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माफी से भी ‘औरंगजेब’ ने नहीं छोड़ा अबू आजमी का पीछा, महाराष्ट्र विधानसभा से सपा MLA निष्कासित: बोले CM योगी- UP भेजिए, हम इलाज करेंगे

महाराष्ट्र सपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक अबू आजमी द्वारा मुगल आक्रांता औरंगजेब का गुणगान एवं महिमामंडन करने पर विवाद हो गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी आजमी को उत्तर प्रदेश भेजे, बाकी वे उनका उपचार करवा देंगे। वहीं, महाराष्ट्र के सत्ताधारी सदस्यों के भारी विरोध के बाद आजमी को पूरे बजट सत्र के लिए सदन से निष्कासित कर दिया गया है।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “उस व्यक्ति (अबू आजमी) को (समाजवादी) पार्टी से निकालिए और यूपी भेजिए। हम इलाज करेंगे। जो व्यक्ति छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत पर शर्म महसूस करता है, गर्व करने के बजाय औरंगज़ेब को अपना आदर्श मानता है, क्या उसे हमारे देश में रहने का अधिकार है? समाजवादी पार्टी को इसका जवाब देना चाहिए।”

उत्तर प्रदेश के विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, “एक तरफ़ आप (अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी) महाकुंभ को दोष देते रहते हैं, दूसरी तरफ़ आप औरंगज़ेब जैसे व्यक्ति की प्रशंसा करते हैं, जिसने देश के मंदिरों को नष्ट कर दिया। आप अपने उस विधायक को नियंत्रित क्यों नहीं कर सकते? आपने उसके बयान की निंदा क्यों नहीं की?”

महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने मंगलवार (4 मार्च) को महाराष्ट्र के विधानसभा में अबू आजमी को निलंबित करने का प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने तर्क दिया कि औरंगजेब की प्रशंसा करना मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके बेटे छत्रपति संभाजी महाराज का अपमान है। इसके बाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 26 मार्च को समाप्त होगा।

वहीं, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के विधायक अबू आजमी के बयान की निंदा करने के बजाय उनका बचाव किया है। महाराष्ट्र के विधानसभा से अबू आजमी के निलंबन के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया साइट X पर पोस्ट करके कहा, “निलंबन का आधार यदि विचारधारा से प्रभावित होने लगेगा तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और परतंत्रता में क्या अंतर रह जाएगा?”

उत्तर प्रदेश के कन्नौज से लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने आगे कहा, “हमारे विधायक हों या सांसद, उनकी बेख़ौफ़ दानिशमंदी बेमिसाल है। कुछ लोग अगर सोचते हैं कि ‘निलंबन’ से सच की ज़ुबान पर कोई लगाम लगा सकता है तो फिर ये उनकी नकारात्मक सोच का बचपना है। आज़ाद ख़्याल कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!”

बता दें कि औरंगजेब पर दिए गए बयान को लेकर आजमी के खिलाफ महाराष्ट्र के ठाणे में केस भी दर्ज किया गया है। दरअसल, मुगल आक्रांता को लेकर आजमी ने कहा था, “मैं 17वीं सदी के मुगल बादशाह औरंगजेब को क्रूर, अत्याचारी या असहिष्णु शासक नहीं मानता। औरंगजेब के शासनकाल में हमारा जीडीपी (विश्व जीडीपी का) 24 प्रतिशत था और भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था।”

समाजवादी पार्टी के विधायक आजमी ने कहा था कि औरंगजेब के शासनकाल के दौरान भारत की सीमाएँ अफगानिस्तान और बर्मा (आज का म्यांमार) तक फैली हुई थीं। उन्होंने कहा कि इन दिनों फिल्मों के माध्यम से मुगल बादशाह की विकृत छवि बनाई जा रही है। अबू आजमी के इस बयान के बाद बवाल हो गया। बता दें कि हाल में ही औरंगजेब की क्रूरता पर छावा मूवी रिलीज हुई है।

आजमी के इस बयान पर महाराष्ट्र के दोनों सदनों में मंगलवार (4 मार्च) को आजमी के बयान को लेकर जमकर हंगामा हुआ। सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा, राकांपा (NCP) और एकनाथ शिंदे की गुट वाली शिवसेना के सदस्यों ने अबू आजमी को विधानसभा से निलंबित करने और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की माँग की। इस हलचल को देखते हुए आज़मी ने अपने बयानों के लिए माफी माँग ली।

सोशल मीडिया साइट X पर अबू आजमी ने लिखा, “मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है। औरंगज़ेब रहमतुल्लाह अलेह के बारे में मैंने वही कहा है, जो इतिहासकरों और लेखकों ने कहा है। मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज या अन्य किसी भी महापुरुषों के बारे में कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है, फिर भी मेरी इस बात से कोई आहत हुआ है तो मैं अपने शब्द, अपना स्टेटमेंट वापस लेता हूँ।”

