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दूरदर्शन पर आ रही है ‘द केरल स्टोरी’, विरोध में बिलबिला उठे कॉन्ग्रेसी-वामपंथी: CM विजयन ने बताया- नफरत फैलाने का घृणित प्रयास

5 अप्रैल, 2024 को रात्रि 8 बजे दूरदर्शन ‘द केरल स्टोरी’ प्रसारित करने जा रहा है। दूरदर्शन पर प्रसारण से पहले ही वामपंथी-कॉन्ग्रेसी एक सुर में इसका विरोध करने लगे हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी प्रसारण को लेकर खफा हैं। उन्होंने दूरदर्शन के निर्णय की निंदा की है। कॉन्ग्रेस नेता वीडी सतीशन ने भी इस मामले में चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। 2023 में आई यह फिल्म केरल में लव जिहाद और इस्लामी आतंकी संगठन ISIS के प्रसार को लेकर बात करती है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, ”दूरदर्शन द्वारा ध्रुवीकरण और भड़काऊ फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ का प्रसारण अत्यंत निंदनीय है। राष्ट्रीय न्यूज चैनल को BJP-RSS की प्रचार मशीन ना बन कर इस फिल्म की स्क्रीनिंग से पीछे हटना चाहिए। यह आम चुनाव से पहले सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने का प्रयास होगी। नफरत फ़ैलाने के ऐसे घृणित प्रयासों के विरोध में केरल मजबूती से खड़ा रहेगा।”

केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कॉन्ग्रेस नेता वीडी सतीशन ने भी इस मामले में अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस मामले में चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है। उन्होंने चुनाव आयोग से माँग की है कि वह 2024 लोकसभा चुनावों के मद्देनजर दूरदर्शन को इस फिल्म का प्रसारण ना करने दे। सतीशन ने दावा किया है कि यह फिल्म राज्य की खराब छवि पेश करती है। उन्होंने इसे संघ परिवार का एजेंडा बताया है। उन्होंने इसे चुनाव आचार संहिता का भी उल्लंघन बताया है।

गौरतलब है कि द केरल स्टोरी फिल्म को 5 मई ,2023 को रिलीज किया गया था। इस फिल्म की कहानी केरल में लड़कियों के लव जिहाद और फिर आंतक के मुंह में धकेले जाने को लेकर थी। इस फिल्म का तब भी वामपंथी और लिबरलों ने खूब विरोध किया था। फिल्म पर पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रतिबंध भी लगाया था। यह प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया था। इस फिल्म को दर्शकों ने काफी सराहा था और इसे बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छी कमाई हुई थी। इस फिल्म ने लगभग ₹300 करोड़ की कमाई की थी।

‘पाकिस्तान में आतंकियों को मरवा रहा है भारत’: चुनाव के समय ‘प्रोपेगेंडा’ खड़ा करने चला था हिंदू विरोधी विदेशी मीडिया, आम लोगों में PM मोदी की जय-जयकार करवा गया

भारत मे होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले विदेशी मीडिया ‘द गार्जियन’ ने वैश्विक स्तर पर एंटी इंडिया प्रोपगेंडा चलाने का प्रयास किया है। उन्होंने हाल में अपने एक आर्टिकल में भारत सरकार पर गंभीर इल्जाम लगाए। इसमें कहा गया कि भारत सरकार आतंकियों को मारने के नाम पर पाकिस्तान में हत्याएँ करवा रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि उन्होंने इस संबंध में दोनों देशों के खुफिया अधिकारियों से बात की और पाकिस्तानी जाँचकर्ताओं द्वारा साझा किए गए दस्तावेज बताते हैं कि भारत ने 2019 के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर विदेशों में हत्याएँ करनी शुरू कर दीं। भारत ने इन आरोपों से साफ मना किया है, लेकिन द गार्जियन ने फिर भी पाकिस्तान के लिए अपना प्रोपगेंडा चलाया ये सोचकर कि इससे पीएम मोदी की छवि बिगड़ेगी लेकिन हुआ उनकी सोच से अलग…।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत की खुफिया एजेंसी को अब भारत के पीएम मोदी के कार्यालय द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस लेख में कनाडा में खालिस्तानी निज्जर की हुई मौत से लेकर 2020 के बाद पाकिस्तान में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा की गई करीब 20 हत्याओं के पीछे भारत का हाथ बताया गया। साथ ही दावा किया गया कि भारतीय अधिकारियों ने पहली बार अपने विदेशों में चलाए जा रहे अभियान की चर्चा की है। उन्होंने ये भी कहा कि हत्याओं में प्रत्यक्ष संलिप्तता के विस्तृत दस्तावेज देखे हैं।

भारत पर इल्जाम लगाने का काम गार्जियन ने यहीं नहीं रोका। विस्तृत लेख में पाकिस्तान के हवाले से उन्होंने जमकर भारत पर सवाल उठाए। यहाँ तक कहा गया कि ये सारी मौतें UAE से संचालित होने वाली भारतीय खुफिया स्लीपर सेल द्वारा की गई है। सबसे हास्यास्पद बात तो ये हैं कि इसमें कहा गया है कि भारतीय एजेंटों ने जिहादियों को अपने इस काम के लिए चुना है और विश्वास दिलाया है कि वो काफिरों को मारेंगे।

