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‘राम मंदिर के लिए चंदा नहीं दोगे तो घर पर निशान और सरकार को सूचना’ – हिंदुओं को ऐसे बदनाम कर रहा गालीबाज पटनायक

आपने देखा होगा कि मोहल्ले में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें कोई काम नहीं होता। वो दूर से ही आपको ‘काँव-काँव’ कर के चिढ़ाएँगे और फिर भाग जाएँगे, क्योंकि उन्हें पता होता है कि उन्होंने जूता खाने वाला काम किया है। देवदत्त ‘नालायक’ पटनायक अब इसी श्रेणी में आ चुका है। उसने राम मंदिर और भगवान श्रीराम का नाम लेकर हिन्दुओं को बदनाम किया है। साथ ही वो अपनी ट्वीट्स की रिप्लाइज बंद कर के भी भागता फिर रहा है।

ट्विटर पर वामपंथियों की आजकल ये फेवरिट तकनीक है। कोई भी बात कह दो और रिप्लाइज ऑफ कर के भाग खड़े हो। खुद को रामायण और महाभारत से लेकर वेदों और उपनिषदों तक में पारंगत बताने वाला देवदत्त पटनायक भी लोगों के तर्कों का जवाब नहीं दे सकता, क्योंकि उसे भी पता है कि उसने बकलोली की है – इसीलिए, उसने एक फालतू बात कह दी और भाग गया। पता उसे भी है कि उसने गाली सुनने वाला काम किया है।

दरअसल, देवदत्त ‘नालायक’ ने दावा किया कि ‘हिंदुत्व’ भारत के हर घर से अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए धनराशि इकट्ठा कर रहा है। उसने आगे लिखा कि जो भी दान देने से इनकार कर देता है, उसके घर को चिह्नित कर लिया जाता है और सरकारी प्रशासन को इसकी सूचना दे दी जाती है। इसके बाद वो खुद ही पूछने लगा कि क्या ये सच है या फिर एक फेक न्यूज़ है? उसने लोगों से पूछा कि आप सब बताएँ।

उसने ‘Anyone?’ लिख कर लोगों से प्रतिक्रिया देने को तो कहा, लेकिन बेशर्मी और बौद्धिक स्तर की निम्नता की घोर हद देखिए कि उसने प्रतिक्रिया देने के विकल्प को ही बंद कर दिया। ‘Is this True? Shocking if True?’ वाला फॉर्मूला अब तक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ही अपनाते रहे हैं, जो हर ट्वीट्स को क्वोट कर के ये पूछा करते थे। सही हुआ तो एजेंडा मिल गया, गलत हुआ तो मैंने थोड़ी न सही बताया था। बस सवाल पूछा था।

इसी तरह देवदत्त पटनायक ने भी किया। अब मैं ट्वीट् कर दूँ कि ‘विकासदीप सरगोसाईं’ एक बिका हुआ पत्रकार है, जिसे सरकार के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाने के लिए दलाली मिलती है। इसके बाद मैं लिख दूँ कि पता नहीं ये सच है या झूठ… इससे ‘चित भी मेरी और पट भी मेरी’ वाली कहावत भी चरितार्थ होती है। कोई अदालती केस की भी संभावना ख़त्म हो जाती है। वामपंथी इस हथियार का अच्छा इस्तेमाल करते हैं।

सोशल मीडिया पर खुलेआम ‘माँ-बहन की गाली’ बकने के लिए कुख्यात देवदत्त पटनायक भी रुका नहीं और उसने इसके बाद एक तस्वीर शेयर की। इसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के लिए दिए गए ऐच्छिक दान का कूपन था। वो 1000 रुपए का था। इसी तरह से अलग-अलग कूपन उपलब्ध हैं और लोगों को इसकी रसीद भी दी जाती है। इस तस्वीर से देवदत्त पटनाटक के पिछले तर्क का कुछ लेना-देना नहीं था।

लेकिन, उसका बौद्धिक स्तर देखिए कि उसने दावा कर दिया कि इस कूपन से साबित होता है कि उसकी बात का पहला हिस्सा एकदम सही है। हिंदी कमजोर होने के कारण अंग्रेजी में हिन्दू ग्रंथों को उलटा-सीधा और आधा-अधूरा पढ़ कर अपनी मनमर्जी से उनके कंटेंट्स का दुष्प्रचार करने वाले देवदत्त पटनायक ने उस कूपन में हिंदी में लिखा ‘ऐच्छिक’ नहीं देखा, जिसका अर्थ है कि लोग अपनी स्वेच्छा से दान कर रहे हैं, इसमें कोई जोर-जबरदस्ती नहीं है।

इसके बाद उसने आशा जताई कि मीडिया कम से कम इस चीज की जाँच करेगा। ‘मीडिया ट्रायल’ के भरोसे वामपंथी कुछ ज्यादा ही रहते हैं। ये ऐसी चीज है जो ओसामा बिन लादेन को एक अच्छा पति, आतंकी रियाज़ नाइकू को गणित का शिक्षक और देवदत्त पटनाटक को ‘हिन्दू इतिहास का विशेषज्ञ’ बना देता है। इसके बाद वो पूछने लगा कि इस कूपन में माँ सीता क्यों नहीं हैं, सिर्फ राम ही क्यों हैं?

