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पाकिस्तान ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाला गया: टेरर फंडिंग रोकने में बुरी तरह विफल इमरान खान की मुसीबतें बढ़ी

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को एक के एक बाद कई झटके लग रहे हैं, इसी बीच उसे एक और बड़ा झटका लगने की ख़बर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था, ‘फाइनेंनिशियल एक्शन टॉस्क फोर्स’ (FATF) के ग्रे लिस्ट में डालने के बाद अब FATF की एशिया प्रशांत इकाई (APG) ने उसे ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाल दिया है। यह फ़ैसला ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में आयोजित FATF की एशिया प्रशांत इकाई की बैठक में लिया गया।

दरअसल, संस्था ने पाया कि टेरर फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और आंतकवादियों को वित्तपोषण से जुड़े 40 में से 32 मानकों को पाकिस्तान ने पूरा नहीं किया है। APG, FATF की क्षेत्रीय इकाई है और ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने के फ़ैसले का असर व्यापक स्तर पर पड़ेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि FATF भी अक्टूबर में होने वाली बैठक में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने का फ़ैसला लेगा।

FATF ने पाकिस्तान से अक्टूबर 2019 तक अपने एक्शन प्लान को पूरा करने के लिए कहा था, इसके लिए पाकिस्तान के प्रति FATF का रुख़ बेहद सख़्त था। एक्शन प्लान में जमात-उद-दावा, फलाही-इंसानियत, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क और अफ़गान तालिबान जैसे आतंकी संगठनों की फंडिंग पर रोक लगाने जैसे कई क़दम शामिल थे।

APG की फाइनल रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान टेरर फंडिंग के ख़िलाफ़ सुरक्षा उपायों के लिए 11 मापदंडों में से 10 को पूरा करने में विफल रहा है। APG ने यह भी पाया है कि इस्लामाबाद की तरफ से कई मोर्चों पर खामियाँ हैं। साथ ही मनी लॉड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए पाकिस्तान की तरफ से की जाने वाली कोशिशों में तमाम ख़ामियाँ हैं। पाकिस्तान की तरफ से 50 पैमानोंं पर सुधार के दावों को लेकर कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। बता दें कि APG एक अंतर सरकारी संगठन है जो क्षेत्र में टेरर फंडिंग और मनी लॉड्रिंग पर नज़र रखता है।

ग़ौरतलब है कि FATF ने जून, 2018 में पाकिस्तान को संदिग्ध सूची में डाल दिया था। इसका कारण अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और इंग्लैंड द्वारा दबाव बनाया जाना था। आपको बता दें कि FATF की ओर से ब्लैक लिस्ट करने का मतलब होता है कि उक्त देश मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों को वित्तपोषण के ख़िलाफ़ मुहीम में अपना सहयोग नहीं कर रहा है। 

अगर पाकिस्तान को FATF द्वारा भी ब्लैक लिस्ट कर दिया गया तो उसे वर्ल्ड बैंक, IMF, ADB, यूरोपियन यूनियन जैसी संस्थाओं से क़र्ज़ मिलना मुश्किल पड़ जाएगा। इसके अलावा मूडीज, स्टैंंडर्ड एंड पूअर और फिच जैसी एजेंसियाँ उसकी रेटिंग भी घटा सकती हैं।

लोकनाथ मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर दीवार गिरने से भगदड़, 6 की मौत, 27 घायल

पश्चिम बंगाल में जन्माष्टमी के उत्सव के दौरान एक मंदिर में दीवार गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में 27 लोग घायल हुए। घटना शुक्रवार सुबह नॉर्थ 24 परगना के कचुआ इलाके में स्थित लोकनाथ मंदिर में घटी। मृतकों के परिजन को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 5 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की।

जानकारी के मुताबिक लोकनाथ मंदिर में जन्माष्टमी के मौक़े पर श्रद्धालु एकत्रित हुए थे, लेकिन इसी दौरान वहाँ एक जर्जर दीवार ढह गई। जिसे देखकर वहाँ भगदड़ मच गई। कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। बाद में 6 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि बाकी घायलों को एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

