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J&K पर UAE में बोले मोदी: अलग-थलग पड़े रहने से युवा कट्टरपंथी और आतंकवादी बने

जम्मू-कश्मीर के मसले पर भारत का समर्थन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के अलग-थलग पड़े रहने के कारण वहॉं के युवा भटक कर कट्टरपंथी बन गए और हिंसा तथा आतंकवाद की राह पर चल पड़े। यही कारण है कि राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किया गया है।

मोदी ने इसे भारत का आंतरिक मसला बताते हुए कहा कि इस संबंध में फैसला पूरी तरह लोकतांत्रिक, पारदर्शी और संवैधानिक तरीके से लिया गया। वे तीन देशों की यात्रा के दूसरे पड़ाव पर यूएई पहुॅंचे थे।

खलीज टाइम्स को दिए साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने जम्मू कश्मीर के अलग-थलग पड़े रहने की स्थिति को खत्म करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त किया। उन्होंने कहा, “अलग-थलग पड़े रहने की इस स्थिति से कुछ युवा पथ से भटक गए, कट्टरपंथी बन गए और हिंसा तथा आतंकवाद के रास्ते पर चल पड़े।”

उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए भारत के फैसले को लेकर यूएई और उसके नेतृत्व ने जिस तरह की समझ दिखाई उसकी मैं सराहना करता हूॅं।

मोदी ने शनिवार को अबू धाबी के शहजादे शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से वार्ता की। संयुक्त अरब अमीरात ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के भारत के फैसले का समर्थन किया है।

भारत में खाड़ी देश के राजदूत अहमद अल बन्ना ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित भारत के फैसलों को यूएई उसका आंतरिक मामला मानता है।

आतंकवाद पर मोदी ने कहा, “भारत चार दशकों से सीमा पार से आतंकवाद से पीड़ित रहा है। भारत और यूएई दोनों का यह सुनिश्चित करने में साझा हित है कि किसी भी तरीके से आतंकवाद को पनाह देने या उसे बढ़ावा देने वाली मानवता विरोधी ताकतें अपनी विध्वंसकारी नीतियां छोड़ने पर विवश हो।” उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत कदमों का समर्थन किया है।

पाकिस्तानियों ने सोशल मीडिया में फिर दिखाई नीचता, अरुण जेटली के निधन पर खुशी से बावले हुए

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया। उनके निधन पर दुनिया के हर हिस्से से संवेदनाएँ आ रही हैं। पर गम की इस घड़ी में भी पाकिस्तानी अपनी नीचता दिखाने में पीछे नहीं रहे।

जेटली के निधन से बावले हुए पाकिस्तानियों ने खुशी मनाते हुए ट्वीट किए हैं। इससे पहले पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर पाकिस्तानी अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आए थे।

जेटली के निधन की ख़बर आते ही एक पाकिस्तानी यूज़र ने उनके लिए अपशब्दों का करते हुए लिखा, “आपको नरक में जाना पड़ेगा।”

एक अन्य पाकिस्तानी ने ट्वीट किया, “पहले सुषमा स्वराज और अब अरुण जेटली। इंशाअल्लाह अगले नरेंद्र मोदी और अमित शाह होंगे, क्योंकि इनकी मौत के लिए कश्मीरी दुआ कर रहे हैं। कश्मीर में अत्याचार के लिए ये लोग गुनहगार हैं। इनका अत्याचार जल्द खत्म होगा और ये सब नरक में सड़ेंगे।”

72 हूर की आस में बेगुनाहों का कत्ल करने वाली कौम से जुड़े अधिकांश पाकिस्तानी यूजरों ने जेटली को नरक मिलने की कामना की।

हैरान करने वाली बात यह है कि केवल पाकिस्तानी ही नहीं हैं जो इस मौके पर भी ज़हर उगल रहे हैं। कुछ ‘अमनपसंद’ भारतीय भी पाकिस्तानियों को भाषा बोलते नजर आ रहे हैं। ट्विटर यूजर @ Musanghistani ने जेटली को फासीवादी हिंदुत्ववादी बताते हुए लिखा है एक कम नाजी हमेशा समाज के लिए अच्छा होता है। शायद वो नरक में सड़े।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर भी उनके ख़िलाफ़ इसी तरह अभद्र टीका-टिप्पणी की गई थी।

