इलाहबाद हाईकोर्ट ने ब्लैक मनी मामले में प्रोपगेंडा वेबसाइट दी क्विंट के संस्थापक राघव बहाल की रिट रद्द कर दी है, जिसमें उन्होंने आयकर विभाग के कार्रवाई को चुनौती दी थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रडार में आने के बाद से ‘द क्विंट’ के मालिक ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उन्हें कारण बताओ नोटिस और उसके बाद की गई कार्रवाइयों को चुनौती दी थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, राघव बहल का कहना है कि कथित विदेशी संपत्ति के संबंध में एक विदेशी बैंक खाते में किए गए सभी भुगतान उसके वैध बैंक खातों से स्थानांतरित किए गए थे और विदेशी बैंक खातों में हस्तांतरित धन का विधिवत खुलासा किया गया था। उन्होंने कहा कि विदेश में संपत्ति के सम्बन्ध में उनके पास आय के वैध स्रोत हैं।
बहल ने अदालत के समक्ष कहा कि कि लंदन में संपत्ति की खरीद का खुलासा उन्होंने 2018-19 के आयकर रिटर्न में किया था। आईटी विभाग ने बहल पर विभाग की आँखों में धूल झोंकने के मामले में कार्रवाई शुरू की थी, इस पर राघव ने अदालत के में कहा कि उनके खिलाफ अभियोजन शुरू करने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई से इनकार कर दिया गया था।
ED का ये मामला आयकर विभाग की मनी लॉन्ड्रिग एक्ट के तहत फाइल की गई चार्जशीट पर आधारित है। इस चार्जशीट में आयकर विभाग ने बहल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लंदन में 2.38 करोड़ मूल्य की संपत्ति खरीदी, जिसके बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।
आयकर विभाग ने हाल ही में बहल के खिलाफ मेरठ की एक अदालत कालाधन-निरोधक कानून या कालाधन (अज्ञात विदेशी आय और संपत्ति) एवं कर आरोपण कानून, 2015 के प्रावधानों के तहत आरोप पत्र दायर किया था।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को ही ट्रोल कर दिया। आईसीसी ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सचिन तेंदुलकर और इंग्लैंड के ऑलराउंडर बेन स्टोक्स की एक तस्वीर शेयर की। समस्या तस्वीर में नहीं थी लेकिन आईसीसी ने जो कैप्शन लिखा, उससे लोग नाराज़ हो गए।आईसीसी ने ये तस्वीर क्रिकेट वर्ल्ड कप के आधिकारिक पेज से शेयर की। कैप्शन में दोनों खिलाड़ियों का परिचय देते हुए लिखा गया- “विश्व का सर्वकालिक महानतम क्रिकेटर और सचिन तेंदुलकर“।
— Cricket World Cup (@cricketworldcup) July 14, 2019
सोशल मीडिया पर लोग इस बात से नाराज़ दिखे कि आईसीसी ने बेन स्टोक्स को विश्व का सर्वकालिक महानतम क्रिकेटर बताया और सचिन तेंदुलकर को ट्रोल किया। हाल ही में स्टोक्स ने 135 रनों की नाबाद पारी खेल कर इंग्लैंड को तब जीत दिलाई थी, जब दूसरे छोर से विकेट का पतझड़ लगा था। स्टोक्स ने एशेज सीरीज के मैच में चौथी पारी में ये कारनामा किया।
इसके बाद स्टोक्स की इस पारी को बेस्ट टेस्ट परियों में से एक शुमार किया जाने लगा। एक यूजर ने आईसीसी को लिखा कि तुम सही हो क्योंकि सचिन तो क्रिकेटर हैं ही नहीं, वह तो क्रिकेट के भगवान हैं।
Yes, someone who couldnt even achieve 20% is a All time great for you? What else to expect from Pakistani Handler.
एक अन्य यूजर ने लिखा कि एक व्यक्ति ने सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी के आँकड़ों को शेयर करते हुए लिखा कि आप उस व्यक्ति से उनकी तुलना कर रहे हो, जिसने सचिन के रनों के 20% बराबर रन भी नहीं बनाए हैं।
Agree, because Sachin isn’t a cricketer but God of cricket.
