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CAA पर फिर पलटी शिवसेना: कॉन्ग्रेस-UPA को दिया गच्चा, कहा – ‘हमारी खुद की पहचान, हम तुम्हारे साथ नहीं’

‘हिंदू हृदय सम्राट’ बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में सरकार बना चुके हैं। उद्धव ठाकरे की सरकार मतलब BJP से अलग होकर तीन पहियों वाली सरकार। वही सरकार जो CAB मतलब नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में लोकसभा में अपने सासंदों से वोटिंग करवाती है, फिर वही राज्यसभा से मुँह फुला कर गायब हो जाती है। अब जबकि बिल ने एक्ट का रूप ले लिया है तो CAA (नागरिकता संशोधन कानून) पर एक बार फिर से शिवसेना ने पलटी मारी है।

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में बुधवार को विपक्षी पार्टियों का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने गया। जैसा कि प्रत्याशित था, शिवसेना इससे गायब रही। कॉन्ग्रेस और NCP के साथ वाली शिवसेना ने न सिर्फ इन दोनों को बल्कि पूरे विपक्ष को धोखा दिया है। इस धोखे के बाद संजय राउत ने जो बयान दिया है, वो मजेदार है। बयान क्या है, सफाई है – वो भी कॉन्ग्रेस को संदेश देती हुई। अपनी ठसक दिखाती हुई।

शिवसेना नेता और मुखपत्र सामना के एडिटर संजय राउत ने सफाई देते हुए कहा कि नागरिकता कानून पर विपक्षी दलों के समूह से अलग रहने का कोई कारण नहीं था। “विपक्षी नेताओं के साथ जाना चाहिए था” वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि यह एक तरह का बेकार सवाल है। इसके बाद तो उन्होंने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक की राजनीति पर बात कर डाली।

संजय राउत ने स्पष्ट कहा कि महाराष्ट्र में भले ही शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी का गठबंधन है, लेकिन दिल्ली में अभी भी उनकी पार्टी की अपनी अलग पहचान है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “शिवसेना कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले UPA का हिस्सा नहीं है, हम एनडीए से बाहर जरूर हैं, मगर यूपीए के साथ नहीं। संसद में हमारी अपनी पहचान है।”

आपको याद दिला दें कि लोकसभा में शिवसेना के सांसदों ने नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में अपना समर्थन दिया था। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी के ‘गुस्से भरे ट्वीट’ के बाद राजनीतिक समीकरण बदला था और इसी बिल पर राज्यसभा में वोटिंग के दौरान शिवसेना ने वॉकआउट किया था।

अब नागरिकता संशोधन बिल कानून बन चुका है। इसके खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं, भ्रम फैलाया जा रहा है। कथित अल्पसंख्यकों के दिलों में डर का माहौल बनाया जा रहा है। इसके लिए वामपंथी, मीडिया गिरोह और राष्ट्रविरोधी राजनीतिक पार्टियाँ कमर कस कर लगी हुई हैं। लेकिन शिवसेना अपने ‘हिंदू हृदय सम्राट’ के साये से बाहर आए तो कैसे आए!

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रामचंद्र गुहा हिरासत में: CAA के ख़िलाफ़ करने गए थे प्रदर्शन, पुलिस ने धर लिया

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ देशभर में जगह-जगह लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इस क़ानून के विरोध में वामदलों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया था। इसी विरोध-प्रदर्शन में पहुँचे इतिहासकार रामचंद्र गुहा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। गुहा को कर्नाटक के बेंगलुरु में विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया।

पुलिस हिरासत में लिए जाने से रामचंद्र गुहा काफ़ी नाराज़ भी नज़र आए। बता दें कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विपक्ष और मुस्लिम संगठनों द्वारा बुलाए गए एक दिन के बंद को लेकर बेंगलुरु में तीन दिनों के लिए धारा-144 लागू कर दी गई है। वामदलों और मुस्लिम संगठनों ने कलबुर्गी में नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।

ग़ौरतलब है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए दक्षिण कन्नड़ ज़िले में 21 दिसंबर की मध्यरात्रि तक निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। दक्षिण कन्नड़ ज़िले के उपायुक्त सिंधू बी रूपेश ने क़ानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पूरे ज़िले में ही निषेधाज्ञा लागू कर दी।