गार्जियन पर प्रकाशित लेख की हेडलाइन

इनके मुताबिक भारत ने ऐसा पुलवामा हमले के बाद करना शुरू किया जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इतना ही नहीं गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में ज्यादातर जगह किसी अधिकारी का नाम नहीं लिखा है। सिर्फ भारतीय और पाकिस्तानी लिखकर उन्होंने अपने पूरे दावे कर डाले हैं। इसमें ऐसा कहा गया कि ऐसे ऑपरेशन करने के लिए सरकार से अनुमति चाहिए होती है बिन उनके ये सब नहीं होता।

आतंकियों की मौत का रोना रोया द गार्जियन

आगे बढ़ें तो दावा किया गया है कि भारत ने ये सब करने के लिए इजरायल की मोसाद और रूस की केजीबी से प्रेरणा ली है। इस लेख में 2018 में सऊदी एम्बेसी में हुई सऊदी के पत्रकार जमाल खासहोगी की हत्या का जिम्मेदार भी रॉ अधिकारियों को ठहराया गया।

आतंकी जाहिद अखुंद की कराची में हुई हत्या के पीछे भी इस आर्टिकल में भारत का नाम लगाया गया और दावा किया गया कि भारत उसकी मूवमेंट के लिए लिए पेमेंट करता था और हत्या को अंजाम देने के लिए अफगानी लोगों को लाखों रुपए दिए गए थे। इसके बाद जैश के आतंकी शाहिद लतीफ की हत्या के पीछे भी इन्होंने भारत का नाम लगाया। इसके बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के बशीर अहमद पीर और सलीम रहमानी की हत्या को भी इन्होंने भारत से जोड़ा। लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर रियाज अहमद की हत्या का नाम भी रॉ पर लगाया गया।

इस रिपोर्ट में पाकिस्तान का पक्ष मजबूती से रखने के लिए भारतीयों पर ये इल्जाम भी लगाया गया है कि इंडिया ने ऐसी हत्याएँ कराने के लिए 2 साल तक यूएई में स्लीपर सेल को स्थापित किया। इसके बाद ये हत्याएँ शुरू हुईं। इसके अलावा पाकिस्तान के विदेश सचिव साइरस सज्जाद काजी भी जनवरी दो हत्याओं के पीछे भारत पर इल्जाम लगा चुके हैं।

भारत ने किया इनकार

बता दें कि एक ओर जहाँ गार्जियन ने अपना पूरा आर्टिकल भारत पर आरोप लगाते हुए प्रकाशित किया है वहीं खुद को निष्पक्ष दिखाने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया भी इसमें जोड़ी है। जिसमें साफ है कि भारत ने इन आरोपों से इनकार किया है और इसे भारत विरोधी प्रोपगेंडा करार दिया है। मगर, द गार्जियन को इस प्रतिक्रिया को न तो अपने खबर के टॉप में रखना जरूरी समझा और न ही भारत के पक्ष को हेडलाइन में जगह दी। इस खबर के प्रकाशित होने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी साफ कहा कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोप झूठे है और सिर्फ भारत के खिलाउ प्रोपगेंडा चलाने के लिए हैं। भारत की नीति में टारगेट किलिंग नहीं है।

द गार्जियन का एंटी इंडिया प्रोपगेंडा

गौरतलब है कि इस पूरे आर्टिकल को लिखने वाले पत्रकारों में एक नाम हन्ना एलीस पीटरसन का भी है। पिछले दिनों ऑपइंडिया ने आपको बताया था कि कैसे हन्ना एलिस भारत विरोधी प्रोपगेंडा अपने समाचार पत्र के माध्यम से चलाती रहती हैं और सोशल मीडिया पर हिंदुत्व से नफरत दिखाती हैं। हमारे उस लेख के बाद अब उनका गार्जियन पर 4 अप्रैल को ये आर्टिकल प्रकाशित हुआ है वो भी ऐसे समय में जब भारत में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।

भारत द्वारा ये पक्ष साफ किए जाने के बाद कि वो टारगेट किलिंग नहीं करते फिर भी द गार्जियन ने पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से भारत पर कई इल्जाम लगाए हैं।

इसका मकसद साफ है कि वो एक बार फिर से भारत विरोधी प्रोपगेंडा वैश्विक स्तर पर चलाने के लिए एक्टिव हो गए हैं ताकि मोदी सरकार पर सवाल खड़ा करवा सकें। हालाँकि उनका ये हथकंडा काम नहीं आया क्योंकि मोदी सरकार में आतंकियों के खिलाफ हुई कार्रवाई से लोग पहले से ही बहुत संतुष्ट हैं जब उन्होंने ये रिपोर्ट पढ़ी कि भारत सरकार विदेशों में भी आतंकियों के सफाए के लिए अभियान चला रही है तो भारतीय मीडिया में पीएम मोदी का बखान होने लगा।

द गार्जियन ने कोशिश की थी कि इस रिपोर्ट से उनपर सवाल उठें लेकिन सोशल मीडिया पर लोग मोदी सरकार की तारीफ करने लगे। अब देखना है कि द गार्जियन या अन्य कोई मीडिया चुनाव से पहले मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए क्या दाव खेलते हैं।

उलटा पड़ा द गार्जियन का दाव

मालूम हो कि ऐसा काम वो पहली बार नहीं कर रहे हैं। इससे पहले इसी द गार्जियन ने लेस्टर हिंसा पर मुस्लिमों को बचाने के लिए एकतरफा रिपोर्टिंग की थी। इंग्लैंड में हुई हिंसा का जिम्मेदार इन्होंने आरएसएस को ठहरा दिया था। अब यही द गार्जियन भारत के खिलाफ ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित कर रहा है। उनके लिए ये सब नया नहीं है और न ही अब भारतीय पाठकों को ये नया लगता है। द गार्जियन के बारे में पाठक जान चुके हैं कि न्यूज कंटेंट के नाम पर भारत विरोधी प्रोपगेंडा चलाना विदेशी मीडिया के लिए नया नहीं है।

यूपी में 16000 मदरसे बंद, हाई कोर्ट के फैसले के बाद एक्शन में योगी सरकार: शिक्षा बोर्ड से मान्यता के बाद ही अब हो सकेगा संचालन

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 16,000 से अधिक मदरसों की मान्यता रद्द कर दी है। यह निर्णय इलाहबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है। यह मदरसे अब तक मदरसा बोर्ड के अंतर्गत चलते थे, जिसे हाई कोर्ट ने असंवैधानिक करार दे दिया था। अब इनमें से पात्र मदरसों को किसी अन्य बोर्ड की मान्यता लेनी होगी, वरना यह बंद हो जाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने इलाहबाद हाई कोर्ट के निर्णय का पालन करवाने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। यह निर्देश उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भेजा गए हैं। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश में जो भी मदरसे अब तक मदरसा बोर्ड के अंतर्गत संचालित हो रहे थे, उनको किसी अन्य बोर्ड से मान्यता प्राप्त करनी होगी। यह मान्यता वही मदरसे प्राप्त कर सकेंगे, जो अन्य बोर्ड की अर्हताओं को पूरा करते हों। जिन मदरसों को इस मामले में पात्र नहीं पाया जाएगा, वह बंद हो जाएँगे।

मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को हितों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। जिन मदरसों को मान्यता मिल जाएगी, वहाँ पढ़ने वाले छात्रों को कोई समस्या नहीं होगी। उत्तर प्रदेश में जो मदरसे मान्यता ना पाने के कारण बंद होंगे, उनमें पढ़ने वाले बच्चों को आसपास के सरकारी स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। यदि स्कूलों में क्षमता बढ़ाने या नए स्कूल खोलने की आवश्यकता पड़ती है तो यह भी किया जाएगा। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी इस बात की पुष्टि की है।

गौरतलब है कि जिन 16,000 से अधिक मदरसों की मान्यता उत्तर प्रदेश में रद्द हो रही है, वह 2004 के मदरसा एक्ट के अंतर्गत संचालित होते थे। इनमें से 500 से अधिक मदरसों को सरकार से काफी अनुदान भी मिलता था। इन मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी सरकार पैसा देती थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 22 मार्च, 2024 को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य मदरसा बोर्ड एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि मदरसे की शिक्षा सेक्युलरिज्म के सिद्धांतों के विरुद्ध है और सरकार को ये कार्यान्वित करना होगा कि मदरसों में मजहबी शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को औपचारिक शिक्षा पद्धति में दाखिल करें। हाई कोर्ट ने इस दौरान पूछा था कि आखिर मदरसा बोर्ड को शिक्षा मंत्रालय की जगह अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा क्यों संचालित किया जाता है।

इलाहबाद हाई कोर्ट के मदरसा बोर्ड को असंवैधानिक घोषित करने के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई है। इस पर शुक्रवार (5 अप्रैल, 2024) को सुनवाई होगी। यह सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच करेगी। उत्तर प्रदेश सरकार भी इस मामले में अपना पक्ष रखेगी।

याद हैं कमलेश तिवारी जिनका मोइनुद्दीन और अशफाक ने रेत दिया था गला? हाई कोर्ट ने 1 साल में ट्रायल पूरा करने को कहा, सैयद आसिम को नहीं दी बेल

साल 2019 में हुए कमलेश तिवारी हत्याकांड के आरोपित सैयद आसिम अली को अब जमानत चाहिए। इसके लिए उसने इलाहाबद हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। हालाँकि अदालत ने उसकी इस माँग को खारिज कर दिया। आसिम पूरे हत्याकांड में मुख्य आरोपितों के साथ लगातार संपर्क में था और उसकी भी इस हत्या में अहम भूमिका थी।

अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अधीनस्थ अदालत (प्रयागराज की अदालत) को आदेश दिया कि वो इस मामले में ट्रायल को पूरा करें। अदालत के अनुसार अगर एक साल में ट्रायल पूरा नहीं होता तो याची हाई कोर्ट आ सकता है। अभी तक इस मामले के 35 गवाहों में से 7 गवाहों का परीक्षण किया गया है। कोर्ट ने जल्द से जल्द ट्रायल पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि आसिम की याचिका को खारिज करने वाला आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सौरभ श्याम शमसेरी की सिंगल बेंच ने दिया। इस मामले में साल 2019 में लखनऊ के नाका हिंडोला थाने में केस दर्ज हुआ था जिसके बाद कमलेश तिवारी के हत्यारे गिरफ्तार किए गए थे।

कमलेश तिवारी हत्याकांड

गौरतलब है कि कमलेश तिवारी ने साल 2015 में पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी की थी। इसके बाद कई कट्टरपंथियों द्वारा उन्हें धमकी मिली, ऐलान हुआ कि जो हत्या करेगा उसे 51 लाख रुपए से लेकर डेढ़ करोड़ तक इनाम मिलेगा। शुरू में कमलेश तिवारी को उनकी टिप्पणी के लिए जेल भेजा गया, लेकिन इससे कट्टरपंथी शांत नहीं हुए, उन्होंने कमलेश की हत्या की साजिश रचना जारी रखा और 2019 में जाकर इसे अंजाम दिया गया।

