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रावण का वीडियो देखा, अब पढ़िए चैट्स (वायरल और डिलीटेड): वाल्मीकि समाज की जिस बेटी ने UN में रखा भारत का पक्ष, कैसे दिया उसे धोखा

‘भीम आर्मी’ के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के साथ अपने पुराने रिश्ते को लेकर स्विट्जरलैंड में Ph.D कर रहीं वाल्मीकि समाज की रोहिणी घावरी चर्चा में हैं। अब उन्होंने उत्तर प्रदेश के नगीना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ का एक वीडियो शेयर किया है, जो इन दोनों के वीडियो कॉल के दौरान का है। इसमें वो रोता हुआ दिख रहा है। मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली रोहिणी का कहना है कि झूठे आँसू दिखा कर और अपनी शादी छिपा कर ‘रावण’ कई मासूम लड़कियों का जीवन बर्बाद कर चुका है।

रोहिणी घावरी और चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के चैट्स हुए थे वायरल

चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के कैरेक्टर को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। रोहिणी घावरी के साथ उसकी तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिनमें दोनों मास्क लगाए दिख रहे हैं और एक-दूसरे के काफी करीब नजर आ रहे हैं। एक चैट स्क्रीनशॉट में चंद्रशेखर ने अपनी उदास तस्वीर भेजते हुए रोहिणी को लिखा था, “मुझे गर्व है आप पर। आप सम्मान की हकदार हो। आप इनका अधूरा सपना ज़रूर पूरा करोगे। मैं लगभग हार मान चुका हूँ।” एक अन्य स्क्रीनशॉट भी चैट का वायरल हुआ था।

इसमें चंद्रशेखर ने लिखा है, “सच कहा आपने, इसीलिए मुझे छोड़ देना चाहिए आपको। ये ही तो कह रही हो आप। समाज भी मेरा साथ नहीं दे रहा, मुझे भी समाज को छोड़ देना चाहिए।” घावरी ने इस पर जवाब दिया था, “मैं बिना कमिटमेंट के नहीं रह सकती। मेरी भी सेल्फ-रेस्पेक्ट है। ख्याल रखना अपना, हेल्थ चेकअप कराते रहना। बाय।” इस पर ‘रावण’ ने लिखा था, “अब जो भी होगा उसके लिए आप भी जिम्मेदार होंगी – हार या जीत ज़िंदगी में।”

तब रोहिणी ने ये भी बताया था कि उनकी हँसती-खेलती ज़िंदगी में आकर एक व्यक्ति ने रात-रात भर अपने तकलीफ-संघर्ष की कहानियाँ सुनाई और ये एहसास कराया कि उसे कभी प्यार नहीं मिला, आंदोलन को सफल बनाने के लिए उसे रोहिणी जैसी बुद्धिजीवी महिला की आवश्यकता है। घावरी ने बताया था कि उसने हमेशा साथ रहने का वादा किया था, लोगों के मना करने के बावजूद उन्होंने सब दाँव पर लगा कर चंद्रशेखर का साथ दिया। हालाँकि, रोहिणी कहती हैं कि उन्हें धोखा मिला, बीच रास्ते में उन्हें छोड़ कर वो चला गया और विदेश में इस हादसे ने उन्हें तोड़ दिया।

रोहिणी घावरी इसे अपने जीवन का सबसे दर्दनाक हादसा बताते हुए कहती हैं कि इसने उन्हें बुरी तरह तोड़ कर रख दिया। उलटे लोग उन्हें भी गंदा बोलते रहे, और वो समाज का नेता बना रहा। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं रोहिणी घावरी और चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ पहले एक-दूसरे के ट्वीट्स को रीट्वीट भी करते थे, लेकिन 5 नवंबर, 2023 में अंतिम बार ऐसा हुआ था। उलटे रोहिणी घावरी को ही सोशल मीडिया पर ‘भीम आर्मी’ समर्थकों ने खरी-खोटी सुनाई थी।

अब रोहिणी घावरी ने जारी किया चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ का वीडियो

इस वीडियो को जारी करते हुए रोहिणी घावरी ने कहा कि उन्होंने झूठे आँसू दिखा-दिखा कर उन्हें उन पर विश्वास करने के लिए मजबूर कर दिया। बकौल रोहिणी, ये उनकी गलती है कि ‘रावण’ को उन्होंने सच्चा आंदोलनकारी इंसान मान कर उनके साथ खड़ी हो गईं। रोहिणी का आरोप है कि चंद्रशेखर ने उस समाज के सामने उन्हें झूठा साबित कर दिया, जिसके लिए वो विदेश में रह कर भी सोचती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सच्ची लड़की होने की सज़ा भुगती, अकेले रह कर जिस मानसिक पीड़ा से उन्होंने खुद को सँभाला उसके बारे में वो ही समझती हैं।

उन्होंने इस वीडियो के साथ लिखा, “अब कभी जीवन में किसी मर्द पर भरोसा नहीं कर पाऊँगी इसलिए शादी रिश्ते जैसी चीज़ो से बहुत दूर हो चुकी हूँ। अब मेरा बचा हुआ जीवन देश और समाज को समर्पित। मैं झूठे आरोप झेल झेल के थक गई हूँ अब जब भी कुछ अच्छा करती हूँ लोग मेरा चीरहरण करना शुरू कर देते है। एक लड़की होने की खूब सज़ा मिल रही है मुझे। जैसे पूरा समाज बेवक़ूफ़ बन रहा है में भी बन गई। मैंने तो पूरी ईमानदारी से दूसरे देश में रहकर भी साथ निभाया था यही सोच के त्याग था की समाज के लिए दोनों मिलकर कुछ अच्छा करेंगे।”

