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तुगलकाबाद रविदास मंदिर पुनर्निमाण के लिए विरोध प्रदर्शन, 1 माह का वेतन देंगे BJP सांसद

दिल्ली के तुगलकाबाद में संत रविदास मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ आक्रोशित भीम आर्मी पार्टी के कार्यकर्ता बुधवार (अगस्त 21, 2019) को दिल्ली पहुँच कर जंतर-मंतर और रामलीला मैदान समेत कई जगहों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में रविदास मंदिर को हटाए जाने वाले उनके आदेशों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश न की जाए। साथ ही उन्होंने माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के साथ ही केजरीवाल सरकार में सामाजिक कल्‍याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और आम आदमी पार्टी AAP के कई विधायक भी श‍ामिल हैं। राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि दिल्‍ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने पुलिस की मौजूदगी में मंदिर को गिरा दिया और प्रतिमा को ले गए। हालाँकि, प्राधिकरण ने मंदिर शब्‍द का इस्‍तेमाल न करते हुए कहा कि उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्‍ट्रक्‍चर को हटाया।

वहीं, संत रविदास मंदिर के तोड़े जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद विजय गोयल का कहना है कि संत रविदास के मंदिर को दोबारा बनाया जाना चाहिए। सांसद ने इस मंदिर के निर्माण के लिए ‘गुरू रविदास जयंती समारोह समिति’ को अपनी एक महीने की सैलरी देने की भी बात कही है।

गौरतलब है कि, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों दिल्ली के तुगलकाबाद में गुरू रविदास की मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था जिसके बाद दिल्ली के साथ पंजाब में विरोध शुरू हो गया और फिर ऑल इंडिया आदि धर्म मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत सतविंदर हीरा और साधु समाज के प्रधान संत सरवण दास महाराज ने 13 अगस्त को बंद का एलान करते हुए कहा था कि इससे उनके समाज की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं, और प्रदर्शन करके वो अपने समाज के संगठित होने का अहसास करवाना चाहते हैं।

जिसके बाद मंगलवार (अगस्त 13, 2019) को पंजाब में रविदास समाज के लोगों ने राज्य बंद बुलाया था। इस दौरान एहतियात के तौर पर जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और गुरदासपुर के सारे शिक्षण संस्थानो को बंद कर दिया गया था।

72 साल बाद PAK में खुला 1000 वर्ष पुराना मंदिर, भारत से ले जाकर स्थापित किए जाएँगे देवी-देवता

पाकिस्तान के सियालकोट में 72 साल बाद करीब 1000 साल पुराना शिवाला तेजा सिंह मंदिर पूजा-पाठ के लिए खोल दिया गया है। विभाजन के दौरान इस मंदिर को बंद कर दिया गया था। पाकिस्तान के हिंदू लम्बे समय से इस मंदिर को खोलने की माँग कर रहे थे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बीते गुरुवार को इस मंदिर में हिंदू परंपरा के मुताबिक भव्य कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिन्दुओं की माँग को देखते हुए पाकिस्तान इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) ने इस मंदिर को खोलने का फैसला किया। मंदिर खुलने पर आयोजित समारोह में हिंदू सुधार सभा के अध्यक्ष अमरनाथ रंधावा, डॉ मुनव्वर चंद और पंडित काशी राम सहित कई हिंदू नेता मौजूद थे।

मंदिर खुलने के बाद इसके जीर्णोद्धार का काम जोरों पर है। इसके लिए ईटीपीबी ने पहली किस्त के तौर पर 50 लाख रुपए दिए हैं। मीडिया खबरों की मानें तो इस मंदिर में भारत से लाकर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित की जाएँगी। साथ ही यहाँ पर नियमित पूजा-पाठ करने के लिए एक पुजारी भी रखे जाएँगे। मंदिर में एक बावर्ची और एक सेवादार रखने की भी बात कही ज रही है।

मंदिर के ख़ुलने को लेकर श्राइन सचिव सैयद फराज अब्बास ने कहा है कि मंदिर को खोलने की माँग लंबे समय से हिंदू समुदाय द्वारा की जा रही थी। ऐसे में ईपीटीबी की पहल के बाद इमरान सरकार ने इसे फिर से खोलने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने बताया कि मंदिर में फर्श का काम शुरू हो गया है, सुरक्षा के लिए द्वार लगवाए जा रहे हैं। छोटी-मोटी रिपेयरिंग के बाद सफेदी का काम भी शुरू हो गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर के पुुननिर्माण के बाद पौराणिक शिवालय का दोबारा से मरम्मत करवाया जाएगा। इन सबको पूरा होने में कम से कम 2 से 3 महीने लगेंगे।

