Home Blog Page 5875

जावेद ‘ट्रोल’ अख़्तर ने रावण से कर दी साध्वी प्रज्ञा की तुलना, अब झेलेंगे मानहानि का मुक़दमा

स्क्रिप्ट लेखक से गीतकार और फिर ट्विटर ट्रोल बने जावेद अख़्तर के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मुक़दमा दर्ज कर उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की माँग की गई है। भोपाल की एक अदालत में इससे जुड़ी याचिका दाखिल की गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट विजय सूर्यवंशी की अदालत में अशोका गार्डन निवासी राजेश कुंसारिया ने परिवाद पेश करते हुए निवेदन किया कि जावेद अख़्तर को कठोर सजा दी जाए। अदालत 24 जून को शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करेगी। शिकायत में कहा गया है कि जावेद अख्तर ने गुरुवार (मई 2, 2019) को भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मानहानिकारक शब्द कहे थे।

जावेद अख्तर ने साध्वी प्रज्ञा को रावण बताते हुए कहा था, “उसकी वेशभूषा पर मत जाओ। सिर्फ़ इसलिए कि एक व्यक्ति संत की तरह दिखता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह व्यक्ति संत ही है। यह मत भूलिए कि जब रावण सीता का अपहरण करने के लिए आया था, तो उसने भी एक संत की तरह कपड़े पहने हुए थे।” शिकायतकर्ता ने कहा कि चूँकि जावेद अख्तर के ये बयान सार्वजनिक मंच पर दिए गए और इसे टीवी न्यूज़ से लेकर अख़बारों तक में भी दिखाया गया, इससे उन्हें आघात पहुँचा है। जावेद अख़्तर ने भाजपा को सलाह दी थी कि साध्वी प्रज्ञा को उस क्षेत्र से लड़ाया जाए, जहाँ सबसे ज्यादा अशिक्षित और सांप्रदायिक लोग रहते हों।

जावेद अख्तर ने साध्वी प्रज्ञा और भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए आगे कहा,

मुझे लगता है कि भाजपा ने प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से उम्मीदवार बनाकर पहले ही अपनी हार मान ली है। भाजपा ने यह मान लिया है कि अब अपने को अच्छा दिखाने का ड्रामा नहीं करना चाहिए और असली मुद्दे पर आ जाना चाहिए क्योंकि चुनाव में वही काम आने वाला है। अभी तक जो पर्दा ओढ़ा गया था, उसे हटा दिया गया है। भाजपा को अगर जीत का थोड़ा सा भी विश्वास होता तो वह प्रज्ञा ठाकुर को टिकट नहीं देती। उन्हें भी प्रज्ञा को उम्मीदवार बनाने में तकलीफ हुई होगी, मगर मजबूरी के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ा होगा।

जावेद अख़्तर इधर कई दिनों से अलूल-जलूल बयान दे रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने कहा था कि अगर बुर्क़ा पर प्रतिबन्ध लगता है तो घूँघट पर भी लगना चाहिए। उनके इस बयान के बाद बवाल मचा और करणी सेना ने उन्हें परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी है। जावेद अख्तर ने कहा था कि लोकतंत्र तभी आगे बढ़ता है और फलता-फूलता है जब राजनीति और धर्म को अलग-अलग रखा जाए।

‘मोदी खो चुके हैं मानसिक संतुलन, चाकूबाज साध्वी प्रज्ञा पहनती थीं जींस-टीशर्ट’

कॉन्ग्रेस पार्टी के राज्य मुख्यालय ‘राजीव भवन’ में सोमवार (मई 07, 2019) को एक संवाददाता सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि वह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं और उन्हें इलाज की ज़रूरत है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को भ्रष्टाचारी नंबर एक बताया था, जिसके बाद बौखलाए कॉन्ग्रेस नेता लगातार उन पर हमले कर रहे हैं।

पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए CM बघेल ने कहा कि राजीव गाँधी के प्रति PM मोदी की टिप्पणी निंदनीय है और उन्हें देश से माफ़ी माँगनी चाहिए। राजीव गाँधी के योगदान को मील का पत्थर बताते हुए बघेल ने कहा कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्होंने एक से एक काम किए थे। इसके साथ ही, बघेल ने कहा कि राजीव जी ने देश की एकता एवं अखंडता के लिए अपना बलिदान दे दिया।

