पिछले कुछ दिनों में राम मंदिर संकल्प निधि के लिए दान माँग रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं पर देश के कई हिस्सों में हमले की खबरें आई हैं। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद अब ताज़ा मामला गुजरात के कच्छ का है, जहाँ गाँधीधाम के किदाना गाँव में इसे लेकर दो समुदायों के बीच संघर्ष हो गया, जो दंगे में बदल गया। ये घटना रविवार (जानवर 17, 2021) की शाम की है, जब हिन्दू कार्यकर्ता अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने निकले थे।
गाँधीधाम के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) वीआर पटेल ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए बताया कि ये दो समूहों के बीच के संघर्ष का मामला है और पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है। पुलिस ने कहा है कि इस मामले में आगे जाँच की जा रही है। पुलिस ने बताया कि गाँव में राम रथयात्रा पर कुछ शरारती तत्वों द्वारा पत्थरबाजी के बाद ये संघर्ष शुरू हुआ, जो हिंसक हो गया।
पुलिस ने दोनों समूहों में से कई लोगों को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बी डिवीजन पुलिस थाना के इंचार्ज सुमित देसाई ने कहा कि अभी पुलिस शिकायत लिखने में ही व्यस्त है, इसीलिए इस घटना में घायलों की संख्या का अनुमान नहीं लगाया जा सका है। FIR दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, स्थिति इतनी भयंकर हो गई कि ये दंगेबाजी में बदल गई।
भगवान श्रीराम के रथ के पास एक समूह जमा हो गया और उसने वहाँ आगजनी शुरू कर दी। इस रैली का आयोजन विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने किया था। इस दौरान हिंसक भीड़ ने एक ऑटो और 2 बाइकों को भी आग के हवाले कर दिया। वो हिंसा पर उतारू थे। किदाना गाँव में IPC की धारा-144 लगा दी गई है और कर्फ्यू जैसा माहौल है। पुलिस को स्थिति शांत करने के लिए आँसू गैस के गोले के इस्तेमाल करना पड़ा।
वहीं मुंद्रा तालुका के सडाऊ गाँव में भी इसी तरह की घटना हुई। कच्छ के रेंज इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) जेआर मोथालिया ने कहा कि किदाना के राम रथयात्रा के पास अचानक से एक बड़ी भीड़ जमा हो गई, जिन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी। TOI के सूत्रों का कहना है कि पुलिस को भी नहीं छोड़ा गया और जवानों पर भी भारी पत्थरबाजी हुई, जिसमें कुछ घायल भी हुए हैं। इसी तरह अंजार में भी तनाव हो गया, जहाँ के मार्ग से कई कंपनियों के कर्मचारी दफ्तर जाते हैं।
इसी तरह मुंबई पुलिस ने मालवणी में विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) के 3 नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। इन विहिप नेताओं ने ‘राम मंदिर समर्पण निधि’ अभियान के लिए पोस्टर लगाए थे, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने ये कार्रवाई की थी। मुंबई पुलिस ने भगवान राम के पोस्टर को भी फाड़ डाला था, जिसका वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद लोग आक्रोशित हो गए थे। राम मंदिर निर्माण के लिए धन जुटाने हेतु विहिप अभियान चला रहा है, जिसके तहत लोगों से चंदा माँगा जा रहा है।
कर्नाटक के मंत्री सुरेश कुमार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को जम कर खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने रविवार (जनवरी 17, 2021) को कहा कि उद्धव ठाकरे का बयान राजनीतिक रूप से खुद को श्रेष्ठ दिखाने की उनकी कोशिश को प्रदर्शित करता है। दरअसल, सीएम उद्धव ने कहा था कि वो कर्नाटक के उन क्षेत्रों को महाराष्ट्र में मिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहाँ मराठी भाषी रहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए कइयों ने ‘बलिदान’ दिया है, जिन्हें ये सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अब कर्नाटक के मंत्री और कन्नड़ एक्टिविस्ट्स ने उन्हें सलाह दी है कि वो दोनों राज्यों के बीच सीमा-विवाद को बढ़ावा देने के बदले अपने राज्य में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई पर ध्यान दें, विकास परियोजनाओं पर अपना फोकस रखें। राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने कहा कि सीमा-विवाद पहले ही अच्छी तरह सुलझा लिया गया है और सीएम उद्धव सही मुद्दों पर ध्यान दें। उन्होंने सलाह दी कि ऐसे मुद्दों को लेकर हंगामा करने से कुछ नहीं होने वाला है।
उद्धव ठाकरे ने अपनी ट्वीट्स में कहा था, “कर्नाटक द्वारा कब्ज़ा किए गए मराठी भाषी लोगों और मराठा संस्कृति के क्षेत्रों को हम महाराष्ट्र में मिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सीमा-विवाद के बलिदानियों के लिए यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम इसके लिए एक हैं। इस वादे के साथ हम बलिदानियों को सम्मान देते हैं।” बता दें कि बेलगावी सहित कुछ हिस्से कभी बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा हुआ करते थे। यहाँ मराठी भाषी बहुमत में हैं।
