Home Blog Page 5246

CAA और NRC पर फरहान गैंग के हर झूठ का पर्दाफाश: साज़िश का जवाब देने के लिए जानिए सच्चाई

जावेद अख्तर और उनकी पहली पत्नी के बेटे फरहान अख्तर ने एक बार फिर से संशोधित नागरिकता क़ानून (CAA) को लेकर झूठ फैलाया है। ऐसा लगता है जैसे उन्हें व्हाट्सप्प पर कुछ मिला, जिसे उन्होंने बिना जाँच-पड़ताल के ही ट्विटर पर शेयर कर दिया। उन्होंने जो भी जानकारी शेयर की है, वो भ्रामक है, ग़लत है, त्रुटिपूर्ण है और भड़काऊ भी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बार-बार सभी इंटरव्यू में कह रहे हैं कि सीएए का भारतीय मुस्लिमों से कोई लेना-देना नहीं है। यहाँ तक कि इसका भारतीय नागरिकों से भी कोई लेना-देना नहीं है। फिर भी इससे जुड़ी ऐसी जानकारियाँ शेयर की जा रही हैं, जिससे लगे कि ये मजहब विशेष के ख़िलाफ़ है।

‘डॉन’ और ‘दिल चाहता है’ जैसी फ़िल्मों को निर्देशित कर चुके फरहान अख्तर ने एक फोटो ट्वीट किया। उसमें बताया गया है कि संसद द्वारा पारित किए गए नए क़ानून के अनुसार, पड़ोसी देशों के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के उन लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी, जो वहाँ की प्रताड़ना से बचने के लिए भारत आ गए हैं। इसके बाद उन्होंने दावा किया है कि अगर एनआरसी के साथ इसे जोड़ कर देखा जाए तो ये क़ानून मुस्लिमों को बाहर कर देता है। आइए, बताते हैं कि ये कैसे ग़लत है:

एनआरसी अभी पूरे देश में लागू नहीं किया गया है। ये भारतीय नागरिकों के एक डेटाबेस की तरह है, एक आधिकारिक रिकॉर्ड है, जिसे फिलहाल केवल असम में लागू किया गया है। इसे पूरे देश में लागू करने की बातें ज़रूर हो रही हैं, लेकिन इसके लिए क्या नियम-क़ानून हैं, ये तभी पता चलेगा जब सरकार कोई घोषणा करे। और हाँ, 1951 में हुए जनगणना के बाद इस रजिस्टर को तैयार किया गया था लेकिन उसके बाद से इसे अपडेट नहीं किया गया। इन सबके बावजूद जानबूझकर सीएए के विरोध में एनआरसी को घुसाया जा रहा है, ताकि मुस्लिमों को डराया जा सके। सारे कार्य सिटीजनशिप एक्ट, 1955 के तहत ही हो रहा है।

अब सीएए पर आते हैं क्योंकि फरहान अख्तर गैंग की पूरी कोशिश यही है कि सीएए की जगह एनआरसी की बात हो और जनता को भड़काया जा सके। हमने देखा कि फरहान अख्तर ने लिखा कि सीएए में मुस्लिमों को बाहर कर दिया गया है, छाँट दिया गया है। ऐसा नहीं है। इस क़ानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के उन प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी, जो दिसंबर 2014 से पहले से भारत में रह रहे हैं। वहाँ अल्पसंख्यक कौन हैं? हिन्दू, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी। मुस्लिम तो इन तीनों देशों में अल्पसंख्यक हैं ही नहीं। फिर जावेद और उनकी पहली पत्नी के बेटे फरहान अपना अल्पसंख्यक-विरोधी रुख क्यों दिखा रहे हैं?

ऐसा भी नहीं है कि इन तीनों देशों से जो भी अल्पसंख्यक यहाँ आएँगे, उन्हें नागरिकता दे दी जाएगी। केवल उन्हीं को मिलेगी, जो दिसंबर 2014 से पहले से भारत में रह रहे हैं। उसके बाद जो आए हैं या आगे जो आएँगे, उनके लिए ये नियम नहीं है। तो क्या मुस्लिमों को नागरिकता नहीं मिलेगी? भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करने के अपने नियम-क़ानून हैं और उसके तहत कोई भी ऐसा कर सकता है। ये सरकार फ़ैसला लेती है कि किसे नागरिकता देनी है या नहीं। जैसे, अदनान सामी मुस्लिम हैं, फिर भी उन्होंने आवेदन किया और उन्हें नागरिकता मिली। इसी तरह दरवाजे सबके लिए खुले हैं। ऐसा कोई भी नियम नहीं बनाया गया है, जिसमें ये लिखा हो कि मुस्लिमों को नागरिकता नहीं दी जाएगी।

अब फरहान अख्तर के अगले झूठ पर आते हैं। ‘रॉक ऑन’ और ‘ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा’ के अभिनेता फरहान ने लिखा है कि मुस्लिमों के अलावा इन लोगों को भी छाँट दिया जाएगा और निकाल बाहर किया जाएगा- आदिवासी, महिलाएँ, ट्रांसजेंडर्स, दलित, भूमिहीन, नास्तिक, भूमिहीन और दस्तावेज न रखने वाले लोग। फरहान लिखते हैं कि इन लोगों को जेल में ठूँस दिया जाएगा। इन्हें प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा और प्रताड़ना कैम्पों में डाल दिया जाएगा। अब आप सोचिए, सरकार के मंत्रीगण और भाजपा के सांसदों-विधायकों के घर में महिलाएँ नहीं हैं क्या? भाजपा में दलित और आदिवासी नेतागण थोक संख्या में हैं? वो सब जेल जाएँगे, प्रत्यर्पित होंगे और प्रताड़ना कैम्पों में डाले जाएँगे?

