Home Blog Page 1048

विरोधी महिलाओं का पूछती है ‘भाव’, उत्पीड़न के खिलाफ मुँह खोलने पर पार्टी की महिलाओं को करती है प्रताड़ित: मातृ शक्ति का अपमान कर ‘न्याय’ देने चली कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना घोषणा पत्र शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) को जारी किया। इसे पार्टी ने ‘न्याय पत्र’ नाम दिया है। घोषणा पत्र में मुख्य तौर पर 5 न्याय और 25 तरह की गारंटियों का जिक्र है। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजते ही जहाँ कॉन्ग्रेस नेता महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियों को लेकर चर्चा में हैं, वहीं पार्टी घोषणा पत्र में महिलाओं को भी ‘न्याय’ देने की बात कर रही है।

इस मोर्चे पर कॉन्ग्रेस के चरित्र में खोट केवल विरोधी महिला नेताओं के लिए ही नहीं दिखता। खुद कॉन्ग्रेस की भी जिन महिला नेत्रियों ने पार्टी से ‘न्याय’ माँगा, उनके ही ऊपर या तो कार्रवाई हुई या फिर उन्हें अपमानजक तरीके से पार्टी छोड़ना पड़ा। इसमें ऐसे कई प्रमुख नाम हैं, जिनका जिक्र हम आगे करेंगे।

कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा कि ‘ऐतिहासिक रूप से महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया है और उन्हें बहुत नुकसान पहुँचाया गया है। कॉन्ग्रेस महिलाओं के प्रति भेदभाव को दूर करने, उनके अधिकारों को बनाए रखने और उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेती है’। इसमें कॉन्ग्रेस ने लैंगिक भेदभाव और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न जैसे कानूनों को सख्त करने की बात कही है।

एक आम आदमी अगर पार्टी के इन वादों को सुने तो उसे लगेगा कि कॉन्ग्रेस महिला सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है। उसके नेता महिलाओं का कितना सम्मान करते हैं। लेकिन, अगर कॉन्ग्रेस नेताओं की जुबान से निकले शब्दों को याद किया जाए तो लगेगा पार्टी के ये दावे खोखले हैं। अभी बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए, जब कंगना रनौत मंडी से टिकट मिलने पर रं** कहा गया और मथुरा से सांसद हेमा मालिनी को ‘चा*ने’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया।

कॉन्ग्रेस के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा के कैथल में 1 अप्रैल 2024 को इंडी गठबंधन के प्रत्याशी सुशील गुप्ता के समर्थन में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, “आप लोग (जनता) हमें विधायक और सांसद इसलिए बनाते हैं, ताकि हम आपकी आवाज संसद में उठा सकें। आपकी बात मनवा सकें। कोई हेमा मालिनी तो है नहीं, जो चा@ने के लिए बनाते हों। कोई फ़िल्म स्टार तो हैं नहीं।”

इसको लेकर भारी भारी बवाल हुआ। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) तक ने संज्ञान लिया और भारतीय चुनाव आयोग आयोग चिट्ठी लिखकर रिपोर्ट माँग ली। इतना सब कुछ होने के बावजूद कॉन्ग्रेस के हाईकमान ने इस पर कोई बयान नहीं जारी किया और ना ही कोई माफी माँगी। ये कॉन्ग्रेस नेतृत्व की महिलाओं की प्रति संजीदगी को दर्शाता है।

इससे पहले कॉन्ग्रेस के नेताओं ने हिमाचल प्रदेश के मंडी से बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को भाजपा का टिकट मिलने पर उन पर अभद्र टिप्पणियों की बौछार शुरू हो गई। कॉन्ग्रेस समर्थित सोशल मीडिया और अखबार के संपादक ही नहीं, उसके राष्ट्रीय स्तर के नेता तक ने कंगना रनौत को रं@ बताते हुए उनका ‘बाजार भाव’ तक पूछ डाला।

जब कंगना रनौत को टिकट मिला तो कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और गुजरात कॉन्ग्रेस के नेता एसपी अहीर ने उनके लिए अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया। सुप्रिया श्रीनेत खुद महिला हैं, लेकिन महिला के प्रति उन्होंने किसी तरह का सम्मान दिखाने की कोशिश नहीं की। हालाँकि, जब बवाल हुआ तो उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट को डिलीट करते हुए माफी माँग ली और इसे अपनी सोशल मीडिया टीम की करस्तानी बता दिया।

सुप्रिया श्रीनेत के सोशल मीडिया अकाउंट पर कंगना रनौत की बिकनी में एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा गया था, “क्या भाव चल रहा है मंडी में कोई बताएगा?” हालाँकि, बाद में सुप्रिया ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “मैं उस व्यक्ति की पहचान करने की कोशिश कर रही हूँ, जिसने ऐसा किया है। इसके अलावा, मेरे नाम का दुरुपयोग करके बनाए गए पैरोडी अकाउंट की रिपोर्ट एक्स में की गई है।”

इतना ही नहीं, गुजरात कॉन्ग्रेस के नेता एचएस अहीर ने तो कंगना रनौत को लेकर जो घटिया बात कही थी, वह किसी महिला के लिए असहनीय है।। उन्होंने कहा था, “मंडी से र*डी।” हालाँकि, सोशल मीडिया पर छीछालेदर के बाद अहीर ने भी अपने पोस्ट को डिलीट कर दिया और कहा, बाद कहा, “मेरे एक्स खाते तक पहुँच रखने वाले किसी व्यक्ति ने बिल्कुल घृणित और आपत्तिजनक पोस्ट की थी, जिसे हटा दिया गया है।”

इन सबसे अलग हैं कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की महिला संपादक मृणाल पांडे भी पीछे नहीं रहीं। कंगना रनौत को मंडी से टिकट मिलने की खबर दैनिक जागरण द्वारा दी गई खबर को शेयर करते हुए मृणाल पांडे ने लिखा, “शायद यूँ कि मंडी में सही रेट मिलता है?” हालाँकि, पांडे ने अपना ट्वीट बाद में डिलीट कर दिया, लेकिन इस पर ना कोई स्पष्टीकरण दिया और ना ही माफी माँगी।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता महिपाल मदेरणा का मामला राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया था। महिपाल मदेरणा ने भँवरी देवी मामले में ना सिर्फ महिला अस्मिता को तार-तार कर दिया था, बल्कि इस कांड ने ये भी बता दिया था कि कॉन्ग्रेस की नजर में महिलाओं की हैसियत है। इस कांड को हुए दशक भर से ऊपर गुजर गए हैं, लेकिन रणदीप सुरजेवाला, सुप्रिया श्रीनेत, मृणाल पांडे, एचएस अहीर जैसे नेताओं के बयान ये साबित करते हैं, पार्टी और उसके नेताओं की महिलाओं के प्रति नजरिये में किसी तरह का बदलाव नहीं आया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी अपने घोषणा पत्र में कहा है कि कॉन्ग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम 2013 को सख्ती से लागू करेगी। इसके साथ ही लैंगिक भेदभाव और पूर्वाग्रह वाले कथित कानूनों की जाँच करने और उन्हें हटाने का वादा भी कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किया है।

कार्यस्थलों पर महिलाओं के उत्पीड़न को लेकर वर्तमान कानूनों को सख्ती से लागू करने की बात कॉन्ग्रेस भले करे, लेकिन पार्टी में ही महिलाओं का उत्पीड़न जारी है। कॉन्ग्रेस की महिलाओं ने पार्टी के पुरुषों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया और आखिरकार पार्टी छोड़ दी। कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता रहीं प्रियंका चतुर्वेदी का मामला सबको याद होगा। यहाँ तक की एक महिला कार्यकर्ता ने तो यूथ कॉन्ग्रेस बीवी श्रीनिवासन पर उत्पीड़न का आरोप मढ़ दिया था।

प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर कहा जाता है कि साल 2019 में मथुरा में कॉन्ग्रेस के नेताओं की उपस्थिति में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। लगभग 8 नेताओं ने उनके साथ दुर्व्यवहार करते हुए उनके कमरे तक पहुँच गए थे। सभी नेता जिसके कारण वह भयभीत होकर पार्टी छोड़ दी थी। हालाँकि, पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया, लेकिन कुछ ही दिन बाद उनका निलंबन वापस ले लिया था।

इसी तरह असम यूथ कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं अंगकिता दत्ता ने यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी पर महीनों तक मानसिक उत्पीड़न और लैंगिक आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था। जब अंगकिता दत्ता ने इसकी शिकायत हाईकमान से की तो उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में ही पार्टी से 6 साल के निलंबित कर दिया गया। आखिरकार तंग आकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

साल 2021 में पार्टी ने तो एक उदाहरण ही पेश कर दिया। महिला सशक्तिकरण और ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ‘ का नारा देने वाली पार्टी कॉन्ग्रेस ने महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपित रंजीत मुखर्जी को तीन प्रमुख राज्यों- त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम का सचिव बनाया बनाया दिया था। इसको लेकर पार्टी में ही बड़े पैमाने पर विरोध हुआ, लेकिन कॉन्ग्रेस को इससे फर्क नहीं पड़ा।

इस तरह कॉन्ग्रेस में महिला उत्पीड़न, शिकायत करने पर उन्हीं पर कार्रवाई जैसी पुरानी परंपरा रही है। इसमें आज भी किसी तरह का बदलाव नहीं दिख रहा है। हाल में कॉन्ग्रेस के नेताओं द्वारा दिए गए महिला विरोधी बयान और अश्लील टिप्पणियाँ उनकी सोच को दर्शाती हैं। पार्टी में घोषणा पत्र में महिला सशक्तिकरण और न्याय की बात बस दिखावा मात्र है।

अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, संजय सिंह… AAP के 16 बड़े नेता जा चुके हैं जेल, फर्जी डिग्री-हिंदू विरोधी हिंसा-रेप से लेकर शराब घोटाले तक में आया नाम

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और जन लोकपाल जैसे मुद्दों पर बनाई गई आम आदमी पार्टी के तमाम बड़े नेता जेल की हवा खा चुके हैं। इसमें अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और मनीष सिसोदिया जैसे कई बड़े नाम हैं। आम आदमी पार्टी के नेताओं को भ्रष्टाचार, आपराधिक, धोखाधड़ी जैसे मामलों में जेल की हवा खानी पड़ी है, जिसमें से कई नेता अब भी जेल में हैं। इस खास पेशकश में हम बता रहे हैं आम आदमी पार्टी के उन 16 नेताओं के बारे में, जो राजनीतिक सफाई जैसे जुमलों के नाम पर राजनीति में आए और खुद कई कारनामों को अंजाम देकर जेल की हवा खा चुके हैं।

अरविंद केजरीवाल

इस लिस्ट की शुरुआत तो किसी भी नाम से कर सकते थे, लेकिन पार्टी के संयोजक से ही यहाँ इसकी शुरुआत करते हैं। अरविंद केजरीवाल पर शराब नीति घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। वो अभी न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं। हो सकता है कि वो जल्द ही जेल से छूट भी जाएँ, लेकिन शराब नीति घोटाले में उनके खिलाफ काफी गंभीर आरोप हैं, जिसकी वजह से दिल्ली हाई कोर्ट तक ने उन्हें कोई राहत देने से मना कर दिया था। अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत को 15 अप्रैल तक के लिए बढ़ाया है। लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 16 अप्रैल को होना है, लेकिन उससे कम से कम एक दिन पहले तक अरविंद केजरीवाल को जेल में ही रहना होगा। आम आदमी पार्टी को अस्तित्व में आए एक दशक का समय बीत चुका है और ये बताने की जरूरत नहीं है कि आम आदमी पार्टी का जन्म कैसे हुआ।

मनीष सिसोदिया

AAP के संस्थापक सदस्यों में से एक दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को फरवरी 2023 में दिल्ली शराब नीति घोटाले के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उन्हें कई अदालतों में अपील के बावजूद अब तक जमानत नहीं मिली है। मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को आम आदमी पार्टी ने काला दिन बताया था और मनीष सिसोदिया को इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन अब वो अपने ‘बॉस’ अरविंद केजरीवाल के साथ ही तिहाड़ जेल में बंद हैं। एक तरफ मनीष से इस्तीफा ले लिया गया, तो दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल तिहाड़ में होते हुए भी दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं।

सत्येन्द्र जैन

सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार के ताकतवर मंत्रियों में से एक थे। मई 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग के केस में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट तक उनकी जमानत को खारिज कर चुका है। गिरफ्तारी के बाद से सत्येन्द्र जैन काफी समय तक तिहाड़ में रहे। जेल में उनके सेल का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वो जेल के कैदी से मसाज कराते दिख रहे थे। हालाँकि उन्होंने दावा किया कि वो मसाज नहीं करा रहे थे, बल्कि वो थेरेपी ले रहे थे, जो उनके इलाज का हिस्सा है। बीच में कोर्ट ने थोड़े समय के लिए इलाज कराने के लिए जमानत दी थी, लेकिन 18 मार्च को उनकी जमानत की तारीख नहीं बढ़ी, तो उन्हें फिर से जेल जाना पड़ा। वो भी तिहाड़ जेल में बंद हैं।

अमानतुल्लाह खान

आम आदमी पार्टी के मुस्लिम चेहरे और ओखला विधानसभी सीट से पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान भी जेल जा चुके हैं। उनपर दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अवैध भर्ती और वित्तीय हेराफेरी से जुड़ा मामला चल रहा है। इस मामले में वो जमानत पर जेल से बाहर हैं। उन पर यौन हमला, रेप और एक महिला की हत्या का भी आरोप है।

सोमनाथ भारती

आम आदमी पार्टी के एक अन्य बड़े नेता सोमनाथ भारती भी जेल की हवा खा चुके हैं। सितंबर 2015 में उनकी पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा के केस में गिरफ्तार किया गया था। उनकी पत्नी ने आरोप लगाया कि भारती उन्हें कई बार पीट चुके हैं। इस मामले में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी हुआ था, जिसके बाद उन्होंने द्वारका पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया था। हालाँकि साल 2019 में उनके खिलाफ मामले को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वैसे, मार्च 2021 में उन्हें पथराव और एम्स की चारदीवारी तोड़ने की कोशिश की करती भीड़ का नेतृत्व करने के मामले में 2 साल की जेल की सजा सुनाई जा चुकी है। हालाँकि दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा पर अभी रोक लगाई हुई है और ये केस कोर्ट में चल रहा है।

विजय सिंगला

पंजाब सरकार में मंत्री रहे विजय सिंगला को मंत्री रहते भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। मई 2022 में उन्हें भगवंत मान ने अपनी कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया था। इस मामले में पंजाब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। विजय सिंगला का मामला अभी कोर्ट में चल रहा है।

ताहिर हुसैन

आम आदमी पार्टी का पूर्व पार्षद ताहिर खान साल 2020 में दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों का मुख्य आरोपित है। उस पर यूएपीए जैसे केस में मामला चल रहा है, तो आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में भी उसका नाम आया। दिल्ली दंगों के दौरान हुसैन ने कथित तौर पर हिंदुओं पर हमला करनी वाली मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ का नेतृत्व किया था। हालाँकि दंगों के दौरान उसने खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश की, लेकिन जाँच के दौरान वो फँस गया। उसकी छत से पत्तर, काँच की बोतलें और अन्य आपत्तिजनक सामग्रियाँ मिली। इस्लामिक गिरोह, वामपंथियों ने ताहिर हुसैन को बचाने की कोशिश की, और उसे पूरी तरह से निर्दोष बताया, लेकिन जाँच में ये तथ्य निकलकर सामने आया है कि वो दंगों में सीधे तौर पर सामिल था। ताहिर हुसैन भी अभी तिहाड़ जेल में बंद है।

संजय सिंह

दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति घोटाले को लेकर ईडी ने अक्टूबर 2023 में आप के प्रमुख नेताओं में से एक और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार किया था। सबसे पहले ईडी ने उनके घर पर छापेमारी की। इस मामले में सरकारी गवाह बने वाईएसआर विधायक श्रीनिवासुल रेड्डी के बेटे राघव माटुंगा और व्यवसायी दिनेश अरोड़ा की गवाही के आधार पर संजय सिंह की गिरफ्तारी की गई थी। उन्हें हाल ही में 2 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। ये मामला अभी कोर्ट में है।

संदीप कुमार

आम आदमी पार्टी के विधायक संदीप कुमार ने साल 2016 में एक महिला का राशन कार्ड बनाने के नाम पर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस मामले में आपत्तिजनक वीडियो भी लीक हो गया था। संदीप कुमार दिल्ली में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी भी देख चुके थे।

नरेश यादव

पंजाब में आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश यादव को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ पंजाब पुलिस ने कुरान के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के मामले में केस दर्ज किया था, इसके बाद मालेरकोटला में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। हालाँकि साल 2021 में कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोपों को खारिज कर दिया।

प्रकाश जारवाल

आम आदमी पार्टी के नेता प्रकाश जारवाल कई बार जेल जा चुके हैं। जुलाई 2016 में प्रकाश जारवाल को एक महिला का यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। साल 2018 में उन्हें दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वहीं, साल 2014 में भी वो दिल्ली जल बोर्ड कर्मचारी को थप्पड़ मारने के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं। इसी साल फरवरी 2024 में उन्हें डॉक्टर राजेंद्र सिंह आत्महत्या मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। बता दें कि अप्रैल 2020 में 52 वर्षीय डॉक्टर राजेंद्र सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में जारवाल और उनके सहयोगी द्वारा उन्हें परेशान करने का आरोप लगाया गया था।

अखिलेशपति त्रिपाठी

आम आदमी पार्टी के विधाय अखिलेश पति त्रिपाठी के खिलाफ साल 2015 में दंगे भड़काने के आरोप लगे थे, जिसके बाद नवंबर 2015 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। यही नहीं, वो नवंबर 2019 में भी गिरफ्तार किए गए थे, जब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें पेश होने का आदेश जारी किया था, लेकिन वो कोर्ट में पेश नहीं हुए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने गैर-जमानती वारंट के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

मनोज कुमार

आम आदमी पार्टी के विधायक मनोज कुमार को जुलाई 2025 में धोखाधड़ी और जमीन हड़पने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर घरेलू हिंसा के भी आरोप लगे थे। हालाँकि साल 2020 में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।

शरद चौहान

आम आदमी पार्टी के विधायक शरद चौहान को जून 2016 में जेल जाना पड़ा था। उन पर आम आदमी पार्टी की ही कार्यकर्ता सोनी मिश्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। उन्हें दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

जीतेन्द्र सिंह तोमर

साल 2015 में दिल्ली के तत्कालीन कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जिस एलएलबी डिग्री के दम पर वो कानून मंत्री तक बन गए थे, वो डिग्री ही फर्जी पाई गई। जीतेंद्र सिंह तोमर को डेढ़ माह तक जेल में रहना पड़ा था। वो जेल जाने वाले आम आदमी पार्टी के शुरुआती नेताओं में से एक थे।

दिनेश मोहनिया

दिल्ली पुलिस ने जून 2016 में आप विधायक दिनेश मोहनिया को एक महिला से दुर्व्यवहार के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन पर यौन शोषण और यौन उत्पीड़न का भी आरोप लगाया गया था। हालाँकि 2020 में वो आरोपों से बरी हो गए।

क्या फिर गिरफ्तार होंगे AAP के सांसद सजय सिंह? जिन शर्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने की थी ‘कृपा’, दूसरे ही दिन उसकी उड़ा दी धज्जियाँ

आम आदमी पार्टी (AAP) से सांसद संजय सिंह 2 दिन पहले कई शर्तों पर 6 महीने बाद जेल से रिहा हुए थे। उन शर्तों में एक शर्त यह भी थी कि उन्हें शराब घोटाला मामले में कोई बयान नहीं देना। हालाँकि, जेल से निकलते ही उन्होंने अपनी बयानबाजी शुरू कर दी। उन्होंने आज (5 अप्रैल 2024) प्रेस कॉन्फ्रेंस करके शराब घोटाले का सारा ठीकरा भारतीय जनता पार्टी पर फोड़ा।

