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इस्लाम में दुर्गा बनना हराम, अल्लाह से तौबा करे नुसरत जहां: TMC सांसद पर भड़का देवबंदी मौलाना

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद और बंगाली फिल्म अभिनेत्री नुसरत जहां ने 20 सितंबर 2020 को अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। वीडियो में वह महिषासुरमर्दिनि के रूप में नज़र आ रही थीं। इसके कारण वह एक बार फिर मज़हब विशेष के लोगों के निशाने पर आ गई हैं। देवबंद के मौलाना इसहाक गोरा ने इसे इस्लाम की नजर में हराम बताते हुए कहा है कि नुसरत जहां इसके लिए अल्लाह से तौबा करें।

मौलाना इसहाक गोरा ने कहा, “नुसरत को ऐसी हरकतें करना पसंद है। वह अक्सर विवादों में रहती है। इस्लाम में इस तरह की तमाम चीज़ें हराम हैं, लेकिन नुसरत फिर भी ऐसा करती है। इस तरह की हरकतों से लोगों की भावनाएँ आहत होती हैं। मेरे अनुसार यह पूरी तरह गलत है। नुसरत जहां को अपनी इस हरकत के लिए सार्वजनिक तौर पर माफ़ी माँगनी चाहिए।” 

मौलाना इसहाक ने यह भी कहा कि इस तरह दुर्गा का वेष धारण करके लोगों को ‘शुभो महालया’ की शुभकामना देना इस्लाम में हराम है। वह ऐसा नहीं कर सकती है। वहीं सोशल मीडिया पर मौजूद कट्टरपंथियों ने तो यहाँ तक कह दिया कि वह अल्लाह से नहीं डरती हैं, इसलिए उनकी मौत का समय नज़दीक आ गया है। अब उन्हें अल्लाह से कोई नहीं बचा सकता है।  

इसके पहले भी 17 सितंबर को नुसरत जहां ने इन्स्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा की थी। इस तस्वीर में नुसरत दुर्गा का रूप धारण किए हुए नज़र आ रही थीं। इसके बाद वह सोशल मीडिया पर मौजूद कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गई थीं। एक सोशल मीडिया यूज़र ने तो यहाँ तक लिख दिया था, “तुम्हारी मृत्यु का समय आ गया है। अल्लाह से डरो। क्या तुम अपने शरीर को ढक कर नहीं रख सकती? छी छी छी।” वहीं कुछ ने कहा कि उन्हें अपनी इस हरकत पर शर्म आनी चाहिए कि वह मुस्लिम होकर ऐसा कर रही हैं। ऐसा करने की वजह से वह सीधा जहन्नुम जाएँगी।    

नुसरत फ़िलहाल एक बंगाली फिल्म की शूटिंग के लिए लंदन में हैं। इस तरह की धमकियों के बाद नुसरत के सहयोगी ने पश्चिम बंगाल सरकार और विदेश मंत्रालय ने शूटिंग के दौरान सुरक्षा बढ़ाने का निवेदन किया है। धमकियों को लेकर नुसरत ने खुद इंग्लैंड में भारत के उच्चायुक्त को पत्र लिखा है। 

पत्र में उन्होंने कहा है, “मैं दो दिन पहले शूटिंग के लिए यहाँ आई हूँ लेकिन मुझे सोशल मीडिया के ज़रिए लगातार धमकी दी जा रही है। इसमें कई कट्टरपंथी भारत और कई पड़ोसी देशों के हैं। इन बातों को मद्देनज़र रखते हुए मेरा आपसे निवेदन है कि मेरी सुरक्षा बढ़ाई जाए।” इसके पहले भी साल 2019 के दौरान हुई दुर्गा पूजा में सिन्दूर और मंगल सूत्र पहनने पर कट्टरपंथियों ने उन्हें खूब निशाने पर लिया था।   

‘कागज नहीं दिखाएँगे’ वाले अनुराग कश्यप कागजों का पुलिंदा लेकर पहुँचे पुलिस स्टेशन: अभिनेत्री के यौन शोषण का मामला

बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप आज (अक्टूबर 1, 2020) सुबह 10 बजे वर्सोवा पुलिस थाने पहुँचे। अभिनेत्री पायल घोष की शिकायत के मद्देनजर उन्हें मुंबई पुलिस ने कल समन जारी कर थाने में 11 बजे हाजिर होने के आदेश दिए थे।

थाने पहुँचने के दौरान अनुराग कश्यप के हाथ में कागजों का बंडल नजर आया। इस बंडल के साथ वह पुलिस थाने में घुस रहे थे। फिल्म निर्माता की हालिया तस्वीरें सामने आने के बाद ट्विटर पर एक पुरानी बहस छिड़ गई है। यह बहस कागज नहीं दिखाने की है।

