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बिहार: लॉकडाउन का पालन कराने पहुँची पुलिस टीम पर हमला, दो पुलिसकर्मी घायल, मुस्लिम समुदाय के छह गिरफ्तार

एक तरफ तो पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे कोरोना योद्धाओं का अपने-अपने तरीके से सम्मान कर रहा है। वहीं कुछ लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। इस तरह की तमाम खबरें बिहार से आ रही हैं, जहाँ कुछ लोग स्वास्थ्य कर्मियों के साथ पुलिस टीम को लगातार अपना निशाना बना रहे हैं। इस बार ताजा मामला बिहार के गया जिले से सामने आया है। जहाँ लॉकडाउन का पालन कराने गई पुलिस टीम पर लोगों ने हमला बोल दिया। इसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।

खबर के मुताबिक गया जिले के शेरघाटी नगर सुमाली मोहल्ले में लॉकडाउन के दौरान नियमों का उल्लंघन कर मंगलवार को कुछ दुकानें खुली हुई थीं। इस बात की जानकारी जब पुलिस को हुई तो पुलिस की एक टीम लॉकडाउन के बीच खुली दुकानों को बंद कराने के लिए पहुँच गई। जैसे ही वहाँ खुली चूड़ी की दुकान को पुलिस बंद कराने लगी ऐसे ही स्थानीय लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। हमले में एसआइ ददन प्रसाद व एक अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए।

वहीं पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं समेत छह हमलावरों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद तत्काल पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते दस नामजद और 10 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। वहीं पुलिस ने गिरफ्तार किए सभी छह आरोपितों को जेल भेज दिया। उधर शेष आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

प्रशिक्षु आइपीएस सह शेरघाटी थानाध्यक्ष सागर कुमार ने बताया कि निर्देश के विरुद्ध चूड़ी की दुकान का शटर आधा खुला था और अंदर कई लोग जमा थे। पुलिस अधिकारी ने जैसे ही टोका और शटर खोलकर अंदर गए तो लोगों ने उनके साथ हाथापाई कर दी। इसकी सूचना मिलने पर दूसरे थानों की पुलिस के साथ महिला पुलिसबल को भी घटनास्थल पर भेजा गया।

पुलिस ने मौके से छह हमलावरों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए लोगों में पीर मोहम्मद, तवाब हुसैन, फिरोज नवाब, दिलनाज, शबाना प्रवीण व तरन्नुम प्रवीण शामिल हैं।

इससे पहले मंगलवार को आरा जिले के नवादा थाना क्षेत्र के जवाहर टोला मुहल्ला में लॉकडाउन की वजह से रास्ता रोके जाने को लेकर दो गुट आमने-सामने आ गए। इतना ही नहीं इस दौरान हथियार बंद एक पक्ष ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें गोली लगने से दो लोग घायल हो गए। आनन-फानन में घायल 35 वर्षीय विनोद पासवान और 40 वर्षीय सुनील पासवान को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फायरिंग मामले में पिता पूरन मियाँ और पुत्र शमी को गिरफ्तार किया है। साथ ही आरोपितों के घर से पुलिस ने एक एयरगन और एक बंदूक समेत दस गोली बरामद की हैं।

वहीं बिहार से लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों पर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दिनों कहा था कि जो लोग ऐसा करेंगे उनको जेल में सड़ा देंगे। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों का नाम गुंडा पंजी में भी दर्ज होगा और स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाई जाएगी, लेकिन उनका आदेश बिहार में समुदाय विशेष पर कोई असर नहीं दिखा रहा है।

अर्नब गोस्वामी पर FIR कराएगी कॉन्ग्रेस: साधुओं की मॉब लिंचिंग पर सोनिया गाँधी से पूछे थे तीखे सवाल

कॉन्ग्रेस पार्टी ख़ुद को स्वतंत्र मीडिया और पत्रकारों की हितैषी बताती है। लेकिन अब उसने ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक संपादक अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराने का फ़ैसला लिया है। पार्टी ने उन पर सोनिया गॉंधी को लेकर गलत टिप्पणी का आरोप लगाया है।

