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जहाँ दर्द, वहीं सुई: फ़र्ज़ी डॉक्टर खलील अहमद गिरफ़्तार, 5वीं फेल लगा रखा था MBBS/MS का बोर्ड

मध्य प्रदेश में एक ऐसे फ़र्ज़ी डॉक्टर को गिरफ़्तार किया गया है, जो पाँचवीं फेल है। यहाँ तक कि उसे एमबीबीएस का फुल फॉर्म तक नहीं पता। जबकि, वह ख़ुद को एमबीबीएस और एमएस डिग्री होल्डर बताता फिरता था। मामला इंदौर के गौतमपुरा का है, जहाँ खलील अहमद नामक फ़र्ज़ी डॉक्टर आर्थोपेडिक क्लिनिक चलाया करता था। वहाँ उसने बाँझपन से लेकर कैंसर तक का इलाज करने जैसे दावों के साथ एक बोर्ड भी लगा रखा था।

शनिवार (अगस्त 31, 2019) को उसके ख़िलाफ़ पुलिस को शिकायत मिली थी। इसके बाद पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की एक टीम के साथ आरोपित डॉक्टर के क्लिनिक पर छापेमारी की। पुलिस को अपनी पड़ताल में पता लगा कि खलील के पास मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन तक नहीं था। यहाँ तक कि जब उससे उसकी डिग्री के बारे में पूछा गया तो वह अचानक से हड़बड़ा गया और उससे कोई जवाब देते नहीं बना।

आरोपित फ़र्ज़ी डॉक्टर के क्लिनिक से कई दवाइयाँ भी बरामद की गईं। हालाँकि, खलील इसका जवाब देने में भी विफल रहा कि कौन सी दवा किस बीमारी में दी जाती है। बाद में जब पुलिस ने उसकी शिक्षा-दीक्षा के बारे में पता लगाया तो खुलासा हुआ कि वह 5वीं फेल है। स्वास्थ्य विभाग की टीम से उससे अंग्रेजी में ‘डॉक्टर’ शब्द लिखने को कहा लेकिन खलील इतना भी नहीं कर सका।

आरोपित खलील पहले बंगाल में किसी डॉक्टर की क्लिनिक पर काम किया करता था। वहीं उसके शैतानी दिमाग में ये आईडिया आया कि ऐसा ही कोई क्लिनिक खोल कर लोगों को बेवकूफ बनाते हुए पैसा कमाया जा सकता है। तब उसने गौतमपुरा में क्लिनिक खोला। एक और अजीबोगरीब बात यह सामने आई है कि मरीज को शरीर के जिस भाग में दर्द होता था, वह उसे उसी स्थान पर इंजेक्शन लगा दिया करता था।

फ़र्ज़ी डॉक्टर खलील अहमद द्वारा तंत्र-मन्त्र और झाड़-फूँक करने की बात भी सामने आई है। उनके ख़िलाफ़ धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने उसके क्लिनिक को भी सील कर दिया है।

2018-19 में UPI लेन-देन 5 बिलियन के पार, डेबिट कार्ड से हुए लेनदेन को छोड़ा पीछे: RBI की रिपोर्ट

मोदी सरकार की नीतियों की वजह से डिजिटल लेनदेन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018-19 में यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI के ज़रिए डिजिटल पेमेंट ने डेबिट कार्ड से हुए लेनदेन को पीछे छोड़ दिया है।

ख़बर के अनुसार, 5.35 बिलियन का UPI लेन-देन, डेबिट कार्ड लेन-देन की तुलना में लगभग 1.2 गुना अधिक था, यानी डेबिट कार्ड का लेन-देन 4.41 बिलियन था। यह डेटा इस बात को स्पष्ट करता है कि UPI के यूज़र्स ने लेन-देन के इस माध्यम को हाथों-हाथ लिया है, जबकि इस तरह के ऐप को लॉन्च हुए केवल तीन साल हुए हैं।

2017-18 में, UPI के ज़रिए केवल 915.2 मिलियन लेन-देन हुआ, जबकि डेबिट कार्ड का लेन-देन 3.34 बिलियन था। दिलचस्प बात यह है कि इसी अवधि में एटीएम की संख्या 222,247 से घटकर 221,703 हो गई।

इसका मतलब यह साफ़ है कि अब उपभोक्ताओं को नकद भुगतान की बजाए ऑनलाइन भुगतान की ओर अग्रसर किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक दिसंबर से अपने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) प्रणाली को 24×7 उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बैंकिंग सिस्टम में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

‘दिग्विजय को ऐसी बयानबाजी करनी है तो पाकिस्तान जाएँ, हम तो उनके खिलाफ कोर्ट जा रहे हैं’

देश को हिंदू आतंकवाद की थ्योरी परोसने वाले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस बार बजरंग दल के ख़िलाफ़ बयानबाजी करके बुरे फँसे। भाजपा और बजरंग दल पर आईएसआई से पैसे लेने का आरोप लगाने के बयान पर बजरंग दल ने उन पर एक्शन लेने का फैसला कर लिया है।

बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सोलंकी ने कहा है कि वो अब कोर्ट में जाकर दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज करवाएँगे। साथ ही उनका कहना है कि पार्टी को अब दिग्विजय सिंह को बाहर निकाल देना चाहिए, क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो एक दिन कॉन्ग्रेस ही भारत से बाहर हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रीय संयोजक का दिग्विजय के बयान पर कहना है कि अगर दिग्विजय को इसी तरह की बयानबाजी करनी है तो पाकिस्तान जाएँ और पाकिस्तानियों के साथ रहें। उनकी मानें तो दिग्विजय के बयानों को अब उनके घरवाले ही गंभीरता से नहीं लेते और न ही उनके बयानों को वो सुनते हैं।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में भिंड प्रवास के दौरान अभी हाल ही में दिग्विजय सिंह ने बजरंग दल और भाजपा के सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा था “जितने भी पाकिस्तान के लिए जासूसी करते पाए गए हैं, वे लोग बजरंग दल, बीजेपी और आईएसआई से पैसा ले रहे हैं। आईएसआई के लिए जासूसी समुदाय विशेष वाले कम कर रहे हैं और दूसरे धर्म वाले ज्‍यादा कर रहे हैं। इसको भी समझ लीजिए।” हालाँकि बाद में उन्होंने अपने इस बयान को लेकर सफाई भी पेश की और दावा किया कि यह पूरी तरह से गलत हैं।

ट्रैफिक नियमों को तोड़ने पर फाइन या सजा नहीं, मिली मिठाई और टॉफी: मणिपुर में अनोखा अभियान

मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के बाद रविवार आधी रात से नया कानून पूरे देश भर में लागू हो गया। कहा जा रहा है कि अब से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को 10 गुना ज्यादा जुर्माना भरना होगा। लेकिन इसी बीच मणिपुर से एक हैरान करने वाली भी खबर आ रही है।

बताया जा रहा है मणिपुर के चुराचंदपुर इलाके में ट्रैफिक पुलिस ने बिना हेलमेट बाइक चलाते लोगों को न केवल हिदायत दी कि सभी सुरक्षा नियम जनता के लिए बनाए गए हैं। इसलिए वो उसका अनुसरण करें बल्कि उनको मिठाई और टॉफियाँ भी बाँटीं और उनसे कोई फाइन भी नहीं लिया

एएनआई के ट्वीट के मुताबिक एसपी अमृता सिन्हा ने बताया कि पहले जब उन्होंने बिना हेलमेट पहने लोगों को सड़क पर रोकना शुरू किया तो लोगों को ये अच्छा नहीं लगा, फिर उन्हें एक आइडिया आया और उन्होंने कुछ दूर पर गाड़ी को रुकवाना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लोगों से उनकी गाड़ी को खींचकर आगे लाने को कहा और फिर उनको टॉफी और मिठाई दी।