जानकारी के अनुसार, मंगलुरु शहर के पुलिस उपायुक्त पी एस हर्ष ने बुधवार (18 दिसंबर) को कमिश्नरी क्षेत्र में ही 18 दिसंबर से 20 दिसंबर तक निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। पुलिस को जानकारी मिली थी कि कुछ संगठनों ने बृहस्पतिवार (19 दिसंबर) और शुक्रवार (20 दिसंबर) को संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन का आह्वान किया है।

हाल ही में सम्पन्न हुए एक कार्यक्रम के दौरान रामचंद्र गुहा ने कहा था कि हिन्दुत्व देश को नुक़सान पहुँचा रहा है और यह देश को बर्बाद करके रख देगा। इसके अलावा, उन्होंने असहिष्णुता के मसले पर देश के प्रबुद्ध लोगों के साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक खुला पत्र भी लिखा था। इसके बाद गुहा ने गो हत्या के बढ़ते मामलों पर विरोध जताने के लिए बीफ़ खाते हुए अपनी एक फ़ोटो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक तौर पर पोस्ट की थी।

बता दें कि एक समय रामचंद्र गुहा ने कॉन्ग्रेस को देश में विद्यमान तमाम समस्याओं के लिए ज़िम्मेवार ठहराया था। उन्होंने ‘इंडिया आफ़्टर गाँधी’ और ‘इंडिया बिफोर गाँधी’ किताबें भी लिखीं हैं।

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Pak मुस्लिम महिला हसीना बेन को मिली भारतीय नागरिकता: CAA के विरोध पर आँख खोलती खबर

देश भर में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर इस क़ानून को वापस लिए जाने का दवाब बना रहा है। इस बीच, भारत सरकार ने पाकिस्तान से आई एक मुस्लिम महिला हसीना बेन को बिना किसी तामझाम के केवल मेरिट और मानवता के आधार पर भारत की नागरिकता प्रदान की है।

दरअसल, पाकिस्तान से वापस लौटकर भारत आई हसीना बेन ने दो साल पहले भारत की नागरिकता के लिए गुजरात में द्वारका के कलेक्टर को पत्र लिखा था। द्वारका के कलेक्टर डॉ नरेंद्र कुमार मीणा ने उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र प्रदान किया। 

बता दें कि हसीना बेन मूलरूप से भारत की ही रहने वाली थीं, लेकिन 1999 में निक़ाह हो जाने के बाद वो पाकिस्तान चली गईं थी। पाकिस्तान में उनके शौहर की मृत्यु हो जाने पर उन्होंने भारत वापस आने का फ़ैसला किया। दो साल पहले ही उन्होंने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया था। अब 18 दिसंबर 2019 को भारत सरकार की तरफ़ से उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। 

भारत सरकार के द्वारा हाल ही में नागरिकता संशोधन क़ानून लागू किया गया है, जिसकी वजह से देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी है। दूसरी तरफ़ विपक्षी पार्टियाँ यह कहकर इस क़ानून का विरोध कर रही हैं कि ये क़ानून संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करता है और इसके साथ ही कई अन्य बातों का भी उल्लंघन करता है। विपक्ष का आरोप ये भी है केंद्र सरकार का ये क़ानून देश में अल्पसंख्यकों के प्रति भय पैदा करता है। 

वहीं, नागरिकता संशोधन क़ानून पर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि ये क़ानून वापस नहीं लिया जाएगा और मोदी सरकार इन शरणार्थियों को नागरिकता देकर रहेगी। नागरिकता क़ानून का विरोध कर रहे छात्रों और युवाओं से अमित शाह ने अपील की है कि वह लोग क़ानून के बारे में पूरी जानकारी लें। अमित शाह ने कहा कि क़ानून के बारे में छात्रों की जानकारी सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार की वेबसाइट पर क़ानून को पढ़ा जा सकता है। अमित शाह ने दावा किया कि मोदी सरकार किसी के ख़िलाफ़ अन्याय नहीं करती है और छात्रों और युवाओं को अगर नागरिकता संशोधन क़ानून में किसी के ख़िलाफ़ कोई अन्याय जैसी बात दिखती है तो वो सरकार को बता सकते हैं।

