Sunday, April 12, 2026
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पहले हिन्दू संत चिन्मय दास की बेल पर लगाई रोक, अब उन्हें मर्डर मामले में भी किया गिरफ्तार: 6 महीने से जेल में किया है बंद, बांग्लादेश में हिन्दुओं का उत्पीड़न जारी

बांग्लादेश की एक कोर्ट ने आदेश दिया है कि चिन्मय कृष्ण दास को एक वकील की हत्या के मामले में आरोपित का दर्जा दिया जाए और उन्हें इसमें भी गिरफ्तार दिखाया जाए। इसके अलावा उन्हें 3 और मामलों में गिरफ्तार दिखाए जाने की माँग पुलिस ने की है।

बांग्लादेश में हिन्दुओं के उत्पीड़न में पूरा सरकारी तंत्र शामिल हो गया है। उनके निशाने पर वे लोग हैं, जो हिन्दुओं के लिए आवाज उठा रहे हैं। हिन्दुओं के अधिकारों के लिए बोलने वाले ISKCON संत चिन्मय दास को भी जेल में रखने के लिए बांग्लादेश का पूरा तंत्र लगा गया है। उन्हें एक और मुकदमे में गिरफ्तार दिखाने का आदेश बांग्लादेश के एक कोर्ट ने दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चटगाँव के एक कोर्ट में जज SM अलाउद्दीन ने यह आदेश सोमवार (5 मई, 2025) को दिया है। जज ने आदेश दिया है कि चिन्मय कृष्ण दास को एक वकील की हत्या के मामले में आरोपित का दर्जा दिया जाए और उन्हें इसमें भी गिरफ्तार दिखाया जाए।

इस वकील की मौत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद हुए प्रदर्शन में हुई थी। पुलिस ने चटगाँव की अदालत से कहा है कि वह 3 और केस में चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार दिखाने का आदेश दे। इन पर सुनवाई मंगलवार (5 मई, 2025) को होनी है।

वकील की हत्या के मामले में चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई के लिए प्रदर्शन करने वाले और भी कई हिन्दू आरोपित बनाए गए हैं। चिन्मय कृष्ण दास पर यह कार्रवाई उनकी जमानत रद्द करने के बाद की है। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 30 अप्रैल, 2025 को हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में संत चिन्मय दास को जमानत दे दी थी। लेकिन इसके एक दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा कर चिन्मय कृष्ण दास के जेल से बाहर आने के रास्ते बंद कर दिए थे। अब उन्हें और भी मामलों में आरोपित बना दिया गया है, अब उनके रिहा होने की उम्मीदें और भी कम हो गई हैं।

क्यों गिरफ्तार हुए थे चिन्मय कृष्ण दास?

25 अक्टूबर, 2024 को बांग्लादेश के चटगाँव में हिन्दुओं ने एक रैली आयोजित की थी। इस रैली का नेतृत्व चिन्मय कृष्ण दास कर रहे थे। यह रैली चटगाँव में ऐतिहासिक लाल दीघी मैदान में आयोजित की गई थी। इसमें हजारों हिन्दू शामिल हुए थे। चटगाँव में यह रैली हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमलों के विरोध में आयोजित की गई थी।

इस रैली के दौरान हिन्दुओं ने भगवा झंडे लहराए और सरकार से कार्रवाई की माँग की। चटगाँव में हुई इस रैली के कारण इस्लामी कट्टरपंथी बिदक गए। उन्होंने इस रैली में एक जगह पर एक भगवा झंडा, बांग्लादेश के झंडे से ऊँचा लहराता हुआ देख लिया।

इसी के आधार पर फिरोज खान नाम के एक शख्स ने चटगाँव में ही चिन्मय कृष्ण दास समेत 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। फिरोज खान ने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश का झंडा नीचे करके लहराया जा रहा था जो इसका अपमान है और यह देशद्रोह का कार्य है। फिरोज ने आरोप लगाया था कि इससे चिन्मय कृष्ण दास देश में अशांति लाना चाहते हैं।

इसके बाद चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार कर लिया गया तगा। उन्हें चटगाँव की अदालत में पेश किया गया। यहाँ मजिस्ट्रेट काजी नजरुल इस्लाम ने उन्हें देशद्रोह का आरोपित मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और जेल भेज दिया था।


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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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