भूपेश बघेल ने राजीव गाँधी को मरणोपरांत भारत रत्न दिए जाने की चर्चा भी की। राजीव गाँधी को 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। बघेल ने पंचायती राज के क्षेत्र में राजीव गाँधी के किरदार को अहम बताया। बघेल ने कहा कि कोई सोच भी नहीं सकता है कि प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति एक ऐसे आदमी के बारे में टिप्पणी करेगा, जो जीवित ही नहीं है। इसके आगे CM बघेल ने कहा, क्योंकि वो 3-4 घंटे ही सोने का दावा करते हैं, इस कारण नींद की कमी की वजह से प्रधानमंत्री का मानसिक संतुलन ख़राब हो गया है। उन्होंने मोदी के प्रधानमंत्री बनने को देश के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि कुर्सी और सत्ता के भूखे मोदी देशभक्ति का झूठा दावा करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा: “नरेंद्र मोदी सत्ता हथियाने के लिए किसी भी स्तर तक नीचे गिर सकते हैं। उनके इस तरह के बयान से यह साबित होता है कि उन्होंने इस आम चुनावों में अपनी हार स्वीकार कर ली है। भाजपा लोकसभा चुनाव में 150 से अधिक सीटें नहीं जीतने वाली है और यूपीए 300से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

उधर रविवार (मई 5, 2019) को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साध्वी प्रज्ञा पर भी विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने जींस-टीशर्ट पहनने के बाद भगवा चोला ओढ़ा है। भोपाल से भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बघेल ने आदतन अपराधी बताते हुए कहा कि उन्होंने कई लोगों के साथ बदतमीजी की है। उन्होंने कहा, “प्रज्ञा ने न जाने कितने लोगों से चप्पल की भाषा में बात की है और एक शख़्स को उन्होंने चाकू भी मार दिया था। बिलाईगढ़ का हर शख्स जानता है कि वह शुरुआत से आदतन अपराधी रही हैं। बाद में उन्होंने भगवा पहनना शुरू किया, लेकिन उसे पहनने से कोई साध्वी नहीं बन जाता। उनका व्यवहार साध्वी की तरह नहीं लगता। साध्वी प्रज्ञा झगड़ालू प्रवृत्ति की रही हैं और छोटी-छोटी बात पर झगड़ा करती थीं।”

भूपेश बघेल द्वारा पीएम मोदी और साध्वी प्रज्ञा पर टिप्पणी किए जाने को लेकर भाजपा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। राज्य में भाजपा के प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि मोदी जब से प्रधानमंत्री बनें हैं, कॉन्ग्रेस नेता उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को अपने संवैधानिक पद का ख्याल रखते हुए इस अशोभनीय टिप्पणी के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए। मध्य प्रदेश भाजपा प्रवक्ता हितेश वाजपेयी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा पर CM बघेल का बयान शर्मनाक और झूठा है।

‘फिक्सर और बिचौलिए’ सुप्रीम कोर्ट में भी? राहुल और राफेल की अलग-अलग तारीखों पर बौखलाए CJI

राफेल मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ दो मामलों की तारीखें एक साथ न देखकर हैरान रह गई। यह हुआ सोमवार को यानी मई 6, 2019 को। सुप्रीम कोर्ट की पीठ के मुताबिक उन्होंने राहुल गाँधी अवमानना मामले और राफेल पर एक ही तारीख को सुनवाई करने का फैसला किया था। लेकिन सुनवाई के दौरान जब पीठ को पता चला कि दोनों मामलों से जुड़ी तिथियाँ अलग-अलग हैं तो उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। उन्हें यह कहने पर मजबूर होना पड़ा कि आखिर यह हुआ कैसे!

पीठ ने कहा कि यह हैरानी वाली बात है कि उनके आदेश के बाद भी राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ दायर अवमानना याचिका को राफेल की सुनवाई के साथ सूचीबद्ध नहीं किया गया। अपनी इस बात के साथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई को 10 मई तक के लिए टाल दिया। अब 10 मई को अवमानना मामले की सुनवाई और राफेल को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका पर एक साथ सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि प्रशांत भूषण की ओर से राफेल मामले में दायर की गई याचिका उस मामले से जुड़ी हुई है, जिसमें फ्रेंच एविएशन फर्म दसॉ के साथ 36 राफेल विमान सौदे की मंजूरी से जुड़े फैसले पर फिर से विचार करने की माँग की गई है। वहीं दूसरी ओर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ मीनाक्षी लेखी ने अवमानना याचिका दर्ज की है।