ग़ौरतलब है कि विपक्ष के विरोध के बावजूद नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार (11 दिसंबर) को राज्यसभा द्वारा और सोमवार (9 दिसंबर) को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। मौजूदा क़ानून के मुताबिक किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल यहाँ रहना अनिवार्य था। नए कानून में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह अवधि घटाकर 6 साल कर दी गई है। मौजूदा क़ानून के तहत भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती थी और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने का प्रावधान था।

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गंदी गालियों के साथ ‘ओम’ का उच्चारण, जानबूझकर हिंदू धर्म का अपमान: रॉक बैंड के 4 सदस्य गिरफ़्तार

एक रॉक बैंड है, नाम है – दस्तान लाइव। इसके चार सदस्यों को पणजी पुलिस ने बुधवार (18 दिसंबर) को शहर में चल रहे सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल में उनके प्रदर्शन के दौरान हिंदू धर्म का अपमान करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया।

ख़बर के अनुसार, दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट के वकील वेंकट कृष्ण कुंदरू की शिक़ायत पर बुधवार दोपहर 2 बजे बैंड के चारों सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया, लेकिन फिर बाद में उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। गिरप़्तार किए गए बैंड के सदस्यों में सुमंत चंद्रशेखर बालाकृष्णन (34), दिल्ली के अनिर्बान घोष (37) बेंगलुरु से निर्मला रविंद्रन (45) और शिवा पाठक (40) शामिल थे।

कुंदरू ने कहा कि दास्तान लाइव समूह ने “सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल 2019 के मंच का दुरुपयोग किया।” उन्होंने एक ऐसे गाने का प्रदर्शन किया, जिसमें हिंदू धर्म का “अपमान” किया गया। इस समूह ने मंगलवार (17 दिसंबर) को 8 से 10 बजे के बीच कैम्पल स्थित दयानंद बंदोदकर ग्राउंड में प्रदर्शन किया।

शिक़ायत में कहा गया है कि दास्तान लाइव रॉक बैंड के समूह ने अपमानजनक (गालियाँ) शब्दों के साथ “ओम” का उच्चारण किया। इसके अलावा, उन्होंने जानबूझकर हिंदू धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत किया और सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल 2019 के मंच का दुरुपयोग किया।

इस मामले पर पुलिस ने बताया कि प्रत्येक को 20,000 रुपए के बॉण्ड पर ज़मानत दी गई है। इसके साथ ही अब वे गोवा से बाहर जाने के लिए आज़ाद हैं। पुलिस ने कहा कि आगे की जाँच के लिए अगर ज़रूरत पड़ी तो इन चारों सदस्यों को पेश होना पड़ेगा। इस मामले की जाँच पुलिस निरीक्षक सुभाष गोदकर कर रहे हैं।

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‘हम मांदर बजाएँगे… रेणुका सिंह को नचाएँगे’ – केंद्रीय मंत्री और BJP महिला नेता के लिए कॉन्ग्रेसी मंत्री के बोल

छत्तीसगढ़ में नगरीय चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ हैं, वहीं दूसरी तरफ़ बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बड़े नेता एक दूसरे के ख़िलाफ़ जमकर बयानबाज़ी करते नज़र आ रहे हैं। नगरीय निकाय चुनाव के घोषणा पत्र के विमोचन के लिए अंबिकापुर पहुँची केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रदेश में हो रहे आदिवासी नृत्य महोत्सव में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है। 

रेणुका सिंह ने इस बात पर आपत्ति जताई कि घूम-घूम कर सभी को निमंत्रित किया जा रहा है, आमंत्रित किया जा रहा है, लेकिन उन्हें इसकी सूचना तक नहीं मिली है। इसके अलावा उन्होंने यह दावा भी किया कि वो इससे बड़ा आदिवासी महोत्सव आयोजित करेंगी और उस महोत्सव में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाएँगी।