पार्टी का आरोप है कि अर्नब गोस्वामी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। छत्तीसगढ़ के रायपुर में अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराया गया है। अब पार्टी आधिकारिक रूप से ख़ुद मामला दर्ज करवाएगी। लोग अब कॉन्ग्रेस से मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं।

इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी मीडिया पर हमले का मुद्दा उठाती रही है। हाल ही में जब जम्मू-कश्मीर में घृणा फैलाने वाले पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई, तब भी कॉन्ग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए मीडिया की आज़ादी का हवाला दिया था।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी माँग की है कि अर्नब गोस्वामी पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने सांसद राजीव चंद्रशेखर से अर्नब को बर्खास्त करने की माँग की। चंद्रशेखर ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि अर्नब को कोई नहीं निकाल सकता, उन्होंने ये सब अपनी मेहनत से ख़ुद पाया है और ‘रिपब्लिक’ के ओनर वही हैं।

पालघर और सोनिया गाँधी पर क्या बोले थे अर्नब?

बता दें कि महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं सहित तीन लोगों की भीड़ ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। लेकिन कॉन्ग्रेस चुप रही। राज्य सरकार में वह शिवसेना के साथ सत्ता में साझीदार है। इस मॉब लिंंचिंग पर चुप्पी को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को घेरते हुए ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने तीखे सवाल पूछे थे।

अर्नब ने कहा था कि इस मामले में मीडिया का रवैया काफ़ी पक्षतापूर्ण है। कोरोना वायरस पर तो सभी न्यूज़ चैनल कार्यक्रम कर रहे हैं। लेकिन साधुओं की मॉब लिंचिंग पर सारे के सारे मौन धारण किए हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर भी निशाना साधा था और उनसे सवाल पूछे।

अर्नब ने याद दिलाया कि देश की 80% जनसंख्या सनातन धर्म को मानती है। सनातनी है। वे साधुओं की क्रूरता से की गई हत्या से व्याकुल दिखे थे। अर्नब ने कहा था कि आज भारत में हिन्दू होना और भगवा वस्त्र धारण करना पाप हो गया है। अर्नब ने कहा था कि अगर किसी पादरी की हत्या होती तो कॉन्ग्रेस पार्टी और इसकी ‘रोम से आई हुई, इटली वाली’ सोनिया गाँधी बिलकुल चुप नहीं रहतीं। अर्नब ने दावा किया कि मॉब लिंचिंग पर सोनिया गाँधी आज चुप हैं तो इसका मतलब है कि वो मन ही मन में खुश भी हैं। 

कश्मीर: सोशल मीडिया के जरिए आतंकवाद का महिमामंडन, पत्रकार गौहर गिलानी पर UAPA के तहत मामला दर्ज

पत्रकार गौहर गिलानी के खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है। कश्मीर जोन की साइबर पुलिस ने मंगलवार को उन पर मामला दर्ज किया। सोशल मीडिया के माध्यम से गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पोस्ट और लेखों के आरोप में उन पर मामला दर्ज किया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि गौहर गिलानी सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट के माध्यम से आतंकवाद का महिमामंडन करते हुए गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त थे।

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने कहा कि गौहर गिलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर जो पोस्ट लिखी थीं उससे राष्ट्रीय अखंडता, संप्रभुता और भारत की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा हो सकता है। साथ ही यह भी उल्लेख किया कि गिलानी की गैरकानूनी गतिविधियों में कश्मीर घाटी में आतंकवाद का महिमामंडन करना और लोगों के मन में डर पैदा करना शामिल है।

गिलानी के खिलाफ मिली शिकायत

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि गौहर गिलानी के खिलाफ लोगों को डराने-धमकाने की कई शिकायतें भी मिली थी। पुलिस के बयान में कहा गया है कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों और कश्मीर घाटी में आतंकवाद का महिमामंडन करना, देश के प्रति अविश्वास पैदा करना और जनता के मन में भय पैदा करने का आरोप है। इससे शांति और सुरक्षा को नुकसान पहुँच सकता है।

पुलिस ने बताया कि, गौहर गिलानी पर UAPA के तहत साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर जाँच शुरू की गई है।