राजनीतिक गहमागहमी के बीच जम्मू-कश्मीर में चुनाव की तैयारियॉं शुरू, 14 महीने में पूरा होगा परिसीमन

आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से जारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच जम्मू-कश्मीर में चुनाव की तैयारियॉं शुरू हो गई है। राज्य के मुख्य सचिव (योजना आयोग) रोहित कंसल ने शनिवार को बताया कि ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव को लेकर अहम फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में पंचायती राज्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह अगला कदम होगा।

राज्य के ग्रामीण विकास विभाग की सचिव शीतल नंदा ने बताया कि पूरे राज्य के 316 ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव होंगे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जम्मू और कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के कुछ दिनों बाद, चुनाव आयोग परिसीमन का काम पूरा करने को तैयार है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि परिसीमन पूरा होने में करीब 14 महीने लगेंगे। पूरी प्रक्रिया नौ से 10 चरणों में पूरी होगी।

राज्य में हालात अब धीरे-धीरे सामान्य होते जा रहे हैं। कंसल ने बताया कि घाटी के 69 थाना क्षेत्रों में अब दिन में पाबंदियों को हटा लिया गया है। जम्मू क्षेत्र में 81 थाना क्षेत्रों में दिन में पाबंदियॉं हटाई गई हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में 1500 प्राथमिक और 1000 माध्यमिक स्कूल खुल गए हैं। हालॉंकि छात्रों की उपस्थिति फिलहाल कम है। शिक्षा विभाग शैक्षणिक गतिविधि पूरी तरह बहाल करने को लेकर प्रयास कर रहा है।

कंसल के मुताबिक 17 अगस्त के बाद छिटपुट विरोध की घटनाओं में भी कमी देखी गई है। हालॉंकि सीमा पार से आंतकी खतरे की आशंका बनी हुई है जिसके कारण सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है।


कृष्णाष्टमी पर संदेशों से परेशान हुए चीफ जस्टिस: रजिस्ट्रार ने जजों से मोबाइल पर मैसेज नहीं करने को कहा

इलाहाबाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने सभी जिला जजों को चिट्ठी भेज कर कहा है कि वे मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर के मोबाइल पर संदेश न भेजें। कृष्णाष्टमी पर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कुछ न्यायिक अधिकारियों की ओर से शुभकामना संदेश भेजे जाने के बाद रजिस्ट्रार जनरल ने यह चिट्ठी भेजी है।

इसमें कहा गया कि इस तरह के संदेशों से समस्या खड़ी होती है और माननीय मुख्य न्यायाधीश को असुविधा होती है। उन्होंने इसको लेकर चिंता जताई है और भविष्य में किसी भी अवसर पर कोई संदेश उनके मोबाइल पर नहीं भेजे जाएँ।


साभार: barandbench.com

पत्र में जजों से इसे गंभीरता से लेने को कहा गया है। हालॉंकि किसी आवश्यक परिस्थिति में वे मुख्य न्यायाधीश को मैसेज भेज सकते हैं। रजिस्ट्रार जनरल ने जिला जजों से अपने अधीनस्था न्यायिक कर्मचारियों को भी इस संबंध में निर्देशित करने को कहा है।

‘फासीवादी, उनके हाथ खून से सने’ – अरुण जेटली के निधन पर लिबरपंथियों ने ऐसे मनाया जश्न!

