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प्रशांत भूषण ने जमा किया ₹1, कहा- जुर्माना भरने का मतलब यह नहीं कि मुझे आदेश स्वीकार है

सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अगस्त 2020 को आपराधिक अवमानना ​​के मामले में वकील प्रशांत भूषण पर 1 रुपए का जुर्माना लगाया था। फैसले के कुछ ही देर बाद प्रशांत भूषण ने कहा था कि वह जुर्माना भरेंगे और इसके ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका भी दायर करेंगे।

अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाया गया 1 रुपए का जुर्माना प्रशांत भूषण ने भर दिया है। जुर्माना भरते हुए उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे अदालत के इस निर्णय को स्वीकार कर रहे हैं। वह इस आदेश के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रहे हैं।

प्रशांत भूषण ने कहा उन्हें जुर्माना भरने के लिए देश के कई हिस्सों से सहयोग मिला है। इस सहयोग की मदद से एक सत्य निधि बनाई जाएगी और इसके माध्यम से ऐसे लोगों की सहायता की जाएगी, जिन्हें सरकार असहमत होकर अपनी राय पेश करने पर जेल में बंद कर देती है। उन्होंने कहा सरकार से असहमति दर्ज कराने वालों को शांत कराने के लिए हर प्रकार के तरीके अपनाए जा रहे हैं। सत्य निधि के ज़रिए ऐसे लोगों की मदद की जाएगी, जिन्हें सरकार अभिव्यक्ति के लिए प्रताड़ित करती है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अगस्त 2020 को आपराधिक अवमानना ​​के मामले में वकील प्रशांत भूषण पर 1 रुपए का जुर्माना लगाया था। फैसले के कुछ ही देर बाद प्रशांत भूषण ने एक ट्वीट में कहा था कि इस फैसले के फ़ौरन बाद उनके सहयोगी और वकील राजीव धवन ने उन्हें 1 रुपया दिया, जो कि उन्होंने स्वीकार कर लिया है। प्रशांत भूषण ने कहा था कि वह जुर्माना भरेंगे और इसके ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका भी दायर करेंगे। 

एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस चीज़ के लिए उन्हें दोषी ठहराया है वो हर नागरिक के लिए सबसे बड़ा कर्तव्य है। अपने बयान में प्रशांत भूषण ने कहा है कि उनके ट्वीट्स का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं था, वे सुप्रीम कोर्ट के अपने शानदार रिकॉर्ड से भटकने को लेकर नाराजगी की वजह से किए गए थे। भूषण ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लगाए गए जुर्माने की रिव्यू पिटिशन फाइल करने का मुझे अधिकार है। कोर्ट ने मुझ पर जो जुर्माना लगाया है, उसका मैं एक नागरिक को तौर पर कर्तव्य निभाते हुए भुगतान करूँगा।”

भूषण ने अपने बयान में यह भी कहा था कि मेरे मन में सुप्रीम कोर्ट के प्रति काफी सम्मान है और मैंने हमेशा माना है कि सुप्रीम कोर्ट कमजोर और दबे लोगों के लिए आशा की आखिरी किरण है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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