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दिल्ली: भारी बारिश से गिरी CM हाउस की छत, सुरक्षित हैं अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास का एक हिस्सा पिछले हफ्ते शहर में भारी बारिश के बाद ढह गया। यह घर सिविल लाइंस स्थित फ्लैग स्टाफ रोड पर स्थित है। हालाँकि, इस घटना में किसी को कोई चोट नहीं आई है और मुख्यमंत्री केजरीवाल सुरक्षित हैं।

इस घटना के बाद 80 साल पुरानी इस इमारत का एमसीडी (MCD) ने सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। इस छत की मरम्मत हुई थी।

एक अधिकारी के अनुसार, “कमरे का इस्तेमाल खुद सीएम द्वारा किया जाता है और पिछले महीनों में कई बैठकें आयोजित की गई हैं, खासकर महामारी के दौरान। शुक्र है कि घटना के समय कोई भी कमरे में नहीं था।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, केजरीवाल के घर का यह सबसे अहम हिस्सा है। उन्होंने घर के एक हिस्से को अपना कार्यालय बना रखा था, जहाँ पर कई महत्वपूर्ण बैठकें भी आयोजित की जाती रही हैं।

केजरीवाल के घर में जब छत पर मरम्मत की जा रही थी, तो बगल के शौचालय की छत भी ढह गई। इसके बाद शौचालय की दीवार में दरारें और ईंटें ढीली होने लगीं। अधिकारियों ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अब नुकसान और घर की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन कर रहे हैं, और एक रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही प्रस्तुत की जाएगी।

बताया जा रहा है कि जिस घर में अभी मुख्यमंत्री केजरीवाल रह रहे हैं, उसे 1942 मे बनवाया गया था और इसके किसी ना किसी हिस्से में मरम्मत का कार्य चलता ही रहता है। इससे पहले, पूर्व डिप्टी स्पीकर अमरीश सिंह गौतम को यह घर आवंटित किया गया था। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अपने कार्यकाल के दौरान मोतीलाल नेहरू मार्ग पर रहीं। केजरीवाल 1942 में बने इस घर में 2015 में अपने दूसरे कार्यकाल में चले गए थे।

‘राम मंदिर बन गया, कपिल सिब्बल कब करेंगे आत्महत्या’: रामलला के वकील रहे के पराशरण नहीं हैं ट्विटर पर

5 अगस्त 2020 को अयोध्या में भव्य राम मंदिर की नींव पड़ी। कई नाम ऐसे हैं जिनके कारण 500 साल चली यह लड़ाई कभी कमजोर नहीं पड़ी। इन नामों के बिना यह संघर्ष यात्रा अधूरी है। ऐसा ही एक नाम हैं 93 वर्षीय अधिवक्ता के पराशरण। उन्होंने राम जन्मभूमि की क़ानूनी लड़ाई लड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान की पैरवी की थी।

राम मंदिर भूमि पूजन की तारीख आते ही सोशल मीडिया उन नामों की चर्चा बड़े पैमाने पर हुई जिन्होंने रामजन्मभूमि पाने की लड़ाई में अहम योगदान दिया। पराशरण की भी काफी चर्चा हुई। उनकी एक तस्वीर खूब वायरल हुई जिसमें दावा किया गया था कि वह अपने घर में बैठ कर भूमि पूजन देख रहे हैं। लेकिन उनके नाम की चर्चा केवल इतने तक सीमित नहीं थी। पिछले कुछ दिनों से उनके नाम का (@KPrasaran) एक सक्रिय ट्विटर अकाउंट सामने आया है।     

इस ट्विटर अकाउंट पर पराशरण की तस्वीर लगी थी। इसकी वजह से कुछ नेटिजन्स को लगा कि यह उनका वास्तविक अकाउंट है। कुछ ही देर में उस एकाउंट के फॉलोवर्स बढ़ गए। इस एकाउंट से पहला ट्वीट राम मंदिर भूमि पूजन से ठीक एक दिन पहले 4 अगस्त को किया गया था।

इसके बाद 5 अगस्त को इस अकाउंट से दूसरा ट्वीट किया गया, जिसमें उन्होंने राम मंदिर का सपना पूरा होने की बात लिखी थी।  

इस अकाउंट से किए गए सबसे ताज़ा ट्वीट में कपिल सिब्बल का ज़िक्र है। ट्वीट में लिखा है, “कपिल सिब्बल कह रहे थे कि वह राम मंदिर बनने पर आत्महत्या कर लेंगे। राम मंदिर बन गया, कब करेंगे आत्महत्या?”

