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नेपाल बॉर्डर से अब 2 पाकिस्तानी गिरफ्तार, साथ में था एक कश्मीरी भी: भारत में घुसने की कोशिश करते हुए चीनी दंपती भी पकड़े गए थे

लोकसभा चुनाव के बीच महराजगंज जिले से सटे इंडो नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियों ने 3 संदिग्धों को पकड़कर ATS को सौंप दिया है। बताया जा रहा है कि पकड़े गए लोगों में 2 पाकिस्तानी और एक जम्मू-कश्मीर का है। अधिकारियों ने इनके पास से पाकिस्तानी पासपोर्ट भी बरामद किया गया है। हालाँकि इस पूरे मामले में जिले के अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार की रात सोनौली सीमा पर आव्रजन विभाग के अधिकारी भारत से नेपाल जाने वाले लोगों की जाँच कर रहे थे। इसी बीच नेपाल जाने के लिए एक बस सीमा पर पहुँची। बस की जाँच की गई तो तीनों संदिग्ध पकड़े गए। पूछताछ में पता चला कि इनमें दो युवक पाकिस्तान के हैं। इनके पास से पाकिस्तानी पासपोर्ट भी बरामद हुआ। जबकि एक युवक जम्मू-कश्मीर का रहने वाला था। उसके पास आधार कार्ड बरामद हुआ।

पूछताछ के बाद पाकिस्तानी युवकों की पहचान मोहम्मद अल्ताफ पुत्र खिजार मोहम्मद, निवासी पाक अधिकृत कश्मीर और दूसरा युवक सैयद गजनी मोहम्मद सईद, लरकाना पाकिस्तान के रूप में हुई। जबकि नासिर जमाल पुत्र कासिम अहमद,करालपोल, श्रीनगर, जम्मू कश्मीर बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात में ही लखनऊ एटीएस तीनों संदिग्धों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। हालाँकि स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस मामले में चुप्पी साधी हुई है।

बता दें कि 26 मार्च 2024 को भी नेपाल बॉर्डर से दो चीनी नागरिक पकड़े गए थे। इन्हें सिद्धार्थनगर में एसएसबी ने पकड़ा था। गिरफ्तार चीनियों में एक महिला और दूसरा पुरुष है। दोनों के पास से चीन और नेपाली सिम के अलावा कई अन्य सामान बरामद हुए। बभनी तिराहे के पास से 1 महिला सहित 2 संदिग्ध लोग नेपाल के रास्ते भारत की सीमा में घुसते नजर आए। पुलिस ने इन्हे रोक कर पूछताछ की तो पुरुष का नाम झोउ पुलिन (ZHOU PULIN) और महिला का नाम युवान युहान (YUAN, YUHAN) निकला। झोउ पुलिन चीन के सिचुआन प्रांत का निवासी है जबकि युआन युहान जोंगकिंग जिले की रहने वाली है। दोनों को जेल भेजा जा चुका है।

मगध और चंद्रगुप्त का बिहार है ये: पीएम मोदी ने बिहार के जमुई में राजद और कॉन्ग्रेस पर बोला हमला, कहा- आटे के लिए तरसने वाले देश के सामने कॉन्ग्रेस सरकार गिड़गिड़ाती थी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुरुवार (4 अप्रैल 2024) को बिहार के जमुई में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान मंच पर बिहार के मुख्यमंत्री एवं जदयू के नेता नीतीश कुमार, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान सहित कई नेता उपस्थित थे। इन लोगों ने भी सभा को संबोधित किया लोपजपा (रामविलास) के उम्मीदवार अरुण भारती के लिए वोट माँगा।

जनसभा में शामिल होने से पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साइट X पर एक पोस्ट किया। इसमें लिखा, “लोकसभा चुनाव में बिहार की भूमिका इस बार भी बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। यहाँ के मेरे परिवारजनों ने राज्य की सभी सीटों पर बीजेपी-एनडीए उम्मीदवारों को जिताने का संकल्प लिया है। आज दोपहर करीब 12 बजे जमुई की जनसभा में जनता-जनार्दन से संवाद का सुअवसर मिलेगा।”

मंच पर पहुँचने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पीएम मोदी का स्वागत किया। भाजपा विधायक श्रेयसी सिंह, समेत कई महिला नेत्रियों ने पीएम मोदी को शॉल भेंटकर उनका स्वागत किया। 

जमुई के खैरा प्रखंड के बल्लोपुर मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने चिराग के बहनोई अरुण भारती को अपना भाई बताते हुए कहा, “आज इस मंच से एक कमी महसूस हो रही है कि बिहार के बेटे और मेरे मित्र व पद्म विभूषण से सम्मानित रामविलास पासवान जी हमारे बीच नहीं हैं। मुझे संतुष्टि है कि रामविलास जी के विचारों को मेरे छोटे भाई चिराग पासवान अच्छी तरह निभा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आजादी के बाद बिहार को न्याय नहीं मिल पाया है। एनडीए सरकार ने बिहार को दलदल से बाहर निकाला है। नीतीश बाबू की इसमें बड़ी भूमिका रही है। साल 2024 का चुनाव बिहार और भारत के भविष्य के लिए काफी निर्णायक है। याद कीजिए कि 10 साल पहले देश में भारत को लेकर क्या राय थी।”