उसने इसके बाद इसे ‘टिपिकल हिंदुत्व’ का नाम दिया। आजकल भगवान राम का दशकों से विरोध करने वाले माँ सीता के झूठे भक्त बने हुए हैं। कल को पूछने लगेंगे कि इस तस्वीर में हनुमान जी क्यों नहीं हैं, क्या ये उनका अपमान नहीं। उसके बाद जामवंत, विभीषण और शत्रुघ्न भी उन्हें चाहिए होंगे। फिर सवाल उठेगा कि अयोध्या की जनता इस तस्वीर में क्यों नहीं, क्या श्रीराम और उनके भक्त अयोध्या की प्रजा को याद नहीं करना चाहते?

इस तरह से एक प्रोपेगंडा को ढकने के लिए एक सीरीज सी चल पड़ती है। ये होता है असली खबरें छिपाने के लिए। उज्जैन के महाकाल मंदिर के पास ही राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने निकले हिन्दुओं पर हमला होता है, पत्थरबाजी होती है। इस घटना को ढकने के लिए कुछ तो चाहिए? इसके 3 दिनों के भीतर इंदौर में हिन्दुओं को निशाना बनाया जाता है, क्योंकि वो राम मंदिर संकल्प निधि के लिए दान माँग रहे थे।

ऐसी घटनाओं पर कहीं जनता का ध्यान न चला जाए, इसीलिए ये कुचक्र रचा जाता है। गुजरात में एक ही दिन में दो-दो जगह ऐसी घटनाएँ होती हैं। कच्छ स्थित गाँधीधाम के किदाना में दंगे जैसे हालात बना दिए जाते हैं, हिंसा और आगजनी में पुलिसकर्मियों तक को नहीं बख्शा जाता। महाराष्ट्र में मुंबई पुलिस दान के लिए इस्तेमाल किए जाए रहे पोस्टर्स ही फाड़ डालती है। इन सब पर लिबरल गैंग चुप रहता है और इन्हें छिपाने की कोशिश करता है।

इन वास्तविक हिन्दूफोबिया से ग्रसित घटनाओं पर पर्दा डालने के लिए कभी पूछा जाता है कि तस्वीर में राम के साथ सीता क्यों नहीं हैं, तो कभी दावा किया जाता है कि चन्दा न देने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। अगर ऐसा होता तो मसूरी के महमूद हसन घर की माली हालत ठीक न होने के बावजूद ये कह कर राम मंदिर के लिए 1100 रुपए नहीं देते कि मुसीबत के समय हिन्दू ही काम आते हैं। लेकिन, ‘नालायक’ जैसों का कहना है कि इन सबके लिए मजबूर किया जा रहा।

देवदत्त पटनायक को अब सोशल मीडिया पर पड़ने वाली गालियाँ भी काम नहीं आ रही है, इसीलिए वो भगोड़ा अब इस तरह की बातें कर रहा है। जहाँ तक माँ सीता की बात है, नेपाल में जनकनंदिनी का भव्य मंदिर है, जहाँ की वो राजकुमारी थीं। वहाँ उन्हें मंदिर के लिए अयोध्या की तरह इंतजार नहीं करना पड़ा। सीतामढ़ी के पुनौरा में उनका जन्मस्थान माना जाता है और वहाँ मंदिर है। क्या ये ‘नालायक’ कभी वहाँ दर्शन करने गया, जो आज उनका भक्त बन कर प्रोपेगंडा फैला रहा है?

इनके लिए आज सबसे बड़ी समस्या ये आन खड़ी हुई है हिन्दू आज एक है और अपनी क्षमता का हर तरह से प्रदर्शन कर रहा है। राम मंदिर के लिए मात्र 2 दिन में 100 करोड़ रुपए जमा हो गए। पीएम केयर्स फण्ड में लोगों ने बढ़-चढ़ कर योगदान दिया। ये सब इन छद्म बुद्धिजीवियों से देखा नहीं जा रहा, इसीलिए वो बिलबिलाए हुए हैं। हिन्दुओं की ये एकता उनके शरीर में जगह-जगह चिकोटी काट रही है।

भारत के गौरव ‘मियाँ भाई’ सिराज: पिता नहीं देख सके गौरवशाली क्षण को

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ब्रिस्बेन में खेले जा रहे चौथे टेस्ट मैच में गेंदबाजी आक्रमण का नेतृत्व सम्भाल रहे छब्बीस वर्षीय मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) के ऑस्ट्रेलिया पहुँचने के कुछ दिन बाद ही उनके पिता का देहांत हो गया और वो अपने बेटे को टेस्ट क्रिकेट खेलते हुए नहीं देख सके।

‘मियाँ भाई’ सिराज क्वॉरंटीन की शर्तों के कारण अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए। ऑटो चालक पिता ने सपना देखा था कि उनका बेटा भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेले। सपना पूरा होने ही जा रहा था, लेकिन तभी ‘मियाँ भाई’ के पिता का निधन हो गया। 

सिराज ने दूसरी पारी में 05 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की टीम को महज 294 रन पर समेट दिया और अपने करियर की पहली सीरीज में तीन मैचों में 13 विकेट लेने के बाद मोहम्मद सिराज ने लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली है।

