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वो 5 मौके, जब चीन से निकली आपदा ने पूरी दुनिया में मचाया तहलका: सिर्फ़ कोरोना का ही कारण नहीं है ड्रैगन

आज कुछ वामपंथी सिर्फ़ इसीलिए चिढ़ रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस को वुहान वायरस, चीनी वायरस कहा जा रहा है। जबकि सालों से वायरस या रोग का नामकरण उस जगह के नाम पर किया जाता रहा है, जहाँ से ये शुरू हुआ और चीन तो हमेशा से दुनिया को ऐसी आपदा देने में अभ्यस्त रहा है। इससे पहले भी कई ऐसे रोग और वायरस रहे हैं, जो चीन से निकला और जिन्होंने पूरी दुनिया में कहर बरपाया। आइए, आज हम उन 5 चीनी आपदाओं के बारे में बात करते हैं, जिसने दुनिया भर में तहलका मचाया।

H7N9 फ्लू

इसे आप बर्ड फ्लू के नाम से जनता हैं, जिसका पहला मामला शंघाई में आया था। बात में पता चला कि एक पोल्ट्री मार्किट में ये वायरस चिकेन्स से निकल कर मनुष्य में आ गया। इस इन्फेक्शन का पता तब चला, जब कई लोग इससे बीमार हो गए। हालाँकि, इस वायरस के मामले में ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन की उतनी ख़बर नहीं आई। इस आपदा के अब तक 5 स्टेज आ चुके हैं, जिसमें से ताज़ा 2017 में आया था। ये एक ऐसा वायरस है, जिसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता मानवों में नहीं है, इसीलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि इस पर नज़र नहीं रखा गया तो ये बड़ा तहलका मचाने की ताक़त रखता है।

SARS

‘Severe Acute Respiratory Syndrome (SARS)’ भी पहली बार 2002 में चीन में ही देखा गया था। चीन के युनान प्रान्त में दूर एक गुफा में चमगादड़ों को इस वायरस का स्रोत माना गया था। ये बात भी 15 साल बाद पता चली थी। ये दक्षिणी चीन से 37 देशों में फैला और इसने 750 लोगों की जान ले ली। वैज्ञानिक भी कहते हैं कि इसका कोई वैक्सीन मिलना मुश्किल है क्योंकि क्वारंटाइन से ही अब तक काम चलाया जाता रहा है। हालाँकि, अब संभव है कि इसके सम्पूर्ण इलाज की व्यवस्था हो जाए।

H5N1 बर्ड फ्लू

ये भी पहली बार हॉन्गकॉन्ग में दिखा था और उसके बाद से देश-विदेश की कई जंगली पक्षियों में पाया जाता रहा है। ये 1996 में पहली बार पाया गया था लेकिन 2002 में इसने अपना बड़ा असर दिखाया और एशिया, अफ्रीका और यूरोप से लेकर अरब जगत तक फ़ैल गया। इस वायरस के फैलने के बाद लोगों में तरह-तरह की बीमारियाँ होने लगीं और कई लोगों की मौत भी हो गई। ये वायरस भी अगर ह्यूमन टू ह्यूमन फैलने लगा तो बड़ी तबाही आ सकती है।

हॉन्गकॉन्ग फ्लू

ये एक ऐसा खतरनाक फ्लू था, जिसनें क़रीब 10 लाख लोगों की जान ले ली। ये 1968-69 में अपने चरम तक पहुँचा था। वियतनाम और सिंगापुर में ये काफ़ी फैला था। इसके बाद ये भारत, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप तक पहुँचा। 1969 में ये जापान, अफ्रीका और दक्षिण अफ्रीका तक पहुँचा। इससे 1 लाख लोग तो सिर्फ़ अमेरिका में ही मारे गए थे। हॉन्गकॉन्ग की तो इससे लगभग 15% जनसंख्या ही साफ़ हो गई थी।

एशियाई फ्लू

इसका पहला मामला फ़रवरी 1957 में सिंगापुर में आया था लेकिन इसकी उत्पति भी चीन से ही हुई थी। दक्षिण-पश्चिमी एशिया में भारत में भी इसके 10 लाख मामले सामने आए थे। इसने दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को तबाह कर दिया था।

बता दें कि कोरोना के मामले में भी दिसंबर 10, 2019 को ही चीन में कोरोना का पहला मरीज बीमार पड़ने लगा था। इसके एक दिन बाद वुहान के अधिकारियों को बताया गया कि एक नया कोरोना वायरस आया है, जो लोगों को बीमार कर रहा है। वुहान सेन्ट्रल हॉस्पिटल के डायरेक्टर ने 30 दिसंबर को इस वायरस के बारे में वीचैट पर सूचना दी। उन्हें जम कर फटकार लगाई गई और आदेश दिया गया कि वो इस वायरस के बारे में किसी को कुछ भी सूचना न दें।

इसी तरह डॉक्टर ली वेलिआंग ने भी इस बारे में सोशल मीडिया पर विचार साझा किए। उन्हें भी फटकार लगाई गई और बुला कर पूछताछ की गई। इसी दिन वुहान हेल्थ कमीशन ने एक ‘अजीब प्रकार के न्यूमोनिया’ के होने की जानकारी दी और ऐसे किसी भी मामले को सूचित करने को कहा।

