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इंस्टा पर पति ने जितनी महिलाओं की तस्वीर की लाइक, पत्नी ने वैलेंटाइन गिफ्ट में सौंप दिए सारे

वैलेंटाइन डे को प्रेम का त्योहार कहा जाता है। अक्सर इस मौके पर प्रेमी एक-दूसरे से अपने प्यार का इजहार करते हैं। अमेरिका में एक महिला ने अनोखे अंदाज़ में अपने पति से प्यार का इजहार किया। वैलेंटाइन डे के मौके पर ग्लोरिया नामक महिला ने अपनी पति को कुछ तस्वीरें प्रिंट करा कर गिफ्ट की। वो न तो इन दोनों की साथ में ली गई तस्वीरें थीं और न ही किसी सब्जी/फोन या बाग़/बगीचों का कोई दृश्य।

वो तस्वीरें भी महिलाओं की थीं। किसी में कोई महिला हॉट अंदाज़ में ड्रेस पहने पोज दे रही है और किसी में बिकनी पहन कर कार को धक्का दे रही है। किसी में कोई महिला सेल्फी ले रही है और किसी में अपने शरीर के विभिन्न स्थानों के आकार को उभार कर पोज दे रही है। ये सारी तस्वीरें किसी एक महिला की नहीं थी। ये उन महिलाओं की तस्वीरें थीं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें खुद पोस्ट की थी।

लेकिन, इससे ग्लोरिया के वैलेंटाइन डे का क्या सम्बन्ध? आइए, बताते हैं। दरअसल, ये वो सभी तस्वीरें थीं जिन्हें उनके पति ने सोशल मीडिया में लाइक किया था। ग्लोरिया ने एक TikTok वीडियो के माध्यम से दिखाया कि कैसे उन्होंने इन तस्वीरों को खोज कर प्रिंट कराया और गिफ्ट बनाकर पैक किया। एक दूसरे वीडियो में उन्होंने अपने पति को ये गिफ्ट देते हुए और साथ ही पति के रिएक्शन को भी कैमरे में कैद किया। इस तरह पति द्वारा लाइक की गई तस्वीरें वैलेंटाइन गिफ्ट बन गई।

उनके ‘gr93la’ यूजरनेम वाले TikTok हैंडल पर अब तक इस वीडियो को 1.5 करोड़ लोग देख चुके हैं। वीडियो के साथ डाले गए कैप्शन में ग्लोरिया ने पूछा कि वैलेंटाइन डे पर आप सब ने अपने पति/बॉयफ्रेंड को गिफ्ट में क्या दिया है? उन्होंने कहा कि जब सब शेयर कर रहे हैं तो मुझे भी शेयर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस ‘क्यूट लिटिल बॉक्स’ में उन्होंने अपने पति द्वारा इंस्टाग्राम पर लाइक की गई महिलाओं की तस्वीरें प्रिंट करा कर डाली हैं।

कंगना की ‘धाकड़’ में खलल डालने ट्रैक्टर से जा रहे थे कॉन्ग्रेसी, पुलिस ने रोका तो किया बवाल

अभिनेत्री कंगना रनौत इन दिनों मध्य प्रदेश के बैतूल में फिल्म ‘धाकड़’ की शूटिंग कर रही है। कॉन्ग्रेस ने किसानों पर कथित टिप्पणी को लेकर कंगना से माफी की माँग की थी। ऐसा नहीं होने पर शूटिंग नहीं होने की धमकी दी थी। इसी कड़ी में कॉन्ग्रेसी ट्रैक्टर रैली निकालकर शूटिंग स्थल जा रहे थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर उन्होंने जमकर बवाल किया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बैतूल जिले में शनिवार (फरवरी 13, 2021) को भी कॉन्ग्रेसियों ने कंगना का विरोध किया। विरोध में ट्रैक्टर रैली निकाल रहे कॉन्ग्रेसियों को पुलिस ने फिल्म ‘धाकड़’ की शूटिंग स्थल सारणी से 11 किमी पहले ही रोक लिया।