इसी विवाद में 1956 में कई लोगों की मौत हो गई थी, जिन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए ‘महाराष्ट्र एकीकरण समिति’ सहित अन्य मराठा संस्थाएँ जनवरी 17 को ‘बलिदान दिवस’ के रूप में मनाती आ रही हैं। उत्तरी कर्नाटक के बेलगाम के बेलगावी में कर्नाटक ने विधान सौधा की तर्ज पर एक ‘सुवर्ण विधान सौधा’ बना रखा है, ताकि इस क्षेत्र को राज्य का अभिन्न अंग दिखाया जा सके। यहाँ साल में एक बार विधान सौधा का सेशन भी होता है।
उधर ‘बेलगावी डस्ट्रिक्ट कन्नड़ आर्गेनाईजेशन एक्शन कमिटी’ के अध्यक्ष अशोक चंडारगी ने कहा कि महाराष्ट्र ने सुप्रीम कोर्ट में एक सूट दायर किया हुआ है। उन्होंने कहा कि सीमा-विवाद 2004 में ही सुलझा लिया गया था लेकिन महाराष्ट्र सरकार यहाँ आवागमन पर प्रतिबंध लगाती है। उन्होंने सलाह दी कि महाराष्ट्र सरकार इस लड़ाई को या तो सड़क पर लड़े, या कोर्ट में। सीमा-विवाद के मामले को देखने के लिए कर्नाटक में एक अलग से मंत्री बनाए जाने की भी माँग की जा रही है।
Maharashtra Ekikaran Samiti, a regional organisation fighting for the merger of Belgaum and some other border areas with Maharashtra, observes January 17 as the ‘martyrs’ day’ for those who laid down their lives for the cause in 1956#belgaumhttps://t.co/tsuXlyag1x
उधर राज्य के जल संसाधन मंत्री रमेश जारखीहोली ने कहा कि महाराष्ट्र को कर्नाटक एक इंच जमीन भी नहीं देगा। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर इस मामले में ‘गैर-ज़रूरी कन्फ्यूजन’ पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महाजन कमीशन की रिपोर्ट स्वीकृत हो गई है और अब एक इंच जमीन भी देने का सवाल नहीं उठता। ‘कन्नड़ डेवलपमेंट अथॉरिटी (KDA)’ के अध्यक्ष टीएस नागभरण ने भी इसे दोहराया। वहीं कुछ एक्टिविस्ट्स ने कहा कि महाराष्ट्र को शोलापुर कर्नाटक को दे देना चाहिए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को जम्मू में एक किताब विमोचन कार्यक्रम के दौरान बताया कि कोरोना महामारी के कारण वह अपनी पत्नी का चुम्मा भी नहीं ले सके। उनके इस हास्यास्पद बयान की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वीडियो में अन्य लोग उनकी बात सुन कर ठहाके लगाते भी नजर आ रहे हैं।
बता दें कि गुर्जर देश चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में फारूक अब्दुल्ला ने महामारी पर बात करते हुए अपनी यह बात रखी। उन्होंने कहा स्थिति यह है कि कोई भी हाथ मिलाने या गले लगने तक से डरता है। अब्दुल्ला ने कहा, “यहाँ तक कि मैं अपनी पत्नी का किस तक नहीं ले सकता। गले लगने का तो सवाल ही नहीं है जबकि दिल ऐसा करना चाहता है। मैं बिलकुल सही कह रहा हूँ।”
गौरतलब है कि अपनी इच्छा जाहिर करते समय अब्दुल्ला कोरोना वैक्सीन व देश में फैली महामारी पर बात कर रहे थे। उन्होंने अपनी इस बात को कहने से पहले यह भी कहा कि कोरोना की वैक्सीन आ गई है। लेकिन ये वक्त ही बताएगा कि ये वैक्सीन कितनी असरदार है। अल्लाह करे ये बीमारी दफा हो जाए। उन्होंने बताया कि कैसे जब भी उनकी बेटी उन्हें बिना मास्क के देखती है तो वह उनसे घर लौटने को कहती है।
इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र शासित प्रदेश में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने की बात कहने के बहाने निशाना साधा। वह बोले, “प्रधानमंत्री कहते हैं कि भारत में 5जी आ रहा है, जबकि हम 4जी (मोबाइल इंटरनेट सेवा) से भी वंचित हैं। वह कुर्सी छोड़ने के बाद यहाँ आएँ और रह कर देखें कि हम 2जी (सेवा) के साथ कैसे जी रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “छात्र अपने घर पर हैं और वे इंटरनेट के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं तथा व्यावसायी भी इंटरनेट सेवा पर निर्भर हैं। मेरा प्रधानमंत्री से अनुरोध है कि यदि आप कहते हैं कि यह स्थान विकास के पथ पर है तो हमें अल्लाह की खातिर 4जी दीजिए ताकि हम भी और हमारे बच्चे भी आगे बढ़ सकें।”