2019 में लिखे एक लेख में ‘चाइनीज एक्सप्रेस’ ने SARS या फिर MERS की तरह कोई खतरनाक वायरस के सामने आने की शंका जताई थी और कहा था कि इसकी वजह चमगादड़ ही होंगे लेकिन बावजूद इसके लगातार लापरवाही बरती गई। उस लेख में ये भी कहा गया था कि ये वायरस चीन से ही आएगा। 2019 तो छोड़िए, 2007 में ही एक जर्नल में प्रकाशित हुए आर्टिकल में बताया गया था कि साउथ चीन में चमगादड़ जैसे जानवरों को खाने का प्रचलन सही नहीं है क्योंकि उनके अंदर खतरनाक किस्म के वायरस होते हैं। उस लेख में इस आदत को ‘टाइम बम’ की संज्ञा दी गई थी। चीन में जनता बड़े स्तर पर इससे प्रभावित हुई है और इसका दोष भी वहाँ की सरकार व प्रशासन का है।

‘मंदिर निर्माण से पहले ही भगवान श्रीराम ने PM केयर्स में दिए ₹11 लाख’: लोगों ने कहा- ये है सनातन संस्कार

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कोरोना वायरस से संक्रमण से उपजी आपदा के बीच पीएम केयर्स फंड में दान दिया है। ये दान राम मंदिर की तरफ से देश को दिया गया है। अब आप सोच रहे होंगे कि भव्य राम मंदिर का तो अभी निर्माण भी नहीं हुआ है लेकिन इसकी तरफ से पीएम केयर्स फंड में दान कैसे दे दिया, तो आपको बता दें कि ऐसा सच में हुआ है। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कहा है कि अभी राम मंदिर बनने में कितने रुपए लगेंगे इसका कोई अंदाज़ा नहीं है लेकिन मंदिर ने निर्माण से पहले ही देश के लिए दान देकर सनातन का महत्व दिखाया है।

विश्व हिन्दू परिषद् के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आज ग्यारह लाख रुपए का एक चेक कोरोना महामारी की रोकथाम हेतु महामंत्री श्री चम्पतराय व अन्य ट्रष्टियों द्वारा पीएम केयर्स फण्ड के नाम ज़िलाधिकारी अयोध्या को भेंट किया। उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने मन्दिर से पहले देशवासियों के कुशलक्षेम हेतु पीएम केयर्स फण्ड में दान देकर बहुत बड़ी कृपा की है। अब इस फण्ड में कभी कोई कमी नहीं आएगी। विहिप ने अपील की है कि हम सभी देशवासी व प्रवासी भारतीय भी अपना-अपना अंशदान देश को शीघ्रातिशीघ्र करें।

विनोद बंसल ने ‘जय श्री राम’ लिखते हुए इस बात की सूचना दी और साथ ही जिलाधिकारी के साथ ट्रस्टियों की तस्वीर भी शेयर की, जिसमें वो चेक सौंपते हुए दिख रहे हैं। साथ ही उन्होंने पीएम केयर्स फंड के अकाउंट डिटेल्स शेयर किए, ताकि अन्य लोग भी डोनेट कर सकें। बता दें कि पीएम केयर्स फंड में एक हफ्ते में 6500 करोड़ रुपए की धनराशि जमा हो गई है। जहाँ तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की बात है, इस ट्रस्ट की घोषणा की जानकारी ख़ुद पीएम मोदी ने दी थी। राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद इसका गठन किया गया था।

महाराष्ट्र: उद्धव सरकार के मंत्री ने अपने नितम्बों पर लगी आग की फोटोशॉप वाली फोटो शेयर की, जानिए क्यों

महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री जीतेन्द्र आव्हाड पर बड़ा आरोप लगा है। महाराष्ट्र पुलिस और आव्हाड के गुंडों ने मिल कर एक सिविल इंजीनियर की पिटाई की है। एनसीपी के बड़े नेता जितेंद्र के गुंडों ने महाराष्ट्र पुलिस के कॉन्स्टेबलों के साथ मिल कर इंजीनियर को मारा-पीटा। दरअसल, जितेंद्र ने पीएम मोदी द्वारा रविवार (अप्रैल 5, 2020) को रात 9 बजे 9 मिनट्स के लिए लाइट्स ऑफ करके दिये, मोमबत्ती जलाने के आव्हान का विरोध किया था। आव्हाड ने लोगों से कहा था कि वो पीएम मोदी का बायकाट करें। इंजीनियर ने जितेंद्र के इस बात का विरोध किया, जिसकी उसे ‘सज़ा’ दी गई।

वर्तक नगर पुलिस स्टेशन में इस सम्बन्ध में मामला दर्ज किया गया है। आरोप लगाया गया है कि आव्हाड ने पुलिस का ग़लत इस्तेमाल किया। महाराष्ट्र के विधान पार्षद निरंजन डावखरे ने इस मामले को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के समक्ष उठाया है। बता दें कि महाराष्ट्र में उद्धव के नेतृत्व में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार चल रही है। एनसीपी नेता सरकार में सबसे ज्यादा हावी हैं और अक्सर नेताओं की गुंडागर्दी की ख़बर आती रहती है।

जितेंद्र आव्हाड ने ट्विटर पर इस घटना के बारे में बोलने की जगह अपना ही नितम्बों वाला फोटो शेयर कर दिया। महाराष्ट्र भाजपा के आईटी सेल के सह-संयोजक प्रतीक कार्पे ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास इतनी हिम्मत है कि वो एनसीपी नेता के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकें? इस पर जितेंद्र ने उन्हें वो फोटो दिखाई, जो इंजीनियर अनंत करमुसे ने शेयर की थी। उन्होंने उस पोस्ट का स्क्रीनशॉट दिखा कर ये साबित करने का प्रयास किया कि उनके बॉडीगार्ड्स, गुंडों और पुलिस ने मिल कर जो किया, वो एकदम सही था।

