Home Blog Page 507

कभी चाकू तो कभी पेट्रोल बम लेकर आते थे पाकिस्तानी, 1000+ बार किया रेप: ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग ने शराब-कबाब से फँसाया, पीड़िता को कहते थे- गोरी मेम-कु&या

एक ब्रिटिश लड़की का पाकिस्तानी आदमियों के ग्रूमिंग गैंग ने 1000 से अधिक बार रेप किया। उसको गालियाँ दी गई। उसे ‘गोरी मेम’ कह कर प्रताड़ित किया गया। उसके साथ हुई इस घटना के बाद पाकिस्तानियों ने घर पर भी हमला किया। उसकी पीड़ा की यह कहानी ब्रिटेन के एक न्यूज चैनल ने अपनी एक डाक्यूमेंट्री में शामिल की है।

ग्रेट ब्रिटेन न्यूज को एक डाक्यूमेंट्री के लिए इस लड़की एमिली (बदला हुआ नाम) ने अपनी कहानी बताई। ग्रेट ब्रिटेन न्यूज ने एमिली की यह पीड़ा एक एक्टर के माध्यम से सुनाई है। एमिली बताती है, “मैं कॉलेज के दौरान एंड्रिया नाम की एक लड़की से मिली जिसने मुझे एक पाकिस्तानी से मिलवाया। यह पाकिस्तानी एक कबाब की दुकान पर काम करता था।”

एमिली ने आगे बताया, “इसके बाद हम लगातार कबाब की इस दुकान पर जाने लगे। यहाँ हमें वह मुफ्त में कबाब खिलाते थे और शराब भी पिलाते थे। इसके अलावा वह मुफ्त में सिगरेट भी पिलाते थे। हम तब किशोर थे और ऐसी मुफ्त की पार्टी को पसंद करते थे। मैं तब 14 साल की थी।”

एमिली ने इसके बाद गैंगरेप के विषय में बताया “इसके बाद मुझे एंड्रिया एक और जगह ले गई जहाँ यह कबाब वाले पाकिस्तानी मिले। यहाँ 5-6 लोगों ने मेरा रेप किया। मुझे इस दौरान अलग-अलग शहर में ले जाया गया और रेप किया गया। मेरी माँ को इस दौरान इस बारे में कुछ नहीं पता था।”

एमिली ने इसके बाद कहा, “वो लोग यही बॉयफ्रेंड वाला मॉडल अपनाते थे। मुझे उन लोगों ने धमकाया, मेरा शीलभंग किया… वह मुझे गोरी लड़की, कु#या जैसी गालियाँ देते थे। मेरे घर एक आदमी चाकू लेकर भेजा गया और पेट्रोल बम भी लेकर कोई पहुँचा। मेरा 1000 से ज्यादा बार रेप हुआ और पता नहीं कितने लोगों ने मेरा यौन शोषण किया।”

यह घटना यूनाइटेड किंगडम के टेलफोर्ड शहर में हुई। इस शहर में पाकिस्तानियों की बड़ी संख्या है। टेलफ़ोर्ड शहर में 2022 में ग्रूमिंग गैंग के बारे में हुई एक जाँच ने सबको चौंकाया था। इस रिपोर्ट में सामने आया था कि यहाँ 1000 से अधिक बच्चों और बच्चियों का यौन शोषण सालों तक चलता रहा।

बच्चों का यह यौन शोषण 1980 से ही चल रहा था और पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग लगातार इन बच्चियों को निशाना बनाते थे। इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि पीड़ितों को ही यहाँ दोषी ठहरा दिया जाता था ताकि किसी पर मुस्लिम विरोधी होने का ठप्पा ना लगे।

टेलफ़ोर्ड में 13 वर्षीय बच्ची लूसी का अजहर अली नाम ने लगातार रेप किया था और बाद में उसका घर जला दिया था। इस आग में गर्भवती लूसी, उनकी बड़ी बहन सारा और माँ की मौत हो गई थी। यह टेलफ़ोर्ड में ग्रूमिंग का बड़ा मामला बना था।

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से यूनाइटेड किंगडम में लगातार पाकिस्तानियों द्वारा ब्रिटिश बच्चियों की ग्रूमिंग का मामला चल रहा है। इसको लेकर एलन मस्क ने भी कार्रवाई की माँग की है। हालाँकि, यहाँ की किएर स्टार्मर की सरकार ने ग्रूमिंग मामलों में जाँच से मना कर दिया है और संसद में भी इस प्रस्ताव को गिरा दिया है।

ताहिर हुसैन ने हिंदू विरोधी दंगों के लिए दिया था पैसा: दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में बताया ‘मास्टरमाइंड’, विधानसभा चुनावों के लिए जमानत माँग रहा है AIMIM का प्रत्याशी

दिल्ली दंगों के सरगना ताहिर हुसैन ने विधानसभा चुनावों में AIMIM के उम्मीदवार के रूप में नामांकन करने के लिए हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत की माँग की है। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (14 मंगलवार) को ताहिर हुसैन की इस माँग का दिल्ली हाई कोर्ट में विरोध किया। इसके बाद जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसले को सुरक्षित रख लिया। वह अपने चैंबर में फैसला सुनाएँगी।

ताहिर हुसैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रिबेका जॉन पेश हुईं और उन्होंने नामांकन दाखिल करने से लेकर चुनाव प्रचार तक के लिए 16 जनवरी से 9 फरवरी तक अंतरिम जमानत की माँग की। वहीं, दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए एडीशनल सॉलीसिटर ऑफ इंडिया (ASG) चेतन शर्मा और SPP रजत नायर ने इस बेल का विरोध किया। नायर ने कहा कि ताहिर हुसैन समाज के लिए खतरा हैं।

शर्मा ने कहा कि नामांकन, स्क्रूटनी और बैंक अकाउंट खोलने के लिए हिरासती परोल दी जा सकती है। हालाँकि, उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देने का सख्त विरोध किया। ASG ने कहा कि ताहिर हुसैन ने वीभत्स काम किया है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि नामांकन किया जा सकता है, लेकिन चुनाव प्रचार के लिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