एक अन्य ट्विटर यूजर ने तस्वीर के माध्यम से मज़ाकिया दावा किया कि आईसीसी का ट्विटर अकाउंट चलाने वाले व्यक्ति ने ये तस्वीर पोस्ट करने से कुछ ही मिनटों पहले नशे का सेवन किया था
बता दें कि अपनी ताज़ा पारी के बाद बेन स्टोक्स की लोकप्रियता में ख़ासा इजाफा हुआ है। कुछ देर के लिए तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय गायिका टेलर स्विफ्ट से भी ज्यादा बार सर्च किया गया।
छत्तीसगढ़ के काँकेर में ज़िले में नक्सलियों ने मंगलवार (अगस्त 27, 2019) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी। 40 वर्षीय संघ कार्यकर्ता दादू राम कोरटिया को नक्सलियों ने पहले तो आवाज़ देकर घर से बाहर निकाला और फिर गोली मार कर हत्या कर दी। दुर्गुकोंदल स्थित कोंडेगाँव में हुई इस घटना की पुलिस ने भी पुष्टि की है। ख़बर के अनुसार, रात 10.30 के क़रीब 25 के लगभग नक्सलियों ने उनके घर के बाहर जमा होकर उन्हें आवाज़ लगाई।
दादू मैकेनिकल इंजीनियर थे। उन्हें साल भर पहले भी मारने का प्रयास किया गया था। सम्भलपुर के सरपंच रहे दादू की पत्नी पेशे से नर्स हैं। नक्सलियों ने इससे पहले उन्हें कई बार हिदायत दी थी कि वे सुरक्षा बलों से नजदीकी न बढ़ाएँ। वह काफ़ी धार्मिक विचार वाले व्यक्ति थे और इलाक़े में उन्होंने कई मंदिर भी बनवाए हैं।
गोली मारने से पहले नक्सलियों ने संघ कार्यकर्ता पर कुल्हाड़ी से वार भी किया। घटना के समय दादू राम की पत्नी भी वहीं पर मौजूद थी। एक और जानने लायक बात है कि नक्सलियों ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने को लेकर विरोध जताया। उन्होंने घटनास्थल पर इससे सम्बंधित पर्चे भी छोड़े। नक्सलियों ने पर्चे में भाजपा और आरएसएस को दलित और आदिवासी विरोधी बताया।
नक्सलियों ने अपने पर्चे में लिखा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करना मोदी सरकार की तानाशाही और हिटलरशाही को दिखाता है। नक्सलियों ने दादू राम को मारने का कारण बताते हुए लिखा कि वह भाजपा और संघ से जुड़े हुए थे, इसीलिए उन्हें मारा गया। नक्सलियों ने केंद्र सरकार के निर्णय के ख़िलाफ़ 30 अगस्त को बंद का भी ऐलान किया है।
हाल ही में कुछ दिनों पहले कांकेर में ही कोयलीबेड़ा में नक्सलियों ने ‘जन अदालत’ लगा कर एक युवक की हत्या कर दी थी। उक्त युवक पर पुलिस की मुखबिरी का आरोप लगा कर उसे पीट पाट कर मार डाला गया था। उसकी लाश जंगल से बरामद हुई थी।
पाकिस्तान भारत की पीठ पीछे वार करने की आदतों से बाज नहीं आ रहा है। वह लगातार जम्मू-कश्मीर में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। लेकिन संतोष की बात ये है कि घाटी में तैनात भारतीय सेना के जवान भी शांत नहीं बैठे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आज भारतीय सेना ने पाक की बॉर्डर एक्शन टीम के नापाक इरादों को त्वरित कार्रवाई करके ध्वस्त कर दिया।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार सीमा पार पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम नापाक हरकत को अंजाम देने की फिराक में थी, जिसके लिए नियंत्रण रेखा पर उन्होंने 100 कमांडो को भी तैनात किया था।
लेकिन अपने मनसूबों में वह कामयाब हो पाते इससे पहले भारतीय सेना को उनके इरादों की भनक लग गई और उनके कुछ करने से पहले भारतीय जवानों ने पाकिस्तान के 2 कमांडो ढेर कर दिए। सेना की इस कार्रवाई में कई अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बैट के इन कमांडोज के दस्ते में पाकिस्तानी सेना के जवानों के अलावा जैश के आतंकी भी शामिल थे।
इसके अलावा बता दें कि पाकिस्तान सेना लगातार उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का प्रयास कर रही है। जिसका उसे भारतीय सेना से मुँहतोड़ मिल रहा है। उसने अपनी इन्हीं घटिया हरकतों के चलते कल यानी मंगलवार को सुंदरबनी सेक्टर के रिहायशी इलाकों में गोलीबारी भी की थी।
