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कश्मीरियों! पाकिस्तान पर भरोसा बंद करो, 72 साल से आपको धोखा दे रहा है: Pak नेता अल्ताफ हुसैन

मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने कश्मीर के लोगों से पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान सरकार के झाँसे में नहीं आने की अपील की है। उनका बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।

लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे हुसैन ने कहा, “ईश्वर की खातिर आप सभी से अपील करता हूँ कि पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान सरकार पर भरोसा करना बंद करें। दोनों पिछले 72 वर्षों से आपको धोखा दे रहे हैं और आज भी ऐसा ही चल रहा है। कुछ पाकिस्तानी सेना के लोग यह नारे लगा रहे हैं कि कश्मीर का पाकिस्तान में विलय कर देंगे और हम आजादी लेंगे, लेकिन आजादी का सही मतलब यह नहीं है। मैं हमेशा पाकिस्तान की कूटनीतिक और विदेशी मामलों की रणनीति पर मुखर रहा हूँ, क्योंकि पाकिस्तान हमेशा दिखाता रहा है कि उसने कश्मीर के लिए बहुत कुछ किया है।”

अल्ताफ ने कहा कि पाकिस्तान ने कश्मीर का समर्थन करने के लिए एक समिति भी बनाई, जिसके चेयरमैन ने कश्मीर मसले के नाम पर दुनिया भर में घूमकर विदेश यात्रा का आनंद लिया। इसके अलावा पाकिस्तान ने कश्मीर के मामले पर संयुक्त राष्ट्र में विशेष स्टाफ भी नियुक्त किया और अरबों खर्च करने के बावजूद कश्मीर के लिए कुछ हासिल नहीं कर पाया।

इतना ही नहीं, अल्ताफ ने पाकिस्तान पर तंज कसते हुए कुछ सवाल भी पूछे हैं। उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी सेना के दावे कहाँ गायब हो गए हैं? पाकिस्तानी सेना भारत से आजादी के लिए कश्मीर के लोगों को अपनी जंग में शामिल करने से क्यों हिचक रही है? पाकिस्तानी सेना कायरता क्यों दिखा रही है और अब तक कश्मीर स्वतंत्र क्यों नहीं हो पाया है? कश्मीरियों को अंत तक समर्थन देने के दावे आखिर कहाँ गायब हो गए हैं?”

इसके साथ ही उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ईश्वर बेहतर जानता है कि पाकिस्तानी सेना सैकड़ों मील दूर से क्या करेगी।

ड्राइवर और गाड़ी छोड़ भाग खड़े हुए पी चिदंबरम, फोन भी स्विच ऑफ, अंतिम लोकेशन लोधी रोड

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम गिरफ़्तारी से बचने के लिए कहाँ छिपे हुए हैं, किसी को नहीं पता। उनका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हो गया है। कुछ नई जानकारियाँ आई हैं, जिनके मुताबिक पी चिदंबरम ने मंगलवार (अगस्त 19, 2019) को सुप्रीम कोर्ट के प्रांगण से निकलने के बाद अपने ड्राइवर को भी साथ नहीं लिया। अर्थात, वह अपने ड्राइवर को छोड़ कर ही भाग खड़े हुए। उनके फोन का अंतिम लोकेशन लोधी रोड के आसपास पाया गया है।

जिस कार से वह सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे, उन्होंने वह गाड़ी भी वहीं छोड़ दी। इसका मतलब यह है कि राज्यसभा सांसद चिदंबरम अपनी आधिकारिक गाड़ी से यात्रा नहीं कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि वर्षों तक केंद्रीय मंत्री रहे नेता का इस तरह से क़ानून की नज़रों से छिपना शोभा नहीं देता।

प्रवर्तन निदेशालय ने चिदंबरम के ड्राइवर से पूछताछ की लेकिन उसे भी नहीं पता कि चिदंबरम कहाँ छिपे हुए हैं। चिदंबरम के वकीलों ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले को अर्जेन्ट सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है। फिलहाल सीजेआई गोगोई राम मंदिर मामले की सुनवाई में व्यस्त हैं। उधर ईडी ने चिदंबरम के ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है, जिसके बाद वह विदेश नहीं भाग पाएँगे।

लंदन में PAK के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद पर फेंके अंडे, पत्रकार से कैमरा छीनकर डिलीट किया वीडियो