भारत के पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर अंतिम साँस ली। किसी के चले जाने से जो एक आकस्मिक शोक का भाव उभरता है, यह संस्कृति शायद कुछ लोगों में नदारद है। ऐसा नहीं होता तो एक तरफ जब राष्ट्रीय स्तर के नेता के निधन पर शोक मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्व-घोषित उदारवादियों के लिए आज ‘जश्न’ का दिन है।

ये वो लोग हैं, जिनके पास उल्लास के नाम पर इन दिनों कुछ भी बचा नहीं है। इसलिए, हिंदुत्ववादी नेताओं के निधन के नाम पर ही सही, ये जश्न मनाने के आतुर रहते हैं। आज यह जश्न अरुण जेटली के नाम पर मना रहे हैं, कुछ दिन पहले पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की मौत पर भी इसी तरह का व्यवहार कर रहे थे।

द क्विंट और द हिंदू का एक स्तंभकार है। यह ट्विटर पर क्वेंटिन टैरेंटुलिनो (Quentin Tarantulino) के नाम से जाना जाता है। यह लिखता है – जब कोई फासीवादी मरता है, तो अच्छा लगता है। हालाँकि इसने अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया, लेकिन स्क्रीनशॉट के जमाने में अपनी करतूतों को छिपाने से बच नहीं पाया।

एक बाबा ग्लोकल है। वो अरुण जेटली को ‘पीस ऑफ शिट’ कहता है। वो लिखता है कि उसे हिंदू वर्चस्ववादी नए-नाजी (तानाशाह) के साथ कोई सहानुभूति नहीं है।

ग्लोकल ने एक दूसरे ट्वीट में लिखा, “अरुण जेटली उन कुछ लोगों में से एक थे, जो ‘अंग्रेजी में नाज़ीवाद’ का बचाव कर सकते थे।’

अशोक स्वैन ने अलग लेवल पर जाते हुए ट्वीट किया, थोड़ा गूढ़ लिखते हुए। वैसे वो हमेशा जहर ही लिखते हैं। लेकिन इस इंसान का ट्वीट पढ़िए, भावनाएँ स्पष्ट हो जाएँगी।

मिनी नायर ने लिखा, “अरुण जेटली को माफ नहीं किया जा सकता, उनके हाथ खून से सने हैं।”

आर्य सुरेश ने कहा कि ‘अरुण जेटली कितने अच्छे व्यक्ति थे’ जैसे लाखों लेख के बावजूद यह भूला नहीं जा सकता कि उन्होंने एक ‘फासीवादी’ का समर्थन किया था।

नंदतारा नाम के यूजर ने लिखा, उन्होंने अपनी सारी अच्छाइयों को किनारे रख दिया और मोदी-शाह के ‘क्लोन’ बन गए।

स्व-घोषित ‘उदारवादियों’ और लिबरपंथियों का यह रेगुलर पैटर्न बन गया है। ये किसी भी भाजपा नेता की मृत्यु के बाद जश्न मनाते हैं। संवेदना, संस्कृति, जीवन-मरण जैसे शब्द इनकी डिक्शनरी में मानो है ही नहीं। अगर होता तो शायद ये वो नहीं होते, जो आज ये बन चुके हैं!

‘मैंने सद्भावना में बुला क्या लिया, राजनीति करने दौड़े चले आए राहुल गॉंधी, अब उनकी कोई जरूरत नहीं’

जम्मू-कश्मीर से बैरंग लौटाए गए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी और अन्य विपक्षी नेताओं को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने खरी-खरी सुनाई है। मलिक ने कहा है, “मैंने उन्हें सद्भावना में बुलाया था। लेकिन, उन्होंने राजनीति शुरू कर दी। उनकी यह हरकत राजनीति के अलावा कुछ नहीं। राजनीतिक दलों को ऐसे वक्त में राष्ट्र हित को तरजीह देनी चाहिए।”

राज्यपाल ने कहा, “अब उनकी यहॉं कोई जरूरत नहीं है। उनकी जरूरत तब थी जब उनके साथी संसद में बोल रहे थे। यदि वे यहॉं आकर माहौल बिगाड़ना और दिल्ली में बोले गए झूठ को ही दोहराना चाहते हैं तो यह सही नहीं है।”