निमंत्रण न मिलने की बात पर रेणुका सिंह ने प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत पर भी निशाना साधा। इसके पलटवार में अमरजीत भगत ने जो जवाब दिया, उससे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई। उन्होंने कहा, ”उन्हें इतनी जल्दबाज़ी क्यों है, हम उन्हें नहीं भूल सकते, ज़रूर बुलाएँगे, वो तैयार रहें, उन्हें नचाएँगे और हम मांदर बजाएँगे।”

इसके अलावा, मंत्री अमरजीत भगत ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के लोग अपने प्रधानमंत्री की तरह सिर्फ़ बड़ी-बड़ी बातें करना जानते हैं। दरअसल, प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन करने जा रही है। इसमें शामिल होने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया जा रहा है। पिछले दिनों केन्द्रीय मंत्री रेणुका सिंह सरगुजा के दौरे पर थीं, इस दौरान उन्होंने भाजपा के निकाय चुनाव के घोषणा पत्र का विमोचन किया और पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि कॉन्ग्रेस ने जो आदिवासी नृत्य समारोह रखा है, उसमें सरगुजा के आदिवासी नेताओं को निमंत्रण ना देकर देश-विदेश के नेता मंत्रियों को आमंत्रित किया जा रहा है।

वहीं, बुधवार (18 दिसंबर) को जब पत्रकारों ने रेणुका सिंह की इस नाराज़गी की जानकारी संस्कृति मंत्री को दी तो उन्होंने कहा:

“जब पूरे देश के आदिवासी नृत्य को यहाँ आमंत्रित किया जा रहा है, देश की कला को यहाँ आमंत्रित किया जा रहा है तो रेणुका सिंह को क्यों छोड़ेंगे, रेणुका सिंह को भी नचाएँगे और हम मांदर झोलेंगे (बजाएँगे)।”

इसके आगे उन्होंने रेणुका सिंह को ललकारते हुए कहा कि वो इस समारोह में आने की तैयारी कर लें, यहाँ आने के लिए साहस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वो कई बार लोगों को न्योता भेजते हैं, लेकिन समारोह में आने का उनमें साहस ही नहीं रहता। केवल राजनीतिक बात करना अच्छी बात नहीं होती।

प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत के इस बयान के केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि वो आदिवासी महोत्सव में नाचेंगी, अगर अमरजीत भगत मांदर बजाएँगे। उन्होंने कहा, “अमरजीत सिंह मांदर बजाएँ, मैं नाचूँगी। अपनी परंपरा और संस्कृति के बढ़ावे के लिए नृत्य करने से मैं छोटी नहीं हो जाऊँगी। अपनी संस्कृति को प्रसारित करने के लिए कई लोग नाचते हैं, तो उसमें बुरा क्या है?”

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6 साल की मासूम से रेप और हत्या मामले में नाजिल को फाँसी की सज़ा, तेज़ाब डालकर जला दिया था शव

उत्तर प्रदेश के रामपुर ज़िले में 6 साल की एक मासूम से रेप के बाद हत्या के मामले में दोषी नाजिल को फाँसी की सजा सुनाई गई और साथ ही 20 हज़ार रुपए का ज़ुर्माना भी लगाया गया। पुलिस ने एक मुठभेड़ में रेप के दोषी नाजिल को गिरफ़्तार किया था। रामपुर के कोतवाली सिविल लाइन इलाक़े में घटित इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही थी। रामपुर की दिल दहला देने वाली इस घटना में मासूम के साथ रेप कर हत्या करने के आरोपित को महज़ 6 महीने के अंदर फाँसी की सज़ा सुनाई गई है। मुठभेड़ के दौरान दोषी नाजिल को दोनों पैरों में गोली लगी थी, जिसके बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया गया था।

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6 साल की बच्ची के रेप और हत्या मामले में नाजिल दोषी करार (तस्वीर सौजन्य: आजतक)

दरअसल, 7 मई 2019 को छ: साल की बच्ची अपने घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक ग़ायब हो गई थी। इसके बाद बच्ची के परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी, उसके न मिलने पर उन्होंने बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद 22 जून 2019 को बच्ची की लाश बस्ती के पीछे एक आधे बने हुए मकान में मिली। 