इसके साथ ही पुलिस ने नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों आराम से समझाया कि ये सब उनकी सुरक्षा के लिए ही है इसलिए पुलिस चाहती हैं कि वो हेलमेट पहनें। एसपी अमृता बताती हैं कि उन्होंने जैसे ही इस तरीके को अपनाया लोग उनके साथ कॉपरेट करना शुरू कर दिया और उनकी बात भी सुनने लगे। लोगों को उनकी सुरक्षा के लिए जागरूक करने के लिए मणिपुर में यह मुहिम अभी कुछ दिन पहले से शुरू हुई है।

कमलनाथ सरकार ने 8 महीने में 11 बार किया तबादला: परेशान थाना प्रभारी पहुँचा हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के सत्ता संभालने के बाद से ही कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा अधिकारियों के ख़बरें सामने आती रही हैं लेकिन एक थानेदार का इतनी बार तबादला किया गया कि वह हाईकोर्ट पहुँच गया है। थानेदार सुनील लाटा अपने लगातार तबादलों के ख़िलाफ़ जबलपुर हाईकोर्ट पहुँच गए हैं। कमलनाथ सरकार द्वारा पिछले 8 महीने में उनका 11 बार ट्रान्सफर किया गया है।

अभी लाटा बैतूल जिले के सारणी थाने के प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके तबादलों का दौर भी तभी शुरू हुआ, जब मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। अब उन्हें निवाड़ी जिले के एक थाने में योगदान देने का आदेश आया है। जरा पिछले 8 महीनों में थाना प्रभारी लाटा के तबादलों की एक बानगी देखिए:

  • सबसे पहले उन्हें बैतूल से आईजी ऑफिस होशंगाबाद ट्रान्सफर किया गया।
  • होशंगाबाद से उन्हें पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया। वहाँ उन्हें आदिम जाति कल्याण शाखा में रखा गया।
  • इसके बाद उन्हें बैतूल के आदिम जाति कल्याण में भेज दिया गया।
  • इसके बाद उनका तबादला सागर और छतरपुर के लिए हुआ। वहाँ वह आमद दर्ज करा पाते, उससे पहले ही उनका तबादला भोपाल के लिए कर दिया गया।
  • उन्हें फिर भोपाल से बैतूल भज दिया गया, जहाँ वह कोतवाली थाना के प्रभारी रहे।
  • लाटा को फिर लाइन हाज़िर कर दिया गया।
  • अंत में उन्हें सारणी थाने का चार्ज दिया गया लेकिन ट्रान्सफर का दौर यहीं ख़त्म नहीं हुआ।
  • सारणी में चार्ज सम्भाले एक सप्ताह भी नहीं हुए थे कि लाटा का ट्रान्सफर निवाड़ी जिले में कर दिया गया।

थानेदार लाटा ने बताया कि तबादलों से परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जहाँ सुनवाई चल रही है। उन्होंने यह याचिका शुक्रवार (अगस्त 30, 2019) को दायर की।

जनसंख्या पर काबू नहीं होने से मंदी: कॉन्ग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने मनमोहन की ‘चिंता’ की निकाली हवा

अर्थव्यवस्था पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ‘चिंता’ की हवा उनकी ही पार्टी के एक युवा नेता जितिन प्रसाद ने निकाल दी है। ​मनमोहन की कैबिनेट में रह चुके जितिन ने मंदी और बेरोजगारी का कारण बढ़ती जनसंख्या को बताया है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री ने इसे ‘मानव रचित संकट’ बताते हुए मोदी सरकार से बदले की राजनीति छोड़ अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए कदम उठाने को कहा था।

जितिन प्रसाद ने कहा, “जनसंख्या नियंत्रण पर देशभर में व्यापक बहस होनी चाहिए। इस पर क़ानून भी बनाया जाना चाहिए। अगर देश को आगे बढ़ना है तो ठोस क़दम उठाने होंगे। मैं सरकार से माँग करता हूँ कि इस मुद्दे पर जो भी क़ानून लाना है, वह लाए।”

उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था डूब रही है, बेरोज़गारी बढ़ रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आबादी को नियंत्रित नहीं किया गया। पर्यावरण पर इसका प्रभाव पड़ रहा। जल संकट, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भारत में आबादी बढ़ने के कारण हैं।”

जितिन प्रसाद ने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें जनसंख्या नियंत्रण जैसे गंभीर मुद्दे पर एकसाथ खड़े होना चाहिए। बता दें कि इस साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसंख्या का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि जो लोग छोटा परिवार रख रहे हैं, वे भी एक तरह से देशभक्ति कर रहे हैं।

लाल किले की प्राचीर से जनसंख्या विस्फोट को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों से छोटे परिवार की अपील की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताते हुए कहा था कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए नयी चुनौतियाँ पेश करता है। इससे निपटने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को क़दम उठाने चाहिए।


मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होंगे ट्रैफिक से जुड़े नए कानून

ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वालों के लिए सरकार ने 1 सितंबर से नया मोटर व्हीकल कानून लागू कर दिया है। कानून में हुए संशोधन के बाद अब ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर 10 गुना तक अधिक जुर्माना भरना पड़ेगा। अब देश भर में अनाधिकृत रूप से सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर वाहन खड़े रखने वालों पर 500 रुपए प्रति घंटा का जुर्माना लगेगा। नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 10 हजार रुपए जुर्माना और 6 महीने की जेल का प्रावधान है और कोई ऐसा करते हुए दोबारा पकड़ा जाता है, तो उसे 2 साल की जेल और 15 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा।

जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार और राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार और मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने अपने-अपने राज्यों में इस अधिनियम को लागू करने से मना कर दिया है। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने इसे लागू करने से इनकार करते हुए कहा कि जुर्माने की राशि काफी अधिक है। प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने नए नियमों का विरोध किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने जुर्माने की दरें जरूरत से ज्यादा बढ़ा दी है। इसी वजह से मोटर व्हीकल एक्ट की नई दरें मध्य प्रदेश में अभी लागू नहीं होगी।

सरकार पहले इसकी विवेचना करेगी और उसके बाद लागू करने पर निर्णय लेगी। इसमें प्रावधान के तहत काम करने का फिलहाल कोई नोटिफिकेशन नहीं है, लेकिन केन्द्र से बात की जा रही है। मध्य प्रदेश शासन के तरफ से निर्देश नहीं मिलने की वजह से पुलिस 1 सितंबर से नए एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं करेगी, जबकि केंद्र सरकार संशोधित एक्ट को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है।

कमिश्नर ने मुझे लाठी से मारा, गालियाँ दी: दफ्तर से TMC गुंडों को हटाने गए BJP सांसद का दावा

पश्चिम बंगाल में भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने तृणमूल कॉन्ग्रेस और पुलिस पर साँठगाँठ का आरोप लगाया है। भाजपा सांसद कार्यकर्ताओं के साथ विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे, तभी तृणमूल के गुंडों ने उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की। सिंह बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस कमिश्नर ने उनके सिर पर लाठी से वार किया। उन्होंने बंगाल पुलिस द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया।

अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि बैरकपुर के पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा ने उनके सिर पर लाठी से मारा और गालियाँ दी। सिंह ने कहा कि उनके आवास पर भी पुलिस और तृणमूल कार्यकर्ताओं ने हमला किया। उन्होंने बताया कि उनके सिर में 12 टाँके लगे हैं। स्थानीय अस्पताल में इलाज करा कर बाहर निकले सांसद ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए अपनी व्यथा सुनाई।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री और वरिष्ठ तृणमूल नेता ज्योतिप्रिया मालिक ने सांसद अर्जुन सिंह पर झूठ का रोना रोने का आरोप लगाते हुए पुलिस कमिश्नर का बचाव किया। मलिक ने कहा कि कमिश्नर वर्मा उस स्थान पर मौजूद ही नहीं थे, जहाँ सांसद सिंह प्रदर्शन कर रहे थे। मलिक ने कहा कि अर्जुन सिंह झूठे हैं और उनके आरोप आधारहीन हैं।

विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा सांसद को सूचना मिली कि पार्टी के श्यामनगर स्थित दफ्तर को तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने अपने कब्जे में ले लिया है। वह तुरंत वहाँ के लिए निकल पड़े। भाजपा के कार्यकर्ता जब वहाँ पहुँचे थे उन्होंने देखा कि तृणमूल के गुंडों ने न सिर्फ़ भाजपा दफ्तर पर अपनी पार्टी का झंडा लगा रखा था, बल्कि सीएम ममता की फोटो भी टाँग रखी थी। भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी के फोटो और तृणमूल के अन्य साजो-सामान वहाँ से हटाना शुरू कर दिया।

इसके बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने सांसद की गाड़ी में तोड़फोड़ की और उन पर हमला कर दिया। सांसद ने कहा कि अगर हमले नहीं रुके तो तृणमूल के लोगों के साथ ही ऐसा ही सलूक किया जाएगा। उन्होंने बंगाल में सिविल वार की आशंका जताई। वहीं, दूसरी तरफ़ ज्योतिप्रिया मलिक ने दावा किया कि भाजपा ने भंगवा रंग से पेंट कर-कर के उनके 180 दफ्तर हथिया लिए हैं, जिन्हें वापस छीन लिया जाएगा।

पश्चिम बंगाल के मंत्री ने याद दिलाया कि ऐसे ही भाजपा के एक दफ्तर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ख़ुद कब्ज़ा किया था। इसी तरह तृणमूल के बाकी नेता भी भाजपा दफ्तरों पर कब्ज़ा करेंगे। फिलहाल घटनास्थल पर पुलिस कैम्प कर रही है।

श्रीराम हमारे भी पूर्वज: मुस्लिम महिलाओं ने राम मंदिर के लिए किया हवन, 125 करोड़ राम नाम जाप

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अब मुस्लिम समुदाय के लोग भी सामने आने लगे हैं। संत परमहंस दास के नेतृत्व में न सिर्फ़ हिन्दुओं ने बल्कि मुस्लिम मंच की महिलाओं ने भी राम नाम जाप में हिस्सा लिया। मुस्लिमों ने हवन में भी हिस्सा लेकर राम मंदिर निर्माण का संकल्प जताया। तपस्वी छावनी के स्वामी परमहंस दास, हाजी सईद और बबलू खान की अगुवाई में मुस्लिम मंच के सदस्यों, ख़ासकर महिलाओं ने सवा सौ करोड़ राम नाम जाप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए।

ज्ञात हो कि हाल ही में शिया बोर्ड ने कहा था कि राम मंदिर वाली ज़मीन हिन्दुओं को दे देनी चाहिए। शिया वक्फ बोर्ड ने खुल कर हिन्दू पक्ष का समर्थन किया था। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड पर आरोप लगाते हुए शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि उन्होंने उनके सारे दस्तावेज जब्त कर रखे थे, जिस कारण उन्हें अदालत का रुख करने में इतना ज्यादा समय लग गया।

स्वामी परमहंस ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए हवन का आयोजन किया गया था। वहाँ उपस्थित मुस्लिमों ने कहा कि श्रीराम उनके भी पूर्वज हैं और वे अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण में हिस्सा लेना चाहते हैं। हवन में हिस्सा ले रहे मुस्लिमों ने साफ़ कर दिया कि अयोध्या श्रीराम की भूमि है।

मुस्लिम मंच ने कहा कि विवादित स्थल पर नमाज नहीं पढ़ी जा सकती, इसीलिए वह मस्जिद नहीं है। महंत दास ने कहा कि राम नाम के जाप से बड़ी से बड़ी बाधाएँ दूर हो जाती हैं। ज्ञात हो कि राम मंदिर मामले की अभी सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही है।

कश्मीर की इन लड़कियों का भारतीय सेना ने रेप कर मार डाला? #SaveKashmir की सच्चाई

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्क्रीय करने के बाद से सोशल मीडिया पर लगातार कुछ ऐसे प्रोपेगेंडा चलाए जा रहे हैं, जिनके द्वारा यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि इसे हटाने के बाद कश्मीर में लोगों पर बहुत जुर्म किए जा रहे हैं।