‘बॉर्डर-गावस्कर सीरीज’ मैच के दूसरे मैच में उन्होंने डेब्यू किया। मेलबर्न उनके करियर का पहला मुकाबला था। राष्ट्रगान के समय मोहम्मद सिराज की आँखों छलक पड़ीं, यह निश्चित ही उनके लिए भावुक पल था।

ब्रिसबेन में 05 विकेट लेने के बाद जब मोहम्मद सिराज से पूछा गया कि इतने भावुक दौरे पर सफलता हासिल कर वो कैसा महूसस कर रहे हैं, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, “मैं भगवान का शुक्रिया करना चाहता हूँ कि मुझे खेलने का मौका मिला। यह मेरे पिता की इच्छा थी कि उनका बेटा खेले और पूरी दुनिया उसे देखे। काश वह होते और देख पाते तो वह काफी खुश होते। यह उनका आशीर्वाद है कि मैं 5 विकेट ले पाया। मेरे पास इसे बयान करने के लिए शब्द नहीं हैं।”

भारतीय गेंदबाज ने कहा था कि उनके पिता ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत की और वही उनके प्रेरणास्रोत थे। सिराज ने कहा कि वो अपने पिता की इच्छा पूरी करेंगे। सीरीज के आखिरी मैच तक वो टीम इण्डिया के सीनियर बॉलर बन चुके हैं।

आईपीएल खेलते समय वो अपने पिता के स्वास्थ्य के लिए अक्सर चिंतित रहे। सिराज के पिता के फेफड़े खराब हालत में थे और अक्सर अस्पताल में ही रहे। सिराज ने एक बार यह भी बयान दिया था कि जब भी उन्हें घर बुलाया जाता है वो टूट जाते हैं और अगर उनके पिता अस्पताल से बाहर होते, तो वे बेहतर महसूस करते और अपने क्रिकेट का अधिक आनंद लेते।

सिराज के पिता का देहांत हुआ और वो उनके अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो सके। लेकिन अगर वो ऐसा करते तो शायद वो अपने पिता का ही सपना तोड़ बैठते। सिराज के पिता बस यही चाहते थे कि वो टेस्ट क्रिकेट खेलें। सिराज ने यही किया और आज उन्हें इसके लिए बड़े स्तर पर सराहा जा रहा है।

परमार वंश के राजमहल पर ‘निजी सम्पत्ति’ का बोर्ड लगाने वाले काजी पर जुर्माना, जगह खाली करने का आदेश

हाल ही में मध्य प्रदेश के विदिशा जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर प्राचीन उदयपुर नगर में तकरीबन एक हजार साल पुराने परमार वंश के राजमहल पर लगे ‘निजी सम्पत्ति’ वाले बोर्ड को प्रशासन द्वारा हटा दिया गया था। अब इस मामले में ‘निजी सम्पत्ति’ का बोर्ड लगाने वाले मोहम्मद काजी सैयद इरफान अली (पुत्र- काजी सैयद मुबारिक अली) को न्यायालय नायब तहसीलदार की तरफ से आदेश जारी किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि शासकीय भूमि पर बेवजह कब्जा करने एवं भूमि अपने दखल में रखने के कारण सैयद इरफान अली को उक्त भूमि ग्राम उदयपुर के खसरा संख्या 822, रकबा 0795 में से 20 बाई 40 वर्गफीट से बेदखल किया जाता है। इसके साथ ही उसके ऊपर धारा 248 (1) के तहत 5000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यह आदेश 15 जनवरी 2021 को जारी किया गया। 

मोहम्मद काजी सैयद इरफान अली को जारी आदेश

आदेश में कहा गया है कि एक सप्ताह के भीतर यानी कि 22 जनवरी 2021 के पहले उक्त भूमि से अपना कब्जा हटा लें। उक्त भूमि पर किसी भी तरह का कोई भी सामान, असबाब या संरचना आदि नहीं होना चाहिए और जुर्माना न्यायालय में जमा करने के लिए निर्देशित किया गया है। ऐसे नहीं होने पर कब्जा बल पूर्वक हटाने एवं जुर्माना की राशि भू-राजस्व के बकाया की भाँति वसूलने की बात कही गई है।

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि अगर निश्चित समय सीमा के भीतर जमीन पर से कब्जा नहीं हटाया जाता है तो भूमि में स्थित फसल, निर्माण या भवन अधिग्रहित कर लिया जाएगा एवं न्यायालय के विवेक अधिकार से धारा 248 (1) के तहत निपटारा किया जाएगा। अगर निर्धारित तारीख के बाद भी भूमि पर दखल जारी रहा तो 23 जनवरी 2021 से 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही यदि बेदखली आदेश के समय सीमा के भीतर अप्राधिकृत कब्जा नहीं हटाया गया तो उस पर धारा 248 (2ए) के तहत सिविल जेल की कार्यवाही प्रस्तावित की जाएँगी।

गौरतलब है कि प्राचीन विरासत से जुड़े इस महल में मदरसा चलते हुए पाया गया था। यही नहीं, इस पर ‘निजी संपत्ति’ का बोर्ड लगाने वाले एक काजी ने यहाँ तक दावा किया कि यह एक हजार साल पुराना ना होकर चार सौ साल पुराना है, जिसका निर्माण उसके पूर्वजों द्वारा पूरा कराया गया था। काजी के अनुसार, जहाँगीर और शाहजहाँ ने उसके परिवार के नाम यह संपत्ति कर डाली थी।

