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पिछले 24 घंटे में कोरोना के 678 नए मामले, 33 लोगों की संक्रमण से मौत: स्वास्थ्य मंत्रालय

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार (अप्रैल 10, 2020) को बताया कि देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 678 नए मामले सामने आए हैं। गुरुवार को 16002 सैंपल की जाँच की गई। इनमें से केवल 0.2 फीसदी ही पॉजिटिव आए हैं। अभी समुदायिक संक्रमण नहीं है। 33 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है और 503 लोग ठीक भी हुए हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेट्री लव अग्रवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “कल, हमने 16002 परीक्षण किए। इनमें से केवल 0.2% मामलों में पॉजिटिव केस आए। एकत्र किए गए सैंपल के आधार पर, संक्रमण दर अधिक नहीं है।” इसके बाद मंत्रालय ने यह भी आश्वासन दिया कि देश में अभी तक सामुदायिक संक्रमण नहीं है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं।

उन्होंने बताया कि सरकार ने रैपिड डायग्नोस्टिक्स किट को भी मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक ट्रांसमिशन नहीं होने के बावजूद हमें जागरूक और सतर्क रहना होगा। उन्होंने इस दौरान जानकारी दी कि जाँच के लिए 146 सरकारी और 76 प्राइवेट लैब हैं। उनके अनुसार, पहले 100 की संख्या में टेस्ट किए जा रहे थे। मगर अब 2 दिन में 16 हजार टेस्ट किए हैं।

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स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर संयुक्त सचिव ने कहा कि कोविड-19 से लड़ने में स्वास्थ्यकर्मी मोर्चा संभाले हुए हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार हमारे लिए हानिकारक है। उन्होंने कहा कि उनके साथ दुर्व्यवहार की घटनाएँ उनके मनोबल को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। 

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन गोलियों के बारे में की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि हमारे पास 1 करोड़ हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन गोलियों की घरेलू आवश्यकता है, जबकि हमारे पास अभी 3.28 करोड़ गोलियाँ उपलब्ध हैं। इससे पहले उन्होंने इस संबंध में आश्वस्त किया कि देश में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की कोई कमी नहीं होगी। मंत्रालय ने कहा कि न कोई कमी है और न ही भविष्य में ऐसा होने की कोई संभावना है।

बता दें, कोरोना वायरस का प्रकोप वर्तमान में देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल गया है। पिछले 24 घंटों में 678 मामले आए हैं। इसके बाद कुल 6412 मामलों की पुष्टि हो गई है। इनमें से 71 विदेशी हैं। इसके अलावा पिछले 24 घंटे में 33 और लोगों की मौत के साथ आँकड़ा 199 के पास पहुँच गया है।

‘यहाँ मोदी का नहीं हमारा कानून चलता है’: दीया जलाने पर रेवंत सिंह की हत्या, हमलावर मुस्लिम पड़ोसी

रेवंत सिंह मर गए। उनका कसूर यह था कि उन्होंने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन थाली-ताली बजाई थी। रामनवमी पर अपने घर में दीया जलाया था। यह उनके पड़ोस में रहने वाले कुछ मुस्लिम युवकों को नागवार गुजरा और उन्होंने रेवंत पर एक दिन घात लगाकर हमला कर दिया। 5 दिन कोमा में रहने के बाद 9 अप्रैल को उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना राजस्थान की है।

रेवंत की मौत ने उनके पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया है। गड़ी चंपावत निवासी सांग सिंह (राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना जैसलमेर के जिला अध्यक्ष) और मूल सिंह राठौड़ (माड़वा अध्यक्ष, राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना) ने ऑपइंडिया को बताया कि रेवंत जैसलमेर के माड़वा गाँव के रहने वाले थे। उनकी पत्नी तीन साल से मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और हर माह उन्हें इलाज के लिए अस्पताल जाना होता है। एक भाई है, उनकी मानसिक हालत भी ठीक नहीं है। चार छोटे बच्चे हैं, जिनके खाना-पीना बनाने से लेकर सारी जिम्मेदारी अकेले रेवंत पर ही थी।

