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WhatsApp पर सरकार हुई सख्त, CEO को 4 पन्नों का पत्र लिख कर माँगा जवाब

व्हाट्सएप (Whatsapp) की नई प्राइवेसी पॉलिसी में यूजर्स के डेटा को फेसबुक के अन्य प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज से जोड़ने को लेकर लगातार बहस जारी है। आईटी मंत्रालय में फेसबुक के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Whatsapp की नई पॉलिसी के प्रभाव पर आंतरिक चर्चा (इंटर्नल डिस्कशंस) चल रही हैं। इस बीच, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मैसेजिंग ऐप की गोपनीयता नीति में हालिया बदलावों के बारे में व्हाट्सएप के सीईओ विल कैथार्ट को पत्र लिखते हुए नई नीतियों में बदलाव को वापस लेने का आदेश दिया है।

सरकारी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोबाइल मैसेंजर ऐप के सीईओ को कथित तौर पर गोपनीयता, डेटा ट्रांसफर और शेयरिंग पॉलिसी के बारे में सरकार के सवाल का जवाब देने के लिए कहा गया है। सरकार ने व्हाट्सएप के सीईओ को चार पन्नों का पत्र लिख कर जवाब माँगा है।

भारत सरकार ने Whatsapp को मैसेजिंग ऐप की गोपनीयता नीति में बदलावों को यह कहते हुए वापस लेने के लिए कहा है कि एकतरफा बदलाव उचित और स्वीकार्य नहीं हैं। पत्र में कहा गया है, व्हाट्सएप की सेवा और गोपनीयता नीति के प्रस्तावित बदलाव ‘भारतीय नागरिकों की पसंद और स्वायत्तता के लिए निहितार्थ के बारे में गंभीर चिंताएँ पैदा करते हैं।’ मंत्रालय ने व्हाट्सएप को प्रस्तावित बदलावों को वापस लेने और सूचना की गोपनीयता, पसंद और डेटा सुरक्षा की स्वतंत्रता पर अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने को कहा है।

यह कहते हुए कि भारतीयों का उचित सम्मान किया जाना चाहिए, उन्होंने कहा, “व्हाट्सएप की सेवा की शर्तें और गोपनीयता में कोई भी एकतरफा बदलाव उचित और स्वीकार्य नहीं होगा।” मंत्रालय ने यूजर्स की सूचना सुरक्षा की चिंताओं को उठाया क्योंकि व्हाट्सएप की नई नीति में अन्य फेसबुक कंपनियों के साथ बिजनेस अकाउंट के यूजर्स के मेटाडेटा को साझा करने का प्रस्ताव है।

विल कैथार्ट (Will Cathcart) को कड़े शब्‍दों में लिखे गए इस पत्र में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड इनफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी मिनिस्‍ट्री ने कहा है कि पूरी दुनिया में व्‍हाट्सएप के सबसे ज्‍यादा यूजर भारत में हैं और इसकी सेवाओं के लिए यह एक बहुत बड़ा बाजार है।

मंत्रालय ने आगे व्हाट्सएप के ‘ऑल-ऑर-नथिंग’ दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई, जो यूजर्स को नई सेवा शर्तों और गोपनीयता नीतियों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करता है। मंत्रालय ने व्हाट्सएप से पूछा है कि वे ऐसे महत्वपूर्ण बदलाव क्यों लेकर आए हैं जब भारत की संसद पहले से ही पर्सनल डेटा संरक्षण विधेयक पर विचार कर रही है।

यह विधेयक, जो संसद के दोनों सदनों की ज्वाइंट सेलेक्ट कमिटी द्वारा विचार के एक अग्रिम चरण पर है, डेटा प्रोसेसिंग के संबंध में ‘उद्देश्य सीमा’ (purpose limitation) के सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करता है। उद्देश्य सीमा का सीधा सा मतलब है कि कंपनियाँ केवल उसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए यूजर्स के डेटा का उपयोग कर सकती हैं, जिसके लिए उसने यूजर्स से सहमति ली है।

अन्य फेसबुक कंपनियों के साथ भारतीय यूजर्स के डेटा के इस व्यापक एकीकरण से व्हाट्सएप के लिए इस सिद्धांत का पालन करना मुश्किल हो जाएगा, अगर यह विधेयक जल्द ही कानून बन जाता है। मंत्रालय ने यूरोपीय संघ और भारत के लिए अलग गोपनीयता नीतियों पर भी आपत्ति जताई है।

पत्र में यह बताते हुए कि भारत में दुनिया में व्हाट्सएप का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता आधार है, कहा गया है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए यह भेदभावपूर्ण व्यवहार व्हाट्सएप द्वारा भारतीय नागरिकों के हितों के लिए सम्मान की कमी दर्शाता है। इस संदर्भ में, सरकार व्हाट्सएप को याद दिलाती है कि भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए उसके पास एक संप्रभु अधिकार है और वह किसी भी कीमत पर उससे समझौता नहीं करेगा।

भगवान राम के चित्र वाले बैनरों को हटाया, कचरा उठाने वाली गाड़ी में डाल कर ले गए: BJP ने दर्ज कराई शिकायत