Article 370: SC पहुॅंचा कश्मीरी पंडितों का संगठन, कहा- फैसले से पहले हमारी भी सुन लीजिएगा

आर्टिकल 370 पर केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका के ख़िलाफ़ कश्मीरी पंडितों के एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर की है। रूट्स इन कश्मीर (RIK) की ओर से केविएट वकील बिमल रॉय ने दायर की है।

इसके माध्यम से शीर्ष अदालत से अपील की गई है कि उनका पक्ष सुने बिना आर्टिकल 370 पर लिए फैसला को चुनौती देने वाली याचिका पर किसी तरह का निर्देश जारी नहीं किया जाए।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के फैसले के ख़िलाफ़ 6 लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इन लोगों में पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक और रिटॉयर्ड मेजर अशोक मेहता शामिल थे। इनके अलावा मनमोहन सरकार में कश्मीर पर वार्ताकार रहीं राधा कुमार, जम्मू और कश्मीर कैडर से संबंधित पूर्व आईएएस अधिकारी हिंडल हैदर तैयबजी, पंजाब कैडर के पूर्व आईएएस अभिताभ पांडे के भी इस याचिका पर हस्ताक्षर थे।

कश्मीरी पंडितों के संगठन RIK का मानना है कि आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए के तहत एक मुस्लिम बहुल राज्य को मिले विशेष प्रावधान का जम्मू-कश्मीर को इस्लामिक स्टेट बनाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था। ये अनुच्छेद न केवल पंडितों की कश्मीर में वापसी में बाधा थे, बल्कि उन हजारों लोगों को न्याय दिलाने में भी बाधक थे, जो आतंकवाद का शिकार हुए हैं।

केविएट दायर करने वाले संगठन की मानें तो इन अनुच्छेदों के निष्प्रभावी होने से अब अल्पसंख्यकों, महिलाओं और वंचित समुदायों को नई व्यवस्था के अनुरूप बराबरी का अधिकार मिल पाएगा। साथ ही जम्मू-कश्मीर, भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और समृद्धि का हिस्सा बन पाएगा।

कश्मीरी पंडितों का यह संगठन अरसे से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के दुष्परिणामों को लेकर जागरुकता अभियान चला रहा था।

‘अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं, उनकी संपत्ति को न तो बेचा और न ही छीना जा सकता है’

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का आज (अगस्त 21, 2019) नौवां दिन है। 6 अगस्त से सर्वोच्च अदालत इस मामले की रोजाना सुनवाई कर रही है, जिसके तहत हफ्ते में 5 दिन मामला सुना जा रहा है। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने बुधवार (अगस्त 21, 2019) को अदालत में दलील देते हुए कहा कि अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं। वैद्यनाथन ने कहा कि राम मंदिर में विराजमान रामलला नाबालिग हैं। नाबालिग की संपत्ति को ना तो बेचा जा सकता है और ना ही छीना जा सकता है।

रामलला के वकील ने अदालत के सामने अपनी दलील रखते हुए कहा कि अगर थोड़ी देर को ये मान भी लिया जाए कि वहाँ कोई मंदिर नहीं, कोई देवता नहीं थे, फिर भी लोगों का विश्वास है कि राम जन्मभूमि पर ही श्रीराम का जन्म हुआ था। ऐसे में वहाँ पर मूर्ति रखना उस स्थान को पवित्रता प्रदान करता है। वैद्यनाथन ने कहा, “अगर जमीन हमारी है और किसी और के द्वारा गैरकानूनी तौर पर कोई ढाँचा खड़ा कर लिया जाता है, तो जमीन उनकी नहीं होगी। यदि वहाँ पर मंदिर था, लोग पूजा भी कर रहे थे तो उन्हें और कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है।”

उन्होंने कहा कि एक मंदिर हमेशा मंदिर ही रहता है, संपत्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। मूर्ति किसी की संपत्ति नहीं है, मूर्ति ही देवता हैं। वैद्यनाथन ने कोर्ट से राम जन्मस्थान को लेकर हजारों साल से लगातार चली आ रही हिंदू आस्था को महत्व देने का निवेदन किया।

गौरतलब है कि, इससे पहले, मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को रामलला के वकील ने अदालत में अपनी दलीलें रखते हुए  ASI की रिपोर्ट समेत कुछ साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए थे। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई में मिली चीजों का हवाला देते हुए दावा किया था कि मंदिर वहीं था, जहाँ मस्जिद बनाया गया। वैद्यनाथन ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में मगरमच्छ और कछुए का जिक्र किया गया है, जो मुस्लिम संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं।

प्रेस फ्रीडम का रोना रो रहे NDTV और रॉय दम्पति का काला चिट्ठा: शेयर्स की धोखाधड़ी से लेकर ICICI लोन तक

एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय देश छोड़ कर भागना चाह रहे थे लेकिन उन्हें एयरपोर्ट पर रोक लिया गया। एनडीटीवी ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ बताया। एनडीटीवी ने रॉय दम्पति के ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को एक झटके में फेक और प्रमाणरहित करार दिया। एनडीटीवी ने दावा किया कि रॉय दम्पति के ख़िलाफ़ कार्रवाई सरकार की धमकी है कि मीडिया संस्थाएँ उनकी तरफदारी करें वरना उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। जबकि, सच्चाई यह है कि रॉय दम्पति के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी और क़ानून का उल्लंघन के कई मामले चल रहे हैं और जाँच एजेंसियों ने उन्हें दोषी भी पाया है।

आईसीआईसीआई लोन फ्रॉड केस: कैसे क्या हुआ?

एनडीटीवी ने आर्थिक धोखाधड़ी भरे कारनामे 2004 से ही शुरू कर दिए थे, जब उसने ‘जनरल अटलांटिक पार्टनर्स इन्वेस्टमेंट (GA)’ के साथ करार किया। इस करार के दौरान एनडीटीवी ने ‘अंतरंग व्यापार का प्रतिषेध विनियम’ और ‘Substantial Acquisition of Shares and Takeovers विनियम’ का उल्लंघन किया। इसका पूरा विवरण आप यहाँ पढ़ सकते हैं। रॉय दम्पति ने GA से एनडीटीवी के शेयर्स 439 रुपए के भाव से वापस ख़रीदे, जब इसका मूल्य 400 रुपए चल रहा था।

इससे बाकि निवेशकों को भी मौक़ा मिल गया कि वे अपने-अपने शेयर्स इसी दाम पर बेच डालें, जिस मूल्य पर रॉय दम्पति ने उन्हें वापस ख़रीदा था। इसके बाद रॉय दम्पति ने एनडीटीवी के 14.99% शेयर्स गोल्डमैन सैक्स नामक कम्पनी को बेच कर फिर नियमों का उल्लंघन किया। इससे गोल्डमैन को एनडीटीवी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में अपना प्रतिनिधि भेजने का मौक़ा मिल गया। इस डील के बारे में न तो सम्बंधित अधिकारियों को कुछ बताया गया, न सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को सूचना दी गई और न ही निवेशों को भनक लगने दिया गया।

न एनडीटीवी और न ही गोल्डमैन ने इस बारे में किसी को कुछ बताया। इन शेयर्स को ओपन-मार्केट व्यापार के रूप में दिखाया गया, जबकि इन्हें पूर्व निर्धारित योजना के तहत बेचा और ख़रीदा गया था। नीचे गोल्डमैन सैक्स द्वारा नॉमिनेट किए गए डायरेक्टर का पत्र है, जो उसने एक निवेशक को जवाब देते हुए लिखा था।

एनडीटीवी के डायरेक्टर (गोल्डमैन सैक्स द्वारा नॉमिनेटेड) का निवेशक को लिखा गया पत्र

इस पत्र में उसने ख़ुद को गोल्डमैन सैक्स द्वारा निवेश किए गए निश्चित फंड का नॉमिनी बताया था। डायरेक्टर ने लिखा कि वह उन फंड्स का प्रबंधन संभालता है। 2016 में सेबी ने गोल्डमैन सैक्स से जुड़ी 2 संस्थाओं के ख़िलाफ़ जाँच शुरू की, जो इस डील का हिस्सा थे। प्रणय और राधिका रॉय ने 2 कंपनियों को कई लाख शेयर बेचे, जिनका मूल्य 400 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से 360 करोड़ रुपए होते। इसके बाद रॉय दम्पति ने शेयर्स वापस खरीदना चाहा लेकिन उनके पास फंड्स की कमी थी।

फंड्स की कमी पूरी करने के लिए रॉय दम्पति ने इंडिया बुल्स से 501 करोड़ रुपए का लोन लिया। इस लोन को चुकाने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से 375 करोड़ का लोन लिया गया। इस ट्रांज़ैक्शन के पीछे की सच्चाई जानने के लिए हमें उस एफआईआर की तह तक जाना होगा, जो रॉय दम्पति के ख़िलाफ़ जून 2017 में दर्ज की गई थी।

रॉय दम्पति के ख़िलाफ़ एफआईआर

इस एफआईआर में रॉय दम्पति के अलावा आरआरपीआर होल्डिंग नमक कम्पनी और आईसीआईसीआई के कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया था। आरआरपीआर होल्डिंग कम्पनी में रॉय दम्पति के अधिकतर शेयर्स हैं। इन सबके ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। इस एफआईआर में 403.85 करोड़ रुपयों की मनी लॉन्ड्रिंग समेत आईसीआईसीआई को हुए 48 करोड़ रुपए के नुकसान का भी जिक्र है, जो प्रणय-राधिका के कारण हुआ।

