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असम-मिजोरम सीमा विवाद: हिंसा में 15 दुकानें फूँकी, 40 घायल, गृह मंत्रालय ने बुलाई बैठक

असम-मिजोरम सीमा विवाद ने एक बार फिर से हिंसक रूप ले लिया है। दोनों राज्यों की सीमा पर हुए संघर्ष में न सिर्फ कई घरों और दुकानों को आग लगा दी गई, बल्कि 8 लोग भी घायल हो गए। ये घटना शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को वैरेंगते-लैलापुर में हुई, जो मिजोरम के कोलासिब और असम के कछार सीमा पर स्थित है। कछार पुलिस ने बताया कि 1 व्यक्ति घायल हुआ है जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि असम के 40 लोग घायल हुए हैं।

असम स्थित कछार के एसपी बीएल मीणा ने इस सीमा विवाद और हिंसा को लेकर ‘एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस’ से कहा कि मिजोरम के असामाजिक तत्व बिना किसी कारण के समस्याएँ पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिजोरम के बदमाशों ने असम में घुसकर 3 घरों व दुकानों में आग लगा दी। उन्होंने बताया कि एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति का अस्पताल में इलाज चल रहा है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कोलासिब प्रशासन ने कहा है कि मिजोरम के 7 नागरिक घायल हुए।

कोलासिब के मजिस्ट्रेट डॉक्टर एच लालठालंगीलाना ने दावा किया कि असम के कुछ लोगों ने मिजोरम के सुरक्षा अधिकारियों पर हमला बोल दिया, इसीलिए ये मामला शुरू हुआ। मिजोरम सरकार का कहना है कि तनाव कम करने के लिए असम सरकार से उसकी वार्ता जारी है। उसने दावा किया कि असम सरकार ने क़ानून के विपरीत हरकत की है और केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसकी सूचना दे दी गई है।

सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक भी की। विवादित स्थल पर दोनों राज्यों के जवान तैनात हैं। पिछले कुछ दिनों में तीसरी जगह ये घटना हुई। मिजोरम जाने वाले सामानों से लदे 100 ट्रक इस विवाद के कारण सीमा पर ही खड़े हैं। उधर त्रिपुरा के साथ भी मिजोरम का सीमा विवाद चल रहा है। त्रिपुरा ने आरोप लगाया है कि मिजोरम स्थित ममित के डीएम ने उसके क्षेत्र में धारा-144 लगादी।

त्रिपुरा का कहना है कि उसके उत्तरी हिस्से में मिजोरम के अधिकारी अपना शासन चलाने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रू जनजाति के लोग फुलडुंगसेई में एक शिव मंदिर का पुनर्निर्माण करना चाहते हैं लेकिन मिजोरम के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। जहाँ ब्रू जनजाति हिन्दू हैं, वहीं वहाँ के मिजो जनजाति सामान्यतः ईसाई मजहब का अनुसरण करते हैं। दक्षिणी असम रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक दिलीप कुमार डे का कहना है कि कछार और करीमगंज में मिजोरम पुलिस असम में घुस गई।

आरोप है कि लायलपुर में मिजोरम वाले 1.5 किलोमीटर भीतर घुस कर एक चेक-गेट बनाने की कोशिश कर रहे थे। वहीं करीमगंज में भी मिजोरम वालों पर अपनी सीमा से 2.5 किलोमीटर आगे बढ़ने का आरोप है। फूलडुंगसेई, ज़म्पुई और ज़ोमुअंटलांग जैसे गाँवों में बड़े समारोहों को प्रतिबंधित कर दिया गया है क्योंकि इस क्षेत्र में मंदिर पुनर्निर्माण को लेकर विवाद है। सांप्रदायिक हिंसा की आशंका भी जताई गई है।

‘ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस’ की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने एक वीडियो शेयर कर के दावा किया कि मिजोरम पुलिस बड़ी संख्या में असम की सीमा पर जुटी हुई है। उन्होंने इसके लिए ‘नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायन्स’ पर निशाना साधते हुए पूछा कि ये कैसा गठबंधन है, जहाँ एक ही गठबंधन की दो पार्टियाँ निर्दोष लोगों की कीमत पर ‘युद्ध’ कर रही है? उन्होंने कहा कि सीमा पर इस स्थिति का अनुमान लगाइए।

इस हिंसा के लिए सोशल मीडिया पर फैले संदेशों को भी जिम्मेदार बताया गया है। वहीं एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मिजोरम के युवकों ने लैलापुर में घुसकर ट्रक ड्राइवरों को मारा और 15 दुकानें फूँक दी। इस हिंसा के पीछे बांग्लादेशियों को भी कारण बताया जा रहा है। मिजोरम के साथ सीमा विवाद पर असम के फॉरेस्ट मंत्री परिमल शुक्लावैद्य ने कहा कि हर साल ऐसी घटनाएँ होती हैं क्योंकि दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे के क्षेत्र में घुस कर पेड़ काटते हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने ट्विटर पर भी एक-दूसरे से संवाद कर गर्मजोशी दिखाई और विवाद ख़त्म करने की बात की।