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद पर लंदन में अंडे फेंके गए। पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने इस वाकये का वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है।

इसके मुताबिक पाकिस्तानी रेल मंत्री लंदन एक अवॉर्ड समारोह में गए थे। वहीं, एक व्यक्ति ने ने उनके ऊपर अंडा फेंक दिया।

घटना 18 अगस्त की बताई जा रही है। साथ ही कहा जा रहा है कि जिस व्यक्ति ने उनपर अंडा फेंका वो कश्मीरी कार्यकर्ता था।

जानकारी के मुताबिक रशीद अहमद पर अंडा फेंकने के लिए वह कार्यक्रम स्थल के बाहर उनका इंतजार कर रहा था। जैसे ही वे पहुँचे उस व्यक्ति ने उनपर अंडा फेंक दिया। इसके बाद उसे पकड़ने की बहुत कोशिश की गई लेकिन वो किसी तरह वहाँ से भागने में सफल रहा।

दूसरे वीडियो में देखा जा सकता है कि जिस जगह पाकिस्तानी मंत्री पर हमला हुआ वहाँ अंडे फूटे पड़े हैं। अभी तक इस व्यक्ति की सही पहचान नहीं हो पाई है। न ही मालूम चला है कि पाकिस्तानी मंत्री पर इस तरह अंडा फेंकने के पीछे उसका क्या उद्देश्य था।

ट्विटर पर एक यूजर अहमद वकास गोराया ने बताया है कि इस पूरी घटना की वीडियो एक पत्रकार ने अपने कैमरे में कैद किया था। लेकिन पाक मंत्री के दोस्त ने उसका फोन छीन वीडियो डिलीट कर दी।

अब ये शख्स ट्विटर पर सवाल कर रहा है कि क्या यूके की सरकार पाक मंत्री और उनके साथियों द्वारा पत्रकार पर हमले की जाँच कराएगी?

अहमद का कहना है कि जिस समय ये सब हुआ उस समय कार्यक्रम को संचालन करने वाले अनिल मुसरत के मेहमान वसीम बदामी और इकरार उल हसन भी वहाँ मौजूद थे, जिन्होंने ये सब देखा।

हमाम में अकेले नंगे नहीं हैं चिदंबरम, सोनिया और राहुल गॉंधी सहित कई नेताओं पर लटक रही तलवार

आईएनएक्स मीडिया केस में पी चिदंबरम गिरफ़्तारी से बचने के लिए छिप गए हैं, लेकिन सीबीआई उनके आवास पर डटी हुई है। चिदंबरम के ख़िलाफ़ एयरसेल-मैक्सिस केस में एक अलग मामला भी चल रहा है, जहाँ कई बार अदालत द्वारा उन्हें गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की जा चुकी है। लेकिन, चिदंबरम अकेले नहीं हैं। कॉन्ग्रेस के कई और बड़े नेताओं के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं।

यही कारण है कि जब से हाई कोर्ट ने चिदंबरम को राहत देने से इनकार किया है, कॉन्ग्रेस नेता केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर हो गए हैं। पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी ने तो चिदंबरम के तारीफों के पुल बाँधते हुए यहाँ तक कहा है कि सरकार उन्हें इसीलिए पकड़ना चाहती है क्योंकि वे सच बोलते हैं और सच्चाई मोदी सरकार को बर्दाश्त नहीं होती। उन्होंने चिदंबरम को देश के प्रति वफादार बताया।

जाहिर है कई नेताओं के फॅंसे होने के कारण सबको एक-दूसरे का समर्थन करने में ही भलाई नजर आ रही है।कल को दूसरों पर भी गिरफ़्तारी की तलवार लटक सकती है, इसलिए कॉन्ग्रेस नेता अभी से हंगामा खड़ा कर, राजनीतिक विरोधियों को फॅंसाने के आरोप बार-बार दोहराकर भ्रष्टाचार के मामलों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी सहित कई पूर्व केंद्रीय मंत्री के ख़िलाफ़ विभिन्न एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं। आइए ऐसे नेताओं पर एक नज़र डालते हैं।

सोनिया गाँधी – राहुल गाँधी

लगातार 2 दशक तक कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं सोनिया गाँधी की एक बार फिर पार्टी के शीर्ष पद पर वापसी हुई है। उनके बेटे राहुल गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। दोनों माँ-बेटे नेशनल हेराल्ड केस में आरोपित हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। दिसंबर 2015 में दिल्ली की एक अदालत ने दोनों को 50-50 हज़ार रुपए के पर्सनल बॉन्ड पर ज़मानत दी थी। सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा दर्ज कराए गए इस मामले में आरोप है कि यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (YIL) ने एसोसिएट जर्नल प्राइवेट लिमिटेड (AJL) का अधिग्रहण किया, जिसमें कई अनियमितताएँ बरती गईं।

वाईआईएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में सोनिया और राहुल भी शामिल हैं। स्वामी के शिकायत में कहा गया है कि वाईआईएल में सोनिया-राहुल की 76% हिस्सेदारी है और एजेएल को कॉन्ग्रेस पार्टी के फंड्स में से लोन दिए गए, जो ग़ैर-क़ानूनी है। कॉन्ग्रेस नेता मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा भी इस मामले में आरोपित हैं।

अशोक चव्हाण

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रह चुके अशोक चव्हाण आदर्श सोसायटी घोटाले में आरोपित हैं। राज्यपाल ने 2016 में चव्हाण के ख़िलाफ़ अभियोग चलाने के लिए सीबीआई को मंजूरी दे दी थी। 2012 में सीबीआई ने इस मामले में 10,000 पेज की चार्जशीट फाइल की थी। आदर्श सोसायटी में कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त जवानों के परिवारों के लिए फ्लैट्स का निर्माण कराया गया था।

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट ने कहा था कि सैनिकों के परिवारों की जगह तत्कालीन मुख्यमंत्री चव्हाण के रिश्तेदारों को अवैध रूप से फ्लैट्स दिए गए। इसी मामले में महाराष्ट्र के एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे भी आरोपित थे।

नवीन जिंदल

उद्योगपति नवीन जिंदल कॉन्ग्रेस पार्टी से 2 बार संसद रह चुके हैं। उनके ख़िलाफ़ कोयला घोटाले में आरोप तय किए जा चुके हैं। जिंदल पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और गलत दावे करने का मामला दर्ज है। उनकी कम्पनी ने मध्य प्रदेश कॉल ब्लॉक का आवंटन लेने के लिए कोयला मंत्रालय के सामने ग़लत तथ्य पेश किए थे। उन पर झारखण्ड अमरकोंडा कॉल ब्लॉक के आवंटन के मामले में एक अलग केस भी चल रहा है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया

ग्वालियर राजघराने से आने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के ख़िलाफ़ ज़मीन कब्जाने का मामला चल रहा है। उनके ख़िलाफ़ 2014 में मध्य प्रदेश इकनोमिक ऑफिस विंग ने जाँच शुरू की थी। जुलाई 2019 में अदालत ने पीआईएल पर उनसे जवाब माँगा था। जवाब न देने पर अदालत ने 10,000 रुपए का आर्थिक दंड दिया था। उन पर आरोप है कि उनके ट्रस्ट ने सरकारी संपत्ति बिल्डर को बेच दिए। ये जमीनें ग्वालियर के चेतकपुरी में स्थित है।

सिद्दारमैया

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ लोकायुक्त के पास एक-दो नहीं बल्कि 50 शिकायतें विचाराधीन पड़ी हुई हैं और इनमें से कई पर कार्रवाई कभी भी शुरू हो सकती है। ये अपने आप में एक यूनिक किस्म का मामला है, जहाँ लोकायुक्त के पास किसी मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ 50 शिकायतें पेंडिंग पड़ी हों। 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने कुछ चुनिंदा माइनिंग कंपनियों को फेवर किया

अशोक गहलोत

अशोक गहलोत के ख़िलाफ़ आरोप है कि उन्होंने पिछली बार मुख्यमंत्री रहते सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ऐसी कंपनियों का चयन किया, जिनके लिंक्स उनके परिवार के सदस्यों से थे। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते क़रीब 11,000 करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट्स अपने क़रीबी कंपनियों को दिए। कई कंपनियों ने अशोक गहलोत की बेटी व उनके दामाद को फ्लैट्स और महँगी गाड़ी समेत कई गिफ्ट भी दिए, जिसके बाद यह मामला प्रकाश में आया।

चिदंबरम के ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर जारी, देश छोड़ कर नहीं भाग सकेंगे

कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय ने लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है। वह विदेश नहीं भाग पाएँगे। उनकी अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद से अब तक सीबीआई की टीम कई बार उनके आवास पर जा चुकी है लेकिन चिदंबरम का कोई अता-पता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट से भी चिदंबरम को झटका मिला है। उनके वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जब तक अंतरिम जमानत पर सुनवाई ना हो जाए, चिदंबरम को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद जस्टिस रमन्ना की पीठ ने सीजेआई को मामला भेज दिया।

आईएनएक्स मीडिया केस में चिदंबरम की सरकारी एजेंसियाँ तलाश कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की कॉन्स्टीट्यूशन बेंच अभी अयोध्या मामले की सुनवाई में व्यस्त है, इसलिए चिदंबरम को तुरंत रहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।

बंगाल: ‘कट मनी’ वापस माँगने पर TMC के मोहम्मद बुलबुल ने 3 साथियों के साथ महिला से किया गैंगरेप

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में कट मनी वापस माँगने पर महिला के साथ गैंगरेप हुआ। आरोपित का नाम मोहम्मद बुलबुल आलम है। आलम तृणमूल कॉन्ग्रेस की स्थानीय पंचायत का सदस्य है। महिला की शिकायत के मुताबिक आलम के अलावा 3 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्जा किया गया है। इनकी पहचान जैदुल इस्लाम, जैनल अबेदिन और अफिदुल हक के रूप में हुई हैं।

घटना 14 अगस्त की है। लेकिन, मोयानगरी पुलिस थाने में इसकी शिकायत बीते सोमवार (अगस्त 19, 2019) को दर्ज हुई। पुलिस ने बताया कि अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। सभी आरोपित फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

जानकारी के मुताबिक मोहम्मद बुलबुल आलम ने कथित तौर पर महिला को गीतांजली आवास योजना के तहत घर देने का वादा किया था। जिसके लिए उसने महिला से 7 हजार की कट मनी भी ली थी। लेकिन महिला को न तो घर मिला और न ही पैसे। वो आलम पर पैसे वापस करने का दबाव बनाने लगी।

इसके कारण 14 अगस्त को आलम ने महिला को मिलने के लिए बुलाया और अपने तीन साथियों के साथ मिलकर उसके साथ बलात्कार किया। महिला को मुँह बंद रखने की धमकी भी दी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जलपाईगुड़ी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हमें शिकायत मिल चुकी है। हम मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही आरोपितों की तलाश भी की जा रही है।”

शशि थरूर ने पाकिस्तानी पत्रकार को लिखा ‘मेरी प्रियतम’…सुनंदा पुष्कर के शरीर पर चोट के 15 निशान

दिल्ली की रोज़ एवेन्यू अदालत में सुनंदा पुष्कर मामले की सुनवाई के दौरान शशि थरूर पर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए गए। बताया गया कि मौत के समय सुनंदा के शरीर पर मारपीट के छोटे-बड़े मिलाकर 15 निशान थे, जो कम से कम 12 घंटा और अधिक से अधिक 4 दिन पुराने थे।

सुनवाई के दौरान सुनंदा केस की जाँच में जुटी दिल्ली पुलिस की ओर से वकील अतुल श्रीवास्तव ने पूरे मामले में सबूतों का हवाला दिया। उन्होंने सुनंदा पुष्कर के साथ घरेलू हिंसा पर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने आशंका जताई कि हो सकता है वह समय-समय पर ऐसी हिंसा का शिकार होती रही हों।

वकील ने दावा किया कि मानसिक परेशानियों और शारीरिक हिंसा के कारण सुनंदा पुष्कर आत्महत्या करने पर मजबूर हुईं। इसलिए आत्महत्या के लिए उकसाने और घरेलू हिंसा करने के आरोप में कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के ख़िलाफ़ केस फाइल हो।

कोर्ट में सुनंदा पुष्कर की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए थरूर पर आरोप लगे, कि सुनंदा की मौत से 4 दिन पहले दोनों पति-पत्नी में लड़ाई हुई थी, जिसके कारण पुष्कर ने सुसाइड की। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि सुनंदा के साथ थरूर के व्यवहार और संबंध दोनों ठीक नहीं थे। अदालत में थरूर और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के बीच के संबंधों का भी जिक्र हुआ।

बताया गया कि कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के कथित तौर पर संबंध थे। दोनों एक-दूसरे को खत भेजते थे जिसमें प्यार भरी भाषा का इस्तेमाल होता था। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि शशि थरूर द्वारा तरार को लिखे पत्र में मेहर के नाम की जगह ‘मेरी प्रियतम’ कहकर संबोधित किया गया था। ये सब कुछ सुनंदा के लिए किसी प्रताड़ना से कम नहीं था।

इसके अलावा अभियोजन ने इस बात पर भी कोर्ट का ध्यान दिलवाया कि थरूर और सुनंदा दोनों की शादी को 3 साल 4 महीने हुए थे, दोनों की ये तीसरी शादी थी। ऐसे में पुष्कर की इस तरह असामान्य मौत संदिग्ध है।

उल्लेखनीय है कि 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के होटल लीला में 51 वर्षीय सुनंदा पुष्कर मृत मिली थीं। उनकी मौत के बाद से पुलिस ने थरूर के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 498-A और धारा -306 के तहत मामला दर्ज किया। फिलहाल वह जमानत पर हैं।

पहले नौकरी लो फिर डिग्री जुगाड़ो: मायावती ने गिफ्ट में दी नौकरियाँ, योगी ने दिए जाँच के आदेश

बसपा सुप्रीमो मायावती जब उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं तो नोएडा प्राधिकरण में योग्यता को नजरंदाज कर नियुक्तियॉं हुई। सिफारिशों के आधार पर उपहार में नौकरी दी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन भर्तियों की जाँच के आदेश दिए हैं। योगी सरकार ने यह कार्रवाई ग्रेटर नोएडा के विधायक धीरेंद्र सिंह द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में दाखिल की गई शिकायत के आधार पर की है।

बताया जाता है कि मायावती के शासनकाल में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों ने मैनेजर पद पर भर्ती के दौरान योग्यता को ताक पर रखते हुए नेताओं के टेलीफोनिक सिफारिश पर उम्मीदवारों का चयन किया था। जब इन उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया तो उनके पास एमबीए की डिग्री नहीं थी। बावजूद इसके उन्हें मैनेजर पद के लिए चुना गया और उन्हें सुझाव दिया गया कि मैनेजर का पदभार संभालने के बाद वो एमबीए में दाखिला ले और फिर डिग्री जमा करें।

इस घोटाले में वरिष्ठ आईएएस व राज्य के प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) के अधिकारी शामिल हैं। धीरेंद्र सिंह ने इस घोटाले को उजागर करते हुए न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस को बताया कि मैनेजर से लेकर चपरासी तक के पदों पर उम्मीदवारों का चयन करते समय नियमों और योग्यताओं को दरकिनार कर दिया गया था।

धीरेंद्र सिंह ने कहा कि ये घोटाला 2002 में शुरू हुआ और नेताओं के फोन पर भर्तियाँ की गईं। उस समय समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सरकारें जाँच पर चुप रहीं। धीरेंद्र सिंह का कहना है कि दो महीने पहले उन्होंने सीएम योगी को भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लिखा, जो घोटाले में शामिल थे।

इसके साथ ही धीरेंद्र सिंह ने नोएडा एक्सटेंशन में एक और गंभीर भ्रष्टाचार का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि मैनेजर के पद के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम पात्रता मानदंड एमबीए डिग्री धारक होना था। लेकिन, बिना एमबीए डिग्री वाले उम्मीदवारों को चयन किया गया। कई साल बाद चयनित उम्मीदवारों ने अपनी एमबीए की पढ़ाई पूरी की। विधायक ने कहा, “इसी तरह से श्रेणी-3 व श्रेणी-4 की नौकरियों में योग्यता स्तर को कम किया गया। 12वीं की बजाय 10वीं व 8वीं उत्तीर्ण उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियाँ उपहार के तौर पर दी गईं।”

यूपी कैडर के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के मुताबिक, 58 से ज्यादा इस तरह की भर्तियाँ प्रकाश में आईं। जाँच फाइलों में उलझी रही, इनसे पता चलता है कि नियमों की अनदेखी की गई और अयोग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया। अधिकारी ने खुलासा किया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारियों ने राजनेताओं के दबाव में काम किया।

2003 में जब मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री का पदभार संभाला, तो उन्होंने ग्रेटर नोएडा के सीईओ बृजेश कुमार को भर्ती घोटाला को लेकर एक जाँच शुरू करने को कहा। जानकारी के मुताबिक, बृजेश कुमार ने जाँच करने के बाद भर्तियों को रद्द करने की सिफारिश की, 2007 में मायावती फिर से मुख्यमंत्री बन गईं। आरोप है कि मायावती के निर्देश पर घोटाले की फाइल को बंद कर दिया गया। घोटाले में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मामले पर चुप्पी बनाए रखने की कोशिश की।