ख़बर के अनुसार, सहायक ज़िला अधिवक्ता फौजदारी रामपुर कुमार सौरभ ने बताया कि इस मामले में रामपुर के निवासी नाजिल ने बच्ची का रेप करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी। दोषी को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम विनोद कुमार की अदालत ने फाँसी की सज़ा सुनाई। अदालत ने अपनी सुनवाई पूरी करते हुए नाजिल को 13 दिसंबर 2019 को दोषी करार दिया था। 

बता दें कि दोषी नाजिल बच्ची को बहला-फुसला कर सामान दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया था और बच्ची का रेप किया। इसके बाद पकड़े जाने के डर से उसने बेरहमी से मासूम का गला दबाकर हत्या कर दी। बच्ची की मौत हो जाने के बाद नाजिल ने उसके शव पर तेजाब डालकर उसे जला दिया। शव इस कदर जल चुका था कि परिजनों ने मासूम बच्ची को उसके कपड़ों और चप्पलों से पहचाना था।   

जानकारी के अनुसार, 22 जून को बच्ची की लाश मिलने के बाद उसी दिन शाम को रामपुर में ही एनकाउंटर हुआ जिसमें आरोपित नाजिल को गोली लगी और पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया। इस मामले में कुल नौ गवाहों की पेशी हुई, इनमें से आठ गवाह अभियोजन पक्ष ने पेश किए।

इससे पहले, 8 दिसंबर को राजस्थान में जयपुर के दूदू की अपर सेशन कोर्ट ने क़रीब आठ साल पहले छ: साल की बच्ची से रेप और फिर उसकी बेरहमी से गला घोंटकर हत्या करने के मामले में महेंद्र उर्फ़ धर्मेंद्र बैरवा को फाँसी की सज़ा सुनाई थी। साथ ही 8.20 लाख रुपए का ज़ुर्माना भी लगाया था।

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बेंगलुरु में 3 दिनों के लिए धारा-144 लागू, वामपंथी और मजहबी संगठनों के मंसूबे हुए नाकाम

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शन को उग्र होने से रोकने के लिए पुलिस ने पहले से ही सारी तैयारी कर ली है। पूरे बेंगलुरु में 3 दिनों के लिए धारा-144 लागू कर दी गई है। अर्थात, कहीं भी भीड़ के रूप में इकट्ठे होकर प्रदर्शन करने पर पुलिस की कड़ी कार्रवाई का समाना करना पड़ सकता है। गुरुवार (दिसंबर 19, 2019) को सुबह 6 बजे से ही बेंगलुरु में धारा-144 लागू हो जाएगा, जो 3 दिनों तक यथावत रहेगा।

दरअसल, पुलिस ने ऐसा फ़ैसला इसीलिए लिया है क्योंकि ख़ुफ़िया सूत्रों से पता चला है कि इस विरोध प्रदर्शन का फायदा उठा कर कुछ असामाजिक तत्व हिंसा फैला सकते हैं। दिल्ली में हुए उपद्रव और दंगाइयों के तांडव के बाद बेंगलुरु पुलिस अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। कलबुर्गी पुलिस कमिश्नर नागराज ने बताया कि कई विभागों में नियुक्तियों के लिए परीक्षाएँ होनी हैं और उन्हें ध्यान में रखते हुए पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक नहीं करेगी और किसी को भी क़ानून अपने हाथ में नहीं लेने देगी।

बेंगलुरु के शहरी और ग्रामीण, दोनों ही इलाक़ों में धारा-144 लागू रहेगा। बता दें कि गुरुवार को कई वामपंथी व मजहबी संगठनों ने बंद का आयोजन किया था। पुलिस को ख़ुफ़िया सूचना मिली है कि इस्लामिक संगठनों और वामपंथियों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में कुछ देशविरोधी ताक़तें हिंसा पर उतर सकती हैं और दिल्ली की तर्ज पर बेंगलुरु में भी दंगा भड़काया जा सकता है। इसीलिए, पुलिस ने पहले से ही तैयार कर के धारा-144 लागू कर दी है। इसीलिए, अगले 3 दिनों तक कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होगा।