शर्मा ने तर्क दिया कि ट्रायल अपने अंतिम चरण है। चुनाव प्रचार के दौरान ताहिर हुसैन इस दौरान गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में चार गवाह पहले ही पलट चुके हैं। शर्मा ने आगे कहा कि ताहिर हुसैन दंगों का मुख्य साजिशकर्ता, सरगना और फंडिंग करना वाला है। वह UAPA और PMLA सहित तीन मामलों में जेल में हैं।

ASG शर्मा ने कहा, “यूएपीए और ईडी मामलों में जेल नियम है और जमानत अपवाद है। यहाँ हम इस तथ्य के बावजूद हिरासत पैरोल के लिए तैयार हैं कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं है। हम मान रहे हैं कि नामांकन दाखिल करने में उनकी सुविधा के लिए हिरासत पैरोल दी जानी चाहिए। दूसरों की तरह वह भी चुनाव लड़ सकते हैं। वे भी जीते हैं। लोग जेल में बैठकर जीते हैं।”

वहीं, ताहिर हुसैन की ओर से रिबेका जॉन ने कहा कि PMLA मामले में वह हिरासत की आधी से ज़्यादा अवधि काट चुके हैं और उन्हें अभी तक दोषी भी नहीं ठहराया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि ताहिर हुसैन को 11 एफ़आईआर में बरी किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

दरअसल, दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में हाईकोर्ट के समक्ष अंतरिम जमानत याचिका दायर की गई है। अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनके शव को नाले में फेंक दिया गया था। बता दें कि इससे पहले 3 दिसंबर को ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

CM आतिशी ने चुनाव प्रचार के लिए किया सरकारी वाहन का इस्तेमाल, AAP ने पीएम मोदी और अमित शाह का AI वीडियो बनाकर किया शेयर: मुख्यमंत्री और पार्टी के खिलाफ FIR दर्ज

दिल्ली में विधानसभा चुनावों को लेकर आचार संहिता लागू है। इस बीच आचार संहिता का उल्लंघन करने पर आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं पर दो अलग-अलग FIR की गई हैं। पहली FIR मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ दर्ज कराई गई है। उन पर चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी वाहन इस्तेमाल करने का आरोप है। वहीं, भाजपा का फर्जी वीडियो शेयर करने को लेकर BJP ने केस दर्ज कराया है।

आदमी आदमी पार्टी (AAP) की नेता और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ रिटर्निंग ऑफिसर ने शिकायत दी है। शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने सरकारी वाहन का राजनीतिक उद्देश्य से इस्तेमाल कर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है। जाँच में पता चला कि लोक निर्माण विभाग (PwD) के अधिकारी संजय कुमार ने सीएम को यह वाहन दी थी। इसके बाद उनके खिलाफ 7 जनवरी को FIR दर्ज की गई।

FIR में कहा गया है, “दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना के खिलाफ आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने और अपने राजनीतिक उद्देश्य के लिए सरकारी वाहन का उपयोग करने की शिकायत मिली है। सामान्य प्रशासन विभाग, जीएनसीटीडी के दिनांक 07.01.2025 के पत्र में कहा गया है कि चुनावों के दौरान चुनाव प्रचार या चुनाव संबंधी यात्रा के लिए आधिकारिक वाहन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।”

FIR की कॉपी में आगे कहा गया है, “इसके अनुसार, सरकारी वाहन संख्या DL-IL-AL1469 का राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है और जीएडी के उपरोक्त पत्र में निहित निर्देशों का उल्लंघन है। यह बीएनएस की धारा 223 के संदर्भ में उक्त अधिकारी (संजय कुमार, कार्यकारी अभियंता, दक्षिण पूर्व सड़क डिवीजन 2) के खिलाफ कार्रवाई को आमंत्रित करता है।”

कालकाजी से AAP उम्मीदवार आतिशी के खिलाफ दिल्ली के गोविंदपुरी थाने में FIR दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि लोक निर्माण विभाग की गाड़ी से कालकाजी स्थित आतिशी के चुनाव कार्यालय में चुनाव प्रचार की सामग्री पहुँचाई गई थी। बता दें कि भाजपा ने कालकाजी सीट से अपने पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी को मैदान में उतारा है।

वहीं, दूसरी FIR आम आदमी पार्टी के खिलाफ दर्ज की गई है। यह FIR दिल्ली भाजपा ने नॉर्थ एवेन्यू थाने में दर्ज करवाई है। भाजपा का आरोप है आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के खिलाफ कई आपत्तिजनक ट्वीट किए हैं। इनमें फोटो और वीडियो बनाने के लिए AI तकनीक का सहारा लिया गया और आपत्तिजनक वीडियो बनाए गए।

शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस मामले की जाँच कर रही है। दिल्ली पुलिस आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया विभाग के लोगों से पूछताछ कर सकती है। इसके साथ ही AAP के सोशल मीडिया हैंडल चलाने वाले व्यक्ति से पूछताछ हो सकती है। दिल्ली पुलिस पता लगाने की कोशिश करेगी कि ये जो सारे वीडियो एवं पोस्ट किसके कहने पर डाले गए हैं। उसके अनुसार पुलिस एक्शन लेगी। 

ईसाई-मुस्लिम महिला साथ में, जिस हिन्दू का त्यो​हार वही किनारे: सोशल मीडिया यूजर्स भड़के, जूते पहन पोंगल मनाने पर उदयनिधि स्टालिन को घेरा

हिन्दू त्यौहार पोंगल को भी ‘सेक्युलर’ किए जाने का प्रयास चल रहा है। पोंगल मनाने में बुरका और क्रॉस वाली महिलाओं को तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने साथ रखा। उन पर आरोप है कि इस दौरान हिन्दू महिला को किनारे खड़ा कर दिया गया। अच्छी फसल और सूर्य की पूजा के इस त्यौहार पर अन्न पकाते समय उदयनिधि ने जूते उतारना भी मुनासिब नहीं समझा, यह कहते हुए लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रश्न उठाए हैं।

