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लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण में 21 राज्य-केंद्रशासित प्रदेशों के 102 सीटों पर मतदान: 8 केंद्रीय मंत्री, 2 Ex CM और एक पूर्व राज्यपाल समेत मैदान में 1625 प्रत्याशी

लोकसभा चुनाव 2024 में शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को पहले चरण के लिए 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 102 संसदीय सीटों पर मतदान होगा। इन सभी लोकसभा एवं विधानसभा सीटों के लिए बुधवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम राज्य की 92 विधानसभा सीटों पर भी शुक्रवार को मतदान कराया जाएगा। हालाँकि सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के नतीजे 2 जून को ही आ जाएँगे। चुनाव आयोग ने इसके लिए सारी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।

21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदान

चुनाव आयोग के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के पहले चरण में उत्तर प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों, अरुणाचल प्रदेश की 2, असम की 14, बिहार की चार, छत्तीसगढ़ की 11, मध्य प्रदेश छह सीट, महाराष्ट्र की पाँच, मणिपुर की दो सीट, मेघालय की सभी दो सीट, मिजोरम की एक, सिक्किम की एक, नगालैंड की एक, राजस्थान की 12, तमिलनाडु की सभी 39, त्रिपुरा की एक सीट, लक्षद्वीप की इकलौती, पुडुचेरी की इकलौती सीट, उत्तराखंड की सभी पाँच, पश्चिम बंगाल की तीन, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की इकलौती सीट और जम्मू-कश्मीर की एक लोकसभा सीट पर मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। मतदान सुबह 8 बजे से शुरू होगा और 6 बजे तक चलेगा। 6 बजे के बाद जो लोग लाइन में होंगे, वो देर तक मतदान करते रहेंगे।

इस दौरान 18 लाख से अधिक मतदान अधिकारी 1.87 लाख मतदान केंद्रों पर 16.63 करोड़ से अधिक मतदाताओं का स्वागत करेंगे। मतदाताओं में 8.4 करोड़ पुरुष; 8.23 करोड़ महिला और 11,371 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

इन महत्वपूर्ण सीटों पर मतदान

लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर सबकी नजरें होंगी। इन महत्वपूर्ण सीटों में यूपी की सहारनपुर, रामपुर, पीलीभीत, मुजफ्फरनगर सीट है, तो असम की डिब्रूगढ़, सोनितपुर सीट पर भी सबकी नजर होगी। वहीं, नक्सल हिंसा प्रभावित छत्तीसगढ़ की बस्तर भी काफी अहम होगी। पहले चरण में बिहार की जमुई और गया सीट पर भी सबकी नजर रहने वाली है, तो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की उधमपुर सीट भी काफी अहम है।

इसके अलावा मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा, तमिलनाडु की चेन्नई उत्तर, चेन्नई दक्षिण, चेन्नई सेंट्रल, कोयंबटूर, थूथुक्कुडी, तिरुनेलवेली, कन्याकुमारी, मणिपुर दो आंतरिक और बाह्य सीट, राजस्थान की बीकानेर और पश्चिम बंगाल की कूचबिहार और अलीपुरद्वार पर भी सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

इन चेहरों पर सबकी निगाहें

उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर सीट से केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान चुनाव मैदान में हैं। राजस्थान के अलवर से केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य भूपेंद्र यादव अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बीकानेर से केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, तमिलनाडु की नीलगिरी लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन चुनाव मैदान में हैं। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई कोयंबटूर से मैदान में हैं, उनपर भी सभी की नजरें रहने वाली हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण में नागपुर लोकसभा सीट से नितिन गडकरी चुनाव मैदान में हैं। वो दो बार ये सीट जीत चुके हैं, इस बार वो हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में हैं। जम्मू-कश्मीर की उधमपुर सीट से केन्द्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह मैदान में हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू तीन बार के सांसद हैं। उनपर भी सबकी निगाहें होगीं, तो केन्द्रीय मंत्री एवं असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल असम के डिब्रूगढ़ से चुनावी मैदान में हैं। तेलंगाना की राज्यपाल और पुडुचेरी की उपराज्यपाल पद से इस्तीफा देकर राजनीति में लौटी तमिलिसाई सौंदर्यराजन चेन्नई दक्षिण से चुनाव लड़ रही हैं।

कॉन्ग्रेस के बड़े उम्मीदवारों की बात करें तो शिवगंगा के सांसद कार्ति चिदंबरम फिर से चुनाव मैदान में हैं। उनके पिता और कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे चिदंबरम यहाँ से सात बार जीत चुके थे। असम की कलियाबोर सीट से गौरव गोगोई पर सभी की नजरे होंगी। वहीं, उत्तरी राजस्थान में भाजपा के गढ़ चूरू से दो बार के पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी भाजपा उम्मीदवार देवेंद्र झाझरिया पहली बार चुनावी मैदान में हैं। एमपी के छिंदवाड़ा से नकुलनाथ पर भी सभी की निगाहें होंगी।

सात चरण में हो रहा लोकसभा चुनाव

गौरतलब है कि 19 अप्रैल को लोकसभा की 102 सीटों पर मतदान होना है। इन सीटों पर चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, लोकसभा चुनाव सात चरण में होंगे। दूसरे चरण के तहत 26 अप्रैल को 89, तीसरे चरण के तहत 7 मई को 94, चौथे चरण के तहत 13 मई को 96, पाँचवें चरण के तहत 20 मई को 49, छठे चरण के तहत 25 मई को 57 और सातवें चरण के तहत 1 जून को लोकसभा की 57 सीटों पर मतदान होगा। नतीजों की घोषणा 4 जून को होगी।

