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‘2002 के बाद कोई मुस्लिम नहीं कर सकता आप पर विश्वास’ – दिग्विजय सिंह ने फिर दिया भड़काऊ बयान

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ जामिया में हुई हिंसा के बाद कई लोगों ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। लेकिन,कॉन्ग्रेस इसको आधार बनाकर सिर्फ़ भाजपा पर हमलावर रही और पार्टी के अलग-अलग नेताओं ने अपनी बयानबाजियों के जरिए लोगों में डर बसाने की कोशिश की। इसी बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर भड़काऊ बयान देकर आग में घी डालने का काम किया।

टाइम्स नाऊ की खबर के अनुसार उन्होंने जामिया हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए मोदी सरकार पर सवाल उठाया और कहा कि कोई मुस्लिम नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर 2002 के गुजरात दंगों के बाद यकीन नहीं कर सकता। उनके अनुसार 2002 के बाद से ही मुस्लिमों ने मोदी और शाह पर अपना विश्वास खो दिया।

गौरतलब है कि गाँधी परिवार के करीबी और कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का ये बयान उस समय आया है जब मोदी सरकार लगातार लोगों से शांति कायम रखने की बातें कर रही है। दूसरी ओर कॉन्ग्रेस जिस ढंग की राजनीति इस मुद्दे पर कर रही है, उस पर खुद लोग ही आरोप लगा रहे हैं कि वो लोगों में डर फैलाने का काम कर रही है।

बता दें कि इससे पहले दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ कई बार विवादित बयान दिए हैं। लेकिन इस बार मामला भड़के माहौल को शांत कराने का था। लेकिन यहाँ भी दिग्विजय सिंह ने अपनी राजनीति की रोटियाँ सेंकनी चाही और देश में शांति की अपील करने के बजाए ऐसे विवादित बयान दे डाले।

इससे पहले भी दिग्विजय सिंह ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था, “मोदी-शाह कहते हैं कि उन पर विश्वास करो। नोटबंदी में किया था क्या नतीजा निकला? अमित शाह हिंदुस्तान के मुसलमानों को कहते हैं कि उन पर विश्वास करो। यदि गोधरा कांड, सोहराबुद्दीन कांड, असम की एनआरसी सूची और उनके मुसलमानों के खिलाफ बयान देखें तो क्या वे बयान और मोदी शाह के कदम मुसलमानों में विश्वास पैदा करते हैं? बिलकुल नहीं। आप मुसलमानों के प्रति नफरत भरे बयान और कदम उठाना बंद करो तो मुसलमान अपने आप विश्वास करेगा।”

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भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने एक वीडियो शेयर कर बताया है कि किस तरह संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर मजहबी उन्माद फैलाने की साज़िश रची जा रही है। यहाँ तक कि मस्जिदों से घोषणा की गई ताकि उपद्रवी सड़क पर उतर कर हिंसा करें। मालवीय ने दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर मस्जिदों से हुई भड़काऊ घोषणाओं को जिम्मेदार ठहराया है।

अमित मालवीय ने कहा कि इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में वहाँ के अल्पसंख्यकों का क्या होता होगा। बता दें कि सीएए भी उन्हीं अल्पसंख्यकों के लिए है, जिन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में प्रताड़ित किया गया और उस प्रताड़ना से तंग आकर वो पिछले 5 वर्षों या इससे अधिक समय से भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। मालवीय ने मस्जिदों से भड़काऊ घोषणाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये सारी घटनाएँ बताती हैं कि सीएए ज़रूरी है।

अमित मालवीय ने ‘इंडिया टुडे’ के एक वीडियो को शेयर किया, जिसमें लोग बता रहे हैं कि वो क्यों सड़कों पर उतरे। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप मालवीय का बयान और उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो को देख सकते हैं:

दिल्ली में हिंसा के दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की, जैसा जम्मू कश्मीर में वर्षों से होता आ रहा है। जम्मू कश्मीर में भी कश्मीरी पंडितों को निकाले जाने के बाद से लेकर अब तक, कई बार विभिन्न मस्जिदों से भड़काऊ ऐलान होने की ख़बरें आती रहती हैं। ‘इंडिया टुडे’ से बातचीत में दिल्ली एक एक उपद्रवी ने कहा:

“हमारे क्षेत्र में कई दिनों से अनाउंसमेंट हो रही थी कि कि मंगलवार को इतने बजे एनआरसी और सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन होगा। कई लोगों को पहले से ही पता था और जिन्हें नहीं पता था, उन्होंने मस्जिदों से अनाउंस कर के कहा गया कि आप सड़क पर उतरो।”

उक्त उपद्रवी की बातों से साफ़ हो जाता है कि मस्जिदों से ऐलान कर लोगों को सड़क पर उतरने को कहा गया। इसके बाद हिंसा भड़की और पुलिस व दंगाइयों के बीच झड़प हुई। पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए।

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केरल में SFI के गुंडों ने ABVP कार्यकर्ता पर किया हमला: 30 सेकंड के Video में कैद हुआ सब कुछ

केरल के त्रिशूर से SFI की गुंडागर्दी का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि
SFI के गुंडे ABVP के कार्यकर्ता को बुरी तरह पीट रहे हैं। बताया जा रहा है कि ABVP कार्यकर्ताओं ने श्री केरला वर्मा कॉलेज में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे प्रोपेगेंडा को ध्वस्त करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम से बौखलाए वामपंथी गुंडों ने इसके बाद इस घटना को अंजाम दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉलेज में एबीवीपी के छात्रों द्वारा आयोजित सेमिनार के दौरान पहले एसएफआई के गुंडों ने उन्हें (ABVP के कार्यकर्ताओं को) उनकी क्लास से खींचकर बाहर निकाला और बाद में उनकी पिटाई की। इस बीच शिक्षकों के एक समूह ने बीच-बचाव करके किसी तरह छात्रों की जान बचाई। पूरे वाकये में अक्षय, अरोमल और राहुल नाम के तीन छात्र घायल हुए हैं। जिन्हें नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के अनुसार नागरिकता कानून के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए एबीवीपी ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। लेकिन एसएफआई इसके विरोध में था और उसने कार्यक्रम का आयोजन करने पर ABVP को धमकाया भी था कि वे इन सबसे दूर रहे। हालाँकि, जब इस धमकी के बाद भी कार्यक्रम आयोजित हुआ तो एसएफआई वालों ने कैंपस सेमिनार के मुख्य अतिथि टीआर रमेश को ही नहीं आने दिया, लेकिन पुलिस के हस्तक्षेप के बाद एसएफआई के कार्यकर्ताओं को कॉलेज परिसर से हटा दिया गया।

दोनों समूहों के बीच इसी गहमागहमी में में धीरे-धीरे टकराव बढ़ गया और फिर हिंसक झड़प का वीडियो सामने आया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को एबीवीपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शेयर किया है। उनका दावा है कि वे केवल नागरिकता संशोधन कानून को लेकर फैली अफवाहों को दूर करने और स्टूडेंट्स को इसके बारे में समझाने गए थे, लेकिन एसएफआइ के गुंडों ने उनके साथ मारपीट की।

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आजकल ‘आज़ादी’ के नारे ख़ूब चर्चा में हैं। जेएनयू में 2016 में लगे देशविरोधी नारों के बाद से ही इन स्लोगन्स को एक तरह से सरकार के विरोध की पहचान बना ली गई। “भारत तेरे टुकड़े होंगे होंगे” और “कश्मीर माँगे, आज़ादी” जैसे विभाजनकारी और भड़काऊ नारों के बाद आज़ादी के स्लोगन्स का ख़ूब इस्तेमाल किया गया। बाद में असली इरादे को छिपाने के लिए “आतंकवाद से, आज़ादी”, “सामंतवाद से, आज़ादी” और “जातिवाद से, आज़ादी” जैसे नारे लगाए गए। हाल ही में जामिया व अन्य यूनिवर्सिटीज में भी जब सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुआ, तब भी ‘आज़ादी’ के नारे लगाए गए।

अब हम आपको ‘आज़ादी’ के नारे का दूसरा पक्ष भी दिखा रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का कहना है कि जिसे भी आज़ादी चाहिए, वह आकर ले जा सकता है। उन्होंने ‘आज़ादी’ की चाह रखने वाले वामपंथियों को चुनौती दी है कि जिसे भी आज़ादी चाहिए, वो आकर ले जाएँ। उनके नारों पर एक नज़र डालिए:

“हम लाकर देंगे- आज़ादी”
“अरे ये पड़ी है- आज़ादी”
“आओ ले लो- आज़ादी”
“अरे दे के रहेंगे- आज़ादी”
“तुम्हें भी देंगे- आज़ादी”
कसाब को दे दी- आज़ादी”
“बुरहान को दे दी- आज़ादी”
“अफजल को दे दी- आज़ादी”

नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देश सकते हैं कि कैसे संशोधित नागरिकता क़ानून का समर्थन कर रहे छात्र वामपंथियों को आज़ादी देने के नारे लगा रहे हैं:

छात्रों को उम्मीद है कि जो वामपंथी दिन-रात ‘आज़ादी’ के नारे लगाते हैं और ‘आज़ादी’ की माँग कर रहे हैं, वो ‘आज़ादी’ उन्हें मुफ्त में मिल रही है तो वो ज़रूर आकर ले जाएँगे। ऑपइंडिया को मिली ताज़ा सूचना के अनुसार, अभी तक एक भी वामपंथी ‘आज़ादी’ लेने नहीं पहुँचा था।

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11 पॉइंट्स में समझिए सच्चाई: CAA के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने के लिए फैलाए जा रहे ये सारे झूठ

उत्तर-पूर्वी राज्यों में हिंसा हो रही है। सीएए और एनआरसी के नाम पर लोगों को भड़काया जा रहा है। जिस क़ानून से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से भाग कर भारत आए प्रताड़ित शरणार्थियों को नागरिकता मिलने जा रही है, उसे लेकर अनेकों-अनेक भ्रम फैलाए जा रहे हैं। यहाँ हम 11 पॉइंट्स में उन सभी सवालों के जवाब देंगे, जिनका इस्तेमाल कर के पूर्वोत्तर में हिंसा भड़काई जा रही है। झूठ क्या है और क्या है सच, इसके बीच की महीन रेखा को हम आपके समक्ष लेकर आए हैं, ताकि आपके सामने अगर कोई झूठ फैलाए तो आप सच के हथियार से उसे जवाब दे सकें।

1.) झूठ: नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) असम एकॉर्ड का उल्लंघन करता है।

सच: सीएए में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे असम एकॉर्ड का उल्लंघन होता हो। इसमें मार्च 24, 1971 की जो कट-ऑफ तारीख दी गई है, वो भी असम एकॉर्ड के अनुरूप ही है। कुछ भी ऐसा नहीं है, जो इस समझौते में लिखी बातों के विपरीत हो।

2.) झूठ: बंगाली हिन्दू असम के लिए बोझ बन जाएँगे।

सच: सीएए पूरे देश में लागू होता है। तीनों पड़ोसी इस्लामिक देशों से प्रताड़ित अल्पसंख्यक जो भारत में शरणार्थी बने हुए हैं, उन्हें केवल असम में ही नहीं बसाया जा रहा है। वो लोग भारत के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं। लेकिन, झूठ फैलाया जा रहा है कि उन्हें केवल असम में ही बसाया जाएगा।

3.) झूठ: सीएए से उन डेढ़ लाख बंगाली हिन्दुओं को भारतीय नागरिकता मिल जाएगी, जो असम में रह रहे हैं।

किसी भी विदेशी नागरिक को इस क़ानून से अपने-आप नागरिकता नहीं मिल जाएगी, चाहे वो किसी भी धर्म का हो। अधिकारीगण इस बात की पूरी पड़ताल करेंगे कि नियमों के तहत उक्त व्यक्ति को नागरिकता दी जाए या नहीं, इसके बाद ही फ़ैसला लिया जाएगा।

4.) झूठ: इससे असम के अल्पसंख्यकों के हितों को नुकसान होगा।

सीएए तो विदेशी अल्पसंख्यकों (पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश) के लिए है। फिर भारतीय अल्पसंख्यकों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ने की बात कहाँ से आ गई? इस पर और स्पष्ट होने के लिए गृह मंत्री अमित शाह का संसद में दिया गया भाषण सुनें।

5.) झूठ: इससे पूर्वोत्तर में बांग्लाभाषियों की संख्या अचानक से बढ़ जाएगी।

असम के बराक वैली में पहले से ही बंगालियों की बड़ी तादाद है, जहाँ बंगाल को दूसरी आधिकारिक भाषा की मान्यता भी दी गई है। ब्रह्मपुत्र की घाटी में रह रहे बंगाली तो असम के अनुरूप ढल गए हैं और वो असमिया बोलते हैं। ऐसा आज से नहीं, वर्षों से हो रहा।

6.) झूठ: ‘इनर लाइन परमिट (ILP)’ के तहत आने वाले क्षेत्रों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा।

आईएलपी के तहत कुछ दिनों पहले तक तीन राज्य आते थे- अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड। भारत सरकार ने हाल ही में मणिपुर की चिंताओं को देखते हुए उसे आईएलपी वाले चौथे राज्य की मान्यता प्रदान की। सबसे बड़ी बात कि सीएए के तहत आईएलपी में आने वाले क्षेत्रों को बाहर रखा गया है।

7.) झूठ: सीएए के लागू होने के बाद नागरिकता पाने की लालच में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी हिन्दू पूर्वोत्तर में आ जाएँगे।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ प्रताड़ना की घटनाओं में भारी कमी आई है। अब ऐसी कोई सम्भावना दिखती नहीं कि हज़ारों-लाखों की संख्या में बांग्लादेश से भारत की तरफ हिन्दुओं का एकमुश्त पलायन हो। और हाँ, सीएए के तहत दिसंबर 31, 2014 का कट-ऑफ डेट भी तो तय किया गया है। उसके बाद आने वाले लोग इस क़ानून के तहत लाभ के अधिकारी नहीं होंगे।

8.) झूठ: सीएए घुसपैठियों को बढ़ावा दे रहा है।

सबसे पहले तो घुसपैठियों और शरणार्थियों के बीच अंतर होता है, ये जान लेना चाहिए। सीएए तो संवैधानिक तरीके से उन्हें अधिकार दे रहा है, जिन्हें पिछले 70 सालों से हर प्रकार के लाभ से वंचित रखा गया और जिन्होंने भारी प्रताड़ना झेली। ये क़ानून वैध शरणार्थियों के लिए है, अवैध घुसपैठियों के लिए नहीं।

9.) झूठ: ये असम के मूल बाशिंदों के ख़िलाफ़ है।

असम के मूल बाशिंदों के हितों की रक्षा के लिए ही तो एनआरसी लाया गया है। सीएए तो पूरे देश के लिए है।

10.) झूठ: सीएए नॉर्थ-ईस्ट के ट्राइबल एरियाज में भी लागू होगा।

असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के ट्राइबल क्षेत्रों में तो सीएए लागू होगा ही नहीं। पूर्वोत्तर के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। संविधान की छठी अनुसूची का ध्यान रखते हुए इसे तैयार किया गया है।

11.) झूठ: ये आर्टिकल 370 का उल्लंघन करेगा (इसके तहत पूर्वोत्तर के राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है।)

सरकार ने बार-बार कहा है कि नॉर्थ-ईस्ट की सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान को अक्षुण्ण रखा जाएगा। साथ ही अनुच्छेद 371 को हटाने की बातें भी फ़र्ज़ी है।

असम में हिंसा भड़काए जाने के पीछे कई आतंकी संगठनों के नाम भी सामने आ रहे हैं। पूर्वोत्तर में भाजपा के लगातार बढ़ते प्रभाव के कारण चिंता में डूबी ताक़तें साज़िश रच रही हैं। जैसे जामिया सहित अन्य विश्वविद्यालयों में छात्रों को भड़काया जा रहा है, उसी तरह नॉर्थ-ईस्ट में लोगों को सड़क पर उतरने को कहा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में अलग तरीके से हिंसा भड़काई जा रही है। अर्थात, अलग-अलग इलाक़ों में विरोध के लिए अलग-अलग बहाने खोजे जा रहे हैं।

‘कॉन्ग्रेसी, कॉमरेड और इस्लामी कट्टरपंथियों ने रची थी गुवाहाटी को जलाने की साजिश’

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यूपी के सीएम योगी घूम रहे हैं… गेरुआ पहन बहू-बेटी की इज्जत लूटते हैं: कॉन्ग्रेस गठबंधन का सीएम कैंडिडेट

झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार जोरों पर है। इस बीच झामुमो नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। सोरेन ने बुधवार को पाकुड़ में सभा को संबोधित करते हुए कहा, “आज देश में बहू-बेटियों को जलाया जा रहा है। मुझे पता चला कि इधर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी गेरुआ पहन कर चक्कर लगा रहे हैं। बीजेपी के ये वे लोग हैं जो शादी कम करते हैं। लेकिन गेरुआ पहन बहू-बेटियों की इज्जत लूटने का काम करते हैं।”

कॉन्ग्रेस, झामुमो और राजद राज्य में मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इस गठबंधन के सीएम उम्मीदवार सोरेन ही हैं। इस दौरान सोरेन ने बीजेपी सरकार पर महिला सुरक्षा को लेकर असफल रहने का आरोप लगाया। साथ ही अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।

बुधवार को झारखंड विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के चुनाव के प्रचार का आखिरी दिन था। गठबंधन उम्मीदवार के समर्थन में यहॉं सभा को संबोधित करने कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गॉंधी भी पहुॅंची थीं। इस दौरान उन्होंने भाजपा की प्रदेश सरकार पर राज्य की उपेक्षा का आरोप लगाया। प्रियंका ने नागरिकता संशोधन कानून का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में जब छात्रों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बावजूद इसके पूरे देश में छात्र सड़कों पर निकल कर इसका विरोध कर रहे हैं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इस सभा के दौरान कुछ समय के लिए अफरातफरी की स्थिति बन गई थी। लोग एक-दूसरे पर कुर्सियॉं फेंकने लगे। उस वक्त छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सभा को संबोधित कर रहे थे। हेमंत सोरेन ने तत्काल मोर्चा सॅंभालते हुए शांति की अपील की और कुर्सियॉं नहीं फेंकने की गुहार लगाई। यहॉं हेमंत और प्रियंका बरहरवा से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार आलमगीर आलम के समर्थन में वोट मॉंगने पहुॅंचे थे।

…तो झारखंड के CM होंगे हेमंत सोरेन, लेकिन इनकी संपत्ति 5 साल में दोगुनी से अधिक, 10 साल में 11 गुनी!

झारखंड: कॉन्ग्रेस कैंडिडेट ने बूथ के बाहर लहराए हथियार, समर्थकों ने पत्रकारों को पीटा

झारखंड: टिकट के नाम पर वसूली कर रही कॉन्ग्रेस, धनबाद में 40 लोगों से लिए ₹5-5 हजार

‘कॉन्ग्रेसी, कॉमरेड और इस्लामी कट्टरपंथियों ने रची थी गुवाहाटी को जलाने की साजिश’

असम सरकार में मंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने पूर्वोत्तर में हो रही हिंसा को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। शर्मा ने दावा किया कि हिंसा की साज़िश दिल्ली में बैठे एक बुद्धिजीवी ने रची थी। राज्य के वित्त मंत्री ने कहा कि गुवाहाटी को दहलाने की साज़िश रची गई थी। उन्होंने कहा कि एक बड़े बुद्धिजीवी ने इस पुरी हिंसा की योजना तैयार की और उनकी मंशा थी कि उत्तर-पूर्व के सबसे बड़े मेट्रोपोलिस गुवाहाटी को तबाह कर दिया जाए। हालाँकि, शर्मा ने किसी का भी नाम नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस बड़े बुद्धिजीवी की योजना थी कि असम के सचिवालय को ही जला डाला जाए। लेकिन, पुलिस की मुस्तैदी से ये मंशा कामयाब नहीं हो सकी।

उत्तर-पूर्व में भाजपा की बड़ी जीत व प्रचार-प्रसार के स्थानीय सूत्रधार रहे हेमंत विश्व शर्मा ने असम यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष कमरुल इस्लाम का एक फोटो भी दिखाया, जिसमें वो हिंसा वाली जगह पर मौजूद दिख रहे हैं। इस पूरी हिंसा को लेकर शर्मा ने कहा कि इसके लिए एक डिज़ाइन तैयार किया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस घटना के पीछे किसका हाथ है, ये साबित करने के लिए उनके पास सबूत भी हैं। बकौल शर्मा, एक बड़े बुद्धिजीवी ने जो कि एक अकादमिक व्यक्ति भी हैं, जनता भवन को जलाने की तैयारी की थी। आपको बता दें कि कॉन्ग्रेस ने अपील की थी कि लोग असम सचिवालय ‘जनता भवन’ के पास इकट्ठे हों।

हेमंत विश्व शर्मा ने एक वीडियो दिखाया, जिसमें कमरुल इस्लाम एक व्यक्ति से हाथ मिलाते हुए दिख रहे हैं। इस्लाम उसी जगह पर मौजूद हैं, जहाँ हिंसा भड़की हुई उस वीडियो में दिख रही है। हालाँकि शर्मा ने कहा कि ये कॉन्ग्रेस नेता कमरुल का कोई हमशक्ल भी हो सकता है लेकिन इस वीडियो की फॉरेंसिक जाँच आवश्यक है। उन्होंने सवाल किया कि हिंसा वाली जगह पर ये दोनों हाथ क्यों मिला रहे हैं? उन्होंने बताया कि इस हिंसा के पीछे पीएफआई के लोगों का हाथ है और सरकार इसके लिए सबूत इकट्ठा कर रही है, जिसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शर्मा ने यह आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस के एक धड़े और PFI ने असम में हिंसा को बढ़ावा दिया और प्रशासन को इसके तह तक जाकर जाँच करनी होगी। यह जानकारी जरूरी है कि ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ एक इस्लामी कट्टरपंथी आतंकी संगठन है। केरल से लेकर कर्नाटक और उत्तर-पूर्व तक, हिंसा की वारदातों में इस संगठन के नाम आते रहते हैं। असम में पुलिस ने हिंसा में लिप्त 107 लोगों को गिरफ़्तार किया है। हिंसा की वारदातों की जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया है। असम सरकार केंद्र से माँग करेगी कि सीबीआई या एनआईए के अधिकारियों को इस हिंसा की जाँच सौंपी जाए, ताकि सच्चाई सामने आए।

‘जंग की मशाल उठाकर करो प्रदर्शन’ – AMU में भड़काऊ स्पीच देने पर डॉ कफील खान हिरासत में

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गोरखपुर के डॉ कफील खान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लेकिन, इस बार मामला बीआरडी अस्पताल में हुए 60 बच्चों की मौत से जुड़ा हुआ नहीं है। इस बार मामला नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को भड़काने का है। जिसके संबंध में आज पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है। कुछ दिन पहले उन पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था।

अलीगढ़ के एसपी अभिषेक ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि कफील खान के ख़िलाफ़ 13 दिसंबर को सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 153-A के तहत मामला दर्ज हुआ था। जिसके बाद इस मामले में आगे जाँच हुई। इस एफआईआर में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने भाषण के जरिए शाांत माहौल को उकसाया और साम्प्रादायिक सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास किया।

जानकारी के मुताबिक उन्होंने इस दौरान छात्रों को जंग की मशाल उठाकर प्रदर्शन करने को कहा था। साथ ही केंद्र पर आरोप लगाया था कि वे देश को बाँटने काम कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि इस कानून को, उन्हें डराने के लिए मोहरा बनाया जा रहा है, लेकिन वे डरें नहीं और अपने दस्तावेज पूरे रखें। इसके बाद उन्होंने छात्रों से कहा कि ये देश उनका है और उनका ही रहेगा, वो जो चाहेंगे, वही होगा।

कफील खान ने अपनी स्पीच में गृहमंत्री अमित शाह को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “मोटा भाई सबको हिंदू-मुस्लिम बनना सिखा रहे हैं, लेकिन इंसान नहीं। जब से आरएसएस अस्तित्व में आया है तब से वे संविधान में यकीन नहीं रखते। कैब से मुस्लिम दूसरी श्रेणी का नागरिक होगा और बाद में उसे एनआरसी लागू करके उसका शोषण किया जाएगा।”

इसके अलावा एक अज्ञात पर भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। जिसपर आरोप है कि उसने भीड़ को उकसाने और हिंदुत्व के ख़िलाफ़ एएमयू कैंपस में प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की। जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं और उस शख्स के ख़िलाफ़ भी पुलिस ने आईपीसी की धारा 153-A के तहत ही मामला दर्ज किया है।

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रवीश कुमार और न्यूजलॉन्ड्री का ऑपइंडिया पर हमला: अजीत भारती का जवाब | Ajeet Bharti on Ravish Kumar and Newslaundry Propaganda

रवीश कुमार ने न्यूज लॉन्ड्री के साथ मिलकर बिना नाम लिए ऑपइंडिया पर हमला करते हुए कहा कि आईटी सेल वालों की दुकान ही चलती है रवीश कुमार के नाम से। रवीश कुमार जहर फैला रहे हैं कि देश में कुछ हो ही नहीं रहा है और बाकी लोग कह रहा है कि नहीं, देश में बहुत कुछ हो रहा है, तो वो आईटी सेल हो गया। और वो दुकान रवीश कुमार चला रहे हैं। आपकी दुकान कौन चला रहा है रवीश कुमार? मोदी या भाजपा?

अब ये इस स्तर पर आ गए हैं कि कहने लगे कि ये किसी की दुकान चला रहे हैं। आपकी दुकान पतंजलि का विज्ञापन चला रहा है। रवीश कुमार ने कहा कि ब्रेनवॉश करने के लिए छोटे-छोटे बॉयलर खोले गए हैं। उसी बॉयलर में रवीश कुमार को उबाला जाता है, तो तड़प होना तो स्वाभाविक है। इनका कहना है कि इन्हीं का टीवी चैनल देखिए, इन्हीं का लिखा पढ़िए, बाकी दुनिया बेकार है। इस लेख को न्यूजलॉन्ड्री के पत्रकार बसंत कुमार ने लिखा है। इसमें उन्होंने पत्रकारिता की सारी नैतिकता को ताक पर रख दिया है।

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बंगाल में कैलाश विजयवर्गीय को मजहबी भीड़ ने घेर रखा है, देखिए Video

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के खिलाफ पश्चिम बंगाल में हिंसा जारी है। भाजपा महासचिव और बंगाल के पार्टी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर दावा किया है कि मजहब़ी उनकी गाड़ी को घेर रखा है। उन्होंने ट्वीट किया है, “मुर्शिदाबाद जाते हुए मुझे नवग्राम के पास मजहबी भीड़ ने घेर लिया है। मेरी गाड़ी के दोनों तरफ भीड़ जमा है। प्रशासन कोई सुनवाई नहीं कर रहा। SP और DG भी फ़ोन नहीं उठा रहे। पश्चिम बंगाल में अराजक सरकार के रहते कुछ भी हो सकता है। यहाँ किसी की जान सुरक्षित नहीं है।”

उन्होंने कहा है, “मुर्शिदाबाद जाते हुए नवग्राम के पास मुस्लिमों की भीड़ ने रिक्शा सामने अड़ाकर हमारा रास्ता रोक दिया। भीड़ की उग्रता देखकर लगता है कि इन्हें भड़काकर हमारे खिलाफ किया गया है। प्रशासन की लापरवाही इससे नजर आती है कि कोई फोन तक नहीं उठा रहा।”

इससे पहले मंगलवार को डीसीपी पर दंगाइयों ने बम फेंका था। हावड़ा के डीसीपी (मुख्यालय) अजीत सिंह यादव पर बम तब फेंका गया जब वे माणिकपुर इलाके में हालात पर काबू पाने पहुॅंचे थे। उनके साथ दो और पुलिसकर्मी भी इस हमले में जख्मी हो गए। बंगाल में हिंसा का यह सिलसिला बीते हफ्ते जुमे की नमाज के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद से ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों से हिस्सा की खबरें लगातार आ रही है। सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे की संपत्तियों को पहुॅंचाया गया है। मालदा, उत्तर दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, बीरभूम, नदिया और हावड़ा जिलों से हिंसा, लूट और आगजनी की कई घटनाएँ सामने आई हैं।

इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि रेलवे की संपत्तियों की सुरक्षा उनके सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शुक्रवार के बाद से अब तक कम से कम 700 ट्रेनें रद्द की गई हैं। ममता ने कहा, “अमित शाह केवल बीजेपी के नेता नहीं हैं। वे देश के गृह मंत्री हैं। शांति बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी हैं। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाली केंद्र सरकार ‘सबके साथ सर्वनाश’ करने पर तुली है।” साथ ही सीएए और एनआरसी वापस लेने की मॉंग करते हुए एक बार फिर दोहराया है कि राज्य में वे इसे लागू नहीं होने देंगी।

ओवैसी के डर से बंगाल में दंगाइयों को खुली छूट दे रही हैं ममता!

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