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6 दिसंबर 1992 इस बात का प्रमाण है कि ‘अयोध्या’ वही है, जिसे युद्ध में पराजित नहीं किया जा सकता

पूरा देश जान चुका है कि 6 दिसंबर 1992 को क्या हुआ था। कुछ घंटों के भीतर लाखों कारसेवकों की भीड़ ने विवादित ढाँचा ढहा दिया। देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज की सदियों पुरानी भावनाओं का ज्वार फूटा और बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिरा दिया गया। देश का हिन्दू अमूमन इतना प्रतिक्रियावादी नहीं होता है लेकिन यहाँ विषय ही अलग था। पूरा विमर्श यह था कि जो अपना था, उसे हासिल करना है। 

ऐसा भी नहीं था कि यह पहला ऐसा मौक़ा था, जब हिन्दुओं की भावनाएँ सामाजिक और राजनीतिक मंच पर सामने आई थीं। अंतर बस इतना था कि इसके पहले सामने आई भावनाओं पर दबाव डाला जा सका था और लेकिन 1992 में धैर्य बनाए रखने की कोई दलीलें काम न आईं और न ही समरसता को बढ़ावा देने की। 

ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि 6 दिसंबर 1992 को जो कुछ हुआ, वह किसी धार्मिक प्रक्रिया या मान्यता का हिस्सा है। लेकिन ऐसा हुआ क्यों, इस पहलू पर विमर्श लगभग शून्य हैं। 1855 के दौरान अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद) में हिन्दुओं का भीषण प्रतिकार देखने को मिला था, नतीजा अयोध्या की ज़मीन पर संघर्ष हुआ। लगभग 12000 लोगों ने ढाँचे को घेर लिया था, तब भी ढाँचे का एक हिस्सा गिराया गया था। 

हिन्दुओं की एक विशाल भीड़ ने साल 1934 में बाबरी मस्जिद के तीनों गुंबद तोड़ दिए थे लेकिन अयोध्या के कलेक्टर ने इसका पुनर्निर्माण कराया था। इन दो कालखंडों में न तो कोई चुनाव था और न ही राजनीतिक दल… यानी ढाँचे को लेकर जनमानस में आक्रोश शुरुआत से ही था। जो थी वह सिर्फ और सिर्फ आस्था थी, हिन्दुओं की अटूट आस्था। जिसे हमेशा से नज़रअंदाज़ किया गया, नतीजतन 6 दिसंबर 1992 हुआ।     

इसलिए बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 28 साल बाद दिए गए न्यायालय के आदेश का उल्लेख भी अहम हो जाता है। इसमें सीबीआई की विशेष अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह विध्वंस पूर्व नियोजित नहीं था बल्कि आकस्मिक घटना थी। न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार यादव ने लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा समेत कुल 32 अभियुक्तों को बरी कर दिया था। लगभग तीन दशक तक चली इस सुनवाई के दौरान 17 अभियुक्तों की मृत्यु हो गई थी।        

पूरे विषय के संबंध में देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का एक भाषण बेहद प्रासंगिक और चर्चित है। इस अभियान के इर्द-गिर्द उस दौर में दिए गए तमाम भाषणों के बीच लोग इस भाषण को जनभावना जागृत करने में अहम मानते हैं। उस भाषण का अंश कुछ इस प्रकार है, “वहाँ नुकीले पत्थर निकले हैं, उन पर तो कोई नहीं बैठ सकता है। तो ज़मीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक बनाना पड़ेगा। राम मंदिर के निर्माण का आन्दोलन सिर्फ एक मंदिर के निर्माण का आन्दोलन नहीं है। क्या राम को छोड़ कर इस देश की कल्पना की जा सकती है।” 

लेकिन अवरोध का सबसे बड़ा आधार ऐसी जमात थी, जो राजनीतिक दल से लड़ते-लड़ते श्रीराम के अस्तित्व से लड़ने लगी थी। इन्हें भी सर्वोच्च न्यायालय ने करारा जवाब दिया था। न्यायालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था, “श्रीराम को अयोध्या से अलग करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। अयोध्या की पहचान ही राम से है, हिन्दुओं की आस्था के गलत होने का कोई प्रमाण नहीं है।” यह तर्क स्वयं में पर्याप्त था कि इस देश का हिन्दू समाज जिस पर अक्सर असहिष्णु होने का आरोप लगाया जाता है, वह असल मायनों में कितना सहिष्णु है। 