गुलबर्गा में 20 ऐसे एक्टिविस्ट्स को पुलिस ने पहले ही अपने शिकंजे में ले लिया है, जो इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले थे। यहाँ तक कि ऑटो रिक्शा यूनियनों तक को भी इस बंद में शामिल कर लिया गया था।

कत्लेआम और 1 लाख हिन्दुओं को घर से भगाने वाले का समर्थन: जामिया की Shero और बरखा दत्त की हकीकत

‘मस्जिदों से ऐलान हुआ, पहले से पता था कि क्या करना है’ – दिल्ली में उपद्रव और दंगों के पीछे मुल्ला-मौलवी?

भारत-पाक सीमा पर कभी भी बिगड़ सकती है स्थिति, जनरल रावत ने कहा- सेना पूरी तरह तैयार

पाकिस्तान से आ रही परमाणु युद्ध की धमकियों के बीच भारतीय सेना प्रमुख ने बड़ा बयान दिया है। सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत ने कहा कि सीमा पर स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा कि हर प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए भारतीय सेना को पूरी तरह तैयार रहना पड़ेगा। जनरल रावत ने कहा कि एलओसी पर विशेष सतर्कता रखने की ज़रूरत है क्योंकि पाकिस्तान कभी भी भड़काऊ हरकत कर सकता है। हालाँकि, उन्होंने यह भी बताया कि भारत की सेना ऐसी किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए एकदम तैयार है।

अगस्त में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद जम्मू कश्मीर विशेष राज्य नहीं रहा और इसे मिले विशेषाधिकार भी नहीं रहे। साथ ही राज्य को पुनर्गठित कर दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया। इसके बाद से ही बौखलाए पाकिस्तान ने सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं में तेज़ी ला दी है। पाकिस्तानी फौज ने भारत को भड़काने के लिए आतंकियों की घुसपैठ चालू कर दी है। हालाँकि पाकिस्तान की लाख कोशिशों के बावजूद भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी बैट कमांडो को सीमा पर ही चित कर दिया है।

इन्हीं सारी घटनाओं के बीच जनरल रावत ने कहा है कि पाकिस्तान ऐसा देश है, जिसे नियंत्रित करने की ज़रूरत ही नहीं है। इसके पीछे कारण बताते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान ख़ुद अपने ख़ात्मे की तरफ बढ़ रहा है। अगस्त से अक्टूबर तक पाकिस्तान ने सीमा पार से 950 बार सीजफायर उल्लंघन की वारदातों को अंजाम दिया है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने संसद में इस बाबत जानकारी दी थी। वहीं सेनाध्यक्ष रावत ने कहा कि पाकिस्तान ख़ुद की हरकतों की वजह से लगातार अनियंत्रित होता जा रहा है।

जनरल रावत ने कहा कि भारतीय सेना के कुछ किए बिना ही पाकिस्तान ख़त्म होने की तरफ बढ़ रहा है। भारत सरकार ने हाल ही में सीएए लागू किया, जिसके तहत पाकिस्तान से आए प्रताड़ित अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलेगी। वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इस क़दम का विरोध करते हुए कहा है कि इससे पूरे दक्षिण एशिया में स्थिति बिगड़ सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत का ये ये क़दम क्षेत्र में परमाणु युद्ध की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

मेरा एक बाप ईसाई, दूसरा बाप मुस्लिम… तो मैं किस मजहब की?: दिया मिर्ज़ा के CAA विरोध का उड़ा मजाक

फ़िल्म अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा ने सोशल मीडिया पर एक पजल टाइप का सवाल दागा है। यह सवाल कुछ उसी तरह का है कि गाय को 5 किलो चारा खिलाया गया तो मुर्गी अंडा कितने ग्राम का देगी? दरअसल, पूर्व मिस एशिया पैसिफिक दिया मिर्ज़ा ने संशोधित नागरिकता क़ानून का विरोध करते हुए इसी तरह का बेतुका सवाल दागा। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने आशंका जताई कि इसके पीछे दो कारण हो सकते हैं। पहला कारण ये हो सकता है कि उन्होंने नए क़ानून को पढ़ने की जहमत ही नहीं उठाई और दूसरा कारण ये हो सकता है कि उन्हें पढ़ कर भी कुछ समझ नहीं आया।