शनिवार देर शाम पुलिस द्वारा रोके जाने पर कॉन्ग्रेसियों ने जमकर नारेबाजी की और सारणी जाकर विरोध प्रदर्शन करने पर अड़े रहे। कुछ देर नारेबाजी के बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। जवाब में पुलिस ने उन पर लाठियाँ भाँजी और वाटर कैनन का प्रयोग किया।

पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और ट्रैक्टर आगे ले जाने की कोशिश की। पथराव के दौरान एसडीएम अनिल सोनी को भी चोटें आई। बैतूल की एसपी श्रद्धा जोशी ने कहा, “इस झड़प में कुछ पुलिसकर्मियों और एसडीएम को चोटें आई हैं। घटना के वीडियो के माध्यम से आरोपितों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

किसान आंदोलन पर कंगना के ट्वीट के बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने पहले ही अल्टीमेटम दिया था कि कंगना 12 फरवरी तक अपने बयान पर माफी नहीं माँगती हैं, तो 13 तारीख को उनकी फिल्म की शूटिंग रोक देंगे। शुक्रवार (फरवरी 12, 2021) को भी पुलिस ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर उन्हें भगा दिया था। कॉन्ग्रेस सेवादल के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करने बैतूल से 90 किमी दूर सारणी के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में चिचोली सहित अन्य कस्बों से उनके साथ कॉन्ग्रेस व युवक कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता भी आ गए। सभी कार्यकर्ता शाम को सारणी के नजदीक बगडोना पहुँचे तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को तितर-बितर कर दिया। विरोध की चेतावनी का शूटिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कंगना ने शुक्रवार शाम से शनिवार सुबह 6 बजे तक शूटिंग की।

कॉन्ग्रेसियों की चेतावनी पर राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पुलिस को कंगना की सुरक्षा बढ़ाने के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि हम मध्य प्रदेश की शांति किसी को भंग नहीं करने देंगे। चाहे वह कोई भी हो।

केरल में गिरफ्तार रऊफ को रिमांड पर लेगी यूपी STF, हाथरस में दंगे की साजिश में आया था नाम

हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश रचने का आरोपित रऊफ शरीफ केरल से ट्रांजिट रिमांड पर उत्तर प्रदेश लाया जा रहा है। मथुरा कोर्ट में पेशी के बाद उसे एसटीएफ रिमांड पर लेगी। रऊफ शरीफ कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) का महा​सचिव है। यह PFI का स्टूडेंट विंग है।

दिसंबर 2020 में उसे केरल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे जमानत दे दी गई। इसके बाद उसे यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया था। उस पर यूपी के हाथरस में दंगे की साजिश रचने और विदेशी फंडिंग जुटाने का आरोप है। यूपी में CAA और NRC के दौरान भड़के दंगों में भी उसकी भूमिका संदिग्ध रही है।

हाथरस मामले में जमकर हो रही राजनीति के दौरान मथुरा जाते समय PFI के चार सदस्य सिद्दीक कप्पन, अतीकुर्रहमान, आलम और मसूद को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ कि उनकी हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश थी। साथ ही रऊफ शरीफ का नाम सामने आया था। इसके बाद यूपी पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन किया था।

हाथरस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर ED ने कुछ दिन पहले ही चार्जशीट दाखिल की है। एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने बताया कि रऊफ को ट्रांजिट रिमांड पर यूपी लाया जा रहा है। मथुरा में उसे संबंधित न्यायालय में पेश कर उसे रिमांड पर लिया जाएगा।

बता दें, हाथरस मामले में जाँच कर रही पुलिस को पता चला था कि दंगे भड़काने के लिए PFI के सदस्य कप्पन और उसके साथियों को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी रऊफ शरीफ व पी.कोया द्वारा फंडिंग की गई थी। आरोपितों को 1.36 करोड़ रुपए ओमान व कतर में बैठे पीएफआइ सदस्यों के जरिये रउफ तक पहुँचाई गई थी।

God Bless You का हिंदी मतलब ‘अस्सलामु अलैकुम’? Google ट्रांसलेशन की करतूत के बाद लोग माँग रहे जवाब