अन्य कश्मीरी पत्रकारों पर भी UAPA

इससे पहले, जम्मू और कश्मीर पुलिस ने दो अन्य कश्मीरी पत्रकारों मसर्रत ज़हरा और पीरज़ादा आशिक पर सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने और देश विरोधी पोस्ट को आपराधिक इरादे से साझा करने के लिए मामला दर्ज किया था। पुलिस ने ज़हरा के खिलाफ उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर देश विरोधी पोस्ट डालने के लिए गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) लागू किया था। जिसके बाद ज़हरा को पूछताछ के लिए साइबर पुलिस स्टेशन बुलाया गया था।

पीरज़ादा आशिक ने शोपियाँ मुठभेड़ के बारे में कथित तौर पर झूठी खबर प्रकाशित की थी। पुलिस के अनुसार, द हिंदू में आशिक का लेख तथ्यात्मक रूप से गलत था और जिला अधिकारियों से सही जानकारी प्राप्त किए बिना प्रकाशित किया गया था। इसके बाद उस पर भी सोशल मीडिया पर ‘राष्ट्र विरोधी’ सामग्री और ‘फर्जी’ समाचार प्रकाशित करने का मामला दर्ज हुआ है।

पाकिस्तान के आतंकी कैंपो में फैला कोरोना, संक्रमितों को दवा की जगह हथियार देकर कश्मीर भेजने की तैयारी

जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने आज (अप्रैल 22, 2020) मीडिया से बात करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है। दिलबाग सिंह के अनुसार पाकिस्तानी आतंकी कैंपों में कोरोना संक्रमण फैल गया है। इसलिए अब पाकिस्तान इन्हीं कोरोना संंक्रमित आतंकियों को कश्मीर में भेजने का प्रयास कर रहा है जोकि चिंता की बात है।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने यह खुलासा आज गंदेरबल में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में बने कोरोना वार्ड के निरीक्षण के दौरान किया। दिलबाग सिंह ने बताया पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ऐसे आतंकियों को कश्मीर घाटी में भेजने की तैयारी कर ली है।

उन्होंने बताया कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि पाकिस्तान में आतंकी कैंपों में कोरोना फैल गया है। अब पाकिस्तान कोरोना के मरीज आतंकियों को भी एक्सपोर्ट करेगा और यहाँ लोगों में इन्फेक्शन फैलाएगा।

इससे पहले पिछले दिनों सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान से एक आतंकी के फोन को टेप किया था। जिसमें इस आतंकी ने दक्षिण कश्मीर में अपने परिवार से बात की थी। फोन में आतंकी ने इस बात का खुलासा किया था कि कैंप में कई आतंकी कोरोना का शिकार बन गए हैं। साथ ही पाकिस्तानी सेना उनकी कोई मदद नहीं कर रही है।

फोन कॉल में यह भी बताया गया था कि किस तरह ऐसे हालात में भी पाकिस्तानी सेना आतंकियों को दवा के बदले सिर्फ हथियार दे कर सरहद पार करने को कह रही है। मार्च महीने की शुरुआत से यदि देखें तो विभिन्न एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने बीस के करीब आतंकियों को मार गिराया है। जिन में 5 को सरहद पार करते हुए कुपवाड़ा में मार गिराया गया, लेकिन अभी तक किसी भी मारे गए आतंकी में कोरोना संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा बीते सप्ताह किश्तवाड़ा में दो आतंकियों को मारा गया था।

बता दें, कश्मीर को लेकर इससे पहले खबर आई थी कि कश्मीर में दहशतगर्दी फैलाने के लिए वह जैश के आतंकियों को अफगानिस्तान में ट्रेनिंग दे रहा था। साथ ही वह कोरोना संक्रमितों की घुसपैठ कराने की भी फिराक में है। 

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बीच इस खबर के अलावा ये भी सूचना है कि लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का आतंकी संगठन और नक्सली भी फायदा उठाने में जुट गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नक्सलियों से लेकर आतंकी संगठनों तक ने इसके लिए अपने स्लीपर सेल को सक्रिय करना शुरू कर दिया है।

बंगाल: राशन वितरण में भेदभाव पर बवाल, विरोध कर रहे लोगों को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

