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‘गाना’ से छुट्टी के बाद तंजिला ने माँगी माफी, कहा- ट्वीट्स डिलीट कर रही हूँ, अकाउंट भी डिएक्टिवेट कर दूँगी

तंजिला अनीस ने रविवार (फरवरी 14, 2021) को अपने विवादित ट्वीट के लिए माफी माँगी। उसने बजरंग दल कार्यकर्ता रिंकू शर्मा की हत्या के बाद एक ट्वीट किया था। इसके बाद उस पर अप्रत्यक्ष तौर पर हत्या को जायज ठहराने का आरोप लगा था। इसे देखते हुए म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘गाना (Gaana)’ ने तंजिला को नौकरी से निकाल दिया था।

अपने माफीनामे में तंजिला अनीस ने उन लोगों से बिना शर्त माफी माँगी, जो उसके हालिया ट्वीट से आहत थे। उसने कहा, “मैं आपको आश्वस्त करना चाहती हूँ कि मेरा उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं या आस्था को आहत करना नहीं था। अगर मैंने अनजाने में ऐसा किया है, तो उसके लिए बिना शर्त माफी माँगती हूँ।”

Tanzila Anis apology
तंजिला अनीस का माफीनामा

तंजिला अनीस ने यह भी कहा कि वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट को डिएक्टिवेट कर देगी। फिलहाल वह अपने ट्वीट और सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट करने में लगी है। हालिया विवाद के दौरान उसके कई पुराने हिंदूफोबिक ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट भी वायरल हुए थे।

माफीनामे में उसने कहा, “मैंने अपनी नौकरी भी खो दी है और इस महान राष्ट्र की बेटी के रूप में कुछ गोपनीयता चाहती हूँ।” फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उसके खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं।

बता दें कि रिंकू शर्मा की निर्मम हत्या के बाद तंजिला अनीस ने एक ट्वीट किया था। इसमें कहा गया था: बजरंग दल का कार्यकर्ता। इतना काफी है। विवाद होने पर उसने ट्वीट डिलीट करते हुए सफाई देते हुए कहा था कि उसे हत्या के बारे में जानकारी नहीं थी। उसके ट्वीट का मकसद केवल यह बताना था कि ‘कट्टरपंथी संगठन’ बजरंग दल से जुड़े व्यक्ति को ‘एक्टिविस्ट’ नहीं कहा जाना चाहिए।

‘गाना’ ने तंजिला को नौकरी से निकालते हुए सोशल मीडिया में जारी एक बयान में कहा था, “गाना देश के सभी धर्मों और समुदायों को सम्मान करता है। हाल ही में ज्वाइन करने वाली एक कर्मचारी के सोशल मीडिया पोस्ट के आलोक में हमारा कहना है कि यह हमारे मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। अब वह कंपनी की कर्मचारी नहीं है।”

उससे पहले तंजिला के खिलाफ चंडीगढ़ में आपराधिक शिकायत की गई थी। साथ ही चंडीगढ़ भाजपा के प्रवक्ता गौरव गोयल ने उसे निकाल बाहर करने की माँग ‘Gaana’ से की थी। गोयल ने ‘Gaana’ के CEO प्रशान अग्रवाल को पत्र लिखकर उनकी कंटेंट हेड तंज़िला पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के कारण रिंकू शर्मा की हत्या का जश्न मनाने का आरोप लगाया था।

‘एनर्जी ड्रिंक दी, नंगा किया, अश्लील काम को मजबूर किया’: ‘गंदी बात’ वाली गहना वशिष्ठ पर गैंगरेप का भी आरोप

‘गंदी बात’ फेम अभिनेत्री गहना वशिष्ठ उर्फ वंदना तिवारी पर सामूहिक दुष्कर्म और गलत तरीके से कैद करने के आरोप लगाए गए हैं। बता दें कि अश्लील वीडियो शूट करने और उसे अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने के आरोप में अभिनेत्री पहले ही गिरफ्तार की जा चुकी है।

पुलिस ने अभिनेत्री गहना वशिष्ठ और 3 लोगों पर महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें करने का मामला दर्ज किया है। बता दें कि ये आरोप एक 24 वर्षीय मॉडल के द्वारा लगाया गया है। जिसके अनुसार, उसे एक वीडियो शूट के दौरान 3 पुरुषों के साथ अश्लील काम करने के लिए मजबूर किया गया था।

इससे पहले 21 साल की मॉडल ने आरोप लगाया था कि इस गैंग ने उसका भी शोषण किया था। 21 वर्षीय अभिनेत्री ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसने एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीता था। वह अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए मौके की तलाश में थी, तभी वह अलीशा नाम की महिला के संपर्क में आई। अलीशा ने उसकी मुलाक़ात ‘मोनू’ नाम के कैमरामैन से कराई। इसके बाद उसे एक नशीली ‘एनर्जी ड्रिंक’ दी गई थी और नग्न अवस्था में उसके साथ अश्लील दृश्य फ़िल्माए गए थे। 

