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रविदास मंदिर हिंसा: भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर समेत 96 न्यायिक हिरासत में भेजे गए

दिल्ली के तुगलकाबाद रविदास मंदिर ध्वंस मामले में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर समेत 96 लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इन सभी पर दंगा भड़काने और हिंसा आदि का मुकदमा दर्ज किया गया है। बुधवार (21 अगस्त) को एक घंटे तक चली भीड़ की हिंसा को काबू करने के लिए पुलिस को आँसू गैस का प्रयोग करना पड़ा था। उसके पहले एक घंटे तक भीड़ ने कई बाइकों को आग के हवाले कर दिया था और गाड़ियों को भी क्षतिग्रस्त किया था।

‘हम हिंसा में विश्वास नहीं करते’

एक ओर पुलिस का दावा है कि इस हिंसा में 90 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, और दूसरी ओर आरोपित चंद्रशेखर का कहना है कि वह अंबेडकर के संविधान को मानते हैं और हिंसा में विश्वास नहीं करते। यह उन्हें फँसाने की साजिश है। कल भड़की हिंसा के बाद आज (22 अगस्त, 2019 को) पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया है। दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भी तैनात किया गया है

थाने में ही लगी अदालत

आरोपितों की बड़ी संख्या को देखते हुए दिल्ली के कालकाजी थाने को ही अदालत में तब्दील कर दिया गया। साकेत अदालत से थाने आए जज के सामने 96 लोगों की पेशी हुई। जज साहब ने सभी की 14 दिन की न्यायिक हिरासत पुलिस को सौंप दी। गिरफ्तार लोगों में अधिकाँश हरियाणा के बताए जा रहे हैं, और एक बड़ी संख्या पंजाब के लोगों की होने की बात भी मीडिया में कही गई है

‘कोर्ट रूम इतने छोटे हैं, मुझे लगा यहाँ कोर्ट कॉम्प्लेक्स में हमारे पास बेहतर कोर्ट रूम होंगे’- चिदंबरम

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम उस समय आश्चर्य में पड़ गए जब उन्हें आज नई दिल्ली के रोसे एवेन्यू कॉम्प्लेक्स में विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष पेश किया गया। चिदंबरम ने सीबीआई अधिकारियों के साथ बातचीत में, आश्चर्य व्यक्त किया कि नए परिसर में कोर्ट रूम बहुत छोटे थे।

चिदंबरम ने सीबीआई कोर्ट में उन्हें पेश करने वाले अधिकारियों से कहा, “कोर्ट रूम इतने छोटे हैं। मुझे लगा कि यहाँ नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स में अब हमारे पास बेहतर कोर्ट रूम होंगे।”

जाम से भरे कोर्ट रूम में, सीबीआई अधिकारियों ने उन्हें बताया कि राउज एवेन्यू कॉम्प्लेक्स में कोर्ट रूम छोटे हैं। अधिकारियों ने उन्हें बताया, “यह सभी बड़े मामलों की एक समस्या है। कोयला घोटाला मामले में, सभी अभियुक्तों को अदालत कक्ष के अंदर फिट करना असंभव है।”

राउज़ एवेन्यू कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन इस साल अप्रैल में किया गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि दिल्ली में विशेष न्यायाधीश, सीबीआई, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा और श्रम अदालत के सभी न्यायालय राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर से कार्य करेंगे।

INX मीडिया मामले के सिलसिले में 24 घंटे से अधिक समय तक छिपने के बाद चिदंबरम को सीबीआई ने बुधवार (21 अगस्त) रात गिरफ़्तार किया। मामला 2007 में INX मीडिया में विदेशी निवेश की अनुमति देने के फ़ैसले से संबंधित है।

दरअसल, CBI के अनुसार मार्च 2007 में INX मीडिया द्वारा विदेशी निवेश के लिए संवर्धन बोर्ड (FIPB) से अवैध तरीके से स्वीकृति प्राप्त की थी। INX मीडिया को शेयर जारी कर 46 फीसद इक्विटी जुटाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस मामले में इद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी को भी आरोपी बनाया गया था।

इंद्राणी मुखर्जी ने जाँच के दौरान CBI और ED को बताया कि FIPB स्वीकृति में हुए उल्लंघन को निपटाने के लिए तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने 10 लाख डॉलर की रिश्वत माँगी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था।

