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‘RR-KKR के पॉइंट्स लेकर निचली टीमों को दे दो’: वेंकटेश प्रसाद ने समझाया क्या है राहुल गाँधी की स्कीम, तो अब RCB पहुँचेगी सीधे फाइनल में?

राहुल गाँधी ने देश में संपत्ति के बँटवारे को लेकर एक खतरनाक बयान दिया था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करारा प्रहार किया। उन्होंने हैदराबाद में कहा था कि उनकी पार्टी सत्ता में आने के बाद वित्तीय एवं संस्थागत सर्वे कराएगी, ताकि पता चले कि देश में अधिक संपत्ति किन लोगों के पास है, साथ ही संपत्ति का पुनः बँटवारा भी सुनिश्चित कराएगी। अब पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने समझाया है कि आखिर क्यों राहुल गाँधी का ये फॉर्मूला गलत है।

वेंकटेश प्रसाद ने IPL का उदाहरण देकर इसे समझाया है। उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र में वादा किया है कि वो संपत्ति के फिर से बँटवारा करेगी और अमीरों से लेकर गरीबों को देगी। वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि गरीबों के उत्थान की ज़रूरत है, लेकिन राहुल गाँधी की सोच निराश करने वाली है। उन्होंने कहा कि ये उसी तरह हुआ, जैसे कोई कहे कि हम ‘राजस्थान रॉयल्स (RR)’ और ‘कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR)’ से 4 पॉइंट्स लेकर तालिका में सबसे नीचे की तीनों टीमों में बाँट दें।

वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि इसके बाद नीचे की तीनों टीमें भी प्लेऑफ में पहुँच जाएगी। बता दें कि प्लेऑफ में IPL की शीर्ष 4 टीमें ही पहुँचती हैं और ये जीत के पॉइंट्स से तय होता है। फ़िलहाल RCB (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर है, जबकि विराट कोहली और ग्लेन मैक्सवेल जैसे दिग्गज खिलाड़ी इस टीम का हिस्सा हैं। राहुल गाँधी का फॉर्मूला लगाया जाए तो प्लेऑफ में विजेता के रन हारने वाले को देकर RCB को भी फाइनल में पहुँचाया जा सकता है।

बता दें कि पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान की याद दिलाई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक़ मुस्लिमों का है। प्रधानमंत्री ने इसे अर्बन नक्सलियों की सोच बताते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस माताओं-बहनों के मंगलसूत्र तक छीन लेगी। राजस्थान के बाँसवाड़ा में पीएम मोदी ने कहा कि संपत्ति इकट्ठी कर के कॉन्ग्रेस घुसपैठियों में बाँट देगी, उन्हें देगी जिनके ज्यादा बच्चे हैं। उन्होंने जनता से पूछा कि क्या किसी को आपकी मेहनत से कमाई संपत्ति ऐंठने का अधिकार है क्या?

‘बच्चे को जन्म देने से बेहतर एबॉर्शन’ : SC ने 14 साल की बच्ची को 30 हफ्ते का गर्भ गिराने की परमिशन, बॉम्बे HC के फैसले को खारिज किया

14 साल की रेप सर्वाइवर को सुप्रीम कोर्ट ने 7 महीने (30 हफ्ते) का गर्भ गिराने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इस मामले पर अपना फैसला दिया। इस दौरान उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को खारिज किया जिसमें गर्भपात कराने पर कोई आदेश देने से मना किया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके बच्ची को एबॉर्शन करा लेने की मंजूरी दी। फैसले में कहा गया कि गर्भपात में देरी बच्चे के लिए कठिनाई से भरा है। उन्होंने कहा कि ये बहुत ही असाधारण स्थिति है जहाँ बच्चों को प्रोटेक्ट करने के लिए ऐसे फैसले लिए जाते हैं।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला देने से पहले 19 अप्रैल 2024 को नाबालिग बच्ची के मेडिकल टेस्ट का आदेश दिया था। कोर्ट ने मुंबई के सायन स्थित लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (LTMGH) से कहा था कि वो इस बात पर रिपोर्ट दें कि अगर पीड़िता मेडिकल प्रोसिजर से एबॉर्शन कराती है या उसे ऐसा न करने की सलाह दी जाती है तो इसका उसकी शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति पर क्या असर पड़ने की संभावना है।

कोर्ट के आदेश के बाद बच्ची का मेडिकल टेस्ट हुआ और अस्पताल की ओर से स्पष्ट राय दी गई कि गर्भावस्था जारी रहने से नाबालिग की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि मेडिकल बोर्ड ने राय दी है कि बच्चे को जन्म देने के मुकाबले गर्भपात करने में जोखिम कम है। इसलिए सायन अस्पताल के डीन से नाबालिग के चिकित्सीय गर्भपात करने का अनुरोध किया जाता है।

