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8 घटनाएँ मंदिरों की अमानत में खयानत की: क्या किसी सरकार ने इसकी सुध ली?

तिरुपति मंदिर में भगवान बालाजी के मुकुट और आभूषण चोरी होने और मामला दो साल तक दबे रहने पर आउटरेज केवल वही कर सकता है, जिसे सेक्युलर-समाजवादी भारतीय गणराज्य की गुलामी और भेदभाव की ज़ंजीरों में जकड़े हिन्दू धर्म/हिंदुत्व की बेड़ियों का पता न हो। जानने वालों के हिसाब से यह तो छोटी सी बात है- जब पद्मनाभ स्वामी के मंदिर का खज़ाना, जिसे मंदिर की, देवता की सम्पत्ति माना जाता है, जिसकी रक्षा के लिए लोगों ने अपनी जान इसलिए हुत कर दी ताकि जब ‘स्वामी’ आएँ तो उन्हें उनकी सम्पत्ति अक्षुण्ण मिले, उसे ‘स्टेट’ की मशीनरी ने छीन लिया, तो एक मुकुट गुम जाना क्या चीज़ है। जिस ज़माने में किसी को ₹5000 बिना सूद के नहीं मिलते, सरकार बहादुर को मंदिर के खजाने से अरबों का ‘लोन’ बिना किसी गिरवी, बिना किसी सूद के मिल जाता है।

तो आउटरेज का कोई मतलब नहीं है- क्योंकि पता है कि हिन्दू खुद ही न इस मुद्दे पर जागरुक है न उद्वेलित, इसलिए सरकारें भी मस्त नींद से ग्रस्त हैं। अनभिज्ञ आउटरेज से कुछ नहीं होगा- जानकारी पहले ज़रूरी है। जानना ज़रूरी है कि मंदिरों की हुंडी में, दान-पेटिका में जो पैसा श्रद्धालु अपने देवता के प्रति कृतज्ञता में, मंदिर के काम के लिए, पुजारी जी की आजीविका के लिए डालते हैं, उस पैसे पर सरकारें कैसे डाका डालती हैं।

50,000 एकड़ ‘गायब’, वापिस आया केवल 3,000

तमिलनाडु के ‘मंदिर भक्षक विभाग’ Hindu Religious and Charitable Endowments (HR&CE) Department को मद्रास हाईकोर्ट ने पिछली फरवरी में फटकारा कि राज्य के मंदिरों की अचल सम्पत्ति में से 50,000 एकड़ ज़मीन गायब कैसे हो गई। केस पढ़ कर पता चला कि ज़मीन भी ‘गायब’ होने वाली चीज़ है- घर की चाभी और नाक पोंछने के बाद रुमाल की तरह। 6 हफ्ते का समय मिला हिसाब-किताब पता लगाकर अदालत में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए। 6 महीने से भी अधिक बाद अक्टूबर में छाती चौड़ी कर मंदिर-भक्षक विभाग ने बताया कि महज़ 3,000 एकड़ ज़मीन वापिस निकाल ली है।

तिरुपति में सालों से जारी लूट

फ़िलहाल मुकुट-चोरी के लिए सुर्खियों में आया देश के सबसे सम्पन्न मंदिरों में से एक तिरुमला देवस्थानं यानी तिरुपति बालाजी मंदिर लुट रहे मंदिरों में भी शायद अव्वल है। 2009 में 300 सोने के सिक्के गायब हुए तो मंदिर के अधिकारियों ने पूरी जाँच कराने से इनकार कर आरोपित पुजारी को बलि का बकरा बना दिया। 2013 में बालाजी की सम्पत्ति में मौजूद आभूषण ₹45,000 करोड़ के थे, लेकिन यह जाँचना ज़रूरी नहीं समझा गया कि उनकी क्या हालत है। 2008 में सतर्कता विभाग (Vigilance Department) ने कोई ख़ुफ़िया जाँच की, कुछ और लोगों की गर्दन नपी (शायद इसलिए ताकि खेल के असली खिलाड़ियों को बचाया जा सके), लेकिन हिन्दुओं के पढ़ने के लिए जाँच रिपोर्ट नहीं मुहैया कराई गई।

वेदान्ता को कौड़ियों के भाव मंदिर की ज़मीन

2010 में ओडिशा की राज्य सरकार ने (वही सरकार, जिसने कुछ समय पहले ‘हिन्दू सेंटीमेंट्स’ की आड़ में अभिजित अय्यर-मित्रा को एक मज़ाकिया वीडियो के लिए जेल की हवा खिला दी थी) जगन्नाथ मंदिर की सैकड़ों एकड़ ज़मीन वेदान्ता फाउंडेशन को बेच दी। किससे पूछकर?

