मलयालम अभिनेत्री विंसी अलोशियस ने अभिनेता शाइन टॉम चाको पर ड्रग्स लेने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। इस बात का खुलासा अभिनेत्री ने गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को किया। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के माध्यम से इस घटना का उल्लेख किया था, कि फिल्म सेट पर उनके साथ एक प्रसिद्ध अभिनेता ने ड्रग्स लेकर दुर्व्यवहार किया।
Kochi, Kerala: Malayalam film actress Vincy Aloysius has filed a complaint with Film Chamber, against actor Shine Tom Chacko after he allegedly misbehaved on the set while under the influence of alcohol. Vincy filed the complaint with the Film Chamber and the film industry's…
इसी बीच अभिनेत्री विंसी द्वारा अभिनेता टॉम चाको पर ड्रग्स लेने वाले आरोप में भी खुलासा हुआ है। बुधवार (16 अप्रैल, 2025) रात शाइन टॉम को ड्रग्स रेड के दौरान कोच्चि के एक होटल से भागते हुए देखा गया था। ‘जिला मादक पदार्थ निरोधक विशेष कार्रवाई बल’ (DANSAF) को अभिनेता के कमरे में ड्रग्स इस्तेमाल होने की सूचना प्राप्त हुई थी, जिसके बाद टीम मौके पर पहुँची थी।
DANSAF की टीम के आने की भनक जब अभिनेता शाइन टॉम को हुई, तो वे होटल की तीसरी मंजिल से भाग निकले। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभिनेता टॉम चाको के भागने की वजह ये बताई जा रही है कि उनके हाथ में ड्रग्स था।
अभिनेत्री विंसी ने कहा कि उनके साथ ‘सूत्रवाक्यम’ फिल्म की सेट पर दुर्व्यवहार किया गया था, जिसकी शिकायत उन्होंने फिल्म चैंबर में दर्ज कराई है। अभिनेत्री की शिकायत पर ‘चैंबर निगरानी समिति’ सोमवार (21 अप्रैल, 2025) को आपात बैठक बुलाएगी।
विंसी अलोशियस के खुलासे के आधार पर आबकारी विभाग जल्द सबूत इकट्ठा करेगा। आबकारी विभाग ने बताया कि यदि अभिनेत्री कोई सुराग देती है तो वे आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ‘एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स’ (AMMA) ने बताया था कि अभिनेत्री विंसी जल्द ही उस व्यक्ति का नाम उजागर कर देगी, जिसने फिल्म के सेट पर ड्रग्स लिया था। यदि नाम सामने आता है, तो तुरंत उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अब इसी मामले में अभिनेता शाइन टॉम चाको का नाम सामने आ गया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते समय अभिनेत्री विंसी अलोशियस ने स्पष्ट किया था कि वो ड्रग्स लेने वाले अभिनेताओं के साथ काम नहीं करेंगी। विंसी ने यह भी कहा कि वे अपने जीवन में ड्रग्स, सिगरेट जैसी किसी भी नशीली पदार्थों का हिस्सा कभी नहीं होंगी, जो उनके दिमाग या स्वास्थ्य को प्रभावित करे।
उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक प्रतिमा विसर्जन जुलूस में शामिल रामगोपाल मिश्रा की 13 अक्टूबर, 2024 को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी। रामगोपाल मिश्रा को भगवा झंडा लहराने पर गोली मारी गई थी। इस मामले में आधे दर्जन मुस्लिम नामजद किए गए थे। हिंसा की घटना के बाद रामगोपाल मिश्रा के परिजनों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाक़ात की थी। उन्होंने पीड़ित परिवार को इस मामले में त्वरित न्याय का भरोसा दिया था।
घटना के लगभग 6 माह पूरे होने के बाद ऑपइंडिया ने रामगोपाल मिश्रा के परिजनों से बात की है। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दंगाइयों पर कि गई कार्रवाई पर संतोष जताया है। उन्होंने बताया है कि सारे आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। रामगोपाल मिश्रा के भाई हरमिलन मिश्रा ने बताया है कि वह अभी कोर्ट में इस मामले में गवाहियाँ दे रहे हैं। उन्होंने रामगोपाल मिश्रा की पत्नी और बाकी परिवार के विषय में भी जानकारी दी है।
कोर्ट में अभी हो रहे बयान
ऑपइंडिया से मृतक रामगोपाल मिश्रा के भाई हरिमिलन ने बताया, “मामले में मुकदमा दर्ज हो गया था। अभी उस पर सुनवाई होती है। अभी मेरी और भाई की गवाही हो चुकी है। मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। आखिरी बार 9 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। अब अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी।” रामगोपाल मिश्रा की हत्या के मामले के अदालती रिकॉर्ड दिखाते हैं कि अब तक 6 बार इसकी सुनवाई हो चुकी है। इससे सम्बन्धित एक और मुकदमा भी बहराइच कोर्ट में ही चल रहा है।
सारे आरोपित गिरफ्तार
हरिमिलन मिश्रा ने ऑपइंडिया से बताया कि रामगोपाल मिश्रा की हत्या करने वाले अब्दुल हमीद समेत बाकी सारे आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि अब्दुल हमीद और उसके परिजन जमानत का भी प्रयास कर रहे हैं लेकिन वह नहीं उन्हें मिली है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के विषय में पूछने पर उन्होंने बताया, “पुलिस और सरकारी वकील इस मामले को अभी मजबूती से रख रहे हैं। उनकी कार्रवाई पर हमें से हम संतुष्ट हैं।”
रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बाद 6 मुस्लिमों को FIR में आरोपित बनाया गया था। इसमें अब्दुल हमीद, सरफराज उर्फ़ रिंकू , फहीम, राजा उर्फ़ साहिल, ननकऊ और साहिल को शुरुआत में आरोपित बनाया गया था। इस मामले में बाद में और भी आरोपित जोड़े गए थे। इन सबकी गिरफ्तारी पुलिस ने कर ली थी।
रामगोपाल की विधवा अब नौकरी के प्रयास में
रामगोपाल मिश्रा की हत्या से मात्र 2 महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी। उन्होंने प्रेम विवाह किया था। ऑपइंडिया से बात करते हुए मृतक रामगोपाल मिश्रा के भाई हरिमिलन ने बताया कि उनकी विधवा भाभी रोली मिश्रा को नौकरी देने की बात कही गई थी। हरिमिलन ने बताया कि वर्तमान उसके लिए वह प्रयासरत हैं। रोली मिश्रा ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं, इसलिए थोड़ा समय लग रहा है, यह भी हरिमिलन ने बताया है। रामगोपाल की पत्नी कुछ दिन अपने घर और कभी मायके में रहती हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह हो गया तो उनकी आजीविका का प्रश्न हल हो जाएगा।
समझौते का प्रश्न ही नहीं उठता