दरअसल, जिस समय सीएए के विरोध में प्रदर्शन हो रहे थे और प्रदर्शनकारी ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ जैसे नारे लगा रहे थे, उस समय अनुराग बॉलीवुड की उन शख्सियतों में से थे जो सोशल मीडिया पर जोर-शोर से इसका समर्थन कर रहे थे और ज्यादातर ट्वीट के जवाब में लिखते थे, ‘कागज नहीं दिखाएँ।’

अब सोशल मीडिया यूजर्स उनके ऐसे ही ट्वीट को उनकी हालिया तस्वीर के साथ शेयर करके मजाक उड़ा रहे हैं। कोई पूछ रहा है कि अनुराग ने जब अपने सारे डॉक्यूमेंट्स जला दिए थे तो कागज कहाँ से आए। कोई कह रहा है कि अभी तो एनआरसी भी नहीं आई, अभी से क्यों कागज निकाल लिए। इसके अलावा कोई अनुराग के हाथों में बंडल देखकर उसे फिल्म की स्क्रिप्ट बता रहा है तो कोई उन्हें ही झूठा बता रहा है।

सत्येंद्र तिवारी लिखते हैं, “ध्यान से देखो ये वही अनुराग कश्यप है नफरत फैलाने वाला। जो 4 दिन पहले कहता था कि कागज नहीं दिखाएँगे। ये केवल घर में बैठकर बेकसूर लोगों की मानसिकता में जहर घोलकर लोगों से दंगा करवाते हैं और खुद कागज लेकर घूमते हैं। कब तक इनके भड़काने पर आग लगाओगे?”

एक यूजर ने अनुराग का पुराना ट्वीट शेयर करते हुए लिखता है, “अनुराग कश्यप बोल रहा था कागज नहीं दिखाएगा। एनआरसी तो आई नहीं। कागज पहले निकल आए तेरे।”

सौरभ सिंह कहते हैं, “कागज नहीं दिखाने वालों का ये हाल हो गया है। खुद ही कागज दिखाने जा रहे हैं।” विजय गुप्ता कहते हैं, “हम भी देखेंगे। बस तब मत कहना कि कागज नहीं दिखाएँगे।” एक यूजर लिखता है कि ये सब वही गैंग है जो कह रहे थे, कागज नहीं दिखाएँगे। लेकिन अब कागज भी पैदा हो गया।”

गौरतलब है कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों के समय अनुराग कश्यप के कई ट्वीट ऐसे सामने आए थे, जिनमें डॉक्यूमेंट्स किसी भी कीमत पर नहीं दिखाने की बात कही गई थी। मेनका गुरुस्वामी ने जब 10 जनवरी को यह जानकारी दी थी कि सीएए प्रभाव में आ गया है, उस समय अनुराग कश्यप ने कहा था, “आने दो हम कागज नहीं दिखाएँगे।”

इसके बाद एक ट्वीट में उन्होंने हर्ष गुप्ता को जवाब दिया था। हर्ष ने उन्हें कहा था, “तेरा बाप भी कागज दिखाएगा।” इस पर उन्होंने कहा, “अपने बाप की बात कर। जला दिए कागज सारे और औकात है किसी कि तो निकाल दे यहाँ से।”

यहाँ बता दें कि 19 सितंबर को अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद पिछले हफ्ते निर्माता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ। केस में अनुराग पर दुष्कर्म, गलत इरादे से रोकने और महिलाओं का अपमान करने पर आईपीसी की यू/एस 376 (1), 354, 341, 342 सहित कई धाराएँ लगीं। इन्हीं पर कार्रवाई करते हुए फिल्ममेकर अनुराग से आज वर्सोवा थाने में पूछताछ हो रही है।

जानकारी के मुताबिक, अनुराग कश्यप अपने वकील के साथ लगभग 10 बजे वर्सोवा पुलिस स्टेशन पहुँचे। थाने के बाहर भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया था। जैसे ही उनकी कार ने पुलिस स्टेशन के परिसर में प्रवेश किया अधिकारियों ने पुलिस स्टेशन के गेट को बंद कर दिया।

परिसर में सिर्फ उन्हीं लोगों को प्रवेश की अनुमति है, जिन्हें पुलिस ने बुलाया था। किसी अन्य व्यक्ति को उन लोगों के अलावा प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई है। वहीं वर्सोवा पुलिस अधिकारी महिला शिकायतकर्ता को मेडिकल परीक्षण के लिए कूपर अस्पताल ले गए हैं।

बारां की नाबालिग लड़कियों ने कैमरे पर बताया- उनके साथ 3 दिनों तक हुआ रेप, CM गहलोत ने कहा- ‘नहीं हुई जबरदस्ती’

राजस्थान के बारां से कल 13 और 15 वर्षीय दो नाबालिग लड़कियों के साथ हुए बलात्कार की घटना सामने आई थी। कथिततौर पर लड़कियों को अगवा कर कोटा, जयपुर और अजमेर ले जाया गया और तीन दिनों तक उनके साथ बलात्कार किया गया था। अपने साथ हुए इस घिनौने अपराध को उन्होंने कमरे पर भी बताते हुए कहा था कि दो लड़कों द्वारा उनका अपहरण किया गया और नशीली दवाइयाँ देकर तीन दिन तक बलात्कार किया गया।