कश्मीर में पंडित ही नहीं, मंदिर भी लुटे

कश्मीर में भी पंडितों की संस्था ने हिन्दू मंदिरों की सम्पत्ति को भू-माफिया और अन्य ताकतों के इशारों पर मंदिर और ट्रस्ट की बजाय लोगों की निजी सम्पत्ति के तौर पर रजिस्टर किए जाने का आरोप लगाया। राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक हिन्दुओं को ही नहीं, Archaeological Survey of India की रिपोर्ट की भी झुठला दिया। 2013 के इस मामले में हिन्दुओं ने भूख हड़ताल से लेकर हर दरवाज़े के चक्कर काटने तक सारे करम कर डाले, लेकिन सरकार टस-से-मस नहीं हुई; सदन के पटल पर भी नहीं। 370 हटाने के अपने प्रशंसनीय कदम के बाद से कश्मीरी पंडितों को छोड़कर दलितों-व्यापारियों-मुस्लिमों आदि अन्य सबके हितों की दुहाई दे रहे गृह मंत्री-प्रधानमंत्री-राज्यपाल इस पर अपनी कृपा-दृष्टि डालेंगे?

पद्मनाभ स्वामी से भी चोरी

केरल के पद्मनाभ स्वामी मंदिर से भी चोरी हो चुकी है। 2016 में ₹186 करोड़ के 769 सोने के कलश गायब हैं। चाँदी की छड़ें गायब हैं। उस समय कॉन्ग्रेस की सरकार थी, और माकपा विपक्ष में थी। ज़ाहिर तौर पर कॉन्ग्रेस के लिए यह मुद्दा इसलिए नहीं होगा क्योंकि उसके समय का मामला है और माकपा ने तो सबरीमाला को नहीं छोड़ा, फिर यह तो पैसे का मामला है। यहाँ भी जवाब भाजपा-संघ को देना चाहिए कि केरल में, या देश के किसी भी हिस्से में, उन्होंने इस पर कितने मिनट ‘मन की बात’ की।

1,000 मंदिर एक झटके में हड़पे

ईश्वर को अफीम मानने वाली और सबरीमाला में हिन्दुओं की आस्था को धक्का पहुँचाने के लिए तत्पर खड़ी माकपा सरकार ने जब सितंबर 2017 में (सबरीमाला के एक साल पहले) 1,000 मंदिरों को हड़प लिया तो मुख्य विपक्षी दल कॉन्ग्रेस और हिन्दू राष्ट्र के पैरोकार संघ-भाजपा कहाँ थे? जनता द्वारा शुरू किए गए, स्वः-स्फ़ूर्त सबरीमाला आंदोलन का क्रेडिट लूटने के लिए दौड़ रहे इन दोनों खेमों को बताना चाहिए कि किसी चाय की टपरी पर नुक्क्ड़ सभा भी हुई इनकी ओर से इस मुद्दे पर?

‘वो मंत्री जी ने कहा था’

2006 में जस्टिस टिपणिस समिति ने सिद्धिविनायक मंदिर के पैसे की लूट को लेकर लिखा कि सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं-मंत्रियों ने सिफारिशें कर-कर के पैसा “गणपति बाप्पा” से नोंचा। भाजपा-कॉन्ग्रेस-शिवसेना-एनसीपी सभी बीएमसी या राज्य सरकार की मलाई इस कालखंड में चाट रहीं थीं। गंगा में खड़े होने को लेकर तो नेताओं का विश्वास नहीं हो सकता, लेकिन इन पार्टियों के अध्यक्ष यह हलफ़नामा दे सकते हैं अदालत में कि जाँच में इन पार्टियों से उस समय जुड़ा रहा एक भी नेता जाँच के फंदे में नहीं फँसेगा?