कौन हैं स्विट्जरलैंड में Ph.D कर रही दलित रोहिणी घावरी

रोहिणी घावरी वाल्मीकि समाज से आती हैं और खुद को दलितों का ठेकेदार बताने वाले कुछ नेताओं द्वारा ब्राह्मणों के प्रति घृणा फैलाए जाने से ताल्लुक नहीं रखती। उलटा उन्होंने बताया है कि वो वाल्मीकि समाज से आती हैं और ब्राह्मणों का उनके जीवन में बहुत योगदान है। उन्होंने बताया कि उनके शिक्षक शर्मा सर ने उन्हें 1 करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप की जानकारी दी। स्विट्जरलैंड में जिस आभा ने उनका साथ दिया, वहाँ रहना सिखाया वो भी ब्राह्मण हैं।

रोहिणी घावरी संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी संबोधन दे चुकी हैं। उन्होंने बताया था कि वहाँ भी जाने के लिए उनके एक पंडित अंकल ने उनका मार्गदर्शन किया। इसीलिए, वो कहती हैं कि वो ब्राह्मणों को गाली देकर एहसानफरामोशी नहीं कर सकतीं। बता दें कि वो UN में राम मंदिर को लेकर पाकिस्तान को खरी-खरी सुना चुकी हैं। उन्होंने ‘जय श्री राम’ का उद्घोष करते हुए कहा था कि दुनिया के हर हिन्दू के लिए राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा वाला दिन ऐतिहासिक है।

जेनेवा में रह रही रोहिणी घावरी शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ दलित समाज के लिए भी आवाज़ उठाती रहती हैं। वो बाबासाहब भीमराव आंबेडकर में श्रद्धा रखती हैं। भारत सरकार से उन्हें 1 करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप प्राप्त हुई। रोहिणी घावरी ने भारत के ठेकेदारों की पोल खोलते हुए UN में बताया था कि भारत के प्रधानमंत्री OBC समाज से आते हैं, वहाँ के दलित ऑक्सफ़ोर्ड-हार्वर्ड में सरकारी सहायता से पढ़ते हैं, इसके बावजूद विदेशी संस्थाएँ भारत को गलत रूप में पेश करती हैं।

भक्तों को मंदिर में जाने से रोका, केरल पुलिस जूते पहन कर अंदर घुसी: ‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव पर वामपंथी सरकार ने लगाए थे कई तरह के प्रतिबंध, अब दबाव में CM ने कही जाँच की बात

केरल के त्रिशूर शहर में प्रसिद्ध वडक्कुनाथन (शिव) मंदिर में आयोजित होने वाले ‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव में शुक्रवार-शनिवार (19-20 अप्रैल 2024) की रात हजारों लोग शामिल हुए, लेकिन केरल की वामपंथी सरकार अपनी हरकतों से बाज नहीं आई और उसने मंदिर परिसर में पुलिस भेज दिया। इस मंदिर में पुलिस को भी जूता पहनने की अनुमति नहीं है, इसके बावजूद पुलिस ने बैरिकेटिंग कर न सिर्फ आम भक्तों को मंदिर में जाने से रोका, बल्कि जूता पहने पुलिस भी मंदिर परिसर में मौजूद रही, जिसकी वजह से मंदिर प्रशासन और आम लोगों ने जमकर हंगामा किया। इस मामले में वामपंथी मुख्यमंत्री पी विजयन ने जाँच की बात कही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह से केरल की वामपंथी सरकार ने मंदिर के अंदर पुलिस को भेजा और आम श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ करने से रोका।

रमित नाम के एक्स यूजर ने केरल पुलिस की बदतमीजी वाला वीडियो पोस्ट किया और लिखा, “त्रिसूर पूरम त्योहार महाने से पिनराई विजयन की पुलिस रोक रही है। ये वो वजह है, जिसे हिंदुओं को शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को वोटिंग के दौरान याद रखने की जरूरत है।”

इस मामले में लोगों के बढ़ते दबाव के बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का बयान सामने आया है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वो इस मामले की उच्चस्तरीय जाँच का आदेश दे रहे हैं। सीएम पी विजयन ने कहा, “इसकी गंभीरता से जाँच होनी चाहिए कि पूरम वाले दिन क्या हुआ था। देवास्वोम अधिकारियों द्वारा भेजी गई एक शिकायत मौजूद है…पुलिस महानिदेशक को घटनाओं की जाँच करने और एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।”

पुलिस और सरकार भिड़ी

इस मामले में चुनाव के दौरान सरकार की छवि खराब करने वाली पुलिसिया कार्रवाई से मंत्री के राजन समेत वामपंथी नेता नाराज हैं। इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान मंत्री के. राजन ने गहरी नाराजगी जताई, जिसके जवाब में कलेक्टर ने भी सख्त भाषा का इस्तेमाल किया। चूँकि इस दौरान मीडिया कर्मियों से भी बदतमीजी की घटनाएँ हुए थी, ऐसे में सरकार को डर है कि कहीं ये मामला उस पर भारी न पड़ जाए।

