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Breaking: वाराणसी से SP ‘प्रत्याशी’ तेज बहादुर की उम्मीदवारी रद्द, विरोधी सन्नाटे में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से SP प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरने वाले BSF के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने के सपने पर पानी फिर गया है। निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए दो नोटिसों का जवाब देने बुधवार (मई 01, 2019) दोपहर 11 बजे तेज बहादुर यादव अपने वकील के साथ RO से मिलने पहुँचे। जिसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर के नामांकन पत्र को खारिज कर दिया।

अब शालिनी यादव सपा की तरफ से चुनावी मैदान में मोदी को टक्कर देंगी। नामांकन पत्र के नोटिस के जवाब देने के दौरान तेज बहादुर के समर्थकों और पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक हुई, जिसके बाद पुलिस ने समर्थकों को कचहरी परिसर से बाहर कर दिया।

मंगलवार (मई 01, 2019) को प्रेक्षक प्रवीण कुमार की मौजूदगी में नामांकन पत्रों की जाँच शुरू हुई। जाँच के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह द्वारा यादव को BSF से बर्खास्तगी के संबंध में दो नामांकन पत्रों में अलग-अलग जानकारी देने पर नोटिस देकर 24 घंटे में BSF से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर प्रस्तुत करने को कहा गया था।

तेज बहादुर को कहा गया था कि वो BSF से प्रमाणपत्र लेकर आएँ, जिसमें यह स्पष्ट हो कि उन्हें नौकरी से किस वजह से बर्खास्त किया गया। जाँच में पाया गया कि यादव ने पहले नामांकन में ‘भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन पद धारण करने के दौरान भ्रष्टाचार या नियमों के उल्लंघन के कारण पदच्युत किया गया’ के सवाल पर ‘हाँ’ में जवाब दिया और विवरण में 19 अप्रैल, 2017 लिखा है।

दूसरे नामांकन में शपथ पत्र प्रस्तुत कर पहले नामांकन में गलती से ‘हाँ’ लिख दिया गया, बताया है। शपथ पत्र में बताया कि तेज बहादुर यादव सिंह पुत्र शेर सिंह को 19 अप्रैल, 2017 को बर्खास्त किया गया, मगर भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा पद धारण के दौरान भ्रष्टाचार एवं नियमों के उल्लंघन के कारण पदच्युत नहीं किया गया है।

‘जब रावण की लंका में बुर्क़ा बैन हो सकता है तो राम की अयोध्या में क्यों नहीं’, भारत में उठी माँग

महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने केंद्र सरकार से भारत में बुर्क़ा पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग की है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में श्री लंका सरकार द्वारा ईस्टर हमले के बाद बुर्क़ा पर प्रतिबन्ध लगाने के निर्णय का स्वागत करते हुए एक संपादकीय लिखा गया है। इसमें भारत सरकार से भी कुछ इसी तरह की माँग की गई है।

सामना में प्रकाशित संपादकीय

बता दें कि श्री लंका सरकार ने चेहरा ढँकने वाले बुर्क़ा का प्रयोग बैन कर दिया है। एक इमरजेंसी क़ानून के माध्यम से इस नियम को लागू करते हुए सरकार ने कहा कि किसी भी प्रकार से ऐसी चीजों का सार्वजनिक तौर पर उपयोग प्रतिबंधित रहेगा, जिससे व्यक्ति की पहचान छुपती हो। श्री लंका के एक इस्लामी संगठन ने भी महिलाओं को बुर्क़े का प्रयोग न करने की सलाह दी है।

शिवसेना ने अपने संपादकीय में इस पर विचार व्यक्त करते हुए लिखा है:

“सरकारी आँकड़ें चाहे जो भी हों, फिर भी कोलंबो के बम विस्फोट में 500 से अधिक मासूमों की बलि चढ़ी है। लिट्टे के आतंक से मुक्त हुआ यह देश अब इस्लामी आतंकवाद की चपेट में आ गया है। भारत, ख़ासकर इसका जम्मू-कश्मीर प्रांत उसी इस्लामी आतंकवाद से ग्रसित है। सवाल सिर्फ़ ये नहीं है कि श्रीलंका, फ्रांस, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन जैसे देश इस तरह के सख़्त क़दम क्यों उठा पाए, सवाल यह है कि उसी तरह के कदम हम कब उठाने वाले हैं?”

“भीषण बम विस्फोट के बाद श्री लंका में बुर्क़ा और नक़ाब सहित चेहरा ढकने वाली हर चीज पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लिया गया। हम इस निर्णय का स्वागत करते हैं और पीएम मोदी को भी श्री लंका के राष्ट्रपति के क़दमों पर चलते हुए हमारे देश में भी ‘बुर्क़ा और उसी तरह के नक़ाब’ पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। ये माँग राष्ट्रहित में है।”

भारत में बुर्क़ा पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग अकेले शिवसेना ने नहीं की है। हिन्दू सेना नामक संगठन ने भी गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर सार्वजानिक व निजी संस्थानों में सार्वजनिक तौर पर बुर्क़ा या नक़ाब के प्रयोग पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग की है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शिवसेना की इस माँग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बुर्क़ा पहनने वाली सभी महिलाएँ आतंकवादी नहीं होती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर वे आतंकवादी हैं तो उनका बुर्क़ा हटना चाहिए। श्री लंका के इस्लामिक विद्वानों का कहना है कि थोड़े समय के लिए वे सरकार के इस क़दम का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन बुर्क़ा के ख़िलाफ़ किसी तरह के क़ानूनी आदेश का विरोध किया जाएगा।

हिन्दू सेना द्वारा गृह मंत्रालय को लिखा गया पत्र

हालाँकि, श्री लंका सरकार ने अपने प्रतिबन्ध वाले नोटिस में बुर्क़ा या नक़ाब शब्द का प्रयोग नहीं किया है।
राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेन को अपने इस निर्णय पर फिलहाल कुछ मुस्लिम उलेमाओं का भी साथ मिला है। जमीयातुल उलेमा के प्रवक्ता फाजिल फ़ारूक़ ने कहा कि उन्होंने लोगों से बिना चेहरा ढके निकलने को कहा है। श्री लंका में क़रीब 10% मुस्लिम हैं। आपको बता दें कि श्री लंका के अलावा कैमरून, मोरक्को, चाड, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, गाबोन, फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क और उत्तर पश्चिम चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग में बुर्क़ा पहनने पर प्रतिबंध है।

इस्लामी उपदेशकों की भड़काऊ शिक्षा और उइगरों पर कार्रवाई सही: चीन

संयुक्त राष्ट्र ने चीन को उइगर समुदाय के मानवाधिकारों का सम्मान करने की नसीहत दी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि चीन को उइगरों के मानवीय अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। गुटेरस ने चीनी वार्ताकारों के साथ बातचीत में ये बातें कहीं। बीजिंग में बेल्ट एन्ड रोड फोरम में शामिल होने के बाद महासचिव ने इन मुद्दों को उठाया और चीन को नसीहत दी। इस सम्बन्ध में वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात कर चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफेन दिजाररिक ने इस विषय में अधिक जानकारी देते हुए कहा:

“संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चीनी वार्ताकारों से सभी प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा की। इसमें शिनजियांग की स्थिति को लेकर की गई चर्चा भी शामिल है। महासचिव ने चीन को इस बात से अवगत करा दिया कि संयुक्त राष्ट्र इस मामले में अपने मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बेचलेट के साथ पूरी मज़बूती से खड़ा है।”

मिशेल बेचलेट हमेशा से इस बात की वकालत करते रहे हैं कि चीन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के अधिकारियों को शिनजियांग प्रांत में उइगर समुदाय पर किए जा रहे अत्याचारों की जाँच के लिए अनुमति दे। बेचलेट चीन द्वारा उइगरों को गायब कराने और उन्हें एकपक्षीय तरीके से हिरासत में लिए जाने व गिरफ़्तार करने को लेकर लगातार आ रही रिपोर्ट्स की जाँच करना चाहते हैं लेकिन चीन ने अभी तक संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों को ऐसा करने की अनुमति नहीं दी है। चीन साफ़-साफ़ कह चुका है कि वह संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का तभी स्वागत कर सकता है जब वे देश के आंतरिक मुद्दों में दखलंदाज़ी न करें।

हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि वह चीन की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पूर्ण सम्मान रखता है और ‘निजी एवं सार्वजनिक तौर पर’ महासचिव गुटेरस की राय समान ही है। संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवाद की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की हरकतों को किसी भी प्रकार से जायज नहीं ठहराया जा सकता है। लेकिन, संयुक्त राष्ट्र ने साफ़ किया कि आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथ के विरुद्ध लड़ाई में मानवाधिकारों का पूरी तरह से सम्मान होना चाहिए। हर समुदाय को इस बात का आभास दिलाया जाना चाहिए कि उनकी पहचान पूरी तरह सुरक्षित है और वे भी राष्ट्र का एक अहम हिस्सा हैं।