इस मामले में JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद को सीधे भारतीय सेना फटकार भी लगा चुकी है कि वो झूठे आरोपों के आधार पर आर्मी की छवि ख़राब करने का काम ना करे। इस पूरे प्रकरण में शेहला ही एकमात्र चेहरा नहीं है, जो कि भ्रम और अफवाहों के जरिए घाटी का माहौल बिगाड़ने के प्रपंचों में लिप्त है बल्कि BBC जैसे मीडिया गिरोह भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

इसी तरह से सोशल मीडिया पर एक तस्वीर दिखाई जा रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि इन दो महिलाओं को भारतीय सेना ने बलात्कार करने के बाद मार दिया। अगस्त 30, 2019 को Twitter पर मोहम्मद हसन रजा ने यह तस्वीर #SaveKashmir हैशटैग के साथ ट्वीट की है।

क्या है सच्चाई?

इस तस्वीर को Google करने पर सर्च रिजल्ट से पता चलता है कि इस फोटो को सबसे पहले 2016 में Popular Acdmi SuKkur नाम के एक पेज ने फेसबुक पर पोस्ट किया था। साथ में कैप्शन दिया गया था- “यह तस्वीर कश्मीर की। है इन दो लड़कियों को भारतीय सेना ने बलात्कार के बाद मार दिया था।”

इसी तस्वीर को thevoiceofuk.com वेबसाइट ने भी 10 अगस्त 2019 को खबर बनाकर पब्लिश किया था, जिसमें हेडलाइन थी- “Thousands of Kashmiri people including women,children and elderly persons protested against New Delhi’s action of abrogating special status of the occupied territory.”

यानी, “महिला, बच्चे, बुजुर्गों को मिलाकर हजारों कश्मीरी लोग ने ऑक्युपाइड क्षेत्र से विशेष राज्य का दर्जा हटाने के नई दिल्ली के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया।” इस फर्जी खबर में अलग-अलग फर्जी तस्वीरों को कश्मीर में हो रहे अत्याचार बताकर दिखाया गया है।

इस तस्वीर की जाँच करने पर आगे पता चलता है कि यह तस्वीर Orlibonurb नाम के यूट्यूब चैनल द्वारा मई 31, 2010 को पब्लिश किए गए एक वीडियो में इस्तेमाल किया गया थंबनेल है। इस वीडियो में यह थंबनेल 1.56 सेकंड पर देखा जा सकता है।

तस्वीर का सच-

यह तस्वीर चीन की एक वेबसाइट ने 2008 में शेयर की थी। इसके विवरण में बताया गया है कि यह तस्वीर एक भारतीय फोटोग्राफर रफ़ीक़ मार्कबूलर (Rafik Markbuler) द्वारा जनवरी 4, 2007 में खींची गई थी।

बताया गया है कि इस तस्वीर को ‘वॉर एंड डिजास्टर’ (युद्ध और आपदा) खबरों के लिए कांस्य पदक भी मिल चुका है। यह तस्वीर एक पुलिस की गाड़ी में बैठी कश्मीरी पत्थरबाजों द्वारा घायल मुस्लिम महिला को दिखाती है।

यह स्पष्ट है कि यह तस्वीर घाटी में अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के बाद के कश्मीर की नहीं है। इस महिला को भारतीय सेना द्वारा रेप करने के बाद मार दिए जाने का आरोप झूठ है, जबकि हकीकत में यह पुरानी तस्वीर कश्मीरी पत्थरबाजों द्वारा घायल की गई महिला की है।

कश्मीर के नाम पर इसी तरह की कई फर्जी ख़बरों और तस्वीरों के जरिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का काम जा रहा है। इस मामले में पाकिस्तानी मीडिया और कुछ भारतीय लेफ्ट लिबरल वर्ग लोगों को गुमराह करने के लगातार प्रयास कर रहा है। जिसके कुछ उदाहरण ये ट्वीट और तस्वीरें हैं –