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‘चाचा नेहरू मदरसा’ के अंदर मंदिर निर्माण संभव नहीं, सलमा अंसारी को AMU ने पढ़ाया नियम-कानून

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी हाल ही में तब चर्चा में आईं, जब उन्होंने घोषणा की थी कि वह ‘चाचा नेहरू मदरसा’ के अंदर एक मंदिर बनाना चाहती हैं, जिसे वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में चलाती हैं।

सलमा अंसारी ने घोषणा की थी कि उनके मदरसे में छात्र, जिनमें कथित रूप से हिंदू परिवारों के भी कई छात्र हैं, अक्सर प्रार्थना करने के लिए परिसर के बाहर जाते हैं, जो उनकी सुरक्षा के लिए ठीक नहीं रहता। अंसारी ने कहा था कि वह परिसर के अंदर एक हिंदू मंदिर और एक मस्जिद बनाने की योजना बनी रही हैं।

सलमा अंसारी की इस घोषणा पर AMU प्रशासन का ध्यान भी गया। अमर उजाला की ख़बर के अनुसार, AMU प्रशासन का कहना है कि सलमा अंसारी का मदरसा AMU से लीज पर ली गई ज़मीन पर है। पट्टा केवल 10 वर्षों के लिए था और AMU अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी भी तरह का निर्माण संभव नहीं हो पाएगा।

AMU अधिकारियों ने यह भी कहा कि सलमा अंसारी ने AMU प्रशासन को मंदिर निर्माण के लिए अभी तक कोई आधिकारिक पत्र नहीं लिखा है।

ख़बर में कहा गया कि भले ही सलमा अंसारी ने मंदिर निर्माण के लिए कागजी कार्रवाई शुरू कर दी हो, लेकिन AMU प्रशासन द्वारा मंदिर-मस्जिद निर्माण की अनुमति संभव नहीं है। इसकी वजह यह है कि साल 2017 के बाद शिक्षण संस्थानों में धार्मिक स्थल के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी।

हालाँकि, सलमा अंसारी ने कथित तौर पर AMU अधिकारियों को मदरसा के लिए पट्टे की अवधि 10 साल से बढ़ाकर 30 साल करने के संदर्भ में पत्र लिखा है।

सलमा अंसारी की घोषणा के बाद, सपा विधायक ज़मीर उल्लाह ख़ान ने कहा था कि यह एक बुरा क़दम है और अगर मदरसा परिसर के अंदर एक मंदिर का निर्माण किया जाता है, तो अन्य मदरसों में मंदिरों का निर्माण करने की माँग उठ जाएगी।

AMU के विद्वान और धर्मशास्त्र के प्रोफेसर मुफ्ती ज़ाहिद ने कहा था कि समुदाय विशेष को मूर्ति पूजा का प्रचार करने की अनुमति नहीं है, केवल मदरसे के अंदर मंदिर बनाने की अनुमति दी जाए।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सलमा अंसारी की घोषणा रॉ के पूर्व अधिकारियों के दावों के संदर्भ में संडे गार्डियन के लेख के तुरंत बाद आई। इस लेख में भारतीय खुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के एक पूर्व अधिकारी ने सनसनीखेज ख़ुलासा किया था कि पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 1990-92 के बीच ईरान में भारतीय राजदूत रहते तेहरान में रॉ के सेट-अप को उजागर कर वहाँ काम कर रहे अधिकारियों की ज़िंदगी को ख़तरे में डाल दिया था।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि अंसारी ने आईबी के एडिशनल सेक्रेटरी रतन सहगल के साथ मिलकर 1992 बम धमाकों से पहले रॉ के गल्फ यूनिट को पंगु कर दिया था। (शायद वे 1993 के धमाकों की बात कर रहे थे, लेकिन भूल से ट्वीट में गलत साल का उल्लेख कर दिया है।)

द संडे गार्डियन में प्रकाशित ख़बर में दावा किया गया कि पूर्व रॉ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तेहरान में राजदूत होने के दौरान, “रॉ के अभियानों को नुकसान पहुँचाने” को लेकर अंसारी के ख़िलाफ़ जाँच की माँग की थी।

