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70000 फरिश्ते अगर नहीं बचा पाए तो डॉक्टर क्या करेगा? निज़ामुद्दीन के तबलीगी मौलाना का लॉजिक

कोरोना वायरस को लेकर समुदाय विशेष में किस तरह से गलतफहमी फैलाई जा रही है और ये काम उनके मौलाना-मौलवी ही कर रहे हैं, ये आपको निजामुद्दीन मरकज मौलाना के एक वीडियो से पता चल जाएगा। इस वीडियो में उसके ‘उपदेश’ सुने जा सकते हैं जो मजहब वालों के लिए हैं। इसमें वो कहता है कि दुनिया में कौन सी ऐसी जगह है, जहाँ आपदा नहीं आई है? क्या वहाँ से भाग जाओगे? इसके बाद वो कुरआन की आयतों का हवाला देते हुए पूछता है कि मौत से भाग कर कहाँ जाओगे, वो तो तुम्हारे आगे-आगे चल रही है, पीछे नहीं। मौत इंसान के आगे रखा है अल्लाह ने, सामने, पीछे नहीं। इसीलिए, मौलाना ‘न भागने’ की सलाह देता है।

इस वीडियो में मौलाना कहता है कि इस हालात में भागना अल्लाह के गुस्से को और बढ़ा देगा। इसके बाद उसने एक कहानी सुनाई। इस कहानी में एक कातिल होता है, जो खून करने के बाद अदालत में पेश किया जाता है तो जज को ही मार डालने की धमकी देता है। इसके बाद मौलाना ने पूछा कि क्या उस मुजरिम को छोड़ दिया जाएगा? फिर वो बताता है कि अदालत में अपील की जाती है, माफ़ी माँगी जाती है, जज का क़त्ल नहीं किया जाता। फिर वो समझाता है कि अल्लाह की तरफ़ से जब ऐसी कोई स्थिति आए तो ये मौका अल्लाह-ताला से माफ़ी माँगने का है।

साथ ही मौलवी लोगों को डॉक्टरों की सलाह न मानने की भी सलाह देता है। वो कहता है कि उनके कहने पर मिलना-जुलना नहीं छोड़ना चाहिए और नमाज भी जारी रखना चाहिए। मौलवी का कहना है कि अगर बीमारी है तो 70 हज़ार फरिश्तों से दुआ करो, किसी भी डॉक्टर से नहीं। वो कहता है कि अगर 70 हज़ार फ़रिश्ते साथ हैं तब बचाव नहीं हो पाया तो कोई मेडिकल विशेषज्ञ या डॉक्टर क्या कर लेगा? वो बार-बार लोगों को कहता है कि जब ऐसी आपदा आए तो अल्लाह की ज्यादा इबादत करो।

ये ‘दिल्ली मरकज’ के यूट्यब पेज पर मौलाना के भाषण का पूरा वीडियो का स्क्रीनशॉट है

मौलवी ने कहा कि आज मस्जिदों को बंद करने को कहा जा रहा है, जो ग़लत है। उसने डॉक्टरों की सलाहों की बात करते हुए लोगों से पूछा कि उन्हें इस बात पर कैसे यकीं आ गया कि मिलेंगे-जुलेंगे तो बीमारी फैलेगी, उन्हें इस बात पर यकीन क्यों नहीं आया कि इस समय अल्लाह उनकी हिफाजत करेगा? मौलाना ने कोरोना पर डॉक्टरों की सलाहों को इस्लाम के ख़िलाफ़ साज़िश करार दिया। उसने कहा कि ये सब एक तय कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है ताकि मजहब के लोग एक थाली में न खाएँ और साथ न बैठें।

https://www.youtube.com/watch?v=24yPKrrDmKU
मौलाना निजामुद्दीन मरकज का कोरोना पर अजोबोग़रीब भाषण

मौलाना ने समुदाय के लोगों को दिलासा दिया कि ये बीमारी तो गुजर जाएगी लेकिन उनका इस्लाम में यकीन बने रहना चाहिए। उसने कोरोना को मजहब के लोगों को अलग करने की साज़िश करार दिया। उसने सलाह दी कि मजहब के लोगों को एक-दूसरे के साथ रहना चाहिए और नमाज पढ़ना कभी बंद नहीं करना चाहिए। वीडियो में 3 मिनट के बाद आप सुन सकते हैं, कैसे मौलाना फरिश्तों की बातें कर के डॉक्टरों को नकार रहा है। मौलाना का कहना है कि दुनिया की कोई भी बीमारी लाइलाज नहीं है। उसका दावा है कि नई बीमारियाँ इसीलिए पैदा हो रही है, क्योंकि गुनाह भी नए-नए हो रहे हैं। बकौल मौलाना, ऐसी बीमारी दवा नहीं बल्कि दुआ से ठीक होती है। इस पूरे तक़रीर में जमात के लोगों को खाँसते हुए भी सुना जा सकता है।

नेपाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर नेपाली-चीनी मजदूरों के बीच झड़प, लगाए ‘गो बैक टू चीन’ के नारे