पीड़िताओं के बयान के बावजूद, राजस्थान के सीएम और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने ट्विटर पर दावा किया कि नाबालिग लड़कियों के साथ किसी भी प्रकार की ‘जबरदस्ती’ नहीं की गई है।

ट्विटर पर उन्होंने दावा किया, “बारां में बालिकाओं ने स्वयं मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए 164 के तहत बयानों में अपने साथ ज्यादती नहीं होने एवं स्वयं की मर्जी से लड़कों के साथ घूमने जाने की बात कही। बालिकाओं का मेडिकल भी करवाया गया एवं अनुसन्धान में सामने आया कि लड़के भी नाबालिग हैं, जाँच आगे भी जारी रहेगी।”

खबरों के मुताबिक, राजस्थान पुलिस ने भी सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से इनकार किया है। कथिततौर पर एक पुलिस वाले ने कहा है कि लड़कियों ने अपने बयान में बलात्कार के आरोप से इनकार किया। हालाँकि, दोनों नाबालिग लड़कियों के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें धमकी देकर डराया धमकाया गया था, ताकि वे आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज न करवायें।

गौरतलब है कि कल हमनें आपको बताया था कि पीड़िताओं के पिता ने पुलिस से अपने बच्चियों के साथ हुए अपराध को लेकर न्याय की माँग की थी। अगवा की गई लड़कियों से जब पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ की तो पुलिस के सामने ही उन्हें जान से मारने की धमकी की गई थी। जिस वजह से वह अपने ऊपर हुए जुर्म के बारे में नहीं बता सकी थी।

नाबालिग लड़कियों के पिता ने पुलिस को बताया था कि दो नाबालिग आरोपित 18 सितंबर की रात को बहला फुसला कर उनकी बेटियों को भगा ले गए थे। पिता के आरोप के अनुसार, अगवा करने के बाद उन्हें अजमेर, कोटा और जयपुर ले जाकर तीन दिनों तक लगातार उनका बलात्कार किया गया। दोनों लड़कियों को 21 सितंबर को कोटा से बरामद किया गया था।

एक तरह जहाँ दोनों नाबालिग कैमरे पर नशीला पदार्थ पिलाकर सामूहिक बलात्कार करने की बात स्वीकार की। वहीं इस मामले में पुलिस और सीएम अशोक गहलोत का दावा है कि नाबालिग लड़कियों ने अपने बयान में बलात्कार के आरोपों से इनकार किया।

चितवन में अयोध्यापुरी धाम बनाएगा नेपाल, 40 एकड़ में फैला होगा; PM ओली का ऐलान

पिछले दिनों ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अयोध्या के अपने देश में होने का दावा किया था। अब उन्होंने अयोध्यापुरी धाम के निर्माण का ऐलान किया है। इसके लिए 40 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। जमीन का आवंटन चितवन में किया गया है। ओली का दावा है कि श्रीराम का जन्म यहीं हुआ था।

ओली ने चितवन जिले की माडी नगरपालिका में अयोध्यापुरी धाम बनाने के लिए 40 एकड़ ज़मीन आवंटित करने का आदेश दिया है। माडी के मेयर ठाकुर प्रसाद धाकल ने नेपाल नेशनल न्यूज़ एजेंसी से बताया कि यह फैसला 29 सितंबर को हुई बैठक के दौरान लिया गया था। ओली ने माडी नगरपालिका के साथ हुई बैठक में पुरातात्विक खुदाई के आदेश भी दिए।

ओली ने भारत पर संस्कृति धरोहर पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वास्तविक अयोध्या नेपाल के चितवन जिले में स्थित है। उन्होंने दावा किया था कि श्रीराम का जन्म नेपाल में हुआ था। भारत के साथ सीमा विवाद पैदा करने की कोशिश में लगे ओली के इस बयान की काफी आलोचना हुई थी।

माडी के मेयर धाकल का कहना है, “हमने 40 एकड़ ज़मीन अयोध्यापुरी धाम के लिए आवंटित की है। हमारे पास लगभग 50 बीघा अतिरिक्त ज़मीन है। अगर हमें कोई तकनीकी मुश्किल आती है उस सूरत में हम इस अतिरिक्त ज़मीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। अयोध्यापुरी धाम के लिए मास्टर प्लान भी तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इस पर विस्तार से एक रिपोर्ट भी तैयार कर ली जाएगी।”       

नेपाल की नेशनल न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने ठोरी के नज़दीक स्थित माडी नगरपालिका का नाम बदल कर अयोध्यापुरी रखने का आदेश दिया है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों का अधिग्रहण करके उन्हें अयोध्या की तर्ज पर बनाने का आदेश दिया है। साथ ही वहाँ पर श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की मूर्ति स्थापित करने का भी आदेश दिया है। ओली ने रामनवमी के अवसर पर भूमि पूजन का काम शुरू करने की बात कही है और दो साल बाद रामनवमी के अवसर पर ही मूर्ति का अनावरण करने की बात भी कही है।   