‘थाली-घंटी नहीं बजेगी, यहाँ मोदी नहीं हमारा राज चलता है’

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर कोरोना संक्रमण से मुकाबले में अपनी जान की परवाह नहीं करने वालों के प्रति आभार जताने के लिए पूरे देश ने 22 मार्च को थाली, ताली, शंख, घंटी बजाई थी। लेकिन मुस्लिम बाहुल्य इलाके में रहने वाले रेवंत को ऐसा करने पर धमकी दी गई।

जनता कर्फ्यू के दिन घंटी-थाली बजाने पर पड़ोस में ही रहने वाले 7-8 गुंडों ने घर जाकर उन्हें धमकाया। उनके साथ धक्का-मुक्की की। रेवंत सिंह को धमकी देते हुए कहा कि यहाँ किसी मोदी का नहीं, बल्कि उनका कानून चलता है। जैसा वो कहेंगे उन्हें मानना होगा।

रेवंत सिंह के भतीजे ने भणियाणा थाने में दिलदार खां पुत्र शहीद खां, फिरोज खां पुत्र शहीद खां और इकबाल पुत्र रहमतुल्ला खां के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज करवाया है। मारपीट की इस घटना में रेवंत सिंह बुरी तरह से घायल हो गए थे। 5 दिन तक कोमा में रहने के बाद बृहस्पतिवार (अप्रैल 09, 2020) को मौत हो गई। मारपीट की यह घटना 4 अप्रैल को माड़वा गाँव में हुई थी।

ऑपइंडिया से बातचीत में हिन्दू संगठनों ने बताया कि रेवंत सिंह की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। लेकिन उन्होंने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन थाली-घंटी बजाने के बाद रामनवमी के दिन दीपक जलाए थे। इस कारण स्थानीय मुस्लिम उनसे नाराज थे और घर में घुस धमकाया भी था।

राशन लेकर लौट रहे थे घर, घात लगाकर किया हमला

रेवंत सिंह पर उस वक़्त हमला किया गया जब वे राशन की दुकान से लौट रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर रेवंत सिंह को स्थानीय हिन्दू परिवारों और करणी सेना ने कुछ रुपए इकट्ठा कर नजदीकी अस्पताल में भर्ती किया, जहाँ पाँच दिन तक कोमा में रहने के बाद उनकी मृत्यु हो गई।

राष्ट्रीय करणी सेना के जिलाध्यक्ष ने बताया कि रेवंत सिंह का शव अभी भी राजस्थान के मथुरादास माथुर अस्पताल में ही है। इस मामले में आठ व्यक्तियों के शामिल होने की बात भी सामने आई है, जिनमें से एक की गिरफ्तारी हो चुकी है। रेवंत सिंह के साथ मारपीट करने वालों पर हिन्दू संगठनों ने कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने बताया कि यह इलाका मुस्लिम आबादी वाला है और वर्तमान में सीएम अशोक गहलोत मंत्रिमंडल के सालेह मोहम्मद (Saleh Mohammad) विधायक हैं।

ज्ञात हो कि हाल ही में दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में दंगाइयों ने एक चाय वाले की दुकान सिर्फ इसलिए जला दी थी क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ किया करता था। रेवंत सिंह के साथ हुआ यह हादसा भी इसी घटना से मिलता-जुलता नजर आता है।

रेवंत सिंह की मृत्यु से आक्रोशित भाजपा नेता महंत प्रतापपुरी ने कहा – “यह मारपीट द्वेष के कारण हुई थी। ये लोग रेवंत सिंह के पीएम मोदी की अपील पर थाली बजाने से नाराज थे। इसी कारण उन्होंने उसे रास्ते में रोका और उसे बुरी तरह से मारा।”

मृतक रेवंत सिंह के बच्चे और उनका घर –

महंत प्रतापपुरी ने आरोपितों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की अपील की है और कहा है कि आरोपितों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए। वहीं एसएसपी किरण जंग ने कहा कि जाँच के बाद हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है।

बिहार में 60 संक्रमित: कोरोना का हॉटस्पॉट बना सीवान, एक ही परिवार के 23 पॉजिटिव

बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने दो और लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि कर दी है। दोनों ही सीवान के रहने वाले हैं। इनमें एक 28 साल का नौजवान है, जबकि दूसरी 10 साल की बच्ची है। ये दोनों भी ओमान से लौटे कोरोना पॉजिटिव युवक के परिवार से हैं। अभी के आँकड़े मिलाकर सिर्फ इस परिवार के 23 सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसी के साथ बिहार में कोरोना के कुल मरीजों की तादाद बढ़कर 60 हो गई है।

बिहार में पिछले 24 घंटे के भीतर कोरोना के 17 नए पॉजिटिव केस पाए गए हैं, जिसके बाद राज्य में हड़कंप मच गया है। बिहार का सीवान जिला अब कोरोना का हॉटस्पॉट बन गया है। शुक्रवार की सुबह आई जाँच रिपोर्ट में इसी जिले के दो केस पॉजिटिव मिले हैं जो रघुनाथपुर प्रखंड के उसी गाँव से जुड़े हैं जहाँ के एक मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री ओमान की है। 

इसके साथ ही सिर्फ सीवान जिले में ही कोरोना के कुल 29 मामले पॉजिटिव पाए गए हैं जिसमें से 23 एक ही परिवार के हैं। हालाँकि इनमें से चार लोग ठीक हो चुके हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें होम क्वारंटाइन में रखा गया है। परिवार के अन्य 10 सदस्यों के कोरोना टेस्ट का रिजल्ट आना अभी बाकी है। नए संक्रमितों में 10 साल की एक बच्ची और 28 साल का एक पुरुष है। 

बता दें कि यह व्यक्ति 16 मार्च को ओमान से लौटा था और 4 अप्रैल को उसे कोरोना पॉजिटिव पाया गया। ओमान से आने के बाद वह होम क्वारंटाइन में रहने की जगह गाँव में घूमता और लोगों से मिलता रहा, जिसके चलते बीमारी फैली। गाँव के एक ही परिवार के इतने लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बिहार के तीन जिलों सीवान, बेगूसराय और नवादा की सीमाएंँ सील कर दी गई हैं। तेजी से सामने आ रहे मामलों के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों से अपील की है कि वो अगर कहीं बाहर से आए हैं तो अपनी ट्रैवल हिस्ट्री न छिपाएँ।

इससे पहले मंगलवार की शाम इसी गाँव के चार कोरोना संक्रमित मरीज पाए गए थे। इसमें तीन महिलाएँ और एक पुरुष शामिल हैं। पटना से सूचना मिलने के बाद सभी चार संक्रमितों को देर रात जिला प्रशासन ने बस से मुख्यालय बुलवाया और जाँच के लिए पटना भेज दिया। सीवान में अचानक इतने मामले सामने आने से लोगों के बीच दहशत फैल गई है। आशंका जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में संक्रमितों का आँकड़ा तेजी से बढ़ सकता है।

कानपुर: डॉक्टरों पर थूकने वाले जमाती अब उन्हीं से रो-रोकर माँग रहे जीवन की भीख

डॉक्टरों पर थूकने वाले, उन पर हमला करने वाले, नर्सों के सामने नग्न होने वाले, उनके सामने अश्लील हरकतें करने वाले, अस्पताल में शौच करने वाले, अस्पताल से भागने वाले, दवा नहीं खाने वाले आदि-आदि कारनामे कर मनमानी करने वाले जमाती अब डॉक्टरों के सामने रो-रोकर उनसे अपने जीवन की भीख माँग रहे हैं। कुछ ऐसी ही खबर उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर से आई है, जहाँ एक अस्पताल में जमाती भर्ती हैं।

एनबीटी की खबर के मुताबिक कानपुर के हैलट अस्पताल स्थित आइसोलेशन वॉर्ड में तबलीगी जमात से जुड़े जिले के कई लोग भर्ती हैं। शुरुआत में इन जमातियों ने इलाज में अस्पताल के डॉक्टरों का सहयोग नहीं किया था। यहाँ तक कि इन जमातियों पर डॉक्टरों के साथ बदसलूकी करने और उनके ऊपर थूकने के भी आरोप लगे थे। लेकिन अब जब इन लोगों की स्थिति बिगड़ने लगी है तो ये डॉक्टरों के सामने रोते-बिलखते उनसे जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं।

एनबीटी ऑनलाइन ने इस मामले में लाला लाजपत राय अस्पताल की प्रधानाचार्य आरती लालचंदानी से बात की तो उन्होंने कहा, “अब अस्पताल में भर्ती संक्रमित जमातियों को अपनी भूल का एहसास हो गया है। इससे पहले वे संक्रमण फैलाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे थे, लेकिन पूरे विश्व में बिगड़ते हालात को देख उनके व्यवहार में बदलाव आया है। अब वे आसानी से दवाइयाँ खा रहे हैं, क्योंकि यह उनके भले के लिए ही है।”

सीएमओ डॉक्टर अशोक कुमार शुक्ला ने कहा, “शुरुआत में ये तीनों वक्त पर दवा नहीं खाते थे, डॉक्टरों का सहयोग भी नहीं करते थे। अब वे पूरी तरह से डॉक्टर्स, नर्सों की बात मान रहे हैं। बाकी रोना वगैरह यह मनोवैज्ञानिक असर है। जब भी कोई शख्स बहुत ज्यादा डर जाता तो इस तरह की प्रतिक्रिया देता है।”

पिछले दिनों कानपुर स्थित लाला लाजपत राय अस्पताल की प्रधानाचार्य आरती लालचंदानी ने बताया था कि चिकित्सालय के कुछ कर्मियों ने आरोप लगाया है कि आइसोलेशन वॉर्ड में रखे गए कुछ मरीजों ने उनके साथ अभद्रता की। आपको बता दें कि कि इससे पहले दिल्ली गाजियाबाद से भी जमातियों द्वारा डॉक्टरों के साथ अभद्रता करने की खबरें आई थीं। इस पर गाजियाबाद की नर्सों ने सीएमओ से शिकायत भी की थी।

गौरतलब है कि देश में लगातार कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती चली जा रही है। उत्तर प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 4, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 410 हो चुकी है। राहत की बात यह है कि इनमें से 31 लोग अब तक ठीक होकर अस्पतालों से अपने घर वापस जा चुके हैं। वहीं पूरे देश में कोरोना मरने वालों की संख्या 199, जबकि संक्रमित लोगों की संख्या 5709 हो गई है।

मुंबई: चेकपॉइंट पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर को बाइक से शेख नईम ने 25 फीट घसीटा, हुआ गिरफ्तार

देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान मुंबई की पी.डी मेल्लो रोड पर बने पुलिस चेकपॉइंट के पास एक बाइक चालक ने पुलिस अधिकारी द्वारा रोके जाने पर उन्हें टक्कर मारकर बुरी तरह जख्मी कर दिया। जानकारी के अनुसार, जब पुलिस के निर्देश के बावजूद चालक नहीं रुका तब पुलिसकर्मी ने युवक की बाइक का हैंडल पकड़कर उसे रोकने की कोशिश की। लेकिन उसने उस वक्त रुकने की जगह स्पीड़ बढ़ा ली और अधिकारी को सड़क पर घसीटते हुए आगे ले गया। गुरुवार को घटी इस घटना में डोंगरी थाने के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर गंभीर रूप से चोटिल हुए। उनके हाथ, पाँव और कंधे में चोट आई। बाद में मौक़े पर तैनात अन्य पुलिसकर्मी ने बाइक चालक को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसकी पहचान खजाबी शेख नईम के रूप में हुई।

डोंगरी पुलिस थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर अराफत सिद्दकी ने इस संबंध में बताया, नईम पर भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसपर आरोप है कि उसने ड्यूटी पर तैनात एक सुरक्षाकर्मी को उसका कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने के इरादे से चोट पहुँचाई। उसे हिरासत में लेने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने शुक्रवार तक के लिए उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया।

गौरतलब है कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने के अलावा नईम ने चेकप्वाइंट पर तैनात पुलिस टीम के रुकने के आदेश के बावजूद अचानक अपनी बाइक की गति को बढ़ाया और भागने के लिहाज़ से आगे बढ़ने की कोशिश की। मगर, इस दौरान असिस्टेंट इंस्पेक्टर विजेंद्र धुरत उसके बाइक के रियर हैंडल को पकड़ने में कामयाब रहे। इसके बाद आरोपित नईम ने उन्हें करीब 25 फीट दूर तक घसीटा।

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मगर, थोड़ी आगे जाकर नईम अपना संतुलन खो बैठा और धुरत के साथ बाइक से गिर गया। बाइक भी दूर जा गिरी। इस वाकये में धुरत के हाथ, पैर और कंधे में चोटें आईं। बाद में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया और मौक़े पर ड्यूटी पर तैनात अन्य पुलिस कर्मियों द्वारा नईम को गिरफ्तार कर लिया गया।

बता दें, कोरोना महामारी के बीच सुरक्षाकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की खबरें आम होती जा रही हैं। कल की यदि बात करें तो महाराष्ट्र के औरंगाबाद में जिलाधिकारी दफ्तर के पास की एक वीडियो वायरल हुई थी। जिसमें 5 लोगों का समूह पुलिस अधिकारियों को परेशान कर रहा था। इसके अलावा 26 मार्च को भी लॉकडाउन के दौरान ताजूद्दीन और कुतुबुद्दीन नाम के 2 युवकों ने बंगलुरू पुलिस को चोट पहुँचाई थी। इसके बाद यूपी, बिहार, झारखंड, इंदौर से ऐसे कई मामले सामने आए।

कमलनाथ ने 90 देशों में IIFA टेलिकास्ट के लिए रखे थे ₹700 करोड़, अब कोरोना से लड़ने पर खर्च होंगे

मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने भोपाल और इंदौर में इंटरनेशनल इंडियन फिल्म अकादमी यानी ‘आइफा’ सेरेमनी आयोजित करवाने के लिए कमलनाथ सरकार द्वारा आवंटित 700 करोड़ रुपए मुख्यमंत्री सहायता कोष में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है। ‘आइफा’ का आयोजन मार्च 2020 में में किया जाना था। 700 करोड़ रुपए खर्च कर 90 देशों में इसका टेलिकास्ट करने का प्लान था।

कमलनाथ की योजना इस मेगा इवेंट के जरिए राज्य की ब्रांडिंग करनी थी। उस समय भी शिवराज सिंह चौहान ने तत्कालीन एमपी सरकार को सलाह दी थी कि इस आयोजन पर इतना पैसा खर्च करने की जगह इसका इस्तेमाल किसानों की कर्ज माफ़ी तथा बाढ़ राहत में किया जाना चाहिए।

शिवराज सिंह चौहान ने ‘आइफा’ के कैंसिल होने के मौके पर कहा था कि ‘आइफा’ प्रदेश में बड़े स्तर पर प्लान किया गया था। लेकिन वर्तमान समय में यह पैसा COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में उपयोग करने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में ट्रांसफर किया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक 259 संक्रमण के मामले सामने आए है। इनमें 16 की मौत हो चुकी है। अब तक रिकवरी शून्य है।

मध्य प्रदेश में कोरोना मामलों में आई अचानक तेजी के कारण राज्य के मुख्यमंत्री ने बुधवार को तीन बड़े शहरों भोपाल, इंदौर और उज्जैन को पूरी तरह से सील करने का फैसला किया था। साथ ही संक्रमण के खतरे को देखते हुए 14 जिलों को पूरी तरह लॉकडाउन करने का भी निर्णय लिया गया है।

राज्य सरकार ने आवश्यक सेवाएँ प्रबंधन अधिनियम (एस्मा) को भी तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इससे COVID-19 के खिलाफ जारी लड़ाई के दौरान राज्य में जरूरी सेवाओं की आपूर्ति में बाधा नहीं आएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा, “जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कोई दिक्क्त न आने पाए। कोई भी व्यक्ति इन क्षेत्रों में न दाख़िल हो सकेगा न इनसे निकल पाएगा। प्रत्येक विभाग के संसाधनों और सेवाओं का कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।” मुख्यमंत्री का यह निर्णय राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य की स्थिति की समीक्षा के बाद आया।

हरियाणा: सर्वे के लिए गई आशा कर्मी व महिला पुलिसकर्मी पर हमला करने वाले जावेद, नदीम, इशाक, आजाद गिरफ्तार, 5 की तलाश जारी

हरियाणा के पंचकुला में आशा कर्मचारी, आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व महिला पुलिसकर्मी पर हमला करने के आरोप में पुलिस ने 4 युवकों को गिरफ्तार किया। युवकों की पहचान जावेद, नदीम, इशाक और आजाद के रूप में हुई। पुलिस ने इन्हें पकड़ने के बाद लोकल कोर्ट में पेश किया। वहाँ से इन्हें 14 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा दिया गया।

सेक्टर 16 पुलिस चौकी इंचार्ज जगदीश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा के निर्देशानुसार आशा वर्करों की एक टीम पुलिसकर्मियों के साथ सर्वे के लिए इंदिरा कॉलोनी गई थी। जहाँ पर कुछ युवकों ने उन्हें सर्वे करने से रोकने के लिए बहस शुरू कर दी। जब पुलिस ने इसमें हस्तक्षेप किया तो भीड़ और हिंसक हो गई। थोड़ी देर बाद उन्होंने पुलिस का कॉलर पकड़ लिया और आशा वर्करों व पुलिसकर्मियों की टीम पर हमला किया। 

हमले में महिला पुलिस कर्मी घायल हो गई। जिसकी सूचना मिलने के बाद, पुलिस ने 9 आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इनमें से 4 आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए हैं। जबकि 5 आरोपित अभी फरार हैं। सेक्टर 14 के थाने में इन पर धारा 188, 186, 323 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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जानकारी के अनुसार, बुधवार से आशा वर्करों की एक टीम पुलिस की टीम को साथ लेकर इंदिरा कॉलोनी में डोर टू डोर जाकर सर्वे कर रही थीं। लेकिन गुरुवार को सर्वे के दौरान कुछ युवकों ने टीम का विरोध करना शुरू कर दिया। फिर उग्र युवकों ने आशा वर्करों व पुलिस के समझाने पर भी उनकी बात नहीं मानी और उन पर हमला बोल दिया। इस हमले में महिला पुलिस कर्मी घायल हो गई। 

हमले के बाद आरोपित मौके से फरार हो गए। सूचना पाकर सेक्टर-16 पुलिस मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने 9 आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करके 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद इन्हें अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उनको 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हिसार जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार आरोपितों का नाम नदीम, जावेद, ईसाक और आज़ाद है।

गौरतलब है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। इन मामलों में अधिकांश जगहों पर आरोपित मुस्लिम पाए जा रहे हैं, जो कभी स्वास्थ्यकर्मियों के कार्य को एनआरसी से जोड़ रहे हैं तो कभी सुरक्षाकर्मियों व सफाईकर्मियों पर थूक रहे हैं। पिछले दिनों का मामला भी याद दिला दें जब तबलीगी जमात के लोग अस्पताल में नर्सों के सामने नंगे होकर घूमने लगे थे और उनसे अश्लील बातें कर रहे थे।

भागलपुर में शब-ए-बारात पर पुलिस बनी निशाना: कब्रिस्तान के पास इकट्ठा होने से रोका तो पथराव, फायरिंग

गालीगलौज, हाथापाई, पथराव, गोलीबारी। यह सब कुछ बिहार के भागलपुर में पुलिस को गुरुवार की रात झेलना पड़ा। शब-ए-बारात पर एक कब्रिस्तान के बाहर जमा हुई भीड़ को हटाने पहुँची पुलिस पर हमला किया गया। गनीमत ये रही कि किसी पुलिसकर्मी को गोली नहीं लगी, लेकिन पत्थरबाजी में होमगार्ड का एक जवान बुरी तरह घायल हो गया।

मामला हबीबपुर के मोमिन टोला स्थित कब्रिस्तान का है। पुलिस दल पर पथराव की खबर पाकर सिटी एसपी सुशांत कुमार सरोज साथी पुलिसकर्मियों ट्रैफिक डीएसपी आरके झा, लॉ एंड ऑर्डर डीएसपी नेसार अहदम, पुलिस मुख्यालय के डीएसपी और कई थानों के थानाध्यक्ष जवानों के साथ वहाँ पहुँचे और मामले को शांत करने की कोशिश की।

इसके बाद पुलिस ने फ्लैग मार्च किया और लोगों से घर के अंदर रहने की अपील की। मस्जिद के लाऊडस्पीकर से भी मौलवियों ने लोगों से घर पर ही रहने की अपील की तब कहीं जाकर लोग अपने-अपने घर लौटे। पुलिस ने पूरे इलाके में डेरा डाल दिया है।

बता दें कि गुरुवार की शाम हबीबपुर पुलिस गश्ती में मोमिन टोला स्थित कब्रिस्तान के पास पहुँची तो देखा कि काफी संख्या में दूसरे मजहब के युवक कब्रिस्तान की तरफ जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें एक साथ इतनी संख्या में उधर जाने से रोका तो वे पुलिस से उलझ गए। पुलिस ने खदेड़ कर कुछ युवकों को पकड़ने की कोशिश की पर वे भागने लगे। तभी वहाँ पर खड़े युवकों ने पहले गाली-गलौज की और फिर पुलिस से हाथापाई करने लगे। कुछ ही देर में उन्होंने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।  

पुलिस ने उन लोगों को चेतावनी दी कि अगर लॉकडाउन का उल्लंघन किया जाएगा तो सख्त कार्रवाई होगी। हबीबपुर थानाध्यक्ष को उपद्रवियों को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई के लिए कहा गया है। एसएसपी आशीष भारती ने इस बाबत कहा है, “लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का जो भी पालन नहीं करेंगे उन पर कार्रवाई होगी। हबीबपुर की घटना में शामिल लोगों को चिह्नित करने के लिए कहा गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।”

उल्लेखनीय है कि शब-ए-बारात दूसरे समुदाय के लोगों के लिए इबादत और फजीलत की रात होती है। माना जाता है कि इस रात को अल्लाह की रहमतें बरसती हैं। शब-ए-बारात की पाक रात को समुदाय के लोग इबादत करते हैं और अपने गुनाहों से तौबा करते हैं। इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, इस रात को अगर सच्चे दिल से इबादत की जाए और गुनाहों से तौबा की जाए तो अल्लाह हर गुनाह से पाक कर देता है।

शब-ए-बारात की पूरी रात समुदाय के पुरुष मस्जिदों में इबादत करते हैं और कब्रिस्तान जाकर मृतक परिजनों की तरफ से अल्लाह से माफी माँगते हैं। लेकिन इस साल लॉकडाउन की वजह से लोगों को घर पर ही रहकर इबादत करने की अपील की गई थी।

कैप्टन ने की पंजाब में कम्युनिटी ट्रांसमिशन की पुष्टि, मरकज से आए 15 लोगों की तलाश

कोरोना संकट से वैसे तो पूरा देश परेशान है, लेकिन पंजाब में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। दरअसल पंजाब में कोरोना वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन की पुष्टि करते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है, “कल (9 अप्रैल 2020) सामने आए 27 कोरोना पॉजिटिव मामलों में से अधिकांश कम्युनिटी ट्रांसमिशन के हैं। इनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। यह हमारे लिए काफी चिंता का विषय है।”

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से 651 लोग पंजाब लौटे हैं। अमरिंदर सिंह ने बताया कि इनमें से 636 ट्रेस कर लिए गए हैं जबकि 15 अन्य की तलाश जारी है।

उन्होंने कहा कि कुल मिला कर अब तक राज्य में 132 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 11 लोगों की मौत हो चुकी है। पंजाब में अब तक सिर्फ 2877 लोगों का सैंपल इकट्ठा किया गया है। खुद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मान रहे हैं कि यह आँकड़ा काफी कम है। उनका कहना है कि 2.80 करोड़ की आबादी वाले राज्य में सिर्फ 2877 लोगों का सैंपल इकट्ठा होना काफी नहीं है।

शुक्रवार को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि हम सिर्फ किसानों को लॉकडाउन में छूट देंगे, क्योंकि इस बार अच्छी फसल हुई है। कोरोना के आँकड़े भयावह हैं। चीजें अच्छी नहीं हैं और लोगों को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। अभी लॉकडाउन हटाना सही नहीं होगा। 

गौरतलब है कि इससे पहले अमरिंदर सरकार ने राज्‍य में मास्‍क पहनना अनिवार्य कर दिया था। सरकार की तरफ से कहा गया था कि घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश: लॉकडाउन के बीच फिर नमाज के लिए मस्जिद में हुए इकट्ठा, 40 पर FIR

कोरोना से जंग जीतने के लिए देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन जारी है। इसका पालन कराने के लिए पुलिस-प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी समुदाय विशेष का एक वर्ग बाज नहीं आ रहा। मध्य प्रदेश में लॉकडाउन के बीच गुरुवार को एक मस्जिद में 40 लोगों ने एकत्र होकर नमाज अदा की। इसकी जानकारी मिलने पर पुलिस ने सभी के खिलाफ में मुकदमा दर्ज किया है।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के एक गाँव की मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने के लिए जुट गए। इस बात की जानकारी जब पुलिस को हुई तो वह तत्काल मौके पर पहुँच गई। सामूहिक नमाज अदा करने के आरोप में 40 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस निरीक्षक मुकेश द्विवेदी ने बताया कि पुलिस को लॉकडाउन का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर लोगों के इकट्ठा होने की सूचना मिली थी। सूचना पर चौरई तहसील के खैरीखुर्द गाँव में गुरुवार रात को पहुँची पुलिस ने देखा कि एक मस्जिद में गाँव के सरपंच सहित 40 लोग सामूहिक तौर पर नमाज अदा कर रहे थे।

मुकेश द्विवेदी ने बताया कि इस पर पुलिस के गश्ती दल द्वारा सभी 40 नमाजियों के खिलाफ में धारा 144, धारा 188 और धारा 269 के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम और मध्य प्रदेश जन सुरक्षा कानून 1949 की संबद्ध धारओं के तहत मामला दर्ज किया गया हैं। चेतावनी देने के बाद सभी को जमानत पर छोड़ दिया गया है।

आपको बता दें कि छिंदवाड़ा में अब तक 4 कोरोना पॉजिटिव के केस सामने आ चुके हैं, जिनमें से 1 की मौत हो चुकी है। साथ ही मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ते मामले को देखते हुए जहाँ भी कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए हैं उन सभी इलाकों को प्रदेश सरकार ने पूरे तरह से सील कर दिया है। वहीं ऐसे लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों को होम क्वारंटाइन किया गया है।

माध्य प्रदेश में अब तक कोरोना से 16 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 259 हो गई है। गौरतलब हो कि गुरुवार को मध्य प्रदेश के इंदौर में देश के पहले कोरोना संक्रमित डॉक्टर ने दम तोड़ दिया था।