सोशल मीडिया पर गूगल ट्रांसलेशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कई लोगों ने स्क्रीनशॉट शेयर कर के दावा किया कि जब वो अंग्रेजी में ‘God bless you’ लिखते हैं तो गूगल इसका अनुवाद ‘अस्सलामु अलैकुम’ दिखाता है, जिसका हिंदी भाषा से कोई सम्बन्ध ही नहीं है। लोगों ने गूगल पर हिंदी अनुवाद के नाम पर इस्लामी सामग्री परोसने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका शुद्ध हिंदी में अनुवाद कुछ और होना चाहिए।

हमने भी इस चीज की जाँच के लिए गूगल ट्रांसलेशन पर ‘God bless you’ टाइप किया, जिसका अनुवाद हमें ‘अस्सलामु अलैकुम’ ही दिखाया गया। जब हमने अंत में अंग्रेजी का पूर्णविराम (.) लगाया, तब इसका अनुवाद ‘भगवान आपका मंगल करे’ दिखाया। ‘God bless you’ के साथ ‘all’, ‘and your family’ और ‘always’ लगा कर विकल्प भी दिखाए गए, जिनके अर्थ क्रमशः ‘भगवान आप सब का भला करे’, ‘भगवान का आशीर्वाद आपके और आपके परिवार को’ और ‘भगवान हमेशा आपका ध्यान रखे’ दिखाया गया।

बता दें कि ‘अस-सलामु अलायकुम’ अथवा ‘अस्सलामु अलैकुम’ अरबी भाषा का अभिवादन है। इसे बोल कर मुस्लिम लोग एक-दूसरे के लिए ‘खुदा तुम्हें सलामत रखे’ की दुआ करते हैं। अरब के ईसाई भी इन शब्दों का प्रयोग कर लेते हैं। अरब से ही ये शब्द भारत में आ गए और यहाँ भी इसी तरह से मुस्लिमों ने अभिवादन की प्रक्रिया को अपना लिया। मुस्लिम विद्वान मानते हैं कि हदीस के हिसाब से ऐसा किया जा रहा है।

हालाँकि, आप इस ट्रांसलेशन के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपको बाईं तरफ नीचे दिख रहे ‘Feeback’ विकल्प पर क्लिक करना है और गलत ट्रांसलेशन वाला विकल्प चुनना है, जिसके बाद आपसे पूछा जाएगा कि इसका सही अनुवाद क्या है? लोग सोशल मीडिया पर ये भी कह रहे हैं कि अगर गूगल इसका अनुवाद इस तरह से अरबी भाषा में दिखा रहा है तो हमें इसे हिंदी में ‘महादेव रक्षा करें’ या ‘ईश्वर आपका भला करें’ के साथ गूगल को प्रतिक्रिया भेजनी चाहिए।

‘मैं पूर्व रॉ एजेंट हूँ, रहने के लिए छत चाहिए’: दर-दर की ठोकरें खा रहा है असली ‘टाइगर’

फिल्मी पर्दे पर आपने कई खुफिया एजेंट की जिंदगी देखी होगी। महँगी गाड़ियाँ, दमदार हथियार और जीवन के हर मोड़ पर रोमांच। लेकिन रील लाइफ का रुतबा और एशोआराम, रियल लाइफ के खुफिया एजेंट को नसीब नहीं होता। एक फिल्म आई थी- एक था टाइगर। इसमें सलमान खान खुफ़िया एजेंसी रॉ के एजेंट बने थे। पर्दे के ‘टाइगर’ के उलट असली जिंदगी का ‘टाइगर’ दाने-दाने को मोहताज है।

असल ज़िंदगी के इस टाइगर का नाम है, मनोज रंजन दीक्षित। वे नजीबाबाद के रहने वाले हैं। दैनिक हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने डीएम कार्यालय में जाकर एक अधिकारी से कहा, “मैं पूर्व रॉ एजेंट हूँ और मुझे रहने के लिए छत चाहिए।” ये सुनते ही वहाँ मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। उनकी मुलाक़ात डीएम से नहीं हो पाई, जिसकी वजह से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

