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पड़ोसी लड़के से बात करती थी 14 साल की बेटी, मोहम्मद बहाल ने कुल्हाड़ी से सिर किया वार: मौके पर ही मौत, मुंगेर पुलिस को पिता की तलाश

बिहार के मुंगेर में एक पिता ने शुक्रवार (12 अप्रैल 2024) को अपनी 14 साल की नाबालिग बेटी की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी और उसके शव को कमरे में छिपा दिया। पिता को शक था कि उसकी बेटी का किसी के नाजायज संबंध है। वह रात में शव को ठिकाने लगाने की कोशिश में था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस को इसके बारे में जानकारी मिल गई। फिलहाल आरोपित फरार है।

घटना मुफस्सिल थाना के श्रीमतपुर पंचायत के मुबारकचक गाँव के खलीफा टोला की है। यहाँ के मोहम्मद बहाल को शंका थी कि पाँचवीं कक्षा में पढ़ने वाली उसकी नाबालिग बेटी शहाना का पड़ोसी के साथ प्रेम प्रसंग है। इसके बाद उसने कुल्हाड़ी से बेटी के सिर पर वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना को अंजाम देकर वह फरार हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुँची। वहाँ नाबालिग मृत अवस्था में पड़ी हुई थी। घर में मृतका की माँ से पुलिस ने पूछताछ की तो उसने टाल-मटोल की कोशिश लगी। उसने पुलिस को बताया कि हैंडपंप से पानी भरने के दौरान बेटी को मिर्गी आ गई और गिरने से मौत हो गई। कभी कुछ और बहाने बनाती। वह लगातार अपना बयान बदल रही थी। इससे अधिकारियों को शक हुआ।

पुलिस जब शव को कब्जे में लेने लगी तो अधिकारियों को रोका गया। हालाँकि, पुलिस ने एक न सुनी और शव को कब्जे में ले लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। इसके साथ ही मृतका को पकड़ कर थाने लाई और सख्ती से पूछताछ की तो उसने बताया कि पड़ोस के युवक से बेटी का प्रेम-प्रसंग चल रहा था। इसी बात को लेकर उसके शौहर ने बेटी के सिर पर धारदार हथियार से वार कर हत्या कर दी।

मृतक की अम्मी खुशबू परवीन ने पुलिस को बताया कि उसका शौहर शराबी है और पेशे से सपेरा है। उसने बताया कि गाँव के कुछ लोगों ने उसके शौहर से बेटी के बारे में शिकायत की थी। गाँव वालों की बातें सुनकर मोहम्मद बहाल काफी गुस्सा हो गया था। शाम को जब वह शराब के नशे में घर आया तो बेटी के साथ मारपीट करने लगा। इसी दौरान उसने कुल्हाड़ी से बेटी के सिर पर वार कर दिया।

मुफस्सिल थानाध्यक्ष सह प्रशिक्षु एएसपी शैलेंद्र कुमार सिंह ने भागलपुर से 3 सदस्यीय एफएसएल टीम को बुलाया है। वहीं, टीम ने ब्लड का सैंपल सहित कई तरह के साक्ष्य ले लिया है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना में इस्तेमाल कुल्हाड़ी को भी बरामद कर लिया गया है। फिलहाल फरार पिता को दबोचने के लिए छापेमारी की जा रही है।

गाँव वालों ने इसकी शिकायत पुलिस से की थी। श्रीमतपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि खुर्शीद आलम उर्फ महफूज ने बताया कि मोहम्मद बहाल को अपनी लड़की पर शक था कि वह किसी लड़के से बात करती थी। पिता ने कुल्हाड़ी से हमला किया और सिर पर चोट लगने से उसकी मौत हो गई। महफूज ने कहा, “मेरे पंचायत के लोग हैं, इसलिए मामला मुझे पता है।”

अपहरण किया, बंधक बनाया… अतीक अहमद के सफाईकर्मी के नाम पर ₹8 करोड़ की संपत्ति लेकिन उसे खबर ही नहीं, दलितों की कब्जाई थी जमीन

प्रयागराज के माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की हत्या को करीब एक साल बीत चुके हैं, लेकिन उनसे जुड़े कारनामे लगातार सामने आ रहे हैं। अब पता चल रहा है कि अतीक अहमद के घर में काम करने वाला सफाई कर्मी भी करोड़ों की संपत्ति का मालिक है। जी हाँ, अतीक अहमद के घर में साफ-सफाई करने वाला श्याम जी सरोज 8 करोड़ से अधिक की संपत्ति का मालिक है, वो भी तब, जब उसकी खुद की सैलरी 8 हजार रुपए प्रति माह थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्याम जी सरोज के नाम से अतीक और उसके गुर्गों ने 8 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराई थी। हालाँकि खुद सरोज को इस बारे में पता नहीं था। उसका तो वेतन महज 8 हजार रुपए प्रति माह था। पुलिस से श्याम जी सरोज ने कहा कि अगर उसे जानकारी होती कि उसके नाम करोड़ों की प्रॉपर्टी है तो वह मुंबई भाग गया होता।