‘अमेज़न प्राइम वीडियो’ पर आई अली अब्बास जफ़र निर्देशित ‘तांडव’ में सैफ अली खान और मोहम्मद जीशान अयूब ने मुख्य किरदार निभाए हैं। इस वेब सीरीज में भगवान शिव का अपमान किए जाने और जातीय वैमनस्य को बढ़ावा देने के कारण अब उत्तर प्रदेश में केस दर्ज किया गया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि जन-भावनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने इस वेब सीरीज पर मनोरंजन की आड़ में नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी पूरी टीम के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के जल्द गिरफ़्तारी की तैयारी की जा रही है। लखनऊ मध्य के हजरतगंज थाने में रविवार (जनवरी 17, 2021) को ये केस दर्ज किया गया। ‘इंडिया ओरिजिनल कंटेंट अमेज़न’ की हेड अपर्णा पुरोहित के अलावा निर्देशक अली अब्बास, प्रोड्यूसर हिमांशु कृष्ण मेहरा और लेखक गौरव सोलंकी सहित अन्य को इस मामले में आरोपित बनाया गया है।
FIR में इन सभी के खिलाफ IPC की धारा- 153A (उपद्रव पैदा करने वाले बयान देना या द्वेषभाव से निशाना बनाना), 295 (किसी धर्म के पवित्र स्थल का अपमान), 505(1)(b) (अशांति और अपराध को बढ़ावा देने वाला प्रसारण), 505(2) (विभिन्न वर्गों में शत्रुता/घृणा पैदा करने वाले कथन) और 469 (दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसी का अपमान) के अलावा IT एक्ट की धारा- 66 (आपत्तिजनक कंटेंट्स), 66 F और 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR में लिखा है:
“उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उक्त वेब सीरीज को देखा गया तो पाया गया कि प्रथम एपिसोड के 17वें मिनट में हिन्दू देवी-देवताओं का विद्रूप ढंग से रूप धारण कर धर्म से जोड़ के अमर्यादित तरीके से उनका अपमान किया गया है और निम्न-स्तरीय भाषा का प्रयोग हुआ है। ये धार्मिक भावनाओं को आघात पहुँचाने वाला और लोगों को भड़काने वाला है। 22वें मिनट में जातिगत विद्वेष वाले डायलॉग हैं। सीरीज में ऐसे कई बयान हैं। भारत के पीएम के गरिमामयी पद का चित्रण अत्यंत अशोभनीय ढंग से किया गया है। जातियों को छोटा-बड़ा दिखाने और महिलाओं के अपमान के दृश्य हैं।”
यूपी पुलिस ने ये भी पाया कि इस वेब सीरीज में एक समुदाय को निशाना बना कर उनकी धार्मिक भावनाएँ भड़काने का काम किया गया है। इसे समाज के लिए हानिकारक भी बताया गया है, क्योंकि इसका इंटरनेट के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है। शासकीय व्यवस्था की क्षति और अश्लीलता फैलाने के भी आरोप लगे हैं। इस वेब सीरीज के निर्माण में सम्मिलित टीम के लोगों का आरोपित के रूप में नाम दर्ज किया गया है।
जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, घटिया वेब सीरीज की आड़ मं नफरत फैलाने वाली वेब सीरीज तांडव की पूरी टीम के खिलाफ योगीजी के उत्तर प्रदेश में गंभीर धाराओं में मामला दर्ज, जल्द गिरफ्तारी की तैयारी !! pic.twitter.com/V9ZewGNOHw
देश की पुलिस-फोर्स और सुरक्षाबलों की छवि को लेकर यूपी सरकार पहले से ही सख्त है। ऐसे में वेब सीरीज तांडव में फोर्स को शराब पीकर दंगा भड़काते हुए दिखाए जाने पर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई। और इसे अभिव्यक्ति की आजादी का जुमला दिया गया। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने इस पर सख्त कार्रवाई करने के संबंध में ट्वीट किया है।
अभिव्यक्ति की आज़ादी का क़त्ल-ए-आम देखा नहीं जाता। श्री @myogiadityanath जी के नेतृत्व में @Uppolice प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा को प्रतिबद्ध है। ऐसे में फ़ोर्स को शराब पीकर दंगा भड़काते हुए दिखाना अशोभनीय है। ‘तांडव’ के निर्माताओं पर सख़्त से सख़्त कार्यवाही करनी चाहिए।
उधर विरोध-प्रदर्शन के बीच मुंबई में पुलिस ने सैफ अली खान के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है। करीना कपूर भी उसी घर में रहती हैं। सैफ-करीना ने अपने पुराने घर के पास ही एक नया घर खरीदा है और उनके सारे कर्मचारी घर के सामान को स्थानांतरित करने में लगे हुए हैं। इन सबके बीच मुंबई पुलिस के कई जवान उनके घर के बाहर देखे गए। सोशल मीडिया से लेकर पुलिस थानों तक ‘तांडव’ का विरोध जारी है।
उधर वेब सीरिज तांडव को लेकर अमेजन प्राइम वीडियो के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। केंद्रीय सूचना मंत्रालय ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को नोटिस जारी किया। इस मसले पर सोमवार तक जवाब देने को कहा गया है। बता दें कि इससे पहले भाजपा नेता राम कदम की शिकायत पर मुंबई पुलिस की तरफ से ‘तांडव’ के मेकर्स को समन जारी किया गया था। सीरिज के खिलाफ धारा 295A, आईटी एक्ट धारा 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है।
वेब सीरिज तांडव को लेकर अमेजन प्राइम वीडियो के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय सूचना मंत्रालय ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को नोटिस जारी किया। इस मसले पर सोमवार तक जवाब देने को कहा गया है।