गौरतलब है कि एक यौन उत्पीड़न पीड़िता के गर्भपात के लिए सुप्रीम कोर्ट से इसलिए फैसला आया है क्योंकि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी के अनुसार, गर्भावस्था को समाप्त करने की मैक्सीमम लिमिट 24 सप्ताह है। ये सीमा विवाहित महिलाओं के साथ-साथ विशेष श्रेणियों की महिला के लिए तय की गई है। इनमें रेप पीड़िता, कमजोर महिलाएँ और विकलांग महिलाएँ शामिल आती हैं।।

जुमे की नमाज पढ़ने गए थे पाकिस्तानी सांसद, संसद के भीतर से जूते उठा ले गए चोर: स्पीकर करवाएँगे जाँच

पाकिस्तान की खराब आर्थिक हालत की लपटें अब इस्लामाबाद में बैठने वाले सांसदों तक पहुँचने लगी हैं। खराब आर्थिक हालत के कारण देश में चोरी की वारदातें बढ़ रही हैं। समस्या यहाँ तक गहरा गई कि पाकिस्तान की संसद से ही नमाज के दौरान जूते चोरी हो गए।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार (19 अप्रैल, 2024) को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चोरी की यह घटना हुई। इस्लामाबाद स्थित संसद के भीतर बनी मस्जिद में तमाम सांसद जुमे की नमाज अदा करने गए थे। इन सांसदों के साथ कई पत्रकार और संसद के अधिकारी भी नमाज अदा करने गए हुए थे।

जब यह सभी नमाज पढ़ कर वापस आए तो कईयों के जूते नहीं मिले। नमाज के दौरान ही लगभग 20 जोड़ी जूते संसद में बनी मस्जिद के बाहर से गायब हो गए थे। इसके बाद कई सांसद अपने जूते ढूंढते रहे। उन्होंने आसपास ढूँढा भी लेकिन जूते चोरी हो चुकी थे।

इसके बाद कई सांसदों को नंगे पैर ही नमाज पढ़ने के बाद वापस जाना पड़ा। कई पत्रकार भी इस चोरी के बाद नंगे पैर हो गए। संसद के भीतर हुई इस चोरी पर कई सांसद भड़क गए और जाँच की मांग की। मामले में यहाँ तैनात सुरक्षाकर्मी भी उन्हें कोई जवाब नहीं दे सके।

मामला बढ़ता देख संसद के स्पीकर अयाज सादिक को इस मामले में दखल देना पड़ा। उन्होंने इस मामले की सूचना लेते हुए जाँच का आदेश दिया है। उन्होंने इस मामले के बाद संसद की सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया है।

अब संसद के CCTV की जाँच की जा रही है। CCTV के जरिए पता लगाया जा रहा है कि आखिर पाकिस्तान की संसद के भीतर कौन जूते चोरी कर ले गया। यह घटना अब सोशल मीडिया में भी वायरल हो रही है। इसे साझा करके लोग पाकिस्तानी संसद की सुरक्षा व्ववस्था का मजाक भी उड़ा रहे हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत वर्तमान में काफी खराब है। पाकिस्तान ने फिर से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद मांगी है। इस बीच देश के भीतर महंगाई आसमान छू रही है और लोग सामान्य वस्तुओं को भी तरस रहे हैं। पिछले वर्ष पाकिस्तान में आटे को लेकर ऐसी ही वीडियो सामने आई थीं। कहीं लोग आपस में आटे के लिए मारपीट करते दिखे थे तो कहीं पर आटे की लूट हो रही थी।

बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में 23753 टीचरों को अब 12% ब्याज के साथ लौटाना होगा अब तक मिला वेतन: ममता बनर्जी सरकार को हाईकोर्ट का झटका, चलती रहेगी CBI जाँच

पश्चिम बंगाल में हुए SSC भर्ती घोटाले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार को झटका दिया है। स्कूल भर्ती घोटाले पर फैसला सुनाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा कि 2016 के पूरे पैनल को रद्द किया जाए। 9वीं से लेकर 12वीं ग्रुप C एवं D में हुई सभी नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि 23,753 नौकरियों को रद्द किया जाए। इतना ही नहीं, इन सभी को 4 सप्ताह के भीतर पूरा वेतन लौटाना होगा, वो भी 12% ब्याज के साथ।