नेपाल में काम करने वाले चीनी और स्थानीय नेपाली लोगों के बीच मंगलवार (मार्च 31, 2020) को झड़प हो गई। दोनों के बीच झड़प ऐसे समय पर हुई है जब कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए हिमालयी देश में लॉकडाउन की घोषणा की गई है। इसके अलावा सरकार ने पड़ोसी देशों के साथ लगने वाली अपनी सीमाओं को सील किया हुआ है।

लामजुंग में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण करने वाली एक चीनी कंपनी के मालिकों के साथ नेपाल के मार्यांगडी के स्थानीय लोग भिड़ गए। ग्रामीणों ने लामजुंग जिले के मंगरंगी ग्रामीण नगर पालिका-6 में थुलोबेसी स्थित न्यादी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए निर्माण सामग्री ले जाने वाले ट्रकों की आवाजाही का विरोध किया। साथ ही लोगों ने ‘गो बैक टू चीन’ के नारे भी लगाए। यह जानकारी एक ऑनलाइन मीडिया पोर्टल खाबारहुब ने दी।

स्थानीय लोगों ने उनका विरोध इसलिए किया क्योंकि वे सभी चीन से वापस लौटे हैं। चीन को कोरोना वायरस के प्रसार के लिए जिम्मेदार माना जाता है क्योंकि पिछले साल वुहान में इसका पहला मामला सामने आया था। वहाँ से यह वायरस पूरी दुनिया में फैला और अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही यह महामारी कई देशों की अर्थव्यस्था को प्रभावित कर चुका है। 

गाँव वालों ने चीनी नागरिकों को अपने गाँव में प्रवेश करने से रोक दिया ताकि अनावश्यक आवाजाही को रोका जा सके। हालाँकि, जब हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की निर्माण सामग्री में इस्तेमाल किए जा रहे दो ट्रकों ने ब्लॉकेज (रोकने के लिए लगाई गई तारों) को हटाकर गाँव में प्रवेश करने की कोशिश की तो गुस्साए युवक बाहर आ गए और विरोध शुरू कर दिया। 

चीनी नागरिकों ने स्थानीय लोगों को धमकाने के लिए स्वदेशी खंजर ‘खुखरी’ दिखाई। नेपाली पत्रकार नबीन कुइनकेल ने कहा कि स्थानीय लोगों ने उस समय अपना आपा खो दिया जब निर्माणाधीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए निर्माण सामग्री लाने के लिए परिवहन ने सड़क किनारे लगाए गए कंटीले तारों को हटा दिया।

स्थानीय नागरिक करण थापा ने कहा कि जब स्थानीय प्रशासन ने लॉकडाउन के उल्लंघन पर आपत्ति जताई तो चीनी नागरिकों ने हम पर हमला किया। उन्होंने कहा, “स्थानीय लोगों ने चीन के लोगों द्वारा सरकारी आदेश का उल्लंघन करने पर विरोध किया।” इस बीच पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बैठक कर समाधान निकालने की कोशिश की।

कोरोना से जंग: भारत की मस्जिदों में छुपाए गए ये विदेशी तबलीगी कौन हैं, कहाँ से आए हैं? सख्त एक्शन की तैयारी में सरकार

देश में जारी लॉकडाउन और सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी भारत में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार और तेजी से बढ़ती चली जा रही है। इस बीच चौंकाने वाली बात यह कि अचानक से इसकी संख्या में आई तेजी के पीछे हाल ही में दिल्ली के निजामुद्दीन में हुए एक मजहबी सम्मेलन को वजह माना जा रहा है, जो कि सही भी है, क्योंकि दिल्ली में आधे से अधिक कोरोना मरीजों की संख्या मरकज में शामिल होने वालों की है। इतना ही नहीं एक से बाद एक हो रहे नए खुलासों ने देश के कई राज्यों को संकट में डाल दिया है, क्योंकि यहाँ से निकले जमाती देश के अलग-अलग हिस्सों में इस्लाम का प्रचार करने के लिए निकले थे।

अब ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब कोरोना से विश्व के कई देश जूझ रहे थे तो भारत में आए विदेशी मुस्लिमों की जाँच के लिए आयोजकों ने सरकार को अवगत क्यों नहीं कराया? इतना ही नहीं मजहबी समम्लेन के बाद ये लोग पूरे देश के अलग-अलग हिस्सों में इस्लाम के प्रचार के लिए निकले और फिर वहाँ की मस्जिदों में भी रुके और वहाँ के लोगों से भी मिले। इस बीच देश में लॉकडाउन भी घोषित हो गया। चौंकाने वाली बात यह कि इस संबंध में किसी भी लोकल मुस्लिम या फिर मस्जिद के मुल्ला मौलवी ने क्षेत्रीय प्रशासन तक को अवगत नहीं कराया।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि देश के मुस्लिमों द्वारा मस्जिदों में छुपाए गए ये विदेशी आखिर कौन हैं और कहाँ से आए हैं और इनका उद्देश्य धर्म का प्रचार करना ही या फिर कि कुछ और? एक साथ इतने सवाल उठना जरूरी भी इसलिए हो जाता है कि जब लॉकडाउन के बाद पूरे देश के प्रसिद्ध मंदिर और चर्च के दरवाजे बंद हो गए। यहाँ तक कि नवदुर्गा के दौरान देश के सभी मंदिरों के कपाट बंद हो गए। ऐसे समय में भी मस्जिदों में नमाज के लिए भीड़ एकत्र होती रही और मस्जिदों से इस्लाम का प्रचार जारी रहा। आज इस गुनाह का परिणाम पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है।