कोरोना वायरस के चलते देश में जारी लॉकडाउन के बीच इन दिनों पश्चिम बंगाल में हो रहा राशन वितरण और उसमें बरती जा रही अनियमितताएँ राज्य सरकार की व्यवस्थाओं की पोल खोल रही हैं। आश्चर्य की बात यह कि अब इसके खिलाफ जो भी आवाज निकाल रहा है उसे ममता की पुलिस जमकर पीट रही है।

कुछ ऐसा ही मामला बुधवार को देखने को मिला। राशन वितरण में हो रही अनियमितताओं का जब स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो उन्हें पुलिस की लाठियाँ खानी पड़ी। विरोध के चलते पुलिस और लोगों के बीच घंटों तक झड़पें होती रहीं। इस दौरान पुलिस ने लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

दरअसल पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना के बदुरिया इलाके में बुधवार को राशन वितरण किया जा रहा था। इसी बीच स्थानीय लोगों ने राशन वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया। गुस्साए लोगों की भीड़ ने रास्ता जाम कर दिया। इस पर वहाँ मौजूद पुलिस ने आपत्ति जताई। कुछ ही देर में पुलिस और विरोध कर रहे लोगों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई।

इस बीच पुलिस ने विरोध कर रहे लोगों पर जमकर डंडे बरसाए। ANI द्वारा जारी वीडियो में आप देख सकते हैं कि कुछ पुलिसकर्मी विरोध कर रही एक महिला को डंडों से जमकर पीट रहे हैं। इस दौरान महिला खुद का बचाव करने की कोशिश कर रही है।

बदुरिया नगर पालिका वार्ड नंबर 9 से पार्षद अरित्रा घोष ने बताया कि दो दिन पहले ही हमने वहाँ प्रत्येक परिवार को राशन सामग्री दी थी। आज मुझे एक जानकारी मिली कि स्थानीय लोगों ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया है और जब पुलिस वहाँ गई तो उन पर हमला किया गया। अब इस मामले की पुलिस जाँच कर रही है।

इससे पहले पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की कार्यशैली पर लॉकडाउन के बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने सवाल उठाए थे। राज्यपाल ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि निशुल्क राशन गरीबों के लिए हैं, तिजोरियों में बंद करने के लिए नहीं है। धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दरअसल, बंगाल के कई इलाकों में मुफ्त राशन वितरण में भारी अनियमितताएँ बरते जाने की खबरें सामने आई हैं।

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राशन वितरण में गड़बड़ी को लेकर मिली कई शिकायतों के बाद तत्काल प्रभाव से राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव को हटा दिया था। उसके बाद भी कई जगहों पर अनियमितता के मामले सामने आ रहे हैं। विपक्षी दल खासकर भाजपा और माकपा निशुल्क राशन के राजनीतिक आवंटन का आरोप लगा रहे हैं।

आपको बता दें कि कि पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस के अब तक 511 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 15 की मौत हो चुकी है।

डॉक्टरों पर हमला करने वालों की अब खैर नहीं: 7 साल तक की जेल, ₹5 लाख तक जुर्माना, सरकार का बड़ा फैसला

डॉक्टरों और मेडिकल कर्मचारियों पर हो रहे हमलों पर अब केंद्र सरकार सख्त हो गई है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जानकारी दी है कि सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया है, जिसमें डॉक्टरों पर हमला करने वालों के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान है। इसमें मेडिकल कर्मचारियों और आशा कर्मचारियों की भी सुरक्षा का ध्यान रखा गया है। उन पर हमला करने वालों को 6 महीने से लेकर 7 साल तक के जेल की कड़ी सज़ा मिल सकती है।

साथ ही हमलावरों पर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो घटना की गंभीरता पर निर्भर होगा। हाल ही में डॉक्टरों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ भी नाराज़ था और इसके बैनर तले देश भर के मेडिकल कर्मचारियों ने प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासन के बाद आईएमए ने अपना विरोध प्रदर्शन ख़त्म किया। आईएमए लगातार माँग कर रहा था कि इसके लिए कोई कड़ा क़ानून बनाया जाए।