इस मामले में श्याम जी सरोज ने पुलिस से संपर्क किया है और एससी-एसटी एक्ट में मामला दर्ज कराया गया है। बता जा रहा है कि श्याम जी सरोज पर अतीक अहमद के गुर्गे उन बेनामी संपत्तियों को ट्रांसफर करने का दबाव बना रहे थे, जो उसके नाम पर खरीदी गई थी। उन संपत्तियों के बारे में उसे जानकारी भी नहीं है। अब श्याम जी सरोज की तहरीर पर पुलिस ने माफिया अतीक अहमद के करीबी जावेद खान उसके भाई कामरान अहमद, फराज अहमद खान और शुक्ला जी के खिलाफ अतरसुइया थाने में एफआईआर दर्ज की है। सफाईकर्मी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपित घर छोड़कर फरार हो गए हैं।

पीड़ित ने बताया है कि वो 15 सालों से जावेद और उसके भाई कामरान के घर पर सफाई का काम करता था। अतीक के गुर्गों ने उसके नाम आईसीआईसीआई बैंक में खाता खुलवाया था। बैंक के सभी कागजात श्याम के नाम पर थे, लेकिन मोबाइल नंबर जावेद ने अपना दर्ज कराया था। जावेद ने श्याम के नाम दलितों की जमीन रजिस्ट्री कराई थी। इसके बाद उसको बेचकर बैंक खाते से रुपये ट्रांसफर कर लिए। इस दौरान श्याम के चेक पर हस्ताक्षर कर कर उसके बैंक खाते में लगाए हैं। रुपये न होने पर चेक बाउंस हो गया था। इसके बाद चेक बाउंस के आरोप में श्याम के नाम पर नोटिस जारी कराया था। इसके बाद धमकी देने लगे कि अगर उसकी बात नहीं मानी तो उसे जेल भिजवा देंगे।

पीड़ित का आरोप है कि कई बार उसे अगवा कर होटल में बंधक बनाए रखा गया है। अतीक के गुर्गे उसे लगातार ब्लैकमेल कर अवैध कारोबार कर रहे थे। पुलिस को श्याम जी सरोज के नाम से कई बैनामे के कागजात मिले हैं। इसमें महेवा नैनी, सराय इनायत में प्रॉपर्टी बताई गई है। श्याम जी ने पुलिस को जानकारी दी है कि करछना, फूलपुर और हंडिया तहसील में ले जाकर हस्ताक्षर कराए गए थे। इस आधार पर पुलिस गंगानगर और यमुनानगर में श्याम जी सरोज के नाम की बेनामी संपत्तियों का पता लग रही है।

शुरुआती जाँच में पता लगा है कि गंगानगर में करीब 5 करोड़ और यमुनानगर में 3 करोड़ की प्रॉपर्टी श्याम जी सरोज के नाम है। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस अतीक अहमद की अवैध और बेनामी संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट 14 (1) के तहत कुर्क करने की भी कार्रवाई करेगी।

फंदे से लटकी लड़की, हाथ पर ‘अकबर’ के नाम की मेहंदी… ईद का मेला घूमने गई थी नाबालिग, पिता बोले – जंगल में ले जाकर हुआ सामूहिक बलात्कार

झारखंड के साहिबगंज में एक नाबालिग लड़की की लाश मिली है। मामला साहिबगंज जिले के बरहेट थाना क्षेत्र का है। संदिग्ध अवस्था में युवती की मौत के बाद परिजनों ने सामूहिक बलात्कार का आरोप भी लगाया है। किशोरी के पिता ने बताया कि रात को उनकी बेटी को किसी ने फोन कॉल किया था, जिसके माध्यम से उसे मेला देखने के लिए बुलाया गया था। इसके बाद वो घर से बाहर निकली थी। हालाँकि, जब वो देर रात तक घर नहीं लौटी तो परिजनों को चिंता हुई।

उसकी खोजबीन शुरू की गई। रात भर तलाशी चली लेकिन लड़की का कोई अता-पता नहीं चला। लड़की के पिता ने जानकारी दी कि जब उनकी बेटी सुबह घर पहुँची तो कुछ देर अपनी माँ से बात की और फिर अपने कमरे में चली गई। पिता ने ये भी बताया है कि उनकी बेटी के हाथ पर ‘अकबर’ नाम के युवक का मेहंदी से नाम लिखा हुआ था। उन्होंने ये भी बताया कि उनकी बेटी के साथ बलात्कार किया गया है। उन्होंने 4 लोगों पर सामूहिक बलात्कार के आरोप लगाए हैं।

हालाँकि, दुमका प्रक्षेत्र की DIG ए विजया लक्ष्मी की बैठक में व्यस्त रहने के कारण बरहेट के थाना प्रभारी इस मामले की छानबीन नहीं कर पाए। पुलिसकर्मियों ने लड़की के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल में भेज दिया है। DIG ने SP को जाँच का आदेश दिया है। पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने बताया कि पुलिस जाँच कर रही है कि मामला प्रेम प्रसंग का है या फिर गैंगरेप का। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की तरफ से आवेदन मिलते ही कार्रवाई शुरू की जाएगी।

पीड़िता की उम्र मात्र 14 वर्ष थी। उसने फंदे से लटक कर आत्महत्या की है। अकबर अंसारी पर परिजनों ने लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाने का आरोप भी लगाया है। ईद के दिन सामूहिक बलात्कार हुआ। सब ईद के जश्न में डूबे हुए थे, ऐसे में इस आत्महत्या से तनाव का माहौल पैदा हो गया। बताया गया कि जब वो घर लौटी तब वो काफी डरी-सहमी थी, आसपास के लोग जमा हो गए थे और उसके बारे में पूछ रहे थे। परिवार का कहना है कि अकबर अंसारी उसे ईद घुमाने के बहाने जंगल में ले गया और वहीं उसका सामूहिक बलात्कार हुआ।

‘शबरी के घर आए राम’: दलित महिला ने ‘टीवी के राम’ अरुण गोविल की उतारी आरती, वाल्मीकि बस्ती में मेरठ के BJP प्रत्याशी का भव्य स्वागत

भाजपा के मेरठ लोकसभा सीट से उम्मीदवार और अभिनेता अरुण गोविल जब शनिवार (13 अप्रैल, 2024) को एक दलित के घर पहुँचे तो उनकी आरती उतारी गई। उनकी आरती उतारने वाली महिला ने कहा कि उनका सपना पूरा हो गया और ऐसा लगा कि शबरी के घर राम आ गए हैं। अरुण गोविल ने रामानंद सागर की रामायण में श्रीराम का किरदार अदा किया था।

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए मेरठ से भाजपा प्रत्याशी शनिवार को मेरठ की वाल्मीकि बस्ती में जनसंपर्क अभियान के लिए पहुँचे थे। यहाँ वह नीतू जाटव के घर में गए। घर में प्रवेश करने से पहले अरुण गोविल की आरती उतारी गई। उनकी आरती नीतू जाटव ने उतारी। नीतू जाटव ने उन्हें माला पहनाई और अपने घर में स्वागत किया।

नीतू जाटव के घर में अरुण गोविल ने जलपान भी किया। नीतू जाटव ने बताया कि अरुण गोविल के उनके घर से उनका सपना पूरा हो गया और उन्हें ऐसा लगा कि शबरी के घर राम आ गए। अरुण गोविल ने वाल्मीकि नगर के और भी घरों में जनसंपर्क किया। इसके बाद वह स्थानीय पार्षद के घर भी पहुँचे।

गौरतलब है कि इस सीट से अब तक भाजपा के ही राजेन्द्र अग्रवाल सांसद थे। राजेन्द्र अग्रवाल भाजपा के वरिष्ठतम सांसदों में से एक थे। वह मेरठ सीट पर लगातार 2009 से ही चुनाव जीत रहे थे। उनका इस बात टिकट काट कर पार्टी ने अभिनेता अरुण गोविल को लड़ाने का निर्णय लिया। अरुण गोविल की भारतीय घरों में काफी लोकप्रियता है।

गोविल ने 1980 के दशक में बनाए गए और दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले नाटक रामायण में श्रीराम का रोल अदा किया था। वह लगातार मेरठ में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उनकी स्थिति इस सीट पर मजबूत नजर आ रही है। उनके सामने समाजवादी पार्टी से सुनीता वर्मा प्रत्याशी हैं।

समाजवादी पार्टी इस सीट पर तीन बार प्रत्याशी बदल चुकी है। सबसे पहले पार्टी ने यहाँ भानू प्रताप सिंह को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाहरी होने के कारण उनका टिकट काट दिया गया। इसके बाद मेरठ से सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान को टिकट दिया गया था लेकिन उनकी टिकट काट दी गई। इसके बाद सुनीता वर्मा को टिकट दिया गया।

