Home Blog Page 5383

श्रीकांत भाऊ बनना चाहते हैं सीएम, शिवसेना सांसद ने कहा- साहिब! मत पालिए अहंकार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हफ्ते भर से ज्यादा हो चुके हैं। लेकिन, अब तक नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है। इसकी वजह मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना की जिद्द है। उसकी जिद्द ने राज्य में कई और लोगों के मन में मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जगा दी है। इनमें केवल नेता ही नहीं हैं। बीड जिले के किसान श्रीकांत वी गदले ने भी सीएम पद पर दावा ठोंका है।

उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिख कर कहा है कि जब तक सीएम पद का मामला नहीं सुलझता है, तब तक उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बना देना चाहिए। गदले ने किसानों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए यह मॉंग की है। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा को सबसे ज्यादा 105 सीटें मिली है। उसकी गठबंधन सहयोगी शिवसेना के पास 56 सीटें है। लेकिन, भाजपा को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलने के बाद से शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद मॉंग रही है। हालॉंकि उसके दावे को खारिज करते हुए भाजपा ने देवेंद्र फडणवीस को फिर से विधायक दल का नेता चुन लिया है। शिवसेना के नहीं मानने की सूरत में भाजपा निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के साथ अल्पमत सरकार का गठन कर सकती है।

इस बीच, शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से ही होगा और सरकार गठन को लेकर अभी भाजपा से कोई बात नहीं हुई है। उन्होंने ट्वीट किया है, “साहिब…मत पालिए, अहंकार को इतना, वक्त के सागर में कई,सिकन्दर डूब गए!” एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात करने वाले राउत ने कहा है कि भाजपा-शिवसेना को जनादेश “50:50 फॉर्मूले” के आधार पर सरकार बनाने के लिए मिला है।

शिवसेना की इस कवायद से एनसीपी के रुख में कोई बदलाव आता नहीं दिख रहा है। पार्टी नेता नवाब मलिक ने फिर से दोहराया है कि भाजपा शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने का जनादेश मिला है और उन्हें सदन में बहुमत साबित करना चाहिए। एनसीपी विधायक दल के नेता अजीत पवार ने भी विपक्ष में बैठने की बात कही है। ​54 सीटें जीतने वाली एनसीपी के मुखिया पवार ने नतीजों के बाद ही विपक्ष में बैठने का ऐलान कर दिया था।

राजस्थान के CM गहलोत ने भाजपा नेता पर दिया विवादित बयान, कहा- नया मुल्ला

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली प्रवास के दौरान प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने भाजपा नेता को नया मुल्ला कहकर बुलाया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूनिया को आदेश दिया है कि वे मुख्यमंत्री को टारगेट करें।

अपनी बात को प्रेस वार्ता में आगे बढ़ाते हुए गहलोत ने इस दौरान कहा कि सतीश पूनिया को उन्हें (गहलोत को) समझने में समय लगेगा। वे नए-नए मुल्ला हैं, जो नया मुल्ला होता है, वो जोर से बांग देता है। उनकी अभी वहीं स्थिती बनी है। उन्हें अमित शाह और नरेंद्र मोदी के इशारे मिले हैं।

हालाँकि इस बयान पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी पलटवार किया है। उन्होंने जवाब दिया है कि मुख्यमंत्री खुद की ही अपनी पार्टी के नेताओं को नहीं पचा पा रहे। इसलिए वे दूसरे नेताओं के बारे में बयानबाजी कर सकते हैं, ये उनका फ्रस्टेशन है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने स्टेट हाईवे पर फिर से टोल वसूली को लेकर एक दिन पहले कहा था कि दीपावली के तोहफे के लिए जनता तैयार रहे, राजकीय टोल नाकों पर फिर से लगेगा टोल!! राजकीय राजमार्गों पर निजी वाहनों का टोल माफ नहीं होगा। उन्होंने इस फैसले को जन विरोधी फैसला बताते हुए सरकार को जनता विरोधी करार दिया था।

