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इधर उमर खालिद की गिरफ्तारी हुई, उधर लिबरल्स की लिबिर-लिबिर चालू हो गई

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने रविवार (13 सितंबर 2020) को गिरफ्तार किया था। फरवरी में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोध के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में दंगे हुए थे और उमर खालिद पर उन दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उमर खालिद पर गैर क़ानूनी गतिविधि (नियंत्रण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था। 

पुलिस ने उमर खालिद से लगभग 11 घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद जैसे ही यह ख़बर सामने आई कि उमर खालिद को दिल्ली दंगों के मामले में शामिल होने की वजह से गिरफ्तार किया जा चुका है, ठीक वैसे ही लिबरल गैंग ने सोशल मीडिया पर प्रलाप शुरू कर दिया। लिबरल गैंग के तमाम लोगों ने उमर खालिद की गिरफ्तारी पर प्रलाप करते हुए प्रतिक्रियाएँ दी। 

पत्रकार सबा नकवी ने गिरफ्तार को गलत बताया। इसके बाद जाँच एजेंसी की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कहा उमर खालिद निर्दोष है और उसे अपराधी बताया जा रहा है। 

इसके बाद खुद को घोर वामपंथी बताने वाली स्वरा भास्कर ने यूएपीए को ही खारिज कर दिया। स्वरा के मुताबिक़ इस क़ानून को ख़त्म कर देना चाहिए, क्योंकि इसके तहत उमर खालिद की गिरफ्तारी हुई है।

अभिनेता मोहम्मद ज़ीशान अयूब ने अपने ट्वीट में लिखा कि इस देश में अल्पसंख्यक होना किसी अपराध से कम न है। अगर कोई अहिंसा या संविधान की बात करता है तो उसे सूली पर चढ़ा दिया जाता है। 

पत्रकार तवलीन सिंह ने ट्वीट कर संकेत दिए कि उमर की गिरफ्तार इसलिए हुई है, क्योंकि वह मुस्लिम है। उन्होंने कहा कि कोई ऐसे हिन्दू के बारे में जानता है जिसे दिल्ली दंगे भड़काने के लिए गिरफ्तार किया गया हो। 

जबकि सच्चाई यह है कि दिल्ली पुलिस ने बिना धर्म या समुदाय देखे कार्रवाई की है। हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा प्रकाशित खबर के अनुसार पुलिस ने दिल्ली दंगों के मामले में ऐसे 9 लोगों को भी गिरफ्तार किया है जो हिंदू हैं। वैसे भी इस तर्क का कोई अर्थ नहीं है। उमर खालिद ने पहले ही यह बात स्वीकारी थी कि वह नास्तिक है।

प्रशांत भूषण जिन्हें हाल ही में अदालत ने अवमानना के मामले में दोषी करार दिया था उन्होंने भी उमर खालिद की गिरफ्तारी पर गुस्सा जताया है। उन्होंने कहा सीताराम येचुरी, योगेन्द्र यादव, जयंती घोष और अपूर्वानंद पर हुई कार्रवाई से एक बात साफ़ है कि दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस की जाँच दुर्भावनापूर्ण तरीके से की जा रही है। 

जबकि दिल्ली पुलिस ने इनका नाम एक चश्मदीद के खुलासे के आधार पर शामिल किया है। इन पर अभी तक इस मामले में कोई धारा लगाई नहीं गई है, जैसा कि प्रशांत भूषण लोगों के सामने बताना चाह रहे हैं। 

स्वघोषित सामाजिक कार्यकर्ता और तथाकथित चुनावी विश्लेषक योगेन्द्र यादव ने भी उमर खालिद की छवि चमकाने का मौक़ा नहीं छोड़ा। अपने ट्वीट में योगेन्द्र यादव ने बताया कि उन्हें उमर खालिद की गिरफ्तारी की वजह से हैरानी है। इसके बाद योगेन्द्र यादव ने उमर खालिद को युवा, आदर्शवादी और हिंसा विरोधी भी बताया। 

अक्सर झूठ का प्रचार प्रसार करने वाले और खुद को फैक्ट चेकर बताने वाले प्रतीक सिन्हा ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट करने का मौक़ा नहीं छोड़ा। प्रतीक सिन्हा उमर खालिद की गिरफ्तारी से इतने निराश हुए कि यहाँ तक कह दिया कि भारत में लोकतंत्र जैसा महसूस ही नहीं होता है। उनके मुताबिक़ दिल्ली दंगों के मामले में जिस तरह की कार्रवाई हुई है उसे देख कर ऐसा लगता है जैसे देश में लोकतंत्र ही ख़त्म हो गया है। 

वामपंथी मीडिया समूह द वायर के सह संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने भी उमर खालिद की गिरफ्तारी पर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक़ अमित शाह ने लोकसभा में उमर खालिद को दिल्ली दंगे भड़काने का आरोपित बताया था। इसी वजह से उसकी गिरफ्तारी हुई। 

विवादित पत्रकार राणा अयूब जो हाल ही में कोरोना से ठीक हुई हैं उन्होंने भी उमर खालिद के समर्थन में एक ट्वीट किया। 

जहाँ एक तरफ लिबरल्स ने तमाम कारण बता कर उमर खालिद की गिरफ्तारी को गलत बताया वहाँ एक बात उल्लेखनीय है कि दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन ने अपने बयान में कहा था कि उसे उमर खालिद ने ही खालिद सैफी से मिलवाया था। इसके बाद सभी ने मिल कर दंगों की योजना तैयार की थी।

पहले उमर खालिद के विरुद्ध जो एफआईआर दर्ज की गई थी, उसमें ऐसा कहा गया था कि दिल्ली दंगों का षड्यंत्र पहले से ही रचा गया था। इसकी साज़िश रचने में कोई और नहीं बल्कि उमर खालिद और उसके सहयोगी शामिल हैं। उमर खालिद ने दिल्ली दंगों के दौरान विवादित भाषण दिए थे और लोगों से निवेदन किया था कि वह डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान सड़कों पर आएँ ताकि दुनिया में ऐसा संदेश जाए कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ बहुत अत्याचार हो रहा है।  

‘चमा$# कब तक बचेगी’ – अलाउद्दीन ने की छेड़छाड़, पुलिस ने पीड़िता के ही परिजनों को किया गिरफ्तार, बजरंग दल का प्रदर्शन

बिहार के बेगूसराय जिले के शाहपुर गाँव में एक दलित नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ और उसके परिवार के साथ मारपीट के बाद पिछले दिनों पुलिस ने उसके ही तीन परिजनों को गिरफ्तार कर लिया था। मगर, ताजा सूचना के अनुसार बजरंग दल के लगातार प्रयासों के बाद उन्हें जेल से आखिरकार शनिवार को बेल मिल गई।