इस संबंध में प्रख्यात समाजवादी और तथाकथित धर्म निरपेक्ष राजनीतिक दलों के पितामह राममनोहर लोहिया के विचार भी लगभग ऐसे ही थे। कभी लोहिया ने कहा था, “मैं जानता हूँ कि इस देश का मानस गढ़ने में राम, कृष्ण और शिव की भूमिका रही है। देश के धार्मिक इतिहास में भारतीय पुराण के इन महान लोगों के अस्तित्व पर प्रश्न करना खुद में निरर्थक है। राम हिन्दुस्तान की उत्तर-दक्षिण की एकता के देवता थे।” 

दुर्भाग्य कि लोहियावादियों ने यह समझने की कोशिश कभी नहीं की और उनका प्रतिरोध राजनीतिक दल से बढ़ कर श्रीराम के अस्तित्व तक पहुँच गया। अयोध्या का अर्थ ही है, ‘जिसे युद्ध में हराया नहीं जा सके’ – सर्वोच्च न्यायालय के आदेश ने यह सिद्ध किया कि अयोध्या को पराजित नहीं किया जा सकता है। जो हिन्दुओं का है, वह हिन्दुओं के पास आना ही था और वह वापस आया।    

10 साल तक की सजा, ₹1 लाख तक का जुर्माना: शादी के लिए धर्मांतरण MP में वैध नहीं, नया कानून तैयार

मध्य प्रदेश में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की तैयारी चल रही थी, जिसकी रूपरेखा लगभग पूरी कर ली गई है। मध्य प्रदेश के नए ‘धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2020’ पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को चर्चा की। विवाह या किसी भी अन्य माध्यम से जबरन धर्मांतरण कराने पर राज्य में आरोपित को 10 वर्ष तक की जेल की सजा और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।

साथ ही अगर सिर्फ धर्मांतरण के उद्देश्य से ही विवाह किया जा रहा है, तो इसे वैध नहीं माना जाएगा। नए अधिनियम के मुताबिक, अगर किसी को भी धर्मांतरण करना है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 1 माह पूर्व ही सूचना देनी पड़ेगी। लोक संपर्क विभाग के अधिकारियों ने सीएम चौहान की बैठक में हिस्सा लिया। शादी या किसी भी अन्य माध्यम से, जबरन या प्रलोभन देकर – किसी को भी किसी दूसरे को इन तरीकों से धर्मांतरण कराने की अनुमति नहीं होगी।

भ्रमित कर के, प्रलोभन देकर, धमकी दे कर और शादी कर के – इन चारों माध्यमों से धर्मांतरण अवैध होगा और उस पर सज़ा मिलेगी। अगर किसी नाबालिग, महिला या SC/ST (दलित) समुदाय के लोगों का इन तरीकों से धर्मांतरण कराया जाता है तो आरोपित को अधिकतम सज़ा मिलेगी। साथ ही इन तरीकों से सामूहिक धर्मांतरण के बाद भी 10 साल कारावास की सज़ा दी जाएगी। आरोपित के माता-पिता या अन्य ‘ब्लड रिलेटिव्स’ मामला दर्ज करा सकते हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा:

“प्रस्तावित अधिनियम के अनुसार, स्वतंत्र इच्छा से धर्म परिवर्तन की दशा में धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले/वाली तथा धार्मिक पुजारी को, उस‍ जिले के जिला मजिस्ट्रेट को जहाँ धर्म परिवर्तन संपादित किया जाना हो, एक माह पूर्व घोषणा पत्र/सूचना पत्र देना बंधनकारी होगा। किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिनियम की धारा 03 का उल्लंघन करने पर 01 वर्ष से 05 वर्ष का कारावास व कम से कम 25 हजार रुपए का अर्थदण्ड होगा। नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रकरण में 02 से 10 वर्ष के कारावास तथा कम से कम 50 हजार रूपए अर्थदण्ड प्रस्तावित किया गया है।”

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के नए अधिनियम को लेकर दी जानकारी