अगस्त 2009 में रॉय दम्पति ने एनडीटीवी के अपने शेयर्स को आरआरपीआर होल्डिंग्स को 4 रुपए प्रति शेयर की दर से बेच डाला जबकि शेयर्स का असली बाजार मूल्य उस समय 140 रुपए प्रति शेयर था। इसके बाद मार्च 2010 में जब शेयर्स का असली बाजार भाव उतना ही था, आरआरपीआर होल्डिंग ने 34.79 शेयर्स 4 रुपए प्रति शेयर की भाव से एनडीटीवी को वापस बेच डाला। आरआरपीआर होल्डिंग्स कम्पनी के संस्थापक रॉय दम्पति ही हैं। उन्होंने इंडिया बुल्स से 501 करोड़ रुपए का लोन लिया।

अक्टूबर 2008 में आरआरपीआर ने आईसीआईसीआई बैंक से 375 करोड़ रुपये लोन लिया। इस लोन के लिए रॉय दम्पति ने अपने शेयर्स रखे लेकिन सम्बंधित सरकारी संस्थाओं व अधिकारियों को इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई, अर्थात इसे छिपा कर दिया गया। सेबी के नियमों का उल्लंघन हुआ। एफआईआर की कॉपी का वह हिस्सा आप भी देखिए।

रॉय दम्पति के ख़िलाफ़ एफआईआर की कॉपी का हिस्सा

नियमों के मुताबिक, बैंक किसी भी कम्पनी के 30% से ज्यादा शेयर्स गिरवी के रूप में नहीं रख सकता, जबकि इस मामले में यह आँकड़ा 60% से भी अधिक रहा, जो सेबी और एमआईबी के नियमों का सीधा उल्लंघन था।

आईसीआईसीआई बैंक को नुकसान

आरआरपीआर होल्डिंग और वीसीपीएल के बीच हुए करार की जानकारी आईसीआईसीआई बैंक को भी थी। बता दें कि रॉय दम्पति ने वीसीपीएल नमक कम्पनी के साथ भी बेनामी करार किया था, जिससे एनडीटीवी का कंट्रोल वीसीपीएल का पास चला गया। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि आरआरपीआर ने अपने बैलेंस शीट में स्वीकार किया है कि उसे आईसीआईसीआई को 15 करोड़ रुपए देने हैं, लेकिन आईसीआईसीआई ने एक पत्र लिख कर बता दिया कि आरआरपीआर के पास उसका कोई बकाया नहीं है। कैसे?

सबसे पहले आईसीआईसीआई का वह पत्र देखिए जिसमें कहा गया है कि सारा बकाया लोन चुकता कर दिया गया:

आईसीआईसीआई कहता है कि आरआरपीआर ने लोन चुका दिए

अब आरआरपीआर का बैलेंस शीट देखिए जिसमें कहा गया है कि उसे आईसीआईसीआई को 15 करोड़ रुपए देने हैं:

आरआरपीआर कहता है कि आईसीआईसीआई को 15 करोड़ रुपए देने हैं

एफआईआर के अनुसार, आईसीआईसीआई को कुल 48 करोड़ रुपए का नुक्सान हुआ। यह भी बड़ा खुलासा हुआ कि प्रणय रॉय और राधिका रॉय के पास लोन चुकता करने के लिए फंड्स थे लेकिन उन्होंने जानबूझ कर ऐसा नहीं किया। एक और गौर करने लायक बात यह है कि वीसीपीएल ने 53.85 करोड़ आरआरपीआर को ट्रांसफर किए और उसी दिन यह रुपए प्रणय रॉय के व्यक्तिगत खाते में भेज दिए गए। यानी आईसीआईसीआई को तो घाटा हुआ लेकिन प्रणय रॉय को तो फायदा हुआ।

वो सवाल जिनका जवाब मिलना ज़रूरी है

रॉय दम्पति ने आख़िर इस बात को क्यों छिपाया कि आरआरपीआर होल्डिंग को जो 375 करोड़ रुपए का लोन दिया गया, उसके लिए एनडीटीवी के शेयर्स को गिरवी रखा गया था? इसे बात को छिपाने के पीछे क्या मकसद था?

आरआरपीआर के बैलेंस शीट में साफ़-साफ़ दिखता है कि उसे आईसीआईसीआई बैंक को रुपए भुगतान करने बाकी हैं लेकिन बैंक कहता है कि सारे रुपए पे कर दिए गए हैं। यह विरोधाभास क्यों?

आख़िर आईसीआईसीआई ने लोन से मिलने वाले ब्याज को छोड़ दिया, क्यों? जानबूझ कर नुकसान सहने का कारण क्या?