इस घटना के बाद जब पीड़िता मॉडल अपने घर गई तब उसके दोस्तों ने बताया कि उसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए गए हैं। इसके बाद उसने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की और तभी उसे पता चला कि अलीशा और यास्मीन खान एक ही व्यक्ति हैं।  

मामले में पुलिस ने यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा, प्रतिभा नलावडे, मोनू गोपालदास जोशी, भानुसूर्यम ठाकुर, मोहम्मद आसिफ और सैफी को धर-दबोचा है। पुलिस का मानना है कि इस रैकेट के पीछे यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा का दिमाग है।

गौरतलब है कि गहना वशिष्ठ को मुंबई क्राइम ब्रांच ने शनिवार (फरवरी 6, 2021) को गिरफ्तार किया था। गहना वशिष्ठ को ‘मिस एशिया बिकनी क्राउन’ विजेता के रूप में जाना जाता है। गहना पर एक वेबसाइट के लिए एडल्ट वीडियो शूट करने और उन्हें अपलोड करने का आरोप है। 

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वो स्ट्रगल कर रहीं एक्ट्रेस को काम का लालच देकर पोर्न वीडियो शूट करवाती थी। काम के एवज में हर फिल्म के लिए 15,000 से 20,000 रुपए भुगतान करती थी। पुलिस को आरोपितों के सैकड़ों एक्स-रेटेड वीडियो मिले हैं।

मंगोलपुरी से मंगलदोई तक हिंदुओ कहना ही होगा- 21 की दिशा ही नहीं, फिदायीन मोहम्मद आदिल डार भी था

मुस्लिम बहुल मंगोलपुरी का K ब्लॉक। इसी ब्लॉक में रहते थे 26 साल के रिंकू शर्मा। उनके घर से कुछ ही दूर वह भीड़ भी रहती है, जिसने निर्ममता से उनको मार डाला। संकरी गलियों वाले इस ब्लॉक में इन दिनों काफी चहलकदमी है। हिंदू खौफ में हैं। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बल की भारी तैनाती है। मीडिया के कैमरे चमक रहे हैं। बजरंग दल, विहिप, बीजेपी नेता एक-एक कर परिवार का दुख बाँटने पहुँच रहे हैं। न्याय के लिए कैंडल मार्च निकल रहा है। पीड़ित परिवार के लिए कुछ लोग ऑनलाइन फंड जुटा रहे हैं।

मंगोलपुरी उसी दिल्ली में है, जहाँ 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली की आड़ में हिंसा हुई। लाल​ किले पर तिरंगे का अपमान हुआ। यह सब कुछ जिस कथित किसान आंदोलन की आड़ में हुआ उसके समर्थन में दिल्ली का मुख्यमंत्री अपना पूरा अमला उतार देता है। देश का मुख्य विपक्षी दल और उसका युवराज अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।

रिंकू शर्मा के परिवार के आँसू पोंछने के वक्त आपकी दिल्ली का मुख्यमंत्री कहाँ हैं? कहाँ हैं उनका अमला? कहाँ है कॉन्ग्रेस? युवराज कहाँ हैं?

कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी (14 फरवरी 2021) रविवार को असम में थे। उसी असम में जहाँ मंगलदोई है। उसी असम में जहाँ अगले कुछ महीनों में चुनाव हैं। मंगलदोई के दर्द पर जाने से पहले ये जानते हैं कि राहुल ने असम में कहा क्या?

असम के शिवसागर की रैली में उन्होंने कहा, “हमने ये गमछा पहना है इस पर लिखा है सीएए। इस पर हमने क्रॉस लगा रखा है मतलब चाहे जो हो जाए सीएए नहीं होगा! हम दो हमारे दो…। अच्छी तरह सुन लो, (सीएए) नहीं होगा, कभी नहीं होगा।” उनके एक और बयान पर गौर करिए। इसमें उन्होंने कहा, “असम के चाय बगान में काम करने वाले वर्कर रोजाना 167 रुपए की मजदूरी पाते हैं, जबकि गुजरात को चाय बगान मिलते हैं। हम वादा करते हैं कि असम के वर्कर को रोजाना 365 रुपए की मजदूरी देंगे। इसके लिए पैसा कहाँ से आएगा? यह गुजरात के व्यापारियों से आएगा।”

