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बुलंदशहर: 14 वर्षीय बच्ची को घर से उठाकर रिजवान उर्फ़ पकौड़ी ने किया रेप, मुँह में कपड़ा ठूँसा..चेहरे पर तेजाब डालने की धमकी, गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक 14 साल की नाबालिग बच्ची के साथ उसके पड़ोसी रिजवान द्वारा बलात्कार की घटना सामने आई है। इस घटना के सामने आते ही रिजवान फरार हो गया था लेकिन बृहस्पतिवार (अक्टूबर 01, 2020) सुबह ही बागपत पुलिस अधिकारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

आरोप है कि नाबालिग के पड़ोसी रिजवान ने उसे नशीला पदार्थ सुँघाकर उसके साथ बलात्कार किया। इसी दौरान पीड़िता के परिजनों ने उसे पकड़ लिया था, लेकिन रिजवान के घरवालों ने उसे भगा दिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बुधवार रात बताया कि, लड़की के पिता ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी 14 वर्षीय बेटी का उनके पड़ोसी 20 वर्षीय रिजवान ने मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) रात बलात्कार किया। पीड़िता का मेडिकल करवाया जा रहा है। बृहस्पतिवार सुबह ही पुलिस सूचना दी कि आरोपित रिजवान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि जब वह बीती रात अपने परिवार के साथ घर के आँगन में सो रही थी, तभी घर की दीवार से कूदकर रिजवान उर्फ पकौड़ी उनके घर में आ घुसा और बच्ची को रुमाल सुँघाकर उसे घर से उठा ले गया।

वह शोर न करे इसके लिए रिजवान ने बच्ची के मुँह में कपड़ा ठूँस दिया था। इसके बाद, रिजवान ने घर से थोड़ी दूर खड़े एक ट्रक के पास उसके साथ बलात्कार किया। बच्ची ने बताया कि रिजवान ने उसे धमकाने के लिए उसके चेहरे पर तेज़ाब डालने की भी धमकी दी थी।

बच्ची के घर से गायब होने का पता चलते ही परिवार के लोगों ने गाँव वालों के साथ मिलकर उसकी तलाश की। खोजबीन में उनकी बच्ची उन्हें कैंटर के पास मिली थी उस समय रिजवान उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था।

बताया जा रहा है कि परिजनों ने रिजवान को पकड़कर इसकी सूचना पुलिस को दी, लेकिन पुलिस के आने से पहले ही आरोपित रिजवान के घरवालों ने उसे छुड़ा लिया और भगा दिया। पुलिस ने बताया कि रिजवान को गिरफ्तार कर लिया गया है और पीड़िता का इलाज चल रहा है।

गौरतलब है कि सामूहिक दुष्कर्म की अलग-अलग घटनाओं में बलरामपुर और आजमगढ़ के साथ ही अजमेर में भी मजहब विशेष के आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अजमेर में टीपू सुल्तान ने अपने 2 दोस्तों के साथ दलित युवती के मुँह में कपड़ा ठूँसकर किया सामूहिक दुष्कर्म, 8 घंटे तक दी गई यातना

राजस्थान के अजमेर में एक दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई है। आरोपित टीपू सुल्तान पर अपने दो साथियों के साथ इस घटना को अंजाम देने का आरोप है। घटना के दौरान टीपू सुल्तान के साथ उसके साथी भी मौजूद थे, पीड़िता ने आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज करा दिया है। पुलिस फ़िलहाल इस मामले की जाँच कर रही है। 

युवती मंगलवार (29 सितंबर 2020) को अजमेर स्थित रामगंज अपनी माँ के घर जा रही थी। रास्ते में उस क्षेत्र का ही रहने वाला टीपू सुल्तान उसे बहला फुसला कर खेतों में ले गया और उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान उसके दो साथी भी मौजूद थे और उन्होंने भी युवती के साथ सामूहिक बलात्कार किया। टीपू के साथियाें ने युवती के मुँह में कपड़ा ठूँस दिया था।

टीपू सुल्तान के युवती को लगभग 8 घंटों तक बंधक बना कर रखा और उसे यातनाएँ भी दीं। इसके बाद रात के लगभग 1 बजे आरोपित टीपू सुल्तान ने युवती को उसकी माँ के घर छोड़ा और वहाँ धमकी भी दी कि घटना के बारे में किसी को भी सूचित करने का अंजाम बुरा होगा। इसके बाद पीड़िता ने अपनी पूरी आपबीती अपने घर वालों से बताई।  