ज़्यादा दिन नहीं हुए हैं जब नाकाम मुल्क पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद पर लंदन में अंडे फेंके गए और उनकी बेइज़्ज़ती करने वाले नौ-दो-ग्यारह भी हो गए। इसके बाद ‘जुलाहे से पार न पाए, गदहे के कान मरोड़े’ की तर्ज पर खिसियाए हुए उनके मित्रों ने गली के टपोरियों की तरह घटना का वीडियो बना रहे पत्रकार पर हमला कर उसके फ़ोन की छिनैती की, ताकि “भाई की इज्जत का भाजीपाला” कोई और देख ले, उससे पहले वीडियो डिलीट किया जा सके।
और अब अपने-आप को अंडों के ‘हथगोलों’ से बचा पाने में नाकाम पाकिस्तानी रेल मंत्री शेख रशीद नाभिकीय हथियारों से संपन्न देशों हिंदुस्तान-पाकिस्तान के युद्ध की घोषणा कर रहे हैं। घोषणा ही नहीं कर रहे, बाकायदा तारीख भी बता रहे हैं। उनके मुताबिक 1-2 महीने में, यानी अक्टूबर-नवंबर तक, हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच जंग की शुरूआत हो सकती है।
BIG BREAKING: Pakistan Railways Minister Sheikh Rashid predicts #Pakistan– #India war in #October#November, While addressing media in #Rawalpindi, he said that decisive time for Kashmir’s struggle has come. “This is going to be the last war between both countries.” pic.twitter.com/oFgDoe3jVo
‘दुनिया टीवी’ के मुताबिक शेखी बघारते हुए शेख रशीद ने एक सेमिनार में दावा किया कि वे हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच युद्ध होता देख रहे हैं और अपनी कौम को तैयार करने (सेमिनार में ) आए हैं। उन्होंने धमकी भी दी कि पाकिस्तानी सेना के पास जो हथियार हैं, वे दिखाने के लिए नहीं, इस्तेमाल करने के लिए हैं।
POK दौरे की घोषणा
शेख रशीद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर मामले को उनकी सरकार बार-बार संयुक्त राष्ट्र में उठाती रहेगी। इसके अलावा गुलाम कश्मीर पर अपनी चौधराहट को फिर से याद दिलाने के लिए उन्होंने POK का दौरा करने की घोषणा भी की है।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। समाचार एजेंसी ANI ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक लड़के को राहुल गाँधी को Kiss करते हुए देखा जा रहा है। यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है।
दरअसल, केरल में बाढ़ राहत कार्यों का जायजा लेने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड पहुँचे कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को एक अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा। वीडियो में देखा जा सकता है कि अपनी कार में बैठकर मीडिया से बात कर रहे राहुल गाँधी के पास अचानक एक लड़का पहुँचा और उनको Kiss कर लिया। लड़के की इस हरकत के बाद राहुल गाँधी मुस्कराने लगे।
वीडियो में राहुल गाँधी लोगों से हाथ भी मिला रहे हैं कि तभी नीली शर्ट पहने एक युवक आता है और पहले हाथ मिलाता है और फिर गले लगाते हए राहुल गाँधी के गालों को चूम लेता है। तभी वीडियो फ्रेम से बाहर किसी ने इस युवक को खींचकर पीछे किया है। इस घटना के बाद भी राहुल गाँधी मुस्कुराते हुए लोगों से हाथ मिलाते और हाथ हिलाते नजर आते हैं।
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास मॉब लिंचिंग की एक घटना सामने आई है। हेडफोन की कीमत पर हुई बहस को लेकर बदमाशों ने एक 27 वर्षीय मदरसा शिक्षक को पीट-पीटकर मार डाला। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ युवक शिक्षक को बेरहमी से पीट रहे हैं, इस दौरान उसने भागकर जान बचाने की कोशिश भी की लेकिन उसे पकड़ लिया गया।
मॉब लिंचिंग की इस घटना में मदरसा शिक्षक की मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (अगस्त 26, 2019) रात को रेलवे स्टेशन के एग्जिट गेट से बाहर निकल रहा उत्तर प्रदेश के शामली का रहने वाला कारी ओवैस एक दुकान पर हैडफोन लेने के लिए रुका। इसी दौरान उसकी दुकानदार से बहस हो गई।
पीड़ित की पहचान उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले कारी ओवैस के रूप में हुई है। वह ग्रेटर नोएडा के एक मदरसे में पढ़ाता था।
कारी ओवैस ने मोबाइल की लीड को पैकिंग से निकाल लिया था, जिसके बाद दुकानदार ने लीड वापस लेने से मना कर दिया। दुकानदार ने कहा कि सामान खोल दिया है और अब इसे वापस नहीं लेंगे। लेकिन कारी सामान वापस करने पर अड़ा हुआ था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हो गया।