18 अक्टूबर 2019, घटना के दिन रोज की तरह कमलेश तिवारी पार्टी मुख्यालय पहुँचे थे। इसी दौरान भगवा वस्त्र में दो साजिशकर्ता हाथ में मिठाई का डिब्बा लेकर नेता उनसे मिलने पहुँचे। बातचीत कर साथ में चाय पी और उसके बाद मिठाई के डिब्बे में छिपाकर लाए रिवॉल्वर व चाकू निकाल लिया। चाकू से ताबड़तोड़ 15 से ज्यादा वार उनके गले पर किए। इसके बाद वे गोली मारकर भाग निकले। कमलेश तिवारी को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। बाद में इन हत्यारों की सीसीटीवी फुटेज सामने आई तो सब सन्न रह गए।

पुलिस ने फुटेज के आधार पर अपनी छानबीन शुरू की तो आरोपित एक के बाद एक गिरफ्तार हुए। आज उस घटना को साढ़े चार साल बीच गए हैं। गिरफ्तारा आरोपितों पर कमलेश तिवारी को दिनदहाड़े गोली मारने या इस हत्या की साजिश रचने का या हत्यारों की मदद करने का इल्जाम है, लेकिन फिर भी उन्हें जमानत चाहिए। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आसिम को फिलहाल बेल देने से साफ मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक घृणा फैलाना और दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या करना गंभीर अपराध है इसलिए बेल किसी कीमत पर नहीं दी जा सकती।

रेड में ED को मिली थी जो BMW वह हेमंत सोरेन की ही, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने कबूला: एजेंसी ने 8.86 एकड़ जमीन भी जब्त की

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने स्वीकार किया है कि दिल्ली में छापेमारी में बरामद हुई नीले रंग की BMW गाड़ी उनकी ही है। उन्होंने बताया है कि उनके दिल्ली स्थित आवास पर छापेमारी से पहले उन्होंने इस गाड़ी का उपयोग किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हेमंत सोरेन ने ED को बताया कि दिल्ली से जब्त नीले रंग की BMW की SUV गाड़ी उनके निजी काम के लिए थी। यह गाड़ी हरियाणा के गुरुग्राम में पंजीकृत है। इसे खरीदने के लिए सोरेन खुद ही BMW के शोरूम में गए थे। उन्होंने यह भी बताया कि 28 जनवरी, 2024 को वह इसी गाड़ी से दिल्ली स्थित अपने आवास से निकले थे।

हेमंत सोरेन की इस BMW गाड़ी को दिल्ली में स्थित झारखंड भवन में तैनात एक चालक चलाता था। उससे भी ED ने पूछताछ की है। चालक ने इस दौरान स्वीकार किया कि वह BMW हेमंत सोरेन की निजी गाड़ी है, वह इसका उपयोग दिल्ली में करते थे।

ED द्वारा जब्त की गई यह BMW भगवानदास होल्डिंग नाम की एक कम्पनी के साथ रजिस्टर्ड है। 29 जनवरी, 2024 को यह गाड़ी ED अपने साथ ले गई थी। ED दिल्ली स्थित आवास पर हेमंत सोरेन की तलाश में आई थी। इस गाड़ी के कॉन्ग्रेस सांसद और शराब कारोबारी धीरज साहू से लिंक होने की भी बात सामने आई थी।

एक रिपोर्ट में बताया गया था कि धीरज साहू ने ही इस गाड़ी के लिए भुगतान किया था। बताया गया था कि जिस कम्पनी के नाम पर यह गाड़ी रजिस्टर्ड है, उसका धीरज साहू से सम्बन्ध है। यह जिस पते पर रजिस्टर्ड थी वह धीरज साहू की सम्पत्ति है। इस मामले में ED ने साहू से भी पूछताछ की थी।

गौरतलब है कि साहू वही कारोबारी और सांसद हैं जिनके ठिकानों पर 2023 में छापेमारी के बाद आयकर विभाग को ₹350 करोड़ से अधिक की नकदी बरामद हुई थी। यह छापेमारी ओडिशा, बंगाल और झारखंड स्थित उनके ठिकानों पर हुई थी।

ED ने इस दौरान हेमंत सोरेन से पूछताछ में उस जमीन के बारे में भी पूछा जिसके कारण वह गिरफ्तार हैं। यह जमीन राँची के बरियातू में है। इसकी बाजार कीमत ₹31 करोड़ बताई जाती है। हेमंत सोरेन ने इस जमीन के विषय में कोई भी जानकारी होने इनकार किया। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ED ने यह 8.86 एकड़ जमीन जब्त भी कर ली है।

गौरतलब है कि ED ने 31 जनवरी, 2024 को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें इससे पहले भी एजेंसी ने 9 समन भेजे थे लेकिन वह इन पर हाजिर नहीं हुए थे। ED ने इसके बाद उन्हें राँची स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने गड़बड़ी से करोड़ों की जमीन हथियाई।

ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ संग लाइव बहस से पीछे हटी गार्जियन की पत्रकार: हिंदू विरोधी होने के आरोप पर इंटरव्यू का रखा था प्रस्ताव

ऑपइंडिया द्वारा वामपंथी प्रोपेगेंडा केंद्रित ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के नापाक हिंदू-विरोधी और भारत-विरोधी एजेंडे को एक्सपोज करने के बाद गार्जियन की दक्षिण एशिया संवाददाता हन्ना एलिस-पीटरसन ने ईमेल के माध्यम से ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नूपुर जे शर्मा से संपर्क किया। हन्ना एलिस-पीटरसन ने 1 अप्रैल, 2024 को ईमेल भेजकर गार्जियन की वामपंथी प्रोपेगेंडा के आरोपों पर सबूतों के साथ ‘सफाई’ देकर ऑपइंडिया को ‘ऑबलाइज’ करने की बात कही।

बता दें कि 25 मार्च 2024 को ऑपइंडिया ने लेख के माध्यम से बताया था कि द गार्जियन किस तरह से हिंदूवादी कार्यकर्या काजल हिंदुस्तानी को इंटरव्यू के लिए परेशान कर रहा था। रिपोर्ट में यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत पेश किए गए हैं कि कैसे काजल हिंदुस्तानी का साक्षात्कार लेने के लिए वामपंथी ब्रिटिश अखबार द्वारा चुने गए तीन ‘पत्रकार’, अर्थात् हन्ना एलिस-पीटरसन, अहमर खान और क्यारी इवेंजेलो हमेशा एक अलग एजेंडे से प्रेरित रहे हैं। जो वैश्विक स्तर पर हिंदुत्व को बदनाम करना, इस्लामिक कट्टरपंथ के खतरे और उनके अत्याचारों को कम करके दिखाना और भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने में लिप्त रहे हैं। ऑपइंडिया ने पर्याप्त सबूतों के साथ बताया कि कैसे गार्जियन के तीनों पत्रकारों का इतिहास हमारे देश के बारे में, हिंदुओं के बारे में भ्रामक और फर्जी खबरें फैलाने का इतिहास रहा है।

ऑपइंडिया की इस विशेष रिपोर्ट से हन्ना एलिस-पीटरसन परेशान हो उठीं, और उन्होंने ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ को ईमेल भेजा। उन्होंने ईमेल में लिखा, “आपने मुझ पर और मेरे सहयोगियों पर एजेंडा आधारित काम करने का आरोप लगाया है, लेकिन यकीन मानिए कि हम ऐसा बिल्कुल भी नहीं करते। ये जरूरी लगा कि हमें आपसे सीधे संवाद करना चाहिए और हमें अपनी बात कहने का अवसर दिया जाए।”

हन्ना द्वारा भेजा गया ये ईमेल सिर्फ उस बात का नमूना है कि जिसमें वो ‘मौका’ देने के नाम पर अपने एजेंडा को आगे बढ़ाते हैं। इसी तरह से द गार्जियन और बीबीसी जैसे पश्चिमी मीडिया संगठन काम करते हैं। गार्जियन की ‘पत्रकार’ हन्ना जो स्वयं हिंदू विरोधी और भारत विरोधी प्रचार फैलाने के लिए जानी जाती है, को वाकई लगता है कि वो हमें ‘उनसे’ बात करने का मौका देकर हमारे ऊपर उपकार कर रही हैं। हालाँकि, एक अविश्वसनीय प्रतिक्रिया में ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नूपुर जे शर्मा ने द गार्जियन ‘पत्रकार’ को एक लाइव स्ट्रीम बहस में शामिल होने का ‘न्यौता’ दिया, जिसमें वो अपने भारत विरोधी और हिंदू विरोधी होने के आरोपों पर ‘लाइव’ जवाब दे सकती हैं।

ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नूपुर जे शर्मा ने हन्ना के साथ इस ई-मेल बातचीत को सार्वजनिक किया और एक्स पर लिखा, “प्रिय हन्ना, आपके ईमेल के लिए धन्यवाद। चूँकि आपने जवाब न देने का फैसला किया है, ऐसे में पारदर्शिता की भावना के तहत मैं आपके साथ हमारी ई-मेल पर हुई बातचीत को सार्वजनिक कर रही हूँ। मैं इस बात से हैरान हूँ कि आपने मुझपर ‘फेवर’ करने की भावना से इंटरव्यू की पेशकश की, लेकिन जैसा कि मैंने ईमेल में कहा था कि यदि आप भारतीय दर्शनों के सामने अपना बचाव करना चाहती हैं, तो मैं आपको पॉडकास्ट का मंच प्रदान कर सकती हूँ, जहाँ आप अपने भारत-विरोधी, हिंदू-विरोधी कवरेज के बारे में मेरे सवालों के जवाब दे सकती हैं।”

नूपुर शर्मा ने अपने और द गार्जियन की दक्षिण एशियाई संवाददाता हन्ना एलिस-पीटरसन के बीच ई-मेल पर हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं।

द गार्जियन ‘पत्रकार’ ने ऑपइंडिया का प्रस्ताव ठुकराया

जैसा कि पहले से अंदाजा था, उसी तर्ज पर द गार्जियन की ‘पत्रकार’ ने ऑपइंडिया के पॉडकास्ट के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने 4 अप्रैल 2024 को एक अन्य ईमेल भेजकर कहा कि वो पॉडकास्ट में शामिल नहीं हो सकती।

एक तरफ द गार्जियन की पत्रकार हन्ना एलिस पीटरसन ऑपइंडिया को इंटरव्यू देकर अहसान करना चाहती थी, तो दूसरी तरफ वो अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई देने के लिए लाइव स्ट्रीमिंग के प्रस्ताव को ठुकरा रही हैं। आखिर किस बात ने उन्हें रोक लिया कि वो ऑपइंडिया के साथ पॉडकास्ट नहीं करेंगी। शायद इस बात ने, कि वो पूरी तरह से एक्सपोज हो जाएँगी। शायद इस बात ने उन्हें रोका कि ऑपइंडिया के निष्कर्ष सही हैं और वो अपना बचाव नहीं कर पाएँगी।