इसीलिए, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की भारती जैन ने ‘रहना है तेरे दिल में’ से फिल्मों में डेब्यू करने वाली दिया मिर्ज़ा को उस आर्टिकल का लिंक दिया, जहाँ सीधे-सपाट शब्दों में सीएए के बारे में समझाया गया है। दिया मिर्ज़ा के ट्वीट को उन्हीं के शब्दों में हूबहू डिकोड करते हैं, ये देखिए:

  • मेरी माँ हिन्दू है।
  • मेरे बायोलॉजिकल पिता ईसाई थे।
  • मेरे दूसरे पिता (Adopted) मुस्लिम हैं।
  • मैंने किसी भी आधिकारिक डॉक्यूमेंट में अपने मजहब का नाम नहीं भरा है। मैं रिलिजन वाला कॉलम खाली छोड़ देती हूँ।
  • क्या धर्म ये निर्णय लेगा कि मैं भारतीय हूँ या नहीं? मैं आशा करती हूँ कि ऐसा नहीं होगा।

इस पजल को पढ़ने के बाद आपको ये पता लगाना है कि दिया मिर्ज़ा भारतीय हैं या नहीं। अब थोड़ी गंभीर बातें कर लें। दरअसल, सीएए से भारतीय नागरिकों का कोई लेना-देना नहीं है। इसका भारतीय नागरिकों के धर्म या मजहब से भी कोई वास्ता नहीं है। सीएए तो भारत के नागरिकों के लिए है ही नहीं। फिर उनसे दस्तावेज माँग कर नागरिकता साबित कराए जाने की बात कहाँ से आई? दरअसल, सीएए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के उन प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए है, जो वहाँ से भाग कर भारत आ गए और यहाँ पिछले 5 वर्षों से या इससे अधिक समय से रह रहे हैं।

बता दें कि दिया मिर्ज़ा के दो पिता इसीलिए हैं क्योंकि जब वो साढ़े 4 वर्ष की थीं, तभी उनके माता-पिता का तलाक हो गया था। इसके बाद उनकी माँ ने अहमद मिर्ज़ा से दूसरी शादी की थी। दिया मिर्ज़ा ने 2014 में साहिल संगा से शादी की थी लेकिन 5 सालों बाद वो भी अपने शौहर से अलग हो गईं। ऐसा नहीं है कि हम उनके व्यक्तिगत जीवन की बातें कर रहे हैं। उन्होंने ख़ुद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा की है। इस एक ट्वीट से पता चल जाता है कि जामिया के उपद्रवियों का समर्थन कर रहे इन सेलेब्रिटीज में सीएए को लेकर कितनी समझ है।

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आयशा रेना और लदीदा फरज़ाना को जामिया मिलिया इस्लामिया के आंदोलन का चेहरा बना कर पेश करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें न सिर्फ़ मीडिया और कुछ बड़े पत्रकार बल्कि, राजनेता और अकादमिक लोग भी शामिल हैं। हमने अपने एक लेख में इसका जिक्र किया था कि कैसे एक पूर्व-नियोजित साज़िश के तहत हिन्दुविरोधी और इस्लामी कट्टरपंथी विचार रखने वाली दोनों महिलाओं को अरब आंदोलन के नायिकाओं की तरह पेश किया जा रहा है। अब लदीदा के बारे में नया खुलासा हुआ है। लदीदा का जो नया फेसबुक पोस्ट सामने आया है, उसमें उन्होंने हिन्दुओं के नरसंहार का समर्थन किया है।

लदीदा ने जो फेसबुक पोस्ट डाला है, उसमें कई ऐसी बातें लिखी हुई हैं कि भारत के टिपिकल सेक्युलर लोग भी उस पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। 14 दिसंबर को शेयर किए गए फेसबुक पोस्ट में लदीदा ने लिखा है:

“कल के आंदोलन के बाद कुछ लोग मेरे से कह रहे हैं कि हमें ‘इंशाअल्लाह’ और ‘अल्लाहु अकबर’ जैसे नारे नहीं लगाने चाहिए। मैं उन लोगों को बता दूँ कि हमने अपने आप को अपने अल्लाह के समक्ष समर्पित कर दिया है। हमने तुम लोगों के सेक्युलर नारों को कब का छोड़ दिया है। सुन लो, हमने जो नारे लगाए वो तुम्हें बार-बार सुनने को मिलेंगे। याद रखो, ये नारे हमारी सोच को दिखाते हैं, हमारी आत्मा हैं। ये नारे हमारे अस्तित्व को उभारते हैं। अरे, तुम अपनी सेक्युलर पहचान बनाने के लिए बेताब होंगे, हम नहीं हैं।”

लदीदा ने अपने फेसबुक पोस्ट में इस्लामी कट्टरपंथी उन्माद की नई मिसाल पेश की

दरअसल, इस फेसबुक पोस्ट में लदीदा इस्लाम से जुड़े मजहबी नारों का बचाव कर रही हैं और बाकी नारों को सेक्युलर बता कर उन्हें छोड़ने की बात कर रही हैं। इसी क्रम में वो आगे लिखती हैं:

“हम हर जगह, हर पल मालकम एक्स, अली मुस्लीयर और वरियंकुन्नथ के बेटे-बेटियों और पोते-पोतियों के रूप में उपस्थित रहेंगे। वो सभी नारे हमारी आत्मा हैं और हमने अपने पूर्वजों से ही सीखा है कि राजनीति कैसे की जाती है? तुम लोगों के लिए भले ही वो नारे बस नारे ही हो लेकिन हमारे लिए वो हमारी पहचान हैं, जो हमें औरों से अलग करती है। हम पर ऐसा कोई दबाव नहीं है कि हमें तुम्हारे सेक्युलर नारों का ही इस्तेमाल करना है। मैं स्पष्ट कर दूँ कि हम तुमसे बिलकुल अलग हैं, हमारे तौर-तरीके अलग हैं और हमारा आधार अलग है। इसीलिए, हमें सिखाने की कोशिश मत करो। हमारे बाप मत बनो।”

लदीदा के इस फेसबुक पोस्ट को पढ़ कर आप समझ ही गए होंगे कि ये महिला किस कदर इस्लामी कट्टरपंथ की मदांधता में डूबी हुई है। अब हम आपको इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात बताते हैं। लदीदा इस पोस्ट में ख़ुद को और ‘अपने’ लोगों को जिस अली मुस्लीयर की बेटी बताती हैं, वो केरल के मोपला दंगों का साज़िश करता है, जिसके हाथ हिन्दुओं के ख़ून से रंगे हुए हैं। अली मुस्लीयर, खिलाफत आंदोलन का वो भड़काऊ चेहरा है, जिसने देश के बँटवारे के लिए हिंसा की।

उन दंगों के कारण केरल से 1 लाख हिन्दुओं को भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी थी। कॉन्ग्रेस पार्टी की अध्यक्ष रहीं एनी बेसेंट ने इस बारे में अपनी पुस्तक में एक घटना का जिक्र करते हुए लिखा है कि हिन्दुओं का बुरी तरह से कत्लेआम किया गया। जिन्होंने भी इस्लाम अपनाने से इनकार किया, उन्हें या तो मार डाला गया, या फिर उन्हें भाग कर जान बचानी पड़ी। इस घटना ने बेसेंट को इतना झकझोड़ दिया था कि उन्होंने इस्लामिक शासन का विरोध किया और कहा कि खिलाफत क्या होता है, ये इस घटना से पता चल जाता है।

बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने भी अपनी पुस्तक में इस घटना की चर्चा की है। उस वक़्त खिलाफत आंदोलन के नेताओं ने मोपला दंगे की प्रशंसा करते हुए इसे मजहब का एक अंग करार दिया था। लदीदा ने मुस्लीयर के दोस्त चक्कीपारामबम हाजी का भी नाम लिया है, जो ख़ुद को सुल्तान मानता था और जिसने मोपला के दंगों का नेतृत्व किया था। हिन्दुओं के नरसंहार में उसने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था।

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