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छात्रों द्वारा महज़ 6 दिन में निर्मित विश्व के सबसे हल्के ‘कलामसैट’ की लॉन्चिंग के साथ इसरो ने रचा इतिहास

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संस्थान (ISRO) लगातार कीर्तिमान स्थापित करता जा रहा है। कल देर रात इसरो ने विश्व का सबसे छोटा सैटेलाइट लॉन्च कर दुनिया के अग्रणी देशों में एक बार फिर ख़ुद को शुमार किया।

बता दें कि कल देर रात PSLV C-44 रॉकेट ने श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से 2019 के पहले मिशन के रूप में 28 घंटे की कॉउंटडाउन के बाद रात 11 बजकर 37 मिनट पर उड़ान भरी। इस मिशन में भारतीय सेना के सैटेलाइट ‘माइक्रोसैट’ के साथ छात्रों का बनाया सबसे हल्का सैटेलाइट ‘कलामसैट’ भी लॉन्च किया गया। कलामसैट इतना छोटा है कि इसे ‘फेम्टो’ श्रेणी में रखा गया है।

मिशन की सफलता के बाद इस बात की जानकारी के साथ एक तस्वीर भी इसरो ने ट्विटर पर भी शेयर की।

इसरो प्रमुख, के सिवन, के अनुसार ‘कलामसैट’ दुनिया का सबसे कम भार का उपग्रह है जिसे पृथ्वी की कक्षा में सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया गया है। यह PSLV की 46वीं उड़ान थी। इसरो ने बताया कि PSLV C-44 द्वारा 740 किलोग्राम भार वाले माइक्रोसैट-R को, प्रक्षेपण के करीब 14 मिनट बाद, 274 किलोमीटर की ऊँचाई पर ध्रुवीय सूर्य तुल्यकालिक कक्षा (Polar Satellite Orbit) में स्थापित कर दिया। इसके बाद 10 सेंटीमीटर के आकार और 1.2 किलोग्राम भार वाले ‘कलामसैट’ को और ऊपरी कक्षा में स्थापित किया।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार इस ख़ास सैटलाइट को तमिलनाडु के स्पेस किड्स नाम की निजी संस्था के 10वीं कक्षा के छात्रों ने महज़ 6 दिन में तैयार किया है। भारतीय छात्रों द्वारा बनाए गए ‘कलामसैट’ सैटेलाइट का नाम पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। कलामसैट एक कम्यूनिकेशन सैटलाइट है, जिसको बस 12 लाख रुपए में तैयार किया गया है।

गुरुवार रात प्रक्षेपण के सफल होने के बाद इसरो प्रमुख के सिवन ने इस मिशन के लिए अपनी टीम और सारे देश को बधाई दी। साथ ही देश के छात्रों को इसके लिए ख़ास बधाई देते हुए सिवन ने कहा, “भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान देश के सारे छात्रों के लिए हमेशा उपलब्ध है। ऐसे में मैं छात्रों से कहना चाहता हूँ  कि आप अपनी बनाई सैटलाइट्स को हमारे पास लाएँ और हम इसे आप के लिए लॉन्च करने में आपकी मदद करेंगे।” बता दें कि अंतरिक्ष विज्ञान में शोध को बढ़ावा देने के लिए इसरो ने ‘कलामसैट’ की लॉन्चिंग के लिए संस्था से कोई भी शुल्क नहीं लिया है।

वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो को बधाई दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा है, “पीएसएलवी के एक और सफल प्रक्षेपण के लिए हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई। इस प्रक्षेपण ने भारत के प्रतिभाशाली छात्रों द्वारा निर्मित कलामसैट को कक्षा में स्‍थापित कर दिया है। यही नहीं, इस प्रक्षेपण के साथ ही भारत सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण संबंधी प्रयोगों के लिए एक कक्षीय प्‍लेटफॉर्म के रूप में एक अंतरिक्ष रॉकेट के चौथे चरण का उपयोग करने वाला पहला देश बन गया है।”

इसरो प्रमुख, के सीवन, के अनुसार वर्ष 2019 में कुल 32 मिशनों को अंजाम दिया जाएगा। इसमें सैटेलाइट मिशन के साथ बहुप्रतीक्षित चंद्रयान-2 और गगनयान मिशन भी शामिल है।

सरकार परमानेंट नहीं : CBI को कॉन्ग्रेस नेता आनंद शर्मा की धमकी; हुड्डा पर पड़े थे छापे

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के रोहतक स्थित आवास पर सीबीआई द्वारा की गई छापेमारी पर कॉन्ग्रेस नेता आनंद शर्मा ने अधिकारियों को धमकी देते हुए कहा है कि सरकार ‘परमानेंट’ नहीं होती। उन्होंने धमकी में यह भी याद दिलाया कि चुनाव आने वाले हैं।