भारत से बात का फायदा नहीं, जब दो परमाणु संपन्न देश आमने-सामने होंगे तो कुछ भी हो सकता हैं: इमरान खान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार (अगस्त 22,2019) को एक विदेशी अखबार से बातचीत के दौरान भारत को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने अखबार को बताया कि अब वह भारत से बातचीत की अपील नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से परमाणु युद्ध की धमकी दी।

विदेशी अखबार से बात करते हुए पाक पीएम ने भारत के कड़े रुख पर शिकायत करते हुए कहा कि उन्होंने भारत से बार-बार बातचीत के लिए अनुरोध किया लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे नजरअंदाज कर दिया। उनके मुताबिक अब उनका भारतीय अधिकारियों से बात करने का कोई औचित्य नहीं रह गया। क्योंकि अब तक उनके सभी प्रयास असफल साबित हुए हैं।

उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत के दौरान कहा, “अब उनसे (भारत) बात करने का कोई फायदा नहीं है। मैंने बातचीत करने की सारी कोशिशें कर लीं। दुर्भाग्य है कि अब जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि मेरी शांति और बातचीत की सारी कोशिशों को उन्होंने तुष्टीकरण के तौर पर लिया।”

गौरतलब है कि पठानकोट पर हुए हमले के बाद भारत अपना पक्ष साफ कर चुका है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करता तब तक भारत की उससे कोई बातचीत नहीं होगी। हालाँकि, इस हमले के बाद पाक पीएम इमरान अलग-अलग समयों पर बातचीत की अपील कर चुके हैं।

लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी का आतंकवाद के खिलाफ़ सख्त रुख देखते हुए पाक पीएम ने उन्हें फासीवादी और हिंदूवादी करार दिया है। साथ ही उनपर आरोप लगाया है कि वह कश्मीर में मुस्लिम बहुल आबादी का सफाया करके उसे हिंदू बहुल इलाके में बदलना चाहते हैं।

इमरान खान का मानना है कि भारत कश्मीर में प्रोपेगेंडा फैलाते हुए फर्जी ऑपरेशन भी चला सकता है, जिससे कि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई करने के लिए आधार मिल सके।

अपनी बात में आगे जोड़ते हुए इमरान कहते हैं कि अगर युद्ध की ऐसी स्थिति आती है तो पाकिस्तान जवाब देने के मजबूर होगा। वे कहते हैं कि जब दो परमाणु शक्ति संपन्न आमने-सामने होंगी तो कुछ भी हो सकता हैं। उन्होंने दोनों देशों के परमाणु शक्ति से संपन्न होने का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया को इस पर ध्यान देना चाहिए कि हम किन हालातों का सामना कर रहे हैं।

भारतीय क्रिकेटरों को जान से मारने की धमकी, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भेजा Email

महाराष्ट्र के एंटी टेररिज्म स्कवॉड (ATS) ने भारतीय क्रिकेटरों को मारने की धमकी देने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। इस शख्स पर आरोप है कि इसने एक ईमेल भेजा था। इस मेल में उसने भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों को मारने की धमकी दी थी।

आरोपित ने ये मेल 16 अगस्त को भेजा था। जिसके बाद बीसीसीआई ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही एटीएस की टीम ने इस मामले की जाँच शुरू की। इस मामले में साइबर विशेषज्ञों की भी सहायता ली गई। कुछ दिन में पता चल गया कि आरोपित असम के मोरीगाँव के शांतिपुर-सहारनपुर इलाके का निवासी है। उसका नाम ब्रज मोहन दास है।

मूल जानकारी हाथ लगने के बाद एटीएस की टीम असम के लिए रवाना हुई और उसे उसके निवास स्थान से गिरफ्तार किया। आज आरोपित की पेशी कोर्ट में हुई, जहाँ कोर्ट ने उसे 26 अगस्त तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

उल्लेखनीय है कि इन दिनों भारत की टीम विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के तहत वेस्टइंडीज दौरे पर है। जिसके मद्देनजर खबर आई थी कि टीम को वहाँ खतरा है। हालाँकि बाद में सूचना फर्जी पाई गई थी, लेकिन फिर भी सुरक्षा के लिहाज से उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई।

उस समय ये धमकी सीधे तौर पर भारतीय टीम को न मिलकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को ईमेल के जरिए मिली थी, जहाँ भारतीय टीम पर हमला होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद ये मेल पाक क्रिकेट बोर्ड ने बीसीसीआई को भेजा था और फिर इसकी सूचना गृह मंत्रालय को दी गई थी। बाद में आईसीसी और वेस्ट इंडीज क्रिकेट बोर्ड ने खबर को अफवाह बताया था। साथ ही बीसीसीआई ने भी इन खबरों का खंडन किया था और आश्वासन दिया था कि भारतीय टीम को कोई खतरा नहीं है।