संजय सिंह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि दिल्ली शराब घोटाले में जिन लोगों को आरोपितों के रूप में को पकड़ा गया था, उन्होंने जब तक केजरीवाल का नाम नहीं लिया, ईडी ने उनके बयान को भरोसे लायक नहीं माना लेकिन जैसे ही उन्होंने अरविंद केजरीवाल का नाम ले लिया उस बयान को मान लिया गया।

संजय सिंह के अनुसार, ऐसे ही लोगों के बयान के आधार पर केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया है। आगे संजय सिंह ने दावा किया कि भाजपा नेता मगुंटा रेड्डी और उसके बेटे राघव मगुंटा इसमें शामिल हैं। इन्होंने दबाव में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान दिया। इनके नौ बयानों में कहीं कुछ नहीं था जबकि दसवें बयान में अरविंद केजरीवाल का नाम आ जाता है।

फिर हो रही गिरफ्तारी की माँग

बता दें कि आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने पर या उसमें जो उन्होंने किसी नेता पर इल्जाम लगाए हैं उसकी चर्चा से ज्यादा इस बात पर चर्चा हो रही है कि आखिर उन्होंने जेल से रिहा होने के बाद ये बयान दिए कैसे।

वॉयस ऑफ असम ने अपने ट्वीट में संजय सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस की क्लिप को शेयर करते हुए लिखा कि संजय सिंह खुलेआम कोर्ट के ऑर्डर की अवहेलना कर रहे हैं। ऐसा करके ये सिर्फ अपना पक्ष कमजोर कर रहे हैं। क्या ऐसी हरकत करने पर इनकी बेल कैंसिल नहीं होनी चाहिए।

इसी तरह अक्षत देउरा ने ईडी को टैग करते हुए लिखा, “संजय सिंह ने सिर्फ अपनी बेल की शर्तों का उल्लंघन किया। अगर अब आप इन्हें गिरफ्तार नहीं करते तो हमें मानना होगा कि ये आपके मुखबिर हैं।”

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने जिन शर्तों पर संजय सिंह को बेल दी उनमें मीडिया में बयान न देने के अलावा, कुछ और शर्तें थीं। जैसे उन्हें साफ-साफ कहा गया कि वह सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश न करें। इसके अलावा जाँच में पूरा सहयोग दें। इसके अतिरिक्त उन्हें कहा गया कि अगर वह दिल्ली-एनसीआर से बाहर आते-जाते हैं तो उन्हें इसकी सूचना कोर्ट को दें। बिना अदालत के इजाजत के वो विदेश यात्रा भी न करें। कोर्ट ने कहा था कि संजय सिंह जहाँ भी जाएँगे उन्हें जाँच अधिकारी को गूगल लोकेशन देनी होगी। इस दौरान वह अपना फोन नंबर नहीं बदल सकते हैं।

समीना ने सचिन को मिलने बुलाया, गाड़ी में बिठाकर रेत दिया गला, हिंडन नदी से शव मिला: बीवी से अवैध संबंध में ‘खान साहब’ ने रची खूनी साजिश

दिल्ली के समीना और हबीब ने युवक सचिन की चाकू से गला रेत कर हत्या कर दी। हत्या के बाद सचिन के शव को हिंडन नदी में फेंक दिया गया। सचिन की हत्या हबीब ने समीना से अवैध सम्बन्ध के शक में की। पुलिस ने हबीब और समीना को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, 31 मार्च, 2023 को अलीगढ़ का रहने वाला 22 वर्षीय सचिन दिल्ली के कनॉट प्लेस में एक रेस्त्रां में काम करता था। यहाँ उसने कुक दिन पहले ही काम करना चालू किया था। इससे पहले वह दिल्ली में ही एक अन्य जगह काम करता था। इस कम्पनी का मालिक हबीब था और उसकी फैब्रिकेशन की यूनिट थी।

सचिन लम्बे समय से यहाँ काम कर रहा और उसकी हबीब की 29 वर्षीय बीवी समीना से नजदीकियाँ हो गईं थी। हबीब को शक था कि सचिन के उसकी बीवी के साथ अवैध सम्बन्ध हैं। इसको लेकर हबीब और उसकी बीवी समीना के बीच विवाद चल रहा था और नौबत तलाक तक आ गई थी।

हबीब ने समीना से अवैध सम्बन्ध के शक के चलते फरवरी, 2024 में सचिन को नौकरी से निकाल दिया था। हालाँकि, उसे अब भी शक था कि सचिन और समीना फ़ोन पर बात करते हैं और उनका संपर्क बना हुआ है। यह भी बताया गया कि सचिन ने ₹2 लाख भी हबीब-समीना से उधार लिए थे। हबीब ने समीना से अवैध सम्बन्ध के शक के चलते ही सचिन की हत्या का प्लान बनाया।

सचिन हबीब के यहाँ नौकरी छोड़ कर कनॉट प्लेस में मशहूर जैन चावल वालों के यहाँ वेटर का काम करने लगा था। हालाँकि, हबीब उसे अब भी ढूंढ रहा था। बताया गया कि 31 मार्च को हबीब ने अपनी पत्नी समीना से सचिन को फ़ोन करवाया।

समीना ने सचिन को एक सूनसान जगह बुलाया। इसके बाद सचिन को हबीब ने गाड़ी में बिठा लिया और पत्नी के साथ चाकू से गला रेत कर हत्या कर दी। हबीब ने इसके बाद सचिन का शव बिना कपड़ों के हिंडन नदी में फेंक दिया और गाड़ी वापस लाकर धो दी।

पुलिस ने बताया कि सचिन को ढूढ़ने के लिए उसने कॉल डिटेल निकलवाई जिसे उन्हें सुराग मिला। इसके बाद पुलिस पूछताछ में हबीब और समीना ने सचिन की हत्या की बात मान ली और बताया कि उन्होंने लाश कहाँ फेंकी है। सचिन की हत्या के मामले में समीमा और हबीब अब दिल्ली पुलिस कि गिरफ्त में हैं।

पुलिस को इस मामले में शक है कि हबीब के साथ हत्या में और लोग शामिल रहे होंगे, पुलिस पूछताछ करके उनका पता लगाने की कोशिश कर रही है। पुलिस ने सचिन का शव उसके परिजनों को पोस्टमार्टम के बाद सौंप दिया है। मामले में हत्या की FIR दर्ज हुई है।

दूरदर्शन पर आ रही है ‘द केरल स्टोरी’, विरोध में बिलबिला उठे कॉन्ग्रेसी-वामपंथी: CM विजयन ने बताया- नफरत फैलाने का घृणित प्रयास