जितेंद्र ने पूछा कि अगर प्रतीक के परिवार के किसी सदस्य की ऐसी तस्वीरें शेयर की जाए तो क्या वो इसका समर्थन करेंगे? उन्होंने कहा कि वो इस तरह की अराजकता का समर्थन नहीं करते। उन्होंने इसके बाद प्रतीक से पूछा कि इस पर उनकी क्या राय है? आरोप है कि जितेंद्र आव्हाड के गुंडों ने इंजीनियर के घर जाकर उन्हें उठाया और फिर पिटाई की। जिस चित्र को लेकर जितेंद्र बौखलाए हुए हैं, वो एडिटेड है। उसमें देखा जा सकता है कि वो माचिस लेकर अपने ही नितम्बों में आग लगा रहे हैं।

दलित महिला के हत्यारों को बचा रहे MLA फैयाज अहमद! काला देवी के बेटे ने बताई उस रात की पूरी कहानी

जब पूरा देश दीपक, मोमबत्ती, टॉर्च आदि जलाकर कोरोना वायरस जैसी महामारी की लड़ाई के खिलाफ एकजुटता दिखा रहा था, बिहार के मधुबनी में एक परिवार ने 70 साल की बुजुर्ग महिला काला देवी (उर्फ कैली देवी) की गला दबाकर हत्या कर दी। यह दिन था रविवार (अप्रैल 5, 2020) का। हत्या को अंजाम देने के बाद सुलेमान नदाफ, मलील नदाफ और शरीफ नदाफ फरार है। घटना जिले के रहिका प्रखंड के सतलखा मानी दास टोल की है।

इस बाबत हमने मृतक महिला काला देवी (पति: जवाहर मंडल) के बेटे सुरेंद्र मंडल से बात की। उन्होंने हमें इस घटना से संबंधित पूरी बात बताई और साथ ही कई सारे सवाल भी खड़े किए। सुरेंद्र मंडल ने बताया कि यह हिन्दू बहुल इलाका है। यहाँ पर समुदाय विशेष के सिर्फ दो ही परिवार रहते हैं और वो भी कहीं और से आकर बसे हुए हैं। शरीफ नदाफ का यहाँ पर ससुराल है। उसका घर रहिका के अंदर मजहबी बस्ती में है।

मधुबनी में दीप जलाने को लेकर विवाद: 70 वर्षीय हिंदू महिला की गला दबाकर हत्या की

सुरेंद्र ने बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर रात के 9 बजे कुछ बच्चे दीपक जलाने के बाद इधर-उधर खेल रहे थे। शरीफ नदाफ ने गाली-गलौज शुरू कर दी। भद्दी और गंदी गालियाँ देने के साथ ही कहा कि इस मुहल्ले में कोई भी बच्चा हिंदू का नहीं है, सभी बच्चे समुदाय विशेष की पैदाइश हैं। 

सुरेंद्र का परिवार दरवाजे पर बैठा ये सब सुन रहा था। लेकिन उन्होंने आरोपितों को जवाब नहीं दिया। बकौल सुरेंद्र आरोपित नशे में थे। इस वजह से उन लोगों ने उनके साथ उलझना मुनासिब नहीं समझा। वे लोग चुप रहे। 

इसके बाद सुलेमान नदाफ का बेटा मलीन नदाफ घर से बाहर निकला और एक बच्चे को धक्का देकर वहाँ से भगा दिया। इस पर सुरेंद्र ने आपत्ति जताते हुए कहा कि आप बच्चे को धक्का क्यों दे रहे हैं, ये आपके घर के आगे तो नहीं हैं। इन्हें खेलने दीजिए। अगर आप देश के प्रधानमंत्री की बात नहीं मान सकते तो फिर उल्लंघन भी मत कीजिए। जो पालन कर रहे हैं, उनको करने दीजिए। इसके बाद उसने बच्चे को छोड़ दिया और सुरेंद्र की घर की तरफ बढ़ गया। 

सुरेंद्र के घर के बाहर ही बेंच पर उनकी माँ काला देवी बैठी हुईं थीं। मलीन नदाफ ने काला देवी के सिर पर दो-तीन बार मारा। सुरेंद्र ने ये देखा लेकिन उन्होंने ये नहीं सोचा था कि वो ऐसा कुछ करेगा, इसलिए वो आगे बढ़ गए। सुरेंद्र के छोटे भाई भी वहीं पर थे। उन्होंने काला देवी के साथ हाथापाई करते हुए देखा तो वहाँ पर गए और उससे कहा कि आपने पी रखी है, आप यहाँ से जाओ। मगर इससे पहले ही मलीन नदाफ ने काला देवी के सिर पर मारने के बाद इतनी जोर से गला दबाया कि वह बेंच पर से नीचे गिर गईं।

मृतका काला देवी

उनके गिरने के साथ ही चीख-पुकार मच गई। उनको आँगन लाया गया। आँगन में काला देवी ने दो बार हिचकी ली और फिर वहीं पर दम तोड़ दिया। इसके बाद उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुरेंद्र ने कहा, “आक्रोश तो हम लोगों में इतना था कि सोचे उसके घर में आग लगा देंगे, मार देंगे। लेकिन हम लोगों ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। हम लोगों ने सब कुछ समाज के ऊपर छोड़ दिया कि वो लोग जैसा कहेंगे, वैसा ही करेंगे।”

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इधर वो लोग काला देवी को लेकर हॉस्पिटल गए और उधर वो तीनों फरार हो गए और 24 घंटे से ज्यादा बीतने के बाद भी प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इतनी बड़ी घटना होने के बाद तो अब तक कार्रवाई हो जानी चाहिए। घटना के बाद सुरेंद्र ने तुरंत मुखिया को बुलाया और इसका समाधान करने के लिए कहा। उन्होंने कहा, “आज यहाँ पर दो मजहबी परिवार रहकर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। अगर यहाँ पर हिन्दुओं का सिर्फ दो परिवार होता तो ये लोग कब का उजाड़ कर मार दिए होते, घर में आग लगा दिए होते। लेकिन हम लोगों ने कभी उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया। हमने कभी नहीं समझा कि ये लोग दूसरे समुदाय के हैं। आज हमारे साथ हुआ है। कल को किसी और के साथ हो सकता है।”