इसके लिए एसोसिएशन ने एक ‘वाइट अलर्ट’ जारी किया था, जिसके तहत इन हमलों के विरोध में 22 अप्रैल को कैंडल जला कर प्रदर्शन किया गया था। एसोसिएशन ने कहा कि ये अलर्ट एक तरह की वार्निंग है। मुरादाबाद सहित कई अन्य इलाक़ों में भी ऐसे ही डॉक्टरों ओर हमले किए गए थे। इंदौर में भी डॉक्टरों पर हमले हुए थे। डॉक्टरों ने कहा था कि अगर उनकी सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई तो फिर उनके पास घर में बैठने के अलावा क्या बच जाएगा?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्द्धन ने अमित शाह के साथ मिल कर देश भर के कई डॉक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बातचीत की और साथ ही उन्हें आश्वासन दिया। अब इसके बाद उनका विरोध प्रदर्शन भी ख़त्म हो गया है। मंत्रियों ने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा और सम्मान करना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। हालाँकि, आईएमए के कई पूर्व अधिकारियों ने भी डॉक्टरों से अपील की थी कि वो ऐसा कुछ भी न करें, जिससे इस आपदा की घड़ी में देश की जनता के लिए दिक्कतें खड़ी हो।

अलीगढ़: लॉकडाउन का पालन कराने पहुँची पुलिस टीम पर हमला, भीड़ ने फेंके ईंट-पत्थर

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक बार फिर पुलिस पर हमला किया गया है। हमला तब हुआ जब पुलिस लॉकडाउन का पालन कराने सब्जी मंडी भुजपुरा पहुॅंची थी।

यह इलाका मुस्लिम बहुल है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सब्जी मंडी के दुकानदारों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक भुजपुरा क्षेत्र में मौजूद सब्जी मंडी में बुधवार को लॉकडाउन के दौरान समय अवधि पूरी होने पर पुलिस की एक छोटी टीम दुकानें बंद कराने पहुँची थी। इसी बीच अचानक से दुकानदारों ने भीड़ के साथ मिलकर पुलिस टीम पर ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स के साथ सीओ प्रथम तत्काल मौके पर पहुँचे। इसके बाद हालात पर काबू पाया गया। सीओ प्रथम विशाल पाण्डेय ने बताया कि अवधि पूर्ण होने के बाद सब्जी विक्रेता अपने घरों को जा रहे थे। इसी दौरान विक्रेताओं में आपस में किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया।

जब लेपर्ड कर्मियों ने सब्जी विक्रेताओं के झगड़े में हस्तक्षेप किया तो मौके का फायदा उठाकर भीड़ ने हमला कर दिया। हालाँकि अब पुलिस आरोपितों की पहचान के साथ मामले की जाँच में जुट गई है। सीओ के मुताबिक जल्द ही सभी आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

इससे पहले दो अप्रैल को अलीगढ़ के रघुवीरपुरी पुलिस चौकी इलाके की एक मस्जिद में लॉकडाउन के बीच सामूहिक नमाज की सूचना पर पहुँची पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया था। छतों से की गई पत्थरबाजी में पुलिस को जान बचाकर भागना पड़ा था। बाद में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

दरअसल तीन दिन पहले पूरे अलीगढ़ जिले में कोरोना का एक भी मामला नहीं था, लेकिन सोमवार को जिले में कोरोना पॉजिटिव घोषित हुए उस्मानपाड़ा के 55 वर्षीय मरीज ने अचानक से दम तोड़ दिया। वहीं, मंगलवार को उसकी बेटी और बहनोई को रैपिड टेस्ट में कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद से ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिले में एक बार फिर से सख्ती बढ़ा दी है।

पालघर पुलिस ने मॉब लिंचिंग पर बार-बार बोला झूठ: पहले कहा- साधुओं की हत्या हो गई थी, फिर बोले- वे घायल थे

महाराष्ट्र दो साधुओं सहित तीन लोगों की भीड़ द्वारा हुई निर्मम हत्या के मामले को न सिर्फ़ मीडिया बल्कि पालघर पुलिस ने भी दबाने की भरसक कोशिश की। अगर ऐसा नहीं होता तो घटना के तीन दिन बाद वीडियो वायरल होने पर पुलिस और प्रशासन हरकत में नहीं आता। पालघर पुलिस ने मॉब लिंचिंग को दबाने के लिए बार-बार बयान भी बदले।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी तभी बयान दिया, जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और जनाक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा था। यहाँ हम आपको बताएँगे कि वीडियो वायरल होने से पहले पुलिस कैसे इस मामले को दबाने के लिए अलग-अलग बातें बोल रही थी।