सोशल मीडिया पर इस विषय के उछलने के बाद तहसीलदार इस महल में पहुँचे और उन्होंने एक्शन लेते हुए महल से उस बोर्ड को हटा दिया, जिसमें इसे काजी की निजी सम्पत्ति बताया गया था। तहसीलदार का कहना था, “यहाँ किसी ने निजी सम्पत्ति के नाम से बोर्ड लगा दिया था। यह एरिया उदयपुर ग्राम के खसरा संख्या- 822 में करीब साढ़े तीन बीघा जमीन पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है। इसी वजह से हम लोग आए और हमने ये बोर्ड हटवा है।”

इस महल का पूरा इतिहास ऑपइंडिया पर आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं

‘उसने पैंट से लिंग निकाला और मुझे फील करने को कहा’: साजिद खान पर शर्लिन चोपड़ा ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

यौन शोषण के आरोपित व बॉलीवुड फिल्म निर्माता साजिद खान के ख़िलाफ़ एक बार फिर सोशल मीडिया पर आवाज उठनी शुरू हो गई है। अब इसी कड़ी में अभिनेत्री-मॉडल शर्लिन चोपड़ा ने फिल्म मेकर फराह खान के भाई साजिद खान पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि 2006 में जब वह उनसे मिलने गई थी, तो साजिद खान ने लिंग (penis) को पैंट से बाहर निकाला और उनसे ‘फील करने’ के लिए कहा। शर्लिन चोपड़ा ने बताया कि यह घटना उनके पिता की मौत के कुछ दिनों के बाद की ही है।

2018 में जब भारत में #MeToo कैंपेन ने जोर पकड़ा था, तब कई महिलाओं ने साजिद खान पर सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया था। इनमें एक्ट्रेसेस सलोनी चोपड़ा, राचेल व्हाइट, आहाना कुमरा, मंदाना करीमी, मॉडल पाउला और एक पत्रकार शामिल थी। पत्रकार ने उन पर 2018 में एक साक्षात्कार के दौरान उनके सामने अपना लिंग बाहर निकालने और छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। 

आहाना कुमरा ने बताया कि साजिद ने मुलाकात के बाद उन्हें मैसेज किया था, “ओह! तुम बिकनी में भी हॉट लग सकती हो।” मुलाकात के दौरान साजिद ने आहाना से एक और अजीब सवाल पूछा था, “अगर मैं तुम्हें ‘100 करोड़’ दूँ तो क्या तुम कुत्ते के साथ सेक्स करोगी?” इसके साथ ही उन्होंने और भी बहुत कुछ बताया, जब साजिद ने आहाना को अनकंफर्टेबल फील करवाया।

गौरतलब है कि दिवंगत एक्ट्रेस जिया खान की जिंदगी पर बनी डॉक्युमेंट्री ‘डेथ इन बॉलीवुड’ हाल ही में यूके में रिलीज की गई। BBC 2 पर आई इस डॉक्यूमेंट्री के दूसरे एपिसोड में जिया की बहन करिश्मा ने डायरेक्टर साजिद खान पर एक्ट्रेस के सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया है। करिश्मा के मुताबिक, अपने साथ हुए इस दुर्व्यवहार के बाद जिया घर आकर खूब रोई थीं। इतना ही नहीं, करिश्मा के मुताबिक साजिद ने उनका फायदा उठाने की कोशिश भी की थी।

डॉक्यूमेंट्री की एक वीडियो क्लिप में करिश्मा कह रही हैं, “रिहर्सल चल रही थी। वह (जिया) स्क्रिप्ट पढ़ रही थी और उसने (साजिद खान) उसे टॉप और ब्रा उतारने के लिए कहा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। उसने कहा कि अभी तो फिल्म शुरू भी नहीं हुई है और यह सब हो रहा है। वह घर आ गई और खूब रोई थी। उसका कहना था कि उनके पास कॉन्ट्रैक्ट है। अगर मैंने छोड़ा तो मुझ पर मुकदमा होगा। अगर नहीं छोड़ा तो मेरा यौन उत्पीड़न होगा। हर स्थिति हारने वाली है।” करिश्मा ने कहा कि जब वह महज 16 साल की थी तभी साजिद खान ने उनका यौन उत्पीड़न किया था।

टीकाकरण का योगी मॉडल: सर्वाधिक हेल्थ वर्कर्स को कोरोना वैक्सीन, 18 करोड़ लोगों तक पहुँची सर्विलांस टीम

कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत से लेकर इसके टीकाकरण अभियान तक में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की तत्परता लोगों के बीच चर्चा का विषय रही और इसी कारण सीएम योगी की कार्यकुशलता की भी जमकर सराहना हुई है।