गुजरात से कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार की घृणा समझी जा सकती है। वहाँ के एक नेता ने गुजरात को ऐसे किले में तब्दील किया जो कॉन्ग्रेस के लिए अभेद्य हो गया। जिसने केंद्र से कॉन्ग्रेस को उखाड़ फेंका। जिसने कॉन्ग्रेस को उसके सबसे बुरे दौर में धकेल दिया। ऐसी दुर्गति में जिसकी उसने सपनों में भी कल्पना नहीं की होगी। जहाँ से बाहर निकलने के उसे ख्वाब भी नहीं आते होंगे। जिसकी आभा ऐसी है कि मंदिर-मंदिर प्रदक्षिणा करने, खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण बताने और हार्दिक-जिग्नेश जैसों को हवा देकर भी 2017 में वह गुजरात जीत नहीं पाई।

पर उसे हिंदुओं की प्रताड़ना इतनी क्यों भाती है? यह हम नहीं कह रहे। यह खुद राहुल ने आज शिवसागर की रैली में दोहराया है। उन्होंने जिस सीएए (CAA) को लागू नहीं होने देने का संकल्प दोहराया है, वह किनके लिए है? पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे इस्लामी मुल्कों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए। ये अल्पसंख्यक कौन हैं? ये हैं- हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई।

सीएए-एनआरसी के नाम पर देश में हुई हिंसा और शाहीनबाग जैसे प्रयोग छिपे नहीं हैं। कथित किसान आंदोलन भी उन्हीं प्रयोगों का हिस्सा है। असम में राहुल के इस बात पर जोर देने की वजह स्पष्ट है।

असल में एनआरसी असम के मंगलदोई के जिक्र के बिना अधूरी है। अपनी किताब ‘द लास्ट बैटल आफ सरायघाट’ में रजत सेठी और शुभ्राष्ठा ने लिखा है कि इमरजेंसी के बाद हुए 1977 के चुनावों में असम में कॉन्ग्रेस को 14 में से 10 सीटें मिली। तीन सीटें जनता पार्टी को मिली थीं। इनमें एक सीट मंगलदोई की थी। इस सीट पर जनता पार्टी के हीरा लाल पटवारी (तिवारी) चुनाव जीते थे। मंगलदोई लोकसभा क्षेत्र में 5,60, 297 मतदाता थे। एक साल बाद हीरा लाल की मौत हो गई तो उपचुनाव कराया गया।

साभार: द लास्ट बैटल आफ सरायघाट

महज़ एक साल से थोड़े से अधिक समय में जब मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) अपडेट की गई तो मतदाताओं की संख्या 80,000 बढ़ गई! यानी रातों-रात 15% की एकाएक वृद्धि! इनमें से लगभग 70,000 मतदाताओं का मजहब इस्लाम था। तमाम नागरिक समूहों ने इसके विरुद्ध शिकायतें दर्ज कराईं। ऐसे मामलों की संख्या भी लगभग 70 हज़ार थी, इनमें से 26 हज़ार ही टिक पाए। यहीं से भारतीय राजनीति में ‘अवैध बांग्लादेशी’ शब्द आता है, जिसका बड़ा हिस्सा बांग्लादेशी मुस्लिमों का है।

इसी वर्ग को शिवसागर में राहुल गाँधी सीएए के जरिए संदेश दे रहे थे। इनके लिए वह बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) जैसे दलों को साधते हैं। ये वही अजमल हैं, जिनके लिए असम के मंत्री हिमांत ​बिस्व सरमा ने कहा है कि समाज सेवा के लिए वह कट्टपंथी संगठनों से पैसा लेते हैं। इसके जरिए वह एक ऐसे नेटवर्क को पोषित करते हैं जो असम की संस्कृति के लिए खतरनाक है।

उनका लक्ष्य स्पष्ट है। वे पूरे असम को मंगलदोई बनाना चाहते हैं। उनकी चिंता 26 साल का रिंकू शर्मा नहीं, 21 साल की दिशा रवि है।

सोचना आपको है। शुतुरमुर्ग की तरह जमीन में सिर गाड़े बैठे रहेंगे या फिर जब वे टूलकिट की साझेदार दिशा रवि की गिरफ्तारी पर उम्र का हवाला देंगे तो आप उठकर खड़े होंगे, यह बताने को कि पुलवामा में आतंकी हमले को अंजाम देने वाला जैश का फिदायीन मोहम्मद आदिल डार भी 21 बरस का था।

पाकिस्तानी बानो बेगम गिरफ्तार, शादी में शामिल होने कराची से आई और UP में बन गई ग्राम प्रधान

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पाकिस्तानी महिला बानो बेगम को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार (फरवरी 13, 2021) को उसे अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया। बानो बेगम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर पंचायत चुनाव लड़ने का आरोप है। वह एटा जिले के जलेसर तहसील के गुदऊ गाँव की ग्राम प्रधान भी बन गई थी।