साथ ही इन मामलों की जाँच सब-इंस्पेक्टर (उप पुलिस-निरीक्षक) या फिर उससे ऊपर के रैंक के पुलिस अधिकारी ही करेंगे। यह अपराध संज्ञेय, गैर जमानती और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होगा। अभियुक्त पर ये साबित करने का भार होगा कि धर्मांतरण नहीं किया गया है। अपना धर्म छुपाकर ऐसा प्रयास करने पर 03 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। 

इससे पहले  सीएम शिवराज ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ पर बड़ा बयान देते हुए कहा था कि सरकार सभी धर्मों और जातियों की है। सीएम ने कहा था, “हमारे राज्य में कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन अगर कोई हमारी बेटियों के साथ कुछ भी घृणित करने की कोशिश करेगा तो उन्हें मैं छोड़ूँगा नहीं। अगर कोई धार्मिक परिवर्तन करता है या ‘लव जिहाद’ जैसा कुछ करता है उन्हें भी सजा मिलेगी।”

‘कॉन्ग्रेस ने 2018 में जो किया… सब बर्बाद कर दिया, BJP के साथ रहता तो CM बना रहता’

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल सेक्युलर (JDS) के नेता एचडी कुमारस्वामी को कॉन्ग्रेस से हाथ मिलाने और उनके साथ गठबंधन सरकार बनाने का मलाल है। एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार (6 दिसंबर 2020) को कहा कि कॉन्ग्रेसी गठबंधन के कारण उनकी साख खत्म हो गई।

एचडी कुमारस्वामी ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा पर फूल बरसाए। उन्होंने कहा कि अगर वह BJP के साथ होते तो अभी तक मुख्यमंत्री बने रहते। लेकिन कॉन्ग्रेस से गठबंधन करके उन्होंने जो कुछ कमाया था, वो सब गँवा दिया।

मैसूर में पत्रकारों से बात करते हुए एचडी कुमारस्वामी ने कॉन्ग्रेसी नेता सिद्धारमैया पर साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह जाल में फँस गए थे। हालाँकि उन्होंने इस निर्णय का दोष पार्टी सुप्रीमो एचडी देवेगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री और अपने पिता) पर डाल दिया। कुमारस्वामी ने कहा कि एचडी देवेगौड़ा के कहने पर ही वह कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन सरकार बनाने के लिए तैयार हुए थे।

CM बन कर भी क्यों रोया?

2018 में CM बनने के एक महीने के अंदर ही एचडी कुमारस्वामी ने जनता के बीच आकर आँसू बहाए थे। इस वाकये को याद करते हुए बताया कि उन्हें एक महीने के अंदर ही पता चल गया था कि वो कहाँ फँस गए हैं।

एचडी कुमारस्वामी ने कहा, “मैंने 2006-07 में मुख्यमंत्री रहते हुए जनता का जो भरोसा हासिल किया, उसे आगे 12 साल तक भी बनाए रखा। लेकिन कॉन्ग्रेस गठबंधन के कारण सब खो दिया। सिद्धारमैया ने मेरी प्रतिष्ठा को नष्ट कर दिया। मैं जाल में फँसता चला गया।”

‘गलती से बन गया था मुख्यमंत्री’

अगस्त 2019 में एचडी कुमारस्वामी ने कहा था कि वो राजनीति से संन्यास लेना चाहते हैं। कुमारस्वामी ने कहा था, “मैं राजनीति से संन्यास लेने की सोच रहा हूँ। मैं गलती से राजनीति में आ गया था। मैं गलती से मुख्यमंत्री बन गया था। भगवान ने मुझे दो बार मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया।”

‘कॉन्ग्रेस के लिए गुलाम बना’

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस-जेडीएस के गठबंधन वाली सरकार गिरने के बाद एचडी कुमारस्वामी ने कई बातों का खुलासा करते हुए बताया था कि उन्होंने 14 महीने कॉन्ग्रेस के लिए गुलाम की तरह काम किया था। उनकी मानें तो उन्होंने सभी विधायकों और निगम अध्यक्षों को पूरी स्वतंत्रता दी थी, लेकिन फिर भी कॉन्ग्रेस सरकार गिरने का दोष उन्हें दे रही थी।