लड़की के साथ छेड़छाड़ मामले में दूसरे पक्ष के ख़िलाफ़ शिकायत करने के बाद उसके तीन परिजनों को जेल में बंद किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद से ही बजरंग दल लगातार परिवार को इंसाफ दिलाने की कोशिशों में जुटा था और साथ ही एसएचओ की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर उनके खिलाफ़ आंदोलन भी कर रहा था।

पिछले दिनों बजरंग दल ने इस मामले के संज्ञान में आने के बाद डीएसपी राजन सिन्हा से मिल कर लाखो थाना प्रभारी के निलंबन की माँग उठाई थी। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए पुलिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल किए थे।

बजरंग दल ने पूछे थे सवाल

बजरंग दल का कहना था कि आखिर पूरे मामले में लड़की के नाबालिग होने पर भी पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? लड़की के वंचित समाज से होने और आवेदन में जाति सूचक गाली का उल्लेख देखने के बाद भी केस को एससी-एसटी एक्ट में नहीं क्यों नहीं लिखा गया? लड़की के घायल परिजनों को जेल में क्यों भेजा गया और फिर उन्हें 72 घंटे जेल में क्यों रखा गया?

10 सितंबर को बजरंग दल का रास्ता जाम प्रदर्शन – जलाया गया थाना प्रभारी का पुतला भी
10 सितंबर को बजरंग दल का रास्ता जाम प्रदर्शन

बजरंग दल का सवाल था कि जब पीड़ित पक्ष में एक व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था और उसका इलाज चल रहा था, तब भी उसे बिना मानसिक इलाज के सीधे जेल भेज दिया गया और 72 घंटे बंद करके प्रताड़ना दी गई। इसके अलावा संगठन के यह भी आरोप थे कि केस होने के दौरान एक ‘दलाल’ थाना प्रभारी के केबिन में गया था और फिर निकल कर पीड़ित परिवार से पैसे की माँग करने लगा था। बजरंग दल की मानें तो इस बात को प्रमाणित करने के लिए संगठन के पास वीडियोज आदि भी हैं।

इतना ही नहीं, एक ऑडियो का जिक्र करते हुए बजरंग दल प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज कहते हैं कि उनके संगठन के कार्यकर्ता से इस मामले को दबाने की बात भी थाना प्रभारी ने की थी। इसलिए उनका सवाल है कि वंचित समाज की लड़की के साथ अपराध को दबाने की बात करना कहाँ तक उचित है?

गौरतलब है कि इन्हीं सवालों के मद्देनजर बजरंग दल ने 10 सितंबर को रास्ता जाम करके प्रदर्शन किया था। साथ ही थाना प्रभारी का पुतला भी जलाया था। संगठन का कहना था कि वह इस मामले को दलित आयोग और बाल आयोग तक लेकर जाएँगे। हिंदू दलितों पर अत्याचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या था मामला?

3 सितंबर बेगूसराय के शाहपुर गाँव में एक नाबालिग दलित लड़की के साथ दूसरे समुदाय के युवक मो अलाउद्दीन द्वारा छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। लड़की ने ऑपइंडिया को बताया था कि सब्जी लेने के लिए बाजार जाते समय अलाउद्दीन ने उसे पहले साइकिल से गिराया फिर हाथ लगाने लगा। बड़ी मुश्किल से वह खुद को छुड़ा कर भागी, जिस पर उसने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि चम$%^ कब तक बच पाएगी।

लड़की ने घर आकर अपने परिवार को यह सब बताया, जिसके बाद उसके घर के लोग दूसरे पक्ष के लड़के को समझाने गए, लेकिन दूसरे पक्ष ने बात सुनने की बजाय हमला बोल दिया और ईंट-पत्थर फेंकने लगे। घायल अवस्था में जब लड़की के परिजन अपनी शिकायत लेकर थाने में पहुँचे, तो उन्हें इलाज के लिए भेजा गया और फिर लौटने पर उनमें से तीन लोगों को जेल में बंद कर दिया गया।

बजरंग दल के संज्ञान में यह मामला आते ही इस पर थाना प्रभारी से गिरफ्तारी को लेकर सवाल पूछा गया मगर, थाना प्रभारी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और दूसरे पक्ष की एफआईआर का खुद ही इंतजार करने लगे। बजरंग दल के सक्रिय कार्यकर्ता व विभाग संयोजक पंकज कहते हैं कि जब उनसे यह बात कही गई, तब उन्होंने कहा कि क्या बिना दूसरे पक्ष की एफआईआर के एडवांस कार्रवाई में तीनों को गिरफ्तार किया गया है?

दूसरे पक्ष की FIR

उल्लेखनीय है कि पीड़ित परिवार के बाद दूसरे पक्ष की ओर से भी 4 सितंबर को एफआईआर करवाई गई थी। शिकायत के अनुसार दूसरे पक्ष से मो. पप्पू ने बताया कि 3 सितंबर को उनके घर पर 10 लोग (राजू कुमार, अमित कुमार, गौतम कुमार, सुनील दास, राजेश दास, अमरेश कुमार, उदय दास, दिनेश दास, संतोष दास और मंटून दास) आए और गाली गलौच करने लगे।

इसके बाद लाठी-डंडे से उन पर वार भी किया। इस बीच जब उसकी पत्नी सोनी खातुन घर से निकल कर उन्हें बचाने आई तो उसके साथ भी मारपीट हुई और राजू कुमार, अमित कुमार ने उसकी साड़ी पकड़ कर खींच लिया, जिससे वह अर्धनग्न हो गई। इसके बाद शिकायत के मुताबिक उन लोगों ने मो. पप्पू की पत्नी के गले से 10 ग्राम की चेन खींच ली और धमकी दी कि अगर मुकदमा किया तो जान से मार देंगे।

दूसरे पक्ष की एफआईआर

यहाँ बता दें कि इस छेड़छाड़ के मामले में बजरंग दल ने पुलिस पर जो सवाल उठाए, उन पर प्रतिक्रिया लेने के लिए हमने लाखो थाना प्रभारी का पक्ष जानने का प्रयास किया था। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालाँकि, मामले के मद्देनजर थाना प्रभारी संतोष शर्मा ने घटना वाले दिन ऑपइंडिया को पूरा मामला दोनों पक्षों के बीच हुई मारपीट का बताया था और सूचित किया था कि इस संबंध में 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

बजरंग दल कार्यकर्ता पंकज ने पूछी थी गिरफ्तारी की वजह

स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ता पंकज बताते हैं कि जब थाना प्रभारी ने लड़की के घरवालों को गिरफ्तार किया था, तब उन्होंने ही इस मामले में सवाल उठाए थे। वह पुलिस से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहते हैं कि जब शिकायत करने पीड़ित परिवार गया तो पुलिस ने उन्हें ही जेल में डाल दिया। बाद में संगठन के दबाव में उन्होंने दूसरी ओर से भी दो लोगों की गिरफ्तारी की। ऐसे में उन्होंने (पंकज) कहा कि चलिए मान लेते हैं कि पुलिस ने माहौल को शांत करने के लिए ऐसा किया। लेकिन 24 घंटे बाद तो उन्हें छोड़ा जाना चाहिए।