पाकिस्तान पर परोक्ष हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “छोटे-छोटे देश, जो आटे के लिए तरस रहे थे, उनके आंतकी देश में अशांति फैलाते थे। कॉन्ग्रेस गुहार लगाती रहती थी। एनडीए सरकार जब आई तो कहा कि यह चंद्रगुप्त और अशोक का भारत है। हम किसी के सामने घुटने नहीं टेका। भारत वही महान पाटलिपुत्र और मगध वाला भारत है। आज का भारत घर में घुसकर मारता है।”

लालू यादव और उनके परिवार पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जो लोग नौकरी के नाम पर जमीन लिखवाए, वे देश का भला कभी नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “नीतीश बाबू भी रेल मंत्री रहे, लेकिन उनके खिलाफ कभी शिकायतें नहीं आईं। कोई सवाल नहीं उठा। घमंडिया गठबंधन की सरकार में खराब हालत वाली ट्रेनें चलती थीं। आज वंदे भारत ट्रेनें बिहार में दौड़ रही है।”

कॉन्ग्रेस पर राजद पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “पहले गरीबों का पैसा बीच में लूट लिया जाता था। अब वह पैसा सीधे आपके खाते में जा रहा है। जमुई में ही किसानों को 850 करोड़ से अधिक राशि खाते में पहुँची है। 10 साल में जो हुआ वह तो ट्रेलर है, अभी तो बहुत काम करना है। बिहार और देश को बहुत आगे लेकर जाना है।” उन्होंने राजद पर अपहरण उद्योग चलाने का आरोप लगाया।

अपनी गरीबी को याद करते हुए पीएम ने कहा, “यह मोदी गरीबी के ताप को सहकर यहाँ तक पहुँचा है। इसलिए हर गरीब का दर्द मोदी जानता और महसूस करता है। यह मोदी की गारंटी है कि आपका सपना ही मेरा संकल्प है। इसलिए केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता दी। बिहार के गरीबों को 37 लाख पक्के मकान मिले हैं। नौ करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिला है।”

विपक्ष पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मोदी सरकार सोलर पॉवर और एलईडी बल्व की बात करती है। वहीं घमंडिया गठबंधन वाले बिहार में लालटेन की लौ जलाना चाहते हैं। हम लोग बिहार में उद्योग और कारखाना लगा रहे, वहीं राजद के लोग अपहरण का उद्योग चलाते थे। हम लोग हाईवे और एक्सप्रेस वे बना रहे हैं जबकि राजद के लोगों ने बिहार में गड्ढे और खाई बनाई।”

इससे पहले सीएम नीतीश कुमार ने लालू यादव के जंगलराज की याद दिलाई और कहा कि नरेंद्र मोदी फिर देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। नीतीश कुमार ने कहा कि साल 2005 से जदयू और भाजपा मिलकर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “हमने बहुत तेजी से काम किया। पहले हिंदू-मुस्लिम का झगड़ा होता था। अब सब कंट्रोल में है। अब हम इधर-उधर होने वाले नहीं हैं।”

लोजपा (रामविलास) के चिराग ने कहा, “जब हमारे प्रधानमंत्री मोदी बिहार में लोकसभा चुनाव की शुरुआत करते हैं तो वह जमुई से ही करते हैं। इसके पहले जमुई में जब सभा की थी, तब मेरे पिता रामविलास पासवान मौजूद रहे। मैं प्रधानमंत्री को आश्वस्त करता हूँ कि बिहार से 40 की 40 सीटें हम जीतेंगे।” बता दें कि जमुई में चिराग के बहनोई अरुण भारती NDA के प्रत्याशी हैं।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 19 अप्रैल 2024 को बिहार की 40 में से 4 सीटों पर मतदान होना है। इनमें गया, औरंगाबाद, नवादा और जमुई लोकसभा सीट शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने बिहार में प्रचार के लिए सबसे पहले जमुई को चुना है। प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली से आई SPG की टीम पिछले तीन दिनों से मोर्चा संभाल रखी है।

स्तन दबाए, झापड़ मारे, दीन की बातें कर हाथ से रगड़वाया प्राइवेट पार्ट: मौलवियों के शिकार बने पाकिस्तानी मुस्लिमों के अनुभव सुन हो जाएँगे हैरान

सोशल मीडिया पर 2 अप्रैल 2024 को एक पाकिस्तानी शख्स फैसल रफी ने मौलवियों को लेकर एक सवाल किया जिसके बाद उस पोस्ट पर तमाम प्रतिक्रियाएँ आईं। दरअसल, फैसल रफी ने अपने ट्वीट में लोगों से पूछा था कि क्या कभी किसी मौलवी ने उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया है या फिर कभी यौन शोषण किया है।

फैसल ने इस सवाल को पूछने के बाद पहले इसका खुद जवाब दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा मेरे साथ हुआ है लेकिन घर में, मदरसे में नहीं।”

फैसल के इस सवाल के बाद प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई और ये प्रतिक्रियाएँ वाकई हैरान करने वाली थीं। न केवल महिला यूजर्स ने अपना दर्द साझा किया। वहीं लड़कों ने भी बताया कि उनके साथ ऐसा हुआ।