आईसीआईसीआई ने एक ऐसे करार का हिस्सा बनना क्यों स्वीकार किया, जिसमें सेबी व अन्य कई नियम तोड़े गए और क़ानून का उल्लंघन हुआ?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि उस समय आईसीआईसीआई बैंक के टॉप लेवल पर वो कौन से अधिकारी थे, जिनके कारण यह करार संभव हो पाया और क्या किन्हीं बड़े राजनेताओं व उद्योगपतियों से उनके सम्बन्ध थे?

एफआईआर क्या कहता है?

अब यह जानते हैं कि एफआईआर में क्या डिमांड्स किए गए हैं। सबसे पहले एफआईआर का वो वाला हिस्सा पढ़ लीजिए:

एफआईआर कॉपी में किए गए डिमांड्स

एफआईआर में माँग की गई है कि इस पूरे मामले की जाँच सीबीआई से कराई जाए। इस बात को लेकर संशय है कि आख़िर एनडीटीवी का असली मालिक है कौन? एनआईआर इसका पता लगाने को कहता है। गुप्त रूप से एनडीटीवी का नियंत्रण इधर से उधर किया गया और आईसीआईसीआई ने इसमें क्या किरदार निभाया? एफआईआर कॉपी पूछती है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे की वजह क्या थी? इसका उद्देश्य क्या था?

एक और बड़ा सवाल यह है कि एनडीटीवी के 85 मिलियन डॉलर के फंड्स विदेश में क्या कर रहे थे और उन्हें भारत वापस क्यों लाया गया, जिससे उसके प्रोमोटरों को 403 करोड़ रुपयों का फायदा हुआ?

रॉय दम्पति के अन्य कारनामे

2015 में सेबी ने एनडीटीवी पर 2 करोड़ रुपए का आर्थिक दंड लगाया क्योंकि कम्पनी ने यह बात छिपाई थी कि इनकम टैक्स ने उससे 450 करोड़ रुपए टैक्स जमा कराने को कहा था। फरवरी 2014 में इस सम्बन्ध में नोटिस मिलने के बावजूद एनडीटीवी ने स्टॉक एक्सचेंज को इससे सम्बंधित कोई सूचना नहीं दी, जो नियमों का उल्लंघन है। 2018 में सेबी ने एनडीटीवी पर फिर से आर्थिक दंड लगाया। SAT ने भी पाया कि एनडीटीवी ने नियमों का उल्लंघन किया है।

नीरा राडिया ने प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ के पत्रकार एमके वेणु से बात करते हुए कहा था कि वो और मनोज मोदी (मुकेश अंबानी का क़रीबी) ने कहा था कि वे प्रणय रॉय से मिलने दिल्ली जा रहे हैं, क्योंकि उनका समर्थन करना ज़रूरी है। हालाँकि, रिलायंस ने एनडीटीवी में किसी भी प्रकार के निवेश की बात को नकार दिया है। लेकिन, ‘नीरा राडिया एंगल’ बताता है कि इसमें बहुत लोच है।

इससे एक बात तो साफ़ हो जाती है कि एनडीटीवी के ख़िलाफ़ चल रहे मामले या रॉय दम्पति के ख़िलाफ़ हो रही कार्रवाई का मीडिया की स्वतंत्रता से कुछ लेना-देना नहीं है। प्रणय रॉय की मानें तो कोर्ट, सेबी और सीबीआई, सभी के सभी मोदी सरकार के प्रभाव में कार्य कर रहे हैं। आईसीआईसीआई लोन वाली स्टोरी संडे गार्डियन ने की थी, जिसके बाद एनडीटीवी के उनके ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा दर्ज कराया। हालाँकि, अदालती फैसला एनडीटीवी के पक्ष में नहीं आया। प्रणय रॉय इसे ‘मीडिया की स्वतन्त्रता’ से जोड़ कर अपनी लॉबी यानी ‘गिरोह विशेष’ को सरकार के ख़िलाफ़ सक्रिय करना चाह रहे हैं।

(यह लेख OpIndia की एडिटर नूपुर शर्मा द्वारा लिखे गए अंग्रेजी लेख का हिंदी अनुवाद है।)

CBI-ED ने किया चिदंबरम की याचिका पर SC में कैविएट दायर, कहा- हमें सुने बिना न दें कोई फैसला

सीबीआई (CBI) ने पी. चिदंबरम कि याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर किया है। इसमें चिदंबरम की याचिका पर एकपक्षीय आदेश नहीं जारी करने कि माँग की गई है। प्रक्रिया के मुताबिक, अब सुप्रीम कोर्ट से चिदंबरम को तत्काल गिरफ्तारी से संरक्षण मिलना मुश्किल है। सीबीआई का पक्ष जानने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट कैविएट दाखिल होने पर आदेश  जारी करता है।