सीबीआई ने यह छापेमारी 2005 में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को गलत तरीके से ज़मीन आवंटित करने के मामले में की है। बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद भी अपने आवास के अंदर मौजूद रहे। सीबीआई की टीमें इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में एक साथ 20 से अधिक जगहों पर भी छापेमारी कर रही हैं।

क्या है भ्रष्टाचार से जुड़ा पूरा मामला

सीबीआई की ये छापेमारी जहाँ साल 2005 में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को गलत तरीके से ज़मीन आवंटित करने के मामले में मारी गई, वहीं दूसरी ओर एक रिपोर्ट की मानें तो सीबीआई ने हुड्डा के खिलाफ एक नया मामला भी दर्ज किया है, जो 2009 में गुड़गाँव में भूमि आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं से संबंधित है।

सीबीआई ने हुड्डा के साथ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा और एजेएल के खिलाफ चार्जशीट फ़ाइल कर दी है। बता दें कि हाल ही में हरियाणा के राज्यपाल नारायण आर्य ने (एजेएल) मामले में सीबीआई को भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी दी थी।

ऐसे किया गया था ज़मीन का फर्जी आवंटन

पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप है कि 30 अगस्त 1982 में एजेएल को ज़मीन आवंटित कर दी थी जिसमें शर्त थी कि कंपनी 6 महीने में ज़मीन पर कंस्ट्रक्‍शन करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो 30 अक्टूबर 1992 को पंचकूला के संपदा अधिकारी ने ज़मीन रिज्यूम कर ली। साथ ही, 10% राशि में कटौती कर बाकि राशि 10 नवंबर 1995 को लौटा दी गई।  

अब एजेएल ने इसका विरोध किया और राजस्व विभाग के पास अपील की, लेकिन यहाँ उसे कोई राहत नहीं मिली। आरोप है की साल 2005 में मुख्यमंत्री हुड्डा ने एजेएल को यह ज़मीन दोबारा से अलॉट करवाने का रास्ता तैयार कर दिया।

बताया जाता है कि तब हुड्डा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने तर्क दिया था कि पुरानी कीमत पर ज़मीन को आवंटित करना संभव नहीं है। लेकिन बावजूद इसके 28 अगस्त 2005 को पंचकूला की ज़मीन 1982 की दर पर ही एजेएल को अलॉट कर दी गई।

ध्वस्त किया जाएगा भगोड़े नीरव मोदी का आलीशान बंगला, ED की स्वीकृति

पंजाब नैशनल बैंक को ₹13 हजार करोड़ का चूना लगाने वाले भगोड़े हीरा कारोबारी के अवैध बंगले ध्वस्त किए जाएँगे। महाराष्‍ट्र के रायगढ़ जिले में अलीबाग बीच के पास उसके ‘अवैध’ बंगले हैं, जिन्हें इसी सप्ताह ध्वस्त किया जाएगा। ये वही बंगले हैं जहाँ कभी नीरव भव्‍य पार्टियाँ दिया करता था। हाल ही में इस बंगले को कलेक्‍टर ऑफ़िस ने जाँच के बाद अवैध घोषित किया था।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो बंगले की सभी मूल्‍यवान वस्‍तुओं को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने निकाल कर कलेक्ट्रेट ऑफिस में जमा करवा दिया है। कलेक्ट्रेट बंगले को गिराने के लिए अब केवल ईडी के औपचारिक संदेश का इंतजार कर रहा है। तहसील के एक अधिकारी की मानें तो बंगले को गिराने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों को बुलाना शुरू कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि 20 हजार वर्गफुट में बने इस बंगले को ध्वस्त करने के लिए करीब 4 दिन लग सकता है।

प्रशासन से मिल चुकी है बंगले को ध्वस्त करने की अनुमति

एक महीने पहले ही प्रवर्तन निदेशालय जिला प्रशासन को इस बंगले को गिराने की अनुमति दे चुका है। बता दें कि इससे पहले पर्यावरण मंत्री रामदास कदम ने भी अवैध बंगलों पर समीक्षा बैठक के बाद इन्हें ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। इसके अलावा हाई कोर्ट का आदेश है कि सरकार उन सभी बंगलों को गिराए जो पर्यावरण के नियमों का उल्‍लंघन करके बनाए गए हैं। जिले के अलीबाग में इस प्रकार के कुछ 121 और मुरुद में 151 बंगले हैं जो अवैध तरीके से पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन करके बनाए गए हैं।

AJL ज़मीन आवंटन मामले में बढ़ी हुड्डा की मुश्किलेंः 30 जगहों पर CBI की छापेमारी

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के रोहतक स्थित आवास पर सीबीआई द्वारा छापेमारी की गई। सीबीआई ने यह छापेमारी 2005 में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को गलत तरीके से ज़मीन आवंटित करने के मामले में की है। बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद भी अपने आवास के अंदर मौजूद रहे। सीबीआई की टीमें इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में एक साथ 20 से अधिक जगहों पर भी छापेमारी कर रही हैं।