हनुमान दीक्षा ले रहे हिंदू छात्रों को मिशनरी स्कूल प्रशासन ने कक्षा में जाने से रोका, तनाव के बाद परिसर में तोड़फोड़, दोनों पक्षों ने दर्ज कराई FIR

तेलंगाना के एक ईसाई मिशनरी स्कूल में छात्रों के धार्मिक पोशाक पहनने पर स्कूल प्रशासन ने आपत्ति जताई, जिसके बाद तनाव उत्पन्न हो गया और स्कूल में तोड़फोड़ की घटना हुई। यह घटना 16 अप्रैल 2024 को मंचेरियल जिले के कन्नेपल्ली गाँव में लक्सेटिपेट के मदर टेरेसा स्कूल में हुई। यहाँ पर कुछ हिंदू छात्र ‘हनुमान दीक्षा पोशाक’ पहनकर पहुँचे थे।

भगवा रंग की धार्मिक पोशाक पहने हुए छात्रों को कथित सूचित किया गया था कि यदि वे बिना स्कूल यूनीफॉर्म के स्कूल आना चाहते हैं तो उनके माता-पिता को इसके लिए पहले अनुमति लेनी होगी। जब छात्र भगवा कपड़े और माला पहनकर आए तो स्कूल के प्रिंसिपल ने उन्हें क्लास में जाने की अनुमति नहीं दी। उन्हें तब तक बाहर खड़ा रखा गया, जब तक वे अपने माता-पिता को स्कूल नहीं बुला लाए।

छात्रों द्वारा अपने माता-पिता को इसकी जानकारी दी गई तो एक धार्मिक समूह के सदस्य स्कूल के बाहर पहुँचे और विरोध करना शुरू कर दिया। उन्होंने छात्रों को उनकी पोशाक के कारण स्कूल में प्रवेश करने और उनकी वार्षिक परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं देने के लिए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

कुछ देर बाद में कुछ प्रदर्शनकारी स्कूल में घुस गए और खिड़कियों में तोड़फोड़ शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने स्कूल के हेडमास्टर सहित कर्मचारियों के साथ मारपीट की। इसकी जानकारी पुलिस को दी गई तो वह मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करने लगी। इस दौरान प्रदर्शनकारी स्कूल स्टाफ से माफी की माँग कर रहे थे।

वहीं, स्कूल प्रबंधन ने तोड़फोड़ को लेकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इस बीच, अभिभावकों ने भी स्कूल के खिलाफ उनके बच्चों को कक्षा में प्रवेश नहीं करने देने की शिकायत दर्ज करायी है। मामला धारा 153 (ए) (धर्म या नस्ल के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295 (ए) (धार्मिक भावनाओं का अपमान) के तहत दर्ज कर लिया गया।

अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों ने 21 दिवसीय विशेष धार्मिक अनुष्ठान के तहत धार्मिक पोशाक पहन रखी थी। उन्होंने कहा कि स्कूल एक समुदाय की धार्मिक प्रार्थना की अनुमति देता है, लेकिन वे हनुमान दीक्षा के दौरान छात्रों को धार्मिक पोशाक पहनने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

एक छात्र के माता-पिता ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे और कक्षा 4 में उसके दो सहपाठियों को स्कूल से निकाल दिया गया, क्योंकि वे ‘हनुमान दीक्षा माला’ पहने हुए थे। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ एक समुदाय को प्रार्थना की अनुमति है, लेकिन हनुमान दीक्षा, जिसके दौरान लोग मोतियों की माला और भगवा पोशाक पहनते हैं, की अनुमति नहीं है।

घटना के बारे में बात करते हुए मंचेरियल के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अशोक कुमार ने कहा, “परीक्षाएँ चल रही थीं। परीक्षा के बाद प्रिंसिपल ने छात्रों से कहा कि वे यूनीफॉर्म में आएँ। अगर वे भगवा कपड़े पहनना चाहते हैं तो उन्हें इजाजत लेनी होगी। इससे माता-पिता भड़क गए। पहले भी प्रिंसिपल के खिलाफ कुछ शिकायतें थीं और यह बात अभिभावकों के मन में थी।”

DCP अशोक कुमार ने आगे कहा, “मंगलवार का दिन था और पास में ही एक मंदिर है। मामला बढ़ गया और फिर तोड़फोड़ हुई।” पुलिस के अनुसार, युवा 21 दिन की अराधना कर रहे थे जिसे ‘हनुमान दीक्षा’ के नाम से जाना जाता है। दांडेपल्ली पुलिस ने स्कूल प्रबंधन और बच्चों के माता-पिता के आरोपों के जवाब में दो एफआईआर दर्ज की हैं। अपराधियों की पहचान के लिए पुलिस वीडियो देख रही है।

अपनी शिकायत में स्कूल प्रशासन ने चार संदिग्धों सहित कई लोगों पर परिसर में घुसने, स्कूल स्टाफ को जबरन हिरासत में लेने की तैयारी करने, उस पर शारीरिक हमला करने और कक्षा की खिड़कियाँ तोड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने 30,000 रुपए मूल्य की संपत्ति के नुकसान का दावा किया है और कहा है कि गेट और मदर टेरेसा की एक मूर्ति को तोड़ दिया गया है।