वे बताते हैं कि थाना प्रभारी ने उनके सवालों को सुन कर रहा, “उधर से देख लेते हैं कि क्या शिकायत आती है। उसके बाद छोड़ देंगे।” जिस पर पंकज ने हैरानी जताते हुए कहा, “ये तो एडवांस बुकिंग हो गई कि कोई एफआईआर हुई भी नहीं और आप अपनी तरफ से खुद ही कार्रवाई करके जेल में डाल दिए।”

इस पर थाना प्रभारी ने कहा, “यहाँ माहौल कम्युनल हो जाता है। इसलिए हमें यह सब करना पड़ेगा।” पंकज का आरोप है कि पुलिस अधिकारी ने उस समय ऐसी बातें करके लड़की के परिजनों को नहीं छोड़ा और शाम को दूसरे पक्ष की एफआईआर मँगवा ली।

प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज की माँग

शुभम भारद्वाज का कहना है कि लाखो ओपी के शाहपुर गाँव में एक वंचित दलित समाज की बहन के साथ 3 सितंबर को मो अलाउद्दीन ने छेड़छाड़ करते हुए दुष्कर्म करने का प्रयास किया। विरोध करने पर पीड़ित लड़की के परिजनों पर जानलेवा हमला कर बुरी तरह से घायल कर दिया।

थाना पहुँच कर शिकायत करने वाले पीड़ित परिजनों के साथ लाखो ओपी प्रभारी के द्वारा जातिसूचक गाली गलौज किया गया तथा करीब 72 घण्टे तक जेल में बंद रखा गया। दलाल के माध्यम से पीड़ित से 10 हजार रुपया माँग की गई। केस में POCSO एक्ट की सुसंगत धारा नहीं लगाई गई है। थाना प्रभारी फोन कर मामले को दबाने का दबाव बजरंगदल कार्यकर्ताओं पर दे रहे हैं। इसलिए भ्रष्ट, धर्म एवं दलित विरोधी लाखो ओपी प्रभारी को शीघ्र निलंबित करना जरूरी है।

‘लालू से CM हेमंत सोरेन की मुलाकात से लोकतंत्र शर्मसार’: पटना में अपनी ही पार्टी के पोस्टर से गायब हुए RJD सुप्रीमो

झारखण्ड में राजद सुप्रीमो लालू यादव के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात का असर बिहार में दिख रहा है। नीतीश सरकार में मंत्री नीरज कुमार ने कहा है कि इस मुलाकात से लोकतंत्र शर्मसार हुआ है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के महामंडलेश्वर सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव के दरबार के दरबार में मत्था टेकने झारखंड सरकार के मुखिया हेमंत सोरेन पहुँचे। उन्होंने कहा कि झारखंड सीएम लालू के सामने नतमस्तक हैं।

बता दें कि लालू यादव को रिम्स से निदेशक के बंगले में शिफ्ट किया गया है और हेमंत सोरेन ने बताया है कि उनका स्वास्थ्य पहले से बेहतर है। नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन लालू के दर पर फ़रियाद लेकर गए थे। जहाँ लालू यादव रुके हुए हैं, वहाँ लगातार नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है और बिहार से टिकट के दावेदार एक-एक कर के पहुँच रहे हैं। उनके बँगले के बाहर खासी चहल-पहल है।

हेमंत सोरेन ने घोषणा की है कि बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी राजद के साथ मिल कर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने बताया कि वो लालू का स्वास्थ्य जानने के लिए आए थे। इससे पहले लालू रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती थे, जहाँ से उन्हें शिफ्ट किया गया। रिम्स में भी हेमंत सोरेन लालू से मिलने पहुँचे थे। उन्होंने चुनाव जीतने के बाद भी लालू यादव का आशीर्वाद लिया था और उनसे शासन चलाने के गुर सीखे थे।

राजद ने इसी बीच पटना में स्थित पार्टी कार्यालय में पोस्टर लगाया है, जिसमें लालू यादव के नदारद होना चर्चा का विषय बन रहा है। विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कभी भी हो सकता है, इससे पहले राजद युवाओं को लुभाने में जुट गया है। ‘नई सोच नया बिहार, युवा सरकार अबकी बार’ नारे के साथ लगाए गए इस पोस्टर में केवल तेजस्वी यादव दिख रहे हैं। इसमें न तो तेजप्रताप और न ही पार्टी के किसी अन्य नेता की तस्वीर है।

जुलाई 2020 में झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया था कि जहाँ एक तरफ मरीजों को RIMS में बेड्स नहीं मिल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लालू यादव की सुरक्षा का बहाना बना कर 18 कमरों को बंद कर दिया गया है। उन्होंने पूछा था कि किसकी शह पर ऐसा किया जा रहा है? उन्होंने ध्यान दिलाया था कि अगर एक कमरे में 2 मरीज भी होते तो इन कमरों में लगभग 40 मरीजों का इलाज किया जा सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का ये भी कहना है कि रघुवंश प्रसाद सिंह की मौत और उससे पहले दिए गए उनके इस्तीफे के कारण लालू यादव की समाजवादी छवि को नुकसान पहुँच सकता है। जिस तरह से तेजप्रताप यादव ने उनके बारे में कहा था कि समुद्र में से एक लोटा पानी निकल जाने से कुछ नहीं होगा और लालू यादव इमोशनल पत्र लिख कर उनका इस्तीफा ठुकराते रहे, ये विरोधाभास भी जनता के बीच गलत सन्देश लेकर जा सकता है।

कोरोना वायरस मानव निर्मित, मेरे पास हैं सबूत: चीन की महिला वैज्ञानिक का दावा

चीन पर कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर लगातार सवाल उठते आ रहे हैं। अमेरिका से लेकर यूरोप के कई देश इस खतरनाक वायरस की उत्पत्ति के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसी क्रम में अब खुद चीन की महिला वीरोलॉजिस्ट डॉ. ली-मेंग यान ने कोरोना वायरस के मानव निर्मित होने का दावा किया है। 

डॉ. ली-मेंग ने दावा किया है कि कोरोना वायरस को एक सरकार के नियंत्रण वाले प्रयोगशाला में तैयार किया गया था और उनके पास अपने दावे को साबित करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण हैं। जिसे वह जल्द पेश करेंगी।

कोरोना से निपटने के लिए चीनी सरकार के खिलाफ व्हिसलब्लोअर बनने वाली वायरोलॉजिस्ट को पिछले साल दिसंबर में चीन से निकलने वाले सार्स (कोरोना जैसा वायरस) जैसे मामलों के एक समूह को देखने का काम सौंपा गया था। 