इससे पहले जम्मू-कश्मीर के हालात जानने के लिए विपक्षी नेताओं के साथ पहुॅंचे राहुल गाँधी को श्रीनगर एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया था। सभी नेताओं को वहॉं से वापस दिल्ली भेज दिया गया। राहुल के साथ गए नेताओं में गुलाम नबी आज़ाद, डी राजा, शरद यादव, मनोज झा, मजीद मेमन शामिल थे।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार (अगस्त 23, 2019) रात को ही इन नेताओं से अपनी यात्रा टालने की अपील की थी। प्रशासन का कहना था कि उनके घाटी में आने से शांति-व्यवस्था और आम जनजीवन बहाल करने में बाधा पहुँचेगी। इसके बावजूद, राहुल 8 दलों के 11 विपक्षी नेताओं के साथ श्रीनगर पहुँच गए थे।

मेरी हत्या हो सकती है… मरना तो वैसे भी है, लेकिन माफ़ी नहीं माँगूंगी: रेपिस्ट पादरी का विरोध करने वाली नन

केरल में बलात्कार के आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ प्रदर्शन में भाग लेने वाली नन लूसी कलपूरा ने अपनी हत्या का अंदेशा जताया है। उन्होंने पुलिस से अपनी शिकायत वापस लेने और माफ़ी माँगने से भी इनकार किया है। कैथोलिक क्रिश्चन सोसायटी फ्रांसिस्कन क्लेरिस्ट कॉन्ग्रिगेशन (FCC) ने कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे माफ़ी माँगने और शिकायत वापस लेने को कहा था।

सिस्टर लूसी का कहना है कि सितंबर 2018 के बाद उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उन्हें जिस तरह टॉर्चर किया गया, इसके लिए एफसीसी को उनसे माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने कहा ये सिर्फ उनकी बात नहीं है। यह महिलाओं के अस्तित्व का मसला है। वे मर्दों की बपौती नहीं हैं।

लूसी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, “जैसे आप धूम्रपान करने के बाद अपने पैरों के नीचे सिगरेट को कुचल देते हैं, वैसा ही व्यवहार वो मेरी जैसी महिलाओं के साथ कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अब समझौता करने की कोई गुंजाइश नहीं है। पहले भी उन्हें बहुत धमकियाँ मिल चुकी है, वो इन धमकियों की परवाह नहीं करती।

इतना ही नहीं, लूसी ने किसी भी अप्रिय घटना के लिए एफसीसी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “मेरी हत्या हो सकती है। मरना तो वैसे भी है। शायद हत्या ही मेरी नियति में है। इसके लिए एफसीसी और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा। मैं यहाँ कॉन्वेंट में रहूँगी। मैंने पुलिस से सुरक्षा भी माँगी है। लेकिन उन्होंने अब तक कुछ नहीं किया है।”

गौरतलब है कि, इस हफ्ते की शुरुआत में सिस्टर लूसी ने कॉन्वेंट में बंधक बनाने और प्रार्थना से रोके जाने को लेकर पुलिस से शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि सोमवार (अगस्त 19, 2019) की सुबह जब प्रार्थना के लिए तैयार हुई तो कॉन्वेंट से निकल नहीं पाई, क्योंकि उन्हें बाहर से बंद कर दिया गया था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुँच उन्हें बाहर निकाला था।

दुष्कर्म में आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ पिछले साल सितंबर में हुए विरोध-प्रदर्शन में शामिल 5 ननों में से एक लूसी कलपूरा हैं। इसके कारण FCC ने उन्हें बर्खास्त कर 17 अगस्त तक कॉन्वेंट छोड़ने को कहा था। इसके खिलाफ उन्होंने वेटिकन में अपील कर रखी है। पिछले दिनों नन लूसी कलपूरा ने एक पादरी पर सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो फैलाकर खुद को अपमानित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस से शिकायत के बाद उनकी छवि खराब करने के लिए चर्च फर्जी वीडियो फैला रहा है।

J&K में पाबंदी राष्ट्रहित में: कश्मीर टाइम्स की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट पहुॅंचा PCI

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से जारी संचार पाबंदियों का प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने समर्थन किया। पीसीआई ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है। राज्य में संचार व्यवस्थाओं पर रोक को ‘राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता’ के हित में बताते हुए कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका में हस्तक्षेप की मॉंग की गई है।

भसीन ने पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। उनका कहना है कि सूचनाओं के आदान-प्रदान पर व्यापक रोक बोलने और और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाओं सहित संचार के सभी तरीकों को तुरंत बहाल करने के लिए केंद्र सरकार को दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