फिर बुधवार (30 सितंबर 2020) को युवती ने अपनी माँ और भाई के साथ रामगंज थाने में पूरे घटनाक्रम की जानकारी और मामला दर्ज कराया। पुलिस ने बलात्कार की धाराओं और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। घटना की वजह से ग्रामीणों में आक्रोश है, इस घटना पर स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस जल्द से जल्द कार्रवाई नहीं करती है तो क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। घटनाक्रम की जाँच रामगंज थाने के थानाध्यक्ष मुकेश सोनी के अंतर्गत की जा रही है।     

बुधवार को ही राजस्थान के बारां (Baran) जिले में भी दो नाबालिग लड़कियों से गैंगरेप (Gang rape) का मामला सामने आया था। ज़ी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपितों ने पहले बारां से दो नाबालिग लड़कियों का अपहरण किया फिर अपहरण के बाद आरोपित दोनों लड़कियों को कोटा, जयपुर और अजमेर ले गए। कथिततौर पर तीन दिनों तक उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था।

बलरामपुर: दलित लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार, लड़की की मौत, शाहिद और साहिल गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के हाथरस में युवती के कथित सामूहिक बलात्कार और हत्या पर व्यापक आक्रोश के बीच, अनुसूचित जाति की ही एक और युवती के साथ राज्य के बलरामपुर (Balrampur) जिले में दो युवकों – शाहिद पुत्र हबीबुल्ला निवासी गैंसड़ी और साहिल पुत्र हमीदुल्ला निवासी गैंसड़ी द्वारा सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई है।

आरोप है कि दोस्ती के बहाने घर ले जाकर दोनों आरोपितों ने लड़की सामूहिक दुष्कर्म किया और गंभीर हालत में एक रिक्शे पर बैठाकर घर भेज दिया। 22 वर्षीय पीड़िता युवती की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। चार डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम के बाद बुधवार (सितम्बर 30, 2020) रात को ही पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक देव रंजन वर्मा ने कहा कि घटना जिले के गैंसड़ी बाजार इलाके की है, जहाँ एक निजी फर्म में काम करने वाली एक 22 वर्षीय दलित युवती मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की शाम घर न लौटने से उसके उसके माता-पिता उसकी तलाश करने लगे।

वहीं, जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक़, छात्रा की माँ का कहना है कि उनकी बेटी विमला विक्रम महाविद्यालय पचपेड़वा में बीकॉम में प्रवेश लेने के लिए सुबह दस बजे निकली थी। पुलिस ने कहा कि युवती के माता-पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने जब अपने मोबाइल फोन पर कॉल का जवाब नहीं दिया, तो उनके परिवार के सदस्यों में दहशत फैल गई।

देर शाम जब लड़की रिक्शा से घर लौटी तो उसके हाथ में ग्लूकोज ड्रिप लगी हुई थी और उसकी हालत ठीक नहीं थी। पुलिस अधीक्षक रंजन वर्मा के अनुसार, परिवार के सदस्यों ने कहा कि लड़की की हालत ठीक नहीं थी, इसलिए वे उसे पास के अस्पताल ले गए और बाद में बलरामपुर जिला अस्पताल ले गए जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

स्थानीय डॉक्टर ने किया खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार, बाजार स्थित निजी क्लीनिक के चिकित्सक डॉ जियाउर्रहमान ने बताया कि दुकानदार शाहिद का भतीजा साहिल घटना के दिन, मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की शाम करीब पाँच बजे उन्हें अपने घर इलाज करने के लिए बुलाकर ले गया था। वहाँ पहुँचने पर उन्होंने देखा कि युवती पेट दर्द के इलाज के लिए दवा माँग रही थी और वह सोफे पर लेटी हुई थी।

डॉ जियाउर्रहमान ने कहा कि घर में किसी महिला सदस्य के न होने पर दवा देने से मना कर वो बाहर निकल आए और आस-पास वालों को बुलाकर युवती के घर वालों को सूचना देने की बात कहकर वह वापस अपने क्लीनिक चले गए। उन्होंने कहा कि युवती को वहाँ कौन लेकर आया था उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है।