इकरा नाम की यूजर ने तो कहा कि उनके साथ ऐसा हुआ है और वो शायद ही ऐसी किसी लड़की को जानती हों जिसके साथ ऐसा नहीं हुआ।

खुर्रम कुरैशी ने कहा कि उनके और उनके भाई के साथ भी ऐसा होता था। मौलवी घर आकर उन्हें मारता था और धमकाता था कि घरवालों को कभी ये सब न पता चले। दोनों भाई डरे रहते थे। खुर्रम ने बताया कि एक बार दोनों भाइयों को पीटते समय अम्मा आ गई थीं जिसके बाद उस मौलवी को घर से बाहर फेंका गया।

सामिया शोएब अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं कि मौलवी का पसंसदीदा काम अपनी गंदी जीभ को मेरे गले में डालना था (उसकी दाढ़ी से आने वाली चंदन की गंध मुझे आज भी याद है) उसने जब मेरे स्तनों को दबोचा तो मैं रोई, उसने मुझे चाँटा मारा और फिर मेरे साथ ये सब कहना शुरू किया।”

सोबिया कपाड़िया ने कहा, “जो आदमी मुझे और मेरी बहन को पढ़ाने आता था, वो हमें पिंच करता था, हमें छूता था। हम दोनों बहुत असहज रहते थे। हम अपने दादा से हमारे आसपास रहने को कहते थे।”

जाहिद ने बताया कि उनके साथ जिस मौलवी ने ऐसा किया वो मौलवी डोनेशन के लिए घर पर आया था। घंटी बजाने पर जब दरवाजा खोला तो उसने उनका हाथ पकड़कर प्राइवेट पार्ट पर रगड़ना शुरू कर दिया और इस दौरान वह दीन की बातें करता रहा। जिसके बाद उन्हे कभी मौलवियों पर यकीन नहीं हो पाया।

बता दें कि मौलवियों द्वारा बच्चों का शोषण पाकिस्तान में बहुत सामान्य सा लगता है। लेकिन लंदन से लेकर अन्य देशों में रहने वाले मुस्लिम भी इस दौरान फैसल से सहमत होते दिखे जो हैरान करने वाला है। भारत में भी कई ऐसी घटनाएँ दर्ज हैं जहाँ मौलवियों को यौन शोषण के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया हो। हमीरपुर में इस आरोप में मुंतजीर आलम गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद जहानाबाद के अल्बानत इकरा अकादनी से मौलवी अब्दुल मनन गिरफ्तार हुआ था। फक्रपुर से मौलवी दिलशाद पकड़ा गया था।

जिस टंकी से 50 परिवारों को मिल रहा था पीने का पानी, उसमें 20 बंदर मरे मिले: लाश देखते ही बंदरों ने किया हमला, तेलंगाना की घटना

तेलंगाना के नालगोंडा में एक पानी की टंकी में 20 बंदरों की लाशें मिली हैं। यह बंदर उस पानी में मरे पड़े थे जिसकी आपूर्ति इलाके के लोगों को हो रही थी। वह यही पानी पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल कर रहे थे। इस मामले में नगर पालिका कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, नालगोंडा के नंदीकोंडा नगर पालिका के विजय विहार में बनी एक पानी की टंकी में यह बंदर पाए गए। इलाके के लोगों ने इस टंकी का ढक्कन खुला हुआ देखा था, इसके बाद जब उन्होंने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि इसमें बड़ी संख्या में मरे हुए बंदर पानी में पड़े हुए हैं।

इस मामले के सामने आने के बाद नगर पालिका के कर्मचारियों को सूचना दी गई। नगर पालिका के कर्मचारियों को इस टंकी के भीतर लगभग 20 बंदर मरे मिले। उन्होंने बताया कि इस इलाके में बंदर मौजूद हैं और संभवतः वह पानी पीने आए होंगे। ढक्कन खुला होने कारण वह इसमें गिर गए और बाहर नहीं निकल पाए। इस पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई।

मामला सामने आने के बाद नगर पालिका के कर्मचारियों ने यहाँ से बंदरों की लाशें निकाली और टंकी की सफाई करवाई। यह सामने आया कि यह लाशें कई दिनों से पड़ी थी और इस इलाके के निवासियों को यही दूषित पानी आपूर्ति में दिया जा रहा था।

यह भी बताया गया है कि नियमानुसार, इस टंकी की सफाई हर दो सप्ताह में होनी चाहिए लेकिन इसका ध्यान नगर पालिका ने नहीं रखा। इस कारण से ही इसमें बंदरों की लाशें जमा होती रहीं और किसी को खबर नहीं लगी। इसी कारण से लोग यह दूषित पानी पीने को मजबूर रहे।

उधर नंदीकोंडा के अधिकारियों ने बताया कि इस टैंक से 50 घरों को पानी की सप्लाई होती है। उन्होंने कहा बताया कि तीन दिनों तक इस टैंक से पानी की आपूर्ति रुकी रही और जब उन्होंने कारणों का पता लगाया तो उन्हें बंदर मरे मिले। बताया गया कि मृत बंदरो को देखने पर बंदरों ने कर्मचारीयों पर हमला भी किया। स्थानीय निवासी साफ़ सफाई को लेकर चिंतित हैं।

