Home Blog Page 4864

UP: कोरोना वॉरियर्स पर हमला करने पर 7 साल तक की सजा, ₹5 लाख तक जुर्माना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बुधवार को हुई बैठक में ‘उत्तर प्रदेश लोकस्वास्थ्य एवं महामारी रोग नियंत्रण अध्यादेश 2020’ कैबिनेट से पास हो गया है। इसके मुताबिक स्वास्थ्यकर्मियों, सभी पैरा मेडिकल कर्मियों, पुलिस कर्मियों और सफाईकर्मियों के साथ ही शासन की तरफ़ से तैनात किसी भी कोरोना योद्धा से की गई अभद्रता या हमले पर 6 माह से लेकर 7 साल तक की सजा होगी। 50 हजार से 5 लाख रुपए तक जुर्माना भी देना पड़ेगा।

इस कानून के तहत उन लोगों पर भी कार्रवाई होगी जो कोरोना के समय में चिकित्सकों, सफाईकर्मियों, पुलिसकर्मियों पर थूकते हैं और अपनी हरकतों से प्रशासन की नाक में दम कर देते हैं। इस कानून के तहत कोरोना वारियर्स के खिलाफ समूह को उकसाने या भड़काने पर भी कार्रवाई हो सकती है। ऐसा करते पकड़े जाए जाने पर 2 वर्ष से 5 वर्ष तक की सजा का और 50 हजार से 2 लाख तक का जुर्माने का प्रवधान है।

बता दें आज बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में कोरोना वारियर्स के लिए इस अध्यादेश को मंजूरी मिली। उत्‍तर प्रदेश महामारी कानून 2005 के अंतर्गत लाए गए इस अध्‍यादेश को उत्तर प्रदेश महामारी रोग नियंत्रण अध्यादेश 2020 का नाम दिया गया। इसके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर महामारी नियंत्रण प्राधिकरण गठित करने का निर्णय लिया गया है। जहाँ राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिले में जिलाधिकारी प्राधिकरण के अध्यक्ष होंगे।

नए अध्यादेश के अनुसार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य महामारी नियंत्रण प्राधिकरण बनेगा, जिसमें मुख्य सचिव सहित 7 अन्य अधिकारी सदस्य होंगे। दूसरा 3 सदस्यीय जिला महामारी नियंत्रण प्राधिकरण होगा, जिसका अध्यक्ष डीएम होगा। राज्य प्राधिकरण महामारी के रोकथाम नियंत्रण से संबंधित मामलों में सरकार को परामर्श देगा, जबकि जिला प्राधिकरण जिले में विभिन्न विभागों के क्रियाकलापों के साथ समन्वय स्थापित करेगा।

कोरोना महामारी को देखते हुए क्वारंटाइन का उल्लंघन करने पर या अस्पताल से भागने पर 1-3 साल की सजा और जुर्माना 10 हजार से 1 लाख तक का होगा। ऐसे ही अस्पतालों और क्वारंटाइन सेंटर्स में अश्लील एवं अभद्र आचरण करने पर 1 से 3 साल की सजा और 50 हजार से 1 लाख तक का जुर्माना होगा। बता दें कि इस कानून में लॉकडाउन तोड़ने और इस बीमारी को फैलाने वालों के लिए भी कठोर सजा का प्रावधान है।

खबरों के अनुसार, अगर कोई भी व्यक्ति कोरोना से संक्रमित होने के बावजूद अपनी जानकारी छिपाएगा तो उसपर भी कार्रवाई होगी। इसके लिए 50 हजार से लेकर 1 लाख तक का जुर्माना लगेगा। वहीं अगर मरीज जान-बूझकर सार्वजनिक परिवहन से यात्रा आदि करता है तो उसके लिए 1 से 3 साल की सजा और 50 हजार से 2 लाख कर जुर्माना देना पड़ सकता है।

बता दें, बीते दिनों कोरोना वॉरियर्स पर लगातार जानलेवा हमले होते देखा सीएम योगी ने कहा था कोरोना महामारी के खिलाफ जारी जंग में एक तरफ स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी, सुरक्षाबल, अन्‍य सरकारी कर्मचारी और विभिन्‍न संगठनों के कर्मी लगातार प्रयासरत हैं। वहीं, दूसरी तरह, कुछ लोग कोरोना वाहक बनकर मेडिकल स्‍टाफ और सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर रहे हैं।

मुख्‍यमंत्री योगी ने इन घटनाओं को गंभीर अपराध बताते हुए कहा था कि इसे बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा। इसे रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने महामारी अधिनियम-1897 में प्रमुख संशोधन करने का निर्णय लिया है।

Covid सेवा: आपदा के बीच डटे हैं RSS के 3.42 लाख स्वयंसेवक, 3.17 करोड़ को भोजन, 50 लाख परिवारों को राशन