पश्चिम बंगाल: विश्वजीत गांगुली समेत 12 फ़िल्म-टीवी कलाकार BJP में शामिल

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी अपना जनाधार बढ़ाने की लगातार कोशिश में है। बीजेपी की यह कोशिश रंग भी ला रही है। इसी कड़ी में गुरुवार (18 जुलाई 2019) को पश्चिम बंगाल के 12 फ़िल्म व टीवी कलाकार बीजेपी में शामिल हो गए। दिल्ली में बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष की मौजूदगी में ये सितारे पार्टी में शामिल हुए। इस दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय, राकेश सिन्हा और संबित पात्रा भी मौजूद थे। बीजेपी में शामिल होने वाले इन कलाकारों में विश्वजीत गांगुली, ऋषि कौशिक, कंचना मोइत्रा, रूपांजन मित्रा, रूपा भट्टाचार्य, मोमिता चटर्जी, सौरभ चक्रवर्ती और नमिता मित्रा के नाम प्रमुख हैं।

ख़बर के अनुसार, दिलीप घोष ने 12 अभिनेताओं का पार्टी में स्वागत किया और कहा कि राज्य के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकास कार्यों से प्रेरित हैं। उन्होंने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी में शामिल होने वालों को परेशान किया जा रहा है। बीजेपी का हाथ थामने वालों के लिए यह एक जोखिम भरा काम है। इसलिए पार्टी ने राज्य के बाहर इस समारोह का आयोजन किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन सभी कलाकारों के साहस पर हम सभी को गर्व करना चाहिए।

जहाँ एक तरफ़ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी में दल-बदल को लेकर नए नेताओं की नियुक्ति कर रही हैं, वहीं TMC के नेताओं का बीजेपी में शामिल होना उनके लिए कम दु:खद नहीं है, इसका असर 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। फ़िलहाल तो हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि राज्य में बीजेपी पार्टी TMC की प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर रही है। इसलिए आगामी चुनाव में बीजेपी को हराना TMC के लिए कड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

इससे पहले भी TMC और अन्य विपक्षी पार्टियों से विधायक और पार्षद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। हाल ही में, मुकुल रॉय ने इस बात की भी जानकारी दी थी कि TMC, कॉन्ग्रेस और CPM के 107 विधायक बीजेपी में शामिल होने के लिए उनसे सम्पर्क बनाए हुए हैं। इसके अलावा कुछ दिनों पहले ही कालचीनी विधानसभा क्षेत्र के TMC विधायक विल्सन चामपारी बीजेपी में शामिल हुए थे। दक्षिण दिनाजपुर ज़िला परिषद की सभापति लिपिका राय और पूर्व ज़िला तृणमूल अध्यक्ष विपल्व मित्र समेत 10 सदस्य बीजेपी में शामिल हो गए थे।

इंदिरा जयसिंह-आनंद ग्रोवर के यहाँ CBI की छापेमारी ख़तरनाक: SC बार एसोसिएशन को वकीलों ने लिखा पत्र

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के कार्यालयों और आवासों पर CBI के छापों की निंदा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सौ से अधिक वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) को एक पत्र लिखा है। इन वकीलों ने माँग रखी है कि CBI छापों के खिलाफ एक आम सभा बुलाई और इसकी निंदा की जाए।

इस पत्र में, वकीलों ने इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के कार्यालयों और आवासों पर CBI की छापेमारी की कड़ी निंदा की और SCBA को इस संदर्भ में एक स्पष्ट संदेश जारी करने की अपील की।

ख़बर के अनुसार, पत्र में CBI की कार्रवाई को, ‘ख़तरनाक मिसाल क़ायम करने वाला, क़ानूनी पेशे की स्वतंत्रता पर प्रहार’बताया गया है। पत्र में कहा गया है कि जाँच में वकीलों के सामूहिक सहयोग के बावजूद CBI ने अभूतपूर्व क़दम उठाया।

अधिवक्ताओं के अनुसार, इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर ने लगातार क़ानून-व्यवस्था को बरक़रार रखा, उन्हें इस तरह दरकिनार कर देना ग़लत है। सभी अधिवक्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए CBI की छापेमारी को ‘राज्य मशीनरी द्वारा ताक़त का ग़लत इस्तेमाल’ बताया।