लाइव लॉ के अनुसार 16 अगस्त को CJI की अगुवाई वाली पीठ ने भसीन की याचिका पर सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टाल दिया था और कहा था कि सरकार को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए।

उनकी याचिका में हस्तक्षेप की माँग करने वाला PCI प्रेस काउंसिल अधिनियम 1978 के तहत ‘प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने और भारत में समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखने और सुधारने’ के उद्देश्य से बनाया गया वैधानिक निकाय है। याचिका में PCI ने कहा है कि उसका काम न केवल प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है बल्कि वो ‘नागरिकता के अधिकारों और जिम्मेदारियों दोनों की भावना को बढ़ावा’ और किसी भी विकास की समीक्षा करने व संभावनाओं के लिए जनहित और महत्व के समाचारों के प्रसार को प्रतिबंधित करने के लिए बाध्य है।

याचिका में कहा गया है, “संविधान के सबसे विवादास्पद प्रावधान को हटाने, जिसमें राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता के हित में संचार और अन्य सुविधाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, वो भसीन के अधिकारों का हनन नहीं करता है।”

UAE ने अपने सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से PM मोदी को नवाजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शनिवार (अगस्त 24, 2019) को अबू धाबी में यूएई (UAE) के सर्वोच्च नागरिक सम्‍मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से नवाजा गया। क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने प्रधानमंत्री को इस सम्मान से सम्मानित किया। बता दें कि, पीएम मोदी अपना दो दिवसीय फ्रांस दौरा खत्म कर अबू धाबी पहुँचे हैं। अबू धाबी पहुँचने पर पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

मोदी और क्राउन प्रिंस के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा भी हुई। इस साल अप्रैल में यूएई ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजने की घोषणा की थी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस से रवाना होने के बाद ट्वीट करके बताया कि उनका फ्रांस दौरा काफी सफल रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान दोनो देशों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत हुई। यह बातचीत आपसी सहयोग को बढ़ाएगी और नए मौके देगी। साथ ही उन्होंने फ्रांस की जनता और सरकार को मेहमानवाजी के लिए शुक्रिया भी कहा।


बैरंग वापस: J&K गए राहुल गाँधी समेत सभी विपक्षी नेताओं को एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेजा गया

जम्मू-कश्मीर के हालात जानने के लिए राहुल गाँधी समेत कई विपक्षी नेता श्रीनगर पहुँचे थे। न्यूज़ एजेंसी ANI के अनुसार, राहुल गाँधी समेत सभी विपक्षी राजनेताओं को एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। इनमें गुलाम नबी आज़ाद, डी राजा, शरद यादव, मनोज झा, मजीद मेमन और अन्य नेता शामिल थे।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार (अगस्त 23, 2019) की रात बयान जारी कर विपक्षी राजनेताओं को घाटी की यात्रा करने से मना किया था। प्रशासन का कहना था कि उनके घाटी में आने से शांति-व्यवस्था और आम जनजीवन बहाल करने में बाधा पहुँचेगी। इसके बावजूद, पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी शनिवार (अगस्त 24, 2019) को 8 दलों के 11 विपक्षी नेताओं के साथ श्रीनगर पहुँच गए थे

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अपने बयान में कहा था कि ऐसे वक्त में जब सरकार राज्य के लोगों को सीमा पार आतंकवाद के खतरे और आतंकवादियों तथा अलगाववादियों के हमलों से बचाने की कोशिश कर रही है और उपद्रवियों तथा शरारती तत्वों को नियंत्रित कर लोक-व्यवस्था बहाल करने की कोशिश कर रही है, तब वरिष्ठ राजनेताओं की ओर से आम जनजीवन को धीरे-धीरे पटरी पर लाने में बाधा डालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अगर वो इलाके का दौरा करेंगे, तो उन पाबंदियों का भी उल्लंघन करेंगे, जो अब भी कई इलाकों में लागू है। वरिष्ठ नेताओं को समझना चाहिए कि शांति-व्यवस्था और जानहानि को रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।