ज्ञात हो कि त्रिपुरा के कंचनपुर के उप-मंडल मजिस्ट्रेट चांदनी चंद्रन ने 17 अगस्त को उत्तर त्रिपुरा के डीएम को पत्र में लिखा था, “…पारंपरिक फुलडुंगसेई वीसी को त्रिपुरा के हिस्से के रूप में स्वीकार किया गया है। इसलिए, वीसी और इसके निवासियों को मिजोरम में मतदाता सूची में शामिल करना समस्या पैदा कर सकता है। मिजोरम और त्रिपुरा के बीच सटीक सीमा का सीमांकन करने की तत्काल आवश्यकता है, जिसमें त्रिपुरा में ही पूरा फुलदुंगसी वीसी शामिल हो।”

मीट की दुकान का विरोध करने पर पार्षद नफीस ने हिन्दू जागरण मंच के कार्यकर्ता पर किया चाकुओं से हमला

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के एक कार्यकर्ता पर तीन लोगों ने चाकू से हमला बोल दिया। ये घटना शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) की रात ककोड़ क्षेत्र में तब हुई, जब हिंदूवादी कार्यकर्ता राहुल बाजार से अपने घर लौट रहे थे। हमला करने वाला नफीस शहर का पार्षद भी है। प्रशासन ने तनाव रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। परिवार ने नफीस और उसके दो अज्ञात साथियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई।

पुलिस ने नफीस को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं उसके दोनों साथी फरार हैं। बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 36 वर्षीय राहुल पर रात के 8:30 से 9 बजे के बीच हमला किया गया। उसकी आटा चक्की और गैस के उपकरणों की दुकान है। उन्होंने बताया कि वार्ड पार्षद नफीस ने आपसी विवाद में चाकूबाजी की इस घटना को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि ये घटना आपसी विवाद में हुई।

पीड़ित को नोएडा स्थित एक अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है, जहाँ उसकी हालत स्थिर बताई गई है। पुलिस ने बताया है कि वार्ड संख्या 8 में एक प्राइवेट बैंक के नजदीक दोनों के बीच किसी बात पर कहा-सुनी हुई और इसके बाद राहुल पर हमला कर दिया गया। बुलंदशहर में ‘हिन्दू जागरण मंच’ का कार्यकर्ता राहुल हमले के बाद जमीन पर बेहोश होकर गिर गया। इस हमले के बाद संगठन से जुड़े व्यापारियों ने पुलिस थाने का घेराव कर कार्रवाई की माँग की।

एसपी अतुल श्रीवास्तव ने घटनास्थल पर जाकर मामले का जायजा लिया। ‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, नफीस के एक करीबी की मीट की दुकान है, जिसका राहुल ने विरोध किया था। इसे लेकर दोनों के बीच पहले से ही रंजिश चल रही थी। रविवार की सुबह ‘हिन्दू जागरण मंच’ के कार्यकर्ता एक मंदिर में इकट्ठे हुए और इसके बाद विरोध प्रदर्शन किया। कस्बे में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई है।

मैथिली ठाकुर के गाने से समस्या तो होनी ही थी.. बिहार का नाम हो, ये हमसे कैसे बर्दाश्त होगा?

मैथिली ठाकुर- लड़की है! उम्र में छोटी है! और तो और, गिरोहों की सदस्यता भी नहीं ले रखी है! ऐसे कैसे अपना राजनैतिक मत प्रकट कर सकती है? अरे कम से कम सुगर फ्री पीढ़ियों से सर्टिफिकेट तो लिया होता! मैथिली ठाकुर के गाने पर विवाद तो होना ही था। आश्चर्य की बात यह है कि यही विवाद तब नहीं छिड़ा था जब जनकवियों के लिखे गीतों को यूट्यूब पर रिलीज करने पर लोग उसके खिलाफ बोल पड़े थे। तब इन्हीं सूरमाओं को याद नहीं आई थी कि लोकगीतों को, कविताओं को कोई अपनी बपौती नहीं बता सकता। लेकिन फिर सही भी है, याद आती भी कैसे?

थोड़े ही दिन पहले जब मगध के मुख्यमंत्री की सरकार के लिए काम करने वालों ने स्थानीय उत्पादों के लिए जीआई टैग देने का काम शुरू किया तो भी ऐसा ही देखने को मिला था। मगही पान को तो मगही पत्ता के नाम से मान्यता दी गई लेकिन मिथिलांचल के मखाना की बात आते ही बात बदल गई। पुर्णिया जिले के “मिथिलांचल मखाना उत्पादक संघ” (एमएमयूएस) ने बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के माध्यम से ये आवेदन दिया था। सभी को ये ज्ञात है कि मखाना केवल मिथिलांचल में उपजाया जाता है, ये पूरे बिहार में नहीं उपजता। इसके अलावा भी कहावतों में मिथिलांचल की पहचान “पान, पाग और मखान” बताई जाती है।

इसका नाम मिथिलांचल के बदले बिहार क्यों रखा जा रहा था, इस पर इन तथाकथित प्रगतिशील गिरोहों ने कोई आवाज नहीं उठाई थी। मिथिलांचल के क्षेत्र से भारत के कुल उत्पादन का 75 प्रतिशत मखाना उपजता है। इसका नाम मिथिलांचल से छीनकर किसी और को देने के खिलाफ दरभंगा के पूर्व सांसद कीर्ति आजाद ने भी आवाज उठाई थी। तकनिकी कारणों से मसला अटका और मिथिलांचल की संपत्ति कोई और लूट नहीं पाया। यहाँ सवाल ये भी है कि जब बिहार की ब्रांडिंग लिट्टी-चोखा के नाम पर होती है, तो भला मखाना जो मिथिलांचल में होता है, उसे भुलाया क्यों जाता है?