जिस पर जवाब देते हुए ही गहलोत ने कहा है कि पूनिया अभी उन्हें समझ नहीं रहे, क्योंकि वे नए मुल्ला है। उनका कहना है कि वसुंधरा राजे की सरकार में लिया गया ये फैसला मेरिट के आधार पर नहीं था। इससे सरकार पर बहुत भार आ रहा था। टोल कंपनी की शर्तों को बिना चर्चा के बदल दिया गया था।

अपने इस फैसले पर गहलोट ने निजी वाहन चलाने वालों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राइवेट गाड़ी चलाने वाले सभी लोग सक्षम हैं, इसलिए वो उम्मीद करते हैं कि प्राइवेट कार चलाने वाले लोग इस फैसले का स्वागत करें ।

गौरतलब है कि इस फैसले से पहले गहलोत सरकार राज्य के सभी दफ्तरों में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की तस्वीर लगाने को भी अनिवार्य कर चुकी है। जिसके लिए खुद मुख्य सचिव ने बाकायदा सभी विभागों को पत्र लिखकर बापू की फोटो लगाने के आदेश दिए हैं। इस कदम के पीछे राजस्थान की वर्तमान सरकार का कहना है कि वे महात्मा गाँधी के आदर्श सिद्धांतों पर चलती है न कि गोडसे या वीर सावरकर के कदमों पर। बता दें कॉन्ग्रेस के इस कदम पर भाजपा ने कॉन्ग्रेस को नसीहत दी थी कि वे ऐसे फरमानों को जारी करने के बजाए काम करने पर ध्यान दें।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की फोटो देख भड़के कमलनाथ: कॉन्ग्रेस ने वापस मँगाया निमंत्रण पत्र

एक नवंबर को मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस है। इस मौके पर राज्य के होशंगाबाद में कुछ कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसी बीच कॉन्ग्रेस ने उन निमंत्रण पत्रों को वापस ले लिया है जिन पर दीन दयाल उपाध्याय की तस्वीर छपी है। कॉन्ग्रेस ने उनकी तस्वीर छापे जाने का विरोध किया है। पहले से वितरित पत्रों के स्थान पर नए पत्र बाँटे गए।

दरअसल, होशंगाबाद में होने वाले राज्य स्थापना दिवस के कार्यक्रम के लिए छपे निमंत्रण कार्ड में दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर छप गई। जिसका कॉन्ग्रेस ने विरोध किया और इस विरोध के बाद नया निमंत्रण कार्ड छपवाया गया।

मध्‍य प्रदेश स्‍थापना दिवस समारोह के लिए छपवाए गए ये कार्ड अतिथियों में बाँट दिए थे पर कॉन्ग्रेस के विरोध के बाद इन्‍हें वापस लिया गया और नए कार्ड बाँटे गए। नए कार्ड में कार्यक्रम की जानकारी और बाकी चीजें भी वही है, सिर्फ पंडित दीन दयाल उपाध्याय की तस्वीर को हटा दिया गया है।  

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेसियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष पंडित दीन दयाल के प्रति नापसंदगी प्रदर्शित किया है। इससे पहले पिछले साल राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार के सत्ता में आने पर अशोक गहलोत ने राज्य के स्कॉलरशिप टेस्ट में से भी पंडित दीन दयाल उपाध्याय का नाम हटा दिया था। 

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य की सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में से दीन दयाल उपाध्याय का नाम हटाकर उनकी जगह राजीव गाँधी और इंदिरा गाँधी का नाम दे दिया।

इमरान खान की सत्ता मुश्किल में: जुमे की नमाज के बाद बज सकती है खतरे की घंटी, लाखों पहुँचे इस्लामाबाद

