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‘नास्तिक वामपंथी’ बन कट्टर इस्लामी एजेंडे को बढ़ावा देने वाला उमर खालिद, 10 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया

दिल्ली दंगों के मामले में रविवार की रात गिरफ्तार किए उमर खालिद को अदालत ने 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने दंगों की साज़िश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपित है। पुलिस ने कहा है कि बहुत जल्द इस मामले में चार्जशीट दाखिल की की जाएगी। 

जैसा उम्मीद थी वैसा ही हुआ, उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद पूरी लिबरल गैंग का प्रलाप चालू हो गया। कुछ ने तो यूएपीए ख़त्म करने की माँग उठा दी और वहीं कुछ ने उसे ऐसा नेता बताया जिसकी देश को ज़रूरत है। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि उसकी गिरफ्तारी सिर्फ इसलिए हुई है क्योंकि वह मुस्लिम है। लेकिन उमर खालिद ने पिछले कुछ सालों में अपनी इस तरह की छवि खुद ही बनाई है। 

उसके साथ जो कुछ भी हो रहा है वह उसकी गतिविधियों का ही नतीजा है। फ़िलहाल दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने उमर खालिद को 10  दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे सोमवार को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए अदालत में पेश किया था। न्यायाधीश अमिताभ रावत ने 11 पन्नों में यह आदेश सुनाया है।   

उमर खालिद का नाम सबसे पहली बार चर्चा में आया 2016 के ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ प्रकरण के बाद। 9 फरवरी 2016 को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में आतंकवादी अफज़ल गुरु की बरसी के मौके पर विरोध-प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन की वजह थी आतंकवादी अफज़ल गुरु का पुण्य स्मरण (टुकड़े टुकड़े गैंग के लिए)। उस प्रदर्शन के दौरान ऐसे कई नारे लगाए गए जो डरावने और हैरान करने वाले थे, उन नारों में सबसे ज़्यादा विवादित थे भारत तेरे टुकड़े होंगे-इंशाअल्लाह, इंशाल्लाह और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी। 

घटना की जानकारी मिलते ही सरकार हरकत में आई और सबसे पहले तथाकथित कॉमरेड कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी हुई। इतना ही नहीं रिहा किए जाने के पहले 10 हज़ार रुपए का जुर्माना भी देना पड़ा। इसके अलावा उमर खालिद को एक सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया गया था। उमर खालिद को भी इस मामले में कन्हैया कुमार के साथ गिरफ्तार किया गया था। जेएनयू में हुई नारेबाजी के मामले में चार्जशीट दायर की थी और कन्हैया कुमार, उमर खालिद समेत अन्य गिरफ्तार किए गए थे।

मज़े की बात है कि उमर खालिद का पिता भी प्रतिबंधित इस्लामी संस्था ‘सिमी’ (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया) का सदस्य था। इस संस्था से अलग होने के बाद वह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का सदस्य बना। उमर खालिद के पिता ने ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से राम मंदिर निर्माण पर आए आदेश के विरोध में पुनर्विचार याचिका दायर करने का ऐलान किया था। 

उमर खालिद के पिता ने पश्चिम बंगाल की जंगीपुर सीट से वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। इसमें कोई हैरानी की नहीं होनी चाहिए कि मुर्शिदाबाद ज़िले में आने वाला यह संसदीय क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य है। सिमी का पूर्व सदस्य फ़िलहाल जमात-ए-इस्लामी हिन्द की केन्द्रीय सलाहकार समिति का सदस्य है। इसके अलावा वह बाबरी मस्जिद कोआर्डिनेशन कमेटी का संयोजक भी रह चुका है।  

उमर खालिद ने एक बात पर हमेशा ज़ोर दिया है कि वह वामपंथी और नास्तिक है। जबकि ऐसे बहुत कम ही मौके होते हैं जब वह अपने मजहबी रूप से समर्पित पिता से असहमत होता हो। लखनऊ के नेता कमलेश तिवारी को जिहादियों ने इस्लाम के विरुद्ध ईशनिंदा करने के लिए जान से मार दिया था। इस घटना के ठीक दो दिन बाद उमर खालिद लगातार हिंदुओं को कोस रहा था। जिससे लोगों का इस बात से ध्यान हट जाए कि मुस्लिम समाज के कुछ लोगों में कट्टरता का स्तर कितना ज़्यादा बढ़ गया है। इसके बाद उसने अपने एक लेख में पैगम्बर मोहम्मद के सामने नतमस्तक होने की बात का बचाव भी किया। इतना सब कुछ तब जब वह खुद को नास्तिक करार देता है।

जेएनयू से सामने आए नारेबाजी विवाद के बाद उमर खालिद, टाइम्स नाउ पर अर्नब गोस्वामी के साथ एक चर्चा में भी शामिल हुआ था। बात करते हुए उमर ने मुखर होकर अफज़ल गुरु का समर्थन करना शुरू कर दिया। ठीक इसी तरह अरुंधति रॉय ने भी अफज़ल गुरु को फाँसी दिए जाने पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद उमर ने साक्षात्कार में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात कही। उसके मुताबिक़ ऐसे बहुत से लोग थे जिन्होंने इस बात पर सवाल उठाया था कि अफज़ल गुरु भारत की संसद पर हुए हमलों में शामिल था भी या नहीं। 

खुद को नास्तिक वामपंथी बताने वाले उमर खालिद ने यहाँ तक कह दिया था कि अफज़ल गुरु को निष्पक्ष ट्रायल तक नहीं मिला था। इसके बाद उसने यह बात भी मानी कि उस दिन नारे लगाए गए थे, लेकिन वह कुछ कश्मीरियों ने लगाए थे। उसने अंत तक एक आतंकवादी का समर्थन करते हुए दूसरों पर कट्टरता का आरोप लगाया। उसका कहना था कि पूरे तंत्र में न्याय के लिए कोई जगह नहीं है। इसके बाद उमर खालिद ने कहा कि भारतीय सेना ने कश्मीर में लाखों लोगों को मारा और औरतों के साथ बलात्कार किया। इसके ठीक बाद अर्नब गोस्वामी ने चर्चा के दौरान ही उमर खालिद को देश विरोधी कह दिया।

22 फरवरी 2016 को उमर खालिद ने जेएनयू में एक भाषण दिया था। भाषण में उसने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के खराब रिश्तों के लिए अमेरिका ज़िम्मेदार है। एक पाकिस्तानी शायर का उल्लेख करते हुए उमर ने कहा “हिंदुस्तान भी मेरा है और पाकिस्तान भी मेरा है पर इन दोनों मुल्कों पर अमेरिका का डेरा है।” इसके बाद उमर ने अपने विरोधियों को अमेरिका का एजेंट तक बता दिया। 

उमर खालिद यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (UAH) का भी हिस्सा रह चुका है, जिसने सीएए के विरोध में PUCL और अन्य के साथ मिल कर अभियान चलाया था। PUCL एक ऐसा संगठन है जिसके तार अर्बन नक्सल से जुड़े हुए हैं और इसके कई लोग भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए थे। वहीं UAH खुद भीम आर्मी, जमात-ए-इस्लामी, उलेमा-ए-हिंद और अल्पसंख्यक अधिकार जैसे संगठनों से जुड़ा हुआ है। UAH के संस्थापक खालिद सैफी को दिल्ली दंगों की साज़िश रचने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। 

दिल्ली दंगों में उमर खालिद की भूमिका सबसे पहली बार तब सामने आई जब 20 फरवरी को उस पर विवादित भाषण देने का आरोप लगा। उसने अपने भाषण में कहा मुस्लिमों को डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह दिखाना ही होगा कि वह देश की सरकार के विरुद्ध लड़ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप 24 फरवरी को भारत की यात्रा पर आए थे और इसी दिन से दंगे और हिंसा शुरू हो गई थी। 

दिल्ली दंगों के मामले में दायर की गई चार्जशीट में साफ़ लिखा है कि उमर खालिद दंगों के मुख्य आरोपित खालिद सैफी की मदद से ताहिर हुसैन के संपर्क में था। खालिद सैफी ने 9 जनवरी को ताहिर हुसैन और उमर खालिद के बीच शाहीन बाग़ में बैठक कराई थी।

ऐसे में उमर खालिद भले कितना भी नास्तिक वामपंथी होने का दावा कर ले पर उसकी हरकतों से सब साफ़ है। कई मीडिया संस्थानों ने उसे एक नास्तिक के तौर पर दिखाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी गतिविधियों के साफ़ है कि वह इस्लामी कट्टरपंथियों से बहुत अलग नहीं है। फ़िलहाल जब उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है ऐसे में अदालत तय करेगी कि दंगों के मामले में उसकी असल भूमिका क्या रही।          

सारा अली खान से कई बार ड्र्रग्स ले चुकी हैं रिया, जल्द तलब करेगी NCB: रिपोर्ट्स

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) अभी तक 17 गिरफ्तारियाँ कर चुका है। इनमें उनकी गर्लफ्रेंड रही रिया चक्रवर्ती भी शामिल है। ऐसी खबरें हैं कि रिया चक्रवर्ती ने पूछताछ के दौरान एनसीबी को बताया कि सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और डिजाइनर सिमोन खंबाटा भी ड्रग्स लेती हैं।

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि रिया ने सारा से भी कई बार ड्रग्स ली थी। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि एनसीबी सारा को जल्द पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। हालॉंकि आधिकारिक तौर पर इनकी पुष्टि नहीं हुई है। एनसीबी के हवाले से एएनआई ने बताया है कि अब तक इनमें से किसी को समन नहीं किया गया है।

टाइम्स नॉउ ने बताया था कि सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और सिमोन खंबाटा को एनसीबी समन भेजेगी। बता दें कि बॉलीवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में लगातार जाँच एजेंसियाँ कार्रवाई में जुटी है। सीबीआई और ईडी के साथ-साथ एनसीबी भी मामले में मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती के हवाले से सामने आए सबूतों की बिनाह पर ड्रग मामले की पड़ताल में जुट गई है।

हाल ही में खबरें तेजी से सामने आई थी कि एनसीबी के साथ पूछताछ में रिया चक्रवर्ती ने सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह समेत कई फिल्मी सितारों का नाम लिया है जो ड्रग्स के आदी हैं।

इस बीच रिया चक्रवर्ती की सारा अली खान और सिमोन खंबाटा के साथ की पुरानी तस्वीरें वायरल हो रही हैं।हालाँकि बॉलीवुड हस्तियों के नाम की लिस्ट बनाने की खबर पर एनसीबी के एक अधिकारी का कहना है कि एजेंसी ने अब तक बॉलिवुड स्‍टार्स की कोई लिस्‍ट तैयार नहीं की है। उन्‍होंने यह भी कहा कि एजेंसी ने पेडलर्स और ट्रैफिकर्स की लिस्‍ट बनाई है और इसी को कुछ लोग बॉलिवुड सिलेब्‍स की लिस्‍ट मान रहे हैं, जिससे कन्‍फ्यूजन हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक रिया चक्रवर्ती ने कई बार बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान से ड्रग्स लिया है। बताया जा रहा है कि सारा अली खान एक हाई प्रोफाइल ड्रग्स पैडलर के संपर्क में थी, जिसकी एनसीबी तलाश कर रही है। सारा से ड्रग्स लेकर रिया ने सुशांत सिंह राजपूत तक पहुँचाया था। रिया और सारा कुछ ड्रग्स पैडलर्स के कॉमन संपर्क में थीं। सारा का रिया के अलावा एक अपना अलग ड्रग्स पैडलर है, जिससे सारा अलग से ड्रग्स लेती थीं। रिया और सारा को कौन-कौन बड़े ड्रग्स पैडलर ड्रग्स देते थे, उनकी तलाश एनसीबी कर रही है।

गौरतलब है कि NCB ने रिया चक्रवर्ती को 8 सितंबर को गिरफ्तार किया था। अभी वह जेल में बंद हैं।

प्रशांत भूषण ने जमा किया ₹1, कहा- जुर्माना भरने का मतलब यह नहीं कि मुझे आदेश स्वीकार है

अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाया गया 1 रुपए का जुर्माना प्रशांत भूषण ने भर दिया है। जुर्माना भरते हुए उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे अदालत के इस निर्णय को स्वीकार कर रहे हैं। वह इस आदेश के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रहे हैं।

प्रशांत भूषण ने कहा उन्हें जुर्माना भरने के लिए देश के कई हिस्सों से सहयोग मिला है। इस सहयोग की मदद से एक सत्य निधि बनाई जाएगी और इसके माध्यम से ऐसे लोगों की सहायता की जाएगी, जिन्हें सरकार असहमत होकर अपनी राय पेश करने पर जेल में बंद कर देती है। उन्होंने कहा सरकार से असहमति दर्ज कराने वालों को शांत कराने के लिए हर प्रकार के तरीके अपनाए जा रहे हैं। सत्य निधि के ज़रिए ऐसे लोगों की मदद की जाएगी, जिन्हें सरकार अभिव्यक्ति के लिए प्रताड़ित करती है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अगस्त 2020 को आपराधिक अवमानना ​​के मामले में वकील प्रशांत भूषण पर 1 रुपए का जुर्माना लगाया था। फैसले के कुछ ही देर बाद प्रशांत भूषण ने एक ट्वीट में कहा था कि इस फैसले के फ़ौरन बाद उनके सहयोगी और वकील राजीव धवन ने उन्हें 1 रुपया दिया, जो कि उन्होंने स्वीकार कर लिया है। प्रशांत भूषण ने कहा था कि वह जुर्माना भरेंगे और इसके ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका भी दायर करेंगे। 

एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस चीज़ के लिए उन्हें दोषी ठहराया है वो हर नागरिक के लिए सबसे बड़ा कर्तव्य है। अपने बयान में प्रशांत भूषण ने कहा है कि उनके ट्वीट्स का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं था, वे सुप्रीम कोर्ट के अपने शानदार रिकॉर्ड से भटकने को लेकर नाराजगी की वजह से किए गए थे। भूषण ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लगाए गए जुर्माने की रिव्यू पिटिशन फाइल करने का मुझे अधिकार है। कोर्ट ने मुझ पर जो जुर्माना लगाया है, उसका मैं एक नागरिक को तौर पर कर्तव्य निभाते हुए भुगतान करूँगा।”

भूषण ने अपने बयान में यह भी कहा था कि मेरे मन में सुप्रीम कोर्ट के प्रति काफी सम्मान है और मैंने हमेशा माना है कि सुप्रीम कोर्ट कमजोर और दबे लोगों के लिए आशा की आखिरी किरण है।

जबरन शराब पिला सलीम ने उस्तरे से रेत दिया: दो हफ्ते से गायब काजल के टुकड़े-टुकड़े हुए कंकाल बरामद

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में दो सप्ताह से लापता युवती की गला काटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने संप्रदाय विशेष के हत्यारोपित युवक सलीम को गिरफ्तार कर लिया है। खेत से कंकाल बरामद कर जाँच को भेजा गया है। मामला दो संप्रदाय का जुड़ा होने के चलते कस्बे में पुलिस तैनात है।

हल्दौर के खेड़ा मुहल्ला निवासी काजल के धड़ से उसकी गर्दन, हाथ व पैर भी अलग-अलग स्थानों पर मिले। कंकाल का ऐसा हाल देख लोगों के होश उड़ गए।

साभार:अमर उजाला

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक काजल 31 अगस्त की शाम घर से अपने ही मोहल्ले में सहेली के यहाँ दावत खाने के लिए गई थी लेकिन वापस नहीं लौटी। पिता ने एक सितंबर को थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने शक के आधार पर मोहल्ला खेड़ा के गली मालियोंवाला कुआँ निवासी सलीम को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

कई दिन तक गुमराह करने के बाद शनिवार (सितंबर 12, 2020) रात सलीम ने काजल की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर रात में ही हरदासपुर गढ़ी मार्ग पर स्थित खेत से काजल का कंकाल बरामद कर लिया। युवती के धड़ से गर्दन भी अलग पड़ी मिली। शव को जंगली जानवर खा चुके थे। परिजनों ने आसपास पड़े कपड़ों से शव की पहचान की। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त एक उस्तरा, मोबाइल व अन्य सामान भी बरामद कर लिया।

बताया जा रहा है कि उसने काजल की हत्या करने के बाद आवाज बदलकर उसके परिजनों को फोन किया। उसने फोन पर खुद को काजल का पति बताते हुए कहा कि काजल ने उसके साथ शादी कर ली है। इसलिए वह उसे ढूँढना बंद कर दें। जब उन लोगों ने काजल से बात करनी चाही तो सलीम ने फोन काट दिया। इससे उनकी आशंका और भी बढ़ गई औऱ उन्होंने पुलिस को बताया। इस पर पुलिस ने फिर से सलीम को हिरासत में लेकर पूछताछ की। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने सच उगल दिया।

एसपी सिटी लक्ष्मी निवास मिश्र, सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता पुलिस और डॉग स्क्वाड के साथ मौके पर पहुँचे और जाँच पड़ताल की। एसपी सिटी ने बताया कि पूछताछ में आरोपित ने स्वीकार किया है कि तीन साल से काजल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। उसे लग रहा था कि वह किसी और से भी बात करती है इसलिए हत्या की योजना बनाई।

घटना के दिन मिलने के बहाने वह काजल को अपने साथ ले गया और पहले उसे जबरन शराब पिलाई। फिर इसके बाद उसका उस्तरे से गला रेत दिया। गला रेतने के बाद उसका मोबाइल, चप्पल और अन्य सामान छिपा दिया। थाना प्रभारी जीत सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर आरोपित को जेल भेज दिया है।

कब्र जैसी डिजाइन, कुवैती झंडा-अरबी भाषा और तिरंगे का अपमान: शमशेर और बारिक पर FIR

अलीगढ़ के अकराबाद थाना क्षेत्र में हैंडपम्पों के साथ लगे कुवैती झंडे और अरबी भाषा में लिखी पट्टिकाओं का मामला अब तूल पकड़ रहा है। छर्रा विधायक ठाकुर रविन्द्रपाल सिंह ग्रामीणों के साथ अकराबाद थाना पहुँचकर शमशेर व बारिक अली नाम के व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। 

विधायक का मानना है कि इसके पीछे विदेशी मुल्कों की साजिश है। अवैध रूप से हैंडपम्प लगाकर जनता को गुमराह करने के मामले में राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 (राष्ट्रीय झंडे का अपमान) व आईपीसी की धारा 269 (जानलेवा बीमारी के संक्रमण) के तहत शमशेर व बारिक अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।

बीजेपी विधायक रविंद्र पाल सिंह ने बताया कि दुभिया और खुर्रमपुर में शमशेर उर्फ भोलू व बारिक अली ने 45 हैंडपम्प लगवाए हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे राष्ट्र विरोधी ताकतों की साजिश है। इन्होंने शासन और प्रशासन की अनुमति के बगैर विदेशी झंडे के साथ हैंडपम्प लगवाए। इस देश विरोधी साजिश को लेकर क्षेत्रीय जनता में आक्रोश है। इन हैंडपम्प के पास एक शिलालेख लगाए गए हैं जिन पर अरबी भाषा में कुछ लिखा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन पर अरबी भाषा में लिखा है, “कुवैत शेख अब्दुला नूरी चैरिटेबल ट्रस्ट हैंडपम्प लगवा रहे हैं। कुवैत राज्य आपके पक्ष में है। शेख अब्दुला नूरी चैरिटेबल ट्रस्ट भारत के भाइयों के लाभ के लिए यह हैंडपम्प स्थापित करा रहे हैं। ट्रस्ट का मुख्यालय कुवैत है।” इन शिलालेखों पर भारतीय ध्वज के साथ कुवैती ध्वज भी लगाया है। भारतीय ध्वज में 24 तीलियों के स्थान पर केवल 8 तीलियाँ ही दिख रही हैं।

भाजपा विधायक रविंद्र पाल सिंह इसे सोची-समझी साजिश और राष्ट्रद्रोह मानते हैं। उन्होंने बताया कि हैंडपम्प के चबूतरे का डिजाइन भी कब्रनुमा है। विधायक ने यह भी कहा कि हैंडपम्प 60 फीट की गहराई पर लगाए गए हैं, जिससे गंदा पानी पीकर इलाके के लोग बीमार हो रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की छवि खराब करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि मॉनसून के अलावा ये इन हैंडपम्प से पानी नहीं निकलेगा, क्योंकि इस क्षेत्र का वाटर लेवल काफी नीचे है।

अलीगढ़ के एसएसपी मुनिराज ने भी इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पुलिस इसकी जाँच की जा रही है। अभी तक यह पता चला है कि इसके लिए जिला प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

समलैंगिक विवाह का हाईकोर्ट में केंद्र ने किया विरोध, कहा- हमारा कानून, समाज और मूल्य मान्यता नहीं देते हैं

दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में हिन्दू मैरिज एक्ट 1956 के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि इस अधिनियम में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि शादी आदमी और औरत के बीच ही होनी चाहिए। सोमवार 14 सितंबर 2020 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की। 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि वह इस याचिका का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा कानून, समाज और मूल्य मान्यता नहीं देते हैं। हिन्दू मैरिज एक्ट समलैंगिक विवाह की अनुमति नहीं देता है। इस क़ानून के तहत सिर्फ एक आदमी और औरत के बीच शादी हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि हमें भूलना नहीं चाहिए कि सर्वोच्च न्यायालय ने सिर्फ समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर किया है। न्यायालय ने इस मुद्दे पर इसके अलावा कुछ और नहीं कहा है।  

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने यह भी कहा कि याचिका हलफ़नामा दायर किए जाने लायक नहीं है। इतना ही नहीं सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाहों के बारे में कुछ नहीं कहा, इसलिए इसे मान्यता देने की माँग करने का कोई मतलब नहीं है। वहीं मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाधीश प्रतीक जालान की पीठ ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा हमने मामले को खुले विचारों से समझा है। 

उन्होंने कहा हमने मुद्दे को इस आधार पर भी समझा है कि दुनिया में कितने बदलाव हो रहे हैं। इसके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे लोगों की सूची सौंपने के लिए कहा जिन लोगों को हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिक विवाह का रजिस्ट्रेशन करने से मना कर दिया गया था। वहीं केंद्र सरकार ने क़ानून और संस्कृति का हवाला देते हुए समलैंगिक विवाह का विरोध किया। इस मामले पर अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। 