हिंदूफोबिक कंटेंट को लेकर यह सीरिज विवादों में है। सोशल मीडिया पर दर्शक सीधे आरोप लगा रहे हैं कि इसमें भगवान शिव और भगवान राम का अपमान किया गया है। कई बीजेपी नेताओं ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से अपील की थी कि ‘तांडव’ को बैन किया जाए।
Amazon Prime Video officials in India summoned by the Information & Broadcasting Ministry, in connection with the controversy around web series ‘Tandav’
बता दें कि इससे पहले भाजपा नेता राम कदम की शिकायत पर मुंबई पुलिस की तरफ से ‘तांडव’ के मेकर्स को समन जारी किया गया था। सीरिज के खिलाफ धारा 295A, आईटी एक्ट धारा 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मुंबई पुलिस को दी शिकायत में कदम ने कहा था, “मैं आपको बताना चाहूँगा कि वेब सीरिज तांडव में हिंदू देवताओं का अपमान किया गया है। इससे हिंदुओं की भावनाएँआहत हुई है। वेब सीरिज के निर्देशक अली अब्बास वामपंथी विचारधारा का महिमामंडन कर रहे हैं। जीशान ने भगवान शिव का अपमान किया है। आपसे अनुरोध है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म, निर्देशक, निर्माता, लेखक और अभिनेताओं पर शिकायत दर्ज करें और सीरिज की स्ट्रीमिंग बंद करें। इसके अलावा सीरिज में विशिष्ट समुदायों का भी अपमान किया गया है। इसलिए आवश्यक कार्रवाई करें।”
हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले ‘तांडव’ के बहिष्कार का ऐलान करते हुए महाराष्ट्र के भाजपा नेता राम कदम ने पूछा था कि आखिरकार क्यों हर बार फिल्मों और वेब सीरिज में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने का काम किया जाता है? उन्होंने कहा, “सैफ अली खान एक बार फिर ऐसी फिल्म या सीरिज का हिस्सा हैं, जो हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।”
राम कदम ने कहा कि निर्देशक अली अब्बास जफर को इस सीरिज से भगवान शिव का मजाक बनाने वाला हिस्सा हटाना होगा और अभिनेता जीशान अयूब को माफ़ी माँगनी पड़ेगी। भाजपा नेता ने ऐलान किया कि जब तक जरूरी बदलाव नहीं होते, तब तक ‘तांडव’ का बहिष्कार किया जाएगा। जिस दृश्य पर आपत्ति जताई जा रही है, उसे पहले ही एपीसोड में दिखाया गया है। जहाँ भगवान शिव बना ज़ीशान अयूब सोशल मीडिया पर प्रोफ़ाइल पिक बदलने की बात करता है, क्योंकि ‘रामजी के फॉलोवर्स बढ़ रहे हैं।’
ये अली अब्बास, सैफ अली खान, आरिफ, जीशान को अपने खुद के धर्म से इतनी नफरत क्यो हैं
बचपन से जिस धर्म का पालन कर रहे हो कभी उस पर भी बनाओ फ़िल्म
गौरतलब है कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी इस सीरिज के कंटेंट पर एतराज जताया था। उन्होंने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से वेब सीरिज पर प्रतिबंध लगाने की अपील की थी। मिश्रा ने एक वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया था कि वेब सीरिज के जरिए देश में हिंसा फैलाने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीरिज में दलितों का अपमान किया गया है।
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील आशुतोष दुबे ने अली अब्बास जफर और अमेजन प्राइम वीडियो को हिंदूफोबिक कंटेंट के लिए कानूनी नोटिस भेजा था।
NRC और CAA विरोधी प्रदर्शनों की तरह ही अब कथित किसान आंदोलन को हवा देने की तैयारी की जा रही है। मुंबई के आजाद मैदान में शनिवार (16 जनवरी, 2021) को हजारों मुस्लिम प्रदर्शनकारी जुटे। ये कथित तौर पर केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध का समर्थन करने को इकट्ठा हुए थे।
एबीपी न्यूज के अनुसार, मुंबई के आजाद मैदान में में किसानों के समर्थन में ‘किसान अलायंस मोर्चा’ का आयोजन किया गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘आजादी’ के नारे लगाए। मंच पर लगे बैनर पर आप साफतौर लिखा देख सकते हैं, ” मुंबईकर किसानों के विरोध का समर्थन करते हैं।” कथित तौर पर, कई सामाजिक संगठनों के प्रदर्शनकारियों ने कृषि कानूनों के खिलाफ यह आंदोलन किया।
वीडियो साभार: Youtube/ABP News
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस विरोध-प्रदर्शन को एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देने की तैयारी की जा रही है, जैसा दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान देखा गया था। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) के बहाने मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी, यह कह कर दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था। दंगों में 52 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।
अब सवाल यह उठता है कि क्या किसान विरोध प्रदर्शन भी एंटी-सीएए विरोध की तरह किसी साजिश के तौर पर रचा तो नहीं जा रहा?
Azad Maidan in Mumbai, This influx of people shows that this movement is not only in North India.
गौरतलब है कि इस वक्त सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कृषि कानून का विरोध कर रहे एक प्रदर्शनकारी को ट्रिपल तालक, आसिफा बलात्कार और NRC के मुद्दे को उठाते हुए तथाकथित किसानों के लिए समर्थन जुटाते हुए देखा जा सकता है। मुस्लिम प्रदर्शनकारी कहता है, “आज, हम परेशान हैं। गली-गली जाकर माँ-बहनों को उनके घरों से बाहर निकालना हमारी जिम्मेदारी है। कल हम सबको मिलकर आजाद मैदान पहुँचना होगा और मस्जिद के पास इकट्ठा होना होगा। हमने बस यात्रा, भोजन और पानी की व्यवस्था कर रखी है। हम सभी माँ-बहनों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगे।” हालाँकि यह वीडियो कब की है, अभी यह पता नहीं लग पाया है।
Saw yesterday’s Mumbai protest in ‘support of Farmers’? Now see how crowd was gathered and what was their motive. pic.twitter.com/su7EAWpUkh
कई सोशल मीडिया यूज़र्स के अनुसार, किसान समर्थन में उक्त आदमी ने एक बार भी कृषि कानूनों का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उसकी जगह शनिवार को विरोध-प्रदर्शनों के लिए समर्थन जुटाने के लिए आजाद मैदान में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जरूर बताया।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने स्वीकार किया है कि मुंबई पुलिस ने ही रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के निजी चैट को लीक किया है।
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, “मुंबई पुलिस द्वारा जारी किए गए अर्नब गोस्वामी के चैट्स की ट्रांस्क्रिप्ट काफी परेशान कर रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर संवैधानिक संशोधनों और राजनीतिक नियुक्तियों तक ऐसी संवेदनशील जानकारी की एक्सेस किसने दी?” उन्होंने कहा, “भारत सरकार को पूरी जाँच शुरू करनी चाहिए। साथ ही रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति को इस मामले को अत्यंत प्राथमिकता के साथ लेना चाहिए।”
पृथ्वीराज चव्हाण के इस खुलासे के बाद एक बार फिर से उस तरफ ध्यान जाता है जब मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस अर्नब गोस्वामी को टॉर्चर करने के लिए किस हद तक पहुँच गई थी।
लीक हुई व्हाट्सएप चैट अर्नब गोस्वामी और BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के बीच चर्चा से संबंधित है। हाल ही में इंटरनेट पर लीक हुई चैट ‘चमत्कारिक रूप से’ सामने आई है और मीडिया में विपक्षी दलों एवं उनके कठपुतलियों के बीच हॉट डिबेट का विषय रहा है। अब ये बात सामने आ गई है कि निजी चैट को मुंबई पुलिस ने ही लीक किया था।
अपनी आदत के अनुसार विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ जाते हुए चैट को लेकर जाँच की माँग कर रहे हैं। वो चैट के जिन हिस्सों को लेकर जाँच की माँग कर रहे हैं, वह बालाकोट एयरस्ट्राइक से संबंधित है।
विपक्षी दलों के अनुसार, अर्नब गोस्वामी को हवाई हमलों से तीन दिन पहले ही पता था कि भारत सरकार, पाकिस्तान के खिलाफ कोई ‘बड़ी कार्रवाई’ करने वाली है। लीक हुई चैट में अर्नब कहते हैं, “एक सामान्य हवाई हमले से भी बड़ा हमला होने वाला है और इसी समय कश्मीर पर कुछ बड़ा होने वाला है। पाकिस्तान पर भारत सरकार इस तरह से हमला करने के लिए आश्वस्त है, जिससे लोगों को गौरव महसूस होगा।”
यहाँ एकमात्र समस्या यह है कि विपक्षी दल के राजनेता जो भी आरोप लगा रहे हैं, वह किसी भी आरोप को साबित नहीं करता है। कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ट्विटर पर कहा, “अगर मीडिया का एक वर्ग रिपोर्टिंग कर रहा है, तो यह सही है, यह बालाकोट हवाई हमलों और 2019 के आम चुनावों के बीच सीधे संबंध की ओर इशारा करता है। क्या राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनावी उद्देश्यों के लिए नजरअंदाज कर दिया गया था? जेपीसी जाँच की जरूरत है।”
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पूछा, “क्या एक पत्रकार (और उनके दोस्त) को वास्तविक एयर स्ट्राइक से तीन दिन पहले बालाकोट शिविर में जवाबी हमले के बारे में पता था? यदि हाँ, तो इस बात की क्या गारंटी है कि उनके ‘सोर्स’ ने दूसरों के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए काम करने वाले जासूसों या मुखबिरों के साथ जानकारी साझा नहीं की? ‘For Your Eyes Only’ निर्णय सरकार-समर्थक पत्रकार के पास कैसे पहुँचा?”
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने टिप्पणी की, “व्हाट्सएप चैट का ट्रांसक्रिप्ट स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सरकार ने बालाकोट हमलों और धारा 370 को खत्म करने वाले दोनों निर्णय के बारे में टीवी एंकर को पूर्व सूचना दी थी। क्या हो रहा है? क्या मैं अकेली हूँ जो सोचती है कि मोदी-शाह हमें जवाब देते हैं?”