संदेशखाली में यौन उत्पीड़न और डर का माहौल, अधिकारियों की लापरवाही: मानवाधिकार आयोग की आई रिपोर्ट, TMC सरकार को 8 हफ़्ते का समय

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से निष्कासित शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों द्वारा महिलाओं का शोषण करने को लेकर देश भर में बवाल हुआ था। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी घटनास्थल पर पहुँचकर जाँच की थी। NHRC ने इसको लेकर अपनी रिपोर्ट जारी है, जिसमें मानवाधिकार से जुड़ी कई चिंताओं को जाहिर किया गया है।

आयोग ने घटनास्‍थल पर की गई जाँच में पाया कि पीड़ितों पर कई तरह से अत्याचार किए। आयोग का कहना है कि लोक सेवकों ने इसे रोकने में लापरवाही की, जिसके कारण मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन हुआ। आयोग ने अपनी यह रिपोर्ट बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी को भेज दी है। साथ ही आयोग द्वारा की गई सिफारिशों पर कार्रवाई की रिपोर्ट 8 सप्ताह में माँगी है।

दरअसल, संदेशखाली की महिलाओं के साथ शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न का NHRC ने स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद आयोग ने पश्चिम बंगाल की सरकार से इस मामले पर रिपोर्ट माँगी थी। आयोग ने आरोपितों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की भी बात कही थी। इसके साथ ही आयोग ने एक सदस्यीय जाँच दल को घटनास्थल पर जाँच के लिए भेजा था।

आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस के जवाब में पश्चिम बंगाल के डीजी और आईजीपी ने 29 फरवरी को बताया कि इस मामले में कुल 25 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से 7 केस महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध की शिकायतों से जुड़े थे। इसके साथ ही इन मामलों में 24 व्यक्तियों को गिरफ्तार करने की बात भी कही थी। बाकी अपराधियों को जल्दी ही गिरफ्तार करने की बात कही गई थी।

NHRC ने अपनी जाँच में पाया है कि संदेशखाली की पीड़ितों के मन में डर समाया हुआ है। आयोग ने सरकार से इस डर को दूर करने के लिए कहा, ताकि वे अपने परिवारों के साथ सामान्य जीवन जी सकें। पीड़ितों में विश्वास बहाली के लिए इलाके के अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकार को भी कदम उठाने के लिए कहा है। जाँच में आयोग ने निम्नलिखित तथ्य पाए हैं-

i. कथित आरोपित व्यक्तियों द्वारा किए गए अत्याचारों के कारण पीड़ितों को डराने-धमकाने वाला तथा खामोश करने वाला माहौल बन गया है। इस आतंक ने उनमें न्याय माँगने के प्रति अनिच्छा पैदा कर दी। यहाँ के लोगों को हमले, धमकी, यौन शोषण, भूमि पर कब्जा और जबरन अवैतनिक श्रम का सामना करना पड़ा। ऐसी परिस्थितियों में उन्हें आजीविका के लिए बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

ii. संबंधित अधिकारियों द्वारा कथित व्यक्तियों के समूह के साथ मिलीभगत से सरकारी योजनाओं जैसे कि वृद्धावस्था पेंशन, मनरेगा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, घरों और शौचालयों के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता आदि के में भेदभाव/अस्वीकार करने का आरोप है, जो गहरी चिंता का विषय है। इसके अलावा, वोट देने के अधिकार से वंचित करने का मामला भी सामने आया है।

iii. प्रतिशोध के डर से इन व्यक्तियों ने शिकायतें नहीं की या देर की कीं।

एनएचआरसी टीम ने संदेशखाली में पुलिस और प्रशासन से भी बातचीत की और अधिक जानकारी के लिए उनसे अनुरोध किया। हालाँकि, उन्होंने आज तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। संदेशखाली के हालात को देखकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने कुछ सिफारिशें की हैं, जो निम्नलिखित हैं:

  1. कानून के शासन में विश्वास और अधिकारियों में विश्वास बहाल करना
  2. गवाहों की सुरक्षा और शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करना
  3. यौन अपराधों के पीड़ितों को परामर्श और पुनर्वास
  4. वैध स्वामियों को भूमि की वापसी
  5. केंद्रीय एजेंसियों द्वारा शिकायतों की निष्पक्ष जाँच
  6. जागरूकता कार्यक्रम शुरू करना
  7. राष्ट्रव्यापी आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (एनईआरएस) का संचालन
  8. व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर पैदा करना
  9. भूमि को पूर्व रूप में लाकर कृषि योग्य बनाना
  10. सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में सुधार करना और क्षेत्र-विशिष्ट योजनाएँ तैयार करना
  11. संदेशखाली की स्थिति पर समय-समय पर रिपोर्ट देने के लिए विशेष प्रतिवेदक नियुक्त करना
  12. थाना संदेशखाली क्षेत्र से लापता महिलाओं/लड़कियों के मामलों की जाँच।