हाथरस की मृतका के पिता का प्रियंका गाँधी ने शेयर किया विवादित वीडियो, पीछे से आ रही आवाज- CBI जाँच

उत्तर प्रदेश के हाथरस में सामूहिक दुष्कर्म का राजनीतिकरण करने का फैसला कुछ प्रमुख राजनीतिक दल कर चुके हैं। इसमें सबसे आगे कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और उनकी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा सबसे आगे नजर आ रहे हैं।

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा, जो कि अपने भाई राहुल गाँधी के साथ आज पीड़िता के परिवार से मुलाकात करने के लिए दिल्ली से रवाना हुए हैं, ट्विटर पर लगातार योगी सरकार पर आरोप लगा रही हैं।

प्रियंका गाँधी ने मृतका के पिता का एक ऐसा विवादित वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्हें सीखा रहे कैमरामैन को आसानी से सुना जा सकता है। इस कारण प्रियंका गाँधी द्वारा ट्वीट किया गया यह वीडियो सोशल मीडिया पर विवाद का विषय बन चुका है।

प्रियंका गाँधी ने मृतका के पिता का एक वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है – “हाथरस की बेटी के पिता का बयान सुनिए। उन्हें जबरदस्ती ले जाया गया। सीएम से वीसी के नाम पर बस दबाव डाला गया। वो जाँच की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। अभी पूरे परिवार को नजरबंद रखा है। बात करने पर मना है। क्या धमकाकर उन्हें चुप कराना चाहती है सरकार? अन्याय पर अन्याय हो रहा है।”

लेकिन इसी एक मिनट के वीडियो में देखा और सुना जा सकता है कि युवती के पिता को कैमरामैन कुछ शब्द सिखा रहा है। ‘बेफिटिंग फैक्ट्स’ नाम के ट्विटर अकाउंट ने प्रियंका गाँधी को ये वीडियो शेयर करने पर फटकार लगाते हुए लिखा है, “डिस्गस्टिंग! प्रियंका गाँधी, आपको वीडियो अपलोड करने से पहले वीडियो की जाँच करनी चाहिए थी। 00:36 पर हम कैमरामैन को ‘सीबीआई जाँच होनी चाहिए’ बोलते हुए सुन सकते हैं।”

‘बेफिटिंग फैक्ट्स’ ने लिखा है – “00:36 पर कैमरामैन पीड़ित के पिता को लगातार गाइड करते हुए उन्हें ये कहने को कह रहा है – ‘सीबीआई जाँच होनी चाहिए, दबाव बना के किया, घर में कैद कर दिया।”

प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी एक बड़ा काफीला लेकर पीड़ित परिवार से मिलने निकले हैं जिस कारण हाइवे पर लंबा जाम लग गया है। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक होने से यूपी पुलिस इस काफिले को दिल्ली वापस नहीं कर पाई। हाथरस के जिलाधिकारी का कहना है कि जिले की सीमाएँ सील हैं और धारा 144 लागू कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि गत 14 सितंबर को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र स्थित एक गाँव में 19 साल की एक दलित लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने इस मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

पटना में सुबह टहलने निकले भाजपा नेता ‘राजू बाबा’ की गोली मार कर हत्या, CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

बिहार की राजधानी पटना के बेउर क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता की गोली मार कर हत्या कर दी गई। गुरूवार (1 अक्टूबर 2020) की सुबह भाजपा मंडल उपाध्यक्ष राजेश कुमार झा उर्फ़ राजू बाबा की हत्या हुई। वह सुबह बेउर थाना क्षेत्र के अंतर्गत तेज प्रताप नगर में अपने घर के नज़दीक टहलने के लिए निकले थे, तभी दो पहिया वाहन सवार नकाबपोश अपराधी उनके नज़दीक आए और उनकी कनपटी पर गोली मार दी। 

घटना को अंजाम देने के बाद दोनों अपराधी तुरंत मौके से फरार हो गए। घटना गुरूवार की सुबह लगभग 6 बजे की है। फ़िलहाल बेउर थाने की पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुछ ही दिन पहले राजेश कुमार झा भाजपा में शामिल हुए थे। इस घटनाक्रम पर बेउर थाना के थानाध्यक्ष फूल देव चौधरी ने भी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि राजेश कुमार झा का कई दिनों से घरेलू विवाद चल रहा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ उनके एक रिश्तेदार पर हत्या में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि दो नकाबपोश बाइक पर सवार होकर आए थे और उन्होंने ही राजेश कुमार झा को गोली मारी। पुलिस ने इस मामले में पूछताछ के लिए अभी तक कुल 3 लोगों को हिरासत में लिया है। शव को फ़िलहाल पोस्टमार्टम के लिए पीएमएचसी भेज दिया गया है। पुलिस फ़िलहाल इस मामले की जाँच कर रही है।   

हाल ही में तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले के केलेमंगलम से एक भयानक घटना सामने आई थी। मंगलवार (17 सितंबर, 2020) रात को कुछ अज्ञात लोगों द्वारा भाजपा युवा विंग के नेता रंगनाथन की बेहरहमी से हत्या कर दी गई थी। ऑर्गनाइज़र की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को 35 वर्षीय दलित भाजपा पदाधिकारी रंगनाथन को एक अज्ञात गिरोह ने मार डाला था। रंगनाथन हाल ही में AIADMK को छोड़ कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्हें कुंडुमारनप्पल्ली गाँव के बीजेपी यूथ विंग अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

अजेंडा-परस्त ‘ब्लस्टर ब्लफ कॉर्पोरेशन’ उर्फ़ BBC को मिला ‘बिफिटिंग रिप्लाई’

1942 में आज़ाद हिन्द रेडियो के एक प्रसारण से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा ‘ब्लस्टर ब्लफ कॉर्पोरेशन’ का तमगा BBC को मिला, अर्थात धमकियाँ देकर ठगी करने वालों का समूह। तब परिस्थितियाँ कुछ और थी अब कुछ और हैं।

पिछले कुछ समय में औपनिवेशिक सरकार द्वारा त्यागी गई विष्ठा यानी, बीबीसी ने भारत विरोधी, पाक-परस्त और जिहादी प्रोपेगेंडा फैलाने की अनेकों जगजाहिर कीर्तिमान हासिल किए हैं। झूटी रिपोर्टिंग और औपनिवेशिक अहंकार से ग्रसित बीबीसी व सोरोस के नमक में पलने वाले बीबीसीकर्मी झूठे और भ्रामक तथ्यों के आधार पर भारत-विरोधी एजेंडा चलाने का ऐसा कोई भी अवसर नहीं छोड़ते।

दिलचस्प बात यह है कि इनकी गिरोह मंडली मतारोपण के बारीक और सुनियोजित षड्यंत्र के लिए दुनियाभर से ऐसे ही दिशाहीन अजेंडेबाज़ पत्रकार रिक्रूट करती है और ‘बीबीसी- हिंदी’ जैसे भारत स्थित साजिश खाने गाहे – बगाहे कभी हिन्दूघृणा से लिप्त कार्टून तो कभी भारतीयता का पाखंड कर अपने औपनिवेशिक ठाठ-बाठ से जनमानस को भ्रमित करने का पुरजोर प्रयत्न करते हैं व शहरी समाज के प्रगतिशील पाठकों में अक्सर मनचाहा जहर भरने में सफल भी होते हैं।

ऐसा ही कुछ, दो दिन पूर्व देखने को मिला,जब प्रसिद्द न्यूज़ एंकर व पॉलिटिकल एनालिस्ट शहजाद पूनावाला को बीबीसी के अमुक पत्रकार का मैसेज प्राप्त हुआ जब बीबीसीकर्मी पत्रकार की मंशा विवादों में आए कथित तौर पर मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले गिरोह ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ के पक्ष में जबरन बात करवाकर उस संस्था पर लगे तमाम प्रकार के आरोपों से इतर मासूम दिखाने की थी।

इसी क्रम में बीबीसीकर्मी ने शहजाद पूनावाला को लिखा – “हैल्लो मिस्टर पूनावाला मैं बीबीसी से हूँ। हम आपके साथ स्काइप के माध्यम से एक इंटरव्यू करने को लालायित हैं, जिसमें आपको इस विषय में चर्चा करनी है कि किस तरह से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार भारत में विरोध के स्वरों को कुचलने का प्रयास कर रही है। यह सब एमनेस्टी इंटरनेशनल के भारत प्रकोष्ठ का शटर गिरने के संदर्भ में है, जो भारत सरकार पर अपने ‘विच-हंट’ होने का आरोप भी लगा रहे हैं। क्या आप प्लीज़ पंद्रह मिनट स्काइप पर दे सकते हैं ? अभी से शाम चार बजे तक कभी भी?”

इसके जवाब में शहजाद पूनावाला ने दो टूक जवाब देते हुए लिखा – “प्रिय शालू (पत्रकार का नाम) जी। मुझे लगता है कि बीबीसी की कवरेज सदा ही फ़र्ज़ी, अत्यधिक झुकी हुई, हताशापूर्ण व भारत विरोधी हितों को प्रचारित करने के लिए होती है, जैसा कि हाल में जम्मू कश्मीर, धारा 370 जैसे कई विषयों पर देखने को मिलती रहती है। इस सब से यह साफ़-साफ़ प्रतीत होता है कि बीबीसी का समस्त प्रयास भारत-विरोधी ताकतों का पक्ष लेने पर केंद्रित है। जब आप इसे सुधार लेंगे तब मैं कोई टिप्पणी करने के लिए उपलब्ध रहूँगा अन्यथा आपकी ऐसी किसी बकवास को वैधता देने में मेरी कोई इच्छा नहीं ऐसी बकवास जो मेरे राष्ट्र हितों के विरुद्ध जाकर पाकिस्तान का बिगुल बजाती हों।”