बालाकोट चैट एक नॉन-स्टोरी क्यों है
अर्नब गोस्वामी के चैट केवल भारतीयों के बड़ी उम्मीदों की ओर इशारा करते हैं कि पाकिस्तान को इस बार छोड़ा नहीं जाएगा, उसे मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई थी और 2019 तक लोगों ने स्वीकार कर लिया था कि मोदी सरकार सार्वजनिक आक्रोश का दमदार जवाब देगी।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पुलवामा आतंकी हमले के तत्काल बाद की गई टिप्पणियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि इसका परिणाम सामने आएगा। नरेंद्र मोदी ने 15 फरवरी, 2019 को आतंकी हमले के एक दिन बाद कहा था कि लोगों का खून उबल रहा है। आतंकवादियों ने ‘गंभीर गलती’ की है और इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा था, “हमारा पड़ोसी देश यह भूल जाता है कि यह (भारत) एक ऐसा देश है, जिसकी नई मंशा और नई नीति है।” पीएम की बातों से स्पष्ट हो रहा था कि भारत कुछ बड़ा करने वाला है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हमले के 3 दिन पहले 23 फरवरी को कहा था, “देश के बहादुर सैनिकों पर भरोसा करें और मोदी सरकार पर भरोसा रखें। इस बार सभी को न्याय दिया जाएगा और पूरा न्याय किया जाएगा। प्रधान सेवक आतंक को खत्म करने में व्यस्त है… अगर मेरा आतंक की फैक्ट्री में ताले लगाने की नियति है, तो वह हो।”
इस तरह की टिप्पणियों से स्पष्ट था कि हमला होना निश्चित है। करण थापर ने हिंदुस्तान टाइम्स के लिए अपने 24 फरवरी के कॉलम में भी इस तरफ इशारा किया था कि हमला होना निश्चित है। उन्होंने कहा, “सवाल यह है कि वे कैसे जवाब देंगे? क्या यह एक कदम बढ़ाने का अवसर है, क्योंकि यह मोदी सरकार को शर्मिंदा करेगा या क्या यह उन्हें पुनर्विचार करने का कारण देगा, क्योंकि वे जानते हैं कि मोदी कड़ा जवाब देंगे?”
इतना ही नहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान खुद संयुक्त राष्ट्र से इस स्थिति को टालने की दलील दे रहे थे। ऐसी परिस्थितियों में जब नरेंद्र मोदी की टिप्पणियाँ पब्लिक डोमेन में है, तो क्या अर्नब गोस्वामी का चैट किसी साजिश की तरफ इशारा करता है? यह मानना बिल्कुल बेतुका है कि उन्होंने जो कुछ भी कहा, वह प्रधानमंत्री ने पहले जनता के नाम अपने संदेश में नहीं कहा।
कंगना रनौत चैट
एक चैट में अर्नब गोस्वामी ने ऋतिक रौशन को ‘dumb’ और कंगना रनौत को ‘schizophrenic’ कहा। यह चैट 2017 की थी। 2019 में दोनों ने कंगना रनौत पर चर्चा की जब अर्नब गोस्वामी ने उन्हें ‘बड़े पैमाने पर रेटिंग क्रंचर’ कहा।
लोगों ने किसी तरह से इस चैट को कंगना द्वारा 2020 में सुशांत सिंह राजपूत मामले में रिपब्लिक टीवी को दिए गए इंटरव्यू से जोड़ दिया। आकाश बनर्जी भी किसी तरह से 2019 की चैट को सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जोड़ते हुए दिखाई देते हैं, जो कि एक हास्यास्पद दावा है।
स्मृति ईरानी चैट
उनकी एक और चैट जिसने बहुत ध्यान आकर्षित किया है, वह यह है कि अर्नब गोस्वामी का कहना था कि स्मृति ईरानी 2017 में नई IB मंत्री होंगी और वह उनके लिए खुश थे, क्योंकि वह उनकी बहुत अच्छी दोस्त हैं। अब, आरोप यह है कि रिपब्लिक टीवी के संपादक को नियुक्ति के बारे में पहले से पता था।
लेकिन उनका यह दावा भी औंधे मुँह गिर जाता है, क्योंकि अर्नब गोस्वामी का चैट प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पर स्मृति ईरानी की नियुक्ति के कम से कम 5 मिनट बाद का है।
18-07-2017 10:51, PMO India tweeted that Smriti Irani will be next I&B Minister.
In alleged chat of Arnab 18-07-2017 10:57, Arnab tells that Smriti is next I&B minister.
How is this ‘Probable’ new I&B minister as it was already tweeted by PMO? Kuchh bhi leak kar rahe ?? pic.twitter.com/2PfKYLbRod
नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2017 की सुबह 10.51 बजे ट्वीट किया और अर्नब ने इसी दिन के 10.57 बजे पूर्व BARC सीईओ को सूचित किया। अब यह उन लोगों की बौद्धिक क्षमताओं के बारे में क्या कहता है जो इसके आधार पर षड्यंत्रकारी निष्कर्ष पर पहुँच रहे हैं?