इसी संदर्भ में, दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन द्वारा एक बयान जारी करते हुए CBI की छापेमारी की निंदा करते हुए कहा गया कि एडवोकेट्स ऑफ़िस में क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा तलाशी अभियान गंभीर चिंता का विषय है। एजेंसियों से कहें कि कोई ऐसा क़दम न उठाए जो पेशे की स्वतंत्रता को बाधित करता हो।

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर के यहाँ CBI ने गुरुवार (11 जुलाई) को छापेमारी की थी। CBI ने यह छापेमारी उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ के लिए विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (FCRA) के उल्लंघन मामले में की थी। CBI प्रवक्ता ने बताया था कि दिल्ली और मुंबई दोनों जगह छापे मारे गए।

दरअसल, यह मामला मई 2019 में सामने आया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के एक स्वैच्छिक संगठन ‘लॉयर्स वॉइस’ द्वारा दायर जनहित याचिका के आधार पर सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ को एक नोटिस जारी किया था। यह नोटिस प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया। इस याचिका में संबंधित संस्थाओं द्वारा विदेशी चंदा (नियमन) अधिनियम (FCRA) क़ानून के उल्लंघन पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) जाँच की माँग की गई है। 

FCRA उल्लंघन की ख़बर सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने ग़ैर सरकारी संगठन के FCRA लाइसेंस को रद कर दिया था, लेकिन दोषियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इनके द्वारा जुटाए गए धन का राष्ट्र के ख़िलाफ़ गतिविधियों में उपयोग किया गया।


पढ़ाने जाता था, 4-5 बार थोड़ी-बहुत ‘छेड़खानी’ हो गई: 9 साल की बच्ची का रेप आरोपित AMU मौलाना

दो दिन पहले की घटना है। अलीगढ़ में 9 साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मौलवी मोहम्मद अहमद को गिरफ्तार किया जा चुका है।

अब इसी घटना में बेहद शर्मनाक और घिनौनी बात सामने आ रही है। टाइम्स नाउ हिंदी की खबर के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद रेप आरोपित मौलवी मोहम्मद अहमद ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने अपराधों को स्वीकार कर लिया है। साथ ही उसने बताया कि वो पीड़ित नाबालिग बच्ची को पढ़ाने जाता था, तो थोड़ी-बहुत छेड़खानी हो गई।

मीडिया के सामने बोलते-बोलते मौलवी मोहम्मद अहमद ने यह भी कबूला कि उसने बच्ची के साथ 4-5 बार ‘गंदी हरकत’ की है। लेकिन उसके अनुसार यह ‘थोड़ी-बहुत छेड़खानी’ थी।

पढ़ें खबर : AMU की मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले मौलाना ने 9 साल की बच्ची को बनाया हवस का शिकार

9 साल की बच्ची से रेप का आरोपित मौलवी मोहम्मद अहमद ने यह भी बताया कि वो अजान पढ़ता है और अगर इमाम नहीं होते हैं तो वो नमाज भी पढ़ता है। उसने कहा, “बच्चों को कुरान की शिक्षा देता हूँ। यह (छेड़खानी) 4-5 बार हुआ है।”

पढ़ें विचार : तख्ती गैंग, मौलवी क़ुरान पढ़ाने के बहाने जब रेप करता है तो कौन सा मज़हब शर्मिंदा होगा?

मौलवी ने कैसे बनाया बच्ची को अपनी हवस का शिकार

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मस्जिद में मोहम्मद अहमद मोज्जिन था। पुलिस के अनुसार, मौलवी मोहम्मद अहमद नाबालिग को घर पर कुरान और उर्दू पढ़ाने जाता था। मौलाना ने मासूम को डरा धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और शिकायत करने पर बच्ची को जान से मारने की धमकी दी।

इस घटना की जानकारी परिजनों को होने पर पीड़ित बच्ची की माँ ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित मौलवी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की और मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया।

IMA पोंजी स्कैम: 1500 करोड़ रुपए का घोटालेबाज मंसूर खान हुआ गिरफ्तार, ED ने कसा शिकंजा