कोरोना वायरस संक्रमण आपदा और उससे बचाव के लिए हुए लॉकडाउन के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) लगातार राहत कार्य और जनसेवा में लगा हुआ है। संघ ने अपने सेवा-कार्य से जुड़े आँकड़े पेश किए हैं। संघ ने इसे ‘कोविड सेवा’ नाम दिया है। संघ ने जानकारी दी है कि वह देश भर के 67,336 स्थानों पर एक साथ राहत-कार्य चला रहा है। आरएसएस के 3,42,319 कार्यकर्ता इस काम में लगे हुए हैं।

संघ न सिर्फ़ लोगों के खाने-पीने का प्रबंध कर रहा है, बल्कि उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रख रहा है। संघ ने अब तक 50,48,088 परिवारों को राशन किट मुहैया कराया है। इतनी बड़ी संख्या में परिवारों तक पहुँचना ये बताता है कि आरएसएस देश के दूर-दराज इलाक़ों में भी कमान थामे हुए है। अब तक कुल 3,17,12,767 भोजन पैकेट्स वितरित किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जगह-जगह पर ब्लड डोनेशन कैम्प भी आयोजित कर रहा है। संघ कार्यकर्ता बढ़-चढ़ कर रक्तदान कर रहे हैं। अब तक 22,446 स्थानों पर ब्लड डोनेशन कैम्पस आयोजित किए गए हैं। लोगों को कोरोना से बचाव के लिए मास्क और सैनिटाइजर्स भी वितरित किए गए हैं। अब तक 44,54,555 मास्क ज़रूरतमंदों के बीच बाँटे जा चुके हैं।

आरएसएस ने अपने बयान में कहा है कि संगठन तभी रुकेगा, जब कोरोना पर भारत को अंतिम विजय नहीं मिल जाती। साथ ही संगठन पोस्ट-कोरोना वर्ल्ड के लिए भी तैयार हो रहा है। संघ ने केंद्र सरकार की उसके कामकाज के लिए तारीफ की है। संघ ने दुनिया भर के कैपिटलिज्म और कम्युनिज्म के ध्वस्त होते आर्थिक मॉडलों के उदाहरण देते हुए कहा कि अब स्वदेशी व्यवस्था का वक़्त आ गया है। ये सेल्फ-रिलायंस का समय है। संघ ने कहा:

“कोरोना से बचाव के लिए नागरिकों को सुविधाएँ देने से लेकर उन्हें जागरूक करने तक, हम सरकार के साथ कदम से क़दम मिला कर चल रहे हैं। हम सरकारी संस्थाओं का सपोर्ट सिस्टम बनने का प्रयास कर रहे हैं। भारत माता के 130 करोड़ बच्चे-बच्चियाँ हमारे भाई बहन हैं। संघ की शाखा की यही शिक्षा हमें पग-पग पर आत्मविश्वास दे रही है। हमारी लोगों से अपील है कि जिस तरह लॉकडाउन में परिवार के बीच नजदीकियाँ बढ़ी हैं, वो टूटनी नहीं चाहिए। परिवार हमारे समाज का आधारभूत संरचना होता है।”

संघ ने आशा जताई कि कोरोना आपदा के बाद हमारे विकास का जो मॉडल है उस पर ज़रूर समीक्षा की जाएगी क्योंकि ताज़ा मॉडल की पोल खोल चुकी है। संगठन ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि जिस तरह फेज बाई फेज लॉकडाउन की घोषणा की गई, उससे लोगों को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहने में मदद मिली। साथ ही संघ ने मंदिरों और मठों व गुरुद्वारों की भी तारीफ की, जो इस आपदा की घड़ी में आगे बढ़ कर काम कर रहे हैं।

इससे पहले हमने जानकारी दी थी कि देश भर में ”सेवा भारती’ के 2.1 लाख स्वयंसेवक काम में लगे हुए हैं। संगठन ने भारत में कुल 1200 संस्थाओं के साथ संपर्क साधा है और उन सभी के साथ मिल-जुलकर काम कर रही है। सेवा भारती संगठन ने पश्चिम दिल्ली की एक चर्च में 250 भूखे लोगों को राशन उपलब्ध करवाया था। संगठन नार्थ-ईस्ट और केरल पर अतिरिक्त ध्यान दे रही है।

रमजान में TV मत चलाओ, इस्लामी नियम से रहो: हिंदू महिला को मजहबी पड़ोसियों ने घेरा, काट डालने की धमकी

