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Fact Check: NDTV वालो, और केतना बेज्जती करवाओगे शोना?

NDTV मीडिया गिरोह आए दिन बेबुनियादी मुद्दों को भुनाने में व्यस्त रहता है, जिससे वो देश की जनता को भ्रमित कर सके, उन्हें बरगला सके, उन्हें ग़लत दिशा में ले जा सके और उनके विचारों को अपने मनमाने ढंग के स्वरूप में बदल सके। और अपने इस मंतव्य को सिद्ध करने के लिए वो किसी भी हद तक गुज़रने से कोई परहेज़ नहीं करता।

ऐसी ही एक नाकाम कोशिश में NDTV ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लिया और उनके एक बयान को ग़लत साबित कर दिया।

विवादस्पद NDTV की पहचान अब अक्सर फ़ेक न्यूज़ को प्रचारित करने की बन चुकी है। NDTV ने अपनी वेबसाइट में एक ऐसी भ्रामक हेडलाइन को प्रमुखता से जगह दी, जिसमें यह दर्शाया गया कि पीएम मोदी ने वंदे भारत ट्रेन-18 का मजाक उड़ाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ सज़ा की बात की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टारगेट करके NDTV ने लिखी भ्रामक हेडलाइन

विवादों की खान में तब्दील NDTV गिरोह की प्रधानमंत्री के संदर्भ में छापी यह ख़बर पूरी तरह से बेबुनियाद है, जिसका असलियत से कोई लेना-देना नहीं है। चलिए अब आपको इस ख़बर की असलियत से अवगत करा दें। दरअसल, मंगलवार (19 फ़रवरी 2019) को पीएम मोदी ने वाराणसी में 3,382 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया था।

इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश जाला। इसी बीच उन्होंने कहा, “मैं इंजीनियरों को सलाम करता हूँ, जो भविष्य में भारत में बुलेट ट्रेन बनाएँगे और इसे चलाएँगे। मुझे ऐसे लोगों का पत्र मिल रहा है जो आहत हैं।” पीएम ने जनता से पूछा, “क्या इंजीनियरों और टेकनिशिअंस का अपमान करना सही है? उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। क्या उन्हें माफ़ किया जा सकता है? क्या उन्हें सही समय पर सही सज़ा नहीं दी जानी चाहिए?”

रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जो बातें कहीं, उनमें भारत के मेहनती इंजीनियरों और तकनीशियनों का मजाक उड़ाने वालों को सज़ा देना शामिल था, न कि वंदे भारत ट्रेन-18 का मजाक उड़ाने से। साथ ही, NDTV ने अपने हेडलाइन में ‘आम जनता’ (people) को सज़ा देने की बात की है, जबकि किसी भी समझदार व्यक्ति को पता चल जाएगा की मोदी का इशारा अगले चुनावों में देश की इस उपलब्धि का मजाक उड़ाने वाले नेताओं को जनता द्वारा वोट न देकर सज़ा देने से था। लेकिन आँख पर मोदी-घृणा की पट्टी हो तो सही में ‘ये अँधेरा ही हमारे समय की तस्वीर’ बन जाती है।

बता दें कि पीएम मोदी के बयान को तोड़-मरोड़कर लोगों के सामने रखने की NDTV का यह अथक प्रयास पूरी तरह से बेकार हो गया, जब सोशल मीडिया पर NDTV को लोगों ने अपने-अपने शब्दों में सबक सिखाया और सही जानकारी से अवगत कराया।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कई अन्य लोगों ने एनडीए सरकार पर निशाना साधने के लिए ट्रेन-18 के तकनीकी ख़राबी का इस्तेमाल किया था। विपक्ष के नेताओं ने ‘मेक इन इंडिया’ को भी असफल करार दिया और भारत की सबसे तेज़ ट्रेन, ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ के ब्रेकडाउन की रिपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक भी उड़ाया।

इससे पहले, भारत की सबसे तेज़ ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ की सफलता को ग़लत साबित करने के लिए, कॉन्ग्रेस समर्थित वामपंथी चैनल NDTV ने जानबूझकर मवेशी से टकराने के तथ्य को नज़रअंदाज़ किया और अपनी रिपोर्ट पेश की कि ट्रेन-18 तकनीकी ख़राबी की वजह से रुक गई। अपनी इस रिपोर्ट में वो न सिर्फ़ ट्रेन-18 को असफल घोषित करने पर तुले नज़र आए बल्कि एनडीए सरकार को बदनाम करने का भरसक प्रयास करते भी दिखे।

वंदे भारत एक्सप्रेस ने बिना किसी बाधा के अगले ही दिन अपना पहला कमर्शियल रन सफलतापूर्वक पूरा किया था। हालाँकि, जो लोग इतने मुखर रूप से विफलता का मजाक उड़ा रहे थे, वे भारत की सबसे तेज ट्रेन के सफलता की सराहना करते दूर-दूर तक नहीं दिख रहे थे।

अभिनेता से नेता बने दिव्या स्पंदना ने NDTV की इस फ़र्ज़ी रिपोर्ट को रीट्वीट किया, बता दें कि दिव्या स्पंदना कॉन्ग्रेस आईटी सेल की प्रमुख भी हैं। इसके अलावा इन्होंने फ़र्ज़ी ख़बर के माध्यम से पुलवामा आतंकी हमले के संबंध में कुछ असंवेदनशील बयानों को भी पोस्ट किया था।

आतंकवाद के विरुद्ध भारत के साथ खुफिया जानकारी साझा करेगा सऊदी अरब: मोहम्‍मद बिन सलमान

सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बुधवार को (फरवरी 20, 2019) प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई। बैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सऊदी अरब के युवराज ने आपसी संबंधों पर जोर देते हुए आतंकवाद जैसी चुनौती से मिलकर मुकाबला करने की बात रखी। प्रेस वार्ता के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे संबंधों में और भी प्रगाढ़ता आई है। सऊदी अरब भारत का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी और एक तरह से हमारा पड़ोसी भी है। सऊदी अरब भारत का एक करीबी दोस्त है और ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्रोत भी।”

सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान के साथ बैठक में दोंनो देशों के बीच कई समझौतों पर सहमति बनी। इसके बाद भारत और सऊदी अरब के बीच अहम समझौतों के आदान-प्रदान के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें:

  • आज हमने द्विपक्षीय संबंधों के सभी विषयों ​​पर व्यापक और सार्थक चर्चा की है। हमने अपने आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का निश्चय किया है।
  • हमारे ऊर्जा संबंधों को स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप में तब्दील करने का समय आ गया है। दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी और स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व में सऊदी अरब की भागीदारी, हमारे ऊर्जा संबंधों को बायर-सेलर रिलेशन से बहुत आगे ले जाती है।
  • पुलवामा अटैक मानवता पर बहुत बड़ा हमला है, आतंकवाद के खिलाफ सब एकजुट हों,
    सऊदी अरब और भारत, आतंकवादी कट्टरवाद पर एक जैसा विचार रखते हैं।
  • अतिवाद के विरुद्ध सहयोग और इसके लिए एक मज़बूत कार्ययोजना की भी जरूरत है, ताकि हिंसा और आतंक की ताकतें हमारे युवाओं को गुमराह न कर सकें। मुझे खुशी है कि सऊदी अरब और भारत इस बारे में साझा विचार रखते हैं।
  • हम इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि काउंटर टेररिज्म, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में और मजबूत द्विपक्षीय सहयोग दोनों देशों के लिए लाभप्रद रहेंगे।

नरेंद्र मोदी के सम्बोधन के बाद सऊदी अरब के युवराज मुहम्मद बिन सलमान ने कहा, “बहुत सारे सेक्टर में दोनों देशों की सरकारें साथ मिलकर काम कर रही है और आतंकवाद के खिलाफ हम भारत के साथ पूरी तरह से काम करेंगे।”

आतंकवाद पर चिंता व्यक्त करते हुए सलमान ने कहा, “आतंकवाद और कट्टरवाद पर हमारी साझा चिंताएँ हैं। हम अपने दोस्त भारत को बताना चाहते हैं कि हर मोर्चे पर हम सहयोग करेंगे। सबके साथ मिलकर हम आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए काम करेंगे।”

इससे पहले राष्ट्रपति भवन में सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान के सम्‍मान में भव्‍य स्वागत समारोह हुआ। पीएम मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसमें मौजूद रहे। सऊदी प्रिंस ने इस दौरान कहा, “आज हमें यह पक्का करना है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते बने रहें और पहले से बेहतर हों। पीएम और राष्ट्रपति के नेतृत्व में मुझे उम्मीद है कि हम लोग दोनों देशों के लिए कुछ अच्छा कर पाएँगे।” सऊदी प्रिंस मंगलवार को देर रात नई दिल्ली पहुँचे और पीएम नरेंद्र मोदी ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया।

ऑपइंडिया EXCLUSIVE इंटरव्यू: मध्यम वर्ग को ₹90,000 करोड़ का सीधा लाभ; UP में 72 लेंगे – गोयल

(मंत्री पीयूष गोयल के साथ यह साक्षात्कार पुलवामा आतंकी हमले से पहले लिया गया था। उस हमले में वीरगति को प्राप्त हुए हमारे देश के जवानों के सम्मानस्वरूप हमने इस साक्षात्कार को देर से प्रकाशित किया।)

लोकसभा चुनाव आने वाले हैं और इसके साथ ही देश में राजनीतिक सरगर्मी भी परवान चढ़ रही है। हाल ही में पेश हुए अंतरिम बजट में सरकार द्वारा कई बड़ी घोषणाएँ की गई, ख़ासकर मध्यम वर्ग के लिए। चूँकि उस दौरान अरुण जेटली अस्वस्थ थे, पीयूष गोयल ने ही बजट पेश किया। हमने गोयल से मुलाकात कर आगामी चुनाव में भाजपा की रणनीति से लेकर देश की अर्थव्यवस्था और रेलवे सेक्टर के बारे में चर्चा किया। नीचे पढ़िए हमारे सवाल और उनके जवाब।

अंतरिम बजट में सरकार का ध्यान मध्यम वर्ग पर केंद्रित था। क्या यह शुरुआत से ही योजनाबद्ध था या फिर पार्टी ने मध्यम वर्ग के बीच पल रहे असंतोष को भाँपने के बाद यह निर्णय लिया था?

(गोयल ने इस बात को नकार दिया कि अंतरिम बजट में मध्यम वर्ग और आयकरदाताओं को दिए गए बड़े लाभ के पीछे वो मीडिया रिपोर्ट्स थे जिनमे कहा गया था कि मध्यम वर्ग भाजपा से असंतुष्ट है।) उन्होंने कहा:

”हमने पिछले 4 वर्षों में इस पर काफ़ी कार्य किया था। मैंने सरकार द्वारा पिछले बजटों में उठाए गए क़दमों को सूचीबद्ध किया है, यह इस श्रृंखला में सिर्फ़ एक अगला क़दम है। सामूहिक रूप से, हमने पहले ही पिछले 4 वर्षों में मध्यम वर्ग को ₹80-90 हजार करोड़ का लाभ दिया है और इस वर्ष ₹25 हजार करोड़ का, इसलिए हमने बस एक निरंतरता बनाए रखी है।”

“अगर इन सभी चीजों को एक साथ रखा जाए तो पता चलता है कि आयकर सम्बन्धी लाभ 6, 7, 8 लाख रुपए तक की आय वाले लोगों की मदद करते हैं और कभी-कभी 9 लाख रुपए की सालाना आमदनी वाले लोग भी लगभग कर मुक्त हो जाते हैं।”

(गोयल ने नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान मुद्रास्फीति की कम दरों पर भी टिप्पणी की जो मध्यम वर्ग को सबसे अधिक लाभ पहुँचाती है) उन्होंने कहा:

“यह अभी 2% है। इससे पहले कभी भी मुद्रास्फीति 5 साल लगातार निचले स्तर पर नहीं रही है। आप भारत के इतिहास में किसी भी 5 साल में देखें, हमारे पास कभी भी ऐसा समय नहीं था जहाँ हमने 5 साल लगातार कम मुद्रास्फीति देखी हो। हमें यह 9-10% पर विरासत में मिला। यूपीए शासन के दौरान तो एक समय पर यह 12% से भी अधिक हो गया था। हम इसे 2% तक ले कर आए हैं। मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।”

मध्यम वर्ग को मुद्रास्फीति, कर और भ्रष्टाचार की चिंता है। राहुल गाँधी भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि उनके आरोपों में दम है?

“भारत के लोग जानते हैं कि उनके लिए क्या अच्छा है।” उन्हें नरेंद्र मोदी पर भरोसा है। अब, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ, कैग रिपोर्ट सामने आई है, फ्रांसीसी सरकार और भारत सरकार ने मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया है। मुझे लगता है कि मुद्दा सुलझा लिया गया है और किसी भी तरह की छेड़छाड़ का कोई असर नहीं पड़ेगा।

भारत के लोग जानते हैं कि उनके लिए क्या अच्छा है। उन्हें नरेंद्र मोदी पर भरोसा है। अब, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के साथ, कैग रिपोर्ट सामने आई है। फ्रांसीसी सरकार और भारत सरकार ने मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया है। मुझे लगता है कि मुद्दा सुलझा लिया गया है और इस से किसी भी तरह की छेड़छाड़ का कोई असर नहीं पड़ेगा।”

भाजपा के सत्ता में आने के बाद से बाजार में नौकरियों की कमी के बारे में बहुत सारी बातें हुई हैं। आपके अनुसार जॉब क्रिएशन असली मुद्दा है या इस मामले में डेटा की कमी असली मुद्दा है?

हमें नौकरियों पर डेटा एकत्र करने के लिए बेहतर उपायों की आवश्यकता है। पूरी दुनिया में नौकरियों की प्रकृति बदल रही है। ऐसे कई क्षेत्र हैं जहाँ नौकरियों की गिनती नहीं की जा रही है क्योंकि हमारे डेटा संग्रह का तरीका अभी भी पुराने समय पर आधारित है।

जॉब क्रिएशन (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) पर एक समेकित डेटाबेस क्यों नहीं जारी किया जा रहा है?

अब नौकरियों की प्रकृति बदल रही हैं और इसी आधार पर समेकित सूची को संकलित किया जा रहा है। जल्द ही आधिकारिक डेटा जारी किया जाएगा।

भाजपा सरकार पर पर आरोप लगाए गए हैं पहले 4 वर्षों के दौरान भ्रष्टाचार के मामलों पर कार्रवाई करने में सरकार धीमी थी और पिछले कुछ महीनों में ही इसमें गति आई है (क्रिस्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण और अन्य भ्रष्टाचार आरोपितों पर कार्रवाई के साथ)?

ऐसे लोगों को प्रत्यर्पित करने के हमारे प्रयास सबसे सुसंगत रहे हैं। हमने कभी भी गति को धीमा नहीं किया है। ये सभी कार्य एक तय प्रक्रिया के बाद ही पूरे होते हैं। आप इसे रात भर नहीं कर सकते। ऐसी प्रक्रियाएँ अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर आधारित होतीं हैं और मुझे इस बात की खुशी है कि हमारी सरकार एक ऐसी सरकार रही है जो इस तरह के भगोड़ों पर कार्रवाई करने और उन्हें वापस लाने के लिए सतत प्रयासरत रही है।

मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा के अंतिम सत्र के दौरान प्रधान मंत्री मोदी का समर्थन किया। आपको क्या लगता है कि कौन-सी चीजें बदल गईं? क्या आपको लगता है कि उनका बयान ज़मीनी हक़ीक़त या हृदय परिवर्तन पर आधारित है?

मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश के लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में अपना मन बना लिया है। वर्षों से उन्होंने एक निर्णायक सरकार को इस तरह से कानून व्यवस्था स्थापित करते हुए नहीं देखा। उत्तर प्रदेश के एक बड़े हिस्से को वर्षों से सुविधाओं की कमी के कारण नुक़सान उठाना पड़ा है। हमने उन्हें वो सुविधाएँ प्रदान करने का कार्य किया है। कई पीढ़ियों से उत्तर प्रदेश में लोग जिस तरह की परिस्थिति में जीने को विवश थे, वो अब बदल गई है।

मेरा मानना ​​है कि कैराना चुनाव के नतीजों से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता है। वो भी तब, जबकि वह राष्ट्रीय चुनाव भी नहीं था। पूरा विपक्ष एकजुट था। कैराना भाजपा का पारम्परिक गढ़ भी नहीं रहा है। इन सबके बावजूद हमने 46% से अधिक वोट हासिल किए। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। मुझे लगता है कि भाजपा के पक्ष में पूरी लहर है। हमारी कोशिश है कि हम 2014 में 1 सीट अधिक जीतें, कम नहीं।

क्या सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की टिप्पणी (जिसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री के रूप में देखने की इच्छा व्यक्त की) उनका व्यक्तिगत विचार था? या फिर वह ज़मीनी हक़ीक़त का संकेत था?

मेरी राय में ये दोनों ही बातें सही है। यह जमीनी हक़ीक़त तो है ही और साथ ही यह एक अच्छी सरकार है जिसने ग़रीबों के कल्याण के लिए काम किया है। इसके अलावा, उनकी पारंपरिक सोच रही है कि हमें देश में एक अच्छी सरकार की जरूरत है।

तमिलनाडु के लिए क्या योजनाएँ हैं? आपको पार्टी ने वहाँ लोकसभा चुनाव प्रभारी बना कर भेजा है?

भाजपा विभिन्न दलों के साथ बातचीत कर रही है। दलों ने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन किया है, उनका पूरी तरह से सफ़ाया हो गया है। अभिनेता रजनीकांत एक “अच्छे दोस्त” हैं और हम उनसे भी मिलने की कोशिश करेंगे।

मोदी सरकार को विरासत में एक जर्जर रेल व्यवस्था मिली। आपने रेलवे सेक्टर को कैसे चमकाया?

अतीत में झाँकने पर आपको पता चलेगा कि मोदी सरकार के सत्ता संभालने के वक़्त फण्ड की कमी थी। किसी भी कार्यक्रम के बारे में सोचने या उसकी रूप-रेखा तैयार करने से पहले हमें सबसे जिस के बारे में सोचना था, वह थी- धन की कमी। मानसिकता कुछ इस प्रकार की बन गई थी- ‘हमारे पास फण्ड नहीं है। इसीलिए, हम अधिक कुछ नहीं कर सकते।’

लेकिन, आज मानसिकता बदल गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने सुनिश्चित किया है कि रेलवे को पर्याप्त धनराशि मिले। हम आधुनिक तकनीकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमने स्वच्छता के स्तर में क्रांति ला दी है। रेलवे स्टेशन पहले से ज्यादा साफ-सुथरे हैं। अब, हम पूरे यात्री अनुभव को और अधिक सुखद बनाने के लिए ट्रेनों के नवीनीकरण की कोशिश कर रहे हैं।

पहले, समय-पालन (Punctuality) के आँकड़े सटीक नहीं थे। काग़ज़ों पर समय-निष्ठा हमेशा से अच्छी थी। लेकिन, लोगों ने हमेशा रेलवे की समय-निष्ठा के बारे में शिकायत की है। जब इस से जुड़े एक मूल कारण का विश्लेषण किया गया था, तो महसूस किया गया कि समय-निष्ठा (Punctuality) स्टेशन मास्टर्स के रिपोर्टों पर आधारित थी, जो ग़लत थे। अब, देश भर की सभी इंटर-जंक्शंस पर डेटा लॉगर्स को रखा गया है। जिस दिन नई प्रणाली चालू की गई, समय-निष्ठा (Punctuality) 20% तक गिर गई। इसलिए, जब तक डेटा अधिक मजबूत नहीं होता है और वास्तविक स्थिति का बयान नहीं करता है, तब तक समस्या का समाधान कभी नहीं हो सकता है।

एंजेल टैक्स को लेकर काफ़ी विवाद रहा है। जबकि सरकार ने जोर देकर कहा है कि कोई जबरदस्त कार्रवाई नहीं होगी, मोदी सरकार के ‘स्टैंड अप, स्टार्टअप’ पर विचार करते हुए इस प्रावधान को पूरी तरह से वापस लेने की माँग की गई है। इसके बारे में आपका क्या कहना है?

सबसे पहले आपको बता दें कि एंजेल टैक्स जैसी कोई चीज है ही नहीं। यह समस्या इसलिए शुरू हुई क्योंकि पहले कई लोगों के पास शेल कम्पनियाँ हुआ करती थीं। ये शेल कम्पनियाँ एक बड़े प्रीमियम पर शेयर जारी करती थीं और उस पद्धति का उपयोग करके धन को लूटती थीं। इसलिए, प्रतिबंध लाना पड़ा। जैसा कि आप जानते हैं, हमने लगभग 300,000 कंपनियों को हटा दिया है और इस तरह की हेराफेरी में लिप्त लोगों पर कार्रवाई भी की गई है।

अब, जब तक कि किसी कंपनी के पास कुछ अस्पष्ट मूल्यांकन या मूल्य नहीं है और शेयर अत्यधिक प्रीमियम पर जारी किए जाते हैं, यह इसके पीछे की मंशा पर संदेह पैदा करता है। अब अगर किसी कम्पनी द्वारा शेयर अत्यधिक प्रीमियम पर जारी किए जाते हैं, तो वह संदेह के घेरे में आ जाती है। अब, ईमानदार करदाताओं और वास्तविक उद्यम पूंजीपतियों को अलग करने ज़रूरत है।

वर्तमान में जो टैक्स लगाया जा रहा है, वह उन ऑपरेशन्स पर है, जहाँ भारी प्रीमियम पर शेयर जारी करके मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही है। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि इसके परिणामस्वरूप ईमानदार स्टार्ट-अप और पूँजीपति पीड़ित न हों। मुझे पूरा विश्वास है कि हम जल्द ही इस मुद्दे को हल कर पाएँगे और कोई भी ईमानदार व्यक्ति पीड़ित नहीं होगा। यदि आवश्यक हो, तो 2019 में जीत कर आने के बाद हम उन उपायों को लागू करेंगे जो इस मुद्दे को हल करने के लिए आवश्यक हैं।

(ये साक्षात्कार नुपुर शर्मा और राहुल रौशन के द्वारा किया गया।)

फ़ैक्ट चेक के नाम पर Alt-News के कट्टर भक्त zoo_bear ने फ़ेक वीडियो के ज़रिए फैलाया झूठ का रायता

स्व-घोषित फै़क्ट-चेकिंग पोर्टल Alt-News के सह-संस्थापक हैं प्रतीक सिन्हा और उनके इस झूठ के कारोबार को बढ़ावा देने में उनके सहयोगी हैं ज़ुबैर, जो ट्विटर पर @zoo_bear नाम से एकाउंट चला कर प्रतीक सिन्हा की झूठ की खेती को सींचने में सहयोग करते हैं। यह अक्सर इस्लामी कट्टरपंथियों की मदद से सोशल मीडिया पर मौजूद राष्ट्रवादी यूज़र्स के ख़िलाफ़ हमलावर रहते हैं। एक बार फिर उन्होंने साम्प्रदायिक हिंसा को उकसाने के लिए फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाईं।

इस बार @zoo_bear ने एक ‘क्रॉप्ड वीडियो’ शेयर किया। जिसमें उसने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में गोंडा के विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कुछ सदस्यों ने पुलवामा आतंकी हमले के ख़िलाफ़ विरोध रैली में देश विरोधी नारे लगाए। ज़ुबैर (@zoo_bear) ने अपने फॉलोअर्स से उसी ‘क्रॉप्ड वीडियो’ को री-ट्वीट करने का आग्रह किया, ताकि सांप्रदायिक द्वेष को भड़काया जा सके और इस फ़र्ज़ी ख़बर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सके।

हालाँकि, गोंडा पुलिस ने जल्द ही ज़ुबैर के दावों को ख़ारिज करते हुए एक बयान जारी किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस तरह के ‘भारत-विरोधी नारे’ नहीं लगाए गए। गोंडा पुलिस ने अपने बयानों में कहा कि VHP के विरोध प्रदर्शन से जुड़े वीडियो का इस्तेमाल ‘भ्रष्ट’ उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और कहा कि इस तरह के नारे आयोजन के दौरान नहीं लगाए गए थे।

गोंडा पुलिस ने इस फ़र्ज़ी ख़बर के दावों को ग़लत साबित करने के लिए घटना के वीडियो को भी पोस्ट किया। वीडियो में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि ज़ुबैर के दावों के उलट, VHP सदस्यों ने पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ मानते हुए उसके ख़िलाफ़ नारे लगाए गए थे न कि भारत के विरोध में।

गोंडा पुलिस द्वारा जारी स्पष्टीकरण के बावजूद, स्व-घोषित फै़क्ट चेकर Alt-News के सहयोगी एकाउंट (@zoo_bear) ने अपने फैलाए गए झूठे ट्वीट को न तो डिलीट किया और न ही अपने इस कृत्य के लिए कोई माफ़ी ही माँगी।

यह पहली बार नहीं है जब Alt-News के गिरोह ने ऐसा अपराध किया हो। हाल ही में, एक यूज़र ‘स्क्विंट नियॉन’ (जिसका ट्विटर हैंडल @squintneon है) को लगातार ऑनलाइन जिहादियों से धमकियाँ दी जा रही थी कि अब वो उसे पहचान सकते हैं और वो उसे छोड़ेंगे नहीं। स्क्विंट नियॉन ने लगातार ऐसे इस्लामी ज़िहादियों को एक्सपोज़ किया था, जिसके कारण, अब उसकी पहचान सार्वजनिक होने पर उसे ये आंतकी विचारों वाले लोग ढूँढ रहे हैं। मुहम्मद ज़ुबैर नाम के सहयोगी के साथ प्रतीक सिन्हा ने डॉक्सिंग करते हुए जानबूझकर स्क्विंट नियॉन को इन ऑनलाइन जिहादियों के समक्ष ला दिया। Alt-News ने न केवल सोशल मीडिया पर नियॉन के विवरणों की जानकारी दी, बल्कि उसके जीवन को दाँव पर लगाने का भी काम किया।

Alt-News के संस्थापक प्रतीक सिन्हा सोशल मीडिया पर राष्ट्रवादी यूज़र्स की निजी सूचनाओं को कॉन्ग्रेस और इस्लामी कट्टरपंथियों तक पहुँचाने का काम करते हैं। इससे पहले, एक ट्विटर उपयोगकर्ता ने गोपनीयता भंग करने के लिए सिन्हा के ख़िलाफ़ मुक़दमा भी दर्ज़ कराया था और व्यक्तिगत छवि को नुक़सान पहुँचाने के एवज़ में 5 करोड़ रुपए का दावा भी ठोका था।

इससे पहले प्रतीक सिन्हा ने अपनी स्टॉकर टेन्डेन्सी का परिचय देते हुए (जिस पर अगर सिन्हा ने लग़ाम नहीं लगाई तो यह ख़तरनाक आपराधिक जुर्म में भी तब्दील हो सकती है) राहुल रौशन (Rahul Roushan) से जुड़ी निजी जानकारियों को पब्लिक कर दिया था। टार्गेटिंग और स्टॉकिंग की सीमा लाँघते हुए प्रतीक सिन्हा ने उनकी पत्नी के साथ-साथ मात्र दो-माह छोटी बच्ची से जुड़ी निजी जानकारियाँ भी पब्लिक कर दी थीं।

ज़ुबैर नाम का यह शख्स और प्रतीक सिन्हा इस घृणित कार्य में अब ‘अकेले’ ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जिन्होंने ऐसी आपराधिक प्रवृत्ति प्रदर्शित की है। ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी ने एक पुस्तक लिखी है, जिसमें कई व्यक्तियों की निजी जानकारी को शामिल किया गया है। इस पुस्तक में उन सबको ‘ट्रोल्स’ के रूप में लेबल किया गया है, जो प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करते हैं।

स्वाति चतुर्वेदी, OpIndia (English) की सह-संस्थापक को डॉक्स करते हुए, उनकी व्यक्तिगत जीवन के पीछे पड़ गईं थीं।

बज़फीड (BuzzFeed) के एक अन्य तथाकथित पत्रकार, प्रणव दीक्षित ने भी एक महिला को ऑनलाइन स्टॉक किया था। चूँकि वो उनसे असहमत थीं, इसलिए प्रणव दीक्षित ने उसका लिंक्डइन प्रोफ़ाइल ढूँढा और एक ईमेल लिखकर उसके नियोक्ताओं से पूछा कि क्या वे जानते हैं कि उनका एक कर्मचारी उनसे असहमत है। फिर भी कमाल की बात ये है कि ये सभी धुरंधर गोपनीयता के चैंपियन हैं।

अभी तक कुछ तथाकथित पत्रकार ही उन लोगों को परेशान करते थे, जो उनसे असहमत होते। लेकिन शायद इतना ही काफ़ी नहीं था! तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन (Derek O’Brien) भी अपने संसदीय विशेषाधिकार का फ़ायदा उठाते हुए, उन ट्विटर यूज़र्स को ज़लील करने लगे जो उनसे असहमत थे।

फ़ेक-न्यूज़ फैलाने के लिए स्व-घोषित फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट Alt-News अरुंधति रॉय द्वारा वित्त पोषित है। उन्हें अक्सर झूठ बोलते हुए पकड़ा भी गया है, जिसके लिए शायद ही वो कभी ख़ुद को सही साबित कर पाई हों।

हाल ही में, उन्होंने पत्रकार बरखा दत्त के फ़ैक्ट-चेक के क्लिप्ड वीडियो की माँग की। लेकिन दिलचस्प रूप से, उन बिंदुओं को छोड़ दिया, जहाँ वास्तव में घाटी में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का संदर्भ था। Alt-News ने आर्मी से सेवानिवृत्त प्रमुख का भी फैक्ट चेक किया, लेकिन बिना सोचे-समझे आर्मी चीफ़ के पक्ष को नज़रअंदाज़ कर दिया। इसके बाद Alt-News ने एक फ़ेक इमेज का फैक्ट चेक करके उसे प्रसारित किया, वो भी बिना सही जानकारी दिए। Alt-news के सह-संस्थापक बड़ी आसानी से झूठ फैला कर अपना मंतव्य सिद्ध कर लेते हैं। ऐसा ही उन्होंने कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा की एक फ़ेक इमेज साझा करके की थी।

कई युवाओं द्वारा भारत-विरोधी नारे लगाने की ख़बरों को ख़ारिज करने के लिए वेबसाइट ने कुछ अजीबो-गरीब मंबो-जंबो सा विश्लेषण किया। जबकि बिहार के डीजीपी ने Alt-News के दावों को एक सिरे से ख़ारिज कर दिया। हैरान कर देने वाली बात यह है कि Alt-News के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा के चेहरे पर एक शिकन भी देखने को नहीं मिलती जब वो अपने फै़क्ट-चेक के फ़र्ज़ी होने के तथ्य से अवगत हो जाते हैं।

Alt-News और इसके सहयोगियों ने अतीत में भी बिना किसी सबूत के एक प्रत्यक्षदर्शी की बातों को ख़ारिज़ कर दिया क्योंकि यह उनके कथन के अनुकूल था। उनके द्वारा खुदरा FDI पर बीजेपी के रुख़ के बारे में और ख़ुद OpIndia.com के बारे में भी झूठ फैलाया गया।

दलितों और मुस्लिमों में हिंदुत्व-RSS का डर फैलाने के लिए पाकिस्तान ने बनाया था यह प्लान

पिछले तीन सालों में मोदी सरकार के दौरान अचानक खड़े हुए दलित, मुस्लिम और क्रिश्चियन आंदोलन या फिर उनपर बढ़ते हमलों को लेकर खूब हाय तौबा मचाई गई। एक छोटी सी घटना को भी देश के लिबरल मीडिया ने तुरंत बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत किया। दरसअल मोदी को हराने के लिए पाकिस्तान ने बहुत सोच समझकर एक मास्टरप्लान बनाया था जिसे अक्टूबर 2016 में पाकिस्तान के उच्च सदन सीनेट की हाई पावर कमेटी ने तैयार किया था।

इस पॉलिसी गाइडलाइंस प्लान को तैयार करने में पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा मोहम्मद आसिफ, डिफेंस सेक्रेटरी, पीएम एडवाइज़र सरताज़ अजीज समेत सीनेट के 13 सदस्य शामिल थे। इस प्लान को पाकिस्तान की ‘कमेटी ऑफ़ द होल’ द्वारा 4 अक्टूबर, 2016 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया था।

इस रिपोर्ट की भाषा से ऐसा प्रतीत होता है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर बलोचिस्तान का नाम लेने भर से पाकिस्तान डर गया था। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि 1971 के बाद पाकिस्तान पर भारत के किसी प्रधानमंत्री द्वारा इतना दबाव नहीं बनाया गया था जितना नरेंद्र मोदी ने बनाया था।

इस प्लान के तहत पाकिस्तान के खिलाफ नरेंद्र मोदी के रवैये को काउंटर करने लिए 22 सूत्रीय योजना बनाई गयी थी जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत के खिलाफ प्रोपगैंडा शुरू करने से लेकर, सार्क देशों समेत तमाम देशों में कश्मीर में ह्यूमन राइट्स का प्रोपगैंडा फैलाने की योजना तैयार की गयी थी।

लेकिन इस प्लान में भारत के लिए सबसे खतरनाक रणनीति भारत की ‘फॉल्टलाइंस’ पर वार करने की थी। मसलन जाति और रिलिजन के आधार पर भारत में दंगे भड़काना। इस प्लान के तहत भारत में दलित, मुस्लिम, सिख, और क्रिश्चियन समुदाय के लोगों को हिंदुत्व-आरएसएस के नाम पर भड़का कर देश को टुकड़ों में बांटने का प्लान बनाया गया था। इस प्रोपगैंडा को फैलाने के लिए पीएम मोदी के खिलाफ लिखने वाले मीडिया, एनजीओ और ह्यूमन राइट्स संगठनों की भी मदद लेने की बात कही गयी थी।

पाकिस्तान को अपने इस प्लान को भारत में लागू करने में आंशिक तौर पर सफलता भी मिली। जिसका नतीजा ये है कि देश में मोदी सरकार के दौरान दलित, मुस्लिम और क्रिश्चियन समुदाय के लोगों पर हमले और फिर उसके नाम पर देश विरोधी फ़र्ज़ी आंदोलन खड़े किये गए। उन्हें हिंदुत्व और आरएसएस के नाम पर जानबूझकर भड़ाकाया गया।

यह आसानी से समझा जा सकता है कि कैसे भारतीय मीडिया और लिबरल लॉबी एक छोटा से केस की बिना जाँच परख किए, मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने लगती है।

अपने प्लान को लागू करवाने के लिए पाकिस्तान ने इंटरनेशनल स्तर पर लॉबिंग करवाने के लिए एजेंसियों को भी हायर किया था। यह भी इसका प्लान का हिस्सा था और उस रिपोर्ट में लिखा है जो पाकिस्तान की सीनेट कमेटी ने तैयार किया था। पाकिस्तान की सीनेट कमेटी की रिपोर्ट आज भी वेबसाइट पर उपलब्ध है।

गुरुग्राम: कश्मीरी छात्रा ने किया आतंकियों का समर्थन, यूनिवर्सिटी से निष्कासित

गुरुग्राम स्थित श्री गोबिंद सिंह ट्राईसेंटेनरी विश्वविद्यालय (SGTU) ने एक कश्मीरी छात्रा को यूनिवर्सिटी से निष्काषित कर दिया है। छात्रा ने सोशल मीडिया पर पुलवामा हमले को सही ठहराया था। उसने पुलवामा में वीरगति को प्राप्त हुए जवानों का अपमान करते हुए व्हाट्सएप पर एक स्टेटस लगाया था। कुछ अन्य छात्रों ने इस स्टेटस को देखा और उन्होंने यूनिवर्सिटी को इसकी सूचना दी। स्क्रीनशॉट्स देखने के बाद यूनिवर्सिटी ने छात्रा को निष्काषित करने का निर्णय लिया।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार द्वारा हस्ताक्षरित ऑर्डर में लिखा है:

“विश्वविद्यालय कैंपस में इस तरह की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसलिए, यह निर्णय लिया गया है कि छात्रा को तत्काल प्रभाव से रस्टीकेट किया जाए। इस मामले की जाँच के लिए एक चार सदस्यीय पैनल गठित किया गया है।”

ख़बरों के मुताबिक़, छात्रा ने इंस्टाग्राम पर भी ऐसे पोस्ट लगाए थे, जिसे देखने के बाद अन्य छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। विश्वविद्यालय के एक अन्य छात्र ने बताया:

“लड़की ने टिप्पणी की थी और उसके पोस्ट से पता चल रहा था कि उसकी नज़र में हमारे सैनिकों के साथ जो कुछ हुआ वह सही था… हमने विरोध किया… और विश्वविद्यालय ने उसे निकाल दिया। हम इस मामले को और आगे नहीं ले जाना चाहते।”

मंगलवार (फरवरी 19, 2019) को सुबह 9 बजे से सैकड़ों छात्र जुटने शुरू हो गए थे। ‘भारत माता की जय’, ‘वन्दे मातरम्’ और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ का नारा बुलंद करते हुए उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर मामले से गंभीरता से लेने का दबाव बनाया। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने छात्रा को निकालने का निर्णय लिया। यूनिवर्सिटी के इस निर्णय के बाद विरोध-प्रदर्शन बंद हो गए।

यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने बताया कि अनुशासनिक समिति ने शुरुआती जाँच में छात्रा को दोषी पाया गया। उसके माता-पिता और स्थानीय अभिभावक को भी इस बारे में सूचना दे दी गई। प्रवक्ता ने बताया कि यूनिवर्सिटी में 30 से भी अधिक कश्मीरी छात्र अध्ययन कर रहे हैं।

इस से पहले नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (NIMS) ने चार कश्मीरी छात्राओं को सस्पेंड किया था। इन्होंने व्हाट्सएप के जरिए देशद्रोही कंटेंट को फॉरवर्ड किया था। देश भर में कई जगह से कश्मीरी छात्रों द्वारा ऐसी हरकतें करने के समाचार आए हैं। पुलवामा हमले के बाद ऐसे कई दोषियों को गिरफ़्तार भी किया जा चुका है।

मसूद अज़हर को प्रतिबंधित करने के लिए सुरक्षा परिषद पहुँचे US, UK और फ्रांस

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित करने की दिशा में भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिलती दिख रही है। फ्रांस ने कहा है कि वह अगले कुछ दिनों में आतंकी मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाएगा। जैश-ए-मोहम्मद को पहले ही संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित कर रखा है। इसी आतंकी संगठन ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी भी ली है। इस हमले में 40 से अधिक भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए। भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए कूटनीतिक अभियान चला रहा है।

इससे पहले 2009 और 2016 में मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया जा चुका है। 2016 में पठानकोट हमले के बाद लाए गए इस प्रस्ताव पर फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ने भारत का साथ दिया था। 2017 में अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रेज़ोलुशन 1267 पारित किया था, जिसमें पाकिस्तानी आतंकी मसूद अज़हर पर प्रतिबंध की माँग की गई थी। आपको बता दें कि चीन हमेशा से इस प्रस्ताव के पास होने में अड़ंगा लगाता रहा है।

फ्रांस की राजधानी पेरिस में चल रही फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ से ब्लैक लिस्ट वाले देशों की सूची में शामिल करने का भी प्रयास किया जाएगा। पाकिस्तान को 2018 में ग्रे लिस्ट में डालते हुए चेतावनी दी गई थी कि अगर उसने अपनी ज़मीन से संचालित हो रहे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई नहीं की तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा। मीडिया में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और फ्रांस के कूटनीतिक सलाहकार फ़िलिप एटिन के बीच इस मसले को लेकर गहन चर्चा हुई।

पुलवामा हमले के बाद अमेरिका ने भी पाकिस्तान को मसूद अज़हर पर कार्रवाई करने को कहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान से मसूद अज़हर को आतंकियों की सूची में डालने को कहा है। ज्ञात हो कि पुलवामा हमले के 100 घंटे के भीतर भारतीय सुरक्षाबलों ने जैश के 3 आतंकियों को मार गिराया था। भारत को भी इस ऑपरेशन में बड़ी क्षति पहुँची क्योंकि सेना के एक मेजर सहित 4 जवान वीरगति को प्राप्त हुए। इस मुठभेड़ में पुलवामा हमले का साज़िशकर्ता गाज़ी भी मारा गया। इस हमले का असली मास्टरमाइंड मसूद अज़हर है, जो पाकिस्तान के पंजाब स्थित बहावलपुर से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है।

क्विंट वालों ने टिक-टॉक विडियो से रॉकेट साइंस लगाकर ‘डेन्जरस हिन्दुत्व प्रोपेगेंडा’ कुछ यूँ निकाला

सोशल मीडिया के आने से पत्रकारिता को बहुत सारे लाभ हुए हैं। लेकिन हाँ, इसका एक बुरा असर यह भी पड़ा कि लोग इन्स्टाग्राम और ट्वीट उठाकर, उसे आर्टिकल बनाकर मेनस्ट्रीम मीडिया में रख देते हैं। इसका एक ही तरीक़ा है, जो ज़्यादातर एंटरटेनमेंट बीट के पत्रकार अपनाते हैं: किसी भी सेलिब्रिटी का इन्स्टाग्राम/ट्विटर पोस्ट लीजिए, उसमें जो लिखा है उसको पहले ‘इनडायरेक्ट स्पीच’ में लिखिए, फिर उसे डायरेक्ट स्पीच में लिखिए और अंत में पोस्ट को एम्बेड कीजिए। बन गया आर्टिकल। 

लगता है ‘द क्विंट’ के पत्रकार ऐसा करने में विश्वास नहीं रखते क्योंकि ‘ईमानदार सरकार’! चुनाव आने वाले हैं, लेकिन किसी सीट की लड़ाई में न तो जुनैद मारा जा रहा है जिसे बीफ से जोड़ा जा सके, न ही ब्राह्मिनिकल पेट्रियार्की टाइप कुछ कांड सामने आ रहा, राम मंदिर पर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट तारीख़ दे रहा है, मोदी अपनी रैलियों में हर दिन विकास के प्रोजेक्ट्स के नाम और प्रोग्रेस गिना रहा है, तो ऐसे में वामपंथियों और पत्रकारिता के समुदाय विशेष में उनके कम्यूनल अजेंडे को हवा देने वाले लेखों का अकाल पड़ गया है।

ये जो गिरोह है पत्रकारिता के समुदाय विशेष का, असली मायनों में सबसे घटिया स्तर की जातिवादी बातें, सबसे नीच स्तर की साम्प्रदायिक बातें यही करता है। वरना, जब कुछ वैसा घटित न हो रहा हो, तब किसी एप्प से चार पोस्ट और चार हैशटैग पर क्लिक करके, उनसे डेंजरस, पोलराइजिंग, एक्सट्रीम हिन्दुत्व अजेंडा निकाल लेना, इनकी ज़िम्मेदारी है, जिसे क्विंट की इस पत्रकार ने बख़ूबी निभाया है। 

आर्टिकल की शुरुआत ही इतने कमज़ोर तरीके से हुई है मानो लॉजिक को लूज़ मोशन्स हो रखे हों! फोटो के कैप्शन से ही ‘क्विंट’ ने ‘टिक-टॉक’ के बारे में जो बात कही है, विडम्बनावश, वो क्विंट और उनके पाठकों पर सटीक बैठती है: “टिक टॉक पर यूज़र्स को पता है कि उनको देखने-सुनने वाले भी उन्हीं की तरह हैं। यही कारण है कि एप्प पर पोलिटिकल विडियोज बिलकुल बेपर्दा (अनअबैश्ड) और क्रिएटिव हैं।” पहला पैराग्राफ़ किसी यूज़र के बारे में बताता है कि उसने भगवा वस्त्र धारण किए हुए हैं और कह रहा है, “क्यूँ जाना है अयोध्या, घर बैठिए और राम का नाम लीजिए।” इसके बाद किसी रिकॉर्ड किए हुए साउंड पर वो अपने होंठ हिला रहा है, “ये हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रश्न है और इससे हम कोई समझौता नहीं कर सकते।” 

इसमें प्रोपेगेंडा क्या है और किसी व्यक्ति का ‘अयोध्या’ को लेकर प्रेम ‘एक्सट्रेमिज्म’ कैसे है, यह मेरी समझ से बाहर है। क्या हमें संविधान इसकी अनुमति नहीं देता, या फिर भगवा वस्त्र पहनने भर से आदमी आतंकवादी हो जाता है? क्या अपने भगवान में आस्था, उनके मंदिर बनाने की बात पर अडिग रहना, उसे अपने स्वाभिमान से जोड़ना और एक पंद्रह सेकेंड का विडियो बनाना ‘हिन्दुत्व प्रोपेगेंडा’ है? और ऐसा साबित करने का लॉजिक (जो नीचे है) वो इतना कुत्सित और बेकार है कि कोई भी समझदार आदमी माथा पीट लेगा। 

आर्टिकल में लिखा है कि यूँ तो यहाँ पोलिटिकल विडियो बहुत हैं, जिसमें राहुल गाँधी के स्पीच आदि भी हैं, लेकिन इन सबको #RSS, #rammandir, #hindu and #bjp लोकप्रियता में पछाड़ देता है। यह कहते-कहते मोहतरमा वहाँ पहुँच जाती हैं जहाँ कॉमन सेन्स नहीं पहुँच सकती, “ये विडियोज़ खतरनाक तरीके से ध्रुवीकरण करने वाले प्रोपेगेंडा की तरफ चले जाते हैं।” 

फिर पत्रकार ने लिखा है कि कैसे मनोरंजन और अभिव्यक्ति का यह माध्यम ‘एक्सट्रीम पोलिटिकल विचारों’ का प्लेटफ़ॉर्म बनता जा रहा है। और वो एक्सट्रीम पोलिटिकल विचार क्या हैं? विडियो क्लिप पर आए 132 कमेंट में से एक @jitenkpatel नामक यूज़र का यह कमेंट, “टिकटॉक मनोरंजन के लिए है फिर भी मंदिर वहीं बनाएँगे।” ये कमेंट सबसे अधिक ख़तरनाक और समाज को बाँटने बाला रहा होगा क्योंकि पत्रकार ने इसे इतनी अहमियत दी। आप पढ़ लीजिए, और सोचिए कि इसमें ‘डेंजर’ या ‘एक्सट्रीम’ कहाँ है?

क्या राम मंदिर बोलने से, भगवा वस्त्र पहनने से, अयोध्या की बात करने से व्यक्ति हिन्दुत्व प्रोपेगेंडा करने लगता है? क्या हिन्दू धर्म को मानने वाले अपने देवता के लिए मंदिर निर्माण की बात, एक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर करने भर से एक्सट्रेमिस्ट हो जाते हैं? फिर तो तिलक लगाकर घूमने वाले साधुओं को क्विंट मानव बम कह सकता है। (ऊप्स! मैंने तो इन्हें नया आइडिया दे दिया कि ‘कुम्भ में पहुँचे लाखों मानव बम, हिन्दुत्व पूरी मानवता के लिए ख़तरा’)

ये अपने आप में हास्यास्पद बात है कि #RSS हैशटैग पर 63 मिलियन व्यूज़ होना प्रोपेगेंडा है, ख़तरनाक है, समाज को तोड़नेवाला है, साम्प्रदायिक है, ध्रुवीकरण करने वाला है! आर्टिकल को लम्बा करने के लिए (क्योंकि एक भी सही तर्क नहीं है सिवाय चार हैशटैग और उससे जुड़े कमेंट पर एकतरफ़ा फ़ैसला सुनाने के) बीच-बीच में यह समझाया गया है कि ये एप्प है क्या, कैसे काम करता है, किस भाषा में है, यहाँ पर कैसे लोग हैं, वो कितने ‘सिली’ हैं, या ‘धरती हिला देने वाले टैलेंट’ लेकर नहीं आए हैं।  

ऐसे ही एक और विडियो का उदाहरण दिया गया है जिसमें कोई माया नायर नाम की यूज़र मलयालम में कहती हैं कि उन्हें RSS पसंद है, और उनकी पसंद में कोई बदलाव नहीं आने वाला। उसके बाद बताया गया कि उस विडियो पर 7.9 हजार लाइक्स और 906 कमेंट हैं। उसके बाद एक और विडियो का उदाहरण है जो RSS हैशटैग से जुड़ा है। इसमें RSS ‘नेशनल सॉन्ग’ (ये क्या है?) की बात करते हुए पत्रकार महोदया ने लिखा है कि यूज़र कहती है, “जीवन संघ के नाम, दिल संघ के नाम, और मैं बेटी संघ की हूँ।”  

इस उदाहरण का उद्देश्य समझ में नहीं आया सिवाय इसके कि भारत में ‘संघ’ की बात करना शायद जर्मनी में हिटलर के क्रॉस की तरह बैन है। लेकिन ऐसी बात तो बिलकुल नहीं है। संघ की शाखाएँ हैं, संघ के स्कूल हैं, संघ हर आपदा में आगे खड़े होकर मदद करता है, संघ में तमाम बड़ी शख़्सियतें जाती रहती हैं, वहाँ से जुड़े लोग देश के प्रमुख पदों पर बैठे हैं, और ऑक्सफोर्ड-हार्वर्ड वालों से बेहतर काम कर रहे हैं। फिर ‘संघ’ का नाम ले लेना ही ‘एक्सट्रेमिस्ट अजेंडा’ हो जाता है? पत्रकार को भारतीय इतिहास से लेकर अपने संविधान, कुछ कानूनी बातें और नागरिक के मौलिक अधिकारों पर क्रैश कोर्स कर लेना चाहिए ताकि वो ऐसी वाहियात बातें लिखकर चार फैशनेबल शब्दों की बात अंग्रेज़ी में करके लहरिया लूटने की नाकाम कोशिश न करे। 

और तो और, खुद ही टिक टॉक के विडियो की गुणवत्ता की बात करते हुए पत्रकार महोदया लिखती हैं कि ऐसा नहीं है कि कोई ग़ज़ब का टैलेंट है इधर, लोग तो अंग्रेज़ी बोलते ही नहीं, और उसमें गर्व भी महसूस करते हैं। मतलब, स्वयं ही इस प्लेटफ़ॉर्म पर जो हो रहा है उसका उपहास कर रही हैं, बताती हैं कि दो-तीन दोस्तों द्वारा घर के बरामदे में चादर की आड़ में ‘अदृश्य होते आदमी’ वाले जादू का प्रदर्शन कर रहे हैं, जो कि कोई धरती-धमक टैलेंट तो नहीं है लेकिन बताता है कि यहाँ किस तरह का कंटेंट है। 

मानवी जी, इस घटना को विरोधाभास कहते हैं। जब ये प्लेटफ़ॉर्म इस तरह की जोकरई और मूर्खतापूर्ण हरकतों से, सलमान और अजय देवगन के गीतों पर रोते हुए लड़कों को विडियो से भरा हुआ है, तो वहाँ आपको राम मंदिर को लेकर भी ‘ख़तरनाक राजनीति’ करने वाले, या ‘एक्सट्रीम हिन्दुत्व अजेंडा’ के नाम पर सबसे ख़तरनाक पोस्ट यही मिलेगा कि ‘मैं आरएसएस को पसंद करती हूँ’, या यह कि ‘मेरा जीवन संघ के लिए है।’

अगर वहाँ और ज़हरीले कमेंट होते तो मुझे पता है क्विंट निकाल लेता तथा एक बड़ा आर्टिकल लिख देता कि कैसे ये ‘ख़तरनाक हिन्दुत्व अजेंडा’ वाले लोग दो-तीन दिन में तलवार लेकर सड़कों पर निकल सकते हैं। लेकिन दुर्भाग्य कहिए, या सौभाग्य, कि ऐसा वास्तविक जीवन में नहीं होता। जिनको राम मंदिर चाहिए वो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतज़ार कर रहे हैं। जिस पार्टी को चाहिए, उसने भी कह दिया है कि वो सुप्रीम कोर्ट के हिसाब से चलेंगे। 

पूरे आर्टिकल में एक ऐसा उदाहरण नहीं है जिससे कि आर्टिकल का शीर्षक या अंत जस्टिफाय किया जा सके। इस पर अपने सात मिनट बर्बाद करने के बाद आपको यही पता चलेगा कि अगर आपने आर्टिकल लिखने से पहले, रिसर्च से पहले ही हायपोथिसिस को प्रूव करने का इरादा कर लिया हो, टैम्पलेट बना रखा हो, तो आपका कन्क्लूजन कुछ ऐसा ही होगा, “टिक-टॉक भारत के हज़ारों युवाओं की अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। अपने फ़ैन्स, अपनी बेपर्दा राजनैतिक अभिव्यक्ति, अपने आक्रामक हिन्दुत्व और वृहद् यूज़र बेस के लिए। क्या भारत इसकी उपेक्षा कर सकता है?”

मैंने आर्टिकल का लिंक भी दे दिया है, उसमें जो सबसे ख़तरनाक अजेंडा की बातें थी, वैसी बातें जो बेपर्दा राजनैतिक अभिव्यक्ति है, वैसे पोस्ट जो आक्रामक हिन्दुत्व का स्वरूप हैं, सब आपको हिन्दी में दे दिया है। डिसाइड कर लीजिए कि क्विंट में काम करने वालों को वैसे विशेषणों से विशेष प्रेम है जिसका मतलब वो नहीं जानते, या फिर ‘हिन्दुत्व’, ‘प्रोपेगेंडा’, ‘एक्स्ट्रेमिज्म’ लिखकर कुछ भी चला दिया जाएगा? इससे कहीं बेहतर तो इन्स्टाग्राम से दीपिका पदुकोन और रणवीर सिंह के लवी-डवी कमेंट पर पोस्ट बना दिया जाता! प्रोसेस तो मैंने बता ही दिया है! 

इमरान खान, AK47 गाड़कर आतंकियों के ग्रेनेड से रिवर्स स्विंग मत कराइए, फट जाएगा

झंडा लगाकर, सीरियस चेहरा बनाकर इमरान खान ने एक वीडियो के माध्यम से जो बातें कही हैं उससे एक बात जो ज़ाहिर है कि इस व्यक्ति को पाकिस्तान के बारे में कुछ ज़्यादा जानकारी नहीं है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने लगातार दबाव बनाया है, कुछ निर्णय लिए हैं जो कि पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था से लेकर उसके प्रायोजित आतंकवाद के लिए सही नहीं दिख रहे। 

पूरे विडियो में, जो कि अपने हिसाब से तथाकथित जमहूरियत के असली मालिकों को खुश रखने के लिए एडिट किया गया है, एक भी बार इमरान खान ने पुलवामा जैसे हमले की निंदा नहीं की, बल्कि यही गुनगुनाते रहे कि दहशतगर्दों से पाकिस्तान को बड़ा नुकसान हुआ है, और सौ बिलियन डॉलर के साथ 70,000 पाकिस्तानियों की जान गई है। 

मतलब, क्या कहना चाह रहा है ये आदमी? तुम दहशतगर्दी से परेशान हो तो बाक़ियों की परेशानी तुम्हारे कारण नहीं हो सकती? इनिंग के उत्तरार्ध में रिवर्स स्विंग डालकर बल्लेबाज़ों को कन्फ्यूज किया जा सकता है, लेकिन ग्रेनेड से गेंदबाज़ी नहीं चल सकती। क्योंकि तथ्य सामने हैं कि पाकिस्तान में मसूद अज़हर से लेकर हाफ़िज़ सईद तक परोपकारी संस्थाओं के नाम पर आम जीवन जी रहे हैं। यही किसी दिन बिलबिला कर पेशावर जैसा कांड करेंगे तो पता चलेगा कि पालतू कुत्ते ठीक होते हैं, आतंकी नहीं।

सबूत माँगे हैं इमरान ने यह कहकर कि ये नया पाकिस्तान है और सबूत देने पर वो कार्रवाई करेंगे। ‘नया पाकिस्तान’ सिर्फ कहने से नहीं बन जाता, या फिर अपनी भैंस बेचकर, गधे एक्सपोर्ट करके पैसे जुटाना किसी राष्ट्र को नई दिशा नहीं देता। नयापन आमूलचूल परिवर्तन से, या उसकी इच्छा से आता है। इस मामले में पाकिस्तान वहीं है, जहाँ वो अलग इस्लामी देश बनने के समय में था। नया पाकिस्तान का मतलब यह तो नहीं कि इन आतंकियों को अब व्यवस्थित तरीके से अपनी सेना में रखने का विचार चल रहा है?

क्या सबूत चाहिए? एलओसी के पास के आतंकियों की ट्रेनिंग कैम्प के बारे में इमरान को पता नहीं है, या फिर लॉन्च पैड के बारे में जहाँ से भारत में होनेवाले आतंकी हमलों की प्लानिंग की जाती है? अगर ये नहीं पता तो आईएसआई वालों को बहुत निराशा होगी, क्योंकि प्रधानमंत्री को इतना तो जानना ही चाहिए कि वो आतंकी देश के प्रधानमंत्री हैं और वहाँ की सत्ता सेना और आतंकी चलाते हैं, जबकि चेहरा जमहूरियत का रहता है। 

भारत से पाकिस्तान में आतंकियों के होने के सबूत माँगना उतना ही हास्यास्पद है जितना यह कहना कि आतंकवादी ने अगर गोली चलाई तो हमें यह बताइए कि उसके हाथ थे! लेकिन पाकिस्तान के पीएम जैश-ए-मोहम्मद और जमात-उद-दवा के पाकिस्तान में सक्रिय होने के बावजूद, उनके द्वारा हमलों की ज़िम्मेदारी लेते रहने के बाद भी, यही रिकॉर्ड बजाते हैं कि उन्हें सबूत चाहिए! वैसे, इमरान जी, ओसामा जहाँ था उसका नाम ‘चाँद’ तो नहीं रख दिया था आप लोगों ने क्योंकि उसके होने को तो उसके मरने तक आप लोग नकारते रहे थे। 

मुझे याद है जब पेशावर के आर्मी स्कूल के हमले में 105 बच्चों की जान गई थी। पूरा भारत उठ खड़ा हुआ था आतंकियों के ख़िलाफ़। जब सच में इस तरह की घटनाएँ होती हैं तो देश की भावना से ऊपर उठकर व्यक्ति मानव मात्र के तौर पर सोचता है, द्रवित हो उठता है। ऐसी घटना दोबारा होगी, तो दोबारा भारत के लोग खड़े होंगे क्योंकि वही मानवता है। 

इतना बड़ा विडियो बनाया तो दो शब्द उन जवानों के नाम भी कह देते जो किसी युद्ध में वीरगति को प्राप्त नहीं हुए, बल्कि अकारण ही वो चले गए। किसने किया, ये तो अलग बात है लेकिन मानव मात्र के नाम पर, एक पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के नाम पर आपके पास संवेदना के दो शब्द नहीं हैं, लेकिन आप सबूत माँगे जा रहे हैं! 

अगर ये नया पाकिस्तान है, तो भारत भी पुराना नहीं रहा। यही कारण है कि आपको सामने आकर ये सब कहना पड़ रहा है। आपके यहाँ चीन का पैसा लगा हुआ है, और अगर भारत ने थोड़ा सा भी रुख़ कड़ा किया, बलूचिस्तान आदि जगहों पर थोड़ी-सी एक्टिविटी बढ़ी तो पैसों के वापस जाने में देर नहीं लगेगी। आपको भी पता है कि नया भारत कहाँ मारता है, कैसे मारता है। 

खासकर, मोदी सरकार ने जो आतंकी हमले के बाद सीधा फ़ैसला सेनाओं के हाथ छोड़ दिया है, तब से खलबली मचनी उचित है। पाकिस्तान में जो पानी जाता है, वो भी भारत से होकर जाता है, जिस पर मोदी ने पहले ही कह रखा है कि पानी और ख़ून एक साथ नहीं बह सकते। अमेरिका अब ट्रम्प के आने के बाद से तुम्हारे साथ रहा नहीं। ले-दे कर चीन है, और अगर हालात खराब हुए तो वो भी अपना पैसा लेकर चला जाएगा। अब आपको डर है कि अगर भारतीय सेना ने बिना युद्ध छेड़े पाकिस्तान को सीमित तरीके से तबाह करना शुरु किया, तो आप कहीं के नहीं रहेंगे। ये जो क्राउन प्रिंस आए थे डॉलर लेकर, वो भी शायद ऐसे पाकिस्तान में पैसे न लगाना चाहें जहाँ लगातार युद्ध जैसी स्थिति बनी रहे।  

ज़लालत और जहालत का पर्याय बन रहे इमरान खान ने ये भी कहने की कोशिश की कि भारत में चुनाव होने वाले हैं तो ये सब किया जा रहा है! पाकिस्तान में तो आप ही कह रहे हैं कि बहुत दहशतगर्दी है, फिर क्या वहाँ भी चुनाव होने वाले हैं? आतंकवाद से अगर आप परेशान हैं तो फिर नामी आतंकी वहाँ कैसे रह रहे हैं? क्या आप उनका इस्तेमाल चुनावों के दौरान करने वाले होते हैं? जिस देश में चुनाव जीतने का एक ही फ़ंडा हो कि कौन सी पार्टी भारत के नाम पर कितना ज़हर उगल सकती है, वो ‘चुनावों के साल’ की बात न ही करे तो बेहतर है।

इमरान ख़ान ने एक और ग़ज़ब की बात कही कि भारत को सोचना चाहिए कि कश्मीर का युवा अपने आपको मारने पर क्यों उतारू है! अब अगर यह बात भी इमरान को समझ में नहीं आ रही तो लानत है पाकिस्तान के मदरसों पर जो उन्हें बहत्तर हूर के कॉन्सेप्ट ठीक से नहीं समझा पाया!

इमरान अगर आतंक को लेकर गम्भीर हैं तो पुरानी स्क्रिप्ट देखकर बोलना बंद करें और सही मायनों में नई सोच दिखाएँ। नई सोच यही कहती है कि अपनी गिरती इकॉनमी की चिंता करें और आतंक के इन्फ़्रास्ट्रक्चर में कम बजट लगाएँ। भैंस, गधे और कार बेचकर पैसे जुटाने वाले प्रधानमंत्री को यह सोचना चाहिए कि बंदूक़ों और आरडीएक्स के साथ-साथ आतंकियों को सैलरी पर रखना पाकिस्तानी हुकूमत की अजीबोग़रीब नीतियों की तरफ इशारा करता है।

कश्मीरी राष्ट्रवादी, जो माँ-पिता को खो चुका है, PM से सुरक्षा की गुहार कर रहा है

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवम् गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह के नाम खुला ख़त 

महोदय,

नमस्ते, आदाब! 

मैं श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) का रहने वाला हूँ। मैं यह खुला ख़त आपको इसलिए लिख रहा हूँ ताकि मैं अपनी तरफ आपका ध्यान आकर्षित कर सकूँ। कश्मीर घाटी के हालात से आप अच्छी तरह से वाक़िफ़ हैं। साथ ही, आप यह भी जानते हैं कि हर राष्ट्रवादी कश्मीरी यह मानता है कि कश्मीर का भविष्य भारत के साथ ही सुरक्षित है। यहाँ के अलगाववादियों और आतंकियों का एक ही मक़सद है कि निर्दोष कश्मीरियों को जिहाद के नाम से काट दिया जाए और कश्मीर को नरसंहार और बर्बादी का पर्याय बना दिया जाए। ऐसे लोगों को रोकने के लिए और कश्मीर के लोगों को उनका असली एजेंडा समझाने के लिए मैं रात-दिन काम कर रहा है।

सर, मैं अपने कई दोस्तों के साथ कश्मीर के युवाओं को मुख्यधारा में लाने और उन्हें भारत देश की परिकल्पना समझाने की पुरज़ोर कोशिश कर रहा हूँ। हम देशभक्त लोग हैं और अपने देश के लिए बहुत बड़े बलिदान कर चुके हैं, जिसमें हमारे माता-पिता, भाई-बहन और कई क़रीबी संबंधियों की शहादत शामिल है। हमने कई सारे इनिशिएटिव लिए हैं ताकि युवा इस चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनें और शांति के प्रयास में हमारा साथ दे सकें। मेरे परिवार के कुछ सदस्य आतंकियों द्वारा पिछले कुछ सालों में मारे जा चुके हैं और यह बताता है कि यहाँ मेरी ज़िंदगी को कितना ख़तरा है। 

हम लगातार यहाँ पर यह प्रयास कर रहे हैं कि युवावर्ग इलेक्टोरल पॉलिटिक्स का हिस्सा बने और यही कारण है कि हम आतंकियों की निगाह पर चढ़ चुके हैं, और हमें लगातार डराया-धमकाया जाता है। मैं कई बार अपने ऊपर हुए आतंकी हमले से बच चुका हूँ। मुझे सोशल मीडिया पर भी लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिलती रही हैं जिसे मैं संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाता रहा हूँ। हुर्रियत और उनके कई एजेंट्स कई बार मुझे धमकी दे चुके हैं कि मैं कश्मीर में अपना काम रोक दूँ।

मैं कई बार राज्य की पुलिस और जम्मू-कश्मीर के ADGP (सिक्योरिटी) के संज्ञान में इन सब बातों को ला चुका हूँ। मैंने होम मिनिस्ट्री, जम्मू कश्मीर के गवर्नर, गवर्नर के सलाहकार एवम् जम्मू कश्मीर DGP तक, सबको लिखा है, उन्हें हर बात बताई है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। 

सर, सरकार तो उन लोगों को भी सुरक्षा दे रही है जिनके माता-पिता आतंकियों द्वारा मारे गए थे लेकिन वो लगातार देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं, जैसा कि श्री राम माधव जी ने अपने बयान में कहा था।  सर, जैसा कि मैंने आपको अपने काम और अपने परिवार के बारे में बताया है, मैं आपसे गुज़ारिश करता हूँ कि आप इन बातों की तरफ़ अपना ध्यान देंगे और मुझे सुरक्षा प्रदान करवाएँगे ताकि मैं अपने राष्ट्रवादी गतिविधियों को आगे बढ़ाता रहूँ। 

इस मदद के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा। 

सादर,

ट्विटर हैंडल @ibne_sena

श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर