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‘CM योगी के पास अपार शक्ति, उनके कार्यकाल में ही बनेगा राम मंदिर’

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर सुनवाई चल रही है। इस बीच, उत्तर प्रदेश के श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री पंडित सुनील भराला ने कहा है कि भगवान राम का मंदिर निश्चित रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में ही बनेगा। मुख्यमंत्री के बारे में उन्होंने कहा कि वो एक निर्णायक व्यक्ति हैं, वो ख़ुद अपने हाथों से मंदिर का निर्माण कार्य करेंगे, उनके पास ‘अपार शक्ति’ है।

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में आज (29 अगस्त) 15वें दिन सुनवाई चल रही है। चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई की अगुआई में पाँच सदस्यीय पीठ के समक्ष दलीलें दी जा रही हैं। इस पीठ में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

बता दें कि बुधवार (28 अगस्त) को एक हिंदु संस्था ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह दावा पेश किया था कि मुगल बादशाह बाबर न तो अयोध्या गए थे और न ही विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर 1528 में मस्जिद बनाने के लिए मंदिर ध्वस्त करने का आदेश दिया था। 

राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने दलीलें रखते हुए कहा था कि विवादित ढाँचा बाबर ने बनवाई, इसका कोई सटीक प्रमाण नहीं है। इसके लिए उन्होंने बाबरनामा, आईने अकबरी, हुमायूँनामा, तुजुक-ए-जहाँगीरी जैसी ऐतिहासिक पुस्तकों का हवाला दिया। साथ ही उन्होंने कहा की मंदिर औरंगजेब ने तोड़ा था।

ख़बर के अनुसार, रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि तीन गुंबद वाली इमारत मस्जिद नहीं थी। मस्जिद में जिस तरह की चीज़ें ज़रूरी होती हैं, वो उसमें नहीं थी। समिति ने कहा कि विवादित इमारत बनवाने वाला कौन था, इस पर संदेह है। मीर बाकी नाम का बाबर का कोई सेनापति था ही नहीं।

राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने सुनवाई की शुरुआत में बाबरनामा के कुछ अंश पढ़े और कहा कि कोई भी ऐतिहासिक दस्तावेज ऐसा नहीं है जो यह बताता हो कि विवादित स्ट्रक्चर (बाबरी मस्जिद) 520 ईस्वी में बना हो। बाबरनामा में मीर बाकी के बारे में ज़िक्र नहीं है। बाकी तश्किन्दी 1529 में अवध (अयोध्या) से बाबर से मिलने गया था। उन्होंने कहा कि बाबर सिर्फ इस बात से वाकिफ़ था कि ज़मीन वक़्फ़ की है।

अरुंधति रॉय की माफी का सच: भारतीय सेना को बर्बर बताने पर चुप, पाक फौज के गुणगान पर बोली- मैं मूर्ख

लेखिका अरुंधति रॉय ने 2011 में भारतीय सेना को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। भारतीय सेना को बर्बर और अत्याचारी साबित करते-करते उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की फौज ऐसा कभी नहीं करती। इस बयान के लिए उनको न केवल भारतीयों, बल्कि बलूचिस्तानियों और बांग्लादेशियों ने भी जमकर लताड़ लगाई।

अब खबर आ रही है कि आठ साल पुराने इस बयान के लिए अरुंधति रॉय ने माफी मॉंग ली है। लेकिन, रॉय के माफीनामे से साफ है कि भारतीय सेना के लिए की गई टिप्पणियों पर वह अब भी चुप हैं। अपने बयान के जिस हिस्से को लेकर उन्हें खेद है वह पाकिस्तानी सेना के गुणगान से जुड़ा है। माफी मॉंगते हुए उन्होंने अपने इस बयान को मूर्खतापूर्ण करार दिया है।

बता दें कि 2011 में रॉय ने कहा था कि भारतीय सेना कश्मीर, मणिपुर, नागालैंड, तेलंगाना, पंजाब और गोवा में अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ युद्ध लड़ रही है। साथ यह भी कहा था कि पाकिस्तान की फौज ऐसा कभी नहीं करती। अभी हाल ही में जम्मू कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद रॉय का वह क्लिप सोशल मीडिया पर फिर से सर्कुलेट होने लगा। नाराज़ बलूच नेताओं ने रॉय को याद दिलाया कि कैसे पाक फौज बलूचिस्तान की जनता पर अत्याचार कर रही है।