सुरेंद्र ने बताया कि घटना के बाद रात के 10-11 बजे पुलिस स्टेशन के बड़े बाबू को फोन कर जानकारी दी, लेकिन उनसे ठीक से बात नहीं हो पाई। इसके बाद उन्होंने 4 लोगों के साथ पुलिस स्टेशन जाकर तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई। फिर प्रशासन घर पर आकर पूरी जानकारी लेकर गई। पुलिस ने सुलेमान से भी फोन पर बात की। सुलेमान से पुलिस ने आधे घंटे में आने की बात कही। सुरेंद्र ने यह भी बताया कि उन्होंने जब आरोपितों के घरवालों से सुलेमान के नंबर माँगे तो उन्होंने बोला कि उनके पास नंबर नहीं है, लेकिन जब पुलिस ने माँगी तो उनकी बहू ने नंबर दे दिया।

वहीं प्रशासन की तरफ से किसी तरह का मदद मिलने की बात पर सुरेंद्र ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद फिर से प्रशासन उनके घर पर आ गई और जल्दी से अंतिम संस्कार करने के लिए कहने लगी। लेकिन वो लोग भी अड़े थे कि जब तक उनको इंसाफ नहीं मिलेगा, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसके बाद थाने की तरफ से कहा गया कि आप शव का दाह-संस्कार कर दीजिए, जो भी प्रक्रिया होगी, वो बाद में होगी। मुखिया जय प्रकाश चौधरी ने अंतिम संस्कार के लिए 3,000 की राशि दी।

राष्ट्रीय जनता दल के स्थानीय विधायक फैयाज अहमद पर आरोपितों को बचने और मामला रफा दफा करने के लिए प्रशासन पर दबाब बनाने का आरोप लग रहा है। सुरेंद्र ने बताया , “हम लोगों को विधायक से किसी तरह की सहायता नहीं मिलती है। समुदाय विशेष के परिवारों को उनकी तरफ से हर तरह से सहायता मिलती है। उन लोगों को छोटी से छोटी समस्या होती है, तो तुरंत समाधान होता है, क्योंकि वे उनकी बिरादरी के हैं। उनके साथ कुछ भी होता है तो विधायक फ़ैयाज़ अहमद और सरपंच फकरे आलम की गाड़ी तुरंत पहुँच जाती है, लेकिन हमारे साथ इतनी बड़ी घटना हो गई कोई नहीं आया।”

इस संबंध में विधायक फैयाज अहमद का पक्ष जानने के लिए हमने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया (बात होते ही हम उनके पक्ष से आपको अपडेट करेंगे।)। सुरेंद्र ने कहा, “वे उन दो परिवार (आरोपित)की हर समस्या में आते हैं और हमारे साथ इतना बड़ा कांड होने के बाद भी नहीं आए तो हम कैसे मान लें कि वे हमारे साथ हैं? आज अगर दूसरे मजहब के साथ कुछ होता तो विधायक फैयाज जी भी आते और फकरे आलम भी दौड़कर आता। लेकिन जब हमारे साथ हुआ तो कोई नहीं आया।” 

सुरेंद्र ने सरपंच फकरे आलम पर सुलेमान नदाफ, मलील नदाफ और शरीफ नदाफ की मदद का आरोप लगाया है। उसने बताया की फरार होने से पहले आरोपित फकरे आलम के पास ही गए थे। फकरे आलम इस मामले में समुदाय के नाम न आने देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हालत देखते हुए प्रशासन की तरफ से मौके पर एक कोतवाल को तैनात किया गया है। 

विहिप के जिलाध्यक्ष महेश प्रसाद और बीजेपी के विधानपार्षद सुमन महासेठ ने भी घटना की पुष्टि की है।हमने रहिका थाना प्रभारी के नंबर पर भी कई बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

कोरोना पॉजिटिव जमाती सफीद मियाँ कपड़े की रस्सी बनाकर अस्पताल की खिड़की से हुआ फरार, पुलिस की कई टीमें 12 घंटे उसे ढूँढती रहीं

कोरोना वायरस को देश के राज्य-राज्य तक पहुँचाने का काम करने वाले तबलीगी जमात के लोग अब प्रशासन की नाक में दम करने लगे हैं। अभी तक केवल इनके जगह-जगह छिपे होने की सूचना पाकर पुलिस इनकी तलाश कर रही थी। पर अब इन्होंने स्थिति ऐसी कर दी है कि प्रशासन इनकी पहरेदारी करने पर मजबूर है। 

जानकारी के मुताबिक, जमातियों से जुड़ा नया मामला उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के खेकड़ा से आया है। जहाँ एक 60 वर्षीय बुजुर्ग सफीद मियाँ कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद अस्पताल की ख़िड़की से निकलकर भाग गया। इसने इस काम को अंजाम देने के लिए चादर और अपने कपड़ों की रस्सी बनाई और फिर उसी के सहारे खिड़की के रास्ते से उतरकर फरार हो गया।

पुलिस-प्रशासन को जब इसकी सूचना मिली तो उनमें हड़कंप मच गया। पुलिस ने उसे खोजने के लिए कई टीमों को लगाया और मंगलवार सुबह तक यानी 12 घंटे के भीतर उसे खोज निकाला।