मनोज रंजन दीक्षित को जासूसी करने के लिए पकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था, 2005 के दौरान उन्हें बाघा बॉर्डर पर छोड़ा गया था। पाकिस्तान से छूटने के बाद 2007 में उनकी शादी हुई। कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि पत्नी को कैंसर है। वह अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए लखनऊ आए थे। 2013 में उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। इसके बाद से ही वह लखनऊ में रह रहे हैं। गोमतीनगर विस्तार में वे स्टोर कीपर का काम कर रहे थे। लॉकडाउन में काम छूट गया था और उनके जीवन की चुनौतियॉं बढ़ गईं।

अफग़ानिस्तान बॉर्डर पर जासूसी के लिए पकड़े जाने पर उन्हें तमाम तरह की यातनाओं का सामना करना पड़ा था। फिर भी उन्होंने देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया। पाकिस्तान में जासूसी के दौरान उनका नाम यूनुस, युसूफ और इमरान था। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 80 के दशक में रॉ में प्रशासनिक सेवाओं की तरह आम नागरिकों को उनकी योग्यता के आधार पर भर्ती किया जा रहा था। 1985 में मनोज रंजन दीक्षित को नजीबाबाद से भर्ती किया गया। दो बार सैन्य प्रशिक्षण के बाद उन्हें पाकिस्तान भेजा गया। 

उन्होंने पाकिस्तान से बतौर जासूस कई अहम जानकारियाँ साझा की थीं। कश्मीरियों युवाओं को बहला-फुसलाकर अफ़गानिस्तान बॉर्डर पर ट्रेनिंग दिए जाने जैसी कई अहम जानकारियाँ। 1992 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कराची जेल में रखा गया था।

मनोज रंजन दीक्षित की उम्र अभी 56 साल है और उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ है। वह सरकारी मदद मिलने की उम्मीद लेकर कलेक्ट्रेट पहुँचे थे, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। ख़ुफ़िया एजेंसी की सबसे पहली शर्त यही होती है कि एजेंट के गिरफ्तार होने पर उनकी पहचान करने से इनकार कर देते हैं। मनोज दीक्षित ने भी इसके अनुबंध पर सहमति जताई थी। भारत वापसी पर कई रॉ अधिकारियों ने उन्हें आर्थिक मदद की थी। उसके बाद किसी ने उनकी सुध नहीं ली।  

चिल्लाती माँ, लगातार फोन कॉल… और बच गई 25 जिंदगियाँ: उत्तराखंड के चमोली में माँ मंगश्री देवी के आगे मौत ने मानी हार

उत्तराखंड के चमोली में आई त्रासदी से जुड़ी कई कहानियाँ धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में एक और कहानी सामने आई है – हेवी ड्यूटी वाहन चालक विपुल कैरेनी (27 साल) तपोवन स्थित एनटीपीसी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में काम करते थे। उनकी माँ ने रविवार (7 फरवरी 2021) को उन्हें कई कॉल किए थे, ताकि वो बैराज से हट जाएँ लेकिन विपुल ने कॉल पर गौर नहीं किया।

इसके बावजूद विपुल की माँ मंगश्री देवी ने हार नहीं मानी। वो तब तक कॉल करते रहीं, जब तक उन्होंने अपने बेटे को बता नहीं दिया कि धौलीगंगा उफ़ान पर है और बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ विपुल ने बताया, “हमारा गाँव ऊँचाई पर स्थित है। जिस वक्त बाढ़ आई, उस वक्त मेरी माँ बाहर काम कर रही थीं। अगर हमें उनकी चेतावनी नहीं मिली होती तो मैं और मेरे लगभग दो दर्जन साथी अब तक मर चुके होते। जैसे ही हमें जानकारी मिली, हमने पास की एक टूटी सीढ़ियों पर शरण ली।”