16 जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण अभियान के बाद योगी आदित्‍यनाथ ने कोरोना वायरस के विरूद्ध सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरूआत कर प्रदेशवासियों को राहत पहुँचाई है। सबसे बड़े राज्‍य उत्‍तर प्रदेश में टीकाकरण अभियान की शुरूआत प्रदेश के 75 जनपदों के 317 स्‍थानों में 16 जनवरी से की गई, जिसके तहत टीका लगवाने वालों में सबसे ज्‍यादा उत्‍तर प्रदेश के 22,643 स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी शामिल हुए। उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को कहा कि राज्य के बाकी स्वास्थ्य कर्मियों को 22 जनवरी तक कोविड-19 टीके लग जाएँगे।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने न सिर्फ सर्वाधिक स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों का टीकाकरण कर दूसरे राज्‍यों के सामने मिसाल पेश की है, बल्कि कोरोना काल में सबसे ज्‍यादा Covid-19 परिक्षण करने वाले उत्‍तर प्रदेश में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और ‘सर्विलांस’ के जरिए कोरोना वायरस की चेन को तोड़ वायरस पर काबू पाने में भी सफलता हासिल की। यह भी एक रिकॉर्ड है कि 24 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में सर्विलांस टीमें 18 करोड़ आबादी तक पहुँच चुकी हैं।

गौरतलब है कि टीकाकरण अभियान के तहत सबसे ज्‍यादा टीकाकरण उत्‍तर प्रदेश में किए गए हैं। प्रदेश में ग्रुप टेस्टिंग, कोल्‍ड चेन, हेल्‍पडेस्‍क, कांटेक्‍ट ट्रेसिंग, टीकाकरण के जरिए कोरोना को मात दी जा रही है।

यूपी में सक्रिय कोरोना मामलों में तेजी से आई गिरावट

उत्तर प्रदेश में जहाँ मार्च से अब तक 5,96,904 कुल कोरोना पॉजिटिव केस मिले, वहीं प्रदेश में कोविड की रोकथाम के लिए लागू की गई रणनीति से सक्रिय केसों मे तेजी से गिरावट आई है। अब यूपी में कोरोना के 8,000 से भी कम सक्रिय कोरोना केस हैं और ये आँकड़ें लगातार गिरावट की ओर हैं। राज्य में संक्रमण के बाद स्‍वस्‍थ होने वाले मरीजों की दर अब 97.70 प्रतिशत हो गई है।

प्रदेश में रोजाना 1.5 लाख कोरोना टेस्‍ट किए जा रहे हैं। स्‍वास्‍थ्‍य महानिदेशक डॉ डीएस नेगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश ने कोरोना महामारी के नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। जिसके सकारात्‍मक परिणाम अब प्रदेश में देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना के मामलों में अब गिरावट आई है जो मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के कुशल नेतृत्‍व में सभंव हुआ है।

यूपी में दो दिन लगेगा कोरोना का टीका

उत्‍तर प्रदेश में वैक्‍सीन लगाने के दिन तय कर लिए गए हैं। राज्य में बृहस्पतिवार और शुक्रवार को टीकाकरण किया जाएगा। प्रदेश के शेष स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों का टीकाकरण 22 जनवरी को किया जाएगा। योगी सरकार ने न सिर्फ कोरोना पर वार किया बल्कि ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस के नए स्‍ट्रेन की जाँच भी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में शुरू कर दी गई है।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने उत्तर प्रदेश की रणनीति को सराहा

देश में सबसे ज्‍यादा जनसंख्‍या वाले उत्‍तर प्रदेश राज्य के सीएम योगी आदित्‍यनाथ के कोविड मॉडल की सराहना विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) भी कर चुका है। डब्‍ल्‍यूएचओ ने उत्‍तर प्रदेश की कोविड मैनेजमेंट रणनीति को सराहते हुए कहा था कि योगी सरकार की रणनीति प्रदेश में कोविड की रोकथाम करने में कारगार रही।

अब हार्वर्ड से भीम आर्मी वाले रावण को आई चिट्ठी, सच्ची में; खुद पढ़कर देख लीजिए

NDTV की पूर्व एंकर निधि राजदान के ‘हार्वर्ड काण्ड’ के बाद अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) एक बार फिर ख़बरों में है। आजाद समाज पार्टी प्रमुख और भीम आर्मी संस्थापक चन्द्र शेखर आज़ाद उर्फ़ ‘रावण’ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वार्षिक आल इंडिया कॉन्फ्रेंस में बतौर गेस्ट ‘एंटी कास्ट स्ट्रगल’ (Anti Caste Struggle) पर व्याख्यान देने जा रहे हैं।

अपने आधिकारिक ट्विटर पेज पर इसकी जानकारी देते हुए ‘भीम आर्मी’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुजनों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अपने नेता चंद्रशेखर को दिली बधाई भी दी है। चंद्रशेखर का हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में यह कार्यक्रम फरवरी 21, 2021की शाम रखा गया है।

गौरतलब है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी कुछ ही दिन पहले से चर्चा का विषय बनी हुई है। इक्कीस वर्षों तक प्रोपेगेंडा समाचार चैनल एनडीटीवी की एंकर रही निधि राजदान ने अपने ट्विटर अकाउंट से खुलासा किया कि उनके साथ ‘साइबर फ्रॉड’ हुआ।

निधि राजदान ने लिखा कि जून, 2020 में ट्विटर पर घोषणा की थी कि उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) में असोसिएट प्रफेसर की जॉब मिल गई है, जिस कारण उन्होंने पत्रकारिता के अपने 21 साल के करियर को अलविदा कह दिया। लेकिन कुछ ही दिन पहले उन्हें आभास हुआ कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की यह हायरिंग बस एक फिशिंग हमले का हिस्सा था।