दरअसल, राहुल ने एक चुनावी रैली में सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर गलत दावा किया था। उन्होंने कहा था कि शीर्ष अदालत भी इस बात को कह चुका है कि चौकीदार चोर है, जबकि हकीक़त में कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा था। मीनाक्षी लेखी द्वारा याचिका दर्ज कराने के बाद राहुल गाँधी ने इस पर हलफनामा दर्ज कर अपनी गलती को माना है और अपने इस बयान पर खेद जताया है। लेकिन उनके इस हलफनामे पर सर्वोच्च न्यायालय संतुष्ट नहीं है।

न्यायाधीश केएम जोसेफ और जस्टिस एसके कौल की पीठ ने 10 मई को दोपहर 2 बजे सुनवाई के लिए दोनों मामलों को सूचीबद्ध किया है। लेकिन इन दोनों मामलों पर सुनवाई से ज्यादा अब इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पीठ द्वारा तय तारीखें बदलीं कैसे? तारीखों में हेरफेर और कोर्ट के आदेश का पालन न होने पर संदेह प्रत्यक्ष रूप से ‘फिक्सर और बिचौलियों‘ पर जा रहा है। आपको बता दें कि तारीखों के हेर-फेर में सुप्रीम कोर्ट पहले से ही फिक्सर और बिचौलियों को लेकर जाँच का आदेश दे चुकी है। ऐसे में दो और हाई-प्रोफाइल मामलों से संबंधित तारीखों की हेराफेरी किसी बड़े गैंग या मोडस ऑपरेंडी की ओर इशारा करती है।

सुप्रीम कोर्ट के गलियारे में चल रही तारीखों वाली यह खबर न सिर्फ मीडिया बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है। लोग तरह-तरह के सवाल कर रहे हैं। कुछ इसे राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस की साजिश बता रहे हैं तो कोई राफेल डील को पटरी से उतारने और सेना के मनोबल को तोड़ने वाला देशद्रोही गैंग की करतूत। नेताओं से परे कुछ लोग इसमें बड़े बिजनेसमैन का हाथ बता रहे हैं। कुछ सवाल को अगले स्तर तक ले जाते हुए यह तक पूछ रहे हैं कि आखिर कितनी बड़ी साजिश है कि खुद चीफ जस्टिस को किसी केस की सुनवाई के दौरान इसके ऊपर बोलना पड़ गया। वो भी तब जब ऐसे फिक्सर और बिचौलियों की जाँच को लेकर आदेश दिया जा चुका है।

मेरे परिवार से लिया जा सकता है प्रतिशोध: CJI को क्लीन चिट के बाद ‘डरी हुई’ पीड़िता का बयान

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा गठित आतंरिक कमिटी ने उन पर लगे यौन शोषण के आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया। कमिटी ने गोगोई के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों का कोई ठोस सबूत नहीं पाया। उन्होंने जो रिपोर्ट दी, उसे सार्वजनकि भी नहीं किया जाएगा क्योंकि कहा गया कि यह एक आंतरिक जाँच प्रक्रिया थी। इन पैनल में 2 महिला जज भी शामिल थीं। पीड़िता सीजेआई गोगोई के आवास स्थित कार्यालय में काम करती थीं। उसने जस्टिस गोगोई पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे और कहा था कि जब उसने उनके कहे अनुसार यह सब करना बंद कर दिया, तो उसे नौकरी से ही निकाल दिया गया। अब इन-हाउस कमिटी द्वारा जस्टिस गोगोई को क्लीन चिट दिए जाने के बाद उक्त महिला ने ख़ुद को काफ़ी ‘डरी हुई और भयाक्रांत’ बताया है। उसने कहा कि वह बहुत ही भयातुर हैं और कुछ भी हो सकता है।

महिला ने कहा कि कमिटी के इस निर्णय से वह हतोत्साहित और उदास हैं। महिला ने कहा कि कमज़ोर एवं शक्तिहीन लोगों को न्याय देने की सिस्टम की क्षमता पर से उनका विश्वास उठने लगा है। एक बयान में उन्होंने कहा कि सिस्टम के अंदर ही शक्तिहीनों को शक्तिशाली लोगों के आगे खड़ा कर दिया जाता है। बता दें कि उक्त महिला ने आंतरिक कमिटी के समक्ष शामिल होने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उन्हें कमिटी से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। महिला द्वारा पेश होने से इनकार करने के बावजूद कमिटी की सुनवाई चालू रही और मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कमिटी के समक्ष पेश हुए।

पीड़िता ने पूछा कि उसने अपनी शिकायत में जिन लोगों के नाम लिए थे, क्या उनमें से किसी को भी जानकारी इकट्ठा करने के लिए बुलाया गया? उसने कहा कि उसकी अनुपस्थिति में उसके चरित्र पर सवाल खड़े किए गए और ग़लत तरीके से उसकी निंदा की गई। वहीं जस्टिस गोगोई ने कहा कि उन्हें जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्हें कई अहम मुद्दों पर सुनवाई करनी है। जस्टिस गोगोई ने कहा कि इसके पीछे बहुत बड़ी ताक़तें हैं जो सीजेआई के पद को निष्क्रिय करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था की स्वतन्त्रता पर भी ख़तरे हैं।

पिछले सप्ताह कमिटी से न्याय की उम्मीद को बेमानी बताते हुए महिला ने इस मामले से अपना नाम वापस ले लिया था और कहा था कि कमिटी का वातावरण काफ़ी डरावना है। महिला ने कहा था कि वह काफ़ी नर्वस महसूस कर रही थीं क्योंकि साथ में उसे काउंसल ले जाने की इज़ाज़त नहीं दी गई थी ताकि वह मामले व सुनवाई से जुड़ी चीजों पर चर्चा न कर सकें। महिला ने कहा कि उसके परिवार वालों से प्रतिशोध लिया जा सकता है और किसी भी प्रकार के हमले किए जा सकते हैं। महिला के अनुसार, कमिटी ने पीड़िता को जाँच रिपोर्ट की कॉपी देने से भी इनकार कर दिया है।

सेना को सलाम: पत्थर खाकर भी चलाते हैं गुडविल स्कूल, 100% बच्चे 10वीं में पास, हिज़्बुल नाराज़

जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा चलाए जा रहे आर्मी गुडविल स्कूलों का पासिंग पर्सेंटेज 100% रहा है। सोमवार (मई 6, 2019) को सीबीएसई ने दसवीं के परीक्षा परिणाम जारी किए। बता दें कि राज्य में कुल ऐसे 43 गुडविल स्कूल संचालित किए जाते हैं, जिनमें से 3 सीबीएसई से सम्बद्ध हैं। राजौरी स्थिति गुडविल स्‍कूल के छात्र हित्‍ताम अयूब ने 94.2% अंक पाकर टॉप किया है। जम्मू कश्मीर में संचालित किए जा रहे इन गुडविल स्कूलों में 15,000 से भी अधिक छात्रों की शिक्षा-दीक्षा हो रही है। इनमें से अधिकतर जम्मू कश्मीर एजुकेशन बोर्ड स जुड़े हुए हैं। भारतीय सेना के अथक प्रयासों के कारण ये स्कूल अशांति के दौर में भी खुले रहते हैं व यहाँ पढ़ाई-लिखाई पर कोई असर नहीं पड़ता।

इन गुडविल स्कूलों से काफ़ी प्रतिभावान छात्र भी निकल कर सामने आए हैं। इनमें से एक छात्र ताजमुल इस्लाम ने किक-बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीत कर राज्य और स्कूल का नाम रोशन किया था। 2017 में कश्मीरी अलगाववादियों ने इन स्कूलों में दी जा रही शिक्षा को आड़े हाथों लिया था। अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी ने कहा था कि ये संस्थान कश्मीरी छात्रों को अपने धर्म एवं संस्कृति से विमुख कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों को गुडविल स्कूलों को नज़रअंदाज़ करने की सलाह दी थी। गिलानी ने कहा था कि थोड़े फायदों के लिए हम अपनी अगली पीढ़ी को गँवा रहे हैं। गिलानी ने कहा था, “एक देश जो आज़ादी के लिए लड़ रहा है, वो कब्जेदारों को अपने बच्चों की देखरेख करने की इज़ाज़त नहीं दे सकता।” यह अलग बात है कि खुद गिलानी के सभी बच्चे शानदार शिक्षा पाकर जीवन के हर सुख-सुविधा का आनंद उठा रहे हैं।