पुलिस ने फ्रैक्चर की बातों से इंकार किया

जब अस्पताल से पुलिस को इस मामले की सूचना दी गई, तो माता-पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। हालाँकि, परिवार के सदस्यों का कहना है कि लड़की के हाथ और पैर फ्रैक्चर हो रखे थे, जबकि पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसी किसी चोट की पुष्टि नहीं हुई।

मृतका युवती की माँ का कहना है कि घर लौटते वक्त उनकी बेटी के साथ बाजार स्थित मकान में ले जाकर दरिंदगी की गई। मृतका के भाई ने तहरीर में कहा है कि उसकी बहन मंगलवार सुबह दस बजे घर से निकली थी और जब रिक्शा से देर शाम घर पहुँची तो वह कुछ बोल पाने में भी असमर्थ थी। उसके कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं कर रहा था।

डॉ जियाउर्रहमान के बयान के आधार पर ही पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता के भाई की शिकायत के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और दोनों आरोपितों – शाहिद व साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376-D में आरोप दर्ज किया गया है और आगे की जाँच जारी है। एसपी ने कहा कि मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा जाएगा और आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

#RebuildBabri: सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुस्लिमों को बरगलाने की कोशिश, पोस्टर के जरिए बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण का आह्वान

सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को बाबरी विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपितों को बरी कर दिया। वहीं इस फैसले से बौखलाए मुस्लिमों ने सोशल मीडिया पर लोगों से बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण का आह्वान किया है।

अदालत के फैसले को ‘न्यायिक कारसेवा’ कहकर खारिज करते हुए कुछ इस्लामवादियों ने मुस्लिमों को बरगलाना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपने समुदाय के लोगों से पहले से निर्माण की जा रही राम मंदिर स्थल पर बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण करने के लिए लोगों को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भड़काया।

अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कुछ कट्टरपंथियों द्वारा उत्तेजक पोस्टरों के जरिए मुस्लिमों को बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण के लिए उकसाया गया है, ताकि 2019 में हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले (हिंदुओं को राम मंदिर बनाने के लिए दी गई जमीन) के विरोध में आपसी फुट डाल कर साम्प्रदायिक हिंसा को बढ़ावा दिया जाए।

फ्रेटरनिटी मूवमेंट-वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया का छात्र युवा विंग- हैशटैग #RebuildBabri के साथ सोशल मीडिया पर एक अभियान चला रहा है। इस संगठन द्वारा अपने सोशल मीडिया पेजों पर एक पोस्टर साझा किया गया है, जिसमें मुस्लिमों को भड़काऊ संदेश दिया गया है कि भारत में उनके साथ विश्वासघात हुआ और धोखा दिया गया गया है। पोस्टर में मुस्लिमों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हिंदुओं को दी गई भूमि को पुनः प्राप्त करने और उस पर बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण करने का भी आह्वान किया गया है।

गौरतलब है कि दिल्ली में हिंसक दंगों के बाद जिहाद को लेकर जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के विरोध का चेहरा बनी फरजाना ने पिछले साल खुले तौर पर अपने एक फेसबुक पोस्ट में जिहाद के लिए लोगों को उकसाया था।

उसने तब कहा था कि लोगों को इस्लामी जिहाद के बारे में सीखना चाहिए और इसके लिए बद्र, यूएचडी और कर्बला के संदर्भ महत्वपूर्ण हैं क्योंकि शुरुआत में इन लड़ाइयों की वजह से मुस्लिमों ने काफ़िरों के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल की थी। इसके अलावा, फ़रज़ाना ने उन नरसंहारियों को भी महिमामंडन किया था, जिन्होंने हिंदुओं को मोपला नरसंहार में मार दिया था।

फेसबुक पर, ‘वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया’ ने हाल के बाबरी विध्वंस के सभी 32 आरोपितों को बरी करने के ‘न्यायिक कारसेवा’ का रूप घोषित कर दिया। जाहिरतौर पर पोस्ट में भारतीय न्यायपालिका पर विवादास्पद ढाँचे के अनदेखी का आरोप लगाया।

इसके अलावा दोहा से एक अल जज़ीरा पत्रकार भी बाबरी ढाँचे की बहाली के अभियान में शामिल हो गया। उसने बाबरी विध्वंस मामले में सभी 32 अभियुक्तों को बरी करने के बारे में एक रिपोर्ट को साझा किया। फिर पत्रकार नौफ़ल पलेरी ने भी भारत में मुस्लिमों को बरगलाने का काम किया।