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने औरंगाबाद पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद नगर निगम द्वारा नियुक्त कुछ ठेकेदारों ने भगवान राम के चित्र वाले बैनर हटा दिए है और उन्हें कचरा इकट्ठा करने वाले वाहन में ले जाया गया है। इससे धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं है।

आपको बता दें कि बीजेपी नेताओं ने इन्हीं बैनर्स के द्वारा श्री राम मंदिर के लिए चंदा एकत्रित करने की शुरुआत की थी, जिनका प्रशासन ने ये हश्र किया है। भाजपा के स्थानीय नेताओं का आरोप है कि उन बैनरों पर, अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के लिए चंदा एकत्र करने का आह्वान किया गया था, मगर आपसी मतभेद के चलते प्रशासन ये हथकंडे अपना रहा है। 

यह बैनर शहर के हिंदू राष्ट्र चौक, मल्हार चौक और अन्य इलाकों में लगाए गए थे। जिनका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ प्रभू के मंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्रित करना था, ना कि कोई प्रपंच करना। मगर प्रशासन ने इऩ्हें ना सिर्फ हटाया है बल्कि कचरा ढोने वाली गाड़ी में इन्हें ले जाकर हिंदूओं की धार्मिक भावनाएँ भी आहत की हैं। भाजपा नेताओं ने एक ज्ञापन में कहा, “इन बैनरों में कुछ भी उत्तेजक नहीं था, जिससे कोई विवाद पैदा होता।”

पुंडलिक नगर पुलिस स्टेशन के सहायक निरीक्षक घनश्याम सोनवणे ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि शिकायत का आवेदन मिला है। उन्होंने कहा, “तथ्यों की जाँच की जाएगी और उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।” 

औरंगाबाद के इन ठेकेदारों पर कार्रवाई की माँग तेज हो गई है। बीजेपी का कहना है कि भगवान राम हमारी आस्था के प्रतीक हैं। इसलिए ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भगवान के पोस्टर को इस तरह कूड़ा गाड़ी में ले जाने का मुद्दा गर्मा गया है। कार्यकर्ताओं ने ये भी कहा कि अगर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। 

गौरतलब है कि औरंगाबाद शहर का नाम बदलने को लेकर शिवसेना और कॉन्ग्रेस के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी (MVA) की सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में पार्टी सांसद संजय राउत ने कहा था, “कॉन्ग्रेस जैसी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों का विचार है कि औरंगाबाद को संभाजीनगर (Sambhaji Nagar) का नाम नहीं दिया जाना चाहिए।” 

राउत ने कहा कि औरंगजेब धर्मनिरपेक्ष नहीं था वो एक क्रूर प्रशासक था। वहीं इस पर पलटवार करते हुए कॉन्ग्रेस के बड़े नेता बाला साहेब थोराट ने कहा कि महाराष्ट्र और केंद्र में पिछले कई साल तक रहे लोग अब नाम बदलने को लेकर राजनीति कर रहे हैं।

जौहर यूनिवर्सिटी की 173 एकड़ जमीन हुई UP सरकार के नाम दर्ज, आजम खान को झटका

उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी सांसद आजम खान को एक बड़ा झटका मिला है। खबर है कि उनकी जौहर ट्रस्ट की 173 एकड़ (70 हेक्टेयर) जमीन यूपी सरकार के नाम दर्ज हो गई है। राजस्व अभिलेखों में जमीन से जौहर ट्रस्ट का नाम काट कर यूपी सरकार के नाम पर चढ़ा दिया गया है।

सपा सांसद आजम खान के ख़िलाफ़ 16 जनवरी 2021 को एडीएम प्रशासन जेपी गुप्ता के कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है। मौजूदा जानकारी के अनुसार अखिलेश सरकार में जौहर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन पर जौहर यूनिवर्सिटी बनी हुई है।

आरोप है कि इसकी खरीद के दौरान उचित शर्तों का पालन नहीं किया गया। बाद में इसी को आधार बनाकर भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयोजक आकाश सक्सेना द्वारा शिकायत की गई।। जाँच हुई तो आरोप सही पाए गए।

पूरे मामले पर एसडीएम कोर्ट में मुकदमा चला और 16 जनवरी को कोर्ट ने जमीन को सरकार को वापस देने का आदेश दिया। अतिरिक्त जिला सरकारी वकील (एडीजीसी-सिविल) अजय तिवारी ने कहा, “ट्रस्ट ने सरकारी आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें उन्हें सिर्फ इस शर्त के आधार पर 12 एकड़ से अधिक जमीन की खरीद की अनुमति दी थी गई कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।”

एडीजीसी ने कहा, “अदालत ने इससे पहले सीतापुर जेल में बंद ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान को नोटिस और समन जारी किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।”

बता दें कि अदालत के हालिया आदेश का पालन करते हुए एसडीएम सदर प्रवीण कुमार के इस फैसले के बाद साढ़े बारह एकड़ जमीन तो यूनिवर्सिटी के पास रहेगी, लेकिन करीब 173 एकड़ जमीन (70 हेक्टेयर) राज्य सरकार के नाम दर्ज की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आकाश सक्सेना का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में 1 साल पहले शिकायत की थी। इसमें उनका कहना था कि आजम खान की यूनिवर्सिटी में 173 एकड़ जमीन जो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जिन शर्तों पर दी गई थी, उनमें से किसी को भी पूरा नहीं किया गया। आजम खान द्वारा किसी भी शर्त का पालन नहीं किया गया। 