काफिला लेकर ‘साधना’ करने होशियारपुर पहुँचे अरविंद केजरीवाल, ‘VVIP विपश्यना’ पर AAP सांसद ने भी उठाया सवाल: कहा- पंजाब को ऐशो आराम का जरिया बनाया

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) मुखिया अरविन्द केजरीवाल पंजाब पहुँचे हैं। दिल्ली में मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने के बाद वह अब पंजाब में VVIP दर्जे का फायदा ले रहे हैं। यहाँ उनके साथ दर्जनों गाड़ियों का काफिला चल रहा है। वह पंजाब में विपश्यना करने गए हैं। यहाँ भगवंत मान की सरकार उनकी अगवानी में लगी हुई है। लम्बे काफिले और VVIP ट्रीटमेंट के चलते अब उनकी आलोचना हो रही है। उनकी ही पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल ने भी उनकी आलोचना की है।

केजरीवाल मंगलवार (4 मार्च, 2025) को पंजाब के होशियारपुर पहुँचे थे। यहाँ वह धम्म ध्वजा विपश्यना केंद्र में पहुँचे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल भी मौजूद हैं। बुधवार को यह विपश्यना प्रोग्राम चालू होगा। विपश्यना का यह कार्यक्रम 10 दिन चलेगा। केजरीवाल का इस विपश्यना केंद्र में पहुँचने का एक वीडियो भी सामने आया।

इस वीडियो के सामने आने के बाद उनकी आलोचना चालू हो गई। वीडियो में दिखता है कि केजरीवाल को विपश्यना केंद्र में ले जाने वाले काफिले में लाल-नीली बत्तियाँ लगी कई गाड़ियाँ। एक वीडियो में कई दर्जन ऐसी गाड़ियाँ दिखती हैं। इस काफिले में स्कॉर्पियो, थार जैसी सरकारी गाड़ियाँ भी थीं।

केजरीवाल के लिए कई बुलेटप्रूफ गाड़ियों का भी इंतजाम था। उनके इस वीडियो पर AAP की ही राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कटाक्ष किया है। स्वाति मालीवाल ने कहा है कि केजरीवाल का काफिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी बड़ा था।

उन्होंने लिखा, “जिस पंजाब की जनता ने इतना प्यार दिया उससे इतना डर लगता है केजरीवाल जी को? सारी दुनिया को VIP कल्चर पर टोकने वाले केजरीवाल जी आज ख़ुद डोनाल्ड ट्रम्प से बड़ा सुरक्षा घेरा लेकर घूम रहे हैं। ग़ज़ब ही है… कैसे पंजाब जैसे महान सूबे को सबने अपने ऐश आराम के साधन निकालने का ज़रिया बना लिया है।”

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी केजरीवाल पर हमला किया। उन्होंने कहा, “अरविंद केजरीवाल की ये नकली सादगी एक और नौटंकी है। जो व्यक्ति भ्रष्टाचार और अहंकार में डूबा हो, वह विपासना के असली अर्थ को क्या समझेगा?”

उन्होंने कहा कि केजरीवाल पंजाब के खजाने से लाखों रूपए उड़ा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविन्द केजरीवाल को विपश्यना के लिए भी अब 100 कमांडो और करोड़ों की गाड़ियाँ चाहिए। केजरीवाल और AAP पर पहले भी पंजाब के संसाधनों के दोहन के आरोप लगते रहे हैं।

खर्च- ₹7500 करोड़, फायदा- ₹3 लाख करोड़: प्रयागराज महाकुंभ से अर्थव्यवस्था भी बम-बम, जानिए कौन हैं वह नाविक जिन्होंने 45 दिन में कमाए ₹30 करोड़

उत्तर प्रदेश में महाकुंभ आयोजन के चलते आर्थिक फ्रंट पर काफी फायदा हुआ है। इससे अर्थव्यवस्था में ₹3 लाख करोड़ जुड़ने की संभावना है। होटल से लेकर ट्रांसपोर्ट और फ़ूड क्षेत्र में काफी कमाई हुई है। इस दौरान प्रयागराज में छोटे-मोटे धंधे करने वाले लोगों को भी बड़ा फायदा हुआ है। इसी तरह का एक उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिया है।

एक नाविक ने कमा लिए ₹30 करोड़

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट पर बोलते हुए मंगलवार (4 मार्च, 2025) को सीएम योगी एक नाविक परिवार के विषय में बताया। उन्होंने कहा, “एक ऐसा नाविक परिवार, जिनके पास 130 नौकाएँ थीं। इन लोगों ने 45 दिनों के महाकुंभ में ₹30 करोड़ की बचत की है। यानी एक नाव ने ₹23 लाख 45 दिनों में कमाए हैं।”

सीएम योगी ने बताया कि इसी हिसाब से एक दिन में एक नाव ने ₹50 हजार से लेकर ₹52 हजार तक की कमाई की है। सीएम योगी ने महाकुंभ आयोजन को लेकर किए गए खर्च और इससे अर्थव्यवस्था में हुई बढ़ोतरी को लेकर भी बात की।

