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Video: ‘किसान’ नेता स्वतंत्र क्यों घूम रहे हैं? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं?

सिंघु बॉर्डर पर किसान क्यों हैं अभी भी? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं? मीटिंग तो एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन असामान्य परिस्थिति में रूटीन से बाहर क्यों नहीं है सरकार? टिकैत, योगेन्द्र यादव समेत वो चालीस किसान नेता क्यों नहीं हैं कस्टडी में? सरकार जवाबदेही तक क्यों नहीं तय कर पाई है?

राष्ट्रवाद लाल किला देख कर चिंतित होना है: भाजपा सबसे बेहतर विकल्प है, उसकी अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक विवशताएँ हैं लेकिन हम लगातार चल रहे उदाहरणों के होने के बाद भी सरकार की असफलता को मास्टरस्ट्रोक नहीं कह सकते।

सरकार ने सिख सुप्रीमेसिज्म को अपीज करने का खूब प्रयास किया। बजाय इसके कि पंजाब में 38% हिन्दू हैं और ये हमेशा किसी की बी टीम बन कर खेलते रहे। पंजाब में हिन्दुओं की स्थिति पर भी सोचता हूँ, लेकिन इन्हें किसान कह कर बातचीत के लिए आमंत्रित करने का सिलसिला तो बंद होना चाहिए।

दीप सिद्धू अचानक से दोबारा भाजपाई हो गया। बाकी बीस हजार उसके क्लोन थे? नीरव मोदी की तस्वीर दिखा कर भी यही कहा गया था। इस आतंकी घटना को एक व्यक्ति के फेक न्यूज से नहीं बचा सकते, ‘अराजक तत्व घुस आए’ कहना पुरानी दलीलें हैं जो नहीं चलेंगी।

बात आपके बातों के साख की है क्योंकि जो आपको वोट देते हैं वो आपसे पूछ रहे हैं कि कहाँ है छप्पन इंच: वो अनभिज्ञ हैं आपकी ऊपर बताई गई विवशताओं से लेकिन उन्हें सांकेतिक तौर पर भी एक्शन ले कर कौन समझाएगा? ये तो सरकार का ही कार्य है, हम तो सूचनाएँ दे सकते हैं।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

पत्नी दूसरे के साथ भागी तो बन गया ‘सीरियल किलर’: 18 महिलाओं को बेरहमी से उतारा मौत के घाट

हैदराबाद में टास्क फोर्स पुलिस ने एक सीरियल किलर को गिरफ्तार किया है। इसकी पहचान मैना रामुलू के रूप में हुई है। यह सीरियल किलर अब तक 18 महिलाओं के साथ सेक्स करने के बाद उनकी हत्या कर चुका है। आरोपित शराब के नशे में हत्याएँ करता था। दो महिलाओं के हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए आरोपित ने पकड़े जाने के बाद 16 और वारदातें कुबूल कीं।

आरोपित पत्थर काटने का काम करता था। पुलिस की टास्क फोर्स ने उसे 21 आपराधिक मामलों में पकड़ा था। इसमें से 16 हत्या के मामले थे और बाकी प्रॉपर्टी से संबंधित अपराध। साथ ही इससे पहले वह एक बार पुलिस की कस्टडी से भी भाग चुका है।

पुलिस के अनुसार 21 साल की उम्र में उसकी शादी हो गई थी। लेकिन, उसकी पत्नी किसी और के साथ भाग गई। इसके बाद से ही महिलाओं के प्रति उसके मन में एक घृणा भर गई थी। फिर, सन 2003 से ही उसने आपराधिक गतिविधियाँ शुरू कर दीं।

अकेली महिलाओं को वह पकड़ता था और शारीरिक संबंध बनाने के बदले उन्हें पैसे ऑफर करता था। उन्हें ले जाकर वह शराब पीता था और फिर महिला की हत्या कर देता था। इसके बाद वह महिलाओं का कीमती सामान आदि लेकर भाग जाता था। पुलिस काफी दिनों से उसकी तलाश कर रही थी।

बता दें कि 30 दिसंबर, 2020 को घाटकेसर के अंकुशपुर में वेंकटगिरि की 50 वर्षीय महिला वेंकटगम्मा की हत्या कर दी गई थी। नॉर्थ जोन टास्क फोर्स की पुलिस टीम ने इस हत्या के मामले में बोरबंडा के 45 वर्षीय रामुलू को गिरफ्तार किया था। उसके ऊपर मूलगुण के बालगु में 35 वर्षीय अज्ञात महिला की हत्या का भी आरोप है, जिसकी लाश 10 दिसंबर, 2020 को सिद्दीपेट में मिली थी।

इस तरह की दो महिलाओं की हत्या

रामुलू ने वेंकटम्मा को शराब खरीदने के बहाने यूसुफगुडा ताड़ी परिसर से उठाया। वह अंकुशपुर, घाटकेसर में एक अलग जगह पर उसे ले गया और शराब पीने के बाद बोल्डर से टक्कर मारकर उसकी हत्या कर दी। इसी तरह से, वह दूसरे शिकार को बालानगर ताड़ी परिसर में ले गया और उसे जाप्ता सिंगापल्ली गाँव, मुलुगु, सिद्दीपेट में सुनसान जगह ले गया। कमिश्नर ने कहा कि पीड़िता अत्यधिक नशे में थी, रामुलू ने उसकी साड़ी का इस्तेमाल कर उसके चेहरे को जला दिया गया और उसके चाँदी के आभूषण लेकर फरार हो गया। शव की पहचान उसके शरीर के साथ बरामद की गई सेल फोन के इस्तेमाल से वेंकटम्मा के रूप में हुई। 

पुलिस ने आसपास की जिला पुलिस और राज्य पुलिस से संपर्क किया है। वहाँ इस तरह की हत्याओं के जो भी मामले थे उनकी जाँच की जा सकती है। फिरहाल आरोपित से पूछताछ हो रही है।

‘150+ लोगों से हिन्दू धर्म छुड़वा ईसाई बनाया जा रहा था’ – इंदौर में VHP और बजरंग दल का दखल, 11 पर FIR

मध्य प्रदेश के इंदौर के भंवरकुआँ थाने में सैंकड़ों लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। खबर है कि सेंट अर्नाल्ड रिलिजियस सेंटर (चर्च) में सैंकड़ों हिंदुओं को लालच देकर बुलाया गया और उसके बाद उनका धर्म-परिवर्तन करवाया जा रहा था। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए और उन्हें रोकते हुए पुलिस को मामले की सूचना दी।

रिपोर्ट के अनुसार, मामला भंवरकुआँ थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी का है। यहाँ सत्य प्रकाशन संचार केंद्र में लगभग 150 से अधिक लोगों को हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए बरगलाया जा रहा था। इसकी सूचना पाकर हिंदू संगठनों के लोगों ने मौके पर पहुँच कर जम कर प्रदर्शन किया।

दरअसल, हिन्दू संगठनों का आरोप है कि यहाँ 150 लोगों को धर्म-परिवर्तन कराने के लिए इकट्ठा किया गया था। इनके अनुसार झाबुआ, नागदा, देवास सहित इंदौर के चंदन नगर क्षेत्र से गरीब परिवारों को यहाँ लाकर जबरन धर्म-परिवर्तन करवाया जा रहा था।

आरोप लगे संस्था के फादर जोमोन का कहना है कि यह कम्युनिकेशन सेंटर है और धर्मांतरण से उनका कोई लेना देना नहीं है। उनके अनुसार वहाँ दो हॉल हैं, जहाँ प्रार्थना की जाती है। और वो इसे सार्वजनिक कार्य के लिए भी उपलब्ध करवाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जो भी ग्रुप वहाँ आया, उसने क्या किया, उनको जानकारी नहीं। हंगामा होने के बाद वो देखने आए।

जब पूरे मामले की सूचना पुलिस को लगी तो मौके पर पहुँच कर हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं को शांत किया और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें रवाना किया। कथित तौर पर भंवरकुआँ पुलिस ने मौके पर पहुँचकर 11 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इसमें से 9 लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। पुलिस पूरे मामले की तहकीकात में जुटी है।

धर्म-परिवर्तन को लेकर पीड़ितों ने कहा कि वो अपनी मर्जी से आए थे। बताया गया कि किसी भी प्रकार की समस्या वहाँ ठीक हो जाती है। एक महिला ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “प्रवचन करने से सारे बिगड़े काम बन जाते हैं, जो भी आएगा परमेश्वर के करीब… वह ठीक होकर जाएगा। यहाँ आकर गूंगे-बहरे सब ठीक हो जाते हैं।”

लाल किले में हुई हिंसा के मामले में 200 लोग हिरासत में: लूट, डकैती और हत्या की साजिश के आरोप में मुकदमा दर्ज

गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस ने 200 लोगों को हिरासत में ले लिया है। कहा जा रहा है जल्द ही इन सबको गिरफ्तार किया जाएगा। इससे पहले पुलिस ने इस संबंध में डकैती, लूट आपराधिक साजिश की कई धाराओं में केस दर्ज किया था। पूरे मामले पर क्राइम ब्रांच द्वारा जाँच की जाएगी।

बता दें कि किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान कल दिल्ली के लाल किले पर हुई हिंसा के संबंध में IPC की धारा 395 (डकैती), 397 (लूट या डकैती, मारने या चोट पहुँचाने की कोशिश), 120बी (आपराधिक साजिश की सजा) और अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज हुई है। यहाँ उपद्रवियों ने कब्जा करने के बाद काफी तोड़फोड़ मचाई थी और दिल्ली पुलिस के कर्मियों पर हमला किया था।

शांतिपूर्ण ट्रैक्टर परेड के नाम पर पूरे एक दिन के नाटक के चलते दिन के अंत तक 313 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई थी। बावजूद इसके किसान नेताओं ने यह गलती नहीं मानी। अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा,

”किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश लगातार चल रही थी। हमें डर था कि कोई साजिश कामयाब न हो जाए मगर आखिर में साजिश कामयाब हो गई। लाल किले में बिना किसी सांठगांठ के कोई नहीं पहुंच सकता। इसके लिए किसानों को बदनाम करना ठीक नहीं है।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पलवल में भी बैरीकेड तोड़कर सड़कों पर हाहाकार मचाने के लिए पुलिस ने 2000 से ज्यादा लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 186, 332, 353, 307, 427 और नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 8 के तहत केस दर्ज हुआ है। ये शिकायत गादपुरी थाने के हेड कॉन्सटेबल की शिकायत पर हुई है।

जाँच अधिकारी व सब इंस्पेक्टर हनीश खान ने बताया कि 350 से 400 ट्रैक्टरों पर सवार 2,000 से 2,200 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जो कल पुलिस अधिकारियों के साथ हिंसक हो गए, बैरिकेड और कंटेनर को तोड़ दिया। साथ ही गादपुरी में शीतला गाँव के पास 11.30 से 12 बजे के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लॉक किया।

उन्होंने बताया कि वह इस संबंध में जाँच कर रहे हैं और आरोपितों की पहचान होना अभी बाकी है। पुलिस के अनुसार, उपद्रवियों ने फरीदाबाद में घुसने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें सही समय पर समझा-बुझाकर रोक लिया। घटना के बाद फरीदाबाद में धारा 144 लगाई गई। साथ ही जिलाधिकारी ने आदेश दिया कि 5 या 5 से ज्यादा लोग, हाथ में डंडा, तलवार या किसी तरह का हथियार लिए बिलकुल नहीं घूम सकते हैं। आदेश के अनुसार, इन निर्देशों का पालन अगले निर्देश आने तक किया जाएगा।

1 Feb को संसद पर कब्जा, ‘खालिस्तानी’ झंडा फहराने वाले को 2.5 करोड़ रुपए: आतंकी संगठन SFJ का ऐलान

गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान आन्दोलनकारियों के लाल किले पर उपद्रव के बाद अब प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) ने आगामी 1 फरवरी को संसद पर कब्ज़ा और घेराव की धमकी दी है। इतना ही नहीं, खालिस्तानी संगठन SFJ ने लाल किले पर झंडा फहराने वाले व्यक्ति को $350,000 इनाम देने का भी एलान किया है। SFJ ने कनाडा से सात मिनट का एक वीडियो जारी करते हुए लाल किले पर ‘खालिस्तानी’ झंडा फहराने की बात भी स्वीकार की है।

1 फरवरी को संसद में बजट भी पेश किया जाना है। इस दौरान सभी लोगों की निगाहें समाचार चैनल्स पर रहेंगी। ऐसे में इसी दिन को संसद घेराव के लिए चुना गया है।

गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘किसान’ दंगाइयों ने ऐतिहासिक लाल किले पर सिखों के धार्मिक झंडे निशान साहब को फहरा दिया और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का अपमान भी किया। पूरे दिन ये तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया और समाचार चैनल्स पर छाई रहीं।

यही नहीं, दंगाइयों ने राम मंदिर और केदारनाथ मंदिर को निशाना बनाते हुए राम मंदिर की झाँकी के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया। दंगाइयों ने अयोध्या श्रीराम मंदिर की झाँकी के लिए बनाए गए राम मंदिर के गुम्बद को निशाना बनाकर उसे तोड़ दिया। ये दोनों झाँकी कल गणतंत्र दिवस की परेड में दिखाई गई थीं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में हुई हिंसा में एक्शन लेते हुए दिल्ली पुलिस ने करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। इन पर हिंसा करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने का आरोप लगा है।

मंगलवार को हुए इन ‘किसान दंगों’ में अब तक कुल 22 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस ने कहा कि वे सत्यापन करने के बाद गिरफ्तारी कर रहे हैं। दंगों में 230 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।

राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले और किसान विरोध स्थलों पर कई स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मंगलवार के दिन ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित मार्ग से दूर, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सीमाओं पर बैरिकेड्स को तोड़ दिया और पुलिस के साथ भिड़ गए। उन्होंने कई जगहों से दिल्ली में प्रवेश किया और गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर धावा बोल दिया।

‘स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट के बिना छूना यौन अपराध नहीं’ वाले बॉम्बे HC के फैसले पर SC ने लगाई रोक, आरोपित को नोटिस जारी

किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को बिना ‘स्किन टू स्किन’ कान्टैक्ट के छूने पर POCSO के तहत अपराध न मानने के हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। साथ ही भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने मामले के आरोपित को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब माँगा है।

बता दें कि यूथ बार असोसिएशन में बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाई कोर्ट के इस फैसले पर विवाद छिड़ गया था। हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को बिना ‘स्किन टू स्किन’ कॉन्टैक्ट के छूना POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आएगा बल्कि IPC की धारा 354 के तहत छेड़छाड़ का अपराध माना जाएगा।

हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने 19 जनवरी को पारित एक आदेश में कहा कि किसी हरकत को यौन हमला माने जाने के लिए ‘गंदी मंशा से त्वचा से त्वचा (स्किन टू स्किन) का संपर्क होना’ जरूरी है। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि महज छूना भर यौन हमले की परिभाषा में नहीं आता है। न्यायमूर्ति गनेडीवाला ने सेशन्स कोर्ट के फैसले में संशोधन किया था, जिसने 12 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न करने के लिए 39 वर्षीय व्यक्ति को तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यौन हमले की परिभाषा में शारीरिक संपर्क प्रत्यक्ष होना चाहिए या सीधा शारीरिक संपर्क होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “स्पष्ट रूप से अभियोजन की बात सही नहीं है कि आवेदक ने उसका टॉप हटाया और उसका ब्रेस्ट छुआ। इस तरह बिना पेनेट्रेशन के यौन मंशा से सीधा शारीरिक संपर्क नहीं हुआ।”

हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी महाराष्ट्र सरकार से इस मामले में अपील दायर करने के लिए कहा था। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने कहा था कि फैसले में ‘यौन इरादे से बिना किसी पेनेट्रेशन के स्किन टू स्किन’ की भी समीक्षा किए जाने की जरूरत है और राज्य को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए। यह फैसला इस मामले में नाबालिग पीड़िता के लिए अपमानजनक प्रतीत हो रहा है।

लाल किले के भीतर दंगाइयों का आंतक: चकनाचूर हुए काउंटर पर लगे शीशे, उखाड़ दिए गए रेलिंग व बैनर

दिल्ली के लाल किले पर गणतंत्र दिवस के दिन किसान दंगाइयों ने खूब उत्पात मचाया। न केवल तिरंगे का अपमान करते हुए उन्होंने वहाँ सिख झंडा किले से फहराया बल्कि अंदर भी काफी तोड़फोड़ की। आज घटना की अगली सुबह सारे नुकसान की तस्वीरें सामने आ गई हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा जारी तस्वीरों में देख सकते हैं। शीशे चकनाचूर पड़े हैं। काउंटर को पलट दिया गया है। सारी चीजें तितर-बितर हैं। एजेंसी का कहना है कि ये तस्वीर टिकट काउंटर, मेटल डिटेक्टर गेट की हैं। जहाँ टूटे शीशों के अलावा लाल किले में पुलिसकर्मियों की टोपियाँ भी पड़ी हैं।

न्यूज 18 के अनुसार, लाल किले में घुसी भीड़ ने उपद्रव के दौरान न केवल टिकट काउंटर को पूरी तरह फोड़ा। उन्होंने इसके साथ लगे बोर्डों को भी निकाल कर फेंक दिया। वहीं एसी और रेलिंग को उखाड़कर भी नीचे कर दिया गया है।

यहाँ मालूम हो कि किसान ट्रैक्टर रैली के बाद जहाँ लाल किला को काफी हानि पहुँची है, वहीं पूरे आयोजन का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। आज सुबह तक इस हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों की संख्या 109 हो गई है। दिल्ली पुलिस ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार ने कहा कि ट्रैक्टर रैली में पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

बता दें कि कल उपद्रवी किसानों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने रखे बैरिकेड्स को तोड़ने के साथ ही पुलिस वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। आईटीओ में कुछ प्रदर्शनकारी एक पुलिसकर्मी को निर्ममता से पीटते दिखे थे। इस बीच एक हिस्से ने उस पुलिसकर्मी को बचाया भी। दूसरी जगह ट्रैक्टर पर बैठे प्रदर्शनकारी ने पुलिसकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने कोशिश की थी। आईटीओ में खड़ी सरकारी बसों में तोड़फोड़ हुई थी। घोड़े पर बैठे निहंगों ने बैरिकेडिंग को तोड़ा था।

इस्लामी हो या खालिस्तानी… निशाना हिन्दू ही है: एक ही ट्रेंड को बार-बार देख कर भी केंद्र और SC शांत क्यों?

दिल्ली दंगों के दौरान महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी हुई थी। ‘किसान आंदोलन’ के दौरान हुई ट्रैक्टर रैली में महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। ‘दिल्ली दंगों’ में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। अब भी ये आँकड़ा 153 का है। तब भीड़ मुस्लिम बहुल इलाकों से निकली थी। अभी पंजाब से आकर बैठी हुई है। तब भी कॉन्ग्रेस उनके साथ थी, अब भी इनके साथ है। तब भी निशाना एक कानून था, अबकी निशाना 3 कानून हैं।

दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगे और खालिस्तानी आंदोलन: समानताएँ

तब भी कपिल मिश्रा को बलि का बकरा बनाने की कोशिश हुई थी। अब अपने में से ही एक का ‘त्याग’ कर के उसे भाजपा का आदमी बताया जा रहा है। तब हिन्दुओं के घर और दुकान जले थे। अब लाल किले पर खालिस्तानी झंडे फहराए गए। तब मीडिया ताहिर हुसैन के डॉक्टर्ड वीडियो के जरिए उसे निर्दोष साबित कर रहा था, आज मीडिया ये बताने में लगा है कि वो फलाँ झंडा था, उसका चिलाँ महत्व है।

तब इस्लामी चरमपंथी थे, अब खालिस्तानी चरमपंथी हैं। तब कोई शाहरुख़ खान पुलिस के सामने बंदूक लेकर खड़ा था, अब ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को तलवारों के दम पर खदेड़ा। तब भी फेक न्यूज़ फैला कर पुलिस को बदनाम किया गया। अब भी राजदीप सरदेसाई जैसों ने स्टंट करते हुए मरे किसान को पुलिस की गोली का शिकार बता दिया। तब भी योगेंद्र यादव थे, अब भी योगेंद्र यादव हैं।

चाहे वो भीमा-कोरेगाँव हिंसा हो, दिल्ली दंगे हो या फिर ‘किसानों’ द्वारा की गई हिंसा हो – वामपंथी, इस्लामी चरमपंथी और खालिस्तानी कट्टरवादी गैंग एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं, जो योगेंद्र यादव जैसे कई डोरों से बँधे हुए हैं। JNU में विकलांगों को आगे किया जाता है, जामिया में छात्रों को, भीमा-कोरेगाँव में दलितों को, दिल्ली दंगों में महिलाओं को और ‘किसान आंदोलन’ में बुजुर्ग सिखों को। पूरे आंदोलन को सही साबित करने के लिए ये इनका अनिवार्य पैटर्न है।

दिल्ली दंगों में दिखाया गया कि कैसे मुस्लिमों ने हिन्दुओं को बचाया। बेंगलुरु में मुस्लिम भीड़ उग्र हो जाती है तो उसे ह्यूमन चेन बनाते हुए दिखाया जाता है। इसी तरह अब खालिस्तानी आंदोलन में प्रदर्शनकारियों को एक एम्बुलेंस को रास्ते देते हुए दिखाया जा रहा है। तब हिन्दू विरोधी नारेबाजी और पोस्टरों का इस्तेमाल हुआ था, अब देश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान हुआ है। तब पूरे देश में कई शाहीन बाग़ बना दिए गए थे, अब पूरे देश में आंदोलन की तैयारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों को रोका, किसान संगठनों ने शुरू कर दिया नंगा नाच

तीनों कृषि कानूनों को चुनौती देते हुए कई याचिकाएँ दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करने से किसी को रोका नहीं जा सकता। किसान नेताओं के वकीलों ने CJI के सामने ही झूठे वादे किए। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने इन कानूनों पर रोक लगा दी, कमिटी गठित कर दी – लेकिन किसान नेताओं ने न्यायपालिका का सम्मान नहीं किया। कमिटी के एक सदस्य को इस्तीफा देना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कानूनों के लागू होने पर रोक लगा दी। फिर भी किसान कहते रहे कि उन्हें इन सब पर यकीन नहीं। असल में इनके दो धड़े होते हैं, जिसका खुलासा CAA विरोधी आंदोलन के समय ही हो गया था। एक धड़ा सड़क पर जम कर अराजकता फैलाता है और एक बड़े अधिवक्ताओं का समूह सुप्रीम कोर्ट में उनके बचाव के लिए खड़ा रहता है। सुप्रीम कोर्ट में वो जो कहते हैं, सड़क पर उसका उलटा करते हैं।

याद कीजिए दिसंबर 2020 के मध्य में जब दिल्ली में जामिया वाले दंगे कर रहे थे। जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दंगे कर के पुलिस को बदनाम किया। मामला सुप्रीम कोर्ट गया तो CJI बोबडे ने क्या कहा था? उन्होंने कहा था कि पहले दंगे बंद करो, पत्थरबाजी बंद करो, तब सुनवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट कह दिया था कि जब तक हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना बंद नहीं करेंगे, वो मामले को नहीं सुनेंगे।

उनका कहना था कि वो छात्र हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि वो कानून को अपने हाथ में ले लेंगे। अंतर क्या है? तब वो ‘छात्र’ थे, अब ‘किसान’ हैं। बार-बार सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका को अँधेरे में रख कर इस तरह की करतूतें की जाती हैं। दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर जैसे जनप्रतिनिधियों को ही कोर्ट में घसीट लिया गया था। आखिर क्या कारण है कि बार-बार यही ट्रेंड अपनाया जाता है और विधायिका व न्यायपालिका को पता नहीं चलता?

जब सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों को रोक दिया तो उसे किसानों को भी गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली न निकालने को कहना चाहिए था, ऐसा सोशल मीडिया पर भी लोगों का मानना था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए दिल्ली पुलिस को निर्णय लेने को कहा और पूछा कि क्या केंद्र सरकार को हम याद दिलाएँगे कि उनके पास शक्तियाँ हैं? शक्ति तो कानून बनाने की भी थी, लेकिन क्या हुआ? रोक लगी उस पर।

उपद्रवियों से खुद को अलग कर लेना, या भाजपा को जिम्मेदार ठहरा देना

JNU में जब वामपंथी छात्रों ने हॉस्टलों में घुस-घुस कर ABVP के छात्रों की पिटाई की थी, तब मीडिया में उन्हें ‘भाजपाई’ साबित करने के लिए एक अलग सी ही होड़ मच गई थी। मीडिया चैनलों ने नकाबपोशों से लेकर ऑडियो रिकॉर्डिंग्स तक निकाल कर दावा किया कि ये तो ABVP के ही छात्र थे, जो मास्क पहन कर लेफ्ट के छात्रों को पीट रहे थे। जबकि वास्तविकता साफ़ दिख रही थी कि अस्पतालों में भर्ती अधिकतर पीड़ित ABVP के हैं।

अब राकेश टिकैत कह रहे हैं कि दीप सिद्धू, जिसने लाल किला पर सिख झंडा फहराया और जिसके पीछे-पीछे सैकड़ों प्रदर्शनकारी उपद्रव करते हुए घूम रहे थे – वो भाजपा का आदमी है। इसके लिए तस्वीर शेयर की जा रही है कि वो भाजपा के फलाँ नेता के साथ दिखा था। तस्वीरें तो मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की भी ढेर सारी हैं साथ में। तो क्या ये दोनों किसी मेले में भटके हुए दो भाई हो गए?

तस्वीरें तो राकेश टिकैत की राजनाथ सिंह के साथ भी है। लेकिन, इसका मतलब ये थोड़े हुआ कि उनका रिमोट कंट्रोल देश के रक्षा मंत्री के हाथ में है! कुछ किसान नेता उपद्रवियों से पल्ला झाड़ रहे हैं, कुछ पुलिस पर आरोप लगा रहे, कुछ इसे देशव्यापी बनाना चाहते हैं, कुछ मीडिया फुटेज से खुश हैं तो कुछ अराजकता में अपनी राजनीतिक जमीन सींच रहे। हाल ही में गुरनाम चढूनी नामक किसान नेता पर कॉन्ग्रेस से 10 करोड़ रुपए लेने का आरोप लगा। साथी किसान नेताओं ने ही लगाया था।

कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर को दिल्ली दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले आज कह रहे हैं कि अरे केंद्र सरकार कानून वापस ले ही लेती तो क्या हो जाता? तब तो राम मंदिर, अनुच्छेद 370, तीन तलाक, CAA और कृषि कानूनों – इन सभी को वापस लेना पड़ेगा क्योंकि इन सबका विरोध करने वाले एक ही समूह के लोग थे। अराजकता का भय दिखा कर विकास नहीं होने दिया जाएगा। प्रधानमंत्री अपने आवास से निकलेंगे तो इसका भी विरोध होगा। तो क्या वो घर में बैठे रहेंगे?

दीप सिद्धू ने किस तरह से बरखा दत्त के शो में खालिस्तानी आतंकी भिंडरवाले का बचाव किया और उसे अपना नायक बताया, ये वीडियो सामने आ चुका है। ये सारे पत्रकार मिल कर चाहे इन हिंसक नेताओं पर कितनी भी सफेदी डालें, उनकी करतूतें दिख ही जा रही हैं। लाल किला में जिस तरह से पुलिसकर्मियों को दीवार फाँद-फाँद कर अपनी जान बचानी पड़ी, ये सबने देखा है। अब डैमेज कंट्रोल, पल्ला झाड़ना और भाजपा पर ब्लेम गेम नहीं चलेगा।

कोर वोटरों की भावनाओं का सम्मान करे केंद्र सरकार

जनता ने नरेंद्र मोदी को सिर्फ विकास के लिए नहीं चुना है। परमाणु परीक्षण हो, राजमार्गों का जाल बिछाना हो, कारगिल विजय हो या फिर सर्व शिक्षा अभियान हो – विकास वाजपेयी ने भी खूब किया था। भाजपा को देश की जनता ने, हिंदुओं ने, इसलिए भी लाया है ताकि हमारे इतिहास, हमारी संस्कृति और हमारी सनातन विरासत पुनर्जीवित हो। वामपंथी इतिहासकारों का वर्चस्व ख़त्म हो। फर्जी बुद्धिजीवी तेल लेने जाएँ।

यही जनता जब इस्लामी भीड़ को सड़कों पर सरेआम हिन्दुओं के घरों और दुकानों को जलाते हुए देखती है तो उसका विश्वास हिलता है। यही हिन्दू जब उन्हीं वामपंथी फर्जी बुद्धिजीवियों को नैरेटिव सेट करते हुए देखते हैं तो वो निराश होते हैं। यही मध्यम वर्ग जब किसी खास वर्ग को अराजकता के माध्यम से पूर्ण बहुमत वाली पार्टी को अपने सामने झुकाते हुए देखता है तो उसे अपने वोट की कीमत नगण्य लगती है।

आज लोग पूछ रहे हैं कि जब आम जनता को महीनों पहले से अंदाज़ा था कि ट्रेंड के हिसाब से राजधानी में अराजकता फैलाई जा सकती है, फिर नेताओं और अधिकारियों को इसकी आशंका न रही हो – ऐसा कैसे हो सकता है। आज लोग सवाल उठा रहे हैं कि खुलेआम अराजकतावादी और धमकी भरी बातें करने वाले कैसे खुले साँड़ बने हुए हैं? लोग जानना चाहते हैं कि आतंकवाद पर सख्त सरकार इन पिद्दियों से क्यों नहीं सख्ती से निपटती?

जनता देख रही है कि किसी गरीब ने मास्क नहीं लगाया तो उसे जुर्माना देना पड़ रहा है (जो उसकी जान बचाने के लिए जायज हो सकता है), लेकिन हजारों लोग बिना मास्क के महीनों बैठ जाते हैं और सारे कोरोना दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते, तो उनका कुछ नहीं उखड़ता। जनता देख रही है कि हेलमेट न होने पर हजारों फाइन लगता है लेकिन हजारों ट्रैक्टर विरोध के नाम पर निकलते हैं तो किसके पास कौन सा लाइसेंस है, कोई चेक तक नहीं करता।

‘केदारनाथ’ और ‘राम मंदिर’ पर किसान दंगाइयों का आतंक, 26 जनवरी परेड वाले मंदिर का गुंबद तोड़ा

राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘किसान’ दंगाइयों ने तिरंगा के अपमान के साथ ही राम मंदिर और केदारनाथ मंदिर को निशाना बनाते हुए राम मंदिर की झाँकी के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया। दंगाइयों ने अयोध्या श्रीराम मंदिर की झाँकी के लिए बनाए गए राम मंदिर के गुम्बद को निशाना बनाकर उसे तोड़ डाला। ये दोनों झाँकी कल गणतंत्र दिवस की परेड में दिखाई गई थीं।

समाचार चैनल ‘आज तक’ की एक रिपोर्ट में एक व्यक्ति इस बात की जानकारी दे रहा है। विकास का कहना है कि कल राम मंदिर की झाँकी एकदम सही हालत में यहाँ पर मौजूद थी, लेकिन दंगाइयों ने सुरक्षाकर्मियों के सामने ही केदारनाथ मंदिर की झाँकी को निशाना बनाया और राम मंदिर की प्रतिमा के ऊपर के गुंबद को तोड़ दिया। विकास ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह से मंदिर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त होने से बचाया।

वहीं, गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में हुई हिंसा में एक्शन लेते हुए दिल्ली पुलिस ने करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। इन पर हिंसा करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने का आरोप लगा है।

मंगलवार को हुए इन ‘किसान दंगों’ में अब तक कुल 22 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस ने कहा कि वे सत्यापन करने के बाद गिरफ्तारी कर रहे हैं। दंगों में 230 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।

राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले और किसान विरोध स्थलों पर कई स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मंगलवार के दिन ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित मार्ग से दूर, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सीमाओं पर बैरिकेड्स को तोड़ दिया और पुलिस के साथ भिड़ गए। उन्होंने कई जगहों से दिल्ली में प्रवेश किया और गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर धावा बोलते हुए तिरंगे का भी अपमान किया।

गणतंत्र दिवस की सुबह से ही किसानों का प्रदर्शन उग्र होता गया। इस बीच, दिल्ली के DDU मार्ग पर एक व्यक्ति की ट्रैक्टर पलटने के कारण मौत हो गई। आईटीओ के पास पूरे चौक पर सैकड़ों की संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर खड़े रहे। जिसे लेकर समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक और फेक न्यूज़ फैला दी और पोल खुलने पर अपना ट्वीट चुपके से डिलीट भी कर दिया।

‘गणतंत्र किसी के बाप की जागीर है, ट्रैक्टर रोके तो बकल उतार दिए जाएँगे, बैरिकेड्स तोड़ेंगे’: टिकैत और चढूनी ने खुलेआम दी थी धमकी

दीप सिंह सिद्धू तो खालिस्तानी समर्थक है ही और वो उस गिरोह का भी सदस्य है, जो ‘किसान आंदोलन’ के पीछे है और जिसे गणतंत्र दिवस के दिन ‘किसानों’ की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिन भर हिंसा की। एक दीप सिद्धू ही नहीं, बल्कि इसी गिरोह के कई नेता हैं जिन्होंने हिंसा की धमकी दी थी। किस-किस से पल्ला झाड़ेंगे? यहाँ हम 2 किसान नेताओं राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी के 2 धमकी भरे बयानों के बारे में बताएँगे, जिनसे पता चलता था कि गणतंत्र दिवस को क्या होने वाला है।

नीचे संलग्न किए गए वीडियो में टिकैत कहते सुनाई दे रहे हैं, “देश को गणतंत्र दिवस मनाने का अधिकार है। किसी के बाप की जागीर है गणतंत्र दिवस। ये गणतंत्र दिवस दुनिया का किसान मनाएगा। दुनिया की सबसे बड़ी परेड होगा। कौन रोकेगा किसान को। अगर ट्रैक्टर को रोका गया तो उसका इलाज होगा। अगर किसी ने रोका तो उसकी बकल उतार दी जाएगी। कौन रोकेगा ट्रैक्टर को? कोई नहीं रोकेगा। खबरदार जो किसी ने भी ट्रैक्टर को रोका। आप बकवास कर रहे हैं।”

वहीं एक बयान है गुरनाम सिंह चढूनी का। इसमें वो कहते हैं, “हमें बुलाने का मकसद क्या है? खाली तारीख देने के लिए बैठक बुलाती है सरकार। उन्होंने 15 तारीख को आने को कहा और 7 लोगों को ही लाने के लिए बोला। अब 7 जाएँगे कि 60, ये तो हम फैसला कर के ही बताएँगे। लेकिन, बात ये है कि सरकार कुछ मानने को तैयार नहीं है। सरकार जिद पर अड़ गई है। हम 26 तारीख को सरकार को चेतावनी देने वाले हैं।”

मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को प्रस्तावित हिंसा को लेकर उन्होंने तभी कहा था, “उस दिन हमने सभी किसानों से कहा है कि वो तैयारी कर के अपने ट्रैक्टरों के साथ आ जाएँ और हम सब जबरदस्ती पुलिस की बैरिकेड्स तोड़ कर दिल्ली में घुसेंगे। सरकार गोली मारे, लाठी मारे या जो करना है करे। लेकिन, ये फाइनल मैच होगा। उस दिन जो भी होगा, वो सरकार की जिम्मेदारी होगी। ये हमारी बात नहीं सुन रहे।”

किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि फ़रवरी 1, 2021 को जब देश की संसद में बजट पेश किया जा रहा होगा, तब वो फिर से संसद की तरफ मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को हुई जबरदस्त हिंसा के बावजूद ये योजना स्थगित नहीं की गई है। किसान नेता राकेश टिकैत ने खालिस्तानी समर्थक दीप सिद्धू से पल्ला झाड़ते हुए उसे भाजपा का कार्यकर्ता बता दिया है। हिंसा पर उन्होंने कहा कि गलती पुलिस की है।