राम मंदिर का भूमि पूजन होने की खुशी में तमाम लोगों ने इस अकाउंट को फॉलो कर लिया। उन्हें ऐसा लगा कि यह के पराशरण का असली ट्विटर अकाउंट है। यह रिपोर्ट तैयार करने के दौरान इस ट्विटर अकाउंट के 3737 फॉलोवर्स थे।

ऑपइंडिया ने अधिवक्ताओं के उस समूह से संपर्क किया जो राम मंदिर की सुनवाई के दौरान के पराशरण के साथ थे। पराशरण के सहयोगी योगेश्वरन ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि यह ट्विटर एकाउंट फ़र्ज़ी हैं, क्योंकि वे अभी तक ट्विटर पर नहीं आए हैं।   

इसके अलावा के पराशरण के दो और सहयोगियों ने इस बात की पुष्टि की। सबसे पहले ट्वीट में जिस तरह की भाषा इस्तेमाल की गई थी उससे ही साफ़ था कि यह उनका आधिकारिक ट्विटर अकाउंट नहीं हो सकता है। इतना ही नहीं अकाउंट द्वारा कपिल सिब्बल पर किया गया ट्वीट भी फ़र्ज़ी निकला, क्योंकि कपिल सिब्बल ने कभी इस तरह का दावा ही नहीं किया था कि मंदिर निर्माण होने पर आत्महत्या कर लेंगे। कपिल सिब्बल के इस बयान का कोई आधिकारिक स्रोत तक नहीं मौजूद है।   

के पराशरण सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। इसके अलावा उनका पूरा न्यायिक करियर 6 दशक तक जारी रहा। वह साल 1983 से लेकर साल 1986 तक भारत के अटॉर्नी जनरल पद थे। वह 1976 में तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल भी रहे। उन्हें साल 2003 में पद्म भूषण और साल 2011 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। साल 2012 में राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया था।   

40 दिनों तक चली राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई के दौरान पराशरण ने अद्भुत ऊर्जा और इच्छा शक्ति का प्रदर्शन किया था। पराशरण सुबह 10:30 बजे से शुरू होने वाली सुनवाई में ठीक समय पर उपस्थित हो जाते थे। शाम 4 से 5 बजे तक चलने वाली सुनवाई में मौजूद रहते थे। पराशरण ने मामले से संबंधित हर ऐतिहासिक दलील का उल्लेख किया। उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि 433 साल पहले बाबर ने रामलला के जन्मस्थान पर मस्जिद बना कर गलती की थीऔर इतनी बड़ी गलती को सुधारने की ज़रूरत है।   

इसके अलावा पराशरण ने यह भी कहा कि मुस्लिम अयोध्या में किसी दूसरी जगह नमाज़ पढ़ सकते हैं। पूरी अयोध्या में 50 से 60 मस्जिद मौजूद हैं। लेकिन हिंदुओं के लिए श्रीराम का जन्मस्थान एक ही है, वह किसी भी सूरत में नहीं बदला जा सकता है। साल 2016 के बाद पराशरण ने सिर्फ 2 मामलों की पैरवी की। पहला सबरीमाला और दूसरा राम मंदिर। वह अक्सर इस बात का ज़िक्र करते थे कि यह उनकी अंतिम इच्छा है कि उनके जीते हुए इन मामलों की सुनवाई पूरी हो।  

ED के सामने पेश हुईं रिया चक्रवर्ती: मनी लॉन्ड्रिंग पर पूछताछ जारी, पिता-भाई के साथ CA भी तलब

सुशांत सिंह के मामले की जाँच में कई बड़े कदम उठाए जाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। सीबीआई और ईडी दोनों ने अपनी तरफ़ से मामले की जाँच शुरू कर दी है। ईडी ने रिया चक्रवर्ती से पूछताछ के लिए उन्हें समन भेजा था। लेकिन रिया ने सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई का हवाला देते हुए टालने की बात कही थी। जिसे ईडी ने अस्वीकार कर दिया है नतीजतन रिया चक्रवर्ती ईडी के सामने पूछताछ के लिए पेश हो रही हैं। रिया के पिता और भाई को भी तलब किया गया है।

वहीं इस बीच ईडी ने सुशांत की पूर्व बिजनस मैनेजर श्रुति मोदी को भी शुक्रवार को हाजिर होने के लिए कहा है। इसके अलावा सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी को भी 8 अगस्त को बुलाया गया है।