आखिर ऐसी चीज़ों के बारे में ही तो कोई छोटी सी लड़की याद दिलाने निकली थी! सामंतवादी पुरुषों को लड़की का बोलना भला कैसे बर्दाश्त होता? अगर बिहार की चीज़ों को पहचान मिलने लगे, मिथिलांचल का मखाना या गया का तिलकुट, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाने लगे, ये उनसे बर्दाश्त कैसे होगा?

उनकी स्थिति तो सड़क के किनारे के उन भिखारियों वाली है जो बच्चों को अफीम चटा कर इसलिए बेहोश रखते हैं ताकि उन्हें दयनीय दिखाकर ज्यादा भीख ली जा सके। अगर कोई बिहारी, राज्य के सम्मान की बात करने लगे, गर्व से अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता का प्रदर्शन करने लगे तो उन्हें दिक्कत होनी ही थी। इससे उन्हें मिलने वाले फंड जो कम हो जाएँगे! फिर कभी बाढ़ कभी बीमारी के नाम पर चंदा आना बंद हो गया तो?

मुगालते और मुंगेरीलाल के हसीन सपनों की दुनिया में जीने के आदि इन लोगों की सबसे बड़ी समस्या है रीढ़ की हड्डी की कमी। बिहार का नाम खराब करने में अकेले लालू यादव का योगदान नहीं है। लालू यादव के चारा घोटाले में पकड़े जाने, जेल जाने पर बात ख़त्म हो जाती। उसे कला-साहित्य के माध्यम से आम बिहारी की पहचान बनाने में तथाकथित बुद्धिपिशाचों ने प्रबल योगदान दिया।

बरसों तक फिल्मों का खलनायक और भ्रष्टाचारी नेता एक ख़ास किस्म की लालू यादव वाली बिहारी भाषा बोलता दिखाया गया। सिवाय मायानगरी की फिल्मों के ये भाषा बिहार में कहीं नहीं बोली जाती। लेकिन ऐसी पहचान बनाने में बिहारियों का चंदे पर पलने योग्य, गरीब, कुचला हुआ, हाशिये पर धकेला गया दिखाने में उन्हें सुविधा होती थी।

लोकतंत्र का मतलब जनप्रतिनिधियों का सरकार चलाना होता है, ये साधारण सी बात बुद्धि-पिशाचों का गिरोह भूल जाता है। अपने प्रतिनिधि चुनते समय मुद्दों पर चर्चा भी होगी, और अपने मुद्दे पर चर्चा करना हरेक व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता है। ये बात कुछ लोगों को हजम नहीं होती। लाइसेंस-परमिट राज के दौर में खाए-पिए-अघाए ये लोग चाहते हैं कि उनसे “सर्टिफिकेट” लिए बिना ना तो कोई समर्थन करे ना विरोध! भला उनकी आज्ञा के बिना बोले ही क्यों? यहाँ तो एक छोटी सी लड़की बोल पड़ी थी और उनकी हालत नंगे राजा वाली हो गई थी जिस पर कोई बच्चा हँस पड़ा हो।

जब विकास की बात होती है तो केवल कमियाँ ही नहीं देखी जातीं। प्रबंधन (मैनेजमेंट) की सफलतम तकनीकों में से एक स्वोट एनालिसिस में कमजोरियों और आसन्न आपदाओं के साथ साथ अच्छाइयों और संभावित मौकों की तलाश भी की जाती है। निराशावादी लोग जो अपने निजी स्वार्थ के लिए एक बच्ची के विरोध में उतर आए हैं, उन्हें भी सोचना चाहिए कि उनका स्तर कितना गिर गया है कि विरोध के लिए वो अपनी बराबरी के लोग भी नहीं चुन पा रहे। शायद वहाँ तर्कों में बुरी तरह पछाड़े जाने का डर होगा? बाकी बिहार में जो अच्छा है, उसे भी सामने लाने के लिए लोककलाकार को जो सम्मान मिलना चाहिए, उसके लिए तो मैथिली ठाकुर की बड़ाई होनी चाहिए, और होगी ही!