केरल के लोगों ने अब्दुल रहीम के लिए इकट्ठा किए ₹34 करोड़, 15 साल की लड़के की हत्या के लिए सऊदी अरब में सुनाई गई थी मौत की सजा

केरल के लोगों के एक बड़े समूह ने कुछ समय में ही ₹34 करोड़ इकट्ठा कर दिए। यह धनराशि अब्दुल रहीम को बचाने के लिए इकट्ठा की गई। अब्दुल रहीम को सऊदी अरब में 15 साल के लड़के की हत्या के दोष में मौत की सजा मिली है। कोझिकोड का रहने वाला अब्दुल रहीम 18 सालों से सऊदी अरब की जेल में बंद है। उस पर 2006 में 15 वर्षीय बालक को मारने का आरोप लगा था। बताया गया कि जिस लड़के की मौत हुई, उसकी अब्दुल रहीम देखभाल करता था और वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर जीवित था।

जिस लड़के की मौत हुई वह सांस लेने और खाना खाने के लिए एक विशेष डिवाइस का उपयोग करता था। यह उसके गले में बाँधा गया था। अब्दुल रहीम ने कहा कि यह डिवाइस उसकी वजह से तब हट गया जब वह पीछे की सीट पर बैठे लड़के को शांत करने की कोशिश कर रहा था। बताया गया कि यह लड़का बवाल कर रहा था और लाल बत्ती जलाने की माँग कर रहा था। जब लड़के की डिवाइस हट गई तो उसे ऑक्सीजन की कमी हो गई और उसकी मौत हो गई। उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसे मृत घोषित कर दिया गया।

इस मौत पर चले मुकदमे में सऊदी अरब की एक अदालत ने अब्दुल रहीम को मौत की सजा सुनाई। सऊदी की सर्वोच्च अदालत ने भी यह निर्णय बरकरार रखा। अब्दुल रहीम को 2012 में सजा सुनाई गई थी। इस फैसले के खिलाफ अपील भी की गई थी, लेकिन 2017 और 2022 में यह फैसला बरकरार रखा गया।

जिस लड़के की मौत हुई उसके परिवारीजनों ने कहा कि 1.5 करोड़ सऊदी रियाल (₹34 करोड़) के बदले में अब्दुल रहीम को माफ कर देंगे। इस मामले में ₹34 करोड़ उपलब्ध करवाने के लिए 16 अप्रैल तक का समय दिया गया था।

रहीम की रिहाई के लिए जिस एक्शन ग्रुप की स्थापना की गई थी, वह पाँच दिन पहले तक केवल 5 करोड़ रुपये जुटाने में सफल हुआ था। लेकिन जैसे जैसे यह बात केरल के रहने वाले अलग अलग लोगों तक पहुँची, पैसा जल्दी जल्दी इकट्ठा होने लगा। रहीम की रिहाई के लिए बनाए गए ग्रुप ने बताया कि पहले लड़के के परिवार ने रहीम को माफ़ करने से मना किया लेकिन वह पैसा लेकर माफ़ी देने को तैयार थे। रियाद से लेकर चेन्नई तक कई लोगों ने यह पैसा इकट्ठा करने में सहायता की।

अब्दुल रहीम की रिहाई के लिए काम करने वाले अशरफ वेंगट ने कहा, “हम अपने ₹34 करोड़ के टार्गेट तक पहुँच गए हैं। हमने अब तक ₹34.45 करोड़ इकट्ठा किए हैं। हमें और पैसे ना भेजे जाएँ। फ़ालतू पैसे को अच्छे कामों में लगाया जाएगा। एक बार फिर से मलयाली समुदाय ने अपनी एकता दिखाई है।” अब्दुल रहीम की माँ ने कहा कि उन्हें विश्वास ही नहीं था कि यह धनराशी कभी इकट्ठा भी की जा सकती है।

अब्दुल रहीम की रिहाई के लिए केरल में कई चैरिटी इवेंट आयोजित किए गए और साथ ही एक यात्रा भी निकाली गई। सऊदी अरब में ‘दिया’ एक ऐसी धनराशि को कहा जाता है जो किसी की हत्या के मुआवजे में दी जाती है। इसे शरिया कानून के तहत अदालत के जरिए तय किया जाता है। इस धनराशि को जल्द ही सऊदी अरब में जमा करवा दिया जाएगा।