उल्लेखनीय है कि आज अयोध्या के बाबरी ध्वंस मामले में सीबीआई के स्पेशल जज एसके यादव ने 2000 पन्नों का जजमेंट (फैसला) दिया। इस मामले में सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में बाबरी ध्वंस साजिशन नहीं हुआ, ये पूर्व-नियोजित नहीं था। इसे संगठन ने रोकने की भी कोशिश की, लेकिन घटना अचानक घट गई। इसके साथ ही सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है।

इस दौरान लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और महंत नृत्य गोपाल दास उम्र और अस्वस्थता के कारण अदालत में उपस्थित नहीं थे। उमा भारती कोरोना की वजह से नहीं आ सकीं। सतीश प्रधान भी नहीं थे। हालाँकि, ये सभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फैसला सुनाने के समय उपस्थित थे। इस दौरान मीडिया तक को भी कोर्ट परिसर में जाने की अनुमति नहीं थी। सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है। आसपास की दुकानें भी बंद थीं।

हाथरस केस में पुलिस पर सवाल उठना लाजमी: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Hathras Case

हाथरस केस में बहुत सारी बातें कही जा रही है। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट और फिर बाद में आई पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में अंतर की वजह से केस बहुत ही ज्यादा पेचीदा हो गया है। शुरू के बयान में रेप के बारे में कुछ नहीं गया और आरोपित भी एक ही बताया गया। बाद वाले बयान में ‘गैंगरेप’ की बात आती है और आरोपितों में भी तीन और नाम जुड़ जाते हैं। आईजी ने भी अपने बयान में यही बातें कहीं।

29 सितंबर को पीड़िता के दम तोड़ने के बाद अलग-अलग तरह की रिपोर्ट्स आनी शुरू होती है। गैंगरेप ट्रेंड कराया गया। भयावहता को दर्शाने के लिए जीभ काटने, रीढ़ की हड्डी तोड़ने, आँख फोड़ने की बात कही गई। ये भी कहा गया कि आरोपित सवर्ण है, इसलिए पुलिस छेड़छाड़ का मामला बताकर रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

इलाज के लिए अमित शाह के न्यूयॉर्क जाने, उनके बीमार होने के वायरल दावों की क्या है सच्चाई, पढ़ें पूरी डिटेल

सोशल मीडिया व्हाट्सएप पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया गया है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वजह से गृह मंत्री अमित शाह को इमरजेंसी बेसिस पर संयुक्त राज्य अमेरिका शिफ्ट किया गया है। इसके साथ ही मैसेज में ये भी कहा गया है कि उन्हें एयर-एम्बुलेंस के माध्यम से न्यूयॉर्क भेजा गया, क्योंकि वह कैंसर और एवियन सारकोमा जैसी कई बीमारियों से पीड़ित हैं। ट्विटर पर भी कई यूजर्स ने इसी तरह का पोस्ट किया।

कुछ यूजर्स ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि अमित शाह की ‘गंभीर स्थिति’ के कारण केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को गृह मंत्रालय का पोर्टफोलियो दिया जा सकता है।

हालाँकि, यह दावे पूरी तरह से निराधार और तथ्यहीन हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर गृह मंत्री को इलाज के लिए यूएसए शिफ्ट किया जाता, तो सरकार द्वारा इसकी घोषणा की जाती। पार्टी के वरिष्ठ सदस्य भी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए जानकारी देते, लेकिन उसके संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। केवल कुछ ट्विटर यूजर्स ने व्हाट्सएप ‘न्यूज’ का हवाला देते हुए पोस्ट किया है।

अमित शाह अपने काम में व्यस्त

सोशल मीडिया पर अमित शाह के स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे दावों के विपरीत उन्हें आज (सितंबर 30, 2020) अपने कर्तव्यों का पालन करते देखा गया। आज दोपहर में, अमित शाह ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया कि उन्होंने गाँधीनगर लोकसभा क्षेत्र से 200 कुम्हार परिवारों को ‘कुम्हार सशक्तिकरण योजना’ के अंतर्गत विद्युत चालित चाक वितरित करने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने उस घटना की तस्वीरें पोस्ट की थीं जिसमें उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शिरकत की थी।

फिर बाद में दिन में, गृह मंत्री ने स्वदेशी विकसित रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए DRDO का भी अभिवादन किया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के काम में भी सक्रिय रूप से शामिल थे। वह पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के निवास पर आयोजित आगामी बिहार चुनावों के बारे में एक महत्वपूर्ण पार्टी बैठक में उपस्थित थे। बैठक में नव निर्वाचित बिहार चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।