यह पूछने पर कि क्या कोई समझौते का दबाव तो नहीं डाला जा रहा, हरिमिलन मिश्रा ने बताया, “समझौते का तो सवाल ही नहीं उठता। वो लोग ₹1 करोड़ भी दे देंगे तो भी हम किसी प्रकार के समझौते के लिए नहीं मानेंगे। मेरा भाई जिस तरह की बर्बरता से मारा गया है, हमें बस उसके लिए न्याय चाहिए। पैसे लेने से मेरा भाई वापस नहीं आ जाएगा।”
हरिमिलन मिश्रा ने बताया कि अभी तो अब्दुल हमीद या उसकी तरफ से किसी ने उनसे ऐसी बात नहीं की है। उन्होंने यह भी बताया कि कोर्ट में कभी कभार दूसरे पक्ष के लोग समझौते का इशारा करते हैं। हरिमिलन ने कहा कि हमें बस न्याय चाहिए और जल्दी चाहिए।
पिता बीमार, चाहते हैं न्याय
मृतक रामगोपाल मिश्रा के पिता वृद्ध हैं और बीमार रहते हैं। उसने भी ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की हत्या क्रूरता से की गई थी, जिसका दुख लगातार बना रहता है। उन्होंने माँग की कि जल्द कोर्ट अपनी कार्यवाही पूरी करके अब्दुल हमीद और बाकियों को सजा दे। उन्होंने कहा कि अब्दुल हमीद और उसके परिवार को सख्त से सख्त सजा दी जाए और यही उनके मृतक बेटे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
भगवा झंडा लहराने पर मार दी थी गोली
13 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए बहराइच के महाराजगंज में जुलूस निकल रहा था। इस जुलूस में डीजे आदि बज रहे थे। इसी में रामगोपाल मिश्रा भी शामिल थे। इस जुलूस पर अब्दुल हमीद के घर के पास इस्लामी कट्टरपन्थियों ने पत्थर बरसा दिए थे। जुलूस में शामिल लोगों पर हमला किया गया था। हिंसा के बीच रामगोपाल मिश्रा ने अब्दुल हमीद के घर की छत पर एक भगवा झंडा लगा दिया था। इसी बीच अब्दुल हमीद ने रामगोपाल मिश्रा को गोली मार दी थी। इसकी वीडियो भी वायरल हुई थी।
घटना के बाद सामने आया था कि रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बाद भी अब्दुल हमीद और उसके घरवालों ने शरीर के साथ बर्बरता की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नाखून उखाड़ने, करेंट लगाने और आँख के पास नुकीली चीज मारने की बात कही गई थी। हालाँकि, पुलिस ने यह सारी बातें नकार दी थी। अब्दुल हमीद की छत पर इसके बाद खून के धब्बे और कांच के टुकड़े भी मिले थे। घटना के बाद अब्दुल हमीद का परिवार भाग गया था। पुलिस ने इसके बाद एनकाउंटर में कुछ आरोपितों को पकड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों द्वारा पारी किए गए अधिनियमों पर हस्ताक्षर को लेकर राज्यपालों और यहाँ तक कि देश के राष्ट्रपति तक के लिए भी समयसीमा तय कर दी है। वहीं वक़्फ़ संशोधन क़ानून पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हर मामले की न्यायिक समीक्षा वाले खतरनाक ट्रेंड के बीच उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट को अपने अधिकारों की याद दिलाई है। उन्होंने न्यायपालिका की कमज़ोर होती साख को लेकर भी बात की है। बता दें कि जगदीप धनखड़ खुद लंबे समय तक अधिवक्ता रहे हैं और क़ानून के जानकार हैं।
उप-राष्ट्रपति ने 14-15 मार्च की रात हुए नई दिल्ली में एक जज के यहाँ आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में कैश बरामद होने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक सप्ताह तक इसके बारे में किसी को कुछ पता ही नहीं चला। उन्होंने पूछा कि क्या इस देरी का कारण समझा जा सकता है, क्या ये माफ़ी योग्य है, क्या इससे कुछ बुनियादी सवाल नहीं उठते? उन्होंने कहा कि किसी भी समय परिस्थिति में या फिर क़ानून के नियमों के हिसाब से स्थिति कुछ और होती। उन्होंने याद दिलाया कि 21 मार्च को एक अख़बार के माध्यम से जनता को इस घटना का पता चला।
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि जब इस घटना का पता चला तब लोग अनिश्चितता के भाव में थे, इस खुलासे से चिंतित व परेशान थे। उप-राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ दिनों बाद हमें एक आधिकारिक स्रोत (सुप्रीम कोर्ट) की तरफ से इनपुट आया। उन्होंने तंज कसा कि इस इनपुट से जज के दोषी होने का संकेत मिला, लेकिन यह संदेह नहीं हुआ कि कुछ गड़बड़ है या फिर जाँच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अब लोग बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, क्योंकि एक ऐसी संस्था कटघरे में है जिसे वो सर्वोच्च सम्मान व आदर के साथ देखते आ रहे हैं।
जगदीप धनखड़ ने कहा कि अबतक एक महीने का समय हो चुका है, लेकिन कोई सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि भले ही ये कीड़ों से भरा डब्बा हो या फिर अलमारी में कंकाल भरे हुए हों, इसे उड़ाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि डब्बे का ढक्कन हटाने का समय आ गया है, अलमारी को ध्वस्त करने का समय आ गया है – ताकि ये कीड़े और कंकाल कम से कम सार्वजनिक परिदृश्य में तो आएँ और इनकी सफाई हो सके। जगदीप धनखड़ के इस बयान को न्यायपालिका की गिरती शुचिता को लेकर चिंता जताने का माध्यम बताया जा रहा है।
Let me take incidents that are most recent. They are dominating our minds. An event happened on the night of the 14th and 15th of March in New Delhi, at the residence of a judge. For seven days, no one knew about it. We have to ask questions to ourselves: Is the delay… pic.twitter.com/fqiT8t5a3l
उन्होंने आगे कहा कि तो क्या हम ऐसे हालात में आ गए कि समय के साथ यह बात चली जाएगी? उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों के दिल पर इस घटना से गहरी चोट लगी है, लोगों का विश्वास डगमगा गया है। इस दौरान उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक सर्वे की भी चर्चा की, जिसमें पता चला था कि न्यायपालिका में लोगों का विश्वास कम हो रहा है। धनखड़ ने कहा कि कार्यपालिका, विधायिका व न्यायपालिका पारदर्शी हों व क़ानून के सामने सबके बराबर होने के सिद्धांत का पालन करें – ये हमारे लोकतंत्र का आधार है।
तो क्या हम ऐसे हालात में आ गए कि समय के साथ यह बात चली जाएगी? लोगों के दिल पर इस घटना से गहरी चोट लगी है, लोगों का विश्वास डगमगा गया है।
There was a survey conducted recently by a media house that indicated that public confidence in the institution of Judiciary is dwindling.
गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को राज्यसभा इंटर्न्स के छठे बैच को संबोधित करते हुए जगदीप धनखड़ ने कहा कि इस देश में किसी के ख़िलाफ़ FIR हो सकती है, उनके ख़िलाफ़ भी, लेकिन इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं हुई है। बता दें कि जिस जज की बात जगदीप धनखड़ कर रहे थे, उनका नाम यशवंत वर्मा है। उनके खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की PIL को भी दिल्ली हाईकोर्ट ने असामयिक बताकर ख़ारिज कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि इस मामले में CJI की अनुमति के बाद ही FIR दर्ज की जा सकती है।
मुख्य न्यायधीश ने मामले की जाँच के लिए एक समिति गठित की है। जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में आग लगने के बाद दमकल विभाग की गाड़ियाँ पहुँची थीं, आग बुझाने के दौरान ही कैश मिला था। जगदीप धनखड़ ने इस घटना और राष्ट्रपति के लिए डेडलाइन तय करने के फ़ैसले का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ‘सुपर संसद’ बन जाएगा और विधायी जिम्मेदारियाँ भी निभाने लगेगा, इसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि क़ानून बनाना संसद का अधिकार है और सरकार जनता के प्रति जिम्मेदार है चुनावों में।
जगदीप धनखड़ ने संविधान के अनुच्छेद 142 का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत मिले कोर्ट को विशेष अधिकार लोकतांत्रिक शक्तियों के खिलाफ 24×7 उपलब्ध न्यूक्लियर मिसाइल बन गए हैं। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले में पूर्ण फ़ैसला देने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति को आदेश नहीं दे सकती है। बता दें कि वक़्फ़ क़ानून पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई चल रही है और इसे लेकर भी सर्वोच्च न्यायालय आलोचना का शिकार बन रहा है।
दुनिया में सबसे अमीर, टेस्ला के मालिक और 14 बच्चों के पिता एलन मस्क बच्चों की फौज खड़ी करना चाहते हैं। वे महिलाओं से बच्चे पैदा करने का आग्रह कर रहे हैं। अपने बच्चों के लिए माता ढूंढ रहे एलन मस्क सरोगेट मदर्स के जरिए अपने ‘ढेर सारे बच्चों’ की इच्छा पूरी करना चाहते हैं।
द वॉल स्ट्रीट की रिपोर्ट में ये छपी है। इसमें कहा गया है, “दुनिया के सबसे अमीर आदमी अपनी कंपनियों को चलाने और ट्रंप को सलाह देने के साथ-साथ एक दर्जन से ज़्यादा बच्चों और ‘हरम ड्रामा’ को भी संभालते हैं। हाल ही में उन्होंने पैसे और निजता को लेकर एक महिला के साथ लड़ाई में पितृत्व परीक्षण कराया।”
रिपोर्ट के मुताबिक मस्क के 13वें बच्चे को जन्म देने वाली कंजर्वेटिव इंफ्लुएंसर एशले सेंट क्लेयर ने कहा है कि उन्हें ऐसे कई मैसेज मिले हैं जिसमें बच्चों की फौज खड़ी करने की बात कही गई थी।
एलन मस्क की चार महिलाओं, तलाकशुदा पत्नी जस्टिन मस्क, सेंट क्लेयर, सिंगर ग्रिम्स, न्यूरालिंक की सीईओ शिवोन जिलिस से 14 बच्चे हैं। शिवोन जिलिस से मस्क के 4 बच्चे हैं और वो कई हाई लेबल प्रोग्राम में मस्क के साथ नजर आ चुकी हैं। यहां तक कि पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान भी वे मस्क के साथ दिखीं थीं।
रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि मस्क ने क्रिप्टो इंफ्लूएंसर टिफनी फोंग से भी संपर्क किया था। लेकिन फोंग ने जब इस मैसेज को सार्वजनिक कर दिया तो मस्क ने सोशल मीडिया पर उसे अनफॉलो कर दिया।
मस्क का मानना है कि दुनिया में जन्मदर का गिरना मानवता के लिए खतरा है और जनसंख्या बढ़ा कर ही ‘सभ्यता को नष्ट’ होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए अधिक बच्चे पैदा करने की जरूरत है लेकिन ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता इंटेलिजेंट हो, ताकि बच्चा भी इंटेलिजेंट हो सके।
रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि मस्क ने जापान की एक हाई प्रोफाइल महिला को अपना स्पर्म उपलब्ध कराया था।
पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून हिंसा विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/BJP) के नेता मिथुन चक्रवर्ती ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उनको बंगाली हिंदुओं के लिए खतरा बताया। उन्होंने ममता बनर्जी को सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने और समुदायों के बीच अशांति पैदा करने का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बंगाली हिंदू बेघर होने और शिविरों में खिचड़ी खाने को मजबूर हैं।
ममता बनर्जी के आरोप
16 अप्रैल 2025 को इमामों की सभा के दौरान ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में हुए दंगे को प्री-प्लांड बताया था। साथ ही कहा था कि इसमें भाजपा, BSF और सेंट्रल एजेंसियों की साजिश है। पश्चिम बंगाल ने मुर्शिदाबाद हिंसा की जाँच के लिए (SIT) का गठित की है, जिसमें नौ अधिकारी होंगे जिसकी कमान मुर्शिदाबाद रेंज के DIG को सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे मुर्शिदाबाद हिंसा में बंगलादेशियों के शामिल होने की बात कही और BSF की भूमिका पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को जिम्मेदारी लेने को कहा। उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि अगर तृणमूल कॉन्ग्रेस हिंसा में शामिल होते तो उनके घरों पर हमले नहीं होते।
