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बालासोर में हनुमान जयंती की शोभा यात्रा पर पथराव, उपद्रवियों ने SP की गाड़ी का शीशा भी फोड़ा: 4 घायल, पिछले साल भी हुई थी ऐसी हिंसा

ओडिशा के बालासोर में हनुमान जयंती से पहले निकाली गई शोभा यात्रा पर पथराव की खबर है। घटना रविवार (14 अप्रैल 2024) की है। बताया जा रहा है कि पत्थबाजी के बाद यहाँ दोंनों पक्षों में झड़प भी हुई। पूरे विवाद में 4 लोग घायल हो गए हैं। हिंसा के दौरान पुलिस के एक वाहन को भी क्षतिग्रस्त किया गया है। फिलहाल, हालात काबू करने के लिए क्षेत्र में बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बालासोर के रेमुना इलाके की है। यहाँ रविवार को हिन्दू समाज के लोगों द्वारा हनुमान जयंती के अवसर पर शोभा यात्रा निकाली गई थी। यह यात्रा गनीपुर गाँव के रास्ते से कनक दुर्गा मंदिर की तरफ जा रही थी। बताया जा रहा है कि शाम के लगभग 4:40 पर अचानक ही इस शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस पथराव की चपेट में यात्रा में शामिल कई श्रद्धालु आ गए और वहाँ भगदड़ जैसे हालात हो गए।

शोभा यात्रा पर इस प्रकार से पत्थरबाजी देख हिन्दू नाराज हो गए और विवाद शुरू हो गया। इसके बाद दोनों पक्षों में भिड़ंत हुई, जिसकी वजह से घटनास्थल पर मौजूद तमाम सम्पत्तियों को नुकसान पहुँचा। मामले की सूचना पर हालात संभालने पुलिस पहुँची मगर, उपद्रवियों ने पुलिस पर भी पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इस हमले की वजह से पुलिस अधीक्षक सागरिका नाथ की कार का शीशा फूट गया। इसके अलावा रेमुना थाने के एक स्टाफ का मोबाइल फोन भी तोड़ डाला गया।

अतिरिक्त पुलिस बल ने मौके पर पहुँच कर पत्थरबाजी के बीच किसी तरह से हालात को काबू किया। ओडिशा के ADG कानून व्यवस्था IPS संजय कुमार के अनुसार, विवाद की शुरुआत शोभा यात्रा में बज रहे म्यूजिक की आवाज कम करने को ले कर हुई थी। उन्होंने इस हिंसा में कुल 4 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। पत्थरबाजी दोनों तरफ से होने की बात कहते हुए संजय कुमार ने बताया कि IG दीपक कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल हालत सामान्य करने की कोशिशों में जुटा हुआ है। दोनों ही पक्षों के जिम्मेदार लोगों से प्रशासन बात भी कर रहा है।

वर्तमान समय में हालात सामान्य और नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। बालासोर के सांसद प्रताप सारंगी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने बताया है कि केस दर्ज कर के घटना की जाँच की जा रही है। वीडियो फुटेज व अन्य माध्यमों से आरोपितों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर यह हिंसा हुई है पिछले साल भी यहाँ पर शोभा यात्रा पर इसी प्रकार का हमला हुआ था।

लेफ्ट-कॉन्ग्रेस ने लूटा पूरा केरल, कर्मचारियों को देने के पैसे भी नहीं बचे: PM मोदी का वामपंथी सरकार पर हमला, आर्थिक संकट के लिए ठहराया जिम्मेदार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केरल के तिरुवनंतपुरम में वामपंथी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि केरल की सरकार पर सोना तस्करी में लिप्त होने के आरोप हैं। पीएम मोदी ने लेफ्ट और कॉन्ग्रेस पर आर्थिक संकट लाने के आरोप लगाए हैं। पीएम मोदी राज्य में हुए घोटालों को लेकर भी कॉन्ग्रेस-लेफ्ट पर हमलावर हुए।

पीएम मोदी सोमवार (15 अप्रैल, 2024) को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के अत्तिंगल पहुँचे। यहाँ वह तिरुवनंतपुरम से भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री राजीव चन्द्रशेखर और अत्तिंगल से वी मुरलीधरन के समर्थन में वोट माँगने पहुँचे हैं। यहाँ उन्होंने राज्य की वामपंथी सरकार पर जम कर हमला बोला।

पीएम मोदी ने कहा कि देश ने लेफ्ट और कॉन्ग्रेस को रिजेक्ट कर दिया है। उन्होंने दोनों को विकास विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि यह दोनों पार्टियां दूसरों के कामों का क्रेडिट लेते हैं। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस और ल्लेफ्त ने मिलकर केरल को भ्रष्टाचार और लूट का अड्डा बनाया है।

केरल की वामपंथी सरकार पर हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “यह एक ऐसी सरकार है, जिस पर खुद सोना तस्करी में शामिल होने और इसमें शामिल अपराधियों को बचाने के आरोप लग रहे हैं।” पीएम मोदी ने कहा कि राज्य के हर वर्ग से लूट हो रही है।

पीएम मोदी ने कहा, “केरल में 300 से ज्यादा सहकारी बैंक हैं, इनके पास केरल के गरीबों के ₹1 लाख करोड़ से अधिक जमा हैं। सीपीएम के भ्रष्टाचार की वजह से यह पैसा खतरे में है। सीपीएम के भ्रष्टाचार की वजह से कई जगह गरीबों का पैसा लूट लिया गया है। इस भ्रष्टाचार में सीपीएम के नेताओं को सैकड़ों करोड़ की रिश्वत मिली है।” पीएम मोदी ने भरोसा दिया कि वह केरल के गरीबों का पैसा वापस करेंगे। पीएम मोदी का यह भाषण आप यहाँ सुन सकते हैं।

केरल की खराब आर्थिक हालत को लेकर पीएम मोदी ने वामपंथी और कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा, “खुली लूट के कारण केरल में आर्थिक तबाही हो चुकी है। केरल के पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं हैं। सरकार खजाना खाली है। केंद्र सरकार जो पैसा विकास के लिए भेज रही है, उसे राज्य सरकार कर्ज चुकाने को उपयोग कर रही है।”

पीएम मोदी ने चेताया कि अगर कॉन्ग्रेस और वामपंथी यहाँ मजबूत रहे तो केरल को बर्बाद कर देंगे। पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस और वामपंथी दलों के गठबंधन पर भी हमला बोला। पीएम मोदी ने इस जनसभा में केरल में आगे के समय में किए जाने विकास को लेकर भी बात की।