साथ ही कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि 6 हफ्ते के भीतर इन सभी से पैसे की वसूली की जाए। ‘स्कूल सेवा आयोग’ को निर्देश दिया गया है कि वो इन रिक्तियों को लेकर फिर से नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। हालाँकि, इस दौरान ये स्पष्ट कहा गया कि CBI की इस मामले में चल रही जाँच जारी रहेगी और वो किसी भी आरोपित को ज़रूरत पड़ने पर हिरासत में ले सकती है। साथ ही 23 लाख परीक्षार्थियों की OMR शीट का पुनर्मूल्यांकन भी होगा।

प्रशासन को कहा गया है कि नई नियुक्तियों को लेकर अगले 15 दिनों में कार्यवाही शुरू की जाए। हालाँकि, एक शिक्षक के मामले को अदालत ने अपवाद माना है। कैंसर से पीड़ित सोमा दास की नौकरी बची रहेगी। ये नियुक्तियाँ सरकारी और सरकार द्वारा समर्थित स्कूलों के लिए हुई थीं। जस्टिस दबंग्सु बासक और मोहम्मद शब्बर रशीदी ने CBI से कहा है कि वो 3 महीने में जाँच की प्रगति की रिपोर्ट सबमिट करे। कुछ याचिकाकर्ताओं ने आदेश पर स्टे लगाने की अपील की थी, जिसे नकार दिया गया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिसर के बाहर इंतज़ार कर रहे कई अभ्यर्थी खुश हुए, वहीं कई उदास नज़र आए। एक ने कहा कि हम इस दिन का कई दिनों से इंतज़ार कर रहे थे, अब हमें अंततः न्याय मिल गया है। इस मामले में ED पहले ही ममता बनर्जी के करीबी मंत्री रहे पार्थो चटर्जी को गिरफ्तार कर चुकी है। उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के ठिकाने से 50 करोड़ रुपए कैश भी बरामद हुआ। पार्थो के एक रिश्तेदार प्रसन्ना रॉय को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

‘संसद में मुस्लिम महिलाओं को मिले आरक्षण’: हैदराबाद से AIMIM सांसद ओवैसी ने रखी माँग, पार्लियामेंट में महिला आरक्षण का किया था विरोध

ऑल इंडिया मज्लिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार (21 अप्रैल 2024) को संसद में मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि संसद में अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद कम है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से सांसद बनने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या 20 रही है।

बिहार के मुस्लिम बहुल लोकसभा सीट किशनगंज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “हमारा कहना है कि आजादी के बाद से देश में 17 लोकसभा चुनाव हुए हैं, लेकिन सांसद बनने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या सिर्फ 20 रही है। तो फिर मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण क्यों नहीं दी जाए?”

बिहार AIMIM के प्रमुख और विधायक अख्तरुल इमान इस बार लोकसभा के लिए मैदान हैं। उनके पक्ष में प्रचार करते हुए ओवैसी ने कहा, “भाजपा-आरएसएस ने AIMIM पर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के खिलाफ होने का झूठा इल्जाम लगाया है। साल 2004 की शुरुआत में हमने सिकंदराबाद में एक महिला उम्मीदवार को उतारा था।”

ओवैसी ने कहा, “मेरा तर्क है कि मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग मिलकर कुल आबादी का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा हैं। हम इस विशाल सामाजिक वर्ग की महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते।” उन्होंने दावा किया कि उनकी बातें जब कई ओबीसी संगठनों तक पहुँची तो उनके नेता उन्हें धन्यवाद देने आए।

ओबीसी संगठनों को लेकर उन्होंने कहा, “ओवैसी साहब, केवल आपने और आपकी पार्टी के सांसद इम्तियाज जलील ने पिछड़े वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया है। इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।” वहीं, AIMIM ने बिहार की 40 में से एक दर्जन से अधिक लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

गौरतलब है कि सितंबर 2023 में संसद में बहस के दौरान के ओवैसी महिला आरक्षण के विरोध में खड़े नजर आए थे। उन्होंने सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल को लेकर कहा था कि यह समावेशी नहीं है और कुछ खास लोगों के लिए लाया गया है। उन्होंने ओबीसी और मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की माँग की थी।

‘मुस्लिमों का संसाधनों पर पहला हक’ – जो कॉन्ग्रेस अब झुठला रही मनमोहन सिंह की बात, तब देने वाली थी मुस्लिमों को 15% आरक्षण, धर्मांतरण के बाद भी मिलता रिजर्वेशन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार (21 अप्रैल, 2024) को कॉन्ग्रेस पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने राजस्थान में एक जनसभा में कहा कि कॉन्ग्रेस देश के लोगों की सम्पत्ति छीन कर बाँटना चाहती है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस यह पहले ही स्पष्ट कर चुकी है देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुस्लिमों का है।