5 अप्रैल, 2024 को रात्रि 8 बजे दूरदर्शन ‘द केरल स्टोरी’ प्रसारित करने जा रहा है। दूरदर्शन पर प्रसारण से पहले ही वामपंथी-कॉन्ग्रेसी एक सुर में इसका विरोध करने लगे हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी प्रसारण को लेकर खफा हैं। उन्होंने दूरदर्शन के निर्णय की निंदा की है। कॉन्ग्रेस नेता वीडी सतीशन ने भी इस मामले में चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। 2023 में आई यह फिल्म केरल में लव जिहाद और इस्लामी आतंकी संगठन ISIS के प्रसार को लेकर बात करती है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, ”दूरदर्शन द्वारा ध्रुवीकरण और भड़काऊ फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ का प्रसारण अत्यंत निंदनीय है। राष्ट्रीय न्यूज चैनल को BJP-RSS की प्रचार मशीन ना बन कर इस फिल्म की स्क्रीनिंग से पीछे हटना चाहिए। यह आम चुनाव से पहले सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने का प्रयास होगी। नफरत फ़ैलाने के ऐसे घृणित प्रयासों के विरोध में केरल मजबूती से खड़ा रहेगा।”

केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कॉन्ग्रेस नेता वीडी सतीशन ने भी इस मामले में अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस मामले में चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है। उन्होंने चुनाव आयोग से माँग की है कि वह 2024 लोकसभा चुनावों के मद्देनजर दूरदर्शन को इस फिल्म का प्रसारण ना करने दे। सतीशन ने दावा किया है कि यह फिल्म राज्य की खराब छवि पेश करती है। उन्होंने इसे संघ परिवार का एजेंडा बताया है। उन्होंने इसे चुनाव आचार संहिता का भी उल्लंघन बताया है।

गौरतलब है कि द केरल स्टोरी फिल्म को 5 मई ,2023 को रिलीज किया गया था। इस फिल्म की कहानी केरल में लड़कियों के लव जिहाद और फिर आंतक के मुंह में धकेले जाने को लेकर थी। इस फिल्म का तब भी वामपंथी और लिबरलों ने खूब विरोध किया था। फिल्म पर पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रतिबंध भी लगाया था। यह प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया था। इस फिल्म को दर्शकों ने काफी सराहा था और इसे बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छी कमाई हुई थी। इस फिल्म ने लगभग ₹300 करोड़ की कमाई की थी।

‘पाकिस्तान में आतंकियों को मरवा रहा है भारत’: चुनाव के समय ‘प्रोपेगेंडा’ खड़ा करने चला था हिंदू विरोधी विदेशी मीडिया, आम लोगों में PM मोदी की जय-जयकार करवा गया

भारत मे होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले विदेशी मीडिया ‘द गार्जियन’ ने वैश्विक स्तर पर एंटी इंडिया प्रोपगेंडा चलाने का प्रयास किया है। उन्होंने हाल में अपने एक आर्टिकल में भारत सरकार पर गंभीर इल्जाम लगाए। इसमें कहा गया कि भारत सरकार आतंकियों को मारने के नाम पर पाकिस्तान में हत्याएँ करवा रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि उन्होंने इस संबंध में दोनों देशों के खुफिया अधिकारियों से बात की और पाकिस्तानी जाँचकर्ताओं द्वारा साझा किए गए दस्तावेज बताते हैं कि भारत ने 2019 के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर विदेशों में हत्याएँ करनी शुरू कर दीं। भारत ने इन आरोपों से साफ मना किया है, लेकिन द गार्जियन ने फिर भी पाकिस्तान के लिए अपना प्रोपगेंडा चलाया ये सोचकर कि इससे पीएम मोदी की छवि बिगड़ेगी लेकिन हुआ उनकी सोच से अलग…।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत की खुफिया एजेंसी को अब भारत के पीएम मोदी के कार्यालय द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस लेख में कनाडा में खालिस्तानी निज्जर की हुई मौत से लेकर 2020 के बाद पाकिस्तान में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा की गई करीब 20 हत्याओं के पीछे भारत का हाथ बताया गया। साथ ही दावा किया गया कि भारतीय अधिकारियों ने पहली बार अपने विदेशों में चलाए जा रहे अभियान की चर्चा की है। उन्होंने ये भी कहा कि हत्याओं में प्रत्यक्ष संलिप्तता के विस्तृत दस्तावेज देखे हैं।

भारत पर इल्जाम लगाने का काम गार्जियन ने यहीं नहीं रोका। विस्तृत लेख में पाकिस्तान के हवाले से उन्होंने जमकर भारत पर सवाल उठाए। यहाँ तक कहा गया कि ये सारी मौतें UAE से संचालित होने वाली भारतीय खुफिया स्लीपर सेल द्वारा की गई है। सबसे हास्यास्पद बात तो ये हैं कि इसमें कहा गया है कि भारतीय एजेंटों ने जिहादियों को अपने इस काम के लिए चुना है और विश्वास दिलाया है कि वो काफिरों को मारेंगे।

गार्जियन पर प्रकाशित लेख की हेडलाइन

इनके मुताबिक भारत ने ऐसा पुलवामा हमले के बाद करना शुरू किया जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इतना ही नहीं गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में ज्यादातर जगह किसी अधिकारी का नाम नहीं लिखा है। सिर्फ भारतीय और पाकिस्तानी लिखकर उन्होंने अपने पूरे दावे कर डाले हैं। इसमें ऐसा कहा गया कि ऐसे ऑपरेशन करने के लिए सरकार से अनुमति चाहिए होती है बिन उनके ये सब नहीं होता।

आतंकियों की मौत का रोना रोया द गार्जियन

आगे बढ़ें तो दावा किया गया है कि भारत ने ये सब करने के लिए इजरायल की मोसाद और रूस की केजीबी से प्रेरणा ली है। इस लेख में 2018 में सऊदी एम्बेसी में हुई सऊदी के पत्रकार जमाल खासहोगी की हत्या का जिम्मेदार भी रॉ अधिकारियों को ठहराया गया।

आतंकी जाहिद अखुंद की कराची में हुई हत्या के पीछे भी इस आर्टिकल में भारत का नाम लगाया गया और दावा किया गया कि भारत उसकी मूवमेंट के लिए लिए पेमेंट करता था और हत्या को अंजाम देने के लिए अफगानी लोगों को लाखों रुपए दिए गए थे। इसके बाद जैश के आतंकी शाहिद लतीफ की हत्या के पीछे भी इन्होंने भारत का नाम लगाया। इसके बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के बशीर अहमद पीर और सलीम रहमानी की हत्या को भी इन्होंने भारत से जोड़ा। लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर रियाज अहमद की हत्या का नाम भी रॉ पर लगाया गया।

इस रिपोर्ट में पाकिस्तान का पक्ष मजबूती से रखने के लिए भारतीयों पर ये इल्जाम भी लगाया गया है कि इंडिया ने ऐसी हत्याएँ कराने के लिए 2 साल तक यूएई में स्लीपर सेल को स्थापित किया। इसके बाद ये हत्याएँ शुरू हुईं। इसके अलावा पाकिस्तान के विदेश सचिव साइरस सज्जाद काजी भी जनवरी दो हत्याओं के पीछे भारत पर इल्जाम लगा चुके हैं।