CBI तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पी चिदम्बरम की गिरफ्तारी से राहत माँगने वाली याचिका के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किए हैं। अब कोर्ट कैविएट दायर करने वालों का पक्ष सुने बिना मामले में कोई फैसला नहीं सुना सकता है।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज, बुधवार को कहा कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की वह अपील तत्काल सूचीबद्ध करने पर विचार के लिए प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखी जाएगी जिसमें उन्होंने आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ्तारी से पूर्व जमानत के लिए दी गई अपनी याचिका खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति एन वी रमण ने चिदंबरम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि मामला प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा।

गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी से किसी भी तरह का संरक्षण देने से मना कर दिया था।

आज ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पी चिदंबरम के खिलाफ लुक-आउट नोटिस जारी किया। इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम ने सरकार पर चिदंबरम से चोर सरीखा व्यवहार करने का आरोप भी लगाया है। निरुपम ने लिखा- “पी चिदंबरम के लिए लुक आउट नोटिस! यह थोड़ा ज्यादा हो गया। देश के विद्वान राजनीतिज्ञ, पूर्व गृह मंत्री और वित्त मंत्री को एक चोर की तरह माना जा रहा है।”

चिदंबरम के वकीलों ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले को अर्जेन्ट सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है। फिलहाल सीजेआई गोगोई राम मंदिर मामले की सुनवाई में व्यस्त हैं। उधर ईडी ने चिदंबरम के ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है, जिसके बाद वह विदेश नहीं भाग पाएँगे।

न्याय प्रणाली में केवियट (Caveat) का अर्थ –

किसी व्यक्ति द्वारा अदालत से आप के विरुद्ध अचानक कोई आदेश लाने की आशंका होने पर कैवियट की अर्जी डाली जाती है, ताकि आपको पूर्व सूचना मिल सके कि आपके विरुद्ध क्या अर्जी डाली जा रही है, आपको आपके विरुद्ध डाली जा रही अर्जी की प्रति लिपि (copy) भी भेजी जाती है |

किसी व्यक्ति को इस तरह की भी आशंका हो सकती है कि किसी मामले को ले कर उस के विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई वाद या कार्यवाही संस्थित करके अथवा पहले से संस्थित किसी वाद या कार्रवाई में उसकी अनुपस्थिति में कोई आवेदन प्रस्तुत कर कोई आदेश प्राप्त किया जा सकता है। उस स्थिति में अदालत में खुद व्यवहार प्रक्रिया संहिता की धारा 148-अ के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया जाता है। इस आवेदन को केवियट (caveat) कहा जाता है।

रिश्वत के पैसे से चिदंबरम ने खरीदे स्पेनिश टेनिस क्लब और विदेश में सम्पत्ति: ED

INX मीडिया घोटाले में ED (प्रवर्तन निदेशालय) का आरोप है कि पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने INX मीडिया घोटाले में मिले पैसे से देश-विदेश में कई अचल सम्पत्तियाँ खरीदी हैं। इनमें स्पेन में एक टेनिस क्लब और ब्रिटेन में घर शामिल हैं। इन्हीं के बारे में पूछताछ के लिए ED कॉन्ग्रेस नेता पी. चिदंबरम को हिरासत में लेना चाहती है।

₹54 करोड़ का है मामला

ED के अक्टूबर 2018 के अटैचमेंट ऑर्डर के अनुसार बार्सिलोना, स्पेन के टेनिस क्लब, ब्रिटेन के दो घरों और भारत के भीतर की संपत्तियों का कुल मूल्य करीब ₹54 करोड़ के आस-पास बैठता है। भारत के भीतर अटैच की गई सम्पत्तियों में उनका वर्तमान निवास, दिल्ली के जोर बाग स्थित ₹16 करोड़ का बंगला, भी शामिल हैं। बार्सिलोना स्थित टेनिस क्लब का मूल्य ₹15 करोड़ बताया जा रहा है

जो लेन-देन हुआ ही नहीं, उसके बने डेबिट नोट

ED का दावा है कि INX मामले के दूसरे आरोपी पीटर मुखर्जी ने कार्ति चिदंबरम को ₹3.09 करोड़ डेबिट नोटों में हेरफ़ेर के ज़रिए दिए। इसके लिए ऐसे लेन-देन कागज़ों पर दिखाए गए, जो असल में हुए ही नहीं।

इसके अलावा कार्ति चिदंबरम से जुड़ी कंपनी Advantage Strategic Consulting Pvt Ltd (ASCPL) के वासन हेल्थ केयर में हिस्सेदारी भी इसी घोटाले के पैसे से खरीदने की बात मीडिया रिपोर्टों में कही जा रही है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि बाद में वासन हेल्थ केयर में ASCPL के शेयरों में से कुछ हिस्सा ₹41 करोड़ के मुनाफ़े पर बेच दिया गया