बता दें कि वडक्कुनाथन (शिव) मंदिर में आयोजित होने वाले ‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव के दौरान आतिशबाजी पर रोक और पुलिस के मंदिर परिसर में घुसने से लोग नाराज हो गए। यही नहीं, तिरुवंबडी देवास्वोम के सदस्यों की पुलिस के साथ बहस हो गई। इसके बाद देवास्वोम अधिकारी ने पूरम कार्यवाही बंद कर दी। तिरुवंबडी मंदिर में केवल एक हाथी की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाज सादे तरीके से आयोजित की गई। जो आतिशबाजी सुबह 3 बजे निर्धारित थी, वह सुबह 7 बजे हुई। यही नहीं, पुलिस पर हिंदुओं के साथ अभद्रता करने का आरोप भी लगा है।

दरअसल, मंदिर प्रशासन एवं आयोजन समिति के साथ पुलिस का किसी तरह का कोई समन्वय नहीं था। जारी किए गए पासों के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी। उत्सव के दौरान पुलिस के भारी हस्तक्षेप के कारण थिरिवाम्बडी मंदिर में सुबह की पूजा के दौरान हंगामा मच गया। हाथी जुलूस के दौरान भी तनाव बढ़ गया। परमेक्कावु मंदिर में भी इसी तरह की घटनाएँ सामने आईं। पुलिस ने पूरम परिसर में अचानक रस्सी के बैरिकेड लगा दिए, जिससे पूरम आयोजक नाराज हो गए।

बता दें कि त्रिशूर पूरम उत्सव का सबसे रंगीन कार्यक्रम कुदामट्टम है। यह अनुष्ठान में 15 हाथियों की दो पंक्तियाँ आमने-सामने खड़ी रहती हैं। इस दौरान एक के बाद एक नवीन रूप से डिजाइन किए गए छतरियों को प्रदर्शित किया जाता है। यह त्योहार तिरुवंबडी और परमेक्कावु मंदिरों के बीच मैत्रीपूर्ण प्रतिद्वंद्विता और सौहार्द्र का प्रतीक है।

इस सालाना उत्सव को आमतौर पर राज्य के सभी मंदिर त्योहारों की जननी के रूप में जाना जाता है। इसमें 30 सजे-धजे हाथियों को परामेक्कावु और तिरुवम्बडी मंदिर में सदियों पुराने रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार परेड के लिए एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े किया जाता है। परेड करने वाले हाथियों को अधिकारियों की ओर से फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। 

दलित बच्ची को बेचने ले जा रहा था नेपाल, पुलिस ने दबोचा तो बोला समीर आलम – बेल पर बाहर आ जाऊँगा: मुस्लिम सहेली के घर जाती थी पीड़िता, जबरन निकाह कर कैद किया

बिहार के पूर्वी चंपारण से ‘लव जिहाद’ का एक मामला सामने आया है। यहाँ ‘द केरला स्टोरी’ जैसे एक मामले में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों ने शनिवार (20 अप्रैल, 2024) को एक समीर आलम नाम के शादीशुदा युवक को दलित समुदाय की नाबालिग हिन्दू लड़की के साथ पकड़ा है। 26 साल के समीर आलम पर आरोप है कि उसने नाबालिग लड़की को धोखे में रख कर पहले निकाह किया और उसे बहला-फुसला कर नेपाल ले जा रहा था। समीर पर इस से पहले भी गैर मुस्लिम लड़कियों को इस्लाम कबूल करवा कर बेचने के आरोप लग चुके हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार के नरकटियागंज की रहने वाली एक 17 वर्षीया हिन्दू लड़की अक्सर अपनी सहेली सलमा खातून के घर जाया करती थी। एक दिन वह सलमा के साथ एक शादी समारोह में गई हुई थी। यहाँ लड़की को समीर आलम मिला। समीर ने लड़की से बात करने की काफी कोशिश की लेकिन पीड़िता ने मना कर दिया। लड़की के इंकार के बावजूद समीर उसके पीछे पड़ा रहा। जब पीड़िता स्कूल जाती थी तो वो रास्ते में बात करने की कोशिश करता था।

थोड़े दिनों के बाद पीड़िता और समीर की बातचीत शुरू हो गई। समीर ने यह नहीं बताया कि वो मुस्लिम है। महज 2 माह पहले शुरू हुई बातचीत में समीर आलम पीड़िता को अपने घर ले जाने की जिद करने लगा। पहले तो लड़की ने मना किया पर बाद में वो जल्दी लौट आने की शर्त पर मान गई। स्कूल के लिए निकली पीड़िता सीधे समीर के घर पहुँच गई। आरोप है कि यहाँ पहले से तैयार कई ख़ातूनें (महिलाएँ) मौजूद थीं। इन सभी के बीच में समीर ने पीड़िता की माँग भरने की कोशिश की।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि इतनी देर में वो समझ चुकी थी कि उसे फँसाया जा चुका है। लड़की चुपचाप जो कहा गया वो करती रही। शादी करने के बाद समीर लड़की को अपने साथ ले कर रहने लगा। लड़की को कहीं भी बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी। 2 बार जब पीड़िता ने भगाने की कोशिश की तो उसे पकड़ लिया गया। पीड़िता का फोन भी छीन लिया गया था। एक दिन वह चुपके से समीर के फोन से अपने घर कॉल करना चाही तो उसे बहुत डाँट पड़ी थी।