‘हम सब आइटम हैं.. इसमें कुछ आपत्तिजनक नहीं’: इमरती देवी के अपमान पर कमलनाथ की ओर से स्पष्टीकरण

भाजपा नेता इमरती देवी को आइटम बोलने के बाद कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कार्यालय से इस पर हास्यास्पद स्पष्टीकरण आया है। इसमें कहा गया है कि आइटम शब्द में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। हर कोई ‘आइटम’ ही होता है।

वरिष्ठ पत्रकार पल्लवी घोष के अनुसार, कमलनाथ के ऑफिस से जारी बयान में कहा गया, “हम सब आइटम हैं। इसमें कुछ आपत्तिजनक नहीं है। हम आइटम नंबर की तरह चिह्नित किए जाते हैं। बेरोजगारी जैसे मुख्य मुद्दे से भटकाने के लिए शब्दों को गलत तरह से पेश किया।”

गौरतलब है कि रविवार (अक्टूबर 18, 2020) को कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भारतीय जनता पार्टी की महिला प्रत्याशी इमरती देवी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘आइटम’ कहा था। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आमसभा को संबोधित करते हुए भाजपा प्रत्याशी एवं कैबिनेट मंत्री इमरती देवी के बारे में कहा था:

“आप तो उसे मुझसे ज्यादा पहचानते हैं, आपको मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ये क्या आइटम है।” (इतना कहने के बाद श्री कमलनाथ ने जनता की तरफ देखा, खिलखिला कर हँसे, फिर दोहराया ये क्या आइटम है, और मुस्कुराए, उनके समर्थकों ने तालियाँ बजाई और ठहाके लगाए।)

बता दें कि मध्य प्रदेश के डबरा में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र राजेश के लिए प्रचार करने पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंच से भाषण देते वक्त कहा था,

“सुरेंद्र राजेश हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे-साधे हैं। यह उसके जैसे नहीं है, क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूँ आप तो उसको मुझसे ज्यादा अच्छे से जानते हैं, आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, यह क्या आइटम है।”

ज्ञात हो कि इमरती देवी, उन पूर्व विधायकों में से एक हैं जिन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। इमरती देवी को ज्योतिरादित्य सिंधिया का कट्टर समर्थक माना जाता है। ऐसे में उन पर आई टिप्पणी को सुन सिंधिया ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा:

“एक गरीब और मजदूर परिवार से आगे आईं दलित नेता इमरती देवी जी को आज डबरा में आइटम और जलेबी कहना अत्यंत निंदनीय और आपत्तिजनक है। ये कमलनाथ जी की मानसिकता को भी दर्शाता है। महिलाओं के साथ ही समूचे दलित समाज का अपमान करने वाले ऐसे मगरूर नेता को सबक सिखाने का समय आ गया है।”

मरियम नवाज के कमरे का दरवाजा तोड़ शौहर को होटल से उठा ले गई पाक पुलिस, सरकार विरोधी प्रदर्शन के बाद हुई कार्रवाई

पाकिस्तान में सरकार विरोधी आंदोलन तेज हो गया है और इसके साथ ही विपक्षी नेताओं के खिलाफ सरकारी मशीनरी का उपयोग शुरू हो गया है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी है कि वो कराची के एक होटल में रुकी हुई थीं। पुलिस ने उनके कमरे का दरवाजा तोड़ डाला और उनके पति कैप्टेन सफ़दर अवान को गिरफ्तार कर के ले गई।

पुलिस ने किस तरह से दरवाजे का लॉक तोड़ा, इसे दिखाने के लिए मरियम नवाज शरीफ ने वीडियो भी शेयर किया। पुलिस के जाने के बाद उन्होंने दरवाजे के टूटे हुए लॉक को जमीन पर गिरा दिखाया। अंतरराष्ट्रीय लेखक तारिक फतह ने भी मरियम को ‘डायनामिक विपक्षी नेता’ बताते हुए पाकिस्तान पुलिस की इस हरकत की निंदा की। मरियम शरीफ और उनके पति लगातार इमरान खान के खिलाफ माहौल बनाने में लगे हुए हैं।

कराची में रविवार (अक्टूबर 19, 2020) को हुई रैली में मरियम ने जनता के सामने शपथ ली थी कि वो न सिर्फ अपने पिता नवाज शरीफ को सत्ता में वापस लाएँगी, बल्कि प्रधानमंत्री इमरान खान को भी सलाखों के पीछे पहुँचाएँगी। उन्होंने इस दौरान कोरोना से निपटने के प्रयासों के लिए प्रांतीय सरकार की सराहना की, जबकि पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने इसी मुद्दे पर उसे लताड़ लगाई थी। उन्होंने कहा कि एक ही रैली से इमरान खान घबरा गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि महामारी के इस काल में इमरान खान से लोगो से सस्ती दवाएँ छीन लीं। मरियम की रैली में कई दलों के विपक्षी नेता शामिल हुए। इस दौरान पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी और जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के मुखिया मौलाना फजलुर रहमान भी मौजूद थे। उन्होंने ही इस्लामाबाद में एक बार रैली कर के इमरान खान सरकार की नींद उड़ाई थी। नवाज शरीफ ने इमरान खान की तरफ इशारा करते हुए कहा,

“आपका डर आपके शब्दों और आपके क्रियाकलापों से साफ़ झलक रहा है। अब लोग यही डर आपके चेहरे पर देखना चाहते हैं। हाल ही में हुई रैली में आपने खाली कुर्सियों को सम्बोधित किया था। आप लोकतंत्र की कब्र खोद रहे हो। नवाज शरीफ तो आपका नाम भी नहीं लेते। वो अब भी नहीं लेंगे, क्योंकि बड़ो के बीच की लड़ाई में बच्चे का क्या काम? जाँच, राजस्व और सुरक्षा से सम्बंधित एजेंसियों को अपने अपने नियंत्रण में ले लिया है। आप आइए और जनता को बताइए, आपने उनका रोजगार क्यों छीना?”