IMA पोंजी घोटाले के आरोपित आईएमए फाउंडर मंसूर खान को प्रवर्तन निदेशालय ने आज (जुलाई 19, 2019) सुबह दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार गिरफ्तारी के बाद ईडी उसे एमटीएनएल बिल्डिंग स्थित अपने कार्यालय लेकर गई है, जहाँ मंसूर से पूछताछ की जा रही है। बता दें कि मंसूर खान पर ईडी के साथ-साथ एसआईटी ने भी लुक-आउट नोटिस जारी किया था। फिलहाल मंसूर ईडी की हिरासत में है।

गौरतलब है कि मंसूर की हिरासत से पहले स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम चीफ़ रविकांत गौड़ा ने कहा था, “अपने सूत्रों के माध्यम से एक एसआईटी ने आईएमए के संस्थापक-मालिक मोहम्मद मंसूर खान का दुबई में पता लगाया। इसके साथ ही उससे यह भी कहा गया है कि वह भारत लौट आए और खुद को कानून के हवाले कर दे। उसके मुताबिक, वह दुबई से दिल्ली आ चुका है। एसआईटी के कई अधिकारी उसे गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली में मौजूद हैं।”

बता दें कि पिछले महीने 8 जून को मंसूर खान 1500 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करके दुबई भाग गया था। उसके ख़िलाफ़ निवेशकों ने हजारों शिकायतें दर्ज करवा के दावा किया था कि उसने उन लोगों को हाई रिटर्न का वादा करके ठगा है। मंसूर खान के झाँसे में आने वाले ज्यादातर मुस्लिम निवेशक थे, जिन्हें इस्लामिक बैंकिंग या हलाल निवेश के नाम पर फँसाया गया था।

पढ़ें : इस्लामिक बैंकिंग के नाम पर ₹2000 करोड़ ऐंठने के बाद मंसूर खान करना चाहता है ख़ुदकुशी

सोनभद्र नरसंहार में ग्राम प्रधान सहित 26 गिरफ्तार: रासुका के तहत कार्रवाई, फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा मुकदमा

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बुधवार (जुलाई 17, 2019) को जमीनी विवाद को लेकर हुए नरसंहार में पुलिस ने मुख्य आरोपित ग्राम प्रधाम यज्ञदत्त, उसके भाई और भतीजों समेत 26 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक मामले में पुलिस ने 28 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है।

पुलिस जाँच में आरोपितों के पास से 2 बंदूके बरामद हुई हैं। साथ ही पुलिस ने 6 ट्रैक्टर भी कब्जे में लिए हैं। अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा पाँच टीमें रवाना कर दी गई हैं और एसपी सलमान ताज पाटिल ने बताया है कि वांछित लोगों की तलाश तेज कर दी गई है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण लल्लू सिंह की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित ग्राम प्रधान और उनके भाई समेत सभी पर हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल, आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम संभावित स्थानों पर दबिश दे रही है।

बता दें कि इस मामले में लखनऊ स्थित प्रदेश अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग ने सभी आरोपितों पर रासुका के तहत कार्रवाई करने को कहा है। आयोग के अध्यक्ष डीजीपी बृजलाल के मुताबिक इस कांड में पुलिस व प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। उन्होंने परिक्षेत्र के डीआईजी को निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में जाँच कर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करें।

प्रदेश अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष के मुताबिक इस घटना में लोकव्यवस्था पूर्ण रूप से भंग हुई है, इसलिए उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए और जमानत होने की स्थिति में उन्हें रासुका में निरुद्ध किया जाए। साथ ही आयोग ने मामले का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जाने के भी निर्देश दिए हैं। इसके अलावा इस मामले में राजस्व परिषद ने भी जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।

पूरा मामला: उत्तर प्रदेश: आदिवासियों की जमीन पर कब्जे के लिए 3 महिलाओं समेत 11 की हत्या

ऋचा भारती पर अभद्र टिप्पणी करने वाले अबु आजमी वसीम खान के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, अभी है फरार