अब्दुल रहीम 26 साल का था, जब वह 2006 में एक परिवार के लिए ड्राइवर के रूप में काम करने के लिए सऊदी अरब गया थे। इस परिवार ने उन्हें अपने 15 वर्षीय लकवाग्रस्त बेटे की देखभाल की जिम्मेदारी दे दी, उसे सांस लेने के लिए अलग से एक डिवाइस की मदद लेनी पड़ती थी। 24 दिसंबर, 2006 में उस लड़के की मृत्यु हो गई। यह घटना अब्दुल रहीम के सऊदी में आने के महज 28 दिन बाद हुई और तब से वह जेल में बंद है।

‘नरेंद्र मोदी ढोलतोर (मरेगा)…, पुलिस वालों को तीर-धनुष से मारो’ : 2 बयान-2 FIR, बस्तर के कॉन्ग्रेस उम्मीदवार कवासी लखमा के खिलाफ EC ने शुरू की कार्रवाई

बस्‍तर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस प्रत्‍याशी कवासी लखमा के खिलाफ इस चुनाव में एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन-तीन एफआईआर दर्ज हो चुकी है। पहला मामला नोट बाँटने से जुड़ा है, तो दूसरा मामला पुलिस वालों को मारने के लिए वनवासियों को भड़काने का है और तीसरा मामला पीएम नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी का है। इन तीनों ही घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं।

इन तीनों मुद्दों पर कवासी लखमा के खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। बीजेपी ने कवासी की शिकायत चुनाव आयोग से भी की है। नोट बाँटने के मामले में एफआईआर पहले ही दर्ज हो चुकी थी, तो गुरुवार-शुक्रवार को कवासी के खिलाफ 2 नई एफआईआर दर्ज हुई हैं।

राहुल गाँधी के बस्तर दौरे से एक दिन पहले बस्तर लोकसभा सीट के कॉन्ग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ जिला निर्वाचन आयोग ने बीजापुर जिले के अलग-अलग थानों में विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराया है और गिरफ्तारी होने की भी संकेत दिए हैं। इन मामलों में बीजापुर जिले के दो अलग-अलग थानों में लखमा के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। हाल ही में नैमेड़ गाँव में एक नुक्कड़ सभा के दौरान कवासी लखमा ने स्थानीय गोंडी बोली में प्रधानमंत्री के खिलाफ विवादित बयान दिया था।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बस्तर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार कवासी लखमा ग्रामीणों को गोंडी बोली में संबोधित कर रहे हैं, जिसमें वो कहते दिख रहे हैं, “कवासी लखमा जीतोड़, नरेंद्र मोदी ढोलतोर” यानी कवासी लखमा जीतेगा और नरेंद्र मोदी मरेगा, खेल खत्म, राम-राम।

कवासी लखमा के इस वीडियो को शेयर करते हुए नरायनपुर के बीजेपी विधायक और छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री केदार कश्यप ने जोरदार हमला बोला, उन्होंने एक्स पर लिखा, “‘छत्तीसगढ़ का राहुल गाँधी उर्फ कवासी लखमा’ कॉन्ग्रेस पार्टी में नेता नहीं नमूने भरे पड़े हैं। मोदी जी के उपर कॉन्ग्रेसियों का प्रहार करना और जनता का मोदी जी पर सत्कार करना बढ़ता रहेगा। कॉन्ग्रेसियों को समझ आ गया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी मरणासन्न अवस्था पर है। 4 जून को कॉन्ग्रेस पार्टी का अंतिम संस्कार किया जाएगा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित, कवासी लखमा चुनाव प्रचार के लिए बीजापुर जिले के कुटरू गए थे। दिनभर प्रचार के बाद वे शाम को जिला मुख्यालय लौट रहे थे। इसी बीच नैमेड गाँव में उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत करने चौपाल लगाई थी। इसी दौरान उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में कहा ‘कवासी लखमा जीतोड़, नरेंद्र मोदी ढोलतोर, खेल खत्म राम-राम।’

कवासी लखमा पहले भी अपने बयान को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। कवासी लखमा का एक और वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें वे कुटरू में ही ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहते दिख रहे थे कि, टीन खदान से पुलिस को तीर-धनुष मारकर भगाओ। अब इन दोनों ही मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

इससे पहले जगदलपुर कोतवाली में भी चुनाव प्रचार के दौरान कवासी लखमा के द्वारा एक समिति को 500-500 के नोट बाँटने के मामले में भी चुनाव आयोग ने एफआईआर दर्ज किया था। कुल तीन अलग-अलग मामलों में प्रत्याशी कवासी लखमा के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है।

आपको बता दें कि कवासी लखमा बस्तर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवार हैं। वह छह बार के विधायक भी हैं और बघेल सरकार में मंत्री भी रहे। लखमा अक्सर अपने बयानों के कारण विवादों में रहते हैं।

‘राम मंदिर जाने की क्या आवश्यकता है?’: पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ रही लालू यादव की बेटी के विवादित बोल, कहा – प्राण प्रतिष्ठा में केवल पूंजीपतियों को बुलाया

राजद सुप्रीमो लालू यादव ने अपनी सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती को बिहार की पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से 2024 के चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी बनाया है। उनका सामना भाजपा के रामकृपाल यादव से है, जो उन्हें 2014 और 2019 में भी हरा चुके हैं। पटना नगर निगम के डिप्टी मेयर रहे रामकृपाल यादव पटना लोकसभा क्षेत्र से भी 3 बार सांसद रहे हैं। अब चुनाव प्रचार के दौरान मीसा भारती ने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर को लेकर विवादित बयान दे दिया है।

मीसा भारती ने कहा, “राम मंदिर जाने की क्या आवश्यकता है, हमारे सोनपुर में हरिहर बाबा का मंदिर है। वहाँ से मेरा पूरा परिवार पूजा कर के और आशीर्वाद लेकर निकला है। अभी चुनाव चल रहा है। मैं मंदिर भी जाऊँगी, राम मंदिर भी इसी देश में है। राम तो हमारे भी राम है, वो केवल मोदी जी के राम नहीं हैं।” बता दें कि हरिहरनाथ मंदिर सोनपुर में स्थित है। बता दें कि इससे पहले वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जेल भेजने की भी बात कर चुकी हैं।

मीसा भारती वही पुराना प्रोपेगंडा दोहराया कि चारों शंकराचार्यों को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में नहीं बुलाया गया था, सारे पूंजीपतियों को वहाँ बुलाया गया था। जबकि सच्चाई ये है कि श्रृंगेरी एवं कांची मठ के शंकराचार्यों ने राम मंदिर उद्घाटन समारोह का स्वागत किया था, कार्यक्रम में कई गरीब आम लोग, खासकर कारसेवक भी आए थे। उन्होंने पाटलिपुत्र निर्वाचन क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर, गाँधी आश्रम और लाइब्रेरी बनवाने का भी वादा किया

याद दिलाते चलें कि अबकी रामनवमी के अवसर पर बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को रामलला का ‘सूर्य तिलक’ भी किया जाना है, जिसके लिए IIT रुड़की के विशेषज्ञों ने तकनीक तैयार की है। जहाँ तक पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र का सवाल है, ये वही सीट है जहाँ से लालू यादव को 2009 में अपने ही पुराने साथी रंजन यादव के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। वहीं अगले ही चुनाव में रंजन यादव तीसरे स्थान पर घिसक लिए। दोनों बार उन्होंने जदयू से चुनाव लड़ा था।

हेल्थ ड्रिंक नहीं है बॉर्नविटा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से तुरंत हटाओ: सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

बॉर्नविटा कोई हेल्थ ड्रिंक नहीं है। सरकार ने ऐसा कोई गाइडलाइन नहीं जारी किया है। बॉर्नविटा ही नहीं, बल्कि ऐसे सभी पदार्थों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से एनर्जी ड्रिंक्स की कैटेगिरी से हटाने के लिए कहा गया है। सरकार ने इस बारे में बाकायदा नोटिफिकेशन जारी किया है और कहा है कि इस आदेश को फौरन माना जाए।

केंद्र सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने ई-कॉमर्स कंपनियों से बॉर्नविटा (Bourn Vita) को हेल्दी ड्रिंक कैटेगरी से हटाने से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया है। नोटिफिकेशन के मुताबिक सभी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स को अपने प्लेटफॉर्म पर बॉर्नविटा (Bourn Vita) समेत सभी पेय पदार्थों को हेल्दी ड्रिंक कैटेगरी से बाहर रखने के लिए कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्रालय ने नोटिफिकेशन में कहा- राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 की धारा (3) के तहत गठित एक निकाय ने जाँच किया। इस जाँच में पाया गया कि यह हेल्दी ड्रिंक के परिभाषा के अनुरूप नहीं है। हेल्दी ड्रिंक्स को खाद्य सुरक्षा प्रणाली (एफएसएस) अधिनियम 2006 के तहत परिभाषित किया गया है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सभी ई-कॉमर्स कंपनियों/पोर्टलों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी साइटों/प्लेटफॉर्मों से बॉर्नविटा सहित पेय/पेय पदार्थों को “हेल्दी ड्रिंक” की श्रेणी से हटा दें।