पाकिस्तान में इमरान सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। पाकिस्तान में तख्ता पलट की आशंका बढ़ती जा रही है और आज का जुमा इमरान के लिए बुरी खबर लेकर आ सकता है। दरअसल, इमरान खान का इस्तीफा माँगने के लिए आजादी मार्च आज इस्लामाबाद पहुँच चुका है। इसकी अगुवाई पाकिस्तान के सबसे बड़े धार्मिक गुट जमीयत-उल-इस्लाम पाकिस्तान के प्रमुख फजलुर्रहमान कर रहे हैं।

बता दें कि फजलुर्रहमान की अगुवाई में पाकिस्तान के कराची समेत सभी बड़े शहरों से 27 अक्टूबर को आजादी मार्च की शुरुआत हुई, जिसका पिछले 5 दिनों में पाकिस्तान में बड़ा असर देखने को मिला। अलग अलग शहरों से लोग इस आजादी मार्च में शामिल होकर इस्लामाबाद की ओर कूच करने लगे।

मौलाना फजलुर्रहमान के नेतृत्व में सरकार विरोधी आजादी मार्च गुरुवार (अक्टूबर 31, 2019) को राजधानी इस्लामाबाद पहुँचा। यहाँ शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) की नमाज के बाद एक रैली होगी। यह रैली पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ गुरुवार को होने वाली थी, लेकिन लाहौर ट्रेन हादसे के कारण एक दिन के लिए टाल दी गई थी। अब यह रैली शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद होगी।

बता दें कि इमरान खान को पाकिस्तान की सत्ता संभाले सिर्फ 14 महीने हुए हैं और उनको सत्ता से हटाने के लिए पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों के साथ आम आवाम सड़कों पर उतर आई है। बेरोजगारी, गरीबी, महँगाई ने पाकिस्तान की आवाम को सड़क पर ला खड़ा किया है। पाकिस्तान में अब इमरान की विदाई के नारे लग रहे हैं।

इस मार्च में कई विपक्षी पार्टियाँ हिस्सा ले रही हैं। जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और अवामी नेशनल पार्टी शामिल हैं। इनकी माँग है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अपना इस्तीफा दें क्योंकि वह इस पद पर बने रहने के लायक नहीं है। 

मौलाना फजलुर्रहमान ने इमरान पर 2018 के आम चुनाव जीतने के लिए धांधली का आरोप लगाया है और इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। रहमान ने इमरान खान पर आर्थिक कुप्रबंधन, अक्षमता और खराब शासन के चलते आम लोगों की जिंदगी को कठिनाईयों से भरा बनाने का भी आरोप लगाया है। जेयूआई-एफ के वरिष्ठ नेता अकरम दुर्रानी ने कहा कि इस्लामाबाद की रैली अब जुमे की नमाज के बाद शुरू होगी और विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता रैली को संबोधित करेंगे।

इसके साथ ही इमरान खान को सेना की कठपुतली भी कहा जा रहा है, जिसे खुद सेना ने गद्दी पर बैठाया है। मौलाना फजलुर्रहमान का मानना है कि पीएम इमरान खान आर्थिक मामलों में काफी पीछे हैं और उनमें शासन चलाने की काबिलियत नहीं है। इस आजादी मार्च के कारण इमरान खान पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

गौरतलब है कि शुक्रवार (25 अक्टूबर) को मौलाना ने कहा था कि उनकी पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्यों और प्रांतीय नेताओं के घरों पर देश भर में छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा था, “यदि बैरिकेड्स और अन्य व्यवधानों के साथ हमारे मार्ग पर बाधाएँ उत्पन्न करने का प्रयास किया गया, तो इससे टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। चाहे एक महीने के लिए ही राष्ट्रीय राजमार्गो को बंद क्यों ना कर दिया जाए, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, हम इस्लामाबाद जाएँगे।” उनका कहना था कि इमरान ख़ान झूठ के सहारे पाकिस्तान में सत्ता में आए।