बंगाल मुख्यमंत्री ने इस हादसे में मरने वालों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनके लिए फिलहाल वर्तमान परिस्थियों में बचाव कार्य सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं। वो इस मामले पर निजी स्तर पर निगरानी कर रही हैं साथ ही मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख देने की घोषणा भी की। उन्होंने गंभीर रूप से घायलों को 1-1 लाख और घायल लोगों को 50-50 हजार रुपए देने की बात की।

ममता बनर्जी ने बताया, “इस बार कछुआ लोकनाथ मंदिर में भारी भीड़ जमा थी। तभी सुबह-सुबह बारिश होने लगी, जिसके कारण लोग बाँस के अस्थायी स्टॉलों में छुपने की कोशिश करने लगे। भारी बारिश के कारण बाँस के स्टॉल टूट गए। वहाँ जगह बहुत ही संकरी है, जिस कारण हड़बड़ी में बहुत लोग मंदिर के पास के तालाब में गिर गए। इससे वहाँ भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।

गौरतलब है कि हर साल लोकनाथ ब्रह्मचारी का जन्मदिन मनाने के लिए कछुआ मंदिर में बड़ी संख्या में लोग जमा होते हैं । इस साल भी वहाँ इसी उद्देश्य से भीड़ लगी थी।

मैक्डॉनल्ड्स ने कहा वो सिर्फ हलाल मांस ही बेचते हैं, स्वीकारा ग़ैर-मुस्लिमों के साथ करता है भेदभाव

ग्लोबल फ़ास्ट-फ़ूड चेन मैक्डॉनल्ड्स ने स्वीकार कर लिया है कि गैर-मुस्लिमों के साथ भेद- भाव करना उनके भारत में बिज़नेस मॉडल का हिस्सा है। हमने इस पर पहले ही रिपोर्ट किया था कि कैसे किसी जानवर को किसी गैर-मुस्लिम द्वारा मारा जाना हलाल हो ही नहीं सकता।

हलाल केवल एक मुस्लिम व्यक्ति ही कर सकता है। इसका मतलब साफ़ है कि हलाल फर्म में गैर-मुस्लिमों को रोज़गार से वंचित रखा जाता है। इसके अलावा कुछ और भी शर्तें हैं, जिन्हें अवश्य पूरा किया जाना चाहिए। यह स्पष्ट है कि हलाल पूरी तरह से एक इस्लामी प्रथा है। भारत में हलाल के एक प्रमाणीकरण और प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर दिशानिर्देश उपलब्ध हैं जिनमें यह स्पष्ट है कि पशु वध प्रक्रिया (हलाल) के किसी भी हिस्से में गैर-मुस्लिम कर्मचारियों को रोज़गार नहीं दिया जा सकता है।

पूरे दस्तावेज़ में इस्लामी पशु वध के दिशानिर्देशों को सूचीबद्ध किया गया है, इसमें शामिल कर्मचारियों के मज़हब/आस्था का उल्लेख करने के लिए ध्यान रखा गया है। यह स्पष्ट करता है कि केवल मुस्लिम कर्मचारियों को ही हलाल के हर चरण में भाग लेने की अनुमति है। यहाँ तक ​​कि मांस का लेबल लगाने का काम भी मुस्लिम ही कर सकते हैं।

इस मामले की हमारी विस्तृत रिपोर्ट आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

हलाल-झटका का विवाद ज़ोमैटो विवाद के दौरान खुल कर सामने आया था। इसमें रेस्त्रां से घर पर खाने की डिलीवरी सर्विस देने वाली, ऍप-आधारित कंपनी पर आरोप लगा था कि एक तरफ वह ‘खाने का कोई मज़हब नहीं होता’ जैसी नैतिकता का ज्ञान बाँचती है, दूसरी ओर मुस्लिमों का तुष्टिकरण करने के लिए, उनकी ‘हलाल माँस ही चाहिए’ की माँग पूरा करने के लिए वह हर तरीके से तैयार रहता है।

हलाल, जैसा कि ऊपर गिनाए गए बिंदुओं से साबित हो जाता है, अपनी मूल प्रकृति से ही भेदभाव वाली प्रथा है, जो गैर-मुस्लिमों को रोजगार के अवसर से वंचित करती है। यानि हलाल माँस को वरीयता देने वाले ज़ोमैटो, मैक्डॉनल्ड्स आदि कॉर्पोरेट खुल कर कार्यस्थल पर भेदभाव (वर्कप्लेस डिस्क्रिमिनेशन) को बढ़ावा देते हैं, और बराबर के अवसरों (ईक्वल ऑपर्च्युनिटी) के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। ऐसे में उनकी सामाजिक न्याय और एक्टिविज़्म आदि की बातों को इसी प्रकार के सबूतों के अलोक में रखकर देखे जाने की ज़रूरत है।

बड़े डिफॉल्टरों के अख़बार में नाम छाप दो, लोन लेकर वापस न करने वालों पर बिहार सरकार सख्त

बिहार सरकार ने बैंकों से मोटी रकम का लोन लेकर न लौटाने वालों पर एक्शन लेने के लिए बैंकों को सुझाव दिया है। इस सुझाव में बिहार सरकार ने बैंक से कहा कि वह कर्ज न लौटाने वाले 25 लाख से बड़े कर्जदारो की सूची पब्लिक करें। जिससे सरकार बैंकों को लोन वापसी करवाने में हर संभव मदद कर पाए।

बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 69वीं त्रैमासिक बैठक हुई। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी भी शामिल हुए। सीएम नीतीश ने बैंकर्स के सामने बैंकों के रवैये को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त की और कहा कि बैंक राज्य सरकार की बात सुनते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में लोग बैंक पर भरोसा करते हैं लेकिन यहाँ बैंक ऋण देने में पीछे हैं। इस बीच बैंकर्स ने भी मुख्यमंत्री से अपनी पीड़ा को साझा किया और बताया ऐसा क्यों है। बैंकर्स ने बताया कि लोन देकर वापस न मिलना बैंक के सामने एक बड़ी समस्या है।

उन्होंने बताया कि बिहार के छोटे ऋण लेने वाले कर्ज अदा कर देते हैं, लेकिन जो बड़ी रकम लेते हैं वो आना-कानी करते हैं। बैंकर्स की शिकायत को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि उनकी सरकार बैंको को लोन वापसी में मदद करेगी।

सुशील मोदी ने बैंकर्स से कहा कि वे उन कर्ज लेने वालों की सूची अखबारों में सार्वजनिक करें, जो बड़े कर्ज लेकर वापस नहीं करते। ताकि उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो। साथ ही उन्होंने इन ऋणधारकों की एक सूची सरकार को उपलब्ध कराने की सलाह दी, जिससे ऐसे कर्जदारों पर शिकंजा कसा जाए।

बता दें बैंकों की इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने सभी बैकों से कहा कि प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में बैंक शाखा खोली जानी चाहिए। इसके लिए खुद राज्य सरकार उनकी सहायता करेगी। उन्हें बताया कि पंचायत भवन में उन्हें जगह उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे लोगों को काफी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि बैंकों का ऋण जमा अनुपात का राष्ट्रीय औसत 75 प्रतिशत है जबकि बिहार के मामले में यह 45 प्रतिशत है।

‘एक रात साथ में सोओ तभी बिल पास करूँगा’ – डॉ. जावेद आलम पर ममताकर्मियों ने लगाया गंभीर आरोप

बिहार में महिलाओं का सम्मान केवल एक भ्रम मात्र लगता है, इसका जीता-जागता सबूत है अररिया क्षेत्र की ममताकर्मियों द्वारा डीएम (ज़िलाधिकारी) को लिखी गई वो चिट्टी, जिसमें उन्होंने ख़ुद के प्रति हो रहे अभद्र व्यवहार के बारे में लिखा है। इस लिखित शिक़ायत में आधा दर्जन से अधिक ममताकर्मियों ने जोकीहाट रेफरल अस्पताल के प्रभारी मोहम्मद जावेद आलम द्वारा किए जाने वाले अभद्र, अमानवीय और अमर्यादित व्यवहार का ज़िक्र किया है।

