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टेरर फंडिंग: J&K के पूर्व विधायक राशिद इंजीनियर को एनआईए ने किया गिरफ़्तार

एनआईए ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व विधायक शेख अब्दुल राशिद उर्फ़ राशिद इंजीनियर को गिरफ़्तार किया है। टेरर फंडिंग मामले में गिरफ़्तार किए जाने वह पहले बड़े नेता है। इससे पहले एनआईए ने कई अलगाववादियों से इस मामले में कड़ी पूछताछ की थी, जिसमें उन्हें पाकिस्तान से फंड मिलने की बात सामने आई थी। इस फंड का प्रयोग भारत के ख़िलाफ़ आतंक फैलाने के लिए किया जाता था। राशिद उत्तरी जम्मू कश्मीर के लंगाते विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रहे हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत में राशिद से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी पूछताछ की थी। ईडी राशिद के जवाबों से संतुष्ट नहीं था, जिसके कारण उनकी गिरफ़्तारी हुई। इससे पहले 2017 में भी राशिद से पूछताछ की जा चुकी है। यह दूसरी बार था जब उन्हें पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया गया। जाँच एजेंसियों ने जब व्यापारी ज़हूर वाताली से पूछताछ की तो राशिद का नाम सामने आया। वाताली पर कश्मीरी आतंकियों को धन मुहैया कराने का आरोप है।

एनआईए ने कई अलगाववादियों को टेरर फंडिंग मामले में अपने रडार पर रखा है और कइयों से पूछताछ की है। इन अलगाववादियों के आतंकी संगठनों जैसे कि लश्कर-ए-तैयबा, दुखरान-ए-मिल्लत और हिज्बुल मुजाहिदीन के साथ सम्बन्ध सामने आए हैं। एनआईए राशिद इंजीनियर को अदालत में पेश कर के कस्टडी की माँग करेगी। बता दें कि कारोबारी ज़हूर वाताली ने कश्मीर से लेकर गुरुग्राम तक अकूत संपत्ति अर्जित कर रखी है और एनआईए ने उसकी कई सम्पत्तियों को अटैच भी किया है।

एनआईए की जाँच में पता चला है कि ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को बरगला कर उनसे पत्थरबाजी और भारत विरोधी प्रदर्शन करवाए। हुर्रियत व ऐसे ही अन्य संगठनों ने इस कार्य के लिए सोशल मीडिया, अखबारों और प्रेस रिलीज का सहारा लिया। अधिकारियों ने बताया कि यह सब बड़ी चालाकी से अंजाम दिया जाता था। मस्जिद में नमाज के बाद या सुरक्षा बलों की आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बाद युवाओं को उकसा कर पत्थरबाजी कराई जाती थी।

ईडी को पता चला है कि अलगाववादियों, आतंकियों व कश्मीरी नेताओं को न सिर्फ़ पाकिस्तान में बैठे आकाओं से फंड प्राप्त हुए बल्कि पाकिस्तान उच्चायोग से सीधे उनके पास फंड पहुँचाया गया। राशिद इंजीनियर इससे पहले जम्मू कश्मीर विधानसभा में भी उत्पात मचा चुके हैं। उनकी इस हरकत के बाद उन्हें सदन से निकाल बाहर किया गया था। राशिद अपने ख़िलाफ़ सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं।

भूल जाओ कश्मीर: पाकिस्तान में गूॅंजा- मोदी से तू डरता है, मरियम से लड़ता है

ज्यादा अरसा बीता नहीं है जब पाकिस्तानी मीडिया प्रधानमंत्री इमरान खान के अमेरिकी दौरे पर फिदा था। लेकिन, जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होते ही पाक के सिर से इमरान का खुमार उतर गया है। सड़कों पर ‘मोदी से तू डरता है, मरियम से लड़ता है’ और ‘नियाजी गो बैक’ के नारे लग रहे हैं।

पाकिस्तानी मीडिया में इमरान का मजाक उड़ाते हुए आर्टिकल प्रकाशित हो रहे हैं। इनमें कहा जा रहा है कि कश्मीर को भूलकर विपक्ष को इमरान खान का मसला संयुक्त राष्ट्र में ले जाना चाहिए और इस संकट से छुटकारा पाने की हर राजनीतिक, कूटनीतिक और रणनीतिक संभावनाओं पर विचार करना जाना चाहिए।