सोशल मीडिया पर धार्मिक टिप्पणी को लेकर सुर्खियों में आई ऋचा भारती उर्फ़ ऋचा पटेल के ख़िलाफ़ अभद्र टिप्पणी करने के मामले में अबु आजमी वसीम खान के ख़िलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। फिलहाल अबु आजमी वसीम खान फरार है और पुलिस ने उसकी धड़-पकड़ की कोशिशें तेज कर दी हैं। इस बात की पुष्टि स्वंय एसएसपी मुख्यालय-1 से अमित रेणु ने की। बता दें कि इस मामले में हिंदू क्रांति सेना के रवि रंजन, विक्रम सिंह, पंकज सिंह सहित पाँच लोगों ने बुधवार (जुलाई 17,2 019) को पिठोरिया थाना में शिकायत दर्ज की थी।

ऋचा की सुरक्षा बढ़ाई गई

गौरतलब है कि इस एफआईआर को दर्ज करने के साथ ऋचा भारती की सुरक्षा को भी बढ़ाया गया है। ऋचा और उनके परिवार की सुरक्षा के मद्देनजर उनके घर पर 4 जवानों की तैनाती की गई है। इसके अलावा हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने भी उनसे मिलकर उन्हें मदद का भरोसा दिलाया है।

मामले में असहयोगात्मक रवैया, ग्रामीणों ने फूँका विधायक का पुतला

स्थानीय कांके विधायक डॉ जीतूचरण राम से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण यहाँ के ग्रामीण नाराज हैं। खबर के मुताबिक गाँव वालों ने यहाँ आंबेडकर चौक में नाराजगी के चलते उनका पुतला दहन भी किया, साथ ही उनके ख़िलाफ़ नारेबाजी भी की। ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे मामले की सूचना देने के बाद भी ऋचा के मामले में विधायक द्वारा कोई मदद नहीं दी गई।

प्रभात खबर के मुताबिक भाजयुमो के मेसरा मंडल अध्यक्ष शिवलाल महतो ने विधायक के असहयोगात्मक रवैये पर बात करते हुए कहा कि विधायक हमेशा जन समस्याओं से दूर रहते हैं, जिसके कारण कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। उन्होंने बताया कि ऋचा भारती मामले में सहयोग के लिए कार्यकर्ता उन्हें फोन करते रहे पर विधायक द्वारा कोई रिस्पॉन्स नहीं आया।

आदेश में सुधार, इसलिए मनीष कुमार सिंह के कोर्ट का बहिष्कार वापस

बता दें कि इस मामले में जिला बार एसोसिएशन ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह की अदालत का बहिष्कार वापस ले लिया है। खबरों की मानें तो गुरुवार को हुई बैठक के बाद एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभू प्रसाद अग्रवाल और महासचिव कुंदन प्रकाशन ने कहा कि मामले में जमानत के आदेश में सुधार किया गया है और कुरान बाँटने की शर्त भी हटा ली गई है, इसलिए शुक्रवार से अधिवक्ता मनीष कुमार सिंह की अदालत में सामान्य रूप से काम करेंगे।

उत्तर प्रदेश: आदिवासियों की जमीन पर कब्जे के लिए 3 महिलाओं समेत 11 की हत्या

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बुधवार (जुलाई 17, 2019) को जमीनी विवाद में 3 महिलाओं समेत 11 लोगों की हत्या कर दी गई। घोरावल इलाके के उम्भा गाँव में हुई इस घटना में 17 लोग घायल हुए। 5 की हालत गंभीर है। ज़मीन से जुड़े विवाद को लेकर हुए नरसंहार में ग्राम प्रधान के भतीजे समेत 24 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मुख्य आरोपित प्रधान अभी फरार बताया जा रहा है। वांछितों की धरपकड़ तेज कर दी गई है। 50 अज्ञात के खिलाफ भी अभियान तेज है। नरसंहार में इस्तेमाल किए गए हथियारों को पुलिस ने बरामद कर लिया है।