इस बीच समीर लड़की को नेपाल में बेचने की साजिश रचने लगा था। इसी साजिश को अंजाम देने के लिए एक दिन उसने पीड़िता को रक्सौल बाजार घुमाने का ऑफर दिया। समीर आलम लड़की को साथ ले कर नेपाल की सीमा की तरफ बढ़ रहा था। इस बीच सीमा पर तैनात SSB की 47वीं बटालियन के इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा की नजर लड़की और समीर पर पड़ी। उन्हें शक हुआ तो समीर से पूछताछ की। समीर के बातचीत के ढंग से उनका शक और पुख्ता हो गया। जब उन्होंने लड़की से बात की तो वो भी खुल कर कुछ बोल नहीं रही थी।

इंस्पेक्टर मनोज शर्मा समीर और पीड़िता को थाने ले आए। यहाँ समीर के मोबाइल में कई आपत्तिजनक वीडियो और फोटो बरामद हुईं। जाँच में यह भी सामने आया कि बेतिया के मूल निवासी और मोहम्मद गुड्डू मियाँ की औलाद समीर आलम पर 11 मई 2022 को दलित समुदाय की ही एक नाबालिग लड़की की तस्करी का आरोप लग चुका है। तब उस पर प्रतापगढ़ में धारा 363, 366, 376, 370 और पॉक्सो एक्ट 03 (2) एसटी, एससी एक्ट में केस भी दर्ज हुआ था। आरोपित समीर पहले से शादीशुदा और 1 बच्चे का अब्बा भी बताया जा रहा है।

समीर आलम से जब आगे की पूछताछ की गई तो उसने कबूला कि वह अपने साथ मौजूद नाबालिग को बेचने के मकसद से नेपाल ले जा रहा था। पहले के साथ दुबारा दलित लड़की की तस्करी में जेल जाने के सवाल पर समीर आलम पुलिस से बोला, “कोई बात नहीं दोबारा भी जेल चला जाऊँगा, फिर बेल पर बाहर आ जाऊँगा।” आखिरकार भेद खुल जाने पर नाबालिग पीड़िता ने भी समीर आलम की पोल-पट्टी पुलिस और SSB के आगे खोल दी।

आखिरकार समीर आलम के खिलाफ रक्सौल के एक सामाजिक कार्यकर्ता रणजीत सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। इस शिकायत पर समीर आलम के खिलाफ IPC की धारा 363, 366, 376, 370 और पोक्सो एक्ट के अलावा एससी/एसटी एक्ट व बाल विवाह अधिनियम आदि के तहत कार्रवाई की गई है। समीर आलम को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। पीड़िता के परिजनों को सूचना दे दी गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी हुई है।

‘हमारी पार्टी को वोट क्यों नहीं दिया?’: दावा – तमिलनाडु में DMK के गुंडों ने BJP को वोट देने वाली महिला की पीट-पीट कर दी हत्या, पुलिस बोली – आपसी विवाद का मामला

तमिलनाडु में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए पहले चरण के मतदान में बीजेपी को वोट देना एक महिला के लिए जानलेवा साबित हुआ। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डीएमके के कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को वोट देने वाली गोमती नाम की महिला पर हमला कर दिया और पीट-पीट कर उसकी हत्या कर दी। महिला की मौके पर ही मौत हो गई। तमिलनाडु पुलिस ने हालाँकि इस मामले को लेकर कहा है कि महिला की हत्या आपसी विवाद के कारण हुई है ना कि वोटिंग के कारण।

ये वारदात तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के पक्किरिमानियाम गाँव की है। दिनामलार की रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमके के गुंडे यह जानने के बाद कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया है, गोमती के आवास पर आए। उनकी पीड़िता के साथ तीखी बहस हुई, जिसके बाद उन्होंने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। उन्हें यह कहते हुए सुना गया , “तूने हमारी पार्टी (डीएमके) को वोट क्यों नहीं दिया।”

नक्खीरन की रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमके गुंडों द्वारा बेरहमी से हमला किए जाने के बाद गोमती की मौके पर ही मौत हो गई। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची।

पुलिस ने पीड़िता के शव को पोस्टमार्टम के लिए वृद्धाचलम सरकारी अस्पताल भेज दिया। पुलिस अब सात आरोपियों की तलाश कर रही है, जिनकी पहचान अरुल, पांडियन, अरिवुमणि, रवि, राजा, कलाईमणि और धर्मराज के रूप में की गई है। इस बीच, पुलिस ने गोमती की हत्या में शामिल होने के आरोप में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है।

बता दें कि तमिलनाडु में सभी 39 लोकसभा क्षेत्रों में शुक्रवार (19 अप्रैल) को मतदान हुआ। तमिलनाडु में 72.09 प्रतिशत मतदान हुआ था। धर्मपुरी लोकसभा सीट पर सबसे अधिक मतदान हुआ, जबकि दक्षिण चेन्नई सीट पर सबसे कम मतदान हुआ। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार को अन्नामलाई के नेतृत्व वाली भाजपा से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

ताज़ा अपडेट्स:

तमिलनाडु में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने इस पर बयान जारी करते हुए कहा, “यह ज्ञात नहीं है कि DMK सरकार ने इस अपराध में शामिल DMK सदस्यों को गिरफ्तार किया है या नहीं। संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए मतदान के मूल अधिकार को भी खत्म करने की द्रमुक की तानाशाही प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है। भारत को बचाने का सपना देखने वाले मुख्यमंत्री स्टालिन को पहले अपनी पार्टी के सदस्यों से तमिलनाडु के लोगों को बचाने का काम देखना चाहिए। मैं इस अपराध में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई का आग्रह करता हूँ।”

वहीं तमिलनाडु पुलिस ने इस घटना से इनकार किया है। तमिलनाडु पुलिस ने इसे फर्जी खबर करार दिया। पुलिस का कहना है कि 2 पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही एक याचिका को वापस लेने के संबंध में विवाद हुआ था। कुड्डालोर जिला पुलिस ने बताया कि झड़प के दौरान गोमती ने हस्तक्षेप किया और जमीन पर गिरने से घायल हो गई। तमिलनाडु पुलिस का कहना है कि इस घटना का किसी पार्टी को मतदान से कोई लेना-देना नहीं है और ये आपसी विवाद का मामला है।

नोट: तमिलनाडु पुलिस का बयान आने के बाद इस खबर को अपडेट किया गया है।

लॉरेंस बिश्नोई के साथियों में पूर्व सांसद धनंजय सिंह का भी नाम, NIA की पूछताछ में खुलासा: राजस्थान से लेकर झारखंड तक के नामी गैंगस्टरों से मिलाया हाथ

गुजरात के साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई का उत्तर प्रदेश के जौनपुर की जेल में बंद बाहुबली नेता और माफिया धनंजय सिंह से कनेक्शन सामने आया है। बताया गया है कि अपनी गैंग को मजबूत करने में जुटे लॉरेंस विश्नोई ने देश के कई हिस्सों में सक्रिय माफियाओं से हाथ मिलाया है। इनमें झारखंडम हरियाणा और पंजाब के भी गैंगस्टर शामिल हैं। आपराधिक वारदातों को अंजाम देने में ये सभी एक दूसरे की मदद करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने साबरमती जेल में बंद लॉरेंस विश्नोई से पूछताछ की है। पूछताछ में उसने अलग-अलग प्रदेशों के कई माफियाओं से अपने रिश्ते क़बूले। इसमें से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के माफिया धनंजय सिंह भी शामिल हैं जो अपहरण और रंगदारी के एक मामले में 7 साल की सजा काट रहे हैं। धनंजय सिंह की पत्नी फिलहाल बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जौनपुर से चुनाव लड़ रहीं हैं। लॉरेंस ने जाँच एजेंसी को यह भी बताया कि वो अपने आपराधिक नेटवर्क को मजबूत कर रहा है। अपनी गैंग की मजबूती के लिए उसने अलग-अलग इलाकों के गैंगस्टरों से हाथ मिलाया है।

साल 2023 में NIA ने लॉरेंस विश्नोई के शूटरों को पनाह देने के आरोप में उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में रहने वाले एक अन्य माफिया विकास सिंह को गिरफ्तार किया था। विकास सिंह जौनपुर के धनंजय सिंह के काफी करीबी माने जाते हैं। माना जा रहा है कि तब से ही धनंजय सिंह की भी लॉरेंस विश्नोई से रिश्तों की सुगबुगाहट राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के जेहन में खटकने लगी थी। अब लॉरेंस के बयान से NIA की उस आशंका को बल मिल गया है। विकास सिंह फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।

बताते हैं कि माफिया धनंजय सिंह के अलावा लॉरेंस विश्नोई ने झारखंड की जेल में बंद एक अन्य बड़े गैंगस्टर से हाथ मिलाया है। इस गैंगस्टर का नाम अमन साहू है। अपनी गैंग को मजबूती देने के लिए लॉरेंस ने हरियाणा में काला जठेड़ी गिरोह से भी हाथ मिलाया है। राजस्थान में रोहित गोदारा गिरोह के अलावा लॉरेंस का दिल्ली में हाशिम बाबा और रोहित मोई गैंग से भी आपराधिक संबंध बताया जा रहा है। ये सभी मिल कर बड़ी हस्तियों से सुरक्षा के नाम पर पैसे की उगाही करते हैं।

बताया जा रहा है कि लॉरेंस और उसकी गैंग अलग-अलग प्रदेशों में फैले अपने इस नेटवर्क से न सिर्फ हथियारों बल्कि शूटरों की भी अदला-बदली करती रहती है। ये सामूहिक गिरोह अपने दुश्मनों को एक साथ निशाने पर लेते हैं। हमला करने वाले अपने शूटरों को ये लोग मिल कर पुलिस से सुरक्षित निकलवाने का भी प्रयास करते हैं। बताते चलें कि बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के घर के बाहर हुई फायरिंग में नाम आने के बाद लॉरेंस विश्नोई का नाम एक बार फिर से चर्चा में है।

TISS ने राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में लिप्त Ph.D छात्र को निलंबित किया: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का किया था अपमान, अब कैम्पस में ‘नो एंट्री’

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने पीएचडी छात्र रामदास प्रिंसी शिवानंदन को दो साल के लिए निलंबित कर दिया है। उन पर संस्थान में बार-बार दुर्व्यवहार और देशविरोधी क्रिया-कलापों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। उस पर ‘राम के नाम’ डॉक्यूमेंट्री के स्क्रीनिंग का भी आरोप है। इसके साथ ही प्रिंसी को दो साल के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइसेंज के सभी चारों कैंपस में एंट्री भी बैन कर दी गई है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थान ने डेवलेपमेंट स्टडीज में डॉक्टरेट कर रहे रामदास प्रिंसी शिवानंदन (30) पर मुंबई, तुलजापुर, हैदराबाद और गुवाहाटी में अपने कैंपस में प्रवेश करने पर भी पाबंदी लगा दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, TISS ने बीते 7 मार्च को रामदास को एक कारण बताओ नोटिस भेजा था, जिसमें 26 जनवरी को ‘राम के नाम’ की एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग में उनकी भूमिका का हवाला दिया गया था। नोटिस में इसे अयोध्या में राम मंदिर की मूर्ति प्रतिष्ठा के खिलाफ “अपमान और विरोध का प्रतीक” बताया गया था। इंस्ट्रीट्यूट ने नोटिस जारी कर इसकी स्क्रीनिंग न करने के लिए भी कहा था।

नोटिस में लिखा है, ”रामदास ने इसी साल जनवरी में दिल्ली में संसद के बाहर प्रोग्रेसिव स्टूडेंट फोरम और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के संयुक्त बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया था।” संस्थान के मुताबिक, “यह संस्थान के नाम का दुरुपयोग जैसा मामला था।” इसमें ये भी कहा गया कि प्रोग्रेसिव स्टूडेंट फोरम का इंस्टीट्यूट से कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि प्रोग्रेसिव स्टूडेंट फोरम एक वामपंथी झुकाव वाला संगठन है।

संस्थान की ओर से जारी आदेश

TISS ने छात्र रामदास प्रिनिसिवनंदन (30) को नोटिस भेजकर कहा कि उसने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह का अपमान करने के लिए डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया। कैंपस में बीबीसी के बैन लग चुके डॉक्यूमेंट्री की भी स्क्रीनिंग की गई थी। इसके साथ ही विवादास्पद वक्ताओं को बुलाकर भगत सिंह पर लेक्चर दिलाया गया था।

टाटा इंस्टीट्यूट की तरफ से जारी नोटिस के मुताबिक, ‘स्पष्ट है, छात्र अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर जानबूझकर और इरादतन देशविरोधी गतिविधियों में शामिल रहा। TISS ने कहा कि छात्र का आचरण देशहित में नहीं है और एक सार्वजनिक संस्थान होने के कारण TISS यह बर्दाश्त नहीं करेगा। उधर, आरोपित छात्र ने कहा है कि वह इस निलंबन के खिलाफ अपील करेगा।

‘जब राष्ट्र में जगता है स्वाभिमान, तब उसे रोकना असंभव’: महावीर जयंती पर गूँजा ‘जैन समाज मोदी का परिवार’, मुनियों ने दिया ‘विजयी भव’ का आशीर्वाद

भगवान महावीर की 2500वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैन समाज के योगदान को याद किया, हजारों जैन धर्मावलम्बियों की मौजूदगी में जैन मुनियों से आशीर्वाद लिया। इस दौरान एक मुनि ने ‘जैन समाज, मोदी का परिवार’ नारा लगवाते हुए प्रधानमंत्री को ‘विजयी भव’ का आशीर्वाद भी दिया। पीएम ने इस दौरान स्मारक डाक टिकट और विशेष सिक्का भी जारी किया। उन्होंने भगवान महावीर की प्रतिमा को प्रणाम किया और जैन समाज के साथ अपने जुड़ाव की बात की।

पीएम मोदी ने भगवान महावीर की 2550वें निर्वाण महोत्सव को एक दुर्लभ अवसर बताते हुए कहा कि ऐसे अवसर विशेष संयोगों को भी जोड़ते हैं, ये वो समय है, जब भारत अमृतकाल के शुरुआती दौर में है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज़ादी के शताब्दी वर्ष को स्वर्णिम शताब्दी बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस साल हमारे संविधान को भी 75 वर्ष होने जा रहे हैं, इसी समय देश में एक बड़ा लोकतांत्रिक उत्सव भी चल रहा है, देश का विश्वास है कि यहीं से भविष्य की नई यात्रा शुरू होगी। पीएम मोदी ने कहा कि भारत न केवल विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यता है, बल्कि मानवता का सुरक्षित ठिकाना भी है। उन्होंने ये कविता पढ़ी:

ये भारत ही है, जो स्वयं के लिए नहीं,
सर्वम के लिए सोचता है।
स्व की नहीं, सर्वस्व की भावना करता है।
अहम नहीं, वहम की सोचता है।
इति नहीं, अपरिमित में विश्वास करता है।
नीति और नियति की बात करता है।
पिंड में ब्रह्मांड की बात करता है।
विश्व में ब्रह्म की बात करता है।
जीव में शिव की बात करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैन समाज को संबोधित करते हुए कहा, “आज देश की नई पीढ़ी को ये विश्वास हो गया है कि हमारी पहचान, हमारा स्वाभिमान है। जब राष्ट्र में स्वाभिमान का ये भाव जग जाता है, तो उसे रोकना असंभव हो जाता है। भारत की प्रगति, इसका प्रमाण है। हम कभी दूसरे देशों को जीतने के लिए आक्रमण करने नहीं आए, हमने स्वयं में सुधार करके अपनी ​कमियों पर विजय पाई है। इसलिए मुश्किल से मुश्किल दौर आए और हर दौर में कोई न कोई ऋषि हमारे मार्गदर्शन के लिए प्रकट हुआ है। बड़ी-बड़ी सभ्यताएँ खत्म हो गईं, लेकिन भारत ने अपना रास्ता खोज ही लिया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘यही समय है, सही समय है’ वाली बात दोहराते हुए कहा कि तीर्थंकरों से प्रेरणा लेकर हमें इस समय समाज में ‘अष्टया’ और ‘अहिंसा’ की नीति पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हर युग में एक नई सोच जन्म लेती है, जब कोई सोच विकसित नहीं होता तो वो चर्चा में बदल जाता है, फिर वो चर्चा बहस में बदल जाती है और विचारों से निकला अमृत हमें नए दौर में ले जाता है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि जब विचार ज़हरीले होते हैं तो समाज विनाश की तरफ जाता है।