अरविन्द केजरीवाल के बस एक ट्वीट से हुई CBI स्वतन्त्र और चिदंबरम जेल के अंदर

सीबीआई द्वारा कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी राजनीतिक दलों से लेकर कुछ मीडिया चैनल्स CBI पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। किसी भी राजनीतिक चेहरे का घोटालों और जाँच में नाम आते ही अक्सर यह चर्चा जोर पकड़ लेती है। कुछ राजनीतिक दल CBI के रोल पर सवाल उठाते आए हैं और आरोप लगाए जाते हैं कि इसका इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जाता है।

लेकिन एक शख़्स ने चिदंबरम की गिरफ्तारी के साथ ही CBI के राजनीति के चंगुल से मुक्त होने की भविष्यवाणी 2013 में ही कर दी थी और ये भविष्यवाणी किसी और ने नहीं बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने की थी। अरविन्द केजरीवाल ने 2013 में यह बात तब एक ट्वीट के जरिए कही थी जब केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार हुआ करती थी।

उस समय अरविन्द केजरीवाल कॉन्ग्रेस सरकार के भ्रष्टाचारों को बेनकाब करने के दावों के आधार पर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहे थे। अरविन्द केजरीवाल ने कॉन्ग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं- सलमान खुर्शीद, कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप लगाते हुए कहा था कि जिस दिन CBI स्वतंत्र हो जाएगी, ये तीनों और इनकी पत्नियाँ भी जेल के भीतर होंगे।

कल शाम पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल से लोग सोशल मीडिया पर सवाल करते रहे कि क्या उन्हें चिदंबरम की गिरफ्तारी और CBI की स्वतन्त्रता पर अब मोदी सरकार को बधाई नहीं देनी चाहिए? हालाँकि, अरविन्द केजरीवाल इस मामले पर अभी तक खामोश ही हैं।

इसी बात पर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट किया और लिखा, “इतना सन्नाटा क्यों है अरविंद केजरीवाल, कोई सदमा लगा है क्या? इसी चिदंबरम के घर के सामने अन्ना आंदोलन में लोगों ने लाठियाँ खाई थीं। भ्रष्टाचारियों की सूची में चिदंबरम का नाम सबसे ऊपर था। आज लालू, वाड्रा सब शिकंजे में हैं। बधाई तो दे दो मोदी जी को, फेविकोल काहे पीकर बैठे हो?”

केजरीवाल के पुराने साथी रहे प्रशांत भूषण का भी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर दोहरा रवैया सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण पूर्व में कई बार पी चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर चुके हैं, लेकिन जब वह गिरफ्तार हो गए तो इस गिरफ्तारी को असंवैधानिक और जाँच एजेंसियों की बदले की कार्रवाई बता रहे हैं।

कोर्ट में काम न आईं सिब्बल की दलीलें, CBI को मिली 26 अगस्त तक की कस्टडी

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को आज गुरुवार (अगस्त 22, 2019) को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया। सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया केस में पी चिदंबरम को 5 दिन के लिए कस्टडी में लेने की माँग की थी। सीबीआई ने अदालत में कहा कि कई ऐसे डाक्यूमेंट्स और जानकारियाँ हैं, जो चिदंबरम को कस्टडी में लेकर पूछताछ करने के बाद ही निकल सकती हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पी चिदंबरम जाँच व पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं, वह जवाब ही नहीं दे रहे हैं।

INX मीडिया मामले में पी. चिदंबरम को कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने पी. चिदंबरम को 5 दिन की CBI रिमांड में भेज दिया है। इसके साथ ही अब 26 अगस्त तक पी. चिदंबरम सीबीआई की हिरासत में रहेंगे। वहीं परिवार के लोग हर रोज आधे घंटे के लिए पी. चिदंबरम से मुलाकात कर सकते हैं।

इससे पहले हुई मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे कार्ति के चार्टर्ड अकाउंटेंट भास्कर रमन की हुई थी, जो अभी जमानत पर जेल से बाहर हैं। सिब्बल ने कहा कि उसके अलावा मामले के अन्य आरोपी पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी को भी जमानत मिल चुकी है लेकिन अन्य मामले में वे जेल में हैं।

सिब्बल ने कहा कि जमानत प्रदान करना एक नियम है और अदालत के समक्ष मुद्दा व्यक्तिगत स्वतंत्रता का है। पूछताछ के लिए चिदंबरम को 5 दिनों की हिरासत में सौंपे जाने की सीबीआई के माँग का विरोध करते हुए उन्होंने यह दलील दी थी।