इसलिए, सोशल मीडिया पर गृह मंत्री अमित शाह को इलाज के लिए न्यूयॉर्क शिफ्ट करने की बात पूरी तरह से गलत है। इसके इतर, उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है, क्योंकि उन्होंने आज मंत्रालय और पार्टी दोनों ही कामों में हिस्सा लिया है। 

यहाँ यह भी गौर करने वाली बात है कि एवियन सारकोमा बीमारी मनुष्यों को प्रभावित नहीं करती है। यह रोग मुर्गियों को संक्रमित करता है, जो एवियन सारकोमा ल्यूकोसिस वायरस के कारण होता है। इस वायरस की वजह से मुर्गियों को कैंसर होता है, लेकिन इस वायरस से इंसानों के संक्रमित होने का कोई सबूत नहीं है।

कॉन्ग्रेस के दबाव में झुकी उद्धव सरकार: महाराष्ट्र में नया कृषि कानून लागू करने का आदेश लिया वापस

कॉन्ग्रेस की तरफ से कैबिनेट बैठक के बहिष्कार की धमकी के बाद महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने बुधवार (सितंबर 30, 2020) को नए कृषि कानून लागू करने का अगस्त महीने में दिया अपना आदेश वापस ले लिया है।

राज्य सरकार में सहयोगी कॉन्ग्रेस और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) की तरफ से महाराष्ट्र में कृषि कानूनों का विरोध कर इसे ‘किसान विरोधी’ कहने के बाद उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली सरकार कृषि सुधार कानूनों को लागू करने को लेकर असमंजस में थी। 

दरअसल, उद्धव सरकार अगस्त में ही कृषि विधेयकों को लागू करने का आदेश जारी कर चुकी थी। हालाँकि खबरों की मानें तो कॉन्ग्रेस के दवाब में आकर अब उद्धव ठाकरे ने उसी पुराने फैसले को वापस ले लिया है। हाल ही में संसद के दोनों सदनों में इस कानून को भारी विरोध के बीच पास कराया गया और राष्ट्रपति से भी इन्हें मंजूरी मिल गई है। इन विधेयकों को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इसके पारित होने से पहले इसे लागू करने का फैसला कर लिया था।

पिछले हफ्ते, महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार ने ऐलान किया था कि राज्य सरकार कृषि सुधार कानूनों को राज्य में लागू नहीं करेगी। राज्य के राजस्व मंत्री और महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के प्रमुख बालासाहेब थोराट ने कहा था कि सभी सत्तारूढ़ विपक्षी दल इन नए कानूनों के खिलाफ हैं। राज्य में उन्हें लागू नहीं करने का निर्णय सामूहिक रूप से विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा।

10 अगस्त को जारी अधिसूचना में सभी कृषि उपज एवं पशुधन बाजार समितियों (APMC) और जिला कृषि सहकारी समितियों को राज्य में प्रस्तावित कानूनों पर तीन अध्यादेशों को ‘सख्ती से लागू करने’ का आदेश दिया गया था। ये विधेयक- कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 थे।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी शासित प्रदेशों की सरकारों से सोमवार को कहा कि वे केंद्र सरकार के ‘कृषि विरोधी कानूनों’ को निष्प्रभावी करने के लिए अपने यहाँ कानून पारित करने की संभावना पर विचार करें। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सोनिया ने कॉन्ग्रेस शासित प्रदेशों को सलाह दी थी कि वे संविधान के अनुच्छेद 254 (ए) के तहत कानून की सभी संभावनाओं का निरीक्षण करें और कृषि विरोधी कानूनों को नकारें और किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रोकें।

वेणुगोपाल ने कहा कि यह अनुच्छेद इन ‘कृषि विरोधी एवं राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल देने वाले केंद्रीय कानूनों’ को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य विधानसभाओं को कानून पारित करने का अधिकार देता है।

वेणुगोपाल ने दावा किया, ”राज्य के इस कदम से कृषि संबंधी तीन कानूनों के अस्वीकार्य एवं किसान विरोधी प्रावधानों को दरकिनार किया जा सकेगा। इन प्रावधानों में न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म करने और कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) को बाधित करने का प्रावधान शामिल है।”