अपने घर में टीवी देखने पर असम में एक ग़रीब परिवार की महिला के साथ स्थानीय कट्टरपंथियों ने मारपीट की। पड़ोसियों ने रमजान का हवाला देकर महिला को टीवी चलाने से मना किया। इसके बाद वे धारदार हथियार लेकर एक दर्जन की संख्या में जुट गए और महिला के साथ मारपीट करने लगे। महिला की हत्या की कोशिश भी की गई।

इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। ऑपइंडिया ने बजरंग दल के स्थानीय पदाधिकारी बिजोय दास से बातचीत की, जो अपने कार्यकर्ताओं के साथ पीड़ित महिला के घर की सुरक्षा में लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि पुलिस ने हल्की धाराएँ लगाई हैं, जबकि ये मामला उससे कहीं बड़ा है। बजरंग दल के कार्यकर्ता पुलिस थाने से लेकर घर पर सुरक्षा देने तक, लगातार पीड़ित परिवार की मदद कर रहे हैं।

पीड़ितों ने बताया कि समीररूद्दीन अली और मोबिदुल रहमान ने महिला पर वार किया। साथ ही उन्होंने गाली-गलौज भी की। ये घटना असम के शिबसागर जिले में स्थित नाज़िरा कसबे की है, जहाँ उक्त महिला चाय की दुकान चलाती है। ये घटना तब हुई, जब वह शुक्रवार (मई 1, 2020) को दुकान से लौटने के बाद घर में टीवी देख रही थी। टीवी की साउंड भी ज्यादा नहीं थी और पड़ोसियों का घर भी वहाँ से कुछ दूरी पर स्थित है।

तब भी आसपास के लोग वहाँ जुट कर ये कहने लगे कि ये रमजान का पाक महीना चल रहा है, टीवी मत चलाओ। पीड़िता का नाम जाह्नोबी गोगोई है। 39 वर्षीय गोगोई के साथ गाली-गलौज करते हुए मजहबी पड़ोसियों ने कहा कि उन्हें टीवी की वजह से संध्या नमाज में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने चेताया कि अगर महिला ने स्थानीय लोगों द्वारा रमजान महीने के लिए तय किए गए नियमों का पालन नहीं किया तो अंजाम बहुत बुरा होगा।

दो लोगों के गाली-गलौज के बाद ये मामला तब हिंसक हो गया जब वहाँ आसपास के कई लोग जुट गए और महिला को मार डालने की बातें करने लगे। कोई रेलवे ट्रैक पर फेंक देने की बातें कर रहा था तो कोई काट डालने की धमकी दे रहा था। एक आरोपित ने तो गला दबा कर मार डालने की कोशिश की। एक ने धारदार हथियार लेकर काट डालने की धमकी दी। पीड़िता ने बताया कि वह चाय-नाश्ते की दुकान चला कर किसी तरह अपना गुजर-बसर करती है।

पुलिस को ईमेल से भेजी गई शिकायत की कॉपी

कोरोना आपदा के बीच उसके पति भी बेरोजगार हैं और 8 साल के बच्ची के पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी महिला पर ही है। घर में संसाधन का भी अभाव है। महिला ने बताया कि लॉकडाउन में थोड़ी ढील के बाद उसने अपना चाय-नाश्ते की दुकान फिर से खोली थी। कई दिनों से घर में आमदनी नहीं आ रही थी। अब रमजान में इस तरह का विवाद खड़ा होने के बाद परिवार पूरी तरह डरा हुआ है।

इस घटना के बाद पीड़ित महिला आवेदन लिखवाने के लिए एक व्यक्ति के पास गई। डर के माहौल में उसे ये नहीं पता चला कि जिस व्यक्ति के पास वो आवेदन लिखवाने गई है वो भी समुदाय विशेष से ही है। जब पीड़िता ने अपनी बात लिखवानी शुरू की तो उसने जान-बूझकर उसमें छेड़छाड़ कर दी। घटना को कम कर के लिख दिया और मजहाबी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए अत्याचार को छिपा दिया। इससे थाने में भी भ्रम का माहौल पैदा हो गया।

राष्ट्रीय बजरंग दल का बयान और घायल महिला

थाने में पुलिस को लगा कि महिला बोल कुछ और रही है और आवेदन में कुछ और है। राष्ट्रीय बजरंग दल के डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी बिजोय दास व अन्य लोगों ने मिल कर वीडियो फुटेज और अन्य सबूत पुलिस को सौंपे। पुलिस ने उन्हें सलाह दी कि वो ये वीडियोज डिलीट कर लें क्योंकि इसके वायरल होने से सांप्रदायिक तनाव फैलने का डर है। हालाँकि, ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान नाज़िरा थाना पुलिस ने कहा कि केस रजिस्टर किया जा चुका है और आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा रही है।