ममताकर्मियों ने न्यूज़-18 से हुई बातचीत में आपबीती सुनाई। अस्पताल से अवैध उगाही न किए जाने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया जाता है। ममताकर्मियों के अनुसार, मो. जावेद उनके बिल पास करवाने के बदले में एक रात उनके साथ सोने तक के लिए कहता है। ममताकर्मियों को तुच्छ समझते हुए उनसे गाली-गलौच के साथ बात करता है। इतना ही नहीं वो अस्पताल से अवैध रुपयों की उगाही करने का दबाव भी ममताकर्मियों पर बनाता है।

ममताकर्मियों ने मो. जावेद पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब से वो नौकरी कर रही हैं तब से वो उनसे घूस ले रहा है। घूस के तौर पर जावेद ने कभी 1 लाख रुपए लिए तो कभी 30 हज़ार रुपए लिए। ममताकर्मी ने कहा, “अभी पेमेंट (सैलरी) नहीं बना रहा है, वही रुपया के कारण। पहले रुपया दो तब पेमेंट बनाएगा। गाली-गलौच करता है, हर तरह की बात बोलता है।” जावेद के बारे में बताते हुए ममताकर्मी ने कहा कि उसे किसी का डर नहीं है, वो कहता है कि CS क्या कर लेगा, DM क्या कर लेगा।

एक ममताकर्मी ने अस्पताल प्रभारी मो. जावेद के बारे में बताया कि वो एक मीटिंग में गईं थीं, जहाँ उनसे पूछताछ में बहस के बाद जावेद ने कहा, “तुम इतना बोलती हो, मारेंगे लात तो बाहर छिटका देंगे, निकाल देंगे।”

ममताकर्मियों के गंभीर आरोपों के संबंध में जब मो. जावेद आलम से पूछा गया तो उन्होंने इन आरोपों को नकार दिया और जाँच से नहीं डरने का दंभ भी भरा।

इस मामले पर अररिया सदर अस्पताल के ACMO डॉक्टर एमपी गुप्ता से जब पूछताछ की गई, तो उन्होंने सही जानकारी से अवगत कराने के बजाए पत्रकारिता का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया। अपनी इस से हरक़त वो आरोपित को बचाते दिखे।

150 MBBS छात्रों के सर मुड़वाने पर UP सरकार और MCI सख्त, लग सकता है 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने सैफई मेडिकल कॉलेज के कुलपति को नोटिस जारी कर MBBS छात्रों के साथ हुई रैगिंग के संबंध में 24 घंटों के भीतर जवाब माँगा है। इतना ही नहीं, एमसीआई ने उन्हें चेतावनी दी है कि अगर 24 घंटों के भीतर वो जवाब नहीं दे पाते तो उन्हें 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना देना पड़ेगा। एमसीआई ने ये भी स्पष्ट किया है कि आने वाले एक साल के लिए अब वह अपने यहाँ न सीटों को बढ़ा सकते हैं और न ही कोई नया पाठ्यक्रम शुरू कर सकते हैं। इस प्रतिबंध को ‘गलत से समझौता’ करने के कारण आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मामले में ईटावा के डीएम द्वारा रिपोर्ट जमा कराने के बाद इस संबंध में प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने मामले की जाँच के लिहाज से 3 लोगों की कमिटी बनाई है।

वहीं, यूनिवर्सिटी के रजिट्रार एससी शर्मा का कहना है कि एमसीआई के नोटिस का जवाब गुरुवार को भेज दिया गया है। उनके मुताबिक विश्वविद्यालय द्वारा की गई शुरुआती जाँच में अभी कुछ नहीं पता चला है। उन्होंने जाँच के बारे में बताते हुए कहा, “पूरी जाँच कल दोपहर तक पूरी होगी। निष्कर्ष जो भी आएगा उसे सरकार और प्रशासन को भेजा जाएगा।”

रजिट्रार के मुताबिक उन्होंने यूनिवर्सिटी स्तर पर भी 12 सदस्यों की टीम का गठन किया है, जिसमें एक पुलिस, एक पत्रकार और एक तहसीलदार शामिल हैं। यह टीम अपनी रिपोर्ट की डिटेल 28 अगस्त तक जमा करवा देगी।

इस मामले के मद्देनजर एमसीआई ने संस्थान से साफ़ कह दिया है कि अगर उन्हें 24 घंटे के अंदर जवाब नहीं मिला तो वह प्रति छात्र एक लाख रुपए का जुर्माना संस्थान पर लगाएँगे। इसके मुताबिक 150 छात्रों का 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना संस्थान को भरना होगा। इसके अलावा एमसीआई ने ये भी जवाब तलब किया है कि अभी तक सीनियर छात्रों को एक महीने के लिए सस्पेंड क्यों नहीं किया गया?

बता दें कि बीते दिनों सैफई मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले एमबीबीएस के नए छात्रों (फर्स्ट ईयर) के सिर के बाल मुंडवाकर परेड कराए जाने के मामला सामने आया था। मामला प्रकाश में उस समय आया जब ये सभी छात्र सिर झुकाए अपने कॉलेज पहुँचे। घटना का पता चलने के बाद कॉलेज प्रशासन ने इस मामले को ‘परंपरा’ बताकर खारिज करना चाहा। खुद वहाँ के डीन ने कहा कि छात्रों ने अपनी मर्जी से ही सिर के बाल मुड़वाए हैं, वैसे भी ये परंपरा है जो सभी जूनियर छात्र अपनी मर्जी से अपनाते हैं। फिर भी रैगिंग जैसी कोई बात सामने आती है तो वे कार्रवाई करेंगे।

High Alert: तमिलनाडु में घुसे लश्कर के 6 आतंकी, सभी मुस्लिम लेकिन लगा रखा है तिलक-भभूत

तमिलनाडु में सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों ने बताया है कि राज्य के कोयंबटूर में लश्कर-ए-तैयबा के 6 आतंकी घुस गए हैं। इन आतंकियों में 1 पाकिस्तानी और 5 श्रीलंकाई तमिल शामिल हैं। अलर्ट के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सभी जरूरी कार्रवाई की जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि श्रीलंका से इन आतंकियों ने समुद्र के रास्ते से भारत में प्रवेश किया है। ये सभी आतंकवादी मुस्लिम हैं लेकिन हिंदुओं की वेशभूषा में ये भारत में घुसे हैं। इन्होंने लोगों को बेवकूफ़ बनाने के लिए तिलक और भभूत भी लगाया हुआ है।

अलर्ट के बाद राजधानी चेन्नई में सुरक्षाकर्मियों की चौकसी बढ़ा दी गई हैं। साथ ही क्यूआरटी टीम को भी वहाँ तैनात किया गया है। चौराहों पर सुरक्षाकर्मी लगातार लोगों की जाँच कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो लश्कर के आतंकवादियों को श्रीलंका के कुछ लोगों ने भारत में घुसने में मदद की है।

चेन्नई के पुलिस कमिश्नर ने बताया है कि खुफिया एजेंसियों के अलर्ट को देखते हुए शहर में पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रदेश के सभी होटल और लॉज चेक किए जा रहे हैं। विस्फोटक और हथियारों के लिए गाड़ियों की चेकिंग की जा रही है। इसके अलावा संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

डीजीपी ने सभी जिले के पुलिस अधिकारियों को आदेश दिया है कि उपद्रवियों और वांछितों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, मंदिरों में सुरक्षा बढ़ा दी जाए और रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और हवाई अड्डों पर सुरक्षा कड़ी की जाए।

इनके अलावा भारतीय नौसेना ने अपने सभी बेस और युद्धपोतों को हाईअलर्ट पर रखा हुआ है। साथ ही सभी समुद्री मार्गों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

‘गौ तस्करों ने मेरे भाई की जान ले ली, प्रतिबंधित पशुओं को बचाने के लिए वो अकेला ही लड़ गया कसाइयों से’

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी का विरोध करना 23 वर्षीय सोनू के लिए जानलेवा बन गया। कसाइयों ने उसे गोली मार दी और भाग गए। न सिर्फ सोनू बल्कि उसके बचाव में आए परिवार वालों को भी कसाइयों ने मारा-पीटा।