‘ट्रिलियन में कितने जीरो’ फेम गौरव वल्लभ का कॉन्ग्रेस से इस्तीफा, कहा- सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकता: महाराष्ट्र में संजय निरुपम ने झटका हाथ

लोकसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस की परेशानियाँ कम होने का नाम नहीं ले रहीं। खबर है कि पार्टी के दो बड़े नेताओं ने कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़ दिया है। इनमें एक नाम संजय निरुपम का है और दूसरा गौरव वल्लभ का है।

संजय निरुपम को तो कॉन्ग्रेस ने खुद निष्कासित करने का भी ऐलान किया है। वहीं किसी समय में संबित पात्रा से पाँच ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं पूछने वाले कॉन्ग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने खुद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वो कुछ समय से पार्टी के स्टैंड से अहज महसूस कर रहे हैं। अपने त्याग पत्र में गौरव ने कई बातें बताईं।

गौरव वल्लभ का त्यागपत्र

गौरव वल्लभ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे गए त्यागपत्र में बताया कि राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर उन्होंने हमेशा देश के कई मुद्दों को पार्टी के समक्ष दमदार तरीके से रखा लेकिन कुछ समय से उन्हें ठीक नहीं लग रहा।

उन्होंने ये त्यागपत्र साझा करते हुए अपने ट्वीट में लिखा-

“कॉन्ग्रेस पार्टी आज जिस प्रकार से दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है, उसमें मैं खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहा। मैं ना तो सनातन विरोधी नारे लगा सकता हूँ और ना ही सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर्स को गाली दे सकता। इसलिए मैं कॉन्ग्रेस पार्टी के सभी पदों व प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ।”

इस ट्वीट में साझा किए गए त्यागपत्र में उन्होंने कहा- “भावुक हूँ और मन व्यथित है। काफी कुछ कहना चाहता हूँ, लिखना चाहता हूँ और बताना चाहता हूँ। लेकिन, मेरे संस्कार ऐसा कुछ भी कहने से मना करते हैं। फिर भी मैं आज अपनी बातों को आपके समक्ष रख रहा हूँ, क्यों उन्हें लगता है कि सच को छुपाना भी अपराध है। ऐसे में मैं अपराध का भागी नहीं बनना चाहता।”

गौरव ने कहा, “जब मैंने कॉन्ग्रेस पार्टी ज्वाइन किया, तब मेरा मानना था कि कॉन्ग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है, जहाँ पर युवा, बौद्धिक लोगों की, उनके आइडिया की कद्र होती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में महसूस हुआ कि पार्टी का मौजूदा स्वरूप नए आइडिया वाले युवाओं के साथ खुद को एडजस्ट नहीं कर पाती। पार्टी का ग्राउंड लेवल कनेक्ट पूरी तरह से टूट चुका है, जो नए भारत की आकांक्षा को बिल्कुल भी नहीं समझ पा रही है, जिसके कारण न तो पार्टी में आ पा रही है और ना ही मजबूत विपक्ष की भूमिका ही निभा पा रही हैं। इससे मेरे जैसे कार्यकर्ता हतोत्साहित होता है। बड़े नेताओं और जमीन कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी पाटना बेहद कठिन है, जो राजनैतिक रूप से जरूरी है। जब तक एक कार्यकर्ता अपने नेता को डायरेक्ट सुझाव नहीं दे सकता, तब तक किसी भी प्रकार का सकारात्मक परिवर्तन संभव नहीं है।”

आगे उन्होंने राम मंदिर पर कॉन्ग्रेस के स्टैंड की निंदा की। उन्होंने कहा कि उन्हें सनातन के विरोध में बोलते हुए किसी को सुनना नहीं पसंद, मगर पार्टी ऐसे लोगों की बातों को मौन स्वीकृति देती है। उन्होंने कहा, “एक ओर हम जाति आधारित जनगणना की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर संपूर्ण हिंदू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं। यह कार्यशैली जनता के बीच पार्टी को एक खास धर्म विशेष के ही हिमायती होने का भ्रामक संदेश दे रही है। यह कॉन्ग्रेस के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है।”

उन्होंने आगे लिखा, “जब मैंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी, उस वक्त मेरा ध्येय सिर्फ यही था कि आर्थिक मामलों में अपनी योग्यता और क्षमता का देशहित में इस्तेमाल करूँगा। हम सत्ता में भले नहीं हैं, लेकिन अपने मैनीफेस्टो से लेकर अन्य जगहों पर देशहित में पार्टी की आर्थिक नीति-निर्धारण को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकते थे, लेकिन पार्टी स्तर पर यह प्रयास नहीं किया गया, जो मेरे जैसे आर्थिक मामलों के जानकार व्यक्ति के लिए किसी घुटन से कम नहीं है।”

संजय निरुपम का इस्तीफा

बता दें कि इससे पहले कॉन्ग्रेस संजय निरुपम ने पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दिया था। बाद में खबर आई कि पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करने पर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। इस पर संजय निरुपम ने बयान भी दिया था कि पार्टी की तत्परता देख उन्हें अच्छा लगा। उन्होंने अपने त्यागपत्र में कहा था, “मैंने आखिरकार आपकी बहुप्रतीक्षित इच्छा को पूरा करने का फैसला किया है और मैं घोषणा करता हूं कि मैंने अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया है।”

कर्नाटक हाई कोर्ट में चाकू लेकर घुसा, अधिकारियों को फाइल सौंप काट लिया गला: चीफ जस्टिस बोले- यह कैसे घुसा, यहाँ कोई पुलिस वाला नहीं है क्या?