स्थानीय मीडिया ने भी इस ख़बर को अपने हिसाब से ही दिखाया। पूरी बात नहीं दिखाई गई। महिला ने बताया कि वो तो टीवी पर गाने वगैरह भी नहीं देख रही थी, वो बस समाचार देख रही थी। असल में जाह्नोबी हिन्दू हैं लेकिन उन्होंने दूसरे मजहब में शादी की थी। शादी के बाद पति ने भी स्वेच्छा से हिन्दू धर्म अपना लिया था। इसके बाद से ही वे लोग स्थानीय लोगों की नज़र में चढ़े हुए हैं।

ये इलाक़ा कॉन्ग्रेस पार्टी का गढ़ भी माना जाता है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया का परिवार यहाँ दशकों से प्रभावी रहा है। फ़िलहाल उनके बेटे देबब्रत यहाँ से विधायक हैं। हालाँकि, ये इलाक़ा जोरहाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता हैं, जहाँ से भाजपा के तोपोन गोगोई सांसद हैं। लेकिन, इससे पहले 1991 से लेकर 2014 तक लगातार 23 साल यहाँ से कॉन्ग्रेस बिजोय कृष्णा हांडिक जीतते रहे थे।

स्थानीय मीडिया की ख़बरों में कहा गया है कि समीरउद्दीन मूल रूप से बांग्लादेशी है और एनआरसी में उसका नाम भी नहीं आया था। इसके बाद से वह और भी बौखलाया हुआ है। उनलोगों की कॉन्ग्रेस में गहरी पैठ है और मजहब विशेष के स्थानीय लोग किसी भी बात को लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं के पास ही जाते हैं। हमने स्थानीय सांसद से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।

जफरुल इस्लाम को पद से हटाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका, हिंदुओं को दिखाया था अरब का धौंस

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान को उनके पद से हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि खान ने अपने सोशल मीडिया पेज पर भड़काऊ और देशद्रोही बयान दिया था। याचिका पर 11 मई को सुनवाई होगी।

जफरुल इस्लाम के खिलाफ देशद्रोह का मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखे एक पोस्ट में हिंदुओं को अरब का धौंस दिखाया था।

रिटायर बैंक अधिकारी सुभाष चंद्र द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि 2 मई को, एक शिकायत के आधार पर, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास और भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच देशद्रोह और घृणा की भावनाओं को बढ़ावा देने के आरोप में आईपीसी की धारा 124A और 153A के तहत FIR दर्ज किया था।

अलख आलोक श्रीवास्तव द्वारा दायर किए गए याचिका में कहा गया है कि FIR दर्ज होने के बावजूद जफरुल इस्लाम खान ने 3 मई को कहा कि उन्होंने न तो अपना ट्वीट डिलीट किया है और न ही इसके लिए माफी माँगी है। वह अपनी बात पर अब भी कायम हैं। खान ने कहा था, “कुछ मीडिया हाउस ने इस तरह से रिपोर्ट किया कि मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी माँगी और उसे डिलीट कर दिया है। मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी नहीं माँगी है और न ही उसे डिलीट किया है। मैंने ट्वीट के लिए नहीं बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के समय ट्वीट करने के लिए खेद जताया था। वो ट्वीट अभी भी मेरे ट्विटर और फेसबुक अकाउंट पर उपलब्ध हैं।” 

याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्पष्ट है कि वे जान-बूझकर भड़काऊ और देशद्रोही बयान दे समाज में असंतोष और दरार पैदा करना चाहते हैं। याचिका में आगे दावा किया गया कि जफरुल इस्लाम, जो कि एक जिम्मेदार पद पर आसीन है, ने ऐसा घृणित बयान देकर देश की एकता और अखंडता को खतरे में डाल दिया है। इन्होंने भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को धूमिल करने और दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश की है। जफरुल खान का बयान तथ्यात्मक रूप से गलत, अपमानजनक और देश विरोधी है।

याचिका में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग, दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल से कहा गया है कि वो जफरुल इस्लाम को उनके इस देशद्रोही और घृणित बयान के लिए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के पद से हटा दिया जाए।

इससे पहले, उच्च न्यायालय में एक और याचिका दायर की गई थी जिसमें जफरुल खान के खिलाफ उनकी भड़काऊ टिप्पणी और हिंदू समुदाय के खिलाफ धमकी भरे बयान के लिए FIR दर्ज करने की माँग की गई थी। इस याचिका को भी 11 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। दिल्ली निवासी मनोरंजन कुमार की याचिका में दावा किया गया है कि आयोग के अध्यक्ष ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किए हैं जिसमें उन्होंने हिंदू समुदाय को ‘कट्टर हिंदू’ बताया है।

28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के दूसरे मजहब वालों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

खान ने पोस्ट में शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक को हीरो की तरह पेश किया था। बता दें कि मलेशिया में रह रहे इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं। 

पालघर मॉब लिंचिंग: अल्ट्रा-लेफ्ट संगठनों की साजिश, लीपापोती की कोशिश में महाराष्ट्र सरकार

महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं समेत तीन लोगों की हत्या के मामले में अल्ट्रा-लेफ्ट लिंक्स की भूमिका सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि साधुओं की मॉब लिंचिंग में मुख्य आरोपित का सम्बन्ध अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों से है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र सरकार इसे महज एक गलतफहमी से हुई हत्या साबित करने का प्रयास कर रही है, लेकिन यह अल्ट्रा-लेफ्ट संगठनों द्वारा एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई मॉब लिंचिंग थी।

दिलचस्प बात यह है कि FIR में मुख्य आरोपित वामपंथी पार्टी CPIM ग्राम पंचायत सदस्य है, जिस पर कुल्हाड़ी, पत्थर, लाठी और अन्य धारदार हथियारों से लैस भीड़ इकट्ठी कर साधुओं पर हमला करने के आरोप हैं। उल्लेखनीय है कि सड़क तोड़ना, पेड़ तोडना और सड़कों को अवरुद्द कर हमला करना नक्सलियों के पुराने और जाने-पहचाने तरीके हैं।

‘टाइम्स नाउ’ के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने वामपंथी गुटों के इस हत्या से जुड़े होने के अपने अनुमान को सही बताया है। उनका कहना है कि यही वजह है कि वामपंथी इस घटना के खिलाफ आवाज उठाने वाले रिपब्लिक भारत न्यूज़ चैनल के पत्रकार अर्नब गोस्वामी के पीछे पड़े हुए हैं।

पुलिस के सामने कर दी साधुओं की निर्मम हत्या

महाराष्ट्र के पालघर के गड़चिनचले गाँव में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। पूरी घटना वहाँ मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों के सामने हुई। आरोपितों ने साधुओं के साथ एक ड्राइवर और पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। हमले के बाद साधुओं को अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

कोरोना संकट के बीच ₹1610 करोड़ का राहत पैकेज: कर्नाटक में 10 लाख से अधिक ड्राइवर-नाई को मिलेंगे ₹5 हजार

कोरोना महामारी के बीच कर्नाटक की येदियुरप्पा सरकार ने वित्तीय पैकेज जारी करते हुए बुधवार को बड़ा ऐलान किया। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने राज्य के ड्राइवरों और नाइयों को 5-5 हजार रुपए की राशि देने की घोषणा की है। राज्य सरकार के इस फैसले से लगभग 7,75,000 ड्राइवरों और 2,30,000 नाइयों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने बताया कि कोरोना के चलते राज्य सरकार ₹1610 करोड़ का वित्तीय पैकेज जारी कर रही है। इस राहत पैकेज के तहत फूल की खेती करने वालों को प्रति हेक्टेयर 25,000 रुपए की राहत मिलेगी। धोबी और नाइयों को एक साथ 5,000 रुपए मुआवजा दिया जाएगा। ऑटो और टैक्सी चालकों को भी एकसाथ 5,000 रुपए की राशि दी जाएगी। निर्माण श्रमिकों को 3,000 रुपए मिलेंगे। उन्हें पहले ही 2 हजार रुपए का भुगतान किया जा चुका है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार ने लगभग 1 लाख लोगों को 3500 बसों और ट्रेनों से उनके घर वापस भेजा है। इसके अलावा प्रवासी श्रमिकों से आगे प्रदेश में रहने की अपील की है, क्योंकि निर्माण कार्य अब फिर से शुरू हो गया है।

बता दें, राज्य सरकार ने किसानों, लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रमों (MSME), हथकरघा बुनकरों, फूलों की खेती करने वालों, धोबियों, नाइयों, ऑटो और टैक्सी चालकों समेत अन्य को ध्यान में रखते हुए इस राहत पैकेज का ऐलान किया है। 

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए मार्च के आखिरी से लॉकडाउन लागू कर रखा है। हालाँकि, 4 मई से तीसरे चरण में कई तरह की रियायतें दी गई हैं। कर्नाटक में अभी तक कोरोना के 671 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं। इसमें से 331 लोग ठीक हुए हैं, जबकि 29 लोगों की मौत हुई है।

अमित मालवीय के खिलाफ FIR पर रोक, राजस्थान हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस को जारी किया नोटिस

राजस्थान हाईकोर्ट ने भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय पर दर्ज की गई FIR पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने हनुमानगढ़ पुलिस को निर्देश दिया कि पूरी कार्यवाही के साथ FIR के प्रभाव और संचालन पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही अदालत ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता और राज्य सरकार को एक नोटिस भी जारी किया, और छह सप्ताह में जवाब माँगा है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस FIR के मामले में उच्च न्यायालय का रुख किया था।