जम्मू-कश्मीर में इस ‘साहसिक’ कदम के लिए अमेरिकी कॉन्ग्रेस के सांसद ने की मोदी की सराहना

एक प्रभावशाली अमेरिकी सासंद ने जम्मू-कश्मीर में संविधान के अस्थायी अनुच्छेद के प्रावधानों को रद्द करने के ‘साहसी कदमों’ के लिए गुरुवार (31 अक्टूबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की।

गुरुवार को, एक सरकारी अधिसूचना के ज़रिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आ गए। 5 अगस्त 2019 को राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने वाले अनुच्छेद-370 को हटाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद दो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था।

सांसद जॉर्ज होल्डिंग ने गुरुवार को सदन में कहा,

“प्रधानमंत्री मोदी और संसद ने जो कदम उठाए हैं उनकी आवश्यकता थी, वे क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए जरूरी हैं और इनकी सराहना की जानी चाहिए।”

रिपब्लिकन सांसद ने कहा कि भारतीय संसद ने जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदलने का कानून पारित करने के साथ ही उन प्रावधानों में भी बदलाव किया है जो “आर्थिक विकास में बाधक थे और अलगाववाद की भावना को बढ़ावा देने वाले लगते थे।”

होल्डिंग ने आगे कहा, “हाल तक, कश्मीर अनुच्छेद-370 से चलता था, जो एक पुराना कानून था जिसे भारतीय संविधान ने अस्थायी तौर पर मान्यता दी थी। अनुच्छेद-370 उन लोगों के लिए भले ही अच्छा हो जिनके राजनीतिक संपर्क थे, लेकिन यह लोगों को आर्थिक अवसर उपलब्ध नहीं कराता था।”

होल्डिंग ने कहा कि भारतीय संविधान के अस्थायी प्रावधान ने ‘ध्रुवीकरण का माहौल’ बनाया जिसका राजनीतिक दोहन किया गया और पिछले कुछ दशकों में हजारों लोगों ने आतंकवादी हमलों में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान स्थित कई समूह सीमा पार आतंकवाद फैलाने में सक्षम रहे जिससे यहाँ के लोगों और उनके परिवारों को काफी कुछ झेलना पड़ा और अर्थव्यवस्था हमेशा कमजोर रही।”

होल्डिंग ने कहा कि इन्हीं सबके चलते मोदी सरकार को यह फैसला लेना था कि पुरानी नीति के साथ ही चला जाए या फिर क्षेत्र के वैधानिक दर्जे में बदलाव कर प्रगति के रास्ते पर बढ़े। होल्डिंग ने कहा, “मैडम स्पीकर, जम्मू-कश्मीर के लोग बेहतर के हकदार हैं और स्थिति को देखते हुए साहसी कदम उठाकर प्रधानमंत्री मोदी ने सही किया। जम्मू-कश्मीर के दर्जे में बदलाव को संसद द्वारा दो-तिहाई बहुमत से पारित किया गया जो सुधारों की आवश्यकता की जरूरत पर आम सहमति को दर्शाता है।”

उन्होंने कहा कि इन बदलावों के बाद भी यहाँ अशांति चाहने वाले लगातार हिंसा को बढ़ावा देने में लगे हैं।

होल्डिंग ने कहा, “पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों ने हाल ही में आम नागरिकों को बाहर निकलने, काम करने या सार्वजनिक स्थलों पर न जाने की चेतावनी देते हुए पोस्टर लगाए।”

उन्होंने कहा कि ये समूह सीमापार आतंकवाद में लिप्त हैं और इन्होंने नागरिकों तथा बच्चों पर हमले भी किए हैं। इन आतंकवादी समूहों ने सेब के कारोबार से जुड़े व्यापारियों और मजदूरों को भी निशाना बनाया।

Fact Check: तेजस में खराब खाना खाकर लोग ICU में हुए भर्ती या ये है महज सरकार को घेरने का प्रोपगेंडा?