भारत ने किया इनकार

बता दें कि एक ओर जहाँ गार्जियन ने अपना पूरा आर्टिकल भारत पर आरोप लगाते हुए प्रकाशित किया है वहीं खुद को निष्पक्ष दिखाने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया भी इसमें जोड़ी है। जिसमें साफ है कि भारत ने इन आरोपों से इनकार किया है और इसे भारत विरोधी प्रोपगेंडा करार दिया है। मगर, द गार्जियन को इस प्रतिक्रिया को न तो अपने खबर के टॉप में रखना जरूरी समझा और न ही भारत के पक्ष को हेडलाइन में जगह दी। इस खबर के प्रकाशित होने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी साफ कहा कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोप झूठे है और सिर्फ भारत के खिलाउ प्रोपगेंडा चलाने के लिए हैं। भारत की नीति में टारगेट किलिंग नहीं है।

द गार्जियन का एंटी इंडिया प्रोपगेंडा

गौरतलब है कि इस पूरे आर्टिकल को लिखने वाले पत्रकारों में एक नाम हन्ना एलीस पीटरसन का भी है। पिछले दिनों ऑपइंडिया ने आपको बताया था कि कैसे हन्ना एलिस भारत विरोधी प्रोपगेंडा अपने समाचार पत्र के माध्यम से चलाती रहती हैं और सोशल मीडिया पर हिंदुत्व से नफरत दिखाती हैं। हमारे उस लेख के बाद अब उनका गार्जियन पर 4 अप्रैल को ये आर्टिकल प्रकाशित हुआ है वो भी ऐसे समय में जब भारत में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।

भारत द्वारा ये पक्ष साफ किए जाने के बाद कि वो टारगेट किलिंग नहीं करते फिर भी द गार्जियन ने पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से भारत पर कई इल्जाम लगाए हैं।

इसका मकसद साफ है कि वो एक बार फिर से भारत विरोधी प्रोपगेंडा वैश्विक स्तर पर चलाने के लिए एक्टिव हो गए हैं ताकि मोदी सरकार पर सवाल खड़ा करवा सकें। हालाँकि उनका ये हथकंडा काम नहीं आया क्योंकि मोदी सरकार में आतंकियों के खिलाफ हुई कार्रवाई से लोग पहले से ही बहुत संतुष्ट हैं जब उन्होंने ये रिपोर्ट पढ़ी कि भारत सरकार विदेशों में भी आतंकियों के सफाए के लिए अभियान चला रही है तो भारतीय मीडिया में पीएम मोदी का बखान होने लगा।

द गार्जियन ने कोशिश की थी कि इस रिपोर्ट से उनपर सवाल उठें लेकिन सोशल मीडिया पर लोग मोदी सरकार की तारीफ करने लगे। अब देखना है कि द गार्जियन या अन्य कोई मीडिया चुनाव से पहले मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए क्या दाव खेलते हैं।

उलटा पड़ा द गार्जियन का दाव

मालूम हो कि ऐसा काम वो पहली बार नहीं कर रहे हैं। इससे पहले इसी द गार्जियन ने लेस्टर हिंसा पर मुस्लिमों को बचाने के लिए एकतरफा रिपोर्टिंग की थी। इंग्लैंड में हुई हिंसा का जिम्मेदार इन्होंने आरएसएस को ठहरा दिया था। अब यही द गार्जियन भारत के खिलाफ ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित कर रहा है। उनके लिए ये सब नया नहीं है और न ही अब भारतीय पाठकों को ये नया लगता है। द गार्जियन के बारे में पाठक जान चुके हैं कि न्यूज कंटेंट के नाम पर भारत विरोधी प्रोपगेंडा चलाना विदेशी मीडिया के लिए नया नहीं है।

यूपी में 16000 मदरसे बंद, हाई कोर्ट के फैसले के बाद एक्शन में योगी सरकार: शिक्षा बोर्ड से मान्यता के बाद ही अब हो सकेगा संचालन

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 16,000 से अधिक मदरसों की मान्यता रद्द कर दी है। यह निर्णय इलाहबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है। यह मदरसे अब तक मदरसा बोर्ड के अंतर्गत चलते थे, जिसे हाई कोर्ट ने असंवैधानिक करार दे दिया था। अब इनमें से पात्र मदरसों को किसी अन्य बोर्ड की मान्यता लेनी होगी, वरना यह बंद हो जाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने इलाहबाद हाई कोर्ट के निर्णय का पालन करवाने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। यह निर्देश उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भेजा गए हैं। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश में जो भी मदरसे अब तक मदरसा बोर्ड के अंतर्गत संचालित हो रहे थे, उनको किसी अन्य बोर्ड से मान्यता प्राप्त करनी होगी। यह मान्यता वही मदरसे प्राप्त कर सकेंगे, जो अन्य बोर्ड की अर्हताओं को पूरा करते हों। जिन मदरसों को इस मामले में पात्र नहीं पाया जाएगा, वह बंद हो जाएँगे।

मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को हितों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। जिन मदरसों को मान्यता मिल जाएगी, वहाँ पढ़ने वाले छात्रों को कोई समस्या नहीं होगी। उत्तर प्रदेश में जो मदरसे मान्यता ना पाने के कारण बंद होंगे, उनमें पढ़ने वाले बच्चों को आसपास के सरकारी स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। यदि स्कूलों में क्षमता बढ़ाने या नए स्कूल खोलने की आवश्यकता पड़ती है तो यह भी किया जाएगा। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी इस बात की पुष्टि की है।

गौरतलब है कि जिन 16,000 से अधिक मदरसों की मान्यता उत्तर प्रदेश में रद्द हो रही है, वह 2004 के मदरसा एक्ट के अंतर्गत संचालित होते थे। इनमें से 500 से अधिक मदरसों को सरकार से काफी अनुदान भी मिलता था। इन मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी सरकार पैसा देती थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 22 मार्च, 2024 को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य मदरसा बोर्ड एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि मदरसे की शिक्षा सेक्युलरिज्म के सिद्धांतों के विरुद्ध है और सरकार को ये कार्यान्वित करना होगा कि मदरसों में मजहबी शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को औपचारिक शिक्षा पद्धति में दाखिल करें। हाई कोर्ट ने इस दौरान पूछा था कि आखिर मदरसा बोर्ड को शिक्षा मंत्रालय की जगह अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा क्यों संचालित किया जाता है।

इलाहबाद हाई कोर्ट के मदरसा बोर्ड को असंवैधानिक घोषित करने के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई है। इस पर शुक्रवार (5 अप्रैल, 2024) को सुनवाई होगी। यह सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच करेगी। उत्तर प्रदेश सरकार भी इस मामले में अपना पक्ष रखेगी।

याद हैं कमलेश तिवारी जिनका मोइनुद्दीन और अशफाक ने रेत दिया था गला? हाई कोर्ट ने 1 साल में ट्रायल पूरा करने को कहा, सैयद आसिम को नहीं दी बेल

साल 2019 में हुए कमलेश तिवारी हत्याकांड के आरोपित सैयद आसिम अली को अब जमानत चाहिए। इसके लिए उसने इलाहाबद हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। हालाँकि अदालत ने उसकी इस माँग को खारिज कर दिया। आसिम पूरे हत्याकांड में मुख्य आरोपितों के साथ लगातार संपर्क में था और उसकी भी इस हत्या में अहम भूमिका थी।

अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अधीनस्थ अदालत (प्रयागराज की अदालत) को आदेश दिया कि वो इस मामले में ट्रायल को पूरा करें। अदालत के अनुसार अगर एक साल में ट्रायल पूरा नहीं होता तो याची हाई कोर्ट आ सकता है। अभी तक इस मामले के 35 गवाहों में से 7 गवाहों का परीक्षण किया गया है। कोर्ट ने जल्द से जल्द ट्रायल पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि आसिम की याचिका को खारिज करने वाला आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सौरभ श्याम शमसेरी की सिंगल बेंच ने दिया। इस मामले में साल 2019 में लखनऊ के नाका हिंडोला थाने में केस दर्ज हुआ था जिसके बाद कमलेश तिवारी के हत्यारे गिरफ्तार किए गए थे।

कमलेश तिवारी हत्याकांड

गौरतलब है कि कमलेश तिवारी ने साल 2015 में पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी की थी। इसके बाद कई कट्टरपंथियों द्वारा उन्हें धमकी मिली, ऐलान हुआ कि जो हत्या करेगा उसे 51 लाख रुपए से लेकर डेढ़ करोड़ तक इनाम मिलेगा। शुरू में कमलेश तिवारी को उनकी टिप्पणी के लिए जेल भेजा गया, लेकिन इससे कट्टरपंथी शांत नहीं हुए, उन्होंने कमलेश की हत्या की साजिश रचना जारी रखा और 2019 में जाकर इसे अंजाम दिया गया।

18 अक्टूबर 2019, घटना के दिन रोज की तरह कमलेश तिवारी पार्टी मुख्यालय पहुँचे थे। इसी दौरान भगवा वस्त्र में दो साजिशकर्ता हाथ में मिठाई का डिब्बा लेकर नेता उनसे मिलने पहुँचे। बातचीत कर साथ में चाय पी और उसके बाद मिठाई के डिब्बे में छिपाकर लाए रिवॉल्वर व चाकू निकाल लिया। चाकू से ताबड़तोड़ 15 से ज्यादा वार उनके गले पर किए। इसके बाद वे गोली मारकर भाग निकले। कमलेश तिवारी को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। बाद में इन हत्यारों की सीसीटीवी फुटेज सामने आई तो सब सन्न रह गए।

पुलिस ने फुटेज के आधार पर अपनी छानबीन शुरू की तो आरोपित एक के बाद एक गिरफ्तार हुए। आज उस घटना को साढ़े चार साल बीच गए हैं। गिरफ्तारा आरोपितों पर कमलेश तिवारी को दिनदहाड़े गोली मारने या इस हत्या की साजिश रचने का या हत्यारों की मदद करने का इल्जाम है, लेकिन फिर भी उन्हें जमानत चाहिए। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आसिम को फिलहाल बेल देने से साफ मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक घृणा फैलाना और दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या करना गंभीर अपराध है इसलिए बेल किसी कीमत पर नहीं दी जा सकती।

रेड में ED को मिली थी जो BMW वह हेमंत सोरेन की ही, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने कबूला: एजेंसी ने 8.86 एकड़ जमीन भी जब्त की

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने स्वीकार किया है कि दिल्ली में छापेमारी में बरामद हुई नीले रंग की BMW गाड़ी उनकी ही है। उन्होंने बताया है कि उनके दिल्ली स्थित आवास पर छापेमारी से पहले उन्होंने इस गाड़ी का उपयोग किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हेमंत सोरेन ने ED को बताया कि दिल्ली से जब्त नीले रंग की BMW की SUV गाड़ी उनके निजी काम के लिए थी। यह गाड़ी हरियाणा के गुरुग्राम में पंजीकृत है। इसे खरीदने के लिए सोरेन खुद ही BMW के शोरूम में गए थे। उन्होंने यह भी बताया कि 28 जनवरी, 2024 को वह इसी गाड़ी से दिल्ली स्थित अपने आवास से निकले थे।

हेमंत सोरेन की इस BMW गाड़ी को दिल्ली में स्थित झारखंड भवन में तैनात एक चालक चलाता था। उससे भी ED ने पूछताछ की है। चालक ने इस दौरान स्वीकार किया कि वह BMW हेमंत सोरेन की निजी गाड़ी है, वह इसका उपयोग दिल्ली में करते थे।

ED द्वारा जब्त की गई यह BMW भगवानदास होल्डिंग नाम की एक कम्पनी के साथ रजिस्टर्ड है। 29 जनवरी, 2024 को यह गाड़ी ED अपने साथ ले गई थी। ED दिल्ली स्थित आवास पर हेमंत सोरेन की तलाश में आई थी। इस गाड़ी के कॉन्ग्रेस सांसद और शराब कारोबारी धीरज साहू से लिंक होने की भी बात सामने आई थी।

एक रिपोर्ट में बताया गया था कि धीरज साहू ने ही इस गाड़ी के लिए भुगतान किया था। बताया गया था कि जिस कम्पनी के नाम पर यह गाड़ी रजिस्टर्ड है, उसका धीरज साहू से सम्बन्ध है। यह जिस पते पर रजिस्टर्ड थी वह धीरज साहू की सम्पत्ति है। इस मामले में ED ने साहू से भी पूछताछ की थी।

गौरतलब है कि साहू वही कारोबारी और सांसद हैं जिनके ठिकानों पर 2023 में छापेमारी के बाद आयकर विभाग को ₹350 करोड़ से अधिक की नकदी बरामद हुई थी। यह छापेमारी ओडिशा, बंगाल और झारखंड स्थित उनके ठिकानों पर हुई थी।

ED ने इस दौरान हेमंत सोरेन से पूछताछ में उस जमीन के बारे में भी पूछा जिसके कारण वह गिरफ्तार हैं। यह जमीन राँची के बरियातू में है। इसकी बाजार कीमत ₹31 करोड़ बताई जाती है। हेमंत सोरेन ने इस जमीन के विषय में कोई भी जानकारी होने इनकार किया। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ED ने यह 8.86 एकड़ जमीन जब्त भी कर ली है।

गौरतलब है कि ED ने 31 जनवरी, 2024 को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें इससे पहले भी एजेंसी ने 9 समन भेजे थे लेकिन वह इन पर हाजिर नहीं हुए थे। ED ने इसके बाद उन्हें राँची स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने गड़बड़ी से करोड़ों की जमीन हथियाई।

ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ संग लाइव बहस से पीछे हटी गार्जियन की पत्रकार: हिंदू विरोधी होने के आरोप पर इंटरव्यू का रखा था प्रस्ताव

ऑपइंडिया द्वारा वामपंथी प्रोपेगेंडा केंद्रित ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के नापाक हिंदू-विरोधी और भारत-विरोधी एजेंडे को एक्सपोज करने के बाद गार्जियन की दक्षिण एशिया संवाददाता हन्ना एलिस-पीटरसन ने ईमेल के माध्यम से ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नूपुर जे शर्मा से संपर्क किया। हन्ना एलिस-पीटरसन ने 1 अप्रैल, 2024 को ईमेल भेजकर गार्जियन की वामपंथी प्रोपेगेंडा के आरोपों पर सबूतों के साथ ‘सफाई’ देकर ऑपइंडिया को ‘ऑबलाइज’ करने की बात कही।

बता दें कि 25 मार्च 2024 को ऑपइंडिया ने लेख के माध्यम से बताया था कि द गार्जियन किस तरह से हिंदूवादी कार्यकर्या काजल हिंदुस्तानी को इंटरव्यू के लिए परेशान कर रहा था। रिपोर्ट में यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत पेश किए गए हैं कि कैसे काजल हिंदुस्तानी का साक्षात्कार लेने के लिए वामपंथी ब्रिटिश अखबार द्वारा चुने गए तीन ‘पत्रकार’, अर्थात् हन्ना एलिस-पीटरसन, अहमर खान और क्यारी इवेंजेलो हमेशा एक अलग एजेंडे से प्रेरित रहे हैं। जो वैश्विक स्तर पर हिंदुत्व को बदनाम करना, इस्लामिक कट्टरपंथ के खतरे और उनके अत्याचारों को कम करके दिखाना और भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने में लिप्त रहे हैं। ऑपइंडिया ने पर्याप्त सबूतों के साथ बताया कि कैसे गार्जियन के तीनों पत्रकारों का इतिहास हमारे देश के बारे में, हिंदुओं के बारे में भ्रामक और फर्जी खबरें फैलाने का इतिहास रहा है।

ऑपइंडिया की इस विशेष रिपोर्ट से हन्ना एलिस-पीटरसन परेशान हो उठीं, और उन्होंने ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ को ईमेल भेजा। उन्होंने ईमेल में लिखा, “आपने मुझ पर और मेरे सहयोगियों पर एजेंडा आधारित काम करने का आरोप लगाया है, लेकिन यकीन मानिए कि हम ऐसा बिल्कुल भी नहीं करते। ये जरूरी लगा कि हमें आपसे सीधे संवाद करना चाहिए और हमें अपनी बात कहने का अवसर दिया जाए।”

हन्ना द्वारा भेजा गया ये ईमेल सिर्फ उस बात का नमूना है कि जिसमें वो ‘मौका’ देने के नाम पर अपने एजेंडा को आगे बढ़ाते हैं। इसी तरह से द गार्जियन और बीबीसी जैसे पश्चिमी मीडिया संगठन काम करते हैं। गार्जियन की ‘पत्रकार’ हन्ना जो स्वयं हिंदू विरोधी और भारत विरोधी प्रचार फैलाने के लिए जानी जाती है, को वाकई लगता है कि वो हमें ‘उनसे’ बात करने का मौका देकर हमारे ऊपर उपकार कर रही हैं। हालाँकि, एक अविश्वसनीय प्रतिक्रिया में ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नूपुर जे शर्मा ने द गार्जियन ‘पत्रकार’ को एक लाइव स्ट्रीम बहस में शामिल होने का ‘न्यौता’ दिया, जिसमें वो अपने भारत विरोधी और हिंदू विरोधी होने के आरोपों पर ‘लाइव’ जवाब दे सकती हैं।

ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नूपुर जे शर्मा ने हन्ना के साथ इस ई-मेल बातचीत को सार्वजनिक किया और एक्स पर लिखा, “प्रिय हन्ना, आपके ईमेल के लिए धन्यवाद। चूँकि आपने जवाब न देने का फैसला किया है, ऐसे में पारदर्शिता की भावना के तहत मैं आपके साथ हमारी ई-मेल पर हुई बातचीत को सार्वजनिक कर रही हूँ। मैं इस बात से हैरान हूँ कि आपने मुझपर ‘फेवर’ करने की भावना से इंटरव्यू की पेशकश की, लेकिन जैसा कि मैंने ईमेल में कहा था कि यदि आप भारतीय दर्शनों के सामने अपना बचाव करना चाहती हैं, तो मैं आपको पॉडकास्ट का मंच प्रदान कर सकती हूँ, जहाँ आप अपने भारत-विरोधी, हिंदू-विरोधी कवरेज के बारे में मेरे सवालों के जवाब दे सकती हैं।”

नूपुर शर्मा ने अपने और द गार्जियन की दक्षिण एशियाई संवाददाता हन्ना एलिस-पीटरसन के बीच ई-मेल पर हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं।

द गार्जियन ‘पत्रकार’ ने ऑपइंडिया का प्रस्ताव ठुकराया

जैसा कि पहले से अंदाजा था, उसी तर्ज पर द गार्जियन की ‘पत्रकार’ ने ऑपइंडिया के पॉडकास्ट के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने 4 अप्रैल 2024 को एक अन्य ईमेल भेजकर कहा कि वो पॉडकास्ट में शामिल नहीं हो सकती।

एक तरफ द गार्जियन की पत्रकार हन्ना एलिस पीटरसन ऑपइंडिया को इंटरव्यू देकर अहसान करना चाहती थी, तो दूसरी तरफ वो अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई देने के लिए लाइव स्ट्रीमिंग के प्रस्ताव को ठुकरा रही हैं। आखिर किस बात ने उन्हें रोक लिया कि वो ऑपइंडिया के साथ पॉडकास्ट नहीं करेंगी। शायद इस बात ने, कि वो पूरी तरह से एक्सपोज हो जाएँगी। शायद इस बात ने उन्हें रोका कि ऑपइंडिया के निष्कर्ष सही हैं और वो अपना बचाव नहीं कर पाएँगी।

बता दें कि ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ ने सबसे पहले द गार्जियन को काजल हिंदुस्तानी को परेशान करने के खिलाफ चेतावनी दी थी। 24 मार्च को एक्स पर एक पोस्ट में, नूपुर ने काजल हिंदुस्तानी को परेशान करने के खिलाफ मीडिया आउटलेट को चेतावनी दी और हिंदू अधिकार कार्यकर्ता को अपना समर्थन भी दिया।

अगले दिन 25 मार्च 2024 को ऑपइंडिया ने पर्याप्त सबूतों के साथ इस बात का खुलासा किया था कि कैसे भारत विरोधी और हिंदू विरोधी एजेंडे के तहत द गार्जियन काजल हिंदुस्तानी के इंटरव्यू का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था।