इसके बाद बंगलादेशी मीडिया ने भी अरुंधती रॉय की आलोचना की। बांग्लादेश लिबरेशन युद्ध के दौरान और उससे पहले पाक फौज ने बांग्लादेशियों पर ख़ूब अत्याचार किए थे। महिलाओं का बलात्कार और बच्चों-बूढों तक को भी मार डालना पाकिस्तानी फौज का पेशा बन गया था। बलूचिस्तान और बांग्लादेश से आने वाली आलोचना के बाद अरुंधति रॉय ने अपने 8 वर्ष पुराने बयान को मूर्खतापूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने जीवन में कभी न कभी कुछ ‘मूर्खतापूर्ण और बेहूदगी भरा’ कह जाते हैं।

‘द प्रिंट’ को दिए गए बयान में रॉय ने कहा कि उस विडियो क्लिप में वह जो भी कहती दिख रही हैं, वो उनकी सोच, विचारों और रचनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता। वे लोगों से किसी बातचीत के दौरान कही अपनी बातों बजाय अपने लिखे पर विश्वास करने की सलाह देती है। वह कहती हैं अगर इस विडियो क्लिप से कोई भी कन्फ्यूजन पैदा हुआ है तो वह माफ़ी माँगती हैं। अरुंधति रॉय ने कहा:

“पाक फौज बलूचिस्तान में जो कुछ भी कर रही है या बांग्लादेश में उसने जो नरसंहार किया- इस बारे में मेरी राय कभी भी अस्पष्ट नहीं रही है। मैंने इस बारे में काफ़ी कुछ लिखा है। हिन्दू राष्ट्रवादी मेरे पुराने विडियो क्लिप को निकाल कर हंगामा मचा रहे हैं। जिसनें भी मुझे पढ़ा है वो इन बातों पर एक सेकंड के लिए भी विश्वास नहीं करेगा। नैतिक रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत में से कोई भी एक-दूसरे से बढ़ कर नहीं है। भारत में अभी फासिज्म का वातावरण तैयार हो रहा है। जो इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, उसे बदनाम होने, ट्रोल किए जाने, जेल में भेजे जाने और पिटाई किए जाने का डर है।”

बांग्लादेश और बलूचिस्तान के सम्बन्ध में कही गई अपनी बातों को ग़लत साबित करने के लिए रॉय ने अपने उपन्यास का उदाहरण दिया। उनके उपन्यास ‘मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ में एक भारतीय ख़ुफ़िया अधिकारी कहता है कि कश्मीर में भारत ने कई भयावह चीजें की हैं, लेकिन पूर्वी पाकिस्तान में जो पाक फौज ने किया वह नरसंहार है।

जयपुर में फिर तनाव: ‘कान्हा मटकी फोड़’ के दौरान पथराव, पुलिस को भी नहीं छोड़ा

जयपुर में शांति समिति की बैठक में कमिश्नर की अपील के बावजूद 10 घंटे के अंदर इलाके में फिर तनाव का माहौल बन गया। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कल्याण जी रास्ते में बुधवार देर रात उपद्रवियों ने आतंक मचाया और पथराव किया। कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस पर भी पत्थर फेंके गए।

जानकारी के मुकाबिक कल्याण जी रास्ते से पहले चौराहे पर ‘कान्हा मटकी फोड़’ कार्यक्रम चल रहा था। इसमें भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुँचे थे। इसी दौरान एक बच्चे को जेब काटने के आरोप में लोगों ने पकड़ लिया। लोगों ने उसे चोरी किया पर्स लौटाने के लिए धमकाया लेकिन मौक़ा पाते ही वह फरार हो गया।

पत्रिका का स्क्रीनशॉट

इसी बीच अचानक थराव शुरू हो गया। आयोजन में आए लोगों ने देखा तो सामने से बच्चों, किशोंरो और युवकों की एक भीड़ कार्यक्रम स्थल के नजदीक चली आ रही थी। जिसने कार्यक्रम स्थल के पास पहुँचकर आयोजन में शामिल लोगों पर पथराव किया। इसके बाद वहाँ भगदड़ मच गई।