असम: टेरर फंडिंग के आरोपित AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल द्वारा संचालित ‘अजमल फाउंडेशन’ के खिलाफ FIR

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल द्वारा संचालित ‘अजमल फाउंडेशन’ के खिलाफ असम के दिसपुर पुलिस स्टेशन में शुक्रवार (4 दिसंबर, 2020) को मामला दर्ज किया गया है। गुवाहाटी के सीपी एम एस गुप्ता ने बताया कि यह मामला सत्य रंजन बोराह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद दायर किया गया था, जिसने एनजीओ पर विदेशी फंड प्राप्त करने और संदिग्ध गतिविधियों में इसका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

बता दें सत्य रंजन बोराह द्वारा दर्ज की गई यह शिकायत लीगल एक्टिविस्ट समूह, लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) की रिपोर्ट पर आधारित है।

बोराह ने एफआईआर में आरोप लगाया, “लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी एनजीओ की रिपोर्ट के मुताबिक एआईयूडीएफ के प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल द्वारा संचालित अजमल फाउंडेशन संगठन कुछ विदेशी एजेंसियों द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है जो विभिन्न आतंकवादी समूहों और उनकी आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण से संबंधित हैं। रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए हम गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत इस संबंध में उचित जाँच चाहते हैं। अजमल फाउंडेशन ने विदेशी फंड का कई राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में दुरुपयोग किया है।”

बोराह ने एआईयूडीएफ प्रमुख को गिरफ्तारी और राष्ट्रीय अखंडता, संप्रभुता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए उसे उचित सजा देने की माँग की है। बोराह ने सुझाव दिया कि एफआईआर में दी गई कुछ जानकारी आगे की जाँच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दी जा सकती है।

असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने भी संगठन के खिलाफ लगाया आरोप

असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मुद्दे पर पत्रकारों से कहा कि लोगों को हमेशा गलतफहमी थी कि अजमल ने अपनी मानवीय कार्य का खर्चा अपनी जेब से दिया है, जो वास्तविकता से बहुत दूर है।

सरमा ने केंद्र सरकार से इस मामले में गहन जाँच कराने की उम्मीद करते हुए कहा, “एक समय था जब उसे (अजमल) विदेशी एजेंसियों से 70-75 करोड़ रुपए मिले थे। इसके साथ इस संगठन ने एक अस्पताल चलाया और कुछ अन्य काम किए। एक स्थापित संस्थान, जिसने विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघन के कई मामलों का खुलासा किया है, ने दावा किया है कि अजमल को जो धनराशि प्राप्त हुई है, वह आतंकवाद से संबंधित है।”

गौरतलब है कि हमनें इस संगठन को लेकर पहले रिपोर्ट किया था कि AIUDF से जुड़े अजमल फाउंडेशन (Ajmal Foundation) पर विभिन्न संदिग्ध स्रोतों से 69.55 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग लेने का आरोप लगा है।

LRO ने मामले को लेकर कहा था कि एनजीओ को मिली फंडिंग में से वह 2.05 करोड़ रुपए खर्च ‘शिक्षा’ पर कर चुके हैं और बाकी का पैसा AIUDF को पहुँचाया जा चुका है, ताकि वह असम की राष्ट्रवादी पार्टियों को टक्कर दे सकें। LRO ने अपनी रिपोर्ट में तुर्की, फिलिस्तान और ब्रिटेन के इस्लामी आतंकी समूहों के नाम खुलासा किया, जो अजमल फाउंडेशन को फंडिंग दे रहे हैं।

इसके अलावा LRO ने इस पूरे मामले पर अपने पास इकट्ठा हुई सारी जानकारी गृह मंत्रालय को भेजी और आरोप लगाया है कि इन्हें मिलने वाली फंडिग FCRA के रूल्स का उल्लंघन करती है, इसलिए इनके लाइसेंस को रद्द किया जाना चाहिए।

इस बीच, बदरुद्दीन अजमल अजमल ने आरोपों का खंडन किया है। अजमल ने कहा, “भाजपा-आरएसएस एनजीओ द्वारा संगठन के खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और मुझे बदनाम करने की साजिश है। केंद्र सरकार फंड के लेन-देन पर नजर रखती है।”