16 अप्रैल को हुई इस निर्मम घटना में महाराज कल्पवृक्ष गिरी और सुशिल गिरी महाराज की हत्या कर दी गई थी। इस खबर को स्थानीय और अंग्रेजी मीडिया द्वारा कवर किया गया। लेकिन ‘चोरी के शक में हत्या’ वाले एंगल के कारण लोगों का इस पर ध्यान ही नहीं गया।

अप्रैल 18 को ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में एक ख़बर आई थी, जिसमें कासा पुलिस थाने के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा था कि पुलिस ने पीड़ितों को बचाने की पूरी कोशिश की। लेकिन भीड़ उग्र और आक्रामक थी जिसकी वजह से पुलिस उन्हें बचा नहीं पाई। असिस्टेंट इंस्पेक्टर आनंदराव काले का कहना था कि भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया, पत्थरबाजी की।

हालाँकि, वीडियो में ठीक उसके उलट दृश्य दिख रहा है। पुलिस ने साधुओं को बचाने की कोई चेष्टा नहीं की। जब भीड़ ने उन साधुओं पर हमला किया तो आत्मरक्षा के लिए उन्होंने पुलिस का हाथ पकड़ा, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनका हाथ झटक दिया।

अब ‘पीटीआई’ में प्रकाशित काले के बयान को देखते हैं। इसमें उन्होंने कहा था कि जब तक पुलिस घटनास्थल पर पहुँची, तब तक तीनों की हत्या हो चुकी थी और उनके शव वहाँ पर पड़े हुए थे। साथ ही कहा गया कि उनकी गाड़ी भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। ये दावा भी झूठा है, क्योंकि वीडियो में पुलिस वाले वहाँ पर मौजूद दिख रहे हैं।

वहीं ‘द हिन्दू’ में अलग ही किस्म की रिपोर्ट प्रकाशित हुई। इसमें कहा गया कि पुलिस जब वहाँ पहुँची तो सभी पीड़ित घायल अवस्था में वहाँ पड़े हुए थे। कासा पुलिस थाने ने कहा था कि जब उनकी पेट्रोलिंग गाड़ी वहाँ पर पहुँची तो पाया कि तीनों घायल अवस्था में पड़े हुए थे। फिर ग्रामीणों ने पुलिस की गाड़ी को घेर कर वहाँ पत्थरबाजी की, जिसके बाद जवानों को वहाँ से जान भगा कर भागना पड़ा। ये कासा थाने के हवाले से द हिन्दू ने कहा है।

मॉब लिंचिंग पर पालघर पुलिस के बार-बार बदलते बयान के बीच इस मामले की जाँच सीआईडी को सौंप दी गई है। महाराष्ट्र सरकार कह रही है कि आरोपितों में कोई भी मजहब विशेष से नहीं है। बॉम्बे हाईकोर्ट में एक पीआईएल दाखिल कर अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने पूरी घटना की सीबीआई जाँच कराने की माँग की है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने महाराष्ट्र के डीजीपी को एक नोटिस भेज कर पुलिसकर्मियों की असंवेदनशीलता पर जवाब-तलब किया है। अब तक 110 लोगों की गिरफ्तारी की ख़बर है, जिनमें से 101 आरोपितों को 30 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

मॉब लिंचिंग के मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों के परिजनों ने भाजपा सरपंच चित्रा चौधरी को पुलिस से मिलीभगत के शक में कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपितों के परिजनों को शक है कि सरपंच ने ही मामले की जानकारी पुलिस को दी थी।

इस मामले को लेकर शिवसेना नेता विजय कृष्ण ने लाइव डिबेट के दौरान पार्टी से इस्तीफा देने का खुलासा किया। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सरकार हिंदुओं को कलंकित कर रही है और वह अपने द्वारा दिए गए बयानों को लेकर गिरफ्तार होने के लिए भी तैयार हैं।