उत्तर प्रदेश को ₹3.5 लाख करोड़ के फायदे का अनुमान

सीएम योगी ने बताया कि राज्य में महाकुंभ के आयोजन से राज्य को ₹3.5 लाख करोड़ का लाभ होने का अनुमान है। उन्होंने CAIT के आँकड़े भी दिए, जिसने बताया था कि महाकुंभ में लोगों ने ₹3 लाख करोड़ का खर्च किया जो अर्थव्यवस्था में जुड़े।

महाकुंभ के चलते ट्रांसपोर्ट, होटल, पूजा सामग्री और बाकी क्षेत्रों में हजारों करोड़ का खर्च हुआ। सीएम योगी ने बताया कि महाकुंभ के दौरान होटल उद्योग में ₹40 हजार करोड़, खाने-पीने और FMCG में ₹33 हजार करोड़, परिवहन क्षेत्र में ₹1.5 लाख करोड़ और पूजा सामग्री के चलते ₹20 हजार करोड़ का फायदा हुआ है।

प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के चलते अयोध्या और वाराणसी में भी भक्तों के बड़े जत्थे पहुँचे, जिससे यहाँ भी आर्थिक लाभ हुआ है। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने बताया है कि महाकुंभ में हुए बड़े खर्च के चलते देश को 6.5% की GDP बढ़ोतरी की रफ़्तार बनाए रखने में मदद मिलेगी।

महाकुंभ में 60 करोड़ से अधिक लोग शामिल हुए थे। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के अलावा मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा अदि को भी इससे बड़ा फायदा हुआ है। महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या इन राज्यों से भी थी।

₹7500 करोड़ हुए थे व्यवस्था पर खर्च

महाकुंभ से ₹3 लाख करोड़ का का फायदा तब हुआ है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके मुकाबले ₹7500 करोड़ का खर्च किया था। उत्तर प्रदेश सरकार में योगी सरकार ने महाकुंभ के लिए प्रयागराज शहर में काफी विकास किया। बड़ा खर्च इन्फ्रा सुधारने पर हुआ था।

योगी सरकार ने प्रयागराज के भीतर 200 से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण किया था। योगी सरकार ने प्रयागराज में 14 नए फ्लाईओवर और 9 अंडरपास भी बनाए थे। नदी के तट को लेकर भी योगी सरकार ने काम किया था। मेला क्षेत्र में योगी सरकार ने 30 पीपा पुल बनाए थे। इसका लाभ अब योगी सरकार को मिला है।

मार-मार कर तोड़ दी भारतवंशी नर्स के चेहरे की सारी हड्डियाँ, अमेरिका में इलाज के दौरान नस्लीय हमला: कहा- भारतीय एकदम बेकार, मैंने एक डॉक्टर को पीट दिया

अमेरिका में एक व्यक्ति ने भारतवंशी नर्स पर जानलेवा हमला कर दिया। उसने यह हमला भारतीयों से घृणा के चलते किया। नर्स इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुई। उसके चेहरे की सारी हड्डियाँ टूट गईं। अमेरिकी ने इस नस्लभेदी हमले के बाद भारतीयों को गालियाँ बकीं। वह हमले के बाद गिरफ्तार भी हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्लोरिडा के एक अस्पताल में 33 साल का एक मानसिक रोगी स्टीफन स्केंटलबरी नाम का रोगी आया था। यहाँ उसका इलाज 67 वर्षीय भारतवंशी नर्स लीलम्मा लाल कर रही थीं। यहाँ इलाज के दौरान ही स्टीफन ने लीलम्मा लाल पर हिंसक हमला कर दिया।

उसने चेहरे पर कई वार किए। इसके चलते लीलम्मा लाल गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनके चेहरे की सारी हड्डियाँ टूट गईं। लाल की आँखों में भी काफी चोट आई। इसके बाद स्टीफन यहाँ से भाग गया। उसके बारे में पुलिस को सूचना दी गई।

स्टीफन को कुछ ही देर बाद पुलिस ने पकड़ लिया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। स्टीफन ने इसके बाद नस्लभेदी टिप्पणियाँ भी की। उसने कहा, “भारतीय बुरे हैं। मैंने अभी-अभी एक भारतीय डॉक्टर को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया।”

वर्तमान में लीलम्मा लाल का इलाज चल रहा है। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस हमले के चलते उनकी दोनों आँखों की रोशनी जाने की आशंका है। उनकी बेटी सिंडी ने कहा है कि हमले के बाद वह अपनी माँ को पहचान ही नहीं पा रही हैं।

उनकी बेटी ने बताया, “उसके दिमाग में खून का रिसाव हुआ है। उनके चेहरे का दाहिना हिस्सा पूरी तरह से टूट गया था… उनके नलियाँ पड़ी हुई थीं और वह बेहोश थी, उनके चेहरे पर बहुत सारे चोट के निशान थे और उसकी आँखों में सूजन थी। मैं वास्तव में उसे पहचान नहीं पाया।”

इस मामले में अब अमेरिका में काम करने वाली भारतीय नर्सों के संगठन ने कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को सुरक्षा मुहैया करवाने की अपील की है। अमेरिका में भारतीयों पर नस्लभेदी हमले बीते कुछ समय में बढे हैं।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने टेके घुटने, रूस के साथ युद्ध खत्म करने को हुए तैयार: कहा- व्हाइट हाउस में जो हुआ उसका पछतावा, अब सब कुछ सही करने का समय

यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की रूस के साथ युद्ध खत्म करने को तैयार हो गए हैं। उन्होंने बातचीत की मेज पर आने के लिए हामी भरी है। जेलेंस्की ने व्हाइट हाउस में ट्रम्प के साथ बैठक में हुए झगड़े को लेकर भी दुख जताया है। जेलेंस्की के रुख में यह नरमी अमेरिका के यूक्रेन की सारी सैन्य मदद रोकने के फैसले के बाद दिखी है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने शान्ति वार्ता को लेकर एक्स पर ऐलान किया है। उन्होंने लिखा, “हममें से कोई भी एक अंतहीन युद्ध नहीं चाहता। यूक्रेन स्थायी शान्ति लाने के लिए जल्द से जल्द बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार है…मेरी टीम और मैं शांति बहाल करने के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प के मजबूत नेतृत्व में काम करने के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “हम युद्ध को समाप्त करने के लिए तेजी से काम करने के लिए तैयार हैं, पहले चरण में कैदियों की रिहाई और हवाई हमलों पर रोक लगनी चाहिए। मिसाइलों, लंबी दूरी के ड्रोन, ऊर्जा और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे पर बमों पर भी रोक लगाई जानी चाहिए, रूस को भी यही करना होगा।”

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने व्हाइट हाउस में हुई बैठक में हुए झगड़े को लेकर कहा, “शुक्रवार को वाशिंगटन में व्हाइट हाउस में हमारी बैठक उस तरह नहीं हुई जैसी होनी चाहिए थी। यह अफ़सोस की बात है कि यह सब हुआ। अब समय आ गया है कि हम सब चीजों को ठीक करें।”

यूक्रेन ने अमेरिका के साथ खनिज डील करने पर भी सहमति जताई है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन यह डील किसी भी तरह से और किसी भी समय करने के लिए तैयार है। जेलेंस्की के रुख में यह बड़ा बदलाव अमेरिका के सैन्य मदद रोकने के फैसले के बाद आया है।

मंगलवार (4 मार्च, 2025) को अमेरिका ने यूक्रेन को भेजे जाने वाले मिसाइल, ड्रोन, टैंक समेत बाकी हथियारों की डिलीवरी रोक दी थी। अमेरिका ने इसके पीछे शान्ति वार्ता पर यूक्रेन के पीछे हटने को कारण बताया था। यह मदद रुकने के चलते यूक्रेन बड़े खतरे में पड़ गया था।

यह सैन्य मदद पैकेज रुकने के कुछ ही घंटे के भीतर यूक्रेन का रुख बदल गया। इस बदले रुख के बाद अमेरिका और यूक्रेन खनिज डील पूरी करने की तरफ बढ़ गए हैं। इस बीच यूरोप ने भी यूक्रेन को सैन्य मदद देने के लिए कदम आगे बढ़ाए हैं।

पूरे परिवार के इस्लाम छोड़ने पर ₹20 हजार, गैर मुस्लिम लड़के से शादी पर ₹15 हजार… स्कूल-चर्चों की फंडिंग से ‘मिशन मोड’ में चल रहा काम, मस्जिद जाना छोड़ा-घरों में ईसा मसीह की तस्वीर

लालच, ब्लैकमेलिंग तथा अन्य तरीकों से हिंदुओं को धर्मांतरण करने में जुटे ईसाई और मुस्लिमों के बीच अब एक-दूसरे का मजहब बदलवाने की होड़ शुरू हो गई है। पैसों का लालच देकर मुस्लिमों को ईसाई बनाने में मिशनरी जुटे हुए हैं। इसके कारण उत्तर प्रदेश के कई मुस्लिम परिवारों ने मस्जिद जाना छोड़ दिया है। उनके घरों में ईसा मसीह की तस्वीर लग गई हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, यदि कोई मुस्लिम परिवार मजहब बदलता है, तो एजेंट को 20 हजार रुपया दिया जाता है। इसी प्रकार यदि कोई मुस्लिम लड़की अपना मजहब बदलकर शादी करती है, तो उसमें सक्रिय एजेंट को 15 हजार रुपये का बोनस दिया जाता है। ये खेल गाँव-गाँव तक फैल गया है, जहाँ मुस्लिम लोग आसानी से इनके झाँसे में आ रहे हैं।