इस संवाद के स्क्रीनशॉट्स शहजाद पूनावाला द्वारा उनके ट्विटर हैंडल पर साझा किए गए थे।

बीबीसी ही नहीं बल्कि भारत-विरोधी अजेंडा में मीडिया का एक बड़ा गिरोह बड़े स्तर पर सक्रीय रहा है। ये बात और है कि पिछले कुछ वर्षों में आम जनता भी इनके इन प्रपंचों को समझने और खुद ही उनका खंडन करने में भी कामयाब रही है। यही एक वजह भी है कि वामपंथ की बौखलाहट नए स्तर पर पहुँच रही है और इसका असर हम सोशल मीडिया पर इनके आकाओं के मानसिक और भावनात्मक मेल्टडाउन के रूप में अक्सर रोज ही देखते हैं।

बीबीसी के लिए यही बेहतर है कि वह जितना संभव हो सके, अपने मानसिक स्तर की ही बातों पर समय और अपने संसाधनों का उपयोग करे।

बॉलीवुड ड्रग्स जाँच की सुई A, D, S पर अटकी: अर्जुन रामपाल, डीनो मोरया और शाहरुख खान आए NCB की रडार पर

बॉलीवुड में ड्रग कार्टेल को लेकर रोज़ नए खुलासे हो रहे हैं। हालिया ड्रग्स मामले में A, D और S नाम के कलाकारों की ओर संकेत किया गया था। इन नामों को लेकर मीडिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि यह तीनों नाम बॉलीवुड कलाकार अर्जुन रामपाल, डीनो मोरया, और शाहरुख खान हैं। एनसीबी अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी में इस बात का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में इस बात का दावा भी किया गया है कि अर्जुन रामपाल शाहरुख खान को ड्रग्स उपलब्ध कराते थे। 

दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित ख़बर में इस बात का खुलासा किया गया है। एनसीबी के एक अधिकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर इन नामों का खुलासा किया है। ड्रग्स मामले में चल रही जाँच में अभी तक दीपिका पादुकोण और सारा अली खान जैसे बॉलीवुड कलाकारों का नाम सामने आया था। ऐसा पहली बार हुआ है जब शाहरुख खान जैसे बॉलीवुड सुपरस्टार का नाम ड्रग्स मामले में सामने आया है। 

एनसीबी फिलहाल इस पहलू पर जाँच कर रही है कि डीनो किस व्यक्ति को ड्रग्स उपलब्ध कराते थे। एनसीबी अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उन्हें यह जानकारी ड्रग पेडलर ने दी। जानकारी के अनुसार अर्जुन रामपाल शाहरुख खान के घर ड्रग्स लेकर जाते थे। फ़िलहाल एनसीबी इन दावों को लेकर पुख्ता सबूत इकट्ठा कर रही है।  

दैनिक भास्कर की ख़बर में दावा किया गया है कि उनके पास दो इंटेलिजेंस इनपुट हैं। इसमें यह इनपुट ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर और शाहरुख खान के शामिल होने को लेकर है। फ़िलहाल एनसीबी इस तैयारी में है कि आगामी कार्रवाई किस तरह अंजाम दी जाएगी। रिपोर्ट में इस तरह का एक और दावा R नाम के कलाकार को लेकर हुआ था। ख़बर में  R नाम का कलाकार रणबीर कपूर को बताया गया है। फ़िलहाल शाहरुख़ खान इंडियन प्रीमियर लीग के लिए दुबई में मौजूद हैं, उनकी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स आईपीएल खेल रही है। 

इस हफ्ते की शुरुआत में एनसीबी ने दीपिका पादुकोण, साला अली खान और रकुल प्रीत सिंह और दीपिका की मैनेजर करिश्मा प्रकाश का मोबाइल जब्त कर लिया था। जाँच के दौरान एनसीबी ने इस बात का खुलासा किया था कि जया साहा के मोबाइल फोन से मिली जानकारी के मुताबिक़ दीपिका पादुकोण माल की माँग कर रही थीं। ख़बरों के मुताबिक़ दीपिका पादुकोण ने कहा था कि माल का मतलब एक तरह की सिगरेट है और हैश का मतलब दूसरे ब्रांड की सिगरेट।

जब बलात्कार से ज्यादा जरूरी हिन्दू प्रतीकों पर कार्टून बना कर नीचा दिखाना हो जाता है: अपना इतिहास स्वयं लिखो

बलात्कार का अभियुक्त था, भारत में होता तो शायद उसके साथ इससे भी बुरा होता। जब वो चीख-चीख कर कहने लगा कि उसने कोई बलात्कार किया ही नहीं तो उसकी सुनता कौन? हरेक अपराधी ऐसा ही कहता है। ऊपर से ये तो अपराधियों में भी सबसे घृणित – बलात्कारी था।

रोनाल्ड कॉटन को जिस मामले में गिरफ्तार किया गया था वो एक छात्रा के बलात्कार का मामला था। कोई अपराधी 1984 में एक रात लड़की के कमरे में घुस आया था और उसने छुरे की नोक पर बलात्कार किया।

अपराधी के कब्जे से जैसे-तैसे भागकर निकली जेनिफर ने जब घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाई तो पुलिस ने आम संदिग्धों की धर-पकड़ की और उसी में रोनाल्ड कॉटन भी पकड़ा गया था। संदिग्धों की पहचान परेड में जेनिफर ने कहा कि कॉटन ही वो आदमी है जो उस रात उसके कमरे में घुस आया था।

जेल जाते ही सबसे पहले तो आय के स्रोत बंद हो जाते हैं, और कहने को चाहे लोग कुछ भी कहें, कानूनी प्रक्रिया और अदालतें गरीबों के लिए तो बिलकुल भी नहीं बनीं। ऊपर से रोनाल्ड कॉटन पर मामला भी बलात्कार का था और पीड़िता ने उसे साफ़ पहचान लिया था।

इस जघन्य कृत्य के लिए रोनाल्ड कॉटन को उम्रकैद के साथ पचास वर्षों की कैद की सजा मिली। रोनाल्ड कॉटन अपने बेकसूर होने की बात पर अड़ा हुआ था। उसने 1987 में अपना मामला फिर से सुनवाई के लिए खुलवा लिया। इस बार मुक़दमे के दौरान उस पर एक किसी दूसरे मामले का आरोप भी साबित कर दिया गया। पहले पचास साल की सजा थी ही, अब 54 वर्षों की सजा और हो गई। शायद ‘नमाज माफ़ करवाने गए और रोज़े गले पड़ गए’ ऐसी ही स्थिति के लिए कहा गया होगा।

वहीं, दूसरी तरफ बलात्कार पीड़िता जेनिफर के लिए भी न्यायिक प्रक्रिया के अनुभव कोई अच्छे नहीं थे। पहले ही बलात्कार की वजह से मानसिक रूप से पीड़ित लड़की के लिए मेडिकल जाँच भी एक डराने वाला अनुभव था। भारत में भी बलात्कार की जाँच के लिए वैसे ही टेस्ट होते हैं। अदालत की सुनवाई तो और भी तोड़ देने वाली प्रक्रिया थी।

पूरे वक्त रोनाल्ड कॉटन कहता रहा कि जेनिफर गलत पहचान रही है, उसने बलात्कार नहीं किया। इस दौर में डीएनए टेस्ट को सबूतों के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता था। रोनाल्ड को जेल में 11 वर्ष बीत चुके थे जब डीएनए टेस्ट को मान्यता मिली। जब इस बार उसने पीड़िता के कपड़ों की डीएनए जाँच करवाई तो पता चला कि जेनिफ़र से सचमुच पहचानने में गलती हुई थी। रोनाल्ड कॉटन अपराधी नहीं था।

इस दौर तक रोनाल्ड कॉटन की बलात्कार पीड़िता जेनिफ़र से ठीक ठाक जान-पहचान हो चुकी थी। उन दोनों ने बाद में मिलकर, ‘पिकिंग कॉटन’ नाम की किताब लिखी जो एक तरफ तो बलात्कार पीड़िता को न्याय व्यवस्था से होने वाली दिक्कतों के बारे में बताती है, और दूसरी तरफ एक बेक़सूर की न्यायिक व्यवस्था से शिकायतों के बारे में।

‘पिक्किंग कॉटन’, न्याय की हत्या पर कोई इकलौती किताब भी नहीं है। ऐसी ही एक दूसरी किताब ‘एक्चुअल इनोसेंस: फाइव डेज टू एग्जीक्यूशन एंड अदर डिसपैचेज फ्रॉम द रोंगली कनविक्टेड’ भी है।

इस किताब ने एक पूरा आन्दोलन शुरू कर दिया था। इसमें ऐसे लोगों की कहानियाँ हैं, जिन्हें जबरन सजा सुना दी गई और बाद में सही तरीके से जाँच में पता चला कि अपराधी तो कोई और थे! ‘द इनोसेंस प्रोजेक्ट’ नाम की एक संस्था भी है जिसने गलत सजा पाए कई लोगों को छुड़ाया है।

भारत में ही अगर कभी ‘आरुषी हत्याकांड’ या ‘निठारी आदमखोर काण्ड’ जैसे मामलों पर लिखा जाता तो शायद ऐसे ही मामले निकलते। भारत के लॉ कमीशन ने, 2018 में ‘Wrongful Prosecution (Miscarriage of Justice): Legal Remedies’ नाम की एक रिपोर्ट भी ऐसे ही मामलों पर लिखी थी।