हॉन्गकॉन्ग में काम करने वाली शीर्ष वैज्ञानिक ने दावा किया कि उन्होंने अपनी जाँच के दौरान एक कवर-अप ऑपरेशन का पता लगाया और कहा कि चीन की सरकार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से पहले ही वायरस के प्रसार की जानकारी थी। 

‘हॉन्गकॉन्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ से वायरोलॉजी और इम्यूनोलॉजी में विशेषज्ञता प्राप्त डॉ. ली-मेंग को कथित रूप से सुरक्षा चिंताओं के कारण अमेरिका भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। 11 सितंबर को, उन्होंने एक गुप्त जगह से ब्रिटिश टॉक शो ‘लूज वीमेन’ को एक साक्षात्कार दिया और कोरोना वायरस बीमारी पर अपने शोध और चुनौतियों के बारे में बात की। 

इस दौरान उन्होंने चीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “इस वायरस को लेकर चीन बहुत कुछ छुपा रहा है और मैं दावे के साथ कह सकती हूँ कि यह एक चीन द्वारा मानव निर्मित वायरस है। मेरे पास इसके सबूत हैं और मैं ये साबित कर दूँगी।”

ली-मेंग ने कहा कि कोरोना वुहान के मीट मार्केट से नहीं आया है, क्योंकि यह मीट मार्केट एक स्मोक स्क्रीन है। यह वायरस प्रकृति की देन नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि अगर यह वायरस वुहान के मीट मार्केट से नहीं आया है तो आखिर इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? इसका जवाब देते हुए ली-मेंग ने कहा कि यह खतरनाक वायरस वुहान के लैब से आया है और यह मानव निर्मित है।

उन्होंने कहा कि इस वायरस का जीनोम अनुक्रम एक मानव फिंगर प्रिंट की तरह है और इसके आधार पर ही वे साबित कर देंगी कि यह एक मानव निर्मित वायरस है। उन्होंने कहा कि किसी भी वायरस में मानव फिंगर प्रिंट की उपस्थिति यह बताने के लिए काफी है कि इसकी उत्पत्ति मानव द्वारा की गई है। ली-मेंग ने कहा कि भले ही आपके पास जीव विज्ञान का ज्ञान न हो या आप इसे नहीं पढ़ते हैं, लेकिन फिर भी आप इसके आकार से इस वायरस की उत्पत्ति की पहचान कर लेंगे। 

इस दौरान उन्होंने चीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “धमकी के बाद मैं हॉन्गकॉन्ग छोड़कर अमेरिका चली गई लेकिन मेरी सारी निजी जानकारी सरकारी डेटाबेस से मिटा दी गई और मेरे साथियों से मेरे बारे में अफवाह फैलाने के लिए कहा गया। सरकार मुझे झूठा साबित करने के लिए तरह -तरह के हथकंडे अपना रही है और हत्या करने तक का आरोप लगा रही है, लेकिन मैं अपने लक्ष्य से पीछे हटने वाली नहीं हूँ।”

ली-मेंग का कहना है कि वह कोरोना वायरस का अध्ययन करने वाली पहले कुछ वैज्ञानिकों में से एक थीं। दिसंबर 2019 के अंत में उनका दावा था कि उन्हें विश्वविद्यालय में उनके पर्यवेक्षक द्वारा एसएआरएस जैसे मामलों के एक विषम समूह को देखने के लिए कहा गया था जो कि चीन में उत्पन्न हुआ है। 

डॉ. ली-मेंग ने कहा कि उन्होंने दिसंबर के अंत और जनवरी के शुरू में चीन में ‘न्यू निमोनिया’ पर दो शोध किए और अपने सुपरवाइजर के साथ परिणाम साझा किए जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सलाहकार थे। 

वह अपने सुपरवाइजर से चीनी सरकार और डब्ल्यूएचओ की ओर से सही काम करने की उम्मीद कर रही थीं। लेकिन उन्हें तब बेहद आश्चर्य हुआ, जब उनसे चुप्पी बनाए रखने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर उन्हें गायब कर दिए जाने की धमकी दी गई। वायरोलॉजिस्ट ने कहा कि चीन में वैज्ञानिकों को गायब कर देना आम बात है। 

डॉ. ली-मेंग ने कहा कि इस पर किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दी। लोग सरकार से डर रहे थे। वे इस झंझट से बचने और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए सरकार और डब्ल्यूएचओ के साथ सहयोग करने की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन इसकी जानकारी बेहद जरूरी थी। 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन की सरकार ने उनके खिलाफ गलत जानकारी फैलाने के लिए बाकायदा कुछ लोगों को नौकरी पर रखा है। उन्होंने कहा कि वायरस से पार पाने के लिए यह पता होना महत्वपूर्ण है कि उसकी उत्पत्ति कैसे हुई। यदि चीन ने दुनिया को सच बता दिया होता तो शायद इसे वक्त रहते नियंत्रित किया जा सकता था।

राणा अयूब ने क्यों छिपाया अपना सेक्स? कोविड-19 रिपोर्ट को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही छीछालेदर

पत्रकार राणा अयूब के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आई थी। सोशल मीडिया के माध्यम से राणा अयूब ने अपनी मेडिकल जाँच रिपोर्ट शेयर कर के दावा किया कि अब वो कोरोना वायरस से मुक्त हो गई हैं। हालाँकि, इस दौरान रिपोर्ट में उनका सेक्स मेल लिखा हुआ था, अर्थात उनका लिंग पुरुष दर्ज था। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर ये चर्चा शुरू हो गई है कि राणा अयूब का सेक्स मेल है और वो पुरुष हैं।

बाद में राणा अयूब ने इस ट्वीट को डिलीट कर लिया। फिर उन्होंने इस हिस्से को क्रॉप कर के अपनी जाँच रिपोर्ट की तस्वीर फिर से पोस्ट की। इसमें उन्होंने अपना सेक्स मेल लिखे होने वाला हिस्सा हटा दिया था। कुछ लोगों ने कहा कि वो अपने कोविड-19 टेस्ट कराने गई थीं या फिर अपना जेंडर टेस्ट कराने? वहीं एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि कोरोना टेस्ट तो बहाना था, राणा अयूब को अपना जेंडर टेस्ट करवाना था।

मीडिया टिप्पणीकार अरुण पुदुर ने इस जाँच रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए पूछा कि राणा अयूब ने उस ट्वीट को डिलीट क्यों किया, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि उनका सेक्स मेल है। उन्होंने पूछा कि ये जाँच रिपोर्ट ही फेक है या फिर राणा अयूब ‘Gender Fluid’ हैं? साथ ही उन्होंने ये भी पूछा कि कहीं वो मुंबई के कई ड्रगबाजों की तरह अपने शरीर से ड्रग्स के सबूत मिटाने के लिए तो नहीं अस्पताल में भर्ती हुई थीं?

विराज नाम के एक ट्विटर यूजर ने तो यहाँ तक दावा किया कि कहीं उन्होंने अपने कोरोना केस वाली बात तो झूठ के रूप में नहीं फैलाई थी? एक यूजर ने लिखा कि वायरस ही जेंडर न्यूट्रल है। ज्योति कपूर दास ने ‘मेरी 5 साल की भतीजी’ टाइप का कोई बहाना फिर से आने की शंका जताई। बता दें कि राणा अयूब ने दावा किया था कि उनकी 5 साल की भतीजी ने मंदिर-मस्जिद की तस्वीर साथ बना कर असहिष्णुता पर लेख लिखा था।

बाद में पता चला कि वो लेख बच्चों की एक पोर्टल से कॉपी-पेस्ट किया गया था। ‘मीमर हर्ष’ नामक ट्विटर यूजर ने शक जताया कि राणा अयूब को कोरोना हुआ ही नहीं था और उन्होंने सहानुभति लेने के लिए ये ‘निंजा टेक्निक’ अपनाया। एक व्यक्ति ने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर ये कैसा हॉस्पिटल है, जिसमें कोरोना पॉजिटिव महिला मरीज इलाज के बाद पुरुष बन कर निकलती है। उसने इसकी तुलना ‘आलू-सोना’ वाली मशीन से की।

ज्ञात हो कि राणा अय्यूब ने ही जानकारी दी थी कि कोरोना वायरस टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया है। उन्होंने बुधवार (सितंबर 9, 2020) को ट्वीट किया था कि बीती रात उनका ऑक्सीजन लेवल काफी डाउन हो गया, जिसके बाद उनका कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया है। उन्होंने अपने ट्वीट में इस बात का दावा किया था वह खुद को किसी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए नवी मुंबई में एक बेड की तलाश कर रही है।

कुत्ते को झील में फेंकने वाला सलमान खान गिरफ्तार, पुलिस के डर से दोस्त के घर में छिपा था

भोपाल के श्यामला हिल्स पुलिस थाने में सलमान खान नाम के युवक पर पशुओं पर क्रूरता का मामला दर्ज किया गया था। युवक ने एक कुत्ते को अपर लेक (झील) में फेंक दिया था। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर आईपीसी की धारा-429 (किसी जीव-जन्तु का वध करने या उसे विकलांग आदि करने की कुचेष्टा) के तहत मांमला दर्ज किया गया था। ख़बरों के अनुसार पुलिस द्वारा किए गए सवाल-जवाब के दौरान उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।  

उसने बताया कि वह मस्ती कर रहा था और इसी दौरान कुत्ते को हाथों से उठकर झील में फेंक दिया। पुलिस ने जब सलमान को गिरफ्तार किया तब वह भोपाल के हनुमानगंज इलाके में अपने एक दोस्त के घर छुपा हुआ था। पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया पर उसका वीडियो वायरल होने के बाद उसे जानकारी मिली कि पुलिस उसकी खोजबीन कर रही है। इसके बाद वह अपने घर से भाग कर एक दोस्त के घर पर छुप गया था।

पुलिस का यह भी कहना है कि जिस धारा के तहत सलमान पर मुकदमा दर्ज किया गया उसके आधार पर उसे 5 साल तक की जेल हो सकती है। पुलिस आज ही उसे अदालत में भी पेश करने की तैयारी कर रही है। वहीं कुत्ते को भोपाल स्थित अपर लेक के वन विहार वाले इलाके में फेंका गया था, वहाँ पानी की मात्रा पूरे झील की तुलना में कम होती है। इसलिए यह उम्मीद जताई जा रही है कि कुत्ते की जान बच गई होगी।      

सलमान खान ने कुत्ते को अपर लेक में फेंक उसका वीडियो बनवाता रहा। कुत्ते को झील में फेंकने वाला वीडियो वायरल होते ही भोपाल में आरोपित की गिरफ़्तारी की माँग होने लगी। सोशल मीडिया पर अन्य जगह के लोगों ने भी इस मामले में अपना विरोध दर्ज कराया। ये वीडियो श्यामा हिल्स के पास अपर लेक में स्थित बोट क्लब के पास बनाए गए रेलिंग के पास शूट किया गया था। 

उक्त आरोपित कुत्ते को सबसे पहले अपने दोनों हाथों से उठाता है और फिर उसे झील में जोर से उछाल कर फेंक देता है। इसके बाद वो वीडियो में मुस्कुराता हुआ दिख रहा है। आरोपित सलमान खान भोपाल के टीला जमालपुरा का रहने वाला है। कहा जा रहा है कि सलमान खान के खिलाफ पहले से ही पशु क्रूरता का इतिहास रहा है और वो इससे पहले भी जानवरों के साथ इस तरह की हरकतें करता रहा है। रविवार की शाम आईपीसी की धारा-429 के तहत मांमला दर्ज किया गया।

साथ ही सलमान खान के खिलाफ ‘पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम’ के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। श्यामा हिल्स की ही रहने वाले सुनीता जोशी ने उसके खिलाफ थाने में ममला दर्ज कराया। भोपाल के डीआईजी

शिवसैनिकों के हाथों पिटे पूर्व नौसेना अधिकारी पर उद्धव ठाकरे की पत्नी ने भी कसा तंज

महज एक कार्टून शेयर करने को लेकर शिवसेना कार्यकर्ताओं के हमले का शिकार बने पूर्व नौसेना अधिकारी मदन शर्मा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से इस्तीफे की माँग की थी। इसी को लेकर शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में मदन शर्मा पर निशाना साधा गया है। बता दें कि सामना के संस्थापक संपादक बाल ठाकरे और संपादक रश्मि उद्धव ठाकरे हैं। रश्मि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी हैं।

सामना के संपादकीय में कहा गया है कि मुंबई में मदन शर्मा नामक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी पर संतप्त शिवसैनिकों ने हमला किया। इसका समर्थन कोई नहीं करेगा। इसका निषेध ही होना चाहिए। लेकिन यह जो कोई सेवानिवृत्त अधिकारी महोदय हैं, उन्होंने राज्य की जनता द्वारा नियुक्त मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के संदर्भ में आपत्तिजनक व्यंग्य चित्र सोशल मीडिया पर साझा करके क्या हासिल किया?