वैसे आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने के बाद से गीदड़ भभकी देने में पाक अव्वल रहा है। खुफिया इनपुट यह भी है कि उसकी जमीन पर पल रहे आतंकी भारत में बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं। लेकिन, नान-टमाटर के चढ़ते भाव के बीच पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज की गिरफ्तारी से जनता चिढ़ गई है।

पाकिस्तानी अवाम और मीडिया के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि कश्मीर से ध्यान हटाने के लिए इमरान ने मरियम की गिरफ्तारी करवाई है। लोग सड़कों पर उतरकर उनका विरोध कर रहे हैं।

चीनी मिल भ्रष्टाचार मामले में मरियम और उनके चचेरे भाई यूसुफ अब्बास को राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने गिरफ्तार किया है। दोनों 21 अगस्त तक एनएबी की हिरासत में रहेंगे।

Article 370: सरदार जयंती पर अस्तित्व में आएगा UT जम्मू-कश्मीर और लद्दाख

आर्टिकल 370 निष्प्रभावी होने के बाद जम्मू-कश्मीर 31 अक्टूबर से दो केन्द्र शासित प्रदेशाें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित हो जाएगा। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शुक्रवार (अगस्त 09, 2019) को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को अपनी स्वीकृति दे दी है। 31 अक्टूबर को ही लौह पुरुष कहे जाने वाले देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती है। पटेल आधुनिक भारत के निर्माता माने जाते हैं।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने का प्रावधान है। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी, जबकि लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी।

अधिनियम के अनुसार, नवगठित केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में करगिल और लेह जिलों को शामिल किया जाएगा, जबकि मौजूदा राज्य के अन्य 12 जिले केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बनेंगे। जम्मू-कश्मीर राज्य में इस समय लोकसभा की छह सीटें हैं। विभाजन के बाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पाँच और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में एक लोकसभा सीट होगी। दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में अब राज्यपाल की जगह उप राज्यपाल होंगे।

केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष का होगा। मौजूदा समय में वहाँ की विधानसभा का कार्यकाल छह साल का होता है। नवगठित केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में 107 सदस्यों का चुनाव मतदान के जरिए होगा। इनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की 24 सीटें शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर की मौजूदा विधानसभा में भी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लिए 24 सीटें रखी गई थीं।

अधिनियम में कहा गया है, “जब तक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस नहीं पा लिया जाता और वहाँ के लोग खुद अपना प्रतिनिधि नहीं चुनते जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में 24 सीटें खाली रहेंगी और विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के उल्लेख के समय उनकी गिनती नहीं की जाएगी।” इस प्रकार नया केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 83 सीटों के लिए चुनाव होगा जिनमें छह अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी।

उप राज्यपाल को यदि यह लगता है कि विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है तो उन्हें दो महिला सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार होगा। अधिसूचना में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के संयुक्त उच्च न्यायालय के रूप में काम करेगा।

उल्लेखनीय है कि संसद ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे से संबंधित अनुच्छेद 370 को हटाने वाले संकल्प और राज्य को दो हिस्सों में बांटने में वाले विधेयक को इसी सप्ताह पारित किया था। इसके बाद राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने इन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त हो गया था। राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 35ए को इससे पहले ही हटा दिया था।

आज जम्मू से धारा 144 भी हटा ली गई है और कल से जम्मू के स्कूल और कॉलेज खुल जाएँगे। जम्मू कश्मीर के डिप्टी कमिश्नर की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सरकार के आदेश के मुताबिक जम्मू से धारा 144 हटाई जा रही है और यहाँ कल यानी 10 अगस्त से स्कूल-कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान सामान्य तौर पर खोले जाएँगे।

NDTV के मालिक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका मुंबई एयरपोर्ट पर रोके गए, जालसाजी के हैं आरोपी

समाचार चैनल NDTV के प्रमोटर्स प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय को मुंबई एयरपोर्ट पर विदेश रवाना होने से पहले ही CBI के निर्देश पर रोक लिया गया है। दोनों पर मनी लॉन्ड्रिंग और जालसाजी के आरोप हैं।

दोनों मुंबई से नैरोबी के लिए उड़ान भरने वाले थे। प्रणब एवं राधिका सीबीआई एवं प्रवर्तन निदेशलाय (ED) की जाँच का सामना कर रहे हैं। इन दोनों के साथ कुछ और लोग भी थे।

कुछ दिन पहले ही प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट/SAT-The Securities Appellate Tribunal) ने मीडिया समूह एनडीटीवी पर सेबी द्वारा लगाए गए दो करोड़ रुपए के जुर्माने को बरकरार रखने का फैसला दिया था। सेबी (SEBI) ने कंपनी पर 450 करोड़ रुपए की कर (Tax) माँग से जुड़ी सूचनाएँ सार्वजनिक करने में खामी पाए जाने के कारण समाचार चैनल एनडीटीवी (NDTV) पर जुर्माना लगाया था।

एनडीटीवी ने सेबी के जून 2015 और मार्च 2018 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। दरअसल, एनडीटीवी ने आयकर विभाग द्वारा की गई 450 करोड़ रुपए की कर (Tax) माँग और कंपनी के शीर्ष कार्यकारी अधिकारियों द्वारा की गई शेयरों की बिक्री संबंधी सूचनाएँ शेयर बाजारों को देने में देरी की थी। इसी मामले में सेबी ने जुर्माना लगाया था।

Article 370: कॉन्ग्रेस की सुप्रीम कोर्ट यूनिट भी मोदी सरकार के साथ

अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के मोदी सरकार के फैसले पर कॉन्ग्रेस में विभाजन साफ-साफ दिख रहा है। कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेताओं के बाद पार्टी की लीगल सेल ने भी जम्मू-कश्मीर पर केन्द्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी की सुप्रीम कोर्ट, मानवाधिकार और आरटीआई यूनिट ने एक प्रेस नोट जारी कर इस मामले पर पार्टी से अलग स्टैंड दिखाया है।

पार्टी की इस यूनिट के अध्यक्ष अनूप जॉर्ज चौधरी के हस्ताक्षर वाले प्रेस नोट में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 एक आस्थायी प्रावधान था और इसे हटाकर केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का सही मायनों में भारत के साथ विलय कर दिया है।

इससे पहले दीपेंद्र हुड्डा, ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया, जर्नादन द्विवेदी, मिलिंद देवड़ा आदि भी अनुच्‍छेद 370 को निष्प्रभावी करने और जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य पुनर्गठन विधयेक को पारित करने के फैसले का स्‍वागत कर चुके हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी की सुप्रीम कोर्ट यूनिट ने अनुच्छेद 35-A और राज्य को दो हिस्सों में बाँटने के फैसले का भी समर्थन किया है। कॉन्ग्रेस की इस यूनिट का मानना है कि राज्य को दो हिस्सों में बाँटने से राजनीतिक शक्तियों का सही रूप से बँटवारा हो सकेगा जो वहाँ की जनता के हित में है।

गत सोमवार को भुवनेश्‍वर कालिता ने कश्मीर मुद्दे पर व्हिप जारी करने से इनकार करते हुए राज्‍यसभा और कॉन्ग्रेस से इस्‍तीफा दे दिया था। उन्‍होंने कहा था कि देश का मिजाज पूरी तरह से बदल चुका है और पार्टी का इस मसले पर स्टैंड जन भावना के खिलाफ है।

अरुण जेटली AIIMS में भर्ती, पीएम मोदी देखने पहुॅंचे

काफी समय से बीमार चल रहे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को AIIMS में भर्ती कराया गया है। साँस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें मेडिकल जाँच के लिए शुक्रवार सुबह 11 बजे एम्स में भर्ती कराया गया। उन्हें सीएन (न्यूरो कार्डियक) सेंटर में एडमिट कराया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एम्स पहुॅंचकर जेटली का हाल जाना। उनसे पहले केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला भी AIIMS पहुॅंचकर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कमजोरी और घबराहट की वजह से जेटली को भर्ती कराया गया है। इससे पहले, सितंबर 2014 में डायबिटीज मैनेज के लिए उनकी गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी भी हो चुकी है, जबकि साल 2005 में उनका दिल से जुड़ा ऑपरेशन भी हुआ था।

भाजपा के वरिष्ठ नेता जेटली पिछले करीब 2 साल से बीमार चल रहे हैं। किडनी की बीमारी के साथ-साथ जेटली कैंसर से भी जूझ रहे हैं। वह सॉफ्ट टिशू कैंसर से पीड़ित हैं। जेटली के बाएँ पैर में कैंसर (सॉफ्ट टिश्यू) है। वह इसकी सर्जरी के लिए जनवरी 2019 में अमेरिका भी गए थे। पिछले साल मई में उन्हें किडनी प्रत्यारोपित की गई थी।