मंगलवार (14 जनवरी, 2024) को सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही देश भर में त्योहार मनाया जा रहा है। उत्तर भारत में जहाँ इसे खिचड़ी और मकर संक्रांति के नाम से तो दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से लोग मना रहे हैं। यह तमिलनाडु का एक बड़ा त्योहार है। इस त्योहार में पारंपरिक तौर पर मिट्टी के बर्तन में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया जाता है। सूर्य देव, इंद्र, गाय-बैल और खेती-किसानी से जुड़े प्रतीकों की पूजा की जाती है।

इसी मौके पर यह त्यौहार मनाने तमिलनाडु के सीएम स्टालिन की एक फोटो वायरल हुई है। इसमें वह जूते पहने हुए हिजाब वाली महिला के बीच एक लड़की को प्रसाद परोस रहे हैं। उनके इस दौरान यह जूते पहनने पर लोगों ने प्रश्न उठाए हैं। कुछ लोगों ने हिजाब वाली महिलाओं को इसमें शामिल करना पोंगल त्योहार को सेक्युलर बनाने की कोशिश और हिन्दुओं का अपमान बताया है।

CM स्टालिन के बेटे उदयनिधि की भी एक फोटो पर ऐसे ही प्रश्न उठे हैं। इसमें वह गले क्रॉस पहने एक महिला और बुर्के वाली एक महिला के साथ पोंगल के बर्तन में प्रसाद बनाते दिख रहे हैं। संभवतः एक हिन्दू महिला किनारे खड़ी है। इसके अलावा उन्होंने जूते भी पहन रखे हैं।

उनका यह फोटो सामने आने के बाद कई लोगों ने प्रश्न उठाए। टीवी एंकर सुमंत रमन ने लिखा, “ना आग, ना बर्तन में कुछ पक रहा, जूते पहने हुए और (संभवतः) हिंदू महिला को हिंदू त्योहार के लिए किनारे पर धकेला जा रहा है। द्रविड़वाद में जो कुछ भी गलत है, उसे दिखाती बेहतरीन तस्वीर। क्या इन आयोजनों का प्रबंध करने वाले लोग बेहतर फोटो सेशन का काम नहीं कर सकते? नई PR एजेंसी लेने का समय आ गया है।”

एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर इसे फैंसी ड्रेस कॉम्पटीशन बताया।

वहीं कुछ लोगों ने यह दावा किया कि पोंगल हिन्दू त्योहार नहीं है। हालाँकि, यह दावा सही नहीं लगता क्योंकि पोंगल में सूर्य को देव मान कर पूजा की जाती है। हिन्दुओं के वेद भी सूर्य पूजा की बात कहते हैं। वहीं इस्लाम में अल्लाह के अलावा और किसी की आराधना नहीं हो सकती। तमिल साहित्य, जिसे संगम साहित्य भी कहते हैं, उसमें भी पोंगल का जिक्र है। हालाँकि, इसका स्पष्ट नाम नहीं लिखा गया लेकिन इससे जुड़ी कई बातें भी लिखी हैं।

पोंगल से जुड़ी भगवान कृष्ण के गोवर्धन उठाने और भगवान इन्द्र की भी कहानी है। इसके अलावा पोंगल से ही भगवान शिव और नंदी की कथा भी जुड़ी है। ऐसे में यह हिन्दू त्योहार ही है। हिन्दुओं की ही मान्यता गाय, सूर्य और फसलों की पूजा करने की है। दूसरी बात यदि यह हिन्दू त्योहार ना होता तो बाकी मुस्लिम-ईसाई देशों में भी मनाया जाता।

AAP ने कोर्ट में कहा – दिल्ली के लोगों को आयुष्मान भारत योजना नहीं देंगे: दिल्ली आरोग्य कोष योजना को बताया बेहतर

दिल्ली में केंद्र की आयुष्मान भारत योजना को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने इस योजना को लागू करने से साफ इनकार करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना को लागू करना पहले से प्रभावी दिल्ली आरोग्य कोष (DAK) योजना को कमजोर करने जैसा होगा।

दिल्ली सरकार ने तर्क दिया है कि उसकी योजना अधिक व्यापक और प्रभावशाली है। आयुष्मान भारत योजना केवल दिल्ली की सीमित आबादी को लाभ पहुँचाएगी, जबकि DAK योजना हर नागरिक को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराती है।

AAP सरकार ने अदालत को बताया कि केंद्र की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) दिल्ली की केवल 12-15% आबादी को कवर करती है। इसके विपरीत, दिल्ली आरोग्य कोष योजना पूरे राज्य की जनता को लाभान्वित करती है। इस योजना के तहत मरीजों को राजधानी के किसी भी सूचीबद्ध निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। सरकार ने कहा कि उनकी योजना पारदर्शी है और इसका प्रभाव ज्यादा दूरगामी है। DAK योजना न केवल दिल्लीवासियों को लाभ पहुँचाती है, बल्कि पड़ोसी राज्यों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी राहत देती है।

दिल्ली सरकार ने हलफनामे में इस बात पर जोर दिया कि राजधानी के सरकारी अस्पतालों का नेटवर्क बेहद मजबूत है। दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने वाले 30% से अधिक मरीज उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और बिहार जैसे पड़ोसी राज्यों से आते हैं। सरकार का दावा है कि यह आंकड़ा दिखाता है कि दिल्ली के अस्पतालों में दी जा रही स्वास्थ्य सेवाएँ, अन्य राज्यों में आयुष्मान भारत योजना के तहत उपलब्ध सुविधाओं से कहीं बेहतर हैं।

AAP सरकार ने इस याचिका को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज करने का आग्रह किया है। सरकार ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा केवल 10% सीटें जीत पाई थी, फिर भी वह अपनी नीतियों को जबरदस्ती थोपने की कोशिश कर रही है। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य नीति बनाना राज्य का विषय है और केंद्र की योजना को लागू करना दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने जैसा है।

दिल्ली सरकार ने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत योजना पुरानी 2011 की जनगणना के आधार पर बनाई गई है, जो वर्तमान समय की जरूरतों के अनुसार अप्रासंगिक हो चुकी है। इस योजना के तहत बहुत से जरूरतमंद लोग लाभ से वंचित रह सकते हैं, जबकि DAK योजना ऐसी किसी सीमा से परे है और ज्यादा समावेशी है।