यह याचिका अभिजीत अय्यर मित्रा, गोपी शंकर एम, गीति थंडानी और जी उर्वशी ने दायर की थी। अपनी याचिका में इन्होंने कहा था कि शादी का अधिकार छिनना समानता के अधिकार और जीने के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने अपनी याचिका में यह भी कहा था हिंदू मैरिज एक्ट ऐसा नहीं कहता कि शादी महिला-पुरुष के बीच ही हो। साल 2018 से भारत में समलैंगिकता अपराध नहीं है, लेकिन फिर भी समलैंगिक शादी अपराध क्यों है। जब एलजीबीटी (LGBT) समुदाय को सुप्रीम कोर्ट ने मान्यता दी है, तो फिर शादी को मान्यता न देना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन होगा।

‘जान बची तो लाखों पाए’: कंगना ने शिव सेना को बताया सोनिया सेना, कहा- मुंबई में आतंकी प्रशासन का बोलबाला

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत आज (14 सितंबर) मुंबई से अपने घर मनाली जाने के लिए रवाना हो गईं। उन्होंने चंडीगढ़ पहुँचते ही एक ट्वीट किया और बताया कि उन्हें पहले मुंबई में कैसा महसूस होता था और अब कैसा महसूस किया।

उन्होंने लिखा, “चंडीगढ़ मे उतरते ही मेरी सिक्योरिटी नाम मात्र रह गई है। लोग ख़ुशी से बधाई दे रहे हैं। लगता है इस बार मैं बच गई। एक दिन था जब मुंबई में माँ के आँचल की शीतलता महसूस होती थी। आज वो दिन है जब जान बची तो लाखों पाए। शिव सेना से सोनिया सेना होते ही मुंबई में आतंकी प्रशासन का बोल-बाला।”

इस ट्वीट से पहले कंगना ने अपने एक ट्वीट में बताया था कि वह भारी मन से वापस जा रही हैं। उन्होंने लिखा, “भारी मन से मुंबई से वापस लौट रही हूँ। जिस तरह मुझे इन दिनों परेशान किया गया, मेरे ऊपर अटैक किया गया, मुझे गलत चीजें बोली गईं, मेरा घर तोड़ने की धमकी दी गई और मेरा ऑफिस तोड़ा, सिक्योरिटी को हथियार के साथ मेरे आसपास रहने के लिए कहा गया, मुझे लगता है POK से तुलना करना सही था।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने यह भी लिखा, “‘दिल्ली के दिल को चीर के वहाँ इस साल खून बहा है, सोनिया सेना ने मुंबई में आजाद कश्मीर के नारे लगवाए, आज आजादी की कीमत सिर्फ आवाज है, मुझे अपनी आवाज दो, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब आजादी की कीमत सिर्फ और सिर्फ खून होगी।”

यहाँ बता दें कि पिछले दिनों बीएमसी की कार्रवाई के बाद से कंगना रनौत लगातार महाराष्ट्र प्रशासन पर हमलावर हैं। बॉलीवुड अभिनेता नास्सर अब्दुल्ला ने शिवसेना का समर्थन करते हुए एक इंटरव्यू में हाल में कहा कि महाराष्ट्र में तोड़फोड़ की घटनाएँ बालसाहब ठाकरे के समय से ही होती आ रही हैं।

उन्होंने दावा किया कि जितने भी शिवसैनिक हैं, वो सभी महिलाओं की इज्जत करते हैं। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत शिवसेना के साथ आततायी हो गईं और इसलिए उनका दफ्तर तोड़ा गया। बकौल नास्सर अब्दुल्ला, ये बात तो माननी पड़ेगी कि शिवसैनिकों ने कंगना रनौत के साथ हाथापाई नहीं की।

उल्लेखनीय है कि कंगना रनौत 9 सितंबर को मुंबई पहुँची थीं। उनके आने से पहले शिवसेना नेता संजय राउत ने उन्हें मुंबई वापस न लौटने की धमकी दी थी, जिसके बाद कंगना ने कहा था कि वह मुंबई जरूर आएँगी जिसे जो करना है कर ले। ऐसे में कंगना जब कड़ी सुरक्षा के बीच मुंबई लौट रही थी तो तो बीएमसी ने उनके ऑफिस पर अवैध निर्माण की बात कहते हुए तोड़फोड़ की।

‘भारत फैला रहा आतंकवाद, खुद PM मोदी गोली से उड़ा रहे सबको’ – दहशत में चीनी मीडिया, कार्टून वीडियो से डरे चायनीज

सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल कार्टून का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस पॉलिटिकल कार्टून को इंडिया टुडे ने बनाया है। पॉलिटिकल कार्टून को ‘The App Hunter’ नाम दिया गया है और इसमें पीएम मोदी को प्रतिबंधित चीनी ऐप को निशाना बनाते हुए देखा जा सकता है।

कार्टून में पीएम मोदी बंदूक से ब्यूटी प्लस, लूडो वर्ल्ड, वी चैट, टिकटॉक और पबजी जैसे तमात चीनी ऐप का शिकार करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को इंडिया टुडे ने 8 सितंबर को अपलोड किया था।

चीनी मीडिया के अनुसार पीएम मोदी द्वारा प्रतिबंधित ऐप पर निशाना बनाकर उनकी राष्ट्रीय भावना को आहत किया गया है। चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है कि चीनी सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे आतंकवाद और चीन के खिलाफ राष्ट्रीय भावना को भड़काने के रूप में समझा है।

चीनी नेटिजन्स ने इस व्यंग्य वीडियो को बेहद बेहूदा बताते हुए इसकी निंदा की। कई नेटिजन्स ने इस पर तमाम तरह की प्रतिक्रिया दी। एक चीनी सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “मोदी ने निहत्थे लोगों का कत्लेआम किया, क्या भारतीय मीडिया आतंकवाद की वकालत करने की कोशिश कर रहा है?” 

वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “एक सशस्त्र मोदी निहत्थे लोगों की हत्या कर रहा है। भारतीय मीडिया अपने प्रधानमंत्री को आतंकवादी की तरह क्यों दिखा रहा है?” चीनी मीडिया के अनुसार कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह गुमराह और अति राष्ट्रवाद का उत्पाद है। कुछ अन्य नेटिजन्स ने लिखा, “इंडिया टुडे ऐसे हिंसक और खूनी वीडियो की वकालत कर रहा है, जो आतंकवाद को प्रचारित करता है।” 

चीनी मीडिया के मुताबिक सिंघुआ विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन के सहायक प्रोफेसर झी चाओ ने सोमवार (सितंबर 14, 2020) को ग्लोबल टाइम्स को बताया, “निजी उद्यमों पर नकेल कसने के लिए राज्य मशीनरी का उपयोग करना लोकलुभावनवाद को बढ़ाने में भारतीय जनता पार्टी के असली रंग को दर्शाता है। यह जनता को आनंद तो देता है, लेकिन जनता के हितों को नुकसान भी पहुँचाता है।”

गौरतलब है कि लद्दाख में भारतीय सैनिकों के जोरदार ऐक्‍शन के बाद भारत के 118 और चीनी ऐप को बैन करने से चीन बुरी तरह से भड़क गया है। चीन के वाणिज्‍य मंत्रालय ने भारत के इस कदम पर गंभीर चिंता जताई थी। चीनी वाणिज्‍य मंत्रालय ने एक बयान जारी करके भारत के इस फैसले पर सख्‍त ऐतराज भी जताया थी।

बता दें कि लद्दाख में चल रहे तनाव के बीच भारत अब तक चीन के 224 ऐप पर बैन लगा चुका है। चीनी वाणिज्‍य मंत्रालय का कहना था कि भारत का ऐप पर बैन लगाना चीनी निवेशकों और सर्विस प्रोवाइडरों के कानूनी हितों का उल्‍लंघन करता है। चीन इसको लेकर गंभीरतापूर्वक चिंतित है और पूरजोर विरोध करता है।

138 घंटे बाद रिपब्लिक के पत्रकारों को बेल, रायगढ़ में रिपोर्टिंग के दौरान हिरासत में लिए गए थे

महाराष्ट्र में गिरफ्तार किए गए ‘रिपब्लिक टीवी’ के पत्रकारों अनुज कुमार, वीडियो जर्नलिस्ट यशपालजीत सिंह और ओला कैब ड्राइवर प्रदीप दिलीप धनावड़े को खालापुर कोर्ट से जमानत मिल गई है। रिपब्लिक मीडिया ने कहा है कि ये उसकी देशव्यापी मुहिम के कारण संभव हो पाया है। महाराष्ट्र पुलिस के द्वारा रिपब्लिक की क्रू टीम को लगभग 138 घंटे तक अपने पास रखा गया, लेकिन अब कोर्ट ने तीनों को जमानत प्रदान किया है।

रिपब्लिक ने इस कार्रवाई को अवैध करार दिया था। इन तीनों को रायगढ़ से गिरफ्तार किया गया था, जब वो इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग कर रहे थे। रिपब्लिक इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक भी पहुँचा था, जहाँ सोमवार (सितम्बर 14, 2020) को मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि रिपब्लिक को अपने पत्रकारों को क़ानूनी सहायता देने से भी वंचित कर दिया गया था।