पीएम मोदी ने जनसभा में कहा कि कॉन्ग्रेस का 2024 लोकसभा चुनाव के लिए लाया गया मेनिफेस्टो माओवादी सोच वाला है। यह सम्पत्ति के बँटवारे की बात करता है। इससे महिलाओं के सोने तक को सर्वे करके जब्त किया जाएगा और फिर बाँट दिया जाएगा। पीएम ने स्पष्ट किया कि यह सम्पत्ति उन लोगों को बाँटी जाएगी, जिनका कॉन्ग्रेस देश के संसाधनों पर पहला हक़ बताती है। पीएम ने कहा कि लोगों से जब्त करके सम्पत्ति घुसपैठियों और ज्यादा बच्चे वाले लोगों को बाँटी जाएगी।

दरअसल, पीएम मोदी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 के उस बयान का जिक्र कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुस्लिमों का है। मनमोहन सिंह ने यह बात 9 दिसम्बर, 2006 को एक सरकारी कार्यक्रम में कही थी। जब पीएम मोदी ने सम्पत्ति बाँटने के कॉन्ग्रेस के वादे के साथ इसका जिक्र किया तो कॉन्ग्रेस ने इसे झुठलाने की कोशिश की।

कॉन्ग्रेस ने एक वीडियो शेयर करके इसे गलत साबित करना चाहा। हालाँकि, कॉन्ग्रेस इसमें सफल नहीं हो सकी। भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का वह हिस्सा भी साझा किया। इस बयान में मनमोहन सिंह स्पष्ट रूप से यही बात कहते हैं। उनके इस बयान की लिखित प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर भी मौजूद है।

इस प्रति में लिखा हुआ है, “हमें अल्पसंख्यकों और विशेष कर मुस्लिमों, के लिए ऐसी योजनाएँ बनानी होंगी जिससे वह हमारे विकास के लाभ का समान रूप से लाभ ले सकने के लिए सशक्त हों। उनका संसाधनों पर पहला दावा हो।”

मोदी कॉन्ग्रेस सम्पत्ति

ऐसे में स्पष्ट होता है कि पीएम मनमोहन सिंह मुस्लिमों को संसाधनों पर पहला हक़ दिए जाने की बात कर रहे थे। कॉन्ग्रेस का दावा इस हिसाब से फेल हो जाता है। इस बयान में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के अन्य वर्गों के विषय में भी बात की थी।

इस बयान के बाद देश में काफी हल्ला हुआ था। इसको लेकर पीएमओ को 10 दिसम्बर, 2006 को एक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा था। इसमें यह दावा किया गया था कि मनमोहन सिंह मात्र मुस्लिमों ही नहीं बल्कि अन्य वर्गों के सशक्तिकरण की बात कर रहे थे।

मनमोहन सिंह के बयान अलावा और बहुत कुछ कर रही थी कॉन्ग्रेस

देश के संसाधनों पर हक़ वाले बयान को लेकर दोबारा से बहस छिड़ने के बाद कॉन्ग्रेस और घिरती हुई नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि मनमोहन सिंह के बयान के पहले से ही मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का प्रयास कॉन्ग्रेस कर रही थी। यह आरोप पत्रकार दिलीप मंडल ने लगाया है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस सरकार रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट के हवाले से दलितों का हक़ छीन कर मुस्लिमों को देना चाहती थी और धर्मांतरण को भी बढ़ावा देना चाहती थी।

दरअसल, 2007 में पूर्व चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्र की अध्यक्षता में बनाए गए आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की वकालत की थी कि मुस्लिमों और ईसाइयों में भी जाति मौजूद है। आयोग ने यह कहा था कि वर्तमान में भारतीय संविधान के अनुसार, जो भी दलित ईसाइयत या फिर इस्लाम में धर्मान्तरित होते हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। आयोग ने कहा था कि इस संवैधानिक रोक को हटा दिया जाए। ऐसे दलित जो कि इस्लाम या ईसाइयत को मानते हैं, उन्हें भी हिन्दू या सिख दलितों जैसा ही आरक्षण दिया जाए।

आयोग ने स्पष्ट रूप से यह भी कहा था कि एक बार यदि किसी व्यक्ति को दलित मान लिया गया है तो फिर चाहे वह किसी भी मजहब को माने, उसका दलित के तौर पर आरक्षण ना लिया जाए। आयोग ने धर्मान्तरित लोगों को आरक्षण का लाभ ना देने को संविधान विरुद्ध बताया था।

गौरतलब है कि यह बहस लम्बे समय से चलती आई है कि जाति व्यवस्था मात्र हिन्दुओं में ही है और ऐसे आरक्षण का लाभ भी हिन्दू दलितों को ही दिया जाए। इस्लाम या ईसाइयत में जाति व्यवस्था नहीं है इसलिए जब कोई व्यक्ति इन धर्म में जाता है तो वह जाति के बंधन से बाहर है।

इसके अलावा आयोग ने मुस्लिमों को अलग से आरक्षण देने की वकालत भी की थी। रंगनाथ मिश्रा आयोग ने कहा था कि सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व काफी कम या नगण्य है, ऐसे में उन्हें विशेष आरक्षण दिया जाए।

आयोग ने कहा था कि अप्संख्य्कों को पिछड़ा मानते हुए 15% का आरक्षण सरकारी नौकरियों में दिया जाए। इस 15% में से 10% केवल मुस्लिमों के लिए हो क्योंकि वो कुल अल्पसंख्यकों का 73% हैं। रंगनाथ मिश्रा के आयोग ने कहा था कि यदि ऐसा ना हो तो OBC आरक्षण में ही 8.2% हिस्सा अल्पसंख्यकों को दे दिया जाए, इसमें 6% सिर्फ मुस्लिमों के लिए हो।

रंगनाथ मिश्रा आयोग द्वारा की गई इन सिफारिशों को आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। रिपोर्ट में यह हिस्सा पृष्ठ संख्या 145-160 के बीच पढ़ सकते हैं। हालाँकि, रंगनाथ मिश्रा की सिफारिशों पर कॉन्ग्रेस सरकार अमल नहीं कर पाई।

सारे मुस्लिमों को PM मोदी ने ‘घुसपैठिए’ कहा? … जानें एक क्लिप पर कैसे कॉन्ग्रेसी, कट्टर इस्लामी और पाकिस्तानी फैला रहे फर्जीवाड़ा, हकीकत क्या है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया स्पीच से राहुल गाँधी द्वारा किए गए ‘संपत्ति के बँटवारे’ के वादे की हकीकत जनता के आगे खुलने से अब कॉन्ग्रेसी बिलबिलाए हुए हैं। पीएम मोदी की स्पीच का हिस्सा काटकर उन्हें इस्लामोफोबिक, मुस्लिमों से घृणा करने वाला साबित करने की कोशिश हो रही है। भारत के लिबरलों से लेकर पाकिस्तान के बुद्धिजीवी तक इस प्रोपगेंडा को फैलाने में मदद कर रहे हैं… लेकिन हकीकत क्या है? क्या पीएम ने सच में ऐसा कुछ विवादित कह दिया है या फिर पीएम मोदी की बातों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।

दरअसल, राजस्थान के बांसवाड़ा में पीएम मोदी ने जनता को संबोधित करते हुए समझाया कि एक ओर राहुल गाँधी संपत्ति के सर्वेक्षण और आबादी के आधार पर संपत्ति के बँटवारे के वादे अपने घोषणा पत्र में कर रहे हैं और दूसरी ओर प्रधानमंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक मुसलमानों का है। पीएम मोदी ने बस इस बात पर गौर करवाया है कि अगर संपत्ति का बँटवारा किया जाता है तो इसका अधिकांश हिस्सा किसपर जाएगा।

अब उनकी इसी स्पीच पर कॉन्ग्रेसी, इस्लामी, और वामपंथी सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं। कहा जा रहा है पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में मुसलमानों को घुसपैठिया कहा है। उन्हें इस्लामोफोबिक कहकर न केवल कॉन्ग्रेसी, बल्कि ऑल्ट न्यूज वाला जुबैर और पाकिस्तान का हामिद मीर तक पीएम मोदी पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। उन्हें अल्पसंख्यकों के प्रति असंवेदनशीलता दिखाने वाला पीएम बताया जा रहा है।

इस पूरे विवाद में हकीकत जबकि ये है कि पीएम मोदी ने मुस्लिमों को घुसपैठिया नहीं कहा है। पूरी वीडियो देखने पर पता चलता है कि मुस्लिमों और घुसपैठियों की बात अलग-अलग की गई है। इसके अलावा पीएम ने जो भी बोला है वो कॉन्ग्रेस नेताओं के बयान पर निशाना साधते हुए ही कहा है।

पहले जानते हैं पीएम मोदी ने कहा क्या

पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में कहा, “कॉन्ग्रेस ने जो अपने घोषणा पत्र में कहा है वो चिंताजनक है। माओवाद की सोच को धरती पर उतारने की कोशिश है। उन्होंने कहा है कि अगर कॉन्ग्रेस की सरकार बनेगी तो हर एक की प्रॉपर्टी का सर्वे किया जाएगा। हमारी बहनों के पास सोना कितना है उसकी जाँच की जाएगी। हमारे आदिवासी परिवारों में चाँदी होती है, उसका हिसाब लगाया जाएगा। सरकार मुलाजिमों के पास कितना पैसा है, कितनी जगह है सबकी जाँच होगी। इतना ही नहीं ये भी कहा है कि बहनों के पास जो सोना है या अन्य संपत्ति है उसे सबको समान रूप से बाँटा जाएगा।”

पीएम मोदी ने जनता से पूछा, “क्या आपको ये मंजूर है? क्या आपकी संपत्ति सरकार को ऐंठने का अधिकार है क्या? माताओं-बहनों के जीवन में सोना सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होता है, ये उसके स्वाभिमान से जुड़ा होता है। उसका मंगलसूत्र कोई सोने का मु्द्दा नहीं है… तुम उसे छीनने की बात कर रहे हो अपने मेनिफेस्टो में।“

इसके बाद पीएम मोदी यहाँ पर बताते हैं कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इसका मतलब ये (कॉन्ग्रेस) संपत्ति इकट्ठा करके किसको बाँटेंगे जिनके ज्यादा बच्चे हैं उनको बाँटेंगे… घुसपैठियों को बाँटेंगे… क्या आपको मंजूर है कि आपकी मेहनत की कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा?

अब जानिए कैसे पीएम की कही एक एक बात कॉन्ग्रेसियों के बयान से निकली है…

पीएम मोदी ने अपने भाषण में जहाँ पर कहा है कि जिनके ज्यादा बच्चे होंगे उन्हें संपत्ति दी जाएगी… तो ये बात पीएम मोदी ने हवा में नहीं कही। राहुल गाँधी ने ही ये कहा था कि संपत्ति का बँटवारा आबादी देख होगा। उन्होंने ही ‘जितनी आबादी उतना हक’ वाली बात कही है। अब इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिमों के हिंदुओं के मुकाबले ज्यादा बच्चे होते हैं।

इसी प्रकार से जहाँ उन्होंने कहा है कि संपत्ति मुस्लिमों को दी जाएगी… वो भी उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता मनमोहन सिंह के बयान को आधार बनाकर कहा है क्योंकि प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने ही कहा था कि संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमामों का है… जिस पार्टी के नेता ऐसी बात कहते हैं और फिर सर्वेक्षण कराकर उनकी पार्टी संपत्ति के बँटवारे को कहती है, तो ये समझना मुश्किल नहीं है कि संपत्ति किसे दिए जाने का विचार है।

वीडियो अगर आगे देखें तो पता चलेगा कि पीएम मोदी रुककर घुसपैठियों पर बयान देते हैं, वो देश के मुस्लिमों को घुसपैठिया नहीं कहते, उनका सीधा निशाना अवैध रूप से देश में घुसे रोहिंग्याओं को बांग्लादेशियों पर हैं, जो भारत में घुस तो आए हैं और कॉन्ग्रेस लगातार अपने तुष्टिकरण की राजनीति में उन्हें खुश करने में लगी रहती है।

अब ऐसे में जहाँ पीएम मोदी द्वारा कहे तीनों शब्दों का अर्थ और संदर्भ अलग है और सबका कनेक्शन कॉन्ग्रेस नेता, उनके बयानों और उनकी राजनीति से ही है इसलिए कॉन्ग्रेसी बिलबिलाए हुए हैं कि घोषणा पत्र में किए गए वादे की मंशा की पोल खोल दी गई। यही वजह है कि उनका प्रचार तंत्र पीएम मोदी की क्लिप बिना संदर्भ के शेयर करके उन्हें इस्लामोफोबिक साबित कर रहे हैं।

मुस्लिमों ने किया कॉन्ग्रेस का बायकॉट, देंगे भाजपा को वोट, चतरा में कहा – ‘जनजातीय समाज के बाद हमारी सबसे अधिक जनसंख्या, हमारे समुदाय से प्रत्याशी दो’

लोकसभा चुनाव 2024 कॉन्ग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई साबित हो रही है। कई जगहों पर बार-बार कैंडिडेट बदलने के बावजूद उसकी मुश्किलें कम नही हो रही हैं। झारखंड के चतरा में अब मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। INDI गठबंधन में यहाँ से कॉन्ग्रेस के केएन त्रिपाठी भाग्य आजमा रहे हैं। उन्होंने भाजपा के स्थानीय प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की घोषणा की।

दरअसल, चतरा लोकसभा सीट पर मुस्लिमों की आबादी लगभग 20 प्रतिशत है। मुस्लिमों का कहना है कि इतनी आबादी होने के बावजूद यहाँ से मुस्लिम प्रत्याशी नहीं दिया गया। इससे नाराज चतरा के अंतर्गत आने वाले चतरा, सिमरिया, लातेहार, मनिका व पांकी विधानसभा के मुस्लिमों ने बैठक की और त्रिपाठी के बहिष्कार की घोषणा की।

उन्होंने INDI गठबंधन से राज्य की कम-से-कम चार सीटों – चतरा, गोड्डा, कोडरमा और गिरिडीह – पर मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवारों की माँग की। ऐसा नहीं करने पर वे करॉन्ग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं करने की चेतावनी दी है। इतना ही नहीं, त्रिपाठी को INDI अलायंस के घटक राजद के कार्यकर्ताओं की ओर से भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

मुस्लिमों ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी चतरा के मुसलमान को अपना जागीर समझने की भूल करना छोड़ दे। अब मुसलमान पूरी तरह से जाग चुके हैं। अब किसी भी परिस्थिति में भाजपा का भय दिखाकर कॉन्ग्रेस पार्टी और महागठबंधन के प्रत्याशी मुसलमानों का वोट नहीं ले पाएँगे। हम अब सिर्फ दरी बिछाने वाले मुसलमान नहीं है।”

चतरा के मुस्लिमों का कहना है कि झारखंड में जनजातीय समुदाय के बाद मुस्लिमों की आबादी दूसरे नंबर पर है। उनका कहना है, “हम 20 प्रतिशत आबादी के साथ कई बार गोड्डा और धनबाद समेत अन्य लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके बावजूद महागठबंधन ने 14 में से एक भी सीट पर मुस्लिमों को प्रत्याशी नहीं बनाया।”

मुस्लिमों ने बैठक ने कहा, “झारखंड के मुसलमान अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस दौरान थर्ड फ्रंट बनाकर हम अपना प्रत्याशी उतारेंगे या भाजपा के स्थानीय प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे।” उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक स्थानीय व्यक्ति को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसलिए वे भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे।

मुस्लिमों का कहना है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में स्थानीय प्रत्याशी की माँग की गई थी। इस संबंध में कई मुस्लिम प्रत्याशियों ने भी आबादी के आधार पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की थी, लेकिन कॉन्ग्रेस और उसके घटक दल राजद ने उनकी माँगों पर विचार नहीं किया।

बताते चलें कि भाजपा ने भूमिहार समाज से आने वाले काली चरण सिंह को चतरा से अपना उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले सुनील सिंह यहाँ से लगातार दो बार सांसद रह चुके हैं। हालाँकि, तीसरी बार भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। वहीं, काली चरण सिंह ने इस चुनाव में धुंआधार प्रचार करके कॉन्ग्रेस प्रत्याशी केएन त्रिपाठी पर बढ़त बनाए हुए हैं।

कुमकुम नहीं लगाना, बुर्का पहनो… पति को तलाक देकर इस्लाम कबूलो: कर्नाटक में रफीक ने बीवी के सामने किया दलित महिला का रेप, 7 पर केस दर्ज

कर्नाटक में 28 साल की शादीशुदा दलित महिला को ब्लैकमेल करके उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। आरोपित, पीड़ित महिला को उसकी अश्लील वीडियोज दिखाते हुए ब्लैकमेल कर रहे थे। पुलिस ने बताया है कि उन्हें मिली शिकायत में महिला ने कहा है कि रफीक नाम के आरोपित ने अपनी बीवी के सामने उसका रेप किया था। इसके बाद उसे कुमकुम लगाने की बजाय बुर्का पहनने को कहा गया।

शिकायत के मुताबिक रफीक और उसकी बीवी ने महिला को पहले बेलगावी स्थित अपने घर रहने को मजबूर किया। उसके बाद उससे वैसा करने को कहा जैसा वो चाहते थे। महिला के अनुसार, पिछले साल जब वो रफीक और उसकी बीवी के साथ रहती थी, तभी रफीक ने अपनी बीवी के सामने उसका रेप किया था और इस साल अप्रैल में दोनों मियाँ-बीवी दलित महिला से कहे लगे कि उसे कुमकुम नहीं लगाना बुर्का पहनना है और पाँच समय नमाज भी पढ़नी है।