बता दें कि ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ ने सबसे पहले द गार्जियन को काजल हिंदुस्तानी को परेशान करने के खिलाफ चेतावनी दी थी। 24 मार्च को एक्स पर एक पोस्ट में, नूपुर ने काजल हिंदुस्तानी को परेशान करने के खिलाफ मीडिया आउटलेट को चेतावनी दी और हिंदू अधिकार कार्यकर्ता को अपना समर्थन भी दिया।

अगले दिन 25 मार्च 2024 को ऑपइंडिया ने पर्याप्त सबूतों के साथ इस बात का खुलासा किया था कि कैसे भारत विरोधी और हिंदू विरोधी एजेंडे के तहत द गार्जियन काजल हिंदुस्तानी के इंटरव्यू का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था।

कल्लू यादव बनकर मोहम्मद अंसार ने विधवा को झाँसे में लिया, अश्लील वीडियो से धर्मांतरण का बनाने लगा दबाव: रायबरेली में मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के रायबरेली में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। मोहम्मद अंसार नाम के एक मुस्लिम युवक ने नाम बदलकर एक हिंदू विधवा से नजदीकी बढ़ाई और फिर उसका यौन शोषण करने लगा।इतना ही नहीं, आरोपित उसका अश्लील वीडियो बनाकर उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। युवती ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

मामला रायबरेली के डलमऊ थाना इलाके का है। यहाँ मथुरा की रहने वाली महिला ने बताया कि लगभग एक साल पहले उसके पति मौत हो चुकी है और उसका तीन साल का एक बच्चा है। अपनी शिकायत में महिला ने बताया, “एक दिन मेरे फोन की घंटी बजी तो मैंने उठाया। एक शख्स ने कुछ पूछा तो मैंने रॉन्ग नंबर कहा। अचानक बात कुछ आगे बढ़ी तो उसने अपना नाम कल्लू यादव बताया था।”

इसके बाद मोहम्मद अंसार कल्लू बनकर महिला को कॉल करने लगा और उसे अपने झाँसे में ले लिया। आरोप है कि अंसार ने पीड़िता को एक मिलने के लिए बुलाया। तीन दिन पहले महिला अंसार से मिलने के लिए रायबरेली आई थी। इस दौरान अंसार ने शादी का झाँसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया और उसका वीडियो भी बना लिया।

महिला को किसी तरह आरोपित का आधार कार्ड हाथ लगा। उसमें उसका नाम मोहम्मद अंसार लिखा हुआ था। अपने प्रेमी को मुस्लिम जानकर महिला सकते में आ गई। इस संबंध में जब उसने अंसार से बात की तो वह उसे धमकाने लगा। न्यूज इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अंसार ने कहा कि वह धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बन जाए, नहीं तो वह उसका अश्लील वीडियो वायरल देगा।

इतना ही नहीं, मोहम्मद अंसार महिला को अपने साथ रखना चाहता था। वह धमकी देता था कि अगर वह उसके साथ नहीं रहेगी तो वह उसे जान से मार देगा। महिला का आरोप है कि अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करके आरोपित उसका लगातार रेप करता रहा। आखिरकार तंग आकर महिला ने डलमऊ थाने की पुलिस से मदद माँगी।

रायबरेली के एएसपी नवीन कुमार सिंह ने महिला के आरोपों का संज्ञान लेते हुए जाँच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने महिला की तहरीर के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपित मोहम्मद अंसार डलमऊ कोतवाली थाना क्षेत्र के रसूलपुर धरावा का रहने वाला है। इस घटना के बाद से आरोपित फरार है। पुलिस उसकी लगातार खोजबीन कर रही है।

पाकिस्तान में अफगानिस्तान सीमा पर हजारों पख्तूनों का 6 महीने से प्रदर्शन, सीमा पार करने के लिए वीजा-पासपोर्ट की अनिवार्यता का कर रहे हैं विरोध

इस्लामी मुल्क पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्थित वेश-चमन सीमा पर हजारों पख्तून प्रदर्शनकारियों ने डेरा डाल दिया है। प्रदर्शनकारी सरकार की नई नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस नीति के तहत वैध वीजा और पासपोर्ट के बिना सीमा पार करने की अनुमति नहीं है। इस फैसले ने चमन के लगभग 12 लाख लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। पहले वे स्वतंत्र रूप से सीमा के आर-पार आते-जाते थे।

पाकिस्तान मीडिया संस्थान डॉन के मुताबिक, स्थानीय लोगों और सैन्य नेताओं को मिलाकर बनी बनी पाकिस्तान की राष्ट्रीय शीर्ष समिति ने पिछले साल फैसला सुनाया था कि केवल वैध पासपोर्ट और वीजा वाले लोगों को ही चमन सीमा पार करने की अनुमति दी जाएगी। पहले पाकिस्तानी और अफगान अपने-अपने पहचान पत्र दिखाकर सीमा पार करते थे।