श्रावस्ती, सीतापुर, अंबेडकरनगर और सुल्तानपुर जैसे जिलों में हाल ही में कई मामले सामने आए हैं। फरवरी 2025 में सीतापुर के हरगाँव और सिधौली इलाकों में छह मुस्लिम परिवारों ने ईसाई धर्म स्वीकार किया। अंबेडकरनगर और सुल्तानपुर में भी 10 परिवारों ने ऐसा ही कदम उठाया। इन परिवारों के युवा अब दाढ़ी नहीं रखते और घरों में ईसा मसीह की तस्वीरें सजा रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मिशनरियाँ हवाला के जरिए मोटी रकम भेज रही हैं। चर्चों और बड़े स्कूलों से भी पैसा आ रहा है, जिससे ये गैंग ग्रामीण इलाकों में जाल बिछा रहे हैं। धर्मांतरण के लिए जिला स्तर पर टीमों को सक्रिय किया गया है। इसके लिए सबसे अधिक 443 सक्रिय टीम के संगम नगरी प्रयागराज में काम करने की बात सामने आई है। इसके अलावा महराजगंज में 398, बहराइच में 378, श्रावस्ती में 320, बलरामपुर में 330 और गोंडा में 340 टीमों के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है।

धर्मांतरण का नेटवर्क फैलाने में प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में 333 टमों के जुटे होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, अंबेडकरनगर में 347, सीतापुर में 326, सिद्धार्थनगर में 345, अमेठी में 317, रायबरेली में 323 और पीलीभीत में 346 सक्रिय टीमें अभियान में जुटी हैं।

नेपाल सीमा से सटे इलाकों में खासकर देवीपाटन मंडल के श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर और गोंडा जैसे संवेदनशील जिलों में पुलिस को कंवर्जन का मामला आते ही कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में आईजी अमित पाठक का कहना है कि चारों जिलों के एसपी को इस प्रकार के मामलों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुछ मुस्लिम परिवार अब जुमे की नमाज नहीं पढ़ते और बच्चे मदरसों की जगह कान्वेंट स्कूल जा रहे हैं। महिलाएँ मिशनरी संस्थाओं से जुड़कर पैसे कमा रही हैं।

आईबी के पूर्व अधिकारी सतीश सिंह बताते हैं कि मुस्लिम परिवारों के धर्मांतरण का पहला मामला पीलीभीत में वर्ष 2020 में सामने आया था। इसके बाद नेपाल से सटे गोरखपुर मंडल के महाराजगंज और फिर बस्ती मंडल के सिद्धार्थनगर जिले में भी पाँच मुस्लिम परिवारों ने ईसाई धर्म स्वीकारा। लेकिन इन परिवारों के सदस्यों ने अपना नाम नहीं बदला।

पुलिस और खुफिया विभाग इसे गंभीरता से ले रहे हैं। श्रावस्ती में एक प्रार्थना सभा के बाद एजेंट भाग गया, जिसके बाद जाँच तेज कर दी गई। सरकार ने सख्त कानून बनाए हैं, फिर भी ये गैंग रुकने का नाम नहीं ले रहे। गरीबी और अशिक्षा का फायदा उठाकर मिशनरियाँ अपना नेटवर्क मजबूत कर रही हैं।

‘मेरा समय खराब है, लेकिन मैं खुद समय हूँ’: कनाडा में बकैती करने पर सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना की ली क्लास, कहा- ओवरस्मार्ट मत बनो, सुधर जाओ

इंडियाज गॉट लैटेंट शो चलाने वाले कॉमेडियन समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट भड़क गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि समय रैना ‘ओवरस्मार्ट’ बन रहे हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ समय रैना के शो पर हुए विवाद के बारे में चल रहे केस में की हैं। समय रैना ने शो पर हुए विवाद और अश्लील टिप्पणियों के बाद कनाडा में कुछ टिप्पणियाँ की थी।

सुप्रीम कोर्ट में पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया की याचिका पर सुनवाई सोमवार (3 मार्च, 2025) को हुई। इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “ये युवा और ओवरस्मार्ट लोग सोचते हैं कि वे इस मामले में बहुत कुछ जानते हैं…इनमें से एक कनाडा गया और इस सुनवाई के बारे में बात की।”

जस्टिस सूर्यकांत विवाद के बाद समय रैना द्वारा कनाडा में की गई टिप्पणियों को लेकर बोल रहे थे। दरअसल समय रैना ने कनाडा में कहा था, “मेरा समय जरूर खराब है लेकिन याद रखना कि मैं खुद समय हूँ।” उन्होंने कनाडा में उनका शो देखने आई जनता को मजाकिया अंदाज में वकील की फीस का इंतजाम करने के लिए धन्यवाद भी दिया था।

जस्टिस सूर्यकांत ने चेतावनी देते हुए कहा, “ये लोग नहीं जानते कि सुप्रीम कोर्ट का क्षेत्राधिकार कहाँ तक है… सुधर जाओ वरना हम जानते हैं कि आपसे कैसे निपटना है।” कोर्ट ने कहा कि ये लोग युवा हैं इसलिए कोई एक्शन नहीं ले रहे।

इसी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर इलाहाबादिया को उनका पॉडकास्ट चलाने की इजाजत दे दी। इससे पहले इस पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस काम पर 280 लोग निर्भर हैं ऐसे में इसे दोबारा चालू करने की अनुमति दी जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबादिया से कहा है कि वह अपने शो में शुचिता बनाए रखें और ऐसा कंटेंट रखें जिसे सभी आयुवर्ग के लोग देख सकें। गौरतलब है कि समय के शो इंडियाज गॉट लैटेंट में रणवीर ने एक अश्लील कमेंट किया था जिसके बाद इसकी क्लिप वायरल हो गई थी।

इसके बाद मुंबई और असम में समय तथा रणवीर के खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई थी। हालाँकि, उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई थी। उनके खिलाफ कई जगह प्रदर्शन भी हुए थे। समय रैना ने यह शो यूट्यूब से भी हटा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी पहली सुनवाई में उनको काफी लताड़ा था।

मोदी राज में वन्यजीव संरक्षण में भी मिसाल बना भारत, ‘वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे’ पर गिर-वनतारा में PM: जानिए कैसे बढ़ी लुप्त हो रहे बाघ-शेरों की संख्या, ‘प्रोजेक्ट चीता’ का होगा विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (3 मार्च 2025) को वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे के मौके पर गुजरात के गिर नेशनल पार्क पहुँचे। वहाँ उन्होंने वन्यजीवों को बचाने के लिए कई बड़े ऐलान किए। सुबह-सुबह पीएम ने लॉयन सफारी की, शेर के बच्चों की तस्वीरें खींचीं और सूरज उगते हुए देखकर मजा लिया। इसके बाद उन्होंने नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की सातवीं बैठक की अगुवाई की। इस बैठक में पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और बाकी बड़े अधिकारी भी शामिल हुए।

बैठक में पीएम ने ‘प्रोजेक्ट लॉयन’ की तारीफ की, जिसके लिए 2,927 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। ये प्रोजेक्ट एशियाई शेरों को बचाने और उनकी तादाद बढ़ाने के लिए है। उन्होंने बताया कि मई में शेरों की 16वीं गिनती होगी। साथ ही जूनागढ़ में नेशनल रेफरल सेंटर-वाइल्डलाइफ की नींव भी रखी गई, जो वन्यजीवों की सेहत और बीमारियों को देखने का बड़ा सेंटर बनेगा।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि बारदा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में शेरों के लिए खाने की अच्छी व्यवस्था और जंगल को बेहतर करने का काम होगा, क्योंकि वहाँ शेर अब अपने आप पहुँचने लगे हैं। उन्होंने नदी में रहने वाली डॉल्फिन पर एक किताब भी लॉन्च की। इसके अलावा, तमिलनाडु के कोयंबटूर में SACON यानी सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री खोलने का ऐलान किया। ये सेंटर इंसानों और जंगली जानवरों के बीच होने वाले झगड़ों को सुलझाने में मदद करेगा।

आँकड़ों के मुताबिक, गिर में अभी 674 शेर हैं और ये नंबर बताता है कि शेरों की देखभाल अच्छे से हो रही है। तेंदुओं की संख्या में 75% की बढ़ोतरी हुई है और दुनिया के 75% बाघ अब भारत में रहते हैं। भारत में गैंडों (राइनो) का शिकार भी लगभग बंद हो चुका है। इस दौरान पीएम मोदी ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ को और बड़ा करने की बात कही। अब चीतों को मध्य प्रदेश के गाँधीसागर सैंक्चुअरी और गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड में भी बसाया जाएगा। इसके साथ ही घड़ियाल और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसे जानवरों को बचाने के लिए नए प्रोग्राम शुरू होंगे। टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों की हिफाजत के लिए भी एक योजना बनी।

इस बैठक में प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलिफेंट और प्रोजेक्ट डॉल्फिन की भी बात हुई। देश में पहली बार नदी की डॉल्फिन गिनी गईं, जिसमें 6,327 डॉल्फिन मिलीं। ये गिनती 28 नदियों में 8,500 किलोमीटर तक चली। सबसे ज्यादा डॉल्फिन उत्तर प्रदेश में मिलीं, फिर बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में। भारत में 106 नेशनल पार्क, 573 वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, 115 कंजर्वेशन रिजर्व और 220 कम्युनिटी रिजर्व हैं। ये सब मिलकर देश की 5.32% जमीन को कवर करते हैं। 2024-25 के बजट में पर्यावरण मंत्रालय को 3,330.37 करोड़ रुपये दिए गए। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी का बजट भी दोगुना होकर 35 करोड़ रुपये हो गया।

मोदी मोदी ने कहा कि स्थानीय लोग और ईको-टूरिज्म वन्यजीवों को बचाने में बड़ी मदद कर सकते हैं। भारत में जंगल का इलाका 16,000 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। 2022 में बाघों की संख्या 3,167 हो गई, जो दुनिया के कुल बाघों की संख्या का 70% से ज्यादा है। प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुआ था, जब बाघों की संख्या सिर्फ 1,411 थी। अब ये बाघों की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। प्रोजेक्ट एलिफेंट से 2022 तक 29,964 जंगली हाथी हो गए।

पीएम ने जंगल की आग रोकने के लिए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया और BISAG-N को साथ काम करने को कहा। उन्होंने AI और मैपिंग का इस्तेमाल करने की सलाह दी। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए नेशनल एक्शन प्लान लॉन्च हुआ और भारतीय स्लॉथ बेयर को बचाने की भी बात हुई।

मोदी की अगुवाई में भारत का वन्यजीव संरक्षण दुनिया के लिए मिसाल बन रहा है। शेर, बाघ, चीता, हाथी, डॉल्फिन और राइनो जैसे जानवरों की संख्या बढ़ रही है। जंगल और जैव-विविधता को बचाने की ये कोशिशें आगे भी जारी रहेंगी। आने वाले सालों में नए प्रोजेक्ट और तकनीक से भारत और बेहतर करेगा।

जिस अमेरिका के भरोसे जंग में कूद गया यूक्रेन, अब वही निपटाने में जुटा: जेलेंस्की-ट्रंप फाइट के बाद हथियार-पैसा सब बंद, रूस के साथ युद्ध का अब क्या होगा अंजाम?

रूस से बीते तीन वर्षों से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के अड़ियल रवैये के चलते अब उनके देश की मदद रुक गई है। जेलेंस्की के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से बहस और झगड़ा करने के बाद यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद पर विराम लग गया है। जेलेंस्की लगातार ट्रम्प के दबाव के बाद भी युद्ध जारी रखना चाहते हैं। जेलेंस्की ने सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ही नहीं बल्कि अपने पुराने एक समर्थक सीनेटर से भी झगड़ा कर लिया है।

अमेरिका नहीं देगा अब सैन्य मदद

मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया है कि व्हाइट हाउस ने यूक्रेन को जाने वाली सारी सैन्य मदद पर रोक लगाई है। फॉक्स न्यूज को व्हाइट हाउस के एक कर्मचारी ने बताया, “राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि उनका पूरा ध्यान सीजफायर पर है। हमें चाहिए कि हमारे बाकी मित्र देश भी इसी के प्रति प्रतिबद्ध हों। हम अपनी सहायता रोक रहे हैं और इसकी समीक्षा भी ताकि शान्ति बहाली का रास्ता आसानी से निकल सके।” व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि मदद अस्थायी तौर पर ही रोकी गई है।

फरवरी, 2022 में युद्ध चालू होने के बाद अमेरिका लगातार यूक्रेन को मिसाइल, छोटे हथियार, टैंक, तोपें, गोला बारूद और बख्तरबंद गाड़ियाँ तक दे रहा था। लेकिन अब इस पर विराम लग गया है। 2022 के बाद से तीन साल के भीतर अमेरिका यूक्रेन को लगभग 175 बिलियन डॉलर (₹15 लाख करोड़ से अधिक) के सैन्य साजोसामान देने की मंजूरी दे चुका है। इसमें से 90% से अधिक मदद दी भी जा चुकी है। यह सारी मदद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के राष्ट्रपति रहते हुए दी गई थी।

बायडेन ने दिसम्बर, 2024 में लगभग ₹50 हजार करोड़ से अधिक की मदद का भी ऐलान किया था। यूक्रेन को लगातार अमेरिकी हथियार भेजे जा रहे थे। कई मौकों पर यूक्रेन की हार को अमेरिकी हथियारों ने ही रोका। जेलेंस्की के नेतृत्व वाला यूक्रेन 2022 में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दम पर ही युद्ध लड़ने गया था। इसमें भी यूरोपियन देशों ने उसके आर्थिक सहायता ज्यादा दी है। हथियार अमेरिका से ही आए हैं। लेकिन अब यह बंद हो गई है। इसका रूस से चल रहे युद्ध पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।

ट्रम्प से जेलेंस्की ने की थी खुले में लड़ाई

अमेरिका का यह मदद बंद करने का फैसला जेलेंस्की के व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वांस के साथ झगड़ा करने के बाद हुआ है। 28 फरवरी, 2025 को व्हाइट हाउस में यह झगड़ा मीडिया के सामने हुआ था। बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति वांस ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की प्रोपेगेंडा कर रहे हैं और कैमरा लाकर युद्ध दिखा रहे हैं।