ममता बनर्जी के अनुसार, केंद्र सरकार मीडिया संस्थानों को पैसे देकर बंगाल को बदनाम कर रही है, जबकि उनकी सरकार ने हिंसा में मारे गए लोगों को 10 लाख रुपए देने की घोषणा की है।
बांगलादेशियों के शामिल होने के दावे
न्यूज एजेंसी PTI ने खुफिया रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि मुर्शिदाबाद हिंसा में बांग्लादेशी संगठनों अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) और जमात-उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) का हाथ है।
वही हिंसा के दौरान हुए पिता-पुत्र की हत्या के मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है जो बांग्लादेश बॉर्डर और वीरभूम से पकड़े गए हैं, जिनके नाम दिलदार नदाब और कालू नदाब है।
बीएसएफ और सीआरपीएफ की मौजूदगी से लोग सुरक्षित
हिंसा प्रभावित क्षेत्र शमशेरगंज के निवासी हबीब-उर-रहमान ने ANI से कहा बीएसएफ़ और सीआरपीएफ की मौजूदगी से माहौल शांत है। मगर, लोगों को डर भी है कि अगर बीएसएफ़ हटी तो हालत फिर खराब भी हो सकते हैं। हालाँकि पाँच दिन बाद अब हालात सामान्य है, प्रशासन ने हालात पर नियंत्रण पा लिया है। पलायन कर चुके लोग भी वापस आ रहे हैं।
हिंसा की जाँच के लिए कमेटी का गठन
मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा की जाँच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक कमेटी का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष विजया रहाटकर होंगे। वह खुद हिंसा-प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वहीं NCW ने महिलाओं के खिलाफ हुए किसी भी प्रकार के हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (17 अप्रैल 2025) को वक्फ (संशोधन) कानून 2025 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने अंतरिम आदेश पर सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया कि अगली सुनवाई तक वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त नहीं किए जाएँगे। इसके साथ ही नोटिफिकेशन या रजिस्ट्रेशन के जरिए घोषित वक्फ संपत्तियाँ, जिनमें ‘वक्फ बाय यूजर’ भी शामिल हैं, डी-नोटिफाई नहीं होंगी, यानी मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। कोर्ट ने केंद्र के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया और अगली सुनवाई 5 मई 2025 को दोपहर 2 बजे तय की है।
#BREAKING In challenge to Waqf Amendment Act 2025, Centre makes the following statements to the Supreme Court :
Non-Muslims won't be appointed to Central Waqf Councils and State Waqf Boards.
Waqfs, including waqf-by-user, whether declared by way of notification or…
इससे पहले, बुधवार (16 अप्रैल 2025) को कोर्ट ने तीन मुद्दों पर अंतरिम आदेश का प्रस्ताव रखा था: पहला- अदालतों द्वारा वक्फ घोषित संपत्तियों को डी-नोटिफाई न किया जाए। दूसरा- कलेक्टर की जाँच के दौरान वक्फ संपत्ति को गैर-वक्फ न माना जाए, और तीसरा- वक्फ बोर्ड और परिषद में पदेन सदस्यों के अलावा कोई गैर-मुस्लिम नहीं होगा। पदेन ऐसे सदस्य होते हैं, जो अपनी सरकारी ओहदों के कारण यहाँ जिम्मेदारी पाते हैं।
इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने समय माँगा था, जिसके बाद सुनवाई गुरुवार को हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कानून पर रोक लगाना असाधारण कदम होगा और कई निजी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने से लोग प्रभावित हुए हैं। इस पर सीजेआई ने जवाब दिया कि मौजूदा स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं होना चाहिए, ताकि किसी के अधिकार प्रभावित न हों।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि कानून में ‘वक्फ बाय यूजर‘ को हटाना और गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जामा मस्जिद जैसी सैकड़ों साल पुरानी वक्फ संपत्तियों के लिए दस्तावेज माँगना असंभव है।
सिबल ने यह भी कहा कि नया कानून मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप करता है। याचिकाकर्ताओं में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी, AAP विधायक अमानतुल्लाह खान, कॉन्ग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, RJD सांसद मनोज झा और कई संगठन शामिल हैं। दूसरी ओर, छह BJP शासित राज्यों-असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश ने केंद्र सरकार के कानून का समर्थन किया है।
इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पाँच मुख्य याचिकाएँ चुनने को कहा और कहा कि बाकी याचिकाओं को आवेदन के रूप में माना जाएगा। इसके अलावा, साल 1995 के वक्फ कानून और 2013 के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को अलग से सूचीबद्ध किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने नैमिष तीर्थ को भी अयोध्या की तर्ज पर विकसित करने का फ़ैसला लिया है। नैमिषारण्य का सनातन धर्म में बड़ा ही पौराणिक महत्व है। योगी सरकार ने संतों के सुझाव पर आधुनिकता के साथ-साथ पुरातनता का ध्यान रखने का भी आश्वासन दिया है। ये नैमिषारण्य ही है जहाँ अधिकतर पुराण लिखे गए, साथ ही भगवान श्रीराम ने अपना अश्वमेध यज्ञ भी यहीं आयोजित किया था। नैमिषारण्य में अक्सर ऋषि-मुनियों की धर्मसभा होती रहती थी।
नैमिषारण्य का विकास कर रही योगी सरकार
नैमिषारण्य में जल्द ही हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की जाएगी। नए घाट बनाए जाएँगे, साथ ही पुराने घाटों का कायाकल्प किया जाएगा। साथ ही सड़कों का चौड़ीकरण भी किया जाएगा। नैमिषारण्य में हेलीपोर्ट बनकर तैयार हो गया है और PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) की तर्ज पर संचालित किया जाएगा। पर्यटन विभाग ने इसे लेकर टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दक्षिण भारत से यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पर्यटन भी बढ़ेगा। पहली उड़ान यहाँ से अयोध्या के लिए निकलेगी।
नैमिषारण्य में श्रीमद्भागवत एवं सत्यनारायण समेत तमाम कथाओं का श्रवण करने का भी विशेष महत्व है। इसे 88,000 ऋषि-मुनियों की पावन तपोभूमि के रूप में जाना जाता है। इसे योगी सरकार एक ‘वैदिक सिटी’ के रूप में विकसित करेगी। ठाकुरनगर-रुद्रावर्त धाम मार्ग के किनारे हेलीपोर्ट बनकर तैयार हो गया है, जिसमें 9 करोड़ रुपए लगे हैं। 3 हेलीपैड भी बनाए गए हैं। 5-7 सीटर हेलीकॉप्टर उड़ान भरेंगे। मनु-शतरूपा ने भी नैमिषारण्य में ही तपस्या की थी।
नैमिषारण्य में वेद विज्ञान अध्ययन केंद्र की भी स्थापना की जाएगी, जिससे युवाओं को प्राचीन शास्त्रों के अध्ययन का मौका मिलेगा। यहाँ आधारभूत संरचनाओं को भी विकसित किया जाएगा। इसके लिए 5 एकड़ जमीन भी सरकार ने आवंटित कर दी है। इसके लिए सबसे पहले 25 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। वैदिक आर्किटेक्चर और वास्तुशास्त्र में मास्टर्स की डिग्री भी दी जाएगी। गुरुकुल परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक मिलेगा और इस तरह यहाँ शास्त्रों का अध्ययन कर युवा निकलेंगे।
नैमिषारण्य में हुई धर्मसभा, जहाँ पड़े महापुराणों के बीज
वाराह पुराण में एक कथा है, जिसमें भगवान विष्णु ने गुरमुख नामक ऋषि से कहा था कि उन्होंने निमिष मात्र (पालक झपकते ही) में यहाँ असुरों का संहार कर दिया है, इसीलिए ये क्षेत्र नैमिषारण्य के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह पद्म पुराण में कथा है कि प्रयागराज में इकट्ठा हुए ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से एक ऐसे स्थल के बारे में पूछा, जहाँ वो कथा कर सकें। भगवान विष्णु ने उन्हें एक चक्र दिया और कहा कि जहाँ इस चक्र का नेमि (बीच का डंडा) नष्ट हो जाएगा, वही वो स्थल होगा। ऋषि-मुनि इस चक्र के पीछे चले और नैमिषारण्य वाली जगह आकर ही ये चक्र ठहर गया।
आख़िर नैमिषारण्य महत्वपूर्ण क्यों है? अगर हम प्राचीन काल में जाते हैं तो पता चलता है कि महाभारत के युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने धर्मपूर्वक भारत-भूमि पर शासन किया। इसके बाद परीक्षित और फिर जनमेजय हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठे। तबतक कलियुग का प्रादुर्भाव होने लगा था। ये घटना महाभारत युद्ध के 1500 वर्ष बाद की है, जब शौनक ऋषि ने देश भर के तमाम ऋषि-मुनियों को यहाँ इकट्ठा किया। शौनक ऋषि का मन्त्रों की रचना में बड़ा योगदान था। माना जाता है कि तब देश-समाज पर अवश्य ही कोई संकट आन पड़ा होगा, तभी ये धर्मसभा बुलाई गई थी।
वहाँ सूत ऋषि को विशिष्ट अतिथि के रूप में बुलाया गया था, जिन्होंने एक के बाद एक करके सैकड़ों कथाएँ सुनाईं। सवाल-जवाब का लंबा दौड़ चला और इनको लिपिबद्ध भी किया गया। इसी तरह पुराणों की रचना हुई। कई वर्षों तक ये प्रश्नोत्तरी चलती रही। हालाँकि, इस धर्मसभा के बाद भी सदियों तक पुराणों में कुछ न कुछ जोड़ा जाता रहा, इस दौरान कई ऐसी चीजें भी जोड़ दी गईं जो धर्म विरोधियों की साज़िश थीं। मुग़लकाल में इस्लामी आक्रांताओं ने भी पुराणों को दूषित करने का प्रयास किया। एक पौराणिक श्लोक है:
एकदा नैमिषारण्ये ऋषयः शौनकादयः। प्रपच्छुर्मुनयः सर्वे सूतं पौराणिकं खलु॥
अर्थात, एक बार नैमिष वन में शौनक आदि ऋषियों ने सूतजी से कई पौराणिक एवं ऐतिहासिक प्रश्न किए। संस्कृत भाषा के विद्वान सूर्यकान्त बाली ने अपनी पुस्तक ‘भारत गाथा’ में नैमिषारण्य में हुई इस महासंगोष्ठी के बारे में विस्तार से बताया है। नैमिषारण्य में एक नहीं, बल्कि कई धर्म-संगोष्ठियाँ हुई थीं। महाभारत और ब्रह्मपुराण में कथा मिलती है कि एक बार 12 वर्षों का सत्र चला था। मत्स्य पुराण, और अग्निपुराण में भी एक दीर्घसत्र की बात है। भागवत महापुराण में तो एक 1000 वर्षों तक चलने वाले सत्र का जिक्र है।
नैमिषारण्य में रहने वाले ऋषियों को नैमिषीय कहा जाता था। जिस तरह से त्रेतायुग में दण्डकारण्य का महत्व था, उसी तरह कलियुग के प्रारंभ में नैमिषारण्य का महत्व रहा। वो आध्यात्मिक संवाद और स्वाध्याय का एक केंद्र हुआ करता था। इसका अर्थ है कि उस समय नैमिषारण्य में इतने ऋषि-मुनियों के ठहरने, खाने-पीने और कथा का श्रवण करने के लिए उचित व्यवस्थाएँ रही होंगी। सभी 18 पुराणों की रचना के बीज यहीं हुए अंतिम धर्मसभा में पड़े। सूत एवं शौनक ऋषियों ने कथाओं के प्रचार-प्रसार के लिए अपने उत्तराधिकारी भी तय किए।
नैमिषारण्य के मंदिर, वहाँ का आध्यात्मिक महत्व
नैमिषारण्य तीर्थ आज उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित है। वहाँ दक्षिण भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नैमिषनाथ विष्णु मंदिर यहाँ का प्रमुख मंदिर है, जहाँ उनकी शेषनाग पर विराजमान प्रतिमा भी है। यहाँ एक ‘चक्र तीर्थ’ भी है, जहाँ स्थित कुंड का विशेष महत्व है। यहाँ कई प्राचीन आश्रम व मठ हैं, जहाँ ऋषि-मुनि तपस्या किया करते थे। लखनऊ से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नैमिषारण्य तीर्थ को अब तक की सरकारों ने विकास से अछूता रखा था, यहाँ के महत्व को पिछली सरकारें समझ नहीं पाईं।
चक्रतीर्थी, भेतेश्वरनाथ मंदिर, व्यास गद्दी, हवन कुंड, ललिता देवी का मंदिर, पंचप्रयाग, शेष मंदिर, क्षेमकाया, मंदिर, हनुमान गढ़़ी, शिवाला-भैरव जी मंदिर, पंच पांडव मंदिर, पंचपुराण मंदिर, माँ आनंदमयी आश्रम, नारदानन्द सरस्वती आश्रम-देवपुरी मंदिर, रामानुज कोट, अहोबिल मंठ और परमहंस गौड़ीय मठ – ये सब वो पवित्र स्थल हैं, जो नैमिषारण्य के महत्व को बढ़ाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस में भी आपको नैमिषारण्य तीर्थ की महत्ता को लेकर ये चौपाई मिलेगी:
तीरथ बर नैमिष बिख्याता। अति पुनीत साधक सिधि दाता॥
यहाँ स्थित ललिता देवी मंदिर का भी स्थानीय श्रद्धालुओं में विशेष महत्व है। ये कथा तो आपको पता ही है कि हिमालय के कनखल में प्रजापति दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था और उसमें महादेव को नहीं बुलाया था। सती के आत्मदास के बाद जब उनका मृत शरीर लेकर महादेव फिर रहे थे, तब विष्णु ने चक्र से मृत शरीर के टुकड़े किए। इस दौरान सती का हृदय नैमिषारण्य में ही गिरा और यहाँ लिंगधारिणी ललिता देवी का प्राकट्य हुआ। माना जाता है कि नैमिषारण्य में कलियुग का प्रभाव नहीं रहता।
यहाँ एक अक्षय वट भी है, जिसके बारे में प्रचलित है कि महर्षि वेद-व्यास के शिष्य महर्षि जैमिनी ने यहाँ तपस्या की थी। जैसे बिहार के गया को पितरों का चरण मानते हैं, ऐसे ही नैमिषारण्य में उनकी नाभी मानी गई है। पितरों की शांति के लिए भी यहाँ दान-पुण्य किए जाते रहे हैं। अक्षय वट के नीचे ही ‘व्यास गद्दी’ भी है, जहाँ से महर्षि वेद-व्यास ने उपदेश दिए थे। इस धाम के बारे में ये भी उल्लेख है कि वृत्रासुर के वध के लिए महर्षि दधीचि ने अपनी हड्डियाँ यहीं दान की थीं। इन हड्डियों से देवराज इंद्र का वज्र बना।
हनुमान गढ़ी का भी विशेष महत्व है। यहाँ पटल लोक से हनुमान जी के उद्भव को दर्शाया गया है। भगवान राम और लक्ष्मण को अपने कंधे पर लेकर जाते हुए हनुमान जी की मूर्ति यहाँ है। इसे दक्षिणेश्वर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यहाँ की मुख्य प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर है। ये चक्रतीर्थ से 500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। 12 किलोमीटर दूर मिश्रिख में दधीचि कुंड है। यहाँ का सबसे बड़ा आश्रम देवपुरी मंदिर है, जिसे नारदानंद स्वामी ने बनवाया था। ये 5 मंजिला परिसर है, जहाँ 108 मंदिर हैं। ये 3 एकड़ में फैला हुआ है।
नैमिष तीर्थ में स्थित देवी और श्रीहरि की प्रतिमाएँ
दक्षिण भारत से भी नैमिषारण्य का ख़ास जुड़ाव है, जो बताता है कि भारत भूमि सनातन के कारण ही एक है। नैमिषारण्य के बालाजी मंदिर में तिरुपति मंदिर भी है, जिसका प्रबंधन आंध्र प्रदेश स्थित TTD (तिरुमला तिरुपति देवस्थानम) बोर्ड सँभालता है। प्रत्येक वर्ष फरवरी में यहाँ मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में दक्षिण भारतीय आते हैं। एक सप्ताह तक चलने वाले इस आयोजन में ‘दीप यज्ञ’ भी चलता है। 1996 में वेंकटरामाचार्य से प्रेरणा लेकर इस मंदिर को निर्मित किया गया था। चक्रतीर्थ से 7 किलोमीटर दूर महादेव का ‘रुद्रावर्त तीर्थ’ भी है।
एक्टर से नेता बन कर लगातार मुस्लिमों की वकालत करने वाले तमिल एक्टर जोसफ विजय के खिलाफ फतवा जारी किया गया है। बरेली के एक मौलाना ने पार्टियों में शराब पिलाने, तस्करों को आमंत्रित करने समेत कई कारणों के तहत फतवा जारी किया है। एक्टर विजय ने वक्फ कानून के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली है।
बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने एक्टर विजय के खिलाफ यह फतवा जारी किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया, “कुछ लोग ऐसे हैं जो चेहरा बदल कर मैदान में आते हैं। इसी शक्ल में एक विजय थालापति हैं। वो TVK पार्टी अध्यक्ष हैं और पहले फ़िल्मी दुनिया में जाने जाते थे और अब सियासी पार्टी बना कर राजनीति में आए हैं और मुस्लिमों के हमदर्द बन रहे हैं।”
#WATCH | Bareilly, Uttar Pradesh | On Fatwa against TVK President Vijay, President of All India Muslim Jamaat, Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi says, "…He has formed a political party and maintained cordial relations with Muslims. However, he has portrayed Muslims in a… pic.twitter.com/vMHXZBjPEo
आगे उन्होंने बताया, “जबकि उनकी फिल्मों में मुस्लिमों को शैतान बनाकर पेश किया गया और आतंकी बताया। रमजान के वक्त में उन्होंने रोजा इफ्तार आयोजित किया और इसमें शराबी, जुआरी और असामाजिक तत्वों को बुलाया। इसको लेकर तमिलनाडु के सुन्नी मुसलमान नाराज है और हमसे फतवा पूछा है।”
मौलाना शहाबुद्दीन ने इसके आगे बताया, “मैंने इसी कड़ी में एक फतवा जारी किया है। मैंने कहा है कि मुस्लिमों को विजय के साथ नहीं खड़े होना चाहिए। वो मुस्लिम के विरोधी चेहरा हैं। उन्हें अपनी मजलिसों और महफ़िलों में बुलाएँ।”