चुनावी रिपोर्टिंग के नाम पर कॉन्ग्रेसी CM के साथ चिकेन करी पार्टी, नवरात्रि में मछली दिखा-दिखा कर खाना… राजदीप सरदेसाई पत्रकार हैं या खानसामा

राजदीप सरदेसाई लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों में जोर-शोर से जुट गए हैं। कैसे? आपको लगता होगा कि वो एक बड़े मीडिया संस्थान में काम कर रहे हैं तो वो घूम-घूम कर जनता का मूड जानते होंगे, नेताओं से कड़े सवाल पूछते होंगे और उम्मीदवारों के प्रदर्शन का विश्लेषण करते होंगे। लेकिन नहीं, जरा ठहरिए। राजदीप सरदेसाई ऐसे इलेक्शन कवरेज नहीं कर रहे। वो देश भर में घूम-घूम कर नॉनवेज खा रहे हैं। कहीं मछली, कहीं चिकेन करी, कहीं खाना न सही तो इसकी बातें ही करते दिखते हैं।

ताज़ा उदाहरण से शुरू करते हैं। राजदीप सरदेसाई कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु पहुँचे, जहाँ मोदी-मोदी और ‘जय श्री राम’ के नारों से उनका स्वागत हुआ। उसके बाद वो सीधे पहुँच गए कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पास, जो चिकन करी खा रहे थे। ओल्ड मैसूर पहुँचे राजदीप सरदेसाई इस वीडियो में कहते नज़र आए कि अक्सर ऐसा नहीं देखा जाता कि कोई CM अपने इलाके का भोजन आपको कराए। यहाँ राजदीप सरदेसाई अगर भोजन कहें तो उसका तात्पर्य मांसाहार से होता है, शाकाहारियों के लिए वो शो नहीं बनाते।

राजदीप सरदेसाई ने सिद्धारमैया से कावेरी पानी मुद्दे को लेकर सवाल नहीं पूछा, बेंगलुरु में पानी की समस्या को लेकर सवाल नहीं पूछा, बल्कि उन्हें इस बात से ख़ुशी हुई कि वहाँ चैत्र नवरात्र नहीं मनाया जा रहा। राजदीप सरदेसाई के लिए ये विविधता है। ये अलग बात है कि कर्नाटक में वहाँ का नया साल उगादि/युगादि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही मनाया जाता है, जिसे हिन्दू नववर्ष भी कहा जाता है। इस दिन लोग मंदिर जाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं। हाँ, राजदीप सरदेसाई इसका जिक्र नहीं करेंगे क्योंकि ये उनके एजेंडे में फिट नहीं बैठता।

उनके एजेंडे में फिट बैठता है मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ बैठ कर ये सीखना कि रागी मुड्डे कैसे खाते हैं। सिद्धारमैया को देखा जा सकता है कि वो रागी मुड्डे को हाथ से गोला बना कर उसे चिकेन करी में डुबो कर खा रहे हैं। फिर इसे निगलना होता है। राजदीप सरदेसाई के हिसाब से ये कठिन कार्य है। वो इसे स्वास्थ्य के लिए भी ठीक बताते हैं। CM से पूछते हैं कि एक दिन में वो 4-5 रैलियाँ कर रहे होंगे, जिस पर वो जवाब देते हैं कि रोज कम से कम 3 रैलियाँ।

और जब राजदीप सरदेसाई ये बातें कर रहे हैं, बेंगलुरु में क्या हालात हैं? बेंगलुरु, जिसे IT सिटी के रूप में जाना जाता है और जो कर्नाटक का सबसे बड़ा महानगर है, वहाँ लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। पूर्वी बेंगलुरु में कई ऐसी हाउसिंग सोसाइटी, जहाँ पानी की सप्लाई बोरवेल पर आधारित है, वहाँ लोग पानी की कमी से जूझ रहे। व्हाइटफील्ड में इस कारण रेंट के लिए निवेश में भी कमी आ गई है। नॉर्थ बेंगलुरु में 30,000 रुपए तक में 2 BHK कमरे वाले फ़्लैट मिल रहे हैं। पानी की कमी के कारण अब हाउसिंग परिसरों में रेंट घट रहे हैं।

हाल ही में RJD नेता तेजस्वी यादव और और उनके गठबंधन साथी VIP के संस्थापक मुकेश साहनी हेलीकॉप्टर में मछली खाते हुए दिखे। ये वीडियो नवरात्रि के दौरान पोस्ट किया गया, तारीख़ लिखते हुए कि ये पुराना है। फिर इसे पोस्ट कर के दिखाने का उद्देश्य क्या था, एक खास समाज को खुश करना? ये दिखाना कि हम हिन्दू व्रत-त्योहारों का सम्मान नहीं करते, मुस्लिम हमें वोट करें? भाजपा ने जब इस वीडियो को लेकर निशाना साधना शुरू किया तो तेजस्वी यादव को सफाई देनी पड़ी।

लेकिन, इन सबके बीच राजदीप सरदेसाई पहुँच गए तमिलनाडु के मरीना बीच के पास एक रोडसाइड रेस्टॉरेंट में साउथ इंडियन स्टाइल का फीश खाने पहुँच गए। बेबी क्रैब्स को उन्होंने स्पेशल बता दिया। शार्क मीट भी उनकी प्लेट में दिखा। भोजन को वो विशेष बताने लगे। साथ ही वो लोगों से पूछते ही नज़र आए कि कहाँ की मछली सबसे अच्छी बनती है। नवरात्र के दौरान जानबूझकर ऐसा करने के पीछे क्या मंशा हो सकती है, खासकर तब जब तेजस्वी यादव के वीडियो को लेकर विवाद जारी हो?

राजदीप सरदेसाई को भले ही लग रहा होगा कि उन्होंने चुनावी कवरेज के साथ भारत के विविध क्षेत्रों के व्यंजनों को दिखाते हुए एक यूनिक शो का निर्माण कर लिया है, लेकिन इसका नाम ‘एलेक्शंस ऑन माय नॉनवेज प्लेट’ कर देना चाहिए था। उन्हें हर जगह जाकर चिकन, मटन, केंकड़े का बच्चा और शार्क ही खाना है, फिर सिर्फ प्लेट क्यों? नॉनवेज प्लेट होना चाहिए। और हाँ, भारत का कौन सा हिस्सा सनातन से नहीं जुड़ा है या जहाँ हिन्दू व्रत-त्यौहार नहीं मनाए जाते हैं, फिर नवरात्र का न मनाया जाना दावा कर के विविधता की बातें करना कहाँ तक सही है?