चैट लीक करने का असली कारण
मुंबई पुलिस का अर्नब की चैट को लीक करने का असली कारण उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करना था, जिससे कि विपक्षी पार्टियों और उनकी कठपुतलियों को अपने दुश्मन का निंदा करने के लिए अधिक गोला-बारूद उपलब्ध हो सके।
मीडिया और राजनीतिक प्रतिष्ठान में निहित स्वार्थों को आसानी से नजरअंदाज किया जाने वाला मूल संदेश यह है कि चैट में कुछ भी नहीं है। यदि वास्तव में भड़काऊ सामग्री होती, तो निरर्थक साजिश के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया होता।
एक और बात जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है वह यह है कि ऐसी कोई भी परिस्थिति नहीं है जिसके तहत मुंबई पुलिस एक पत्रकार की निजी चैट को लीक कर सकती है। यह गोपनीयता का एक बड़ा उल्लंघन है जो कि निंदनीय है। इसके अलावा, लीक हुई चैट से यह भी पता चलता है कि अर्नब गोस्वामी को सरकार के अंदरूनी कामकाज के अलावा सामान्य राजनीतिक रूप से सूचित नागरिकों के बारे में कुछ भी पता नहीं था।
पूरे टीआरपी घोटाले के दौरान महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय रही है। आरोप लगाए गए हैं कि मुंबई पुलिस गोस्वामी के खिलाफ प्रतिकूल बयान देने के लिए गवाहों के साथ जबरदस्ती कर रही। पार्थो दासगुप्ता के परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि रिपब्लिक टीवी के संपादक के खिलाफ बयान देने के लिए पार्थो को तलोजा जेल में टॉर्चर किया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में, गोस्वामी के निजी चैट को लीक करना उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए उनके खिलाफ मुंबई पुलिस की एक और संवेदनशील कार्रवाई प्रतीत होती है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेनामी संपत्ति मामले में रॉबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने सुनवाई करने का फैसला लिया है।
खबरों के अनुसार, ED ने बीकानेर बेनामी संपत्ति के मामले में रॉबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी महेश नागर से पूछताछ के लिए उच्च न्यायालय की अनुमति माँगी है। ईडी की अर्जी पर सोमवार को जस्टिस पीएस भाटी की एकलपीठ सुनवाई करेगी।
गौरतलब है कि यह मामला वाड्रा के सहयोगी कंपनी महेश नगर द्वारा कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की ओर से जमीन खरीदने से संबंधित है, जिसके ओनर सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा हैं। नागर के पास कंपनी द्वारा जारी किया गया पावर ऑफ अटॉर्नी था, जिसके उपयोग से उन्होंने कंपनी की ओर से जमीन की खरीदारी की थी। रिपब्लिक टीवी द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में महेश नागर ने कहा था कि रॉबर्ट वाड्रा ने अपने भूमि सौदों के लिए विभिन्न स्रोतों और नामों का इस्तेमाल किया।
इसके अलावा ईडी, वाड्रा की कंपनी द्वारा बीकानेर में किसानों से लूट और धोखाधड़ी कर प्राप्त की गई जमीन के सौदे की भी जाँच-पड़ताल करेगी। बता दें राज्य सरकार ने हस्तांतरित किए गए 374.44 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था, जब यह पाया गया कि उसे कथित रूप से ‘अवैध निजी लोगों’ के नाम पर हस्तांतरित किया गया था।
बात दें राज्य पुलिस ने स्थानीय तहसीलदार द्वारा एक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के बाद सौदे में जालसाजी का आरोप लगाया था। जिसके तहत ED ने 2015 में इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप है कि स्काईलाइट ने 69.55 हेक्टेयर भूमि को एलेगेनी फिनलीज को 7.41 लाख प्रति हेक्टेयर में बेचा था, लेकिन इसने भूमि को 1 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से खरीदा था। महेश नागर ने स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की ओर से जमीन खरीदी और बेची थी।
उल्लेखनीय है कि भूमि खरीदने के लिए एलेगेनी फिनलेज़ द्वारा इस्तेमाल की गई राशि भूषण पावर एंड स्टील कंपनी (बीएसपीएल) द्वारा दिए लोन से ली गई थी। उसी वर्ष बीएसपीएल को इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन (ITCS) द्वारा 500 करोड़ की छूट दी गई थी, जिस वजह से इस मामले में शक पैदा हुआ।
इससे पहले ऑपइंडिया ने दस्तावेजों के साथ एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें बताया गया था कि महेश नागर ने रॉबर्ट वाड्रा की ओर से खरीद दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। उसने कहा था कि उसे एचएल पाहवा से पैसा मिला था जो गाँधी-वाड्रा परिवार के जमीन के सौदों से करीब से जुड़ा हुआ था।
अमेजन प्राइम वीडियो पर 15 जनवरी को रिलीज हुई वेब सीरिज तांडव (Tandav) को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इस वेब सीरिज पर हिंदू धर्म की गलत छवि दिखाने का आरोप है। दर्शकों का कहना है कि इसमें न केवल जातिवादी कंटेंट है, बल्कि भगवान शिव और भगवान राम का अपमान भी किया गया है।
शो के स्टारर सैफ अली खान की बढ़ती आलोचना के बीच बीजेपी नेता राम कदम ने अभिनेता ज़ीशान अय्यूब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और वेब सीरीज में हिंदू देवताओं का अपमान करने के लिए माफी की माँग की है। साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों फिल्मों और वेब सीरिज में लगातार हिन्दू घृणा से सना कंटेंट परोसा जा रहा है।
आखिरकार क्यों हर बार फिल्मों और वेब सीरीज में हिन्दू देवी देवताओं को अपमानित करने का काम किया जाता है। ताजा उदाहरण नई वेब सीरीज ‘तांडव’ है। सैफ अली खान एक बार फिर ऐसी फिल्म या सिरीज़ का हिस्सा है जो हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुचाता है। डायरेक्टर अली अब्बास जफर को सिरीज़ से भगवान pic.twitter.com/z35cHoiw9d