दो महीने पहले ही विपुल की शादी हुई थी और वह 7 साल की उम्र से वहाँ काम कर रहे हैं। रविवार की सुबह 9 बजे वह तपोवन स्थित अपने गाँव ढाक से प्रोजेक्ट की जगह के लिए निकले थे, जहाँ अब सिर्फ मलबा बचा हुआ है। विपुल के अनुसार:

“आम दिनों में हमारी कमाई लगभग 600 रुपए होती है लेकिन रविवार के दिन हमारी कमाई लगभग दोगुनी होती है। इसलिए मैं रविवार को काम करने के लिए गया था। सुबह 10:35 बजे मेरी माँ का फोन आया और उन्होंने मुझे वहाँ से भागने के लिए कहा।” 

इसके बाद उस दिन के हालातों के बारे में बताते हुए विपुल ने कहा, “शुरुआत में मैंने उन्हें चिल्लाते हुए सुना लेकिन मैंने उन्हें गम्भीरता से नहीं लिया। मैंने उनसे कहा मज़ाक मत करिए, पहाड़ कैसे फट सकते हैं। उन्होंने मुझे फिर से फोन किया और भागने के लिए कहा। मेरी माँ और पत्नी ने पानी को उसकी औसत ऊँचाई से 15 मीटर ऊपर देखा था, उसके रास्ते में जो कुछ भी आया, वह तबाह हो गया। हम सभी सीढ़ियों की तरफ दौड़े और उसकी वजह से ही हमारी जान बची।” 

मंगश्री देवी की कॉल के चलते बचने वाले लोगों में एक और नाम था संदीप लाल। ढाक के ही रहने वाले संदीप लाल ने बताया, “मैं अंदर था और पावर लाइन की गड़बड़ी ठीक कर रहा था। जैसे ही मेरे पास विपुल का कॉल आया, मैं वहाँ से बाहर भागा। मैं आज ज़िंदा हूँ तो सिर्फ और सिर्फ विपुल की माँ द्वारा दी गई चेतावनी की वजह से। इस घटना से पता चलता है कि हमें अपने माता-पिता की चेतावनी को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।”

विपुल और संदीप के लगभग 100 दोस्त अभी भी लापता हैं।

‘मुझे, मेरी बहन, बच्चों और अब्बा को फिर किया नजरबंद’ – उमर अब्दुल्ला ने लगाई गुहार, पुलिस ने खोली पोल

रविवार (फरवरी 14, 2021) को पुलवामा में हुए हमले का 2 वर्ष पूरा हो रहा है और कृतज्ञ राष्ट्र उन 40 CRPF के जवानों को श्रद्धांजलि दे रहा है, जो इस आत्मघाती हमले में बलिदान हो गए। आतंकी अक्सर ऐसी घटनाओं के बरसी पर खून बहाने की फिराक में रहते हैं, इसीलिए पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे मौकों पर सतर्क रखा जाता है। इसी बीच जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर नजरबंद किए जाने बड़ा दावा किया है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता ने कहा कि उन्हें उनके ही घर में नजरबंद कर के रखा गया है। उन्होंने ट्विटर के माध्यम से अगस्त 2019 के बाद के ‘नया जम्मू कश्मीर’ की बात की। इसी तारीख को जम्मू कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा वापस लेकर अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया गया था। उससे पहले भी कई अलगाववादियों और कश्मीरी नेताओं को जेल में या नजरबंद कर के रखा गया था।

उमर अब्दुल्लाह ने दावा किया है कि बिना किसी जानकारी और वजह के उन्हें उनके घर में नजरबंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता को भी घर में नजरबंद कर दिया गया है, जो एक सांसद हैं। उन्होंने अपनी बहन और बच्चों तक की नजरबंदी की बात की। साथ ही बाहर खड़ी सशस्त्र बलों की वैन की तस्वीरें भी पोस्ट की। उन्होंने एक दस्तावेज शेयर कर के दावा किया कि इसमें उनके नाम हैं, जिन्हें नजरबंद किया गया है।

अब आपको बताते हैं कि सच्चाई क्या है। श्रीनगर पुलिस ने साफ़ किया है कि पुलवामा के लेथपोरा में हुए खूँखार आतंकी हमले की आज दूसरी बरसी है, ऐसे में पुलिस ये प्रयास कर रही है कि कोई हिंसा की वारदात न हो। पुलिस ने कहा कि कुछ प्रतिकूल ख़ुफ़िया सूचनाओं के कारण VIPs और सुरक्षा घेरे में रहने वाले लोगों को आवाजाही न करने की सलाह दी गई है। साथ ही ऐसे सभी व्यक्तियों को आज प्लान की गई यात्राओं को भी रोकने के लिए पहले ही सूचित कर दिया गया था।

हालाँकि, उमर अब्दुल्लाह इससे भी संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने शक जताया कि ये श्रीनगर पुलिस का ही ट्विटर हैंडल है, क्योंकि उस पर वेरिफाइड वाला ब्लू टिक नहीं था। उन्होंने पूछा कि उन्हें किस कानून के तहत नजरबंद किया गया है? उन्होंने पुलिस को लिखित में ये दिखाने को कहा कि उनके या उनके दफ्तर ने ऐसा कोई आदेश प्राप्त किया है। उनकी पार्टी JKNC ने भी नजरबंदी का आरोप लगाते हुए झूठ फैलाया।

PM मोदी ने सेना को सौंपे 118 अर्जुन टैंक: ₹8400 करोड़ की लागत से तैयार किए गए हैं स्वदेशी MK-1A

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (फरवरी 14, 2021) दो राज्यों- तमिलनाडु और केरल के दौरे पर हैं। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में उन्होंने 118 हाइटेक अर्जुन टैंक (MK-1A) सेना को सौंप दिया। प्रधानमंत्री ने सलामी भी दी। इस दौरान आर्मी चीफ एमएम नरवणे भी मौजूद रहे। इन टैंकों को DRDO ने 8400 करोड़ की लागत से तैयार किया है।

पीएम मोदी ने पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “कोई भी भारतीय आज का दिन नहीं भूल सकता है। दो साल पहले आज ही के दिन पुलवामा में हमला हुआ था। हम उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने उस हमले में अपनी जान गँवा दी थी। हमें अपने सुरक्षा बलों पर गर्व है। उनका साहस आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।”

अर्जुन टैंक पर पीएम मोदी ने कहा, “मुझे स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए और बनाए गए अर्जुन मेन बैटल टैंक (एमके-1ए) को सौंपते हुए गर्व है। ये स्वदेशी गोला-बारूद का भी इस्तेमाल करता है। तमिलनाडु पहले ही भारत के ऑटोमोबाइल निर्माण का हब है। अब मैं तमिलनाडु को भारत के टैंक निर्माण के हब के रूप में विकसित होते देखता हूँ।”

पीएम मोदी ने तमिलनाडु में कई विकास परियोजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई। चेन्नई मेट्रो प्रोजेक्ट फेज-1 एक्सटेंशन का उद्घाटन भी किया।

पीएम मोदी ने तमिलनाडु में योजनाओं की शुरुआत के बाद कहा, “आज चेन्नई से हम ई-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं। ये प्रोजेक्ट इनोवेशन और स्वदेशी विकास के प्रतीक हैं। इनसे तमिलनाडु का और विकास होगा।” उन्होंने बताया कि चेन्नई मेट्रो का तेज़ी से विकास हो रहा है, इस साल के बजट में इस प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के लिए 63,000 करोड़ से ज़्यादा रुपए आवंटित किए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईआईटी मद्रास के डिस्कवरी कैंपस की आधारशिला रखी। यह कैंपस चेन्नई के पास थय्युर में बनाया जाएगा। पहले चरण में 2 लाख वर्ग मीटर से अधिक एरिया में बनने वाले इस कैंपस के निर्माण में 1000 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रैंड एनीकट नहर प्रणाली के विस्तार, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण की आधारशिला रखी। इस नहर का आधुनिकीकरण 2,640 करोड़ रुपए की लागत से होगा, जिससे नहरों में जल वहन करने की क्षमता बढ़ेगी।

अर्जुन टैंक की खासियत क्या है?