वहीं जेलेंस्की ने कहा था कि रूस कल को अमेरिका पर भी हमला कर सकता है। ट्रम्प ने बैठक में उनसे स्पष्ट कर दिया था कि वह कोई भी डील करने की स्थिति में नहीं हैं। ट्रम्प ने बैठक में ही जेलेंस्की को कसके लताड़ लगाई थी। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि जेलेंस्की रूस के राष्ट्रपति पुतिन से इतनी घृणा करते हैं कि कोई डील करना मुश्किल है।

ट्रम्प ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की ने अमेरिका सम्मान नहीं किया है। उन्होंने कहा था कि जेलेंस्की अमेरिकी मदद का फायदा उठाना चाहते हैं। इस तू-तू मैं-मैं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था। इसके बाद से साफ़ हो गया था कि अमेरिका अब यूक्रेन को समर्थन नहीं देने वाला और जल्द शांति का पक्षधर है।

पुराने समर्थक सीनेटर से भी कर लिया झगड़ा

जेलेंस्की ने अपने अड़ियल रवैये के चलते सिर्फ ट्रम्प से ही लड़ाई नहीं की। उन्होंने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम से भी झगड़ा मोल ले लिया है। लिंडसे ग्राहम लगातार यूक्रेन के समर्थक रहे हैं। वह रूस के खिलाफ बोलते रहे हैं और जेलेंस्की की प्रशंसा करते रहे हैं। लेकिन उनकी हरकतों पर हाल ही में उन्होंने जेलेंस्की की आलोचना की।

इतनी सी बात पर जेलेंस्की उन पर भड़क गए। उन्होंने लिंडसे ग्राहम की आलोचना कर डाली। उन्होंने कहा, “मैं उन्हें यूक्रेन की नागरिकता दे सकता हूँ। वह हमारे देश का नागरिक बन जाएँगे, और फिर उनकी बात में दम होगा। और मैं उन्हें यूक्रेन के नागरिक के तौर पर उनसे जानना चाहूंगा कि राष्ट्रपति कौन बने।”

गौरतलब है कि 2015 के एक कानून के अनुसार यूक्रेन में जब तक युद्ध होगा तब तक देश में चुनाव नहीं हो सकते। इसी कानून का सहारा उठा कर जेलेंस्की लगातार राष्ट्रपति बने हुए हैं। उन पर राष्ट्रपति पद हथियाने का आरोप लग रहा है। यूक्रेन में चुनाव की माँग भी तेज हो रही है।

गाँव हिंदू बहुल, पर घर-खेत से लेकर मंदिर-शिवलिंग तक को वक्फ बोर्ड बता रहा अपनी ‘प्रापॅर्टी’: सरकारी जमीन पर भी दावा, मध्य प्रदेश के रायसेन में ग्रामीण हैरान

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में वक्फ बोर्ड की मनमानी ने एक बार फिर लोगों को हैरान कर दिया है। इस बार बोर्ड ने एक हिंदू बहुल गाँव माखनी पर अपना दावा ठोंक दिया है। इतना ही नहीं, गाँव में स्थित शिवलिंग तक को अपनी संपत्ति बता दिया। वक्फ बोर्ड ने गाँव वालों को नोटिस भेजकर कहा है कि वे जिस जमीन पर रह रहे हैं, वो उनकी है और इसे खाली करना होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वक्फ बोर्ड का कहना है कि माखनी गाँव ये जमीन कब्रिस्तान की है। ये अलग बात है कि जमीन पर मालिकाना हक को लेकर किसी तरह का कोई सबूत नहीं दिखाया गया। गाँव वालों के घर, खेत, चबूतरे और शिवलिंग तक को अपनी संपत्ति बताते हुए वक्फ ने 3 एकड़ जमीन पर भी कब्जे का दावा किया है। वक्फ बोर्ड ने लोगों से कहा है कि वो ये जमीन खाली करके जल्द से जल्द उस पर से हट जाएँ। ऐसे नोटिस ग्रामीणों को मिलने के बाद से लोग परेशान हैं।

हैरानी की बात ये है कि सरकारी रिकॉर्ड में ये जमीन सरकार की दर्ज है, फिर भी वक्फ इसे अपना बता रहा है।

वक्फ बोर्ड का दावा है कि ये गाँव कादर खान नाम के शख्स का था, जिसने जमीन उन्हें दान दी। मगर गाँव वालों का कहना है कि यहाँ कोई कादर खान कभी रहा ही नहीं। कई पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हिंदू परिवारों ने साफ कहा कि वे अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे और वक्फ की इस हरकत के खिलाफ लड़ेंगे। लोगों में गुस्सा है, क्योंकि उनके घर और आस्था के प्रतीक शिवलिंग पर भी दावा किया जा रहा है।

बता दें कि भारत सरकार वक्फ बोर्ड में सुधार के लिए वक्फ संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, लेकिन बोर्ड की मनमानियाँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं।