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हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाने से जन्नत… और पैसा भी: मुरादाबाद में 14 साल की दलित बच्ची ने बताया कैसे 4 मुस्लिम लड़कों ने 2 महीने तक गोमांस खिलाकर किया रेप

मुरादाबाद में दलित बालिका का अपहरण कर 2 महीने तक रेप करने वाले मुस्लिमों को इसके लिए पैसा मिलता था। यह पैसा इस्लामिक जिहाद के नाम पर मिलता था। दलित नाबालिग का अपहरण करने वाला मुख्य आरोपित सलमान उससे दावा करता था कि वह ना जाने कितनी लड़कियों को मुस्लिम बना चुका है।

यह सारे आरोप 14 वर्षीय दलित बच्ची ने FIR में लगाए हैं। पीड़िता का सलमान, आरिफ, राशिद और जुबैर ने 2 माह पहले अपहरण किया था। इसके बाद उसे एक कमरे में लगातार बेहोशी की हालत में रखते थे। यहाँ उसके साथ 2 माह तक रेप हुआ। पीड़िता ने बताया है कि होश में आने पर उसे गाय-भैंस का मांस खिलाया जाता था।

पीड़िता का आरोप है कि उसके हाथ पर बना ॐ का टैटू तेज़ाब डाल कर मिटा दिया गया। उसके चेहरे पर भी तेज़ाब डालने की धमकी दी गई। पीड़िता को धमकी दी गई अगर उसने किसी को इस प्रताड़ना के विषय में बताया तो उसके परिवार की हत्या कर दी जाएगी। सलमान ने पीड़िता से कहा कि धर्मांतरण करवाने से उसे जन्नत मिलेगी।

‘मुस्लिम गैंग’ ने कहा कि अगर वह अपने घर में बताएगी तो उसके चाचा-चाची और भाई की हत्या कर दी जाएगी। ऑपइंडिया के पास इस मामले में दर्ज करवाई गई FIR की कॉपी मौजूद है। पीड़िता किसी तरह 2 मार्च, 2025 को अपने घर वापस मुस्लिम लड़कों के चंगुल से छूट कर पहुँची थी। तब वह ढंग से चल फिर भी नहीं पा रही थी।

पीड़िता के परिजनों ने यह भयावह कहानी सुनने के बाद पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। सलमान, जुबैर, आरिफ और राशिद को आरोपित बनाया गया है। यह चारों मुरादाबाद के एक गाँव के ही रहने वाले हैं। उनके खिलाफ रेप के साथ ही SC-ST और POCSO एक्ट में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित सलमान समेत 3 आरोपित गिरफ्तार कर लिए हैं।

मामला सामने आने के बाद मुरादाबाद के हिन्दू संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आजाद समाज पार्टी मुखिया और MP चन्द्र शेखर ने भी इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने योगी सरकार से कहा है कि सभी दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर कठोरतम सज़ा दी जाए। उन्होंने पीड़िता के लिए ₹50 लाख के मुआवजे की माँग भी की है।

वक्फ संपत्तियों के लिए ₹150 करोड़, निकाह करने पर ₹50 हजार : कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने मुस्लिमों के लिए खोला खजाना, सरकारी टेंडरों में 4% आरक्षण भी दिया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार (7 मार्च) को विधानसभा में अपना 16वाँ बजट पेश किया। जुमे के दिन पेश इस बजट में कॉन्ग्रेस सरकार ने मुस्लिमों का विशेष ध्यान रखा। उनके लिए मदरसे, कब्रिस्तान, हज भवन, मौलवियों को तनख्वाह से लेकर स्टार्टअप और ITI बनाने तक कई तरह के प्रावधान किए गए हैं। भाजपा ने इस बजट की तीखी आलोचना की है और इसे मुस्लिम लीग बजट कहा है।

कॉन्ग्रेस सरकार के बजट में वक्फ संपत्तियों की मरम्मत तथा मुस्लिम कब्रिस्तानों के लिए 150 करोड़ रुपए आवंटित की गई है। इसके अलावा, अल्पसंख्यक परिवारों को निकाह के लिए 50,000 रुपए की सहायता देने की भी घोषणा की है। सबसे गंभीर बात है कि तुष्टिकरण की हद पार करते हुए कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य के सरकारी टेंडरों में मुस्लिमों को 4% आरक्षण देने की घोषणा की है।

कॉन्ग्रेस सरकार ने मस्जिदों के पेश-इमामों का मानदेय बढ़ाकर 6,000 रुपए प्रति माह कर दिया है। यह बढ़ोतरी जैन पुजारियों और सिख ग्रंथियों पर भी लागू होगी। इस बजट में 250 करोड़ रुपए ईसाई समुदाय के विकास के लिए प्रावधान किया गया है। हज यात्रियों और उनके रिश्तेदारों के लिए बेंगलुरु में हज भवन का एक अतिरिक्त भवन का निर्माण किया जाएगा।

राज्य सरकार ने विदेश पढ़ने जाने वाले अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की सहायता राशि बढ़ाकर 20 लाख रुपए से 30 लाख रुपए कर दिया। माइनॉरिटी बहुल इलाकों में सरकार ने ITI खोलने की घोषणा की है। बजट में यह भी कहा गया है कि कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) के माध्यम से व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने वाले अल्पसंख्यक छात्रों के लिए 50% फीस वापस लौटाया जाएगा।

कर्नाटक सरकार के बजट में उर्दू माध्यम के स्कूलों की सहायता के लिए 100 करोड़ रुपए दिए गए हैं। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के माध्यम से सीनियर सेकेंड्री परीक्षा के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए मदरसों में औपचारिक शिक्षा और सुविधाओं का प्रावधान करने की घोषणा की है।

वहीं, 169 माइनॉरिटी हॉस्टल में रहने वाले 25,000 विद्यार्थियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने की भी बात कही गई है। बजट में अल्पसंख्यक छात्रों को स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहित करने का भी प्रावधान है।सीएम सिद्धारमैया ने घोषणा की है कि कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से स्टार्टअप शुरू करने के लिए अल्पसंख्यक युवाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस सरकार ने ‘मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कॉलोनी विकास कार्यक्रम’ के लिए 1,000 करोड़ रुपए का आवंटित किए हैं। वहीं, राज्य के हर तालुक में अल्पसंख्यकों के लिए बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा। हर हॉल की अनुमानित लागत लगभग 50 लाख रुपए होगी। इस तरह भाजपा ने राज्य सरकार के बजट की तीखी आलोचना करते हुए इसे ‘मुस्लिम लीग बजट’ कहा है।

मस्जिद को बढ़ाना, शिव मंदिर के सामने उसका गेट खोलना… दिल्ली सीलमपुर (ब्रह्मपुरी) की इसी अल-मतीन मस्जिद से 2020 हिंदू-विरोधी दंगों में चली थी गोलियाँ: समझिए हिंदू क्यों लगा रहे ‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर

उत्तर-पूर्वी दिल्ली का ब्रह्मपुरी इलाका इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। यहाँ की अल-मतीन मस्जिद के विस्तार को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। मस्जिद के सामने हर साल होलिका दहन होता है, लेकिन इस बार होली का त्योहार जुमे की नमाज और रमजान के महीने के साथ टकरा रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच डर और आशंका का माहौल है।

हिंदू समुदाय का एक बड़ा हिस्सा इसे 2020 के दिल्ली दंगों से जोड़कर देख रहा है, जब इसी मस्जिद से गोलियाँ चलने और हजारों की भीड़ जुटने की बात सामने आई थी। क्या ब्रह्मपुरी सचमुच एक इस्लामी एपिसेंटर में तब्दील हो रही है, या यह सिर्फ़ एक बनाया गया विवाद है? इसकी जड़ में जाने के लिए हमने स्थानीय लोगों से बात की और बैकग्राउंड को खंगाला।

मस्जिद विस्तार और ‘मकान बिकाऊ’ के नोटिस

अल-मतीन मस्जिद पहले से ही गली नंबर-13 में एक चार मंजिला मकान में चल रही थी। लेकिन हाल ही में इसके विस्तार की योजना बनी। अब इस मस्जिद को बगल के प्लॉट तक फैलाया जा रहा है। एक बेहद बारीक योजना बनाकर पहले तो मस्जिद के बगल की जमीन हिंदू परिवार से खरीदी गई और फिर उस एक मंजिला घर को तोड़कर वहाँ नई बिल्डिंग बनाई जा रही है, जो मूल-रूप से गली नंबर 13 की मस्जिद को विस्तार देने के लिए है।

इस पूरे वाकये को बहुत प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया। स्थानीय लोगों को डर है कि जैसे 25 फरवरी 2020 को हिंदुओं पर हमला बोला गया, इस अल-मतीन मस्जिद से निकली इस्लामी भीड़ द्वारा, अगर मस्जिद 2 गुनी बड़ी हो गई, तो सोचिए कि और कितने हमलावर एक साथ उनके ही दरवाजे पर जमा हो जाएगी। यही वजह है कि ब्रह्मपुरी की गली नंबर-12 के करीब 60 मकान हिंदू परिवारों में से 25-30 मकानों पर ‘मकान बिकाऊ है’ के नोटिस लग चुके हैं।

इस अल-मतीन मस्जिद के विस्तार का विरोध करने वाले शिकायतकर्ता पंडित शंकर लाल गौतम कहते हैं, “यह निर्माण अवैध है। MCD को गुमराह करके नक्शा पास कराया गया। मस्जिद के ठीक बगल में शिवालय है। अगर यहाँ मस्जिद का गेट खुला तो दोनों समुदाय आमने-सामने होंगे, और तनाव बढ़ेगा। हम 2020 जैसा कुछ नहीं चाहते।” शंकर लाल का आरोप है कि यह सिर्फ मस्जिद का विस्तार नहीं, बल्कि इलाके की डेमोग्राफी बदलने की साजिश है। उनके मुताबिक, दंगों के बाद से ज्यादातर मकान हिंदुओं ने बेचे और खरीदने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग हैं।

2020 का हिंदू विरोधी दंगा: एक जख्म जो अभी भरा नहीं

2020 के फरवरी महीने में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी हिस्से में हुए दंगे आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। सीलमपुर, जाफराबाद और ब्रह्मपुरी जैसे इलाकों में हिंसा ने 53 लोगों की जान ले ली थी और सैकड़ों घायल हुए थे। इस दौरान अल-मतीन मस्जिद का नाम भी चर्चा में आया था। स्थानीय लोगों का दावा है कि मस्जिद से गोलियाँ चली थीं और अचानक हजारों की भीड़ वहाँ जमा हो गई थी। ऑपइंडिया के पास मौजूद वीडियो और तस्वीरें उस वक्त की भयावह स्थिति को बयान करती हैं – जलते हुए घर, सड़कों पर बिखरा मलबा और डरे हुए लोग। वीडियो फुटेज, जो अभी हार्ड ड्राइव में सुरक्षित हैं और पुलिस-कोर्ट के रिकॉर्ड में भी मौजूद हैं, इस बात की तस्दीक करते हैं कि हिंसा के दौरान यह इलाका एक युद्धक्षेत्र में बदल गया था।

उस वक्त के बाद से ब्रह्मपुरी में डेमोग्राफी तेजी से बदली है। हिंदू समुदाय के कई परिवारों ने अपने मकान बेच दिए और इलाका छोड़ दिया। स्थानीय निवासी दिनेश शर्मा (बदला हुआ नाम) बताते हैं, “2020 के बाद यहाँ का माहौल बदल गया। दंगों में हमने अपने लोगों को खोया, घर जले और डर ऐसा बैठा कि कई लोग यहाँ से चले गए। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि फिर वही सब होगा।” रमेश की बात में एक गहरा डर झलकता है, जो सिर्फ उनके नहीं, बल्कि गली नंबर-12 के कई हिंदू परिवारों का है।

मुस्लिम पक्ष का आरोप – “विवाद जबरदस्ती पैदा किया जा रहा”

मस्जिद के सामने खड़े मिले अल-मतीन के नायब ईमाम सद्दाम हुसैन से हमारी बातचीत हुई। उनका कहना है, “हमारी आबादी बढ़ रही है, मौजूदा मस्जिद छोटी पड़ गई थी। दान में मिले प्लॉट पर विस्तार शुरू किया, इसमें गलत क्या है? कुछ लोग आपस में लड़वाना चाहते हैं, इसलिए इसे मुद्दा बना रहे।” सद्दाम हुसैन का दावा है कि मकान बेचना लोगों की अपनी मर्जी है। “यहाँ अच्छी कीमत मिल रही है, इसलिए लोग बेच रहे हैं। कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा। हम शांति चाहते हैं।”

सद्दाम हुसैन ने कहा कि गली नंबर 12 में मस्जिद का नहीं, बल्कि कम्युनिटी सेंटर के लिए जमीन ली गई है। हालाँकि स्थानीय मुस्लिमों का दावा है कि वहाँ मस्जिद ही बन रही है। मुस्लिम समुदाय के लोग यह भी कहते हैं कि वे बड़े दिल वाले हैं। हर साल मस्जिद के सामने होलिका दहन होता है, और उन्हें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन हिंदू पक्ष इसे छिपी सच्चाई मानता है। एक महिला, जो अपना नाम नहीं बताना चाहतीं, कहती हैं, “ये लोग बाहर से शांति की बात करते हैं, लेकिन 2020 में क्या हुआ, सबको पता है। अब होली और रमजान साथ आए हैं, जुमे की नमाज होगी, और हमें डर है कि कोई बड़ा खेल न हो जाए।”

ब्रह्मपुरी की गली नंबर – 13 में स्थित मस्जिद चौक, यहीं पर होता है होलिका दहन

होली और रमजान का टकराव

इस बार होली का त्योहार 24 मार्च को है, जो जुमे की नमाज और रमजान के महीने के साथ पड़ रहा है। मस्जिद के सामने हर साल होलिका दहन होता है, लेकिन इस बार तनाव की वजह से लोग डरे हुए हैं। गली नंबर-12 के निवासी अजय कुमार कहते हैं, “पुलिस अभी शांति बनाए हुए है, लेकिन सिपाही चले गए तो क्या होगा? 2020 में भी पहले सब ठीक था, फिर अचानक हमला हुआ। हम अपने बच्चों को नहीं गँवाना चाहते।” अजय की बात में 2020 का डर साफ झलकता है, जब हिंसा ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया था।

खास बात ये है कि अल-मतीन मस्जिद एक निजी घर में चल रही थी। बात में इस जगह को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया और सोसायटी के नाम पर ‘जकात’ यानी दान दे दिया गया। गली नंबर 13 में स्थित मस्जिद 10 से 12 साल पुरानी है, जो धीरे-धीरे खड़ी की गई। अब ये 4 मंजिला है। जबकि इस जगह पर होलिका दहन बहुत पहले से होता रहा है।

दरअसल, गली नंबर 13 में स्थित अल-मतीन मस्जिद के बगल वाली जमीन ही गली नंबर 12 की तरफ है। यहीं पर गली नंबर 12 और 13 को जोड़ने वाला एक छोटा कट भी है। जहाँ मस्जिद का गेट बन सकता था, लेकिन गली नंबर 12 में जहाँ मस्जिद का गेट खोलने की कोशिश की गई थी, उसी के सामने शिव मंदिर है। इसी बात का विरोध हिंदू कर रहे हैं। क्योंकि शिव मंदिर 1984 का बना हुआ है। ये आज का नहीं है, जबकि मस्जिद अभी पिछले दशक ही बनी है। लोग होलिका दहन के दिन भी मंदिर में पूजा करते हैं। सिर्फ होलिका ही नहीं, महाशिवरात्रि से लेकर हर सोमवार को लोग पूजा करते हैं। ये रिपोर्ट पढ़ने के बाद अपने आप चीजें साफ हो जाती हैं कि असलियत क्या है। कौन पहले से है और कौन बाद में आया।

1984 में निर्मित मंदिर, मंदिर के सामने ही मस्जिद का गेट बनाने की कोशिश (दाईं तरफ- मंदिर निर्माण की जानकारी देता शिलापट)

पुलिस और MCD की कार्रवाई

विवाद बढ़ता देख दिल्ली पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है। मौके पर सिपाही तैनात हैं और MCD ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। अल-मतीन सोसाइटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें आरोप है कि गलत जानकारी देकर नक्शा पास कराया गया। पुलिस का कहना है कि दोनों समुदाय शांति की बात कर रहे हैं, और अभी कोई बड़ी घटना नहीं हुई। लेकिन स्थानीय बीजेपी निगम पार्षद का कहना है, “यह माहौल बिगाड़ने की कोशिश है। हम हिंदुओं को पलायन नहीं करने देंगे।”

डेमोग्राफी बदलाव का आरोप

हिंदू समुदाय मस्जिद निर्माण को एक ‘मोडस ऑपरेंडी’ मानता है। उनका कहना है कि पहले मस्जिद बनती है, फिर माहौल बदलता है, और हिंदू पलायन को मजबूर हो जाते हैं। 2020 के बाद से ब्रह्मपुरी में यह ट्रेंड देखने को मिला है। एक बुजुर्ग निवासी कहते हैं, “पहले यहाँ हिंदू-मुस्लिम साथ रहते थे। दंगों के बाद सब बदल गया। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि हमें यहाँ से भगाने की तैयारी है।”

बता दें कि ब्रह्मपुरी की विवादित गली नंबर 12-13 मौजपुर-वार्ड नंबर 228 में आती है। यहाँ साल 2020 में 25 फरवरी 2025 को हिंदुओं पर हमले के बाद फायरिंग में 3 हिंदू युवक घायल हो गए थे। इसी गली नंबर 13 में अल-मतीन मस्जिद है, जिसका विस्तार किया जा रहा है।

साल 2020 के दंगों के बाद से हिंदुओं पर जबरदस्त दबाव है। वो अपने घर बेच रहे हैं। मुस्लिमों का कहना है कि वो अच्छे पैसे दे रहे हैं, इसलिए लोग घर बेच रहे हैं, जबकि हकीकत ये है कि लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। वो डर के साए में जी रहे हैं, इसलिए पलायन को मजबूर हो रहे हैं। उनके दिलों में 2020 की खौफनाक यादें अब भी ताजा हैं।

ऐसे में ब्रह्मपुरी का यह विवाद सिर्फ मस्जिद निर्माण तक सीमित नहीं है। यह 2020 के दंगों का जख्म, डेमोग्राफी बदलाव का डर और धार्मिक त्योहारों के टकराव का नतीजा है। पुलिस और MCD की कार्रवाई से अभी शांति है, लेकिन लोगों के मन में आशंका बनी हुई है। हिंदू और मुस्लिम दोनों दिल्ली पुलिस की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह शांति टिकाऊ होगी? या फिर होली और रमजान का यह संयोग एक बार फिर ब्रह्मपुरी को 2020 की आग में झोंक देगा? जवाब समय के पास है, लेकिन फिलहाल यहाँ के लोग डर और उम्मीद के बीच जी रहे हैं।

महाकुंभ के कारण 33 करोड़+ युवाओं का धर्म में बढ़ा विश्वास, 300% उछली वेद-पुराण की सर्चिंग: योगी सरकार के ‘डिजिटल अभियान’ का पाकिस्तान तक में जलवा

प्रयागराज में आयोजित हुए 2025 के महाकुंभ ने देश के युवा को धर्म की तरफ मोड़ा है। वह सोशल मीडिया पर गाने-फिल्म की जगह अब वेद-पुराण ढूंढ रहे हैं। सनातन की महिमा के बारे में इन्टरनेट से जानकारी जुटा रहे हैं। महाकुंभ में आने वाले अधिकांश लोग युवा ही थे। महाकुंभ ने तकनीक और धर्म का अद्भुत मिश्रण दिखाया है।

गूगल ट्रेंड्स के अनुसार, दिसम्बर 2024 के बाद से ‘महाकुंभ’ तक लगातार दुनिया में बहुत ज्यादा सर्च किया वाला शब्द रहा है। जनवरी, 2025 आते-आते इन सर्च की संख्या करोड़ों में पहुँच गई। सर्च सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि नेपाल, पाकिस्तान और यहाँ तक कि अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया में भी किए गए।

अमर उजाला की एक रिपोर्ट बताती है कि महाकुंभ के दौरान देश में वेद और पुराणों के विषय में किए जाने वाले सर्च में 300 गुना की बढ़ोतरी हुई। यहाँ तक कि महाकुंभ की आधिकारिक वेबसाइट भी इस दौरान विजिटर्स से गुलजार रही है। महाकुंभ की वेबसाइट पर 33 लाख से ज्यादा लोगों ने 4 जनवरी, 2025 तक ही आ गए थे। इसके बाद और भी बढ़ोतरी हुई।

आँकड़े यह भी बताते हैं कि महाकुंभ में आने वाले 66 करोड़ श्रद्धालुओं में से लगभग 50% लोग युवा ही थे। यानी यह लोग 25-50 वर्ष के आयुवर्ग में थे। इन युवाओं में वह लोग भी शामिल थे जो अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं। यानी महाकुंभ 2025 में डॉक्टर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर समेत तमाम प्रोफेशन के लोग शामिल हुए।

इससे वामपंथियों का वह नैरेटिव भी ध्वस्त हुआ, जिसमें धर्म को कम-पढ़े लोगों का विषय बताया जाता है। सोशल मीडिया भी लगातार महाकुंभ पोस्ट से गुलजार रहा। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इन्टरनेट पर महाकुंभ से जुड़े हुए 33 करोड़ से अधिक फोटो-वीडियो अपलोड किए गए।

महाकुंभ में युवाओं के बड़ी संख्या में आने के पीछे एक कारण इसका इन्टरनेट पर प्रसार और इसके विषय में जानकारियाँ सुलभ होना भी रहा है। युवाओं ने महाकुंभ के लिए इन्टरनेट का इस्तेमाल महाकुंभ में हर चरण में किया। महाकुंभ पहुँचने के लिए बस-ट्रेन बुक करने से लेकर रास्ते ढूँढने तक उनकी मदद इन्टरनेट ने की।

धर्म के साथ तकनीक का यह मिश्रण पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में देश में दिखा है। महाकुंभ के दौरान तिलक, त्रिपुंड और पारंपरिक कपड़े जैसे प्रतीक भी खूब पॉपुलर रहे। इन सबमें बड़ा रोल योगी सरकार के इंतजाम का रहा है।

योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि महाकुंभ 2025 को वह ‘डिजिटल महाकुंभ‘ के तौर पर आयोजित करेंगे। योगी सरकार ने महाकुंभ 2025 के लिए अलग से सोशल मीडिया हैंडल बनाए थे। वेबसाइट से सारी जानकारी मिल रही थी। इसके अलावा कई बड़े इन्फ़्लुएन्सर ने भी इस काम में मदद की।

मुजफ्फरनगर में मुस्लिम भीड़ ने विकास कश्यप की बारात पर किया हमला… लाठी-डंडे-पत्थर सब चलाए, 1 बाराती को घर में खींचकर पीटा: 12 लोग घायल, 64 के खिलाफ केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में कश्यप समाज की शादी में पटाखे फोड़ने और आतिशबाजी करने पर मुस्लिमों के एक समूह ने बारातियों पर हमला कर दिया है। इस हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना को लेकर गाँव में भारी तनाव है। तनाव को देखते हुए गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मामला मुजफ्फरनगर जिले के तिवाती थाना क्षेत्र के सैदपुर गाँव का है। यहाँ उसी चरथावल थाना क्षेत्र के नंगला राई से कश्यप समाज के विकास की बारात आई थी। बाराती खुशी में पटाखे जला रहे थे और आतिशबाजी कर रहे थे। इसी दौरान एक चिंगारी सरताज नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति के लकड़ी के ढेर में गिर गई और वहाँ आग लग गई। हालाँकि, मौके पर मौजूद लोगों ने आग को तुरंत बुझा दिया।

इस बात को लेकर सरताज के लड़कों ने बारातियों के साथ झगड़ा करना शुरू कर दिया। पहले गाली-गलौज हुई और फिर बात हाथापाई तक पहुँच गई। देखते ही देखते मुस्लिम समाज के 8-10 लड़के वहाँ आ गए और बारातियों पर हमला कर दिया। उन्होंने लाठी-डंडों से बारातियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। एक बाराती अमित को हमलावरों में घर में खींच लिया और उसे बुरी तरह पीटा।

इस हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। इधर, सूचना मिलते ही तीन थानों की पुलिस बल आ पहुँची। पुलिस ने माहौल को किसी तरह सँभाला और घायलों को उपचार के लिए तुरंत अस्पताल भेजा। इस घटना में लगभग 12 बाराती घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर अपनी मौजूदगी में शादी की रस्म पूरी कराई और शादी संपन्न कराकर बारातियों को वापस भेजा।

हालाँकि, गाँव में तनाव की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। गाँव वालों का कहना है कि हमला करने वालों में 30-40 लोग शामिल थे। पुलिस ने इस घटना को लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया है। FIR में सरताज सहित 14 नामजद और 50 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने आरोपित हमलावरों की पहचान करके उनकी तलाश शुरू कर दी। सभी आरोपित फरार हैं।

उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है। वहीं, एसपी देहात आदित्य बंसल ने भी घटनास्थल का दौरा किया और कहा, “हमले में कई बारातियों को चोट लगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को नहीं बख्शा जाएगा।” एसपी आदित्य बंसल ने गाँव के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और लोगों को आश्वस्त किया है कि हमलावरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मनुस्मृति के पन्ने फाड़ना एक अपराध, नहीं होगी कोई FIR रद्द: इलाहाबाद HC ने RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती को फटकारा, गिरफ्तारी पर रोक लगाने से भी किया इनकार

राष्ट्रीय जनता दल की प्रवक्ता प्रियंका भारती की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लाइव टीवी पर हिन्दू ग्रन्थ मनुस्मृति के पन्ने फाड़ने के मामले में उन पर दर्ज FIR रद्द नहीं होगी। ऐसा करने से इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मना कर दिया है। हाई कोर्ट ने इसे एक संज्ञेय अपराध करार दिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 28 फरवरी को सुनवाई में कहा, “हमें लगता है कि हैं कि दो टीवी चैनल ‘इंडिया टीवी’ और ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ द्वारा आयोजित लाइव टीवी बहस में एक विशेष धर्म की पवित्र पुस्तक ‘मनुस्मृति’ के पन्नों को फाड़ने का कृत्य और कुछ नहीं बल्कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के दुर्भावनापूर्ण भावना का प्रदर्शन था और इसे बिना किसी वैध कारण के किया गया।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रियंका भारती को फटकार लगाते हुए कहा, “हम इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि याचिकाकर्ता एक पढ़ी-लिखी और उच्च योग्यता वाली महिला हैं और वह बहस में एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता के रूप में भाग ले रहीं थी। ऐसे में यह बात नहीं मानी जा सकती कि यह कार्य अनजाने में किया गया।”

मनुस्मृति के पन्ने फाड़ने के को इसके बाद हाई कोर्ट ने एक अपराध करार दिया। हाई कोर्ट ने कहा, “वर्तमान मामले में एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता द्वारा लाइव टीवी बहस में एक विशेष धर्म की पवित्र पुस्तक ‘मनुस्मृति’ के कुछ पृष्ठ फाड़ने का कृत्य, प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि एक संज्ञेय अपराध किया गया है।”

प्रियंका भारती की याचिका इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद्द कर दी और कोई भी राहत देने से मना कर दिया। यह याचिका प्रियंका भारती ने अलीगढ़ में उनके खिलाफ दर्ज एक मुकदमे के बाद के बाद दायर की थी। उन्होंने माँग की थी कि उनके खिलाफ FIR को रद्द कर दिया जाए।

प्रियंका भारती ने मनुस्मृति पर चालू बवाल के बीच दो टीवी चैनल पर उसके कुछ पन्ने फाड़ दिए थे। इसके बाद उनके खिलाफ कीई जगह विरोध प्रदर्शन हुए थे। अलीगढ़ में उनके खिलाफ FIR राष्ट्रीय स्वर्ण परिषद के संगठन मंत्री भरत तिवारी की तरफ से 28 दिसंबर, 2024 को दर्ज करवाई गई थी।

भरत तिवारी ने कहा था कि प्रियंका भारती की करतूत देश में सामजिक वैमन्यस्यता फैलाने वाली है। उन्होंने इंडिया TV के मालिक रजत शर्मा और TV9 चैनल के मालिक वरुण दास पर भी TRP की नीयत से प्रियंका भारती की हरकतों को बढ़ावा दिए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि इस कृत्य के चलते उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

14 साल की दलित लड़की को अगवा किया, 2 महीने तक रेप करते रहे सलमान-जुबैर सहित 4 मुस्लिम युवक: रिपोर्ट में बताया- जबरन गोमांस खिलाया, तेजाब डाल ॐ का टैटू जलाया

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में 4 मुस्लिम आरोपितों ने एक दलित किशोरी को अगवा कर लिया और 2 महीने तक बंधक बनाकर उसके साथ बार-बार गैंगरेप किया। इस दौरान उसे जबरन गोमांस भी खिलाया। इतना ही नहीं, किशोरी के हाथ पर बने ॐ टैटू को मिटाने के तेजाब डालकर हाथ को जला दिया। किशोरी के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित सलमान को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला मुरादाबाद के भगतपुर थाना क्षेत्र के दौलपुरी बमनिया गाँव का है। वहाँ के एक दलित परिवार की 14 साल की लड़की 2 जनवरी 2025 को गायब हो गई। इसके बाद लड़की के परिजनों ने उसे खूब खोजा, लेकिन उसका कहीं अता-पता नहीं चला। पुलिस ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई गई। फिर भी पता नहीं चला। इसके बाद वह 2 मार्च को अचानक घर पहुँच गई।

उस समय उसकी हालत बेहद खराब थी। वह ढंग से चलने-फिरने में सक्षम नहीं थी। उसने दरिंदगी की जो दास्तां बताई, उसे सुनकर परिवार के लोगों के पैरों तले की जमीन खिसक गई। इस दरिंदगी को अंजाम देने वाला कोई और नहीं, बल्कि के गाँव के ही चार युवक शामिल थे। इनके नाम थे सलमान, राशिद, आरिफ और जुबैर। इसके बाद किशोरी के परिजनों ने थाने में जाकर शिकायत दर्ज की।

भगतपुर पुलिस थाने के प्रभारी संजय पांचाल ने बताया कि इस घटना को लेकर किशोरी के परिवार ने थाने में शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया है कि 2 जनवरी 2025 को 14 साल की दलित किशोरी दर्जी के पास कपड़े सिलाने जा रही थी। उसी दौरान सलमान, जुबैर, राशिद और आरिफ ने एक कार में उसका अपहरण कर लिया। रास्ते में उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोश कर दिया।

जब उसकी आँख खुली तो किशोरी एक कमरे में पाई। उस समय उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। वहाँ उसे बंधक बनाकर चारों ने कई बार उसका सामूहिक दुष्कर्म किया। इस दौरान आरोपितों ने उसे भूखा रखा। वह जब भी कुछ खाने को माँगती तो उसे गोमांस देते थे और कहते थे कि खाना है तो इसे ही खाओ। इसी दौरान उसके हाथ पर बने ओम के चिह्न को मिटाने के लिए तेजाब से हाथ जला डाला।

इस दौरान आरोपितों ने किशोरी को धमकी दी कि अगर उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया कि तो वे उसे और उसके परिवार को जान से मार देंगे। कुछ समय के बाद आरोपित वहाँ से लेकर भोजपुर इलाके में लाकर दूसरे कमरे में बंद कर दिया। यहाँ पर मौका देखकर पीड़िता किसी तरह भाग निकली और अपने घर पहुँच गई। लगभग 2 महीने तक यह सब होता रहा।

घर पहुँच कर किशोरी ने इस घटना के बारे में अपने परिजनों को बताया। इसके बाद परिजनों ने भगतपुर थाने में आरोपितों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो और एससी/एसटी एक्‍ट में केस दर्ज कर लिया है। वहीं, एक आरोपित सलमान को भी गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, बाकी तीन आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने लगातार दबिश दे रही है।

इस घटना को लेकर गाँव में माहौल बिगड़ गया है। इस घटना के विरोध में हिंदू संगठनों ने जमकर प्रदर्शन किया और बाकी आरोपितों की जल्दी गिरफ्तारी की माँग की है। मुरादाबाद के एसपी ग्रामीण कुंवर आकाश सिंह ने बताया है कि जल्दी ही बाकी आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना को लेकर मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मौलाना को नहीं कबूल UCC, क्योंकि मामू की बेटी को नहीं बना सकते बेगम: कहा- इस्लाम हमारी रगों में घुसा है, इसे हम नहीं छोड़ सकते… जानिए उत्तराखंड में किन रिश्तों में अब निकाह नहीं संभव

उत्तराखंड के मौलाना समान नागरिक संहिता (UCC) कानून से नाखुश हैं। सगे रिश्तों में निकाह करने पर UCC में लगाई गई पाबंदी को लेकर मौलाना गुस्सा हैं। मौलानाओं का कहना है कि यह मुस्लिमों की हैसियत कम करने का प्रयास है। उन्होंने दावा किया है कि UCC उन पर लादा जा रहा है।

पत्रकार अदिति त्यागी से बातचीत करते हुए मौलानाओं ने यह बातें कही हैं। इसका वीडियो अब वायरल है। इस वीडियो में मौलाना कहता है, “UCC लागू करने से पहले उलेमा से राय ली गई थी, अलग जगह-जगह पर मीटिंग हुई थी। हमने इन बैठक में साफ़ कर दिया था कि इस्लाम हमारी रगों में घुसा है और इसे हम नहीं छोड़ सकते।”

आगे मौलाना ने कहा, “उसमे एक कानून बनाया है कि मामू की लड़की और फूफी की लड़की से निकाह नहीं कर सकते लेकिन हमारी शरीयत में इसकी इजाजत है। किसी ने अपनी बीवी को तलाक दिया है तो उसे (महिला) 3 महीने इद्दत करनी है, इसमें यह खत्म कर दिया गया है… यह शरीयत के भीतर दखल है। हम ये नहीं बर्दाश्त कर सकते।”

मौलाना ने कहा कि अगर राय ली गई तो मानी क्यों नहीं गई। मौलाना ने दावा किया UCC कानून उन पर लादा गया है और यही करना था तो राय लिए जाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। मौलाना ने दावा किया कि इस्लाम पूरा मजहब है और इसमें कोई शक नहीं बचा है।

गौरलतब है उत्तराखंड में पास किए गए UCC कानून में शादी, तलाक और विरासत को लेकर कई नियम बनाए गए हैं। इनमें विशेष तौर पर शादी को लेकर स्पष्ट नियम हैं कि किस रिश्ते में शादी हो सकती है और किसके अंतर्गत शादी मानी नहीं जाएगी।

किन रिश्तों में नहीं हो सकता निकाह

UCC के अंतर्गत किन रिश्तों में निकाह को कानूनी रूप से निषिद्ध किया गया है, इसे आप नीचे दी गई सूची से समझ सकते हैं। ये सूची बताती है कि UCC लागू होने के बाद पुरुष किन महिलाओं और महिलाएँ किन पुरुषों से विवाह नहीं कर सकेंगी।

कोई भी पुरुष इन महिलाओं से विवाह नहीं कर सकेगाकोई भी महिला इन पुरुषों से विवाह नहीं कर सकेगी
बहनभाई
भांजीभांजा
भतीजीभतीजा
मांचाचा/ताऊ
मामीससुर
चाचीसाला/साडू
चचेरी बहनसौतेला भाई
फुफेरी बहनसौतेला भाई
मौसेरी बहनमौसेरा भाई
पत्नी की बहनपत्नी का भाई
सौतेली मांसौतेला पिता
सौतेली बहनसौतेला भाई
नानीदादा
सौतेली नानीसौतेला दादा
पत्नीपतिव्रता
सौतेली पत्नीसौतेला पतिव्रता
माता की बहनपत्नी का पिता (ससुर)
माता की सौतेली बहनसौतेला ससुर
दादीनाना
सौतेली दादीसौतेला नाना
पिता की सौतेली नानीसौतेला पतिव्रता (माता का सौतेला पतिव्रता)
नाती की नानीमाता का दादा
पिता की सौतेली पत्नीमाता का सौतेला दादा
पत्नी की सौतेली बहनसौतेला बेटा
पत्नी की पत्नीपोता
बहू (विधवा)बेटा का ससुर
नातिननाती
पोतीबेटी का ससुर
पोते की सौतेली बहूपोते का ससुर
बेटे की सासबेटी का ससुर
पत्नी की विधवासास का ससुर
बेटे की विधवाबेटी का ससुर
पत्नी की विधवानाती का ससुर
नाती की विधवानाना का नाना

इन सभी रिश्तों में किए गए विवाह को UCC के अंतर्गत वैध रिश्ते नहीं माना जाएगा। गौरतलब है कि हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत यह बंदिशें पहले से देश की बहुसंख्यक आबादी पर लागू थीं। अब यह उत्तराखंड के भीतर पूरी जनता पर और हर समुदाय पर लागू होंगी।

13 जुलाई को चाहिए सरकारी छुट्टी, क्योंकि ‘काफिर राजा’ के खिलाफ हुआ था ‘इस्लामी जिहाद’: जिस आग से मोदी सरकार ने कश्मीर को निकाला, उसे फिर से भड़काना चाहते हैं कट्टरपंथी

जम्मू कश्मीर में महाराजा हरि सिंह के विरुद्ध इस्लामी जिहाद करने वालों को शहीद बताने का दौर फिर से चालू हो रहा है। हरि सिंह को काफिर मान कर जिहाद करते हुए मारे जाने वालों के नाम पर छुट्टी घोषित किए जाने की माँग चल रही है। यह छुट्टी भारत सरकार ने 2019 में खत्म कर दी थी। भाजपा ने इन इस्लामी जिहादियों को शहीद बताए जाने का विरोध किया है।

यह पूरा मामला जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र में चालू हुआ। बुधवार (5 मार्च, 2025) को जम्मू कश्मीर विधानसभा में PDP के विधायक वहीद-उर-रहमान पारा ने माँग की कि 13 जुलाई का अवकाश दोबारा चालू किया जाए। उन्होंने इसे ‘शहीदी दिवस’ का दर्जा दिए जाने की माँग की।

भाजपा ने किया वाकआउट

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने इसका जोरदार प्रतिरोध किया। उन्होंने कहा, “वे शहीद नहीं बल्कि देशद्रोही थे।” सुनील शर्मा ने स्पष्ट कर दिया कि महाराजा हरि सिंह के विरुद्ध विद्रोह करने वाले को क्रांतिकारी नहीं बल्कि कट्टरपंथियों की भीड़ थी।

सुनील शर्मा के नेतृत्व में भाजपा ने विधानसभा से वाकआउट कर दिया। सुनील शर्मा ने बाहर कहा कि शहीदों के नाम पर गद्दारों को सम्मान नहीं दिया जा सकता। सुनील शर्मा ने कहा, “मैं आज आपको बताना चाहता हूँ कि 13 जुलाई, 1932 को मारे गए लोगों ने पहले एक हिंदू इलाके में आग लगाई और फिर महाराजा के शासन के खिलाफ बावला शुरू किया। इन लोगों को कॉन्ग्रेस पार्टी ने शहीद बना दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में इन्हें शहीद नहीं माना जा सकता।”

किश्तवाड़ से भाजपा विधायक शगुन परिहार ने भी इस मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “13 जुलाई के नाम पर छुट्टी माँग रहे हैं, वह लोग गद्दार थे। यह लोग कश्मीरी पंडितों की बात नहीं करते, 90 के दशक के विषय में बात नहीं करते… महाराजा का राज्य यह लोग चाहते हैं लेकिन उनका सम्मान नहीं करते। यह लोग पाकिस्तान का सम्मान करते हैं, जिसकी वजह से हमारे लाखों लोग मारे गए।”

क्यों हो रहा 13 जुलाई पर बवाल?

इस पूरे बवाल की जड़ 9 दशक पहले की एक तारीख 13 जुलाई, 1931 से जुड़ी है। दरअसल, 13 जुलाई, 1931 को श्रीनगर की सेंट्रल जेल के बार महाराजा हरि सिंह की सेना ने 21 इस्लामी दंगाइयों को गोली मार दी थी। यह इस्लामी दंगाई जेल पर हमला करने आए थे और महाराजा हरि सिंह का तख्तापलट करना चाहते थे।

1948 में जब जम्मू कश्मीर का विलय भारत में हो गया और नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य की सत्ता में आई तो इन्हें शहीद का दर्जा दे दिया गया। इस दिन राज्य में छुट्टी भी घोषित की गई। इनको ‘लोकतंत्र’ के लिए आंदोलन करने वाला क्रांतिकारी बताया गया। इनके लिए एक सूफी संत की मजार के पास एक स्मारक भी बनाया गया था।

यह छुट्टी दशकों तक इसी तरह चलती रही थी। हालाँकि, 2019 में मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद यह छुट्टी खत्म कर दी थी। हालाँकि, अब जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार में यह छुट्टी दोबारा चालू करने की माँग की गई है। इस पर भाजपा को सख्त ऐतराज है।

क्या है 13 जुलाई के शहीदों की सच्चाई

कश्मीर में कट्टर मानसिकता वाले लगातार 13 जुलाई की घटना को महाराजा हरि सिंह के खिलाफ क्रान्ति और जनआंदोलन करार देते हैं। इसे ‘कश्मीर शहीद दिवस’ बताते हैं। कहा जाता है कि यह महाराजा के कथित क्रूर शासन के खिलाफ एक विद्रोह था। जबकि असल में यह एक ‘काफिर’ हिन्दू शासक के खिलाफ लड़ाई थी।

इस सम्बन्ध में कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट सुशील पंडित ने एक लेख में काफी अच्छे से समझाया था। वो मानते हैं कि आधुनिक कश्मीर का पहला नरसंहार तभी हुआ था, वो भी पूरी साजिश के साथ। सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी गई, ज़िंदा जला दिया गया, विकलांग बना दिया गया और नदी में फेंक दिया गया। महिलाओं का यौन शोषण और बलात्कार हुआ। कइयों के घर लूट लिए गए तो कइयों को इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया गया।

उन्होंने बताया है कि कैसे जब पुलिस ने दंगाइयों पर कार्रवाई की तो उनमें से कुछ की मौत हो गई, जिसके बाद उनके गिरोह द्वारा उन्हें ‘शहीद’ बता दिया गया और स्वतंत्र भारत में जम्मू कश्मीर की नई सरकार ने उन आतंकियों के कृत्यों को ‘पवित्र’ बनाने के लिए नायकों की तरह उनका सम्मान करते हुए 13 जुलाई को उन्हें याद किया जाने लगा। आइए, अब जानते हैं कि असल में उस दिन हुआ क्या था। उस समय जम्मू कश्मीर के स्वायत्त राजा थे हरि सिंह।

तब जम्मू कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख, गिलगिट-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद-मीरपुर और अक्साई चीन के अलावा शक्सगाम घाटी के इलाके भी उनके क्षेत्र का हिस्सा हुआ करते थे। लेकिन, अंग्रेज उनसे कुछ इलाके छीनना चाहते थे। महाराजा हरि सिंह उन दुर्लभ राजाओं में से एक थे, जिनका शासन मुस्लिम बहुल इलाके में था। इसीलिए, अंग्रेजों ने एक साजिश के तहत पेशवर के एक अहमदी अब्दुल क़दीर को खानसामा के वेश में श्रीनगर में स्थापित कर दिया।

इसके बाद ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ के शेख मोहम्मद अब्दुल्लाह को भी लाया गया। वो एक राजनीतिक महत्वाकांक्षा वाला व्यक्ति हुआ करता था, जिसकी पुश्तें आज भी जम्मू कश्मीर को अपनी बपौती समझती हैं। ख़ानक़ाह मोहल्ला स्थित ‘शाह-ए-हमदान’ में एक सार्वजनिक सभा हुई, जहाँ अब्दुल क़दीर ने एक भड़काऊ भाषण दिया। महाराजा के विरुद्ध जंग के लिए कुरान का हवाला दिया गया। उसने भड़काया कि एक ‘काफिर’ कैसे मुस्लिमों के ऊपर राज कर सकता है, इसकी इस्लाम में सख्त मनाही है।

कानून के अनुसार जिस गोहत्या पर प्रतिबंध था, उसके लिए उसने मुस्लिमों को खुल कर उकसाया। उसे जब राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया तो दंगे भड़क गए। कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिशें हुईं। मज़बूरी में जेल परिसर में ही सुनवाई होती थी। 13 जुलाई को भी एक ऐसी ही सुनवाई थी। लेकिन, भीड़ ने वहाँ हमला कर दिया और जज के चैंबर में घुसने की कोशिश करने लगे। भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल दिया और आगजनी शुरू कर दी।

जैसा कि आज भी होता है, जम कर मुस्लिम भीड़ ने पत्थरबाजी भी शुरू कर दी। जेल के कैदियों ने भी वहाँ से भागने का प्रयास शुरू कर दिया। पुलिस बल ने सारे पैंतरे आजमा लिए, लेकिन मुस्लिम भीड़ तितर-बितर नहीं हुई। कुछ कैदियों को भगा भी दिया गया। इसके बाद स्थानीय DM ने गोली चलाने के आदेश दिए। हरि पर्वत किले की तरफ भी भीड़ चल पड़ी थी। लाठीचार्ज का कोई असर नहीं हो रहा था। महराजगंज तब व्यापारियों का अड्डा हुआ करता था, जहाँ जम कर लूटपाट मचाई गई।

सुशील पंडित लिखते हैं कि इसके बाद भोरी कदल से लेकर आईकदल तक एक लंबी दूरी में हिन्दुओं की दुकानों को तहस-नहस कर दिया गया और चीजें लूट ली गईं। सफाकदल, गंजी, खुद और नवाकदल जैसे इलाकों में भी जम कर लूटपाट हुई। बाजार में बही-खातों को जला दिया गया और हिन्दू दुकानदारों में भगदड़ मच गई। लाखों के सामान लूट लिए गए, ये सड़कों पर तहस-नहस कर के फेंक दिए गए। हालाँकि, इस दौरान किसी मुस्लिम के दुकान में घुस कर लूटपाट की कोई खबर नहीं आई।

श्रीनगर के विचारनाग में मुस्लिम भीड़ अलग से जुटी हुई थी। वहाँ समृद्ध हिन्दुओं के साथ अत्याचार किया गया और उनकी महिलाओं का यौन शोषण हुआ। जब तक सेना आई, तब तक मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं का बड़ा नुकसान कर दिया था। इसके बाद ‘बुद्धिजीवी’ गिरोह काम पर लगा और उसने इसे ‘सामंती सत्ता के विरुद्ध लोकतांत्रिक विद्रोह’ नाम दे दिया। याद कीजिए, मोपला मुस्लिमों द्वारा केरल में किए गए बड़े स्तर के नरसंहार को भी ‘जमींदारों के खिलाफ किसानों का विद्रोह’ कह दिया गया था।

जबकि, असल में कश्मीर में 13 जुलाई, 1931 को जो भी हुआ, वो एक हिन्दू राजा के विरुद्ध इस्लामी जंग था। शेख मोहम्मद अब्दुल्लाह का भी इन दंगों को भड़काने में बड़ा हाथ था। उसे गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया। हालाँकि, अगले ही साल महाराजा ने उसे माफ़ी दे दी और उसने ‘ऑल जम्मू एंड कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ्रेंस’ का गठन कर के लोगों को भड़काना शुरू कर दिया। मीरपुर में हिन्दुओं ने भाग कर जान बचाने की कोशिश की। बाद में उनमें से सैकड़ों को शरणार्थी बन कर रहना पड़ा।

हिन्दुओं के गाँव जलाए, मंदिर तोड़े

उस समय इस घटना को देखने वाले बुजुर्गों ने बताया था कि कैसे कइयों को बेरहमी से मार डाला गया और इस्लाम अपनाने को भी कइयों को मजबूर किया गया। मंदिरों और गुरुद्वारों पर हमले की कई घटनाएँ सामने आईं। गुरुग्रंथ साहिब सहित कई पवित्र सनातनी पुस्तकों को जला दिया गया और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को खंडित किया गया। इसे ’88 ना शौरांश’ कहते हैं, अर्थात 88 का नरसंहार। विक्रम संवत के हिसाब से तब 1988 चल रहा था।

उस घटना के बाद के सैकड़ों परिवार और उनकी पुश्तें दशकों तक पुनर्वास के लिए संघर्ष करती रहीं। खुद अंग्रेजी रिकार्ड्स की मानें तो 31 मंदिरों-गुरुद्वारों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। 600 के आसपास जबरन इस्लामी धर्मांतरण के मामले सामने आए। सुक्खचैनपुर और संवल (मीरपुर) के हिन्दुओं को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। अंग्रेज लिखते हैं कि जहाँ भी दंगाई पहुँचे, स्थानीय मुस्लिम जनसंख्या ने उनका साथ दिया।

कुछ हिन्दुओं के गाँवों को तो एकदम से वीरान ही बना दिया गया, ऐसी लूटपाट और तबाही मचाई गई। इसके बाद 18 जनवरी, 1932 को भी हिन्दुओं के 50 गाँवों पर हमला हुआ और 300 घरों को लूटा गया। इनमें से 40 को आग के हवाले कर दिया गया। इतना ही नहीं, 40 हिन्दुओं को जबरन मुस्लिम बनाया गया। थन्ना गाँव में 20 जनवरी, 1932 को फिर से 36 घरों में लूटपाट हुई और 8 को फूँक दिया गया। सोहाना गाँव में 84 घरों में लूटपाट हुई और एक अन्य गाँव में 28 जनवरी को लूटपाट हुई।

जिस कश्मीर को महाराजा रणजीत सिंह ने अफगानों के चंगुल से छुड़ाया था और फिर डोगरा राजाओं ने हिन्दू शासन की स्थापना की, वहाँ के गैर-मुस्लिमों को सदियों के अत्याचार से राहत मिली। लेकिन, इस घटना के बाद से पुनः कश्मीर में पंडितों का नरसंहार शुरू हो गया। वहाँ भारत का संविधान स्वतंत्रता के बाद भी लागू नहीं हो पाया और मुट्ठी भर अलगाववादियों के अलावा अब्दुल्लाह-मुफ़्ती मिल कर यहाँ इस्लामी शासन चलाते रहे।

मोदी सरकार में रुका गद्दारों का सम्मान

जुलाई 2020 में ऐसा पहली बार हुआ, जब कश्मीर में दंगाइयों को श्रद्धांजलि नहीं दी गई। मोदी सरकार के कारण ये संभव हो पाया। आधुनिक कश्मीर में हिन्दुओं को संगठित तरीके से खदेड़ना के कार्य तभी शुरू हुआ था। अंग्रेजों के षड्यंत्र और इस्लामी भीड़ की हिंसा ने एक हिन्दू सत्ता को उखाड़ने के लिए हिन्दुओं का नरसंहार किया और बाद में ‘बुद्धिजीवियों’ ने इसे एक अलग रंग दिया। महाराजा हरि सिंह ने इन घटनाओं की जाँच के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बरजोर दलाल की अध्यक्षता वाली एक समिति को दी।

महाराजा हरि सिंह ने लंदन के गोलमेज सम्मेलन में भारतीय एकता की बात की थी, उसी के बाद अंग्रेज सेनाधिकारी मेजर बोट ने अब्दुल कदीर नाम के पठान को वहाँ लाकर बसाया। ये सब एक साजिश का हिस्सा था। ब्रिटिश ने सत्ता सँभालने के बाद अब्दुल कदीर को 1.5 साल में ही रिहा कर दिया, जबकि उसे 5 साल की जेल हुई थी। कादियाँ नगर के अहमदिया समुदाय ने इस पूरे मामले में अंग्रेजो की खासी मदद की। इस रिपोर्ट में पता चला कि अंग्रेज अधिकारी वेकफील्ड जानबूझ कर उस दिन जेल के पास स्थिति को काबू करने नहीं गया, जबकि सुरक्षा का नियंत्रण उसके पास ही था।

4 जुलाई, 1931 को कुरान की बेअदबी की खबर सामने आई, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। लेकिन, वेकफील्ड ने जाँच के बाद कुरान के तौहीन की बात प्रचारित की और मुस्लिमों को भड़काया। श्रीनगर में महाराजा हरि सिंह के खिलाफ भड़काऊ सामग्रियाँ भेजी गईं। वेकफील्ड की जगह प्रधानमंत्री बनाए गए हरि कृष्ण कौल ने मुस्लिम दंगाइयों से राज्य का समझौता कराया, लेकिन दंगे नहीं रुके। देश के कई हिस्सों में इस्लामी दंगों का पैटर्न यही रहा है, आज भी यही है।

पूरे बदन में लपेटकर सोना लाती थी कर्नाटक के DGP की हिरोइन बिटिया, साल भर में 30 बार दुबई गई: एक राजनेता का भी निकला कनेक्शन, ब्लैकमेलिंग का भी दावा

सोने की तस्करी में पकड़ाई तमिल एवं कन्नड़ फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री रान्या राव ने इस काम के लिए एक खास तरह का जैकेट बनवा रखा था। इसे वह अपने शरीर, कमर और जाँघ पर बाँधती थी और उसमें सोने की बिस्किट भरकर लाती थी। रान्या को राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के अधिकारियों ने 14.80 किलोग्राम सोने के साथ रान्या को बेंलगुरु एयरपोर्ट से 3 मार्च को गिरफ्तार किया था।

रान्या राव कर्नाटक के वरिष्ठ IPS अधिकारी के. रामचंद्र राव की सौतेली बेटी हैं। रामचंद्र राव इस समय कर्नाटक राज्य पुलिस आवास निगम में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर तैनात हैं। इस पद का प्रभार उन्हें अक्टूबर 2023 में मिला था। रान्या राव को आपराधिक अपराध न्यायालय ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

एक नेता और कुछ अधिकारियों पर नजर

शुरुआती जाँच में इस पूरे तस्करी रैकेट में एक राजनेता की मिलीभगत भी सामने आई है। हालाँकि, जाँच एजेंसियों ने उसका नाम उजागर नहीं किया है। सूत्रों के हवाले से TOI ने बताया है कि बेंगलुरु के केंद्रीय व्यापारिक जिले में एक आभूषण बुटीक द्वारा तस्करी के सोने खरीदे गए थे। ये सोना एक प्रमुख राजनेता की ओर से खरीदा गया था। अधिकारी अब इसके लिए भुगतान के तरीकों का पता लगा रहे हैं।

बता दें कि रान्या राव की गिरफ्तारी के बाद DRI ने अभिनेत्री के बेंगलुरु के लेवली रोड अपार्टमेंट के उनके फ्लैट में भी छापेमारी की थी। फ्लैट में 2.10 करोड़ रुपए के डिजाइनर ज्वैलरी और 2.70 करोड़ रुपए नकद मिले हैं। इस मामले में DRI ड्रग तस्कर, नेता, व्यवसायी, अधिकारी, पुलिस आदि के नेटवर्क की जाँच कर रही है।

रान्या को बचाने की कोशिश करने वाला कॉन्स्टेबल गिरफ्तार

शादी के बाद रान्या अपने पति जतिन हुक्केरी के साथ लगातार अंतरराष्ट्रीय यात्राएँ कर रही थीं। वे दोनों वहाँ भी जा रहे थे, जहाँ उनका कोई व्यवसाय या पारिवारिक संबंध नहीं था। इतना ही नहीं, वह पिछले 15 दिनों में दुबई की चार बार यात्रा कर चुकी थीं। पिछले एक साल में वह 30 बार दुबई देशों की यात्रा कर चुकी हैं। इसको लेकर अधिकारियों को शंका हुई और वे रान्या पर निगाह रखने लगे।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुकीं रान्या जब 3 मार्च को एमिरेट्स की फ्लाइट्स से उतरीं तो उन्होंने स्थानीय पुलिसकर्मियों को फोन करके घर तक एस्कॉर्ट देने के लिए कहा। पिता के DGP होने के कारण रान्या एयरपोर्ट पर हमेशा एस्कॉर्ट की माँग करती थी। इससे वह जाँच से बच जाती थी। हालाँकि, 3 मार्च को DRI ने उनकी तलाश ली तो लगभग 17.30 करोड़ रुपए की 14.80 किलोग्राम सोना बरामद हुआ।

बेंगलुरु एयरपोर्ट पर तैनात कान्स्टेबल बसवराज ने रान्या की मदद की थी। जब अधिकारियों ने रान्या राव की जाँच करनी चाही तो बसवराज ने उन्हें रोक दिया था और कहा था, “तुम्हें पता है ये कौन हैं? ये डीजीपी रामचंद्र राव की बेटी हैं।” इसके बावजूद DRI के अधिकारियों ने रान्या राव की तलाश ली और इस मामले का खुलासा किया। बसवराज को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

हर ट्रिप के 12-13 लाख रुपए लेती थी रान्या, बोली- ब्लैकमेल किया गया

एक अधिकारी ने कहा, “अपनी पिछली चार यात्राओं में उसने इसी प्रकार का पैटर्न अपनाया तथा ऐसे कपड़े पहने, जिससे वह तस्करी किए गए सोने की बेल्ट को छुपा सके।” न्यूज18 ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रान्या राव ने पूछताछ में अधिकारियों से कहा कि सोने की तस्करी के लिए उसे ब्लैकमेल किया गया था। हालाँकि, यह दावा कितना सही है, यह जाँच के बाद ही पता चलेगा।

सूत्रों का कहना है कि हर बार दुबई की यात्रा की में वह कई किलोग्राम सोना लेकर आई हैं। कहा जा रहा है कि रान्या राव तस्करी किए गए सोने के लिए 1 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से पैसे लिए थे। इसका मतलब है कि रान्या हर ट्रिप में उनकी 12 से 13 लाख रुपए की कमाई हुई। बेटी की गिरफ्तारी पर IPS रामचंद्र राव को सदमा लगा है।

रामचंद्र राव ने कहा, “चार महीने पहले ही उसकी (33 साल की रान्या राव की) शादी हुई है। तब से अब तक वह हमसे मिलने नहीं आई है। हमें उसके या उसके पति (आर्टिटेक्ट जतिन हुक्केरी) के व्यवसाय के बारे में कोई जानकारी नहीं है।” उन्होंने कहा कि IPS के रूप में उनके करियर पर कोई काला धब्बा नहीं है और कानून अपना काम करेगा।

IPS रामचंद्र राव का विवाद में आया था नाम

हालाँकि, रामचंद्र राव पर भी जब्त की हुई रकम को कम दिखाने का आरोप लगा था। The Week की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 में रामचंद्र राव जब दक्षिणी रेंज के IG थे। उस समय मैसूर के येलवाल के पास कालीकट जाने वाली एक निजी बस को रोककर तलाशी ली गई थी। मैसूर दक्षिण पुलिस ने केरल के चार व्यापारियों द्वारा ले जाई जा रही राशि को जब्त की थी।

पुलिस ने जब्त की हुई रकम 20 लाख रुपए बताई थी। हालाँकि, केरल के इन व्यापारियों ने आरोप लगाया था कि उनकी कुल 2.27 करोड़ रुपए जब्त की थी। इतना ही नहीं, पीड़ित व्यापारियों ने पुलिस पर आरोप लगाया था कि एक दूसरे व्यापारी के साथ मिलकर उन्हें लूटा गया है। बस पर छापेमारी करने वाले अधिकारियों में से एक रामचंद्र राव का गनमैन प्रकाश भी था।

हालाँकि, रामचंद्र राव ने इन व्यापारियों द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया था। हालाँकि, भारी विरोध को देखते हुए उनका तुरंत तबादला कर दिया गया था। बाद में राज्य की CID ​​ने कहा था कि रामचंद्र राव और एक पुलिस उपाधीक्षक की ओर से बहुत बड़ी चूक हुई थी। उनके संज्ञान में लाया गया था कि IG से जुड़े एक गनमैन सहित कुछ पुलिसकर्मी डकैती में शामिल थे।