बता दें कि कश्मीरी स्कूल और शिक्षा हमेशा से अलगाववादियों व आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। 2016 में इनके द्वारा फैलाई गई अशांति के कारण कई सरकारी व प्राइवेट स्कूल 6 महीने तक बंद रहे थे लेकिन फिर भी गुडविल स्कूल चलते रहे थे। 2013 में भी गिलानी ने गुडविल स्कूलों के विरुद्ध ज़हर उगला था। गिलानी ने 2013 में कहा था कि सेना द्वारा चले जा रहे सद्भावना स्कूलों में सनक और बेहूदगी फैलाई जा रही है, जिसे बंद किया जाना चाहिए। इधर गुडविल स्कूलों के अच्छे परफॉरमेंस से ख़फ़ा हिज़्बुल मुजाहिदीन ने छात्रों के विरोध में पोस्टर्स चिपकाएँ हैं और कहा है कि ऐसा नहीं चलेगा।

2016 में भारतीय सेना ने घाटी में स्कूल चलो अभियान चलाया था, जिसमें छात्रों को स्कूलों में दाखिला लेने के लिए कहा जाता था और उन्हें मुफ़्त में कोचिंग की सुविधा भी दी जाती थी। इतना ही नहीं, इन छात्रों को पढ़ाई के अलावा खेल-कूद सहित अन्य क्रियाकलापों में भी बढ़-चढ़ कर भाग लेना सिखाया जाता है। इन स्कूलों में प्रशिक्षित एवं योग्य शिक्षक होते हैं। 1998 में 4 गुडविल स्कूलों के साथ शुरू हुए शिक्षा के इस पवित्र सफ़र को सेना नित नए आयाम दे रही है। इससे न सिर्फ़ 15,000 बच्चों को शिक्षा मिल रही है बल्कि 1000 शिक्षक एवं अन्य कर्मचारियों को भी रोज़गार मिला है। डिजिटल क्लासरूम, आधुनिक लाइब्रेरी और ढाँचागत सुविधाएँ इन स्कूलों की ख़ासियत है।

Pak लड़कियों का चीन में देह व्यापार: मसूद अज़हर मामले के बाद 8 चाइनीज नागरिक गिरफ़्तार

पाकिस्तानी आतंकी मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने पर इस बार चीन ने अड़ंगा नहीं लगाया। कहा जा रहा है कि इसके बाद पाकिस्तान और चीन के रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने सोमवार (मई 6, 2019) को चीन के 8 नागरिकों को गिरफ़्तार किया, जिनमें एक महिला भी शामिल है। इन सब पर मानव तस्करी का आरोप है। ये लोग पाकिस्तान से लड़कियों की तस्करी कर उन्हें चीन ले जाते थे। इन लड़कियों से पहले तो फ़र्ज़ी शादी का कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है, फिर इन्हें चीन ले जाकर देह व्यापार की काली इंडस्ट्री में धकेल दिया जाता है। पाकिस्तान की इस कार्रवाई को चीन द्वारा मसूद अज़हर मामले में भारत के सामने झुकने से जोड़ कर देखा जा रहा है।

पिछले सप्ताह भी एफआईए ने 2 चीनी नागरिकों को गिरफ़्तार किया था। इन्हें फैसलाबाद में एक शादी समारोह से उठाया गया था। फैसलाबाद पाकिस्तान के प्रसिद्ध शहर लाहौर से 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।पाकिस्तानी एजेंसी एफआईए के पंजाब निदेशक तारिक रुस्तम ने एजेंसी की इस कार्रवाई के बारे में न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया:

“गिरफ़्तार किए गए ये लोग मानव तस्करी में शामिल हैं और पाकिस्तानी लड़कियों को चीन ले जाकर उनसे देह व्यापार कराते हैं। हमें सूचना मिली थी कि चाइनीज नागरिक पाकिस्तान से अंग तस्करी और मानव तस्करी कर रहे हैं। ये लोग ज्यादातर पाकिस्तान में रह रही अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय की लड़कियों से शादी करते हैं। इसके बाद उन्हें चीन ले जाकर उनसे जबरन देह व्यापार कराते हैं।”

गिरफ़्तार आरोपितों में इस गिरोह का कैनेडिश सरगना भी शामिल है। पिछले एक साल से लाहौर एयरपोर्ट के पास रह रहा कैनेडिश सरगना पाकिस्तानी लड़कियों को पहले लाहौर के किसी किराए के घर में रखता था। वहाँ उन्हें चाइनीज भाषा सिखाई जाती थी। फिर उन लड़कियों के शादी सम्बन्धी फ़र्ज़ी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इसके बाद उन्हें चीन ले जाया जाता था और फिर देह व्यापार में ढकेल दिया जाता था। बता दें कि चीन और पाकिस्तान की सीमावर्ती इलाकों में लम्बे अरसे से आपस में शादियाँ होती आई हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के प्रति दुराचार, अत्याचार और दुष्कर्म की घटनाएँ आम हैं। कहा जा रहा है कि ये चाइनीज गिरोह काफ़ी दिनों से पाक में सक्रिय है लेकिन चीन को नाराज़ न करने के लिए इन पर कार्रवाई नहीं की जा रही थी।