मौलाना रिजवी ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब एक्टर विजय ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून को चुनौती दी है। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया है कि यह कानून संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है और धार्मिक आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देता है।
विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के माध्यम से यह याचिका दायर की है। उन्होंने इस कानून को वापस लेने की माँग की है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार को चेतावनी भी दी है कि, अगर ये कानून वापस नहीं लिया गया तो उनकी पार्टी मुस्लिमों के साथ मिलकर कानूनी लड़ाई लड़ेगी। इससे पहले विजय ने एक इफ्तार पार्टी का आयोजन भी किया था।
इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम जुटे थे। हालाँकि, यह सब करने के बाद भी विजय से काफिर का टैग नहीं छूटा है। विजय स्वयं एक ईसाई हैं। लगातार मुस्लिमों की वकालत करने विजय के मुस्लिमों का लगातार पक्ष लेने और लड़ाइयाँ सब करने के बाद भी उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया है और मुस्लिमों को उनसे दूर रहने को कहा गया है।
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि किसी हिन्दू को लगातार मुस्लिमों की लगातार वकालत करने के बावजूद किसी गैर-मुस्लिम को उसकी जगह बताई गई हो। इससे पहले कट्टरपंथी मौलाना जाकिर नाइक ने भी प्रोपेगेंडाबाज पत्रकार रवीश कुमार के लिए ऐसी ही बातें बताई थीं।
दरअसल, ज़ाकिर नाइक ने सवाल पूछा गया था कि दूसरे धर्म वालों का क्या होगा? सवाल था कि आजकल रवीश कुमार जैसे ‘अच्छे दिल वाले’ पत्रकार भी हैं, जो सच्चाई दिखाते हैं, सच्चाई का साथ देते हैं और दूसरे मजहब वालों का पक्ष लेते हुए ‘दमनकारियों’ के खिलाफ बोलते हैं।
सवाल में ये भी कहा गया था कि मीडिया में रवीश ऐसे अकेले पत्रकार नहीं हैं बल्कि और भी हैं जो समुदाय विशेष से तो नहीं हैं लेकिन उनका पक्ष लेते हैं। सवाल था कि अगर ये पत्रकार इस्लाम का अनुयायी बने बिना ही मरें तो उनका क्या होगा, अल्लाह उनके साथ क्या करेगा? क्या उन लोगों का भी यही अंजाम होगा, जो अन्य काफिरों का होता है?
बकौल ज़ाकिर नाइक, रवीश कुमार हों या ‘समुदाय विशेष का पक्ष लेने वाले’ अन्य दूसरे धर्मों वाले, उन सभी के लिए समान सज़ा की ही व्यवस्था है। ज़ाकिर नाइक ने अपने अनुयायियों को समझाया कि जन्नाह अलग-अलग तरह के होते हैं, जैसे फिरदौस और फिरदौस आला।
नाइक ने कहा कि जब कोई जन्नत में जाता है तो सबके लिए अलग-अलग लेवल की व्यवस्था की गई है, सारे जन्नाह समान नहीं होते। ज़ाकिर नाइक ने कहा कि मजहब के सभी लोग भले ही उच्च-कोटि वाले जन्नाह में नहीं जाएँगे लेकिन मजहब के सारे सच्चे लोग जन्नाह में ही जाएँगे।
दूसरे धर्म वालों के बारे में उसने कहा कि जन्नाह की तरह नरक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं और दूसरे धर्म वाले दिल के कितने भी अच्छे क्यों न हों, उन्हें जाना नरक में ही है। ज़ाकिर नाइक ने स्पष्ट कहा कि दूसरे धर्म वालों का नरक में जाना तय है। बकौल नाइक, अगर कोई मरते समय इस्लाम का अनुयायी नहीं है तो उसके लिए नरक की ही व्यवस्था है।
ऐसे में यह स्पष्ट है कि मुस्लिमों को कोई समर्थन दे लेकिन यदि वह उनके मजहब का नहीं है तो उसे कभी भी स्वीकार्यता नहीं मिलेगी। यह बात सिर्फ ऐसे मामलों में नहीं बल्कि चुनावों में भी स्पष्ट हो जाती है जब मुस्लिम उम्मीदवार की तरफ एकतरफा मुस्लिम वोट होते हैं।
पाकिस्तान फौज के प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने एक बार फिर दो देशों वाली थ्योरी दोहराई है। मुनीर ने कहा है कि पाकिस्तान कलमे की बुनियाद पर बना है। मुनीर ने हिन्दुओं के खिला भी जहर उगला है। उसका यह बयान वायरल हो रहा है।
आसिम मुनीर ने यह बयान पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित ओवरसीज पाकिस्तानी कार्यक्रम सम्मेलन में बुधवार (16 अप्रैल, 2025) को दिया है। जनरल आसिम मुनीर ने इस दौरान कहा कि हम हिंदुओं से हर मायने में अलग हैं, चाहे वो धर्म हो या मकसद हो।
"..We different from Hindus in every possible aspect of life. Our religion is different, our customs are different…that was the foundation of 2 nation theory…"
अपने विवादास्पद भाषण में मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान और भारत दो अलग-अलग राष्ट्र हैं, जिनकी संस्कृति, धर्म और सोच में कोई समानता नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान को ‘कलमे की बुनियाद पर बनी दूसरी रियासत’ बताया। उन्होंने पाकिस्तानियों से विभाजन की कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की बात कही।
कश्मीर को बताया पाकिस्तान की नस
जनरल आसिम मुनीर ने कार्यक्रम में कश्मीर को पाकिस्तान के ‘गले की नस’ की बताया और दावा किया कि कश्मीर को पाकिस्तान से कोई अलग नहीं कर सकता। इसके अलावा गाजा पट्टी को पाकिस्तानियों का दिल बताया।
बलूचिस्तान में बीएलए के हमलों को लेकर कहा, “आतंकवादियों की दस पीढ़ियाँ भी बलूचिस्तान या पाकिस्तान को नहीं बदल सकतीं…अगर भारतीय सेना के 13 लाख सैनिक हमें हिला नहीं पाए, तो ये आतंकवादी हमारे इरादों को कैसे तोड़ सकते हैं?”
आने वाली पीढ़ी जान सके कि पाकिस्तान उनके लिए क्या
अपने भाषण में मुनीर ने कहा, “मेरे भाई-बहन, बेटे-बेटियों! कृपया पाकिस्तान की कहानी को कभी भूलना मत। इसे अपनी अगली पीढ़ी को बताएँ, जिससे वह पाकिस्तान के साथ अपने जुड़ाव को महसूस करें। यह कभी कमजोर न हो, चाहें यह तीसरी पीढ़ी हो, चौथी पीढ़ी हो या फिर पाँचवीं पीढ़ी। और आने वाली पीढ़ी जान सके कि पाकिस्तान उनके लिए क्या है।”
प्रवासी पाकिस्तानियों को संबोधित करते हुए जनरल मुनीर एक फौजी प्रमुख नहीं बल्कि किसी मौलाना की तरह नजर आए। उनके भाषण में इस्लाम, कलमा, मक्का-मदीना जैसे शब्दों की भरमार रही। बता दें कि, जनरल मुनीर के इसी शब्दावली के कारण उसको पाकिस्तान में ‘मुल्ला जनरल’ के तौर पर जाना जाता है।
इस सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत पाकिस्तान के सभी बड़े नेता मौजूद थे।
नेशनल हेराल्ड केस में कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी समेत कई लोगों पर ईडी ने चार्जशीट दायर की है। ये चार्जशीट 988 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर दायर की गई है।
9 सितंबर 1938 को जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार शुरू किया. अखबार शुरू करने में करीब 5 हजार स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना अहम योगदान दिया। अखबार का प्रकाशन तीन भाषाओं हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू में होता था। अंग्रेजी में ‘नेशनल हेराल्ड’, उर्दू में ‘कौमी आवाज’ और हिन्दी में ‘नवजीवन’ के नाम से प्रकाशित होता था। इसका संचालन एसोसिएट जर्नल यानी एजीएल करता था। लेकिन इसके सर्वेसर्वा नेहरू थे क्योंकि उनके इशारों पर ही नेशनल हेराल्ड चला करता था। 1942 से 1945 यानी 3 सालों तक नेशनल हेराल्ड पर अंग्रजों ने प्रतिबंध लगा दिया था।
फिरोज गाँधी को बनाया मैनेजिंग डायरेक्टर
प्रधानमंत्री बनने के बाद नेहरू ने बोर्ड के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया। नेहरू ने बेटी इंदिरा गाँधी के पति फिरोज गाँधी को बोर्ड का मैनेजिंग डायरेक्टर बनवाया। आजादी के बाद से कांग्रेस का मुखपत्र बन गया,लेकिन धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति खराब होने लगी।
नेहरू के दौर से ही नेशनल हेराल्ड में एक से बढ़कर एक घोटाले शुरु हो गये थे… सोचिए 1947-48 में बड़ौदा के महाराजा से नेशनल हेराल्ड के लिए पूरे दो लाख रुपये की रिश्वत मांग ली गई… जिसकी शिकायत सरदार पटेल ने नेहरू से की, फिर भी वो रिश्वत वापस नहीं की गई…
डीडी न्यूज के पत्रकार पंकज श्रीवास्तव के मुताबिक नेहरू के निजी सचिव ओ. एम. मथाई ने नेशनल हेराल्ड और एजीएल को लेकर कई खुलासे किए। मथाई के मुताबिक फिरोज गाँधी कंपनी चलाने में सक्षम नहीं थे।
इस वजह से बोर्ड को काफी नुकसान हुआ। आर्थिक संकट से उबारने के लिए जनहित निधि ट्रस्ट बनाया गया। इस ट्रस्ट में प्रधानमंत्री नेहरू की बेटी इंदिरा गाँधी की बड़ी भूमिका थी। मथाई ने नेशनल हेराल्ड के लिए रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे।
नेहरू के निजी सचिव ने रिश्वत की बात कही
पत्रकार पंकज श्रीवास्तव बताते हैं कि मथाई ने कहा था कि नेशनल हेराल्ड के लिए बड़ौदा के राजा प्रताप सिंह से 2 लाख रिश्वत ली गई थी। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नेशनल हेराल्ड रिश्वत कांड की शिकायत नेहरू से की थी। शिकायत के बाद भी रिश्वत की रकम महाराजा बड़ौदा को नहीं लौटाई गई। सरदार पटेल ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि ये स्वतंत्रता सेनानियों का अखबार है, लेकिन इससे सरकारी लोग जुड़े हैं। सरदार पटेल ने ये भी कहा था कि वो इसे चैरिटी का विषय नहीं मानते।
नेहरू के दौर में कई बिजनेस घरानों ने नेशनल हेराल्ड को आर्थिक मदद की। इनलोगों ने अखबार को विज्ञापन देना शुरू किया। मफतलाल ग्रुप, टाटा ग्रुप और बिड़ला ग्रुप ने कई विज्ञापन दिए। इन विज्ञापनों के माध्यम से बोर्ड को 1956 से 1957 के बीच 842000 रुपए जमा हुए
1962 में जब प्रधानमंत्री के तौर पर पंडित नेहरू विराजमान थे। उस वक्त दिल्ली में नेशनल हेराल्ड को जमीन मिली। ये जमीन बहादुर शाह जफर मार्ग पर 15 हजार स्क्वायर फीट का प्लॉट दिया गया। इसके बाद आर्थिक तंगी के बीच 2008 तक इसका प्रकाशन चला। गाँधी परिवार का इस पर वर्चस्व बना रहा। इसमें घोटाले का आरोप सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी पर है।