AIUDF के प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने यह भी कहा, “100% झूठा आरोप है। मुझे मेरे अजमल फाउंडेशन और मेरी पार्टी को बदनाम करने की ये साजिश है। हेमंत बिस्व सरमा ने इसे असम में गढ़ा है। जैसे ही उन्हें BTAD चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस के साथ हमारे गठबंधन का पता चला उन्होंने इसे इंटरनेशनल टेरर बना दिया।”

‘गुपकार गैंग के पास जब सत्ता थी तो रिफ्यूज़ियों को वोट का अधिकार नहीं दिया, आज कहते हैं कोई तिरंगा नहीं उठाएगा’

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को गुपकार गैंग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने गुपकार गैंग पर जमकर निशाना साधा। स्मृति ईरानी ने कहा कि गुपकार गैंग के पास जब सत्ता थी तो उन्होंने कभी रिफ्यूज़ियों को वोट का अधिकार नहीं दिया लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने ये समझा कि जिन परिवारों ने हिंदुस्तान को चुना, पाकिस्तान का तिरस्कार किया उनको ये अधिकार मिलना चाहिए कि वो जाकर वोट करें।

स्मृति ईरानी ने कहा, “वो राजनीतिक दल तब इकट्ठा नहीं होते हैं जब जनता को जरूरत होती है। वो राजनीतिक दल इस चुनाव में आपके काम नहीं आई। हिमाकत तो इतनी उनकी कि उन्होंने ये ऐलान करने की गुस्ताखी कर दी कि तिरंगा कोई नहीं उठाएगा। अरे उनसे पूछो, जिन्होंने हिन्दुस्तान को तब गले लगाया जब भारत का विभाजन हुआ और हिन्दुस्तान की धरती को चुना और रिफ्यूजी बनकर यहाँ आए। उनसे पूछो कि तिरंगे की शान क्या है। उनसे पूछो कि तिरंगे की आन क्या है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय दलों के ‘गुपकार गठबंधन’ पर जबरदस्त हमला बोलते हुए पूछा था कि ये ‘गुपकार गठबंधन’ है या ‘गुप्तचर गठबंधन’? भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार (नवंबर 16, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जम्मू-कश्मीर के पर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ कॉन्ग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ये ‘गुप्तचर गठबंधन’ वही चाहता है, जो पाकिस्तान की इच्छा होती है।

उन्होंने गुपकार गठबंधन के साथ हाथ मिलाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतों के साथ हाथ मिला कर कॉन्ग्रेस ने अपना असली रंग दिखा दिया है।

वहीं अमित शाह ने इसे गैंग बताते हुए कहा था कि जनता इस ‘अपवित्र गठबंधन’ को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो देश के हितों के खिलाफ काम करने में लगा हुआ है। अमित शाह ने ट्विटर पर 3 ट्वीट्स कर के इस गठबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि या तो ‘गुपकार गैंग’ देश के मूड के हिसाब से चले, या फिर जनता इसकी नैया डुबो देगी। 

उन्होंने कॉन्ग्रेस और गुपकार गठबंधन पर आरोप लगाया कि वो जम्मू कश्मीर को उस काल में वापस लेकर जाना चाहते हैं, जब वहाँ सिर्फ आतंक और उथल-पुथल का साम्राज्य हुआ करता था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त कर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को अधिकार दिए हैं, उन्हें ये वापस छीनना चाहते हैं।

मुख्तार के करीबी जफर अब्बास व सादिक हुसैन जमीन के धाँधली के आरोप में यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के साथ-साथ अब उनके करीबियों पर भी सरकार शिकंजा कस रही है। गाजीपुर में पुलिस ने गजल होटल की जमीन को मुख्तार अंसारी की पत्नी व दोनों पुत्रों के नाम से दर्ज कराने के मामले में शनिवार (5 दिसंबर, 2020) को आईएस-191 गैंग के दो सहयोगियों जफर अब्बास व सैय्यद सादिक हुसैन को धर-दबोचा है।

पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्तार के दोनों करीबी गजल होटल की जमीन की रजिस्ट्री में तथ्यों को छुपा कर मुख्तार अंसारी की पत्नी आफशा अंसारी और उसके बेटों अब्बास व उमर अंसारी के नाम दर्ज कराने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस मामले में पुलिस टीम ने दो महीने पहले दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