ज्ञात हो कि चीन ने शिनजियांग में कई री-एजुकेशन सेंटर और ट्रेनिंग कैम्पस खोल रखे हैं, जहाँ 10 लाख से भी अधिक उइगरों को क़ैदियों के रूप में रखा गया है। चीन इस कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना भी झेलता रहा है। चीन ने संयुक्त राष्ट्र को इन कैम्पों की ज़रूरत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस्लामी उपदेशकों की भड़काऊ शिक्षा ने कुछ उइगरों को ‘हत्यारा शैतान’ बना दिया है। चीन ने उइगरों पर कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि मानवाधिकारों का उल्लंघन कहीं नहीं किया गया।

चीन में उइगरों पर कई प्रतिबन्ध हैं। उइगरों की निगरानी के लिए पड़ोसियों को छोड़ रखा गया है। निगरानी कर रहे लाखों पुलिस और अधिकारी उइगरों से कभी भी पूछताछ कर सकते हैं और उनके घरों की छानबीन कर सकते हैं। सर्विलांस कैमरा हर तरफ है चाहे वह सड़क हो, दरवाजा, दुकान या मस्जिद। एक रास्ते पर 20 कैमरे मौजूद हैं। बंदियों के बच्चों को अनाथालय उससे दूर ले जाते हैं। मस्जिद में नमाज़ पढ़ने आए लोगों का रजिस्ट्रेशन होता है और फिर वो मस्जिद के अंदर कैमरे की निगरानी में नमाज़ पढ़ते हैं, ताकि पुलिस उन पर नजर रख सके।

70 वादों में से 67 में फेल हुई दिल्ली सरकार, PPRC की रिसर्च रिपोर्ट ने दिखाया केजरीवाल को आईना

लोक नीति शोध केंद्र (PPRC) द्वारा किए गए रिसर्च में सामने आया है कि दिल्ली सरकार अपने अधिकतर वादों को पूरा करने में बुरी तरह से विफल रही है। दिल्ली सरकार 2015 के विधानसभा चुनाव में किए गए लगभग सभी वादों को पूरा करने में असफ़ल रही है। बता दें कि आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में 70 वादे किए थे। इस घोषणापत्र को ’70 पॉइन्ट एक्शन प्लान’ के रूप में पेश किया गया था। रिसर्च के दौरान ‘पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर’ ने पाया कि दिल्ली सरकार इन 70 वादों में से 67 को पूरा करने में नाकाम रही है। मंगलवार (अप्रैल 30, 2019) को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में पीपीआरसी के निदेशक विनय सहस्त्रबुद्धे ने इस रिपोर्ट को जनता के सामने रखा। इस रिपोर्ट में उन सभी वादों को ट्रैक करते हुए उनका विश्लेषण किया गया है।

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आम आदमी पार्टी अपने कार्यों को जनता के बीच प्रचारित कर रही है। पार्टी लोकसभा चुनाव भी इन्हीं के आधार पर लड़ रही है। लेकिन, रिपोर्ट में पाया गया है कि इन दोनों ही क्षेत्रों में धरातल पर स्थिति और भी बदतर हुई है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में फ्री वाई-फाई देने की बात भी कही थी लेकिन इस पर अभी तक कुछ काम नहीं हो सका है। अरविन्द केरीवाल की पार्टी ने 500 नए स्कूलों के निर्माण का वायदा किया था लेकिन अभी तक सिर्फ़ 5 स्कूलों के निर्माण का कार्य ही शुरू हो सका है। दिल्ली के स्कूलों से पास होकर निकले छात्रों में से मात्र 0.13% छात्रों को ही शिक्षा लोन मुहैया कराया गया है।

केजरीवाल की पार्टी ने 20 नए डिग्री कॉलेजों के निर्माण का वादा किया था लेकिन अब तक एक पर भी काम शुरू नहीं कराया जा सका है। जितने शिक्षकों की ज़रुरत थी, उससे आधे से भी कम पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। अगर स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें तो इस मामले में भी दिल्ली सरकार फिसड्डी साबित हुई है। अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की बात की गई थी लेकिन अभी तक उस पर 60% कार्य भी नहीं हो सका है। मोहल्ला क्लीनिकों में गाय और भैंस चर रहे हैं। मोहल्ला क्लीनिकों में डॉक्टरों, दवाओं और अन्य सुविधाओं के नाम पर बेहिसाब ख़र्च किए जा रहे हैं लेकिन आवारा पशुओं के अलावा वहाँ कोई और नहीं दिखता।

दिल्ली सरकार ने केंद्र की महत्वकांक्षी आयुष्मान योजना को भी रोक रखा है। पूरे देश में 20 लाख से भी अधिक लोग इसका लाभ उठा चुके हैं लेकिन दिल्ली में इस पर अमल ही नहीं किया गया। इस योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ़्त में कराया जाता है। दिल्ली सरकार ने अपने नागरिकों को इस योजना से मरहूम रखा है। अभी तक एक भी जगह वाई-फाई सर्विस नहीं शुरू की जा सकी है। महिला सुरक्षा को लेकर किए गए वादे अधर में लटके पड़े हैं। सीसीटीवी योजना की हालत ख़राब है। जनता को सीवर की गंदगी से मिले पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिससे उनमें रोष है। ऐसी शिकायतों में 50% से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आम आदमी पार्टी ने जन लोकपाल और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा था लेकिन जन लोकपाल वाले मामले में भी सरकार निष्क्रिय रही है। पीपीआरसी ने यह रिपोर्ट दिल्ली सरकार के आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर ही तैयार की है। विनय सहस्त्रबुद्धे ने इस दौरान केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने तो AAP के आंतरिक लोकपाल एडमिरल एल रामदास को भी निकाल बाहर किया।

दोस्त की 11 वर्षीय बेटी से छेड़छाड़ करता था ग़ुलाम मुसतफ़ा, टोकने पर दोस्त को 5वीं मंज़िल से नीचे फेंक मार डाला

दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके से एक व्यक्ति द्वारा अपने दोस्त की ही बेटी से छेड़छाड़ करने की ख़बर आई है। यहाँ 40 वर्षीय समीर अहमद (बदला हुआ नाम) अपनी पत्नी, दो बेटों और 11 वर्षीय बेटी के साथ जमा मस्जिद की गोदनी वाली गली में रहता था। समीर सुप्रीम कोर्ट की लाइब्रेरी में इलेक्ट्रिशियन का काम करता था। समीर की ही तरह जामा मस्जिद इलाक़े में ही रहने वाला ग़ुलाम मुसतफ़ा भी वहीं इलेक्ट्रिशियन का काम करता है। ग़ुलाम और समीर दोस्त थे। ग़ुलाम अक्सर समीर के घर आया-जाया करता था। दोनों ही एक-दूसरे के घर हमेशा आते-जाते रहते थे और खाना-पीना भी साथ खाते थे। रविवार (अप्रैल 28, 2019) को समीर जब घर आया तो उसकी नाबालिग बेटी ने शिकायत की कि ग़ुलाम अंकल उसके साथ गन्दी हरकतें करते हैं।

इस पर समीर को गुस्सा आया और उसने ग़ुलाम को कॉल कर फ़ौरन घर आने को कहा। जब ग़ुलाम आया तो समीर ने उसके द्वारा अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ किए जाने को लेकर सवाल पूछने के लिए बातचीत शुरू की। दोनों छत पर बात कर रहे थे। दोनों ने छत पर ही खाना भी खाया। खाते-पीते और बातचीत करते सुबह 4 बजे से भी अधिक का समय हो गया। इसके बाद समीर ने उससे अपनी बेटी के साथ ग़लत हरकत किए जाने को लेकर सवाल पुछा तो ग़ुलाम को गुस्सा आ गया और उसने समीर को 5वीं मंज़िल से नीचे फेंक दिया। समीर नीचे गली में आकर गिरा। ग़ुलाम ने समीर को नीचे फेंकने के बाद फरार होकर बचने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया।

समीर को एलएनजेपी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने ग़ुलाम के विरुद्ध ग़ैर इरादतन हत्या और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपित ग़ुलाम मुसतफ़ा उर्फ़ पप्पू को गिरफ़्तार कर लिया गया है। उसकी उम्र 23 वर्ष है। आरोपित को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस ने समीर के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार वालों को सौंप दिया है। ग़ुलाम ने पुलिस से कहा कि उसका इरादा हत्या करने का नहीं था बल्कि शराब के नशे में उसने समीर को धक्का दिया और वो नीचे गिर गया। जब समीर नीचे गिरा, तब पड़ोसियों की नज़र उस पर पड़ी और उसे अस्पताल पहुँचाया गया लेकिन वह बच नहीं सका और उसकी मृत्यु हो गई।

शास्त्री भवन में लगी आग, राहुल गाँधी ने कहा: मोदी फाइल जला रहे हैं

दिल्ली के शास्त्री भवन में आज दोपहर यकायक आग भड़क उठी। कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के दफ्तर वाले इस भवन की आग बुझाने में दमकल विभाग की गाड़ियाँ जुट गईं। पर अभी वह इमारत पूरी तरह से ठंडी भी नहीं हो पाई होगी कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी उस पर रोटियाँ सेंकने में जुट गए। उन्होंने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि मोदी सरकार फाइलें जला रही है।

निराधार आरोप

राहुल गाँधी का यह आरोप कितना निराधार है, इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह साल भर से ज्यादा समय से देश भर में घूम-घूम कर आरोप रक्षा मंत्रालय-प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा राफेल सौदे में घोटाले का लगा रहे हैं, और उन्हें जलती फाइलें कानून, सूचना एवं प्रसारण, कॉर्पोरेट मामले, केमिकल और पेट्रोकेमिकल, व मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय वाले शास्त्री भवन में दिख रहीं हैं। जबकि इनमें से किसी मंत्रालय का मोदी सरकार पर उनके द्वारा लगाए गए इकलौते आरोप राफ़ेल मामले से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

राहुल गाँधी को सामने आकर यह साफ़ करना चाहिए कि आखिर कौन से ‘घोटाले’ की फाइलें शास्त्री भवन में रहीं होंगी, जिन्हें मोदी सरकार उनके आरोप के मुताबिक जला रही थी?

आचार संहिता उल्लंघन: पीएम मोदी को EC ने दी क्लीन चिट, कॉन्ग्रेस ने की थी शिकायत

लोकसभा चुनाव की गहमागहमी जारी है। इस बीच कॉन्ग्रेस की खिसियाहट कई बार सामने आ चुकी है। कॉन्ग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की थी। आचार संहिता उल्लंघन के इसी मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव आयोग ने क्लीन चिट दे दी है। बता दें कि महाराष्ट्र के वर्धा में राहुल गाँधी को लेकर दिए बयान के मामले में चुनाव आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि पीएम ने आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं किया है।

पूरा मामला यूँ है, कॉन्ग्रेस ने आयोग से शिकायत की थी कि एक अप्रैल को महाराष्ट्र के वर्धा में एक रैली के दौरान पीएम ने राहुल गाँधी के वायनाड से चुनाव का मुद्दा उठाया था। कॉन्ग्रेस की शिकायत के मुताबित पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस बहुसंख्यक आबादी वाले इलाकों से हटकर वहाँ चुनाव लड़ रही है जहाँ बहुसंख्यक आबादी माइनॉरिटी में हैं। कॉन्ग्रेस की यह शिकायत पाँच अप्रैल को की गई थी।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ शिकायत की है। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस ऐसे कई निराधार आरोप लगा चुकी है।

चुनाव आयोग ने चलाया अनुशासन का डंडा, आजम खान पर दूसरी बार 48 घंटे के लिए बैन

चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान पर दूसरी बार अनुशासन के तहत कार्रवाई की है। आयोग ने आजम खान को एक बार फिर से 2 दिन तक चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाई है।

बता दें कि आजम खान 1 मई की सुबह 6 बजे से 48 घंटों तक के लिए चुनाव प्रचार नहीं कर पाएँगे। इन 48 घंटों के दौरान आजम खान का चुनावी रैली, रोड शो, इंटरव्यू, जनसंपर्क अभियान थम जाएगा। आजम खान ने 5 अप्रैल, 7 अप्रैल, 8 अप्रैल, 9 अप्रैल और 12 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के अलग अलग जगहों पर विवादित बयान देकर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया था।

बता दें कि इससे पहले चुनाव आयोग ने बीजेपी कैंडिडेट जया प्रदा पर आपत्तिनजक बयान देने के लिए बैन लगाया था। जया प्रदा पर टिप्पणी के लिए चुनाव आयोग ने आजम खान पर 72 घंटे का बैन लगाया था। आज़म खान के बेटे ने भी जया प्रदा पर अभद्र टिप्पणी की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने आजम खान के भाषणों की जाँच में पाया कि उनके स्पीच भड़काऊ थे और उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी पर धार्मिक आधार पर टिप्पणी की थी। आयोग ने कहा है कि आजम खान के बयान चुनाव में ध्रुवीकरण पैदा कर सकते हैं, और इसका असर सिर्फ वहीं नहीं पड़ता है जहाँ ये भाषण दिए जाते हैं बल्कि सूचना के डिजिटल युग में सोशल मीडिया के ज़रिए, इसका प्रभाव पूरे देश पर भी पड़ सकता है।

हालाँकि, आजम खान ने चुनाव आयोग को भेजे अपने जवाब में बिना शर्त माफी माँगा था, लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी इस पेशकश को ठुकरा दिया था। चुनाव आयोग ने कहा है कि वह आजम खान द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयान की सख्त निंदा करता है और उन्हें चेतावनी देता है कि वे भविष्य में ऐसा आचरण न करें।

CJI यौन उत्पीड़न मामले में महिला ने जाँच में शामिल होने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी जिन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, ने तीन न्यायाधीशों के इन-हाउस पैनल द्वारा की जा रही जाँच से यह कहते हुए शामिल होने से इनकार किया है कि उन्हें लगता है कि वहाँ कोई न्याय मिलने की संभावना नहीं थी।

न्यायमूर्ति एसए बोबडे के नेतृत्व में वाले पैनल, जिसने सोमवार को अपना तीसरा इन-चैंबर सुनवाई किया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी के सामने महिला ने अपना बयान दिया था। अब तक हुई तीन सुनवाई में, महिला ने कहा कि उसे डर लग रहा है क्योंकि उसे अकेले इसमें शामिल होना है और यहाँ तक कि उसके वकील को भी कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनने दिया गया।

इतना ही नहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला ने इस मामले की सुनवाई कर रही जजों की समिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। महिला ने समिति पर यौन उत्पीड़न अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया है।

महिला का आरोप है कि समिति द्वारा मुझसे बार-बार पूछा गया कि यौन उत्पीड़न की शिकायत मैंने क्यों देर से की। महिला ने कहा कि तीन जजों की समिति द्वारा पूछताछ से मैं घबरा गई थी। वहाँ का माहौल अजीब था। मेरे वकील भी साथ में नहीं थे। इसके अलावा महिला ने कहा कि उसे 26 और 29 अप्रैल को दर्ज किए गए बयानों की प्रति भी नहीं दी गई।

बता दें कि इससे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जाँच के लिए गठित तीन जजों की आंतरिक जाँच समिति से जस्टिस एनवी रमण ने खुद को अलग कर लिया था। दरअसल, आरोप लगाने वाली महिला कर्मचारी ने ही इस समिति में जस्ट‍िस एनवी रमण को शामिल किए जाने पर ऐतराज जताया था। महिला का कहना था कि जस्ट‍िस रमण प्रधान जस्ट‍िस गोगोई के करीबी दोस्त हैं और उनके घर पर अक्सर उनका आना-जाना रहता है।

आसाराम के बेटे नारायण साईं को दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा, ₹1 लाख का जुर्माना

गुजरात के सूरत स्थित आश्रम में दो बहनों से दुष्कर्म के मामले में सूरत की कोर्ट ने मंगलवार (अप्रैल 30, 2019) को आसाराम के बेटे नारायण साईं को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसी के साथ कोर्ट द्वारा नारायण साईं पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने शुक्रवार (अप्रैल 26, 2019) को सूरत की रहने वाली दो बहनों के साथ बलात्कार के आरोप में दोषी करार दिया था। अदालत ने इस मामले पर सजा सुनाने के लिए 30 अप्रैल का दिन मुकर्रर किया था।

गौरतलब है कि इन दोनों बहनों ने 2013 में पुलिस में दर्ज अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि आसाराम और नारायण साईं ने उनके साथ बलात्कार किया। दोनों बहनों की शिकायत के बाद नारायण साईं को हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पास पीपली से दिसंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया था। एक बहन ने साईं पर 2002 और 2005 के बीच सूरत में आश्रम में रहने पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था, तो वहीं पीड़िता की बड़ी बहन ने अहमदाबाद में 1997 और 2006 में आश्रम में रहने के दौरान आसाराम पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।

दोनों बहनों ने साईं और आसाराम के खिलाफ कथित शोषण की अलग-अलग शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने आसाराम और उसके बेटे के खिलाफ दुष्कर्म, यौन शोषण और अवैध तरीके से बंधक बनाकर रखना और अन्य अपराध के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस ने साईं के चार साथियों को भी गिरफ्तार किया था।

नारायण साईं के खिलाफ कोर्ट अब तक 53 गवाहों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिसमें कई अहम गवाह भी हैं, जिन्होंने नारायण साईं को लड़कियों को अपने हवस का शिकार बनाते हुए देखा था या फिर इस कृत्य में आरोपियों की मदद की थी, लेकिन बाद में वो गवाह बन गए।