स्कलू की देखरेख करने वाले मिशनरी कॉन्ग्रिगेशन ऑफ द ब्लेस्ड सैक्रामेंट (एमसीबीएस) के सदस्य एवं स्कूल के स्टाफ फादर जैमन जोसेफ के अनुसार, छात्रों को 15 अप्रैल को परीक्षा देने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा, “गलत खबर को सोशल मीडिया पर फैलाई गई, जिसके कारण मंगलवार की सुबह 500 से अधिक लोग स्कूल पहुँचे और लगभग चार घंटे तक हमला किया। यह पूर्व नियोजित था।”

उन्होंने आगे कहा, “प्रिंसिपल ने सोमवार दोपहर छात्रों से कहा कि उन्हें भगवा कपड़े पहनकर आने की अनुमति लेनी होगी। अगर उनके माता-पिता ने हमें फोन भी किया होता तो हम अनुमति दे देते। मंगलवार की सुबह भी एक छात्र भगवा कपड़े में आया और हमने उस छात्र को नहीं रोका। तब तक एक बड़ी भीड़ स्कूल में आ गई और हम पर हमला कर दिया।”

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। आप इस पर क्लिक करके इसे पढ़ सकते हैं।)

हिंदू लड़की को अपने घर में बंधक बनाकर दरिंदगी करता रहा अयान पठान, पिटाई के बाद जख्मों पर डाली मिर्च, होठों को फेवीक्विक से चिपकाया: पीड़ित की हालत गंभीर

मध्य प्रदेश के गुना जिले में मुस्लिम युवक अयान पठान ने एक हिंदू लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसा लिया और अपने ही घर में उसे महीने भर से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान वो हिंदू लड़की से संबंध बनाता था और उसके साथ जमकर मारपीट करता था। किसी तरह से लड़की अपनी जान बचाकर अपने घर पहुँची, तब जाकर इस मामले का खुलासा हो पाया।

ये मामला गुना जिले के कैंट थाना क्षेत्र के नानाखेड़ी इलाके का है। यहाँ एक हिंदू लड़की को मुस्लिम युवक अयान पठान ने अपने प्रेम जाल में फंसा लिया। लड़की की माँ को इस रिश्ते से आपत्ति थी, लेकिन माँ से लड़कर अयान के पास पहुँची लड़की को अयान ने अपने ही घर में बंधक बना लिया। अयान पठान बात-बात पर मारपीट करने लगा। इतना ही नहीं, उसने युवती को बेल्ट से मारने से पहले उसके होंठ फेवीक्विक से चिपकाए ताकि वो चीख ना पाए। यही नहीं, वो मारपीट से बने घावों पर लाल मिर्च डाल देता था। किसी तरह से लड़की अपनी माँ के पास पहुँची, तब जाकर अयान पठाने की हैवानियत सामने आई।

बेटी की हालत को देखते हुए उसकी माँ ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि युवती के पिता नहीं हैं और अयान पठान की नजर उसकी पैतृक संपत्ति पर थी। अयान चाहता था कि युवकी की माँ उस पैतृक घर को उसके नाम कर दे। युवती ने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई। आँखों में मिर्च डाल दी। लव जिहाद से जुड़े मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने अयान पठान को गिरफ्तार कर लिया।

पीड़िता ने बताया कि “अयान पठान उसके घर के पास में ही रहता है। उसने मुझे एक महीने अपने घर में कैद करके रखा था। मेरे साथ जबरदस्ती की। वह न तो बाहर आने देता और न किसी से बात करने देता था। मैं किसी तरह अपने घर आई। मंगलवार ( 16 अप्रैल 2024) रात उसने घर आकर मुझे बेल्ट से बुरी तरह पीटा। मेरे पूरे शरीर में चोट आई है। दोनों आंखों में सूजन है। दर्द होने पर चिल्लाई तो होंठ पर फेवीक्विक डाल दी, ताकि मुंह से आवाज ना निकल सके और लोगों को उसकी हरकत का पता ना चल सके।”

एएसपी मान सिंह ठाकुर ने बताया कि अयान पठान को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके घर से अवैध शराब भी बरामद हुई है। न्यूज18 ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस मामले में पीड़ित की माँ ने पहले भी पुलिस में शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने अयान को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन लड़की ने तब किसी तरह के दबाव में आकर अयान को बचा लिया था। दोनों काफी समय से प्रेम संबंध में थे, इसलिए वो अयान को एक बार बचा चुकी थी। इस बार लड़की की हालत काफी गंभीर है और उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

‘भोजशाला के अवशेष यहाँ पर हमले की कहानी कह रहे हैं’: हिंदू पक्ष का दावा- ASI सर्वे में गोमुख और स्तंभ सहित कई हिंदू प्रतीक मिले

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सर्वे का काम जारी है। अदालत के निर्देश पर ASI यहाँ GPS-GRS और कार्बन डेटिंग के लिए खुदाई भी करा रही है। इसकी रिपोर्ट 29 अप्रैल 2024 तक पेश की जा सकती है। गुरुवार (18 अप्रैल) को यहाँ सर्वे का 28वाँ दिन है। अब हुए 40 प्रतिशत काम के दौरान कई हिंदू कलाकृतियाँ मिलने की बात कही जा रही है।

ASI के सर्वे दल में 15 अधिकारी और 25 श्रमिक शाम‍िल हैं। दरअसल, बुधवार (17 अप्रैल 2024) को भोजशाला में परिसर के बाहर गर्भगृह के सामने हवन कुंड के समीप सर्वे का कार्य किया गया। दरगाह के समीप और अकल कुईया का सर्वे भी टीम ने किया था। दावेदारों ने गर्भगृह के सामने कई पत्थर, भित्ति चित्र और मूर्तियाँ मिलने के बात कही है।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू पक्ष ने यहाँ सर्वे में कई हिंदू प्रतीकों के मिलने की बात कही है। उनका दावा है कि भोजशाला मंदिर ही है। उनका कहना है कि 15वें दिन गर्भगृह के पिछले हिस्से में तीन सीढ़ियाँ दिखीं, जबकि 19वें दिन दीवार में दबा गोमुख निकला है। यह दरगाह से लगी दीवार में दबी हुई थी। हिंदुओं का दावा है कि किसी भी मंदिर में अभिषेक का जल गोमुख से ही निकलता है।

इतना ही नहीं, हिंदू पक्ष का यह भी दावा है कि इसके पश्चिमी हिस्से में दीवार और स्तंभ जैसी आकृति मिली है, जिसका एक हजार साल पुराना आधार है। यहाँ बीचो-बीच एक कुंड स्थित है, जिसकी सफाई में कई अवशेष सामने आने का दावा किया जा रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मंदिर के बीच की यज्ञशाला है। यहाँ शिलालेख-मूर्तियाँ मिली हैं, क्योंकि सनातन का केंद्र रहा है।

भोजशाला आंदोलन से जुड़े धार के हिंदू पक्ष के गोपाल शर्मा और याचिकाकर्ता आशीष गोयल के हवाले से भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गर्भगृह के पिछले हिस्से में स्तंभ की तरह की आकृति मिली है। उनका दावा है कि यह सपोर्टेड पिलर रहा होगा। सुरक्षा के लिहाज से निकास द्वार बने होंगे। पिलर मिला है तो और रास्ते भी होंगे।

हिंदू पक्ष के गोपाल शर्मा ने कहा कि भोजशाला के गर्भगृह, उत्तर और दक्षिण दिशा में सर्वे हुआ है। यहाँ कुछ ऐसे अवशेष मिले हैं, जो भोजशाला में आक्रमण की कहानी कह रहे हैं। वो बता रहे हैं किस प्रकार भोजशाला को तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि यहाँ ऐसे अवशेष निकले हैं, जो जाँच का विषय है। जाँच में सच सामने आएगा और सिद्ध होगा कि यह भोजशाला है।

उन्होंने कहा कि भोजशाला में मौजूदा स्तंभों से लेकर सर्वे में प्राप्त एक पिलर पर हिंदू प्रतीक चिह्न व वास्तु शैली दिखाई दे रही है। भोजशाला और उसके 50 मीटर के दायरे में अभी लगभग 40 प्रतिशत काम हो चुका है। उनका कहना है कि लगता है कि सर्वे पूरा होने में अभी समय और लगेगा। हो सकता है कि ASI की टीम सर्वे के दिन बढ़ाने के लिए माननीय न्यायालय में माँग करे।

वहीं, मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद का कहना है कि सर्वे में आज कुछ नहीं मिला है। उन्होंने दावा किया कि दो दिन पहले भोजशाला के अंदर भगवान गौतम बुद्ध की मूर्ति निकली थी।

बताते दें कि धार में भोजशाला ASI द्वारा संरक्षित इमारत है। साल 2022 में हिन्दू संगठनों ने याचिका दायर करके भोजशाला का GPR और GPS तकनीक से सर्वे कराने की माँग की थी। इंदौर हाईकोर्ट ने 11 मार्च को इसे स्वीकारते हुए सर्वे के आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि स्मारक के मूल स्वरूप से परिवर्तन नहीं होना चाहिए। इसके बाद 22 मार्च से सर्वे शुरू कर दिया गया।

‘केरल में मॉक ड्रिल के दौरान EVM में सारे वोट BJP को जा रहे थे’: सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण का दावा, चुनाव आयोग ने बताया मनगढंत कहानी

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में उन दावों का खंडन किया, जिसमें कहा जा रहा था कि केरल में ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी पाई गई है। वकील प्रशांत भूषण ने भी सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केरल के कासरगोड में 4 ऐसी ईवीएम मशीनें मिली, जिसके बारे में बताया गया कि इन मशीनों में एक वोट करने पर अपने आप एक वोट बीजेपी को मिल जा रहा है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब माँगा था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि ये दावे गलत हैं। मनगढंग बातों की कोर्ट में कोई जगह नहीं है। चुनाव आयोग ने कहा कि उनके अधिकारियों ने जाँच में ऐसा कुछ नहीं पाया।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा। चुनाव आयोग के वरिष्ठ उपायुक्त नितेश कुमार व्यास ने कहा, “केरल की खबरें झूठी हैं। हमें जिला कलेक्टर से इस मामले की जाँच कराई है। इस पर हम अदालत को पूरी रिपोर्ट भी सौंपेंगे।” चुनाव आयोग ने ये बात उस समय कही है, जब सुप्रीम कोर्ट में इस बात की सुनवाई चल रही है कि क्या सभी ईवीएम मशीनों के साथ वीवीपैट जोड़ा जाए और इवीएम के आँकड़ों के साथ ही वीवीपैट की पर्चियों का भी मिलान किया जाए।

बता दें कि गुरुवार (18 अप्रैल 2024) को वकील प्रशांत भूषण ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया था कि केरल के कासरगोड में मॉक टेस्ट के दौरान ऐसी 4 ईवीएम मशीनें मिलीं, जो हरेक वोट के साथ एक अतिरिक्ट वोट बीजेपी के हिस्से में डाल रही थी। प्रशांत भूषण ADR नाम के एनजीओ की तरफ से कोर्ट में बहस कर रहे हैं।

प्रशांत भूषण के दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह से जानकारी माँगी थी। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के उपायुक्त ने बताया कि ईवीएम और वीवीपैट किस तरह से काम करती हैं। उन्होंने कहा कि ईवीएम बनाने वालों को ये नहीं पता होता है कि कौन सा बटन किस पार्टी को दिया जाएगा और कौन सी मशीन किस राज्य में जाएगी।

चुनाव आयोग ने कहा कि याचिकाएँ सिर्फ आशंका हैं, और कुछ नहीं है। वीवीपैट सिर्फ एक प्रिटिंग मशीन है और सिंबल मशीन में अपलोड किए जाते हैं। जस्टिस खन्ना ने कहा कि आपने कहा कि वीवीपैट केवल एक प्रिंटर है। सिंबल का डेटा किस यूनिट में अपलोड किया जाता है? सुप्रीम कोर्ट में मौजूद ईसीआई अधिकारी ने डायस लेते हुए कहा कि मैं चुनाव योजना को देखता हूँ। मैं जो भी कह रहा हूं अधिकारपूर्वक कह ​​रहा हूँ। मतपत्र इकाई केवल बटन नंबर बताती है। 3 दबा दिया गया है। बटन इकाई उम्मीदवारों के लिए तय नहीं है। कंट्रोल यूनिट में कुछ भी लोड नहीं है। हर एक मशीन में बटन नंबर अलग होता है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘चुनावी प्रक्रिया में पवित्रता होनी चाहिए। लेकिन किसी को भी इस बात पर कोई आशंका नहीं होना चाहिए कि कुछ गलत हो रहा है।’ इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 5 घंटे तक बहसों को सुना और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

बता दें कि वीवीपैट एक तरह की स्वतंत्र सत्यापन प्रणाली होती है, जिसमें मतदाता ये देख पाता है कि उसका वोट सही तरीके से पड़ा है या नहीं, साथ ही वो ये भी जान सकता है कि उसने वोट जिसे डाला है, वो भी उसी को गया है या नहीं। किसी विवाद की स्थिति में वीवीपैट की पर्चियों का भी मिलान किया जाता है। अभी के नियम के हिसाब से हर विधानसभा क्षेत्र में 5 वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर पर्चियों का मिलान किया जा सके।

कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका लेकर गई मुस्लिम लड़की, कहा- 12वीं से पहले निकाह की न हो इजाजत: मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने खारिज की PIL

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार (18 अप्रैल 2024) को निकाह से संबंधित एक मुस्लिम महिला की जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दी। इस याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया था कि वह राज्य के अधिकारियों को निर्देश दे कि बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने तक किसी भी मुस्लिम लड़की को निकाह करने की अनुमति नहीं देने का आदेश जारी करें।

कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने कहा कि स्कूल शिक्षा मंत्री को दिए गए अभ्यावेदन पर विचार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा, “किसी भी स्थिति में यह नीतिगत मामले से संबंधित है। जैसा कि माँग किया गया है कि कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता। इसे खारिज किया जाता है।”

यह याचिका नाज़िया इलाही खान नाम की एक मुस्लिम महिला ने दायर की थी। नाजिया ने अदालत को बताया कि उन्होंने राज्य के अधिकारियों से सभी मुस्लिम लड़कियों के लिए निकाह से पहले कम-से-कम बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य बनाने के लिए आग्रह किया था, लेकिन उनके अनुरोध पर वे कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिकग, नाजिया इलाही खान ने अपनी याचिका में कहा, “यह मुद्दा बड़े पैमाने पर जनता, विशेषकर इस्लामी समुदाय को प्रभावित करता है।” उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम लड़कियों के लिए कम से कम बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई करना असंभव हो गया है, क्योंकि उनके लिए निकाह करना बेहतर समझा जाता है।

याचिकाकर्ता ने आगे दावा किया, “मुस्लिम समुदाय की युवा लड़कियों की निकाह तब कर दी जाती है, जब वह युवावस्था या किशोरावस्था की उम्र प्राप्त कर लेती है, जो लगभग बारह साल की उम्र से शुरू होती है।” नाजिया खान ने 12 फरवरी को इस संबंध में एक अभ्यावेदन दायर किया था और आरोप लगाया था कि तब से राज्य द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

नाजिया इलाही खाने कहा कि राज्य सरकार की इस तरह की निष्क्रियता ने मुस्लिम लड़कियों की तकलीफों को और बढ़ा दिया है, जिसके कारण उन्हें और भी अधिक हाशिए पर धकेल दिया है। इस आधार पर उन्होंने हाई कोर्ट से हस्तक्षेप की माँग की थी। हालाँकि, हाई कोर्ट ने इस आवेदन को खारिज कर दिया।

‘देश हो या परदेस मोदी की गारंटी हमेशा पूरी होती है’: ईरान ने जिस जहाज को बनाया बंधक, उस पर सवार भारतीय महिला ऐन टेस्सा जोसफ घर लौटीं

ईरान में कब्ज़े में लिए गए मालवाहक जहाज़ एमएससी एरीज़ पर काम करने वाली केरल की एन टेसा जोसफ़ भारत लौट आई हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि तेहरान में भारतीय दूतावास मालवाहक जहाज़ पर अब भी मौजूद 16 लोगों के बारे बातचीत कर रहा है। बयान में कहा गया है कि जहाज़ पर मौजूद सभी भारतीय स्वस्थ हैं और उन्हें भारत में अपने परिवार से बातचीत करने दी जा रही है।

विदेश मंत्रालय ने बताया है कि तेहरान में भारतीय मिशन और ईरानी सरकार के ठोस प्रयासों से केरल के त्रिशूर की रहने वाली भारतीय डेक कैडेट एन टेसा जोसेफ, जो कंटेनर जहाज एमएससी एरीज़ के भारतीय चालक दल के सदस्यों में से थीं, आज (18 अप्रैल 2024) दोपहर कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित रूप से उतर गई हैं। कोचीन हवाई अड्डे पर क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने जोसेफ का स्वागत किया।

तेहरान में भारतीय मिशन मामले से अवगत है और कंटेनर जहाज के शेष 16 भारतीय चालक दल के सदस्यों के संपर्क में है। चालक दल के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा है और वो सभी भारत में अपने परिवार के सदस्यों के संपर्क में हैं। भारतीय मिशन एमएससी एरीज़ के शेष चालक दल के सदस्यों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ भी संपर्क में है।

इससे पहले, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इस मामले पर अपने ईरानी समकक्ष विदेश मंत्री अमीर अब्दुल्लाहियन से बात की थी। उन्होंने ईरान में स्थित भारतीय दूतावास के कामों की तारीफ की और कहा कि एन टेसा जोसेफ की वापसी से खुश हूँ। उन्होंने कहा कि मोदी की गारंटी हमेशा पूरी होती है, घर हो या बाहर।

बता दें कि ईरानी कमांडो ने शनिवार (13 अप्रैल 2024) को 17 भारतीय चालक दल के सदस्यों को ले जा रहे एक इजरायली-संबद्ध कंटेनर जहाज को जब्त कर लिया था। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड के सदस्य एक हेलीकॉप्टर से होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पुर्तगाली ध्वज वाले एमएससी एरीज़ पर उतरे और जहाज को ईरानी जलक्षेत्र में ले गए। यह जहाज भारत आ रहा था। यह जहाज लंदन स्थित ज़ोडियाक मैरीटाइम से जुड़ा है। ज़ोडियाक मैरीटाइम इज़रायली अरबपति इयाल ओफ़र के ज़ोडियाक समूह का हिस्सा है।

ईरान में जब्त किए गए जहाज के चालक दल में शामिल भारतीयों के परिजनों ने केंद्र सरकार से उनकी जल्द से जल्द रिहाई की माँग थी। इसके बाद सोमवार को ईरान ने जहाज पर मौजूद भारतीयों को अपने परिजनों से बात करने की अनुमति दी थी और अब एक भारतीय को रिहा भी कर दिया है।

फिल्म ‘कबीर सिंह’ में काम करने पर आदिल हुसैन ने जताया अफसोस, बोले ‘एनिमल’ के डायरेक्टर रेड्डी वांगा- लालची, तुम्हारा चेहरा बदल दूँगा

हाल में फिल्म अभिनेता आदिल हुसैन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ‘कबीर सिंह’ करना उनके जीवन की सबसे बड़ी गलती थी और इसका उन्हें बहुत अफसोस है। उनके इस इंटरव्यू की वीडियो सार्वजिनक प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होने के बाद अब फिल्म के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ने इस पर प्रतिक्रिया दी है।

संदीप ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर ट्वीट कर लिखा है- “30 कला फिल्मों के विश्वास ने आपको इतनी पॉपुलैरिटी नहीं दिलाई होगी, जो एक ब्लॉकबस्टर के अफसोस ने आपको दिलाई है।” वांगा ने आगे तीखे शब्दों में आदिल की आलोचना करते हुए कहा, “मुझे तुम्हें कास्ट करने का अफसोस है, ये जानते हुए भी कि तुम्हारा लालच, जुनून से काफी हद तक बड़ा है। अब AI की सहायता से आपके फेस को फिल्म में बदलकर आपको शर्म से बचाऊँगा। मुझे लगता है अब आपके लिए सब ठीक होगा।”

बता दें कि कबीर सिंह फिल्म साल 2019 में आई थी। ये तेलुगु फिल्म अर्जुन रेड्डी की रीमेक है। इस मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर अपार सफलता हासिल की थी और 278 करोड़ का बंपर कलेक्शन किया था। इस फिल्म में आदिल हुसैन ने कॉलेज डीन का रोल अदा किया था। अब पाँच साल बाद उन्होंने इस रोल पर एक इंटरव्यू में टिप्पणी की।

फिल्म करने पर अफसोस जताते हुए उन्होंने वीडियो में कहा कि शुरुआत में उन्होंने टाइम की कमी की वजह से फिल्म करने से मना कर दिया था। बाद में मेकर्स ने उन्हें सीन भेजा तो उन्होंने मेकर्स से पूरी स्क्रिप्ट माँगी लेकिन मेकर्स ने उन्हें तेलुगु फिल्म अर्जुन रेड्डी, जिसपर कबीर सिंह बेस्ड है उसकी स्क्रिप्ट भेजी। आदिल कहते हैं कि उन्हें स्क्रिप्ट देखने का टाइम नहीं मिला, इसलिए उन्होंने मैनेजर से फिल्म के लिए मेकर्स से ज्यादा पैसे माँगने के लिए कहा, जिससे वह खुद ही उन्हें कास्ट करने से मना कर दें, लेकिन उनका ऑफर एक्सेप्ट हो गया।

क्यों विवादों में घिरी सेरेलक बनाने वाली नेस्ले, बेबी फूड में कैसे कर रही मिलावट: जानिए सबकुछ, खुलासे के बाद एक्टिव हुईं भारतीय एजेंसियाँ

खाने पीने के उत्पाद बनाने वाली कम्पनी नेस्ले के भारतीय समेत तमाम विकाशील या गरीब देशों के बच्चों पर दोहरे मानक सामने आ गए हैं। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नेस्ले भारतीय बच्चों के लिए बेचे जाने फूड सेरेलेक में मिठास के लिए चीनी जैसे उत्पाद मिलाती है जबकि यही काम यूरोप के बच्चों के लिए नहीं किया जाता। भारतीय बच्चों और यूरोपियन बच्चों के लिए बेंचे जाने एक ही उत्पाद में इतना अंतर कैसे है,नेस्ले से इस बात का जवाब देते नहीं बन रहा है। अब भारत सरकार भी इस मामले का संज्ञान ले रही है।

क्या है पूरा मामला?

स्विटज़रलैंड के पब्लिक आई और इंटरनेशनल बेबीफूड एक्शन नेटवर्क (IBFAN) ने पूरे विश्व से नेस्ले के बच्चों के लिए बेंचें जाने वाले उत्पादों के सैंपल की जाँच की है। भारत समेत कई देशों में यह उत्पाद सेरेलेक के नाम से बेचा जाता है। यह उत्पाद छोटे बच्चों को खाने के रूप में दिया जाता है। फिलिपीन्स में बेचे जाने वाले इसी उत्पाद में प्रति खुराक में 7.3 ग्राम चीनी पाई गई। स्विटज़रलैंड समेत अन्य यूरोपियन देशों में बेंचे जाने वाले इन्हीं उत्पादों में बिलकुल भी चीनी नहीं थी।

इस रिपोर्ट में बताया गया कि नेस्ले सेरेलेक के सभी उत्पादों में चीनी डाली जाती है। औसतन यह 4 ग्राम होती है। सबसे ज्यादा फ़िलीपीन्स के सैंपल में चीनी पाई गई। यूरोपियन बाजारों के सैंपल में चीनी नहीं मिली। भारत से लिए गए सैंपल की जाँच में भी बड़े खुलासे हुए। भारत में बिकने वाले सेरेलेक में औसतन हर खुराक में 3 ग्राम चीनी पाई गई है। यह भी बताया गया है कि चीनी इस उत्पाद में डाली गई लेकिन उसके विषय में डिब्बों पर स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया।

नेस्ले सेरेलेक सुगर

रिपोर्ट में बताया गया है, “भारत में, जहाँ इस उत्पाद की बिक्री 2022 $250 मिलियन (लगभग ₹2000 करोड़) के पार थी, सभी सेरेलैक बेबीफूड में प्रति खुराक लगभग 3 ग्राम अतिरिक्त चीनी होती है। यही स्थिति अफ्रिका के मुख्य बाज़ार दक्षिण अफ़्रीका में भी है, जहाँ सभी सेरेलैक प्रति खुराक में 4 ग्राम या अधिक चीनी होती है।”

सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत तमाम देशों में भी नेस्ले ने यही किया। यह भी बताया गया कि इनमें से कुछ पैकेज पर इनमें चीनी होने की बात लिखी तक नहीं थी। इन उत्पादों में शहद के रूप में चीनी थी जिसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मना करता है।

नेस्ले का यह कदम बच्चों के लिए खतरनाक क्यों?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के खाने में छोटी उम्र से ही अधिक चीनी दिया जाना ठीक नहीं है। इससे उनमें मोटापा, ह्रदय सम्बंधित बीमारियाँ और कैंसर आदि का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा बच्चों के दांतों पर भी चीनी का विपरीत प्रभाव पड़ता है। मिठास के लिए उत्पाद कम्पनियाँ उपयोग करती हैं, वह भी शुद्ध चीनी ना होकर अन्य मिठास वाले उत्पाद होते हैं। ऐसे में इनसे बचने की सलाह दी जाती है।

औपनिवेशिक सोच का नतीजा

नेस्ले के दोहरे मानकों पर सवाल उठाते हुए, जोहान्सबर्ग में विटवाटरसैंड विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य के प्रोफेसर और एक बाल रोग विशेषज्ञ करेन हॉफमैन ने पब्लिक आई से कहा, ”मुझे समझ में नहीं आता कि दक्षिण अफ्रीका बिकने वाले उत्पाद उन उत्पादों से अलग क्यों है जो विकसित देशों में बेचे जाते हैं। यह औपनिवेशीकरण का एक रूप है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। बच्चों के खाने में चीनी मिलाना भी एकदम सही नहीं है।”

नेस्ले ने क्या कहा?

नेस्ले ने इस मामले पर बयान जारी किया है। भारत में नेस्ले के प्रवक्ता ने कहा है, “नेस्ले इंडिया अपने उपभोक्ताओं को सबसे अच्छा न्यूट्रीशन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, यह हम पिछले 100 सालों से कर रहे हैं और हम हमेशा अपने उत्पादों में पोषण, गुणवत्ता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखेंगे।”

भारत में खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवता का प्रमाणन करने वाली एजेंसी FSSAI ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और पब्लिक आई की रिपोर्ट के बाद इस पर कार्रवाई करेगी।

‘चुनाव प्रचार से दूर रहें BJP नेता’: छत्तीसगढ़ में कसा शिकंजा तो बौखलाए नक्सली, जगह-जगह टाँगे हत्या की धमकी वाले बैनर-पोस्टर

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ भाजपा सरकार की कार्रवाई को कॉन्ग्रेस ने फेक बताया था। इसके बाद नक्सलियों ने बस्तर में बैनर टाँग कर भाजपा नेताओं को धमकी दी है। नक्सलियों ने बैनर-पोस्टर के माध्यम से कहा कि जनजातीय समुदाय के लोगों की मौत की जिम्मेदार भाजपा है। इसलिए वे लोकसभा चुनाव प्रचार से दूर रहें, वर्ना तिरुपति कटला और कैलाश नाग जैसा अंजाम होगा और मारे जाओगे।

दरअसल, अभी दो-तीन दिन पहले केंद्रीय बलों ने कांकेर जिले में एक मुठभेड़ में 29 नक्सलियों को मार गिराया था। नक्सलियों की इतने बड़े पैमाने पर झटका देने के बाद यह वाकया सामने आया है। उन्होंने दंतेवाड़ा जिले के इंद्रावती नदी के पास छिंदनार, चेरपाल और तुमरीगुंडा मार्ग पर भारी संख्या में बैनर पोस्टर चस्पा किए हैं। हालाँकि, पुलिस ने सभी बैनर-पोस्टर्स को हटा दिया है।

इन बैनर-पोस्टर पर भाजपा नेताओं को चेतावनी दी गई है और उन्हें चुनाव प्रचार से दूर रहने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है। इसके साथ ही जिले के छिंदनार-तुमरीगुंडा रास्ते पर उन्होंने पेड़ों को काटकर और पत्थरों से सड़क को जाम कर दिया है। नक्सलियों की चेतावनी के बाद इलाके के भाजपा नेताओं में दहशत का माहौल है।

नक्सलियों ने बैनर-पोस्टर और पर्चे में लिखा है, “बीजेपी नेता और कार्यकर्ता चुनाव प्रचार से दूर रहें, आदिवासियों के हत्याओं के लिए बीजेपी के नेता लोग ही जिम्मेदार हैं। चुनाव प्रचार में शामिल होने वाले बीजेपी नेताओं को तिरुपति कटला और बीजेपी नेता रहे कैलाश नाग जैसी सजा मिलेगी।” वहीं, पुलिस ने किसी भी नेता को बिना जानकारी के प्रचार में जाने से मना किया है।

इससे पहले बुधवार (17 अप्रैल 2024) को नक्सलियों ने राज्य के सुकमा जिले के केरलापेदा में पोलिंग बूथ पर चुनाव बहिष्कार को लेकर पर्चे लगाए। इसके अलावा, उन्होंने दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार इलाके के पाहुरनार, छोटे करका, चेरपाल, तुमरीगुंडा में नक्सलियों ने बीजेपी नेता और कार्यकर्ताओं को धमकी भरा पत्र जारी किया है। इससे स्थानीय भाजपा नेताओं में दहशत का माहौल है।

बता दें कि अभी दो दिन पहले ही नारायणपुर जिले में बीजेपी नेता और दण्डवन गाँव के उप सरपंच पंचमदास मानिकीपुरी को घर से अगवा करके उनकी हत्या कर दी थी। नक्सलियों ने कॉन्ग्रेस नेता अमित भद्र और बीजेपी सरपंच बिसेल नाग को भी जान मारने की धमकी दी है। दरअसल, पिछले दो सालों में नक्सलियों ने संभाग के अलग-अलग जिलों में 10 से अधिक बीजेपी नेताओं की अब तक हत्या कर दी है।

दरअसल, नक्सली हमेशा से बस्तर में चुनावों का बहिष्कार करते रहे हैं। चुनाव के दौरान नेताओं की हत्या, अपहरण और चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं लेने की धमकी अक्सर दी जाती है। इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया है। बस्तर में मतदान प्रथम चरण में ही 19 अप्रैल को होना है। इसको लेकर नक्सली सक्रिय हो गए हैं और जगह-जगह धमकी एवं चुनाव बहिष्कार की पर्ची फेंक रहे हैं।