बशीर ने बीवी को कुल्हाड़ी से काटा, समीरा की अम्मी-अब्बू से मॉंग रहा था 5 लाख रुपए

हैदराबाद में एक शख्स ने कुल्हाड़ी से काटकर अपनी बीवी की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपित बशीर को गिरफ्तार कर लिया है।

आसिफ नगर के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नरसिम्हा रेड्डी ने एएनआई (ANI) को बताया कि आरोपित बशीर ने 12 अगस्त को अपनी दूसरी बीवी समीरा पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया। जिसमें समीरा के गले पर गंभीर चोट आई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस वारदात को अंजाम देने के बाद बशीर वहाँ से फरार हो गया। हालाँकि, पुलिस ने 20 अगस्त को तोलीचौकी इलाके से बशीर को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

नरसिम्हा रेड्डी ने बताया कि बशीर ने 25 साल पहले समीरा की बड़ी बहन फहीमुन्निसा के साथ निकाह किया था। इसके 10 साल बाद उसने समीरा से निकाह किया। साल 2016 में समीरा ने बशीर को तलाक दे दिया। इसके बावजूद दोनों साथ-साथ ही रहते थे।

कमिश्नर ने बताया कि बशीर ने समीरा के माता-पिता से दहेज की माँग की थी। बशीर और उसके पिता ने
समीरा के माता-पिता से दहेज के तौर पर 5 लाख रुपए की माँग की थी। समीरा के परिवार वालों ने यह माँग कर दी तो फिर से 5 लाख रुपए की डिमांड कर दी। डिमांड पूरा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।  

बिहार: मेयर के बेटे ने मारी आँख, महिला पार्षद ने CM नीतीश से लगाई गुहार

बिहार के पटना में एक वार्ड पार्षद ने मेयर सीता साहू के बेटे पर बोर्ड मीटिंग के दौरान छेड़खानी का आरोप लगाया है। वार्ड पार्षद पिंकी देवी का आरोप है कि पटना नगर निगम की बोर्ड बैठक के दौरान मेयर सीता साहू का बेटा उन्हें लगातार आँख मार रहा था। उन्होंने आरोपी को ऐसा नहीं करने की सख्त हिदायत भी दी, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। पिंकी देवी ने कहा कि शुरू में उन्होंने शिशिर की इस हरकत को नजरअंदाज किया। लेकिन वो रूका नहीं और उन्हें देखकर लगातार आँख मारता रहा।

पिंकी देवी का कहना है कि उन्होंने शिशिर को उसकी गंदी हरकत के लिए चेतावनी देते हुए कहा वो उसकी माँ से इसकी शिकायत करेंगी। इसके बाद भी उसके चेहरे पर कोई डर नहीं दिखा। उसने कहा कि वो जो चाहें करें। पिंकी का आरोप है कि उन्होंने मेयर सीता साहू से इस बात की शिकायत की तो उन्होंने उन्हें ही कसूरवार ठहराया और कहा कि वो वो लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए ऐसे आरोप लगा रही हैं। सीता साहू अपने पुत्र को डाँटने की बजाय उन पर ही चिल्लाने लगी। इसके बाद स्थायी समिति सदस्य इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी और वार्ड पार्षद सतीश कुमार विरोध करने पहुँच गए। पिंकी कुमारी ने कदमकुआँ थाने में मेयर पुत्र के साथ-साथ इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी व सतीश कुमार के खिलाफ लिखित में शिकायत दर्ज कराई है।

प्रभात खबर में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

पिंकी कुमारी ने कहा कि सिटी मैनेजर संजय कुमार पर भ्रष्टाचार का आरोप है, जिसके खिलाफ वो बोल रही थी। उनका यह बोलना मेयर के साथ-साथ मेयर पुत्र को अच्छा नहीं लग रहा था। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वो एफआईआर करावाएँगी और महिला आयोग के पास भी जाएँगी। साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि आगे ऐसी घटना न हों।

केले के रेशे से बना सैनिटरी पैड होगा 120 बार इस्तेमाल, जानें कितनी है कीमत? क्या है खास?