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को डेयरी-आधारित, अनाज-आधारित या माल्ट-आधारित पेय पदार्थों को “हेल्दी ड्रिंक” या “एनर्जी ड्रिंक” के रूप में लेबल नहीं करने का निर्देश दिया था। ऐसा इसलिए है क्योंकि “हेल्दी ड्रिंक” शब्द को देश के खाद्य कानूनों में परिभाषित नहीं किया गया है। ऐसे में गलत शब्दों का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है।

एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया कि ‘हेल्थ ड्रिंक’ शब्द एफएसएस अधिनियम 2006 या खाद्य उद्योग को नियंत्रित करने वाले इसके नियमों और विनियमों के तहत परिभाषित या मानकीकृत नहीं है। इसके अतिरिक्त ‘एनर्जी ड्रिंक्स’ शब्द की अनुमति सिर्फ कार्बोनेटेड और नॉन-कार्बोनेटेड पानी-आधारित स्वादयुक्त पेय जैसे उत्पादों के लिए ही है।

दमिश्क में धमाका, रवाना हुए अमेरिका के युद्धपोत, लेबनान ने इजरायल पर बरसाए रॉकेट: ईरान को बायडेन की चेतावनी के बीच ‘वर्ल्ड वॉर III’ की आहट

सीरिया की राजधानी दमिश्क में एक गाड़ी में जोरदार धमाका हुआ है। यह धमाका ईरान और इजरायल के बीच चल रही तल्खियों के समय में हुआ है। अमेरिका ने इस युद्ध की आशंका के चलते अपने जहाजों को इजरायल के समर्थन में भेजना चालू कर दिया है। यह तनाव 1 अप्रैल, 2024 को ईरानी दूतावास पर दमिश्क में हमले के बाद चालू हुआ था।

सीरिया में हुए इस धमाके में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। हालाँकि, इस धमाके के कारण आसपास कुछ नुकसान पहुँचा है, ऐसा बताया जा रहा है। इस धमाके के पीछे कौन संगठन है, इस विषय में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि इससे पहले 1 अप्रैल, 2024 को दमिश्क में ही ईरानी दूतावास के एक हिस्से पर इजरायल ने हवाई हमला किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम सीमा पर है। ईरान के इस हमले के बाद बदला लेने की बात कही जा रही है। सीरिया की असद सरकार के पीछे ईरान का ही समर्थन माना जाता है।

ईरान के दूतावास में हुए हमले में कई बड़े ईरानी सैन्य अधिकारी मारे गए थे। हमले के बाद लगातार यह आशंका बनी हुई है कि ईरान या तो खुद या अपने नियंत्रण वाले लड़ाका समूहों के माध्यम से इजरायल पर बड़ा हमला करवा सकता है। ईरान पर ऐसा ना करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव भी है लेकिन जनता के गुस्से को शांत करने के लिए उसके कोई कार्रवाई करने के कयास लग रहे हैं।

ईरान के हमले की आशंका के बीच लेबनान में अपना दखल रखने वाले इस्लामी आतंकी समूह हेज्बोल्लाह ने इजरायल पर राकेट हमले तेज कर दिए हैं। वह इजरायल की तरफ लगातार राकेट दाग रहा है। हेज्बोल्लाह के पीछे भी ईरान का ही समर्थन माना जाता है।

इजरायल और ईरान के बीच पहले से ही तनाव काफी ज्यादा है। यह तनाव 7 अक्टूबर को इस्लामी आतंकी समूह हमास के इजरायल पर हमले के बाद बढ़ा था। इसमें दमिश्क में हुई कार्रवाई ने और तेजी ला दी। अमेरिका इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने भी चिंता जताई है कि इजरायल पर जल्द हमला होना है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी भी दी है। उसने कहा है ईरान हमला करने की सोचे भी मत। अमेरिका ने कहा कि इजरायल की सुरक्षा के लिए वह प्रतिबद्ध है और ईरान को वह सफल नहीं होने देगा। कहा जा रहा है कि यह तृतीय विश्व युद्ध में बदल सकता है।

इजरायल ने इस हमले को लेकर अपनी तैयारियाँ मजबूत कर दी हैं। इजरायल ने अपनी सैन्य तैयारियाँ बढ़ा दी हैं और अमेरिका भी इजरायल की मदद को आगे आया है। अमेरिका ने अपने युद्धपोत इजरायल की तरफ भेजना चालू कर दिए हैं ताकि हमले की स्थिति में तुरंत जवाब दिया जा सके।

तनाव के इस माहौल के बीच भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी की है। भारत ने अपने नागरिकों से दूतावास के सम्पर्क में रहने को कहा था। भारत ने कहा था कि नागरिक अगली सूचना तक ईरान और इजरायल की यात्रा ना करें।