और हाँ, राजदीप सरदेसाई की चालाकी देखिए। आपने आज तक उन्हें पोर्क खाते हुए नहीं देखा होगा। खासकर नवरात्र के दौरान तो उन्हें आपने सूअर का मांस खाते हुए नहीं देखा होगा, जितने धड़ल्ले से वो नवरात्र में केंकड़े का बच्चा खा रहे हैं। और तो और, हिन्दुओं को चिढ़ाने के लिए राजदीप सरदेसाई बीफ भी खा चुके हैं। CNN-IBN में रहते हुए उन्होंने ‘बीफ फेस्टिवल’ और चर्चा चलाई, सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि वो स्टीक खाने जा रहे हैं, साथ ही खुद को भारतीय और हिन्दू बताना भी नहीं भूले।

इसी तरह राजदीप सरदेसाई तमिलनाडु में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई के साथ बातचीत के दौरान भी जबरन नॉनवेज का मुद्दा उठाते हुए दिखे। उन्होंने चुनाव, देश और पत्रकारिता सबको एक ही शब्द में समेट दिया है – मांसाहार। मुट्ठी से रागी मुड्डे को दबा-दबा कर गोल बना कर उसे चिकेन करी में डुबो कर निगल लेना ही अगर पत्रकारिता है तो राजदीप सरदेसाई को ये मुबारक हो! मछली, चिकेन, मटन, केंकड़ा, शार्क और बीफ खाना ही अगर पत्रकारिता है तो राजदीप सरदेसाई को मुबारक हो! किसी और में ये बीमारी न फैले, यही बेहतर है।

जिस अडानी ग्रुप में पैसा लगाने पर विपक्ष उठा रहा था सवाल, उसने ही LIC को किया मालामाल: सालभर में 59% रिटर्न, निवेश घटाने के बाद भी ₹22378 करोड़ मुनाफा

सार्वजनिक क्षेत्र की इंश्‍योरेंस कंपनी एलआईसी ने वित्त वर्ष 2023-24 में अडानी ग्रुप की कंपनियों में किए गए अपने इन्‍वेस्‍टमेंट वैल्‍यू में 59 फीसदी का मुनाफा दर्ज किया है। अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई थी, जिसके बाद एलआईसी के निवेश की वैल्‍यू कम हुई, लेकिन कुछ दिनों बाद जब अडानी ग्रुप शेयरों ने वापसी की, तो उसका जोरदार फायदा एलआईसी को भी मिला। महज एक ही साल में एलआईसी को 22,378 करोड़ रुपए का फायदा मिला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अडानी ग्रुप की सात कंपनियों में एलआईसी का कुल निवेश 31 मार्च, 2023 को 38,471 करोड़ रुपए से बढ़कर 31 मार्च, 2024 को 61,210 करोड़ रुपए हो गया। यानी इसमें एक फाइनेंशियल ईयर में 22,378 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले साल, हिंडनबर्ग रिपोर्ट में अडानी ग्रुप के शेयरों में हेराफेरी के आरोपों के बाद इंश्‍योरेंस कंपनी को भी अडानी ग्रुप में निवेश करने के अपने फैसले पर सवालों का सामना करना पड़ा था।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने तो यहाँ तक आरोप लगा दिए थे कि एलआईसी को अडानी ग्रुप की कंपनियों में निवेश के लिए मजबूर किया गया और आम लोगों का पैसा डुबाया गया। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने एलआईसी दफ्तरों के सामने प्रदर्शन भी किया था। कॉन्ग्रेस का आरोप था कि पीएम मोदी ने गौतम अडानी को एलआईसी के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए दिए हैं। हालाँकि ताजे रिपोर्ट्स कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहे हैं।

एलआईसी ने घटाया निवेश, फिर भी तगड़ा मुनाफा

बता दें कि एलआईसी पर कॉन्ग्रेस के आरोपों के बीच एलआईसी ने अडानी ग्रुप में अपने निवेश को घटा दिया था। एलआईसी ने अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड और अडानी एंटरप्राइजेज में अपना निवेश कम करते हुए अपने शेयर बेच दिए थे। एलआईसी के इस कदम के बावजूद इन दोनों कंपनियों के शेयरों में वित्त वर्ष 2023-24 में 83 फीसदी और 68.4 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।

बता दें कि एलआईसी ने अडानी की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइज लिमिटेड, अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड, अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी टोटल गैस, अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी में भी एलआईसी का निवेश है। आँकड़ों के मुताबिक, अडानी एंटरप्राइज लिमिटेड में एलआईसी का निवेश 31 मार्च, 2023 को 8,495.31 करोड़ रुपए से बढ़कर एक साल बाद 14,305.53 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड में निवेश 12,450.09 करोड़ रुपये से बढ़कर 22,776.89 करोड़ रुपए हो गया। अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड में एलआईसी का निवेश एक साल में दोगुना से अधिक होकर 3,937.62 करोड़ रुपये पर पहुँच गया।

मुर्गा बेचने वाले इमरान ने रमजान में किया 4 साल की हिन्दू बच्ची का रेप, प्राइवेट पार्ट में उंगली डालकर खून निकाला: हिन्दू संगठनों के विरोध के बाद गिरफ्तार

मुंबई में 4 साल की एक हिन्दू बच्ची से रेप करने का मामला सामने आया है। रेप का आरोप पीड़िता के पड़ोस में रहने वाले मोहम्मद इमरान दराज खान पर लगा है। इमरान मुर्गे के मांस बेचता है। हिन्दू संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद रविवार (14 अप्रैल 2024) को पुलिस ने इमरान के खिलाफ FIR दर्ज के उसे गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना इसी माह 7 अप्रैल की है जब रमजान चल रहा था। अब मामले की जाँच की जा रही है।

यह पूरा मामला मुंबई के मीरा रोड में आने वाले पुलिस स्टेशन नवघर का है। यहाँ रविवार को 4 साल की बच्ची के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि मीरा रोड के पास ऑरेंज अस्पताल है जहाँ मोहम्म्द इमरान दराज खान की चिकन की दुकान है। इसी दुकान के पड़ोस में उनका भी सैलून है। बच्ची की माँ कुछ दिनों के लिए मायके गई थीं जिस वजह से बच्ची की देखभाल की जिम्मेदारी पिता ही उठा रहे थे। ऐसे में इमरान की गंदी नजर बच्ची पर पड़ी और वो बच्ची को टॉफी-चॉकलेट का लालच देने लगा। शुरू में बच्ची के पिता ने इमरान को टोका भी मगर इमरान बाज नहीं आया।

7 अप्रैल को लड़की को घर में अकेला देख कर इमरान ने उसे अपनी चिकन शॉप पर बुलाया। यहाँ उसने बच्ची को चॉकलेट दी और थोड़ी ही देर में उसकी पैंट जबरन उतार दी। जब बच्ची ने रोना चाहा तो उसे एक बड़ा सा चाकू दिखा कर चुप रहने के लिए कहा गया। इमरान ने धमकाया कि अगर शोर मचाया तो वो बच्ची को मार डालेगा।

शिकायत में आगे बताया गया है कि कुछ देर बाद इमरान ने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में अपनी उँगलियाँ डाल दीं। इस से बच्ची को तेज दर्द हुआ। उसके आंतरिक अंगों से खून निकलने लगा। हालाँकि चाकू के डर से वह दर्द सहती रही। घर आने के बाद बच्ची गुमसुम रहने लगी। पिता द्वारा कई बार उदासी की वजह पूछने पर भी पीड़िता ने कुछ नहीं बताया। हालाँकि बच्ची के पिता को पीड़िता के व्यवहार में काफी बदलाव नजर आ रहा था।

रविवार (14 अप्रैल) को अचानक बच्ची ने अपने पेट में तेज दर्द उठने की शिकायत की। पहले तो पिता ने सोचा कि शायद गर्मी या कुछ खाने की वजह से यह समस्या हुई हो। हालाँकि इसके बावजूद पीड़िता दर्द की शिकायत करती रही और थोड़ी देर बाद वह रोने लगी। इसके बाद पीड़िता के पिता ने अपनी बेटी से बड़े शांत भाव से वजह पूछी तो उसने सब बता दिया। पीड़िता ने बताया कि चिकन शॉप के मालिक इमरान खान ने उसके साथ रेप किया था।

मामले की जानकारी होने के बाद पीड़िता के पिता ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया। साथ ही शिकायत पुलिस में दी गई। नवघर पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 376 और 506 के अलावा पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। घटना की जानकारी होते ही हिन्दू संगठनों में नाराजगी फ़ैल गई। उन्होंने 14 अप्रैल की ही रात को मीरा रोड इलाके में प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों के पास तख्तियाँ थीं जिसमें पीड़िता को न्याय दिलाने की माँग लिखी हुई थी। इस विरोध प्रदर्शन का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग भी किया था लेकिन उनका रोष शांत नहीं हुआ। इसके बाद खबर आई कि पुलिस ने आरोपित इमरान को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता का अस्पताल में इलाज चल रहा है। बच्ची का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है। बच्ची की काउंसिलिंग भी करवाई जा रही है। पुलिस मामले की जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई कर रही है।

5 बीवी, 21 बच्चे (12 बेटा+9 बेटी)… 1200 लोगों का है परिवार, 350 वोटर: लोकसभा चुनाव में मतदान करने को तैयार है असम का जंबो कुनबा

देश में लोकसभा चुनाव के पहले चरण की मतदान की तारीख नजदीक आ गई है। 19 अप्रैल, 2024 को देश के 102 लोकसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। इसी दिन असम के सोनितपुर लोकसभा क्षेत्र में एक ही परिवार के 350 वयस्क सदस्य वोट डालेंगे।

असम के सोनितपुर जिले में फुलोगुड़ी नेपाली पाम में रहने वाला स्वर्गीय रोन बहादुर थापा का परिवार यह कारनामा करेगा। इस परिवार के 350 वयस्क सदस्य मतदाता सूची में शामिल हैं। यह सभी 19 अप्रैल, 2024 को वोटिंग करेंगे। जहाँ वोटिंग करने वालों की सँख्या 350 है, इस परिवार के कुल सदस्यों की संख्या और भी बड़ी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परिवार की संख्या में यदि बच्चों को भी जोड़ा जाए तो यह संख्या 1200 पहुँच जाती है। रोन बहादुर थापा के परिवार में 12 भाई और 9 बहनें हैं जो यहीं रहते हैं। रोन बहादुर थापा के परिजनों ने बताया कि सिर्फ यही परिवार नहीं बल्कि इलाके के 300 अन्य परिवार भी रोन बहादुर थापा को ही अपना पूर्वज मानते हैं।

यहाँ इस परिवार की नीँव रखने वाले रोन बहादुर थापा के पुत्र टिल बहादुर थापा ने मीडिया को बताया, “मेरे पिता यहाँ 1964 में आए थे। वह अपने पिता के साथ 1964 में यहाँ आकर बस गए थे। उनके पाँच बीवियाँ थी। इनसे उनके 12 लड़के और 9 लडकियां हुईं। उनके अपने बेटों से 56 पोती-पोते थे। बेटियों से कितने नाती हुए मुझे नहीं मालूम। इस चुनाव में थापा परिवार के लगभग 350 लोग वोटिंग करेंगे। अगर इसमें बच्चों को मिला ले तो यह संख्या 1200 के पार हो जाती है।”

टिल बहादुर थापा ने परिवार की बड़ी संख्या के होने के बाद भी विशेष लाभ नहीं मिलने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि असम में रोजगार की समस्या है और उनके घर के बच्चे पढ़ लिख कर भी कोई अच्छा रोजगार नहीं पा रहे। रोन बहादुर के एक और लड़के सरकी बहादुर थापा ने बताया कि उनके भी तीन बीवियाँ हैं।

असम के सोनितपुर में 19 अप्रैल को मतदान होगा। सोनितपुर में लगभग 16 लाख मतदाता है। सोनितपुर से भाजपा ने रंजीत दत्ता तो वहीं कॉन्ग्रेस ने प्रेमलाल गंजू को उम्मीदवार बनाया है। 2019 में यहाँ से भाजपा के पल्लब लोचन दास चुनाव जीते थे। 2019 तक इस लोकसभा क्षेत्र का नाम तेजपुर था।

केजरीवाल ने कहा- चुनाव प्रचार से रोकने के लिए किया गिरफ्तार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अब 29 अप्रैल को सुनेंगे आपकी: ED से माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 अप्रैल 2024) को दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया। दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने अपनी याचिका में एजेंसी द्वारा उनकी गिरफ्तारी और दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी रिमांड को चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय को 24 अप्रैल 2024 या उससे पहले अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की याचिका 29 अप्रैल 2024 से शुरू होने वाले सप्ताह तक के लिए टाल दी है। सीएम केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि उन्हें चुनाव प्रचार से रोकने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पहले की तारीख की माँग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल तय की। उन्होंने कहा, “यह एक असामान्य मामला है। इसमें 15 बयान (गवाहों के) हैं… 10 एक ही व्यक्ति के हैं.. ये एक बयान बन जाता है..।”