हालाँकि, सरकार के इस निर्णय से लाखों लोगों प्रभावित हुए हैं। इसको लेकर उनमें आक्रोश भड़क उठा है। इस नीति के विरोध में स्थानीय पख्तून हजारों की तदाद में लगभग 180 दिनों से चमन और अफगान जिले स्पिन-बोल्डक के बीच अधिकृत सीमा क्रॉसिंग फ्रेंडशिप गेट पर डेरा डाल दिया है।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बदलते मौसम की मार सही। आँसू गैस के गोले को सहन किया है और गोलियों से घायल भी हुए हैं। वे तब तक उस जगह को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, जब तक कि उनकी बात सरकार द्वारा सुनी नहीं जाती। ‘चमन पारलट’ नामक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व चमन निवासी अखवोंड द्वारा किया जा रहा है।

अखवोंड का कहना है कि पख्तून आजादी की माँग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे सिर्फ अपना सामान्य जीवन वापस चाहते हैं जिसमें वे सीमा पार स्वतंत्र रूप से आ-जा सकें। अखवोंड बताते हैं कि पाकिस्तान की तरफ की सीमा चमन और अफगानिस्तान में वेश कहलाता है और वे सब इसे चमन सीमा के रूप में संदर्भित करते हैंं।

लगातार निगरानी चौकियों के बढ़ने और कंटीले तार लगाने से पहले भी यह जमीन दोनों ओर के पख्तूनों के लिए एक घर की तरह था। सीमा के दोनों ओर के पख्तून ना सिर्फ एक परिवार की तरह साथ रहते थे, बल्कि वे राष्ट्रीयता, जनजाति संस्कृति और मजबूत भावनाओं के बंधन से भी बँधे हुए थे।

ब्रिटिश विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड ने 1893 में अफगानिस्तान और भारत के बीच सीमा की स्थापना की थी और पख्तून प्रांत को अलग कर दिया था। दोनों देशों के बीच फैली हुई 2,430 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा पख्तून जनजातीय क्षेत्रों से होकर गुजरती है और उन्हें दो अलग-अलग मुल्कों में विभाजित करती है। पाकिस्तान बनने के बाद डूरंड रेखा उसे विरासत में मिली, लेकिन इस पर कोई औपचारिक समझौता या मान्यता नहीं है।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) के उपाध्यक्ष काशिफ पानेजई के मुताबिक, सीमा पर जो इलाका बँटा हुआ है, वह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, वह उनका घर है। उन्होंने कहा, “डूरंड रेखा कई गाँवों को आधे में विभाजित करती है और कई लोगों को उनके कृषि वाली भूमि से विभाजित करती है। यह जनजातियों और अन्य समूहों को बीच से बाँटता है।”

पिछले छह महीनों में प्रदर्शनकारी प्रशासन के साथ कई दौर की बातचीत कर चुके हैं। हालाँकि, इसका कोई फायदा नहीं हुआ। बैठकों में अधिकारी हमेशा यही कहते हैं कि स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर है, क्योंकि वीसा और पासपोर्ट की जरूरत पर सैन्य नेतृत्व ने निर्णय लिया है। हालाँकि, अखवोंड इस्लामाबाद जाकर सेना प्रमुख से बात करने को तैयार हैं, लेकिन कई प्रयास के बाद भी वे विफल रहे हैं।

वहीं, अधिकारी असफल वार्ता के लिए प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। चमन के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन राजा अतहर अब्बास ने डॉन को बताया, “यदि आप कानूनी चश्मे से देखें तो सरकार का निर्णय अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के अनुरूप है। प्रत्येक राज्य को अपने स्वयं के सीमा नियम बनाने का अधिकार है। दस्तावेज के बिना अफगान नागरिकों का पाकिस्तान में प्रवेश चिंताजनक है।”

कैप्टन अब्बास स्वीकार करते हैं कि चमन के नागरिक वास्तविक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य प्रदर्शनकारियों को समायोजित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है और मृत्यु और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं जैसे मानवीय मुद्दों पर उदार रहा है। अपने सामान्य जीवन की बहाली की माँग को लेकर तंबू में हजारों लोगों के साथ विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है।

कॉन्ग्रेस को अमेठी में नहीं मिल रहा उम्मीदवार, क्या वाड्रा से बची आस? बोले प्रियंका गाँधी के पति- लोग चाहते हैं कि अपनी राजनीति की शुरुआत यहीं से करूँ

लोकसभा चुनाव 2024 में यूपी की अमेठी सीट पर कॉन्ग्रेस अभी तक उम्मीदवार तय करने में नाकाम रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी के यहाँ से हारने के बाद कॉन्ग्रेस बुरी तरह हिली हुई है। हालाँकि, गाँधी परिवार की यह परंपरागत सीट के लिए पार्टी को एक अदद उम्मीदवार की तलाश है। इस बीच राहुल गाँधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा ने यहाँ से चुनाव लड़ने में रुचि दिखाई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस की नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि अमेठी की जनता चाहती है कि वे अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अमेठी से करें। वाड्रा का कहना है कि अमेठी की जनता मानती है कि उसने मौजूदा सांसद को चुनकर बड़ी गलती कर दी है। बता दें कि इस सीट से स्मृति ईरानी भाजपा की सांसद हैं।

रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि वर्षों से गाँधी परिवार ने अमेठी, रायबरेली, सुल्तानपुर, जगदीशपुर जैसे क्षेत्रों में मेहनत किया है। इसके कारण वहाँ के लोगों की प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, “जो कोई भी रायबरेली या अमेठी का प्रतिनिधित्व करता है उसे लोगों की प्रगति, उनकी सुरक्षा के लिए काम करना चाहिए और भेदभाव की राजनीति नहीं करनी चाहिए।”