वहीं एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक मरकज में पूरे देश से 1830 जमाती शामिल हुए थे, जिनमें से अब तक 10 जमातियों की मौत हो चुकी है। मरकज में शामिल होने वाले 55 मुस्लिम हैदराबाद, 45 कर्नाटक, 15 केरल, 109 महाराष्ट्र, 5 मेघालय, 107 मध्यप्रदेश, 15 ओडिशा, 9 पंजाब, 19 राजस्थान, 46 राँची, 501 तमिलनाडु, 34 उत्तराखंड, 156 उत्तर प्रदेश, 73 पश्चिम बंगाल, 456 असम से मुस्लिम लोग शामिल हुए थे। इसके साथ ही कार्यक्रम मे 281 विदेशी शामिल हुए थे, जिनमें से 1 जिबूती, 1 किर्गिस्तान, 72 इंडोनेशिया, 71 थाईलैंड और 34 श्रीलंका, 19 बांग्लादेश, 3 इग्लैंड, 1 सिंगापुर, 4 फिजी, 1 फ्रांस, 2 कुवैत के विदेशी मुस्लिम शामिल थे।

उधर निजामुद्दीन तब्दीली जमात मरकज से अब तक 1200 लोगों को निकाला जा चुका है, जिनमें से 200 विदेशी लोग शामिल हैं। वहीं सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए विदेशों से पर्यटन के नाम पर इस्लाम का प्रचार करने वाले 255 विदेशियों के वीजा को रद्द कर दिया है। ये लोग अब कभी भारत की यात्रा नहीं कर सकेंगे। साथ ही दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने इसे गंभीर अपराध करार देते हुए कहा कि आयोजकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी इसके लिए केन्द्र सरकार को भी पत्र लिखकर माँग की गई है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने द हिंदू को बताया कि दक्षिण दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय अलमी मरकज बंग्लेवाली मस्जिद में इस महीने की शुरुआत में देश भर से लगभग 8,000 लोग शामिल हुए थे, जिसमें 16 देशों के इस्लामी प्रचारकों ने हिस्सा लिया था। इनमें से 800 इंडोनेशियाई प्रचारकों को भारत ब्लैकलिस्ट करने जा रहा है, ताकि भविष्य में वे देश में प्रवेश न कर सकें।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई स्थानों से पुलिस ने मस्जिदों से विदेशी मुस्लिमों को इस्लाम का प्रचार करते हुए गिरफ्तार किया है, जिनमे बिहार की राजधानी पटना से भी 12 विदेशी, जो कि तजाकिस्तान से भारत में इस्लाम धर्म प्रचार करने आए थे। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा नगर की एक मस्जिद से 10 विदेशी मुस्लिमों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। झारखंड की राजधानी राँची के स्थित मस्जिद से भी 11 विदेशी मौलवियों को पुलिस प्रशासन ने हिरासत में लिया था।

तबलीगी जमात के आतंकवादी संगठनों अलकायदा, तालिबान और कश्मीरी आतंकवादियों से भी संबंध

भारत के कई राज्यों में वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में तबलीगी जमात की भूमिका सामने आई है। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में इस्लामी संगठन द्वारा आयोजित एक इस्लामी मजहबी आयोजन में भाग लेने के बाद कम दस लोगों की मौत हो गई है। वैसे भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो तबलीगी जमात की लापरवाही से प्रभावित है। अन्य दक्षिण एशियाई देश भी इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में, अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ तबलीगी जमात के संबंध बेहद अर्थपूर्ण हो जाते हैं।

2011 में विकिलिक्स द्वारा जारी गुप्त अमेरिकी दस्तावेजों से पता चला है कि अलकायदा के कुछ गुर्गों ने जमात का इस्तेमाल अपनी पाकिस्तान की यात्रा के लिए वीजा और फंड हासिल करने के लिए किया। दस्तावेजों में कहा गया है कि वे दिल्ली या फिर इसके आस-पास भी रहते थे। ‘एक अनुभवी जिहादी’ के रूप में सऊदी अरब के अब्दुल बुखारी का हवाला देते हुए, क्यूबा में ग्वांतानामो बे के अमेरिकी अधिकारियों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि 1985-1986 में वह जिस जमात के सदस्य से मिले थे, उसने पाकिस्तान के लिए वीजा में उनकी मदद की। 25 जुलाई, 2007 की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात तबलीगी के एक सदस्य ने एक बंदी के लिए पाकिस्तान का वीजा खरीदा, जिसके बाद वो बंदी और अन्य सऊदी लोग लाहौर गए।