क्या है भ्रष्टाचार से जुड़ा पूरा मामला

सीबीआई की ये छापेमारी जहाँ साल 2005 में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को गलत तरीके से ज़मीन आवंटित करने के मामले में मारी गई, वहीं दूसरी ओर एक रिपोर्ट की मानें तो सीबीआई ने हुड्डा के खिलाफ एक नया मामला भी दर्ज किया है, जो 2009 में गुड़गाँव में भूमि आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं से संबंधित है।

सीबीआई ने हुड्डा के साथ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा और एजेएल के खिलाफ चार्जशीट फ़ाइल कर दी है। बता दें कि हाल ही में हरियाणा के राज्यपाल नारायण आर्य ने (एजेएल) मामले में सीबीआई को भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी दी थी।

ऐसे किया गया था ज़मीन का फर्जी आवंटन

पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप है कि 30 अगस्त 1982 में एजेएल को ज़मीन आवंटित कर दी थी जिसमें शर्त थी कि कंपनी 6 महीने में ज़मीन पर कंस्ट्रक्‍शन करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो 30 अक्टूबर 1992 को पंचकूला के संपदा अधिकारी ने ज़मीन रिज्यूम कर ली। साथ ही, 10% राशि में कटौती कर बाकि राशि 10 नवंबर 1995 को लौटा दी गई।  

अब एजेएल ने इसका विरोध किया और राजस्व विभाग के पास अपील की, लेकिन यहाँ उसे कोई राहत नहीं मिली। आरोप है की साल 2005 में मुख्यमंत्री हुड्डा ने एजेएल को यह ज़मीन दोबारा से अलॉट करवाने का रास्ता तैयार कर दिया।

बताया जाता है कि तब हुड्डा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने तर्क दिया था कि पुरानी कीमत पर ज़मीन को आवंटित करना संभव नहीं है। लेकिन बावजूद इसके 28 अगस्त 2005 को पंचकूला की ज़मीन 1982 की दर पर ही एजेएल को अलॉट कर दी गई।

10% आरक्षण पर अभी नहीं लगेगी कोई रोक : सुप्रीम कोर्ट

आरक्षण मामले को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फ़ैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर कहा है कि अभी फ़िलहाल के लिए ग़रीब तबके को मिलने वाले 10 फ़ीसदी आरक्षण पर कोई रोक नहीं होगी।

आर्थिक आधार पर मिलने वाले आरक्षण पर रोक लगाने के लिए साफ़ मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले 124वें संविधान संशोधन पर विचार करेगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार हफ़्ते के भीतर जवाब माँगा है।

इस मामले पर चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई और संजीव खन्ना की पीठ ने सुनवाई की है। बता दें कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को मिलने वाले 10 फ़ीसद आरक्षण के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने फ़िलहाल अपना फै़सला सुनाया है।

इससे पहले कल (जनवरी 24, 2019) गुजरात सरकार ने प्रदेश में रहने वाले आर्थिक रुप से कमज़ोर सवर्णों के लिए बड़ी घोषणा की है। सरकार ने कहा कि समान्य वर्ग के आर्थिक रुप से कमज़ोर लोगों को दिए जाने वाले 10% आरक्षण के लिए केवल ₹8 लाख सलाना आय ही सीमा होगी। सरकार ने कहा कि इसके अलावा घर व ज़मीन को आरक्षण के शर्तों के रूप में नहीं देखा जाएगा। सरकार के इस फ़ैसले के बाद समान्य वर्ग के आर्थिक रुप से कमज़ोर लोगों के लिए पहली बार किसी राज्य की सरकार ने इस तरह की बड़ी घोषणा की है।

अहमदाबाद में होने वाली कैबिनेट की मीटिंग के बाद राज्य सरकार ने बुधवार को यह फ़ैसला लिया। दरअसल केंद्र सरकार द्वारा सांसद में पारित बिल के अनुसार समान्य वर्ग के आर्थिक रुप से कमज़ोर उन लोगों को आरक्षण का लाभ मिलेगा जिनकी वार्षिक आय ₹8 लाख से कम है। इसके अलावा इस वर्ग के उन्हीं लोगों को आरक्षण का लाभ मिलेगा जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन व 1000 वर्ग फीट से कम में घर है। परंतु, गुजरात सरकार ने समान्य वर्ग के ग़रीब लोगों के लिए दिए जाने वाले आरक्षण में जमीन व घर की शर्तों को हटा दिया है।  

फरवरी से इस वर्ग के लोगों को मिलेगा आरक्षण का लाभ

जानकारी के लिए बता दें कि आगामी 1 फरवरी से सामान्य वर्ग के ग़रीबों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलने लगेगा। इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब 1 फरवरी के बाद से सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए जो भी रिक्तियाँ निकाली जाएगी, उनमे सामान्य वर्ग के ग़रीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस सम्बन्ध में आदेश जारी करते हुए कहा कि सालाना ₹8 लाख से कम आय वाले लोगों को ये सुविधा दी जाएगी। इस आदेश के क्रियान्वयन के लिए अलग से रोस्टर जारी किया जाएगा।

DoPT के संयुक्त सचिव ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने शनिवार (जनवरी 19, 2019) देर रात अधिसूचना जारी करते हुए कहा, “संसद ने संविधान में संशोधन कर ग़रीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र के सभी पदों एवं सेवाओं के लिए 1 फरवरी 2019 से अधिसूचित होने वाली सभी प्रत्यक्ष भर्तियों पर इसे लागू किया जाता है।”

याद दिला दें कि विधेयक पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 13 जनवरी को हस्ताक्षर कर दिए थे। इस से पहले विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया था।

रोज़ वैली चिटफंड घोटाला: ममता बनर्जी के क़रीबी को CBI ने किया गिरफ़्तार

बंगाली फ़िल्म प्रोड्यूसर श्रीकांत मोहता को सीबीआई ने कोलकाता से गिरफ़्तार कर लिया है। ₹17,450 करोड़ के रोज़ वैली चिटफंड घोटाले में शामिल मोहता को सीबीआई भुवनेश्वर लेकर जाएगी, जहाँ उसे अदालत में पेश किया जाएगा। हालाँकि, मोहता को गिरफ़्तार करना सीबीआई के लिए आसान नहीं रहा। मोहता के सुरक्षाकर्मियों के साथ-साथ बंगाल पुलिस ने भी सीबीआई को तलाशी अभियान चलाने में बाधा पहुँचाई, लेकिन अंततः जाँच एजेंसी उसे गिरफ़्तार करने में सफल रही। मोहता को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का क़रीबी माना जाता है।

श्रीकांत मोहता श्री वेंकटेश फ़िल्म्स (SVF) नामक प्रोडक्शन कम्पनी का संस्थापक है। यह पूर्वी भारत की सबसे बड़ी फ़िल्म प्रोडक्शन कंपनियों में से एक है। SVF ने प्रसेनजित चटर्जी अभिनीत ‘चोखेर बाली’ और अजय देवगन अभिनीत ‘रेनकोट’ जैसी प्रसिद्ध बंगाली एवं हिंदी फ़िल्मों का निर्माण किया है। इसके अलावा कम्पनी हॉलीवुड फ़िल्मों का डिस्ट्रीब्यूशन भी करती आई है।

सीबीआई ने गुरुवार (जनवरी 24, 2019) को सुबह 11 बजे दक्षिण कोलकाता के क़स्बा स्थित एक्रोपॉलिस मॉल के 19वें तले पर SVF के मुख्यालय पर छापा मारा। मोहता उस समय अपने दफ़्तर में ही मौज़ूद था। उसके निजी सुरक्षाकर्मियों ने सीबीआई के अधिकारियों को अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद क़स्बा थाना की पुलिस वहाँ पहुँची। पुलिस और सीबीआई अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई जिसके बाद जाँच एजेंसी मोहता को हिरासत में लेने में सफल रही। इस से पहले सुबह 7 बजे सीबीआई मोहता के आवास पर भी पहुँची थी।

सीबीआई के अनुसार, पुलिस ने जाँच अधिकारियों की पहचान जानने के बाद भी उनकी कार्यवाही में बाधा पहुँचाई। सीबीआई द्वारा अदालत का अनुमति पत्र दिखाए जाने के बावजूद पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनसे बहस करना जारी रखा। काफ़ी मशक्क़त के बाद पुलिस दोपहर 2 बजे घटनास्थल से चली गई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मोहता ने ही क़स्बा पुलिस को फ़ोन कर बुलाया था।

मोहता को हिरासत में लेने के बाद सीबीआई उसे सॉल्ट लेक स्थित सीजीओ कार्यालय ले कर गई। एजेंसी के अनुसार वह जाँच में सहयोग नहीं कर रहा था और पूछताछ में भी साफ़-साफ़ जवाब नहीं दे रहा था।

पुलिस का कहना है कि मोहता ने उन्हें कॉल कर कहा था कि कुछ अज्ञात लोग उसके दफ़्तर में जबरन घुसने की चेष्टा कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार मोहता ने इस संबंध में लिखित शिक़ायत भी दर्ज़ कराई थी। सीबीआई ने पुलिस के दावों की पोल खोलते हुए पूछा कि अगर ऐसा था तो फिर उन्होंने हमारी कार्यवाही में बाधा क्यों पहुँचाई?

कुछ दिनों पहले सीबीआई ने मोहता से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माँगे थे लेकिन उसने ख़ुद हाज़िर होने की बजाय अपने वकील से दस्तावेज़ भिजवा दिए थे। सीबीआई कई दिनों से उसे पूछताछ के लिए बुला रही थी। मोहता पर रोज़वैली समूह के मालिक गौतम कुंडू से ₹30 करोड़ लेने का आरोप है। कुंडू अभी जेल में क़ैद है। इस घोटाले तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई नेताओं को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है। तृणमूल सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को भी इस मामले में सीबीआई गिरफ़्तार कर चुकी है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने सीबीआई की कार्रवाई को लोकतंत्र के लिए एक ख़तरनाक निशानी बताया। तृणमूल नेता पार्थ चटर्जी ने कहा कि सीबीआई का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फ़िल्म इंडस्ट्री के लोगों, व्यापारियों और नेताओं के ख़िलाफ़ सीबीआई का प्रयोग करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी ने मोहता और ममता बनर्जी की नज़दीकियों पर सवाल उठाए और कहा कि मोहता हमेशा मुख्यमंत्री बनर्जी के साथ अपनी नज़दीकियों का उल्लेख करता रहा है। भाजपा ने इस गिरफ़्तारी का स्वागत करते हुए कहा कि सीबीआई सही रास्ते पर है।

कुछ महीनों पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीबीआई को बिना राज्य सरकार की अनुमति के पश्चिम बंगाल में कार्रवाई करने से रोक दिया था। उस से पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी यही निर्णय लिया था।

IED के साथ 2 आतंकी गिरफ़्तार, गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के 5 जगहों पर हमले की थी साज़िश

गणतंत्र दिवस से पहले से पहले दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों को गिरफ़्तार किया है। जानकारी के मुताबिक़ हिरासत में लिए गए आतंकवादियों की योजना गणतंत्र दिवस पर आतंक फैलाने की थी। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के अनुसार एक आतंकी जो जैश-ए-मोहम्मद का मास्टरमाइंड है और हाल में ही श्रीनगर में हुए ग्रेनेड हमले में शामिल था। वह एक बार फिर आतंकी हमले की योजना बना रहा था। इसके अलावा पुलिस ने बताया कि दोनों आतंकी गणतंत्र दिवस के मौक़े पर भीड़भाड़ वाले इलाक़े में हमला करने की साज़िश रच रहे थे।

पुलिस ने कहा कि गिरफ़्तार किए गए 29 वर्षीय अब्दुल लतीफ़ गनी और 26 वर्षीय हिलाल अहमद भट, दिल्ली आए थे। आतंकी संगठन जैश-ए-मौहम्मद ने दिल्ली सचिवालय समेत शहर में पाँच जगहों को हमले के लिए चुना था। गुर्गों ने दक्षिण दिल्ली में आईजीएल गैस पाइपलाइन, तुर्क़मान गेट, इंडिया गेट और लाजपत नगर बाज़ार में हज मंजिल इमारत आदि जगहों का मुआयना किया था और उनकी तस्वीरें लीं थी, जहाँ आईईडी (IED) रखे जाने की योजना बनाई थी।

बता दें कि गनी (Ganaie) हाल ही में बांदीपुरा में श्रीनगर और सुंबल सहित जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में हुए ग्रेनेड हमलों के मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया था। उसके मॉड्यूल ने 17 जनवरी को जीरो ब्रिज़ की घटना के साथ-साथ ही लाल चौक में हमले को अंजाम दिया था। 18 जनवरी को शोपियां में भी घटना को अंजाम दिया था। पुलिस ने इन जगहों की तस्वीरें उसके ख़ुद के फोन से बरामद की हैं।

DCP प्रमोद कुशवाहा के अनुसार टीमों ने दो IED, 26 कारतूस और a.32 बोर की पिस्टल बरामद की है। मॉड्यूल ने लगभग एक दर्जन IED की ख़रीद की थी जिनका पता लगा लिया गया है। गिरफ़्तारी संबंधी ऑपरेशन अभी जारी है क्योंकि इसके अलावा भी और गिरफ़्तारियाँ होने की संभावना है। विशेष सेल के मुताबिक़, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कम से कम चार संदिग्धों की पहचान की है, जिनमें से दो अन्य को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

ऑपरेशन के बारे में बताते हुए, DCP कुशवाहा ने कहा कि मिलिट्री इंटेलिजेंस की दिल्ली यूनिट से एक विशिष्ट सूचना प्राप्त हुई थी जिसके बाद लक्ष्मी नगर के JH ब्लॉक में एक घर में संदिग्ध लोगों को पर नज़र रखी जा रही थी। चौबीसों घंटे उस घर पर निगरानी रखी गई।

कुछ हफ़्तों बाद, पुलिस गनी की पहचान करने में सक्षम हो गई। 20 जनवरी को, पुलिस इन्स्पेक्टर शिव कुमार को जानकारी मिली कि गनी किसी से मिलने के लिए राजघाट पर जाएगा। पूरे क्षेत्र का अवलोकन एसीपी अत्तर सिंह की टीम ने कर लिया था। इसके बाद टीम ने गनी को राजघाट पर ही हथियार और गोलियों समेत गिरफ़्तार कर लिया।

कुशवाहा ने कहा कि ऑपरेशन कमांडर अबू मौज, जिला कमांडर तल्हा भाई और जिला कमांडर उमैर इब्राहिम के साथ अन्य घटिया सामग्री के नाम पर जैश-ए-मोहम्मद के तीन रबर स्टैम्प भी बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान, दोनों ने खुलासा किया कि उनके पाक स्थित हैंडलर अबू मौज उर्फ़ अबू बकर ने उन्हें पिछले साल नवंबर में आईईडी (IED) प्रदान किया था।

अबू मौज के निर्देशानुसार, गनी दिसंबर में लाल चौक पर अकीब नाम के एक व्यक्ति से मिला था। आकिब दो दिनों तक गनी के घर पर रहा और फिर आईईडी, एक पिस्तौल और 30 कारतूस वितरित किए। मौज ने उनसे जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र और पुलिस बलों पर ग्रेनेड फेंकने और दिल्ली के कुछ हिस्सों में इन ग्रेनेड का इस्तेमाल करने के लिए कहा था, जिससे गणतंत्र दिवस समारोह में व्यवधान उत्पन्न हो जाए।

पूछताछ के दौरान अब्दुल लतीफ़ गनी ने आगे खुलासा किया कि वह अबू मौज के साथ टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से संचार में था। अब्दुल लतीफ़ गनी, हिलाल अहमद और समीर के साथ नवंबर 2018 में हवाई मार्ग से दिल्ली आए। हिलाल अहमद द्वारा टिकट की व्यवस्था की गई। उन्होंने हमलों के लिए विभिन्न स्थानों की पहचान की। गनी ने वीआईपी क्षेत्रों, धार्मिक स्थानों, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठित स्थानों और फुटपाथ जैसे क्षेत्रों को का अवलोकन किया। उन्होंने तस्वीरें और वीडियो लिए और फिर उन्हें अबू मौज के पास भेजा।

जम्मू-कश्मीर में अपनी गतिविधियों के बारे में, गनी ने कहा कि उसने जम्मू और कश्मीर में आबिद नाम के शख़्स को दो हथगोले दिए थे। पुलिस ने कहा कि आबिद ने 4 जनवरी को बांदीपुरा के सुंबल में 5 आरआर के सेना के जवानों पर एक ग्रेनेड फेंका था। इसके अलावा गनी ने ख़ुलासा किया कि उन्होंने श्रीनगर में शाहबल और हिलाल अहमद भट को भी कुछ हथगोले दिए थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस को इस नेटवर्क के बारे में सूचित किया गया था और इसके बाद उसने 22 जनवरी को श्रीनगर में ग्रेनेड विस्फोट करने के आरोप में गनी के एक सहयोगी शाहबाज़ को गिरफ़्तार किया था।

5 सालों में असम में हिंदू हो जाएँगे अल्पसंख्यक, अगर नागरिकता बिल नहीं हुआ लागू: हिमंत सरमा

असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि वो असम को दूसरा जम्मू-कश्मीर नहीं बनने देंगे। नागरिकता (संविधान संशोधन) बिल 2016 पर सरमा का कहना है कि राज्य को तभी बचाया जा सकता है जब इस बिल को लागू किया जाए। साथ ही असम अकॉर्ड के क्लॉज़ 6 को लागू करने के साथ छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्ज़ा भी दिया जाए।

हिमंत का कहना है कि यदि नागरिक बिल को पास नहीं किया गया तो आने वाले पाँच सालों में असम में हिन्दू अल्पसंख्यकों की सूची में आ जाएँगे।

सरमा ने इस बात की भी घोषणा की है कि 2021 के बाद वो राजनीति में अधिक सक्रिय नहीं रहेंगे। उन्होंने नागरिकता (संविधान संशोधन) बिल 2016 को उच्च सदन में पास कराने के अपने संघर्ष को ‘पानीपत की अंतिम लड़ाई’ कहा है। सरमा ने अपनी बातचीत में कहा कि जो उन्हें धर्मनिरपेक्षता का पाठ सिखा रहे हैं वही लोग आज जम्मू-कश्मीर में खून-खराबे के लिए ज़िम्मेदार हैं।

सरमा का कहना है कि उन्हें धर्मनिरपेक्ष या सांप्रदायिक होने पर प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। लोग हिंदुओं को हिंदुओं के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं। हिंदू बांग्लादेशियों का विरोध करने वालों को पता नहीं है कि वे असम के 14 जिलों में निर्णय लेने की शक्ति खो चुके हैं। पहले ही उनकी 30 सीटें जा चुकी हैं, अगर विधेयक आता है तो अभी भी कम से कम 17 विधानसभा सीटें बचा सकते हैं।

बता दें हाल ही में गुहावटी में नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (NESO) के सदस्यों ने रैली निकाली थी जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार को भी इस विधेयक को लागू करने के ख़िलाफ़ चेतावनी दी थी जिसके बाद ही हिमंत का यह बयान आया है। रैली के दौरान छात्रों ने पीएम मोदी और असम मुख्यमंत्री सीएम सर्वानंद सोनोवाल को अवैध आप्रवासियों का रक्षक और संरक्षक बताया।

सरमा ने कहा कि 1971 की गणना के अनुसार असम की जनसंख्या में 71 प्रतिशत हिंदू थे जो कि 2011 आते-आते 61 प्रतिशत हो गए। अगर 2021 तक बांग्लादेश से आए 8 लाख हिंदू बंगालियों को असम से बाहर भेज दिया गया तो ये आँकड़े गिरकर 51 से 52 प्रतिशत ही रह जाएँगे जिसके कारण आने वाले समय में राज्य का मुख्यमंत्री बदरुद्दीन अजमल या फिर सिराजुद्दीन अजमल होगा।

इस मामले का विरोध करने वालों पर सरमा ने कहा: “ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU) के सदस्य बिल का विरोध करने के लिए सोशल मीडिया पर संदेश भेज रहे हैं। हालांकि ये लोग खुद असम में आर्थिक शरणार्थी हैं, वे इस बारे में क्यों बात कर रहे हैं कि नागरिकता किसे मिलनी चाहिए?” सरमा ने यह भी कहा कि उन्हें अपने मोबाइल पर धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं।

बता दें कि जिस विधेयक पर इतनी खींचतान की जा रही है वो लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है और अब राज्यसभा में भी इसके पारित करने पर चर्चा की जानी है। अगर ये विधेयक लागू हो जाता है तो 12 की जगह पिछले 6 साल से देश में रह रहे बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता दे दी जाएगी।

आगामी चुनावों में आंध्र प्रदेश में नहीं होगा कॉन्ग्रेस और TDP का गठबंधन

आंध्र प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रघुवीरा रेड्डी ने आगामी चुनावों में किसी भी दल के साथ गठबंधन की संभावना को सिरे से नकार दिया है। आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने वाले हैं। रेड्डी ने कहा कि पार्टी राज्य की सभी 25 लोकसभा सीटों और 175 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव व केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने भी कहा कि आंध्र में कॉन्ग्रेस का तेदेपा के साथ गठबंधन नहीं है।

वनइंडिया की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार ओमान चांडी ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए कहा: “राज्य की सभी 175 विधानसभा और 25 लोकसभा सीटों पर कॉन्ग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। तेदेपा ने हमारे साथ केवल राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन किया है, जिसका राज्य से कोई लेना-देना नहीं है।”

चांडी ने बताया कि आंध्र प्रदेश कॉन्ग्रेस के नेतागण 31 जनवरी को आयोजित बैठक में चुनावी तैयारियों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने बताया कि पार्टी ने फरवरी में राज्य के सभी 13 जिलों में बस यात्रा निकालने की योजना बनाई है। रघुवीरा रेड्डी ने कहा कि गठबंधन को लेकर किसी भी प्रकार का निर्णय कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी करेंगे, साथ ही उन्होंने दुहराया कि पार्टी चुनावी समर में अकेले दम पर उतरेगी।

तेलंगाना में तेदेपा के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतरने से कॉन्ग्रेस को नुकसान हुआ था। हालिया विधानसभा चुनावों में राज्य में कॉन्ग्रेस की सीटें 21 से घट कर 19 हो गई। तेदेपा को भी अच्छा-ख़ासा नुकसान उठाना पड़ा। उसकी सीटों की संख्या 15 से घट कर सिर्फ़ 2 रह गई। कहा जा रहा है कि तेलंगाना चुनाव परिणाम को ध्यान में रखते हुए कॉन्ग्रेस तेदेपा के साथ गठबंधन करने से बच रही है।

उधर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी इस ओर इशारा किया कि कॉन्ग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन नहीं होगा। अपनी पार्टी के नेताओं को टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सम्बोधित करते हुए तेदेपा अध्यक्ष ने कहा:“राज्यों में गठबंधन संबंधित दलों की इच्छा पर आधारित होगा। हम राष्ट्रीय स्तर पर साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं। हम देश बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, एकजुट भारत के नारों के साथ एक साझा मंच पर साथ आये हैं।”

नायडू ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस का कोई चुनावी गठबंधन नहीं है लेकिन फिर भी कॉन्ग्रेस नेता ममता बनर्जी द्वारा आयोजित रैली में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना 23 विपक्षी दलों का राष्ट्रीय एजेंडा है।

मंगलवार (जनवरी 22, 2019) को चंद्रबाबू नायडू ने राहुल गाँधी से उनके आवास पर मुलाक़ात की थी। कोलकाता में ममता बनर्जी द्वारा आयोजित विपक्ष की महारैली में राहुल गाँधी शामिल नहीं हुए थे। नायडू ने राहुल गाँधी से इस रैली को लेकर चर्चा की थी।

योगी सरकार के पहले 16 महीने: 3,000 एनकाउंटर्स, 78 अपराधी ढेर, 7,043 गिरफ़्तार, 11,981 ने किया आत्मसमर्पण

योगी सरकार के पहले 16 महीनों कार्यकाल में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 3,000 से भी अधिक एनकाउंटर्स में 78 अपराधियों को ढेर किया। योगी आदित्यनाथ ने मार्च 19, 2017 को यूपी की सत्ता संभाली थी। उत्तर प्रदेश के DGP कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि ये डाटा मार्च 2017 से जुलाई 2018 तक के हैं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर योगी सरकार ने अपनी उपलब्धियों की एक लिस्ट जारी की जिसमें मारे गए और गिरफ़्तार किए गए अपराधियों के साथ एनकाउंटर्स की संख्या को भी उपलब्धियों के रूप में पेश किया गया है। राज्य के मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने योगी सरकार के कार्यकाल की अब तक की उपलब्धियों की लिस्ट को सभी जिलों के ज़िलाधिकारियों के पास भेज दिया है।

मुख्य सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और वॉन्टेड अपराधियों की गिरफ़्तारी के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। इस पत्र में बताया गया है कि जुलाई 2018 तक हुई 3,208 मुठभेड़ों में 69 अपराधियों को मार गिराया गया; 7,043 अपराधियों को गिरफ़्तार किया गया और 838 अपराधी घायल हुए। पत्र में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि 11,981 अपराधियों ने अपनी ज़मानत रद्द करा कर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

इन सब के अलावा स्पेशल टास्क फाॅर्स (STF) ने 9 अन्य अपराधियों को मार गिराया व 139 गिरफ़्तार किए गए। इस डाटा को अच्छी तरह खंगालने पर पता चलता है कि बताई गई अवधि में प्रतिदिन औसतन 6 एनकाउंटर्स हुए और 14 अपराधियों की गिरफ़्तारी हुई। हर महीने औसतन 4 अपराधियों को मार गिराया गया।

अगर योगी सरकार के पहले 9 महीनों (दिसंबर 15, 2017 तक) की बात करें तो इस अवधि में 17 अपराधियों को ढेर किया गया। अर्थात, हर महीने औसतन 1.8 अपराधी मारे गए। हालाँकि अगले 7 महीनों (जनवरी, 2018 से जुलाई, 2018) की बात करें तो यह आँकड़ा काफ़ी तेज़ी से बढ़ा। इस दौरान हर महीने औसतन 8.71 अपराधियों को ढेर किया गया। इन सात महीनों में कुल 61 अपराधी हत हुए।

मुख्य सचिव के पत्र के अनुसार योगी आदित्यनाथ के सत्ता सँभालने के बाद से दिसंबर, 2017 तक यूपी पुलिस ने ‘आत्मरक्षा’ की कार्रवाई में 17 अपराधियों को मार गिराया व 109 अन्य को गिरफ्तार किया।

अपराध नियंत्रण के अलावा योगी सरकार ने अपनी उपलब्धियों की लिस्ट में किसानों के लिए किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया है। कर्ज़माफ़ी से लेकर गन्ना किसानों को भुगतान करने तक का ज़िक्र किया गया है।

बता दें कि पिछले गणतंत्र दिवस (2018) के मौके पर भी सभी जिलों के डीएम को कुछ इसी तरह की रिपोर्ट भेजी गई थी जिसमें योगी सरकार की अब तक की उपलब्धियों का ब्यौरा दिया गया था। उस रिपोर्ट में एन्टी रोमियो स्क्वॉड के कार्यों को हाईलाईट किया गया था।

ज्ञात हो कि योगी कार्यकाल में ताबड़तोड़ एनकाउंटर्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दाख़िल की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इसे एक गंभीर मसला बताते हुए अगली सुनवाई की तारीख़ 12 फरवरी, 2019 तय की है। इस याचिका में यूपी पुलिस द्वारा किए गए एनकाउंटर्स की जाँच CBI से कराने की माँग की गई है।