अतीक अहमद के करीबी राशिद, कम्मो और जाबिर के आलीशान बंगलों पर चला योगी सरकार का बुलडोजर, करोड़ो की संपत्ति खाक

यूपी सरकार लगातार अतीक अहमद और उसके करीबियों के अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने का काम कर रही हैं। इसी क्रम में प्रशासन ने अब उसके खास रहे तीन गुर्गों राशिद, कम्मो और जाबिर के अवैध आलीशान मकानों को जमींदोज कर दिया। यह सभी मकान प्रयागराज के बेली इलाके में स्थित थे।

अतीक गैंग के तीनों सदस्यों में राशिद प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। राशिद कैंट थाने का हिस्ट्रीशीटर भी है। वहीं इनमे से दो अतीक के शार्प शूटरों में शामिल थे। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) द्वारा पुलिस की मदद से की जा रही इस कार्रवाई के दौरान राशिद के घर की महिलाओं ने जम कर विरोध किया। पुलिस के कहने के बावजूद वे घर से बाहर निकलने को राजी नहीं थी। जिसके बाद जबरन उन्हें घर से निकाला गया। सरकारी अमले द्वारा बेली कछार में स्टेट लैंड की करोड़ों की बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर आलीशान इमारतें खड़ी की गई थी।

वहीं राशिद की अवैध सम्पतियों को गिराने के बाद प्रशासन ने आगे की कार्रवाई करते हुए कम्मो और जाबिर के अवैध को बंगलों को ध्वस्त कर दिया। बता दें ये आपस में भाई है। इस वक्त जाबिर जेल में बंद है वहीं कम्मो पुलिस की पकड़ से फरार चल रहा। प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार से इन लोगों ने कई सरकारी जमीनों पर अवैध मकानों को खड़ा कर दिया था। यह दोनों नामी अपराधियों के सूची में शामिल हैं।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, जाबिर पर 18 और कम्मो पर 16 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। यह कार्रवाई पीडीए के जोनल अधिकारी सत शुक्ला और आलोक पांडेय के नेतृत्व में हुई है। प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी के स्पेशल आफिसर सत शुक्ला के मुताबिक़ जो मकान गिराए गए हैं, वह सभी सरकारी ज़मीन पर बने थे। इन ज़मीनों को फ्री होल्ड नहीं कराया गया था और न ही विकास प्राधिकरण से कोई नक्शा पास कराया गया था।

अनलॉक-5.0 में खोल दिए गए सिनेमाघर, मल्टीप्लेक्स: स्कूल और कोचिंग सेंटर को लेकर भी दी गई विशेष जानकारी

देश में 1 अक्टूबर से अनलॉक-5 (Unlock 5) की शुरुआत हो रही है। कोरोना के बीच अनलॉक-5 की गाइडलाइंस बुधवार (30 सितंबर, 2020) को जारी कर दी गई। वहीं महामारी से सबसे प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में लॉकडाउन को 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है। गृह मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक अनलॉक-5 में सिनेमाघर और मल्टीप्लेक्स 50 प्रतिशत सीटों के साथ खोल दिए जाएँगे।

मंत्रालय की गाइडलाइन्स के अनुसार, 15 अक्टूबर से सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स को खोलने की छूट दे दी गई है। खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए स्वीमिंग पूल भी खोले जा सकेंगे। इसके अलावा एंटरटेनमेंट पार्क को खोलने की मंजूरी भी सरकार ने दी है। वहीं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सिनेमा हॉल, थियेटर्स, मल्टीप्लेक्स को लेकर जल्द ही अन्य सूचनाएँ भी लागू करेगा।

स्कूल और कोचिंग संस्थानों को खोलने के लिए राज्य सरकारों को 15 अक्टूबर के बाद फैसला लेने की इजाजत होगी। लेकिन, इसके लिए परिवार की मंजूरी अनिवार्य होगी।