विकीलीक्स में खुलासा किया गया है कि उस बंदी को फिर नई दिल्ली में जमात तबलीगी के नेता से मिलवाया गया संगठन के लिए एक जीवन समर्पित करने के लिए कहा गया। बंदी ने जमात तबलीगी से कहा कि उसे इस बारे में सोचने की जरूरत है क्योंकि वह अपना जीवन सेवा, तीर्थयात्रा और मिशनरी कार्यों में नहीं लगाना चाहता। इसके बाद वो दो सप्ताह के लिए लाहौर लौटा और फिर सऊदी अरब चला गया।

1 सितंबर, 2008 को सोमालियाई बंदी मोहम्मद सोलिमन बर्रे पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में धर्मांतरण करवाने वाली संस्था जमात तबलीगी की पहचान अलकायदा कवर स्टोरी के रूप में की गई है। अलकायदा, जमात तबलीगी के सदस्यों की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा को सुविधाजनक बनाने और फंड देने का काम करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसे भारत में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी का दर्जा देने से इनकार कर दिया गया था, लेकिन उसने जमात तबलीगी के प्रायोजन के तहत पाकिस्तान जाने के लिए वीजा लिया था। बंदी ने कहा कि उसका मिशनरी कर्तव्यों को पूरा करने या जमात तबलीगी के साथ सेवा करने का कोई इरादा नहीं है, उन्होंने तो सिर्फ वीजा प्राप्त करने के लिए समूह का इस्तेमाल किया था।

एक अन्य रिपोर्ट में भी तबलीगी जमात का उल्लेख है। 27 जनवरी 2008 को तैयार किए गए सूडान के अमीर मुहम्मद पर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1991 की शुरुआत में बंदी ने सुडान ने केन्या के रास्ते भारत की हवाई यात्रा की। भारत के लिए उड़ान भरते समय बंदी ने तबलीगी जमात के एक प्रतिनिधि से मुलाकात की, जिसने उसे नई दिल्ली के एक बड़े तबलीगी सेंटर के बारे में बताया, जहाँ वह सहायता के लिए जा सकता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदी ने पाकिस्तानी वीजा प्राप्त करने के लिए खुद को एक तबलीगी के रूप में पेश किया।

इस तरह से यह स्पष्ट है कि इस्लामिक संगठनों ने तबलीगी जमात का इस्तेमाल अपने सदस्यों की यात्राओं को सुविधाजनक बनाने के लिए एक पाइपलाइन की तरह इस्तेमाल किया। 2003 में ब्रुकलिन ब्रिज को नष्ट करने के लिए एक आतंकवादी साजिश के आरोपित ओहियो ट्रक ड्राइवर आयमान फारिस ने अल कायदा के लिए एक काम पूरा करने के लिए जमात का इस्तेमाल पाकिस्तान की सुरक्षित यात्रा के लिए किया। तबलीगी जमात का नाम संयुक्त राज्य अमेरिका में 9/11 आतंकवादी हमले के बाद के बाद जाँचकर्ताओं की नजर में आया। इसके बाद कम से कम चार हाई-प्रोफाइल आतंकवाद मामलों में इसका नाम सामने आया था।

एक प्रतिष्ठित जिओपोलिटिकल इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म स्ट्रैटफ़ोर ने तबलीगी जमात और ग्लोबल जिहाद की दुनिया से इसके संबंध पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात और शिया विरोधी संप्रदाय समूहों, कश्मीरी आतंकवादियों और तालिबान के बीच ‘अप्रत्यक्ष कनेक्शन’ का सबूत है। इसमें कहा गया है कि तबलीगी जमात संगठन इस्लामिक चरमपंथियों के लिए और नए सदस्यों की भर्ती के लिए अलकायदा जैसे समूहों के लिए एक वास्तविक समूह के रूप में कार्य करता है। तबलीगी कट्टरपंथी इस्लामवाद की दुनिया से तब रूबरू होते हैं जब वे अपना शुरुआती ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान जाते हैं। एक बार पाकिस्तान में भर्ती होने के बाद, तालिबान, अल कायदा और हरकत-उल-मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठन उन्हें अपने में शामिल करने की कोशिश करते हैं।

दुनिया भर में वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में अपनी भारी भागीदारी सुनिश्चित करने से पहले तबलीगी जमात से जुड़े लोगों ने आतंकवादी हमलों में नियमित रूप से भाग लिया। 2017 के लंदन ब्रिज हमले में हमलावरों में से एक, यूसुफ ज़ाग्बा को तबलीगी जमात से जुड़ा था। 2005 में लंदन बम धमाकों को अंजाम देने वाले 7/7 आतंकवादियों के सरगना मोहम्मद सिद्दीकी खान और सहयोगी शहजाद तनवीर को भी तबलीगी जमात से जुड़ा था।

वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में तबलीगी जमात के संदिग्ध तरीके और आतंकवादी संगठनों के लिंक उसके इतिहास को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि यह ‘बायोलॉजिकल टेरर’ का एक हिस्सा हो सकता है। पाकिस्तान, मलेशिया और अब भारत में भी तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों ने दक्षिण एशियाई देशों में वायरस फैला दिया है। यदि यह सच में जानबूझकर फैलाने का मामला था, तो यह उन घटनाओं के सबसे खतरनाक मोड़ को दर्शाता है जो अब देशों के अधिकारियों को झेलनी पड़ेंगी। साथ ही उनके लापरवाही के इस घिनौने कृत्य की वजह से कई जीवन खतरे में पड़ गए हैं।

