Home Blog Page 1019

सोई रही सरकार, संतों को पीट-पीटकर मार डाला: 4 साल बाद भी न्याय का इंतजार, उद्धव के अड़ंगे से लेकर CBI जाँच तक जानिए कहाँ तक पहुँचा पालघर का केस

महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की निर्मम हत्या मामले में हाल में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मुख्यमंत्री शिंदे वाली शिवसेना के एक नेता ने दावा कर बताया कि पालघर में हिंदू साधुओं की हत्या पर सीबीआई की जाँच इसलिए नहीं हुई थी क्योंकि उद्धव ठाकरे उस समय सो रहे थे और राहुल गाँधी के दबाव में उन्होंने इस मामले में एक्शन नहीं लिया था। आज उस मॉब लिंचिंग की घटना को 4 वर्ष बीत गए हैं। साल 2022 में जब महाराष्ट्र में NDA सरकार बनी तो ये मामला सीबीआई को सौंपा गया, लेकिन जाँच एजेंसी के पास जाने से पहले इस मामले में क्या-क्या हुआ था… आइए जानते हैं।

16 अप्रैल 2020- पालघर में साधुओं की हत्या

16 अप्रैल 2020 को पालघर में कल्पवृक्ष गिरि और सुशील गिरि नाम के दो साधुओं और उनके ड्राइवर को पालघर में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला गया था। जब यह घटना हुई थी, तब दोनों साधु मुंबई से सूरत की यात्रा कर रहे थे। इस दौरान 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने उन्हें रोक लिया था और पथराव करने के बाद उनकी कार को उलट दिया था। भीड़ ने साधुओं की इतनी पिटाई की थी कि उन्होंने अपना दम तोड़ दिया था।

घटना की एक वीडियो भी सामने आई थी। इस वीडियो में साधुओं को निर्ममता से पीटते देखा गया था। वीडियो दिल दहलाने वाली थी। साधु पुलिस के भरोसे भीड़ के बीच तक आए थे। उन्हें लगा था कि शायद पुलिस उन्हें बचा लेगी, लेकिन हुआ क्या? एकदम उलटा। जब भीड़ ने साधुओं के ऊपर हमला किया तो उनके बचाव की जगह हर कोई मूकदर्शक बन गया। आज भी बुजुर्ग साधु की उस वीडियो को शेयर करके कहा जा रहा है कि इन साधुओं को 4 साल बाद भी न्याय नहीं मिला है।।

उद्धव सरकार ने सीबीआई जाँच का किया विरोध, शिंदे सरकार मानी

साल 2023 में एकनाथ शिंदे की सरकार ने इस मसले पर सीबीआई जाँच कराने का फैसला लिया। बात सुप्रीम कोर्ट तक पहुँची तो सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई जाँच को मंजूरी दी और कहा कि राज्य सरकार ने फैसला ले लिया है तो इस पर कोर्ट के किसी प्रकार के निर्देश की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट का ये कहना दिखाता है कि अगर उद्धव सरकार भी चाहती तो इस मामले में वो सीबीआई की जाँच करवा सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने इस दिशा में कदम ही आगे नहीं बढ़ाए।

इस मामले में उन्होंने बाकायदा सुप्रीम कोर्ट में जाकर सीबीआई जाँच का विरोध किया था। उद्धव ठाकरे सरकार की ओर से यह दलील दी गई थी कि महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है। साथ ही, जिन पुलिसकर्मियों ने इसकी जाँच में लापरवाही की थी, उनके खिलाफ एक्शन भी लिया जा चुका है।

ईसाई मिशनरियों का हाथ

गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ इस हत्या मामले से उद्धव सरकार का हिंदूविरोधी चेहरा उजागर हुआ था। वहीं पड़ताल के दौरान कुछ एंगल भी सामने आए थे जो बेहद चौंकाने वाले थे। पालघर में साधुओं की लिंचिंग के बाद मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि आदिवासी इलाकों में हिंदू संतों के खिलाफ एक हवा बनाई गई और इसी कारण संतों की मॉब लिंचिंग हुई। उस साजिश में ईसाई मिशनरियों के हाथ होने के भी संकेत मिले थे।

बताया गया था कि इलाके में सक्रिय ईसाई मिशनरियों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है और उन्हीं लोगों ने भीड़ को साधुओं के खिलाफ भड़काया। इसके अलावा ये रिपोर्ट भी सामने आई थी कि घटना के वक्त भीड़ के साथ एनसीपी नेता और सीपीएम नेता भी मौजूद थे।

धीरे-धीरे आरोपितों को मिली जमानत

हिंदू संगठनों ने इस मुद्दे को जगह-जगह उठाया था। मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर इसकी कवरेज लगातार होने पर प्रशासन ने इसमें अपनी जो कार्रवाई की। उसमें कुछ डिटेल्स सामने आई। ये पता चला कि उस दिन साधुओं को मारने में 400-500 लोग भीड़ का हिस्सा थे। बाद में पुलिस ने इनमें से 180 लोगों को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किया था। लेकिन इनमें से कई आरोपितों को जमानत मिलती गई।

2020 के लिंचिंग मामलें में 2021 में विशेष अदालत ने 89 लोगों को जमानत दी। इसके बाद 2022 में 10 और लोगों को जमानत दे दी गई। जस्टिस ने कर्क दिया कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों, वीडियो फुटेज में मृतक के साथ करने वाले हमलावरों और उकसाने वाले लोगों में अंतर होता है।

यूपी में होता तो उलटा टंगवा देता- सीएम योगी

हाल में पालघर का यह मामला महाराष्ट्र में दोबारा तब गरमाया जब एकनाथ शिंदे की सरकार बनी और उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। सीबीआई जाँच को अनुमति तो मिली ही। साथ ही शिंदे गुट के विधायक प्रताप सरनाईक अपनी ओर से दोनों संतों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए दिए गए। मालूम हो कि इस एक घटना ने देश के हर हिंदू को झकझोर दिया था। कुछ दिन पहले वर्धा में चुनावी सभा के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर कहा भी था कि यहाँ पालघर में साधुओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है। उत्तर प्रदेश में ऐसा होता तो मैं आरोपितों को उल्टा टंगवा देता।

‘मोदी की गारंटी’ भी होगी पूरी: 2014 और 2019 में किए इन 10 बड़े वादों को मोदी सरकार ने किया पूरा, पढ़ें- क्यों जनता चाहती है ‘तीसरी बार मोदी सरकार’

भारतीय जनता पार्टी ने 14 अप्रैल 2024 को लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना ‘संकल्प पत्र’ यानी चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया। भाजपा का घोषणापत्र “मोदी की गारंटी” टैगलाइन के साथ जारी किया गया है। ‘मोदी की गारंटी’ शब्द का इस्तेमाल बीजेपी लोकसभा चुनाव के शंखनाद से कई माह पहले से कर रही है। बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कई अहम वादे किए हैं, जिसमें यूसीसी, वन नेशन-वन इलेक्शन, महिला सशक्तिकरण, युवाओं और गरीबों का उत्थान प्रमुख है।

बीजेपी के नए चुनावी घोषणा पत्र को देखने के साथ ही ये जान लेना भी जरूरी है कि मोदी सरकार ने अपने पिछले 2 कार्यकाल में कौन से बड़े चुनावी वादे किए थे और उनमें से कितने पूरे हुए। हम यहाँ उन 10 बड़े वादों को रख रहे हैं, जिन्हें मोदी सरकार ने साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में किए थे और वो पूरे हो चुके हैं।

राम मंदिर निर्माण

भाजपा ने साल 2014 और 2019 दोनों घोषणापत्रों में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की बात कही थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्भरता की बात कही थी। साल 2014 में बीजेपी ने कहा था कि “भाजपा अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की सुविधा के लिए संविधान के ढाँचे के भीतर सभी संभावनाओं का पता लगाने के लिए अपना रुख दोहराती है”। साल 2019 के घोषणापत्र में भाजपा ने कहा, “हम राम मंदिर पर अपना रुख दोहराते हैं। हम संवैधानिक ढाँचे के भीतर सभी संभावनाओं का पता लगाएँगे और अयोध्या में राम मंदिर के शीघ्र निर्माण की सुविधा के लिए सभी आवश्यक प्रयास करेंगे।” ये वो मुद्दा है, जिसपर विपक्ष लगातार बीजेपी का मजाक उड़ाता रहा है। ये कहते हुए कि ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, लेकिन तारीख नहीं बताएँगे।’