एक तरफ जहाँ देश में चलने वाली सबसे अच्छी ट्रेन तेजस का बखान हो रहा है वहीं बीते 2-3 दिनों से सोशल मीडिया पर तेजस ट्रेन में खराब खाने के कारण यात्रियों की तबीयत बिगड़ने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल पोस्ट में लगातार बताया जा रहा है कि तेजस में खराब खाना परोसे जाने के कारण कई लोग बीमार पड़ गए, और 3 की स्थिति इतनी गंभीर है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके अलावा इन पोस्ट से भाजपा सरकार को घेरने का भी पूरा प्रयास हो रहा है।

जब तेजस से जुड़ी इस सूचना पर हमारी नजर पड़ी, तो हमने भी इस मामले पर रिपोर्ट बनाने के लिए सच्चाई जानने की कोशिश की। लेकिन मालूम चला वायरल पोस्ट में दी गई जानकारी 2017 की पुरानी खबर की है। जिसे हाल ही में viral in india नाम के फेसबुक पेज ने शेयर किया है।

VIRAL IN INDIA द्वारा शेयर पोस्ट में बताया गया है कि तेजस का खाना खाने से 24 यात्रियों की हालत खराब हो गई और 3 लोग ICU में भर्ती है। इस पोस्ट में एक ओर खाने की तस्वीर दिखाई गई और दूसरी ओर तेजस ट्रेन की। पोस्ट के कैप्शन में लिखा है कि ये हाल है देश की सबसे अच्छी ट्रेन का।

हालाँकि, गूगल पर तेजस और खराब खाने जैसे की वर्ड्स डालने पर मालूम चलता है कि पोस्ट में लोगों के बीमार होने की सूचना निराधार नहीं है। लेकिन ये बात बिलकुल गलत है कि इसके कारण लोगों को आईसीयू में भर्ती होना पड़ा।

खबर की सच्चाई की पड़ताल करने के दौरान हमें पता तला कि 2 साल पहले 2017 में कई खबरे छपीं थी जिसमें ट्रेन का खाना खाने के कारण कई लोगों के बीमार होने की पुष्टि थी। लेकिन हमें ये भी पता चला कि तुरंत इन यात्रियों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था और इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया था।

आगे खबर की सच्चाई तलाशते हुए एक मीडिया रिपोर्ट मिली जिसमें घटना के बाद रेलवे का बयान था। रेलवे ने इन लोगों के बीमार होने पर कहा था कि तेजस में लोग खराब खाने से बीमार नहीं हुए थे बल्कि एसी कोच में दो बच्चों की उलटी के बाद कोच में बेचैनी शुरू हुई और लोग बीमार हुए। वहीं सेंट्रल रेलवे की टीम की ओर से आई जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि खाना ‘संतोषजनक’ था।

हालाँकि, इतनी पड़ताल के बाद स्प्ष्ट हो गया कि ये खबर फर्जी नहीं है, लेकिन इसे आज के समय में सरकार के खिलाफ़ इस्तेमाल करने के लिए तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि 30 अक्टूबर को अपडेट किए गए वायरल पोस्ट को अब तक एक हजार से ज्यादा लोग शेयर कर चुके हैं। इस पोस्ट पर तरह-तरह के कमेंट करके सरकार को घेरा जा रहा है। बिना सच्चाई खँगाले प्रशासन को कोसने का काम जारी है। लोग इस पोस्ट को आधार बनाकर ट्विटर पर भी अन्य यूजर्स को बरगलाने का काम काम कर रहे हैं। और डेली बिहार नाम की वेबसाइट ने तो इसे खबर का रूप देकर भी पेश किया है।

अंततः इस पूरी पड़ताल से साफ है कि इस समय वायरल तेजस की यह खबर की ख़राब खाने की वजह से यात्री बीमार हुए निराधार है। बस सरकार और उसकी नई व्यवस्था को घेरने की बदनीयत से इस खबर को फैलाया गया और लोगों ने भी बिना सच्चाई परखें इस अफवाह तंत्र के शिकार हुए। हमारी पड़ताल से यह स्पष्ट है कि यह खबर फेक है।