दिल्ली के भाजपा सांसदों ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने अदालत से माँग की है कि दिल्ली सरकार को आयुष्मान भारत योजना को लागू करने का निर्देश दिया जाए। भाजपा सांसदों का कहना है कि यह योजना पूरे देश में लागू हो चुकी है और दिल्ली के नागरिकों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले महीने दिल्ली सरकार और केंद्र को निर्देश दिया था कि वे 5 जनवरी तक आयुष्मान भारत योजना को लागू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करें। कोर्ट ने कहा था कि जब 33 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस योजना को लागू कर चुके हैं, तो दिल्ली में इसे न लागू करना उचित नहीं है।

प्रोफेसर अजहर का काम था पढ़ाना, भेजने लगा हिंदू लड़की को गंदे-गंदे मैसेज, बुलाता था कमरे पर… सहेली मुस्लिम छात्रा का भी है एंगल: हुआ गिरफ्तार-सस्पेंड

गुजरात के वडोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (एमएसयू) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ हिंदी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अजहर ढेरीवाला को एक हिंदू छात्रा का यौन उत्पीड़न करने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

प्रोफेसर अजहर ढेरीवाला पर आरोप है कि वो लंबे समय से एक हिंदू छात्रा को परेशान कर रहा है। पीड़ित लड़की की सहेली के मुताबिक, प्रोफेसर व्हाट्सएप पर अश्लील संदेश भेजता थे, घर तक पीछा करता था, और छात्रा को कमरे में आने का दबाव डालता था। यही नहीं, उसने छात्रा को धमकी दी कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई, तो परीक्षा में उसके नंबर काट लिए जाएँगे।

मामला तब खुला जब पीड़िता की सहेली शनिवार (11 जनवरी 2025) को अपनी माँ के साथ सयाजीगंज पुलिस स्टेशन पहुँची और शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस को दिए गए बयान में सहेली ने बताया कि प्रोफेसर अजहर ढेरीवाला न केवल पीड़िता को, बल्कि उसे भी मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। प्रोफेसर ने कई बार पीड़िता की जानकारी जुटाने और उसे राजी करने के लिए दबाव डाला।

इतना ही नहीं प्रोफेसर छात्रा का घर तक पीछा भी करता था। प्रोफसर ने छात्रा को धमकी भी दी थी कि अगर उसने प्रोफेसर की बात नहीं मानी तो एग्जाम में उसके मार्क्स कट कर देगा। इस मामले में छात्रा ने विश्वविद्यालय में शिकायत भी की थी, जिसके बाद प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया गया था। यही नहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन उसके ऑफिस को सील कर दिया था। हालाँकि उसके बाद भी वह फोन करके छात्रा को परेशान करने लगा, जिसके बाद छात्रा ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत दर्ज कराने के दौरान पीड़िता की सहेली ने पुलिस को कई सबूत सौंपे हैं, जिनमें अश्लील संदेश, कॉल रिकॉर्डिंग और प्रोफेसर द्वारा किए गए दबाव के अन्य प्रमाण शामिल हैं। इस मामले में पुलिस ने पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह मामला केवल यौन उत्पीड़न तक सीमित है या इसमें अन्य आपराधिक पहलू भी शामिल हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी है। और इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया है।

इस बीच, आरोपित प्रोफेसर डॉ अजहर ढेलीवाला ने कहा है कि उसके ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। वहीं, उसकी और छात्राओं के बीच बातचीत का कथित ऑडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वो छात्राओं को डर और लालच के दम पर अपने कमरे पर आने के लिए कह रहा है।

पीड़ित लड़की की माँ ने कहा कि वह पुलिस में इसलिए आए हैं क्यों उस लड़की के पास पारिवारिक सपोर्ट कम है। इसलिए वो खुद अपनी बेटी की सहेली के लिए पुलिस स्टेशन पहुँची।

मुस्लिम बेटी-अम्मी ने मौलाना के साथ मिल पिता पर ही करवा दिया POCSO केस, प्रताड़ित बाप-बेटे ने अपनाया हिंदू धर्म: मीडिया ने मौलवी को ‘धर्मगुरु’ बता फैलाया भ्रम

राजस्थान के अजमेर में मुस्लिम बाप-बेटे ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है। इस्लाम में रहते हुए पिता का नाम शफीक खान (बदला हुआ नाम) और बेटे का अकरम खान (बदला हुआ नाम) था। शफीक ने अपना नाम शुभम अग्रवाल और बेटे ने अपना नाम अमन अग्रवाल कर लिया है। दोनों पड़ोसी मौलाना से तंग थे। मौलाना इनकी पत्नी और बेटी को उकसाकर इनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगवाए थे।

दोनों पिता-पुत्र मूल रूप से अजमेर के खानपुरा के रहने वाले हैं। वे अजमेर के सुभाष नगर में फिलहाल रह रहे हैं। लगभग 45 साल के शफीक का कहना है कि वह पिछले 30 साल से फोटोग्राफी का काम कर रहे हैं और अपनी पत्नी, बेटा और बेटी साथ रहते थे। उनका कहना है कि पड़ोसी मौलाना ने उनकी बेटी और बीवी को अपने वश में कर लिया और उनके ही खिलाफ दोनों को उकसा रहा है।

शफीक ने आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके बेटे को मौलाना द्वारा पिछले तीन साल से प्रताड़ित किया जा रहा है। मौलाना ने पीड़ित की बेटी को बहका कर उसके खिलाफ 14 अगस्त 2024 को रामगंज थाने में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में मुकदमा दर्ज करवा दिया। मौलाना पीड़ित की बीवी के जरिए भी लगातार प्रताड़ित कर रहा था। आखिरकार पीड़ित ने बीवी से तलाक लेने का निर्णय लिया।

शुभम अग्रवाल बने पीड़ित शफीक का कहना है कि 27 अगस्त 2024 को अपनी बीवी को 2 लाख रुपए दिए और तलाक लिया। इसके बावजूद मौलाना के बहकावे में बीवी और बेटी पीड़ित को लगातार प्रताड़ित करते रहे। उनका कहना है कि इस संबंध में उन्होंने अपने समुदाय के लोगों से मदद माँगी, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। इसके बाद पिता-पुत्र ने हिंदू समुदाय के लोगों से मदद माँगी।

जब हिंदू समुदाय के लोगों से इन्हें हर तरह की मदद मिली तो दोनों ने इस्लाम मजहब त्यागकर हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया। इसके बाद वे दोनों ने क्रिश्चियन गंज स्थित मंदिर के पुजारी से संपर्क किया और हिंदू धर्म अपनाने की बात कही। इसके बाद पुजारी ने पूजा-पाठ, हवन और पूरे विधि-विधान से दोनों को हिंदू धर्म में घरवापसी करवाई। दोनों ने कोर्ट के जरिए भी धर्म परिवर्तन कर लिया।

दोनों का हिंदू धर्म में स्वागत करने वाले अजमेर के मंदिर के पुजारी ने बताया कि दोनों पिता-पुत्र काफी समय से परेशान थे और दोनों हिंदू धर्म अपनाना चाहते थे। आखिरकार सोमवार (13 जनवरी) को पूजन हवन करके उन्होंने सनातन धर्म अपना लिया। पुजारी का कहना है कि दोनों ने स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाया है। दोनों को सनातन धर्म के बारे में काफी जानकारी पहले से ही है।

हिंदू धर्म अपनाने वाले बाप-बेटे का कहना है कि उनका हिंदू धर्म से पहले से जुड़ाव रहा है। अब वे स्वेच्छा से हिंदू धर्म में आ गए हैं। दोनों ने हिंदू समाज से उन्हें अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “मेरा हिंदू समाज से भी निवेदन है कि मुझे और मेरे बेटे को हिंदू धर्म में स्वीकार करें। हमने कोर्ट के जरिए भी धर्म बदल लिया है। अगर मेरी कोई गलती हो तो मुझ पर कार्रवाई की जाए।”

मीडिया ने मौलाना को धर्मगुरु लिखकर संशय पैदा करने की कोशिश की

शफीक और अकरम नाम के दोनों बाप-बेटे अपने पड़ोसी मौलाना से परेशान थे। हालाँकि, मुख्यधारा की मीडिया संस्थानों ने मौलाना को धर्मगुरु बताकर समाज में भ्रम पैदा करने की कोशिश की। इस पूरे खबर को पढ़कर एक बार संशय होता है कि वे हिंदू धर्मगुरु से परेशान थे, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। इस तरह हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

दैनिक जागरण ने आरोपित को मौलाना लिखने की जगह उसे हिंदू धर्मगुरु लिखा है। कहीं भी मौलवी जैसे मौलाना मजहबी उलेमा के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया है। वहीं, दैनिक भास्कर ने इस्लामी धर्मगुरु भी नहीं लिखा। उसने लिखा कि दोनों बाप-बेटे ‘पड़ोसी धर्मगुरु’ से परेशान थे। इससे लगता है कि वे किसी हिंदू से परेशान थे।

180+ लोगों के हत्यारे आतंकियों को ‘न्याय’ दिलाने के लिए हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस पहुँचे कोर्ट, सबको बताया ‘मासूम’: उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी

ओडिशा हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस रहे डॉ एस मुरलीधर अब वकील बन चुके हैं। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में वकील के तौर पर मुंबई लोकल ब्लास्ट के दो दोषी 2 आतंकियों के लिए केस लड़ना चालू किया है। मुरलीधर ने कहा है कि 180 से अधिक लोगों की जान लेने वाले मुंबई लोकल ब्लास्ट मामले में जाँच पक्षपाती तौर पर हुई है और दोषियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उन्होंने यह दलीलें ब्लास्ट के दो दोषियों मुजम्मिल अताउर रहमान शेख और ज़मीर अहमद लतीफुर रहमान शेख के पक्ष में दी हैं। उन्होंने इन दोनों को मासूम बताया है।

मुंबई लोकल ट्रेन में ब्लास्ट करने वाले मासूम: मुरलीधर

वकील मुरलीधर ने सोमवार (13 जनवरी, 2025) को इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी दलीलें पेश की। मुरलीधर ने दावा किया कि ऐसे मामलों में पुलिस दबाव में जाँच करती है और कई बार आतंक के आरोपित जेल से सालों बाद छूटते हैं। मुरलीधर ने दावा किया कि मुंबई लोकल ब्लास्ट मामले में दोषी 17 वर्षों से बंद हैं और उनके जीवन के महत्वपूर्ण साल निकल चुके हैं। मुरलीधर ने दावा किया कि मुंबई लोकल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए सभी लोग ‘निर्दोष’ और मासूम हैं।

वकील मुरलीधर ने यह भी दावा किया कि इस मामले में जाँच एजेंसियों के पास कोई पक्का सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसियाँ पहले भी फेल हो चुकी हैं लेकिन कोर्ट अभी इसे ठीक कर सकती है और इन्हें रिहा कर सकती है। उन्होंने मीडिया को भी ऐसे मामलों में दोषी ठहराया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ऐसे मामलों में पकड़े गए लोगों को पहले ही दोषी मान लेती है और इसके बाद जाँच गड़बड़ होती है। वकील मुरलीधर ने दावा किया कि हमारे पास तमाम ऐसे केस हैं।

वकील मुरलीधर ने कोर्ट में कहा, “गवाहों और आरोपितों के बयान और सबूत मौजूद हैं कि उन्हें गवाही देने के लिए मजबूर किया गया था। आरोपितों के परिवार और रिश्तेदारों को भी पीटा गया और प्रताड़ित किया गया। उदाहरण के लिए, पूरे पंचनामा में सबूत झूठे थे। आरोप है कि इन लोगों ने बम बनाने के लिए RDX का इस्तेमाल किया, लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आरडीएक्स कौन लाया, बम बनाने में उनकी किसने मदद की।”

180+ लोगों की गई थी जान

मुंबई लोकल ब्लास्ट मामले में यह केस वकील मुरलीधर मुजम्मिल अताउर रहमान शेख और ज़मीर अहमद लतीफुर रहमान की तरफ से लड़ रहे हैं, जिन्हें एक अदालत उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। इनमें से एक बंगलुरु और एक मुंबई का रहने वाला है। इस मामले में उनके साथ 10 और लोग दोषी ठहराए गए थे। इनमें से 5 को फांसी जबकि 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इन्होने अपनी इस सजा के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की हुई है।

यह ब्लास्ट 11 जुलाई, 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए थे। इनमें 7 ट्रेनों को निशाना बनाया गया और था सब में प्रेशर कुकर और IED वाले बम रखे गए थे। यह बम शाम को तब फटे जब लोग अपने घरों को वापस लौट रहे थे। इस ब्लास्ट में 187 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। यह 26/11 के पहले देश के सबसे बड़े सीरियल ब्लास्ट थे। इन ब्लास्ट के बाद पुलिस और ATS ने 13 लोग पकडे थे जिसमें से 12 को सजा सुनाई गई थी।

जज रहते हुए सवालों के घेरे में रहे मुरलीधर

साल 2022 में फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने भीमा कोरेगाँव मामले में तब दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रहे एस मुरलीधर पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया था। उनका ये आरोप जस्टिस मुरलीधर के गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमांड और हाउस अरेस्ट को रद्द करने फैसले पर था।

हालाँकि, बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 दिसंबर 2022 को विवेक अग्निहोत्री ने जस्टिस मुरलीधर के खिलाफ किए गए कॉमेंट्स पर बगैर शर्त दिल्ली हाईकोर्ट से माफी भी माँगी थी। इस आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्निहोत्री और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व निदेशक एस गुरुमूर्ति के खिलाफ 2018 में अवमानना का केस किया था।

गौरतलब है कि पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगाँव मामले में अगस्त 2018 में नवलखा को दिल्ली से हिरासत में लिया था और उन्हें घर में नजरबंद करने के लिए महाराष्ट्र ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड ली थी। उस साल अक्टूबर में जस्टिस मुरलीधर ने इस ट्रांजिट रिमांड को रद्द करते हुए नवलखा को हाउस अरेस्ट से रिहा करने का आदेश दिया था। बता दें कि जस्टिस मुरलीधर साल 2021 में उड़ीसा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे और 7 अगस्त, 2023 को रिटायर हुए थे।

AAP का भ्रष्टाचार: INDI गठबंधन वाले कॉन्ग्रेस ने ही ‘कट्टर ईमानदार’ का सर्टिफिकेट किया कैंसल, कोर्ट ने भी फटकारा

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद को कट्टर ईमानदार कहते हैं। वो अपनी पार्टी को ईमानदारी का पर्याय बताते हुए उसे ईमानदारी का सर्टिफिकेट देते हैं, लेकिन इंडी गठबंधन में शामिल उनकी सहयोगी पार्टी कॉन्ग्रेस के ही नेता ने उनके ईमानदारी के ‘सर्टिफिकेट’ को कैंसिल कर दिया है। कॉन्ग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोपों को न सिर्फ दोहराया है, बल्कि साफ कहा है कि सरकारी एजेंसियों की कार्रवाईयों के चलते शराब नीति के घोटाले से आने वाला पैसा बंद हो गया है, इसलिए दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को जनता से मदद माँगनी पड़ रही है।

तेलंगाना कॉन्ग्रेस नेता किरण कुमार चमाला ने AAP की ईमानदारी पर सीधा सवाल उठाते हुए पूछा कि आप अब क्यों क्राउडफंडिंग का सहारा ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने साउथ लॉबी और तेलंगाना की MLC के कविता के साथ मिलकर दिल्ली की शराब नीति में भ्रष्टाचार किया था। उनका दावा है कि जब तक केंद्र सरकार ने इस गड़बड़ी पर चोट नहीं की, तब तक AAP ने शराब नीति के जरिए पैसे बनाए।

चमाला ने कहा, “दिल्ली CM आतिशी अब चुनावों के लिए 40 लाख रुपये जुटाने के लिए जनता से क्राउडफंडिंग माँग रही हैं। उन्हें यह बताना चाहिए कि जब तक ‘साउथ ग्रुप’ सक्रिय था, तब तक उनकी पार्टी ने शराब घोटाले से कमाई की। अब जब भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है, तो उन्हें जनता से मदद माँगनी पड़ रही है।”

केंद्र सरकार की कार्रवाई के बाद शराब घोटाले की कमाई बंद हो गई, जिससे आम आदमी पार्टी की असलियत सामने आ गई। तेलंगाना कॉन्ग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली की शराब नीति से हासिल किए पैसों के जरिए गोवा चुनाव लड़ा और नतीजा यह है कि वहाँ बीजेपी की सरकार है।

एक तरह से ये केंद्र सरकार की तारीफ ही है कि उसने भ्रष्टाचार पर गहरा चोट किया है और शराब की कमाई को बंद कर दिया। कॉन्ग्रेस नेता का ये बयान आम आदमी पार्टी को बुरी तरह से एक्सपोज करता है कि उसका भ्रष्टाचार बंद हो गया तो उसे क्राउडफंडिंग की राह पकड़नी पड़ी।

बता दें कि शराब घोटाले से आतिशी का सीधा कनेक्शन रहा है, क्योंकि घोटाले से जुड़े लोगों की वो रिश्तेदार हैं। ऑपइंडिया ने अपने लेख में बताया था कि आतिशी की बहन रोजा बसंती की शादी पत्रकार भूपेंद्र चौबे से हुई है, जो ‘इंडिया अहेड न्यूज़’ में बड़े पद पर थे और चैनल का सारा काम वही देख रहे थे। बकौल कपिल मिश्रा, आतिशी के जीजा वाले इस चैनल को हवाला के माध्यम से शराब घोटाले का 17 करोड़ रुपया पहुँचाया गया। ‘India Ahead News’ चैनल में कमर्शियल हेड के रूप में तैनात रहे अरविंद कुमार सिंह को CBI ने शराब घोटाले में गिरफ्तार भी किया था। जून 2021 से लेकर जनवरी 2022 तक हवाला के जरिए हुए पैसों के लेनदेन में उन्हें जाँच एजेंसी ने शामिल बताया था।

अरविंद कुमार सिंह चैनल में प्रोडक्शन कंट्रोलर भी थे। गोवा में AAP का चुनाव प्रचार देख रही कंपनी ‘Chariot Media’ के खाते में 17 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। CBI ने आरोप लगाया था कि हवाला नेटवर्क के जरिए ये पैसे भेजे गए थे। 14 फरवरी, 2022 को गोवा में विधानसभा चुनाव हुए थे। दिल्ली के शराब घोटाले में हुआ ये था कि एक नई शराब नीति बना कर ‘साउथ लॉबी’ यानी, दक्षिण भारत की कुछ शराब कंपनियों को फायदा पहुँचाया गया और बदले में करोड़ों रुपए की घूस ली गई।

AAP को मिली घूस की रकम 100 करोड़ रुपए बताई गई थी। कविता के करीबी अरुण पिल्लई ने ‘साउथ लॉबी’ की तरफ से बैठकों में हिस्सा लिया था। वहीं Indospirit के मालिक समीर महेन्द्रू ने भी घूस में करोड़ों रुपए दिए थे। इस पूरे खेल में कोरोना के दौरान नुकसान दिल्ली की जनता का हुआ, अरविंद केजरीवाल अपने आवास ‘शीशमहल’ को सुख-सुविधाओं से लैस करने में व्यस्त रहे।

दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार

अब दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाले और शीशमहल के मामले को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार भी लगाई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 14 रिपोर्ट्स विधानसभा में पेश नहीं की गईं। इनमें से दो रिपोर्ट्स लीक हो चुकी हैं, जिनमें केजरीवाल के सरकारी बंगले पर करोड़ों रुपये खर्च और शराब नीति से सरकारी खजाने को 2000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है।

जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने दिल्ली सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने विधानसभा सत्र बुलाने में कदम पीछे खींच लिए। इससे आपकी ईमानदारी पर संदेह होता है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि CAG रिपोर्ट को समय पर पेश करना सरकार की जिम्मेदारी थी।

‘सर्टिफिकेट’ अब भी दिखाएगी आम आदमी पार्टी या…

आम आदमी पार्टी की ‘कट्टर ईमानदारी’ पर न केवल राजनीतिक विरोधी, बल्कि सहयोगी दल भी सवाल खड़े कर रहे हैं। कोर्ट की फटकार और भ्रष्टाचार के आरोपों ने पार्टी की छवि को बड़ा झटका दिया है। मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी दुविधा वाली बात हो गई है कि वो जनता के बीच क्या मुँह लेकर जाए? ‘कट्टर ईमानदारी’ वाला सर्टिफिकेट खारिज होने के बाद क्या वो इसे महज एक राजनीतिक नारा बताकर अपना पलड़ा झाड़ ले? या बेशर्मों की तरह वो अपने सर्टिफिकेट पर डटी रहे। ऐसे में आम आदमी पार्टी को ECI और CAG की रिपोर्ट्स को सामने लाना इसलिए भी जरूरी है ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और ‘अगर’ कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, तो इस मुद्दे पर भी दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

1.5 लाख दलित-मुस्लिम वोटर, पंचायत चुनाव हारा हुआ सपा सांसद का बेटा और ‘राम मंदिर के बाद भी हारी भाजपा’: अयोध्या के मिल्कीपुर उपचुनाव में जानिए BJP की रणनीति

2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे देश को चौंकाया। अधिकांश एग्जिट पोल में 300 पार दिखने वाली भाजपा 240 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। इसके बाद उसने TDP और जेडीयू समेत बाकी NDA दलों के सहयोग से सरकार बनाई। लेकिन इस लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नतीजा फैजाबाद लोकसभा सीट का रहा।

लोगों ने अचरज जताया कि हिन्दुओं की सदियों पुरानी राम मंदिर की अभिलाषा पूरी होने के बाद भी आखिर भाजपा को यह परिणाम क्यों मिला। इस हार को लेकर कई तरह के विश्लेषण पेश किए गए। आम बोलचाल में अब अयोध्या कही जाने वाली यह सीट भाजपा समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद के हाथों हारी थी। अवधेश प्रसाद को इससे पहले दिल्ली की राजनीति में कोई नहीं जानता था। इस जीत ने अवधेश का कद कई गुना बड़ा कर दिया। अवधेश प्रसाद कोई नए नेता नहीं है।

वह सांसद बनने के पहले अयोध्या जिले की ही मिल्कीपुर सुरक्षित विधानसभा सीट से विधायक थे। अवधेश प्रसाद के संसद पहुँचने पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें ट्रॉफी की तरह प्रस्तुत किया। भाजपा अब इस हार का हिसाब पूरा करने का मौक़ा पा चुकी है।

कानूनी पचड़े के चलते फँसा था चुनाव

अवधेश प्रसाद की जीत से खाली हुई विधानसभा सीट मिल्कीपुर पर फरवरी, 2025 में उपचुनाव होगा। अभी तक यह उपचुनाव एक कानूनी पचड़े की वजह से लटका हुआ था। इस सीट पर अवधेश प्रसाद की विधानसभा में जीत के विरुद्ध भाजपा प्रत्याशी ने ही याचिका डाली हुई थी, उन्होंने यह वापस ले ली थी। इसके बाद अब उपचुनाव का ऐलान हो गया है।

हरियाणा और झारखंड विधानसभा चुनाव के साथ हुए उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में भाजपा गठबंधन ने 9 में से 7 सीटें हाल ही में जीती थीं। इसके बाद भाजपा का जोश हाई है और वह मिल्कीपुर भी जीतने के दावे कर रही है। मिल्कीपुर का उपचुनाव हाई प्रोफाइल हो चुका है।

यहाँ 5 फरवरी, 2025 को मतदान होगा जबकि 8 फरवरी को नतीजे आएँगे। समाजवादी पार्टी ने चुनाव तारीखों से कहीं पहले इस सीट पर अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को टिकट देने का ऐलान कर दिया था। इस सीट पर भाजपा ने अभी अपना उम्मीदवार नहीं दिया है। कयास हैं कि भाजपा मकर संक्रांति के बाद यहाँ नाम की घोषणा करेगी।

भाजपा जल्द करेगी प्रत्याशी का ऐलान

भाजपा की तरफ से बाबा गोरखनाथ, रामू प्रियदर्शी, चन्द्रभान पासवान समेत कई लोग लाइन में हैं। बाबा गोरखनाथ 2017 में यहाँ से विधायक रहे थे और 2022 में उन्हें अवधेश प्रसाद से हार मिली थी। उनका भी दावा टिकट को लकर मजबूत है। उनके अलावा भाजपा के एक और पूर्व विधायक और संगठन का बड़ा चेहरा रामू प्रियदर्शी भी मैदान में हैं।

इन दोनों के अलावा चंद्रभान पासवान, चन्द्रकेश पासवान समेत कई और लोग भी लाइन में हैं। इस पर फैसला जल्द होने की उम्मीद है। इसके बाद ही चुनाव किस तरफ जाएगा, इस पर फैसला होगा। मिल्कीपुर दलित बहुल सीट है और आरक्षित भी है। ऐसे में भाजपा भी जमीन पर सारी चीजों का जायजा लेने के बाद ही प्रत्याशी तय करना चाहती है।

स्थानीय पत्रकार नितेश सिंह बताते हैं, “बाबा गोरखनाथ का आधार पहले से बना हुआ है लेकिन उनका अंदरखाने कुछ विरोध भी है। हालाँकि, उनकी दावेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा रामू प्रियदर्शी सभी बेंचमार्क पर खरे उतर रहे हैं। अभी काफी मुश्किल है बताना कि पार्टी किसे चुनेगी।”

सीट दलित बहुल लेकिन निर्णायक वोट सवर्णों का

मिल्कीपुर विधानसभा में लगभग 1.2 लाख वोटर दलित हैं। इनमें से भी सबसे अधिक वोट पासी समाज के लोगों का है। पासी समाज से ही अवधेश प्रसाद आते हैं। दलित वोटरों के अलावा ब्राम्हण, ठाकुर और बाकी सवर्ण वोटर भी यहाँ बड़ी संख्या में हैं। उनका कुल वोट भी लगभग 1 लाख है। मुस्लिम वोट यहाँ 30,000 है।

सपा मुस्लिम और दलित वोट के गठजोड़ से ही यहाँ जीतने की फिराक में हैं। इससे पहले अवधेश प्रसाद भी इसी फार्मूले के तहत जीतते आए हैं। उन्हें कुछ समर्थन सवर्ण भी देते रहे हैं। लेकिन इस बार मामला अलग है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवधेश प्रसाद की जो पकड़ जमीन पर है, वह उनके बेटे अजीत प्रसाद की नहीं है।

अजीत प्रसाद जिला पंचायत का चुनाव तक हार चुके हैं। पत्रकार नितेश सिंह कहते हैं, “अजीत प्रसाद में वो विनम्रता नहीं है जो अवधेश प्रसाद में थी। वह प्रचार में तो लगे हुए हैं लेकिन सपा में अंदरखाने हुई लड़ाई उन्हें नुकसान कर सकती है। हालाँकि, अखिलेश यादव का सीधा आशीर्वाद उन्हें हासिल है।”

सभी उम्मीदवार दलित समाज से होने के चलते सवर्ण किसे समर्थन देता है, यह चुनाव में X फैक्टर बन सकता है। चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि 2017 में बाबा गोरखनाथ को सवर्णों का समर्थन हासिल था लेकिन 2022 में यह समर्थन अवधेश प्रसाद को रहा। ऐसे में उनका वोट निर्णायक हो सकता है।

विश्लेषक बताते हैं कि सवर्णों का वोट किधर जाएगा, इसको लेकर फैसला भाजपा के उम्मीदवार का नाम सामने आने के बाद होगा। वह यह भी कहते है यहाँ सवर्ण भाजपा की तरफ से कोई अलग चेहरा चाहते हैं, इसके बाद वह पूरी तौर पर समर्थन को तैयार हैं।

भाजपा 2 बार जीती है मिल्कीपुर

मिल्कीपुर ऐसी विधानसभा सीट है जिस पर बीते तीन दशक में भाजपा, बसपा, सपा और कम्युनिस्ट पार्टी सभी जीते हैं। हालाँकि, पिछले 10 विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में इस सीट पर सपा 6 बार जीती है। भाजपा यहाँ 2017, 1991 जबकि बसपा 2007 में चुनाव जीती थी। हालाँकि, अब यहाँ सीधी लड़ाई भाजपा और सपा में ही है। 2017 विधानसभा चुनाव में बाबा गोरखनाथ ने 28000 वोटों के अंतर से अवधेश प्रसाद को हराया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में वह लगभग 13000 वोटों से हारे थे। इस बार वह फिर टिकट पाने के मैदान में हैं।

मंत्री से लेकर संगठन तक भाजपा ने झोंकी ताकत

भाजपा फ़ैजाबाद लोकसभा सीट पर मिली हार का बदला इस सीट पर जीत से लेना चाहती है। यह बदला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उसके सामने उन्हीं अवधेश प्रसाद के बेटे हैं, जिन्होंने उन्हें मात दी है। भाजपा इस चुनाव के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। उसने यहाँ अपने 6 मंत्री लगाए हुए हैं।

इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष से लेकर क्षेत्रीय अध्यक्ष और बाकी संगठन के लोग भी जुटे हुए हैं। यह हर गाँव के प्रधान, VDC, नगर पंचायत के प्रतिनिधि और प्रभावशाली लोगों से मिलकर माहौल सेट कर रहे हैं। यहाँ तक कि लोगों की समस्याओं को सं कर वहीं पर उनका निवारण करवाया जा रहा है।

चुनाव में सीधा दखल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी है। उन्होंने भी यहाँ के भाजपा पदाधिकरियों के साथ बैठक की है। उनका बीते कुछ माह में यहाँ दौरा भी हो चुका है। प्रत्याशी की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री योगी की रैली भी यहाँ आयोजित किए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।

भाजपा चुनाव में हर गाँव से वोट बटोरने के लिए लगातार अपना संगठन मजबूत कर रही है। गाँवों में उसके कार्यकर्ता जा रहे हैं। जैसे ही प्रत्याशी घोषित किया जाता है, जनसंपर्क भी तेजी से चालू किया जाएगा। भाजपा इस सीट को जीतकर अयोध्या में मिली हार पर मिट्टी डालना चाहती है।