कर्नाटक हाई कोर्ट में घुस कर एक शख्स ने रेजर से अपना गला काट लिया। यह घटना कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के कोर्ट रूम में हुई। रेजर से खुद को घायल करने वाला शख्स अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। बताया जा रहा है रेजर चलाने वाला शख्स एक मामले को लेकर परेशान था।

जानकारी के अनुसार, बुधवार (3 मार्च, 2024) को कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एन वी अन्जारिया और जस्टिस एच बी प्रभाकर शास्त्री दोपहर 1 बजे के करीब एक मामले की सुनवाई करने जा रहे थे। इसी दौरान एन चिन्नम श्रीनिवास नाम का एक शख्स कोर्ट रूम में घुस आया।

उसने पहले कुछ फाइलें कोर्ट के अधिकारियों को सौंपी। इसके बाद उसने कामकाज में बाधा डालने की कोशिश की। जब उसे रोका गया तो उसने एक चाकू निकाल कर खुद को घायल कर लिया। उसने कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने ही अपने गला चाकू से काट लिया।

यह सारा वाकया देख चीफ जस्टिस अन्जारिया भी सन्न रह गए। उन्होंने तुरंत उस आदमी को कोर्ट से निकालने और पुलिस बुलाकर अस्पताल ले जाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा, “इसे तुरंत बाहर ले जाओ, यहाँ कोई पुलिस वाला नहीं है क्या, यह ऐसा क्यों कर रहा है? चीफ जस्टिस ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि यह व्यक्ति कोर्ट रूम के अंदर चाकू लेकर घुस गया।

श्रीनिवास गले पर चाकू मारने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया है जहाँ डॉक्टरों ने उसके गले का ऑपरेशन किया। पुलिस ने उनके विरुद्ध एक FIR दर्ज कर ली है और उसके द्वारा उपयोग किया गया रेजर ब्लेड भी बरामद कर लिया।

बताया जा रहा है कि श्रीनिवास अपनी पत्नी के साथ कोर्ट में किसी काम से आए था, वह पैसों की धोखाधड़ी के एक मामले में न्याय ना मिलने से परेशान थे। बताया गया कि श्रीनिवास ने हैदराबाद की एक कम्पनी के साथ एक समझौता किया था। इसके अंतर्गत उन्होंने इन कम्पनी को ₹93 लाख दिए थे।

कम्पनी ने इसके बदले हैदराबाद में बनने वाले एक अपार्टमेन्ट कॉम्प्लेक्स में हिस्सेदारी देने की बात कही थी। हालाँकि, इस कम्पनी ने अपना वादा पूरा नहीं किया जिससे श्रीनिवास परेशान हो गए। उन्होंने इस मामले में FIR दर्ज करवाई थी जिसे 2021 में हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया गया था। वह इसी बात से लगातार परेशान चल रहे थे।

श्रीनिवास की पत्नी ने बताया कि उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनके पति इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। हाई कोर्ट ने घटना के बाद श्रीनिवास से फ़ाइल लेने वाले अधिकारी को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बिना उस शख्स से फ़ाइल क्यों ली गई।

घर से स्कूल के लिए निकलीं दो बच्चियाँ, मुस्लिम युवक छत्तीसगढ़ से लेकर चले गए झारखंड: हिंदुओं के विरोध-प्रदर्शन के बाद पुलिस ने किया बरामद

छत्तीसगढ़ के सरगुजा से लव जिहाद का मामला सामने आया है। 2 मुस्लिम युवकों पर एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली 2 नाबालिग छात्राओं को भगा कर ले जाने का आरोप लगा है। आरोपित भी उसी स्कूल के छात्र बताए जा रहे हैं। घटना के विरोध में तमाम लोग हिन्दू संगठनों के सदस्यों के साथ सड़क पर उतर गए और आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग करने लगे। पुलिस ने लोकेशन ट्रेस करते हुए दोनों लड़कियों को राँची से बरामद कर लिया है। आरोपितों को भी हिरासत में लेकर मामले की जाँच की जा रही है। घटना सोमवार (1 अप्रैल 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना सरगुजा जिले के रघुनाथपुर क्षेत्र की है। सोमवार को 2 नाबालिग छात्राएँ हर दिन की तरह स्कूल के लिए निकली थीं। आरोप है कि रास्ते में इन छात्राओं को मुस्लिम समुदाय के 2 युवक मिले जो छात्राओं के ही स्कूल में पढ़ते हैं। इन्होंने दोनों छात्राओं को बहलाया-फुसलाया और अपने साथ ऑटो में बिठा लिया। आरोपित छात्राओं को अपने साथ लेकर झारखंड की राजधानी राँची पहुँच गए।