पाकिस्तानी अधिकारी पिछले कुछ वर्षों में अवैध तरीके से चीन भेजी गई लड़कियों की सूची तैयार कर रहे हैं और आँकड़ें का पता लगा रहे हैं। शक है कि इनकी संख्या सैंकड़ों में हो सकती है। पाकिस्तानी सरकार ने एजेंसियों को ऐसे चाइनीज गिरोहों के ख़िलाफ़ सख्ती से काम लेने को कहा है। ग़रीब ईसाई लड़कियाँ पैसे और बेहतर जीवन की लालसा में इनके बहकावे में आ जाती हैं। फ़र्ज़ी मैच मेकिंग सेंटर के जरिए इन्हें झाँसे में लाया जाता है। फ़र्ज़ी दस्तावेजों में चाइनीज लड़कियों को ईसाई या मुस्लिम धर्म का दिखाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चीन में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का मुद्दा कई बार उठ चुका है।

Fact Check: क्या BSF से निलंबित तेज बहादुर यादव इस वायरल वीडियो में दारू पी रहे हैं?

तेज बहादुर यादव ने जब बीएसएफ में रहते हुए खाने में कथित ख़राबी का वीडियो बनाकर वायरल किया था, तभी से वह लगातार विवादित कारणों से न्यूज़ में बने हुए हैं। उसके बाद उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और उन्हें बीएसएफ से निकाल दिया गया। इसके बाद ख़बर आई कि उन्होंने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर बहुत सारे पाकिस्तानी दोस्त जोड़ रखे हैं। इसके बाद वो राजनीति में उतरे और सीधा वाराणसी पहुँच कर पीएम मोदी से निर्दलीय लड़ने का ऐलान कर दिया। ऐन वक्त पर सपा-बसपा महागठबंधन ने भी उन्हें टिकट देकर बहती गंगा में हाथ धोने की सोची लेकिन चुनाव आयोग का डंडा चला और तेज बहादुर यादव का नामांकन रद्द हो गया।

अब तेज बहादुर यादव का नया वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह दारू पीते हुए दिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि तेज बहादुर इसमें अपने परिचितों संग दारू पी रहे हैं। इस वीडियो के बारे में पूछने पर हाँ-ना, हाँ-ना करने के बजाय तेज बहादुर ने पत्रकारों को बताया कि यह वीडियो 2 वर्ष पुराना है। इसका अर्थ यह कि इस वीडियो में तेज बहादुर यादव उपस्थित हैं। 1 मिनट 40 सेकण्ड्स के इस वीडियो को सोशल मीडिया, ख़ासकर फेसबुक पर काफ़ी सर्कुलेट किया जा रहा है।

इस वीडियो को देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि इसे किसी ने चोरी-छिपे शूट कर लिया है। वीडियो में 2 लोग दारू पीते हुए दिख रहे हैं और उनके सामने खाने-पीने का सामान रखा हुआ है। कमरे में अन्य लोग भी हैं, जिनकी आवाज़ें सुनीं जा सकती हैं। इसमें एक व्यक्ति तेज बहादुर यादव से परिचय कराते हुए कह रहा है कि ये बीएसएफ के जवान रहे तेज बहादुर यादव हैं। वीडियो देखने पर यह भी पता चलता है कि जो व्यक्ति तेज बहादुर यादव के बारे में बात कर रहा है, वह पूरी तरह नशे में धुत है। वे लोग दिल्ली पुलिस व पंजाब पुलिस के बारे में मज़ाकियाँ बातें करते दिख रहे हैं।

इसमें एक व्यक्ति शांत बैठा हुआ है, जिसके तेज बहादुर यादव होने की बात कही जा रही है। यादव बड़बोले व्यक्ति को चेताते हुए भी दिख रहे हैं ताकि वो धीमा बोले। यादव उसे ‘आराम से, आराम से’ कहते दिख रहे हैं। तेजबहादुर को वीडियो में दारू पीते व स्मोकिंग करते देखा जा सकता है। इस वीडियो वाले पोस्ट पर फेसबुक पर सैंकड़ों लोगों ने कमेंट किया, जिनमें से कुछ ने जानना चाहा कि क्या इसमें सच में तेज बहादुर यादव उपस्थित हैं? ख़बर लिखे जाने तक इस वीडियो को लाखों लोगों ने शेयर किया है।

चूँकि तेज बहादुर ने खुद इस वीडियो के बारे में स्वीकार लिया है, इसलिए यह वीडियो सच है। हाँ यह जरूर है कि जो लोग सिर्फ दारू पीने के लिए तेज बहादुर को निशाना बना रहे हैं, वो गलत हैं। जिस स्टेट में शराब बैन नहीं है और आप शांति के साथ दोस्तों संग पीते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। विरोध की राजनीति में किसी व्यक्ति का चरित्र-हनन करना अनुचित है।

सड़क पर गैर-कानूनी मस्जिद निर्माण: विरोध करने गए BJP विधायक हिरासत में, पुलिस का दोहरा रवैया

हैदराबाद में भाजपा विधायक टी राजा सिंह को रविवार (मई 5, 2019) को पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया। दरअसल, हैदराबाद के अंबरपेट इलाके में जमीन के एक हिस्से पर शेड की स्थापना को लेकर दो समुदायों में झड़प हो गई।

मौके पर पहुँची पुलिस ने वहाँ पर इकट्ठा हुई भीड़ को हटाया। इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि भाजपा के विधायक के साथ पुलिस बुरी तरीके से पेश आ रही है। इस वीडियो में पुलिस आयुक्त अंजनी कुमार अपनी टीम से भाजपा विधायक को वहाँ से ले जाने के लिए कहते हैं। अंजनी कुमार कहते हैं, “ले जा इसको, उठा कर ले जाओ।”

राजा सिंह इसका विरोध कर रहे होते हैं, मगर पुलिस बलपूर्वक राजा सिंह को पकड़कर ले जाती है और हिरासत में ले लेती है। हालाँकि राजा सिंह को इसके बाद जल्द ही रिहा कर दिया गया। विधायक राजा सिंह ने इसके बाद ट्वीट कर बताया कि वो और उनके समर्थक लोग सड़क पर गैर-कानूनी मस्जिद निर्माण का विरोध करने गए थे लेकिन पुलिस ने उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया जबकि गैर-कानूनी काम करने वाले लोग अभी भी खुला घूम रहे हैं।

भाजपा की तेलंगाना इकाई के नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने पक्षपातपूर्ण ढंग से काम किया और केवल हिंदू संगठनों के सदस्यों पर लाठीचार्ज किया। उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय सरकारी जमीन पर अवैध रूप से अतिक्रमण करना चाहती थी, जिसे वो रोकने का प्रयास कर रहे थे। मगर पुलिस ने उनके साथ भेद-भाव वाला रवैया अपनाया।

उन्होंने कहा कि वो शहर के गोशामहल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सिंह की स्थिति के बारे में जानने के लिए मौके पर पहुँचे थे, लेकिन उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया जो निंदनीय है। भाजपा नेताओं ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लक्ष्मण की अगुवाई में पुलिस महानिदेशक एम महेंदर रेड्डी से सोमवार (मई 6, 2019) शाम मुलाकात की और इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा।

14 साल की लड़की, 52 साल का वकील: दोनों की शादी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठहराया वैध

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 52 वर्षीय एक वकील से 14 वर्ष की नाबालिग से हुई शादी को वैध ठहराया है। ये शादी 4 वर्ष पूर्व हुई थी और नाबालिग लड़की अब 18 वर्ष की हो चुकी है। लड़की ने 18 वर्ष की हो जाने के बाद उक्त वकील के साथ रहने की इच्छा जताई, जिसके बाद यह निर्णय दिया गया। जस्टिस रंजीत मोरे और जस्टिस भारती डांगरे की खंडपीठ ने उक्त वकील की याचिका पर सुनवाई के बाद पिछले सप्ताह यह निर्णय लिया। शिकायतकर्ता (जो अब 18 वर्ष की है) ने आरोप लगाया था कि उसके दादा-दादी ने उसे शादी करने के लिए मज़बूर किया था। वकील 10 महीने तक न्यायिक हिरासत में भी रहा था। उस पर बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था।