विपक्ष द्वारा मजाक उड़ाने के बावजूद बीजेपी ने इस मुद्दे पर कोई हड़बड़ी नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में जब हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया, तो राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ। और अब नतीजा देखिए कि बीजेपी सरकार ने बेहद तेजी से काम किया और इस साल के पहले माह में ही रामलला की प्राण प्रतिष्ठा भगवान राम के भव्य मंदिर में हो चुकी है।

खास बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर निर्माण की निगरानी की और हर काम से जुड़े रहे, इस बात के बावजूद कि मंदिर में एक भी पैसा सरकार का नहीं लगा, बल्कि करोड़ों भक्तों द्वारा दिए गए दान से हुआ। अब हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन रामलला के दर्शन कर रहे हैं और खास मौकों पर ये संख्या लाख को पार कर जाती है।

अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाना

बीजेपी ने साल 2014 के अपने घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 को खत्म करने का वादा किया था, साल 2019 के घोषणापत्र में पार्टी ने न सिर्फ बेहतर दूरदर्शिता दिखाई बल्कि अनुच्छेद 35ए को खत्म करने की भी बात कही। साल 2014 के घोषणापत्र में कहा गया था, “बीजेपी अनुच्छेद 370 पर अपना रुख दोहराती है, और सभी हितधारकों के साथ इस पर चर्चा करेगी और इस अनुच्छेद को निरस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।” दूसरी ओर 2019 के घोषणापत्र में बताया गया कि कैसे सत्तारूढ़ दल ने निर्णायक कार्यों और दृढ़ नीति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए।

साल 2019 में मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में संसद के पहले पूर्ण सत्र में ही अपना सबसे बड़ा वादा पूरा किया और बता दिया कि देश में ‘एक देश-एक संविधान और एक विधान’ का समय आ चुका है। मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया और अनुच्छेद 35ए को भी। इसे सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई, जिसे खारिज कर दिया गया। आज जम्मू-कश्मीर में भी देश के अन्य राज्यों की तरह केंद्र के सभी कानून लागू होते हैं। जम्मू-कश्मीर में विकास की नई बयार चली है।

‘मेक इन इंडिया इन डिफेंस’ और रक्षा बुनियादी ढांचा

बीजेपी के साल 2014 और साल 2019 के दोनों घोषणापत्रों में रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ की अहम जगह थी। बीजेपी ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास में वृद्धि और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास की घोषणा की थी, जिसे मोदी सरकार ने पूरा किया। आज भारत के रक्षा निर्यात में 20 गुना की बढ़ोतरी हुई है। भारत के हथियारों का इस्तेमाल दुनिया के तमाम देश कर रहे हैं।

भारत में रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश भी कई गुना बढ़ा है। भारत में फाइटर जेट के इंजन तक बनने का काम शुरू हो रहा है, तो ड्रोन से लेकर तोप, तेजस विमान, पनडुब्बियाँ जैसी तमाम भारी मशीनरी भारत में ही बन रहे हैं। भारत सरकार ने 928 सामानों की खरीदी पर बैन लगा दिया है और उन्हें भारत में ही उत्पादित किया जा रहा है। आपात स्थिति में छोड़कर गोला बारूद की खरीदारी पर भी रोक लग गई है।

इसके अलावा कई परियोजनाएं जो वर्षों से रुकी हुई थीं, मोदी सरकार के तहत तेजी से आगे बढ़ी हैं। उदाहरण के लिए, इसका एक प्रमुख उदाहरण भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान, एलसीए तेजस है। तेजस को 1980 के दशक में मंजूरी दी गई थी, इसकी पहली सफल उड़ान 2001 में वाजपेयी सरकार के दौरान हुई थी। इसके बाद, परियोजना धीमी गति से आगे बढ़ती रही।

मोदी सरकार के तहत इस परियोजना को गति मिली। 2015 में तेजस को पहली बार वायुसेना में शामिल किया गया था. वर्तमान में, भारतीय वायु सेना के पास लगभग 40 तेजस एमके1 विमान हैं, जबकि उसने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को लगभग 83 और तेजस एमके1 (तेजस मार्क-1ए का उन्नत संस्करण) का ऑर्डर दिया है। हाल ही में भारतीय वायु सेना ने खतरनाक लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को शामिल किया, जिनकी लंबे समय से प्रतीक्षा थी। इसके अलावा सेना ने 550 अर्जुन मार्क-1 टैंक का ऑर्डर दिया है।

सड़क और राजमार्ग

2014 के घोषणापत्र में, भाजपा ने पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में विश्व स्तरीय राजमार्गों, तटीय राजमार्गों और बेहतर सड़क बुनियादी ढांचे की बात की थी। 2019 के घोषणापत्र में, भाजपा ने कहा कि उसने गाँवों को ग्रामीण सड़कों से जोड़ने के लिए 60,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की योजना बनाई है। ये राजमार्ग गोदामों और अन्य जैसी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का हिस्सा हैं। पार्टी ने 2022 तक राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई दोगुनी करने का भी वादा किया। देश की प्रगति में सड़क बुनियादी ढाँचा सबसे महत्वपूर्ण है और मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किया है।

बीजेपी ने वादा किया था कि 2023 तक 99% गाँव सड़कों से जुड़ जाएँगे। 2013-14 में सड़क निर्माण 11.6 किमी/प्रतिदिन था। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, उस अवधि में केवल 4,300 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण किया गया था। हालाँकि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद गति तेजी से बढ़ी और 2022-23 में यह 28.3 किमी/दिन तक पहुँच गई। अगर कुल सड़क निर्माण की बात करें तो जुलाई 2023 तक यह 91 किमी प्रति दिन की दर से 7,42,398 किमी थी। मार्च 2014 तक कुल सड़कें 80 किमी प्रति दिन की दर से 3,81,393 किमी थीं।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सचिव अनुराग जैन के अनुसार, पिछले दशक में देश भर में 95,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ है । 2014 के आंकड़ों की तुलना करने पर, यह 28.3 किमी से अधिक राजमार्गों के औसत दैनिक निर्माण का अनुवाद करता है, जो 143% की पर्याप्त वृद्धि दर्शाता है। 

रेलवे

साल 2014 के घोषणापत्र में भाजपा ने तीर्थयात्रा रेल, रेलवे मॉडरेशन और आवश्यक बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक उपयोगिताओं के साथ सभी स्टेशनों के आधुनिकीकरण का वादा किया था। 2019 में, भाजपा ने रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण, वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी नई संस्करण ट्रेनों और बहुत कुछ का वादा किया। आज देश भर में 51 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। पिछले एक दशक में भारतीय रेलवे नेटवर्क में  व्यापक परिवर्तन हुए हैं। रेलवे में आधुनिकीकरण के प्रयास जारी हैं और मोदी सरकार ने इस प्रयास के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की है। रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिससे देश भर में तेजस, वंदे भारत और गतिमान एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों की शुरुआत संभव हो सकी है।

खौस तौर पर रेलवे क्षेत्र में मोदी सरकार की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि  94% नेटवर्क का विद्युतीकरण है । 2014 में, जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली, तब देश का केवल 21,801 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क विद्युतीकृत था। वर्तमान में देश के 61,000 किमी से अधिक रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है । यूपीए सरकार के तहत, दैनिक विद्युतीकरण दर 1.42 किलोमीटर थी, जबकि मोदी सरकार के तहत यह बढ़कर 14 किलोमीटर प्रति दिन हो गई है। मोदी प्रशासन ने विद्युतीकरण प्रयासों के लिए ₹43,346 करोड़ आवंटित किए हैं।