सुनवाई के दौरान मेहता ने दिल्ली हाईकोर्ट का जजमेंट पढ़ा, जिसमें लिखा है कि आईएनएक्स मीडिया केस मनी लॉन्ड्रिंग का एक क्लासिक उदाहरण है। इस जजमेंट को जस्टिस सुनील गौड़ ने लिखा था, जिन्होंने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज की थी। मेहता ने अदालत को बताया कि इस मामले में आरोपित का गंभीर और सक्रिय किरदार रहा है। सीबीआई को इस पूरे लेनदेन की जड़ तक पहुँचना है। मेहता ने जज के सामने केस की डायरी पेश की।

बता दें कि चिदंबरम पर वित्त मंत्री रहते आईएनएक्स मीडिया को एफआईपीबी से स्वीकृति दिलवाने के बदले रिश्वत लेने का आरोप है। उनके वकील कपिल सिब्बल ने अपनी दलील पेश करते हुए अदालत में कहा कि इस प्रक्रिया में भारत सरकार के 6 सचिव हिस्सा लेते हैं लेकिन किसी को भी गिरफ़्तार नहीं किया गया। सिब्बल ने इस बात पर आपत्ति जताई कि एफआईआर 10 वर्षों के बाद दर्ज किया गया। उन्होंने वादा किया कि जब भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा, पी चिदंबरम हाजिर हो जाएँगे।

सिब्बल ने दावा किया कि सीबीआई को जो सवाल चिदंबरम से पूछने थे, वह पूरी तरह से तैयार नहीं हैं और चिदंबरम ने हर सवाल का जवाब दिया है। सिब्बल ने ‘उस तरीके’ पर आपत्ति जताई, जिससे चिदंबरम के ख़िलाफ़ केस चला और उन्हें गिरफ़्तार किया गया। वहीं अभिषेक मनु सिंघवी की आपत्ति इस बात को लेकर थी कि 2018 में इन्द्राणी मुखर्जी का बयान रिकॉर्ड करने के 4 महीने बाद चिदंबरम को पूछताछ के लिए बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इन्द्राणी को अप्रूवर बना दिया गया है ताकि चिदंबरम को कस्टडी में लिया जा सके।

अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में कहा कि भारत सरकार के जिन 6 सचिवों ने एफआईपीबी अप्रूवल दिया, उनमें से एक आगे जाकर रिज़र्व बैंक का गवर्नर बना। सिंघवी ने एक सुप्रीम कोर्ट जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि कस्टडी की माँग तभी की जाती है जब जाँच एजेंसी को लगे कि कस्टडी में लिए बिना आगे की जाँच प्रक्रिया पूरी करनी असंभव है।

सुनवाई के दौरान आरोपित पी चिदंबरम इस बात पर अड़ गए कि उन्हें भी कुछ बोलना है। सीबीआई की आपत्ति के बाद सिंघवी ने एक जजमेंट पढ़ा, जिसके अनुसार आरोपित ख़ुद का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा की जाँच एजेंसी दिमाग वाले लोगों से डील कर रही है और ऐसे में इस केस की जड़ तक पहुँचना ज़रूरी है। हालाँकि, सिब्बल ने कहा कि वे नहीं चाहते कि चिदंबरम से पूछे जाने वाले सवाल सार्वजनिक हों, लेकिन वो सवालों की प्रमाणिकता की पुष्टि चाहते हैं।

फर्जी नारीवाद में मत फँसो लड़कियो, वरना प्रेम में सहमति से बना शारीरिक संबंध भी फर्जी बलात्कार ही लगेगा

बढ़ते समय में ‘स्पेस’ एक बहुत बड़ी माँग है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता से लेकर सार्वजनिक रूप से सहमति-असहमति दर्ज कराने के लिए हमें इसकी जरूरत पड़ती है। हमें अपनी बात कहनी होती है तो हम इसकी अपेक्षा करते हैं, हमें किसी की बात सुननी होती है तो हम इसे तलब करते हैं। बाहरी परिवेश से लेकर व्यक्तिगत जीवन तक हमें ‘स्पेस’ मिलना और ‘स्पेस’ देना ही हमारे भीतर सकारात्मक बदलाव लेकर आता है।

कल्पना करिए! आपसे अंजाने में हुई किसी गलती पर कोई आपसे झल्ला कर कहे “तुम इतनी बेवकूफों वाली हरकत कैसे कर सकते हो” या “तुमने ये किया भी कैसे” तो आपको कैसा लगेगा? और इसी परिस्थिति में कोई आपको समझते हुए कह दे, “ऐसा हो जाता है…कोई बात नहीं” तो कैसा लगेगा। एक ही स्थिति पर दो अलग ‘भाव’ और फर्क सिर्फ़ इतना कि आपकी गलती, आपकी भूल, आपके मत, आपके स्वभाव, आपके समाज और आपके परिवेश को सामने वाला स्पेस दे रहा है या नहीं। विपरीत परिस्थियों में भी मिला सही स्पेस आपको आगे बढ़ने के विकल्प देता है और इसकी गैर मौजूदगी सिर्फ़ अवसाद!!!

मुझे लगता है इस ‘स्पेस’ का अर्थ समझने की छोटे बच्चे से लेकर हर बड़े बुजुर्ग को जरूरत है। लेकिन जो सबसे ज्यादा इसके तलबगार हैं वो प्रेम संबंध में जकड़े प्रेमी-प्रेमिका हैं। जकड़े शब्द का इस्तेमाल मैं सोच-समझ कर रही रही हूँ। जिन्होंने अपने जीवन में प्रेम अनुभव किया है या जो अपने जीवन में किसी के प्रेम संबंधों के गवाह हैं, वो इस बात से सहमत रहेंगे। किसी व्यक्ति विशेष से हुआ प्यार हमें भावनाओं के प्रलोभ से ऊपर, उसमें जकड़ते जाने की ट्रेनिंग देता है। नतीजतन हम सामने वाले को अपनी निजी प्रॉपर्टी समझने लगते हैं। हम बिना उसकी व्यथा, मजबूरी, मानसिकता जाने उससे अपेक्षा करते हैं कि वो जो करे उसके मनमुताबिक हो। और जब ऐसा नहीं होता तो हम परेशान हो जाते हैं, घबराहट से भर उठते हैं, गुस्सा हमें खाने लगता है, हम चिड़चिड़े हो जाते हैं। और आखिर में कोई ऐसा कदम उठा लेते हैं जो न हमारे लिए सही होता है न किसी अन्य के लिए। अपने साथी और उसके फैसले को मात्र ‘स्पेस’ न देने के कारण हम खिन्नता के पात्र बन जाते हैं।

प्रेम संबंध के दौरान लड़के-लड़कियों के बीच ये बहुत बड़ा पेशोपेश होता है कि वो एक दूसरे से जुड़ते वक्त समाज से छिपकर स्वतंत्र रूप से फैसला लेते हैं लेकिन जब रिश्ता समाज के बीच पहुँचता है तो उन्हें कई तरह की बंदिशें और उलाहनाएँ झेलनी पड़ती हैं। इसके बावजूद हम क्या फैसला करते हैं और उस पर हमारा साथी क्या रिएक्ट करता है, उसे ही प्रेम में एक तरह से स्पेस देना और स्पेस मिलना कहा जाता है।

कल जब सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक फैसला आया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अगर कोई महिला भविष्य में शादी की सुनिश्चतता जाने बिना किसी शख्स के साथ लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाती है तो वह उस पर यह कहकर बलात्कार का आरोप नहीं लगा सकती कि उस आदमी ने उससे शादी का वादा किया था।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक उदाहरण है कि अब न्यायपालिका भी प्रेम संबंधों में जोड़ों से स्पेस की मौजूदगी की अपेक्षा कर रहा है। मसलन इस केस में एक सेल्स टैक्स की असिसटेंट कमिश्नर ने आरोप लगाया कि सीआरपीएफ कमांडेंट ने उसे झूठे वादे देकर बलात्कार किया। सही पढ़ा आपने, महिला अधिकारी ने अपनी शिकायत में पुरुष अधिकारी और एक लंबे समय तक रहे अपने प्रेमी पर बलात्कार का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी शिकायत में इस बात का जिक्र किया कि पुरुष अधिकारी ने झूठा वादा करके उसके साथ ये सब किया। लेकिन जब कोर्ट ने मामले में सारी दलीलें सुनीं तो उन्होंने फैसला किया कि 6 साल रिश्ते में रहने के बाद, अलग-अलग मौक़ों पर एक दूसरे के घर आने-जाने के बाद दोनों के बीच सहमति के रिश्ते थे। इसलिए बलात्कार का उनका आरोप खारिज किया जाता है।