17 सितम्बर 2018 को लड़की 18 वर्ष की हो गई थी, अर्थात क़ानूनी तौर पर बालिग हो गई। इसके बाद वकील ने हाईकोर्ट का रुख कर मामले को रद्द करने की माँग की। गत सप्ताह महिला ने भी एक हलफनामा दायर कर कोर्ट से मामले को रद्द करने को कहा और बताया कि वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है। उसने कहा कि मामले को रद्द किए जाने से उसे कोई आपत्ति नहीं है और विवाद सुलझा लिया गया है। अतिरिक्त सरकारी अभियोजक अरुण कुमार पाई ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह से मामले को रद्द करने से ग़लत उदाहरण पेश होगा और व्यापक पैमाने पर जनता के बीच एक ग़लत प्रकार का संदेश जाएगा।

2 मई को दिए गए आदेश में पीठ ने कहा कि उसे महिला के भले-बुरे की चिंता है। अदालत ने अपने आदेश में आगे कहा, “इसमें कोई विवाद नहीं है कि आरोपित के साथ शादी के समय वह नाबालिग थी लेकिन अब वह बालिग हो गई है और उसने आरोपी व्यक्ति के साथ रहने की इच्छा जताई है।” इसके बाद दोनों की शादी को भी अदालत ने वैध करार दिया।

2017 में उक्त वकील को पॉक्सो ऐक्ट के तहत 14 साल की लड़की से शादी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था। तब वकील की नाबालिग (17 वर्षीय) पत्नी ने उस पर शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पुलिस के अनुसार, सांगली में रहने वाले लड़की के बुजुर्ग माता-पिता अपनी मौत से पहले बेटी की शादी होते देखना चाहते थे और उसी वक्त आरोपी वकील की पहली पत्नी की भी मौत हुई थी। इसके बाद सहमति से दोनों शादी के लिए राजी हो गए थे। आरोपित पर बाल विवाह से जुड़े ऐक्ट, पॉक्सो और रेप संबंधी आईपीसी की धारा लगाकर मामला दर्ज किया गया था। 

TMC सांसद प्रसून बनर्जी और सुरक्षा बलों के बीच हाथापाई, मतदान केंद्र से किए गए बाहर

लोकसभा चुनाव 2019 के पाँचवे चरण का मतदान 6 मई की सुबह से शुरू हुआ। ज्ञात हो कि सात राज्यों की 51 सीटों पर होने वाले मतदान में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल रहे। एक तरफ मतदान की प्रक्रिया जारी रही, तो वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में हिंसक हमलों का सिलसिला भी चला।

पश्चिम बंगाल में हावड़ा क्षेत्र से सांसद प्रसून बनर्जी और सुरक्षा बलों के बीच मतदान केंद्र संख्या 40 और 50 पर हाथापाई तक की नौबत आ गई, इसके बाद बनर्जी को मतदान केंद्र से बाहर निकाल दिया गया।

ऊपर के वीडियो में साफ़ तौर पर देख सकते हैं कि TMC सांसद बनर्जी किस तरह से सुरक्षा बलों से बहस कर रहे हैं। इसके अलावा वो मतदान केंद्र पर भी अधिकारियों से बहस कर रहे थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रंतिदेव सेन गुप्ता के ख़िलाफ़ भी हमला बोला। बनर्जी 2014 के लोकसभा चुनाव में माकपा (मार्कसवादी कम्यूनिस्ट पार्टी) के उम्मीदवार श्रीदीप भट्टाचार्य को हराकर विजयी हुए थे। TMC सांसद बनर्जी को हराने के लिए इस बार माकपा ने सुमित्रा अधिकारी को मैदान में उतारा है, वहीं कॉन्ग्रेस ने सुव्रा घोष को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

लोकसभा चुनाव 2019 में पश्चिम बंगाल अपनी हिंसक गतिविधियों को लेकर शुरुआती दौर से ही चर्चा में रहा है। बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लेकर तो वहाँ आए दिन विवादों की ख़बरें सामने आती रहती हैं। कभी चुनाव अधिकारी के ग़ायब होने की ख़बर आती है, तो कभी बीजेपी कार्यकर्ताओं पर बम बरसाने की ख़बर का ख़ुलासा होता है। कभी मौलवियों का फ़रमान जारी होता है तो कभी TMC कार्यकर्ताओं की ख़ूनी झड़प का शिकार होकर कोई मतदाता अपनी जान से हाथ धो बैठता है। इसके अलावा बेतुकी हरक़तों भी सामने आती हैें, जिसमें मतदाताओं की इत्र लगी ऊँगली तक सूँघी जाती है।