नेपाल से आए इस जमाती को 3 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। यह कोराना पॉजिटिव मरीज दिल्ली से आई 17 नेपालियों की जमात में शामिल था, जो रटौल गाँव के एक मदरसे मे ठहरा हुआ था। जाँच में इसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। पिछले चार दिनों से इसका बागपत जिले के खेखड़ा सीएचसी में इलाज चल रहा था। मगर, सोमवार की रात ये सबको चकमा देकर भाग गया।

मेरठ जोन के आईजी प्रवीण कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नेपाली बुजुर्ग रात को ही भागा था। उसकी खोज में कई टीमें लगाई गईं थी आखिरकार वह एक गाँव के पास बने ईंट के भट्‌ठे से पकड़ा गया। जिसके बाद उसे दोबारा अस्पताल भेज दिया गया।

बता दें अपराधियों की तरह अस्पताल से फरार हुए इस नेपाली बुजुर्ग के भागने की खबर सुनते ही एसएसपी बागपत ने आसपास के सभी जिलों में कोरोना पाॅजिटिव की तलाश के लिए लोगों से अपील की थी। एसएसपी के निर्देश पर जारी अपील में लिखा था कि अस्पताल से भागे कोरोना पाॅजिटिव नेपाल के सुनसारी निवासी 60 वर्षीय जमाती सफीद मियाँ का उपचार सीएचसी खेकड़ा में चल रहा था। यह उपचार के दौरान अस्पताल से भाग गया है। यह व्यक्ति जिन-जिन लोगों से मिला उन्हें जानलेवा कोरोना वायरस से संक्रमित कर देगा। जिस कारण इस व्यक्ति का उपचार होना अत्यधिक आवश्यक है।

निजामुद्दीन मरकज में महिलाएँ भी हुईं थीं शामिल, कुशीनगर में 5 पर दर्ज हुआ मुकदमा, भेजी गई क्वारंटाइन सेंटर

दिल्‍ली के निजामुद्दीन मरकज में शामिल हुई 5 महिलाओं को उत्तरप्रदेश के कुशीनगर से ढूँढ निकाला गया है। खुफ‍ियाँ एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद इनकी तलाश यहाँ शुरू हुई थी। मगर, कल देर रात जाकर पुलिस को इन्हें खोज निकालने में सफलता मिली। 

बता दें, पाँचों औरतों के अलावा पुलिस ने इनके शौहरों को भी हिरासत में लिया है। इनमें से 2 लोगों को परसों चिह्नित किया गया था और 3 को कल सुबह पकड़ा गया। पतियों के गिरफ्तारी के बाद भी ये महिलाएँ पुलिस से छिपी हुईं थी। लेकिन कल रात इन्हें भी धर पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार ये सभी असम के निवासी हैं। जो 9 मार्च को मरकज़ से निकले और कुशीनगर में जाकर छिप गए।

कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक के अनुसार, “एक ईमेल आया था, जिसमें ये सूचना थी कि असम के रहने वाले 10 लोग दिल्ली के जमात में शामिल होकर 9 मार्च को वहाँ से निकले थे। वे जनपद कुशीनगर में छिपे हो सकते हैं। पहले जब सूचना के आधार पर तलाशी कराई गई, तो ये लोग नहीं मिल पाए। बाद में इनके पीछे सूचना तंत्र और विश्वासपात्र लोगों को लगाया गया। जिससे 2 लोग पकड़ में आए और इनको चिह्नित करके क्वारंटाइन कराया गया। बाद में 3 व्यक्ति पकड़े गए। उन्हें भी एंबुलेंस से भिजवाकर क्वारंटाइन कराया गया। इसके बाद पाँच महिलाएँ शेष थीं। पर उन्हें भी (रात में) चिह्नित करते सेंटर भेजा गया।”

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, देर रात पकड़ी गई इन औरतों की पहचान राहिमा खातून, शकीना खातून, जाहूरा खातून, रजीफा खातून व एफ खातून के रूप में हुई है। अब इन्हें और इनके पतियों को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। सभी के सैंपल जाँच के लिए गोरखपुर भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद इनपर आगे की कार्रवाई होगी। 

खबर के अनुसार, इन महिलाओं को सोमवार देर रात नगर से सटे गाँव अमवा जंगल में उसी मकान से पकड़ा गया जहाँ दो दिन पूर्व दो जमाती पकड़े गए थे। बाद में पता चला कि ये महिलाएँ पकड़े गए जमातियों की खातूनें हैं। पुलिस ने महिलाओं के पकड़े जाने के बाद इनके ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर लिया और फिर जाँच के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।

एसपी कुशीनगर विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि जमाती दिल्ली से 9 मार्च को कुशीनगर के लिए चले। 11 मार्च को हाटा के एक हाजी ने उन्हें शरण दी। लॉकडाउन होने के बाद वहीं इन्हें अलग-अलग गाँवों में अपने मददगारों के जरिए शरण दे रहा था। उनके मुताबिक सभी के सैंपल जाँच के लिए भेजे गए हैं। यदि जाँच रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो इन सभी पर कोरोना अपराधी का भी केस दर्ज किया जाएगा। 

यहाँ बता दें 2 दिन पहले यानी रविवार रात को पुलिस ने अमवा गाँव के जंगल स्थित एक मकान में छापेमारी कर हाशिम तथा यशोधर अली को पकड़ उन्हें जाँच के लिए जिला अस्पताल भेजा था। पूछताछ में मालूम हुआ था दोनों मरकज में शामिल होने के बाद हाटा फिर पडरौना पहुँचे थे। इसके बाद पुलिस ने जमातियों व उनके मददगारों सलाउद्दीन, साहिल, खुदाद्दीन, शाकिर अली व हाजी हमीद के विरुद्ध धारा 188, 269, 271 आइपीसी व 51 बी आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