पाकिस्तान 2020 तक ग्रे लिस्ट में: अरबों डॉलर फँसने से तिलमिलाया चीन, भारत-अमेरिका पर लगाए आरोप

फ्रांस की राजधानी पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (FATF) की बैठक में पाकिस्तान को फ़रवरी 2020 तक ग्रे लिस्ट में रखे जाने के फ़ैसले से चीन ख़ासा भड़का हुआ है। इस फ़ैसले से पाकिस्तान का नाख़ुश होना तो समझ में आता है, लेकिन इसका असर चीन पर भी दिखाई दे रहा है।

चीन ने आरोप लगाया है कि भारत और अमेरिका FATF का राजनीतिकरण करने में लगे हुए हैं। यह बयान चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ़ से दो दिन पहले ही दिया गया है। चीन की इस तिलमिलाहट की असल वजह पाकिस्तान में अरबों डॉलर निवेश है, जो अब उसे ख़तरे में दिखाई दे रहे हैं। चीन का बयान बताता है कि वह किस तरह दुनिया में पाकिस्तान के नैरेटिव को आगे बढ़ा रहा है, जबकि हक़ीकत यह है कि FATF ने इमरान ख़ान सरकार को आतंकी नेटवर्क ख़त्म करने के लिए गाइडलाइंस जारी की थी, उनमें से किसी में भी वो खरा नहीं उतरा था।

ख़बर के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की आम सभा (UNGA) में भाषण देने से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अलजजीरा और रशिया टुडे को इंटरव्यू दिया था। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने भारत पर आरोप लगाया गया था कि वो FATF के माध्यम से पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डालने की कोशिश में लगा हुआ है। पाकिस्तान की यह कोशिश थी कि चीन उसे किसी तरह से ब्लैकलिस्ट होने से बचा ले। वहीं, चीन के लिए भी यह किसी मजबूरी से कम नहीं था।

चीन की बौखलाहट का कारण पाकिस्तान में अरबों का निवेश है। इसके अलावा भी चीन के कई प्रोजेक्ट पाकिस्तान में चल रहे हैं। इतना ही नहीं चीन ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर का क़र्ज भी दिया हुआ है, जिसका ब्याज़ चुकाना भी पाकिस्तान के लिए काफ़ी महँगा सौदा साबित हो रहा है। ऐसे में पाकिस्तान, चीन के कर्ज़ का भुगतान कैसे कर पाएगा, इसकी चिंता चीन को भी सता रही है।

बता दें कि FATF एक अंतर-सरकारी निकाय है जो 1989 में आया, इस संगठन ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देने से साफ़ इनकार कर दिया था क्योंकि उनके मुताबिक पाकिस्तान मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग को रोकने पूरी तरह विफल रहा है। इसीलिए इस निकाय ने पाकिस्तान को फ़रवरी 2020 तक ग्रे-लिस्ट में रखने का निश्चय किया था।

इससे पहले 10 अक्टूबर को जब इमरान खान को इस बात का अंदेशा होने लगा था कि FATF से पैसे माँगने पर पाकिस्तान को बेईज्ज़त होना पड़ सकता है तो आनन-फानन में दुनिया की नज़र में खुदको पाक-साफ दिखाने के लिए इमरान खान की सरकार ने टॉप 4 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया था जिससे दुनिया के सामने यह ढोंग किया जा सके कि पाकिस्तान में आतंक-विरोधी माहौल है और वे इसका समर्थन बिलकुल नहीं करते।

महाराष्ट्र में खींचतान के बीच इस किसान ने राज्यपाल को लिखा पत्र, कहा- किसानों के लिए मुश्किल वक्त, मुझे बना दो CM

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव नतीजे आए लगभग एक हफ्ते हो गए पर अब तक सरकार नहीं बन पाई है। मुख्‍यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच जारी तल्‍खी के बीच महाराष्ट्र के बीड जिले के एक किसान ने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाहिर की है। किसान ने राज्यपाल को खत लिखकर खुद को मुख्यमंत्री बनाने की माँँग की है। किसान का कहना है कि जब तक मामले का हल नहीं होता, तब तक उसे सीएम बना दिया जाए।

बीड जिले के किसान श्रीकांत वी गदले ने राज्यपाल को लिखा, “जब तक सीएम की पोस्ट का मामला सुलझता नहीं है, तब तक मुझे CM बनाया जाना चाहिए। यह किसानों के लिए बेहद मुश्किल वक्त है। बेवक्त बारिश की वजह से किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचा है। राज्य में सरकार का गठन जल्द से जल्द होना चाहिए।”

बता दें कि 24 अक्‍टूबर को आए चुनाव नतीजों में बीजेपी को 105 तो शिवसेना को 56 सीटों पर जीत हासिल हुई है। 288 सदस्‍यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 145 सीटें चाहिए। शिवसेना ढाई-ढाई साल तक दोनों दलों के सीएम बनाए जाने की माँग पर अड़ी हुई है, जबकि बीजेपी का कहना है कि देवेंद्र फडणवीस ही पूरे पाँच साल तक मुख्‍यमंत्री रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले देवेंद्र फड़णवीस ने कहा था, “बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास स्‍पष्‍ट बहुमत है। इसके अलावा निर्दलीयों का समर्थन भी है, गठबंधन ने 288 में से 161 सीटें जीतकर जनादेश हासिल किया है। हम इस जनादेश का सम्‍मान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें नहीं लगता कि एक स्थिर सरकार बनाने में कोई बाधा है।”

उन्होंने भरोसा जताया था कि अहम मुद्दों पर जल्‍द ही स्थिति साफ हो जाएगी और सरकार बनाने में देरी नहीं होगी। हालाँकि दोनों ही दलों के बीच सरकार के गठन को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। बता दें कि शिवसेना ढाई-ढाई साल के लिए सीएम का प्रस्ताव रखा है, जिसे बीजेपी ने नामंजूर कर दिया है। जिसके बाद राज्य में सरकार बनाने को लेकर अन्य विकल्पों पर भी चर्चाएँ शुरू हो गई है।

लियाकल मियाँ ने काले जादू के नाम पर बुजुर्ग बुद्धू के ऊपर चढ़ा दिए तीन लोग, गई जान, FIR दर्ज

पश्चिम बंगाल के अलीपुर द्वार जिले में काले जादू के नाम पर लियाकल मियाँ और उनके साथी मलॉय ने बुद्धू नामक एक बुजुर्ग की जान ले ली। लेकिन मीडिया में इसे इस तरह पेश किया गया कि जैसे इस घटना में कोई हिन्दू तांत्रिक और मन्त्र विधि शामिल हो। पुलिस ने बुद्धू उरांव के बेटे की तहरीर पर दोनों आरोपितों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया। साथ ही बुद्धू का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले में जाँच जारी है।

गौरतलब है कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस मामले को भाषा के गलत प्रयोग से ट्वीस्ट देते हुए हिंदू तांत्रिक से जोड़कर दिखाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, बुद्धू उरांव अलीपुर द्वार जिले के बोंचुकुमारी का रहने वाले है। जिन्हें उनकी बीमारी के कारण कुछ समय पहले सिलिगुड़ी के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। हालाँकि, यहाँ से वे पूरी तरह ठीक होकर वह अपने घर आ गए थे। लेकिन अगले ही दिन यानी 29 अक्टूबर को पड़ोसियों के कहने पर शरीर की अशुद्धियाँ दूर कराने के लिए उन्होंने मदारीहाट में लियाकल मियाँ को संपर्क किया।

काले जादू के नाम पर लियाकल और उनके साथी ने बुद्धू से 12 हजार रुपए माँगे। इसमें पहले उन्होंने 5 हजार रूपए टोकन अमॉउंट के रूप में लिया। बाद में अपना काले जादू की प्रक्रिया शुरू की। दोनों ने पहले बुद्धू को पेट के बल लेटने के लिए कहा और पीठ पर पान के पत्तों से मालिश की। थोड़ी देर बाद दोनों उसकी पीठ पर आ खड़े हुए और बुद्धू के बेटे राजेश को भी अपने साथ खड़ा कर लिया।

इस प्रक्रिया को कुछ समय बीता कि लियाकल और उनका तेज आवाज में जादू-टोने के लिए कुछ पढ़ने लगे। तभी बुद्धू भी अपने ऊपर तीन लोगों के वजन को न सहने के कारण कराहने लगा, लेकिन काले जादू के नाम पर चिल्ला रहे दोनों लोगों की आवाजें इतनी तेज थी कि बुजुर्ग की आवाज उन्हें सुनाई नहीं पड़ी। करीब 15 मिनट के संघर्ष के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।

जब गाँव वालों को इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने काला जादू करने वाले लियाकत और उनके साथी को पीटना शुरू कर लिया। हालाँकि थोड़ी देर बाद मौक़े पर पहुँची पुलिस ने उन्हें गाँव वालों के चंगुल से निकाला और उनको गिरफ्तार कर लिया गया।

अब फिलहाल लियाकल और मलॉय दोनों पर हत्या के आरोप में मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले में आगे की जाँच जारी है। पुलिस ने कहा है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह का मालूम चल पाएगा, तब तक वे अपनी जाँच में जुटे हैं।

दिल्ली एयरपोर्ट पर संदिग्ध बैग में RDX की आशंका: CISF ने जाँच शुरू की, बढ़ाई गई सुरक्षा

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और भोपाल के साथ देश के कई शहरों में भी आतंकी हमलों की आशंका के बीच शुक्रवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर एक संदिग्ध बैग मिला है। इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर छोड़े गए संदिग्ध बैग में RDX होने की आशंका से दिल्ली एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।

ख़बर के अनुसार, दिल्ली पुलिस को रात को लगभग 1 बजे फोन आया कि टर्मिनल-3 के गेट नं-2 के पास एक संदिग्ध बैग मिला है। इसके बाद बैग को पुलिस ने हटा दिया और सामग्री की जाँच की। बैग के आसपास का बड़ा इलाका सुरक्षा बलों ने खाली करवा दिया और लोगों को उस क्षेत्र से दूर रहने को कहा गया। इसके बाद जाँच के लिए पहुँची डॉग स्क्वॉयड की टीम ने पूरी पड़ताल की। किसी बड़ी आशंका के मद्देनजर जाँच के दौरान एक-दो घंटों के लिए टर्मिनल-3 के सामने की सड़क को बंद कर दिया गया था। यह सब जाँच के लिए किया गया था और इसी कड़ी में टर्मिनल-3 पर यात्रियों को कुछ घंटे तक निकलने नहीं दिया गया था। 

बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड को तुरंत मौक़े पर बुलाया गया और टर्मिनल-3 के बाहर की सड़कों को अवरुद्ध कर दिया गया।

विशेष सेल और ख़ुफ़िया ब्यूरो ने जाँच शुरू कर दी और जल्द ही औपचारिक रूप से CISF से जाँच शुरू करवाई जाएगी। विस्फोटक रात में लगभग 3 बजे निष्क्रिय गया था। ग़ौरतलब है कि इससे कुछ दिनों पहले भी इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट पर लावारिस बैग मिलने के बाद हड़कंप मच गया था, हालाँकि उस दौरान कुछ भी ख़तरनाक बैग में नहीं मिला था।