कराची में हुए इस शक्ति-प्रदर्शन में मरियम नवाज शरीफ ने इमरान खान से कहा कि वो अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए फ़ौज का इस्तेमाल करना बंद करें। उन्होंने पाक पीएम को डरपोक बताते हुए उन पर फ़ौज के अपमान का आरोप लगाया। कराची में हुई इस रैली में 11 विपक्षी पार्टियों के नेता शामिल थे। ये कार्यक्रम 5 घंटों तक चला। इसके बाद मरियम नवाज शरीफ के शौहर को गिरफ्तार करने की खबर आई।

महाराष्ट्र: पुलिस ने 5 नक्सली आतंकी किए ढेर, इसी जगह हुए हमले में 15 जवानों ने गँवाई थी जान

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली (Gadchiroli) में पुलिस और नक्सलियों के बीच रविवार को हुई मुठभेड़ में पुलिस ने 5 नक्सली आतंकी मार गिराए। मरने वालों में 3 महिलाएँ भी शामिल हैं। एनकाउंटर के बाद अब पुलिस द्वारा इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

पुलिस का इस मुठभेड़ को लेकर कहना है कि रविवार (अक्टूबर 18, 2020) को पुलिस अधीक्षक अंकित गोयल के नेतृत्व में सी-60 के जवान धानोरा जंगल में एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान के तहत सर्च ऑपरेशन पर निकले थे। 

इसी सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने भी बचाव में जवाबी कार्रवाई की और 3 महिलाओं समेत 5 नक्सलियों को मार गिराया। इसके बाद  नक्सलियों के अन्य साथी वहाँ से भाग गए। पुलिस ने फायरिंग बंद होने के बाद पाँचों शव बरामद किए।

बता दें कि पूरी घटना धानोरा तहसील के ग्यारापत्ती जंगल में हुई। इस मुठभेड़ में पुलिस को बडी संख्या में नक्सली सामग्री बरामद हुई। हालाँकि, नक्सलियों के शवों की पहचान होना अभी बाकी है। पुलिस ने इस कार्रवाई को बड़ा नक्सल विरोधी अभियान बताया है।इस बीच तेलंगाना के मुलगू (Mulugu) जिले में भी 2 माओवादी मारे गए हैं।

याद दिला दें पिछले साल महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में 15 पुलिस कर्मियों समेत कम से कम 16 लोगों की जान चली गई थी। पुलिस ने बताया था इस विस्फोट से सड़क पर एक विशाल खड्ड बन गया। इससे पहले नक्सलियों ने एक सड़क निर्माण कंपनी के 27 वाहनों में आग लगा दी थी।

गौरतलब है कि 16 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में भी तेलम पुजारीपाल के जंगलों में DRG के जवानों ने 2 नकसलियों को गिरफ्तार किया था। तब, DRG के जवान गश्त पर निकले थे और उसी बीच नक्सलियों व जवानों के बीच मुठभेड़ हुई। DRG के जवानों ने भाग रहे दो नक्सलियों को पकड़ा और घटनास्थल से टिफिन बम व नक्सली साहित्य बरामद किए थे। इसी प्रकार 17 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में 3 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। ये तीनों अलग-अलग इलाकों में सक्रिय था और इन पर 1 लाख इनाम भी घोषित था।

ओवैसी के इलाके में बाढ़ प्रभावितों से मिलने गए कॉन्ग्रेस नेता को AIMIM कार्यकर्ताओं ने जमकर कूटा, देखें वीडियो

तेलंगाना में कॉन्ग्रेस और AIMIM नेताओं के बीच झड़प का मामला सामने आया है। ये झड़प बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीड़ितों से मिलने को लेकर हुई। कॉन्ग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि उन्हें प्रभावित इलाके में पहुँचने के बाद भी पीड़ितों से मिलने नहीं दिया गया।

रविवार (अक्टूबर 18, 2020) को हुई इस झड़प में दोनों पार्टियों के नेता शामिल थे। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद इन्हें अलग करवा कर विवाद शांत कराया।

जानकारी के मुताबिक, तेलंगाना के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में से चंदरघाट क्षेत्र में कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मंत्री शब्बीर अली कल स्थिति का मुआयना करने और पीड़ितों से मिलने गए थे। मगर, शब्बीर अली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहुँचते ही वहाँ कुछ AIMIM के नेता व कार्यकर्ता भी पहुँच गए। इसके बाद आपसी बहस शुरू हुई और देखते ही देखते यह बहस, झड़प में बदल गई। बाद में पुलिस ने इस मामले में हस्तक्षेप करके मामले को शांत करवाया।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, हाल में हुई भारी बरसात के कारण तेलंगाना के कई इलाके बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। इन्हीं इलाकों में अकबरुद्दीन ओवैसी का चुनाव क्षेत्र चंद्रायनगुट्टा भी आता है। ऐसे में कई AIMIM नेता वहाँ पीड़ितों की मदद करने में जुटे थे लेकिन बीच में कॉन्ग्रेस नेता भी वहाँ आ पहुँचे और उनसे बात करने का प्रयास किया।

हालाँकि, बातचीत की जगह पूरा मामला बिगड़ गया और दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। टाइम्स नाउ द्वारा जारी की गई वीडियो में हम देख सकते हैं कि किस तरह बीच सड़क पर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ। AIMIM नेताओं ने कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ अभद्रता से बात करनी शुरू कर दी और उन्हें लोगों से मिलने से रोका।

पूरा मामला इतना अधिक बढ़ गया कि दोनों पक्ष को शांत कराने के लिए पुलिस को इलाके में तैनात करना पड़ा। कॉन्ग्रेस नेता भी बाद में अपने कार्यालय लौट आए।

यहाँ बता दें कि पीड़ितों की मदद करने के नाम पर एक ओर जहाँ पार्टी नेताओं के बीच ऐसे झगड़े के वीडियो सामने आ रहे हैं। वहीं आरएसएस के सेवा भारती संगठन की पूरी टीम बिना किसी विवाद के लोगों की मदद करने में जुटी है। पिछले दिनों हमने सोशल मीडिया पर वायरल होती तस्वीरों व कुछ क्लिपों को देखा था जिसमें स्वयंसेवक खुद की जान को खतरे में डाल कर लोगों तक बुनियादी जरूरतों का सामना पहुँचा रहे थे।

केजरीवाल सरकार की ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ स्कीम निकली हवा-हवाई: खर्च हुए करोड़ों पर कैसे और कहाँ इसकी कोई जानकारी नहीं

हर सरकार कई बड़े वादे और दावे करती है। इन दावों के ज़रिए ही जनता का सरकार पर भरोसा बनता है लेकिन वादों की अनदेखी पर समीकरण बिगड़ते हैं। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने साल 2019 के अक्टूबर महीने में एक योजना की शुरुआत की थी जिसका नाम था ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’। इस योजना का उद्देश्य था रास्तों पर होने वाली दुर्घटना में घायल लोगों की जान बचाना। बेशक इस योजना का उद्देश्य सराहनीय है लेकिन मूल प्रश्न यह है कि यह योजना किस हद तक लागू हुई है? इसका लाभ कितनों को मिला है? मोटे तौर पर इस योजना में अभी तक जितना कुछ हुआ है वह क्या और कितना है? 

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की अगुवाई में दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने अक्टूबर 2019 में ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ योजना की नींव रखी। योजना के नाम से ही स्पष्ट है कि इस योजना के तहत ऐसे लोगों को जान बचाई जाएगी जो सड़क दुर्घटना में घायल हो जाते हैं। इस दौरान आने वाले खर्च की ज़िम्मेदारी दिल्ली सरकार उठाएगी और मदद करने वाले को पुरस्कृत भी किया जाएगा। इस योजना की शुरुआत करते हुए अरविन्द केजरिवाल ने कहा था- 

“दुर्घटना के बाद अगला एक घंटा गोल्डन आवर होता है। इस दौरान घायल को अस्पताल पहुँचा दिया तो उसकी जान बच सकती है। पुलिस किसी को तंग नहीं करती है। मैं चाहता हूँ कि दिल्ली का हर नागरिक फरिश्ता बने। दिल्ली में ऑटो वाले और टैक्सी वाले भाई कहीं दुर्घटना हो जाए तो जान बचाने का काम करें।” इसके अलावा मुख्यमंत्री अरविन्द केजरिवाल ने यहाँ तक दावा किया था कि अभी तक इस योजना के तहत कुल 3 हज़ार लोगों की जान बचाई जा चुकी है।

सवाल यही बचता है कि इस योजना से आम जनमानस किस हद तक प्रभावित हुआ। इस तरह के तमाम सवालों के जवाब के लिए दिल्ली स्थित तिलक नगर के रहने वाले अधिवक्ता अनंतदीप सिंह ने आरटीआई दायर की थी। उन्होंने अपनी आरटीआई में दिल्ली सरकार से इस योजना से संबंधित कई अहम सवाल पूछे थे। पूछे गए तमाम सवालों में से कई सवालों के जवाब पूरे या संतोषजनक नहीं थे और कुछ सवालों के जवाब के लिए स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करने का निर्देश दे दिया गया। अधिवक्ता अनंतदीप सिंह ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इस पूरे मामले की जानकारी दी। उनके द्वारा ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ योजना के संबंध में पूछे गए कुछ सवाल यह थे- 