फिर, सोमवार शाम को ही नेबुआ-नौरंगिया थाने के गाँव पटेरा बुजुर्ग से भी दो जमाती पकड़े गए। इनकी पहचान अब्दुल सलाम व फकरूद्दीन के रूप में हुई। दोनों ने पुलिस के सामने निजामुद्दीन मरकज में शामिल होने की बात स्वीकार की। दोनों के साथ रहे एक अन्य जमाती ऐनुलहक ने देर शाम पडरौना कोतवाली में पहुँच खुद के मरकज में शामिल होने की जानकारी दी। उसने बताया था कि वह भटक गया है। पुलिस की जाँच में पाँचों के तार आपस में जुड़े मिले। 

PM CARES ने एक हफ्ते में जुटाए ₹6500 करोड़: सोनिया गाँधी चाहती हैं इसे PMNRF में ट्रांसफर किया जाए, जानें असली कारण

कॉन्ग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए स्थापित किए गए PM केयर्स के अंतर्गत अब तक जमा हुई संपूर्ण धनराशि को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) में ट्रांसफर करने के लिए प्रधानमंत्री से कहा है। सोनिया गाँधी के अनुसार बेहतर पारदर्शिता, जवाबदेही के लिए यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है।

भले ही सोनिया गाँधी का यह बयान सामान्य लग रहा हो, लेकिन ऐसे समय में जब देश एक वैश्विक महामारी से निपटने की कोशिश कर रहा है, यह बयान राजनीति से प्रेरित है। इस संदर्भ में बताना जरूरी है कि PMNRF हमेशा एक प्रबंधन समिति की देखरेख में संचालित होता है, जो जमा हुई धनराशि का नियोजन प्रधानमंत्री के विवेकानुसार सुनिश्चित करती है। बता दें कि पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा PMNRF की स्थापना के समय से लेकर आज तक इसकी प्रबंध समिति में कॉन्ग्रेस पार्टी का अध्यक्ष भी हमेशा शामिल रहता है, जो कि वर्तमान में सोनिया गाँधी हैं।

PMNRF की स्थापना के समय निम्नलिखित लोगों को प्रबंध समिति में शामिल किया गया था

i) प्रधानमंत्री
ii) भारत की राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष।
iii) उप प्रधानमंत्री।
iv) वित्त मंत्री।
v) टाटा ट्रस्टीज़ का एक प्रतिनिधि।
vi) फिक्की द्वारा चुने जाने वाले उद्योग और वाणिज्य का प्रतिनिधि।

यहाँ तक की 1985 में राजीव गाँधी कार्यकाल के दौरान इस कोष की मैनेजिंग कमेटी ने कोष के प्रबंधन से संबंधित सभी अधिकार प्रधानमंत्री को सौंप दिए। प्रधानमंत्री को अधिकार मिल गया कि वह अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी को ‘कोष का सचिव’ नियुक्त कर सकते हैं जिसके पास अन्य बातों के अलावा इस कोष के बैंक अकाउंट संचालित करने का भी अधिकार था।

वुहान कोरोना वायरस के इस संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने PM CARES फंड लॉन्च किया है, जिसमें सहयोग करने के लिए उन्होंने पूरे देश का आह्वाहन किया है। यह एक आपातकालीन कोष है जिसका उपयोग कोरोना वायरस से निपटने के लिए किया जाएगा। PM CARES यानी ‘प्राइम मिनिस्टर सिटीजन्स असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन’ कोष की स्थापना पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में की गई है। प्रधानमंत्री जहाँ इस ट्रस्ट के चेयरमैन हैं, वहीं देश के रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री तथा गृह मंत्री इस ट्रस्ट के सदस्य हैं।

जैसे ही यह कोष लॉन्च हुआ, देश के हर ख़ास ओ आम से इसे अपार सहयोग मिलना प्रारम्भ हो गया। जिसमें आम जनता से लेकर उद्योगपतियों फिल्म स्टार्स आदि ने अपना अपना अंशदान करना शुरू कर दिया। यहाँ ये सवाल लगातार पूछा जा रहा कि आखिर PM CARES फंड नामक नए फंड की जरूरत क्या थी जब कि PMNRF मौजूद था ही।

यह दिलचस्प है कि सोनिया गाँधी पीएम केयर्स में अब तक जमा हुई धनराशि ₹6500 करोड़ को PMNRF में ट्रांसफर करने की माँग करेंगी, जबकि पीएम केयर्स सिर्फ कोरोना महामारी से लड़ने के लिए स्थापित किया गया है और PMNRF हर एक आपदा से निपटने के लिए बनाया गया है।

शायद ऐसा इसलिए है, क्योंकि PMNRF सीधे प्रधानमंत्री के नियंत्रण में है और सोनिया गाँधी को उम्मीद है कि भविष्य में एक दिन देश का पीएम गाँधी परिवार से ही होगा। इस तरह यह धनराशि पीएम के नियंत्रण में होगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि पीएम केयर्स PMNRF की तुलना में कहीं अधिक उचित और पारदर्शी है।

संक्षेप में PM CARES, PMNRF की तुलना में कहीं ज्यादा पारदर्शी और सक्षम है हालाँकि, PMNRF भी समय-समय पर नागरिकों की मदद के लिए आगे आता रहा है। यहाँ यह भी बताते चलें कि PM CARES में 13 विशेषज्ञों को भी शामिल करने का प्रावधान है जो अपनी सेवाएँ देश के लिए निःशुल्क प्रदान करेंगे। इसमें सलाहकारी बोर्ड के तौर पर भी 10 व्यक्तियों को शामिल करने की व्यवस्था है, जिन्हें ट्रस्टीज द्वारा डॉक्टरों, स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनलों, अकादमिक जगत के लोगों, अर्थशास्त्रियों और वकीलों में से चुना जाएगा।