दोनों में बहस होते देख और दुकानदार भी मौके पर पहुँच गए और युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। गंभीर हालत में युवक को अरुणा आसफ अली अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज करने के बाद दो दुकानदारों लल्लन और अय्यूब को हिरासत में ले लिया है।
डीसीपी (नॉर्थ) हरेंद्र सिंह के अनुसार, “सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और युवक को अरुणा आसफ अली हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ओवैस को लल्लन और उसके साथी अय्यूब ने मारा था।”
पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (IPC Section 304) के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। कारी के परिवार वाले इसे हत्या का मामला बता रहे हैं जबकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही स्थिति साफ हो पाएगी।
हालाँकि, चश्मदीदों का कहना है कि कारी को हेडफोन पसंद नहीं आया था और वह वहाँ से जाने लगा। लेकिन तभी दुकानदारों ने उसे पकड़ लिया और जमकर पीटा।
कहते हैं कि कलि काल में एक महान व्यक्ति का अभ्युदय हुआ जो हर मामले का जानकार हुआ करता था। वो जो कह देता था, वही परम सत्य हुआ करता था। वो टीवी नामक यंत्र से रात के नौ बजे प्रवचन किया करता था। उसके भक्तों की संख्या बढ़ती गई और एक समय आया कि वो हर भक्त की जेब में घुस गए। भक्तों के मन में और भी उन्माद भरा, वो और भी आनंदित होते गए। फिर महान व्यक्ति ने फेसबुक नामक जगह पर अपने प्रवचन लिखने शुरु किए और कमेंट में ‘आह ब्रो-वाह ब्रो’ की कामुक आहें लिखी जाने लगीं।
चूँकि भक्तों ने इनकी हर बात को परम सत्य जाना, तो कालांतर में श्री कुमार ने अपने प्रवचन में प्रपंच का प्रतिशत बढ़ाना शुरु किया। पहले पाँच प्रतिशत, फिर दस और कभी-कभी तो पूरा का पूरा प्रवचन ही प्रलाप हुआ करने लगा। भक्त मग्न थे। जबकि श्री-श्री 1008 श्री रवीश कुमार जी महाराज के विरोधियों ने उनके हर पोस्ट और प्राइम टाइम पर कमेंट सेक्शन में लिख कर भक्तों को रवीशिया अफ़ीम की ख़ुमारी से बाहर लाने की कोशिश की लेकिन भक्त तो परमअज्ञान की अवस्था पा चुके थे, उनका उस प्रपंच सागर से बाहर आना नामुमकिन हो चुका था। वो बेचारे सूअरों की तरह कीचड़ में ही आनंद पा रहे थे। कोई निर्मल जल डाल कर उन्हें सत्य से अवगत कराना चाहता था, तो वो उसे सामूहिक रूप से काट खाने को दौड़ते थे।
प्रपंच की मिलावट चलती रही और चौवनिया मुसकान से लाखों भक्तों के दिल में तीर भोंक कर नित-प्रतिदिन छेद करने वाले रवीश कुमार जी महाराज दिन दूनी, रात चौगुनी प्रगति करते रहे। उनके गिरोह के सदस्यों ने अपने ही द्वारा बनाए गए अवार्डों से उन्हें नवाजना शुरु किया। वो जैसे कम पड़ गया हो तो समुद्र के पार, दूर देश के एक शासक की याद में चलता आ रहा मेडल भी उन्हें मिला। हालाँकि मेडल अगर उन्हें पहले के दिनों के लिए दिया जाता, तो सबको स्वीकार्य होता। लेकिन, मेडल वालों ने लिखा कि ये मेडल तो उन्हें 2014 के बाद वाली प्रपंचकारी पत्रकारिता के लिए दिया गया है, जिसमें उन्होंने तथ्यों को छुपाने, परिभाषाओं को घुमाने और जान-बूझ कर बातों को मरोड़ कर पेश करने के बाद उसे सत्य की तरह प्रस्तुत करने की अनूठी और अप्रतिम कला का प्रदर्शन पूरी नियमितता के साथ किया है।
इससे श्री कुमार जी महाराज को और बल मिला। वो दुगुने जोश के साथ मैदान में आए। उनके भक्तों पर विरोधियों ने जल डालना जारी रखा ताकि किसी की आँख पर पड़े और वो सत्य का अन्वेषण कर सके। लेकिन भक्तों ने कहा कि ये अवार्ड सिर्फ महाराज रवीश कुमार जी को ही नहीं मिला, ये अवार्ड उनके अखंड (आपको पता ही है) भक्तों को भी मिला है। इसलिए, वो आँख मूँद कर कीचड़ में तैरते रहे। उन्हें पता भी नहीं चला कि अब उस कीचड़ में कुछ सहयोगी ‘कुछ नया किया जाए’ के चक्कर में विष्ठा और मानव मल मिलाने लगे। रवीश भक्तों को और मजा आने लगा क्योंकि अब कीचड़ की बोरिंग गंध में नयापन आ चुका था। भक्तों ने महाराज को धन्यवाद किया।
ऐसा नहीं था कि ये सारे भक्त पहले से ही मूर्ख थे। जी नहीं, यहाँ एक से एक धुरंधर और पढ़ाकू लोग थे जिन्होंने आरती की थाल में अपने दिमाग का कपूर रख कर उसे ऊर्ध्वपाती बनाने में कभी भी लेशमात्र संकोच नहीं किया और रवीश चालीसा पढ़ते रहे क्योंकि वो साकार भी है, निराकार भी; वो प्रपंचों का आदि भी है, अंत भी; वो तरल भी है, ठोस भी; वो छुपाता भी है, दिखाता भी; वो टीवी पर भी है, फेसबुक पर भी; वो स्क्रीन पर भी बोलता है, भक्तों के दिल में भी…
कब रवीश कुमार प्रपंच में लीन हो कर एकाकार हो गए, उस दिवस की याद किसी को नहीं है। वो दौर सबको याद है, लेकिन वो एक दिन किसी को याद नहीं। उनके कुछ कालजयी प्रपंचों में गिरोह के सदस्यों ने खूब साथ दिया। एक प्रपंच था कि अमित शाह पुत्र जय शाह ने करोड़ों की हेराफेरी कर दी। ये दावा ‘द वायर’ का था। आज सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ लगाते हुए उन्हें कहा कि सीधे शब्दों में ये ‘पीत पत्रकारिता’ यानी ‘यलो जर्नलिज्म’ यानी ‘सनसनी फैलाने वाली पत्रकारिता’ है। ऐसे ही जस्टिस लोया वाले मामले में गिरोह के दूसरे सदस्य ‘कारवाँ’ मैग्जीन की बातें झूठी साबित हो चुकी हैं, उनके परिवार वालों ने किसी भी साजिश से इनकार करते हुए कहा कि इस पर बवाल न करें, लेकिन प्रपंचसखा रवीश कोर्ट और परिवार के बाद भी लगे रहे कि जाँच तो होनी चाहिए।
रवीश जी महाराज ने कल एक और प्रपंच फेंका, जिसमें उन्होंने रिज़र्व बैंक के कन्टिनजेन्सी फ़ंड को ही पूरा सरप्लस बता दिया। रिज़र्व बैंक के इस मामले पर आप पूरी बात यहाँ पढ़ सकते हैं। आम जनता को ऐसे बड़े टर्म्स से मतलब नहीं होता। वो विश्वास करते हैं कि कोई कहता है कि मोदी ने पैसा चुरा लिया। किसी को यह नहीं पता, या बताया भी नहीं जाता, कि रिज़र्व बैंक का यह फ़ंड क्या है। महाराज रवीश कुमार ने भी बताया कि आकस्मिक निधि से ही सरकार को पैसा दिया जाता है जो कि सरासर गलत है। रिज़र्व बैंक भी कारोबार करती है, उससे मुनाफ़ा कमाती है। बैंक के बैलेंस शीट का एक हिस्सा (मात्र 5.5-6.5%) कंटिन्जेन्सी फ़ंड होता है।
इस फ़ंड का मतलब है कि बुरे दिनों के लिए यह पैसा बचा कर रखना। यह प्रतिशत कितना होगा, यह बात रिज़र्व बैंक की कमिटी तय करती है, यह देखते हुए कि वैश्विक आर्थिक स्थिति कैसी है, हम पर कितना असर पड़ सकता है। अगर असर हुआ तो हमारे पास कितना पैसा होने से हम उसके असर को झेल लेंगे। रवीश ने धूर्तता से लोगों को यह बताया कि पूरा मुनाफ़ा ही कंटिन्जेन्सी फ़ंड है और उसी से पैसा निकाल कर सरकार ने ले लिया है। जबकि सरकार ने पैसा ज़बरदस्ती नहीं लिया है, रिज़र्व बैंक को क़ानूनन वो पैसा सरकार को ही देना होता है। क्योंकि बैंक सरकार की है, प्राइवेट लिमिटेड नहीं।
श्रीयुत रवीश जी ने चुपके से कह दिया और गंभीर चेहरा बना कर कहते रहे कि विमल जालान कमिटी के एक सदस्य ने साइन करने से इनकार कर दिया था तो उन्हें कहीं और भेज दिया गया। यहाँ श्री कुमार ने यह नहीं बताया कि कमिटी में कितने लोग थे और बाकी लोगों की राय क्या थी? क्या यह बात सामान्य नहीं है कि कई लोगों में से एक व्यक्ति किसी बात पर अलग राय रखता हो? फिर उसी की राय को सबसे ज़रूरी या सबसे सही किस आधार पर मान लिया गया? वो इसलिए मान लिया गया क्योंकि प्रपंच ऐसे ही फैलाया जाता है। आपके मन में संदेह छोड़ दिया जाएगा और आपको लगने लगेगा कि आख़िर एक आदमी को हटाया क्यों गया! आपको अगर सही कारण भी दे दिया जाएगा तो भी आप मानेंगे ही नहीं क्योंकि आप अंत में यह कह देंगे कि उससे यही कारण कहलवाया गया है, वो दबाव में होगा। इस कुतर्क का कोई अंत नहीं।
रवीश का RBI पर प्रपंच
बाहरहाल, रिज़र्व बैंक पर आते हैं जहाँ श्री रवीश कुमार जी महाराज ने बल दे कर, बार-बार कहा कि इतना पैसा चीन से युद्ध के समय से ले कर किसी भी समय मे नहीं दिया गया था। वो यह नहीं बता रहे कि पिछले साल कितना मुनाफ़ा और कारोबार किया रिज़र्व बैंक ने। क्योंकि वो बता देंगे तो फिर आप पूछ बैठेंगे कि रवीश जी पैसा जब ज्यादा कमाया है, तो मुनाफ़ा भी ज्यादा होगा, तो सरकार को मिलेगा भी ज्यादा।
इसमें एक और बात आती है कन्टिन्जेन्सी फ़ंड के प्रतिशत की। प्रतिशत बहुत कमाल की चीज है। यह फ़ंड बैंक के कारोबार के बैलेंस शीट का 6.5% से 5.5% तक होता है। अब मानिए कि बैलेंस शीट है 100 रुपया तो 6.5% के हिसाब से फ़ंड बनेगा 6.5 रुपया। बैंक का कारोबार ज्यादा हुआ तो बैलेंश शीट मान लीजिए 120 रुपए तक पहुँच गया। वित्तीय स्थिति में अगर बहुत ज्यादा बदलाव न हुआ हो तो इसी बैंलेंस शीट पर 6.5 की जगह 5.5% भी कंटिन्जेन्सी फ़ंड रखेंगे, तो भी फ़ंड की वैल्यू 6.6 रुपए हो जाएगी, जो कि पिछले साल के ऊपरी मानक से ज्यादा ही है। इसलिए प्रतिशत का खेल खेलने वाले यह नहीं बता रहे कि रिज़र्व बैंक के बैलेंश शीट में दो सालों में क्या वृद्धि हुई या अंतर आया है।
रवीश जी महाराज आधी बात छुपा लेते हैं क्योंकि उससे प्रपंच सामने नहीं आता और अनभिज्ञ लोग इतने डिटेल में जाते ही नहीं। वो जब 6.5 और 5.5% देखते हैं और सुनते हैं कि इस बार कमिटी ने कहा कि 5.5% ही काफी है तो लोगों को लगता है कि एक प्रतिशत ज्यादा पैसा मोदी ने मार लिया। अब मोदी ने ये पैसा मार कर कहाँ रिसॉर्ट खुलवा लिए, किस देश में उसके टेनिस क्लब चल रहे हैं, वेगस का कौन सा कसीनो उसका है, इसकी जानकारी सिर्फ रवीश भक्तों के पास ही है।
रवीशभक्तों का क्यूट लॉजिक
अंत में इन अखंड (आपको पता ही है) भक्तों से जुड़ा एक ताज़ा वाक़या भी सुनाता चलूँ। हुआ यूँ कि स्कूल के दोस्तों के एक व्हाट्सएप्प ग्रुप में यह बात चली कि रिज़र्व बैंक के साथ मोदी जी ने गलत किया या सही। तो, एक मित्र ने बताया कि बैंक तो कानूनन सरप्लस देने के लिए बाध्य है। थोड़ी देर बाद एक रवीश भक्त मित्र ने लिंकबाजी करते हुए लिखा कि ‘ये रवीश कुमार का व्यू है… थोड़ा डिटेल में… देख सकते हो’। देखने के बाद एक ने बताया कि ये गलत है क्योंकि बुनियादी परिभाषा में ही रवीश ने बातें गलत लिखी हैं, और छुपाई हैं।
भक्त बिगड़ गया और कहने लगा, “हर किसी का अपना व्यू होता है भाई। मुझे पता है ये सरकारी हड्डी पर नहीं दौड़ा अब तक तो उसके व्यूज मेरे लिए मैटर करते हैं।” मित्र को समझाने की कोशिश हुई कि व्यू गलत हो सकते हैं, तथ्य गलत नहीं होते। फिर भक्त ने लिखा, “मीडिया को मीडिया की तरह काम करना चाहिए, प्रचारक नहीं बनना चाहिए।” भक्त का टार्गेट वह मित्र था जो मीडिया में काम करता था। लेकिन करे तो क्या करे, स्कूल का दोस्त है उसे कैसे बाक़ियों की तरह लताड़ दे।
एक कोशिश और की समझाने की कि बात रिज़र्व बैंक पर हो रही है, मीडिया क्या है और कैसे है, उस पर नहीं। तब भक्त ने ब्रह्मास्त्र चला दिया, “उसे ऐसे ही वर्ल्ड रिकगनिशन नहीं मिला अगर वो गलत ही रहा करता तो।” उस मित्र को फिर बताया गया कि इस बात का उसकी महानता से कोई मतलब नहीं। अगर ऐसे ही डिबेट करना है तब तो उसके भाई को भी सेक्स रैकेट चलाने वाला बता दिया जाएगा लेकिन मुद्दा वो है ही नहीं।
तब भक्त बिलकुल डिफेंसिव हो गया और बोल बैठा, “जो भी हो। मुझे वो पसंद है और उसकी रिपोर्टिंग भी। बाकी बातों से मुझे फर्क नहीं पड़ता कि वो सही है या गलत।”
व्हाट्सएप्प का स्क्रीनशॉट
इस लाइन पर गौर कीजिए। ये लाइन एक व्यक्ति की नहीं है, ये लाइन बस एक व्यक्ति ने बोली है। यह लाइन रवीश कुमार जी महाराज के हर अंधभक्त की है जो तर्क से जब हार जाता है तो अंत में यही बोलता है कि उसको अवार्ड मिले हैं, तुम संघी हो, उसको दुनिया में लोग बुलाते हैं, तुम जलते हो।
ये सारी बातें सही होतीं अगर सामने वाला तर्क की जगह सिर्फ गाली दे रहा होता रवीश कुमार को। जबकि सत्य यह है कि उसके हर प्राइम टाइम के झूठों के पुलिंदों पर चार-चार लेख लिखे जा सकते हैं। मैं नहीं लिखता क्योंकि मुझे और बातों पर भी लिखना होता है, और भी मुद्दे हैं। ये जगज़ाहिर है कि रवीश कुमार हर मुद्दे पर प्रपंच ही फैलाएँगे। इसलिए उन्हीं मुद्दों को उठाता हूँ जहाँ वो बिलकुल ही गलत बोल कर लोगों को बरगलाते हैं।
क्या बँट चुका है व्हाट्सएप्प ग्रुप भी
इस पूरे व्हाट्सएप्प चैट से एक और बात याद आ गई। हाल ही में रवीश जी का एक विडियो घूम रहा था, जहाँ उन्होंने कहा कि किसी ने उन्हें मैसेज किया कि वो जब अपने घर में उनका शो देखने बैठता है तो उसका भाई टीवी बंद कर देता है। ये एक सामान्य सी घटना है, जो हर घर में होती है जहाँ एक ही टीवी हो या फिर आने वाला प्रोग्राम इतना बेकार हो कि कोई इरिटेट हो जाता है। रवीश जी का प्रोग्राम वैसा ही होता है। तो बड़े भाई ने बंद करा दिया होगा।
लेकिन, रवीश जी इसे कैसे देखते हैं? सुनिए विस्तार से। वो वहाँ पहुँच जाते हैं जहाँ पता नहीं रेनेसाँ ह्यूमैनिज्म जैसी थ्योरी भी पानी माँगने लगे। वो बताते हैं कि आज की सरकार ने लोगों को घरों में बाँट दिया है। पहले समाज के स्तर पर यह विभाजन था, अब घरों में हो गया है। यह सामाजिक पतन है जहाँ परिवार बँट चुका है।
अब कहीं मेरा वो मित्र रवीश जी को फोन न कर दे कि व्हाट्सएप्प में उसके तर्कों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और रवीश जी यह न कहते मिलें किसी प्रोग्राम में, “स्कूल के लम्बे समय के दोस्तों के बीच विभाजन हो रहा है, लोग ग्रुप में लड़ रहे हैं, मेरी बात आती है तो लोग बँट जाते हैं। मोदी सरकार ने पहले राजनीति को बाँटा, फिर देश बँटा, फिर राज्यों में लोग बँटे, फिर समाज में फूट डाली गई, फिर घरों में लोग मेरा प्रोग्राम देखने से मना करने लगे और अब यह बात मोबाइल तक पहुँच गई, जो कि हमारी-आपकी जान बन चुकी है। अब लोग वहाँ भी बँट चुके हैं।”
रवीश जी, यही ख़ूबसूरती है हमारे समाज की कि एक ही परिवार के लोग एक ही विषय पर दो विचार रख सकते हैं। पूरा परिवार हर बात पर एक ही बात कहेगा तो आप ही कहेंगे कि बाप की तानाशाही चल रही है। आपको जब ऐसे मैसेज आएँ तो भक्तों को बताएँ कि मोबाइल में भी प्राइम टाइम आता है। इयरफोन लगा कर देख ले।
हाल-फ़िलहाल में पाकिस्तान राष्ट्र से अधिक मीम लगने लगा है। राष्ट्रीय कर्ज़ा गधे और भैंसें बेच कर उतारा जा रहा है। प्रधानमंत्री इमरान खान हिंदुस्तान को परमाणु युद्ध की धमकी देने के साथ उसी साँस में नान और टिमाटर के दाम तय करने के लिए मंत्रियों से लेकर सेना तक से सलाह-मशविरा करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी कोई सुनवाई नहीं है जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर और अब हालत यह है कि कराची में कूड़े पर भिनभिना रही मक्खियों से निबटने के लिए संघीय मंत्री, सिंध के मुख्यमंत्री और कराची के मेयर तीनों संघर्ष कर रहे हैं।
दस सड़कें साफ़ कर लेना उपलब्धि होगी
पाकिस्तान के समा टीवी की वेबसाइट ने संघीय समुद्री मामलों के मंत्री (चूँकि कराची बंदरगाह का शहर है) अली ज़ैदी के हवाले से कहा है कि कराची जैसे बड़े शहर में दस सड़कें भी साफ़ कर लेना ‘बड़ी उपलब्धि’ होगी। मक्खियों से शहर को निजात दिलाने के लिए सिंध के मुख्यमंत्री को खुद निर्देश देना पड़ा कि वहाँ फ्यूमिगेशन जैसे मूलभूत एहतियाती कदम उठाए जाएँ। इसके बाद भी उन्हें कराची के मेयर को बैठक के लिए बुलाना पड़ रहा है।
CM Sindh has convened a meeting regarding Karachi’s garbage issue tomorrow at 4 PM. Mayor KMC, Chairmen DMCs, Cantonment Boards & other authorities have all been invited. This is another initiative of Sindh Govt to resolve this issue. I hope the invitees will all work with GoS
इसके पहले पाकिस्तान के मंत्री कितने खलिहर हैं, इसका नज़ारा एक ट्विटर यूज़र ने पेश किया था। उसने पाकिस्तान के संघीय साइंस एन्ड टेक्नोलॉजी मंत्री चौधरी फ़वाद हुसैन के ब्लू-टिक वाले, ‘वेरिफाइड’ ट्विटर अकाउंट पर संदेश भेज कर पाकिस्तान में रह रहे R&AW ऑपरेटिव की पहचान बताने का लालच दिया। और उसके बाद शश नामक ट्विटर यूज़र ने उन्हें सलमान खान, जॉन अब्राहम और सैफ़ अली खान का फ़ोटो भेजकर काफ़ी देर मजे लिए।
यही नहीं, पाकिस्तान ऐसे आर्थिक संकट से गुज़र रहा है कि वहाँ सरकारी दफ्तरों में केवल एक ही समाचारपत्र रखने, नई गाड़ियों की खरीद पर रोक जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। इसके बाद भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री देश की आर्थिक हालत सुधारने पर बहस की बजाय अपनी संसद में हिंदुस्तान को परमाणु हमले की धमकी देने में अपने करदाताओं के टैक्स से खरीदा बहुमूल्य समय बर्बाद कर रहे हैं।