अपनी अस्वस्थता के कारण ही जेटली ने मोदी सरकार की दूसरी कैबिनेट में शामिल होने से मना कर दिया था। इसको लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी थी।

जेटली ने उस चिट्ठी को ट्विटर पर भी शेयर करते हुए लिखा था, “पिछले 18 महीने से मैं बीमार हूँ। मेरी तबीयत खराब है, इसलिए मुझे मंत्री न बनाने पर विचार करें।”

इंदिरा गाँधी ने पाकिस्तान को लौटाई थी हजारों एकड़ जमीन: जरदारी का खुलासा

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने शुक्रवार (अगस्त 09, 2019) को संसद में कश्मीर मुद्दे पर बात रखते हुए ‘पूर्वी पाकिस्तान’ की जंग के समय को याद करते हुए इंदिरा गाँधी का जिक्र किया। इंदिरा का हवाला देते हुए उन्होंने जो कुछ कहा वह कॉन्ग्रेस की परेशानी बढ़ा सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जरदारी ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि 1971 की जंग के बाद इंदिरा गाँधी ने हजारों एकड़ जमीन पाकिस्तान को लौटाई थी। उन्होंने कहा कि 1971 की जंग में 90,000 कैदी भारत के पास थे। इसके अलावा हजारों एकड़ जमीन भी भारत के कब्जे में थी। तब पूर्व पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो ने इंदिरा से बातचीत की। इसके बाद इंदिरा गाँधी ने सैनिक भी लौटाए और हमारी जमीन भी वापस की।

जरदारी ने पाकिस्तान की संसद में कहा कि आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी किया जाना पूर्वी पाकिस्तान जैसी बड़ी समस्या है। इस समझने के लिए हमें इतिहास का सहारा लेना होगा। जरदारी ने अपने भाषण में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर सेकुलर मूल्यों को खत्म करने का आरोप लगाया।

जरदारी ने कहा- “हम ईस्ट पाकिस्तान की जंग हारे थे। मैं इस पर नहीं जाना चाहता। इसके बहुत से मसले हैं, लेकिन हमारा आधा अंग टूट चुका था। इसी तरह आज कश्मीर का हमारा आधा अंग टूट चुका है। कश्मीर और भारत के मुसलमानों को जिन्ना की यह बात समझ आ गई है कि दो राष्ट्र का सिद्धांत ही चलेगा। उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के बयानों का हवाला देते हुए जरदारी ने कहा कि कश्मीर की लीडरशिप खुद कह रही है कि हमने गलती की कि हमने भारत का साथ दिया। यह बात समझने के लिए हमें दूरदृष्टि चाहिए।”

इसके साथ ही जरदारी ने पाकिस्तान सरकार को संयुक्त राष्ट्र अमीरात, चीन, रूस, ईरान के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात करने का भी सुझाव दिया।

TRS के वरिष्ठ नेता जी विवेकानंद ने थामा BJP का दामन

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के वरिष्ठ नेता जी विवेकानंद शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी और तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष के लक्ष्मण की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली।

विवेकानंद का भाजपा में शामिल होना सत्ताधारी टीआरएस के लिए बड़ा झटका है। उन्हें टीआरएस सुप्रीमो और सीएम के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने अपने पहले शासनकाल में सलाहकार नियुक्त किया था। मगर पार्टी की तरफ से टिकट न मिलने के कारण जी विवेकानंद काफी नाराज चल रहे थे। इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के चीफ व्हिप रहे भुवनेश्वर कलीता भी आज (अगस्त 9, 2019) बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। कलीता ने अनुच्छेद 370 पर कॉन्ग्रेस के रुख के विरोध में सोमवार (अगस्त 5, 2019) को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

कलीता ने एक पत्र में कहा था, “आज कॉन्ग्रेस ने मुझे कश्मीर मुद्दे के बारे में व्हिप जारी करने को कहा है। जबकि सच्चाई ये है कि देश का मिजाज पूरी तरह से बदल चुका है और ये व्हिप देश की जन भावना के खिलाफ है। पंडित नेहरू ने खुद कहा था कि आर्टिकल 370 एक दिन घिसते-घिसते पूरी तरह घिस जाएगा। आज की कॉन्ग्रेस की विचारधारा से लगता है कि कॉन्ग्रेस आत्महत्या कर रही है और मैं इसमें भागीदार नहीं बनना चाहता हूँ।”