जब दोनों छात्राएँ अपने घर नहीं पहुँची तो उनकी खोजबीन शुरू की गई। पहले जान-पहचान और परिचितों के यहाँ तलाशने पर दोनों का पता नहीं चला तो उनके परिजन पुलिस के पास गए। रघुनाथपुर पुलिस चौकी में छात्राओं की गुमशुदगी दर्ज की गई। इस बीच जानकारी मिली कि दोनों छात्राओं को 2 मुस्लिम युवक अपने साथ ले गए हैं। इस बात का पता चलते ही हिन्दू संगठन के सदस्य पुलिस चौकी पर जुटने लगे। उनके साथ आसपास के स्थानीय लोग भी पहुँचे और आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ दोनों छात्राओं की सकुशल बरामदगी की माँग उठाने लगे।

हालत की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल भी अतिरिक्त फ़ोर्स के साथ पहुँचे। पुलिस ने लोकेशन ट्रेस की तो दोनों छात्राओं की लोकेशन झारखंड की राजधानी राँची में मिली। पुलिस ने दबिश दे कर दोनों छात्राओं को सही सलामत बरामद कर लिया। इसी दबिश में दोनों आरोपित भी हिरासत में लिए गए। दोनों छात्राओं का मेडिकल परीक्षण करवाने के साथ उनके बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 363 और 366 के साथ पॉक्सो एक्ट में कार्रवाई की गई है।

2019 में अमेठी में धूल चटाया, क्या 2024 में वायनाड से भी राहुल गाँधी का बोरिया-बिस्तर बँधवा देंगी स्मृति ईरानी: कॉन्ग्रेस नेता को वामपंथी साथी भी रहे लताड़

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने बुधवार (3 अप्रैल, 2024) को केरल की लोकसभा सीट वायनाड से अपना नामांकन दाखिल किया। भाजपा ने इस सीट केरल के सुरेन्द्रन को उम्मीदवार बनाया है। अब इस लड़ाई में राहुल गाँधी को अमेठी में करारी शिकस्त देने वाली भाजपा नेता स्मृति ईरानी की एंट्री हो गई है।

के सुरेन्द्रन गुरुवार (4 अप्रैल, 2024) को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस नामांकन के लिए केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी वायनाड पहुँच रही है। इसी के साथ ही 2014 और 2019 वाली स्मृति बनाम राहुल की लड़ाई तेज हो गई है। राहुल गाँधी ने यहाँ नामांकन से पहले एक रोड शो किया जिसमें उनके साथ कॉन्ग्रेस महासचिव और उनकी बहन प्रियंका गाँधी भी मौजूद रहीं।

राहुल गाँधी और स्मृति ईरानी की लड़ाई 2014 से ही चर्चित रही है। 2014 लोकसभा चुनाव में स्मृति ने राहुल को कड़ा मुकाबला दिया था। राहुल गाँधी ने बड़ी मुश्किल से यह सीट जीती थी।

2019 में राहुल गाँधी को यह पता चल गया था कि वह अमेठी में चुनाव नहीं जीत पाएँगे इसलिए उन्होंने पहले ही सेफ सीट वायनाड से लड़ने का निर्णय लिया। जैसा सोच कर कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी ने अमेठी के साथ वायनाड को चुना था, वही हुआ, अमेठी में उन्हें स्मृति ईरानी से शिकस्त मिली और वायनाड में जीत।

अमेठी में स्मृति ईरानी के हाथों हारने के बाद राहुल गाँधी वहाँ लौट कर नहीं गए। कॉन्ग्रेस ने भी यह बात मान ली कि अब राहुल गाँधी अमेठी से नहीं जीत सकते। कॉन्ग्रेस ने 2024 चुनाव में राहुल को केवल वायनाड से ही उतारा। उसने अभी अमेठी से राहुल के अलावा भी कोई उम्मीदवार तक नहीं घोषित किया है।

स्मृति ईरानी ने राहुल को अमेठी में करारी शिकस्त देने के बाद उनकी राह वायनाड में भी मुश्किल बनाने का मन बना लिया है। इसलिए वह राहुल के सामने चुनाव लड़ रहे के सुरेन्द्रन के नामांकन में पहुँच रही हैं। वह पहले भी राहुल गाँधी पर अमेठी से किनारा करने को लेकर हमले बोलते रही हैं।

वायनाड लोकसभा सीट 2009 में बनी थी, तब से यहाँ कॉन्ग्रेस का ही कब्जा है। 2019 में राहुल गाँधी के जीतने से पहले यहाँ कॉन्ग्रेस के एमएल शान्वास सांसद थे। ऐसे में वायनाड राहुल के लिए सेफ सीट करार दी जा रही है।

हालाँकि, स्मृति और के सुरेन्द्रन इस मान्यता को बदलने के लिए तत्पर हैं। स्मृति ईरानी अब वायनाड में भाजपा के लिए जमीन मजबूत करेंगी और भाजपा का यहाँ प्रयास रहेगा कि वह भले ही यह सीट ना जीत पाए लेकिन राहुल की दुश्वारियों को काफी हद तक बढ़ा दे। इसके लिए उन्होंने अमेठी वाले नियम भी अपनाए जा सकते हैं।

2014 चुनाव में हार के बाद भी स्मृति ईरानी ने अमेठी नहीं छोड़ा था। उन्होंने यहाँ जमीन पर काम करके स्थानीय नेताओं से सम्बन्ध बनाए। राहुल गाँधी की गैरमौजूदगी और अमेठी में विकास ना होने का मुद्दा जनता के सामने रखा और आखिर में उन्हें हरा दिया।

लेकिन अब वायनाड भी राहुल गाँधी के लिए मुश्किल साबित होने जा रही है। स्मृति ईरानी और के सुरेन्द्रन की जोड़ी उसी गेमप्लान पर वायनाड में काम करने वाली है, जिसके जरिए भाजपा ने अमेठी को गाँधी परिवार से ले लिया था। वायनाड में भाजपा राहुल गाँधी की गैरमौजूदगी और विकास ना करने के मुद्दे पर जोर देकर राहुल की राह मुश्किल करने वाली है।

सोशल मीडिया पर यह बात तैर रही है कि राहुल गाँधी 2019 में वायनाड से सांसद बनने के बाद मात्र 12 बार ही यहाँ गए हैं। यानी वह एक वर्ष में केवल औसतन 2-3 बार ही अपने संसदीय क्षेत्र पहुँचे। ऐसे में इस मुद्दे को भुनाया जाने वाला है।

दूसरी तरफ ईरानी यहाँ की सांसद ना होते हुए भी यहाँ के दौरे करती आई हैं। मई 2022 में ही एक ऐसे दौरे में ईरानी ने वायनाड में विकास की स्थिति पर प्रश्न उठाए थे। उन्होंने कहा था कि वायनाड में कोई ख़ास काम नहीं हुआ है। वायनाड में पानी के कनेक्शन ना मिलने और किसानों के काम अटकने को लेकर भी प्रश्न उठाए थे।

वायनाड में राहुल को केवल भाजपा ही नहीं बल्कि INDI गठबंधन के साथियों से भी चुनौती मिल रही है। वामपंथी दलों ने यहाँ से एनी राजा को उम्मीदवार बनाया है। केरल के CM पिनाराई विजयन ने तक राहुल गाँधी को लताड़ा है। उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी भाजपा से सीधी लड़ाई करने से बच रहे हैं।

चुनावी नतीजों पर एक बार नजर डाली जाए तो पता चलता है कि भाजपा ने वायनाड में 2009 में मात्र 4% जबकि 2014 में 9% वोट पाया था। यह वोट शेयर 2019 में थोडा सा घट कर 7% के आसपास हो गया था। हालाँकि, इन तीनों चुनावों के दौरान, भाजपा का केरल में ना ही संगठन ज्यादा मजबूत था और ना ही उनके पास कोई बड़ा चेहरा यहाँ था।

सुरेन्द्रन को इस सीट से इसलिए भी उम्मीदवार बनाया गया है क्योंकि वह केरल भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा वर्तमान में हैं। वह केरल में जमीनी कार्यकर्ता और सड़क पर संघर्ष करने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं। केरल समेत दक्षिण भारत के हिन्दुओं के लिए महत्वपूर्ण अयप्पा मंदिर के लिए सुरेन्द्रन जेल जा चुके हैं, वह वामपंथी सरकार से 200 से अधिक मुकदमे भी इस कारण से झेल चुके हैं। ऐसे में उनकी हिंदूवादी छवि भी इसमें सहायता कर सकती है।

हालाँकि, राहुल को वायनाड में यहाँ की जनसांख्यिकी के कारण बढ़त मिलती रही है। अब स्मृति ईरानी की इन चुनावों में एंट्री कितना बदलाव लाएगी, यह 4 जून को पता चलेगा।

‘हेमा मालिनी तो है नहीं जो चा$ने के लिए बनाते हो’: अब कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भरी सभा में की अभद्र बातें, इससे पहले कंगना रनौत को लेकर हुई थी गंदी बातें

कॉन्ग्रेस के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने हाल में भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसद हेमा मालिनी पर अभद्र टिप्पणी की। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि जनता विधायक-सांसद इसलिए बनाती है ताकि उनकी आवाज उठा सकें। वो कोई हेमा मालिनी तो है नहीं जिन्हें चा@#$ हो।

रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा के कैथल में 1 अप्रैल को आयोजित कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए अपना यह बयान दिया था। उन्होंने इंडी गठबंधन के प्रत्याशी सुशील गुप्ता के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा- “हम लोगों को विधायक और सांसद आप लोग इसलिए बनाते हैं ताकि हम आपकी आवाज संसद में उठा सकें। आपकी बात मनवा सकें। कोई हेमा मालिनी तो है नहीं जो चा@#$ के लिए बनाते हों। कोई फ़िल्म स्टार तो हैं नहीं।

उन्होंने आगे अपनी बात बैलेंस करने के लिए कहा, “हम तो हेमा मालिनी का भी सम्मान करते हैं क्योंकि धर्मेन्द्र के यहाँ शादी कर रखी है जो बहू हैं हमारी। ये लोग कोई फ़िल्म स्टार तो हो सकते हैं। लेकिन कोई मुझे या गुप्ता जी को इसीलिए AAP सांसद-विधायक बनाते हैं ताकि हम लोग आपकी सेवा कर सकें।”