तथाकथित भगवा आतंकवाद के नाम पर मीडिया ट्रायल चलाकर बरसों जेल में बंद रखे गए लोगों की कहानियाँ निकाली जाएँ तो ऐसे ही मामले निकलेंगे। हाल ही में ‘कठुआ कांड’ के मामले में मीडिया लिंचिंग के शिकार युवक की कहानी भी ऐसी ही होगी।

कठुवा कांड में तो जिस नौजवान की कई बुद्धि-पिशाच और पक्षकार मिलकर, मीडिया लिंचिंग कर रहे थे, अदालत में पता चला कि वो सच कह रहा था। जिस वक्त वारदात हुई थी वो तो किसी दूसरे राज्य में कहीं परीक्षाएँ दे रहा था। फिर सवाल ये है कि नैरेटिव गढ़ने की जल्दी में भला पक्षकार और बुद्धिपिशाच भला सच्चाई को क्यों देखते? हिन्दुओं को नीचा दिखाने वाले, बलात्कार को धर्म से जोड़ने वाले कार्टून बनाना उनके लिए ज्यादा जरूरी था। जितनी नीचता हिन्दुओं के प्रति की जा सकती, आखिर उतना ही तो वो प्रसिद्ध होते ना?

बाकी एक तथ्य ये भी है कि जब तक शेर खुद शिकार की कहानियाँ ना लिखने लगें, तब तक शिकार की कहानियों में शिकारी खुद अपना महिमामंडन तो करेगा ही। अपने पक्ष की कहानियाँ खुद लिखना सीखिए, लेकिन उससे भी जरुरी है कि वो जिस मुद्दे पर उकसाएँ, उस पर चुप रहना सीखिए।

आजमगढ़ में 8 साल की बच्ची को नहलाने के बहाने घर लेकर जाकर दानिश ने किया रेप, हालत नाजुक

उत्तर प्रदेश में एक और बलात्कार की घटना सामने आई है। इस घटना में 8 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना अंजाम दी गई है। आरोपित दानिश नाम के युवक ने बच्ची के साथ दरिंदगी को अंजाम दिया है, यह वारदात उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की है। फ़िलहाल पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। 

घटना आजमगढ़ के जीयनपुर क्षेत्र की है जिसमें 20 साल के दानिश ने 8 साल की बच्ची को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया है। पीड़िता की माँ ने आरोपित दानिश के विरुद्ध मामला दर्ज करा दिया है, शिकायत के दौरान माँ ने बताया कि दानिश उसे नहलाने के बहाने अपने घर लेकर गया था। वहाँ उसने बच्ची के साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया। बच्ची की माँ ने यह भी बताया कि जब वह दानिश के घर से आई तब उसके शरीर से खून बह रहा था और वह काफी पीड़ा में थी।

इस घटना पर बात करते हुए आजमगढ़ के पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “बच्ची की माँ द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। घटना के संबंध में दानिश नाम के आरोपित की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है।” फ़िलहाल उस बच्ची की हालत नाज़ुक बताई जा रही है, जिसके चलते उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

इसी तरह की एक घटना उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुई है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक 14 साल की नाबालिग बच्ची के साथ उसके पड़ोसी रिजवान द्वारा बलात्कार की घटना सामने आई है। इस घटना के सामने आते ही रिजवान फरार हो गया था लेकिन बृहस्पतिवार (अक्टूबर 01, 2020) सुबह ही बागपत पुलिस अधिकारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि नाबालिग के पड़ोसी रिजवान ने उसे नशीला पदार्थ सुँघाकर उसके साथ बलात्कार किया। इसी दौरान पीड़िता के परिजनों ने उसे पकड़ लिया था, लेकिन रिजवान के घरवालों ने उसे भगा दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि जब वह बीती रात अपने परिवार के साथ घर के आँगन में सो रही थी, तभी घर की दीवार से कूदकर रिजवान उर्फ पकौड़ी उनके घर में आ घुसा और बच्ची को रुमाल सुँघाकर उसे घर से उठा ले गया। वह शोर न करे इसके लिए रिजवान ने बच्ची के मुँह में कपड़ा ठूँस दिया था। इसके बाद, रिजवान ने घर से थोड़ी दूर खड़े एक ट्रक के पास उसके साथ बलात्कार किया। बच्ची ने बताया कि रिजवान ने उसे धमकाने के लिए उसके चेहरे पर तेज़ाब डालने की भी धमकी दी थी।

इसके अलावा अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ यूपी के बलरामपुर (Balrampur) जिले में दो युवकों – शाहिद पुत्र हबीबुल्ला निवासी गैंसड़ी और साहिल पुत्र हमीदुल्ला निवासी गैंसड़ी द्वारा सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई थी। आरोप है कि दोस्ती के बहाने घर ले जाकर दोनों आरोपितों ने लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और गंभीर हालत में एक रिक्शे पर बैठाकर घर भेज दिया था। 22 वर्षीय पीड़िता युवती की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। थी चार डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम के बाद बुधवार (सितम्बर 30, 2020) रात को ही पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया था।