इस मामले पर बयान देते हुए रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने कहा, ”ये लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार है। शिवसेना चाहती है कि हम उनके सामने घुटने टेक दें, वो हमसे हमारे रिपोर्ट करने के मूल अधिकार को छीनना चाहते है। संविधान के अनुच्छेद 19 (ए) के तहत, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। हमारी कवरेज सच के लिए है, सत्ता से डरे बिना।”

NHRC को दी गई याचिका में रिपब्लिक ने कहा है कि बिना क़ानूनी मदद उपलब्ध कराए उसके पत्रकारों को कस्टडी में लेना गलत है। इसे मानवाधिकार के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन भी करार दिया गया है। साथ ही आरोप लगाया कि पत्रकारों को उस रिपोर्ट के बारे में खुलासा करने को कहा जा रहा है, जिसकी वो जाँच कर रहे थे। साथ ही उस रिपोर्टिंग में मिले अहम लीड्स और उनके सूत्रों के बारे में खुलासा करने को कहा गया था।

पत्रकारों और मीडिया नेटवर्क को धमकाने, डराने के अपने काम को जारी रखते हुए, शिवसेना ने बृहस्पतिवार (सितम्बर 10, 2020) को महाराष्ट्र में स्थानीय केबल ऑपरेटरों को ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर प्रतिबंध लगाने के लिए भी कहा था। संजय राउत को अपना मार्गदर्शक बताते हुए, शिवसेना ने ऐसा ना करने पर इसका ‘अंजाम भुगतने’ तक की भी धमकी दी थी।

माँ के फोन से ड्रग तस्करों से बात करती थी रिया चकवर्ती, भाई का स्कूल दोस्त भी गिरफ्तार

ड्रग केस में गिरफ्तारी के बाद रिया चक्रवर्ती को लेकर आए दिन नए खुलासे हो रहे है। ताजा जानकारी के अनुसार, एनसीबी ने आज (सितंबर 14, 2020) सुबह छापेमारी के दौरान रिया के भाई शौविक के स्कूली दोस्त सूर्यदीप मल्होत्रा को भी गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा एनसीबी की पड़ताल में सामने आया है कि ड्रग तस्करों से बात करने के लिए रिया अपनी माँ के फोन का इस्तेमाल करती थी।

आजतक और टाइम्स नाऊ का दावा है कि एनसीबी के सूत्रों से उन्हें यह सूचना मिली है। इनकी रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि रिया के घर पर एनसीबी की रेड के समय एक लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किया गया था।

बता दें कि इससे पहले ईडी ने भी अपनी जाँच के लिए रिया का फोन माँगा था लेकिन उस समय रिया ने उन्हें अपना फोन नहीं दिया। जो फोन दिया उससे भी ऐसी चैट निकल कर आ गई जिसके कारण ईडी ने एनसीबी को यह केस सौंप दिया और उन्होंने अपनी ताबड़तोड़ छापेमारी व पूछताछ करके इस मामले से संबंधित कई लोगों को गिरफ्तार किया। रिया चक्रवर्ती भी इस संबंध में पिछले शुक्रवार को जेल भेजी जा चुकी हैं। उनकी बेल याचिका कोर्ट ने दो बार खारिज की है। मुमकिन है कि वो अब हाईकोर्ट का रुख करें।

सूर्यदीप मल्होत्रा को लेकर भी खुलासा रिया और शौविक की चैट्स से ही हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि सूर्यदीप, सुशांत के घर पार्टी करने आया करते थे। इतना ही नहीं 10 अक्टूबर को हुई एक चैट में शौविक किसी को ड्रग्स के लिए सूर्यदीप नाम रेफर कर रहा है। इसके अलावा यह भी पता चला है कि शौविक हाई एंड ड्रग पार्टी में भी सूर्यदीप को लेकर कई बार गया था।

सूर्यदीप पर यह भी आरोप है कि उसी ने शौविक को बांद्रा बॉयज ड्रग पेडलर ग्रुप से मिलवाने का काम किया था। जैसे पहले सूर्यदीप ने उसे बाशित से मिलवाया, फिर बाशित ने उसे अब्बास, जैद और करण से मिलवाया और धीरे-धीरे यह ग्रुप बढ़ता गया।

रिपब्लिक टीवी की खबर में एनसीबी ने पूरे केस में 6 अन्य लोगों की गिरफ्तारी की है। इनके नाम करमजीत सिंह, ड्वेन फर्नांडिस, संकेत पटेल, अंकुश अर्जेना, संदीप गुप्ता और आफताब फतेह अंसारी हैं। इन्हें जल्द ही एडिशनल चीफ मजिस्ट्रेट कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाएगा।