भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण की शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को भूमिपूजन के साथ ही हो जाएगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में कभी राम के अस्तित्व को नकारने वाली कॉन्ग्रेस भी अब खुद को रामभक्त दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। जहाँ एक तरफ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ मंदिर निर्माण का स्वागत कर रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में माता कौशल्या का मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू है।
छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में ही राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या का मंदिर है, जो राम की माता भी हैं। इस हिसाब से इसे राम का ननिहाल भी माना जाता है। अगस्त के तीसरे हफ्ते के बाद से ही चंदखुरी में माता कौशल्या के मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ-साथ सौंदर्यीकरण का कार्य भी शुरू हो जाएगा। आसपास के क्षेत्रों में विकास योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भुवेश बघेल ने बुधवार को अपनी पत्नी के साथ जाकर वहाँ के तैयारियों का जायजा लिया।
प्राचीन मंदिर के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए इसका पुनर्निर्माण करें और पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए हो रही तैयारियों का जायजा खुद मुख्यमंत्री ने लिया। इसके लिए भूमिपूजन पहले ही किया जा चुका है और अब जब अयोध्या में भूमिपूजन के लिए सरगर्मियाँ तेज हैं, ऐसे समय में चंदखुरी प्रोजेक्ट को गतिशील बनाने का निर्णय लिया गया है। भगवान राम ने वनवास के दौरान भी इस इलाक़े में अच्छा-खासा समय व्यतीत किया था।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि ‘राम वन गमन मार्ग’ योजना के अंतर्गत पूरे राज्य में भगवान राम की वनवास यात्रा के मार्गों को चिह्नित कर उन्हें एक बड़े पर्यटन स्थल नेटवर्क में तब्दील किया जाएगा। इसी क्रम में 15 करोड़ रुपए की लागत से छत्तीसगढ़ स्थित चंदखुरी में माता कौशल्या मंदिर व आसपास के क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को तालाब में पुल और गोलाकार मार्ग बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा:
प्रभु श्री राम के ननिहाल चंदखुरी का सौंदर्य अब पौराणिक कथाओं के नगरों जैसा ही आकर्षक होगा। राजधानी रायपुर के निकट स्थित इस गाँव के प्राचीन कौशल्या मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए, पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। हमारी महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना में शामिल चंदखुरी में यह पूरा कार्य 15 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। योजना के मुताबिक, चंदखुरी में मंदिर के सौंदर्यीकरण तथा परिसर विकास का कार्य दो चरणों में कार्य पूरा किया जाएगा। नागरिक सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। बीते 22 दिसंबर को चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए भूमि-पूजन किया गया था।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि चंदखुरी में शौचालयों और धर्मशालाओं की पर्याप्त संख्या में व्यवस्था की जाए। वहाँ ग्रामीणों ने एक राष्ट्रीय बैंक का ब्रांच खोलने की भी माँग की है। साथ ही मंदिर के पास ही एक बाईपास रोड के निर्माण की भी अनुमति दे दी गई है। बता दें कि रामायण काल में छत्तीसगढ़ को दक्षिण कौशल के रूप में जाना जाता था और ये दण्डकारण्य का एक भाग था।
त्रेता युग में भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में 4 महीने बीता कर वहाँ से लंका के लिए प्रस्थान किया था। उन्होंने हरचौका सीतामढ़ी के माध्यम से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया थे। वो गवाई नदी में कोरिया जिले फिर उन्होंने सुकमा स्थित रामराम पहुँचने से पहले 75 जगहों पर डेरा डाला था। इनमें से 9 जगहों को ‘राम वेब गमन पर्यटन परिपथ’ के रूप में चिह्नित कर पहले फेज में पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।
हमारी महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना में शामिल चंदखुरी में यह पूरा कार्य 15 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा।
योजना के मुताबिक चंदखुरी में मंदिर के सौंदर्यीकरण तथा परिसर विकास का कार्य दो चरणों में कार्य पूरा किया जाएगा। pic.twitter.com/66yO1qb5Jt
इनमें हरचौकी सीतामढ़ी (कोरिया), रामगढ़ (अंबिकापुर), शिवरीनारायण (जांजगीर-चंपा), तुरतुरिया (बलोदा बाजार), चंदखुरी (रायपुर) राजिम (गरीबन्द), सिहावा-सप्तर्षि आश्रम (धमतारी), जगदलपुर (बस्तर) और रामराम (सुकमा) शामिल है। इन 9 जगहों को विकसित करने के लिए 134.45 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट कॉस्ट रखा गया है। इस वर्ष के बजट में इसके लिए 10 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 5 करोड़ रुपए पिछले बजट में जारी किया गया था।
जहाँ तक चंदखुरी की बात है, वहाँ मंदिर के पास स्थित झील के चारों तरफ परिक्रमा के लिए रास्ता भी तैयार किया जाएगा। इस पर एक हाईटेक ब्रिज भी बनेगा। झील के सामने पार्किंग स्थल बनेगा और लाइट-साउंड शो की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही एक फ़ूड जॉइंट भी बनेगा। मंदिर परिसर में व उसके आसपास विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे भी लगाए जाएँगे। भूपेश बघेल पहले भी इस स्थल का दौरा करते रहे हैं।
चंदखुरी में भगवान राम के प्रति लोगों में आस्था का आलम ये है कि हर वर्ष दीपावली के मौके पर लोग पहले कौशल्या माता के मंदिर में दीपक जलाते हैं, उसके बाद ही अपने-अपने घरों में रोशनी करते हैं। ऐसे में सीएम भूपेश बघेल द्वारा वहाँ मंदिर बनवा कर और उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को अयोध्या में मोदी सरकार द्वारा राम मंदिर के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रत्युत्तर के रूप में भी देखा जा रहा है।
इधर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे। इस दिन मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। कमलनाथ ने राम मंदिर के भव्य निर्माण का स्वागत किया था। कहा था कि मंदिर निर्माण हर भारतीय की सहमति से हो रहा है और यह केवल भारत में ही संभव है।
बरखा दत्त ने 1 अगस्त के दिन सुशांत सिंह राजपूत की तथाकथित थेरेपिस्ट सुसैन वॉकर मोफत के साक्षात्कार का एक वीडियो साझा किया था। जिस पर नेटिज़न्स ने गंभीर सवाल खड़े किए। वॉकर जो खुद एक मनोवैज्ञानिक, साइकोथेरेपिस्ट और हिपनोथेरेपिस्ट हैं। उन्होंने ऐसा दावा किया था कि सुशांत बाईपोलर हैं। जिसके बाद उन पर सुशांत सिंह से जुड़ी इस तरह की जानकारी साझा करने के लिए काफी सवाल उठाए गए थे।
अपने बयान में उनका कहना था कि यह उनकी ज़िम्मेदारी थी कि वह सार्वजनिक रूप से सामने आएँ। इसके अलावा उनका यह भी कहना था कि रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह की भावनात्मक रूप से मदद ही करती थीं। फिलहाल सुशांत सिंह की मौत के मामले में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ़ जाँच जारी है। ख़बरों के मुताबिक़ फिलहाल रिया चक्रवर्ती का कोई अता-पता नहीं है।
Sushant Singh Rajput’s Therapist Susan Walker reached out to @themojo_in & broke her silence. Says Media’s irresponsible coverage on Mental Health dismayed her & made going public her “duty”. Says Sushant “suffered from Bipolar Disorder” & “Rhea gave him courage to seek help” pic.twitter.com/R4wITRsPcB
साक्षात्कार में बरखा दत्त से बात करते हुए वॉकर ने अपने बयान में कई बातें कहीं। उन्होंने कहा गलत जानकारियों की आड़ में सोशल मीडिया पर कई तरह के झूठ और षड्यंत्र फैलाए जा रहे हैं। मैंने यह फैसला किया है कि इस मामले में बयान दर्ज कराना मेरी ज़िम्मेदारी है। मैं बतौर मनोवैज्ञानिक और फिजियोथेरेपिस्ट सुशांत सिंह और रिया चक्रवर्ती से दिसंबर और नवंबर 2019 में कई बार मिली थी।
इसके बाद जून में रिया से इस बारे में बात भी की थी। इसके बाद वॉकर ने मानसिक बीमारी के इर्द-गिर्द अपनी बात जारी रखी। फिर उन्होंने कहा सुशांत को बाईपोलर डिसऑर्डर था जो कि एक गंभीर मानसिक बीमारी है। यह एक व्यक्ति के लिए घातक हो सकता है।
सुसैन वॉकर का मोजो को बयान
फिर वॉकर ने मानसिक बीमारी की बात जारी रखते हुए कई बातें बताई। उन्होंने कहा ऐसे में पेशेवर मनौवैज्ञानिक के लिए भी मरीज़ और उसके घरवालों की मदद करना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसी मानसिक बीमारी कैंसर या डायबटीज़ से कम नहीं है। इससे कोई भी व्यक्ति प्रभावित हो सकता है भले वह किसी भी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि का क्यों न हो। बरखा दत्त ने खुद इस बात की जानकारी दी कि वॉकर ने अपना बयान दर्ज कराने के लिए खुद उनके मीडिया संस्थान मोजो से संपर्क किया था।
इसके बाद वॉकर ने कहा ऐसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों और उनके परिवार के लिए बहुत ज़रूरी है कि वह भेदभाव से बचे रहें। जिससे उन्हें सही उपचार मिलता रहे और लोग उन्हें स्वीकार करें। मानसिक बीमारी होना कोई शर्म की बात नहीं है। क्या किसी को कैंसर होने पर शर्मिंदा होना चाहिए? मानसिक बीमारी का भी इलाज संभव है।
बल्कि मानसिक बीमारियों का असर इतना भयावह होता है कि लोग इसके चलते आत्महत्या तक कर लेते हैं। ऐसी मानसिक पीड़ा का सीधा असर लोगों के दिमाग और उनकी भावनाओं पर पड़ता है।” फिर वॉकर ने यह दावा किया कि रिया पूरी तरह निर्दोष हैं। बल्कि रिया ने सुशांत के मुश्किल वक्त में उनका साथ निभाया है। यह रिया के लिए (सुशांत की) मानसिक बीमारी का सामना करना आसान नहीं था। इसके बदले में उसे जिस तरह की नफ़रत का सामना करना पड़ रहा है वह हैरान कर देने वाला है।
बाईपोलर डिसऑर्डर जिसे manic-depressive illness या manic depression भी कहते हैं। इसके असर के चलते लोगों का मन बहुत जल्दी बदलता है। उनकी ऊर्जा, दिन भर की गतिविधियाँ और ध्यान लगाने की क्षमता भी काफी हद तक प्रभावित होती है। ऐसे तो इस मानसिक बीमारी के लिए कोई तय उपचार या दवाई नहीं है। लेकिन मरीज़ को योग्य मनोवैज्ञानिक के संपर्क में रहने का सुझाव ज़रूर दिया जाता है। मनोवैज्ञानिक (टॉक थेरेपिस्ट) मरीज़ की मदद करते हैं अगर उसमें कोई लक्षण मौजूद होते हैं।
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नेटिज़न्स का कहना था कि थेरेपिस्ट जिन्होंने सुशांत को अपना मरीज़ बताया है। उनकी तरफ से ऐसा बयान नैतिक और वैधानिक रूप से सही नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की धारा 23 (1) के मुताबिक़ मानसिक रूप से अ-स्वस्थ्य व्यक्ति के पास अधिकार होता है। वह अपने मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल और उसके उपचार को गोपनीय बनाए रखे। नियम यह भी कहता है कि स्वास्थ्य कर्मियों की (मनोवैज्ञानिक भी) ज़िम्मेदारी होती है कि वह उपचार के दौरान मिली जानकारी को सार्वजनिक होने से बचाएँ।
इसके नियम के अगले हिस्से की धारा 24 (1) के मुताबिक़ मरीज़ से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी उसकी तस्वीर या कोई तथ्य मीडिया में नहीं लाया जा सकता है। कुछ मामलों में ऐसा किया जा सकता है जिनमें हिंसा की संभावना हो या अदालत से जुड़ा मामला हो। लेकिन सुशांत सिंह के मामले में इतने अहम नियमों की अनदेखी की गई है। ऐसा किसी और ने नहीं बल्कि डॉ. सौमित्रा पथारे (निदेशक, मेंटल हेल्थ लॉ एंड पॉलिसी) और डॉ. हरीश शेट्टी (मनोवैज्ञानिक, मुंबई) ने बरखा दत्त का जवाब देते हुए बताया।
Susan appeared on a Youtube channel and said that Sushant was suffering from mental illnesses. Of course, a Psychologist can diagnose mental illnesses. But the case MUST be referred to a doctor (Psychiatrist) who HAS to be an MD (Doctor of Medicine) for final diagnosis.
नेटिज़न्स ने सिर्फ बरखा दत्त की आलोचना ही नहीं की बल्कि प्रशासन से सवाल भी किया कि कैसे सुसैन वॉकर सुशांत सिंह का उपचार कर रही थीं। वॉकर की लिंक्डीन प्रोफाइल और मोजो द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ वह लंदन से क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमएससी हैं। और एक मनोवैज्ञानिक बाईपोलर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति का इलाज नहीं कर सकता है। विवाद बढ़ने के बाद वॉकर ने अपनी लिंक्डीन प्रोफाइल सुरक्षित कर ली।
Ms Susan Walker Moffat said on record that Sushant Singh Rajput was suffering from Bipolar Disorder. I want to place on record that she’s not a Psychiatrist. She doesn’t have any medical degree. She is a Counsellor. She has done MSc in Psychology from London University. pic.twitter.com/OLvkngptGq
इसके अलावा नेटिज़न्स ने वॉकर की मान्यता रद्द करने की माँग भी उठाई।
Sushant Singh Rajput’s Therapist Susan Walker reached out to @themojo_in & broke her silence. Says Media’s irresponsible coverage on Mental Health dismayed her & made going public her “duty”. Says Sushant “suffered from Bipolar Disorder” & “Rhea gave him courage to seek help” pic.twitter.com/R4wITRsPcB
बरखा दत्त ने सुशांत सिंह की थेरेपिस्ट के इस बयान से ठीक एक दिन पहले एक ट्वीट किया था। ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि सुशांत सिंह के मामले में जिस तरह निजी जानकारी साझा की जा रही है। जिस तरह उनकी जिंदगी से संबंधित मुद्दों पर बात हो रही है उस पर उन्हें दुःख है। वह इस माध्यम का हिस्सा बन कर निराश हैं।
बरखा दत्त का ट्वीट
फिलहाल बिहार पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है और वह मुंबई में ही मौजूद है। बिहार पुलिस ने रिया चक्रवर्ती के खिलाफ़ मामला भी दर्ज कर लिया है। इसके अलावा बिहार पुलिस ने मुंबई पुलिस पर जाँच में सहयोग न करने का आरोप लगाया है।
केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया है कि भारत में मोबाइल फोन्स के उत्पादन में बड़ी वृद्धि होने वाली है। सैमसंग और एप्पल सहित 22 बड़ी कंपनियाँ अगले 5 साल में 11 लाख करोड़ रुपए के मोबाइल फोन्स का उत्पादन करेंगी। इनमें विदेशी के साथ-साथ भारतीय कंपनियाँ भी शामिल हैं। सरकार ने इसके लिए 41,000 करोड़ रुपए का प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI: production-linked incentive) की व्यवस्था की है।
सबसे बड़ी बात ये है कि मोबाइल फोन्स कंपनियों के सक्रियता बढ़ाने और सरकारी प्रयासों के बाद देश में 12 लाख रोजगार सिर्फ़ इसी सेक्टर में पैदा होने वाले हैं। इनमें से 3 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के मौके हैं जबकि 9 लाख अप्रत्यक्ष रूप से होंगे। मोबाइल फोन्स के मामले में वैल्यू अडिशन बढ़ कर 15-20% की मौजूद स्थिति से छलाँग लगा कर सीधा 35-40% पर चल जाएगा। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्टस के मामले मे ये आँकड़ा 45-50% होगा।
भारत 7 लाख करोड़ रुपए के मोबाइल फोन्स का निर्यात भी करेगा। इसके लिए जिन भी कंपनियों ने अप्लाई किया है, उन्हें भारत सरकार की तरफ से केन्द्रीय टेलीकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने धन्यवाद दिया। ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मि और ऑस्ट्रिया सहित कई देशों के 22 मोबाइल फोन्स कंपनियों ने PLI स्कीम के तहत आने का फैसला लिया है। विदेशी कंपनियों में Samsung, Foxconn Hon Hai, Rising Star, Wistron और Pegatron शामिल हैं।
एप्पल और सैमसंग समेत दुनिया के बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं ने भारत में उत्पादन के लिए निवेश किया। pic.twitter.com/aZx7O2Q6L2
इसके तहत शर्त ये थी कि ये विदेशी कंपनियाँ 15,000 या उससे अधिक के मूल्य के मोबाइल फोन्स का उत्पादन करेगी। वहीं भारतीय कंपनियों के लिए ऐसा कोई भी प्राइस लिमिट नहीं रखा गया है। दुनिया भर में फिलहाल एप्पल 37% और सैमसंग 22% सेल्स की हिस्सेदारी रखता है। भारत सरकार की इच्छा है कि इन कंपनियों के उत्पादन भारत में बढ़े, जिससे यहाँ रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उक्त प्रोपॉजल के बाद ये कंपनियाँ भारत में हजारों करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इनमें चीन की एक भी कंपनी शामिल नहीं है। हालाँकि, उन सभी कंपनियों को भारत की सिक्योरिटी क्लियरेन्स के नियमों का पालन करना पड़ेगा। 2025 तक भारत में मोबाइल फोन्स की माँग कई गुना बढ़ने वाली है, ऐसे में आत्मनिर्भर भारत के तहत पहले से ही देश को पर्डक्शन हब बनाने की तैयारी चल रही है।
दिल्ली के बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित मौजपुर का मोहनपुरी इलाका, जहाँ हिन्दुओं की दो-तीन गलियाँ मुस्लिमों की घनी बस्तियों से घिरी हैं। वहीं एक लड़की को खुलेआम कोई रेप करने की धमकी दे, उसे गन्दी गलियाँ दे और मुस्लिम परिवार अपने आरोपित लड़के को घर में छिपाकर यह कहे, “लड़का है, गरम खून है, निकल जाता है।”
क्या सोच रहे हैं आप कौन पीड़िता है और कौन आरोपित? क्या नारी सुरक्षा की बात फिर से याद आ गई? किससे, कौन और कहाँ-कहाँ लड़े? पीड़िता न्याय के लिए जिसके पास उम्मीद में जाए अगर वही उस समुदाय विशेष के भीड़ के दबाव में आकर पीड़ित लड़की को ही प्रताड़ित करने लगे तो!
कभी पीड़िता को ही जेल में डाल देने की धमकी, तो कभी घंटों थाने में बैठाने के बाद उल्टा पीड़िता पर ही दबाव बनाए कि समझौता कर लो आगे से वो लड़का ऐसा नहीं कहेगा या कुछ नहीं करेगा तो ऐसे में लड़की न्याय के लिए कहाँ जाए, वो भी तब जब परिवार को वही अकेली सम्भालने वाली हो! पिता का शाया सर से उठ चुका हो, भाई बाहर, एक छोटी बहन और माँ के साथ वह उस इलाके में रहती हो।
आपको इतना पढ़ के कोई ताज्जुब नहीं हुआ होगा क्योंकि अब ऐसी घटनाओं के लोग आदी होते जा रहे हैं। फिर भी शायद कुछ लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ी होगी कि मामला क्या है? तो आपको विस्तार से बताते हैं ताकि दिल्ली या देश को बार-बार निर्भया या हैदराबाद की रेप और बर्बर हत्या की भुक्तभोगी डॉ प्रीति जैसी घटनाओं के घटित होने का ही इंतज़ार न करना पड़े।
21 फ़रवरी 2020 की एक शाम जब दिल्ली के नूर-ए-इलाही, घोंडा, चाँदबाग, जफराबाद, भजनपुरा, यमुना विहार, ब्रह्मपुरी जैसे इलाकों में दबे-छिपे कहीं दंगों की भूमिका लिखी जा रही होगी! ठीक उसी समय मौजपुर के मोहनपुरी इलाके में हिन्दू बहुल दो-तीन गलियों में से गली नंबर-8 में रहने वाली एक लड़की देवांशी (बदला हुआ नाम) अपने पालतू डॉग को गली में घूमाने निकलती है और गलती से गली नंबर-9 के उस मोड़ तक पहुँच जाती है। जहाँ से मुस्लिम बहुल घनी बस्ती शुरू होती है। एक लड़की का उस एरिया में पहुँच जाना उसकी सबसे बड़ी भूल साबित होती है और बदले में मिलती है गाली और रेप की धमकी।
ऑपइंडिया से बात करते हुए देवांशी (बदला हुआ नाम) ने पूरी बात विस्तार से बताई कि क्या हुआ था उसके साथ फरवरी की उस मनहूस शाम को। देवांशी ने बताया कि 21 फरवरी की शाम 7 बजे के आस-पास वो अपने डॉगी को बाहर घूमाने ले गई थी। पास की ही गली नंबर-9 के मोड़ तक जहाँ से मुस्लिम बहुल एरिया शुरू होता है, वहीं एक मुस्लिम लड़का जो पहले से ही कहीं बाइक से जा रहा था, उसके साथ बदतमीजी पर उतर आया। जब देवांशी ने उसे टोका तो आरोपित समीर ने कहा, “अपने कुत्ते को यहाँ पेशाब मत करवाना नहीं तो मैं तुझे फाड़ कर चार कर दूँगा, तेरा यहीं खड़े-खड़े रेप कर दूँगा।”
इतने पर लड़की ने पलट कर लड़के का कॉलर पकड़ लिया। देवांशी उस आरोपित लड़के को पहचानती हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में भी आरोपित समीर अहमद के नाम का पते के साथ उल्लेख किया। लेकिन शिकायत जब FIR में दर्ज हुई तो कई तथ्य नदारत थे।
गौरतलब है कि धमकी वाले दिन देवांशी थोड़ी ही देर में घर से अपना फोन लेकर अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए पीसीआर को कॉल करती हैं। पीसीआर आती है और उन्हें और उनकी माँ को भजनपुरा थाने ले जाया जाता है। जहाँ करीब तीन घंटे बैठाए रखने के बाद रात करीब 10.30 पर उनकी शिकायत IO मनोज भाटी द्वारा तो ले ली जाती है लेकिन अत्यधिक काम का हवाला देकर FIR दर्ज नहीं की जाती है।
अगले दिन फिर सुबह अर्थात 22 फरवरी को सुबह 9 बजे उन्हें भजनपुरा थाने बुलाया जाता है। जहाँ पहुँचकर पीड़िता IO मनोज भाटी को फोन करती हैं तो वो कहते हैं कि आरोपित को ही उठाने आया हूँ। 2 घंटे तक पीड़िता वहीं रहती हैं, तभी आरोपित समीर के परिवार और मोहल्ले के 50 से अधिक मुस्लिम थाने पर इकट्ठे हो जाते हैं।
पीड़िता देवांशी ने ऑपइंडिया को बताया कि SHO भजनपुरा आरएस मीणा से जब कई प्रभावशाली मुस्लिम अंदर मिलने जाते हैं तो उनके सुर बदल जाते हैं। 21 फरवरी की रात को जो FIR दर्ज करने की बात कही गई थी, अब उल्टा लड़की पर ही समझौते का दबाव और पीड़िता पर ही FIR दर्ज करने की बात कही जाने लगती है। 22 वर्षीय लड़की की माँ को केबिन से बाहर भेजकर उन्हें घंटों बैठाए रखा जाता है लेकिन FIR दर्ज नहीं की जाती।
थक-हारकर जब SHO मीणा और IO मनोज भाटी, और समाज के कई लोगों के कहने पर वो समझौते को राजी होती हैं तो उल्टा उन्हीं पर ही FIR की धमकी दी जाती है। थाने में ही आरोपित समीर के अपने परिवार और मुहल्ले वालों के साथ मौजूद होने और स्वयं पीड़िता के अनुसार, समीर द्वारा यह कबूल कर लेने के बाद भी कि हाँ उसने ही गाली और रेप की धमकी दी थी। लेकिन समीर के मुस्कराते चेहरे ने और SHO की धमकी और दबाव ने देवांशी का मन बदल दिया।
अब देवांशी अड़ गईं कि अगर उसकी गलती है कि रेप की धमकी पर उन्होंने उसका कॉलर पकड़ कर अपराध किया है तो उन पर FIR की जाए लेकिन उसकी शिकायत को भी FIR में दर्ज किया जाए। साथ ही उसने जब दूसरे दिन फिर से लिखित शिकायत की कॉपी माँगी तब IO मनोज भाटी ने उसके सामने ही और आरोपित समीर और अन्य मुस्लिमों की उपस्थिति में ही उसे फाड़कर कूड़ेदान में डाल दिया। उक्त बातें डिटेल में ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने फोन पर कही।
IO मनोज भाटी और SHO मीणा और वहाँ मौजूद अन्य समुदाय विशेष के इस बदले बरताव को देखकर, वह सहसा वहीं मौजूद ACP से मिलने उनके केबिन में गईं तो उन्हें वहाँ से पुलिस के द्वारा हटा दिया गया। इस कवायद में 22 फरवरी को सुबह से शाम होने वाली थी। दिन में 4 बार वो 100 नंबर पर कॉल कर चुकी थीं, जो उसी भजनपुरा थाने पर ट्रांसफर होने से निरर्थक साबित होती रही। बाद में पीसीआर पर ही मिले ACP के नंबर पर बात करने पर उन्होंने कहा कि अब जाओ FIR लिख ली जाएगी।
पीड़िता ने उसी समय राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को कॉल करके अपनी समस्या बताई तो उन्हें सीलमपुर स्थित DCP ऑफिस जाने या ACP से शिकायत करने के लिए कहा गया। ACP के आदेश पर उनकी बात सुनी जाती है और सम्बंधित भजनपुरा थाने को FIR दर्ज करने को कहा जाता है।
जब वो करीब 8 बजे थाने पहुँचती हैं और अपने एक दिन पहले की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने को कहती हैं। और याद दिलाती हैं कि DCP ऑफिस ने कहा है कि अब जाओ, थाने में हो जाएगा। जहाँ ऊपर से फोन आने की तस्दीक करते हुए, कहा जाता है कि FIR दर्ज हो जाएगा लेकिन उसकी कॉपी लेने 12 बजे रात के आसपास आना होगा।
सोचिए एक अकेली लड़की को रात 12 बजे उस संवेदनशील इलाके में थाने बुलाया जाता है। पीड़िता के अनुसार, शायद यह सोचकर कि वह डर जाएगी और नहीं आएगी। लेकिन किसी तरह अपने चचेरे भाई को साथ लेकर करीब 12.30 बजे भजनपुरा थाने जाकर FIR की कॉपी रिसीव करती हैं। उसमें भी बड़ा झोल यह कि FIR में जो उनकी शिकायत में था, वो बात न लिखकर उसे एक आम छेड़छाड़ और बदतमीजी जैसा मामला बना दिया जाता है। साथ ही आरोपित समीर पुत्र शरफुद्दीन के नाम के साथ उसका पूरा पता देने के बावजूद FIR से वो सूचनाएँ गायब हैं।
भजनपुरा थाने में दर्ज FIR की कॉपी-1
भजनपुरा थाने में दर्ज FIR की कॉपी-2
FIR में दर्ज आरोप ठीक करने और शिकायत के अनुसार सही FIR दर्ज करने की जब वह रात में थाने में ही जिद करती हैं तो उन्हें IO मनोज भाटी ने यह कह कर टाल दिया कि जैसा बताया था, वही FIR में है। और यह कह दिया जाता है कि वो अब घर चले गए हैं। अब थाने से कुछ नहीं होगा, तुम्हें कोर्ट जाना होगा।
कानूनी पेचीदगियों से अनजान जब वह अपने वकील से बात करने को कह देती हैं तो बात अगले दिन के लिए टाल दी जाती है। लेकिन, थाने में उनकी FIR पुनः सही नहीं की जाती है। यह सब किसके दबाव और शह पर हुआ, यह पूछे जाने पर, इसके बारे में पीड़िता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इतना जरूर कहा कि उस दिन थाने में वो केवल अपनी मम्मी के साथ गई थीं जबकि आरोपित पक्ष की ओर से 50 से अधिक लोग आए थे। जिनमें से उसने इलाके के कई प्रभावी मुस्लिमों के नाम लिए, जो उसकी जानकारी में थे।
पीड़िता ने 24 फ़रवरी 2020 को सीलमपुर स्थित DCP ऑफिस में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई। उस शिकायत में भी कार्रवाई के साथ यही अपील थी कि उसकी बात FIR में नहीं लिखी गई। लेकिन उस पर आगे कुछ नहीं हुआ।
DCP को दिया गया शिकायत पत्र-1 DCP को दिया गया शिकायत पत्र-2
तीन-चार दिन थानों में जूझने के बाद जब वह निराश और समीर के व्यंग्य भरे कुटिल मुस्कान से तंग आकर और प्रथम दृष्टया पराजय और आँखों में आँसु लिए 24 फरवरी को किसी तरह अपने घर पहुँचती हैं, तब तक अचानक से इलाके में दंगे भड़क चुके थे। उत्तर-पूर्वी दिल्ली जलने लगी थी और आरोपित समीर पर कार्रवाई और सही FIR की आस दिल में दबाए, देवांशी कई दिनों तक घर में कैद रहीं।
बाहर की दुनिया अब उनके लिए और डरावना हो चुकी थी। कुछ दिनों बाद दिल्ली का वह इलाका शांत हुआ जरूर लेकिन माहौल और प्राथमिकता बदल चुकी थी और नॉर्थ घोंडा और मौजपुर के मोहनपुरी की वो इक्का-दुक्का हिन्दू बहुल गलियाँ डर के साए में रहने लगी थीं।
डर ऐसा कि बढ़ते-बढ़ते अब वहाँ के हिंदू घरों के बाहर पोस्टर लगाकर अपना सब कुछ बेचकर दिल्ली या कहीं भी जहाँ वो सुकून से रह सकें, वहाँ चले जाने को विवश हैं। इसी बीच, उसी डर और दहशत के दौरान 9 मार्च को उन्हें भजनपुरा थाने से ही कोई आकर कोर्ट का नोटिस दे जाता है। जिसमें उन्हें कड़कड़डूमा कोर्ट में जाकर अपना बयान दर्ज करवाना था। लेकिन FIR में तो कुछ और ही बात लिखी है। जब वह थाने में एक सब-इंस्पेक्टर किरण कुमारी को फोन कर पूछती हैं तो वही बात दोहरा दी जाती है कि अब जो कुछ होगा, कोर्ट से ही होगा।
देवांशी बताती हैं कि वह अपनी मम्मी के साथ 18-19 मार्च दोनों में से किसी दिन कोर्ट गई थीं लेकिन कई घंटों तक वहाँ बैठे रहने के बावजूद मजिस्ट्रेट के सामने उनका बयान दर्ज नहीं हो पाता है। पूछने पर उन्हें पता चलता है कि अभी दिल्ली दंगों के बयान दर्ज हो रहे हैं प्राथमिकता पर, बाकी के बाद में दर्ज होंगे। वह वहाँ से भी निराश होकर लौट आती हैं। और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बदले हुए माहौल में कोर्ट द्वारा फिर से बुलाए जाने और न्याय मिलने का इंतज़ार करने लगती हैं।
इसी इंतज़ार में करीब डेढ़ महीने और गुजर जाते हैं। और एक दिन किसी के बताने पर सांसद मनोज तिवारी तक अपनी बात पहुँचाने के लिए खुद से एक शिकायती पत्र में, आरोपित समीर के साथ ही SHO आरएस मीणा, IO मनोज भाटी पर कार्रवाई की माँग करते हुए, टाइप कर भेज देती हैं। अपने सांसद मनोज तिवारी को 1 मई को भेजी शिकायत को भी अब लगभग तीन महीने होने को आए लेकिन दो सप्ताह पहले ही जो समीर उनकी तरफ देखकर तंज भरते हुए हँस कर पहले सिर्फ डराता था, घूरता था, अब वो गलती से कहीं मिल जाने पर एक दिन गली के नुक्कड़ पर अपने दोस्तों के साथ खड़ा देवांशी को देखकर कहता है, “क्या बहन के…%&DI! क्या कर लिया तेरे पुलिस ने? अभी सिर्फ कहा है, कर के भी दिखा दूँगा। पुलिस मेरे मुट्ठी में है।”
ऑपइंडिया से की गई बातचीत का कुछ महत्वपूर्ण हिस्सा आप वीडियो में देख सकते हैं:
आरोपित समीर की कुटिल मुस्कान और बार-बार के तंज और धमकी के कारण देवांशी चाहती हैं कि उस पर कार्रवाई हो। उनका कहना है, “वो मुझे बचपन से जानता है। हम एक ही स्कूल के अलग-अलग सेक्शन में थे। फिर भी आज धमकी दे रहा है तो कल ऐसा कर भी सकता है। मैं चाहती हूँ, जो मेरी शिकायत में है, वो FIR में दर्ज हो और आरोपित समीर के साथ उन सभी पर कार्रवाई हो, जिन्होंने कहीं न कहीं एक पीड़िता का साथ न देकर मुस्लिम भीड़ के दबाव में आरोपितों का ही साथ दिया।”
इसी बीच, एक दूसरे मामले में, शुक्रवार (31 जुलाई 2020) को दिल्ली के उसी मौजपुर इलाके के मोहनपुरी और घोंडा में जब सांसद मनोज तिवारी दिल्ली दंगों से पीड़ित हिन्दुओं के पलायन और उनके प्रतिष्ठित लोगों को मुस्लिमों द्वारा कथित रूप से झूठे केस में फँसाए जाने की मौजूदा शिकायतों और हालात का जायजा लेने गए थे तो समीर द्वारा गाली और रेप की धमकी की पीड़िता देवांशी ने भी उनसे अपनी बात कही और अपने पहले के शिकायत पत्र की भी याद दिलाई। जिस पर सांसद ने भी जरुरी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
5 महीने से ज़्यादा समय हो जाने पर भी जब उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है और हाल ही में जब उन पर फिर फिकरे कसे जाते हैं, गाली दी जाती है, और धमकी याद दिलाई जाती है। तो परेशान होकर अपने साथ ही साथ अपनी बहन और गली के अन्य लड़कियों के लिए देवांशी आरोपित पर कार्रवाई चाहती हैं। वो चाहती हैं कि उन्हें न्याय मिले।
देवांशी चाहती हैं कि आगे से फिर कोई इस तरह खुलेआम किसी लड़की को धमकी देकर खुलेआम न घूमता रहे। लेकिन अभी भी आरोपित समीर अहमद बेफिक्र घूम रहा है। अब देखना यह है कि इतने के बाद भी प्रशासन हरकत में आकर कोई कार्रवाई करता है या किसी बड़ी घटना के घटने का इंतजार करता है।
कॉन्ग्रेस पार्टी की आंतरिक कलह की वजह से बुरी स्थिति है। गुरुवार (जुलाई 30, 2020) को पार्टी के राज्यसभा सांसदों की बैठक बुलाई गई थी, जिसके बाद से ही कलह और तेज़ हो गई है। जहाँ कई युवा नेता 10 साल की यूपीए सरकार के मत्थे सारा दोष मढ़ रहे हैं वहीं वरिष्ठ नेता पूर्व पीएम डॉक्टर मनमोहन सिंह के पक्ष में गोलबंदी कर रहे हैं। ताज़ा राजनीतिक स्थित पर रणनीति बनाने के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने 34 सांसदों के साथ बैठक की थी।
लेकिन, एक वरिष्ठ सांसद ने सोनिया गाँधी के सामने ही पार्टी में महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सहमति न होने की बात कह कर हंगामा मचा दिया। वर्चुअल बैठक में उक्त नेता ने कहा कि पार्टी को आत्ममंथन की ज़रूरत है। वहीं बैठक में मौजूद युवा सांसदों ने मनमोहन सिंह की सरकार पर सारा ठिकड़ा फोड़ दिया। उनका कहना है कि पार्टी की मौजूदा स्थिति के लिए यूपीए सरकार ही दोषी है।
मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे दो नेताओं के बीच भी झगड़ा हुआ, जो बताता है कि 2014 में सत्ता जाने के बाद से ही पार्टी में बड़ी फूट पड़ी हुई है। मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि यूपीए को उसके अंदर के लोगों ने ही जानबूझ कर नुकसान पहुँचाया, जिससे उसे 2019 के लोकसभा चुनावों में बुरी हार मिली। शनिवार को मनीष तिवारी ने बयान दिया कि 10 वर्षों तक सत्ता से बाहर रहने के बावजूद एक भी भाजपा नेता ने अटल बिहार वाजपेयी की सरकार की आलोचना नहीं की।
उन्होंने मनमोहन सिंह पर आरोप लगाने वाले कॉन्ग्रेस नेताओं को अज्ञानी करार दिया। सबसे बड़ी बात ये कि उन्होंने ट्विटर पर ये बयान दिया, कॉन्ग्रेस की बैठक में नहीं। कॉन्ग्रेस नेताओं मिलिंद देवड़ा, शशि थरूर और आनंद शर्मा ने मनीष तिवारी का समर्थन किया। देवड़ा ने कहा कि डॉक्टर मनमोहन सिंह ने पद छोड़ते समय कहा था कि इतिहास उनके साथ न्याय करेगा लेकिन किसने सोचा था कि उनकी उपस्थिति में उनकी अपनी ही पार्टी के नेता उन पर निशाना साधेंगे।
I agree with @ManishTewari & @milinddeora. UPA’s transformative ten years were distorted & traduced by a motivated & malicious narrative. There’s plenty to learn from our defeats & much to be done to revive @INCIndia. But not by playing into the hands of our ideological enemies. https://t.co/Ui6WUlBl3F
वहीं शशि थरूर ने कहा कि यूपीए सरकार का एक दशक बदलाव का वाहक था लेकिन अलग नैरेटिव बना कर उसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। उन्होंने हार से सीख लेकर कॉन्ग्रेस के पुनरुत्थान की बात कही। उन्होंने सलाह दी कि कॉन्ग्रेस वैचारिक दुश्मनों के हाथों में न खेलें। वहीं आनंद शर्मा ने तो सोनिया-मनमोहन की तारीफों के पुल ही बाँध दिए। उन्होंने विकास के लिए उन्हें ही श्रेय दिया।
Congress as a democratic party is always open to a debate on its achievements and failures. Honest introspection and analysis are always helpful and gives strength to move forward. (9/11)
उन्होंने कहा कि भाजपा अब यूपीए को श्रेय दे, ऐसा किसी की आकंक्षा नहीं है लेकिन पार्टी के नेताओं को अपनी ही सरकार की आलोचना से बचना चाहिए। वहीं सातव ने कहा कि सोशल मीडिया पर पार्टी के कुछ नेता इन मुद्दों पर बात कर रहे हैं, जो सही नहीं है। उन्होंने बैठक में टकराव की बात को नकारते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने समय-समय पर पार्टी नेताओं को बोलने के लिए मंच मुहैया कराया है।
बैठक में शामिल होने वाले एक और नेता का कहना था कि राहुल गाँधी पूरा प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद हालात वैसे के वैसे ही बने हुए हैं। कॉन्ग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री पी चिदंबरम ने कहा “पार्टी का संगठन ज़िला और मंडल स्तर पर कमज़ोर है।” वहीं दूसरी तरफ कपिल सिब्बल ने कहा कि पार्टी को इसकी अंतिम पंक्ति तक निरीक्षण की ज़रूरत है। उनके मुताबिक़ संगठन के हर व्यक्ति को सिरे से सोचना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है।
भगवान राम पूरे देश की आस्था के केंद्र हैं और उनके मंदिर को लेकर आम जनमानस की भावनाएँ किसी से छिपी नहीं है। अब जब बुधवार (अगस्त 5, 2020) राम मंदिर के भूमिपूजन के साथ ही इसकी नींव डाल दी जाएगी और इसके निर्माण की शुरुआत हो जाएगी, मध्य प्रदेश स्थित जबलपुर की एक ऐसी महिला हैं, जो उस दिन अन्न ग्रहण करेंगी। 81 साल की उर्मिला चतुर्वेदी ने 27 साल पहले शपथ ली थी कि वो तब तक अन्न ग्रहण नहीं करेंगी, जब तक अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत नहीं हो जाती।
अब वो घड़ी आ गई है। राम मंदिर के लिए सदियों से संघर्ष चल रहा था और इस यज्ञ में आहुति देने वालों में जहाँ कइयों के नाम लोगों को मालूम हैं, वहीं उर्मिला चतुर्वेदी जैसे भक्त भी हैं, जो अपनी अलग ही लड़ाई लड़ रहे थे और उन्हें अपनी आस्था पर पूरा भरोसा था। नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें राहत मिली और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर भूमिपूजन के बाद उनके स्वप्न पूरे होंगे।
उर्मिला चतुर्वेदी का कहना है कि उनका शरीर भले ही कमजोर हो गया हो लेकिन उनका संकल्प अभी भी चट्टान की तरह मजबूत है। शायद तभी उम्र के इस पड़ाव तक वो अपने राम को छत मिलने का इन्तजार करती रहीं। जब 1992 में बाबरी ढाँचे को कारसेवकों द्वारा ध्वस्त किया गया था, तभी उन्होंने भीष्म प्रतिज्ञा कर ली थी कि जब तक वहाँ भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण की शुरुआत नहीं हो जाती, वो अन्न नहीं खाएँगी।
उर्मिला चतुर्वेदी इतनी उत्साहित हैं कि वो अपने परिजनों को अयोध्या चल कर इस ऐतिहासिक पल का भागी बनने के लिए राजी करने पर तुली हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण आपदा और लॉकडाउन का हवाला देकर परिजन किसी तरह उन्हें मना रहे हैं और बाद में अयोध्या ले जा कर रामलला के दर्शन कराने का आश्वासन दे रहे हैं। दरअसल, राम मंदिर को लेकर हुए हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष से उर्मिला चतुर्वेदी काफी दुःखी रहती थीं।
उर्मिला चतुर्वेदी का कहना है कि भले ही वो शारीरिक रूप भूमिपूजन में नहीं जा पा रही हैं लेकिन मन से तो वो वहाँ पर मौजद रहेंगी ही। वो चाहती हैं कि अयोध्या में उन्हें भी कोई जगह मिल जाए, जहाँ रह कर वो अपने राम की शरण में जाकर उनकी आराधना करती रहें। वो अपना बाकी जीवन राम की शरण में बिताना चाहती हैं और अयोध्या मंदिर से अच्छी जगह उनके लिए दुनिया में कहीं भी नहीं है।
उर्मिला चतुर्वेदी की इस तपस्या में उनके परिजन भी उनके साथ थे, जिन्होंने उनका पूरा सहयोग किया। उनके परिजन भी चाहते हैं कि अब जब राम जन्मभूमि में मंदिर का स्वप्न साकार हो रहा है तो वो जल्दी ही अन्न ग्रहण करना शुरू कर दें। उर्मिला कहती हैं कि इन 27 सालों में वो समाज और लोगों से भी दूर चली गई थीं, कई लोग उन पर दबाव बना रहे थे कि वो अपना उपवास ख़त्म कर दें लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
कई बार मंचों पर भी सम्मानित किया जा चुका है उर्मिला चतुर्वेदी को। हालाँकि, उनके रिश्तेदारों और समाज के लोगों में कई लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने उनकी रामभक्ति को देख कर उनके उपवास का समर्थन किया। आजकल वो पूरा दिन राम मंदिर से जुडी ख़बरें ही देखती रहती हैं। वो दिन भर पूजा-पाठ में व्यस्त रहती हैं और टीवी पर राम मंदिर से जुड़ी ख़बरें देखती हैं। उनके परिजनों की योजना है कि उन्हें अयोध्या ले जाकर सरयू किनारे संकल्प तुड़वाया जाए।
इसी तरह बिहार के किशनगंज में ऐसे ही एक राम भक्त हैं, जिन्होंने 18 साल पहले यह प्रण लिया था कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर नहीं बन जाता तब तक वो नंगे पाँव रहेंगे। दास किशनगंज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के ज़िला कार्यकारी होने के साथ ही एक किराने की दुकान भी चलाते हैं। देव दास अब तक 1800 से अधिक लोगों के दाह-संस्कार में शामिल हो कर ख़ुद काम करते हैं।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ 4 अगस्त के दिन एक बड़े आयोजन की योजना बना चुके हैं। 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले वह भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे।
इतना ही नहीं इस दिन मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इस दौरान वह सामाजिक दूरी से संबंधित अहम दिशा निर्देशों का भी ध्यान रखेंगे।
साल 2018 के विधानसभा चुनावों के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने “सॉफ्ट हिंदुत्व” के एजेंडे पर चलने का पूरा प्रयास किया है। ऐसा मध्य प्रदेश में काफी हद तक नज़र आता है। विधानसभा चुनावों के मतदान के दौरान मुख्यमंत्री पद के दावेदार कमलनाथ को संगठन ने “हनुमान भक्त” के तौर पर ही दर्शाया था। इसके बाद वह “राम वन गमन पथ योजना” जैसी नीति लेकर आए। सत्ता में आने के बाद राज्य में गौशालाएँ बनवाई और मंदिरों का नवीनीकरण तक कराया।
कुछ ही दिनों पहले कमलनाथ ने राम मंदिर के भव्य निर्माण का स्वागत किया था। उन्होंने शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) के दिन एक वीडियो संदेश जारी किया था। उसमें उन्होंने कहा कि देशवासियों को लम्बे समय से इसकी अपेक्षा और आकांक्षा थी। मंदिर निर्माण हर भारतीय की सहमति से हो रहा है और यह केवल भारत में ही संभव है।
मै अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का स्वागत करता हूँ। देशवासियों को इसकी बहुत दिनों से अपेक्षा और आकांक्षा थी। राम मंदिर का निर्माण हर भारतवासी की सहमति से हो रहा है, ये सिर्फ़ भारत में ही संभव है। जय श्री राम pic.twitter.com/EwvzJ07kch
— Office Of Kamal Nath (@OfficeOfKNath) July 31, 2020
इस वीडियो में कमलनाथ के पीछे भगवान हनुमान की तस्वीर भी नजर आ रही थी। कभी अपने को हनुमान भक्त और कभी शिवभक्त दिखाने वाले कमलनाथ अब राम भक्त के रूप में नज़र आ रहे थे। लेकिन कमलनाथ द्वारा श्रीराम मंदिर के समर्थन में दिया गया बयान एक विशेष समुदाय के लोगों को रास नहीं आई। ट्विटर पर ही कमलनाथ के इस वीडियो में कुछ लोगों ने कमेंट में लिखा है कि यह सभी भारतीयों की सहमति से नहीं बना है।
एक ट्विटर यूजर फ़राज़ ने कमलनाथ के इस वीडियो के जवाब में लिखा है कि राम मंदिर पर आपके इस नजरिए का अंजाम आपको अगले चुनाव में भुगतना पड़ेगा। वहीं, आफताब अहमद मलिक ने इस वीडियो के जवाब में बेहद निराशाजनक भाव में लिखा है कि वो MP कॉन्ग्रेस से नफरत करते हैं और अब तक वो कमलनाथ के समर्थक थे, लेकिन अब से नहीं हैं।
‘काकावाणी’ ट्विटर हैंडल से पोस्ट करने वाले अली सोहराब ने कमलनाथ का यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा है – “सेक्युलरिज्म”। अली सोहराब के इस ट्वीट के जवाब में शेख अजहरुद्दीन ने कमलनाथ पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए लिखा है कि अच्छा हुआ मध्य प्रदेश में इनकी सरकार गिर गई और अब राजस्थान के साथ ही बाकी राज्यों में भी गिर जानी चाहिए।
हाल ही में कमलनाथ ने भोपाल में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कराया था। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस के इस कदम को दिखावा बताया था। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने आज तक से इस बारे में बातचीत की थी। उनका कहना था कि “कॉन्ग्रेस ने हमेशा राम के अस्तित्व को खारिज है। राम सेतु को काल्पनिक बताया है अब राम का नाम जप रही है। कॉन्ग्रेस के लिए यह बहुत अच्छा होगा अगर वह “श्रीराम” को सिर्फ चुनाव और और उपचुनाव के दौरान न याद करें।”
शुक्रवार के दिन जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का खंडन किया है। ख़ास कर राहुल गाँधी ने जिस तरह कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद सैफुद्दीन सोज़ को घर में नज़रबंद किए जाने पर झूठ और भ्रम फैलाया था। यह विवाद बुधवार के दिन शुरू हुआ, जब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफुद्दीन सोज़ ने आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया था कि पिछले साल 5 अगस्त के बाद से वह अपने घर में नज़रबंद किए गए हैं। जब केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था। जिसके तहत जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद सैफुद्दीन सोज़ की पत्नी मुमताज़निसा बुधवार के दिन सर्वोच्च न्यायालय में हेबस कॉर्पस पेटीशन (बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका) दायर की थीं। याचिका में यह कहा गया था कि उन्हें 5 अगस्त 2019 को गिरफ्तार किया गया था लेकिन गिरफ्तारी का आधार स्पष्ट नहीं किया गया था।
इस पर जम्मू कश्मीर प्रशासन ने सर्वोच्च न्यायालय के सामने अपना पक्ष रखा। उसमें जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कहा कि सैफुद्दीन सोज़ न तो गिरफ्तार किए गए हैं और न ही नज़रबंद किए गए हैं। इसके अलावा जम्मू कश्मीर के गृह विभाग ने यह भी कहा कि उन पर किसी भी तरह की पाबंदी नहीं लगाई गई है। उन्हें कहीं भी जाने और घूमने की पूरी आज़ादी मिली हुई है। इस जानकारी के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उस याचिका को खारिज कर दिया गया, जिसमें सैफुद्दीन की ग़ैरक़ानूनी तरीके से गिरफ्तारी की बात लिखी हुई थी।
SC dismissed habeas corpus petition by the wife of Saifuddin Soz as the govt said, he is not under any kind of detention.
But this video shows the otherwise, one can clearly see that J&K Police Personnel are literally manhandling him and preventing him from speaking to media. pic.twitter.com/uz4Slf7H4b
इस घटना के एक दिन बाद सैफुद्दीन सोज़ श्रीनगर स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी में अपने घर की दीवार के पीछे नज़र आए। इसके बाद उन्होंने कहा पिछले साल 5 अगस्त के दिन जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाया गया। जिसके बाद आधिकारिक रूप से आदेश आया, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई।
सैफुद्दीन सोज़ ने कहा:
“सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से झूठ कहा है। अगर मैं आज़ाद हूँ और मुझ पर कोई पाबंदी नहीं है तो मुझे बाहर निकलने दिया जाए, असल में मैं आज़ाद नहीं हूँ। मेरे पास पास पुलिसकर्मी मौजूद हैं और उनका कहना है कि उन्हें ऊपर से आदेश मिले हुए हैं।”
इस नाटकीय घटना के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी इस मामले में कूद पड़ी। उन्होंने सैफुद्दीन मामले को मोदी सरकार पर हमला करने का ज़रिया बना लिया। समाचार चैनल एनडीटीवी ने इस मामले से जुड़ा एक एडिटेड वीडियो तक साझा कर दिया। जिसमें वह ऐसा दिखा रहे थे कि जम्मू कश्मीर प्रशासन ने सैफुद्दीन को गिरफ्तार या नज़रबंद किया है। जबकि एनडीटीवी पर इस तरह फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने का आरोप लगता रहा है। एनडीटीवी द्वारा साझा किए गए वीडियो में ऐसा दिखाया गया था कि सैफुद्दीन को उनके घर से निकलने नहीं दिया गया था। वीडियो में वह जम्मू कश्मीर प्रशासन पर चिल्लाते हुए नज़र आ रहे थे।
Watch | Saifuddin Soz kept behind locked gates in his home, shouts “Let Supreme Court see how I am being detained” pic.twitter.com/nhRi1LE0Vf
इसके बाद और कोई नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी खुद जनता के बीच झूठ फैलाने में लग गए। उन्होंने एनडीटीवी का यह वीडियो साझा करते हुए कॉन्ग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज़ को रिहा करने की माँग की। वीडियो को ट्वीट करते हुए राहुल गाँधी ने लिखा, “गैर-कानूनी तरीके से हुई कश्मीर नेताओं की गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं है। इससे सिर्फ और सिर्फ देश की छवि खराब होती है, उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए।” लेकिन इस वीडियो को भी जम्मू कश्मीर प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया था।
The illegal detention of political leaders with absolutely no basis damages the fabric of our nation.
कॉन्ग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज़ की तरफ से किए गए दावे के बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन ने यह स्पष्ट किया। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में एक भी गलत तथ्य नहीं पेश किए। विचित्र बात यह थी कि खुद की गिरफ्तारी का दावा करने वाले सैफुद्दीन सोज़ इस दौरान दो बार दिल्ली गए थे। पहली बार अक्टूबर महीने में और दूसरी बार दिसंबर महीने में।
जम्मू कश्मीर सूचना विभाग के प्रधान सचिव रोहित कंसल ने इस बारे ट्वीट करके जानकारी भी साझा की थी। उन्होंने अपने ट्वीट में स्पष्ट किया कि सैफुद्दीन सोज़ दिल्ली गए थे। इसके अलावा उन्हें किसी भी समय, कहीं भी आने और जाने की आज़ादी थी। इस दौरान उनकी सुरक्षा का ध्यान हमेशा रखा जाता है।
उल्लेखनीय बात यह है कि सैफुद्दीन को आधिकारिक तौर पर सुरक्षा मिली हुई है। उनके साथ हर समय गार्ड्स और सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते हैं। सुरक्षा प्रोटोकोल को मद्देनज़र रखते हुए वह हमेशा उनके साथ रहते हैं। जबकि उन्होंने खुद इस बात की पुष्टि की थी कि वह दो बार दिल्ली जा चुके हैं।
“5 अगस्त 2019 के बाद मैं दो बार दिल्ली गया था। इस दौरान मैं अपनी बहन से मिला था और अपना स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया था। लेकिन इसके पहले मैं पुलिस से आधिकारिक तौर पर इजाज़त ली थी वह भी दिसंबर और अक्टूबर में। कई मौक़ों पर मेरी इजाज़त रद्द भी की गई थी।”
This is the kind of deception these guys play & have been playing for decades now. Did @ndtv get played too or was it “milibagat”/ preplanned?
सिर्फ इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया। जिसमें सैफुद्दीन श्रीनगर की सड़कों पर आज़ाद घूमते हुए नज़र आ रहे थे। यह वीडियो गुरूवार का बताया जा रहा है। इसके कुछ ही समय बाद वह कहने लगे कि उन्हें अपने घर में नज़रबंद किया गया है। इस तरह के तमाम सबूतों के बावजूद पहले एनडीटीवी और उसके बाद राहुल गाँधी ने इस मुद्दे पर झूठ फैलाया। वह ऐसे मुद्दे पर झूठा दावा कर रहे हैं, जिस पर हर तरह की जानकारी पहले से ही मौजूद है।
कॉन्ग्रेस पार्टी की स्थिति अब ये हो गई है कि वास्तविक समस्याओं के बारे में आवाज़ उठाने के लिए भी अब उसे पुरानी या फेक तस्वीरों का सहारा लेना पड़ रहा है। अबकी उसने बिहार में बाढ़ की समस्या को दिखाने के लिए किसी अन्य राज्य की पुरानी तस्वीर शेयर की। ये कारनामा बिहार कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल द्वारा किया गया। पार्टी ने नीतीश कुमार की सरकार की आलोचना के लिए ऐसा किया।
बिहार कॉन्ग्रेस ने बाढ़ में सड़क पर फँसी गाड़ियों और एक महिला की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “नीतीश कुमार का सुशासन पानी में तैर रहा है। मुजफ्फरपुर, भागलपुर, बिहार शरीफ और पटना को स्मार्ट सिटी बनाने की लिए चुना गया था, जो आज भी बरसात के पानी और जलभराव से परेशान है। बिहार का संकल्प, बदलाव ही विकल्प।” ध्यान से देखने पर पता चलता है कि तस्वीर में दिख रही गाड़ी का नंबर प्लेट पश्चिम बंगाल का है।
ट्विटर पर अंकुर सिंह ने कॉन्ग्रेस के इस झूठ का पर्दाफाश किया। उन्होंने स्टॉक फोटोग्राफी एजेंसी Alamy की वेबसाइट पर इस तस्वीर को खोज निकाला। दरअसल, ये तस्वीर बिहार की है ही नहीं। ये पश्चिम बंगाल की है। इसे वेबसाइट पर ‘बंगाल बाढ़’ की कैटेगरी में रखा गया है। जानकारी दी गई है कि ये हाल ही में आए ‘अम्फान’ तूफ़ान की फोटो है, जिसके कारण पश्चिम बंगाल में लोग सड़क पर फँसे हुए हैं।
ट्विटर यूजरों ने भी बिहार कॉन्ग्रेस को इस तस्वीर के लिए जम कर धोया। एक यूजर ने लिखा कि ये लोग पुरानी तस्वीरें शेयर करते हैं और जब जनता इन कारनामों के कारण इन्हें वोट नहीं देती तो ये ईवीएम हैक होने का रोना रोते हैं। बिहार कॉन्ग्रेस ने पश्चिम बंगाल और बिहार के बीच का अंतर ही नहीं समझा, जिससे लोग उससे नाराज़ दिखे। कॉन्ग्रेस के झूठ का पर्दाफाश होने के बाद उसकी जम कर आलोचना हुई।
Why is Congress using pics from West Bengal to target Bihar?
जहाँ तक बिहार में बाढ़ की बात है, इसने सच में विकराल रूप ले लिया है और सरकार पूरी तरह विफल नज़र आ रही है। कुल 45 लाख लोग प्रभावित हैं। दरभंगा स्थित कुशेश्वर स्थान का पूरा थाना ही बाढ़ में डूबा हुआ है और एक पेड़ के नीचे से पुलिस का कामकाज चल रहा है। गोपालगंज और पूर्वी चम्पारण में बाँधों के टूटने के बाद लाखों लोग बेघर हो गए हैं। राहत कार्य न के बराबर हो रहे हैं और जनप्रतिनिधि जनता की सुध नहीं ले रहे।
इससे पहले मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के नेता जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि देश की जनता के रुपयों से पीएम मोदी अपनी सुविधाएँ बढ़ा रहे हैं और वो भोग-विलास की वस्तुओं से लैस विमान में ही यात्रा करते हैं। जीतू पटवारी ने जिस 787 जेट की तस्वीर शेयर की थी, वो प्राइवेट है, पीएम मोदी की नहीं है। उसे दुनिया का पहला ‘787 ड्रीम जेट’ बताया गया है, जिसका प्रबंधन सितम्बर 2016 से ही डियर जेट नामक कम्पनी करती आ रही है।
सदियों के इंतजार के बाद अब अयोध्या 5 अगस्त को राम मंदिर भूमि पूजन के लिए तैयार हो गया है। रामजन्मभूमि के लिए कुछ कारसेवकों ने अपने प्राणों को भी रामलला के लिए दाँव पर लगा दिया था। उस वक़्त आंदोलन का नेतृत्व करने वाले और प्राण न्योछावर करने वाले लोगों की बस एक ही चाहत थी कि राम लला मंदिर में विराजमान हों।
अपने ही देश में भगवान राम को न्याय दिलाने के लिए हिंदुओं की पीढ़ियों द्वारा लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का समापन होने जा रहा है। उनका संकल्प अब पूरा होने जा रहा है। उसी आंदोलन के दौरान के ऐसे व्यक्ति ने इसमें हिस्सा लिया, जिन्होंने राजनीतिक दबावों के बीच अपने करियर को दाँव पर लगा कर राम मंदिर बनवाने का सपना देखा और प्रयास किया।
वह शख्स थे कंडांगलथिल करुणाकरण नायर, जिसे केके नायर के नाम से जाना जाता है। केके नायर का जन्म 11 सितंबर, 1907 को केरल में हुआ था। वह भारतीय सिविल सेवा अधिकारी थे और भारत के गणतंत्र बनने से पहले ही हिंदुओं की पूजा के मौलिक अधिकार की रक्षा करने में सबसे आगे थे।
उनका जीवन केरल के अलप्पुझा के कुट्टनाड गाँव से शुरू हुआ। केरल में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, नायर उच्च अध्ययन के लिए इंग्लैंड गए और 21 वर्ष की आयु में भारतीय सिविल सेवा (ICS) की परीक्षा उत्तीर्ण की। परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें 1 जून, 1949 को अयोध्या (फैजाबाद) के उपायुक्त सह जिला मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त किया गया था।
अयोध्या का वह दौर उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया था। नायर को राम जन्मभूमि मुद्दे पर एक रिपोर्ट करने के लिए उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार की तरफ से एक पत्र मिला था। उस मुद्दे पर रिपोर्ट को प्रस्तुत करने के लिए उन्होंने अपने सहायक गुरु दत्त सिंह को भेजा। जिसके बाद 10 अक्टूबर, 1949 को सिंह ने अपनी रिपोर्ट में, उस स्थान पर एक राजसी राम मंदिर के निर्माण की सिफारिश की। सिंह ने स्थल का दौरा कर यह देखा कि उस स्थल के लिए हिंदू और मुस्लिम आपस में लड़ रहे थे।
उन्होंने लिखा, “हिंदू समुदाय ने इस आवेदन में एक छोटे के बजाय एक विशाल मंदिर के निर्माण का सपना देखा है। इसमें किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्हें अनुमति दी जा सकती है। हिंदू समुदाय उस स्थान पर एक अच्छा मंदिर बनाने के लिए उत्सुक है, जहाँ भगवान रामचंद्र जी का जन्म हुआ था। जिस भूमि पर मंदिर बनाया जाना है, वह नजूल (सरकारी भूमि) है।”
नेहरू का निर्देश, फिर भी नहीं झुके केके नायर
प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निर्देश पर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने राम मंदिर से हिंदुओं को बेदखल करने की कोशिश की। हालाँकि, केके नायर ने उन्हें वहाँ से भेजने से इनकार कर दिया और आदेश को लागू नहीं करने का फैसला किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि हिंदू उस स्थल पर पूजा कर रहे हैं। उन्होंने मूर्तियों को साइट से हटाने से भी इनकार कर दिया। जिसके बाद नायर को गोविंद वल्लभ पंत ने जिला मजिस्ट्रेट के पद से निलंबित कर दिया।
इन सब के बाद केके नायर ने तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ अदालत का रुख किया। अदालत ने मामले पर उनके पक्ष में फैसला सुनाया। नायर को वापस अपना आईसीएस अधिकारी का पद मिल गया। लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। यह फैसला उन्होंने नेहरू के खिलाफ बढ़ती नाराजगी को मद्देनजर रखते हुए लिया।
नायर ने नेहरू के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री की खुली अवहेलना और लाखों हिंदुओं को न्याय दिलाने के उनके दृढ़ संकल्प की वजह से लाखों लोग उन्हें पसंद करने लगे थे। उनके व्यवहार की वजह से लोग उन्हें ‘नायर साहब’ कहते थे।
आईसीएस से इस्तीफा देने के बाद, उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में अभ्यास करना शुरू कर दिया। केके नायर और उनका परिवार अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए जनसंघ में शामिल हो गए। उनकी पत्नी शकुंतला नायर चुनाव लड़ीं और 1952 में उत्तर प्रदेश विधान सभा की सदस्य बनीं।
नायर और उनकी पत्नी दोनों 1962 में लोकसभा के सदस्य बने। दिलचस्प बात यह है कि उनके ड्राइवर को भी उत्तर प्रदेश की विधान सभा के सदस्य के रूप में चुना गया था। वहीं प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के कहने पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा घोषित राष्ट्रीय आपातकाल के काले दिनों के दौरान नायर और उनकी पत्नी को गिरफ्तार भी किया गया था।
7 सितंबर 1977 को केके नायर का निधन हो गया। उन्होंने अपना जीवन जनसंघ और राम मंदिर के लिए समर्पित कर दिया। उत्तर प्रदेश राज्य में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति होने के बावजूद उन्हें अपने गृह राज्य केरल में भी बहुत सम्मान और पहचान मिली।
केरल में राष्ट्रवादियों ने अपने गाँव में विश्व हिंदू परिषद द्वारा दान की गई भूमि पर उनका स्मारक बनाने का फैसला भी किया है। इसके अलावा केके नायर मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से एक ट्रस्ट भी स्थापित किया गया है। कल्याणकारी गतिविधियों के अलावा, ट्रस्ट छात्रों के लिए सिविल सेवा उम्मीदवारों और छात्रवृत्ति के लिए प्रशिक्षण प्रदान करता है।
केके नायर द्वारा चलाए गए राम जन्मभूमि आंदोलन को लालकृष्ण आडवाणी, अशोक कुमार, कल्याण सिंह, विनय कटियार और उमा भारती जैसे बड़े नेताओं ने बाद में जारी रखा। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक फैसले के बाद, उसी स्थल पर राजसी राम मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया गया है, जिसके लिए नायर ने अपने करियर को भी समर्पित कर दिया था। यद्यपि केके नायर इस दुनिया में नहीं हैं, फिर भी आने वाले वर्षों में आंदोलन में किए गए उनके योगदान को याद रखा जाएगा।