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ओखला के AAP विधायक अमानतुल्ला खान के बेटे अनस ने अलीगढ़ में डॉक्टर को पीटा, महिला रिश्तेदारों ने भी की गाली-गलौच: पुलिस में शिकायत

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान के बेटे अनस ने अलीगढ़ में एक डॉक्टर के साथ मारपीट की और उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। ये मामला 27 मार्च 2024 का है, लेकिन मीडिया में इस बारे में कहीं कोई खबर नहीं आई। इस मामले में अमानतुल्लाह कान के बेटे अनस खान ने अपने मामा और साथियों के साथ मिलकर मामूली सड़क विवाद में अलीगढ़ के डॉक्टर सुहेब आरिफ को जमकर पीटा।

डॉ सुहेब आरिफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएनएमसी में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर हैं। इस घटना में उन्हें काफी चोटें आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अब इस मामले में जेएनएमसी के रेडिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन, अलीगढ़ को पत्र लिखा है और आरोपित अनस खान के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

अलीगढ़ के जेएनएलसीएच के रेजिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद आसिम सिद्दीकी ने 29 मार्च के पत्र में लिखा है कि, ‘हमारे रेजिडेंट, डॉ सुहेब आरिफ अपने अस्पताल की ड्यूटी से लौट रहे थे, तभी 27 मार्च 2024 को दोपहर 3 बजे निजामी पुलिस, सर सैयद नगर, सिविल लाइंस के पास एक एंडीवर कार (HR12D0002), जो सड़क पर गलत तरीके से खड़ी थी, सामने आ गई। डॉ सुहेब आरिफ ने गाड़ी के ड्राइवर से रास्ता देने का अनुरोद किया, लेकिन उस कार से 4 लोग बाहर निकले और उन्होंने डॉक्टर के साथ गाली-गलौच और मारपीट शुरू कर दी। उन्होंने डॉक्टर को गोली मारने की धमकी दी।’

इस घटना में डॉ सुहेब आरिफ को कई गंभीर चोटें आई, जिसके लिए उन्हें जेएनएमसीएच ले जाया गया। (चोट की रिपोर्ट संलग्न है)। हमलावरों में मुख्य भूमिका अनस पुत्र अमानतुल्ला खान (ओखला निर्वाचन क्षेत्र, दिल्ली से विधायक) और उनके मामा थे। उन लोगों के साथ कार में सवार महिलाओं ने भी पीड़ित डॉक्टर के साथ गाली-गलौच की। पत्र में आगे लिखा है, “मिस्टर अनस और उनके साथियों की इस हरकत से हम बेहद दुखी हैं। हम अपने साथी डॉक्टर के साथ खड़े हैं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अनुरोध करते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो।”

इस घटना का पास के एक घर के सीसीटीवी से वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में एक संकरी सड़क पर दो कारों की भिड़ंत और उसके बाद डॉक्टर और आरोपियों के बीच हाथापाई होती दिख रही है। ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने भी अपने एक्स हैंडल से पोस्ट किया। इसमें लिखा गया, ”विधायक के बेटे की दादागीरी – जेएनएमसी अलीगढ़ के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. सुहेब को ओखला से आप विधायक अनस खान पुत्र अमानतुल्ला खान ने बेरहमी से पीटा। डॉक्टर काफी डरे हुए हैं क्योंकि उन्हें विधायक के साथी द्वारा लगातार धमकी दी जा रही है। हम सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई चाहते हैं।”

ये पूरी घटना 27 मार्च 2024 की है। हालाँकि अभी तक इस घटना के बारे में मीडिया में कोई खबर तक नहीं है।

केजरीवाल को CM पद से हटाने को लेकर दाखिल की याचिका, दिल्ली हाई कोर्ट का सुनवाई से इनकार: कहा- पद छोड़ना उनके विवेक पर, लेकिन निजी हित से ऊपर हो देश हित

दिल्ली हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को CM पद से हटाने की माँग करने वाली याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इस दौरान कह़ा है कि ऐसे समय में लोगों को अपने हितों से ऊपर देश हित रखना चाहिए लेकिन केजरीवाल को यह तय करना पड़ेगा कि वह इस्तीफ़ा देते हैं नहीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में वह कोई आदेश नहीं दे सकता।

दिल्ली हाई कोर्ट में हिन्दू सेना के विष्णु गुप्ता ने एक याचिका डाली थी कि मुख्यमंत्री केजरीवाल को उनके पद से हटाया जाए। याचिका में कहा गया था कि शराब घोटाला मामले में केजरीवाल की ED द्वारा गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सरकार पंगु हो गई है। याचिका में कहा गया था कि दिल्ली में संवैधानिक संकट आ गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस प्रीतम सिंह अरोड़ा की सदस्यता वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में कहा, “कभी-कभी, व्यक्तिगत हित से राष्ट्रीय हित को ऊपर रखा जाना होता है। लेकिन यह उनकी (केजरीवाल की) अपनी निजी राय है। यदि वह ऐसा नहीं करना चाहते तो यह उन पर निर्भर है। हम तो कानूनी अदालत हैं। क्या आपके पास कोई ऐसा उदाहरण है कि कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति शासन या राज्यपाल शासन लगाया गया हो?”

कोर्ट ने कहा कि वह ऐसे मामले में निर्णय नहीं कर सकता, बल्कि इसका इलाज कहीं और है और याचिकाकर्ता को संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से सम्पर्क करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में निर्णय लेने के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल पूरी तरह से सक्षम हैं।

कोर्ट ने कहा, “यह एक प्रैक्टिकल मुद्दा है, कोई कानूनी मुद्दा नहीं है। हम इसमें नहीं घुसेंगे। क्या हम घोषित कर दें कि सरकार काम नहीं कर रही? इस मामले में राज्यपाल पूरी तरह से सक्षम हैं। उन्हें हमारी सलाह की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्हें अपने निर्णय लेने का विवेकाधिकार है। हमें ऐसा नहीं मानना चाहिए कि वह अपना काम नहीं करेंगे। हम इस मामले में नहीं सा सकते।”

कोर्ट ने कहा कि हमारे निर्णयों में कुछ निरंतरता होनी चाहिए। हमने एक उदाहरण तय किया है और अब हमें उसे मानना होगा। कोर्ट का इशारा ऐसी ही मांग करते हुए कुछ दिन पहले दाखिल की गई याचिका से था। इसे भी ख़ारिज कर दिया गया था।

कोर्ट ने इस मामले की सांवैधानिकता तय करने के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल को जिम्मेदार बताया। कोर्ट ने कहा,”उपराज्यपाल द्वारा इस मामले की संवैधानिकता पर विचार किया जाएगा। वह और पीएम इस पर विचार करेंगे। वही इस बात के लिए अधिकृत हैं। सब हर काम कोर्ट द्वारा नहीं किया जा सकता। हम राज्य नहीं चलाते हैं। यह मामला भी सही समय में अपने निष्कर्ष पर पहुँच जाएगा।”

कोर्ट ने पहले भी ऐसी ही याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि गिरफ्तार होने के बाद कोई पद पर नहीं रह सकता ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में न्यायपालिका के हस्तक्षेप की कोई याचिका नहीं है। गौरतलब है कि 21 मार्च, 2024 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को ED ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था। ED ने उन्हें इस पूरे घोटाले का मुखिया बताया है। कोर्ट ने उन्हें 15 अप्रैल, 2024 तक इस मामले में जेल भेजा है।

हेमा मालिनी पर अभद्र टिप्पणी कर फँसे कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला, महिला आयोग ने चुनाव आयोग से कार्रवाई को कहा: तीन दिन में माँगी रिपोर्ट

कॉन्ग्रेस के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने हाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला सांसद हेमा मालिनी पर अभद्र टिप्पणी की। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जनता विधायक-सांसद इसलिए बनाती है, ताकि उनकी आवाज उठा सकें। वो कोई हेमा मालिनी तो है नहीं, जिन्हें चा#ना हो। अब इस बयान का राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने संज्ञान लिया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने सोशल मीडिया साइट X पर इसको लेकर एक जानकारी साझा की है। NCW ने कहा, “राष्ट्रीय महिला आयोग श्री रणदीप सुरजेवाला द्वारा की गई बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की कड़ी निंदा करता है। ये टिप्पणी बेहद स्त्री-द्वेषपूर्ण और एक महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली है।”

सोशल मीडिया पोस्ट में राष्ट्रीय महिला आयोग ने आगे कहा, “माननीय अध्यक्ष रेखा शर्मा ने औपचारिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर श्री सूरजेवाला के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और 3 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने का अनुरोध किया है।” इस पोस्ट में NCW ने सूरजेवाला, हेमा मालिनी, चुनाव आयोग, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय को भी टैग किया है।

रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा के कैथल में 1 अप्रैल 2024 को इंडी गठबंधन के प्रत्याशी सुशील गुप्ता के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था, “आप लोग (जनता) हमें विधायक और सांसद इसलिए बनाते हैं, ताकि हम आपकी आवाज संसद में उठा सकें। आपकी बात मनवा सकें। कोई हेमा मालिनी तो है नहीं, जो चा@ने के लिए बनाते हों। कोई फ़िल्म स्टार तो हैं नहीं।”

उन्होंने आगे अपनी बात बैलेंस करने के लिए कहा, “हम तो हेमा मालिनी का भी सम्मान करते हैं क्योंकि धर्मेन्द्र के यहाँ शादी कर रखी है जो बहू हैं हमारी। ये लोग कोई फ़िल्म स्टार तो हो सकते हैं। लेकिन कोई मुझे या गुप्ता जी को इसीलिए AAP सांसद-विधायक बनाते हैं ताकि हम लोग आपकी सेवा कर सकें।”

इस बयान पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा, “कॉन्ग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने हेमा मालिनी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है, जो न केवल उनके लिए बल्कि सभी महिलाओं के लिए अपमानजनक है।” उन्होंने सुरजेवाला का वीडियो साझा करते हुए कहा, “यह राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस है, जो महिलाओं से नफरत करती है। हेमा मालिनी इस लोकसभा चुनाव में भी मथुरा से भाजपा की उम्मीदवार हैं।”

वहीं कंगना रनौत ने इस वीडियो को शेयर करके कहा, “बात मोहब्बत की दुकान खोलने की हुई थी लेकिन कॉन्ग्रेस नफरत की दुकान खोल बैठी है। महिलाओं के प्रति गिरी हुई सोच रखने वाले कॉन्ग्रेस के नेता अवश्यंभावी हार की हताशा और कुंठा में अपने चरित्र का दिन-ब-दिन पतन कर रहे हैं।” वहीं, शहजाद जयहिंद ने कहा, “नारी शक्ति का अपमान, कॉन्ग्रेस की पहचान।”

संदेशखाली में जो हुआ उसके लिए 100% TMC जिम्मेदार: बंगाल HC ने लगाई ममता सरकार को फटकार, शाहजहाँ शेख के वकील को भी लताड़ा

संदेशखाली मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को फटकारा। मामले तो बेहद शर्मनाक बताते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य में नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है जो इसकी जिम्मेदारी सारी राज्य सरकार की है।

कोर्ट ने कहा, “संदेशखाली में जो हुआ अगर उसमें 1 फीसदी भी सच्चाई है तो ये बेहद शर्मनाक है क्योंकि बंगाल सांख्यिकी रिपोर्ट में खुद को महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित राज्य बताने का दावा करता है।”

कोर्ट ने कहा, “संदेशखाली में जो हुआ उसके लिए पूरा जिला प्रशासन और सत्तारूढ़ दल को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यदि किसी नागरिक की सुरक्षा खतरे में है तो 100% जिम्मेदारी सत्तारूढ़ दल की है; इसमें भी सरकार जिम्मेदार है।”

बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा है। इस दौरान वकील प्रियंका टिबरेवाल ने कोर्ट को बताया कि उन्हें संदेशखाली में कई शिकायतें मिली हैं। इतने सारे लोग आए। लेकिन ये कहते हैं कि कुछ नहीं हुआ।

उन्होंने बताया, “मैं हलफनामा रिकॉर्ड में रख रही हूँ। मैं उनके नामों का उल्लेख नहीं कर रही हूँ, अन्यथा वे लोग खतरे में पड़ जाएँगे। एक महिला थी जो अपने पिता से मिलने गई थी। लौटी तो उसकी जमीन हड़प ली और उसे ले जाकर उससे रेप हुआ।”

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, टिबरेवाला ने बताया, “यहाँ ज्यादातर पीड़िताएँ अनपढ़ हैं। ई-मेल तो भूल जाइए, वो खत भी नहीं लिख सकती हैं। हमारे पास 500 से ज्यादा महिलाओं ने सेक्शुअल असॉल्ट की शिकायत की है। हमारे पास एफिडेविट हैं, जिनमें कहा गया है कि केवल एक शाहजहाँ गिरफ्तार हुआ है। उसके 1000 साथी गाँव में घूम रहे हैं और शाहजहाँ के खिलाफ बयानबाजी ना करने के लिए धमका रहे हैं। ये लोग कह रहे हैं कि अगर महिलाओं ने बयान दिया तो उनके पति-बच्चों का सिर काटकर फुटबॉल खेलेंगे।”

मुख्य न्यायाधीश ने इस केस की सुनवाई के दौरान जहाँ बंगाल सरकार को फटकारा तो वहीं शेख शाहजहाँ के वकील को भी डाँट लगाई। उन्होंने केस में आरोपों के जाँच की माँग की थी। मुख्य न्यायाधीश शिवगणनम ने कहा, “आप एक ऐसे आरोपित की ओर से पेश हो रहे हैं जिसकी जाँच चल रही है। आप पहले अपने आसपास के अंधकार को दूर करें, फिर अपनी शिकायत व्यक्त करें।”

‘जहाँ पर दूसरों से उम्मीद खत्म, वहाँ से मोदी की गारंटी शुरू’: PM ने बंगाल में कहा- देश के लिए कड़े फैसले लेने जरूरी, संदेशखाली के अपराधी जेल में काटेंगे जीवन

लोकसभा चुनाव 2024 में प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (4 अप्रैल 2024) को पश्चिम बंगाल के कूचबिहार पहुँचे। यहाँ उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) और कॉन्ग्रेस पर हमला बोला। इसके साथ ही उन्होंने संदेशखाली में टीएमसी के पूर्व नेता शाहजहाँ शेख द्वारा किए गए अपराध का मुद्दा भी उठाया।

पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल के विकास के लिए राज्य में भाजपा का मजबूत होना बहुत जरूरी है। भाजपा ही है, जो राज्य की माताओं-बहनों पर होने वाले अत्याचार को रोक सकती है। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देखा है कि कैसे तृणमूल सरकार ने संदेशखाली के गुनहगारों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। संदेशखाली की महिलाओं के साथ जो हुआ वह तृणमूल के अत्याचार की पराकाष्ठा थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा ने संकल्प लिया है कि वह संदेशखाली के दोषियों को सज़ा दिलवाकर ही रहेगा। उन्हें जेल में ही जिंदगी काटनी पड़ेगी। उन्होंने कहा, “आज दुनिया कहती है कि मोदी मजबूत नेता है। दुनिया कहती है कि मोदी कड़े और बड़े फैसले लेने वाला नेता है। मैं तो विनम्रता से यही कहना चाहता हूँ कि मोदी तो भारत की जनता का बहुत सामान्य सेवक है।”

उन्होंने कहा, “मोदी ने कड़े फैसले लिए ताकि… देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो। देश आतंकवाद से मुक्त हो। 140 करोड़ भारतीयों को नए अवसर मिलें। 21वीं सदी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। अब समय आ गया है कि हम एक विकसित भारत का निर्माण करें। हम दिल्ली में कमजोर सरकार बर्दाश्त नहीं कर सकते। हमें केंद्रीय स्तर पर स्थिरता चाहिए।”

पीएम ने कहा, “मोदी आपके भविष्य की चिंता कर रहा है, आपकी आने वाली पीढ़ियों के सा​मने से दशकों पुरानी चुनौतियों को हटा रहा है। मोदी की नीयत सही है, इसलिए दशकों बाद जम्मू-कश्मीर को धारा-370 से मुक्ति मिली है। दशकों बाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास हुआ। 500 वर्ष बाद अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बना है। जहाँ दूसरों से उम्मीद खत्म होती है, वहाँ से मोदी की गारंटी शुरू होती है।”

पीएम मोदी ने कहा, “आजादी के बाद हमारे देश में 6-7 दशक तक लोगों ने सिर्फ और सिर्फ कॉन्ग्रेस का मॉडल देखा। पिछले 10 सालों में देश ने पहली बार पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार का मॉडल देखा है। यह चुनाव देश का चुनाव है। देश को दुनिया को तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनाने का चुनाव है। इसलिए देश में एक स्थिर और मजबूत सरकार चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “पिछले 10 साल में देश में जो विकास हुआ है वह सिर्फ ट्रेलर है। अभी तो मुझे बहुत कुछ करना है। अभी तो हमें देश को, पश्चिम बंगाल को बहुत आगे ले जाना है। मेरे विरोधी कहते हैं कि मोदी का परिवार नहीं है। मेरे लिए मेरा भारत ही मेरा परिवार है।” उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने गरीबों को उनका हक दिया। देश को भ्रष्टाचार मुक्त और आतंक मुक्त बनाने का प्रयास किया।

पीएम मोदी ने कहा, “तृणमूल कॉन्ग्रेस और लेफ्ट की राजनीति झूठ, भ्रम और दुष्प्रचार पर टिकी है। INDI गठबंधन अपने आप में झूठ और भ्रम का प्रत्यक्ष उदाहरण है। तृणमूल के गुंडे आपको वोट देने से रोकते हैं तो पूरी हिम्मत से खड़े हो जाइए। इस बार चुनाव आयोग बहुत जागरूक है। आपके एक-एक वोट की ताकत वे समझते हैं। इसलिए आप निडर होकर वोट करने निकलिए।”

उन्होंने कहा, “21वीं सदी का ये समय, भारत के लिए बहुत अहम है। ये समय विकसित भारत बनाने का है। जब भारत विकसित होगा तो बंगाल उसका सबसे बड़ा लाभार्थी होगा। ये समय महाराज नर नारायण, चीला राय और ठाकुर पंचानन वर्मा जैसे महान सपूतों के सपनों को पूरा करने का समय है।”

नरेंद्र मोदी ने कहा कि टीएमसी, वामपंथी और कॉन्ग्रेस भले ही बागी नजर आते हों, लेकिन पर्दे के पीछे ये सभी पार्टनर हैं। टीएमसी नेताओं के घर से भारी मात्रा में पैसे मिले हैं। ‘नौकरी देने’ की आड़ में ये लोगों को लूटते हैं। उन्होंने कहा, “मैं कहता हूँ ‘भ्रष्टाचार हटाओ’, वे कहते हैं ‘भ्रष्ट नेताओं को बचाओ’।”

मोदी राज में 115% बढ़ गई राहुल गाँधी की संपत्ति, BJP सरकार की लाई योजनाओं में भी कर रखा है निवेश: कॉन्ग्रेस नेता पर चल रहा POCSO का भी केस

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी लगातार पिछले 10 वर्षों से मोदी सरकार पर अर्थव्यवस्था को लेकर हमले बोलते आए हैं। उनका दावा रहा है कि देश में गरीबी और बेरोजगारी बढ़ रही है। वह यह भी दावा करते रहे हैं कि इस दौरान लोगों की कमाई घटी है। राहुल गाँधी के यह दावे स्वयं उन पर ही फिट नहीं बैठ रहे। राहुल गाँधी की सम्पत्ति बीते 10 वर्षों में 115% बढ़ी है। यह जानकारी उनके द्वारा लोकसभा चुनाव के लिए जमा किए गए हलफनामे से मिली है।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने बुधवार (3 मार्च, 2024) को केरल के वायनाड में एक रोड शो के बाद अपना नामांकन किया। यहाँ दाखिल हलफनामे में उन्होंने बताया कि उनके पास ₹20.39 करोड़ की कुल चल-अचल सम्पत्ति है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में दाखिल किए गए हलफनामे में राहुल गाँधी ने बताया था कि उनके पास कुल ₹9.4 करोड़ की सम्पत्ति है। इस प्रकार देखा जाए तो पिछले 10 वर्षों में उनकी सम्पत्ति में 115% की वृद्धि हुई है।

राहुल गाँधी ने अपने हलफनामे में सारी जानकारियाँ दी हैं। इस हलफनामे के अनुसार, राहुल गाँधी को वित्त वर्ष 2022-23 में ₹1.02 करोड़ की कमाई हुई है। इससे पहले के भी 4 वर्षों में उन्हें औसतन ₹1.25 करोड़ की कमाई हुई है। उनके पास वर्तमान में ₹55000 नकद है।

राहुल गाँधी सम्पत्ति
राहुल गाँधी की बीते वर्षों में कमाई

उनके पास ITC, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, इंफोसिस समेत कई नामी कम्पनियों में शेयर हैं। उनके पास कुल 25 कम्पनियों में ₹4.33 करोड़ के बाजार मूल्य के शेयर हैं। उनके पास कॉन्ग्रेस के अखबार नेशनल हेराल्ड वाली कम्पनी यंग इंडिया में भी ₹1.9 लाख के शेयर हैं। राहुल गाँधी ने कई प्रकार के म्यूच्यूअल फंड में भी निवेश कर रखा है।

राहुल गाँधी सम्पत्ति
राहुल ने म्यूच्यूअल फंड्स में भी निवेश किया हुआ है

राहुल गाँधी के हलफनामे के अनुसार, उनके पास HDFC बैंक के 4 म्यूच्यूअल फंड है जो कि अलग-अलग कैटेगरी के हैं। उनका इन म्यूच्यूअल फंड में ₹3.81 करोड़ का निवेश है। इसके अलावा उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा द्वारा जारी किए जाने वाले गोल्ड बॉन्ड्स भी ₹15.21 लाख का निवेश किया हुआ है। यह योजना मोदी सरकार ने नवम्बर 2015 में चालू की थी।

राहुल गाँधी के पास ₹4.20 लाख का सोना भी है। इसके अलावा उन्होंने ₹61.52 लाख निवेश भी PPF खाते में किया हुआ है। उनके अचल सम्पत्ति की कुल कीमत ₹9.24 करोड़ है।

राहुल गाँधी सम्पत्ति
राहुल गाँधी की चल सम्पत्ति

राहुल गाँधी के पास अपनी बहन प्रियंका गाँधी के साथ संयुक्त स्वामित्व में दिल्ली में एक जमीन है। यह दिल्ली में महरौली में है जिसकी कीमत ₹2.10 करोड़ है। इसके अलावा गुरुग्राम में दो ऑफिस स्पेस भी ले रखे हैं, इनकी कीमत खरीद के समय ₹7.93 करोड़ थी। इन अचल संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य ₹11.15 करोड़ है। राहुल गाँधी की वर्तमान में कुल सम्पत्ति ₹20.39 करोड़ है। उनके ऊपर ₹49 लाख का बकाया भी है। 2019 से तुलना की जाए तो उनकी सम्पत्ति में इजाफा हुआ है।

राहुल गाँधी की अचल सम्पत्ति

उन्होंने इस हलफनामे में बताया है कि उनके ऊपर 18 आपराधिक मामले हैं जिनमें से सूरत में उनके खिलाफ दायर किए गए मामले में उन्हें 2 वर्षों की सजा भी हुई है। उनको यह सजा ‘सारे मोदी चोर होते हैं’ बयान पर मिली थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है। उनके खिलाफ एक नाबालिग रेप पीड़िता के अभिभावकों की पहचान उजागर करने के मामले में POCSO के तहत मुकदमा दर्ज है।

राहुल गाँधी ने अपनी शिक्षा के विषय में बताया है कि उन्होंने 1989 में CBSE से सीनियर सेकेंडरी, 1994 में अमेरिका के फ्लोरिडा से बीए और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज एम फिल किया है। एम फिल उन्होंने 1995 में किया है।

नवरात्रि में नए ठिकाने के बारे में बताएँगे संजय निरुपम, कहा- कॉन्ग्रेस में 5 पावर सेंटर, एक बहनजी का भी: गौरव वल्लभ BJP में हुए शामिल

लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही कॉन्ग्रेस के कई नेता पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल होना शुरू हुए हैं। एक साथ बड़े नेताओं ने आज बीजेपी की सदस्यता ली। इसमें एक गौरव वल्लभ और अनिल शर्मा हैं। इनके अलावा एक अन्य नेता हैं जिन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ी है उनका नाम संजय निरुपम है लेकिन उन्होंने अभी घोषणा नहीं की है कि वो किस पार्टी में जाएँगे। उन्होंने कहा कि वो खरमास खत्म होने के बाद नवरात्रि में तय करेंगे कि उन्हें किस ओर जाना है।

संजय निरुपम ने कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद जमकर अपना गुस्सा उतारा। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के निष्कासन से पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि पार्टी संरचनात्मक और वैचारिक तौर पर बिखरी हुई है। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस पार्टी में 5 पावर सेंटर हैं, जिनकी अपनी लॉबी चलती है। इनमें पहला नाम सोनिया गाँधी का है। दूसरा राहुल गाँधी का है। तीसरा बहन जी (प्रियंका गाँधी) का है। चौथा अध्यक्ष (मल्लिकार्जुन खड़गे) का है जिनकी लॉबी में ऐसे लोग शामिल हैं जिनके पास अनुभव तक नहीं है और अध्यक्ष से जुड़कर वो हाईकमान बन गए हैं। पाँचवा नाम है वो केसी वेणुगोपाल है। वो भी अपने ढंग से राजनीति करते रहते हैं। वो हिंदी बोलते हैं किसी को समझ नहीं आता, अंग्रेजी बोलते हैं समझ नहीं आता और मलयाली बोलते हैं वो कोई समझ नहीं पाता।

उन्होंने कहा कि इन लोगों की लॉबियों के कारण योग्य लोगों का कष्ट बढ़ता जा रहा है। वह बोले कि ये सब वो पिछले 5 सालों से गंभीरता से महसूस कर रहे थे और बड़ी पैमाने में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में निराशा बनी हुई।

संजय निरुपम ने कहा सेक्युलरिज्म में धर्म का विरोध नहीं, सर्व धर्म सद्भाव होना चाहिए। मगर कॉन्ग्रेस ने नेहरूवियन सेक्युलरिज्म के विचार को अपनाया। वामपंथी रामलला का सीधा विरोध करेंगे। अब कॉन्ग्रेस उसी राह पर आगे चल पड़ी है, इसलिए रामलला विराजमान के कार्यक्रम का कॉन्ग्रेस ने सीधे तौर पर विरोध किया।

इसके अलावा संजय निरुपम ने ये भी बताया कि वो कॉन्ग्रेस से क्यों नाराज थे। उन्होंने बताया, “महाराष्ट्र में जिस तरह से कॉन्ग्रेस पार्टी ने उनके दबाव में आकर समर्पण करके शिवसेना (यूबीटी) के साथ उनकी शर्तों पर गठबंधन किया और जिस तरह से कॉन्ग्रेस ने सीटें छोड़ीं। यही कारण है कि मैं नाराज था। आने वाले दिनों में कॉन्ग्रेस पार्टी कमजोर हो जाएगी और धीरे-धीरे मुंबई में दब जाएगी…मैं किस पार्टी में शामिल होऊँगा, यह मैं आपको आने वाले दिनों में बताऊँगा भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अभी भी चरम पर है और लगातार बढ़ रही है।”

गौरतलब है कि आज अनिल शर्मा ने भी भाजपा हेडक्वार्टर में आकर पार्टी की सदस्यता ली। उनके साथ राजद के एक नेता उपेंद्र प्रसाद भी बीजेपी में शामिल हुए हैं।

इनके अलावा बीजेपी का हिस्सा होने के बाद जहाँ गौरव ने कहा ” मेरा दृष्टिकोण हमेशा से था कि श्रीराम मंदिर बने तो वो लोग भी वहाँ जाएँ, लेकिन कॉन्ग्रेस ने इसे मना किया, मैं ये बर्दाश्त नहीं कर सकता। गठबंधन के नेता सनातन पर सवाल उठाते हैं, कॉन्ग्रेस इन पर जवाब क्यों नहीं देती। मैंने भाजपा ज्वाइन कर ली है। उम्मीद है मेरी काबिलियत और जानकारी भारत को आगे बढ़ाए।”

इधर TMC को ‘लॉटरी किंग’ ने इलेक्टोरल बॉन्ड से दिया चंदा, उधर ‘फ्यूचर गेमिंग’ के खिलाफ कोलकाता पुलिस ने 2 केस बंद किए: रिपोर्ट

लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन का धंधा कई राज्यों में फैला है, खासकर केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और त्रिपुरा में। उसके खिलाफ कोलकाता में जाँच चल रही थी। कोलकाता पुलिस ने 2 एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन उसने इलेक्टोरल बॉन्ड से सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस को इतना चंदा दे दिया, कि उसके खिलाफ कोलकाता पुलिस ने जाँच ही बंद कर दी और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। वो भी तब, जब मामले में ईडी भी जाँच शुरू कर चुकी थी और 400 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को भी जब्त कर चुकी थी। कोलकाता पुलिस ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा कि लॉटरी किंग की कंपनी के खिलाफ मामला ‘गड़बड़ी’ से दर्ज हुआ था, उसके खिलाफ तो कोई ढंग का मामला है भी नहीं। ये अलग बात है कि ईडी कोलकाता पुलिस और कोर्ट से ये कहती रही कि लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन की कंपनी फ्यूचर गेमिंग के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता पुलिस ने सैंटियागो मार्टिन की कंपनी फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज के खिलाफ दो मामलों को बंद कर दिया, वो भी उस समय, जब फ्यूचर गेमिंग ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से टीएमसी को मोटी रकम दी थी। फ्यूचर गेमिंग कंपनी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में लोकप्रिय ‘डियर लॉटरी’ गेम चलाती है। इसी मामलों में धोखाधड़ी के केस में कंपनी के खिलाफ कोलकाता पुलिस जाँच कर रही थी।

एसबीआई की ओर से जब इलेक्टोरल बॉन्ड का पूरा डाटा सार्वजनिक किया गया, तो सारे तार आपस में जुड़ गए। इलेक्टोरल बॉन्ड के डाटा के मुताबिक, फ्यूचर गेमिंग ने अक्टूबर 2020 में टीएमसी को सबसे पहले 1 करोड़ रुपए दिए, फिर जुलाई 2021 में 30 करोड़, अक्टूबर 2021 में 46 करोड़ और जनवरी 2022 में 60 करोड़। वहीं, कोलकाता पुलिस ने दिसंबर 2021 और जनवरी 2022 में इस कंपनी के खिलाफ चल रहे मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए केस को बंद कर दिया।

कोलकाता पुलिस में फ्यूचर गेमिंग के खिलाफ एफआईआर 2019 की थी। इसी एफआईआर के बेस पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर रही थी। ईडी ने 28 मई 2021 को ये केस दर्ज किया गया। इस मामले में ईडी ने अप्रैल 2022 को 409.92 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त की थी। लेकिन कोलकाता पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट की वजह से अब उसने इस केस को कोलकाता हाई कोर्ट में चैलेंज किया है और क्लोजर रिपोर्ट को बेस बनाकर कहा है कि ईडी ने गलत तरीके से उसके खिलाफ कार्रवाई की है।

इस बीच, ईडी ने कोर्ट को बताया है कि फ्यूचर गेमिंग कंपनी के खिलाफ उसके पास काफी सबूत हैं और इस केस को आगे बढ़ाने के पर्याप्त कारण हैं। ईडी ने अप्रैल 2022 में लॉटरी विनियमन अधिनियन 1998 की धारा 7(3) और 9 के तहत ये कार्रवाई की है और उसके पास काफी सबूत हैं। ईडी ने बाकायदा प्रेस रिलीज जारी कर इस बात की जानकारी दी थी।

हालाँकि कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस केस की अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की है, लेकिन ये साफ है कि कलकत्ता हाई कोर्ट में ईडी के सामने कोलकाता पुलिस की वो क्लोजर रिपोर्ट फ्यूचर गेमिंग के काफी काम आने वाली है। मामला साफ है कि इलेक्टोरल बॉन्ड द्वारा उसने पश्चिम बंगाल की सरकार चलाने वाली पार्टी टीएमसी को जो पैसे दिए हैं, वो साफ बता रहे हैं कि ये पैसे क्यों दिए गए और उन पैसों के बदले में उसका क्या काम हुआ। वहीं, टीएमसी ने कहा है कि उसे मालूम नहीं कि किसने पार्टी को चंदा दिया। इस मामले में भाजपा ने टीएमसी पर जोरदार हमला बोला है और कहा है कि टीएमसी ने भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए केंद्रीय जाँच एजेंसियों की कार्रवाई में अडंगा डाला है।

खास बात ये है कि फ्यूचर गेमिंग टीएमसी को अक्टूबर 2020 से जनवरी 2024 तक कुल 542 करोड़ रुपए इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से दे चुकी है, जो इस कंपनी द्वारा किसी भी राजनीतिक पार्टी को दिया गया सबसे बड़ा दान है। इस कंपनी ने तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके को दूसरा सबसे बड़ा चंदा दिया है। डीएमके को भी मार्टिन की कंपनी ने 500 करोड़ से अधिक की राशि दी है। इस कंपनी (फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज) ने पिछले 5 वर्षों में चुनावी बांड के माध्यम से ₹1,368 करोड़ का सबसे बड़ा राजनीतिक दान दिया है।

फ्यूचर गेमिंग के खिलाफ ये दो मामले

फ्यूचर गेमिंग के खिलाफ कोलकाता पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की थी। जिसमें फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज के खिलाफ पहली एफआईआर जून 2019 में भवानीपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। यह शिकायत कालीघाट के एक व्यक्ति ने दर्ज कराई थी जिसने ‘डियर लॉटरी’ का नियमित खरीदार होने का दावा किया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ” लॉटरी सिस्टम में करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की गई।” इस एफआईआर में फ्यूचर गेमिंग पर आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 34 (सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए कई व्यक्तियों द्वारा किया गया आपराधिक कार्य), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 417 और 419 (धोखाधड़ी), 418 (धोखाधड़ी), 419 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी) और लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 के प्रावधान के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अगस्त 2019 में कोलकाता के बेलियाघाटा पुलिस स्टेशन में दायर दूसरी एफआईआर में शिकायतकर्ता ने कहा कि मनचाहे लोगों को लॉटरी जिताई गई। ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह से लॉटरी के जरिए पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के लोगों को फायदा पहुँचाया गया। सीबीआई ने भी नवंबर 2022 में बताया था कि टीएमसी के नेता अनुब्रत मंडल और उनकी बेटी सुकन्या ने तीन साल में 5 लॉटरी जीती। इस मामले में अनुब्रत मंडल को सीबीआई ने नवंबर 2022 में गिरफ्तार किया था, तो बेटी सुकन्या को अप्रैल 2023 में गिरफ्तार किया।

ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है, मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

अयोध्या में रामलला विराजमान, काशी का भी काम हुआ, अब मथुरा कर रही इंतजार: CM योगी, बोले- हेमा मालिनी ने दिलाई नई पहचान तो कॉन्ग्रेसियों को बुरी लगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (4 अप्रैल 2024) को मथुरा में जनसभा को संबोधित किया। लोकसभा चुनाव 2024 में इस सीट पर भाजपा ने पूर्व अभिनेत्री हेमा मालिनी को एक बार फिर से मैदान में उतारा है। सीएम योगी ने भगवान श्रीकृष्ण की नगरी से ‘राधे-राधे’ और ‘बिहारी लाल की जय’ के नारों से अपने संबोधन की शुरुआत की।

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा, “अयोध्या, मथुरा और काशी में सबसे पहले चुनाव मथुरा में हो रहा है, तो संदेश यहीं से जाना चाहिए। अयोध्या में रामलला विराजमान हो गए हैं। काशी का भी काम हो गया है। अब मथुरा इंतजार कर रही है।” उन्होंने कहा कि सपा-बसपा और कॉन्ग्रेस हमारी आस्था का सम्मान नहीं कर सकते, तो उन्हें देश का बोझ लेकर चलने की जरूरत नहीं है।

सीएम योगी ने कहा, “कन्हैया के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने 16 कला के साथ अवतार लिया था। आज कला जगत की हेमा मालिनी मैदान में हैं। लीलाधारी भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली, जनपद मथुरा के वासी अपना एक-एक वोट कमल के निशान पर भाजपा को देने जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि हेमा मालिनी पर राधारानी और भगवान कृष्ण का आशीर्वाद है।

सीएम योगी ने कहा, “हेमा ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है। हेमा मालिनी ने भारत की नृत्य संस्कृति, सिनेमा संस्कृति को पूरे जगत में पहचान दिलाई है। कॉन्ग्रेसियों को यह बात बुरी लगती है। उनको भगवान भी बचा पाएगा या नहीं उसको लेकर संदेह होता है। हालात ये हैं कि किसी भी दल में प्रत्याशी ढूंढने पर भी नहीं मिल रहा है। वे उधार में प्रत्याशी ला रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में हर तरफ से मोदी जी के लिए आवाज आ रही है। उन्होंने कहा कि भारतवासियों ने ऐसी सरकार देखी है, जिसने राष्ट्रीय स्वाभिमान को 56 इंच चौड़ा किया। उन्होंने देश में एक भार फिर से मोदी सरकार बनाने के लिए लोगों से संकल्प लेने का आग्रह किया।

सीएम योगी ने ब्रज की बात करते हुए कहा, “अयोध्या में राम मंदिर के लिए 500 वर्ष इंतजार और संघर्ष करना पड़ा। अयोध्या में अब प्रभु राम का स्मरण हो रहा है। रामलला विराजमान होने के बाद वहाँ के लोगों की आय बढ़ी है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला भी न्यायालय में है। अब हमें पूरा फोकस ब्रजभूमि पर करना है। राम आए हैं, कृष्ण भी आएँगे।”

स्थानीय सांसद हेमा मालिनी की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस में देश में 60 वर्षों तक शासन किया। उसने ना ही काशी के बारे में सोचा और ना ही मथुरा के बारे में सोचा। उन्होंने पूछा, कॉन्ग्रस ने काशी के बारे में क्यों नहीं सोचा? मथुरा वृन्दावन के बारे में क्यों नहीं सोचा? मथुरा की सांसद हेमा बनीं तब उनके सुझाव पर विकास के कार्य आगे बढ़ाये।

हालात के मारे, महत्वाकांक्षी माता के बच्चे, परिवारवाद के शिकार… कंगना रनौत ने कॉन्ग्रेस के ‘परिवार’ पर किया वार, कहा- जिससे प्रेम किया उससे शादी नहीं कर पाए राहुल गाँधी

हिमाकल प्रदेश के मंडी से लोकसभा उम्मीदवार अभिनेत्री कंगना रनौत ने कहा है कि राहुल गाँधी पर दबाव डाल कर राजनीति करवाई जा रही है। उन्होंने कहा है राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी हालात के मारे हुए हैं और उन पर सोनिया गाँधी दबाव डाल कर राजनीति करवा रही हैं।

कंगना रनौत ने यह बातें आजतक से एक साक्षात्कार में कहीं। कंगना ने इस दौरान कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार पर हमला किया। कंगना रनौत ने कहा, “राहुल गाँधी हालातों के मारे हैं। वह एक महात्वाकांक्षी माता के बेटे हैं, जितना उन्हें नाकाम बताने की कोशिश हुई है, वह उतना हैं नहीं। बच्चे परिवारवाद का शिकार हो जाते हैं। खाली बाहरी ही नहीं शिकार होते। लगता है यही शिकार राहुल गाँधी हैं। वो एक्टिंग कर सकते हैं। सुनने में आता है वो किसी महिला से प्रेम करते हैं, शादी नहीं हो पाई।”

आप यह बातचीत नीचे लगे वीडियो में 14 मिनट से 18 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

कंगना ने आगे कहा, “मुझे नहीं मालूम उनका घर क्यों नहीं बसा, उनकी शादी क्यों नहीं हुई। हमने उड़ती उड़ती खबरें सुनी हैं। उनका कोई करियर नहीं बन पा रहा है। मुझे वो अकेले लगते हैं, उन पर प्रेशर डाला जा रहा है। वह 60 साल के होने वाले हैं, उन्हें युवा बता कर लॉन्च किया जाता है। मैंने फिल्म इंडस्ट्री में भी यही देखा है।”

कंगना ने कहा कि राजनीति राहुल गाँधी का काम नहीं है और उनकी माता जी यह समझ नहीं रही हैं, मुझे लगता है कि उनसे राजनीति जबरदस्ती करवाई जा रही है। उन्होंने प्रियंका गाँधी पर भी इस दौरान टिप्पणी की। कंगना रनौत ने कहा, “राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी मुझे हालात के मारे लगते हैं और दोनों ही अच्छे लगते हैं। मुझे लगता है कि उनकी माताजी को उन्हें इस तरीके से टॉर्चर नहीं करना चाहिए। मुझे लगता है कि वह लोग अच्छे बच्चे हैं, लेकिन वह नहीं हुआ है, अब दोनों ही परेशान रहते हैं।”

कंगना रनौत ने अरविन्द केजरीवाल की गिरफ्तारी पर कह़ा कि अन्ना हजारे ने भी इसको लेकर आगाह किया था। कंगना रनौत ने बॉलीवुड में किए गए संघर्ष को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि वह अब अपनी जमीन पर वापस लड़ने आई हैं इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कंगना ने कहा कि उनमें संयम की कोई कमी नहीं है।

कंगना रनौत को भाजपा ने हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट उम्मीदवार बनाया है। वह लगातार इस सीट पर जोर शोर से प्रचार में जुटी हैं। उनके उम्मीदवार घोषित किए जाने पर उनके खिलाफ कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और अन्य लोगों ने काफी अपमानजनक बातें की थी।