हरियाणा: औरंगजेब के डर से बने थे मुस्लिम, अब 6 मुस्लिम परिवारों के 35 सदस्यों ने की हिंदू धर्म में घर वापसी

20 वर्षों से हिंदू रीति-रिवाज से जीवन यापन कर रहे हरियाणा के 6 मुस्लिम परिवारों ने बीते दिन एक घटना के बाद हिंदू धर्म में घर वापसी कर ली। डूम समाज से ताल्लुक रखने वाले 6 परिवारों के मुखिया ने कहा कि औरंगजेब के समय उनके पूर्वज हिंदू थे, जिन्होंने दवाब में आकर मुस्लिम धर्म को अपना लिया था, लेकिन आज हम सभी ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म में वापसी की है।

जानकारी के मुताबिक हरियाणा जींद जिले के दनौदा गाँव में रहने वाले 6 मुस्लिम परिवारों के बुजुर्ग निक्काराम का चार दिन पूर्व (18 अप्रैल) को देहांत हो गया। मुस्लिम धर्म के अनुसार शव को दफन किया जाता है, लेकिन परिवार के सदस्यों ने शव का हिंदू रीति से दाह संस्कार किया। इसी के बाद पूरे परिवार ने हिंदू धर्म में वापसी की इच्छा जताई और फिर घर पर हवन यज्ञ करा जनेऊ पहनकर परिवार के सभी 35 सदस्यों ने फिर से हिंदू धर्म में वापसी कर ली।

जानकारी के मुताबिक डूम जाति से ताल्लुक रखने वाला परिवार पिछले करीब 20 सालों से हिंदू रीति रिवाजों का पालन कर रहा था। वह हर वर्ष अपने घरों में हिंदू त्यौहारों को ही मनाते हैं। इन्हीं परिवार से रमेश कुमार ने बताया कि उन्होंने कभी भी कोई धार्मिक कार्य मुस्लिम रीति रिवाज से नहीं किया है। इतना ही नहीं परिवार में उनका एक भाई प्रवीण आरएसएस से संबंध रखता है और कावड़ भी लाता है।

औरंगजेब के डर से हरियाणा में पूर्वजों ने अपनाया था इस्लाम

रमेश कुमार के अनुसार उन्होंने छह महीने पहले मकान बनाया था। तब भी घर में हवन करवाया था। अब कोरोना के चलते गाँव में लगने वाले ठीकरी पहरे व नाके पर सरपंच को बोलकर खुद हवन करवाया। इतना ही नहीं गाँव में डूम जाति के छह परिवारों में से चार के यहाँ मंदिर बने हुए हैं और परिवार में सभी के नाम हिंदू धर्म के हैं। उन्होंने बताया कि औरंगजेब के समय उनके पूर्वज हिंदू थे और दवाब के चलते पूर्वजों ने मुस्लिम धर्म को अपना लिया था, लेकिन अब शिक्षित परिवार के युवकों को इसका ज्ञान हुआ तो पूरे परिवार ने सहमति से बिना किसी दवाब में आकर हिंदू धर्म को अपना लिया।

जागरण में प्रकाशित खबर की कटिंग

रमेश ने वर्तमान हालाात पर अपना दुख प्रकट करते हुए कहा कि कहा कि आज पूरे विश्व के साथ-साथ देश भी कोरोना वायरस से जूझ रहा है। बचाव के लिए पूरे देश में लॉक डाउन लगा हुआ है, लेकिन कुछ लोग प्रधानमंत्री के आदेशों को दरकिनार करके जमात में शामिल हुए और फिर हजारों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। ऐसा करना मानव धर्म के खिलाफ है।

वहीं गाँव के सरपंच पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि डूम के परिवार के सदस्यों ने बिना किसी दबाव और अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपना सकता है। इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं, बल्कि पूरे गाँव ने इनके इस फैसले का सम्मान किया है।

विश्व हिन्दू परिषद ने रखे थे धर्मान्तरण के बड़े आँकड़े

पिछले साल ही विश्व हिन्दू परिषद् ने भी जो स्वेच्छा से हिन्दू धर्म में वापस आना चाहते हैं उनका स्वागत करते हुए यह कहा था कि बड़े पैमाने पर इस्लाम और ईसाईयत में होने वाले मज़हबी मतांतरण देश पर भी एक हमला हैं, और देश के लोगों को बाँट देने की एक साजिश हैं। उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद की माँग है कि सरकार मज़हबी मतांतरण के खिलाफ एक कठोर कानून लेकर आए।