‘हमहूँ हैं लाइन में’

बिहार में नीतीश और भाजपा दोनों के समर्थक अक्सर गला छुड़ाने के लिए ‘सुशासन कुमार’ के पहले 5 “स्वर्णिम” सालों (2005-10) का हवाला देते हैं। और 2006 में बिहार के धार्मिक ट्रस्ट प्रशासक आचार्य किशोर कुणाल ने आरोप लगाया कि कुप्रबंधन और सरकारी हेराफेरी और हस्तक्षेप के चलते बिहार के मंदिरों ने ₹2,000 करोड़ गँवाए। क्या नीतीश सरकार इस स्थिति में है कि एक श्वेत-पत्र लाकर पूरे ₹2,000 करोड़ का ठीकरा अपने पूर्ववर्ती लालू-राज, जंगल-राज के सिर फोड़ दे?

‘कट्टर हिन्दू शेरनी’ सो रहा है

बात-बेबात के मुद्दों पर तीर-कमान हो जाने वाले हिंदूवादी हिन्दू सभ्यता के अस्तित्व के लिए ज़रूरी सबसे अहम स्तम्भों, हमारे मंदिरों, हमारे देवताओं, हमारी परम्पराओं की रक्षा और अक्षुण्णता को लेकर बहुत ही ज़्यादा उदासीन हैं। हर बात पर भारत के “हिन्दू राष्ट्र” हो जाने का इंतज़ार करने की दुहाई देने वाले, “सेक्युलर” राष्ट्र-राज्य का रोना रोने वाले न केवल आस्था के, आध्यात्म के, शक्ति के (सामाजिक भी, सांस्कृतिक भी, आध्यात्मिक भी) केंद्रों पर उसी आसुरिक-सेक्युलर साम्राज्य के हमले पर उदासीन रहते हैं, बल्कि तालियाँ पीटते हैं, यह समझकर कि सरकार कोई बहुत अच्छा काम कर रही है।

किसी एक-आध मंदिर के स्थानीय हाथों में कुप्रबंधन को बहाना बनाकर न केवल सरकार मंदिरों पर डाका डालती है, बल्कि आम हिन्दू इसमें तालियाँ बजा-बजा कर सहायता करता है, ऐसा करने वाले को वापिस सत्ता में लाकर संदेश देता है कि इस काम का जनता इनाम देती है। और जब उसी मंदिर के साथ सबरीमाला जैसा शील-भंग होता है, पद्मनाभ स्वामी, सिद्धिविनायक जैसी डकैती होती है, हज़ारों एकड़ ज़मीन गायब हो जाती है, चर्च ग्रस लेता है तो हम बैठ कर कभी कल्कि अवतार के आने की प्रतीक्षा करते हैं और कभी नेताओं को भगवान विष्णु का 14वाँ-25वाँ अवतार बताकर खुद को भरमाते फिरते हैं।

पॉलिटिकल जुवेनाइल की तरह कर रहे राहुल गॉंधी, चुनाव आने पर लोग जूतों से मारेंगे: J&K के राज्यपाल

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी कश्मीर मसले पर लगातार घिरते ही जा रहे हैं। हालाँकि आज सुबह एक ट्वीट में कश्मीर को भारत का अंदरूनी मामला बताकर अपने बिखेरे हुए रायते को उन्होंने समेटने की कोशिश की थी। लेकिन, इससे उनके बयान पर विवाद थमता नहीं दिख रहा। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ‘पॉलिटिकल जुवेनाइल’ जैसा बर्ताव कर रहे हैं और आर्टिकल 370 का समर्थन करने के कारण चुनाव के वक्त लोग उन्हें जूते मारेंगे।

मलिक ने कहा कि राहुल गाँधी ने कश्मीर पर बचकाना बयान दिया है। राजनीतिक रूप से राहुल गाँधी अभी बच्चे हैं और एक ‘पॉलिटिकल जुवेनाइल’ की तरह बर्ताव कर रहे हैं। साथ ही कहा कि कॉन्ग्रेस ने आज तक जम्मू-कश्मीर पर अपना रुख साफ नहीं किया है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मलिक ने कहा “राहुल गाँधी एक परिपक्व नेता की तरह व्यवहार नहीं कर रहे हैं। मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि जब उनके नेता संसद में कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बता रहे थे, तब राहुल को जिम्मेदार नेता की तरह उन्हें रोकना चाहिए था और खुद खड़े होकर बोलना चाहिए था कि कश्मीर पर कॉन्ग्रेस की राय वही है जो पूरे देश की है। लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए।”

सत्यपाल मलिक ने यह भी कहा कि जनता आर्टिकल 370 का समर्थन करने के लिए कॉन्ग्रेस को माफ नहीं करेगी।

मलिक ने कहा, “मुझे नहीं बताना चाहिए लेकिन जिस वक्त देश में चुनाव आएगा, उनके विरोधियों को कुछ कहने की जरूरत नहीं होगी। वे सिर्फ कह देंगे कि ये 370 के हिमायती हैं, लोग जूतों से मारेंगे।”

राज्यपाल मलिक ने राज्य के युवाओं के लिए नौकरियों की घोषणा भी की है। उन्होंने कहा कि अगले दो-तीन महीनों में राज्य के नौजवानों को 50 हजार नौकरियों की सौगात मिलेगी। राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं से अपील की कि वो इन नौकरियों की तैयारी में पूरे जोश से जुड़ जाएँ।

‘मुस्लिम महिलाएँ ऐसे कपड़े नहीं पहनती, कलमा पढ़कर दिखाओ’

सोशल मीडिया पर एक विडियो सामने आया है जिसमें पाकिस्तान में धर्म के नाम पर होने वाली महिला विरोधी गतिविधियों का नमूना देखने को मिलता है। दरअसल, एक महिला तुर्किश बाइकर से एक पाकिस्तानी फल बेचने वाला कलमा पढ़ने की बात करते हुए नजर आ रहा है। फल विक्रेता महिला से इसलिए कलमा पढ़वाना चाहता है क्योंकि उसके अनुसार आसिल ओज़बे नाम की यह महिला अपने पहनावे से ‘मुस्लिम’ नहीं लगती।

वीडियो में देखा जा सकता है कि फल बेचने वाला चाहता है कि आसिल कलमा पढ़कर यह साबित करे कि वह मुस्लिम है। उसको आसिल के मुस्लिम होने पर इसलिए भी संदेह है क्योंकि उसने इस्लाम के अनुसार कपड़े नहीं पहने हैं।

आसिल के कलमा पढ़ने के बाद फल बेचने वाला दावा करता है कि ‘मोहम्मद’ के अनुसार, महिलाओं को ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए, जैसे कि बाइकर आसिल ने पहने हुए हैं। उसने कहा- “मोहम्मद कहते हैं कि ऐसे कपड़े किसी को नहीं पहनने चाहिए। तुम एक औरत हो। मुस्लिम ऐसे कपड़े नहीं पहनते हैं क्योंकि सब लोग आपका शरीर देख लेते हैं। महिलाओं को ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए।”

यह वीडियो इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान में महिलाओं की क्या स्थिति है। एक ओर पकिस्तान जहाँ कश्मीर मामले पर मानवाधिकारों के फर्जी दावे कर रहा है, वहीं पाकिस्तान में मानवाधिकारों की कितनी इज्जत है यह इस वीडियो से स्पष्ट होता है।

अयोध्या मामला: ‘बाबर ने नहीं औरंगजेब ने तोड़ा था राम मंदिर, तीन गुंबद वाली इमारत मस्जिद नहीं’

अयोध्या मामले में बुधवार (अगस्त 28, 2019) को सुप्रीम कोर्ट में 14वें दिन की सुनवाई पूरी हुई। रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने दलीलें रखते हुए कहा कि विवादित ढाँचा बाबर ने बनवाई, इसका कोई सटीक प्रमाण नहीं है। इसके लिए उन्होंने बाबरनामा, आईने अकबरी, हुमायूँनामा, तुजुक ए जहाँगीरी जैसी ऐतिहासिक पुस्तकों का हवाला दिया। साथ ही उन्होंने कहा की मंदिर औरंगजेब ने तोड़ा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि तीन गुंबद वाली इमारत मस्जिद नहीं थी। मस्जिद में जिस तरह की चीज़ें ज़रूरी होती हैं, वो उसमें नहीं थी। समिति ने कहा कि विवादित इमारत बनवाने वाला कौन था, इस पर संदेह है। मीर बाकी नाम का बाबर का कोई सेनापति था ही नहीं।

राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने सुनवाई की शुरुआत में बाबरनामा के कुछ अंश पढ़े और कहा कि कोई भी ऐतिहासिक दस्तावेज ऐसा नहीं है जो यह बताता हो कि विवादित स्ट्रक्चर (बाबरी मस्जिद) 520 ईस्वी में बना हो। बाबरनामा में मीर बाकी के बारे में ज़िक्र नहीं है। बाकी तश्किन्दी 1529 में अवध (अयोध्या) से बाबर से मिलने गया था। उन्होंने कहा कि बाबर सिर्फ इस बात से वाकिफ़ था कि ज़मीन वक़्फ़ की है।

पीएन मिश्रा ने कहा कि निकोलो मनूची ने एक किताब लिखी थी जो इटालियन था और औरंगज़ेब का कमांडर था। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि औरंगज़ेब का इटालियन कमांडर था? पीएन मिश्रा ने जवाब देते हुए कहा कि- हाँ, औरंगज़ेब का कमांडर इटालियन था।

वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि मंदिर बाबर ने नहीं, औरंगजेब ने तोड़ा था। इस पर जस्टिस एसए बोबडे ने पूछा- “आपसे इसका क्या लेना-देना है? जन्मस्थान पर आपका हक कैसे है, यह स्पष्ट करें।” इस पर मिश्रा ने जवाब देते हुए कहा- “मेरा दावा है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी। अगर अदालत इस दावे को स्वीकार करता है तो सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा पूरी तरह से गलत साबित होता है।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसने कहा कि ऐसे सबूत नहीं मिले हैं, जो सिद्ध करते हैं कि बाबर ने मस्जिद का निर्माण नहीं किया?

इसके उत्तर में राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि इस्लामिक शासन में तीन तरह के शासन होते हैं- दारुल इस्लाम, दारुल हरब और दारुल अमन। मिश्रा ने बताया कि दारुल इस्लाम में मुस्लिम शासक दूसरे मुस्लिम शासक से जंग करके उसकी सम्पत्ति को जीत सकता है, लेकिन उसका स्टेट्स नहीं बदलता है।

उन्होंने कहा कि आगरा, दिल्ली और अवध में इब्राहिम लोधी का शासन था। बाबर ने अयोध्या में गवर्नर के ज़रिए राज किया। भारत को दारुल हरब कहा जाता है। इसमें दूसरे शासक से कहा जाता था कि या तो वह इस्लाम कबूल कर ले या दूसरे धर्म के लोगों पर जज़िया लागू किया जाता था। दारुल अमन में दूसरे धर्म के लोगों से जंग नहीं की जाती और उनको उनके धर्म का पालन करने किया जाता था।

SC/ST एक्ट: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जाति के कारण हुआ अपराध, साबित करना होगा

SC/ST एक्ट को लेकर उच्चतम न्यायालय ने महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (2) (v) के अंतर्गत दोषसिद्धि के लिए अभियोजन द्वारा यह साबित करना अनिवार्य है कि पीड़ित के साथ अत्याचार किए जाने का कारण विशुद्धतः जातिगत था। केवल पीड़ित के अनुसूचित जाति या जनजाति का सदस्य होने भर से मामला SC/ST एक्ट का नहीं हो जाता।

हत्या के साथ जुड़ा SC/ST एक्ट का मुकदमा

मध्य प्रदेश के ‘खुमान सिंह बनाम मध्य प्रदेश राज्य’ मामले में ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय दोनों ने यह निष्कर्ष निकाला था कि चूँकि मृतक की हत्या के पहले आरोपित ने उसे खंगार जाति का होकर भी ठाकुरों के मवेशी हँका कर भगाने की ‘जुर्रत’ को लेकर कथित तौर पर डाँटा था, अतः यह जातिवादी हिंसा का मामला था और इसमें SC/ST एक्ट का मुकदमा बनता है। इसके बाद आरोपितों को ट्रायल कोर्ट में उम्रकैद की सजा हुई जिसे उच्च न्यायालय ने भी बरक़रार रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा

लेकिन अभियुक्तों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति आर बानुमति और एएस बोपन्ना की खंडपीठ ने मामले में जातिवादी एंगल के लिए पर्याप्त साक्ष्य न पाते हुए SC/ST एक्ट हटाने का निर्णय दिया। इस फैसले में उन्होंने ‘दिनेश उर्फ़ बुद्ध बनाम राजस्थान राज्य’ मामले को भी उद्धृत किया।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों पर चल रहा 302 का हत्या का मुकदमा भी आईपीसी की धारा 304 खंड II (गैर-इरादतन हत्या) का कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उम्र कैद को बदल कर अब तक जेल में बिताए हुए समय के बराबर कर दिया, यानी अभियुक्त सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति मिलने और कुछ औपचारिकताओं की पूर्ति के बाद आज़ाद होंगे।

नेताओं और राजनयिकों के फेल होने के बाद Pak ने बूढ़े क्रिकेटरों को मैदान में उतारा

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का हर एक पैंतरा नाकाम हो रहा है। न ही उसके सेना की कठपुतली प्रधानमंत्री इमरान खान और उनका मंत्रिमंडल राजनीतिक तौर पर अपने लोगों को यकीन दिला पा रहा है और न ही उसके राजनयिक कूटनीति का दाँव-पेंच कामयाब हो पा रहा है। ट्रम्प इमरान खान से अपने घर (White House) पर बात करने के बाद कश्मीर पर गच्चा दे गए और उसे हथियार बेच कर बना नया ‘बेस्ट फ्रेंड’ भी हिंदुस्तान के पाले में खड़ा हो गया।

ऐसे में हर मोर्चे पर मुँह की खाने के बाद अब पाकिस्तान ने मैदान में उतारा है बूढ़े हो चुके पूर्व क्रिकेटरों को, जो लोगों को सोशल मीडिया पर बरगला रहे हैं। इनमें से एक हैं शोएब अख्तर को खेलते समय सचिन के ‘काँपते’ पैर देखने का दावा करने वाले पाकिस्तान के ‘चिर-युवा’ शाहिद अफरीदी और दूसरे हैं 1993 के मुंबई बम धमाके कराने वाले डॉन दाऊद इब्राहिम के समधी जावेद मियाँदाद।

शाहिद अफरीदी ने दावा किया है कि वे शुक्रवार (30 अगस्त) को दोपहर 12 बजे मजार-ए-कैद में मौजूद रहेंगे। पाकिस्तान उस घंटे को “कश्मीर का घंटा” (Kashmir Hour) के रूप में मना रहा है। उन्होंने अन्य लोगों से भी शामिल होने की अपील की। साथ ही उन्होंने जल्दी ही LOC पर जाने का भी ऐलान किया है।

इसके अलावा जावेद मियाँदाद ने भी ट्विटर पर घोषणा की कि वे भी LOC पर जाएँगे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर की आड़ में भी हिंदुस्तान पर निशाना साधने की कोशिश की।

Pak ने संघर्ष की ओर बढ़ाए कदम, कर रहा मिसाइल टेस्ट की तैयारी

जम्मू-कश्मीर के नाम पर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने से पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा। एक तरफ उसके प्रधानमंत्री इमरान खान संसद से परमाणु युद्ध की धमकी दे रहे हैं और यह ज्ञान भी बाँच रहे हैं कि इस युद्ध में कोई विजेता नहीं होगा, दूसरी ओर पाकिस्तान ने नए मिसाइल परीक्षणों की तैयारी शुरू कर दी है। ANI के मुताबिक पाकिस्तान ने इसके लिए ज़रूरी NOTAM (notice to airmen) प्रोटोकॉल और नौसैनिक चेतावनी जारी कर दी है।

कराची में हो सकता है परीक्षण

यह संभावित परीक्षण सिंध प्रान्त के कराची में सम्भव हो सकता है। कराची के पास पाकिस्तानी सेना की सोनमियानी फ्लाइट टेस्ट रेंज स्थित है। तीन दिन के लिए कराची की एयरस्पेस को भी बंद कर दिया गया है। स्थानीय मीडिया के हवाले से न्यूज़ 18 ने दावा किया है कि पाकिस्तान के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (CAA) ने बुधवार (28/08/2019) को एक NOTAM जारी किया है जिसमें कराची हवाई क्षेत्र के तीनों मार्ग 28 अगस्त से 31 अगस्त तक बंद रहने की सूचना है।

कश्मीर में 2-3 महीने में 50 हजार नौकरियाँ, कुपवाड़ा, हंदवाड़ा में मोबाइल सेवा बहाल

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार के मीडिया से बात करते हुए कई बड़े ऐलान किए।
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि आने वाले 2-3 महीने में 50 हजार नौकरियाँ देंगे। इसके साथ ही हालात सामान्य होने के चलते संचार व्यवस्था के लिए कुपवाड़ा और हंदवाड़ा जिलों (कश्मीर के) में मोबाइल फोन कनेक्टिविटी शुरू की जा रही है। उन्होंने बताया कि जल्द ही अन्य जिलों में भी सेवा बहाल कर दी जाएगी।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि राज्य में विकास के रास्ते खुले हैं। सरकार के लिए हर कश्मीरी की जान कीमती है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद किसी की जान नहीं गई। कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ है, केवल कुछ हिंसक घायल हुए हैं, उनको भी कमर से नीचे की चोटें हैं। उन्होंने कहा कि फोन, इंटरनेट आतंकियों के काम आते हैं। ये उनके लिए हथियार हैं। फोन, इंटरनेट से अफवाह फैलती है। राज्य में हालात सामान्य है। कश्मीर के लिए एक-दो दिन में बड़े ऐलान होंगे।

थरूर पब्लिसिटी के भूखे, जयराम के ही कारण डूबा UPA-2: वीरप्पा मोइली का अपने ही साथियों पर निशाना

मनमोहन सिंह की यूपीए-2 सरकार में मंत्री रहे जयराम रमेश और शशि थरूर पर उनके कैबिनेट साथी रहे कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली जमकर बरसे हैं। मोइली ने तिरुवनंपुरम से पार्टी सांसद शशि थरूर को पब्लिसिटी का भूखा बताया है। वहीं, जयराम को पॉलिसी पैरालिसिस के लिए जिम्मेदार बताते हुए कहा है कि उनके कारण ही यूपीए-2 डूबी थी।

मोइली यूपीए सरकार के दौरान पेट्रोलियम, क़ानून और कॉरपोरेट मामले जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके हैं, जबकि रमेश उस यूपीए-2 में पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे महकमों को सँभाला था।

रमेश ने हाल ही में विपक्षी नेताओं को सलाह देते हुए कहा था कि हमेशा मोदी को विलेन बनाना काम नहीं आने वाला और सरकार के अच्छे क़दमों की तारीफ़ की जानी चाहिए। इसके बाद कॉन्ग्रेस के लोग ही उनके विरोध में उतर आए हैं। मोइली ने कहा कि रमेश ने सत्ता में रहते हुए यूपीए-2 सरकार के सिद्धांतों से कई बार समझौता किया।

मोइली ने कहा कि जयराम रमेश पर्यावरण मंत्री थे और ग्रामीण विकास मंत्रालय भी उन्हीं के पास था। बकौल मोइली, जयराम रमेश ने इंडस्ट्रीज को काफ़ी नुक़सान पहुँचाया और कंपनियों को ज़मीन अधिग्रहण करने में बाधाएँ उत्पन्न की। मोइली ने कहा कि रमेश के कार्यकाल में पर्यावरण मंत्रालय में सारी चीजें नकारात्मक ही हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडस्ट्रीज को पर्यावरण क्लीयरेंस देने के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई। मोइली ने थरूर को पब्लिसिटी का भूखा बताते हुए कहा कि वो तो कभी गंभीर नेता रहे ही नहीं।