इसके अलावा न केवल विद्युतीकरण बल्कि नई रेलवे लाइनें बिछाने में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान कुल 25,871 किलोमीटर नई लाइनें स्थापित की गईं। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान रेलवे को पर्याप्त मात्रा में धन आवंटित किया गया है। 2014 में रेलवे को लगभग ₹29,000 करोड़ का बजट मिला था। साल 2024-25 तक यह बजट लगभग आठ गुना बढ़कर ₹2.90 लाख करोड़ हो गया है। नई लाइनों और विद्युतीकरण परियोजनाओं में निवेश के अलावा, मोदी सरकार स्टेशन पुनर्विकास पहल पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।

ऊर्जा

ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता पिछले दस वर्षों में किए गए कार्यों से दिखाई देती है। साल 2014 के घोषणापत्र में ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को भारत के ऊर्जा मिश्रण के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में उल्लेख किया गया था। 2019 तक, इस क्षेत्र में बहुत काम किया गया था और घोषणापत्र में भविष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप था।

साल 2019 के घोषणापत्र में भाजपा ने उल्लेख किया कि भारत प्रभावी और व्यवहार्य हस्तक्षेपों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने में एक वैश्विक चैंपियन बन गया है। उस समय तक, भारत ने 76.87 गीगावॉट की संचयी स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल कर ली थी, साथ ही 175 गीगावॉट का अपना घोषित लक्ष्य भी हासिल कर लिया था।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 6 दिसंबर 2023 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 31 अक्टूबर 2023 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से कुल 186.46 गीगावॉट क्षमता स्थापित की गई थी। इसमें 178.98 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल थी। ऊर्जा और 7.48 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा। इसके अलावा, 114.08 गीगावॉट क्षमता कार्यान्वयनाधीन है और 55.13 गीगावॉट क्षमता निविदा के अधीन है।

स्वास्थ्य देखभाल

सत्तारूढ़ पार्टी के 2014 के घोषणापत्र में टेलीमेडिसिन, मोबाइल हेल्थकेयर और योग और आयुष सहित भारतीय चिकित्सा प्रणाली के बारे में बात की गई थी। 2019 तक, आयुष्मान भारत के तहत प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना ने 10.74 करोड़ गरीब परिवारों को स्वास्थ्य कवर प्रदान किया। इसके अलावा, एमबीबीएस सीटों में 18,000 और पीजी मेडिकल सीटों में 12,000 की बढ़ोतरी की गई। नये एम्स स्थापित किये गये।

साल 2019 के घोषणापत्र में बीजेपी ने फिर टेलीमेडिसिन की बात की। विशेष रूप से साल 2020 में जब COVID-19 महामारी आई, तो स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में अचानक बदलाव आया। टेलीमेडिसिन एक आवश्यकता बन गई। भारत सरकार ने मरीजों को डॉक्टरों से जोड़ने के लिए ईसंजीवनी ऐप लॉन्च किया। फरवरी 2023 तक, ऐप पर 10 करोड़ टेली-परामर्श हुए, जिससे यह एक बड़ी सफलता बन गई। इसके अलावा, जनऔषधि केंद्र में सस्ती दवाओं ने विशेष रूप से गरीब परिवारों के लिए स्वास्थ्य पर खर्च को प्रभावी ढंग से कम कर दिया। 31 जनवरी 2024 तक देश में 10,607 जनऔषधि केंद्र कार्यरत हैं। इन दुकानों में किफायती कीमतों पर लगभग 1,965 दवाएं और 293 सर्जिकल आइटम उपलब्ध हैं।

न्यायिक सुधार

साल 2014 और साल 2019 के दोनों घोषणापत्रों में भाजपा ने न्यायिक सुधारों की बात की। 2014 में, इसने न्याय वितरण को सरल, त्वरित और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार करने की प्रतिबद्धता जताई। साल 2019 में इसने प्रक्रियात्मक कानूनों के सरलीकरण की दिशा में काम करने का वादा किया।

भारत सरकार ने ब्रिटिश काल के आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम की जगह नए आपराधिक कानून पेश किए। वे 1 जुलाई 2024 को मौजूदा प्रणाली को बदल देंगे। भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता, और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) भारतीय दंड संहिता 1860, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की जगह ले लेंगे। 1973 का, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का।

तीन विधेयक पहली बार 11 अगस्त, 2023 को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयक के रूप में लोकसभा में पेश किए गए थे। उन्हें आगे की जांच के लिए बृज लाल की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति के पास भेजा गया। 21 दिसंबर को राज्यसभा द्वारा पारित होने से पहले उन्हें 20 दिसंबर को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। 25 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिलने के बाद तीन नए आपराधिक संहिता विधेयक कानून बन गए। ब्रिटिश काल के कानूनों से छुटकारा पाने में भारत को 75 साल लग गए। कानूनों के बारे में अधिक जानकारी यहां जाँची जा सकती है ।

नागरिकता संशोधन कानून या CAA

बीजेपी ने अपने 2019 के घोषणापत्र में नागरिकता संशोधन बिल लाने का वादा किया था. घोषणापत्र में कहा गया है, “हम उत्पीड़न से बचने वाले पड़ोसी देशों के धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम पूर्वोत्तर राज्यों की आबादी के उन वर्गों के मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए सभी प्रयास करेंगे जिन्होंने कानून के बारे में आशंकाएँ व्यक्त की हैं। हम पूर्वोत्तर के लोगों की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। भारत के पड़ोसी देशों से उत्पीड़न से बचकर आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख और ईसाइयों को भारत में नागरिकता दी जाएगी।

नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) पहली बार 15 जुलाई 2016 को संसद में पेश किया गया था। बीजेपी सरकार बनने के सात महीने के भीतर इसे 11 दिसंबर 2019 को लोकसभा और राज्यसभा में पारित किया गया था। भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से मंजूरी मिलने के बाद नागरिकता संशोधन कानून लागू हो गया। कोविड-19 महामारी के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण सीएए नियमों को अधिसूचित करना संभव नहीं था। भारत सरकार विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया कि सीएए नियमों को जल्द से जल्द अधिसूचित किया जाएगा। नियमों को अंततः 11 मार्च 2024 को अधिसूचित किया गया।

सीएए पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश सहित भारत के पड़ोसी तीन मुस्लिम-बहुल देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई और जैनियों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करके भारत में शरण लेने की अनुमति देगा। जो लोग 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे, वे सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक समर्पित पोर्टल है जिसका उपयोग वे नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए कर सकते हैं।

महिला आरक्षण

भाजपा ने साल 2014 और साल 2019 के दोनों घोषणापत्रों में संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संसदीय और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा किया था। 2014 के घोषणापत्र में कहा गया था, “महिलाओं के कल्याण और विकास को सरकार के भीतर सभी स्तरों पर उच्च प्राथमिकता दी जाएगी, और भाजपा संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संसदीय और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।” साल 2019 के घोषणापत्र में लिखा था, “सरकार के भीतर सभी स्तरों पर महिलाओं के कल्याण और विकास को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी, और भाजपा संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।”

महिला आरक्षण विधेयक 19 सितंबर 2023 को संसद में पेश किया गया और इसे दोनों सदनों ने पारित कर दिया। कानून के अनुसार, निचले सदन या लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें। इसमें एससी/एसटी समुदाय की महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें शामिल होंगी। हालाँकि यह संसद में पारित हो गया, आरक्षण का 2024 के चुनावों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। हालाँकि, इसका असर 2029 के चुनावों पर पड़ेगा। यह विधेयक 2027 के बाद लागू होगा जब जनगणना की जाएगी और मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण किया जाएगा।

ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में अनुराग ने लिखी है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

रामपुर से सपा प्रत्याशी मोहिबुल्लाह नदवी ने आम्बेडकर की चित्र पर नहीं चढ़ाया फूल: सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल, दलित-मुस्लिम एकता में आयोजित हुई थी सभा

उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी मोहिबुल्लाह नदवी का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि मोहिबुल्लाह नदवी ने डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर के चित्र पर फूल नहीं चढ़ाया। सोशल मीडिया पर इसे डॉक्टर आम्बेडकर का अपमान बताया जा रहा है। वीडियो में नदवी कहते हुए दिख रहे हैं कि उन्होंने अपने अंदाज में माल्यार्पण कर दिया है।

वीडियो के अंत में दिख रहा है कि इसके बाद नदवी वहाँ से तेजी से निकल गए। फूल चढ़ाने से इनकार करने से संबंधित जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो पुलिस का एक जवान और एक टोपी वाला व्यक्ति उसे मोहिबुल्लाह तक पहुँचने से रोकता है। यह वीडियो रविवार (14 अप्रैल 2024) को BK स्पीड न्यूज़ नाम के एक यूट्यूब चैनल पर शेयर हुआ है।

इस वीडियो की शुरुआत में पत्रकार ने बताया है कि रामपुर में 14 अप्रैल को डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर की जयंती पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें समाजवादी पार्टी के तमाम नेता शामिल हुए थे। आयोजन का मकसद भी दलित-मुस्लिम एकता को मजबूती देना था। तमाम मंचासीन वक्ताओं ने अपने सम्बोधन दिए। कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर आम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।

बताया जा रहा है कि तमाम नेताओं ने बारी-बारी से डॉक्टर अम्बेडकर की मूर्ति पर फूल चढ़ाए, लेकिन समाजवादी प्रत्याशी मोहिबुल्लाह नदवी ने इससे किनारा कर लिया। कार्यक्रम के समापन के बाद समाजवादी पार्टी प्रत्याशी मीडिया से रूबरू हुए। इसी दौरान एक पत्रकार ने उनसे पूछ लिया कि ‘आपने बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर फूल क्यों नहीं चढ़ाए।’

इस सवाल पर मोहिबुल्लाह थोड़ा असहज हो गए। उन्होंने बस इतना कहा, “मैंने अपने तरीके से माल्यार्पण किया है।” हालाँकि, पत्रकार मोहिबुल्लाह नदवी के इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अपने सवाल को जारी रखा। महज कुछ ही सेकेंड के बाद मोहिबुल्लाह नदवी वीडियो में भागते नजर आए। वो फूल चढ़ाने वाले सवाल पर जवाब देने के लिए तैयार ही नहीं थे।

पत्रकारों ने भी उनका पीछा करना जारी रखा। पत्रकारों को पीछे पड़ा देखकर मोहिबुल्लाह नदवी की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी बीच में आ गया। उसने सवाल पूछ रहे मीडियाकर्मियों को रोक दिया। इस रोकटोक में नमाजी टोपी पहने एक अन्य व्यक्ति को भी देखा जा सकता है, जो मोहिबुल्लाह का सहयोगी बताया जा रहा है।

यह आयोजन रामपुर के बिलासपुर थाना क्षेत्र में पड़ने वाले गुजरेला गाँव में हुआ था। आयोजक INDI गठबंधन के घटक कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता संजय कपूर थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोई भी पदाधिकारी इस मामले पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। सोशल मीडिया पर तमाम लोग इसे इस्लामी और शरिया कानून से जोड़ रहे हैं। हालाँकि, ऑपइंडिया इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

सिडनी में एक बार फिर चाकूबाजी: चर्च में हमलावर ने पादरी सहित 4 को मारा छुरा, 2 दिन पहले शहर के मॉल में 6 लोगों की कर दी गई थी हत्या

ऑस्ट्रलिया में सोमवार (15 अप्रैल 2024) को एक बार फिर से चाकूबाजी की खबर है। इस बार चाकू एक चर्च में प्रार्थना के दौरान चली है। हमलावर ने पादरी सहित 4 लोगों को निशाना बनाया है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। हमले के बाद ईसाई समुदाय के कई लोगों ने चर्च के बाहर जमा होकर नारेबाजी की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना ऑस्टेलिया के सिडनी की है। सोमवार को यहाँ के ‘गुड शेफर्ड चर्च’ में लोग साप्ताहिक प्रार्थना के लिए जमा हुए थे। पादरी मेरी एमैन्युएल प्रार्थना करवा रहे थे। इसी दौरान भीड़ में से एक युवक निकला और पादरी की तरफ बढ़ा। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले युवक ने कोट से चाकू निकालकर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हालाँकि, वहाँ मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया।

पादरी को बचाने के दौरान 4 अन्य लोगों को चाकू लग गई और वो घायल हो गए। आखिरकार लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि पकड़े जाने के बाद भी हमलावर हँस रहा है। इस घटना की जानकारी कुछ ही देर में सिडनी शहर में फ़ैल गई। सैकड़ों की संख्या में लोग चर्च पहुँचकर नारेबाजी करने लगे। वो हमलावर को सौंपने की माँग करने लगे।

हालात की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर पहुँचा और हालात को सामान्य किया। पुलिस ने हमलावर को लोगों से छुड़ाकर अपने कब्जे ले लिया। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर जा रही है। जिस समय 50 वर्षीय पादरी पर हमला हुआ था, उस समय प्रार्थना सभा चर्च के यूट्यूब पर LIVE चल रही थी। घायल पादरी और अन्य लोगों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

अभी तक हमलावर की पहचान और उसके मकसद की जानकारी सामने नहीं आई है। जिस स्थान पर यह चर्च बना है, उसके आसपास इराक और सीरिया युद्ध के दौरान भागकर ऑस्ट्रेलिया आए कई शरणार्थियों को जगह देकर बसाया गया था। पुलिस इस बात की भी जानकारी जुटा रही है कि इस ताजा हमले का सिडनी के मॉल में हुई चाकूबाजी की घटनाओं से कोई कनेक्शन तो नहीं है।

बता दें कि सिडनी के बॉन्डी जंक्शन पर खचाखच भरे वेस्टफील्ड शॉपिंग मॉल में एक शख्स ने 13 अप्रैल 2024 को लोगों को अंधाधुन चाकू मारने लगा था। इस हमले में 6 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि एक शख्स, जिसकी पहचान सामने नहीं आई है, उसने एक महिला और उसके बच्चे के अलावा एक दुकानदार को चाकू मार दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि अपनी जान बचाने के लिए लोग को कई दुकानों में घुसते हुए देखा गया। मॉल में हर तरफ खून बिखरा हुआ था। घटना की जानकारी मिलते ही सिडनी पुलिस घटनास्थल पर पहुँची थी और उसने हमलावर पर गोली चलाई थी। हमलावर की जानकारी और पहचान सामने नहीं आई थी।

‘वित्त मंत्री रहते RBI पर दबाव बनाते थे P चिदंबरम, सरकार के लिए माहौल बनाने को कहते थे’: बैंक के पूर्व गवर्नर ने खोली UPA की पोल

रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे पी सुब्बाराव ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने यूपीए सरकारों के समय दो वित्तमंत्रियों के साथ काम किया था। इसमें प्रणब मुखर्जी और पी चिदंबरम का नाम है। पी सुब्बाराव ने अपनी किताब में दावा किया है कि यूपीए सरकारों में वित्त मंत्री रहे प्रणब मुखर्जी और पी चिदंबरम रिजर्व बैंक पर दबाव डालते थे कि वो सरकार के पक्ष में माहौल बनाने वाले आँकड़ें जारी करे। यही नहीं, वो अपने मनमुताबिक आरबीआई की नीतियों को बदलने का दबाव भी डालते थे। पी सुब्बाराव ने अपनी किताब में लिखा है कि प्रणब मुखर्जी तो अपनी बात शालीन तरीके से रखते थे, लेकिन पी चिदंबरम अपनी बात मनवाने के लिए बहस करते थे।