1 जनवरी 2021 को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद से वह फरार चल रही थी। गुप्त सूचना के आधार पर जलेसर पुलिस ने उसे उसके घर के पास से गिरफ्तार किया।

यूपी पुलिस ने ग्रामीणों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों के आधार पर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद बानो ने 2015 में ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ा और उसमें जीत दर्ज की। पंचायत प्रमुख शहनाज़ बेगम की मृत्यु के बाद, वह अंतरिम पंचायत प्रमुख बन गई।

35 साल पहले बानो बेगम एक शादी में शामिल होने कराची से भारत आई। फिर एटा में अख्तर अली से निकाह कर ली। उसके बाद से वह अपने दीर्घकालिक वीज़ा की अवधि कई बार बढ़वा चुकी थी।

बानो ने बनवाए थे फर्जी दस्तावेज

गाँव के निवासी कुवैदान खान ने 10 दिसंबर 2019 को डिस्ट्रिक्ट पंचायत राज ऑफिसर (डीपीआरओ) आलोक प्रियदर्शी से शिकायत की। शिकायत में उन्होंने कहा था कि बानो बेग़म पाकिस्तान की नागरिक है। इस बात के सामने आते ही पूरे गाँव में हडकंप मच गया। फिर बानो बेग़म ने ग्राम प्रधान पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने पूरे प्रकरण के बारे में ग्राम पंचायत सचिव और एटा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट सुखलाल भारती को सूचित किया। मजिस्ट्रेट सुखलाल भारती ने बानो बेग़म पर मामला दर्ज करने और जाँच शुरू करने का आदेश दिया है। 

जाँच के कुछ ही समय बाद यह पता चला कि बानो बेग़म भारत की नागरिक नहीं है। उसने नकली वोटर आईडी और आधार कार्ड बनवाए थे। आरोपों के मुताबिक़ गुदऊ ग्राम पंचायत सचिव ध्यान सिंह ने प्रधान पद के लिए बेग़म बानो के नाम का सुझाव दिया था। उन लोगों के खिलाफ़ भी जाँच की जा रही है जिन्होंने बेग़म को नकली दस्तावेज़ उपलब्ध कराने में मदद की। 

रघुनाथ मंदिर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और लखदाता बाजार…: पुलवामा हमले की बरसी पर तबाही का था बड़ा प्लान

पुलवामा हमले की दूसरी बरसी पर बड़े आतंकी हमले की साजिश को सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में कई जगह आतंकी वारदातों को अंजाम देने का प्लान था। जम्मू पुलिस ने रविवार (फरवरी 14, 2021) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इस पूरी साजिश का खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पाकिस्तान से चंडीगढ़ में पढ़ने वाले एक युवक को मैसेज भेजकर आईईडी प्लांट करने का ऑर्डर दिया गया था।  

जम्मू पुलिस के आईजी मुकेश सिंह ने बताया, “हमारे पास पहले से ही इनपुट थे कि पुलवामा हमले की बरसी पर आतंकी ग्रुप्स वारदातों को अंजाम दे सकते हैं। इस वजह से हम हाई अलर्ट पर थे। बीती रात हमने सोहेल नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया। उसके पास एक बैग था। पूछताछ के दौरान उसके बैग से 6-6.5 किलो आईईडी जब्त किया गया। हालाँकि वह एक्टिवेट नहीं था।”

उन्होंने आगे बताया कि सोहेल ने खुलासा किया है कि वह चंडीगढ़ में नर्सिंग की पढ़ाई करता है। उसे पाकिस्तान के अल बदर तंजीम के हुक्मरान के जरिए मैसेज आया था कि उसको एक आईईडी प्लांट करनी है।

आईजी मुकेश सिंह ने पाकिस्तान की साजिश का भंडाफोड़ करते हुए कहा कि सोहेल को आईईडी लगाने के लिए तीन से चार जगहों का टारगेट दिया गया था। इनमें रघुनाथ मंदिर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और लखदाता बाजार का नाम शामिल था। इसमें से किसी एक जगह पर उसे आईडी रखना था। इस आईडी को रखने के बाद उसे श्रीनगर की फ्लाइट पकड़नी थी, जहाँ उसे अल बदर तंजीम का ग्राउंड वर्कर अथर शकील खान उसे रिसीव करता।

उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ के रहने वाला काज़ी वसीम को भी इसकी जानकारी थी। पुलिस ने उसे भी पिक कर लिया है। उसकी भी गिरफ्तारी हो जाएगी। इसके अलावा, आबिद नबी नाम के एक शख्स को भी गिरफ्तार किया गया है। अगर यह आईडी एक्टिव होती तो बड़ा धमाका हो सकता था। जान-माल की बड़ी हानि हो सकती थी।