इस मामले में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें रिया चक्रवर्ती समेत उनके परिवार के 6 लोगों का नाम शामिल किया गया। इसके अलावा सीबीआई ने जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन कर दिया है। एसआईटी की इस टीम के मुखिया गुजरात कैडर के आईपीएस मनोज शशिधर होंगे। वहीं ईडी ने इस मामले में रिया चक्रवर्ती को 7 अगस्त के दिन यानी आज पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन रिया ने सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई का हवाला दिया था। इसके आधार पर रिया ने अपील की थी, उनका बयान आज नहीं दर्ज किया जाए। ईडी ने इस अपील को ठुकरा दिया था, जिसके चलते आज रिया पूछताछ में शामिल हो रही हैं। रिया चक्रवर्ती ईडी के दफ्तर पहुँच चुकी हैं। और उनसे पूछताछ जारी है।

ईडी ने रिया को व्हाट्सएप के ज़रिए समन भेजा था। उन्होंने इसका जवाब मेल करके दिया था। लेकिन ईडी ने रिया चक्रवर्ती की इस माँग को सिरे से खारिज कर दिया है। ईडी इस मामले की आर्थिक दृष्टिकोण से जाँच कर रहा है। सुशांत सिंह मामले में रिया पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया था।

सुशांत सिंह के पिता ने पटना में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ़ मामला दर्ज कराया था। मामले के स्थानान्तरण के लिए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। ख़बरों के मुताबिक़ रिया पिछली बार 1 अगस्त के दिन अपने से परिवार के साथ कुछ सामान लेकर बाहर जाती हुई थी नज़र आई थीं। इसकी जानकारी उनके इमारत के प्रबंधक ने दी थी। इसके पहले बुधवार के दिन रिया के सीए को भी समन भेजा जा चुका है लेकिन वह भारी बारिश का हवाला देते हुए पेश नहीं हुआ था। इसके अलावा ईडी पिछले कुछ समय में रिया से जुड़े कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है।   

इस मामले पर बिहार पुलिस ने भी अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जिसके बाद बिहार सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफ़नामा दायर किया था। बिहार पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह के रूपए हड़पने के लिए उनके संपर्क में आई थीं। इसके अलावा इन लोगों ने सुशांत सिंह को मानसिक रूप से बीमार बताना शुरू कर दिया।   

इतना ही नहीं बिहार पुलिस ने रिया चक्रवर्ती पर सुशांत सिंह को दवाओं का ओवरडोज़ देने का आरोप भी लगाया। बिहार सरकार की सिफ़ारिश के बाद सुशांत सिंह का मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। जिसके बाद सीबीआई ने 6 अगस्त के दिन रिया चक्रवर्ती समेत कुल 6 लोगों के खिलाफ़ मामला दर्ज किया था।    

राहुल गाँधी के बहनोई के करीबी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने की 14 जगहों पर छापेमारी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा के करीबी संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। गौरतलब है कि ईडी संजय भंडारी को भगोड़ा घोषित करवाने के लिए कोर्ट में अर्जी लगा चुकी है।

अधिकारियों ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 75 बेसिक ट्रेनर विमानों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विभिन्न शहरों में कई परिसरों पर छापे मारे हैं। उन्होंने कहा कि एजेंसी दिल्ली में एक दर्जन, गुड़गाँव और सूरत में एक-एक सहित कम से कम 14 परिसरों को कवर कर रही है।

क्या है मामला

संजय भंडारी के खिलाफ CBI ने जून 2019 में एयरफोर्स को 75 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट दिलाने के नाम पर कमीशन लेने के आरोप का मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि संजय भंडारी ने अपनी कंपनी Offset India Solutions Pvt Ltd के जरिए ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट देने वाली कंपनी Pilatus Aircrats Ltd के साथ मिलकर ये कॉन्ट्रैक्ट दिलवाया। बदले में Pilatus ने संजय भंडारी को 350 करोड़ रुपए दिए।

मामला प्रकाश में तब आया था जब उपरोक्त सौदे के लिए Pilatus Aircrats Ltd की निकटतम प्रतिद्वंद्वी रही दक्षिण कोरियाई कंपनी कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने पिलैटस को यह करार दिए जाने के खिलाफ तत्कालीन यूपीए सरकार से विरोध दर्ज कराया था। उनका दावा था कि पिलैटस की बोली के दस्तावेज़ अधूरे थे, और इसलिए उसे मिला हुआ करार रद्द होना चाहिए।

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने इस मामले में भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी से बात की थी और उनसे इस निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह किया था। लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला, और अंत में यह अनुबंध पिलैटस को ही दिया गया था।

गौरतलब है कि 2008 से 2012 की अवधि में, हथियार डीलर संजय भंडारी कॉन्ग्रेस सरकार के तहत सक्रिय रूप से अपने ‘बिज़नेस’ के लिए वापसी कर रहे थे और दसाँ (Dassault) के ऑफ-सेट पार्टनर बनने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास भी कर रहे थे। दसाँ ने संजय भंडारी के ऑफ-सेट पार्टनर बनने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

हालाँकि, भूमि सौदे को स्वीकार करते हुए, कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी को भूमि के विक्रेता एचएल पाहवा के साथ संबंधों पर चुप्पी ही साध रखी है। 

ग्लोबल सिटीजन बनने के साथ छात्र अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें: राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर PM मोदी का सम्बोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) सुबह 11 बजे से ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर कॉन्क्लेव’ में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उद्घाटन भाषण देते हुए अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत में नई शिक्षा नीति-2020 पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि शिक्षा नीति पब्लिक डोमेन पर डालने के बाद जो सवा दो लाख से भी ज्यादा सुझाव आए हैं, उस एक-एक सुझाव का विश्लेषण करने के बाद जो अमृत निकला है वो आज आपके सामने है।

नई शिक्षा नीति पर बोलते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि लंबे मंथन के बाद नई शिक्षा नीति बनाई गई, जिसे लागू करना बेहद आसान है। पीएम मोदी ने कहा कि आज हर जगह इसकी चर्चा हो रही है और किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का पूर्वग्रह है, या किसी एक ओर झुकी हुई है।

पीएम मोदी ने कहा – “हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपने राष्ट्रीय महत्व के साथ जोड़ते हुए, अपने राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुसार बदलाव करते हुए चलता है। जिसका मकसद ये होता है कि देश का एजुकेशन सिस्टम अपनी वर्तमान औऱ आने वाली पीढ़ियों को भविष्य के लिए तैयार रखें, ‘फ्यूचर रेडी’ करें।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्बोधन की प्रमुख बातें –

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21 वीं सदी के भारत की नींव रखेगी। हमने इस राष्ट्रीय नीति को यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया है कि यह भारतीयों को अधिक सशक्त और अवसरों के लिए आसानी से आकर्षक बनाता है।
  • बीते अनेक वर्षों से हमारे शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं हुए थे। परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में जिज्ञासा और कल्पना की नीति को प्रमोट करने के बजाए भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था।
  • आज गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि भी है। वो कहते थे – “उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती, बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।” निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बृहद लक्ष्य इसी से जुड़ा है।
  • हमारे छात्रों में, हमारे युवाओं में क्रिटिकल थिंकिंग और इनोवेटिव थिंकिंग विकसित कैसे हो सकती है, जब तक हमारी शिक्षा में ललक न हो, फिलोसोफी ऑफ़ एजुकेशन, शिक्षा का उद्देश्य न हो।
  • इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। School Curriculum के 10+2 स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 करिकुलम का ढाँचा देना, इसी दिशा में एक कदम है।
  • हर विद्यार्थी को ये अवसर मिलना ही चाहिए कि वो अपने Passion को फॉलो करे। वो अपनी सुविधा और ज़रूरत के हिसाब से किसी डिग्री या कोर्स को फॉलो कर सके और अगर उसका मन करे, तो वो छोड़ भी सके।
  • इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है। ये एक बहुत बड़ी वजह है, जिसकी वजह से जहाँ तक संभव हो, पाँचवी कक्षा तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है।
  • आज मुझे संतोष है कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाते समय, इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया। बदलते समय के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है।
  • हमें हमारे छात्रों को ग्लोबल सिटिजन तो बनाना है, इसका भी ध्यान रखना है कि वो इसके साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। जड़ से जग तक, मनुज से मानवता तक, अतीत से आधुनिकता तक, सभी बिंदुओं का समावेश करते हुए, इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तय किया गया है।
  • जब एक शिक्षक सीखता है तो देश अग्रणी बनता है। हम सबको एकसाथ संकल्पबद्ध होकर काम करना है।

एक योगी के तौर पर मस्जिद के शिलान्यास में कतई नहीं जाऊँगा, टोपी पहन लेना ‘सेक्युलरिज्म’ नहीं ढोंग है: योगी आदित्यनाथ

अयोध्या में बनने वाली मस्जिद को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा है कि वह बतौर योगी और बतौर हिंदू मस्जिद के शिलान्यास का हिस्सा नहीं बनेंगे। न तो वह ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे और न ही उन्हें ऐसी किसी कार्यक्रम से बुलावा आएगा।   

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एबीपी न्यूज़ के साथ साक्षात्कार के दौरान इस मुद्दे पर कई बातें कहीं। उन्होंने कहा कि बतौर राज्य के मुख्यमंत्री उन्हें किसी धर्म से परेशानी नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा “ऐसे नेता जो रोज़ा और इफ़्तार में शामिल होते हैं और टोपी लगा कर खुद को धर्म निरपेक्ष साबित करने में लगे रहते हैं। असल में यह धर्म निरपेक्षता नहीं है और जनता यह बात बहुत अच्छे से समझती है।” 

इसके बाद उन्होंने कहा “अगर आप मुझसे एक मुख्यमंत्री के रूप में पूछेंगे तो मुझे किसी मज़हब, संप्रदाय से परहेज नहीं है। अगर एक योगी के रूप में पूछेंगे तो कतई नहीं जाऊँगा। मैं इसलिए नहीं जाऊँगा क्योंकि क्योंकि मैं एक योगी हूँ। हिंदू धर्म का होने के नाते मेरे पास अपने तौर तरीकों से पूजा करने का अधिकार है। इसलिए न तो मुझे कोई मस्जिद के शिलान्यास में बुलाएगा। और न ही मैं इस तरह के किसी आयोजन का हिस्सा बनने वाला हूँ।”

इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जिस दिन मुझे इस तरह का कोई आमंत्रण आ गया उस दिन सेक्युलरिज्म खतरे में आ जाएगा। और मैं ऐसा बिलकुल नहीं चाहता कि धर्म निरपेक्षता पर किसी भी तरह का ख़तरा हो। इसलिए बेहतर यही होगा कि मैं शांति से अपने कर्तव्य का पालन करता रहूँ। जिससे प्रदेश के हर नागरिक को चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या समुदाय का क्यों न हो। उसे सरकार की तरफ से किसी भी तरह की निराशा न हो।” 

भूमि पूजन के कार्यक्रम के बाद सभी अथितियों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा था कि पाँच सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है। राम मंदिर भूमि पूजन से इतर योगी आदित्यनाथ ने न्यूज चैनल आज तक के साथ खास बातचीत में मस्जिद के शिलान्यास पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि वो मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे।

बता दें कि मीडिया चैनल ने सीएम योगी से सवाल किया था, “विरोधी कह रहे हैं कि आपने सभी धर्मों के लोगों को राम मंदिर के भूमि पूजन में बुलाया और सब आए। लेकिन आने वालों दिनों में जब अयोध्या में मस्जिद का निर्माण शुरू होगा, तो कहा जा रहा है कि कि सीएम योगी वहाँ नहीं जाएँगे।”  सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका जवाब देते हुए कहा, “मेरा जो काम है वो काम मैं करूँगा। मैं अपने कार्य को हमेशा कर्तव्य और धर्म मानकर चलता हूँ। मैं जानता हूँ कि मुझे कोई बुलाएगा नहीं इसलिए मैं जाऊँगा भी नहीं।”

मुंबई: फेसबुक लाइव में लोगों पर यकीन ना करने की सलाह देकर भोजपुरी अभिनेत्री ने कर ली आत्महत्या, धोखाधड़ी का लगाया आरोप

भोजपुरी अभिनेत्री अनुपमा पाठक मुंबई स्थित अपने घर पर फाँसी से लटकी पाई गई हैं। बताया जा रहा है कि शहर के दहिसर इलाके में 2 अगस्त को इस अभिनेत्री ने आत्महत्या कर ली थी। और 6 अगस्‍त को यह घटना खबर बनकर सामने आई। प्रारंभिक जाँच के आधार पर पुलिस ने 40 वर्षीय अभिनेत्री अनुपमा पाठक की मौत को आत्महत्या बताया है।

अनुपमा बिहार के पूर्णिया जिले से मुंबई चली गईं थीं, जहाँ उन्होंने भोजपुरी फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों में काम किया। यह कदम उठाने से पहले भोजपुरी अभिनेत्री 10 मिनट के लिए फेसबुक पर लाइव आईं थीं। इस वीडियो में, उन्होंने अपनी परिस्थितियाँ सामने रखते हुए लोगों से किसी पर भरोसा न करने के लिए भी कहा। अभिनेत्री ने फेसबुक लाइव वीडियो में बताया था कि उनके साथ धोखा हुआ है और वह अब किसी पर भरोसा नहीं कर सकती हैं।  

अनुपमा पाठक ने कहा, “यदि आप किसी को बताते हैं कि आप कुछ समस्याओं से गुज़र रहे हैं और आत्महत्या करना चाहते हैं, तो वह व्यक्ति, चाहे वह कितना भी अच्छा दोस्त क्यों न हो, वह अपने आपको तुरंत आपकी समस्याओं से दूर रखने के लिए कहेगा, ताकि आपकी मौत के बाद वो किसी तरह की मुसीबत में न पड़े। इसके अलावा, लोग आपका मजाक बनाएँगे और दूसरों के सामने आपका अपमान करेंगे। इसलिए कभी भी अपनी समस्याओं को किसी के साथ शेयर न करें और कभी भी किसी को अपना दोस्त न समझें।”

फेसबुक लाइव में अभिनेत्री ने कहा – “वो इंसान बनें, जिस पर हर कोई भरोसा कर सकता है, लेकिन कभी किसी पर भरोसा मत करो। मैंने अपने जीवन में यही सीखा है। लोग बहुत स्वार्थी हैं और दूसरों की परवाह नहीं करते हैं।”

रात के 12 बजे किए गए अपने आखिरी फेसबुक पोस्ट में अनुपमा पाठक ने लिखा, “अलविदा और शुभ रात्रि।”

अभिनेत्री के घर से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया हुआ है। इस नोट में उन्होंने आत्महत्या करने के कारणों में अपनी आर्थिक परेशानी का भी उल्लेख किया है। अभिनेत्री अनुपमा पाठक ने अपने सुसाइड नोट में एक शख्स मनीष झा के बारे में भी बताया है। अनुपमा पाठक ने आरोप लगाया कि उस आदमी ने मई में उसका दोपहिया वाहन ले लिया और उसे बाद में वापस करने से मना कर दिया।

अनुपमा के फ्लैट से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने ये कदम उठाने के दो कारण बताए हैं। इस सुसाइड नोट में लिखा, “मैंने एक दोस्त की रिक्वेस्ट पर मलाड की विजडम प्रोड्यूसर कंपनी में 10 हजार रुपए निवेश किए थे। कंपनी को मेरे पैसे दिसंबर 2019 में वापस करने थे। कंपनी मेरा पैसा वापस करने में आनाकानी कर रही है।”

लगातार सामने आई हैं मनोरंजन उद्योग में आत्महत्या की घटनाएँ

अनुपमा पाठक की मौत ऐसे समय में हुई है, जब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के सदमे से उबर रहा है। इससे पहले 9 जून को, राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन ऊँची इमारत से कूद गईं। एक महीने पहले, 15 मई को, टीवी अभिनेता मनमीत ग्रेवाल की उनके मुंबई स्थित घर पर आत्महत्या से मृत्यु हो गई थी।

44 वर्षीय टेलीविजन अभिनेता समीर शर्मा, जो कि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ और ‘लेफ्ट राइट लेफ्ट’ में अपनी भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं, बुधवार को मलाड में अपने घर पर मृत पाए गए।

चीन पर अमेरिका की डिजिटल स्ट्राइक: ट्रम्प ने दी TikTok और वी-चैट पर पाबंदी के आदेश को मंज़ूरी

अमेरिका और चीन के बीच जारी खींचतान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप ने चीन की एप्लीकेशन टिक टॉक और वी चैट के मालिकों से किसी भी तरह का लेन-देन करने पर पाबंदी लगा दी है। कुछ ही दिन पहले ख़बर आ रही थी कि अमेरिकी टेक कंपनी टिक टॉक को खरीद सकती हैं। लेकिन अब ऐसा न होने की सूरत में अमेरिका ने टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने के लिए 15 सितंबर की सीमा तक तय कर दी है।    

अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इस आदेश पर मुहर लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरूवार के दिन टिकटॉक और वी चैट पर पाबंदी लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। आदेश में यह बेहद साफ़ तौर लिखा है कि दोनों ही एप्लीकेशन को अमेरिका में 45 दिन के भीतर बंद कर दिया जाए। हाल ही में अमेरिकी सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए आदेश जारी किया था।  जिसके मुताबिक़ वह इस एप्लीकेशन का उपयोग नहीं कर सकते थे।   

एप्लीकेशन के आदेश पर आधिकारिक रूप से मुहर लगाने के बाद ट्रंप ने कहा कि यह पाबंदी बेहद ज़रूरी थी। टिकटॉक जैसे एप्लीकेशंस का भरोसा नहीं किया जा सकता है। यह एप्लीकेशन जिस तरह देश का डाटा (जानकारी) चुराते हैं उससे देश की आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव पड़ता है। ट्रंप ने इस विषय पर बयान जारी करते हुए कई अहम बातें कहीं। ट्रंप ने कहा, “चीन के यह एप्लीकेशन अमेरिकी लोगों से संबंधित दो तरह की जानकारी चुराते हैं पहली निजी और दूसरी स्वामित्व से जुड़ी। इसके अलावा यह जानकारी चीन की कम्युनिष्ट पार्टी तक पहुँचाई जाती है।” 

इसके बाद ट्रंप ने कहा, “इसकी वजह से चीन की सरकार को अमेरिका के संघीय कर्मचारियों और संगठित – असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की जानकारी मिल जाती है। वह इस तरह की जानकारियों को ट्रैक कर सकते हैं। चीन की सत्ताधारी पार्टी इस तरह की निजी जानकारियों के आधार पर ब्लैकमेल करने का दस्तावेज़ तैयार कर सकती है। ऐसी जानकारियों का इस्तेमाल कॉर्पोरेट स्तर पर जासूसी के लिए भी किया जा सकता है।” 

हालाँकि, इस कार्रवाई पर फिलहाल टिकटॉक और वी चैट की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इसके ठीक पहले अमेरिकी व‍िदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बुधवार को कहा था कि वह अमेरिकी कार्रवाई को चीनी तकनीकी से निजी ऐप तक बढ़ा रहे हैं। उन्‍होंने इस मामले में टिकटॉक और वी चैट का ज़िक्र किया था। भारत में पहले ही सभी तरह के संदिग्‍ध ऐप पर प्रतिबंधित लगाया जा चुका है। 

हाल ही ऐसी ख़बरें आई थीं जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ बढ़ते तनाव और जासूसी के आरोपों के बीच इसके संकेत दिए थे। इधर बाइटडांस (ByteDance) और माइक्रोसॉफ्ट के बीच सौदे को लेकर बातचीत चलने की बात हो रही थी। बाइटडांस टिकटॉक की पैरंट कंपनी है।

रिया पर पैसे के लिए दवाओं के ओवरडोज़ से सुशांत को ‘बीमार’ करने का आरोप: बिहार पुलिस ने SC में दायर की एफिडेविट

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत के मामले में बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में केस सीबीआई को ट्रांसफर किए जाने के कारणों पर हलफनामा दायर किया है, जिसमें एक खुलासा किया गया है कि एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह राजपूत को अपने घर ले जाकर उन्हें मानसिक रूप से बीमार करने की कोशिश किया करती थी। वह पिछले कई दिनों से लगातार सुशांत को दवाईयों की ओवरडोज दे रही थी।

इस हलफनामे (एफिडेविट) में बिहार पुलिस ने रिया चक्रवर्ती को लेकर एक और खुलासा करते हुए कहा है कि रिया और उसके घरवाले सुशांत के जीवन में पैसों के लालच से आए थे और रिया चक्रवर्ती उन्हें अपने घर ले जाकर दवाईयों की ओवरडोज दे रही थीं।

बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधीक्षक ने सुप्रीम कोर्ट को दिए इस हलफनामे में बताया है कि रिया चक्रवर्ती, सुशांत को अपने घर ले गई थीं और वहीं उन्होंने सुशांत को दवाईयों के ओवरडोज देने शुरू कर दिए थे। बिहार पुलिस ने इन सबका सुशांत के पैसे हड़पने का एकमात्र मकसद बताया। दरअसल, ये आरोप असल में सुशांत के पिता केके सिंह ने रिया पर लगाए थे। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा था कि रिया, सुशांत से झगड़ा कर उनका सारा सामान ले गई थीं।

सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या के मामले में सीबीआई ने रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की थी। बिहार पुलिस ने ये भी कहा है कि मुंबई पुलिस से किसी प्रकार की मदद ना मिलने के बावजूद उन्हें इस केस में कई चीजें मिली हैं, जिन पर जाँच की जा सकती है।

गौरतलब है कि सुशांत राजपूत की मौत मामले में जाँच करने मुंबई गई पटना पुलिस की टीम बीएमसी को चकमा देकर बृहस्पतिवार (अगस्त 06, 2020) को पटना पहुँच गई थी। आज सुबह मुंबई बिहार के आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी को क्वारंटाइन से छोड़ दिया गया है। विनय तिवारी को उस समय क्वारंटाइन किया गया, जब वो सुशांत केस को लेकर मुंबई में जाँच कर रही बिहार पुलिस टीम का नेतृत्व करने के लिए पहुँचे थे।

बीएमसी ने उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया, जिसके बाद इस मामले में काफी हंगामा देखने को मिला था। बाद में बिहार सरकार ने सुशांत केस को लेकर सीबीआई जाँच की सिफारिश की, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया।

रिया चक्रवर्ती को आज ईडी के सामने पेश होना था। लेकिन रिया ने अनुरोध किया है कि उनके बयान की रिकॉर्डिंग को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तक के लिए टाल दिया जाए। लेकिन ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपने बयान की रिकॉर्डिंग को स्थगित करने के लिए रिया चक्रवर्ती की याचिका को खारिज कर दिया है।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट स्थापित: 14 राज्यों के 80 संत-महामंडलेश्वर जुड़े, आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए शुरू होगा हस्ताक्षर अभियान

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के साथ ही अब मथुरा में 14 राज्यों के 80 संतों के साथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास की स्थापना की गई है। अयोध्या के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए आंदोलन की रणनीति पर चर्चा जोरों पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रस्ट के प्रमुख आचार्य देवमुरारी बापू ने कहा, “हमने 23 जुलाई को ‘हरियाली तीज’ के अवसर पर पंजीकरण कराया और वृंदावन से 11 संत आए, जो ट्रस्ट का हिस्सा हैं।”

आचार्य ने आगे कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की आजादी के लिए अन्य संतों और साधुओं को जोड़ने के लिए जल्द ही एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हस्ताक्षर अभियान के बाद, हम इस मुद्दे पर एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। हमने फरवरी में अभियान शुरू किया था, लेकिन हम लॉकडाउन के कारण आगे नहीं बढ़े।”

ट्रस्ट में वृंदावन के 11 पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा 14 राज्यों के 80 संत, महामंडलेश्वर को जोड़ा गया है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है, जिसमें निर्णय लिया गया है कि ट्रस्ट में वृंदावन के संत और महंतों को जोड़ने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। 

मथुरा में शाही ईदगाह है विवाद का विषय

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में मुख्य विवाद का विषय शाही ईदगाह है, जो मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के निकट स्थित है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास पहले से ही मस्जिद के बगल में साढ़े चार एकड़ भूमि पर दावा कर रहा है और चाहता है कि इसे और मंदिर के अधिकारियों द्वारा आयोजित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए ‘रंग मंच’ के रूप में इस्तेमाल किया जाए।

अयोध्या के बाद अब मथुरा और काशी

वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद से विश्व हिंदू परिषद (VHP) दावा करती रही है कि मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर को ‘स्वतंत्र’ करना उसके एजेंडे में है।

उल्लेखनीय है कि मथुरा के शाही ईदगाह को ‘प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट’ के तहत संवैधानिक प्रोटेक्शन मिलता है। दिसंबर 6, 1992 को बाबरी विध्वंस के बाद धीरे-धीरे ‘अयोध्या तो एक झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी है’ के नारे राजनीतिक परिदृश्यों के चलते काशी और मथुरा ठंडे बस्ते में चले गए थे।

लेकिन बहुमत के साथ सत्ता में आते ही अयोध्या श्रीराम मंदिर पर केंद्र सरकार ने तत्परता से काम किया है। हालाँकि, इस बारे में अभी बिल्कुल साफ-साफ कहना जल्दबाज़ी होगी कि बीजेपी, काशी और मथुरा के मुद्दों को अयोध्या की तरह प्राथमिकता देगी या नहीं।

विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि मथुरा में ठीक मस्जिद के स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और वह मस्जिद नहीं बल्कि हमारी ज़मीन है। विहिप ने कहा था – “वह मस्जिद है ही नहीं, वह हमारी ज़मीन है।” इस मंदिर परिसर के ठीक बाहर मथुरा का सबसे पुराना मंदिर है, जिसका नाम है केशव देव जी महाराज मंदिर!

ऐतिहासिक तथ्यों से पता चलता है कि जनवरी 1670 में रमजान के महीने में औरंगजेब ने मथुरा के एक बहुत प्रसिद्ध मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था। इस मंदिर का नाम केशव राय मंदिर था, जिसे ओरछा के राजा बीर सिंह बुंदेला ने उस दौर में 33 लाख रुपए में बनवाया था।

इतिहासकार डॉ वासुदेव शरण अग्रवाल ने कटरा केशवदेव को ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि माना है। विभिन्न अध्‍ययनों और साक्ष्यों के आधार पर मथुरा के राजनीतिक संग्रहालय के दूसरे कृष्णदत्त वाजपेयी ने भी स्वीकारा कि कटरा केशवदेव ही कृष्ण की असली जन्मभूमि है।

इति‍हासकारों के अनुसार, सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा बनवाए गए इस भव्य मंदिर पर महमूद गजनवी ने सन 1017 में आक्रमण कर इसे लूटने के बाद तोड़ दिया था।