कलकत्ता हाई कोर्ट न होता तो ममता बनर्जी के बंगाल में रामनवमी की शोभा यात्रा भी न निकलती: इसी राज्य में ईद पर TMC बाँटती है लुंगी और नमाजी टोपी

पश्चिम बंगाल के जादवपुर में 21 अप्रैल 2024 को विश्व हिूंद परिषद रामनवमी पर शोभा यात्रा निकाल रही है। शाम को 6 बजे से इस यात्रा को मंजूरी कलकत्ता हाई कोर्ट ने दी है। कलकत्ता हाई कोर्ट में विश्व हिंदू परिषद ने अपील की थी कि ममता सरकार रामनवमी की शोभा यात्रा की परमिशन नहीं दे रही है और ट्रैफिक जैसे बहाने बना रही थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने प्रशासन को फटकार तो लगाई ही, साथ ही विश्व हिंदू परिषद को राम नवमी की शोभा यात्रा की अनुमति दे दी। सोचिए, अगर कलकत्ता हाई कोर्ट नहीं होता तो?

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की। कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस जय सेनगुप्ता की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, “प्रत्येक नागरिक को खुद को अभिव्यक्त करने या अपनी आस्था का पालन करने का अधिकार है, हालाँकि उचित प्रतिबंधों के अधीन और इसी तरह की कई रैलियाँ 21 अप्रैल को आयोजित करने की अनुमति दी गई है। इसलिए मुझे याचिकाकर्ता को अनुमति न देने का कोई कारण नहीं दिखता है।”

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पाया कि विश्व हिंदू परिषद ये शोभा यात्रा रविवार (21 अप्रैल 2024) को निकाल रही है। इस दिन छुट्टी है, तो सड़क पर भारी ट्रैफिक की समस्या नहीं होगी। इसके साथ ही एनडीए या अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं भी शाम 5 बजे तक समाप्त हो जाएँगी। इसलिए प्रशासन ने जो बहाने किए हैं, वो पोषनीय नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक के नाम पर शोभा यात्रा पर रोक लगाना सही नहीं, इसलिए शाम को 6 बजे से इस शोभा यात्रा को निकालने की अनुमति दी जाती है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रशासन से समुचित सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है, साथ ही यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्जन की भी सुविधा देने के लिए कहा है। कलकत्ता हाई कोर्ट का ये फैसला स्थानीय प्रशासन के लिए झटके की तरह है, क्योंकि प्रशासन ट्रैफिक व्यवस्था के नाम पर शोभा यात्रा को अनुमति देने से ही इनकार कर रहा था।

वीएचपी ने कोर्ट को बताया कि वो 2016 से रामनवमी के बाद पहले रविवार को इस तरह का जुलूस निकालती रही है, लेकिन राज्य सरकार ने विहिप की याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि 21 अप्रैल को रैली आयोजित करने का कोई धार्मिक महत्व नहीं है। राज्य ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव के कारण पुलिस कर्मियों की कमी है। इसके साथ ही 21 अप्रैल को परीक्षाएं भी आयोजित की जानी हैं, इसके परीक्षा केंद्र उस रोड पर हैं, जहाँ रैली निकाली जानी है। हालाँकि कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ रैली को अनुमति दे दी।

बता दें कि ये उस पश्चिम बंगाल राज्य का मामला है, जहाँ राम नवमी पर तो शोभा यात्रा निकालने तक की अनुमति कोर्ट में जाकर लेनी पड़ रही है, वहीं, ईद के मौके पर लुंगी व अन्य सामान बाँटे जाते हैं। कुछ दिन पहले एक वीडियो सामने आया था, जिसमें सत्ताधारी दल के लोग ईद के मौके पर उपहार बाँठ रहे थे। वीडियो में दिख रहा था कि लोगों को बैग दिए गए। इन बैग में लुंगी (तहमद), नमाजी टोपी, साड़ियाँ, लच्छा (जिससे सेवइयाँ बनती हैं) और ड्राई फ्रूट भरे हुए थे। बैगों के ऊपर ‘इफ्तार सामग्री, ईद उपहार’ लिखा हुआ था, तो ‘अल्पसंख्यक मोर्चा पुरुलिया जिला’ भी लिखा हुआ था। हालाँकि इस मामले में सत्ताधारी दल टीएमसी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इस बात का पता नहीं चल पाया है।

जिस नाबालिग मुस्लिम को दिया काम, उसी ने निकाल ली आँतें, हिन्दू दुकानदार के खून से लाल हो गया जूतों का शोरूम: 3 चाकूबाज के साथ किया हमला

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक हिन्दू व्यापारी पर चाकू से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित का नाम राजू हरगुनानी है जिनका जूतों का शोरूम है। मुख्य हमलावर मुस्लिम समुदाय का है जो कि नाबालिग बताया जा रहा है। आरोपित पूर्व में पीड़ित राजू की दुकान पर काम कर चुका था। हमले में घायल राजू की आँतें भी बाहर निकल आईं हैं। गंभीर हालत में उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शुक्रवार (19 अप्रैल, 2024) की है। पुलिस ने हमलावरों की संख्या 4 बताई है।