उन्होंने बताया कि वह ज्वाइनिंग का समय पहले सितंबर 2020 मानकर चल रही थीं और अपनी नई जिम्मेदारियों को उठाने की तैयारी कर रही थीं। बाद में उन्हें कहा गया कि जनवरी 2021 में उनकी क्लास शुरू होगी। धीरे-धीरे उन्हें हर चीज इतना डिले होने पर असामान्य लगना शुरू हुआ। शुरूआत में वह महामारी के कारण सब चीजों को नजर अंदाज करती रहीं लेकिन हाल ही में उन्हें इन चीजों को लेकर शक गहराया और उन्होंने यूनिवर्सिटी के शीर्ष प्रशासन से संपर्क किया।

बाद में यूनिवर्सिटी के अनुरोध पर निधि की ओर से हर वह प्रमाण पेश किए गए जिसे देख वह सोच रहीं थीं कि उन्हें यह सब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से मिल रहा है। आखिर में उन्हें पता चला कि वास्तविकता में हार्वर्ड ने उन्हें प्रोफेसर बनने के लिए कोई ऑफर भेजा ही नहीं बल्कि वह तो एक तरह के ऑनलाइन हमले का शिकार हुईं।

‘तांडव’ की हिंदूघृणा पर अगर ये माफी है तो इसकी पुड़िया बना कर स्थान विशेष में रख लो अली अब्बास

अमेजन प्राइम की वेब सीरिज ‘तांडव’ हिंदूफोबिक कंटेंट को लेकर विवादों में है। दर्शकों की नाराजगी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सख्ती के बाद इस सीरिज के डायरेक्टर अली अब्बास जफर ने अपने ट्विटर हैंडल से एक पोस्ट शेयर कर बिना शर्त माफी माँगी है। मीडिया इसे माफी बताकर प्रचारित कर रहा, लेकिन यह किसी फिल्म/कार्यक्रम के पहले दिखाए जाने वाले डिस्क्लेमर से हटकर कुछ भी नहीं।

पहले ये जानते हैं कि अली अब्बास ने कहा क्या है? तांडव के डायरेक्टर अली ने अपने ट्वीट में जो बयान दिया है उसके 2 मुख्य पार्ट हैं। पहला पार्ट उस डिस्कलेमर की तरह जो सीरीज के शुरू होने से पहले बताया जाता है।

अली अब्बास जफर ने लिखा, “वेब सीरीज तांडव एक फिक्शन है और अगर इसकी किसी भी व्यक्ति या घटना से समानता है तो यह पूरी तरह से संयोग है। किसी भी व्यक्ति, जाति, समुदाय, नस्ल, धर्म या धार्मिक विश्वासों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने या किसी संस्था, राजनीतिक दल या व्यक्ति का, जीवित या मृत का अपमान करने का इरादा नहीं था। तांडव के कास्ट और क्रू की तरफ से व्यक्त की गई चिताओं को संज्ञान लिया गया और बिना किसी भावनाओं को आहत किए और बिना शर्त माफ़ी माँग ली है।”

दूसरे पार्ट में उन्होंने उन आलोचनाओं का जिक्र किया है जिसके लिए ‘तांडव’ को लेकर इतनी कॉन्ट्रोवर्सी है। अपने बयान में अली ने उन सभी लोगों से माफी माँगी है जिन्हें ये वेब सीरीज देखने के बाद इससे ऐतराज था।

अली ने लिखा, “हम अपनी सीरीज तांडव को लेकर बहुत ही ध्यान से दर्शकों के रिएक्शन को नोटिस कर रहे थे और आज डिस्कशन के दौरान मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन और ब्रोडकास्टिंग ने हमें बताया कि इस सीरिज के जरिए लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं, जिसके लिए कई शिकायतें दर्ज हुई हैं।”

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में सब-इंस्पेक्टर की ओर से सीरिज के निर्माताओं और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ के सूचना सलाहकार ने शिकायत की कॉपी ट्विटर पर शेयर करते पुलिस टीम के मुंबई के लिए रवाना होने जाने की जानकारी दी थी। जिसके बाद अब यह बयान सामने आया है।

इस वेब सीरीज में सैफ अली खान, डिंपल कपाड़िया, जीशान अय्यूब ने अभिनय किया है। इससे पहले केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भी इस मामले में अमेजन प्राइम से जवाब माँगा था। बता दें कि कई स्थानों पर ‘तांडव’ के ऐक्टर्स सैफ अली खान, डिंपल कपाड़िया और सुनील ग्रोवर सहित 32 फिल्मी हस्तियों पर केस दर्ज किया गया है। वेब सीरीज में हिंदू देवी-देवताओं का उपहास उड़ाने और समाज में जातिवाद को बढ़ावा दिए जाने का आरोप लगाया गया है।

अब सवाल उठता है कि कोई देवी-देवताओं का मजाक उड़ाए और फिर डिस्क्लेमर जैसा माफीनामा जारी कर दे तो क्या हिंदू समाज इसी से संतुष्ट हो जाएगा? यहाँ तो हिंदू सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए विरोध कर रहे हैं और कानून का इस्तेमाल करते हुए शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। जबकि किसी मजहब की भावना आहत होने पर गर्दन काट दी जाती है। लोग सड़कों पर उतर आते हैं और हिंसक वारदातों को अंजाम देते हैं। इसलिए, डिस्क्लेमर जैसा ‘माफीनामा’ जारी कर हिंदुओं को मूर्ख बनाने का ये खेल भी अब बंद करना होगा।

TRP स्कैम: इंडिया टुडे के CFO और डिस्ट्रीब्यूशन हेड को ED ने फिर किया तलब

टीआरपी स्कैम में मुंबई पुलिस का रिपब्लिक टीवी और उसके एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के खिलाफ ‘विच हंट’ जारी है। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर इंडिया टुडे के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) दिनेश भाटिया और डिस्ट्रीब्यूशन हेड केआर अरोड़ा को मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है।

इससे पहले, संयुक्त निदेशक के कार्यालय ने 8 जनवरी, 2021 को ग्रुप सीएफओ को तलब किया था। मामले से जुड़े सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया कि इंडिया टुडे के शीर्ष प्रबंधन के दोनों सदस्य से सोमवार (जनवरी 18, 2021) सुबह से ही एजेंसी गहन पूछताछ कर रही है। फर्जी टीआरपी मामले में दर्ज मूल एफआईआर में इंडिया टुडे के खिलाफ आरोप लगाया गया है कि नेटवर्क टीआरपी में हेरफेर के लिए लिए भुगतान कर रहा था।

बता दें कि यह खबर तब सामने आई है जब मुंबई पुलिस टीआरपी स्कैम में रिपब्लिक टीवी को फँसाने की कोशिश करने के आरोप लग रहे हैं। जबकि हंसा रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर दर्ज ओरिजिनल एफआईआर में  इंडिया टुडे का नाम है।

हाल ही में गिरफ्तार हुए BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के परिवार ने खुलासा किया था कि मुंबई पुलिस टीआरपी घोटाले में अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए तलोजा जेल के अंदर किसी को भुगतान कर रही है। मुंबई पुलिस ने पार्थो दासगुप्ता पर रिपब्लिक टीवी के पक्ष में टीआरपी में हेराफेरी करने के लिए अर्नब गोस्वामी से पैसे लेने का आरोप लगाया है।

ED ने टीआरपी घोटाले में दर्ज की ECIR 

ईडी ने फर्जी टीआरपी मामले में एन्फोर्समेंट केस इनफार्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की है जो कि पुलिस की एफ़आईआर के समानांतर होती है। ईडी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जाँच कर रहा है और रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई थी कि एफ़आईआर में जितने चैनल्स के नाम शामिल हैं सभी की जाँच होगी। मूल एफ़आईआर में शामिल किए गए नामों के अलावा (जिसमें रिपब्लिक का नाम शामिल नहीं है) मुंबई पुलिस की पड़ताल भी जाँच के दायरे में आ सकती है। ईडी इस मामले से जुड़ने वाली दूसरी केन्द्रीय एजेंसी है, इसके पहले सीबीआई ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की थी। 

फ़र्ज़ी टीआरपी मामला 

8 अक्टूबर को मुंबई पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह द्वारा की गई प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि तमाम चैनल अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। रिपब्लिक टीवी इसमें मुख्य आरोपित है। यह शिकायत हंसा रिसर्च ने की थी जो BARC के लिए टीआरपी रिकॉर्ड करने वाली डिवाइस को रेगुलेट करती है। 

शुरूआती एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं मौजूद था, बल्कि इंडिया टुडे को मुख्य आरोपित बताया गया था। इसके बाद ऐसे कई सबूत सामने आए थे जिससे यह पता चला कि मुंबई पुलिस ने तमाम लोगों को रिपब्लिक टीवी के खिलाफ़ बोलने के लिए उकसाया था। हंसा समूह ने यह शिकायत भी की थी कि मुंबई पुलिस उसके कर्मचारियों को रिपब्लिक टीवी के खिलाफ़ बयान देने के लिए धमका रही है।

इस्लामी भीड़ ने पादरी और उसकी पत्नी पर हमला किया, चर्च की इमारत भी ध्वस्त कर दी: युगांडा की घटना

युगांडा में कट्टर इस्लामी भीड़ ने एक पादरी और उसकी पत्नी पर हमला किया। मॉर्निंग न्यूज स्टार के मुताबिक भीड़ ने पूर्वी युगांडा के किबुकु जिले में नानकोडो उप-काउंटी में चर्च की इमारत के एक हिस्से को भी ध्वस्त कर दिया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि यह नृशंस हमला एक इमाम के 5 दिसंबर को ईसाई धर्म स्वीकार करने को लेकर हुआ। भीड़ में 8 लोग शामिल थे। उन्होंने काजीगो इलाके में उसी शाम पादरी मोशे नबवाना और उसकी पत्नी लोविसा नौरा पर बेरहमी से हमला किया। दोनों चर्च की सेवा के बाद अपने घर लौट रहे थे।