बचपन में पढ़ा था थूक कर चाटना। यानी अपनी ही बातों से मुकर जाना। बीते कुछ सालों से जिस एक व्यक्ति को बार-बार इस मुहावरे पर खरे उतरता देख रहा हूँ, वो कोई और नहीं देश के इकलौते चिर युवा 49 वर्षीय राहुल गॉंधी हैं।
अब तो हालत यह हो गई है नेहरू-गॉंधी परिवार के अपने इस लाडले को पाकिस्तानी भी कंफ्यूज्ड कहने लगे हैं। वैसे, राहुल गॉंधी की बाल बुद्धि और बाल हठ से देश अरसे से परिचित है। जब से उन्हें मोदी के मुकाबिल खड़ा करने की कोशिश की गई उनका यह गुण बार-बार प्रकट होने लगा और हर बार वे ‘गलती हो गई माफ कर दो’ वाले भाव में आ जाते हैं।
श्रीनगर एयरपोर्ट से लौटा दिए गए राहुल गॉंधी ने कहा ‘कश्मीर में लोग मर रहे हैं’। पाकिस्तान ने बिना वक्त गॅंवाए उनके बयान को लपका और अपने प्रोपगेंडा के साथ संयुक्त राष्ट्र पहुॅंच गया। फिर राहुल ने सफाई देते हुए कश्मीर को भारत का आंतरिक मामला बताया। कहा कि वहॉं हिंसा के पीछे पाकिस्तान का हाथ है, जो पूरी दुनिया में आतंकवाद के पैरोकार के तौर पर पहचान रखता है।
ज्यादा दिन नहीं बीते जब अपनी इस हरकत के कारण उन्हें सुप्रीम कोर्ट से डॉंट मिली थी। 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील मामले में कुछ गोपनीय दस्तावेज के आधार पर दोबारा सुनवाई की बात कही। राहुल ने इसे गलत तरीके से पेश करते हुए कहा कि अदालत ने भी चौकीदार को चोर मान लिया है। उस समय भी उन्होंने माफी मॉंग अपनी जान छुड़ाई थी।
इसी साल छह जनवरी को उन्होंने ट्वीट कर तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से एचएएल को एक लाख करोड़ रुपए ऑर्डर देने का सबूत पेश करने या इस्तीफा देने को कहा। कुछ ही घंटों में एचएएल ने राहुल को ट्वीट कर झूठा बताया। कहा- उसकी वित्तीय स्थिति में सुधार हो रहा है। 15 हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टरों और 83 हल्के लड़ाकू विमानों का ऑर्डर अपने अंतिम चरण में है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने बयान से राहुल पहले भी देश की फजीहत करा चुके हैं। जुलाई 2018 में फ्रांस के राष्ट्रपति का हवाला दे राफेल डील को लेकर मनगढ़ंत दावे किए। चंद घंटों के भीतर ही फ्रांस की सरकार ने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष झूठ बोल रहे हैं।
इन प्रकरणों को सत्ता सुख से दूरी की हताशा मान कर आँख मूॅंद भी लें, पर उन बयानों का क्या जिसके मार्फत राहुल ने लोकतंत्र की साख को तब डूबोया जब कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार हुआ करती थी। यह और बात है कि उस समय राहुल के मुॅंह खोलते ही वाह जहॉंपनाह का शोर इतना ज्यादा होता था कि मीडिया गिरोह को सब कुछ ऐतिहासिक ही लगता था।
याद कीजिए किस तरह 2008 में आत्महत्या करने वाले एक किसान की पत्नी कलावती के नाम पर राहुल ने कैसे वाहवाही लूटी थी। इस घटना के दो साल बाद कलावती की बेटी ने आत्महत्या कर ली। कुछ साल बाद कलावती ने यह कहते हुए आत्महत्या की धमकी दी कि उसने एक लाख रुपए कपास की खेती में लगाए थे। आधे डूब गए। सरकारी ने मदद नहीं की तो वह जान दे देगी। कलावती को पोस्टर वूमेन बनाने के बाद राहुल की पार्टी पॉंच साल से ज्यादा समय तक सरकार में रही, लेकिन एक कलावती की जिंदगी नहीं बदली।
याद कीजिए 27 सितंबर 2013 को। दागी सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों को बचाने वाले मनमोहन सरकार के अध्यादेश को कैमरे के सामने फाड़ते राहुल गॉंधी। उस समय कहा गया था कि यह अध्यादेश लालू यादव जैसे सजायाफ्ता को बचाने के लिए केंद्र सरकार लेकर आई थी। राहुल की खूब वाहवाही हुई। लेकिन, 2014 के बाद उन सभी तस्वीरों और बयानों को याद कीजिए जिनमें राहुल और लालू हाथ थामे और एक-दूसरे की तारीफ करते नहीं अघाए। इस बार लोकसभा चुनाव से पहले राहुल ने बिहार के उस बाहुबली विधायक को भी बगलगीर बना लिया था, जिसके घर से हाल ही में एके47 मिला है।
यही कारण है कि पलटी मारने के बाद झट से पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने राहुल गॉंधी को कंफ्यूज्ड बता दिया। पर देश और लोकतंत्र का दुर्भाग्य देखिए राहुल की थूक कर चाटने की आदत शशि थरूर जैसे कॉन्ग्रेसी सांसद ‘बहुत सही मालिक’ कह कर अब भी डिफेंड कर रहे हैं।