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर दुव्वुरी सुब्बाराव ने अपनी किताब में दावा किया है कि यूपीए सरकारों के दौरान प्रणब मुखर्जी और पी. चिदंबरम के नेतृत्व वाला वित्त मंत्रालय ब्याज दरों में नरमी लाने के लिए रिजर्व बैंक पर दबाव डालता था और आम जनमानस में सरकार के प्रति सकारात्मक भावनाओं को बनाए रखने के लिए वृद्धि की बेहतर तस्वीर पेश करने के लिए कहता था। सुब्बाराव ने अपनी हालिया किताब ‘जस्ट ए मर्सिनरी: नोट्स फ्रॉम माई लाइफ एंड करियर’ में यह भी लिखा है कि सरकार में केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के महत्व को लेकर ‘समझ और संवेदनशीलता’ कम है।

‘रिजर्व बैंक सरकार की चीयरलीडर?’ नाम के अध्याय में सुब्बाराव ने बताया है कि सरकार का दबाव सिर्फ रिजर्व बैंक के ब्याज दर के रुख तक सीमित नहीं था। केंद्रीय बैंक पर इस बात के लिए भी दबाव बनाया गया कि वह मूल्यांकन के विपरीत विकास और मुद्रास्फीति के बेहतर अनुमान पेश करे। उन्होंने कहा, ‘मुझे एक ऐसा अवसर याद है जब प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री थे। वित्त सचिव अरविंद मायाराम और मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने अपने अनुमानों के साथ हमारे अनुमानों का विरोध किया, जो मुझे लगा कि बहुत ज्यादा था।

उन्होंने कहा, “मायाराम ने एक बैठक में यहाँ तक कह दिया कि दुनिया में हर जगह, सरकारें और केंद्रीय बैंक आपस में सहयोग कर रहे हैं, यहाँ भारत में रिजर्व बैंक बहुत बदमाश है।” सुब्बाराव ने कहा कि वे उनकी इस उम्मीद से हमेशा परेशान और नाराज रहे कि आरबीआई को सरकार के लिए चीयरलीडर के रूप में काम करना चाहिए। आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि वह इस बात को लेकर सख्त थे कि रिजर्व बैंक अपने बेहतरीन पेशेवर फैसले में सिर्फ जनता के बीच सकरात्मक भावनाएँ बनाने न भटके।

उन्होंने यह भी याद किया कि आरबीआई के नीतिगत रुख को लेकर चिदंबरम और मुखर्जी दोनों के साथ उनका टकराव हुआ था क्योंकि दोनों हमेशा नरम दरों पर जोर देते थे, हालांकि दोनों की शैली अलग थी। सुब्बाराव ने लिखा, “चिदंबरम आमतौर पर वकील की तरह अपने मामले में बहस करते थे, वहीं मुखर्जी प्रतिष्ठित और सर्वोत्कृष्ट राजनेता थे। वे अपना नजरिया जाहिर करने के बाद मामले में बहस करने का काम अपने अधिकारियों पर छोड़ देते थे। उन्होंने साल 2012 में वित्त मंत्री बनने के फिजूलखर्ची पर भी रोक लगाने की कोशिश की थी।

बता दें कि डी सुब्बाराव 5 सितंबर, 2008 को पाँच साल के लिए आरबीआई के गवर्नर के रूप में कार्यभार संभालने से पहले वित्त सचिव (2007-08) थे। उनके आरबीआई गवर्नर का पद संभालने के कुछ दिन बाद ही 16 सितंबर को अमेरिका का लेहमैन ब्रदर्स दिवालिया हो गया था और यह 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी का कारण बना था। यह इतिहास की सबसे बड़ी कॉरपोरेट विफलता भी मानी जाती है।

‘इलेक्टोरल बॉन्ड्स सफलता की कहानी, पता चलता है पैसे का हिसाब’: PM मोदी ने ANI को इंटरव्यू में कहा – हार का बहाना ढूँढने के लिए की जा रही ED-CBI-EVM की बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ANI को दिए गए इंटरव्यू में कहा है कि हमारे देश में लंबे अर्से से चर्चा चली है कि चुनावों में कालेधन का बहुत बड़ा खतरनाक खेल हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश के चुनावों को कालेधन से मुक्ति मिलनी चाहिए। उन्होंने 1000-2000 के नोटों को खत्म किए जाने को इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 20 हजार रुपए तक पार्टियाँ कैश ले सकती है।

इलेक्टोरल बॉन्ड्स और ED-CBI पर भी बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

बकौल पीएम नरेंद्र मोदी, उन्होंने नियम बनाकर 20 हजार को ढाई हजार कर दिया, क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि ये कैश वाला कारोबार चले। पीएम ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि तक इलेक्टोरल बॉन्ड की बात है तो ये उसकी सक्सेस स्टोरी है, क्योंकि इससे मनी का ट्रेल मिल रहा है कि किस कंपनी ने दिया, कैसे दिया, कहाँ दिया। पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ तक ED-CBI की बात है तो इसमें एक भी कानून मेरी सरकार ने नहीं बनाया है।

पीएम मोदी ने बताया कि उनकी सरकार ने तो इलेक्शन कमीशन में सुधार किए हैं, पहले तो प्रधानमंत्री एक साइन करके इलेक्शन कमीशन बना देते थे, आज तो उसमें विपक्ष भी रहता है। उन्होंने ‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा’ कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि ये कभी ED, कभी CBI, कभी EVM का बहाना निकालेंगे, मूलत: वो अपनी पराजय के लिए रीजनिंग पहले से सेट करने में लगे हैं, ताकि पराजय उनकी खाते में ना चली जाए। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि भारत में पिछले 10 साल से हर क्षेत्र में दुनिया भर से निवेश आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूँ कि हिंदुस्तान में निवेश आना चाहिए। पैसा किसी का भी लगा हो, पसीना मेरे देश का लगना चाहिए, उसके अंदर सुगंध मेरे देश की मिट्टी की आनी चाहिए, ताकि मेरे देश के नौजवान को रोजगार मिले। आज का फर्स्ट टाइम मतदाताओं 2047 का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने वाला है। आज का फर्स्ट टाइम वोटर्स परंपरागत चीजों से बाहर आना चाहता है। विपक्ष का घोषणा-पत्र इकोनॉमी को पूरी तरह फेल करने वाला घोषणा पत्र है।”

पीएम मोदी ने ये भी कहा कि एक प्रकार से विपक्ष का घोषणा पत्र देश के फर्स्ट टाइम वोटर्स (जिनकी उम्र 25 साल से कम है) के भविष्य को रौंदने वाला घोषणा पत्र है। ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ के प्रतिबद्धता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने संसद में भी बोला है, हमने कमिटी भी बनाई हुई है, उसकी रिपोर्ट भी आई है। उन्होंने बताया कि बहुत सकारात्मक और नवोन्मेषी सुझाव आए हैं, अगर हम इस रिपोर्ट को लागू कर पाए तो देश को बहुत फायदा होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति को मज़बूत करने के लिए राम मंदिर मुद्दे को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया और बार-बार इसे भड़काया गया। उन्होंने कहा कि जब यह मामला अदालत में चल रहा था तब कोशिश की गई कि फैसला ना आए। उन्होंने कहा कि ये मुद्दा विपक्ष के लिए एक राजनीतिक हथियार था, अब राम मंदिर बन गया तो उनके हाथ से यह मुद्दा ही चला गया है। बता दें कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने राम मंदिर का न्योता ठुकरा दिया था।

ANI से इंटरव्यू में PM मोदी ने बताया तीसरे कार्यकाल का प्लान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ANI को सवा घंटा से भी अधिक का इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। पीएम मोदी ने कहा कि 2047, यानीदेश की आज़ादी के 100 साल जैसे मील के पत्थर लोगों में नया जोश भरते हैं, नए संकल्प होते हैं। उन्होंने इसके लिए लक्ष्य बनाने की बात की, गाँव के प्रधान से लेकर RBI तक। उन्होंने कहा कि 2024 चुनावी क्रम का हिस्सा हैं, लोकतंत्र में चुनाव को हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए बल्कि ये महापर्व है, इसे उत्सव के रूप में मनाना चाहिए।

पीएम मोदी ने इसकी तुलना स्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स से की, जिसमें प्रतिस्पर्धा होती है। उन्होंने इसे लोकोत्सव बनाने की बात करते हुए कहा कि लोकतंत्र संविधान की सीमाओं में नहीं बल्कि हमारी रगों में दौड़ना चाहिए और संस्कार में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले कार्यकाल में उन्हें विकास की गति और स्केल दोनों बढ़ानी है। पीएम मोदी ने कहा कि पहले की राजनीतिक संस्कृति में परिवार को मजबूत बनाने और परिवार की जड़ों को कोई उखाड़ न दे इसमें शक्ति लगाईं गई, जबकि वो देश मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं जिसका फायदा सबको मिलता है।

ANI की संपादक स्मिता प्रकाश के सवालों का जवाब करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पास तीसरे कार्यकाल के लिए बहुत सी योजनाएँ हैं, लेकिन उनके निर्णय किसी को डराने-दबाने के लिए नहीं बल्कि जन-कल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए हैं। बकौल पीएम मोदी, बहुत कुछ अभी भी करना है। उन्होंने कहा कि अब तक जो हुआ वो ट्रेलर है, उन्हें बहुत अधिक अभी करना है। पीएम मोदी ने इस दौरान ‘एक देश, एक चुनाव’ की बात करते हुए कहा कि राज्यों में चुनाव होते रहते हैं और आचार संहिता लगती रहती है जिससे व्यवधान पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि वो चुनाव को छुट्टियों की तरह नहीं लेते हैं और अधिकारियों को 100 दिन की योजनाएँ बनाने के लिए कह दिया जाता है। उन्होंने बताया कि रिसर्च के आधार पर अधिकारियों की टीम बना कर प्रेजेंटेशन लिए गए, AI की मदद ली गई, अगले 25 वर्षों की योजनाएँ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि ये उनका विजन नहीं है बल्कि 15-20 लाख लोगों के विचार इसमें समाहित हैं, ये देश का इनपुट है। इसे दस्तावेज के रूप में बनाया जा रहा है, जिसे राज्यों को भेज दिया जाएगा और राज्य इस पर काम करेंगे कि क्या हो सकता है क्या नहीं।

फिर ‘नीति आयोग’ की बैठक में मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा होगी। 25 साल को पीएम मोदी ने 3 हिस्सों में बाँटा है, जिसमें उनके अगले 5 वर्ष हैं और उसका एक हिस्सा उनके पहले 100 दिन हैं। पीएम मोदी ने कहा कि 2019 में भी वो काम करके चुनाव मैदान में गए थे और जब वो वापस आए तो अनुच्छेद 370, ट्रिपल तलाक से बहनों को मुक्ति, बैंकों का मर्जर – ये सब काम उन्होंने 100 दिन के अंदर कर दिए। बकौल पीएम मोदी, आज जो शब्दों का कमिटमेंट होना चाहिए, लगता है उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है – कोई कुछ भी बोल देता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे अभी कुछ दिन पहले ही एक नेता ने कहा – मैं एक झटके में ग़रीबी खत्म कर दूँगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिनको 5-6 दशक तक देश में राज करने को मिला, वो जब आज ऐसा कहेंगे तो देश सोचेगा कि ये क्या बोल रहे हैं। बकौल पीएम मोदी, वो जो कमिटमेंट करते हैं, उसकी ऑनरशिप भी लेते हैं और जब ऑनरशिप लेते हैं तो देश को भरोसा होता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज हम जो बात कहते हैं उस पर देश को भरोसा है।

उदाहरण के तौर पर उन्होंने गिनाया कि जब कहा गया कि जम्मू-कश्मीर से 370 हटाएँगे तो हटाया, ट्रिपल तलाक से बहनों को मुक्ति दिलाई। प्रधानमंत्री ने दोहराया – ये मोदी की गारंटी है। पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ तक रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की बात है तो उन्हें न्योता मिला, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया, जबकि उन्हें गर्व होना चाहिए था। बकौल पीएम नरेंद्र मोदी, इससे स्पष्ट होता है कि उनके लिए वोट बैंक ही सबसे जरूरी है और ये किसी को नीचा दिखाना अपना अधिकार मानते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ANI की स्मिता प्रकाश से कहा, “ये तो नामदार हैं और मैं कामदार हूँ। लोकतंत्र में इतनी नफरत नहीं होनी चाहिए। हमारे लिए ये न राजनीति का विषय है, न कभी होना चाहिए और न कभी होगा। हमारे लिए ये आस्था का विषय है। मेरे पास बड़ी योजनाएँ हैं, किसी को डरने की जरूरत नहीं है। मेरे निर्णय किसी को डराने, दबाने के लिए नहीं हैं। मेरे निर्णय देश के सर्वांगीण विकास के लिए हैं। सवाल कॉन्ग्रेस से पूछना चाहिए कि आपकी क्या मजबूरी है। सनातन के खिलाफ इतना जहर उगलने वाले लोगों के साथ बैठना उनकी क्या मजबूरी है? कॉन्ग्रेस की मानसिकता में ये कौन सी विकृति है।”

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि DMK का तो जन्म ही शायद इस नफरत के लिए हुआ होगा। उन्होंने कहा कि भारत को टुकड़ों में देखना, ये भारत के प्रति नासमझी का परिणाम है। पीएम मोदी ने पूछा कि अगर आप हिंदुस्तान में देखें प्रभु राम के नाम से जुड़े हुए गाँव सबसे ज्यादा कहाँ है? तो वह तमिलनाडु में है। अब आप इसको कैसे अलग कर सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि विविधता हमारी ताकत है, हमें इसको सेलिब्रेट करना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, “जो व्यक्ति UN में जाकर दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल भाषा का गुणगान करता है, उस व्यक्ति पर आप ऐसे आरोप कैसे लगा सकते हैं? विपक्ष की मुसीबत है कि वे देश को एक ही साँचे में ढालना चाहते हैं। हम विविधता की पूजा करते हैं, हम इसको सेलिब्रेट करते हैं।” बता दें कि भाजपा ने इस बार ‘400 पार’ का नारा दिया है। इससे पहले पीएम मोदी ने इस चुनाव से पहले अपना पहला इंटरव्यू तमिल चैनल ‘Thanthi TV’ को दिया था।

‘मस्जिद के सामने से नहीं ले जा सकते’: डॉ. आम्बेडकर के जुलूस पर पथराव, धुले पुलिस ने इसाक-कल्लू-कौसर सहित 7 को किया गिरफ्तार, 21 पर FIR

महाराष्ट्र पुलिस ने रविवार (14 अप्रैल) को डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर निकाले गए एक जुलूस को जानबूझकर निशाना बनाया गया। इस मामले में विशेष समुदाय के 21 लोगों पर मामला दर्ज किया है और इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बताया जाता है कि आरोपितों ने 14 अप्रैल को जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव किया था।

गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान साहिल लाला बागवान, समीर लाला बागवान, इसाक मिस्त्री, कल्लू पठान, विहान बागवान, कौसर मुस्सा खटीक और अज्या खटीक के रूप में हुई है। इस मामले में 21 लोगों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 143, 146, 147, 149, 295 और 296 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, कई अन्य प्रासंगिक धाराएँ भी लगाई गई हैं।

धुले में हिंसा की खबर सामने आई है

स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 14 अप्रैल की शाम को हुई। बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर की जुलूस जब स्थानीय जामा मस्जिद के पास से गुजर रहा था, उसी दौरान एक समुदाय के लोगों ने जुलूस को उस रास्ते से गुजरने से रोक दिया। बाद में उन्होंने जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव शुरू कर दिया।

इस पथराव में कई लोग घायल हो गए। पथराव होता देख कुछ लोगों ने फोन करके इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन को दी। इसके बाद एसपी श्रीकांत धीवरे अपने दल के साथ मौके पर पहुँचे और स्थिति को नियंत्रित किया। बाद में गोविंदा गुलाब नागराले की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली।

नागराले ने अपनी शिकायत में कहा, “जुलूस शांतिपूर्वक जामा मस्जिद के पास से गुजर रहा था, तभी समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों को रुकने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि कोई भी जुलूस मस्जिद के पास से नहीं गुजरेगा। बाद में उन्होंने जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव के दौरान नारेबाजी भी की। इस हमले में कई लोग घायल हो गए।”

स्थानीय मीडिया में धुले में हिंसा की आईं खबरें

इस बीच पुलिस ने मामले को शांत कराने की कोशिश की और कहा कि कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। स्थानीय रिपोर्ट में कहा गया है, “यह एक छोटी सी घटना है। इस पर हल्ला मचाने की कोई जरूरत नहीं है। अफवाहों पर विश्वास न करें। मामले की एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जाँच चल रही है।”

पुलिस ने जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव करने वाले कुछ लोगों की पहचान की है। जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें कुछ व्यक्तियों की पहचान पापा शाह, सादिक शाह, वसीम पठान, सुल्तान बिल्डर, जुनैद शाह, तौफिक, शोएब के रूप में की गई है।

‘कॉन्ग्रेस देती है सनातन के खिलाफ ज़हर उगलने वालों का साथ, DMK का जन्म ही इसीलिए’: ANI से इंटरव्यू में बोले PM मोदी – मेरे निर्णय किसी को डराने-दबाने के लिए नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ANI को सवा घंटा से भी अधिक का इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। पीएम मोदी ने कहा कि 2047, यानीदेश की आज़ादी के 100 साल जैसे मील के पत्थर लोगों में नया जोश भरते हैं, नए संकल्प होते हैं। उन्होंने इसके लिए लक्ष्य बनाने की बात की, गाँव के प्रधान से लेकर RBI तक। उन्होंने कहा कि 2024 चुनावी क्रम का हिस्सा हैं, लोकतंत्र में चुनाव को हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए बल्कि ये महापर्व है, इसे उत्सव के रूप में मनाना चाहिए।

पीएम मोदी ने इसकी तुलना स्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स से की, जिसमें प्रतिस्पर्धा होती है। उन्होंने इसे लोकोत्सव बनाने की बात करते हुए कहा कि लोकतंत्र संविधान की सीमाओं में नहीं बल्कि हमारी रगों में दौड़ना चाहिए और संस्कार में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले कार्यकाल में उन्हें विकास की गति और स्केल दोनों बढ़ानी है। पीएम मोदी ने कहा कि पहले की राजनीतिक संस्कृति में परिवार को मजबूत बनाने और परिवार की जड़ों को कोई उखाड़ न दे इसमें शक्ति लगाईं गई, जबकि वो देश मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं जिसका फायदा सबको मिलता है।

ANI की संपादक स्मिता प्रकाश के सवालों का जवाब करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पास तीसरे कार्यकाल के लिए बहुत सी योजनाएँ हैं, लेकिन उनके निर्णय किसी को डराने-दबाने के लिए नहीं बल्कि जन-कल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए हैं। बकौल पीएम मोदी, बहुत कुछ अभी भी करना है। उन्होंने कहा कि अब तक जो हुआ वो ट्रेलर है, उन्हें बहुत अधिक अभी करना है। पीएम मोदी ने इस दौरान ‘एक देश, एक चुनाव’ की बात करते हुए कहा कि राज्यों में चुनाव होते रहते हैं और आचार संहिता लगती रहती है जिससे व्यवधान पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि वो चुनाव को छुट्टियों की तरह नहीं लेते हैं और अधिकारियों को 100 दिन की योजनाएँ बनाने के लिए कह दिया जाता है। उन्होंने बताया कि रिसर्च के आधार पर अधिकारियों की टीम बना कर प्रेजेंटेशन लिए गए, AI की मदद ली गई, अगले 25 वर्षों की योजनाएँ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि ये उनका विजन नहीं है बल्कि 15-20 लाख लोगों के विचार इसमें समाहित हैं, ये देश का इनपुट है। इसे दस्तावेज के रूप में बनाया जा रहा है, जिसे राज्यों को भेज दिया जाएगा और राज्य इस पर काम करेंगे कि क्या हो सकता है क्या नहीं।

फिर ‘नीति आयोग’ की बैठक में मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा होगी। 25 साल को पीएम मोदी ने 3 हिस्सों में बाँटा है, जिसमें उनके अगले 5 वर्ष हैं और उसका एक हिस्सा उनके पहले 100 दिन हैं। पीएम मोदी ने कहा कि 2019 में भी वो काम करके चुनाव मैदान में गए थे और जब वो वापस आए तो अनुच्छेद 370, ट्रिपल तलाक से बहनों को मुक्ति, बैंकों का मर्जर – ये सब काम उन्होंने 100 दिन के अंदर कर दिए। बकौल पीएम मोदी, आज जो शब्दों का कमिटमेंट होना चाहिए, लगता है उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है – कोई कुछ भी बोल देता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे अभी कुछ दिन पहले ही एक नेता ने कहा – मैं एक झटके में ग़रीबी खत्म कर दूँगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिनको 5-6 दशक तक देश में राज करने को मिला, वो जब आज ऐसा कहेंगे तो देश सोचेगा कि ये क्या बोल रहे हैं। बकौल पीएम मोदी, वो जो कमिटमेंट करते हैं, उसकी ऑनरशिप भी लेते हैं और जब ऑनरशिप लेते हैं तो देश को भरोसा होता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज हम जो बात कहते हैं उस पर देश को भरोसा है।

उदाहरण के तौर पर उन्होंने गिनाया कि जब कहा गया कि जम्मू-कश्मीर से 370 हटाएँगे तो हटाया, ट्रिपल तलाक से बहनों को मुक्ति दिलाई। प्रधानमंत्री ने दोहराया – ये मोदी की गारंटी है। पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ तक रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की बात है तो उन्हें न्योता मिला, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया, जबकि उन्हें गर्व होना चाहिए था। बकौल पीएम नरेंद्र मोदी, इससे स्पष्ट होता है कि उनके लिए वोट बैंक ही सबसे जरूरी है और ये किसी को नीचा दिखाना अपना अधिकार मानते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ANI की स्मिता प्रकाश से कहा, “ये तो नामदार हैं और मैं कामदार हूँ। लोकतंत्र में इतनी नफरत नहीं होनी चाहिए। हमारे लिए ये न राजनीति का विषय है, न कभी होना चाहिए और न कभी होगा। हमारे लिए ये आस्था का विषय है। मेरे पास बड़ी योजनाएँ हैं, किसी को डरने की जरूरत नहीं है। मेरे निर्णय किसी को डराने, दबाने के लिए नहीं हैं। मेरे निर्णय देश के सर्वांगीण विकास के लिए हैं। सवाल कॉन्ग्रेस से पूछना चाहिए कि आपकी क्या मजबूरी है। सनातन के खिलाफ इतना जहर उगलने वाले लोगों के साथ बैठना उनकी क्या मजबूरी है? कॉन्ग्रेस की मानसिकता में ये कौन सी विकृति है।”

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि DMK का तो जन्म ही शायद इस नफरत के लिए हुआ होगा। उन्होंने कहा कि भारत को टुकड़ों में देखना, ये भारत के प्रति नासमझी का परिणाम है। पीएम मोदी ने पूछा कि अगर आप हिंदुस्तान में देखें प्रभु राम के नाम से जुड़े हुए गाँव सबसे ज्यादा कहाँ है? तो वह तमिलनाडु में है। अब आप इसको कैसे अलग कर सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि विविधता हमारी ताकत है, हमें इसको सेलिब्रेट करना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, “जो व्यक्ति UN में जाकर दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल भाषा का गुणगान करता है, उस व्यक्ति पर आप ऐसे आरोप कैसे लगा सकते हैं? विपक्ष की मुसीबत है कि वे देश को एक ही साँचे में ढालना चाहते हैं। हम विविधता की पूजा करते हैं, हम इसको सेलिब्रेट करते हैं।” बता दें कि भाजपा ने इस बार ‘400 पार’ का नारा दिया है। इससे पहले पीएम मोदी ने इस चुनाव से पहले अपना पहला इंटरव्यू तमिल चैनल ‘Thanthi TV’ को दिया था।

‘मैंने रामलला की मूर्ति बनाई, दिव्य आँखें तो खुद श्रीराम जी ने बनाई’ : अरुण योगीराज बोले, ‘आज तक किसी ने भी नहीं की बुराई, पूरे देश से मिल रहा प्यार’

इस साल 22 जनवरी को सारी दुनिया की निगाहें अयोध्या पर थी। भगवान राम के भव्य मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी थी। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान जब भगवान राम के चेहरे को दुनिया ने देखा, तो बस देखती रह गई। हर कोई टकटकी लगाए रामलला की आँखों में खो गया। चहुँओर प्रभु राम की जय जय कार होने लगी और बाल रामलला पर माताएँ अपना प्यार लुटाने लगीं। कोई उनके चेहरे की तारीफ कर रहा था, कोई नाक की, तो अधिकतम रामलला की दिव्य आँखों की। अब 17 अप्रैल 2024 को जब रामनवमी मनाई जाने वाली है, तो रामलला की दिव्य मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज का एक इंटरव्यू सामने आया है, जिसमें वो बोल रहे हैं कि उन्होंने तो भगवान राम की मूर्ति ही बनाई, उनकी दिव्य आँखों को तो स्वयं भगवान राम ने ही बनाया।

समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कहा कि उनके द्वारा बनाई गई राम लला की मूर्ति अयोध्या में भक्तों के भगवान राम के प्रति प्रेम के कारण सुंदर है। योगीराज ने कहा, मैं अयोध्या में बहुत सारे भक्तों से मिला और उन्होंने अपना दर्द, बलिदान और कभी-कभी भगवान राम लला के प्रति प्रेम साझा किया…मैंने सब कुछ सुना… भगवान राम लला के प्रति प्रेम के कारण मूर्ति सुंदर है।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उनके जीवन में काफी बदलाव आ गया है। उन्होंने कहा कि अब लोग मुझे देखते ही पहचान जाते हैं। हर जगह मुझे प्यार मिलता है। लोग मुझसे भगवान श्री राम की मूर्ति के बारे में बात करना चाहते हैं। लोगों के सबसे ज्यादा सवाल भगवान श्रीराम की आँखों को लेकर होते हैं।

अरुण योगीराज ने कहा कि भगवान श्री राम की आँखों को देखने के बाद हर किसी को ऐसा लगता है कि वे उस पल उनसे बात करेंगे। यह एक जीवित मूर्ति की तरह प्रतीत होती है। तो वे मुझसे पूछते हैं कि मैंने भगवान श्री राम की आँखें कैसे बनाईं। मेरा हमेशा यही जवाब होता है कि ये मैंने नहीं बनाई, भगवान राम ने बनाई हैं। बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि भगवान रामलला की मूर्ति बनाने के पीछे की पूरी प्रक्रिया क्या थी।

योगीराज ने बताया कि जब वह मूर्ति बना रहे थे, तो कुछ लड़के कहते थे कि ऐसा लग रहा है जैसे भगवान राम उनसे बात कर सकते हैं और अब हर भक्त अयोध्या मंदिर में भगवान राम लला के दर्शन के बाद यही बात कहता है। योगीराज ने कहा, जब मैं श्री राम की मूर्ति बना रहा था तो चार-पांच लड़के जो लगभग 18-19 साल के थे, कहते थे कि ऐसा लगता है कि भगवान राम बस उनसे बात करने जा रहे हैं। ऐसी ही प्रतिक्रिया अब लोगों की मिलती हैं, मानों उन लड़कों की बात सच हो गयी। अब पूरा देश भी यह कहता है कि भगवान श्री राम की आँखों को देखकर ऐसा लगता है कि भगवान उस वक्त उनसे बात करेंगे। उनकी आँखें बहुत जीवंत हैं, यह एक कलाकार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।

किसी ने नहीं निकाला खोट, सबने दिया प्यार : योगीराज

मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कहा कि आर्टवर्क में हर काम की आलोचना होती है। पिछले कई कामों में मेरी भी आलोचना हुई, लेकिन भगवान राम लला की मूर्ति तैयार के लिए किसी ने मेरे काम की बुराई नहीं की। मुझसे जो भी मिला, सभी ने मुझे प्यार और सराहनी दी। योगीराज ने कहा कि हर काम को लगभग 70 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं, लेकिन 30 प्रतिशत लोग बुराई भी करते हैं, लेकिन इस काम में मुझे 100 प्रतिशत लोगों का प्यार मिला। एक प्रतिशत लोगों ने भी मेरी बुराई नहीं की। योगीराज ने कहा कि वो स्वयं को भाग्यशाली पाते हैं कि उन्हें भगवान रामलला की मूर्ति बनाने का अवसर मिला।

‘स्टार प्रचारक हूँ, चुनाव प्रचार करना है’: तेलंगाना के पूर्व CM की बेटी को कोर्ट ने नहीं दी जमानत, इससे पहले बेटे की परीक्षा के नाम पर माँगी थी बेल

दिल्ली के शराब घोटाले में गिरफ्तार के. कविता की याचिका पर दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार (15 अप्रैल 2024) को सुनवाई की। याचिका में कविता ने यह कहते हुए अंतरिम जमानत की माँगी थी कि उनके पिता की पार्टी भारतीय राष्ट्र समिति (BRS) ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 में अपना ‘स्टार प्रचारक’ घोषित किया है। उनके लिए 20 अप्रैल से 11 मई तक चुनाव ड्यूटी निर्धारित की है।

हालाँकि, कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2024 तय की है। इसके साथ ही राऊज एवेन्यू कोर्ट ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री BRS प्रमुख के. चंद्रशेखर राव की बेटी कविता द्वारा दायर जमानत याचिका पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी किया है। कविता फिलहाल 23 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में हैं।

इसके पहले कविता ने 8 अप्रैल 2024 को अपने बेटे की परीक्षाओं को आधार बना कर जमानत माँगी थी। हालाँकि, कोर्ट में ED ने उनकी जमानत का विरोध किया था और कहा था कि उन्होंने इस मामले में सबूत मिटाए हैं। इसलिए उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

कविता की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई की स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने यह निर्णय सुनाया था। कविता को 26 मार्च 2024 को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उनकी न्यायिक हिरासत मंगलवार (9 मार्च 2024) को खत्म हो रही थी। कविता की तरफ से उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने यह याचिका लगाई थी।

कविता ने यह कहते हुए अदालत से राहत की माँग की थी कि उनके बेटे की अगले माह से परीक्षाएँ शुरू हो रही हैं और उनका इस दौरान उसके साथ रहना जरुरी है। उन्होंने जमानत के लिए PMLA कानून के कुछ नियमों का भी सहारा लिया था। कविता ने कोर्ट में कहा कि उनके बेटे की तैयारी में उनकी जगह कोई नहीं ले सकता।

ED ने कोर्ट में उनकी जमानत का विरोध किया था। ED की तरफ से पेश वकील जोहेब हसन ने कहा था कि PMLA कानून में महिलाओं के लिए राहत का प्रावधान है, लेकिन कविता को सामान्य महिला नहीं माना जा सकता। ED ने कहा कि वह कोई सामान्य महिला नहीं बल्कि बड़ी राजनेता हैं।

ED ने कहा था, ”इस मामले में आरोपित (के कविता) रिश्वत देने के मामले में सबसे प्रमुख किरदार है। उन्होंने सिर्फ रिश्वत ही नहीं दी है, बल्कि इंडोस्पिरिट्स के माध्यम से इस मामले में फायदा भी लिया है। मैं सिर्फ बयानों पर विश्वास नहीं कर रहा। हमारे पास इस मामले में सबूत, व्हाट्सएप डॉक्यूमेंट सब हैं। इस मामले में उन खातों से लेनदेन हुआ और यह उनकी लाभार्थी हैं।”