मुंबई पुलिस को दी शिकायत में कदम ने कहा है, “मैं आपको बताना चाहूँगा कि वेब सीरिज तांडव में हिंदू देवताओं का अपमान किया गया है। इससे हिंदुओं की भावनाएँआहत हुई है। वेब सीरिज के निर्देशक अली अब्बास वामपंथी विचारधारा का महिमामंडन कर रहे हैं। जीशान ने भगवान शिव का अपमान किया है। आपसे अनुरोध है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म, निर्देशक, निर्माता, लेखक और अभिनेताओं पर शिकायत दर्ज करें और सीरिज की स्ट्रीमिंग बंद करें। इसके अलावा सीरिज में विशिष्ट समुदायों का भी अपमान किया गया है। इसलिए आवश्यक कार्रवाई करें।”
राम कदम की शिकायत
भाजपा नेता कदम की शिकायत के बाद पुलिस ने तांडव के मेकर्स को समन जारी किया है। सीरिज के खिलाफ धारा 295A, आईटी एक्ट धारा 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है।
Filed complaint against Tandav Web Series at Ghatkopar police station. Police has assured quick investigation, FIR under Sec 295A of IPC, Section 67A of IT Act & Atrocities Act.Producer, Director, Writer, Actors & Amazon to be summoned soon.#BanTandavNow#Boycottandavpic.twitter.com/Apg0hNYZgJ
गौरतलब है कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से वेब सीरिज पर प्रतिबंध लगाने की अपील की थी। मिश्रा ने एक वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया था कि वेब सीरिज के जरिए देश में हिंसा फैलाने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीरिज में दलितों का अपमान किया गया है।
वहीं इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील आशुतोष दुबे ने अली अब्बास जफर और अमेजन प्राइम वीडियो को हिंदूफोबिक कंटेंट के लिए कानूनी नोटिस भेजा था।
I have served the legal notice to @aliabbaszafar & @PrimeVideoIN for Amazon Prime Video & Tandav Web Series hurts the Hindu sentiments by casting a Controversial scene in the web series through mocking character of the Hindu god Shiv Ji & Narad Muni Ji! pic.twitter.com/upzC9NkxcZ
उल्लेखनीय है कि अमेज़न प्राइम ने हाल ही में सैफ अली खान स्टारर राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ ‘तांडव’ को अपने प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया है। इसे निर्देशित किया है अली अब्बास ज़फ़र ने।
नेटिज़न्स ने कई उदाहरणों से यह साबित किया है, वेब सीरीज में हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हुए हिंदू समाज के विभिन्न संप्रदायों के बीच जानबूझकर विभाजन के बीज बोने का प्रयास कर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों ने गणतंत्र दिवस को देखते हुए घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ा है। इसके तहत दिल्ली में छुपकर रह रहे रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है।
आनंद विहार रेलवे स्टेशन के बाहर रविवार (जनवरी 17, 2021) को 6 संदिग्ध रोहिंग्या को हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि उनके खिलाफ पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। ये ट्रेन से 6 जनवरी को दिल्ली पहुँचे थे। इन सभी को लामपुर डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया है।
इन रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने के लिए FRRO को जानकारी दे दी गई है। पुलिस के मुताबिक, ये सभी ट्रेन के जरिए त्रिपुरा से दिल्ली आए थे। इनके पास भारतीय होने का कोई दस्तावेज नहीं था। विदेश मंत्रालय के जरिए इन्हें वापस भेजा जाएगा।
Six suspected Rohingyas were detained outside Anand Vihar Railway Station and an FIR has been registered against them in Patparganj Industrial Area. They had arrived in Delhi on 06.01.21 through train: Delhi Police https://t.co/IZZAIC3Gjx
इससे पहले उत्तम नगर थाना पुलिस ने हस्तसाल इलाके में पिछले करीब ढाई महीने से रह रहे म्यांमार के दो नागरिकों को गिरफ्तार किया। दोनों रोहिंग्या हैं। दोनों आरोपितों की पहचान हामिद हुसैन और नबी हुसैन के रूप में हुई। दाेनों म्यांमार के बुथीडोंग इलाके के रहने वाले हैं। नवंबर महीने में ये बांग्लादेश की सीमा पार करने के बाद भारत में दाखिल हुए और फिर दिल्ली पहुँचे। ये किस मकसद से यहाँ रह रहे थे, पुलिस अभी इसकी तहकीकात कर रही है।
पुलिस को इनके इलाके में होने की सूचना सूत्रों से प्राप्त हुई। इसके बाद पुलिस ने दोनों के बारे में पता किया, जिसके बाद इन्हें पकड़ा। दोनों एक ही कमरे में रह रहे थे। पुलिस ने जब इनसे पूछताछ शुरू की तो ये कुछ स्पष्ट तौर पर नहीं बोल रहे थे। इनसे जब कागजात की माँग की गई तो ये पुलिस के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाए। पकड़े गए दोनों लोगों को जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के बयान के मुताबिक, “15 जनवरी को फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 के तहत एक केस दर्ज किया गया था, जिसके बाद जाँच शुरू की गई थी। जाँच के दौरान पता चला कि दोनों आरोपी म्यांमार के स्थायी निवासी हैं और एक नवंबर, 2020 को बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए अवैध तरीके से भारत में घुस आए थे।”
गौरतलब है कि पिछले दिनों रेलवे पुलिस ने बिहार के किशनगंज से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर 10 रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया था। ये सभी बुधवार (13 जनवरी 2021) की दोपहर 02501 अगरतला-नई दिल्ली राजधानी स्पेशल ट्रेन से गिरफ्तार किए गए। इसमें 3 पुरुष, 2 महिला और 5 बच्चे शामिल थे। गिरफ्तार किए गए सारे रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार स्थित कुटूपालंग शिविर से फरार हुए थे।