वैसे तो जाति की चर्चा करना उचित नहीं है लेकिन इस प्रोपेगंडा का जवाब देने के लिए इसका उल्लेख करना पड़ेगा। भारत के राष्ट्रपति, जो संघ से जुड़े रहे हैं और भाजपा नेता भी हैं, वो दलित हैं। क्या उन्होंने ऐसे क़ानून पर हस्ताक्षर किया, जिससे उन्हें ही जेल में डाल दिया जाएगा? ये बेहूदा लॉजिक है। लेकिन फिर भी, एक-एक झूठ का पर्दाफाश आवश्यक है। दरअसल, असम में जो एनआरसी लाया गया है, उसका धर्म से कोई लेना-देना है ही नहीं। ये तो सभी नागरिकों के लिए है! दलितों, मुस्लिमों व महिलाओं को अलग करने का कोई सवाल ही कहाँ उठता है, जब मजहब, लिंग और जाति का एनआरसी से कोई मतलब ही नहीं है।

इसके बाद फरहान अपने व्हाट्सप्प फॉरवर्ड के माध्यम से समझाते हैं कि एनआरसी क्या है? इसमें बताया गया है कि ये भारत के हर नागरिक को ये साबित करने को कहता है कि वो यहाँ रहने के अधिकारी तभी होंगे, जब उनके पास दस्तावेजी सबूत हों। फरहान लिखते हैं कि आईडी कार्ड और टैक्स स्लिप्स से कुछ साबित नहीं होगा। इसके बाद वो पूछते है कि कितने लोगों के माता-पिता के पास 1971 के पहले का जन्म प्रमाण पत्र या ऐसे दस्तावेज हैं? यहाँ फिर से बताना पड़ेगा कि एनआरसी पूरे देश में लागू नहीं किया गया है और असम में 1971 को समयसीमा तय करनी एक वजह है। असम एकॉर्ड में भी इसी तारीख का जिक्र किया गया है। ये एकॉर्ड केंद्र सरकार और असम आंदोलन के नेताओं के बीच हुआ था। तब केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी।

फिर पूरे देश के लिए 1971 की बात क्यों की जा रही है, जबकि ऐसी कोई बात ही नहीं है? ये तो असम के लिए है। अब फरहान अख्तर के अगले झूठ की ओर आते हैं। फरहान यहाँ सीएए और एनआरसी को लिंक किए जाने की बात करते हैं। उनका कहना है कि सरकार ऐसा करेगी। सच्चाई क्या है? सच्चाई ये है कि एनआरसी को अपडेट करने के लिए सीएए का कोई इस्तेमाल होगा ही नहीं। सरकार ने भी इस बात से पूरी तरह इनकार कर दिया है। जब एनआरसी मजहबी आधार पर किया ही नहीं जा रहा और इसके लिए सीएए का इस्तेमाल हो ही नहीं रहा, तो फिर मुस्लिमों को बाहर किए जाने वाली बात ही फ़र्ज़ी साबित हो जाती है।

सिटीजनशिप एक्ट, 1955 के तहत काम होगा और जो देश का नागरिक नहीं है, उसे देश से बाहर निकाल फेंका जाएगा। इससे फरहान अख्तर या उनके गैंग को समस्या ही क्या है? अब फरहान अख्तर के सबसे बड़े झूठ की तरफ़ आते हैं। ‘सेनोरिटा’ और ‘दिन धड़कने दो’ जैसे गाने गा चुके फरहान को कम से कम एक बार सीएए पढ़ तो लेना चाहिए था। भले ही वो ‘रॉक ऑन’ में ‘सोचा है’ गाते हैं लेकिन खुद उनमें सोचने की क्षमता की कमी दिखाई देती है। उनके अगले झूठ पर नज़र डालिए:

फरहान लिखते हैं कि भारत के हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय से जुड़े लोगों को बिना दस्तावेज दिखाए ही नागरिकता दे दी जाएगी। मज़ाक चल रहा है क्या? किसी व्यक्ति को सिर्फ़ इसीलिए दस्तावेज नहीं दिखाने होंगे क्योंकि वो हिन्दू है? इसके बाद फरहान इसे भेदभाव करार देते हुए कहते हैं कि ये भारत के सेक्युलर संवैधानिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है। किसी अनपढ़ व्यक्ति को भी ये पता है कि वो हिन्दू हो या मुस्लिम, उसे राशन लेने के लिए राशन कार्ड और वोट देने के लिए वोटर आईडी कार्ड दिखाना ही पड़ेगा। सरकारी अधिकारी इसके लिए उसका मजहब नहीं पूछेंगे।

एक बात जान लीजिए। जब भी कोई व्यक्ति आपसे कहे कि भेदभाव हो रहा है, आप जवाब दीजिए कि एनआरसी में एक हिन्दू को भी उन्हीं प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा, जिससे एक मुस्लिम को। एक सिख और एक हिन्दू या फिर एक पारसी और एक बौद्ध, किसी भी व्यक्ति को समान नियम-कायदों का पालन करना पड़ेगा। फरहान अख्तर और उनके गैंग के लोग नकारात्मक मानसिकता से भरे पड़े हैं। वो मुस्लिमों को डरा रहे हैं। एनआरसी और सीएए की लिंकिंग की बात ग़लत है। मुस्लिमों को छाँटने की बात ग़लत है। भेदभाव की बात ग़लत है। ये सारे तर्क दीजिए, जब भी कोई ऐसी भ्रामक बातें फैलाए। जाते-जाते बता दें कि फरहान अख्तर ने भारत का जो नक्शा शेयर किया है, वो भी ग़लत है। वो पूरे जम्मू कश्मीर को भारत का हिस्स्सा नहीं मानते।

…वो सांसद जिसने किया CAB का समर्थन लेकिन जमात फेडरेशन ने कर दिया निष्कासित

जामिया हिंसा पर FIR: कॉन्ग्रेस का पूर्व MLA आसिफ खान भी था शामिल, दंगाइयों के साथ छात्रों ने भी की पत्थरबाजी

भारत के साथ रिश्ते सुनहरे दौर में, अवैध रूप से रह रहे हर बांग्लादेशी को बुलाएँगे: पीएम शेख हसीना का सलाहकार

…वो सांसद जिसने किया CAB का समर्थन लेकिन जमात फेडरेशन ने कर दिया निष्कासित

AIADMK राज्यसभा सांसद ए मोहम्मद जॉन को संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने पर ऑल जमात फेडरेशन से निष्कासित कर दिया गया है। ये फैसला रानीपेत में सोमवार (दिसंबर 16, 2019) की शाम अधिकारियों की बैठक के बाद लिया गया।

फेडरेशन में मोहम्मद जॉन ‘संरक्षक’ के पद पर साल 2010 से आसित थे। लेकिन सोमवार को उन्हें इस पद से यह कहकर हटा दिया गया कि कैब का समर्थन करके उन्होंने समुदाय का अपमान किया है।

ऑल जमात फेडरेशन के सदस्य मोहम्मद हसन और तमिलनाडु के जिलाध्यक्ष मुनेत्र कड़गम ने इस बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को हुई बैठक में सर्वसम्मति से सब ने फैसला लिया कि मोहम्मद जॉन को राज्यसभा में कैब का समर्थन करने पर उनके पद से निष्कासित किया जाए, क्योंकि ऐसा करके उन्होंने समुदाय का अपमान किया है।

इसके अलावा मोहम्मद हसन ने ये भी बताया है कि जॉन को उनके पद से हटाने का फैसला राज्य में पूरी जमात और रानीपेत में समुदाय द्वारा बनाए जा रहे दबाव के बाद लिया गया है।

गौरतलब है कि कैब का समर्थन करने के कारण टीएमएमके ने भी मोहम्मद जॉन के ख़िलाफ़ उनके आवास पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। साथ ही ये भी बताया है कि उनके इस फैसले में IUML,VCK और TVK जैसी स्थानीय पार्टियाँ भी साथ हैं।

जनरल डायर की तरह लोगों पर गोली चलवा रहे अमित शाह: एनसीपी नेता नवाब मलिक

जामिया हिंसा पर FIR: कॉन्ग्रेस का पूर्व MLA आसिफ खान भी था शामिल, दंगाइयों के साथ छात्रों ने भी की पत्थरबाजी

जामा मस्जिद के शाही इमाम ने कहा- CAA से मुस्लिमों का लेना-देना नहीं, कौमी ठेकेदारों ने बताया जाहिल

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के बहाने देश के कई हिस्सों में समुदाय विशेष की हिंसा के बीच दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही मस्जिद सैयद अहमद बुखारी की शांति की अपील उनके ही समुदाय के ठेकेदारों को नहीं भाया। शाही इमामन ने लोगों को CAA का सही मतलब बताते हुए उनसे शांत रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि विरोध लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है। कोई उन्हें ऐसा करने से नहीं रोक सकता। लेकिन, यह बेकाबू नहीं होना चाहिए।

सड़कों पर उतरकर हिंसा करने वाले लोगों को समझाने की कोशिश करते हुए उन्होंने कहा कि इस कानून का भारत के मुस्लिमों से कोई सरोकार नहीं है। ये केवल उन तीन इस्लामिक देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है, जिन्हें उनके मुल्क में प्रताड़ित किया गया है। शाही इमाम ने एनआरसी और सीएए को दो अलग-अलग चीज भी बताया और कहा कि दोनों में फर्क़ हैं। एक सीएए है, जो अब कानून बन गया है और दूसरा एनआरसी है, जिसकी अभी सिर्फ़ घोषणा हुई है, वो कानून नहीं बना है।

हालाँकि, जामा मस्जिद का शाही इमाम होने के नाते अहमद बुखारी का ये फर्ज था कि वो अपने समुदाय के लोगों को समझाएँ और नए कानून पर उनकी भ्रम की स्थिति को दूर करें। लेकिन जैसे ही उन्होंने ऐसा किया, मजहब के कट्टरपंथी ठेकेदार उन पर टूट पड़े। उनके ख़िलाफ़ बयानबाजी होने लगी। उन्हें जाहिल कहा गया। ‘जमीरफरोश’ करार दिया गया।

सबसे पहले आप समर्थक ‘जनता का रिपोर्टर’ के संपादक रिफत जावेद ने अहमद बुखारी पर सवाल उठाए और उन्हें जाहिल यानी बेवकूफ बताया। रिफत ने लिखा, “इस जाहिल को शाही इमाम का तमगा किसने दे दिया। इन्हें फॉलो कौन करता हैं। ऐसे लोग सच्चे जमीरफरोश होते हैं।”

इसके बाद अहमद बुखारी को समुदाय विशेष के लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर ‘सरकारी कठपुतली’ और ‘सरकारी मौलाना’ कहा जाने लगा।

एक सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें सीएए पर बरगलाने वाला बताया और कुछ ने गुस्से में पूछा कि आखिर ये है ही कौन?

केवल जनता के बीच में भ्रम दूर करने के कारण लोग उनपर ये इल्जाम लगाने से भी नहीं चूँके कि वो सरकार से पैसे लेते हैं और सरकारी भोंपू हैं।

बता दें, कि सोशल मीडिया पर अहमद बुखारी की अपील के विरोध में उतरे लोगों के अलावा कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने उनके साथ अपनी सहमति दिखाई हैं। उनके इस अपील के कारण लोग उन्हें पढ़ा-लिखा समझदार इमाम कह रहे हैं। लेकिन कुछ उनके बयान पर उन्हें ट्रोल करने से बाज नहीं आ रहे। लोगों का कहना है कि इस इमाम को साल 2004 में आडवाणी 2 करोड़ रुपए में लेकर आए थे और तब इसने भाजपा का समर्थन किया था, इसलिए ऐसे गद्दारों को चप्पल से धोना चाहिए।

जामिया में मिले 750 फ़र्ज़ी आईडी कार्ड: महीनों से रची जा रही थी साज़िश, अचानक नहीं हुई हिंसा

CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के नाम पर दंगा भड़काने की साज़िश: व्हाट्सप्प ग्रुप से हुआ कॉन्ग्रेस नेताओं का पर्दाफाश

इस उन्माद, मजहबी नारों के पीछे साजिश गहरी… क्योंकि CAA से न जयंती का लेना है और न जोया का देना

71 मौतें, 185 घायल: जयपुर बम ब्लास्ट में 11 साल बाद न्याय – सैफ, सरवर, सैफुर्रहमान, सलमान दोषी करार

राजस्थान की राजधानी जयपुर में 13 मई 2008 को 8 जगहों पर सिलसिलेवार धमाके हुए थे। जिसके संबंध में यहॉं की एक विशेष अदालत ने बुधवार (18 दिसंबर 2019) को इस मामले में चार लोगों को दोषी करार दिया। इनके नाम हैं मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजम, सैफुर्रहमान और मोहम्मद सलमान। धमाकों में 71 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 185 लोग घायल हुए थे।

इस ब्लास्ट के 2 अन्य आरोपित दिल्ली के बटला हाउस में 2008 में हुए एनकाउंटर में मार गिराए गए थे। एक आरोपित शाहबाज हुसैन को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। धमाकों के सि​लसिले में जयपुर पुलिस ने पॉंच आरोपितो को गिरफ्तार किया था। तीन आरोपित दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं। ये तीनों देश के दूसरे हिस्सों में भी धमाकों के आरोपित हैं। लिहाजा इनके खिलाफ एटीएस जॉंच नहीं कर पाई है।

मामले में कुल 13 लोगों को पुलिस ने आरोपित बनाया था। इनमें से 3 अब भी फरार हैं। इस मामले की सुनवाई में बीते एक साल से तेजी आई थी। सुनवाई के दौरान 1,296 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दोषी करार दिए गए चारों आरोपितों को शुक्रवार को सजा सुनाए जाने की संभावना है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार दोषियों ने शहर में बम धमाके करने के लिए जिन जगहों व दुकानदारों से साइकिलें खरीदी थीं, उन दुकानदारों ने उनकी पहचान की थी। 13 मई 2008 की शाम परकोटा इलाके में 12 से 15 मिनट के अंतराल में चांदपोल गेट, बड़ी चौपड़, छोटी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, जौहरी बाजार और सांगानेरी गेट पर बम धमाके हुए थे। पहला ब्लास्ट खंदा माणकचौक, हवा महल के सामने शाम 7:20 बजे हुआ था। फिर एक के बाद एक 8 धमाके हुए थे।

इन धमाकों के बाद काफी देर तक जयपुर शहर की मोबाइल और टेलीफोन लाइनें जाम हो गईं थीं। जिससे दूसरे शहरों में मौजूद लोग अपने परिजनों और रिश्तेदारों की खैरियत जानने के लिए परेशान होते रहे थे।

बताया जाता है कि हनुमान मंदिर के निकट बम निरोधक दस्ते ने एक बम को निष्क्रिय कर दिया था। लेकिन, जो धमाके हुए थे, वो इतने शक्तिशाली थे कि कुछ लोगों के जिस्म तो कुछ फुट ऊपर तक उड़ गए थे। हमले की साजिश काफी सावधानी से रची गई थी। राजस्थान के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ए.एस. गिल ने कहा था कि यह आतंकवादी हमला था।

इसके बाद मामले की जाँच करते हुए एसओजी ने सितम्बर 2008 को सबसे पहले इंडियन मुजाहिद्दीन को घटना जानकारी मेल करने वाले आरोपित मोहम्मद शहबाज हुसैन को गिरफ्तार किया था। और उसकी निशानदेही पर ही पुलिस ने मार्च 2009 में मोहम्मद सैफ उर्फ कैरीऑन और मोहम्मद सरवर आज़मी को भी गिरफ्तार कर लिया। बाद में मोहम्मद सलमान और सैफुर उर्फ सैफुर्रहमान अंसारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा, पिछले साल आरिज खान उर्फ जुनैद को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया, लेकिन अभी तक राजस्थान पुलिस ने उसे प्रोडेक्शन वारंट पर गिरफ्तार नहीं किया है। पूरे मामले में मिर्जा शादाब बैग उर्फ मलिक, साजिद बड़ा और मोहम्मद खालिद अभी भी फरार चल रहे हैं।

सिमी आतंकी इलियास और एजाज गिरफ्तार, मुंबई लोकल ब्लास्ट में 12 साल से थी तलाश

वर्धमान ब्लास्ट: 4 बांग्लादेशी सहित 19 दोषी करार, बुर्का बनाने के नाम पर लिया था घर

बेगम ज़मीना को फ़िदायीन बता विमान में ब्लास्ट की धमकी देने वाला नसीरुद्दीन गिरफ़्तार

जनरल डायर की तरह लोगों पर गोली चलवा रहे अमित शाह: एनसीपी नेता नवाब मलिक

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के बहाने देश में कई जगहों पर हिंसा की गई है। इन घटनाओं के पीछे की साजिश भी धीरे-धीरे सामने आने लगी है। इनमें विपक्षी दल के नेताओं की संलिप्तता भी उजागर हुई है। जामिया में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है उसमें कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान का भी नाम है।

एक ओर विपक्षी नेता हिंसा करने वालों का बचाव करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं, दूसरी ओर केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं के खिलाफ विवादित टिप्पणी का सिलसिला भी जारी है। इस कड़ी में एनसीपी की मुंबई ईकाई के अध्यक्ष और विधायक नवाब मलिक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तुलना अंग्रेज अफसर जनरल डायर से की है।

मलिक ने कहा है कि अमित शाह जनरल डायर की तरह देश के लोगों पर गोली चलवा रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के उस बयान का भी समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने जामिया की घटना की तुलना जलियॉंवाला बाग में 1919 में निहत्थों पर हुई गोलीबारी से की थी। मलिक ने कहा, “जिस तरह जलियॉंवाला बाग में जनरल डायर ने लोगों पर गोली चलवाई थी, अमित शाह भी देश के लोगों पर ऐसे ही गोली चलवा रहे हैं। अमित शाह जनरल डायर से कम नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे का वह बयान बिल्कुल सही था, जिसमें उन्होंने जामिया में पुलिस कार्रवाई को जलियॉंवाला जैसा बताया था।

ठाकरे ने कहा था कि जामिया में जो हुआ वह जलियॉंवाला बाग जैसा है। छात्र एक ‘युवा बम’ की तरह हैं। हम केंद्र सरकार से अपील कर रहे हैं कि वे छात्रों के साथ जो कर रहे हैं, वह ना करें। इस बयान को लेकर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि जामिया की घटना की जलियॉंवाला से तुलना कर उद्धव ठाकरे ने शहीदों का अपमान किया है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी की गठबंधन सरकार सत्ता में है। कॉन्ग्रेस के स्टैंड के विपरीत जाकर शिवसेना ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किया था। हालॉंकि दबाव में वह राज्यसभा में बिल के पक्ष में मतदान से पीछे हट गई थी और मतदान के वक्त उसके सांसद सदन से बाहर निकल गए थे। इसके बाद से ही नागरिकता संशोधन कानून पर शिवसेना का स्टैंड पेंडुलम की तरह बना हुआ है।

जामिया में मिले 750 फ़र्ज़ी आईडी कार्ड: महीनों से रची जा रही थी साज़िश, अचानक नहीं हुई हिंसा

CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के नाम पर दंगा भड़काने की साज़िश: व्हाट्सप्प ग्रुप से हुआ कॉन्ग्रेस नेताओं का पर्दाफाश

इस उन्माद, मजहबी नारों के पीछे साजिश गहरी… क्योंकि CAA से न जयंती का लेना है और न जोया का देना

दिलीप मंडल के विरोध की सजा: माखनलाल यूनिवर्सिटी ने 23 छात्रों को निष्कासित किया

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया और यूपी के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में विरोध के नाम पर हिंसक हुए छात्रों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। कॉन्ग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल इन छात्रों की ढाल बनकर खड़े हो गए। लेकिन, इसी वक्त में कॉन्ग्रेस शासित मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में 23 छात्र निष्कासित कर दिए गए।

इन छात्रों पर कार्रवाई प्रदर्शन के दौरान कथित अनुशासनहीनता को लेकर की गई है। प्रदर्शन दो प्रोफेसरों दिलीप मंडल और मुकेश कुमार के खिलाफ जातिगत भेदभाव का आरोप लगते हुए किया गया था। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मॉंगों के समर्थन में धरने पर बैठे छात्रों के साथ बर्बरता बरतने का आरोप पुलिस पर भी है। छात्रों का कहना है कि कुलपति की शह पर ऐसा किया गया।

असल में प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद इस विश्वविद्यालय में राजनीतिक प्रयोगों का जो सिलसिला शुरू हुआ था उसके तहत ही कुछ महीने पहले दिलीप मंडल और मुकेश कुमार की अनुबंध पर नियुक्ति हुई थी। आरोप है कि दोनों प्रोफेसर छात्रों के बीच जातिगत भेदभाव कर माहौल खराब कर रहे हैं। इन छात्रों को मंगलवार को निष्काषित करने का आदेश जारी किया गया।

बता दें, यूनिवर्सिटी के दो सहायक प्रोफेसर द्वारा जातिवादी ट्वीट के बाद छात्रों ने ये प्रदर्शन शुरू किया था और इसी संबंध में उन्होंने पिछले गुरुवार को वाइस चांसलर के केबिन के सामने धरना दिया था। हालाँकि उस वक्त वीसी भोपाल में मौजूद नहीं थे। छात्रों के इस समूह की माँग थी कि छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव करने वाले प्रोफेसरों को निष्काषित किया जाए। लेकिन, कॉलेज प्रशासन ने उन्हें हटाने की जगह छात्रों को ही सस्पेंड कर दिया।

साथ ही, आदेश की कॉपी में छात्रों पर लिए गए एक्शन पर लिखा गया कि जब वीसी दीपक तिवारी वापस आए तो स्टूडेंट्स अगले दिन धरने पर बैठ गए। इस दौरान कुछ छात्रों ने दोबारा से तोड़फोड़ की। जिसके बाद वीसी ने पुलिस को बुलाया और पुलिस-छात्रों में बवाल हुआ। इस दौरान दोनों पक्षों की चोटें आईं। 10 छात्रों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई। अब एफआईआर में 13 नाम और जोड़े गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी की अनुशासनात्मक कमिटी ने छात्रों के निष्कासन की सिफारिश की थी। जिसके बाद रजिस्ट्रार दीपेंद्र बघेल ने मंगलवार को ऑर्डर जारी किया। मंगलवार को जारी किए गए आदेश में रजिस्ट्रार की तरफ से कहा गया,”इन छात्रों को निष्कासित किया गया है और अगले आदेश तक ये यूनिवर्सिटी की कक्षा या एग्जाम में शामिल नहीं हो सकेंगे।”

रजिस्ट्रार का कहना है कि ये फैसला सीसीटीवी फुटेज देखकर लिया गया है। अनुशासनात्मक समिति ने तय किया है कि छात्रों के दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता को देखते हुए सख्त कार्रवाई होनी जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की दोबारा कोई हरकत न हो।

निष्कासित किए गए छात्रों के नाम सौरभ कुमार, प्रखरादित्य द्विवेदी, राघवेंद्र सिंह, आशुतोष भार्गव, अभिलाष ठाकुर, अर्पित शर्मा, रवि भूषण सिंह, अंकित शर्मा, अर्पित दुबे, सुरेंद्र चौधरी, विवेक उपाध्याय, शुभम द्विवेदी, अंकित कुमार चौबे, आकाश शुक्ला, अनूप शर्मा, प्रतीक वाजपेयी, विपिन तिवारी, राहुल कुमार, रवि शर्मा, मोनिका दुबे, नीतीश सिंह और विधि सिंह है।

प्रशासन के इस फैसले के बाद शिवराज सिंह चौहान ने बच्चों के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने ट्वीट किया है, “माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय एवं संचार विश्वविद्यालय में छात्रों को जायज माँगे उठाने पर निष्काषित कर दिया है। यह बच्चों की आवाज दबाने व लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास है। छात्रों को निष्काषित कर उनके भविष्य को तबाह करने के इस षड्यंत्र को हम कामयाब नहीं होने देंगे।” चौहान ने कहा है कि छात्रों की सभी जायज माँगे मानी जाएँ और उनके निष्कासन का आदेश तुरंत वापस लिया जाए।

उल्लेखनीय है कि दिलीप मंडल और मुकेश कुमार पर छात्रों के बीच जातिगत भेदभाव कर माहौल खराब करने का आरोप है। छात्रों का आरोप है कि दिलीप मंडल और मुकेश कुमार सोशल मीडिया पर जाति विशेष को लेकर लगातार पोस्ट कर रहे हैं। छात्रों ने इस संबंध में 11 दिसंबर को कुलपति को ज्ञापन सौंपते हुए शिकायत की थी कि दिलीप सी मंडल और मुकेश कुमार जाति के आधार पर छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और जातिगत कटुता बढ़ाने का काम कर रहे हैं। मगर विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से न तो उनसे संपर्क करने की कोई कोशिश की गई और न ही ज्ञापन से संबंधित कोई जवाब दिया गया। उल्टा प्रशासन ने इनके खिलाफ FIR करवा दी और फिर पुलिस ने भी छात्रों के साथ काफी बर्रबरता से मारपीट की। 

कड़ाके की ठंड, घुप्प अँधेरी रात, 20 किमी घुमाया, कपड़े उतरवाए: दिलीप मंडल का विरोध करने की सजा

जामिया की हिंसा देखी, मजहबी नारे सुने: अब देखिए माखनलाल के पीड़ित छात्रों का मौन विरोध

पूरा नाम क्या है? जाति जानने के बाद प्रताड़ित करते हैं दिलीप मंडल: माखनलाल यूनिवर्सिटी के छात्र

8-12 साल के 4 बच्चों को किया अगवा, कुकर्म के बाद हत्या: सोहेल शहजाद को 3 बार सजा-ए-मौत

एक नाबालिग बच्चे को अगवा कर रेप के बाद उसकी हत्या करने के जुर्म में सोहेल शहजाद को अदालत ने तीन बार मौत की सजा सुनाई है। शहजाद को पुलिस ने एक अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। उस पर 8-12 साल की उम्र के चार बच्चों को अगवा कर रेप के बाद उनकी हत्या करने का मामला चल रहा था। इसमें से 8 साल के फैजान से जुड़े मामले में उसे सजा सुनाई गई है।

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार इस साल जून के बाद इन घटनाओं को अंजाम दिया गया। चुनियान का फैजान 16 सितंबर की रात को गायब हो गया। अगले दिन उसकी लाश मिली थी। मामले की भयावहता को देखते हुए पाकिस्तान की एक आतंकरोधी अदालत ने मंगलवार को शहजाद को तीन बार मौत की सजा का हुक्म दिया। इसके अत्तिरिक्त सोहेल पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही पीड़ित पक्ष को 2 लाख रुपए मुआवजे देने का आदेश भी दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बाकी तीन बच्चों के शव भी पुलिस ने 17 सितंबर को चुनियान बायपास के पास एक रेत के टीले से बरामद किए थे। मामला सामने आते ही इलाके में तनाव फैल गया। बच्चों को न्याय दिलाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए और पुलिस प्रशासन समेत नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठाने लगे। धीरे-धीरे मामले में कार्रवाई आगे बढ़ी। पुलिस ने शहजाद को इस मामले में संदिग्ध पाया और 1 अक्टूबर को उसकी गिरफ्तारी हुई। मृत बच्चे के डीएनए के साथ आरोपित के डीएनए की जाँच करवाई गई और रिपोर्ट आते ही साफ हो गया कि दोषी सोहेल शहजाद ही है।

मुकदमे के दौरान, कुल 23 गवाहों ने दोषी के खिलाफ अपने बयान दर्ज किए। जिसके बाद कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा सुनाई। तीन अन्य बच्चों को अगवा कर रेप के बाद उनकी हत्या का मामला शहजाद के खिलाफ अलग से चल रहा है। सुरक्षा कारणों से इस मामले की सुनवाई लाहौर के कोर्ट लखपत जेल में की गई।

गैंगरेप के बाद हत्या कर शव को पेड़ से लटकाया: जाहिद, नसीम, ताहिर समेत 6 के खिलाफ FIR

6 साल की बच्ची से रेप, गला दबाकर हत्या: महिला जज ने सुनाई फाँसी की सज़ा, हत्यारे को पछतावा नहीं

उबर को सेक्स क्राइम की 5981 शिकायतें मिली: 464 के साथ रेप, 19 हत्याएँ भी

प्रीति से पहले 9 और महिलाओं को रेप के बाद जलाकर मारा था: हैदराबाद में ढेर किए गए दरिंदे पुराने हवसी

हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। उनका जला हुआ शव बरामद होने के बाद पूरा देश उबल पड़ा था। इस मामले में चार लोग गिरफ्तार किए गए थे। बाद में पुलिस ने एनकाउंटर में चारों आरोपितों को मार गिराया था। बावजूद इसके इन आरोपितों को लेकर जो जानकारियॉं सामने आ रही है वह हैरान करने वाली हैं। इनसे पता चलता है कि ये आदतन अपराधी थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रीति रेड्डी के साथ वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपित इस तरह की कई और जघन्य घटनाओं में शामिल थे। पुलिस के अनुसार चार आरोपितों में दो ने इस तरह की 9 और वारदातों में संलिप्तता कबूली थी।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ में 2 आरोपितों ( आरिफ और चेन्नाकेशववुलू) ने इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने पहले भी 9 महिलाओं का बलात्कार करके उन्हें जलाकर मारा है। फिलहाल पुलिस इसी जानकारी के आधार पर कर्नाटक और तेलंगाना में पूरी पड़ताल कर रही है। आरोपितों के फोन टावर लोकेशन और अपराधस्थल के साथ मिलान किया जा रहा है। आरोपितों का कहना था कि उन्होंने तेलंगाना के संगारेड्डी, रंगारेड्डी, माहबूबनगर में अपने कुकर्मों को अंजाम दिया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि आरोपित आरिफ और चेन्नाकेशववुलू ने खुद स्वीकारा था कि वे हाईवे पर कई बार हिजड़ों और वेश्याओं का यौन शोषण करते थे। लेकिन 9 महिलाएँ ऐसी थीं, जिनका बलात्कार कर उन्होंने जलाकर मारा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को इस बात का खुलासा करते हुए बताया, “आरोपितों को कस्‍टडी में लेने के बाद से ही हम तेलंगाना और कर्नाटक हाइवे पर महिलाओं के साथ रेप और जलाकर मारने की 15 घटनाओं में उनकी भूमिका की जाँच कर रहे थे। चार में से दो ने इनमें से 9 घटनाओं में अपने शामिल होने की बात मान ली थी। लेकिन अब हम हर एक केस की पुष्टि कर रहे हैं इसलिए अलग-अलग जगहों पर हमने जाँचकर्ताओं की कई टीम भेजी हैं।”

गौरतलब है कि पुलिस ने आरोपितों को लेकर ये चौंकाने वाला खुलासा उस समय किया है जब सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर के एनकाउंटर की जाँच के लिए 3 सदस्यीय आयोग बनाया है। इसकी अगुवाई रिटायर्ड जज वीएस सरपुरकर कर रहे हैं।

‘पूरी तरह जली या नहीं’- स्कूटर से बॉडी वापस देखने आए थे आरोपित: ‘प्रीति’ रेड्डी केस में नया खुलासा

प्रीति रेड्डी मर गई फिर भी रेप करते रहे दरिंदे: आरिफ के प्लानिंग की पूरी डिटेल

आरिफ ने ‘प्रीति रेड्डी’ का मुँह-नाक दबाया, उसी ने डेड बॉडी पर पेट्रोल डाला: पुलिस की रिपोर्ट में भयावह खुलासे

जामिया हिंसा पर FIR: कॉन्ग्रेस का पूर्व MLA आसिफ खान भी था शामिल, दंगाइयों के साथ छात्रों ने भी की पत्थरबाजी

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ रविवार (दिसंबर 15,2019 ) को जामिया नगर इलाके में भड़की हिंसा को लेकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। ओखला के पूर्व कॉन्ग्रेसी विधायक आसिफ मुहम्मद खान को भी आरोपी बनाया गया। इसके अलावा स्थानीय नेता आशु खान, मुस्तफा और हैदर के नाम भी हैं। छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) के नेता कासिम उस्मानी, ऑल इंडिया स्टू़डेंट्स असोसिएशन (AISA) के नेता चंदन और स्टूडेंट ऑफ इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआईओ) के आसिफ तन्हा को भी आरोपी बनाया गया है।

एफआईआर जामिया थाने के एसएचओ उपेंद्र सिंह ने दर्ज कराई है। आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की 13 धाराएँ लगाई गई हैं। आईपीसी की धारा- 143/ 147/ 148/ 149/ 186/ 353/ 332/ 308/427/435/ 323/341/120बी/34 के अलावा प्रिवेंशन ऑफ डेमेज टु पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट, 3/4 1984 लगाई गई हैं।

वहीं, पूर्व विधायक आसिफ मुहम्मद खान ने कहा है कि वे शाहीनबाग में शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। फिर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी और जामिया नगर में उनके ख़िलाफ क्यों मामला दर्ज किया गया है?

1_121719112611.jpg
एफआईआर का पहला पन्ना
(साभार: आजतक)

2_121719112633.jpg
एफआईआर का दूसरा पन्ना (साभार: आजतक)
3_121719112655.jpg

एफआईआर का तीसरा पन्ना (साभार: आजतक)
4_121719112714.jpg
एफआईआर का चौथा पन्ना (साभार: आजतक)

एफआईआर में इस बात का भी उल्लेख है कि पुलिस ने इस पूरी घटना में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए केवल 75 आँसू गैस के गोले दागे थे। साथ ही पुलिस ने कैंपस में प्रवेश भी किया था, लेकिन वो सिर्फ़ उपद्रवियों को पकड़ने के लिए और बाकी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए। एफआईआर में बताया गया है कि हिंसा वाले दिन 7-8 छात्र ऐसे थे, जो यूनिवर्सिटी के भीतर से आराजक तत्वों के साथ पत्थरबाजी कर रहे थे।

बता दें, दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में मंगलवार तक भी नागरिकता कानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी रहा। सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वारा ‘अब्दुल कलाम आजाद’ गेट के बाहर धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। लेकिन मंगलवार को जमा हुई भीड़ में विश्वविद्यावय के छात्र बहुत कम रहे। ज्यादातर प्रदर्शनकारी यहाँ कानून और दिल्ली पुलिस का विरोध करने जामिया नगर, बाटला हाउस, हमदर्द, पुरानी दिल्ली की जामा मस्जिद, नोएडा, हरियाणा आदि इलाकों से पहुँचे थे।

जामिया में मिले 750 फ़र्ज़ी आईडी कार्ड: महीनों से रची जा रही थी साज़िश, अचानक नहीं हुई हिंसा

CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के नाम पर दंगा भड़काने की साज़िश: व्हाट्सप्प ग्रुप से हुआ कॉन्ग्रेस नेताओं का पर्दाफाश

इस उन्माद, मजहबी नारों के पीछे साजिश गहरी… क्योंकि CAA से न जयंती का लेना है और न जोया का देना

भारत के साथ रिश्ते सुनहरे दौर में, अवैध रूप से रह रहे हर बांग्लादेशी को बुलाएँगे: पीएम शेख हसीना का सलाहकार

तुष्टिकरण और निहित राजनीतिक स्वार्थों के कारण देश के भीतर भले कुछ ताकतें घुसपैठियों की ढाल बनने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन बांग्लादेश ने फिर दोहराया है कि अवैध रूप से भारत में रह रहे अपने हरेक नागिरक को वह वापस बुलाएगा। उसने कहा है कि अगर भारत में किसी भी बांग्लादेशी नागरिक के अवैध रूप से रहने का सबूत दिया जाता है तो उसे वापस बुलाया जाएगा। यह बात बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार गौहर रिजवी ने कहा है।

इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने रविवार (दिसंबर 15, 2019) को यही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हमने भारत से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की सूची मुहैया कराने का अनुरोध किया है। भारत द्वारा सूची मुहैया कराने पर उन नागरिकों को लौटने की मॅंजूरी दी जाएगी।

इसी कड़ी में अब रिजवी ने कहा है, “हम भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को वापस बुलाएँगे, लेकिन भारत को इसका सबूत देना होगा। यह मानक प्रक्रिया है। मुझे नहीं लगता कि इसे कोई मुद्दा बनाने की जरूरत है।” उन्होंने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए यह बात कही।

इनका संबंधों पर असर पड़ने की बात को भी रिजवी ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रिश्ते इस वक्त सुनहरे दौर में हैं। बकौल रिजवी, “हमारी दोस्ती पिछले 50 वर्षों से है। भारत हमेशा हमारे साथ है और भविष्य में भी रहेगा। दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण हैं जहॉं एक देश के लोगों ने दूसरे देश की आजादी के लिए खून बहाया हो। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से सहिष्णु और धर्मनिरपेक्षता में यकीन करने वाला मुल्क रहा।”

रिजवी और मोमेन का बयान ऐसे वक्त में आया है जब दावा किया जा रहा था कि एनआरसी और सीएए को लेकर बांग्लादेश खुश नहीं है। इसका भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर असर पड़ने की बात भी कही जा रही थी। मोमेन का भारत दौरा रद्द होने की वजह भी यही बताया जा रहा था। लेकिन, मोमेन ने भारत के साथ मजबूत संबंधों का हवाला देकर तमाम अटकलों को खारिज कर दिया था।

बता दें कि 30 अगस्त को NRC की अंतिम लिस्ट प्रकाशित हुई थी। इसके लिए 3.3 करोड़ आवेदकों ने आवेदन किया था। जिसमें से 19 लाख से अधिक लोगों को बाहर रखा गया। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सितंबर में न्यूयॉर्क में द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ NRC का मुद्दा उठाया था। हालाँकि भारत ने बता दिया कि यह मुद्दा देश का आंतरिक मामला है।

इस बीच, प्रधानमंत्री शेख हसीना के हवाले बांग्लादेशी मीडिया में कहा गया है कि पाकिस्तान केवल भारत ही नहीं अन्य पड़ोसी देशों के खिलाफ भी साजिश रचता है। हसीना ने कहा है कि कड़े संघर्ष के बाद मिली आजादी को पाकिस्तानी से मोहब्बत रखने वाले खत्म करने और विफल करने की कोशिश में हैं। लेकिन, वह इन साजिशों को सफल नहीं होने देंगी।

NRC के विरोध में ममता बनर्जी: कहा- बांग्लादेशी घुसपैठियों को देंगे यहीं रहने का अधिकार

NRC का असर: बंगाल से वापस बांग्लादेश लौटने लगे घुसपैठिए, कन्हैया सहित वामपंथी नेताओं ने सरकार को कोसा

बांग्लादेशी या रोहिंग्या इस देश का नहीं है, उसकी पहचान कर, अलग करना समय की माँग

बATS ने 9 महिलाओं समेत 12 बांग्लादेशियों को मुंबई से किया गिरफ्तार, MP से भी 1 घुसपैठिए को दबोचा