साथ ही कोर्ट ने एक बहुत महत्तवपूर्ण बात कही, “झूठे वादे कर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने में और आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाने में फर्क है। झूठा वादा कर धोखा देना वह स्थिति है, जिसमें वादा करने वाले शख्स के मन में जुबान देते वक्त उसे निभाने की सिरे से कोई योजना ही न हो।”

कोर्ट ने महिला की शिकायत पर बारीकी से अध्य्यन करते हुए कहा कि 2008 में किया गया शादी का वादा 2016 में पूरा नहीं किया जा सका। सिर्फ इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता है कि शादी का वादा महज शारीरिक संबंध बनाने के लिए था। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला शिकायतकर्ता को भी इस बात का पता था कि शादी में कई किस्म की अड़चनें हैं। वह पूरी तरह से परिस्थितियों से अवगत थीं।

ये पूरा मामला प्रेम संबंध में सहमति-असहमति को स्पेस न दिए जाने के कारण कोर्ट में पहुँचा। लेकिन आखिरकार कोर्ट के फैसले ने प्रेम संबंध में जकड़े लोगों की उस भावना को चोट किया, जो अपने साथी की निजता खत्म करके उसको अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली वस्तु समझ लेते हैं। इस हालिया मामले में बलात्कार का आरोप मढ़ती हुई लड़की ने एक बार भी सोचने का प्रयास नहीं किया कि जो संबंध दोनों के बीच बने वो तब भी रहे जब लड़के ने शादी में असमर्थता दिखाते हुए अपनी मजबूरी उसके आगे रख दी। वो मजबूरी लड़की की जाति थी। जिसे लड़के का परिवार-समाज स्वीकारने को तैयार नहीं था, और लड़का अपने समाज की सोच के ख़िलाफ़ कदम उठाने के लिए तैयार नहीं था। लड़की चाहती तो उसे और उसके समाज को पिछड़ी सोच के लिए दुत्कार सकती थी, अपने तरीके से बहिष्कार कर सकती थी, घर में सबको सच्चाई बता सकती थी, उसके फैसले का और उसका विरोध कर सकती थी। लेकिन वो सीधे कोर्ट पहुँची और लड़के पर आरोप भी लगाया तो ये कि उसके प्रेमी ने उसका बलात्कार किया! क्या वाकई 6 साल के प्रेम संबंध में आपसी सहमति से आई करीबियाँ बलात्कार होती हैं? आप अपने स्तर पर सोचिए।

प्रेम के बाद अलग होना और प्रेम में दोषी होना, दो अलग बातें हैं। जिसे कोर्ट ने भी अपने फैसले के साथ स्पष्ट कर दिया। भारतीय संस्कृति के पटल पर नाक-साख, जाति-धर्म, माँ-बाप की इज्जत के नाम पर कितने जोड़े एक दूसरे से अलग हो जाते हैं, ये मुझे विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है। हम नजर घुमाकर भी देखें तो इन कुप्रथाओं और भ्रांतियों से ग्रसित समाज में ऐसे पीड़ित प्रेम संबंध मिल जाएँगे जो अपने अटूट प्रेम के बावजूद भी टूट गए और अलग-अलग साथी के साथ न सिर्फ अपना जीवन गुजार रहे हैं बल्कि मस्त भी हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उनमें से कोई एक अपनी कुंठा-गुस्सा-द्वेश निकालने के लिए संबंधों को बलात्कार बता दे।

फर्जी नारीवाद को दो पल के लिए कोने में रखकर एक बार इस बात पर गौर करिए कि हम कथित तौर पर महिला सुरक्षा और महिला अधिकारों के नाम पर क्या गंदगी फैला रहे हैं। हम अभिव्यक्ति की आजादी का प्रयोग कौन सी दिशा में कर रहे हैं? पूछिए एक बार खुद से क्या वाकई प्रेम में अलग होने के बाद आपसी संबंध बलात्कार हो जाते हैं? और अगर आपको इस सवाल का जवाब ‘हाँ’ दिखता है तो उस ‘भाई’ या उस ‘दोस्त’ या उस ‘रिश्तेदार’ के बारे में जरूर सोचिए, जिसे सामाजिक के दबाव में आकर अपने प्रेम को छोड़ना पड़ा, लेकिन फिर भी वो उसे भुलाने में असमर्थ रहा। अब ऐसे में क्या हो अगर उसकी प्रेमिका आकर उसे बलात्कारी बता जाए… शायद उस समय हमें उस लड़की से या पूरी लड़की जाति से नफरत हो जाएगी। एक आरोप एक लड़के की जिंदगी, एक पुरूष का भविष्य सब बर्बाद कर देती है। वो शादी का वादा करके मुकर जाने पर अपनी ओछी मानसिकता के लिए दोषी हो सकता है, वो समाजिक कुरीति बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकता है, लेकिन बलात्कार का आरोपी या दोषी बिल्कुल नहीं हो सकता।