अमित मालवीय के ट्वीट पर की थी FIR दर्ज

मंगलवार (मई 05, 2020) को भाजपा के आईटी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय द्वारा कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ एक ट्वीट करने के मामले में राष्ट्रीय भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। हनुमानगढ़ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता मनोज कुमार सैनी द्वारा इस ट्वीट को अपमानजनक बताते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी।

दरअसल इस ट्वीट में अमित मालवीय ने लिखा था- “सोनिया गाँधी का दावा है कि राहुल की चेतावनी के कारण भीलवाड़ा में 22 लाख लोगों का परीक्षण किया? जहाँ कहीं भी राहुल (गाँधी) हैं, क्या अतिशयोक्ति और गणित में गड़बड़ी हो सकती है?”

अमित मालवीय ने भीलवाड़ा मॉडल पर किया था ट्वीट

CRPC की धारा 482 के तहत भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया कि FIR में भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय द्वारा भीलवाड़ा मॉडल पर सोनिया गाँधी की ओर से उस वक्तव्य को इंगित करते हुए किए गए ट्वीट को आधार बनाया गया था, जिसमें सोनिया गाँधी ने कहा था कि राहुल की चेतावनी के बाद भीलवाड़ा में कोरोना वायरस के 22 लाख का परीक्षण हुआ।

अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि उक्त ट्वीट के आधार पर FIR दायर की गई है तो इसमें जेपी नड्डा का कोई रोल नहीं है। दूसरा, यह ट्वीट अमित मालवीय द्वारा उनके निजी ट्विटर हैंडल से किया गया। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया तथा अप्रार्थी संख्या 2, हनुमानगढ़ टाउन पार्षद मनोज कुमार सैनी को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह में जवाब तलब किया। वहीं, FIR के क्रियान्वयन व प्रभाव तथा इसके तहत समस्त प्रकार की जाँच पर अंतरिम रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

अमित मालवीय कॉन्ग्रेस द्वारा कोरोना वायरस के दौरान किए गए खोखले दावों का निरंतर खंडन कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने हाल ही में घोषणा कर कहा कि प्रवासियों को उनके घर भेजने व ट्रेन में आने वाले खर्चों का भुगतान कॉन्ग्रेस पार्टी करेगी। इस पर भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोनिया गाँधी को निशाना बनाते हुए कहा था कि हम नहीं चाहते कि हमारे गाँव इटली जैसे बन जाएँ।

महान मुगलों का जानिए सच्चा इतिहास, हिंदुओं ने उन्हें बदनाम किया: इतिहासकार फख्तर का शोध

पिछले कुछ समय में मुगलों को लेकर हमारे समाज में कई गलत धारणाएँ बनी हैं। इतिहास के पन्ने कुरेद-कुरेद कर उन्हें अत्याचारी और आतताई बताने की कोशिशें हुई हैं। उनके महान कार्यों को तथ्यों से काटकर ऐसा दर्शाया गया है कि उन्होंने भारत में हिंदुओं पर बहुत जुल्म किया। लेकिन हकीकत में क्या आप जानते हैं कि महान मुगलों का सच्चा इतिहास क्या है, जिसे हिंदुओं ने समय के साथ बदल दिया?

आप जानते हैं कि रामचरितमानस के असली रचियता कौन हैं? या जिन गंगा मैया को लेकर कहा जाता है कि उन्हें भागीरथ अपने प्रयासों से धरती पर लाए, उनका बाबर से क्या कनेक्शन है? गाय – जिन्हें हिंदू माँ कहते हैं, वो भारत में कैसे आई? और संस्कृत ने उर्दू से कितने शब्द चुराए? नालंदा में क्या वाकई बख्तियार खिलजी ने आग लगाई? आदि-आदि।

इन्हीं सवालों का जवाब जानने के लिए, महान मुगलों का इतिहास सामने लाकर रखने के लिए ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती ने भारतीय इतिहास के बहुत बड़े जानकार लहसुन फख्तर से इस विषय पर बात की। साथ ही नासा के कई सॉफ्टवेयर की मदद लेते हुए उन्होंने सच्चाई का पता लगाया और शोधपरक तथ्य दुनिया के सामने लेकर आए। हमारा दावा है कि इन तथ्यों को जानने के बाद जो भी हिंदू सड़कों पर हीरो बने घूम रहे हैं, उन सबकी अक्ल ठिकाने आ जाएगी।

जैसे नालंदा को लेकर बख्तियार खिलजी को अक्सर बदनाम किया जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने उसमें आग लगाई। लेकिन जब हमने इस बारे में इतिहास खंगाला तो मालूम हुआ कि जो बताया गया, सच्चाई उससे बिलकुल अलग है। दरअसल, बख्तियार खिलजी ने जानबूझकर कुछ नहीं किया वो तो उनके घोंड़ों की नाल से निकली चिंगारी ने विकराल आग का रूप धरा था और कुछ काफिरों ने उस समय ये लिख डाला कि उन्होंने खिलजी को हजारों की सेना के साथ नालंदा में आग लगाते देखा।

इसी तरह गंगा को लेकर फैलाए झूठ का भी हमारी पड़ताल में पर्दाफाश हुआ। लोग कहते हैं कि उन्हें भागीरथ धरती पर लाए। मगर क्या किसी ने देखा? नहीं। क्योंकि वास्तविकता तो यह है कि बाबर ने उनकी खोज की और अपना विज्ञान लगाते हुए गंगा की सारी चालाकी समझ ली। उन्होंने उसका पूरा पता लगाया और जहाँ-जहाँ वह बहती थीं, उसका मैप तैयार किया। इसके बाद अपने भारी वैज्ञानिक बुद्धि से ही श्री बाबर जी ने गंगा और जमुना का संगम करवाया।

भारत में गाय को लेकर हिंदू दावा कर देते हैं कि वो उनकी गौमाता हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि गायों का गाँव-गाँव में मिलना भी मुगल शासकों की रहमदिली ही है। सच यह है कि जब बलात्कारी बाबर और पूरे बलात्कारी मुगलिया खानदान में कोई बच्चा होता, तो वे हर बच्चे के पैदा होने पर एक पहाड़ पर जाते थे (जो अरब के रेतों से छुपा था), और वहाँ पर एक गाय प्रकट होती थी, जिसे वो ले कर आते थे। इसी तरह भारत में गाय आई।

आज हिंदू लोग आरोप लगाते हैं कि मुगलों ने भारत में आकर भारत की संस्कृति पर हमला किया। उनके धार्मिक स्थलों को तोड़ा, उनके रहन-सहन, खाने-पीने को बिगाड़ा। लेकिन सच तो यह है कि हिंदुओं ने सिर्फ़ उन्हें लेकर भ्रम फैलाया। पहले उनकी उर्दू से शब्द चुराकर हिंदी बनाई और फिर रामचरितमानस को लेकर कहा कि उसे तुलसीदास जी ने लिखा, जबकि वास्तविकता में इसका निर्माण अकबर जी के रहमोकरम से हुआ था।

अब आगे इसी प्रकार मुगलों का पूरा सच, उनकी दरियादिली जानने के लिए ऑपइंडिया संपादक का शोधपरक वीडियो नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देखें।

हिज्बुल, लश्कर, जैश जैसे आतंकी संगठनों की रिपोर्टिंग प्रोपेगेंडा है: तथाकथित पत्रकार सबा नकवी

पत्रकार सबा नकवी ने आतंकियों के ख़िलाफ़ लिखने वालों को कोसा है और आतंकियों का विरोध करने को प्रोपेगेंडा बताया है। साथ ही उन्होंने ऐसे पत्रकारों को नीचा भी दिखाया। बता दें कि भारत के तीन ऐसे फोटोग्राफरों को पुलित्जर प्राइज (Pulitzer Prize) से नवाजा गया है, जो जम्मू कश्मीर में आतंकियों के हिमायती रहे हैं और सेना को बदनाम करने के लिए फोटो क्लिक करते रहे हैं। डार यासीन, मुख़्तार ख़ान और चन्नी आनंद को ये अवॉर्ड मिला।

राहुल गाँधी ने भी इन तीनों को बधाई दी थी। ट्विटर पर आईएनएस की पत्रकार आरती टीकू सिंह ने कहा कि उन पत्रकारों को कोई अवॉर्ड नहीं दिया जाता जो पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा मार डाले गए लोगों के अनाथ बच्चों की व्यथा को दुनिया के सामने लाते हैं। उन्होंने लिखा कि हिज़्बुल, लश्कर और जैश ने बम ब्लास्ट कर के न जाने कितने ही बच्चों को अनाथ बनाया लेकिन उनका दर्द दिखाने वालों को पुलित्जर नहीं मिलता।

उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि ऐसे पत्रकारों के लिए कोई लॉबिंग ही नहीं करता, इसीलिए उन्हें अच्छा काम कर के भी अवॉर्ड नहीं दिया जाता। ये पढ़ते ही सबा नकवी बौखला गईं। उन्होंने लिखा कि प्रोपेगेंडा और पक्षपाती पत्रकारिता के लिए कोई केटेगरी ही नहीं होती। बता दें कि इससे पहले राहुल गाँधी ने भी तीनों पत्रकारों को ट्वीट कर के बधाई दी थी। संबित पात्रा ने उन तीनों को तथाकथित पत्रकार बताया है।

भाजपा नेता संबित पात्रा ने राहुल गाँधी को ये याद दिलाया कि पुलित्जर प्राइज की वेबसाइट जम्मू कश्मीर के बारे में क्या सोचती है। इस अवॉर्ड के साइटेशन में लिखा हुआ है कि जम्मू कश्मीर एक विवादित प्रदेश है, ये स्वतंत्र होना चाहिए था लेकिन भारत ने इस पर जबरदस्ती कब्जा किया हुआ है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी राष्ट्र के सामने स्पष्ट करे कि उनकी पार्टी जम्मू कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हैं या नहीं?

ज्ञात हो कि पुलित्ज़र प्राइज की वेबाइट पर जम्मू कश्मीर को ‘कंटेस्टेड टेरिटरी’ बताया गया है। इसका अर्थ हुआ- विवादस्पद प्रदेश। ये भारत के रुख के एकदम विपरीत है। इसमें अवॉर्ड जीतने वालों की फोटो के नीचे भी जम्मू कश्मीर पर भारत के कब्जे की बात कही गई है। बावजूद इसके सबा नकवी और राहुल गाँधी जैसों का भारत को बदनाम करने और देश को खंडित दिखाने वाले पत्रकारों को बधाई देना और उनका बचाव करना आश्चर्य का विषय है।

पुलित्जर जम्मू कश्मीर को नहीं मानता भारत का अंग

इससे पहले सबा नकवी ने एक पुराना वीडियो शेयर कर यह जताने की कोशिश की थी कि हिंदू भी लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने एक मंदिर का पुराना वीडियो शेयर कर के जमतियों का बचाव किया था। हालाँकि पकड़े जाने पर अपना ट्वीट डिलीट कर दिया था। बाद में उन्होंने सब्जी और फल बेचने वालों को लेकर भी एक वीडियो बना कर प्रोपेगेंडा चलाया था। आज सबा नकवी दूसरों को प्रोपेगेंडाबाज बता रहीं।

मारा गया हिजबुल मुजाहिद्दीन का सबसे बड़ा आतंकी: ढेर हुआ रियाज नायकू, हंदवाड़ा के बाद बड़ी कार्रवाई

सेना ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के सबसे बड़े आतंकी रियाज नायकू को मार गिराया है। वो हिजबुल का मुखिया था और सारी आतंकी गतिविधयों को संचालित करता आ रहा था। इसे हंदवाड़ा में आतंकियों की करतूतों के बदले में की गई जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है। इससे पहले जम्मू कश्मीर के बेगपोरा से भारी गोलीबार की ख़बर आई थी और कहा गया था कि नायकू अपने घर के आसपास ही सेना के शिकंजे में आ गया है।

कश्मीर घाटी में आतंक-निरोधी अभियान की ये सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मानी जा रही है। इस कार्रवाई को सेना, सीआरपीएफ और राष्ट्रीय राइफल्स ने मिल कर अंजाम दिया। उन्हें सूचना मिली थी कि रियाज अपने घर आया हुआ है, जिसके बाद घेराबंदी की गई। इसके बाद हुई मुठभेड़ में रियाज मारा गया। जुलाई 2016 में अनंतनाग में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद रियाज ने ही हिजबुल की कमान संभाली थी।

नायकू के बारे में मीडिया में कहा जा रहा है कि वो पहले गणित का शिक्षक था। इसी तरह बुरहान वानी को ‘हेडमास्टर का बेटा’ कह कर प्रचारित किया गया था। उसके ऊपर 12 लाख रुपए का इनाम भी था। वो 33 वर्ष की उम्र में आतंकी बन गया था। ज़ाकिर मूसा जब हिजबुल से अलग हो गया था तो इसी ने इस आतंकी संगठन को फिर से खड़ा किया था। इस बार वो अपने बीमार माँ को देखने आया था। आज से दो साल पहले सद्दाम पोद्दार को मारा गया था।

इससे पहले हंदवाड़ा एनकाउंटर में पाकिस्तान के रहने वाले टॉप लश्कर आतंकी हैदर को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। भारतीय सेना के हाथ रविवार (मई 3, 2020) को ये बड़ी कामयाबी हाथ लगी थी। इसके कुछ दिनों बाद भारत ने कहा था कि वो पाकिस्तान के उन सभी क़दमों का कड़ा विरोध करता है, जिनके तहत वो अपने कब्जे वाले भारतीय प्रदेशों की स्थिति में बदलाव लाने के लिए उठा रहा है। भारत ने पाकिस्तान को तुरंत अपने अवैध कब्जे वाले प्रदेशों को खाली करने को कहा था।