हालाँकि, सिंघवी ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “16 मार्च को गिरफ्तारी का समय बहुत पहले मामला दर्ज होने के बाद का है… पहले दौर का मतदान 19 अप्रैल को है।” इस पर पीठ ने कहा, “हम तथ्यों को जानते हैं और हमने कागजी किताबों का अध्ययन किया है। हमारे द्वारा नोटिस जारी करने के बाद आपको बहस नहीं करनी चाहिए।”

शीर्ष अदालत में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की याचिका तब दायर की गई थी, जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में उनकी याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने राय दी थी कि इस घोटाले में केजरीवाल की संलिप्तता दिखाने के लिए सबूत हैं। हाई कोर्ट ने कहा था कि रिश्वत के रूप में प्राप्त धन का इस्तेमाल 2022 के गोवा विधान सभा चुनावों में राजनीतिक प्रचार के लिए किया गया था।

वादे किए 300+, कैंडिडेट 300 भी नहीं मिले: इतिहास की सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ रही कॉन्ग्रेस, क्या पार्टी के सफाए के बाद पूर्ण होगी राहुल गाँधी की यात्रा

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए पहले चरण के मतदान में कुछ ही दिन का वक्त है। इस चुनाव में बीजेपी ने 370+ तो एनडीए ने 400+ का लक्ष्य रखा है। एनडीए अपने दो दर्जन से अधिक सहयोगियों के साथ मुकाबला कर रही है, तो इसके जवाब में बना इंडी गठबंधन लगातार पीछे होता दिख रहा है। अभी तक शीट शेयरिंग का मुद्दा उलझा रहा। कई सीटों पर इंडी गठबंधन के दल फ्रेंडली फाइट भी कर रहे हैं, यानी आपस में ही लड़ाई। वहीं, बात इंडी गठबंधन के मुख्य घटक दल बन चुके (गठबंधन बनाने वाले नीतीश कुमार ही बाहर) कॉन्ग्रेस की करे, तो पूरी तरह से न सिर्फ कन्फ्यूज बल्कि असहाय भी नजर आ रही है।

ऐसा लगता है, मानो वो लोकसभा चुनाव 2024 की लड़ाई में पहले ही हथियार डाल चुकी हो, क्योंकि इस बार कॉन्ग्रेस न सिर्फ अपने इतिहास में सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ रही है, बल्कि उसे ढंग के कैंडिडेट तक नहीं मिल रहे हैं। वो दूसरी पार्टियों के नेताओं के बच्चों को अपने टिकट पर चुनाव लड़ा रही है, यूपी की प्रयागराज सीट ऐसी ही एक सीट है। खैर, बड़े कैनवस पर देखें तो लोकसभा चुनाव 2024 में कॉन्ग्रेस 300 सीटों पर भी चुनाव लड़ती नहीं दिख रही है। आज (15 अप्रैल 2024) तक कॉन्ग्रेस महज 278 सीटों पर ही उम्मीदवार खड़े कर सकी है।

इस बार कॉन्ग्रेस की हालत इतनी खराब क्यों है?

एक तरफ तो कॉन्ग्रेस देश की सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव लड़ रही है, तो दूसरी तरफ वो ऐतिहासिक रूप से सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पंजाब में वो दिल्ली, गुजरात, हरियाणा की अपनी ही सहयोगी आम आदमी पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ रही है, तो केरल में वामदलों के खिलाफ। यूपी में ऐतिहासिक रूप से सबसे कम 17 सीटों पर ही कॉन्ग्रेस चुनाव लड़ रही है, तो पश्चिम बंगाल में वो 20 सीटों तक सिमट रही है। बिहार में कॉन्ग्रेस को एक चौथाई सीटें भी नहीं मिली हैं, तो मध्य प्रदेश में भी एक सीट पर वो चुनाव नहीं लड़ रही है। गजब बात ये है कि मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट पर इंडी गठबंधन ही चुनाव से बाहर है, क्योंकि जिस सपा को खजुराहो सीट दी गई थी, उसके कैंडिडेट का पर्चा ही खारिज हो चुका है।

कॉन्ग्रेस पार्टी राजस्थान और गुजरात में भी अपने दम पर सभी सीटों पर नहीं लड़ पा रही है, तो हरियाणा में भी उसे आम आदमी पार्टी की बैसाखी की जरूरत पड़ रही है। असम में भी कॉन्ग्रेस की यही हालत है। जम्मू कश्मीर में भी कॉन्ग्रेस की ऐसी ही हालत है, क्योंकि पीडीपी के साथ गठबंधन नहीं होने की वजह से कश्मीर घाटी की तीनों सीटों पर पीडीपी ने अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं।

एक तरफ बीजेपी देश के 16 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों में अकेले चुनाव लड़ रही है, तो कॉन्ग्रेस 12 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में। इन 18 (राज्य और केंद्र शाषित प्रदेशों में कुल 79 लोकसभा सीट) में कॉग्रेस उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन इसमें भी पंजाब, सिक्किम में उसे आम आदमी पार्टी और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा जैसे सहयोगियों से ही लड़ाई लड़नी पड़ रही है, ऐसी ही हालत दो केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली और जम्मू-कश्मीर का भी है। यहाँ आम आदमी पार्टी के साथ साझेदारी दिल्ली में है, तो जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ, यहाँ पीडीपी अलग चुनाव लड़ रही है। वहीं, कॉन्ग्रेस 6 केंद्र शासित प्रदेशों लक्षद्वीप, अंडमान निकोबार, लद्दाख, पुड्डुचेरी, चंडीगढ़, दमन दीव और दादरा नागर हवेली में अकेले ही चुनाव लड़ रही है।

इस बार कॉन्ग्रेस की सबसे कम सीटें, जानें पुराना इतिहास

अब बात करते हैं मुख्य मुद्दे की। अभी तक कॉन्ग्रेस ने देश भर की कुल 278 लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। कॉन्ग्रेस ने कभी भी 400 से कम सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। शुरुआत से लेकर अभी तक के आँकड़ों पर गौर करें, तो साल 1952 के पहले लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 479 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 364 सीटों पर जीत दर्ज की। 1957 में ये आँकड़ा बढ़कर 490 तक पहुँचा और जीत का आँकड़ा भी 370 तक पहुँच गया। कॉन्ग्रेस ने 1962 में 487 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 361 सीटों पर जीत मिली। साल 1967 के चुनाव में 512 सीटों पर चुनाव लड़कर कॉन्ग्रेस को 284 सीटों पर जीत मिली। 1971 में कॉन्ग्रेस ने 441 सीटों पर ही चुनाव लड़ा, लेकिन 352 सीटों पर कॉन्ग्रेस को जीत मिली। पाकिस्तान से युद्ध में जीत का भी इसमें बड़ा हाथ रहा।