हमले के बाद दोनों को कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। इसके अलावा, मुस्लिम भीड़ ने उस चर्च पर भी हमला किया जहाँ तत्कालीन इमाम ने अपना भाषण दिया था। उन्होंने छत, खिड़कियाँ, बेंच, वाद्ययंत्र और दरवाजे सहित चर्च के कुछ हिस्सों को ध्वस्त कर दिया। 

जानकारी के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के दौरान पादरी लोगों को मुफ्त मास्क बाँट रहे थे और अपने अनुयायियों से यीशु मसीह के बारे में बात कर रहे थे। इसी दौरान पूर्व इमाम की पादरी से मुलाकात हुई। इमाम के ईसाई में परिवर्तित होने के बाद चर्च के सदस्यों ने उन्हें और उनकी पत्नी को सुरक्षा चिंताओं के कारण 10 दिसंबर को एक अस्थायी सुरक्षित घर में स्थानांतरित कर दिया था।

पादरी की पत्नी ने सुनाया खौफनाक किस्सा

घटना को याद करते हुए, पादरी की पत्नी ने कहा, “सदस्यों को बहुत खुशी हुई और उन्होंने जोर से चिल्लाकर प्रभु की स्तुति की, जिसने आसपास के मुसलमान का ध्यान अपनी ओर खींचा। फिर 6 बजे इमाम के धर्म परिवर्तन की घोषणा हुई।” उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने मेरे पति की पिटाई शुरू कर दी। उन्होंने लाठी और नुकीली चीजों से उनके सिर, पीठ और छाती पर वार किया। मैं जोर से चीखने लगी। इसके बाद हमलावर ने मुझ पर छड़ी से हमला किया। जिसमें मेरी छाती, पीठ पर चोटें आई और मेरा हाथ टूट गया।”

चीख-पुकार सुनकर ईसाई पड़ोसी उनके बचाव के लिए दौड़े। हालाँकि तब तक बदमाश इलाके से भाग चुके थे। उन्हें पहले कासरिरा के एक क्लिनिक में भर्ती कराया गया और फिर पादरी मोशे नबवाना की हालत बिगड़ने के बाद कुमी जिले के नोगीनो के एक अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया। पादरी की पत्नी और उनके 8 बच्चों की माँ नौरा, आठ आरोपियों में से चार की पहचान कर पाई हैं। इस घटना से आक्रोशित होकर उन्होंने कहा, “हम अभी तक इस भयानक घटना की रिपोर्ट पुलिस को नहीं दे रहे हैं। इस समय मेरी प्रार्थनाएँ मेरे पति की शीघ्र स्वस्थ होने के लिए है।”

मुलगो अस्पताल में उनके इलाज की लागत 3.5 मिलियन युगांडा शिलिंग (, 68, 959) तक पहुँच गई है। घटना के बारे में जानने के बाद, चर्च के एक वरिष्ठ पादरी ने कहा कि उन्हें भविष्य में इस तरह के और हिंसक हमलों का डर है। इस बीच, नौरा अपने मेडिकल बिलों का भुगतान करने और चर्च की इमारत की मरम्मत के लिए पैसे जुटाने की उम्मीद कर रही है।

पादरी की पत्नी पर पहले भी मोहम्मद ने हमला किया था 

मॉर्निंग स्टार न्यूज ने बताया कि नौरा पर पहले मोहम्मद नाम के व्यक्ति ने हमला किया था। दरअसल नौरा ने अपने केले के बागान के नुकसान के लिए जब मोहम्मद से सवाल-जवाब किया था तब उसने उन पर हमला किया था। उन्होंने बताया, “उस समय मेरे पति दूर थे, और मैं मोहम्मद के घर गई और उससे इस तरह की हरकतें करने का कारण पूछने की कोशिश की। उसने उछल कर मेरे पेट पर लात मारी और मुझे थप्पड़ मार दिया। जिसके बाद मुझे तिरिनयी के एक क्लिनिक में ले जाया गया।”

मंदिरों में हौले-हौले बजाओ माइक, केरल की वामपंथी सरकार का आदेश

केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने अपनी हिन्दू विरोध की राजनीति को एक नया मोड़ देते हुए एक आदेश जारी कर राज्य के मंदिरों में लाउडस्पीकर पर ‘लगभग’ प्रतिबंध लगा दिया, जिसके चलते नए विवाद ने जन्म ले लिया है। लोगों ने राज्य की वामपंथी सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए लिखा है कि केवल हिंदू पूजा स्थलों को ही निशाना बनाया जा रहा है।

‘स्वराज्य’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नए साल की 7 जनवरी को ही केरल देवस्वोम बोर्ड ने एक आदेश जारी करते हुए कहा है कि मंदिरों को 55 डेसीबल से अधिक ध्वनि स्तर वाले लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी। गौरतलब है कि 55 डेसिबेल की ध्वनि घर के भीतर दो लोगों की बातचीत जितनी ही ऊँची होती है।

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सोशल मीडिया पर कई लोगों द्वारा केरल सरकार के इस फैसले के प्रति आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है।

एक ट्विटर यूजर ने कहा, “सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट नियंत्रित केरल हिंदू मंदिरों में लाउड स्पीकरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। केवल हिंदू मंदिरों में! हिन्दू?”

कुछ लोगों ने कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर से भी इस फैसले को लेकर सवाल किए हैं।