उनके इस बयान के बाद कई भाजपा नेता भड़के हुए हैं। उनका कहना है कि चुनाव आते ही महिलाओं को लेकर अभद्र टिप्पणी करना कॉन्ग्रेस का व्यक्तित्व बन गया है। अमित मालवीय ने रणदीप सुरजेवाला की वीडियो को शेयर करते हुए कहा,

“कॉन्ग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने हेमा मालिनी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है, जो न केवल उनके लिए बल्कि सभी महिलाओं के लिए अपमानजनक है।” उन्होंने सुरजेवाला का वीडियो साझा करते हुए कहा, यह राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस है, जो महिलाओं से नफरत करती है। हेमा मालिनी इस लोकसभा चुनाव में भी मथुरा से भाजपा की उम्मीदवार हैं।”

उन्होंने पूछा कि आखिर कौन लोग हैं जो सोचते हैं कि महिलाएँ चाटने के लिए बनी हैं। ये बेहद घटिया विवरण है जो कोई दे सकता है।

वहीं कंगना रनौत ने इस वीडियो को शेयर करके कहा, “बात मोहब्बत की दुकान खोलने की हुई थी लेकिन कॉन्ग्रेस नफरत की दुकान खोल बैठी है। महिलाओं के प्रति गिरी हुई सोच रखने वाले कॉन्ग्रेस के नेता अवश्यंभावी हार की हताशा और कुंठा में अपने चरित्र का दिन-ब-दिन पतन कर रहे हैं।”

शहजाद जय हिंद ने कहा, “नारी शक्ति का अपमान, कॉन्ग्रेस की पहचान। कॉन्ग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने घटिया, नारीविरोधी टिप्पणी जो की है वो सिर्फ हेमा मालिनी पर नहीं बल्कि पूरी नारीशक्ति पर की है।”

बता दें कि इससे पहले कॉन्ग्रेस की महिला नेता सुप्रिया श्रीनेत ने मंडी से भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी पर अपने इंस्टा के जरिए अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कंगना की एक फोटो शेयर करते हुए कहा था ‘मंडी में भाव’ वाला कमेंट किया था, बाद में इसका खूब विरोध हुआ और सुप्रिया श्रीनेत की शिकायत चुनाव आयोग को दी गई और ईसी ने बाद में उन्हें फटकारा भी।

उधर अरविंद केजरीवाल जेल में, इधर कार्यकर्ता जश्न में डूबे… 6 महीने बाद तिहाड़ जेल से निकले संजय सिंह तो पुष्पवर्षा और ढोल-नगाड़ों से स्वागत, अब AAP का नेता कौन?

AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को जेल से रिहा कर दिया गया है। शराब घोटाले में वो 6 महीने जेल में रहे, जिसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत दी है। AAP के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी फ़िलहाल जेल में हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी पार्टी के कार्यकर्ता जश्न मनाते दिखे। तिहाड़ जेल से बाहर निकले संजय सिंह ने कहा कि जेल के ताले टूटेंगे और सभी AAP नेता छूटेंगे। उनका इशारा अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की तरफ था।

कार्यकर्ता इतना जश्न मनाने लगे कि संजय सिंह को उन्हें टोकना पड़ा। हाल ही में दोबारा राज्यसभा सांसद बनाए गए संजय सिंह ने कहा कि अभी जश्न मनाने का वक्त नहीं है, संघर्ष का समय है। इस दौरान वो हाथ जोड़ कर कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार करते दिखे। उनके भाषण पर कार्यकर्ताओं ने हल्ला कर के उनका समर्थन किया। इस दौरान तिहाड़ जेल के बाहर मीडिया की भी भारी भीड़ दिखी। संजय सिंह ने गाड़ी के ऊपर चढ़ कर भाषण दिया।

इधर उनके जेल से बाहर आने के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि अब AAP का नेतृत्व कौन करेगा, क्योंकि पार्टी के सबसे बड़े नेता जेल में हैं। सुनीता केजरीवाल 3 बार अपने पति की कुर्सी पर बैठ कर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुकी हैं, I.N.D.I. गठबंधन की रैली में भाषण दे चुकी हैं और आम आदमी पार्टी के विधायकों-मंत्रियों की बैठक भी तलब कर चुकी हैं। उधर आतिशी और सौरभ भारद्वाज जैसे मंत्री अपने नेता की गिरफ़्तारी के खिलाफ आक्रामक हैं।

संजय सिंह जेल से छूटने के बाद अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता से मिलने भी जाएँगे। ढोल-नगाड़ों के साथ संजय सिंह का स्वागत हुआ, उनके पिता के ऊपर फूलों की बारिश की गई। सौरभ भारद्वाज भी उनके स्वागत के लिए तिहाड़ जेल पहुँचे थे। अब संजय सिंह की पार्टी में भूमिका क्या होगी? इस सवाल पर आतिशी का कहना है कि वो बड़े भाई की तरह हैं और उनके बाहर आने से कार्यकर्ता खुश हैं। जबकि सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब तक सभी नेता छूट कर नहीं आ जाते, जश्न नहीं मनाया जाएगा।