वह जाँच रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहते हैं कि जौहर ट्रस्‍ट की इस जमीन पर जौहर विश्वविद्यालय का काम चल रहा है, लेकिन पिछले दस सालों में चैरिटी का कोई कार्य न होने की बात भी सामने आई है।  उन्होंने माँग की थी कि, चूँकि एक बहुत बड़ा हिस्सा यूनिवर्सिटी का सरकार द्वारा निहित किया जा रहा है। ऐसे में अब यूनिवर्सिटी को टेकओवर कर लेना चाहिए।

इस्लामी रीति-रिवाज से दफनाने के लिए चाहिए आतंकियों की लाशें, पुलिस ने परिवार वालों से कहा – ‘सवाल ही नहीं उठता’

जम्मू कश्मीर पुलिस ने दिसंबर 30, 2020 को लावेपुरा में मारे गए तीनों आतंकियों के शवों को उनके परिवार को सौंपने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वो तीनों आतंकवादी से और इससे जुड़े सबूत जल्द ही उनके परिजनों के साथ साझा किया जाएगा। सोमवार (जनवरी 18, 2021) को इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) विजय कुमार ने ये जानकारी दी। तीनों को श्रीनगर के बाहर के इलाके लावेपुरा में एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था और उनके शव दफना दिए गए थे।

अतहर मुश्ताक, अज़ाज़ अहमद गनी और जुबैर अहमद लोन को 2 दिनों तक पुलिस ने घेर रखा था लेकिन बार-बार आत्मसमर्पण के लिए कहे जाने के बावजूद उन तीनों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसकी जवाबी कार्रवाई में वो मारे गए। तीनों के परिवार सशस्त्र बलों के दावों को नकार रहे हैं। पुलिस का कहना है कि वो न सिर्फ आतंकवादी थे, बल्कि आतंकियों की मदद भी कर रहे थे। अब तक पुलिस ने इससे जुड़े 60% सबूत इकट्ठे कर लिए हैं।

IGP ने बताया कि जब शत-प्रतिशत सबूत इकट्ठे कर लिए जाएँगे, फिर उनके परिजनों से उसे शेयर किया जाएगा। इन तीनों ने कैसे आतंक का रास्ता अपनाया और उनकी करतूतें क्या थीं, इन सब के बारे में परिजनों को जानकारी दी जाएगी। परिजन कह रहे हैं कि उन्हें इस्लामी रीति-रिवाज से दफनाने के लिए इन आतंकियों की लाशें चाहिए, लेकिन पुलिस ने कहा है कि उन्हें लाशें सौंपे जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

पुलिस ने कहा कि दफ़न करने की प्रक्रिया तो संपन्न हो गई है, वो भी इन तीनों के परिजनों के सामने। तीनों के माता-पिता, परिवार के अन्य सदस्य और मजिस्ट्रेट भी प्रक्रिया के समय मौजूद थे। सेंट्रल कश्मीर के सोनमर्ग स्थित एक कब्रिस्तान में तीनों को दफनाया गया था। कोरोना वायरस संक्रमण के सामने आने के बाद से ही परिवार वालों को मृत आतंकियों के शव दफनाने के लिए नहीं दिया जा रहा है।

IGP ने कहा कि कोरोना की समस्या घाटी में अब भी बनी हुई है। अगर किसी नागरिक की किसी वजह से मौत होती है तो उस मामले में कुछ निश्चित प्रोटोकॉल हैं, जिन्हें फॉलो किया जाता है। लेकिन, आतंकियों के मामले में अगर परिजनों को शव दे दिए जाते हैं तो हजारों की संख्या में लोग आ जुटते हैं, जो ठीक नहीं है। इसके बाद पुलिस को उन्हें रोकने में खासी दिक्कत आती है। पुलिस ने कहा कि दूरदर्शी हितों को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है।

अतहर मुश्ताक के अब्बा ने तो बेलौ गाँव में एक खाली कब्र भी खोद रखी है और उनका कहना है कि वो तब तक वहाँ बैठे रहेंगे, जब तक उनके बेटे की लाश उन्हें नहीं मिल जाती। पुलिस ने बताया है कि एनकाउंटर स्थल से एक असाल्ट राइफल और दो पिस्टल भी मिले हैं, लेकिन परिजन कह रहे हैं कि वो तीनों आम नागरिक थे। जम्मू कश्मीर में इससे पहले भी आतंकियों की ‘अंतिम यात्रा’ में लोगों का जुटान होता रहा है।

इससे पहले पुलिस ने 2 वीडियो जारी किए थे, जिनमें से एक दिसंबर 29 की शाम का है, जबकि एक उसके अगले दिन की सुबह का है। दोनों में ही पुलिस उन तीनों आतंकियों को चेतावनी देती ही दिख रही है, लेकिन उधर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है। आतंकियों ने जिस घर को अपना अड्डा बनाया था, उसे चारों तरफ से घेर लिया गया था। इतनी देर तक चेताए जाने के बावजूद उन्होंने फायरिंग की, जिसके बाद उन्हें मार गिराया गया।

कोहली बाहर, 6 खिलाड़ी चोटिल… फिर भी ऑस्ट्रेलिया में Aussies को हराया: भारतीय खिलाड़ियों ने ढाहा गाबा का किला

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई भारतीय टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। सलामी बल्लेबाज शुभमण गिल भले ही शतक से चूक गए और भारत की नई दीवार कहे जा रहे चेतेश्वर पुजारा ने अपनी करियर का सबसे धीमा अर्धशतक बनाया, लेकिन फिर भी भारत इस मैच को जीतने में कामयाब रहा। अंत में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत की शानदार बल्लेबाजी देखने को मिली और उनका साथ दिया अपना डेब्यू टेस्ट मैच खेल रहे वाशिंगटन सुंदर ने। इसके साथ ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया से ये टेस्ट सीरीज 2-1 से जीत ली।

इस सीरीज में शुभमण गिल ने भी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच में पहली बार कदम रखा था। जहाँ तक इस मैच की बात है, ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में मारनस लाबुशेन की शतक की मदद से 369 रनों का स्कोर खड़ा किया था। नटराजन और शार्दुल ठाकुर ने 3-3 विकेट लिए। भारत ने पहली बारी में शार्दुल और सुंदर के पचासों की मदद से 336 रन बनाए। हेजलवुड ने 5 विकेट लिए। लेकिन, दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया को भारत ने 394 पर समेट दिया।

इसका कारण रही मोहममद सिराज (5 विकेट) और शार्दुल ठाकुर (4 विकेट) की गेंदबाजी। स्टीव स्मिथ ने जरूर 55 रन बना कर ऑस्ट्रेलियाई पारी को सम्भालना चाहा, लेकिन उन्हें भी सिराज ने चलता किया। इस मैच में रोहित शर्मा ने कुछ अच्छे कैच लिए। वहीं बल्लेबाजी में वो खास कमाल नहीं दिखा सके। अंतिम पारी पूरी तरह युवा गिल और पंत के साथ-साथ पुजारा के नाम रही। अंत में भारत जीतने में कामयाब रहा। पंत ने नाबाद 89 रन बनाए।

ये सीरीज जीत तब आई है, जब ऑस्ट्रेलिया में भारत को तमाम मुश्किलों का समाना करना पड़ा। तीसरे टेस्ट मैच से पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन ने टीम इंडिया के क्रिकेटरों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा दिए थे, जिससे वो नाराज़ हो गए थे। ब्रिस्बेन में चौथे और अंतिम टेस्ट मैच से पहले सख्त क्वारंटाइन थोपे जाने से भारतीय क्रिकेटर आक्रोशित थे।

‘नेहरू ने चीनियों को तोहफे में दी थी अरुणाचल की भूमि’ – BJP चीफ जेपी नड्डा ने राहुल गाँधी को उन्हीं के सवाल पर घेरा

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी छुट्टियों से लौटने के बाद अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में चीन द्वारा गाँव बसाने के दावे वाली खबर को शेयर करके मंगलवार (जनवरी 19, 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन इस बीच उनका पूरा खेल उन्हीं पर उलटा पड़ गया और एक बार फिर सरेआम उनकी फजीहत हो गई।

हरिभूमि की एक खबर शेयर करते हुए राहुल गाँधी ने लिखा, “उनका वादा याद है- मैं देश नहीं झुकने दूँगा।” दिलचस्प बात यह है कि राहुल का यह ट्वीट ऐसे क्षेत्र को लेकर आया, जिस पर चीन ने नेहरू काल से कब्जा जमाया हुआ है।

उनकी इसी अज्ञानता के कारण ट्विटर पर यूजर तो उनका मजाक उड़ा ही रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने भी फ्रंट पर आकर राहुल गाँधी को आड़े हाथों लिया है। 

पार्टी के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल का पलटवार करते हुए दावा किया कि जिस जगह पर चीन द्वारा गाँव बसा लेने की बात की जा रही है, वहाँ चीन ने कॉन्ग्रेस के शासनकाल में कब्जा किया था। 

केंद्रीय मंत्री लिखते हैं, “अपने गिरेबान में भी झाँका करो कभी-कभी, किसी दूजे पर गर्द झाड़ देना आसां बहुत होता है! जिन लोकेशन्स का आप जिक्र कर रहे हैं उन पर चीन ने कॉन्ग्रेस के शासन काल में कब्जा किया था। एक राष्ट्रीय नेता संवेदनशील तथ्यों से इतना अनजान कैसे हो सकता है?”

उनके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी ट्विटर पर सिलसिलेवार कई सवाल राहुल गाँधी से पूछ डाले। उन्होंने कहा, “अब जब राहुल गाँधी अपनी मासिक छुट्टियों से लौट आए हैं तो मैं कुछ सवाल करना चाहता हूँ। मुझे उम्मीद है कि आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका जवाब देंगे।” 

जेपी नड्डा ने लिखा, “राहुल गाँधी, उनका वंश और कॉन्ग्रेस चीन पर झूठ बोलना कब बंद करेंगे? क्‍या वह इस बात से इनकार कर सकते हैं कि हजारों किलोमीटर भूमि, यहाँ तक कि अरुणाचल प्रदेश की जिस भूमि का वो जिक्र कर रहे हैं, वह किसी और ने नहीं, बल्कि खुद पंडित नेहरू ने चीनियों को तोहफे में दी थी? बार-बार कॉन्ग्रेस चीन के आगे आत्‍मसमर्पण क्‍यों कर देती है?”

अगले ट्वीट में वह कहते हैं, “क्‍या राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस पार्टी के चीन और उनकी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी से हुए एमओयू को खारिज करने की नीयत रखते हैं? क्‍या वह उनके परिवार के नियंत्रण वाले ट्रस्‍टों को चीन से मिले दान को लौटाने का इरादा रखते हैं? या फिर उनकी नीतियाँ और हरकतें चीनी पैसे और एमओयू से चलती रहेंगी?”

नड्डा ने चीन के अलावा कई और मुद्दों पर राहुल गाँधी से सवाल पूछे। उन्‍होंने लिखा, “राहुल गाँधी ने कोरोना को लेकर देश को हतोत्‍साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज जब भारत सबसे कम सक्रिय मामलों वाले देशों में है और हमारे वैज्ञानिकों ने वैक्‍सीन बना ली है तो उन्‍होंने वैज्ञानिकों को बधाई क्‍यों नहीं दी और एक बार भी 130 करोड़ भारतीयों की सराहना नहीं की?”

उन्होंने किसान आंदोलन में कॉन्ग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे झूठ पर पूर्व अध्यक्ष से सवाल पूछे। उन्होंने लिखा, “कॉन्ग्रेस भारत के किसानों को भड़काना और गुमराह करना कब बंद करेगी? यूपीए ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को सालों तक क्यों रोका और एमएसपी क्यों नहीं बढ़ाया? कॉन्ग्रेस सरकार के राज में दशकों तक किसान गरीबी में क्यों रहे? क्या उन्हें किसानों के प्रति सहानुभूति केवल विपक्ष में रहते हुए महसूस होती है?”

वह पूछते हैं, “राहुल गाँधी झूठ फैला रहे हैं कि सभी एपीएमसी मंडियों को बंद कर दिया जाएगा। लेकिन क्या एपीएमसी एक्ट को खत्म करना कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र का हिस्सा नहीं था? क्या उससे मंडी बंद नहीं होती?”

भाजपा अध्यक्ष आगे कहते हैं कि राहुल गाँधी ने तमिलनाडु में जल्लीकट्टू का आनंद लिया। जब सत्ता में थे, तब उनकी पार्टी ने इस पर प्रतिबंध लगाकर तमिल संस्कृति का अपमान क्यों किया। क्या उन्हें भारत की संस्कृति और लोकाचार पर गर्व नहीं है?

अपने इस सभी प्रश्नों को दाग कर नड्डा ने आखिर में कहा, “उम्मीद है कि राहुल गाँधी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन सभी सवालों के जवाब दे पाएँगे। अगर वह नहीं करते तो मैं अपने मेहनती मीडिया साथियों से अपील करता हूँ कि वह ये सवाल उनसे जरूर पूछें। ”

कुतुब मीनार किसने बनवाया? NCERT बिना सबूत के पढ़ा रही – ‘गुलाम वंश के सुल्तानों ने बनवाया’ – RTI से खुलासा

क़ुतुब मीनार परिसर के भीतर प्राचीन काल में कई मंदिरों के अस्तित्व की बात कुछ इतिहासकारों ने भी स्वीकार की है। आपने भी यही पढ़ा और सुना होगा कि कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने कुतुब मीनार को बनवाया था। NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) की पाठ्य पुस्तकों में भी छात्रों को यही पढ़ाया जा रहा है। इस मामले में लेखक नीरज अत्री ने एक RTI दायर की थी, जिसके जवाब चौंकाने वाले हैं।

उससे पहले जानते हैं कि NCERT की पुस्तक में लिखा क्या है। इसमें कुतुबमीनार की तस्वीर के साथ दिए गए विवरण में बताया गया है कि कुव्वतुल-इस्लाम मस्जिद और मीनार को 12वीं शताब्दी के अंत में बनवाया गया था। साथ ही लिखा है कि दिल्ली के सुल्तानों द्वारा बसाए गए पहले नगर का जश्न मनाने के लिए इसका निर्माण हुआ। आगे बताया गया है कि इसे इतिहास में दिल्ली-ए-कुहना नाम से जाना जाता है, जिसे हम आज पुरानी दिल्ली कहते हैं।

तत्पश्चात लिखा है कि इस ‘मस्जिद’ को कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाना शुरू किया था, जिसे मामलुक साम्राज्य के तीसरे सुल्तान इल्तुतमिश ने पूरा करवाया, जो ऐबक का दामाद था। साथ ही पुस्तक के उस पन्ने में मस्जिद क्या होता है और अरबी में इस शब्द का मतलब क्या है, ये सब समझाया गया है। खुत्बा-ए-जुमा के साथ-साथ नमाज पढ़ने के बारे में भी समझाया गया है। फिर मुहम्मद बिन तुगलक के बनवाए बेगमपुरी मस्जिद का जिक्र है।

इसके बाद ‘Brainwashed Republic: India’s Controlled Systemic Deracination’ नामक पुस्तक लिख चुके नीरज अत्री ने इस मामले में नवंबर 21, 2012 में एक RTI दायर की थी। इस पुस्तक में वो पहले ही पाठ्यक्रम में शामिल भारतीय इतिहास की पुस्तकों की पोल खोल चुके हैं। जिस पुस्तक की यहाँ बात हो रही है, वो NCERT की कक्षा-7 की पुस्तक (ISBN 81-7450-724-8) है, जिसका नाम ‘Our Past 2’ है।

इस पुस्तक के 36वें पेज पर ‘फिगर 2’ बता कर कुतुबमीनार का चित्र है और उपर्युक्त विवरण वहीं पर बाईं तरफ छपा हुआ है। नीरज अत्री का सवाल इस फैक्ट पर था कि इसे दिल्ली के दो सुल्तानों कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने बनवाया। उन्होंने इस मामले में 5 सवाल पूछे। क्या रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज या रेफेरेंस है, जिसके आधार पर ये निष्कर्ष निकाला गया कि कुतुबमीनार को इन्हीं दोनों सुल्तानों ने बनवाया था? अगर हाँ, तो कौन सा।

इसके जवाब में NCERT के RTI सेल द्वारा दिसम्बर 11, 2012 को दिए गए जवाब में कहा गया था कि ऐसी कोई सर्टिफाइड कॉपी या दस्तावेज उपलब्ध ही नहीं है। दूसरा सवाल था कि ऐसा कोई शिलालेख या पुरालेखिक सबूत भी है क्या, जिससे ये साबित होता हो? इसका जवाब भी ना में मिला। तीसरे सवाल में उन लोगों के नाम माँगे गए थे, जिनकी अनुशंसा के बाद पुस्तक के उक्त अंश को जोड़ा गया।

इसके जवाब में बताया गया कि सदस्यों, मुख्य सलाहकार, सलाहकार और अध्यक्ष के नाम पाठ्य पुस्तक में ही दिए गए हैं। इन तथ्यों का निरीक्षण कर के इन्हें पास किसने किया? इस चौथे प्रश्न का जवाब था कि प्रोफेसर मृणाल मिरि की अध्यक्षता वाली नेशनल मॉनिटरिंग कमिटी ने इसे अनुमति प्रदान की, जिसका जिक्र पुस्तक में भी है। अंतिम सवाल था कि इस तथ्य को लेकर कोई नोट्स हैं, जिसके जवाब में बताया गया कि विभाग की किसी फाइल्स में ऐसा कुछ भी नहीं है।

बता दें कि अत्री ने एनसीईआरटी में तथ्यों के साथ हुई कई छेड़छाड़ के लिए 100 से भी अधिक आरटीआई लगाई थी। उन्होंने एनसीईआरटी पुस्तकों के बारे में बताया था कि UPA सरकार के आने के बाद उसमें आर्य-द्रविड़ की थ्योरी परोसी गई, जिससे बच्चों के मन में गलत धारणाएँ बैठीं। अत्री ने ऑपइंडिया को बताया था कि भारत सबसे पुरानी सभ्यता है और हमारे पास गौरव करने के लिए इतनी चीजें हैं, फिर भी हम अकेले देश हैं जो अपने ही बच्चों का आत्मविश्वास ख़त्म करते हैं।

केरल में 17 साल की लड़की का 45 लोगों ने किया रेप, यौन शोषण: 32 FIR, 20 गिरफ्तार, पुलिस नहीं बता रही नाम

केरल के मलप्पुरम से एक चैंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 17 साल की एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया कि 45 लोगों ने उसके साथ रेप और यौन शोषण किया। इन सभी ने पिछले कुछ महीनों में पीड़िता के साथ इस तरह की करतूत की। पुलिस ने बताया है कि निर्भया सेंटर में पीड़िता की काउंसिलिंग की जा रही थी, जहाँ ये खुलासा हुआ। पुलिस ने सभी आरोपितों की तुरंत पहचान करने में कामयाबी पाई।

नाबालिग पीड़िता ने बताया है कि वो 2016 में जब सिर्फ 13 साल की ही थी, तब उसके साथ यौन शोषण की पहली घटना हुई थी। इसके एक वर्ष बाद फिर से उसके साथ उसी तरह की घटना घटी। दूसरी घटना के बाद उसे चाइल्ड केयर होम में भेज दिया गया। पिछले साल उसकी माँ और भाई उसे लेने आए, जिनके साथ उसे घर भेज दिया गया। सर्कल इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस मोहम्मद हनीफा इस मामले की जाँच कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि चाइल्ड केयर होम से निकलने के बाद लड़की कुछ दिनों तक गायब हो गई थी। कई महीनों तक चली खोजबीन के बाद पुलिस ने दिसंबर 2020 में उसे पलक्कड़ में बरामद किया, जहाँ से उसे निर्भया सेंटर लाया गया। काउंसिलिंग के लिए हुए कई सेशनों में उसने अपने साथ हुए बलात्कार और यौन शोषण की घटनाओं का खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

मल्लपुरम की बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष शाजेष भास्कर ने कहा कि संस्था ने ऐसे सभी वैध और तर्कपूर्ण कदम उठाए थे, जब उसे चाइल्ड केयर होम से 1 वर्ष पूर्व छोड़ा गया था। चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर के साथ हुई बैठक में किशोरी की सुरक्षा के लिए निर्णय लिया गया था – ऐसा प्रशासन का दावा है। ‘Juvenile Justice Act’ के तहत ही कदम उठाए गए थे, जिसमें पॉस्को पीड़िता को लेकर नियम बताए गए हैं।

इसमें कहा गया है कि ऐसी पीड़िता को अधिक दिनों तक संस्था में ही रखना अंतिम प्राथमिकता होनी चाहिए और उसे सुरक्षा व समाज में सम्मान दिलाने के लिए उसके माता-पिता के साथ ही भेजा जाना चाहिए। CWC का दावा है कि उसने पूरे विश्वास और सही इरादों के साथ फैसले लिए। लेकिन, उसका ये भी कहना है कि एक बार पीड़िता के परिवार के साथ जाने के बाद उसकी सुरक्षा को लेकर बने नियमों में कुछ गड़बड़ियाँ हैं। केरल के मलप्पुरम में नाबालिग के साथ इतनी संख्या में आरोपितों द्वारा रेप किए जाने का मामला सामने आने के बाद विपक्ष भी हमलावर है।

केरल स्थित मलप्पुरम के पंडीक्कड़ की पीड़िता का कहना है कि मार्च 2020 से लेकर अब तक 27 आरोपितों का उसका यौन शोषण किया। उससे पहले के भी कुछ मामलों को मिला कर अब तक पॉस्को एक्ट के तहत 32 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि इसमें लड़की का कोई परिजन या रिश्तेदार शामिल नहीं है। पुलिस ने आरोपितों के नाम बताने से भी इनकार कर दिया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पैरेंट्स के साथ भेजे जाने के बाद पीड़िता की सुरक्षा को लेकर कदम न उठाने के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।

सोहैल मंसूरी ने सन्नी बन 4 साल तक बनाया यौन संबंध, ‘शिव डोला’ में हुई थी पहली मुलाकात: MP में हुआ गिरफ्तार

मध्य प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ बने कानून के तहत बड़वानी में पहली गिरफ़्तारी हुई है। 22 वर्षीय युवती ने एक व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया था कि उसने छद्म हिन्दू नाम के साथ उसका यौन शोषण किया। आरोपित का नाम सोहैल मंसूरी (छद्म नाम सन्नी) है, जो शादीशुदा है। जब उसने पीड़िता पर जबरन इस्लामी धर्मांतरण के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तब इस मामले का खुलासा हुआ।

सोहैल मंसूरी ने सन्नी बन कर युवती के साथ दोस्ती की थी। उसके खिलाफ पुलिस ने मध्य प्रदेश के ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020’ के तहत मुकदमा दर्ज किया है। 4 वृष पूर्व बड़वानी के पलसूद में दोनों की मुलाकात हुई थी। ये जगह इंदौर से 170 किलोमीटर की दूरी पर है। युवती वहीं पर रहने लगी थी। सोहैल मंसूरी यूँ तो ड्राइवरी का काम करता था, लेकिन वो पार्टियों और कार्यक्रमों में संगीत भी बजाया करता था।

ऐसी ही एक पार्टी के दौरान उसकी मुलाकात युवती से हुई थी। उसने खुद को हिन्दू बताते हुए अपना नाम सन्नी बताया था। इसके बाद उनमें मोबाइल नंबरों का आदान-प्रदान हुआ और जल्द ही ये बातचीत दोस्ती में बदल गई। दोस्ती और गहरी हुई, जिसके बाद दोनों रिलेशनशिप में आ गए। पुलिस ने जानकारी दी है कि कई मौकों पर सोहैल मंसूरी ने पीड़िता के साथ शारीरिक सम्बन्ध भी स्थापित किए। अचानक से कुछ समय पहले उसने अपनी असली पहचान उजागर की थी।

इसके बाद वो जबरन इस्लामी धर्मांतरण के लिए पीड़िता पर दबाव बनाने लगा। वो कहता था कि अगर युवती ने इस्लाम नहीं अपनाया तो वो उसके साथ शादी ही नहीं करेगा। जब वो धर्मांतरण से इनकार करती थी तो आरोपित उसकी पिटाई करता था। सोहैल एक बच्चे का पिता भी है। उसे सोमवार (जनवरी 18, 2021) को गिरफ्तार कर लिया गया। केस को कोतवाली से पलसूद थाने में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

युवती की आरोपित से पहली मुलाकात अपने मामा के यहाँ ‘शिव डोला’ कार्यक्रम में हुई थी। 4 सालों के रिलेशनशिप के दौरान तीसरे साल में ही पीड़िता को उसकी सच्चाई पता चल गई थी, लेकिन उसने माफ़ी माँगते हुए शादी का वादा किया था। बाद में वो बदल गया। उसके शादीशुदा और 1 बच्चे का पिता होने की बात एक वर्ष पूर्व पता चली। जब युवती ने उससे सम्बन्ध तोड़ दिया तो वो धमकी और मारपीट पर उतर आया।

बता दें कि उमरिया में जन-जातीय गौरव सम्मान समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लव-जिहाद के मुद्दे पर आक्रोश दिखाया था। उन्होने कड़े शब्दों में कहा था, “मैं मध्यप्रदेश की धरती पर ‘लव जिहाद’ किसी भी कीमत पर नहीं चलने दूँगा। उसके लिए हम कानून बना रहे हैं। यह देश को तोड़ने का षड्यंत्र है, इसे किसी भी कीमत पर हम कामयाब नहीं होने देंगे।” यूपी में पहले ही ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई हो रही है।

‘अल्लाह का मजाक उड़ाने की है हिम्मत’ – तांडव के डायरेक्टर अली से कंगना रनौत ने पूछा, राजू श्रीवास्तव ने बनाया वीडियो

अमेजन प्राइम की विवादित सीरीज ‘तांडव’ पर मचे बवाल के बाद इसके मेकर्स ने लोगों की भावनाओं को आहत करने के लिए बिना शर्त माफी माँगी है। हालाँकि उनकी इस माफी का असर जनता पर खासा नहीं पड़ा बल्कि गुस्सा और ज्यादा भड़क गया। आम जनता के बाद अब बड़ी-बड़ी हस्तियों ने इस सीरीज के मेकर्स को घेरना शुरू किया है। 

कंगना रनौत ने सीरीज के मेकर्स से पूछा कि क्या उनमें ‘अल्लाह’ का मजाक बनाने की हिम्मत है? उन्होंने कपिल मिश्रा के ट्वीट को रीट्वीट करके लिखा, “माफी माँगने के लिए बचेगा कहाँ? ये सीधा गला काट देते हैं, जिहादी देश फतवा निकाल देते हैं, लिब्रु मीडिया वर्चुअल लिंचिंग कर देती है, तुम्हें ना सिर्फ़ जान से मार दिया जाएगा बल्कि उस मौत को भी जस्टिफ़ाई किया जाएगा, बोलो अली अब्बास जफर, है हिम्मत अल्लाह का मज़ाक़ उड़ाने की?”

इससे पहले बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने लिखा था, “अली अब्बास जफर, कभी अपने मजहब पर मूवी बनाकर माफी माँगिए। सारी अभिव्यक्ति की आज़ादी हमारे ही धर्म के साथ क्यों? कभी अपने एकमात्र ईष्ट का भद्दा मजाक उड़ा कर भी शर्मिंदा होइए। आपके अपराधों का हिसाब भारत का कानून करेगा, जहरीला कंटेट वापस लीजिए, तांडव को हटाना ही पड़ेगा।”

वहीं कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने वीडियो जारी करके कहा,  “मैं बहुत समय से कह रहा हूँ। ये हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ये किसी साजिश के तहत हिंदू धर्म को बदनाम किया जा रहा है। शर्म करो! डूब मरो! ऐसे फिल्म वालों, ऐसी वेब सीरीज बनाने वालों। हमारे हिंदू देवी देवताओं का मजाक उड़ाते हो। तुम्हें शर्म आनी चाहिए। अगर हिम्मत है तो दूसरे धर्म पर भी ऐसी कॉमेडी करो। लेकिन तुम नहीं करोगे। क्योंकि तुम्हारा सिर कलम कर दिया जाएगा।”

श्रीवास्तव कहते हैं, “हर बार वेबसीरीज में सैफ अली खान बार-बार ये हरकत करता है। उसे कोई रोकने वाला नहीं है। कोई कानून नहीं है। हिंदू धर्म में हर कोई सहिष्णु। हिंदुओं का दिल बड़ा होता है, माफ करते जा रहे हैं। क्षमा करते जा रहे हैं। अब समय आ गया है हिंदुओं जागो। तुम्हें जागना होगा। ये जो माँग हो रही है सीन को हटा दो… सीन को हटाने से काम नहीं चलेगा। तुम्हें कड़ी से कड़ी सजा देनी पड़ेगी। ऐसा कानून बनाना पड़ेगा कि दोबारा कोई ऐसी हरकत न करे।”

गौरतलब है कि तांडव वेब सीरीज को लेकर हुए विवाद के कारण इसके मेकर्स ने सोमवार को इस संबंध में माफी माँगी थी। लेकिन लोगों का गुस्सा और अधिक भड़ गया। इसमें अली अब्बास जफर ने लिखा था:

“वेब सीरीज तांडव एक फिक्शन है और अगर इसकी किसी भी व्यक्ति या घटना से समानता है तो यह पूरी तरह से संयोग है। किसी भी व्यक्ति, जाति, समुदाय, नस्ल, धर्म या धार्मिक विश्वासों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने या किसी संस्था, राजनीतिक दल या व्यक्ति का, जीवित या मृत का अपमान करने का इरादा नहीं था। तांडव के कास्ट और क्रू की तरफ से व्यक्त की गई चिताओं को संज्ञान लिया गया और बिना किसी भावनाओं को आहत किए और बिना शर्त माफ़ी माँग ली है।”

दूसरे पार्ट में उन्होंने उन आलोचनाओं का जिक्र किया है, जिसके लिए ‘तांडव’ को लेकर इतनी कॉन्ट्रोवर्सी है। अपने बयान में अली ने उन सभी लोगों से माफी माँगी है जिन्हें ये वेब सीरीज देखने के बाद इससे ऐतराज था। अली ने लिखा, “हम अपनी सीरीज तांडव को लेकर बहुत ही ध्यान से दर्शकों के रिएक्शन को नोटिस कर रहे थे और आज डिस्कशन के दौरान मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन और ब्रोडकास्टिंग ने हमें बताया कि इस सीरिज के जरिए लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं, जिसके लिए कई शिकायतें दर्ज हुई हैं।”