साल 1977 में आपातकाल के बाद पहले चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 492 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन 154 सीटों पर ही जीत मिली और उसे पहली बार पूर्ण रूप से विपक्ष में बैठना पड़ा लेकिन 1980 में कॉन्ग्रेस ने 491 सीटों पर उम्मीदवार उतारते हुए 352 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की। साल 1984 में इंदिरा गाँधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर में कॉन्ग्रेस ने 492 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 405 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की, जो अब तक का रिकॉर्ड भी है।

इसके बाद कॉन्ग्रेस गिरावट की ओर आई। साल 1989 में कॉन्ग्रेस ने 510 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन सिर्फ 197 सीटों पर ही जीत मिली, तो 1991 में 492 सीटों पर लड़कर 232 सीटों पर जीत मिली। 1996 में कॉन्ग्रेस ने सर्वाधिक 529 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन 140 सीटें ही मिल पाई, जबकि 1998 में 477 सीटों पर चुनाव लड़कर उसे 141 सीटें मिली। 1999 में 453 सीटों पर लड़कर कॉन्ग्रेस 114 सीटें ही जीत पाई, तो 2004 में 417 सीटों पर लड़कर 145 सीटें जीत पाई। सबसे कम सीटों पर कॉन्ग्रेस ने इसी साल चुनाव लड़ा, लेकिन यूपीए गठबंधन के तहत कॉन्ग्रेस की अगुवाई में सरकार बनी।

साल 2009 में कॉन्ग्रेस ने यूपीए 2 के लिए 440 सीटों पर चुनाव लड़ा और 206 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई, लेकिन 2014 में कॉन्ग्रेस पार्टी को 463 सीटों पर लड़ने के बावजूद सिर्फ 44 सीटें मिली, जो उसका अब तक का सबसे बुरा चुनावी प्रदर्शन रहा। साल 2019 में 421 सीटों पर लड़कर महज 52 सीटों पर जीत मिली। इसमें से भी बड़ी संख्या में इस्तीफे हो चुके हैं। और इस बार तो कॉन्ग्रेस पार्टी अभी तक महज 278 सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर पाई है। ऐसा लगता है कि पार्टी बामुश्किल 20 सीटों पर और उम्मीदवार खड़े कर पाएगी और कुल आँकड़ा 300 के अंदर या आसपास ही सिमट कर रह जाएगा। ऐसे में कॉन्ग्रेस का चुनावी प्रदर्शन क्या होगा, ये सोचने वाली बात है, क्योंकि जितनी सीटों पर बीजेपी ने अकेले 2019 में जीत दर्ज की, उससे भी कम सीटों पर लड़ना ये दिखाता है कि कॉन्ग्रेस इस लोकसभा चुनाव में पहले ही हार मान चुकी है।

राहुल गाँधी की यात्राओं वाले राज्यों में भी दिक्कतें

कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए दो साल पहले से ही माहौल बनाना शुरू कर दिया था। साल 2022 के आखिर में कॉन्ग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा निकाली। ये न्याय यात्रा करीब 139 दिनों तक 14 राज्यों में कन्याकुमारी से लेकर श्रीनगर तक चली। इसके बाद 2023-24 में भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाली। इस यात्रा की भी अगुवाई राहुल गाँधी ने की। पूरब से पश्चिम तक ये यात्रा 15 राज्यों से गुजरी। यानी दो यात्राओं में 14+15 राज्यों में पहुँचने वाली कॉन्ग्रेस की यात्राओं का भी कोई बहुत फायदा नहीं पहुँचा। बल्कि इन राज्यों में कॉन्ग्रेस को नुकसान होता ही दिख रहा है।

राहुल गाँधी की यात्राओं के बीच कई सहयोगियों ने इंडी गठबंधन को छोड़ दिया। खास तौर पर भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समय। मुंबई से लेकर दिल्ली, पंजाब, यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और अरुणाचल प्रदेश तक पार्टी को झटके लगे। 15 राज्यों की इस यात्रा में कॉन्ग्रेस पार्टी को गुजरात, मध्य प्रदेश से लेकर तकरीबन हर उस जगह पर झटका लगा, जहाँ या तो राहुल गाँधी पहुँच चुके थे, या पहुँचने वाले थे। इस यात्रा को भी तय समय से पहले ही खत्म करना पड़ा। कॉन्ग्रेस द्वारा जारी मैप के मुताबिक, राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा करीब 100 लोकसभा सीटों से होकर गुजरी, इनमें से आधी से अधिक सीटों पर कॉन्ग्रेस का उम्मीदवार ही नहीं है। रही बात अमेठी और रायबरेली की, तो वहाँ अभी तक कॉन्ग्रेस पार्टी उम्मीदवार का नाम भी तय नहीं कर सकी है।

कॉन्ग्रेस के पास नहीं उम्मीदवार, निर्विरोध जीत रही बीजेपी

देश के पूर्वोत्तर का सबसे अहम राज्य है अरुणाचल प्रदेश। पूर्वोत्तर में भारत-चीन की तनातनी का केंद्र। यहाँ पर भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत में है। विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 19 अप्रैल को अरुणाचल में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी। हैरानी की बात है कि देश के सबसे पुराने दल कॉन्ग्रेस के पास यहाँ से हर सीट पर उम्मीदवार तक नहीं हैं। बीजेपी के कम से कम 5 प्रत्याशियों को विधानसभा चुनाव में निर्विरोध जीत मिली है, जिसमें मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी हैं। कॉन्ग्रेस की दुर्गति देखिए कि अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की 60 सीटे हैं, लेकिन उसने सिर्फ 34 सीटों पर उम्मीदवार उतारे।

अरुणाचल में राहुल गाँधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के तहत गए थे। तब पार्टी के पास कुछ विधायक थे, लेकिन उनकी भारत जोड़ो न्याय यात्रा का असर ऐसा हुआ, कि एक विधायक छोड़कर बाकी सारे विधायक बीजेपी में शामिल हो गए, यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायक दल के नेता भी। ये कॉन्ग्रेस की खत्म होती ताकत का सबूत नहीं, तो और क्या है?

वैसे एक तरफ तो चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव की घोषणा कर रहा था, तो दूसरी तरफ राहुल गाँधी अपनी यात्रा में ही बिजी रहे। सहयोगी सीट बँटवारे की गुहार लगाते-लगाते अलग होते गए, लेकिन राहुल गाँधी की यात्रा नहीं रुकी। इस बीच, कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए 44 पन्नों का जो घोषणा पत्र जारी किया है, उसमें 300 से ज्यादा वादे कर दिए हैं और उम्मीदवार पार्टी को 300 भी नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में क्या ये माना जाएगा कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे जब 4 जून को आएँगे, तब तक राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के दफ्तर पर ताला लगा चुके होंगे?

गर्भवती पत्नी को दवा दिलाने जा रहा था अंकित, AAP कार्यकर्ता ने चाकू घोंप-घोंप कर मार डाला: पंजाब के जालंधर की घटना, 6 पर FIR

पंजाब के जालंधर जिले में एक युवक की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई है। युवक के पूरे शरीर पर ताबड़तोड़ 17 वार किए गए जिससे उसकी आँतें तक बाहर आ गईं। हमले में मृतक की गर्भवती पत्नी भी घायल हो गईं। उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। हत्या का आरोप आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता करण मल्ली और उसके साथियों पर लगा है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। घटना रविवार (14 अप्रैल 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना जालंधर के बस्ती शेख मोहल्ले में पड़ने वाले चाय आम की है। 26 वर्षीय मृतक का नाम अंकित जंबा है। वह प्लास बनाने वाली फैक्ट्री का मालिक था। 4 साल पहले अंकित की शादी मनीषा से हुई थी। मनीषा 4 माह की गर्भवती थी। रविवार को अंकित बाइक से अपनी पत्नी का इलाज करवाने अस्पताल जा रहा था। इसी बीच चाय आम के पास उसकी बाइक आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता करण मल्ली ने रोक ली। करण के साथ 5 अन्य शामिल लोग बताए जा रहे हैं।

अंकित द्वारा बाइक रोकते ही इन सभी ने उस पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार करने शुरू किए। अंकित के पेट, पीठ और सिर में चाकू घोंपे गए। घटनास्थल पर मौजूद मनीषा ने अपने पति को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहीं। इसी बीच बचाव में मनीषा भी घायल हो गईं। हमलावरों ने अंकित पर कुल 17 वार किए। 5 मिनट तक लगातार अंकित पर वार करने के बाद हमलावर मौके से भाग निकले। हमले के दौरान अंकित की पत्नी लोगों से मदद माँगती रही लेकिन किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया।

बाद में पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। पुलिस ने अंकित को अस्पताल में भर्ती करवाया जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। अंकित की पत्नी मनीषा हमले में गंभीर रूप से घायल हो गईं हैं जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने करण मल्ली, सोनू, अजय और सन्नी सहित कुल 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इन सभी पर हत्या, हत्या का प्रयास और अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

हत्या के पीछे आरोपितों और मृतक के बीच पुरानी रंजिश बताई जा रही है। बताया गया कि लगभग ढाई साल पहले अंकित जंबा और करण मल्ली में किसी बात को ले कर झगड़ा हुआ था। तब, अंकित ने करण के खिलाफ हत्या के प्रयास की FIR दर्ज करवाई थी। उस समय अंकित पर हमला करने में कुछ निहंग भी शामिल थे। हालाँकि पुलिस ने करण की भी तहरीर पर क्रॉस केस दर्ज किया था। इस मामले में अंकित जंबा को भी जेल भेजा गया था। मनीषा का कहना है कि तब से करण उनके पति को मारने की लगातार कोशिशें कर रहा था। इस की सूचना पंजाब पुलिस को भी दी गई थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मृतक के भाई मनी ने आरोप लगाया है कि हमलावर करण आपराधिक सोच का है जो जालंधर के मल्ली इलाके में नशे का कारोबार करता है। अंकित की हत्या के बाद उनके परिजनों और रिश्तेदारों ने अस्पताल में हंगामा किया। मृतक के घर वालों ने आरोपितों की गिरफ्तारी न होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। तनाव को देखते हुए अस्पताल में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। फिलहाल अभी तक किसी हमलावर की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

ईरान का बम-मिसाइल इजरायल के लिए दिवाली के फुसकी पटाखे: पेट्रियट, एरो, आयरन डोम, डेविड स्लिंग… शांत कर देता है सबकी गरमी, अब आ रहा इन सबका बाप!

हाल ही में इजरायल पर ईरान ने 300 रॉकेट दागे, जिनमें से 297 को यहूदी देश ने मार गिराया। एक को तो अंतरिक्ष तक खदेड़ कर मार गिराया गया। इसी तरह हमास ने भी 5000 से भी अधिक रॉकेट्स के साथ अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमला किया था, लेकिन उनमें से अधिकतर हवा में ही मार गिराए गए। रक्षा तकनीक के मामले में इजरायल इतना उन्नत है कि वो असंभव को संभव कर पाता है। इसके मुख्य स्तम्भ हैं – आयरन डोम, एरो, पेट्रियट और डेविड्स स्लिंग। आइए, इनके बारे में समझते हैं।

इजरायल का आयरन डोम – मिसाइलों के लिए काल

अरबों डॉलर की अमेरिकी मदद से इजरायल ने मिसाइलों के इस काल को विकसित किया है, अमेरिका ने हमास के हमले के बाद इजरायल को अरबों डॉलर की और भी सहायता दी है। ये एंटी-मिसाइल तकनीक मिसाइलों का पता लगाता है, फिर हवा में ही उसे मार गिराता है। ‘राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स’ और ‘इजरायल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज’ ने मिल कर इसे बनाया है। 2011 में निर्मित ये आयरन डोम शॉर्ट रेंज रॉकेट्स व अन्य हवाई हमलों को हवा में ही नाकाम कर देता है।

इसमें एक राडार यूनिट लगा है जो इजरायल की तरफ आने वाली मिसाइलों की पहचान करता है। इसके बाद इसका डेटा बैटल मैनेजमेंट एवं कंट्रोल यूनिट को भेजा जाता है, जो इस खतरे की पहचान करता है। फिर एक फायरिंग यूनिट ऐसे मिसाइल को लॉन्च करता है जिसमें राडार लगा होता है और वो आने वाले खतरे को नष्ट कर देता है। किसी रिहायशी इलाके या इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने की मंशा हो दुश्मन की, तब ये मिसाइल/रॉकेट्स को मार गिराता है।

ये तकनीक राडार द्वारा खतरे को भाँपने और विश्लेषण के माध्यम से उसे पहचानने पर आधारित है। इसकी सफलता दर 90% से अधिक है। 2000 से अधिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर के ये अपनी क्षमता जाहिर कर चुका है। ये एक मल्टी-मिशन सिस्टम है। ये हर मौसम में काम करता है, दिन हो या रात। इसके संचालन में तुलनात्मक रूप से खर्च भी कम आता है। ये जहाजों तक को सुरक्षित करता है। बारिश हो, बादल नीचे आ गए हों या धूल उड़ रहे हों – ये काम करता रहता है।

David’s Sling: इजरायल के एयर डिफेन्स का मिडिल लेयर

डेविड्स स्लिंग इजरायल के एयर डिफेंस का मिडिल लेयर है। ये बैलिस्टिक एवं क्रूज मिसाइलों को भाँप कर उनकी पहचान करता है, साथ ही माध्यम से लेकर लॉन्ग रेंज तक की मिसाइलों का भी पता लगा लेता है। ये 2017 से संचालन में है। इसे ‘राफेल एडवांस्ड डिफेन्स सिस्टम्स’ और अमेरिका के डिफेन्स कांट्रेक्टर Raytheon ने मिल कर विकसित किया है। 25 से 186 मील तक की रेंज में फायर की गई मिसाइलों/रॉकेट्स को ये जवाबी हमले से नष्ट कर देता है।

अगस्त 2008 में इजरायल-अमेरिका ने इसके लिए प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर किए थे। इसे ‘Magic Wand’ (जादुई छड़ी) भी कहा जाता है। ईरान, सीरिया, हमास और लेबनान की तरफ से आने वालों खतरों को ये नष्ट करता है। Raytheon के ‘स्टनर मिसाइल्स’ का इस्तेमाल कर खतरे को भाँपता है। एक लॉन्चर 16 मिसाइलों से लैस हो सकता है। पूरे इजरायल के लिए 2 डेविड्स स्लिंग बैटरी काफी है। एक बार इजरायल ने सीरिया की तरफ से आने वाली मिसाइलों को नष्ट करने के लिए 2 इंटरसेप्टर छोड़े थे, लेकिन उन मिसाइलों ने दिशा बदल ली जिसके बाद इजरायल ने एक इंटरसेप्टर को खुद को नष्ट करने का आदेश दिया, दसरा सीरिया में कहीं गिरा।

Arrow: टॉप लेवल सर डिफेन्स सिस्टम

इजरायल ने Arrow 2 एवं 3 सिस्टम विकसित की है। अगर किसी इसाइल को पृथ्वी के वातावरण से बाहर फायर किया गया है, उसकी भी पहचान कर के ये उसे नष्ट कर सकता है। इसे इजरायल का टॉप लेवल एयर डिफेन्स सिस्टम कहा जाता है। 2017 में इसका निर्माण पूरा हुआ था। Arrow 3 का परीक्षण 2023 में ही हुआ है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा फायर की गई मिसाइल की इसने पहचान की थी, जिसका निशाना इजरायल का एलिअट शहर था।

इसे भी अमेरिका के साथ मिल कर ही विकसित किया गया है। Arrrow 2 विस्फोटकों का भी इस्तेमाल करता है, जबकि 3 में ये व्यवस्था नहीं है। इंटर्सेप्शन के माध्यम से ही ये डैमेज कर देता है। ये लॉन्ग रेंज की मिसाइलों को पकड़ने की क्षमता रखता है। इसे विकसित किया जाना 1980 के दशक में ही शुरू हो गया था। 90 के दशक में इजरायल ने Arrow 1 से काम चलाया, लेकिन 2000 में इसका दूसरा वर्जन आ गया। ये ऊपरी वातावरण में हिट एन्ड कील सिस्टम पर काम करता है।

Patriot: इजरायली हवाई सुरक्षा का बुजुर्ग सदस्य

ये भी अमेरिका की मदद से ही विकसित किया गया सिस्टम है। ये इजरायल की एंटी-मिसाइल तकनीक का सबसे पुराना सदस्य है। 1991 में प्रथम खाड़ी युद्ध के समय इसका इस्तेमाल किया गया था। इराक द्वारा फायर की जाने वाली मिसाइलों की ये उस समय पहचान करता था। इराक में तब सद्दाम हुसैन का शासन था। अब ये एयरक्राफ्ट्स एवं ड्रोन को मार गिराने के काम आता है। अभी Arrow 2 का इस्तेमाल जिस काम के लिए किया जाता है, कभी इसकी जगह Patriot था।

सितंबर 2014 में इसने सीरिया से आ रहे एक एयरक्राफ्ट को मार गिराया था, जिसमें लोग भी सवार थे। ये कम्युनिकेशन, कमांड एवं कंट्रोल पर काम करता है। साथ ही राडार सर्विलांस और मिसाइल गाइडेंस से लैस है। ये एक मोबाइल एयर डिफेन्स सिस्टम है, ट्रक और करें की मदद से जिसमें मिसाइलों को रीलोड किया जाता है। इसमें एक कंट्रोल स्टेशन होता है, जिसे इसका हार्ट कहा जाता है। इसमें इन्फॉर्मेशन कोऑर्डीनशन सेंटर और इलेक्ट्रिक पॉवर प्लांट भी होता है।

Iron Beam: इजरायल की रक्षा तकनीक का भविष्य

Iron Beam को भी राफेल द्वारा ही बनाया जा रहा है, जो इजरायल की रक्षा तकनीक का भविष्य है। मोर्टार से लेकर रॉकेट तक को ये नष्ट करेगा। अभी के काइनेटिक इंटरसेप्टर सिस्टम कुछ खतरों की पहचान नहीं कर पाते हैं, इसीलिए नई तकनीक की ज़रूरत है। ये एक मल्टीलेयर डिफेन्स सिस्टम है, ये प्रकाश की गति से इंगेजमेंट करेगा और इसमें अनगिनत मैगजीन्स होंगे और इंटर्सेप्शन पर खर्च भी कम आएगा। इजरायल HEL सिस्टम, LITE बीम और आयरन बीम बना रहा है।

Iron Beam 100 KW का क्लास हाई एनर्जी लेजर वेपन सिस्टम (HELWS) होगा, ये अपनी तरह की पहली ऐसी व्यवस्था होगी। ये RAM और UAVs को पकड़ सकेगा। ये कुछ सौ मीटर की दूरी से लेकर कई किलोमीटर तक के क्षेत्र में खतरों को तबाह करेगा। इसे कई प्लेटफॉर्म्स पर इंटीग्रेट किया जा सकता है। ये पिनपॉइंट एक्यूरेसी के साथ काम करता है। अपनी कम से कम क्षति होती है। प्रति इंटर्सेप्शन खर्च न के बराबर होता है।