गृह मंत्रालय की गाइडलाइन

  • सिनेमा/थिएटर/मल्टीप्लेक्स में उनकी बैठक क्षमता से 50% तक दर्शक को आने की अनुमति होगी। इसके लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय एसओपी जारी करेगा।
  • बिजनेस टू बिजनेस (बी 2 बी) एग्जिबिशंस लगाई जा सकेंगी। इनके लिए वाणिज्य विभाग एसओपी जारी करेगा।
  • खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए उपयोग होने वाले स्विमिंग पूल को खोलने की अनुमति होगी, जिनके लिए खेल मंत्रालय एसओपी जारी करेगा।
  • अम्‍यूजमेंट पार्क और इसी तरह के स्थानों को खोलने की भी अनुमति होगी और इन सभी के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय एसओपी जारी करेगा।
  • स्कूल, कॉलेज, शिक्षा संस्थान और कोचिंग संस्थान को चरणबद्ध तरीके से खोलने के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को फ्लेक्जिबिलिटी दी गई है और वे स्थितियों को देखते हुए 15 अक्टूबर 2020 के बाद इन्‍हें फिर से खोलने के लिए निर्णय ले सकेंगे। हालाँकि, इसके लिए सरकारें स्कूलों/संस्थान प्रबंधनों के साथ परामर्श करेंगी और दी गई शर्तों का पालन करेंगी।
  • ऑनलाइन एजुकेशन/डिस्टेंस लर्निंग जारी रहेगा और इसे लगातार प्रोत्साहित किया जाएगा
  • जो स्कूल ऑनलाइन क्‍लासेस चला रहे हैं और उनके कुछ छात्र शारीरिक रूप से स्‍कूल में उपस्थित होने के बजाय ऑनलाइन ही पढ़ना चाहते हैं तो उन्‍हें ऐसा करने की अनुमति दी जाएगी
  • छात्रों की स्‍कूलों में उपस्थिति अभिभावकों की लिखित सहमति से ही लागू होगी। इनके लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली SOP के आधार पर स्‍थानीय जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी-अपनी SOP तैयार करेंगे।

वहीं महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र के खाने के कारोबारियों को 5 अक्टूबर से पूरे महाराष्ट्र में बार और रेस्टोरेंट खोलने की इजाजत दे दी है। 50 प्रतिशत क्षमता के साथ बार और रेस्टोरेंट शुरू किए जा सकेंगे। बता दें कि मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में मार्च महीने से ही रेस्टोरेंट और बार बंद हैं।

इसी के साथ ही मुंबई के डिब्बा वालों के लिए भी अच्छी खबर आई है। अब उन्हें लोकल में यात्रा करने की अनुमति दे दी गई है।

आंध्र प्रदेश: पठान सलार खान ने 15 सालों में 80 से भी ज्यादा मंदिरों की दानपेटियों से चुराए रुपए, गिरफ्तार

आंध्र प्रदेश पुलिस ने मंगलवार (29 सितंबर, 2020) को मंदिरों के दान पेटियों को तोड़कर पैसे चोरी करने के मामले में पठान सलार खान नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया है। सलार खान ने पिछले तीन महीनों में राज्य के विभिन्न मंदिरों से 18,000 रुपए की चोरी की है। आरोपित ने यह कबूल किया है कि 15 साल में उसने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लगभग 80 मंदिरों की दानपेटियों से पैसे चुराए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पठान सलार खान को पुलिस ने कृष्णा जिले से गिरफ्तार किया है। तिरुवुरु सर्कल इंस्पेक्टर एम शेखर बाबू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपित को 14 सितंबर को विस्सनपेटा मंडल के कोरलामांडा गाँव के बाहरी इलाके में भगवान हनुमान मंदिर के दानपेटी को तोड़ने और चोरी करने के मामले में हिरासत में लिया गया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने बताया कि आरोपित का नाम पठान सालार खान है। आरोपित कृष्णा जिले का रहनेवाला है। मामले की जाँच करने के लिए जिले के एसपी के आदेश पर चार दल बनाए गए। दल ने जाँच के दौरान 50 वर्षीय पठान सलार नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया। जिसके बाद पुलिस की जाँच पड़ताल में उसने चोरी की सारी वारदातों को कबूल किया।

सीआई एम शेखर बाबू ने बताया कि कोर्लामंडा देवस्थानम में हुंडी क्षतिग्रस्त करने के मामले में उसके पास से 2000 रुपए बरामद किया गया। जुर्म को स्वीकार करते हुए खान ने बताया कि उसने 4 जुलाई को चिल्लाकल्लु गाँव में हनुमान मंदिर की हुंडी क्षतिग्रस्त कर 6000 रुपए और 8 सितंबर को एडुरूबिदम गाँव में भगवान राम मंदिर के हुंडी से भी 10,000 रुपए चुराए थे। आरोपित को आज कोर्ट में पेश किया गया था, जिसके बाद उसे पुलिस रिमांड पर रखा गया है।