जमीन की रजिस्ट्री में धांधली का मामला उजागर होने के बाद गजल होटल के बड़े हिस्से को डीएम की अध्यक्षता वाली बोर्ड के फैसले के बाद गिरा दिया गया था। पुलिस काफी से समय से दोनों आरोपितों की धर पकड़ में जुटी थी।

पुलिस टीम ने आरोपितों के घर पर दबिश देते हुए खुदाईपुरा नखास निवासी जफर अब्बास व सैय्यद सादिक हुसैन को गिरफ्तार किया। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि दोनों आरोपितों की लंबे समय से तलाश थी। इन्हें गिरफ्तार कर चालान कर दिया गया है। बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।

संजय राउत को डॉक्टरों ने दी कम बोलने की सलाह, कंगना रनौत को कहा था- ‘हरामखोर’

फायरब्रांड राजनेता और शिवसेना से राज्यसभा सदस्य संजय राउत को उनके डॉक्टरों ने अगले कुछ दिनों तक कम बोलने की सख्त सलाह दी है। लीलावती अस्पताल में एंजियोप्लास्टी सर्जरी के बाद राउत को डॉक्टरों ने सलाह दिया है।

राउत को अस्पताल से शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को छुट्टी मिली। जिसके बाद पत्रकारों ने उनसे उनकी सर्जरी के बारे में पूछताछ की। राउत ने उनके सवालों के जवाब देते हुए कहा, “डॉक्टरों ने मुझे कम बात करने और तनाव मुक्त जीवन जीने के लिए कहा है। मैं डॉक्टरों की बातों का पालन करूँगा और आशा करता हूँ कि मुझे फिर से अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा।”

राउत ने यह भी कहा कि उनकी आखिरी सर्जरी के दौरान कुछ चीजें रह गई थी, जिसकी वजह से उन्हें फिर से सर्जरी करवानी पड़ी। हालाँकि, कोरोना वायरस की वजह से उन्होंने काफी समय से अपना इलाज नहीं करवाया था।

बता दें कि डॉक्टरों ने राउत को खाने-पीने में संयम बरतने की सलाह के अलावा फूड डाइट प्लान भी दिया है, जिसका उन्हें कठोरता से पालन करना है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार से दोबारा सामना में संपादन शुरू करेंगे।

राउत की गुरुवार (दिसंबर 4, 2020) को एंजियोप्लास्टी सर्जरी हुई थी। बता दें यह सर्जरी आर्टरी के माध्यम से रक्त के प्रवाह को बहाल करने के लिए की जाती है। पिछले साल भी इसी तरह की उनकी एंजियोप्लास्टी सर्जरी हुई थी। हालाँकि, सर्जरी के बाद भी उनकी समस्या बनी रही। जिसके चलते राउत कुछ दिनों पहले अस्पताल में भर्ती हुए थे।

गौरतलब है कि हाल ही में जब कंगना रनौत ने मुंबई की तुलना पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) से कर दी गई थी तब राउत ने इसके खिलाफ काफी बड़ा मोर्चा खोल दिया था। इतना ही नहीं इस मामले पर उन्होंने शब्दों की मर्यादा को तार-तार करते हुए एक महिला को हरामखोर तक कह दिया था।

कर्नाटक के हसन जिले में गोहत्या करने वाले बूचड़खानों का खुलासा करने वाली महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ ने किया हमला

कर्नाटक में हसन जिले के पेंशन मोहल्ले में अवैध रूप से गोहत्या करने वालें गिरोह का पर्दाफाश करने वाली एक महिला पत्रकार पर एक हिसंक भीड़ से हमला कर दिया। भीड़ में मौजूद बुर्का पहनी महिलाओं ने पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया, साथ ही उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई।

विजया टाइम्स की प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार विजयलक्ष्मी शिबरूर को शहर में अवैध रूप से गौ हत्या करने वाले माफियाओं के बारे में जानकारी मिली थी। जिसकी पड़ताल के लिए वे और उनकी टीम हसन जिले के उस इलाके में रिपोर्टिंग करने पहुँचे। इन्वेस्टिगेशन के दौरान महिला पत्रकार ने बताया कि जिले में गोहत्या पर प्रतिबंध के बावजूद शहर के ये अवैध बूचड़खाने किस तरह से संचालित होते हैं।