इस टैंक को पूरी तरह भारत में बनाया गया है। ये 118 टैंक सेना के पहले बैच में शामिल होंगे। अर्जुन श्रेणी के काफी टैंक पहले ही पश्चिम रेगिस्तान में पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात हैं। इन 118 अर्जुन टैंक से सेना में बख्तरबंद कोर में दो रेजिमेंट बनाई जाएगी।

जिस ‘भारत भवन’ के लिए ढोया था ईंट-पत्थर… अब उसी के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि: जानिए कौन हैं पद्मश्री भूरीबाई

मध्य प्रदेश की आदिवासी चित्रकार भूरी देवी को ‘भारत भवन’ के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। दिलचस्प बात ये है कि जब इस भवन का निर्माण शुरू हुआ था, तब वो 6 रुपए प्रतिदिन की दिहाड़ी पर बतौर मजदूर यहाँ काम करती थीं। उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि इसी ‘भारत भवन’ में वो मुख्य अतिथि बनेंगी। पद्मश्री से सम्मानित भूरीबाई देवी पिथोरा पेंटिंग कला में सिद्धहस्त हैं।

भूरी बाई को गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई। कला के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य करने के लिए भूरी बाई को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। पिथोरा पेंटिंग के जरिए भूरी बाई ने बरिया जनजातीय परंपराओं को जीवित रखा। उन्हें इसके लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा।

इससे पहले उन्हें 1986-87 में मध्‍य प्रदेश सरकार के सर्वोच्‍च पुरस्‍कार शिखर सम्‍मान से सम्मानित किया गया था। 1998 में मध्‍य प्रदेश सरकार ने उन्‍हें अहिल्‍या सम्‍मान से भी सम्मानित किया था।

भोपाल के ‘भारत भवन’ को बहुकला केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसके निर्माण के समय वो ईंट-पत्थर ढोने का काम किया करती थीं। ‘भारत भवन’ के पहले प्रमुख रहे जे स्वामीनाथन ने उनकी कला को पहचाना था और उन्हें आगे बढ़ाया। फ़रवरी 13, 2021 को 39वाँ स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। भूरीबाई बताती हैं कि 40 वर्ष पहले वो मजदूर के रूप में यहाँ काम करती थीं, जो उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

जब वो यहाँ काम करती थीं, तब उन्हें पता भी नहीं था कि वो जिस भवन के निर्माण में योगदान दे रही हैं, वो कला केंद्र बनने वाला है। वो इसे सिर्फ एक इमारत समझ कर काम करने आई थीं। वो अपना घर चलाने के लिए ईंट-पत्थर ढो रही थीं, लेकिन फिर यहीं से जुड़ गईं। उन्होंने मुख्य अतिथि बनने को भावुक क्षण बताते हुए कहा कि यहीं उन्हें अपनी कला को निखारने का मंच मिला और उन्हें नए मौके मिले।

आदिवासी भील समुदाय की भूरीबाई ने बताया कि जब वो मजदूरी करती थीं तो एक दिन वो अन्य महिला मजदूरों के साथ भोजन करने जा रही थीं। तभी जे स्वामीनाथन आए और पूछा कि क्या वो अपनी संस्कृति की शादी की चित्रण बना सकती हैं? उन्होंने हामी भर दी लेकिन साथ ही पूछा कि मजदूरी का क्या होगा और रुपए नहीं मिलेंगे तो घर कैसे चलेगा? इस पर उन्हें बताया गया कि इसके लिए 150 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से धनराशि मिलेगी। भूरीबाई ने 10 दिन काम किया और 1500 रुपए लेकर घर गईं।

‘दैनिक जागरण’ में सुशील पांडेय की खबर के अनुसार, झाबुआ के एक गाँव में चित्रकारी सीखने वाली भूरीबाई के पास जब इतने रुपए उनके पति ने देखा तो पूछा कि कहीं उन्होंने कुछ गलत कार्य तो नहीं किया? उन्हें समाज में लांछन का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने परिवार, पति और खेती-बारी सबका ख्याल रखते हुए चित्रकारी जारी रखी। श्यामला पहाड़ी पर बने ‘भारत भवन’ की स्थापना 1982 में हुई थी।

बता दें कि मोदी सरकार में सांस्कृतिक स्तर के काम करने वाले ऐसे कई लोगों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इस वर्ष भी कुल 119 नामों की इस सूची में कई ऐसे नाम हैं, जिनके संघर्ष की कहानी लंबी है। इनमें लौंडा नाच के नाम पर समाज में एक गायब होती परंपरा को जीवनदान देने वाले रामचंद्र माँझी और डायन जैसी कुरीति की भुक्तभोगी होने के बाद उसके ख़िलाफ लंबी लड़ाई लड़ने वाली छूटनी देवी जैसे नाम शामिल हैं। 

गायिका इब्तिसाम ने इस्लाम धर्म छोड़ दिया, कहा – ‘ये आतंक का मजहब, महिलाओं के साथ हिंसा का मजहब’

कुवैत की गायिका इब्तिसाम हामिद (Ibtisam Hamid) ने इस्लाम छोड़ कर यहूदी मजहब (Judaism) अपना लिया है, जिसके बाद कई मुस्लिम उनके विरोध में उतर आए हैं। उन्हें अरब में बस्मा-अल-कुवैती के नाम से जाना जाता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर के इस्लाम का त्याग करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यहूदी मजहब महिलाओं के प्रति ज्यादा सहिष्णु है, इसीलिए वो इसे अपना रही हैं।

उन्होंने ऐलान किया कि वो स्वेच्छा से इस्लाम का त्याग कर रही हैं। उन्होंने कहा, “इस्लाम आतंक और पाखंड का मजहब है। ये महिलाओं से घृणा करता है, उन्हें दबाता है और उनके साथ हिंसा को अंजाम देता है। इस्लाम कभी महिलाओं को उनका संपूर्ण अधिकार नहीं देता। इसीलिए, गर्व से कहती हूँ कि मैं यहूदी हूँ।” साथ ही उन्होंने कुवैत की सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी अल-सबह पर इजरायल के साथ सम्बन्ध बिगाड़ने के आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि अल-सबह धार्मिक और वैचारिक स्वतंत्रता को नकारता है। गायिका इब्तिसाम हामिद ने कहा कि उनका न तो इस पार्टी से कोई सम्बन्ध है और न ही इसका समर्थन करती हैं। गायिका ने 2018 में कहा था कि इस्लाम में संगीत हराम है और वो इस मामले में ईश्वर से दिशा-निर्देश चाहती हैं। उनका दावा है कि बचपन में उन्हें पूरी कुरान याद थी।

कुवैत की गायिका ने इस्लाम को कहा अलविदा

वहीं अरब की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इब्तिसाम हामिद कुवैती नहीं हैं। कहा जा रहा है कि उनकी माँ कुवैती हैं लेकिन कुवैत में एक महिला की नागरिकता उसके बच्चों को नहीं दी जा सकती है। वो कुवैत में रहती भी नहीं हैं और कुवैती नागरिकता के लिए उनके आवेदन को नकार दिया गया था। पिछले दिनों कुवैती ब्रॉडकास्टर मुहम्मद अल मुमिन्स ने खुद के इस्लाम छोड़ कर ईसाई बनने की बात कही थी।

इब्तिसाम के बारे में बताया गया है कि वो फ़िलहाल इराकी नागरिक हैं। गायिका ने कहा कि उन्होंने अमेरिका की नागरिकता के लिए ऐसा नहीं किया है, बल्कि यहूदी मजहब में उनका विश्वास है। पिछले वर्ष UAE, बहरीन, सूडान और मोरक्को जैसे देशों ने इजरायल के साथ शांति समझौता किया था, लेकिन कुवैत ने इससे इनकार कर दिया था। कुवैत ने फ़िलिस्तीन को पूर्ण अधिकार मिलने से पहले ऐसा न करने की बात कही थी।