सीकर में प्रवासी मजदूरों का कमाल: जिस स्कूल में क्वारंटाइन कर रखे गए हैं बदल दिया उसका रूप

कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिए जब से लॉकडाउन हुआ है प्रवासी मजदूरों के फॅंसने की खबरें अलग-अलग शहरों से आती रही है। लेकिन, राजस्थान के सीकर में प्रवासी मजदूरों ने अपनी मेहनत से एक स्कूल का रूप ही बदल दिया है।

सीकर के पलसाना गॉंव के एक स्कूल में प्रवासी मजदूरों को क्वारंटाइन कर रखा गया था। पुताई कर प्रवासी मजदूरों ने इस इस स्कूल को नया रूप दे दिया है।

राजस्थान पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार पलसाना कस्बे के शहीद सीताराम कुमावत व सेठ केएल ताम्बी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। यहाँ इस समय हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश के 54 मजदूर रखे गए हैं। मजदूरों के मुताबिक, वे मेहनतकश लोग हैं। खाली बैठने से बीमार हो जाते। इसलिए स्कूल की पुताई कर दी।

राजस्थान पत्रिका के सीकर संस्करण में प्रकाशित खबर

मजदूरों का कहना है कि गाँव के सरपंच और गाँव के भामाशाहों ने उनके रहने-खाने-पीने की इतनी अच्छी व्यवस्था की, जिसकी वे कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे। बस इसी के बदले उनके मन में गाँव वालों के लिए कुछ करने की बात आई और उन्होंने स्कूल की पुताई शुरू कर दी।

खबर के मुताबिक उन्होंने बीते शुक्रवार को खुद पहल करके सरपंच से रंग-रोगन का सामान लाकर देने का कहा। इसके बाद सरपंच और विद्यालय स्टाफ की ओर से सामग्री उपलब्ध कराने के बाद मजदूरों ने अपना काम शुरू किया। इस दौरान शिविर का निरीक्षण करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव जगत सिंह पँवार भी सेंटर पर पहुँचे। उन्होंने निरीक्षण के बाद सेंटर पर ठहरे लोगों से काफी देर तक बात की। वे इन प्रवासी मजदूरों को काम करता देख काफी खुश भी हुए। जगत सिंह पँवार ने कहा कि यहाँ के सरपंच, विद्यालय स्टाफ एवं भामाशाहों के साथ प्रवासी लोगों की ओर से एक परिवार की तरह किया जा रहा कार्य अन्य सेंटर्स के लिए रोल मॉडल है।

बता दें, जिस तरह गाँव वालों के सेवाभाव को देखकर सभी मजदूर बेहद खुश है, उसी तरह उनके इस काम को देखकर गाँव वाले भी मुग्ध हैं। पलसाना के सरपंच रूप सिंह शेखावत बताते है, प्रशासन की ओर से सेंटर स्थापित करने के बाद प्रवासी लोगों के भोजन पानी व ठहरने की जिम्मेदारी दी गई। अब प्रवासी लोगों ने खुद कार्य करने की इच्छा जताई, तो उन्हें पुताई के लिए सामान उपलब्ध करवा दिया गया। उनके इस व्यवहार से पूरा गाँव अभिभूत है।

स्कूल के प्रधानचार्य का कहना है कि पिछले 9 साल से रंग-रोगन का काम नहीं हुआ था। जब मजदूरों ने अपनी ओर से इच्छा व्यक्त की तो सभी शिक्षकों ने वेतन से सामग्री लाकर दी। इस काम के लिए मजदूरों ने भी पैसे लेने से मना कर दिया।

गौरतलब है कि जिस राजस्थान से ये सुखद खबरें आई हैं। उसी राजस्थान से बीते दिनों पुलिसकर्मियों पर हमले की खबर आई थी। जहाँ स्थानीयों द्वारा कोरोना योद्धाओं को बेहरमी से पीटा गया था। इस दौरान उनपर लाठी-डंडे और तलवार से हमला हुआ था।