महिला पत्रकार ने एनजीओ और पुलिस अधिकारियों के साथ शहर में चार अवैध बूचड़खानों और पाँच मवेशी होर्डिंग स्थानों का दौरा किया। वहीं जैसे ही उन्होंने मवेशियों को बचाने के लिए इन अवैध बूचड़खानों में से एक में प्रवेश करने की कोशिश की उसी दौरान एक गुस्साई भीड़ (जिसमें बुर्क़ा पहने महिलाएँ शामिल थीं) ने पत्रकार को चारों ओर से घेरते हुए उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोक दिया।

भीड़ ने न केवल पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया बल्कि उसके साथ छेड़छाड़ की, साथ ही वहाँ से नहीं निकलने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।

यहाँ मौजूद फुटेज में आप देख सकते है कि किस तरह गुस्साई भीड़ द्वारा महिला पत्रकार पर हमला करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद बुर्का पहनी महिलाओं ने पत्रकार पर हमला किया। वहीं पूरी घटना के दौरान असहाय पुलिस अधिकारी मूकदर्शक बने रहे।

वहीं उस स्थान से नहीं जाने पर भीड़ ने पत्रकार को जान से मारने की धमकी भी दी। घटनाक्रम के दौरान अवैध मवेशी तस्कर ने अन्य मवेशियों को छिपा दिया, जिस वजह से एनजीओ केवल कुछ जानवरों को बचाने में कामयाब रहे।

कथित तौर पर हसन बाबू और रहमान द्वारा इलाके में चार अवैध बूचड़खाने संचालित किया जा रहा था। जिन्होंने लगभग 100 मवेशियों को बंधक बनाया हुआ था।

वहीं घटना के बाद एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में इस मामले को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

नए कृषि कानून से खुश एमपी और राजस्थान के किसान, कहा- प्रदर्शनकारियों को बरगला और उकसा रहे विपक्षी नेता

एक तरफ जहाँ पंजाब और हरियाणा के किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, वहीं TV9 भारतवर्ष पर प्रसारित एक रिपोर्ट मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों को सितंबर 2020 में केंद्र द्वारा पारित किए गए नए कृषि कानूनों से लाभ हुआ है।

मध्य प्रदेश के कृषि कानूनों के लाभार्थियों में से एक ने कहा कि उन्होंने अपनी कृषि उपज 2500 / – प्रति क्विंटल बेची है, जबकि फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1800 रुपए प्रति क्विंटल के करीब था। किसान ने प्रीमियम प्राप्त करने के अलावा यह भी कहा कि नए कानून ने उनके समय की बचत की है और अनाज को इकट्ठा करने के लिए व्यापार उनके खेतों में ही आ गया है जिसने परिवहन लागत को शून्य तक पहुँचा दिया है।

मध्यप्रदेश के एक अन्य किसानों की भी ऐसी ही कहानी है। जिन्होंने कहा कि पहले मंडियों में व्यापार कुछ प्रभावशाली व्यापारियों तक सीमित था, जो कृषि उपज की कीमत तय करते थे। तीन कानूनों के पारित होने के साथ किसान सीधे अपने पसंदीदा मूल्य पर व्यापारियों को अपनी उपज बेच सकते हैं।

एक किसान ने कहा, “पहले मंडियों में 10 किलोग्राम अनाज केवल नमूना लेने के उद्देश्य से भेजा जाता था। अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों में समय भी बहुत लगता है। हमें परिवहन और लोडिंग / अनलोडिंग शुल्क अलग से वहन करना पड़ता था। हमें अक्सर अपनी कृषि उपज के कभी-कभी महीनों तक राशि प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ता था। कानूनों के पारित होने के बाद व्यवसाय हमारे खेत में ही आने लगा है और हमें अपनी उपज के लिए डायरेक्ट भुगतान कर दिया जाता हैं। न केवल हमें एमएसपी पर प्रीमियम मिलता है बल्कि हमारी परिवहन लागत और समय भी बचता है।”