यह घटना कानपुर नगर के पूर्वी क्षेत्र की है। यहाँ के कोतवाली क्षेत्र में नवीन मार्केट है जहाँ लगभग 57 वर्षीय राजू हरगुनानी ने जूतों का शोरूम खोल रखा है। राजू के भतीजे सुनील कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में सुनील ने बताया है कि राजू की दुकान पर पहले से ही बिलाल, अख्तर और शान नाम के कर्मचारी काम कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले राजू ने लगभग 14 वर्षीय एक अन्य लड़के को काम पर रखा था जो कि मुस्लिम समुदाय से था। लड़के ने लगभग 1 हफ्ते ही राजू की दुकान पर काम किया फिर किसी बात से नाराज हो कर चला गया।

शुक्रवार (19 अप्रैल) को रात लगभग 8:30 से 9:00 बजे के बीच राजू अपने शोरूम के काउंटर पर बैठे हुए थे। तभी काम छोड़ कर जा चुका उनका पूर्व नाबालिग स्टाफ शो रूम के अंदर आया। उसके हाथ में एक बड़ा सा चाकू था। शो रूम में घुसते ही हमलावर ने राजू पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए। राजू के पेट, पीठ और हाथों में कई घाव हो गए। बताया जा रहा है कि पीड़ित के पेट की अँतड़ियाँ भी बाहर निकल गईं थीं। शोरूम में ढेर सारा खून फ़ैल गया।

चीख-पुकार सुन कर जब आसपास के लोग दौड़े तो हमलावर ने उन्हें भी चाकू दिखा कर डराया और दूर रहने की हिदायत दी। राजू को कई चाकू घोपने के बाद हमलावर मौके से भाग निकला। चाकूबाजी से इलाके में अफरातफरी मच गई। राजू को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उनका इलाज वेंटिलेटर पर चल रहा है। सुनील कुमार ने अपनी शिकायत में राजू पर हमला करने वाले आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

मामले की सूचना पर पहुँची पुलिस ने केस दर्ज कर के तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने हमलावरों की संख्या 4 बताई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले के बाद मुख्य आरोपित लखनऊ भाग गया था। शनिवार (20 अप्रैल) को पुलिस ने दबिश दे कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। हमले में इस्तेमाल किया गया चाकू भी पुलिस ने बरामद कर लिया है। हमलावर पर पुलिस ने IPC की धारा 307 व 506 के तहत FIR दर्ज की है। मामले की जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

फयाज ने नेहा को मार डाला, ‘ट्रू लव’ बता कर बचाव करने वाले सादिक और आदिल धराए: हिन्दू कार्यकर्ता ने की थी शिकायत

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस पार्षद निरंजन हिरेमथ की बेटी नेहा की सरेआम हत्या कर दी गई। पिता निरंजन ने हत्या को लव जिहाद बताते हुए कार्रवाई की माँग की है। पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और फयाज पर लव जिहाद के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो कुछ कट्टरपंथी ‘नेहा और फयाज की लव स्टोरी’ बताकर इसे हत्याकांड को जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहे हैं और ‘प्यार के लिए’ न्याय माँग रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने हिंदू संगठनों की शिकायत पर दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार हुए दोनों युवकों की पहचान सादिक इमाम साब तड़ाकोटा और आदिल के रूप में हुई है। विद्यागिरी पुलिस थाने में इन दोनों के खिलाफ हिन्दू कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी। नबीला जमाल समेत कुछ तथाकथित पत्रकारों ने भी इस मामले को ‘लव स्टोरी’ से जोड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धारवाड़ के रहने वाले दोनों युवक सोशल मीडिया पर नेहा हत्याकांड को ये कह कर जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहे थे कि नेहा और फयाज आपस में प्रेम करते थे। इसलिए फयाज को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने ‘नेहा फैयाज का सच्चा प्यार, प्यार के लिए न्याय’ जैसी बातें सोशल मीडिया पर लिखी। इस मामले में हिंदू संगठनों ने कार्रवाई की माँग की थी।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, साथ ही लोगों को चेतावनी भी दी है कि वो भ्रम फैलाने वाले पोस्ट न करें।

बता दें कि नेहा के पिता ने इस बर्बर हत्याकांड को लव जिहाद कहा है, जबकि कर्नाटक की कॉन्ग्रेस पार्टी और सरकार इसे लव जिहाद का मामला मानने को तैयार नहीं है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने इसे आपसी मामला करार दिया है, तो उप-मुख्यमंत्री ने इसे बीजेपी से जोड़ दिया और कहा कि बीजेपी जानबूझकर इस मामले को लेकर पूरे राज्य में हवा बना रही है कि कर्नाटक में कानून व्यवस्था की हालत खराब है।

वहीं, नेहा हत्याकांड को लेकर कर्नाटक के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि आरोपित फयाज पर कड़ी कार्रवाई की जाए और कर्नाटक सरकार भी तथ्यों को स्वीकार करे कि ये मामला लव जिहाद का है। इस मामले में नेहा की माँ ने कहा था कि फैयाज ने नेहा पर संबंध के लिए दबाव बनाया था। नेहा के पिता ने भी फयाज को अपनी बेटी से दूर रहने के लिए कहा था, लेकिन फयाज ने आखिर में नेहा की हत्या कर दी।