महिला ने शिकायत में कहा है कि उसे जातिगत गालियाँ दी जाती थीं क्योंकि वो पिछड़ी जाति से आती है। उसे कहा गया था कि उसे अपने पति को तलाक देकर इस्लाम कबूलना ही होगा। अगर वो ऐसा नहीं करती तो उसे मार दिया जाएगा और उसकी अश्लील तस्वीरें भी वायरल कर दी जाएँगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में सौनदत्ती में महिला ने 7 लोगों के खिलाफ शिकायत दी है। केस को कर्नाटक धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार संरक्षण अधिनियम, आईटी कानून की प्रासंगिक धाराओं, एससी/एसटी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की बलात्कार, अपहरण, आपराधिक धमकी की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कर्नाटक में एक कॉन्ग्रेस नेता की बेटी की सरेआम हत्या का मामला सामने आया था। घटना का आरोपित नेहा के साथ पढ़ने वाला फयाज था। रिपोर्टों से पता चला था कि फयाज उसके साथ रिलेशनशिप में आना चाहता था, लेकिन नेहा के मना करने के बाद उसने उसे मारने का फैसला किया और कॉलेज कैंपस के बाहर आकर उसे चाकू घोंप- घोंपकर मार डाला।

बेटी नेहा की हत्या पर कॉन्ग्रेस नेता को अपनी ही कॉन्ग्रेसी सरकार पर भरोसा नहीं: CBI जाँच की माँग, कर्नाटक पुलिस पर दबाव में काम करने का आरोप

फयाज के हाथों मारी गई नेहा के पिता और कॉन्ग्रेस पार्षद निरंजन हिरेमठ ने इस मामले अब सीबीआई जाँच की माँग की है। उन्होंने इस मामले में कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हुबली कमिश्नर इस मामले में राज्य सरकार को गलत रिपोर्ट दे रही हैं।

नेहा के पिता निरंजन हिरेमठ ने कहा, ”नेहा की हत्या के मामले में मैंने 8 लोगों के नाम स्पष्ट रूप से दिए हैं। उन्होंने एक भी व्यक्ति को नहीं गिरफ्तार किया है। इसलिए मेरा भरोसा अब जाँच से उठता जा रहा है। मामले को भटकाने की कोशिश हो रही है। अगर उनसे यह जाँच नहीं हो रही तो जाँच को सीबीआई को सौंप दिया जाना चाहिए। कमिश्नर खुद एक महिला हैं तब भी वह एक युवती को हत्या को गंभीरता से नहीं ले रहीं। वह किसी दबाव में काम कर रही हैं। कमिश्नर का ट्रांसफर करके जाँच सीबीआई को दी जानी चाहिए।”

निरंजन हिरेमठ ने नेहा की हत्या के मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और गृह मंत्री जी परमेश्वरा पर भी गलत बयान देने के आरोप लगाए। उनके अनुसार, हुबली की कमिश्नर जाँच की गलत रिपोर्ट दे रही हैं, जिस कारण कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता गलत बयानी कर रहे हैं। उन्होंने माँग की कि हुबली की कमिश्नर को हटाया। उन्होंने कहा कि उनका विश्वास टूट गया है, वह अपनी ही पार्टियों के नेताओं से इस मामले में तेज जाँच और कार्रवाई की माँग करते हैं।

इससे पहले रविवार (21 अप्रैल, 2024) शाम को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केन्द्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी भी निरंजन से मिलने पहुँचे। उन्होंने भी फयाज के हाथों नेहा की हत्या में सीबीआई जाँच की माँग की और कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री जाँच को डिरेल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण के चलते ऐसा हो रहा है। नड्डा ने कहा कि अगर राज्य की पुलिस से जाँच नहीं हो पा रही तो मामला सीबीआई को सौंप दिया जाए।

गौरतलब है कि कर्नाटक के हुबली में गुरुवार (18 अप्रैल, 2024) को फयाज नाम के एक युवक ने नेहा नाम की हिन्दू युवती की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी। वह नेहा का पहले इन्तजार कर रहा था और जब वह कॉलेज से बाहर आई तो उसने चाकुओं से हमला कर दिया। नेहा की इस हमले में मौत हो गई। फयाज को इस हमले के बाद पकड़ लिया गया था।

बताया जा रहा है कि फयाज युवती पर उसके साथ रिलेशनशिप में आने का दबाव बना रहा था और लड़की ने इससे इनकार कर दिया। ऐसे में फयाज उसका महीनों पीछा करता था। घटना वाले दिन जब नेहा उसके सामने आई तो उसने उसके गले पर वार किए, जो बताते हैं कि उसकी मंशा नेहा को जान से ही मारने की थी।

पुलिस की जाँच में भी सामने आया है कि फयाज अपने दोस्तों से बोलते हुए फिरता था कि जिस लड़की ने उसका ऑफर ठुकराया है वो उसे खत्म कर देगा। मामले के बारे में बताते हैं सिटी पुलिस कमिशनर रेणुका एस सुकुमार ने कहा वे दोनों (पिछले साल तक) बीसीए साथ में पढ़ रहे थे। लेकिन, बीसीए के बाद नेहा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और फयाज ने छोड़ दी।