मुकेश सिंह ने बताया कि बीती रात 15 छोटे आईईडी और 6 पिस्तौल सांबा सेक्टर से भी बरामद की गई।

पुलवामा हमले में 40 जवान हुए थे वीरगति को प्राप्त

बता दें कि दो साल पहले आज के ही दिन पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन से सीआरपीएफ जवानों की बस को टक्कर मार दी थी, जिसमें 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। हमले की दूसरी बरसी पर जम्मू-कश्मीर के लेथपुरा में सीआरपीएफ के कैंप में एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया किया गया। दिल्ली में सीआरपीएफ मुख्यालय से डिजिटल माध्यम से बल के वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस मौके पर सीआरपीएफ ने कहा कि देश उस हमले के जिम्मेदारों को माफ नहीं करेगा और जवानों के सर्वोच्च बलिदान को नहीं भूलेगा।

कोर्ट में दिशा रवि रोई, बाहर लिबरल: 5 दिन की पुलिस कस्टडी में, खालिस्तानी संगठन से भी लिंक

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने शनिवार (13 फरवरी 2021) को 21 साल की ‘क्लाइमेट एक्टिविस्ट’ दिशा रवि को बेंगुलरु से गिरफ्तार किया था। टूलकिट (ToolKit) मामले में यह पहली गिरफ्तारी है। किसान आंदोलन की आड़ में रची गई विदेशी साजिश का पर्दाफाश जिस टूलकिट से हुआ था, उसे स्वीडन की कथित बाल अधिकार कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने गलती से लीक कर दिया था।

रविवार (14 फरवरी 2021) को दिशा को अदालत ने 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए दिशा रोने लगी। इधर, उसकी गिरफ्तारी पर लिबरलों का भी विलाप शुरू हो गया है। इस बीच, खालिस्तानी संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (PFJ) से भी उसके लिंक मिलने की बात सामने आई है।

ग्रेटा थनबर्ग की ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर’ इंडिया चैप्टर की दिशा संस्थापक सदस्य है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि दिशा रवि, टूलकिट Google डॉक की संपादक है। वह दस्तावेज़ के निर्माण और प्रसार में मुख्य साजिशकर्ता है। उसने व्हाट्सएप ग्रुप शुरू किया और टूलकिट डॉक बनाने में सहयोग किया। डॉक का ड्राफ्ट तैयार करने में वह शामिल थी।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक दिशा रवि ने ही ग्रेटा थनबर्ग के साथ टूलकिट डॉक शेयर किया था।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि दिशा रवि ने ही उसे टूलकिट डिलीट करने के लिए कहा था। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने कहा कि इसमें दो लाइन से कहीं ज्यादा एडिटिंग है। बता दें कि सुनवाई के दौरान दिशा ने कहा कि उसने दो लाइनें ही एडिट की थी।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने 4 फरवरी को इस मामले में आईपीसी की धारा 124ए, 120ए और 153ए के तहत एफ़आईआर दर्ज की थी। देशद्रोह, आपराधिक षड्यंत्र और समूहों के बीच नफ़रत फैलाने संबंधी यह एफ़आईआर ‘टूलकिट’ के निर्माताओं के खिलाफ़ दर्ज की गई थी।

दिशा रवि की गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही वामपंथियों का प्रलाप शुरू हो गया है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया है। लिबरलों ने दिशा रवि के पक्ष में सोशल मीडिया पर सहानुभूति जताना शुरू कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता करुणा नंदी ने दावा किया कि कार्यकर्ता एक गायिका माँ की बेटी है। उन्होंने कहा, “इस तरह के मामले में गिरफ्तारी के लिए आरोप बेतुके हैं।”

Screengrab of karuna Nundy’s tweet

लेफ्ट-प्रोपगेंडा वेबसाइट स्क्रॉल की कार्यकारी संपादक सुप्रिया शर्मा भी दिशा रवि के समर्थन में सामने आई।

Screengrab of the tweet by Supriya Shama

कम्युनिकेशन स्ट्रैटजी कंसल्टेंट कार्तिक ने इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “भारत सरकार बहुत बहादुर है! बेंगलुरु की 21 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि को शनिवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम ने गिरफ्तार किया।”

Screengrab of the tweet by Karthik

लेफ्ट-विंग प्रोपेगेंडा फैलाने वाली कार्यकर्ता कविता कृष्णन भी दिशा रवि की गिरफ्तारी के बाद खुद को रोक नहीं पाई। उन्होंने ट्विटर पर आरोप लगाया, “जैसा कि मैंने चेतावनी दी थी, ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए टूलकिट के खिलाफ एफआईआर कोई मजाक नहीं है, यह भारत में कार्यकर्ताओं के विच-हंट के लिए नया बहाना है। 21 वर्षीय छात्रा और फ्राइडे फॉर फ्यूचर की कार्यकर्ता को इस बहाने पूछताछ के लिए उठाया गया है।”

Screengrab of the tweet by Kavita Krishnan

लेखक मिहिर शर्मा ने दावा किया कि ’21 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता’ को गिरफ्तार करके भारत एक ‘बड़ा सुपरपावर’ साबित हुआ।

गौरतलब है कि ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया था। लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट ग्रेटा ने डिलीट भी कर दिया था। हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस डॉक्यूमेंट से यह स्पष्ट हो गया था कि किसान आन्दोलन एक सोची-समझी रणनीति के साथ शुरू किया गया था और 26 जनवरी का उपद्रव भी इसी रणनीति का हिस्सा था।  

इसके बाद उसने एक और ट्वीट किया, जिसमें गूगल डॉक्यूमेंट की एक फाइल शेयर की गई थी। इस फाइल में भारत में चल रहे किसान आन्दोलन को हवा देने वाले सोशल मीडिया कैंपेन का शेड्यूल और तमाम रणनीति दर्ज थी। यह गूगल डॉक्यूमेंट शेयर करते हुए ग्रेटा ने लिखा था कि जो लोग मदद करना चाहते हैं यह ‘टूलकिट’ उनके लिए है। इस लिंक में भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने की कार्ययोजना का विवरण था।

क्राइम ब्रांच के स्पेशल पुलिस कमिश्नर प्रवीर रंजन ने कहा था, “शुरूआती जाँच में पता चला है कि टूलकिट ‘खालिस्तानी समर्थक समूह’ पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (Poetic Justice Foundation) द्वारा तैयार की गई थी।”

बॉर्डर पर टेंशन… PM मोदी की ब्रीफिंग और IT मिनिस्ट्री में रातोंरात तैयारी: चीन को झटका दिए जाने की इनसाइड स्टोरी

चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच भारत सरकार ने टिकटॉक, वीचैट जैसे चीनी एप पर जून 2020 में कार्रवाई थी। सरकार के इस अभूतपूर्व निर्णय को अमलीजामा पहनाने के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT) के अधिकारियों ने रातोंरात जरूरी कागजी कार्रवाई निपटाए थे। टाइम्स आफ इंडिया की एक रिपोर्ट से इस फैसले को लेकर दिखाई गई तत्परता सामने आई है।

मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खासतौर से ब्रीफ किया था। उन्हें तेजी से पेपरवर्क निपटाने का जिम्मा दिया गया ताकि भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच तीसरे राउंड की वार्ता से पहले इस बैन की घोषणा की जा सके। कानूनी अधिकारियों के साथ मिलकर आईटी मंत्रालय ने समय से इस काम को अंजाम दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक़ एलएसी पर चीन कुछ हद तक लाभ की स्थिति में था, लेकिन मोदी सरकार इस बार ‘परंपरागत सावधानी रखने वाले रवैए’ से हटकर चली। तमाम चीनी एप्लीकेशंस पर प्रतिबंध लगाकर सरकार ने चीन को स्पष्ट संदेश दिया कि गलवान घाटी में दिए गए धोखे, जिसमें 20 भारतीय जवान बलिदान हुए थे, का माकूल जवाब दिया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत सरकार सिर्फ सैन्य स्तर पर जवाब नहीं दे रही थी। राजनीतिक, कूटनीतिक और यहाँ तक कि आर्थिक लिहाज़ से भी भारत सरकार ने चीन को मुँहतोड़ जवाब दिया। सरकार का मत स्पष्ट था कि वह आर्थिक या सैन्य लिहाज़ से किसी भी तरह का ख़तरा उठाने से पीछे नहीं हटेगी। 

इसकी वजह से मोदी सरकार को पैनगोंग त्सो पर विवाद को हल करने में मदद मिली। चीनी सेना घुसपैठ के किसी भी मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाई, जिसकी वजह से एलएसी पर भी स्थिति सामान्य करना सम्भव हुआ। चीन एलएसी पर अपने मनमुताबिक स्थायी बदलाव करने और फिंगर 4-8 वाले क्षेत्र को लेकर अपने मंसूबों में नाकामयाब रहा। भारत भले उस क्षेत्र से बाहर रहने वाला है, लेकिन इसका एक और मतलब साफ़ है कि चीन भी उस क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधि नहीं कर सकता है।   

दरअसल भारत सरकार ने 29 जून 2020 को कुल 59 चीनी एप्लीकेशंस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद सरकार ने जुलाई 2020 में 47 ऐसी एप्लीकेशंस पर पाबंदी लगाई थी जो इनके क्लोन के रूप में काम कर रही थीं। इसके बाद केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 ए के तहत 2 सितंबर 2020 को लगभग 118 चीनी एप्लीकेशंस पर प्रतिबंध लगाया जिसमें PUBG भी शामिल था। इसके बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय ने नवंबर में 43 अन्य एप्लीकेशंस पर पाबंदी लगाने का आदेश जारी किया था। 