स्त्री जीवन में ‘माहवारी’ एक शाश्वत हकीकत है। इसे न झुठलाया जा सकता है और न इससे बचा जा सकता है। हर 28 दिन के चक्र में महिला को अपने शरीर में बदलते हॉर्मोन्स के कारण इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ये चक्र 11-12 वर्ष की आयु से शुरू होता है और अधिकतम 45-55 की उम्र तक चलता है। मतलब स्त्री जीवन का एक बहुत लंबा काल इस चक्र के साथ गुजरता है।

पुराने समय में महिला के जीवन में माहवारी को लेकर कई भ्रांतियाँ थी, लेकिन अब धीरे-धीरे समय बदल रहा है। पहले जहाँ लोग इस विषय पर बात करने से गुरेज करते थे, वहीं अब लोग इसपर खुलकर बात कर रहे हैं। महिला की स्वास्थ्य सुरक्षा अब समाज में एक अहम मुद्दा है। जिसके चलते शहर की तंग गलियों से लेकर गाँव-कस्बों तक की महिलाओं को सैनिटरी पैड को इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन सवाल है कि क्या ये सैनिटेरी पैड वाकई सुरक्षित हैं? तो जवाब है, नहीं। महिलाओं के लिए बाजार में उपलब्ध सैनिटेरी पैड न महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं और न ही प्रकृति के लिए।

जानकारी के मुताबिक इनका ज्यादा इस्तेमाल करने से इंफेक्शन तो होता ही है। इसके अलावा अधिकांश सैनिटरी पैड के सिंथेटिक सामग्री और प्लॉस्टिक से निर्मित होने के कारण इन्हें 50 से 60 साल सड़ने में लग जाते है। जो प्रकृति के लिए नुकसानदायक है।

आमतौर पर महिलाएँ इसका इस्तेमाल करती हैं और फिर इसे कूड़े में फेंक देती हैं। बाद में इन्हें या तो जला दिया जाता है या मिट्टी में दबा दिया जाता है। जिससे प्रकृति दूषित होती है। क्योंकि जब इन्हें जलाया जाता है तो इनमें डाइऑक्सिन के रूप में कार्सिनोजेनिक धुएँ का उत्सर्जन होता है, और वह वायु प्रदूषण का बहुत बड़ा कारक है।

इसलिए, महिलाओं की जरूरत का ख्याल रखते हुए और प्रकृति को होने वाले नुकसान से संरक्षित करने के लिए आईआईटी दिल्ली से जुड़े एक स्टार्टअप ने पहली बार ऐसा पैड बनाने का दावा किया है जो केले के रेशे से निर्मित है।

यह पैड न सिर्फ़ महिलाओं के लिए सुरक्षित है बल्कि इको फ्रेंडली भी है। इसको बनाने में केले में मौजूद फाइबर का इस्तेमाल किया गया है। इसकी कीमत 199 रुपए है और इसकी खास बात ये है कि इसे महिलाएँ 2 साल तक चला सकती हैं। इसे बनाने वाले लोगों ने दावा किया है कि इसका 120 बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस पैड में केले के रेशे के अलावा टेरी, पॉलिस्टर पिलिंग और कॉटन का इस्तेमाल किया गया है। पैड की खासियत है कि महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाले गीलेपन से छुटकारा मिलेगा क्योंकि इसमें मौजूद विस्कोस और पॉलिस्टर अत्यधिक शोषक है।

आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर्स की मदद से ‘सैनफे’ द्वारा तैयार किए गए इस उत्पाद के लिए एक पेटेंट का आवेदन जमा कराया गया है। स्टार्टअप के संस्थापक अर्चित अग्रवाल की मानें तो इस पैड को लेकर थर्ड पार्टी लैबोरेट्री में प्रयोग किए जा चुके हैं। इससे साबित हो चुका है कि इस पैड में किसी प्रकार का बैक्टीरिया नहीं है। न ही इससे महिलाओं को किसी करह की जलन या फिर रैश होने का खतरा है।

अर्चित अग्रवाल की मानें तो इस पैड को जल्द ही आम दुकानों पर उपलब्ध करवाया जाएगा, लेकिन उससे पहले महिलाएँ इसे ऑनलाइन मँगवा कर इस्तेमाल कर सकती है।

बता दें महिलाओं की सुरक्षा और प्रकृति को बचाने के लिहाज से किए गए इस प्रयोग केन्या और तंजानिया जैसे देशों में भी अमल हो रहा है। अर्चित बताते हैं कि इन देशों में तौलिया बनाने के पदार्थों से पैड का निर्माण किया जाता है, क्योंकि सिर्फ़ रुई इसके लिए काफी नहीं होती। वे कहते हैं कि वो केले के रेशे से बना सैनिटरी पैड अन्य देशों में एक्सपोर्ट भी करेंगे, और इस काम के लिए वह दक्षिण भारत से केले के रेशे लेगें।

अर्चित की मानें तो सरकार और एनजीओ निरंतर ग्रामीण इलाकों में डिस्पोजल पैड बाँटने का काम करती हैं। हम उनसे भी अपील करेंगे कि वो इस रियूजेबल पैड को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने में मदद करें।