सूचना मिलने पर पुलिस मौक़े पर पहुँची। लेकिन उपद्रवियों ने पुलिस पर भी पथराव किया। माहौल बिगड़ा तो आला अधिकारियों को सूचित किया गया और अतिरिक्त जाब्ता बुलाकर इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

गौरतलब है कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद से कानून-व्यवस्था की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। जयपुर में दूसरे समुदाय के लोगों द्वारा पत्थरबाजी की हाल में कई घटनाएँ सामने आई है। बकरीद पर उत्पात के बाद तो धारा 144 लगानी पड़ी थी।

फारूक अब्दुल्ला की बेटी से हाईकोर्ट: आप भी दूसरे नागरिकों की तरह, प्रतिबंध झेलने पड़ेंगे

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बेटी को रियायत देने से इनकार करते हुए कहा है कि कानून की नजर में सब समान हैं। साफिया खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि वह भी दूसरे नागरिकों की ही तरह हैं। यदि प्रशासन को लगता है कि राज्य में शांति-व्यवस्था बहाल रखने के लिए कुछ प्रतिबंध जरूरी हैं तो उन्हें भी ये प्रतिबंध झेलने पड़ेंगे।

साफ़िया ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि वो शांतिप्रिय भारतीय नागरिक हैं और किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं हैं। बावजूद इसके उन्हें 5 अगस्त से घर में नज़रबंद कर रखा गया है। उन्होंने अपनी याचिका में बीमारी का हवाला देते हुए लिखा था कि उन्हें नियमित डॉक्टर से परामर्श और दवाइयाँ लेनी पड़ती हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों को हटाया जाए जिससे वो अपनी मर्जी से बाहर आ-जा सकें।

याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि वो (साफ़िया) भी देश के अन्य नागरिकों की तरह है और अगर प्रशासन को लगता है कि राज्य में अमन-शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबंध ज़रूरी हैं तो उन्हें भी इन प्रतिबंधों को झेलना पड़ेगा। इस मामले में 16 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान राज्य के एडवोकेट डीसी रैना ने कोर्ट को इस इस बात से अवगत कराया था कि याचिकाकर्ता (साफ़िया ख़ान) को न तो किसी हिरासत में रखा गया है और न ही उन्हें नज़रबंद किया गया है। घाटी में जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ नितांत आवश्यक प्रतिबंध लगाए गए हैं।

डीसी रैना ने याचिकाकर्ता की चिकित्सीय सुविधाओं के बारे में ज़िक्र करते हुए कहा कि श्रीनगर के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर की अगुआई में डॉक्टर्स की टीम उनके घर गई थी, लेकिन याचिकाकर्ता ने उनकी सुविधाएँ लेने से इनकार कर दिया। इस बारे में जब याचिकाकर्ता के वकील इशाक क़ादरी को सूचित किया गया, तो उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए कहा कि वो साफ़िया ख़ान से मिलने नहीं जा सके हैं।

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सभी दलीलों को सुनने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता को सुविधाएँ मुहैया कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया। साथ ही यह बात भी स्पष्ट हो गई कि उन्हें न तो हिरासत में लिया गया है और न ही नज़रबंद किया गया है।

अरुंधति रॉय, प्रपंच कब तक चलाओगी: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Arundhati Roy Propaganda

अरुंधति रॉय का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें अरुंधति रॉय कहती नजर आती हैं कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी भारत ने एक तरह से उपनिवेशवाद ही किया है और आज तक भारत के लोग भारतीय सेना की बर्बरता ही झेल रहे हैं। रॉय ने यह भी कहा कि हर जगह के कबिलाई लोग, समुदाय विशेष एवं ईसाई भारतीय राष्ट्र के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं। भारत के इनके राज्य को उपनिवेश बना दिया, जिसके लिए ये आज भी लड़ रहे हैं।

ये वामपंथियों का हमेशा से कुत्सित प्रयास रहा है। अरुंधति रॉय जैसे लोग ही भारत को टुकड़ों में बाँटने की मंशा रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर भारत के खिलाफ बातें करके भारतीय सेना को तानाशाह के रूप में दिखाते हैं। ऐसे लोग इतने घाघ और बेगैरत होते हैं कि किताब बेचने के लिए अपनी जमीर सहजता से बेच देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सामने बैठे अंग्रेजी दर्शक उनसे दोबारा सवाल नहीं पूछते। वो अपने पूर्वजों के कुकर्मों को भूल चुके हैं तो उनके लिए अपनी ग्लानि छुपाने के लिए काफी है कि भारतीय सेना ने तो भारतीयों के साथ और भी ज्यादा बर्बरता किया है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

इमरान खान का ‘न्यू पाकिस्तान’: PM ऑफिस की बत्ती होगी गुल, बिजली विभाग ने भेजा नोटिस

कुछ दिनों पहले ख़बर आई थी कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान प्रधानमंत्री आवास को निकाह का मंडप के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। एक शादी समारोह की तस्वीर भी सामने आई थी। कहा गया था कि ऐसा वे सरकारी खजाने में रुपए डालने के लिए कर रहे हैं। अब नई ख़बर आई है, जो पाकिस्तान के दिवालियेपन को उजागर करती दिख रही है। परमाणु युद्ध की धमकी देने वाले और मिसाइल परीक्षण की तैयारी कर रहे पाक पीएम बिजली बिल भी नहीं चुका रहे हैं।

पाक प्रधानमंत्री के सेक्रेटेरिएट ने करोड़ों का बिजली बिल बकाया रखा है। बुधवार (अगस्त 28, 2019) को इस्लामाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कम्पनी ने सेक्रेटेरिएट को नोटिस जारी कर बकाये बिल का भुगतान करने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर बिजली काटने की चेतावनी दी गई है।

बिजली कम्पनी द्वारा प्रधानमंत्री सेक्रेटरिएट को कई बार नोटिस भेजा गया लेकिन फिर भी वे बकाया चुकाने में नाकाम रहे हैं। पाकिस्तान में बिजली की समस्या अब और गहरी हो गई है। गर्मी के दिनों में भी पाक के बड़े महानगरों तक में बिजली गुल होना आम बात है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बदहाली के दौर से गुज़र रही है। पाकिस्तानी मंत्री लंदन में जाकर अण्डों से पिटते हैं और अपने देश पहुँच कर युद्ध की तारीख का ऐलान करते हैं।

वर्धमान ब्लास्ट: 4 बांग्लादेशी सहित 19 दोषी करार, बुर्का बनाने के नाम पर लिया था घर

कोलकाता की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की विशेष अदालत ने बुधवार को 2014 वर्धमान ब्लास्ट मामले में 31 आरोपितों में से 4 बांग्लदेशी नागरिकों समेत 19 लोगों को दोषी ठहराया। इन्हें 30 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में 31 लोग आरोपी हैं। इनमें से 19 ने 12 अगस्त को अदालत के सामने अपना जुर्म कबूल करने की इच्छा जताई थी। इन्होंने बुधवार को अपना कबूलनामा अदालत में दाखिल कर दिया।

कबूलनामे के बाद दोषियों की ओर से केस लड़ रहे वकील ने अदालत से 2 दिन की मोहलत माँग ली। इसके बाद अदालत ने इनकी सजा पर सुनवाई शुक्रवार तक टाल दी।

बता दें कि 2 अक्टूबर 2014 को पूर्वी वर्धमान के खागड़ागढ़ में आइईडी तैयार करते समय हुए धमाके में दो लोग मारे गए थे। बाद में एनआईए की जाँच में खुलासा हुआ कि विस्फोट के पीछे जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) का हाथ था। यह पहला मौका था जब पश्चिम बंगाल में जेएमबी की सक्रियता सामने आई थी।

खबरों के मुताबिक बांग्लादेशी आतंकियों ने बुर्का बनाने के नाम पर किराए का मकान लिया था और उसी की आड़ में विस्फोटक तैयार कर बांग्लादेश भेजते थे। इसके बाद एनआइए ने बंगाल, बिहार, झारखंड, असम समेत कई और राज्यों में छापेमारी कर जेएमबी के जुड़े होने के आरोप में 31 लोगो को गिरफ्तार किया था।

एनआईए ने जेएमबी के मंसूबों का खुलासा करते हुए कहा था कि इनका काम लोगों को कट्टरपंथी बनाने, अपने संगठन में जोड़ने और उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने का है और साथ ही लोकतांत्रिक भारत और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने का है।

एनआईए ने जेएमबी के मंसूबों का खुलासा करते हुए कहा था वह लोगों को कट्टरपंथी बनाने, अपने संगठन का विस्तार करने और आतंकी कृत्यों को अंजाम देने के लिए उन्हें हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने की फिराक में था। उसका मंसूबा भारत और बांग्लादेश की सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने है।

ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल के बेटे फ़ैसल को किया तलब

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के बेटे फ़ैसल पटेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्टर्लिंग बायोटेक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलब किया है। ED संदेसरा बंधुओं के साथ फ़ैसल पटेल के संबंधों की भी जाँच कर रही है।
फार्मास्युटिकल कंपनी के मालिक संदेसरा बंधु 5,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में आरोपित हैं।
अहमद पटेल गुजरात से कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं। वह सोनिया गाँधी के राजनीतिक सचिव भी रह चुके हैं।

ED ने फ़ैसल पटेल को गुरुवार (29 अगस्त) को पूछताछ के लिए बुलाया है। इस साल 30 जुलाई को ED ने इस मामले में अहमद पटेल के दामाद और वकील इरफ़ान सिद्दीकी से भी पूछताछ की थी।

स्टर्लिंग बायोटेक कंपनी ने आंध्र बैंक सहित बैंकों के एक कंसोर्टियम से 5,000 करोड़ रुपए ऋण लिया, लेकिन यह ऋण एक गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) में बदल गया। ED के अनुसार, संदेसरा समूह ने कथित तौर पर कई बैंकों को धोखा दिया और बैंकों और निवेशकों के ख़िलाफ़ उसका कुल बकाया 10,000 करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है।

चार्जशीट के अनुसार, स्टर्लिंग ग्रुप के मालिक नितिन संदेसरा और चेतन संदेसरा ने पैसे विदेश ले जाने के लिए करीब 300 मुखौटा कंपनियॉं बनाई।

जॉंच के दौरान ईडी को इस समूह के अहमद पटेल से रिश्तों का पता चला। पूछताछ से इस घोटाले में अहमद पटेल, उनके बेटे फैसल पटेल और दामाद इरफान सिद्दीकी की संलिप्तता सामने आई।

संदेसरा समूह के एक कर्मचारी सुनील यादव ने बताया था कि चेतन संदेसरा (निदेशक संदेसरा समूह) के
नई दिल्ली स्थित पुष्पांजलि फार्म में इरफ़ान सिद्दीकी आया करता था। चेतन संदेसरा भी इरफ़ान के वसंत विहार स्थित घर पर जाता था। यादव के मुताबिक चेतन संदेसरा अहमद पटेल के बेटे को पैसे देता था। उसने भी चेतन की तरफ से फैसल के ड्राइवर को पैसे सौंपे थे।

सीबीआई ने स्टर्लिंग बायोटेक, उसके निदेशकों, वरिष्ठ अधिकारियों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। FIR के अनुसार, समूह की कंपनियों का कुल बकाया 31 दिसंबर 2016 तक 5,383 करोड़ रुपए था।

अर्बन नक्सल: हाईकोर्ट ने कहा- किताबों, सीडी से लगता है आप प्रतिबंधित संगठन का हिस्सा हो

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगाँव मामले की सुनवाई करते हुए वर्नोन गोंजाल्विस के पास से मिले आपत्तिजनक पुस्तकों व सीडी को लेकर उनसे सवाल किया। अदालत ने कहा कि जिस प्रकार की पुस्तकें गोंजाल्विस ने अपने घर में रखी है, उससे प्रतीत होता है कि वह प्रतिबंधित संगठन का हिस्सा हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट तीन आरोपित वर्नोन गोंजाल्विस, सुधा भारद्वाज और अरुण फरेरा की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही है। जनवरी 1, 2018 को भीमा कोरेगाँव में हुई हिंसा के सम्बन्ध में इन तीनों को गिरफ़्तार किया गया था।

कोर्ट ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि गोंजाल्विस के घर से मिले पुस्तकों व सीडी को पुलिस ने बरामद वस्तुओं की सूची में नहीं रखा था। अदालत ने पूछा कि उनके अंदर क्या है? साथ ही हाईकोर्ट ने उन्हें भी चार्जशीट का हिस्सा बनाने की सलाह दी। गोंजाल्विस के घर से जय भीम कॉमरेड की सीडी और आनंद पटवर्धन की डॉक्यूमेंट्री मिली। कबीर कला मंच द्वारा जारी सीडी राज्य दमन विरोधी, मार्क्सिस्ट आर्काइव्स, वार एंड पीस इन जंगलमहल, अंडरस्टैंडिंग माओइस्ट, आरसीपी रीव्यू गोंजाल्विस के घर से बरामद की गईं।