6.6 लाख लोगों के लिए 21000 कैम्प, 23 लाख को खिलाया जा रहा खाना: कोरोना पर स्वास्थ्य व गृह मंत्रालय के आँकड़े

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस को लेकर अब तक के अपडेट्स और सूचनाओं के साथ-साथ सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों से जनता को अवगत कराया है। मंत्रालय ने बताया है कि पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना के 227 नए मामले सामने आए हैं। देश में लॉजिस्टिक्स आइटम्स की कमी न हो इसके लिए दक्षिण कोरिया, टर्की और वियतनाम से सप्लाई ली जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के जनरल सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने बताया कि डीआरडीओ स्थानीय उत्पादन कंपनियों के साथ मिल कर एन-95 मास्क की सप्लाई बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

इधर दिल्ली सरकार ने ‘एपिडेमिक डिजीज एक्ट’ के तहत सभी डीएम, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और पुलिस को कहा है कि जहाँ भी डॉक्टरों अथवा नर्सों को उनके मकान-मालिकों द्वारा घर खाली करने के लिए दबाव बनाया जा रहा हो, वहाँ कार्रवाई की जाए। उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर एक जिले में तलाशी अभियान चला कर उन लोगों को खोजा जाए, जिन्होंने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ इमारत में हुए मजहबी कार्यक्रम में हिस्सा लिया हो। संभावना है कि उनमें से कुछ लोग यूपी में हो सकते हैं, जो कोरोना के करियर भी हो सकते हैं।

अब तक 42,788 सैम्पलों की टेस्टिंग की जा चुकी है। इनमें से 4346 सैम्पलों की टेस्टिंग तो 1 दिन पहले ही की गई है। आईसीएमआर ने बताया कि ये उनकी 36% क्षमता को दर्शाता है। अब तक 133 लैब्स सक्रिय हो गए हैं। साथ ही 49 प्राइवेट लैब्स को भी अनुमति दे दी गई है। सोमवार (मार्च 29, 2020) को 399 लोगों की टेस्टिंग उन प्राइवेट लैब्स में ही की गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने निजामुद्दीन क्षेत्र में कई कोरोना मरीजों के मस्जिद में छिपे मिलने वाली घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये फाल्ट-फाइंडिंग का समय नहीं है बल्कि जल्द से जल्द एक्शन लेने का वक़्त है।

इधर गृह मंत्रालय ने भी जानकारी दी है कि देश भर में अब तक 21,064 कैम्पस स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें अलग-अलग प्रदेशों में मजदूरों और बेघर लोगों को आसरा दिया जा रहा है। फ़िलहाल इन कैम्पों में 6.6 लाख लोग रह रहे हैं और 23 लाख लोगों के लिए खाने का इंतजाम किया जा रहा है। ये वो लोग हैं, जो गरीब हैं, भूख की समस्या से जूझ रहे हैं, दूसरे प्रदेशों से आए हैं या फिर कई ऐसे भी हैं जो अपने गृह राज्य में पहुँचने के बाद क्वारंटाइन किए गए हैं।

जान-बूझकर इधर-उधर थूक रहे तबलीग़ी जमात के लोग, डॉक्टर भी परेशान: निजामुद्दीन से जाँच के लिए ले जाया गया

दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में स्थित मस्जिद से 200 लोगों के मिलने के बाद से पूरी दिल्ली में हड़कंप मचा हुआ है। अरविन्द केजरीवाल ने बताया है कि राष्ट्रीय राजधानी में अभी तक सामुदायिक संक्रमण का एक भी मामला नहीं आया है। यहाँ कोरोना के कुल 97 मामले मिले हैं, जिनमें से 41 ऐसे हैं जिनकी कोई ट्रेवल हिस्ट्री है। यानी ये सभी विदेश से लौटे लोग हैं। 21 मरीज इनके परिवार वाले हैं। 10 मामले ऐसे हैं, जिनके बारे में सूचनाएँ इकट्ठी की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने लॉफ्टिनेंट गवर्नर से दरख्वास्त की है कि निजामुद्दीन मामले में एफआईआर दर्ज की जाए।

इधर निजामुद्दीन से ले जाए जा रहे सभी लोग बदतमीजी पर उतर आए हैं। उनके द्वारा वो सारी हरकतें की जा रही हैं, जिनसे संक्रमण फैलने का ख़तरा है। एक डॉक्टर ने बताया कि बस से ले जाए जा रहे ये सभी लोग इधर-उधर थूक रहे हैं और अधिकारियों की बात नहीं मान रहे हैं। ये सभी बस की खिड़कियों की तरफ़ से थूक रहे थे, जिससे अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का ख़तरा है। मेडिकल कर्मचारी भी उनलोगों से परेशान हो गए हैं। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी इस आरोप की पुष्टि की।

उधर दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि एलजी द्वारा जल्द ही एफआईआर रजिस्टर करने का आदेश दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर किसी भी अधिकारी के द्वारा किसी भी प्रकार की लापरवाही की बात सामने आएगी तो उसके ख़िलाफ़ त्वरित कार्रवाई की जाएगी। निजामुद्दीन में मिले विदेशियों ने वीजा नियमों का भी उल्लंघन किया है, ऐसा गृह मंत्रालय ने बताया है। यहाँ तबलीग जमात के मजहबी कार्यक्रम में न सिर्फ़ सैकड़ों लोग शामिल हुए बल्कि उन्होंने एम्बुलेंस को भी लौटा दिया था। इन्होने सतर्कता और सोशल डिस्टन्सिंग की सलाहों को भी जम कर ठेंगा दिखाया।

आरोप है कि स्थानीय लोगों ने मस्जिद में छिपे विदेशियों और अन्य लोगों का पूरा साथ दिया। बता दें कि वो समुदाय विशेष बहुल इलाक़ा है। वहीं मरकज लगातार दावा कर रहा है कि वो प्रशासन से लगातार संपर्क में है और उसने लगातार सरकार का सहयोग किया है। मरकज में कुल 2500 लोगों के एक मजहबी कार्यक्रम में शामिल होने की बात सामने आई थी। इनमें से 800 लोगों को हॉस्पिटल ले जाया गया है। कइयों को अभी भी ले जाया जा रहा है। इनमें से कुछ के यूपी जाने की आशंका है, जिनकी तलाशी के लिए सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

मोहल्ला क्लिनिक का एक और डॉक्टर कोरोना +ve: प्रशासन ने जारी किया नोटिस, संपर्क में आए मरीजों को क्वारंटाइन का आदेश

दिल्ली में कोरोना के फैलते संक्रमण ने अब सबको सकते में डाल दिया है। एक ओर जहाँ दिल्ली सरकार लगातार लोगों को आश्वस्त कर रही है कि वे जनता को हर मुमकिन स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाएँगे। वहीं पर उन्हीं के मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर इससे संक्रमित हो रहे हैं। जी हाँ, दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक का एक और डॉक्टर कोरोना से संक्रमित पाया गया है। डॉक्टर उत्तरी पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर इलाके का बताया जा रहा है।

खबर के अनुसार डॉक्टर के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद प्रशासन ने नोटिस जारी किया हैं। नोटिस में बताया गया है कि जो भी मरीज या लोग 12 मार्च से 20 मार्च के बीच इस मोहल्ला क्लीनिक में इलाज कराने आए हो वो अगले 15 दिन तक अपने घर में ही क्वारनटीन रहें।

जानकारी के मुताबिक, बाबरपुर इलाके के मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर में कोरोना के लक्षण पाए गए थे जिसके बाद उन्होंने कोरोना का टेस्ट करवाया। आज डॉक्टर की टेस्ट रिपोर्ट आई जिसमें वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद डॉक्टर और उनके परिवार के साथ उनके स्टाफ को भी आइसोलेट किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली के मौजपुरी के मोहनपुरी स्थित मोहल्ला क्लिनिक में एक डॉक्टर में कोरोना लक्षण पाए गए थे और जाँच के बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की खबर तो खुद स्वास्थ्य विभाग ने की थी। उस दौरान भी नोटिस जारी कर वहाँ की जनता को सूचित किया गया था, क्योंकि कम से कम 900 मरीज और लोग इसके संपर्क में आए थे। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी कहा था, कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए डॉक्टर के संपर्क में आने वाले सभी 900 लोगों को क्वारंटाइन यानी बाकी के समाज से अलग कर दिया गया है। इसके बाद डॉक्टर की बेटी और पत्नी भी कोरोना से संक्रमित पाए गए थे।

बता दें, मौजपुरी के मोहनपुरी स्थित मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर गोपाल झा एक सऊदी से लौटी महिला के कारण संक्रमित हुए थे। जानकारी के मुताबिक दुबई से लौटने के बाद ये महिला अपने भाई (तबरेज) और अम्मी से मिली और भाई भी इस बीमारी से संक्रमित हुआ। बाद में महिला का भाई बहन से वह सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भी जाता रहा और इस तरह एक महिला की लापरवाही के कारण 400-450 लोग इस खतरे के घेरे में माने जा रहे थे।

लखनऊ: अमीनाबाद की मरकजी मस्जिद में मिले 6 किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के मुस्लिम, सभी को भेजा गया आइसोलेशन में

देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित मस्जिदों में विदेशी नागरिकों के मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बीते दिनों पटना, राँची, दिल्ली और महाराष्ट्र के मस्जिद से मौलवियों के मिलने की खबर आई। अब इस सूची में लखनऊ का नाम भी जुड़ गया। खबर है कि यूपी की राजधानी के अमीनाबाद इलाके में डीएम के छापे के बाद इस खबर का खुलासा हुआ कि वहाँ के मरकजी मस्जिद में 6 विदेशी लोग रह रहे थे। जो किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के नागरिक हैं और भारत में एक धार्मिक जलसे में भाग लेने आए थे। सभी के पास वैध वीजा है।

जानकारी के अनुसार, खुफिया और एलआईयू की सूचना के बाद पुलिस प्रशासन की टीमों ने मस्जिद में छापा मारा। इस दौरान डीएम के साथ पुलिस कमिश्नर भी थे। पुलिस अधिकारियों ने इन विदेशी नागरिकों के मिलने के बाद इन्हें हिरासत में ले लिया है। इनसे पूछताछ की गई है और अब इनकी मेडिकल जाँच कराई जा रही है। तब तक इन्हें आइसोलेशन में रखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मड़ियाँव और काकोरी इलाके की मस्जिदों में भी कई विदेशी नागरिकों के रुके होने की खबर है। बताया जा रहा है मड़ियाँव में 17 बांग्लादेशी नागरिकों के रुके होने की सूचना है। जो टूरिस्ट वीजा पर यहाँ आए हैं।

गौरतलब है कि यूपी सरकार इस समय कोरोना को रोकने के लिए सख्ती से काम कर रही है। इसी दिशा में उन्होंने अफसरों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि लॉकडाउन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दिल्ली की तबलिगी जमात में शामिल होकर उत्तर प्रदेश आए लोगों की तेजी से तलाश कर उन्हें क्वारंटीन किया जाए। जिससे संक्रमण का खतरा न फैले।

बता दें, दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में विदेशी नागरिकों के शामिल होने का मामला सामने आने के बाद विभिन्न राज्यों की पुलिस सतर्क हो गई है। क्योंकि जमात में शामिल होने आए वे लोग लॉकडाउन के ऐलान के बाद अलग-अलग राज्यों की ओर चले पड़े थे। इसी कड़ी में यूपी पुलिस प्रशासन दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज के आयोजन में शामिल हुए लोगों की तलाश कर रहा हैं चूँकि उन्हें सूचना मिली थी कि तबलीगी जमात में लखनऊ के 20 लोग शामिल हुए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार पता चला है कि ये 20 लोग अभी तक लखनऊ नहीं लौटे हैं, ये अभी नई दिल्ली में ही हैं।

जावेद अख्तर ने मस्जिदों को बंद करने के लिए किया ‘फतवा’ का समर्थन, यूजर्स ने पूछा- क्या सरकारी आदेश काफी नहीं?

वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस के साथ लड़ाई में पूरे देश को लॉकडाउन किया गया है। सारी दुनिया इस खतरनाक वायरस से लड़ने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। ऐसे में जब दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के 2000 से ज्यादा लोगों के एक मजहबी सभा में शामिल होने की खबरें सामने आईं तो प्रशासन के होश उड़ गए। इस जलसे में शामिल होने वाले लोगों में मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान से आए लोग शामिल हैं।

बता दें कि अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष ताहिर महमूद ने दारूल उलूम देवबंद से कहा है कि जब तक कोरोना का संकट खत्म नहीं होता है तब तक सभी मस्जिदों को बंद करने का फतवा जारी करें। ताहिर के इस बयान के कुछ ही वक्त बाद फिल्मकार जावेद अख्तर का इस पर बयान आया। जावेद अख्तर ने ट्वीट कर कहा, “ताहिर महमूद साहेब, जो कि एक स्कॉलर और अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष हैं, उन्होंने कहा है कि दारूल उलूम देवबंद कोरोना संकट खत्म होने तक के लिए मस्जिदों को बंद करने का फतवा जारी करे। मैं पूरी तरह से उनकी इस माँग का समर्थन करता हूँ अगर काबा और मदीना की मस्जिद बंद की जा सकती है तो भारत की मस्जिदों को क्यों बंद नहीं किया जा सकता?”

अख्तर का ट्वीट देखने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें निशाने पर लिया। जाफर अली नाम के एक यूजर ने पूछा, “हमें मस्जिदों को बंद करने के लिए फतवे की जरूरत क्यों है? क्या भारत सरकार द्वारा किया गया अनुरोध और आदेश इसके लिए काफी नहीं है?”

आकांक्षा राव नाम की यूजर ने कमेंट कर पूछा, “फतवा क्यों, क्या हम मध्यकाल में रह रहे हैं? क्यों आप सिर्फ देश के कानूनों का पालन नहीं कर सकते?”

फिल्मेमकर विवेक अग्निहोत्री ने जावेद अख्तर से पूछा, “फतवा? यह देश फतवा के हिसाब से चलेगा या सरकार के आदेश के हिसाब से?” 

वहीं, ‘अंजाना-अंजानी’ और ‘कहानी’ जैसे फिल्में लिख चुकी अद्वैता काला पूछती हैं, “क्योंकि सऊदी अरब में निर्णय सऊदी प्रासशन द्वारा लिए गए हैं और लोग पालन भी कर रहे हैं। भारत में फतवा की जरूरत है। यह काफी समस्या पैदा करने वाला और इन परिस्थितियों के लिए खतरनाक है।”

साकेत नाम के एक यूजर ने लिखा, “क्या इस पढ़े लिखे समाज के लिए सरकार द्वारा दिए गए निर्देश काफी नहीं हैं या कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ मजहबी नेताओं और शरिया की ही बातें सुनते हैं?”

दिल्ली बीजेपी मीडिया प्रभारी पुनीत अग्रवाल ने जावेद अख्तर पर निशाना साधते हुए कहा, “निर्वाचित पीएम द्वारा लॉकडाउन की घोषणा के तुरंत बाद अन्य सभी धार्मिक स्थलों को बंद कर दिया गया था, लेकिन उनके धर्म को दारूल उलूम देवबंद के फतवे की जरूरत है ताकि वे अन्य मस्जिदों को बंद कर सकें। आपको लगता है कि हम शरिया कानून में हैं? निजामुद्दीन की घटना जानबूझकर की गई थी। यह भारत के खिलाफ युद्ध है।”

लेखिका शेफाली वैद्य ने लिखा, “मिलिए ‘नास्तिक’ जिहाद अख्तर से। जिहाद भारतीय सरकार के सभी पूजा स्थलों को बंद करने के आदेश से खुश नहीं है। जिहाद दारुल उलूम देवबंद से फतवा जारी करवाना चाहते हैं, ताकि मस्जिद बंद हो सके। तभी जिहाद मस्जिदों को बंद करने का समर्थन करेगा। क्योंकि मुस्लिमों के लिए इमान सबसे ऊपर है।”

एक यूजर ने लिखा कि मुस्लिमों को अलग से फतवे की जरूरत क्यों होती है? जब वो यहाँ पर रहकर सब्सिडी का लाभ उठाते हैं तो फिर उन्हें भी टैक्स जमा करना चाहिए और देश के कानून का पालन करना चाहिए।

एक अन्य यूजर ने लिखा, “अबे मुल्ले, ये मस्जिदे काबा की वजह से नहीं इंडियन महामारी कानून की वजह से बंद रहेंगे। इंडिया के हर एक नागरिक को संविधान कानून पे चलना है। दूसरे इस्लामिक देश से हमें क्या लेना देना। भारत का शासन दिल्ली से चलेगा काबा से नहीं।”

राजेश सिंह नाम के एक यूजर ने लिखा, “पूरा देश खतरे में है, सरकार ने लॉकडाउन घोषित कर रखा है, और तुम फतवे का इंतजार कर रहे हो? देश फतवे से चलेगा या लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार से चलेगा? यही तुम लोगों का असली चेहरा है, पूरी मानवता खतरे में है और तुम लोग फतवे के इंतजार में हो? शर्म आती है तुम जैसे जाहिलों पर।”

पश्चिम बंगाल: कोरोना से जंग लड़ रहे डॉक्टरों को ममता दीदी ने नहीं दी जरूरी किट, मिले बेड शीट के बने मास्क और रेन कोट

कोरोना वायरस विश्व में महामारी का रूप ले चुका है। आए दिन इसकी चपेट में आने से लोग मौत का शिकार हो रहे हैं। इसी तरह भारत में भी लगातार बढ़ते वायरस की रोकथाम के लिए पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। इस जंग में अपनी जीत हासिल करने के लिए डॉक्टर, मेडीकल स्टाफ और पुलिस प्रशासन के लोग खास तौर पर अपनी जान जोखिम में जाकर अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन आश्चर्य की बात यह कि ऐसे लोगों को ही सरकार सुरक्षा कवच नहीं दे पा रही हैं। कुछ ऐसा ही एक मामला पश्चिम बंगाल से सामने आया है, जहाँ के एक डाक्टर ने अपने ही विभाग पर आरोप लगाया है कि उन्हें कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की देखभाल के लिए बेडशीट के मास्क, सनग्लास और रेनकोट दिए गए हैं।

सिलीगुड़ी के उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर शहरियार ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की देखभाल के लिए पीपीई, लेबोरेटरी ग्लास और सर्जिकल मास्क के बजाय बेडशीट के मास्क, धूप के चश्मे और रेनकोट दे दिए गए। इतना ही नहीं हमें रेनकोट धोकर और फिर से उसका उपयोग करने के लिए कहा गया। डॉक्टर ने कहा कि जब हमने इसकी शिकायत मेडिकल सुपरिंटेंडेंट कम वाइस प्रिंसिपल से की तो उन्होंने कहा कि पीपीई की हमारे पास कोई आपूर्ति नहीं है और इसकी आपूर्ति के लिए एक अनुरोध विभाग के लिए भेजा गया है।

वाइस प्रिंसिपल से संतुष्टीपूर्ण जवाब न मिलने पर डॉक्टरों ने एक बार फिर से पीपीई किट के लिए दबाव डाला। इसके जवाब में उन्होंने डॉक्टरों को ड्यूटी पर आने के लिए मना कर दिया। अब सवाल यह खड़ा होता है कि जब अपनी जान जोखिम में डालकर जो डॉक्टर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं उन्हीं को हम अगर सुरक्षा नहीं दे पाए तो यह जंग आखिर हम कैसे इतनी जल्दी से जीत सकते हैं।

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या तीन है, जबकि इससे संक्रमिल लोगों की संख्या 26 हो गई है। वहीं अगर बात करें पूरे भारत की तो इससे मंरने वालों की संख्या 40, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1300 के पार हो गई है। गौरतलब है कि देश में कोरोना की रोकथाम के लिए 14 अप्रैल तक लॉकडाउन जारी है।