  1. इस योजना के तहत अभी तक कुल कितने लोगों का उपचार हुआ है? 
  2. योजना के तहत जिन अस्पतालों में उपचार हुआ है उनका नाम और पता? साथ ही जिन मरीजों का उपचार हुआ है उनकी जानकारी। 
  3. कितने अस्पतालों ने इस योजना के तहत आने वाली घटनाओं की जानकारी पुलिस को दी है? अस्पताल जिन्होंने जानकारी दी है और पुलिस थाने जिन्होंने शिकायत दर्ज की है, उनके नाम।
  4. क्योंकि दुर्घटना होने पर अक्सर प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है बल्कि उपचार के दौरान अस्पताल के लिए वह अहम दस्तावेज़ होता है। इस तरह की कितनी एफ़आईआर दर्ज हुई?
  5. दुर्घटनाग्रस्त होने वाले लोगों की मदद करने वालों से जुड़ी जानकारी? 
  6. इस योजना के विज्ञापन में दिखाए गए लोगों की जानकारी जिनका उपचार इस योजना के तहत हुआ है और जिन लोगों ने मदद की है? दिल्ली सरकार द्वारा इस योजना के तहत आने वाले निजी अस्पतालों पर किए गए खर्च का ब्यौरा?   
अधिवक्ता अनंतदीप सिंह द्वारा दायर की गई आरटीआई

हैरानी की बात यह है कि इनमें से कुछ ही सवालों के जवाब दिए गए। ज़्यादातर सवालों में स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में संपर्क करने की बात कह दी गई या कोई जानकारी लेने के लिए नंबर प्रदान कर दिया गया। बल्कि अंत में इस बात का उल्लेख विधिवत है कि दिल्ली सरकार ने इस योजना पर कितनी राशि खर्च की। दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि इस योजना के तहत अभी तक 7,58,88,716 रुपए खर्च किए जा चुके हैं यानी लगभग 7 करोड़ से ज़्यादा रुपए। ऐसे में अनंतदीप सिंह का मूल प्रश्न यही था कि एक योजना पर इतनी बड़ी राशि खर्च हुई तो उसका ब्यौरा भी होना चाहिए।   

अधिवक्ता अनंतदीप सिंह द्वारा दायर की गई आरटीआई

अनंतदीप ठाकुर ने यह आरटीआई 13 मार्च को दायर की थी, जिसका जवाब जुलाई 2020 में आया। उनका कहना था कि उन्होंने दिल्ली के कई पुलिस थानों में इस योजना से संबंधित जानकारी के लिए संपर्क किया कि योजना का उल्लेख करते हुए कितनी एफ़आईआर दर्ज कराई गई हैं लेकिन थानों ने भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी सरकार की तरफ से ऐसी योजना की शुरुआत सराहनीय है लेकिन लोगों को यह जानने का अधिकार है कि इससे कितने लोग लाभान्वित हुए।

आरटीआई में पूछे गए सवालों को असंतोषजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि वह अपनी शिकायत आगे लेकर जाएँगे। चाहे इन सवालों को वह पब्लिक ग्रिवांसेस विभाग तक ले जाने की बात हो या दिल्ली आरटीआई तक ले जाना हो। यह तो महज़ कुछ प्रश्न हैं जिनका जवाब नहीं मिल पाया है, इसके अलावा भी ऐसे कई सवाल हैं जो अभी तक उठाए ही नहीं गए हैं। ऐसी योजनाएँ हितकारी होती हैं, इनका प्रभाव दूरगामी होती है लेकिन सारी बातें सिर्फ तब प्रासंगिक हो सकती हैं जब इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिले। 

सुशांत से जुड़े ड्रग्स केस में NCB ने की 23वीं गिरफ्तारी: बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल का करीबी हुआ अरेस्ट

सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) की कार्रवाई जारी है। ताज़ा मामले में एनसीबी ने अफ्रीकी मूल के मुंबई निवासी एगीसलोस डेमेट्रिडेस को गिरफ्तार किया है। यह व्यक्ति बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल का करीबी बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यह अर्जुन रामपाल की गर्लफ़्रेंड का भाई है। सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स मामले में एनसीबी की तरफ से की गई 23वीं गिरफ्तारी है। इस मामले में फ़िलहाल एनसीबी की जाँच जारी है।

एगीसलोस डेमेट्रिडेस के पास कई मादक पदार्थ मिले हैं जिसमें चरस और एलप्राज़ोलम की टेबलेट भी शामिल है। इसके अलावा एनसीबी ने एगीसलोस को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, इसके बाद आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में भेज दिया गया है। ड्रग्स मामले में अब तक एनसीबी द्वारा की गई यह 23वीं गिरफ्तारी है, इसके पहले क्षितिज प्रसाद और जय मधोक के रूप में 21वीं और 22वीं गिरफ्तारी हुई थी। 

सुशांत सिंह राजपूत मामले में ड्रग्स का पहलू सामने आने के बाद एनसीबी ने कई बड़े बॉलीवुड कलाकारों, निर्माता – निर्देशकों पर कार्रवाई की थी। अफ्रीकी मूल के इस नागरिक को एनसीबी ने ड्रग्स लेन-देन के मामले में गिरफ्तार किया है, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इस गिरफ्तारी के बाद कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। एनसीबी ने ड्रग्स मामले में अभी तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है।