कहा जा रहा है कि शशि थरूर, अभिषेक मनु सिंघवी और जयराम रमेश के बयानों से कॉन्ग्रेस का आलाकमान भी नाराज़ चल रहा है। केरल कॉन्ग्रेस ने तो थरूर से उनके बयान पर सफाई भी माँगी है। थरूर ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी के बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि हर समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खलनायक की तरह पेश करना सही नहीं है। उनके अच्छे काम के लिए उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए। इससे उनकी आलोचना को विश्वसनीयता मिलेगी।

इससे पहले कुमारी शैलजा और अधीर रंजन चौधरी सहित कई कॉन्ग्रेस नेता भी रमेश के बयान की आलोचना कर चुके हैं। मोइली ने कहा कि जयराम रमेश ऐसे बयान देकर कॉन्ग्रेस का नुक़सान पहुँचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि रमेश ने भाजपा से समझौता कर लिया है। मोइली ने कहा कि ऐसे बयान देने वाले नेताओं पर कॉन्ग्रेस आलाकमान को कार्रवाई करनी चाहिए।

मोइली ने जयराम रमेश के बारे में कहा कि ऐसे नेता पार्टी जब जीतती है तो सत्ता भोगते हैं और जब पार्टी विपक्ष में रहती है तो सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में बोलते हैं। मोइली ने कहा कि जो नेता कॉन्ग्रेस छोड़ कर जाना चाहते हैं, वे सीधे चले जाएँ और पार्टी के भीतर रह कर पार्टी की विचारधारा को नुक़सान न पहुँचाएँ।

सील मकान का ताला तोड़ने के लिए AAP MLA हाजी इशराक पर मामला दर्ज

आम आदमी पार्टी के विधायक हाजी इशराक पर सीलिंग तोड़ने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नगर निगम ने ब्रह्मपुरी इलाके में एक मकान को सील किया था, जिसका ताला हाजी इशराक ने रविवार को तोड़ दिया।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद विधायक हाजी इशराक और मकान मालिक के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज किया गया। आजतक की खबर के मुताबिक इशराक ने उनसे बातचीत में इस बात को स्वीकारा कि सीलिंग उन्होंने ही तोड़ी है। लेकिन अपनी इस हरकत को वह गलत नहीं मानते।

ताजा रिपोर्ट के अनुसार सीलमपुर के ब्रह्मपुरी इलाके में ईडीएमसी ने फिर से इस घर को सील कर दिया है। इस बार घर के तीन मालों में हुए अवैध निर्माण को भी तोड़ दिया है।

बता दें कि बीते रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था जिसमें हाजी इशराक खान, मकान मालिक के साथ खुद सील तोड़ते हुए दिखाई दे रहे थे। वीडियो वायरल होने के बाद मीडिया से बातचीत में इशराक ने बताया था कि जिस मकान की सीलिंग तोड़ी गई है, वहाँ पर सीलिंग लगाना गलत था। जिस मकान पर सील लगाई गई थी उसके पड़ोस में रहने वाले एक पुलिस वाले ने मकान मालिक से घूस माँगी थी, जो मकान मालिक ने नहीं दी। इसलिए पुलिस वाले ने नगर निगम के साथ मिलकर मकान सील करवा दिया।

वहीं, मकान मालिक सिंह त्यागी की मानें तो वह 40 वर्ष से उस जगह पर रह रहा था, लेकिन बीते 2 साल से घूस न मिलने से उसका पड़ोसी उसे परेशान करने लगा। मकान मालिक की मानें तो उसका घर अवैध निर्माण नहीं है। उसने कई बार अधिकारियों से गुहार भी लगाई थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस बीच उसने अपनी दिक्कत इलाके के विधायक हाजी इशराक को बताई और उन्होंने खुद आकर मकान पर लगी सीलिंग को हटा दिया।