ये बात सच है कि समाज में ऐसी घटनाएँ आए दिन घट रही हैं कि जहाँ पुरूष शादी का वादा करके एक महिला को भीतर तक छील जाते हैं, लेकिन इस बात से भी गुरेज नहीं किया जा सकता कि अब महिलाएँ अपनी कुंठा निकालने के लिए आपसी संबंधों को भी बलात्कार बता रही हैं। जिसमें दोषी न होते हुए एक पुरूष को जलालत झेलनी पड़ती है। इन्हीं सब कारणों से प्रेम संबंधों में स्पेस की जरूरत अत्यधिक है, ताकि हम अपने साथी को उसके स्वभाव, मनोभाव और उसकी हरकतों पर आँक सकें, न कि उस व्यक्तित्व के आधार पर जो ‘प्रेम की जकड़’ या ‘साथी की मंशा’ के दबाव के कारण बना। क्योंकि अगर ऐसा होगा तो सहमति से बनाया शारीरिक संबंध भी फर्जी बलात्कार ही लगेगा।

जयपुर में मुस्लिम भीड़ ने काँवड़ यत्रियों पर किया था हमला: तनाव के मद्देनज़र धारा-144 का विस्तार

हिंसक मुस्लिम भीड़ द्वारा जयपुर शहर में काँवड़ यत्रियों पर हुए हमले के एक सप्ताह बाद, शहर की पुलिस ने शुक्रवार, 23 अगस्त की मध्य रात्रि तक CRPF की धारा-144 का विस्तार करने का फ़ैसला किया है। पुलिस के सूत्रों ने कहा कि ताज़ा आँकड़े के अनुसार, पुलिस ने 149 लोगों को गिरफ़्तार किया है। इस मामले में अभी और गिरफ़्तारियाँ हो सकती हैं।

एडीजी अजय पाल लांबा ने बताया, “शहर में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध जारी रखा गया, ख़ासकर उस इलाक़े में जहाँ पिछले सप्ताह हिंसात्मक घटना हुई थी।”

2 दिन पहले, धारा-144 कार्यान्वयन को 21 अगस्त तक बढ़ा दिया गया था। जानकारी के अनुसार, प्रतिबंधों को अब दो और दिनों तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

जयपुर में 12 अगस्त को बकरीद के मौक़े पर जमकर बवाल हुए था। यह बवाल एक मामूली कहासुनी से शुरू हुआ था। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग जयपुर-दिल्ली रोड पर जमा हो गए और वाहनों पर जमकर पत्थरबाज़ी की। इस घटना में एक मुस्लिम भीड़ ने हरिद्वार जाने वाले काँवड़ियों को ले जा रही एक बस पर हमला किया था। घटना के दौरान 30 से अधिक काँवड़िए गंभीर रूप से घायल हो गए थे, वहीं क़रीब एक दर्जन से अधिक बसों को आग लगा दी गई थी।

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार द्वारा विधानसभा में मॉब-लिंचिंग के ख़िलाफ़ सख़्त विधेयक पारित किए जाने के एक सप्ताह बाद काँवड़ यत्रियों पर भड़की हिंसा सामने आई थी। राजस्थान के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता अशोक गहलोत मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ एक बिल लेकर आए थे, क्योंकि ऐसा महसूस किया गया था कि भारतीय दंड संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता में वर्तमान प्रावधान भीड़ की घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

‘शेहला बिन बुलाए चली आई, अब उसे खदेड़ तो नहीं सकते… लेकिन हमने उसे बोलने नहीं दिया’

आज गुरुवार (अगस्त 22, 2019) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लगा। मौक़ा था डीएमके द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन का, जिसमें जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने वाले केंद्र सरकार के निर्णय के ख़िलाफ़ विपक्षी एकजुटता दिखाई गई। इस विरोध प्रदर्शन में कॉन्ग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद और राजद नेता मनोज झा और सीपीएम नेता वृंदा करात सहित कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधि वहाँ उपस्थित रहे। लेकिन, एक नाम चौंकाने वाला था।

जेएनयू की पूर्व छात्र नेता और जम्मू कश्मीर में राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाली शेहला रशीद भी मंच पर उपस्थित थी। शेहला ने हाल ही में ट्विटर पर बिना सबूत जम कर अफवाह फैलाया था और भारतीय सेना के फटकार के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी गिरफ़्तारी की भी माँग की थी। शेहला रशीद का विपक्षी मंच पर आना कई प्रश्नचिह्न खड़े कर गया। जब डीएमके से इस बारे में पूछा गया तो पार्टी ने कहा कि शेहला के आने से समस्या नहीं होनी चाहिए क्योंकि वह जम्मू कश्मीर की एक राजनीतिक पार्टी का प्रतिनिधित्व करती हैं।

डीएमके नेता टीकेएस इलानगोवन ने कहा, “हाँ वो मंच पर थीं लेकिन देखा आपने, हमनें उन्हें बोलने नहीं दिया। हमनें जिन्हें आमंत्रित किया था, केवल उन्हें ही बोलने का मौक़ा दिया गया। बाकी लोग बैठ कर समर्थन कर सकते हैं।” डीएमके की नाराज़गी मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि जम्मू कश्मीर के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। शेहला रशीद के बारे में बात करते हुए डीएमके नेता ने कहा कि कुछ लोग बिना बुलाए आ गए हैं तो अब भगाया तो नहीं जा सकता न।

डीएमके नेता ने कहा कि सीपीआइ ने भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया लेकिन उसे भी नहीं बुलाया गया था। डीएमके नेता टीकेएस ने कहा कि पार्टी शेहला रशीद द्वारा ट्विटर पर दिए गए बयानों से कोई इत्तेफाक नहीं रखती और उससे उनकी कोई सहमति नहीं है। टाइम्स नाऊ से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर शेहला को बोलने की अनुमति दे दी जाती तो फिर सीपीआई को भी बोलने की अनुमति देनी पड़ती।

फोर्ब्स की रिपोर्ट में सबसे ज़्यादा कमाने वाले दुनिया के 5 एक्टर्स में अक्षय कुमार का नाम

फोर्ब्स मैगज़ीन ने 2019 में दुनिया के 10 सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले अभिनेताओं की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने जून 2018 में 65 मिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग 466 करोड़ रुपए) की कमाई के साथ चौथे स्थान पर क़ब्ज़ा कर लिया है।

इस लिस्ट में हॉलीवुड अभिनेता ड्वेन जॉनसन (Dwayne Johnson) शीर्ष स्थान पर हैं। ड्वेन जॉनसन को ही ‘द रॉक’ के नाम से भी जाना जाता है। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में उन्होंने 89.4 मिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग 640 करोड़ रुपए) की कमाई की।

मिशन मंगल की सफलता के आधार पर, अक्षय कुमार बॉलीवुड के एकमात्र ऐसे अभिनेता हैं, जिन्हें दुनिया के 10 सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले अभिनेताओं की लिस्ट में रखा गया है।

फोर्ब्स द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार, दुनिया में दूसरे सबसे अधिक कमाने वाले ऑस्ट्रेलियाई अभिनेता क्रिस हेम्सवर्थ हैं, जो मार्वल के सुपरहीरो यूनिवर्स के कई अभिनेताओं में से एक है। क्रिस हेम्सवर्थ (Christopher Hemsworth) की कमाई जून 2018 से जून 2019 के बीच 76.4 मिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग 547 करोड़ रुपए) है।

रॉबर्ट जॉन डॉनी जुनियर (Robert John Downey Jr.), जून 2018 और जून 2019 के दौरान 66 मिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग 473 करोड़ रुपए) की कमाई के साथ तीसरे स्थान पर हैं। जैकी चैन 58 मिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग 415 करोड़ रुपए) के साथ दुनिया में पाँचवें सबसे अधिक कमाने वाले अभिनेता हैं, जबकि छठे स्थान पर ब्रैडली कूपर और एडम सैंडलर ने 57 मिलियन अमरीकी डालर (लगभग 408 करोड़ रुपए) के साथ बने हुए हैं।

आठवें स्थान पर क्रिस इवांस (Chris Evans) हैं, जिनकी कमाई अमरीकी डॉलर 43.5 मिलियन (लगभग 311 करोड़ रुपए) है। पॉल रुड (Paul Rudd) 41 मिलियन डॉलर (लगभग 293 करोड़ रुपए) है, जो नौवें स्थान पर हैं। दसवें स्थान पर हैं विल स्मिथ (Will Smith), जिनकी कमाई 35 मिलियन डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपए) है।