उभ्भा गाँव का प्रधान यज्ञदत्त गुर्जर कुछ साल पहले एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हुआ था। गाँव के भाईलाल बताते हैं कि सालों पहले वह अपनी गाड़ी पर बसपा का झंडा लगाकर चलता था। गाँव वालों के अनुसार लगभग 50-60 साल पहले पश्चिमी यूपी से यज्ञदत्त के पूर्वज यहाँ आए। उसके बाद यहीं बस गए। इस गाँव में रहने वाले आदिवासी सौ-डेढ़ सौ साल से यहाँ रह रहे हैं। इस गाँव में गुर्जर के डेढ़ सौ परिवार हैं, जिसमें लगभग छह सौ लोगों की आबादी है। आदिवासियों की आबादी लगभग साढ़े पाँच सौ के आसपास है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीजीपी ओपी सिंह को मामले पर नजर बनाए रखने का निर्देश दिया है। CM आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए मिर्जापुर के मण्डलायुक्त तथा वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक को घटना के कारणों की संयुक्त रूप से जाँच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय करते हुए 24 घण्टे में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने इस घटना में मारे गए लोगों के परिजन को पाँच-पाँच लाख रुपए की सहायता का एलान किया है। उन्होंने जिलाधिकारी सोनभद्र से पूछा है कि ग्रामवासियों को पट्टे आखिर क्यों मुहैया नहीं कराए गए थे?

गाँव के लल्लू सिंह की तहरीर पर पुलिस ने मुख्य आरोपित ग्राम प्रधान यज्ञदत्त समेत अन्य के खिलाफ हत्या और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा कायम किया है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम बनाकर संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है।

डीजीपी सिंह के अनुसार, ग्राम प्रधान यज्ञवत घुर्तिया ने दो साल पहले एक आईएएस अधिकारी से उम्भा गाँव में 90 बीघा जमीन खरीदी थी। बुधवार सुबह प्रधान घुर्तिया जमीन पर कब्जा करने के लिए कई लोगों को ट्रैक्टर ट्राली से लेकर पहुँचा था। प्रधान ने ट्रैक्टर से जुताई शुरू की तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया।
सोशल मीडिया में लोग पूछ रहे हैं कि जिस जगह आदिवासी कई पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं वहां की
लगभग सौ बीघा ज़मीन कैसे एक कलेक्टर के नाम ट्रांसफर हो गई?

इसी दौरान प्रधान पक्ष के लोगों ने धारदार हथियारों से ग्रामीणों पर हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधान और उसके लोगों ने गाँव वालों पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं। इसमें नौ लोगों की मौत हुई। मृतकों में तीन महिलाएँ और 6 पुरुष शामिल हैं। घायलों को रॉबर्ट्सगंज जिला अस्पताल और पीएचसी घोरावल में भर्ती करवाया गया। इस मामले में अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गाँव में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि 16 जुलाई को 32 ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर प्रधान समेत 300 लोग ज़मीन पर कब्ज़ा करने पहुँचे थे।

उत्तर प्रदेश में कानून एवं व्यवस्था के प्रभारी पुलिस अधिकारी पीवी रामाशास्त्री ने कहा, “जमीन के इस टुकड़े के लिए इससे पहले भी ग्राम प्रधान और गाँव वालों में विवाद हो चुका था। उस समय पुलिस के दखल से मामला शांत हुआ था।”

उन्होंने कहा, “ग्राम प्रधान का आरोप है कि गाँव वालों ने अवैध तरीके से उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। पुलिस ने दोनों पक्षों से पीछे हटने को कहा था और जिला प्रशासन ने जमीन को अपने कब्जे में लेने का फैसला किया था, जिसकी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी थी।”

मोदी-शाह राष्ट्रवाद की भावना से काम कर रहे हैं: पूर्व कॉन्ग्रेस MLA अल्पेश ठाकोर BJP में शामिल

गुजरात कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक अल्पेश ठाकोर और धवल झाला बृहस्पतिवार (जुलाई 18, 2019) को अपने समर्थकों सहित भाजपा में शामिल हो गए। कॉन्ग्रेस से कई दिनों से नाराज़ चल रहे ठाकोर ने ‘वन्दे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाते हुए एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की। अल्पेश ने कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि वहाँ तो पार्टी अध्यक्ष का पद ही 2 माह से खाली पड़ा है। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के गुजरात दौरे से ठीक पहले हुए इस राजनीतिक बदलाव को राज्य के लिए अहम माना जा रहा है।

ठाकोर सेना के अध्यक्ष अल्पेश और पूर्व विधायक धवल सिंह झाला को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जीतूभाई वाघानी ने केसरिया दुप्पट्टा ओढ़ा कर भाजपा की सदस्यता दिलाई। वाघानी ने कहा कि भाजपा विचारधारा वाली पार्टी है और यहाँ जो भी आता है वो पार्टी की विचारधारा अपना लेता है। अल्पेश ठाकोर ने कॉन्ग्रेस छोड़ने व भाजपा में शामिल होने के पीछे के कारणों पर चर्चा करते हुए कहा:

“कॉन्ग्रेस ग़रीब व आदिवासी की सेवा करने की अपनी विचारधारा से भटक कर केवल स्‍वार्थ की राजनीति कर रही है। निर्धन व सामान्‍य लोगों की सेवा करने के लिए सत्‍ता में होना आवश्‍यक है। मैंने कॉन्ग्रेस में रहकर भी ग़रीब व आम लोगों के हितों की बात की, लेकिन वहाँ सुनने वाला कोई नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्‍यक्ष व गृहमंत्री अमित शाह राष्‍ट्रवाद व देश के विकास की भावना से काम कर रहे हैं।”

अल्पेश ठाकोर ने कहा कि मोदी-शाह देश को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। हाल ही में गुजरात में हुए राज्यसभा उपचुनाव में इन दोनों नेताओं ने कॉन्ग्रेस में रहते हुए पार्टी लाइन से इतर जाकर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद दोनों ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

हम्पी के पवित्र स्थलों पर तोड़फोड़, पुलिस ने बताया ‘खजाना खोजी’ बदमाशों की करतूत

बदमाशों की नज़र अब ऐसे प्राचीन भारतीय स्थलों पर है, जिनका हिन्दू समाज में ख़ासा महत्व है। कर्नाटक से आई ख़बर के मुताबिक़ हम्पी के नजदीक स्थित नव वृन्दावन में तोड़फोड़ की गई है। कभी हम्पी को विश्व के सबसे सुन्दर और समृद्ध नगरों में से एक गिना जाता था। कोप्पल जिले में ये घटना तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित माधव परंपरा के अनुयायियों द्वारा पूजित पवित्र स्थल पर घटी। गुरुवार की सुबह (जुलाई 18, 2019) की ये तोड़फोड़ आषाढ़ एकादशी जैसे संवेदनशील मौके पर की गई, जब वहाँ कई श्रद्धालु जुटते हैं।

नव वृन्दावन में माधव परंपरा के 9 संतों की समाधियाँ हैं। इस परंपरा के मानने वाले लोग ब्राह्मण हैं, जो तमिलनाडु और कर्नाटक से लेकर गोवा तक बसे हुए हैं। पुलिस का कहना है कि इस क्षेत्र में कुछ ऐसे बदमाश सक्रिय हैं, जो पुराने खजानों की खोज में पुरातन स्थलों को निशाना बनाते हैं।

मौसम की स्थिति को देखते हुए अनेगुंदी से बल्लारी तक सिर्फ़ नाव से ही पहुँचा जा सकता है। चूँकि यह स्थल तुंगभद्रा नदी में स्थित एक द्वीप पर है, यहाँ तक पहुँचने व वापस आने के लिए प्रशासन द्वारा नाव चलाया जाता है। यह सेवा शाम 4 बजते ही समाप्त कर दी जाती है। ऐसे में, पुलिस स्थानीय लोगों से पूछताछ कर ये जानने की कोशिश कर रही है कि क्या उन्होंने संदिग्ध लोगों को देखा था?

पुलिस ने बताया कि बदमाशों ने पवित्र स्थल की खुदाई व तोड़फोड़ से पहले कुछ कर्मकांड किया था, जिससे साफ़ होता है कि यह कृत्य ‘खजाना खोजी’ अपराधियों का ही है। दक्षिण भारत के पराक्रमी राजा कृष्णदेवराय के खजाने की खोज में ऐसी कई वारदातें सामने आई हैं। पाँच महीने पहले भी कुछ बदमाशों ने हम्पी में प्राचीन स्थलों को नुकसान पहुँचाया था।