जिसमें रिया चक्रवर्ती, उनका भाई शोविक चक्रवर्ती, सुशांत सिंह राजपूत का पूर्व मैनेजर सैमुएल मिरांडा, दीपेश सावंत समेत कई अन्य लोग शामिल हैं। इसमें रिया चक्रवर्ती को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 7 अक्टूबर को जमानत पर रिहा कर दिया था। रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी 9 सितंबर को हुई थी, उच्च न्यायालय ने 29 सितंबर को इस संबंध में फैसला सुरक्षित कर लिया था। वहीं दूसरी तरफ रिया के भाई शोविक चक्रवर्ती को अदालत की तरफ से जमानत नहीं दी गई थी। वह फ़िलहाल हिरासत में ही मौजूद है।  

कमलनाथ के इमरती देवी को ‘आइटम’ कहने से भड़के CM शिवराज, कहा- कॉन्ग्रेस ने अपनी सामंतवादी सोच फिर उजागर कर दी

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में उपचुनाव का जोर चल रहा है। मध्य प्रदेश में हो रहे उपचुनाव पर सभी की नजर है, लेकिन इस बीच कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भारतीय जनता पार्टी की महिला प्रत्याशी इमरती देवी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘आइटम’ कह डाला।

पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने आमसभा को संबोधित करते हुए भाजपा प्रत्याशी एवं कैबिनेट मंत्री श्रीमती इमरती देवी के बारे में कहा, “आप तो उसे मुझसे ज्यादा पहचानते हैं, आपको मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ये क्या आइटम है।” (इतना कहने के बाद श्री कमलनाथ ने जनता की तरफ देखा, खिलखिला कर हँसे, फिर दोहराया ये क्या आइटम है, और मुस्कुराए, उनके समर्थकों ने तालियाँ बजाई और ठहाके लगाए।) 

बता दें कि मध्य प्रदेश के डबरा में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र राजेश के लिए प्रचार करने पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंच से भाषण देते वक्त कहा, “सुरेंद्र राजेश हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे-साधे हैं। यह उसके जैसे नहीं है, क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूँ आप तो उसको मुझसे ज्यादा अच्छे से जानते हैं, आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ‘यह क्या आइटम है।”

इमरती देवी, उन पूर्व विधायकों में से एक हैं जिन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। इमरती देवी को ज्योतिरादित्य सिंधिया का कट्टर समर्थक माना जाता है।

कमलनाथ पर भड़के शिवराज

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “कमलनाथ जी! इमरती देवी उस गरीब किसान की बेटी का नाम है, जिसने गाँव में मजदूरी करने से शुरुआत की और आज जनसेवक के रूप में राष्ट्रनिर्माण में सहयोग दे रही हैं। कॉन्ग्रेस ने मुझे ‘भूखा-नंगा’ कहा और एक महिला के लिए आपने ‘आइटम’ जैसे शब्द का उपयोग कर अपनी सामंतवादी सोच फिर उजागर कर दी।”

अपने एक और ट्वीट में शिवराज सिंह ने कहा, “खुद को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ बताने वाले ऐसी ‘अमर्यादित भाषा’ का प्रयोग कर रहे हैं? नवरात्रि के पावन पर्व पर देश नारी की उपासना कर रहा है, ऐसे में आपके बयान से आपकी ओछी मानसिकता झलकती है। बेहतर होगा कि आप अपने शब्द वापिस लें और इमरती देवी सहित प्रदेश की हर बेटी से माफी माँगें।”

मगरूर नेता को सबक सिखाने का समयः सिंधिया

कमलनाथ की उक्त टिप्पणी पर पूर्व कॉन्ग्रेस और वर्तमान में बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “एक गरीब और मजदूर परिवार से आगे आईं दलित नेता इमरती देवी जी को आज डबरा में आइटम और जलेबी कहना अत्यंत निंदनीय और आपत्तिजनक है। ये कमलनाथ जी की मानसिकता को भी दर्शाता है। महिलाओं के साथ ही समूचे दलित समाज का अपमान करने वाले ऐसे मगरूर नेता को सबक सिखाने का समय आ गया है।”

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने इमरती देवी को ‘जलेबी’ कहा था 

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने भाजपा प्रत्याशी श्रीमती इमरती देवी के बारे में कहा था, “मैं कमलनाथ जी के संग कई जगह पर जनसभा करके आया हूँ। लेकिन आज डबरा में जो जनसभा देखी वैसे मैंने कहीं नहीं देखी और मुझे पूरा विश्वास है कि जनता आने वाले 3 नवंबर को इमरती देवी को जलेबी बना देगी।”

कमलनाथ के बयान पर बीजेपी ने विरोध जताया है और इसे नवरात्र के दौरान महिलाओं का अपमान बताया है। बीजेपी का कहना है कि इससे पहले दिग्विजय सिंह ने उनकी ही पार्टी की नेता और पूर्व सांसद के बारे में जो कहा था उसका भी विरोध हुआ था और अब कमलनाथ इस तरह के बयान दे रहे हैं जो गलत है।