बाप ने कहा बेटे की मदद करो, बेटे ने माँगे $10 लाख: इन्द्राणी-पीटर के बयानों से बुरे फँसे चिदंबरम

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज किए जाने के बाद से उन पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक रही है और वे ‘फ़रार’ हैं। कल मंगलवार (अगस्त 19, 2019) देर रात सीबीआई की टीम उनके निवास पर पहुँची लेकिन वह नहीं मिले। आज सुबह से ही सीबीआई की टीम उनके घर पर डटी हुई है। चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने आईएनएक्स मीडिया को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) से ग़ैर-क़ानूनी स्वीकृति दिलाने के लिए रिश्वत ली। यह 2007 का मामला है जब वह देश के वित्त मंत्री थे

सीबीआई और ईडी, दोनों ही इस मामले की जाँच कर रहे हैं। क्या आपको पता है कि चिदंबरम के ख़िलाफ़ इस मामले की जाँच में पीटर मुखर्जी और इन्द्राणी मुखर्जी के बयानों का अहम योगदान है? मुखर्जी दम्पति आईएनएक्स मीडिया के प्रमोटर थे और फिलहाल जेल में बंद हैं। इन्द्राणी ने प्रवर्तन निदेशालय को दिए बयान में बताया कि फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड के पास आईएनएक्स मीडिया ने अर्जी भेजी थी और उसकी स्वीकृति दिलाने के लिए उन्होंने कम्पनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ चिदंबरम से उनके दफ्तर में मुलाक़ात की थी।

इस बातचीत में पीटर मुखर्जी भी शामिल थे। उन्होंने चिदंबरम को बताया कि आईएनएक्स मीडिया ने एफडीआई के लिए एफआईपीबी के पास अर्जी भेजी है। पीटर ने उस अर्जी की एक प्रति चिदंबरम को सौंपी। इसके बाद चिदंबरम ने जो कहा, वह जाँच एजेंसियों के लिए एक अहम कड़ी साबित हुई। चिदंबरम ने मुखर्जी दम्पति से कहा कि वह आईएनएक्स मीडिया को एफआईपीबी से मंजूरी दिला देंगे लेकिन बदले में उनलोगों को उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के व्यापार में मदद करनी होगी।

यह बयान चार्जशीट में भी शामिल हुआ और कोर्ट में इसे सबूत के रूप में भी पेश किया गया। इन्द्राणी मुखर्जी ने चिदंबरम को रिश्वत भी दी लेकिन इसकी रक़म कितनी थी, अभी इसका खुलासा नहीं हुआ है। इसके बाद 2008 में एफआईपीबी की मंजूरी में कुछ दिक्कतें आईं तो मुखर्जी दम्पति ने ‘उचित सलाह’ के लिए तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम से मुलाक़ात की। कार्ति ने मुखर्जी दम्पति से 10 लाख डॉलर रिश्वत के रूप में माँगे।

मार्च 2018 में कार्ति चिदंबरम को मुखर्जी दम्पति के सामने बिठा कर पूछताछ की गई थी। इस तरह पीटर-इन्द्राणी के बयानों से सीबीआई और ईडी को आईएनएक्स मीडिया केस में अहम जानकारियाँ मिलीं। पी चिदंबरम और उनके वकील अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। कॉन्ग्रेस इस पूरे प्रकरण को ‘बदले की राजनीति’ बता रही है।

आर्टिकल 370 पर फैसले के बाद कश्मीर में पहला Encounter, 1 आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर के बारामूला में मंगलवार (अगस्त 20, 2019) देर रात आतंकवादियों और सुरक्षा बल के बीच मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। एक एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) को भी अपनी जान गँवानी पड़ी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकियों के छिपे होने की खबर मिलते ही सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया। इसके बाद आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।

जवाबी कार्रवाई में जवानों ने एक आतंकी को मौक़े पर ढेर कर दिया। सीआरपीएफ और एसओजी की संयुक्त टीम ने पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।

बता दें आर्टिकल 370 के जम्मू-कश्मीर में निष्प्रभावी होने के बाद एनकाउंटर का यह पहला मामला है।