वाड्रा ने दावा किया कि अमेठी के लोगों को लगता है कि स्मृति को ईरानी को सांसद बनाकर उन्होंने गलती की। वाड्रा ने दावा कि या कि अमेठी के लोग चाहते हैं कि गाँधी परिवार वापस आए और फिर से अमेठी का प्रतिनिधित्व करे। उन्होंने कहा, “यहाँ तक कि मुझसे भी आशा करते हैं कि मैं अपना पहला राजनीतिक कदम यहाँ रखूँ।”

रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, “लोग जानते हैं कि हमने कितना प्रयास किया… वे सोशल मीडिया पर मुझसे जुड़ते हैं, मेरे कार्यालय के बाहर मुझसे मिलते हैं, मेरा जन्मदिन मनाते हैं,” उन्होंने कहा, “मेरी अलग पार्टी लाइन के नेताओं से भी दोस्ती है। उनको यह लगता है कि अगर मैं सांसद बनता हूँ तो अलग स्तर पर काम हो पाएगा।”

प्रियंका गाँधी के चुनाव लड़ने के लेकर उन्होंने कहा, “मैं हमेशा चाहता हूँ कि प्रियंका गाँधी पहले सांसद बनें। उसके बाद मैं भी संसद आ सकता हूँ। मैं दूसरे नेताओं से मिलता हूँ तो वे पूछते हैं कि आप राजनीति में आने में देर क्यों लगा रहा हैं। आप हमारी पार्टी से आ जाइए।” वाड्रा ने कहा कि सही समय आने पर वे फैसला लेंगे।

बता दें कि कई घोटालों में फँसे कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा में सक्रिय राजनीति का आने का संकेत पहली बार नहीं दिया है। उन्होंने जुलाई 2022 में भी कहा था कि अगर लोग चाहेंगे तो वह सक्रिय राजनीति में आने पर विचार करेंगे। उनकी यह टिप्पणी नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोनिया गाँधी से पूछताछ के बाद आई है।

भारत-नेपाल सीमा से हिज्बुल के 3 आतंकी गिरफ्तार, लोकसभा चुनावों के दौरान वारदात को देना चाहते थे अंजाम: यूपी ATS कर रही पूछताछ

नेपाल के रास्ते भारत में एंट्री लेने की कोशिश कर रहे हिज्बुल मुजाहिद्दीन के तीन आतंकियों को सुरक्षा एजेंसियों ने धर दबोचा है। इनमें से एक दो पाकिस्तानी नागरिक हैं, तो एक कश्मीरी आतंकवादी। यूपी एटीएस तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इन तीनों को उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले की नेपाल सीमा से दबोचा गया। तीनों एक बस में सवार होकर नेपाल से भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे, तभी जाँच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें धर दबोचा, फिर यूपी एटीएस के हवाले कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, इन आतंकियों को आईएसआई ने भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए भेजा था, इन तीनों की पहचान भी सामने आ चुकी है। इसमें से पहला- मोहम्मद अल्ताफ भट पुत्र खिजर मोहम्मट भट, निवासी मकान नम्बर 559, सादिकाबाद, रावलपिंंडी, पाकिस्तान है, तो दूसरा- सैय्यद गजनफर पुत्र सैय्यद मोहम्मद सैय्यद, निवासी-तरामणि चौक इरफानाबाद, एफ-87, हाउस नम्बर 19, जामिया अली मुर्तजा मस्जिद, इस्लामाबाद, पाकिस्तान है। वहीं, तीसरा आतंकी कश्मीरी है। उसकी पहचान नासिर अली पुत्र गुलाम अहमद अली निवासी कराली पोरा हवल श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर के रूप में हुई है।

यूपी एटीएस ने बताया है कि इन आतंकियों के आने की खुफिया सूचना मिली थी, जिसके बाद एटीएस ने नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर उन्हें पकड़ने की तैयारी की और एक बस से तीनों को गिरफ्तार किया। ये आतंकवादी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहम्मद अल्ताफ हिज्बुल के मुजफ्फराबाद कैंप में ट्रेनिंग ले चुका है और वो नेपाल में बैठे हिज्बुल के हैंडलर के संपर्क में था। हैंडलर ने ही अल्ताफ को नेपाल के रास्ते भारत पहुँचने का निर्देश दिया था। नेपाल के काठमांडू में आईएसआई का हैंडलर मिला जिसने अल्ताफ के साथ सैयद गजनफर को फर्जी आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज उपलब्ध करवाए, जिसकी मदद से तीनों भारत आए।

एटीएस की आईजी निलाब्जा चौधरी ने कहा, एटीएस को इंटेलीजेंस इनपुट मिला था कि कुछ पाकिस्तानी नेपाल बॉर्डर के रास्ते भारत में घुसपैठ की कोशिश में हैं, जिनकी मदद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई कर रही है। इन्होंने आईएसआई की मदद से हिज्बुल के ट्रेनिंग कैंप में हथियारों की ट्रेनिंग ली है और वो भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम देने आ रहे हैं। इसी सूचना के अधार पर यूपी एटीएस की गोरखपुर यूनिट ने इलेक्ट्रॉनिक और जमीनी सर्विलांस के माध्यम से ऑपरेशन चलाया और सोनौली बॉर्डर के पास फरेंदा नाम के गाँव के पास से 2 पाकिस्तानी आतंकियों और उनके एक कश्मीरी सहायक को गिरफ्तार कर लिया।