इस तरह की तमाम चीनी एप्लीकेशंस कथित तौर पर देश की संप्रभुता, अखण्डता, सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में लिप्त थीं। इसके अलावा भारत सरकार ने चीन के अली बाबा ग्रुप की चार एप्लीकेशंस पर भी प्रतिबंध लगाया था।   

कनाडा को कोरोना वैक्सीन की 5 लाख डोज इसी महीने, ट्रूडो ने मोदी से आपूर्ति का किया था अनुरोध

भारत इसी महीने कनाडा को कोरोना वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ की पाँच लाख खुराक भेजेगा। भारत सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद ये मंजूरी दी गई है।

भारत की ‘मेड इन इंडिया’ कोरोना वैक्सीन की माँग दुनिया भर के देश कर रहे हैं। भारत मानवता का परिचय देकर कई देशों को मुफ्त में कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध करवा चुका है। अब भारत की Vaccine Diplomacy का असर काफी दूर तक नजर आने लगा है। पाकिस्तान की नजर भी ‘मेड इन इंडिया’ कोरोना वैक्सीन पर बनी हुई है। इन सबके बीच कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) ने भी कोविशील्ड की जरूरत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से फोन कर बात की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कनाडाई समकक्ष को कोविड-19 टीकों की आपूर्ति में मदद करने की पूरी कोशिश करने का भरोसा दिया था। ट्रूडो ने एक सवाल के जवाब में कहा वो सीरम इंस्टीट्यूट से भारत में आने वाले संभावित अतिरिक्त टीकों को लेकर आशान्वित हैं। इस पर बारीकी से काम किया जा रहा है। 

कोरोना वैक्सीन की खुराकों की कमी से जूझ रहे कनाडा ने 5 फरवरी को भारत से 10 लाख खुराकों की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। हालाँकि जब भारत ने फरवरी में जिन देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की जानी है, उनकी सूची जारी की तो इस सूची में कनाडा का नाम नहीं था। इस सूची में 25 देशों का नाम था जिन्हें 2.4 करोड़ खुराक भेजी जानी थीं। इस सूची के जारी होने के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 10 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया था और उनसे कनाडा को वैक्सीन की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था।

कोविड-19 टीकों की कमी से जूझ रहे कनाडा का रुख अब किसान आंदोलन पर भी बदल गया है। हाल ही में कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो भारत के किसान आंदोलन में दखलअंदाजी की वजह से निशाने पर आए थे। मगर अब उन्होंने भारत की तारीफ की है। पीएम मोदी की तारीफ करते हुए ट्रूडो ने कहा कि अगर विश्वभर के देश कोरोना से जंग जीत जाते हैं तो इसमें भारत की मेडिकल क्षमता और पीएम मोदी के नेतृत्व की अहम भूमिका होगी।

भारत के लिए इसे एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, बीते साल नवंबर में गुरु नानक जयंती के मौके पर जस्टिन ट्रूडो ने भारत में चल रहे आंदोलन को लेकर टिप्पणी की थी। जिस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा ऐतराज जताते हुए दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को ‘गंभीर नुकसान’ पहुँचने की बात कही थी।

कनाडा के पीएम ट्रूडो पर खालिस्तानियों के प्रति नरम रुख अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि कनाडा के पीएम ने किसान आंदोलन को लेकर भारत सरकार के बातचीत से रास्ता निकालने के प्रयासों की सराहना की है। ट्रूडो सरकार कनाडा में मौजूद राजनयिकों और परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

‘गमछा पर लिखा है CAA, इस पर क्रॉस लगा रखा है’: प्रताड़ित हिंदुओं को नागरिकता राहुल गाँधी को नहीं कबूल

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने असम के शिवसागर में हुई रैली में कहा कि सत्ता में आने पर सीएए लागू नहीं करेंगे। अक्सर अपनी बातों से ज़्यादा हरकतों की वजह से चर्चा में रहने वाले राहुल गाँधी ने इस रैली में असम के एक पारंपरिक गमछे का इस्तेमाल किया, जिससे वह राज्य के लोगों और खुद के बीच ‘कनेक्ट’ स्थापित कर पाएँ (जैसा अमूमन उनसे होता नहीं है)। 

गमछा दिखाते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि इस पर सीएए (नागरिकता संशोधन क़ानून) लिखा हुआ है और उस पर क्रॉस का निशान बना हुआ है। इसका मतलब यह है कि चाहे जो हो जाए सीएए लागू नहीं होगा। राहुल गाँधी ने कहा, “हमने ये गमछा पहना है इस पर लिखा है सीएए। इस पर हमने क्रॉस लगा रखा है मतलब चाहे जो हो जाए सीएए नहीं होगा! हम दो हमारे दो…।। अच्छी तरह सुन लो, (सीएए) नहीं होगा, कभी नहीं होगा।” 

सीएए 2019 के दौरान संसद के दोनों सदनों से पारित किया गया था। इस पर अभी अमल किया जाना बाकी है। इस कानून की मदद से पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को नागरिकता दी जाएगी। इसके लागू होने के बाद पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन और ईसाई लोगों को नागरिकता दी जाएगी।  

लेकिन कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ताजा बयान से फिर साबित किया है कि उन्हें इस्लामी देशों के प्रताड़ित हिन्दुओं, सिखों, बौद्धों, जैनों, ईसाइयों से कोई मतलब नहीं है। इन देशों में मौजूद अधिकांश लोग दलित समुदाय से आते हैं, जिनके हित की कॉन्ग्रेस हमेशा वकालत करती है। इसका मतलब साफ़ है कि ‘दलितों के अधिकारों’ के लिए लड़ने की बात छलावा मात्र है। दलितों के मुद्दे पर की गई सारी भाषणबाजी सिर्फ राजनीतिक मुनाफ़े के लिए की गई थी। 

असम में सीएए को लेकर पूर्व में काफी विरोध-प्रदर्शन हुए थे। प्रदेश में इस मुद्दे पर लगभग सारे विवाद हल हो चुके हैं। लेकिन आगामी विधानसभा चुनावों में यह बेशक बड़ा मुद्दा होगा।    

राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता बच्चों को CM योगी ने किया सम्मानित, कहा – ‘अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकः’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (13 फरवरी 2021) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विजेता बच्चों से संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर कहा कि सभी विजेताओं ने अपने-अपने क्षेत्र में कुछ उल्लेखनीय किया है। इससे यह बात सिद्ध होती है कि हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है। उस प्रतिभा को समाज के सामने लेकर आने और सही मंच प्रदान करने की ज़रूरत है। 

CM योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 5 होनहारों को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित करते हुए, उन्हें प्रदेश की इन्द्रधनुषी प्रतिभा, क्षमता और विशिष्टता की पहचान कहा। उसका ही नतीजा है कि आज सभी को इन छात्रों पर गर्व है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुताबिक़ विद्वता, वीरता, खेल, कला और संगीत में विलक्षण इन प्रतिभा सम्पन्न बच्चों ने खुद को पहचाना और अपनी विशिष्टता को उत्कृष्टता में तब्दील किया। इन छात्रों को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदेश के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा का आधार साबित होगा। इसके बाद CM योगी आदित्यनाथ ने कहा,

“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में हर प्रकार के राष्ट्रीय पुरस्कारों के चयन में पारदर्शिता आई है। पद्म पुरस्कारों से लेकर बाल पुरस्कारों तक योग्यता के आधार पर ही लोगों का चयन किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति में एक बात कही जाती है, ‘अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकः तत्र दुर्लभः’ यानी कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं है। एक अच्छा योजक मिल जाए तो हर व्यक्ति अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकता है। प्रतिभा केवल एक क्षेत्र में नहीं हो सकती है, एक व्यक्ति अपने जीवन के किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा समाज के सामने ला सकता है। यह क्षेत्र कला, साहित्य, विज्ञान या जीवन का कोई भी अन्य क्षेत्र हो सकता है।” 

विजेताओं का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “आप पाँचों में कुछ अलग करने का साहस था। हर व्यक्ति को जीवन में एक ऐसा अवसर मिलता है, जो उसके जीवन का ‘टर्निंग पॉइंट’ होता है। जहाँ पर सकारात्मक निर्णय लेने वाला व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। जिनका दृष्टिकोण नकारात्मक हो, ऐसा व्यक्ति कभी अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान हमें ध्यान रखना होगा कि हम कोई भी कार्य पुरस्कार हासिल करने के लिहाज़ से नहीं करें। हमारा एकमात्र कार्य सिर्फ सही दिशा में आगे बढ़ते जाना है, परिणाम के बारे में सोचना नहीं।” 

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2021 के लिए उत्तर प्रदेश के 5 बच्चों का चयन हुआ है। इसमें लखनऊ के व्योम आहूजा (10), बाराबंकी के कुंवर दिव्यांश सिंह (15), गौतमबुद्ध नगर के चिराग भंसाली (16), अलीगढ़ के मोहम्मद शादाब (17) और प्रयागराज के मोहम्मद (17) शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 जनवरी को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए इन छात्रों से संवाद भी किया था।