एमपी ही नहीं राजस्थान के किसान भी पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली के आसपास हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं हुए हैं। TV9 Bharatvarsh की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के एक किसान ने नए कृषि कानूनों को लाने के लिए पीएम मोदी को बहुत धन्यवाद दिया, जिन्होंने किसानों पर प्रतिबंध हटा दिया और उन्हें अपने उत्पाद को अपने ग्राहकों की पसंद और उनकी पसंदीदा दरों पर बेचने में सक्षम बनाया।

गौरतलब है कि पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में किसानों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेताओं द्वारा नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शनकारियों को मूर्ख बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा परेशान की गई आशंकाओं के विपरीत, नए कृषि कानून किसानों के हित में हैं।

चैनल को इंटरव्यू दे रहे एक किसान ने कहा, “हम कृषि बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं क्योंकि वे हमारे कल्याण के लिए हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को उसके लाभ और किसानों के लिए नए अवसरों के बारे में पता नहीं है। विपक्षी नेताओं द्वारा केंद्र के खिलाफ आंदोलन शुरू करने के लिए उन्हें बरगलाया और उकसाया गया है।”

योगी सरकार ने शुरू किया मिशन रोजगार: 50 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य, दिशा-निर्देश जारी

युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है। राज्य सरकार ने आज से प्रदेश में मिशन रोजगार शुरू किया है। अभियान के तहत सरकार ने 50 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया है। रोजगार के लिए प्रदेश के इतिहास में यह इकलौता और सबसे बड़ा अभियान है।

प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार पूरे प्रदेश में 5 दिसंबर से मिशन रोजगार अभियान की शुरूआत किया। अभियान के तहत प्रदेश में स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण और अप्रेन्टिसशिप के जरिए युवाओं को रोजगार मुहैया कराया जाएगा। मिशन रोजगार के तहत राज्य सरकार की योजना इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 50 लाख युवाओं को रोजगार देने की है।

मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने इसके लिए राजस्व परिषद, कृषि उत्पादन आयुक्त, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, समस्त विभागाध्यक्ष, मण्डलायुक्त और जिलाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

अभियान की जानकारी देते हुए मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने बताया कि इस मिशन रोजगार के अन्तर्गत प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों, संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, निगमों, परिषदों, बोर्डों और प्रदेश सरकार के विभिन्न स्थानीय निकायों, विकास प्राधिकरण और औद्योगिक विकास प्राधिकरण शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार के सृजन के साथ ही कौशल प्रशिक्षण और अप्रेन्टिसशिप, भूमि आवंटन, विभिन्न प्रकार के लाइसेन्स और अनुमतियों के माध्यम से अधिक से अधिक रोजगार, स्वरोजगार के अवसरों का सृजन किए जाने का अभियान चलाया जाएगा।

हर कार्यालय में होगी हेल्प डेस्क

इस अभियान को सफल बनाने के लिए हर विभाग, संगठन, प्राधिकरण के कार्यालयों में हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। इस हेल्प डेस्क पर उस विभाग से संबंधित रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रम की जानकारी दी जाएगी। अभियान के अंतर्गत मिलने वाले रोजगार का डाटा बेस तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक ऐप और पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। प्रशासकीय विभागों के अन्तर्गत सभी निदेशालय, निगम, बोर्ड, आयोग आदि अपने विभाग के लिए एक नोडल अधिकारी नामित करेंगे।

मिशन रोजगार के सम्पूर्ण कार्यक्रम अभियान का संचालन औद्योगिक विकास आयुक्त द्वारा किया जाएगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति हर महीने अभियान की मॉनिटरिंग करेगी। वहीं, हर जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति होगी जो रोजगार, स्व रोजगार के लिए जनपद स्तर पर कार्ययोजना बनाएगी। प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय द्वारा निजी उद्योगों के साथ मिलकर रोजगार मेलों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही पहले से रूकी भर्ती के प्रकरणों का निस्तारण भी कराया जाएगा।

कौशल विकास के इन प्रयासों से मिल रहा स्वरोजगार को बढ़ावा

योगी सरकार युवाओं को वैश्विक स्तर से लेकर जिला स्तर तक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण दिला रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफार्म कोर्सेरा, यूएसए के जरिए प्रदेश के 50 हजार युवाओं को अन्तरराष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम नि:शुल्क कराया जा रहा है।