संपादकीय में आगे कहा गया है, “संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का सम्मान करो, ऐसा इन महोदय को नौसेना में रहते कोई सिखाया नहीं था क्या? आप जिस राज्य में रहते हो, कमाते हो, सुख से जीते हो उस राज्य के नेताओं के बारे में कुछ भी व्यर्थ बोलना और उस पर संतप्त होकर कोई तुम्हारा मुँह फोड़ दे तो उसे अन्याय, अत्याचार, आजादी पर हमला आदि व्यर्थ विशेषण इस्तेमाल करके राजनीति करना।”

साभार: सामना संपादकीय

तंज कसते हुए लिखा गया है, “कटु सत्य कहा जाए तो आज आपने महाराष्ट्र का खाया और उसी थाली में छेद कर दिया है। मुख्यमंत्री का अपमान किया है। कल मन में आ ही गया तो राज्यपाल, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, वर्तमान सेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख का उपहास उड़ाओगे तो भी चिंता मत करना। आपको इस महान कार्य के लिए ‘पद्म’ पुरस्कार अथवा विशिष्ट सेवा पदक देकर सम्मानित किया जाएगा।”

संपादकीय में कहा गया है कि जब एलएसी पर चीन के साथ हिंसक झड़प में हमारे 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए, तब मदन शर्मा ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की माँग क्यों नहीं की? तब भी उनके अंदर के सैनिक को जागना चाहिए था। 20 सैनिकों की हत्या के जिम्मेदार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री से इस्तीफे की माँग करनी चाहिए थी, परंतु फिलहाल देश में जो कुछ अनाप-शनाप हरकतें हो रही है, उसे देखते हुए ओलंपिक में बच्चों के खेल का कोई स्वर्ण पदक अवश्य ही मिल जाएगा।

संपादकीय में आरोप लगाते हुए कहा गया है कि पिछले 24 घंटों में कर्नाटक में तीन पुजारियों की पत्थर से कूँचकर हत्या कर दी गई। वहीं उत्तर प्रदेश के मंदिर में जा रहे पुजारी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। पालघर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में राजनीतिक निवेश करनेवाले और उनके मीडिया के ‘सहयोगी’ इन साधुओं की हत्या के मामले में चुप हैं। भाजपा के लोग सड़क पर उतरकर इन घटनाओं का निषेध करते हुए गलती से भी नहीं दिखे, क्योंकि यह सब व्यर्थ कारोबार उन्होंने सिर्फ महाराष्ट्र के लिए ही सुरक्षित रखा है।

‘कॉन्ग्रेसी’ सिकंदर खान ने 16 साल की लड़की का 2 वर्ष तक किया रेप: हिंदू नाम से दोस्ती, पोर्न साइट पर डालता था वीडियो

मध्य प्रदेश के सतना स्थित कोलगवाँ से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ कम्पनी बाग़ निवासी अतीक मंसूरी उर्फ़ समीर उर्फ़ सिकंदर खान ने हिन्दू नाम के साथ 16 साल की नाबालिग को 2 साल तक यौन शोषण का शिकार बनाया। उसका असली नाम मोहम्मद अली अंसारी बताया गया है। नाबालिग को उसने अपना नाम समीर सिंह बताया था। सतना पुलिस ने बलात्कार आरोपित के फार्महाउस और साइबर कैफे को सील कर लिया है।

बताया जा रहा है कि सिकंदर कॉन्ग्रेस का नेता था लेकिन पार्टी जिलाध्यक्ष ने इस बात से इनकार (हालाँकि मीडिया हाउस इस तथ्य को चला रहे हैं) किया है। फ़िलहाल सिकंदर खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। आश्चर्य की बात यह कि वो जेल जाते वक्त विक्टरी साइन दिखाते हुए शान से जा रहा था।

उसके ठिकानों से कम्प्यूटर, डीवीआर और कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं। 40 वर्षीय सिकंदर ने फेसबुक के जरिए नाबालिग से संपर्क किया था। पुलिस को शिकायत मिली है कि उसने कई अन्य महिलाओं को भी अपना शिकार बनाया है। एसपी रियाज इक़बाल ने जाँच के लिए एसआईटी गठित कर दी है।

एसपी ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी के पास सिकंदर खान को लेकर कोई भी सूचना या शिकायत है तो वो बिना डरे सामने आएँ, पुलिस उन शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करेगी। सतना पुलिस ने सूचनाओं को गोपनीय रख कर कार्रवाई करने की बात कही है। पुलिस उसके अन्य ठिकानों पर भी दबिश दे रही है। उसे जल्द ही रिमांड पर भी लिया गया है। उसका साइबर कैफे प्रताप होटल के नीचे रीवा रोड में स्थित है, जहाँ पुलिस पहुँची।

वहीं नजीराबाद में सिकंदर का फार्महाउस भी है, जिसका इस्तेमाल वो अपने साथियों के साथ अय्याशी के लिए करता था। नगर कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष मक़सूद अहमद ने कहा है कि आरोपित कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता नहीं है, और उसने सदस्यता ही नहीं ली है। हालाँकि, उसके भाई कॉन्ग्रेस के पूर्व-पार्षद हैं और पार्टी के नेता हैं, ये बात उन्होंने स्वीकार की। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ऐसे लोगों का समर्थन नहीं करती और पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए।

‘नई दुनिया’ के सतना संस्करण में प्रकाशित खबर

पुलिस ने बताया है कि आरोपित को रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ जारी है। नाबालिग पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि सिकंदर खान ने अपने फार्महाउस पर बुला कर उसका बलात्कार किया था। साथ ही वीडियो बना कर ब्लैकमेल भी करता था।

आरोपित सिकंदर की कई कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ भी तस्वीरें हैं। वह शहर के कई बड़े नेताओं के साथ होर्डिंग्स भी लगवाता था। उसके खिलाफ 4 एफआईआर दर्ज की गई है। सतना में बलात्कार आरोपित सिकंदर खान को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है।

सिकंदर पर आरोप है कि वो महिलाओं के अश्लील वीडियो बना कर उन्हें पोर्न वेबसाइट्स पर अपलोड कर दिया करता था। एक होर्डिंग में उसे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ भी देखा जा सकता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा है कि सतना में हुई लव जिहाद की घटना मानवता पर कलंक है, ऐसी घटनाएँ मध्य प्रदेश में बर्दास्त नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि दोषियों की जगह सिर्फ जेल है, चाहे फिर वो कोई भी हो।

‘उदित राज सिर्फ़ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नहीं, बल्कि विश्व के राष्ट्रपति बन सकते हैं, वे गैलेक्सी भी सँभाल सकते हैं’

आउटलुक को दिए साक्षात्कार में कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने बताया कि ‘भाजपा का आईटी सेल’ उनके और पार्टी के बीच में दरार पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्विटर पर हैशटैग चलाकर उनसे  माँग की जा रही है कि वह सोनिया गाँधी से उनकी जिम्मेदारियाँ ले लें।

यहाँ ये बात साफ कर दें कि उदित राज जिसे बीजेपी आईटी सेल का बता रहे हैं, वो एक डिजिटल एक्टिविस्ट है और ट्विटर पर @being_humor नाम से है। @being_humor ने ऑपइंडिया की निरवा मेहता से बात करते हुए अपने इस समर्थन की वजह बताई है और ये भी समझाया है कि वह उदित राज को इतना महान क्यों समझते हैं।

डिजिटल एक्टिविस्ट से बातचीत के अंश:

कॉन्ग्रेस से जुड़ने के बाद  #UditRajForCongressPresident सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। आप इस पर क्या कहेंगे?

यह पार्टी में फेरबदल के बाद नहीं हुआ है। हैशटैग दो हफ्तों से ट्रेंड कर रहा है। पार्टी से जुड़ने के कारण तो बस इसे तूल मिला है। उदित राज के समर्थकों की यह सच्ची माँग है। वह जनता के मुद्दों पर बोलते हैं और न्यायोचित बात करते हुए अपनी माँग करते हैं जो राहुल गाँधी के बयानों में नजर नहीं आता।

आउटलुक को दिए इंटरव्यू में उदित राज ने कहा कि वह जनता के नेता है इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है? आपको लगता है वह जनता के नेता हैं?

#UditRajForCongressPresident और #justiceforuditraj हैशटैग पर 1 लाख से ज्यादा ट्वीट इस बात का सबूत है कि उनके बहुत समर्थक हैं। हालाँकि, फिर भी मैं आपका ध्यान उनकी विशाल छवि पर दिलवाना चाहता हूँ, उनके समर्थक जाति-पाति से हटकर हर वर्ग के हैं। वह खुद को सुनामी (आँधी) कहने की बजाय केवल जनता का नेता बताकर बड़प्पन दिखा रहे हैं। उनकी कुछ तस्वीरें देखें जिनसे उनकी मास अपील का पता लगता है।

क्या आपको लगता है कि आउटलुक के साथ उनका साक्षात्कार एक तरीका था कि कॉन्ग्रेस में उन्हें हाईकमान नोटिस करें?

बिलकुल। अपने एक से ज्यादा जवाबों में उन्होंने न केवल अपने उपर ध्यान आकर्षित करवाने की कोशिश की है, बल्कि कॉन्ग्रेस पर भी हमला बोला है। उन्होंने यह कहकर कि राहुल गाँधी ने अभी उनकी सुनवाई नहीं की, उनका जवाब आना बाकी है, उदित राज ने बड़े ही समझदारी से बताया है कि कॉन्ग्रेस दलितों की सुनवाई नहीं कर रही।यह पूछने पर कि अनुभवी दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी AICC में मुख्य सचिव पद से हट गए। उदित राज ने कहा कि खड़गे अभी भी राज्यसभा सदस्य हैं। इसलिए उनकी बातों को समझिए और आपको पता चलेगा कि उनकी माँग क्या है।

क्या आपको लगता है कि उनकी मौजूदगी के कॉन्ग्रेस में कोई मायने हैं?

कोई फर्क नहीं पड़ता। कॉन्ग्रेस अवसरवादी पार्टी है। उन्होंने भगवान राम की मौजूदगी को नकार दिया था। लेकिन पीएम मोदी ने जब 5 अगस्त को राम जन्मभूमि पूजन किया तो उन्होंने राम मंदिर का क्रेडिट खुद ले लिया। जब कॉन्ग्रेस को उदित राज की ताकत का पता चलेगा, वह उन्हें भी पूजने लगेगी।

आप इसे क्यों ट्रेंड करवा रहे हैं?

मैंने अकेले कुछ नहीं किया। मैंने सिर्फ़ @amit_gujju जी के साथ मिल कर अपनी आवाज उठाई और उदित राज जी के सैकड़ों समर्थकों ने जुड़कर इसे जन आंदोलन बना दिया। ऐसा शायद इसलिए क्योंकि कई लोगों ने कॉन्ग्रेस को दलितों पर राय रखते देखा है और भाजपा पर ये आरोप भी लगाते देखा है कि बीजेपी दलितों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देती, इसलिए अब वह चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस अपनी बातों को चरितार्थ करे।

क्या भाजपा आईटी सेल ने आपसे ऐसा करने को कहा या किसी और ने कहा?

नहीं, मैं दूर से दूर तक भाजपा आईटी सेल से नहीं जुड़ा हुआ हूँ। हालाँकि, अगर कोई अच्छा पैसा देगा, तो मैं उससे जुड़ना चाहूँगा। मुझे उदित राज के कई समर्थकों के संदेश आते हैं। वह सभी लोग अपने महान नेता की सेवा में तैनात होने के लिए तैयार हैं।

आप कॉन्ग्रेस विरोधी लग रहे हैं? लोग आपके ऊपर क्यों विश्वास करेंगे कि आप वाकई उदित राज को समर्थन करते हैं?

मैं कॉन्ग्रेस और उसकी विचारधारा का विरोधी लग सकता हूँ। लेकिन मैं हमेंशा मजबूत राष्ट्रवाद और मजबूत विपक्ष के समर्थन में हूँ, जो कॉन्ग्रेस नहीं है। अब डॉ. उदित राज पर आऊँ तो उनके लिए देश हमेशा राजनीति से ऊपर रहा है और इसे इस तथ्य से साबित किया जा सकता है कि उन्होंने अपनी अपनी बड़ी पार्टी छोड़ कर भाजपा में जाना सही समझा और फिर साल 2019 में जब उन्हें लगा कि राहुल गाँधी अकेले मोदी का कुछ नहीं कर पाएँगे तो उन्होंने इसका भार अपने ऊपर ले लिया, ताकि कॉन्ग्रेस की डूबती नैया को बचा सकें। यानी, उन्होंने पहले भाजपा को सशक्त किया फिर कॉन्ग्रेस में आ गए। मुझे उनमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने का ही नहीं, विश्व राष्ट्रपति बनने का और आकाशगंगा को सँभालने का जज्बा भी दिखता है।

आखिरी बार एक दलित, ‘सीताराम केसरी’ ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पद जब सँभाला तो उनके साथ बदसलूकी हुई। क्या आप कहीं भीतर से उदित राज से नफरत तो नहीं करते और उनके साथ बदसलूकी करवाना चाहते हों?

आप उदित राज जी को समझे नहीं। वह सीआईडी के दया की तरह हैं, वह जब जी चाहे दरवाजे तोड़ सकते हैं। ये उनकी ताकत है कि जैसे ही #UditRajForCongressPresident ट्रेंड करना शुरू हुआ, सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी ने ध्यान इधर-उधर करने के लिए देश छोड़ना जरूरी समझा।

आप कब तक इस अभियान को चलाएँगे?

हम इसे जल्द तो नहीं रोकेंगे। बल्कि आप कोरोना खत्म होने के बाद जमीनी स्तर पर इसका असर देखेंगे। हम जंतर-मंतर पर अगले 4 साल तक के लिए एक जगह खरीदने की सोच रहे हैं। हम सुनिश्चित करेगें कि ये अभियान समय के साथ और तूल पकड़े ताकि डॉ. उदित राज सिर्फ़ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि साल 2024 में पीएम कैंडिडेट भी बनें।

चीन के खिलाफ बोलने से बचने के लिए तो नहीं भागे राहुल-सोनिया? मॉनसून सत्र के आधे हिस्से में नहीं रहेंगे दोनों

भारत-चीन तनाव के बीच सोनिया गाँधी अपने रूटीन मेडिकल चेकअप के लिए विदेश निकल गई हैं और उनके बेटे राहुल गाँधी भी साथ गए हैं। जहाँ सोनिया गाँधी रायबरेली से पाँचवीं बार सांसद बनी हैं, वहीं राहुल गाँधी 3 बार अमेठी का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब केरल के वायनाड से सांसद हैं। सोनिया भी अमेठी का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। ऐसे में संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले दोनों का विदेश जाना एक संयोग नहीं है, ऐसा कई लोगों को लग रहा।

भारत और चीन के बीच जब से तनाव शुरू हुआ है, तब से राहुल गाँधी की भाषा पर गौर किया जाए तो हमें पता चलता है कि उन्होंने आज तक चीन की आलोचना में एक शब्द भी नहीं कहे लेकिन प्रधानमंत्री को बदनाम करने के लिए उनके लिए ‘सरेंडर मोदी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। राहुल गाँधी लगातार कहते रहे कि चीन ने हमारी जमीन हड़प ली है और मोदी सरकार इस मामले में डर कर हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

एक और बात गौर करने लायक ये भी है कि राहुल गाँधी ने कभी उन मीडिया रिपोर्ट्स तक पर भी प्रतिक्रिया नहीं दी, जिनमें भारतीय सेना के पराक्रम की बात की गई। गलवान संघर्ष में 40 चीनी फौजियों के मारे जाने की बात सामने आई लेकिन राहुल गाँधी ने सेना की पीठ नहीं थपथपाई। हाल ही में एक अमेरिकी रिपोर्ट में इससे भी ज्यादा का आँकड़ा दिया गया है लेकिन राहुल गाँधी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और चुप रहे।

इसके अलावा सेना और सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी बयान का राहुल गाँधी ने समर्थन नहीं किया और ‘चीन ने हमारी जमीन हड़प ली’ वाला राग अलापते रहे। कॉन्ग्रेस पार्टी ने कभी भी इस बात की भी चर्चा नहीं की कि आज भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवान उन चोटियों पर डेरा डाले हुए हैं, जहाँ 1962 के बाद से ही वो नहीं गए थे। आज चीन की गतिविधियों ऊपर भारतीय सशस्त्र बलों की सीधी नज़र है।

ऐसे में ये सवाल तो उठेगा ही कि क्या सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी चीन के डर से संसद सत्र के पहले हिस्से में भाग नहीं ले रहे हैं क्योंकि इससे उन्हें चीन की आलोचना या निंदा करनी पड़ेगी? क्या सोनिया-राहुल चीन के खिलाफ एक भी शब्द बोलने से डर रहे हैं? भारत-चीन तनाव के बीच ही राहुल ने अपने वीडियो सीरीज शुरू किया और इस तनाव के लिए पीएम मोदी को जिम्मेदार तो ठहराया लेकिन चीन की आलोचना नहीं की।

कभी सीमा पर भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों को अलग-अलग भोजन मिलने की बात करते हैं तो कभी चीन विवाद को मोदी की छवि से जोड़ कर देखते हैं। हाल ही में चीन के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भी एक वीडियो जारी कर दिखाया था कि जहाँ वहाँ के फौजी ठण्ड में ड्रोन से आया गर्मागर्म खाना खाएँगे, वहीं भारतीय सेना के जवाब भूखे रहेंगे। राहुल गाँधी और चीन, दोनों एक ही बातें कर रहे हैं। ऐसे में कैसे वो संसद में चीन की करतूतों की निंदा करने का साहस जुटा पाएँगे?

चीनी मुखपत्र ने तो ये भी लिखा कि कॉन्ग्रेस पार्टी मौके की ताक में है और कभी भी मोदी सरकार को हिला सकती है, जिसके लिए वो मुद्दा ढूँढ रही है। ऐसे में ये आरोप लगना स्वाभाविक है कि जब ये सारे सवाल संसद में उठेंगे, तब सत्ताधारी दल की बड़ी संख्या बल के सामने जवाब नहीं जुटे तो क्या होगा? क्या यही वो डर है, जिसने सोनिया-राहुल को विदेश जाने के लिए मजबूर कर दिया है? क्योंकि चीन की इतनी तरफदारी आजकल तो वामपंथी दल भी नहीं करते।

इसी तरह जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी भारत-चीन मुद्दे पर बोल रहे थे, तब राहुल गाँधी सोते हुए नज़र आए थे। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी कहा था कि जिस तरह से इश्क और मुश्क छिपाने से भी नहीं छिपते, ठीक वैसे ही कॉन्ग्रेस और चीन के बीच चल रहे प्रेम के बारे में सभी को पता है। उन्होंने दावा किया था कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की कॉन्ग्रेस पार्टी के बीच समझौते हुए हैं, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक की जानी चाहिए। 

भाजपा का आरोप है कि 2008 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और कॉन्ग्रेस ने एक MOU पर हस्ताक्षर किए थे, इसीलिए दोनों के बीच का प्रेम किसी से छिपा हुआ नहीं है। आखिर उस MOU में क्या था, इसका विवरण अब तक सामने नहीं आया है? क्या कोई ऐसा करार है, जिसके तहत गाँधी परिवार ने चीन और शी जिनपिंग के खिलाफ न बोलने की शपथ ली हुई है और इसीलिए वो संसद सत्र में सवालों से बचने के लिए भाग गए?

ये भी अजीब विडम्बना है क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि जब ऐसे मौके आते हैं, तब सरकारें जवाब देने से बचती रही हैं लेकिन यहाँ तो विपक्ष के प्रथम परिवार के दो लोग ही देश से निकल लिए। कॉन्ग्रेस तो कहती है कि देश में अशांति है और माहौल खराब है, फिर उसे क्या ज़रूरत है भागने की क्योंकि अभी तो मोदी सरकार को घेरने के लिए उसके हिसाब से सबसे मुफीद समय होना चाहिए न? कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष देश से बाहर हैं और पार्टी संसद में लड़ेगी… वाह रे देश की सबसे परानी पार्टी!

23 नेताओं ने पत्र लिख कर गाँधी परिवार को घेरा है और पार्टी में लोकतंत्र की माँग की है। संगठन में हुए महत्वपूर्ण बदलावों में उन नेताओं को नज़रअंदाज़ किया गया है और वफादारों की चाँदी हो गई है। पार्टी के लिए भी आंतरिक कलह के कारण ये ठीक समय नहीं है क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाने के बाद अभी-अभी सचिन पायलट की बगावत रही है। ऐसे समय में दोनों के विदेश जाने पर अटकलों का बाजार गर्म होना आम है।