अदालत ने गोंजाल्विस से पूछा की ये किताबें और सीडी उनके घर में क्या कर रही थीं? तीनों ही आरोपितों के ख़िलाफ़ गैर-क़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया था। गोंजाल्विस के पास मिली एक सीडी के नाम में ही ‘राज्य के दमन का विरोध’ था, जिस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई।

पुणे पुलिस का कहना है कि 31 दिसंबर 2017 को आयोजित किए गए एलगार परिषद के कार्यक्रम का माओवादियों ने समर्थन किया था और उस कार्यक्रम में उकसाने वाले भाषण दिए गए थे जिससे अगले दिन वहां हिंसा भड़क गई थी। गोंजाल्विस के वकील का कहना है कि उनके ख़िलाफ़ सारा मामला कम्प्यूटर से मिले ईमेल और पत्रों के आधार पर बनाया गया है।

गोंजाल्विस के वकील ने अदालत में बहस करते हुए कहा कि सिर्फ़ ऐसी सामग्रियाँ रखने भर से ही कोई व्यक्ति आतंकवादी या माओवादी नहीं बन जाता। उन्होंने गोंजाल्विस के जमानत की माँग की। अदालत ने बचाव पक्ष को कहा कि उन्हें जवाब देना पड़ेगा कि ये चीजें उनके पास क्यों थीं? साथ ही पुणे पुलिस को भी हाईकोर्ट ने कहा कि वो साबित करे कि ये सामग्रियाँ गोंजाल्विस के ख़िलाफ़ ठोस सबूत की तरह हैं।

अफरीदी बेइज्जत होने का मौका खोजते रहते हैं, उन्हें KG tutorials की ज़रूरत: गौतम गंभीर

पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद और टीम इण्डिया के विस्फोटक ओपनर रह चुके गौतम गंभीर ने पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी की ऑनलाइन चुटकी लेते हुए कहा कि अफरीदी खुद ही खुद को शर्मिंदा करने का तरीका ढूँढ़ लेते हैं। आईपीएल फ्रेंचाइज़ी केकेआर के कप्तान रह चुके सलामी बल्लेबाज़ ने यह ट्वीट अफरीदी के उस बयान के जवाब में किया, जिसमें अफरीदी ने हिंदुस्तान-पाकिस्तान की नियंत्रण रेखा (LOC) पर जाने का ऐलान किया था।

अफरीदी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए गंभीर ने लिखा है, “दोस्तो, इस फोटो में शाहिद अफरीदी खुद शाहिद अफरीदी से पूछ रहे हैं कि उन्हें शाहिद अफरीदी को अगली बार शर्मिंदा करने के लिए क्या करना चाहिए जिससे कि यह साबित हो सके कि शाहिद अफरीदी ने परिपक्व होने से इनकार कर दिया है।” 

साथ ही अफरीदी पर तंज़ कसते हुए कहा कि अफरीदी ‘गंभीर’ (mature) होने से लगातार इंकार कर रहे हैं। अतः गौतम उनके लिए KG क्लास के tutorials ऑनलाइन मंगवा रहे हैं।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर हर मोर्चे पर मुँह की खाने के बाद अब पाकिस्तान ने मैदान में उतारा है बूढ़े हो चुके पूर्व क्रिकेटरों को, जो लोगों को सोशल मीडिया पर बरगला रहे हैं। उन्हीं में से एक अफरीदी भी हैं।

शाहिद अफरीदी ने दावा किया है कि वे शुक्रवार (30 अगस्त) को दोपहर 12 बजे मजार-ए-कैद में मौजूद रहेंगे। पाकिस्तान उस घंटे को “कश्मीर का घंटा” (Kashmir Hour) के रूप में मना रहा है। उन्होंने अन्य लोगों से भी शामिल होने की अपील की। साथ ही उन्होंने जल्दी ही LOC पर जाने का भी ऐलान किया है।