वरिष्ठ अधिकारी ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि “PMNRF के विपरीत, पीएम केयर्स में ट्रस्टियों की जिम्मेदारी परिभाषित की गई है। PMNRF में सलाहकार बोर्ड का कोई प्रावधान नहीं है। इसमें ट्रस्ट के सदस्यों के रूप में प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और टाटा ट्रस्ट के प्रतिनिधि और फिक्की का चुना गया उद्योग प्रतिनिधि हैं।”

बीजेपी के एक सीनियर नेता ने PM CARES पर कॉन्ग्रेस के विरोध को खुद के स्वार्थों से प्रेरित बताते हुए कहा कि वे सिर्फ इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि PM CARES में PMNRF की भाँति कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को जगह नहीं दी गई है। बीजेपी नेता ने आगे कहा, ”इस फंड में बीजेपी से भी कोई नहीं है- ट्रस्ट में जो भी लोग हैं वो सरकार में अपनी पोजीशन की वजह से हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पीएम केयर्स का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल या किसी अन्य प्रकार की आपातकालीन आपदा जैसे कि संकट में राहत या सहायता और मानव निर्मित या प्राकृतिक आपदाओं के बीच स्वास्थ्य एवं दवा जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।

‘अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी, मरे हुए वापस नहीं आएँगे’: लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर राज्य सरकारों की माँग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 24, 2020 को घोषणा की थी कि रात 12 बजे से पूरे भारत लॉकडाउन रहेगा। उन्होंने 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की, जिसकी अवधि 14 अप्रैल को ख़त्म हो जाएगी। अब कहा जा रहा है कि उसके बाद भी लॉकडाउन की अवधि बढ़ाई जा सकती है। पूरे भारत में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में सम्भावना जताई जा रही है कि कुछ और दिनों के लिए लॉकडाउन की अवधि बढ़ाई जाएगी। केंद्र सरकार के सूत्रों के हवाले से कई मीडिया पोर्टलों का कहना है कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लॉकडाउन जारी रहेगा।

भारत में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगभग 5000 पहुँच गई है, जिसमें से 4394 सक्रिय मामले हैं। कुल 386 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं, वहीं 137 लोगों की मौत हो गई है। तबलीगी जमात के मुसलमानों की हरकतों के बाद से भारत में अचानक से मामले बढ़ने लगे हैं। कई राज्यों से जमातियों को ढूँढ-ढूँढ कर निकाला जाने लगा है। कई जगहों पर जमातियों का पता लगाने के लिए पुलिस जब मुस्लिम बहुल इलाक़ों में गई तो पुलिस व डॉक्टरों पर हमले भी किए गए।

कई राज्यों ने केंद्र सरकार से लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की माँग की है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा कि पीएम मोदी को बिना किसी झिझक के लॉकडाउन की अवधि बढ़ा देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है, जिससे कोरोना को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका, स्पेन और इटली की स्थिति न आने पाए, इसके लिए लॉकडाउन ज़रूरी है। केसीआर ने कहा कि अर्थव्यवस्था को तो मेहनत और कई प्रयासों के बाद सुधारा जा सकता है लेकिन मृतकों को जिन्दा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोगों की जान बचानी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश से भी यही माँग उठ रही है। इसमें योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि जब तक देश में कोरोना का एक भी मरीज रहेगा, तब तक लॉकडाउन जारी रहेगा। इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि सिर्फ उन्हीं इलाक़ों में लॉकडाउन किया जाए, जहाँ कोरोना के ज्यादा मामले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार कह चुके हैं कि ये एक लम्बी लड़ाई है और हमें बिना थके इसे जीतना है। विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन से फायदा हो रहा है, इसीलिए मई-जून तक इसे जारी रखने की ज़रूरत है।

भारत सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए हेल्थकेयर फैसिलिटीज को सुधारने में जुटी हुई है। कहा जा रहा है कि कुछ क्षेत्रों में लॉकडाउन हटने के बाद सरकार को टेस्टिंग किट्स वगैरह की व्यवस्था करने में और आसानी होगी। विदेश से भी इम्पोर्ट चालू हो गया है, ऐसे में सरकार ने राहत की साँस ली है। हालाँकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया है और कहा है कि फ़िलहाल लॉकडाउन बढ़ाने पर विचार नहीं किया गया है।

जिस क्वारंटाइन सेंटर में तबलीगी जमातियों ने किया शौच, उसे अब आर्मी कर रही है टेकओवर

दिल्ली के नरेला में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर को इंडियन आर्मी पूरी तरह से टेकओवर करने की तैयारी में जुट गई है। यहाँ बड़ी तादाद में तबलीगी जमात के लोग कोरोना संदिग्ध होने के कारण रखे गए हैं। बता दें यह पहला कैंप हैं जहाँ आर्मी के डॉक्टरों की मदद माँगी गई थी।

जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले तक यहाँ इंडियन आर्मी के कुल 4 डॉक्टर और 8 नर्सिंग स्टाफ और सिक्योरिटी स्टाफ मौजूद था। मगर, अब पूरे कैंप को इंडियन आर्मी ने टेकओवर कर रही है। इसकी जानकारी भारतीय सेना के सूत्रों ने दी।

एएनआई के मुताबिक, नरेला कैंप में मेडिकल स्क्रीनिंग सेटअप को टेकओवर करने के लिए अतिरिक्त आर्मी मेडिकल स्टॉफ इस समय सिविल मेडिकल प्रोफेशनल के साथ काम कर रहा है।

गौरतलब है कि सबसे पहले शुक्रवार को इंडियन आर्मी की एक मेडिकल टीम नरेला कैंप पहुँची थी। उसमें दो डॉक्टर और 2 नर्सिंग स्टाफ मौजूद थे। उनके साथ सिक्यॉरिटी टीम भी गई थी। मगर, शनिवार को आर्मी ने मेडिकल टीम दोगुनी कर दी और वहाँ आर्मी के 4 डॉक्टर और 8 नर्सिंग स्टाफ तैनात कर दिए। 

रविवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल विपिन रावत ने भी नरेला कैंप का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सिविल डॉक्टर्स, आर्मी डॉक्टर्स और वॉलंटियर्स से बात की थी। साथ ही उन्हें पूरी मदद का भरोसा दिलाया। फिर नरेला कैंप में पूरी तरह आर्मी की मेडिकल टीम को तैनात करने के प्रपोजल को सोमवार सुबह मान लिया गया और इसके बाद ये प्रक्रिया शुरू कर दी गई। 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक आर्मी की कुल करीब 80 लोगों की टीम नरेला आइसोलेशन कैंप भेजी जा रही है। उसमें डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और ऐडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ शामिल हैं। बता दें, नरेला कैंप में 1200 से ज्यादा कोरोना संदिग्धों को रखा गया है। इसमें दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित मरकज आने वाले तबलीगी जमाती भी हैं।

गौरतलब है कि नरेला के सेंटर में क्वारंंटाइन किए गए जमातियों की हरकत बेहूदगी की हर हदें पार कर रही हैं। इसलिए इस सेंटर को आर्मी को सौंपा गया। दरअसल इस सेंटर से इससे पहले खबर आई कि थी कि यहाँ दो जमातियों ने कमरे के बाहर शौच कर दिया और जब सफाईकर्मियों ने इसके संबंध में उनसे पूछताछ की तो उन्होंने उनके साथ बदसलूकी की। इसके बाद इस हरकत की खबर नरेला इंडस्ट्रियल थाना पुलिस को दी गई। बाद में पुलिस ने बाराबंकी निवासी मो. फहद और अदनान जहीर के खिलाफ सरकारी आदेश का उल्लंघन समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। 

मौलाना साद को सोशल मीडिया पर लिखा आतंकी, महाराष्ट्र की पुलिस ने डॉक्टर को लिया हिरासत में

कोरोना वायरस कहर के बीच महाराष्ट्र से एक खबर आई है। खबर है महाराष्ट्र में एक डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की। कारण यह कि डॉक्टर ने कथित तौर पर तबलीगी जमात के मुखिया मोहम्मद साद को एक आतंकवादी करार दिया था।

जानकारी के मुताबिक यह घटना औरंगाबाद की है। यहाँ की सिटी पुलिस ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से एक आपत्तिजनक मैसेज पोस्ट करने के लिए एक डॉक्टर के खिलाफ गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने डॉक्टर की पहचान और अन्य जानकारी शेयर की है, मगर ऑपइंडिया डॉक्टर की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए जान-बूझकर डॉक्टर के नाम और अन्य विवरण प्रकाशित नहीं कर रहा है।

डॉक्टर के खिलाफ औरंगाबाद के पुंडलिक नगर पुलिस स्टेशन में 5 अप्रैल को गैर-संज्ञेय क्राइम दर्ज किया गया था। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस उप-निरीक्षक प्रभाकर सोनवणे ने इस मामले में डॉक्टर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (बी) (सी) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुंडलिक नगर पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस निरीक्षक जीबी सोनवणे ने कहा, “पुलिस द्वारा डॉक्टर के खिलाफ प्रीवेंटिव एक्शन के रूप में मुकदमा दर्ज किया गया। उन्हें कानून के मुताबिक हिरासत में ले लिया गया और नोटिस जारी किया गया।” इसके साथ ही पुलिस ने सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक सामग्री पोस्ट करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया महाराष्ट्र सरकार और पुलिस से अलग रही। लोगों का कहना है कि किसी को आतंकी कह देने भर से पुलिस उसे हिरासत में कैसे ले सकती है। और अगर ऐसा किया गया है तो क्या महाराष्ट्र की पुलिस उन सब को हिरासत में लेगी, जो आए दिन प्रधानमंत्री को आतंकवादी और हत्यारा कहती फिरती है।

बता दें कि मौलाना साद दिल्ली पुलिस द्वारा मोस्ट वांटेड है। उस पर महामारी रोग अधिनियम 1897 और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दिल्ली पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया है। साद ने कथित तौर पर कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा लागू किए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया था। मार्च में दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज में आयोजित एक मजहबी सभा में भाग लेने वाले तबलीगी जमात के सैकड़ों सदस्यों को कोरोनो वायरस पॉजिटिव पाया गया है। निजामुद्दीन मरकज में हुए मजहबी कार्यक्रम के बाद से कोरोना के मामले में अचानक से बढ़ोतरी देखी गई।

लॉकडाउन के मद्देनजर किसी भी तरह के आयोजन पर रोक होने के बावजूद दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात का आयोजन करने वाले मौलाना साद का अब तक कुछ पता नहीं लग पाया है। मौलाना साद को क्राइम ब्रांच ने उसके वकील के माध्यम से सोमवार को दोबारा नोटिस भेजकर जवाब-तलब किया है। नोटिस में मौलाना से मकरज से जुड़े पदाधिकारियों की जानकारी माँगी गई है। क्राइम ब्रांच ने मौलाना को पहले जारी किए हुए नोटिस में 26 सवाल पूछे थे। जिसके जवाब में मौलाना ने खुद के सेल्फ आइसोलेशन में होन की जानकारी दी थी। मौलाना ने मरकज खुलने के बाद बाकी के सवालों के जवाब देने के लिए कहा था।