ख़बर के अनुसार, सोनू जागरण ऑर्केस्ट्रा पार्टी में पियानो बजाने का काम करता था। इसके अलावा उसने एक शॉर्ट फिल्म में भी काम किया था। सोनू खाना खाने के बाद रोज पियानो की प्रैक्टिस किया करता था। बुधवार को भी वो खाना खाने के बाद प्रैक्टिस कर रहा था। रात में अचानक उसे एक आहट सुनाई पड़ी। उसने उठकर देखा कि एक पिकअप गाड़ी में कुछ अज्ञात लोग प्रतिबंधित पशुओं को सड़क पर लाद रहे थे। सोनू ने इसका विरोध किया और उन्हें ललकारा। लेकिन सोनू को अकेला पाकर कसाइयों ने उसे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया।

कसाइयों और सोनू के बीच मार-पीट के कारण उसके परिजन भी नींद से जागकर बाहर आ गए। इसके बाद परिजनों और कसाईयों के बीच भी मारपीट हुई। लेकिन जब समाज के और भी लोग जाग गए तो अपना पलड़ा हल्का होते देख कसाईयों ने हवा में फायरिंग शुरू कर दी। इसी बीच एक गोली सोनू को लग गई, तभी मौक़ा देख कसाई अपनी गाड़ी लेकर वहाँ से फ़रार हो गए।

गंभीर हालत में घायल सोनू को पहले बिलसंडा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ उसकी हालत को देखते हुए उसे ज़िला संयुक्त चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। यहाँ भी उसकी हालत गंभीर बताई गई, जिसके बाद सोनू को बरेली के अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। लेकिन, रास्ते में ही सोनू ने दम तोड़ दिया।

मृतक सोनू की बहन रामगीता का कहना है कि गौ तस्करों ने उसके भाई की जान ली है। उधर, पुलिस अधीक्षक मनोज सोनकर, अपर पुलिस अधीक्षक रोहित मिश्र, एसडीएम सौरभ दुबे, पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रवीण मलिक, थाना प्रभारी निरीक्षक एसके सिंह आदि फोर्स के साथ घटना स्थल पर पहुँचे। एसपी ने सोनू के परिजनों से बातचीत कर मामले की जानकारी ली।

पुलिस द्वारा FIR में कसाइयों का ज़िक्र न किए जाने से लोगों में आक्रोश पनप गया। इस पर हिन्दू युवा वाहिनी समेत कई संगठनों ने पुलिस अधिकारियों से शिक़ायत की। उन्होंने इस घटना के ख़ुलासे के लिए पुलिस प्रशासन को 48 घंटे की मोहलत दी है। साथ ही मृतक के परिजनों के लिए मुआवज़े के तौर पर 25 लाख रुपए की माँग भी की। एसपी ने घटना के ख़ुलासे के लिए पुलिस की कई टीमों का गठन किया है और अनहोनी घटना की आशंका को देखते हुए कई थानों की पुलिस को मोहनपुर गाँव में तैनात कर दिया।


मुझे घर का खाना चाहिए, कैंटिन का खाना नहीं खाऊँगा: कोर्ट की अनुमति नहीं होने से रात भर भूखे सोए चिदंबरम

पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने CBI की हिरासत में अपनी पहली रात बिना कुछ खाए-पिए बिताई। दरअसल, उन्होंने घर के खाने की माँग की थी, लेकिन बिना कोर्ट की अनुमति के ऐसा नहीं किया जा सका। इसके बाद चिदंबरम ने कैंटिन का खाना खाने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, CBI द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब भी उन्होंने ठीक से नहीं दिए।

ख़बर के अनुसार, चिदंबरम पूरी रात शांत रहे, उन्होंने मुश्किल से ही CBI और डॉक्टर्स से बात की। डॉक्टर्स ने उनसे उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा और रेग्युलर चेकअप किया, जो नॉर्मल रहा। चिदंबरम को ग्राउंड फ्लोर स्थित सूइट-5 में रखा गया है और उनकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी CBI ऑफिसर्स की है। उनकी निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके तहत 24X7 उन पर नज़र रखी जा रही है।

CBI ने उनसे कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे, इसमें मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित सवाल भी शामिल थे। विदेशी कंपनियों और पेमेंट मोड को लेकर भी उनसे सवाल किए गए। ज्ञात हो कि CBI ने इस संबंध में तीन देशों को पत्र लिखकर लेन-देन को लेकर जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। चिदंबरम से स्पष्ट तौर पर नॉर्थ ब्लॉक में पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी से उनकी मुलाक़ात के बारे में सवाल किया गया, इसके जवाब में उन्होंने दोनों से मुलाक़ात होने की बात से साफ़ इनकार कर दिया।

इसके अलावा, CBI ने चेस मैनेजमेंट कंपनी के बारे में उनसे पूछा, एडवांटेज और आसब्रिज कंपनी के संदर्भ में भी सवाल किए और कार्ति चिदंबरम की कंपनियों के बारे में भी सवाल पूछे गए। भास्कर रमन नाम के शख़्स के बारे में चिदंबरम से पूछा गया कि क्या आप उन्हें जानते हैं? साथ ही यह भी पूछा कि INX मीडिया ने आपके बेटे की कंपनी को किश्तों में करोड़ों रुपयों का भुगतान क्यों किया?

ग़ौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा चिदंबरम को अग्रिम ज़मानत नहीं मिली थी, जिसके बाद उनके वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया था।

YAK की सवारी पड़ी भारी: मेरठ बवाल में वॉन्टेड हाजी सईद को UP पुलिस ने फेसबुक देख किया गिरफ्तार

पिछले कुछ महीनों से लगातार पुलिस को चकमा देकर भाग निकलने वाला हिस्ट्रीशीटर अपनी छोटी सी गलती के कारण पकड़ा गया। हिंसा भड़काने समेत 9 मामलों के दोषी हाजी सईद को पुलिस ने सोशल मीडिया पर उसकी फोटो देखने के बाद गिरफ्तार कर लिया।

सईद की ये फोटो शिमला की है, जो सोशल मीडिया पर डलने के बाद खूब वायरल हुई। इस तस्वीर में सईद एक याक की सवारी करता नजर आ रहा है। इस फोटो के सोशल मीडिया पर पोस्ट होने के बाद पुलिस ने उसकी लोकेशन का फौरन पता लगाया और उसकी गिरफ्तारी संभव हुई।

पोस्ट की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत एक्शन में आई और उसने अपनी एक टीम को शिमला भेज दिया। लेकिन सईद के कुछ जानकारों ने उसके ऊपर होने वाली कार्रवाई के बारे में उसे पहले ही इत्तेला कर दिया था, जिस कारण उसने अपनी लोकेशन बदलनी शुरू कर दी थी। पर पुलिस ने अपनी सूझ-बूझ से उसे आखिर में गिरफ्तार कर लिया ।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एसएसपी अजय साहनी ने सईद की गिरफ्तारी के बाद बताया कि भूसा मंडी निवासी हिस्ट्रीशीटर हाजी सईद 9 मुकदमों में वांटेड था। 6 मार्च को भूसा मंडी-मछेरान में अवैध निर्माण तोड़ने को लेकर हुए बवाल और आगजनी में उस पर कुल 3 मुकदमे दर्ज हुए थे। हाजी सईद ने ही भीड़ को आगजनी और तोड़फोड़ करने के लिए उकसाया था।

इसके अलावा 1 जुलाई को भीड़ हत्या के खिलाफ फैज-ए-आम कॉलेज से निकले शांति मार्च में जो बवाल हुआ था, हाजी सईद उसका भी सह-अभियुक्त था। जानकारी के मुताबिक हाजी सईद और बदर अली ने मिलकर शांति मार्च के बहाने बवाल कराया था। कुल मिलाकर हाजी सईद पर सदर बाजार थाने में 5, कोतवाली में 1, रेलवे रोड में 2 और देहली गेट थाने में 1 मुकदमा दर्ज था।