अगस्ता वेस्टलैंड मामले में कमलनाथ के भांजे के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी

दिल्ली की एक अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे और कारोबारी रतुल पुरी के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोर्ट से पुरी के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी करने की मांग की थी।

खबरों के अनुसार, ईडी ने कोर्ट से कहा था कि पुरी जॉंच जांच सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनसे संपर्क करना भी मुश्किल है। ऐसे में यदि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे मामले की जॉंच को प्रभावित कर सकते हैं। गौरतलब है कि एक बार ईडी के समन पर पुरी पेश होने के बाद टॉयलेट जाने का बहाना बना निकल भागे थे।

ख़बर के अनुसार, रतुल पुरी ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा रिकॉर्ड किए गए अपने बयान की कॉपी हासिल करने के लिए गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। निचली अदालत ने 6 अगस्त को बयान की कॉपी की उनकी माँग ख़ारिज कर दी थी। उनके वकील विजय अग्रवाल ने दावा किया कि आवेदन ख़ारिज करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

ग़ौरतलब है कि हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष पुरी ने 27 जुलाई को निचली अदालत से इस मामले में अग्रिम ज़मानत माँगी थी।

‘स्टंट सेकुलर’ Zomato में कॉस्ट कटिंग: 100 लोगों को नौकरी से निकाला

हाल ही में अपनी सेक्युलर छवि के लिए चर्चा में आई ऑनलाइन खाना डिलीवरी करने वाली कंपनी जोमैटो (Zomato) ने अपने गुरुग्राम कार्यालय में आवश्यकता से अधिक 100 कस्टमर्स सपोर्ट कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। कंपनी ने कॉस्ट कटिंग करने के लिए छंटनी करने का कदम उठाया है।

Zomato कंपनी ने कहा है कि यह छंटनी ग्राहक देखभाल विभाग में आवश्यकता से अधिक कर्मचारी होने के कारण की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “पिछले कुछ महीनों में हमारी सेवा गुणवत्ता सुधरी है। मिलने वाले ऑर्डरों के लिए ग्राहक सहायता के लिए कर्मचारियों की जरूरत कम हुई है।” Zomato के अनुसार, कंपनी ने बैकअप के लिए रखे इन लोगों को नौकरी से निकाला है।

हालाँकि, कंपनी का कहना है कि इस छंटनी की वजह से उसके कोर ऑपरेशन (Core operations) पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। Zomato ने कहा है, ”पिछले कुछ समय में हमारी सर्विस में सुधार देखने को मिला है। अब वर्किंग ऑपरेशन को ऑपरेट करने में कम लोगों की जरूरत पड़ रही है।

कंपनी का कस्टमर्स सपोर्ट डिपॉर्टमेंट में इस बात से अच्छा प्रभाव देखने को मिला है। Zomato हर ऑर्डर पर कस्टमर सपोर्ट में 4 से 5 रुपए खर्च करती है। इस खर्च में ऑर्डर की सेल सर्विस भी शामिल है। इस तरह से कम्पनी का मानना है कि वो मानव संसाधनों पर ज्यादा खर्च वहन करने में असमर्थ है।

Zomato हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रही। दरअसल, जोमैटो ने एक हिन्दू युवक की माँग को खारिज कर के उसे बदले में ऐसा जवाब दिया था, जिससे कंपनी हिन्दू समुदाय और कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गई थी।

अमित शुक्ला नाम के उपभोक्ता ने मुस्लिम डिलिवरी ब्वॉय को देखकर ऑर्डर कैंसल कर दिया था। साथ ही, उन्होंने दूसरे राइडर से खाना भिजवाने की माँग की थी। हालाँकि, कंपनी ने इसके लिए इनकार कर दिया और रिफंड देने से भी मना कर दिया था। इसके बाद कस्टमर ने कानूनी कार्रवाई करने की धमकी भी दी थी। इसके बाद यूज़र्स ने Zomato के बहिष्कार का निर्णय किया था और इसके बाद कम्पनी की मोबाइल एप्प को भी अनइंस्टॉल किया गया।